CLASSICAL POETIC TREASURY

Hindi Dohe Kosh (Couplets) (हिंदी दोहे कोष)

Immortal ethical couplets of Sant Kabir, Rahim, and Goswami Tulsidas with authentic Hindi commentary, English translation, and literary context.

🪶
173
Total Couplets
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3
Classical Poets
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10
Categories
🪶Poet / Author (रचयिता / कवि):
💡Theme / Subject (विषय / संदर्भ):
🪔संत कबीरदास🌱विनम्रता एवं निरहंकार🎓 Class 9-10

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।

जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥

Bura jo dekhan main chala, bura na miliya koy. / Jo dil khoja aapna, mujhse bura na koy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि जब मैं संसार में दूसरों की बुराइयाँ और दोष ढूँढ़ने निकला, तो मुझे कोई भी वास्तव में बुरा नहीं मिला। परंतु जब मैंने अंतर्मुखी होकर अपने ही मन और हृदय की गहराइयों में झाँका, तो मुझे ज्ञात हुआ कि संसार में मुझसे अधिक अवगुणों से भरा कोई दूसरा नहीं है। यह दोहा आत्म-समीक्षा और निरहंकारिता का सर्वोच्च संदेश देता है।

English: When I set out to search for evil and fault in the world, I could find no truly wicked person. But when I probed deep into my own heart and mind, I realized that none was more flawed than myself. True transformation begins with honest self-introspection rather than judging others.

बुरा जो देखन • आत्मनिरीक्षणपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।

ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥

Pothi padhi padhi jag mua, pandit bhaya na koy. / Dhai aakhar prem ka, padhe so pandit hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि संसार भर के लोग मोटे-मोटे धार्मिक ग्रंथ और शास्त्र पढ़-पढ़कर मृत्यु को प्राप्त हो गए, किंतु केवल किताबी ज्ञान से कोई भी सच्चा ज्ञानी अथवा पंडित नहीं बन सका। वास्तव में जो व्यक्ति प्रेम के केवल ढाई अक्षर का मर्म समझ लेता है और प्राणिमात्र से निष्कपट ईश्वरीय प्रेम करता है, वही सच्चा ज्ञानी और तत्ववेत्ता है।

English: Countless generations passed away perusing heavy treatises and scriptures, yet none attained true wisdom through mere bookish knowledge. He who truly comprehends and lives the two and a half letters of unconditional divine love is the truly enlightened sage.

पोथी पढ़ि पढ़ि • प्रेम का महत्वपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास📖गुरु महिमा एवं ज्ञान🎓 Class 6-8

गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय।

बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय॥

Guru govind do-u khade, kaake laagun paay. / Balihari guru aapno, govind diyo batay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि मेरे समक्ष मेरे गुरु और साक्षात् ईश्वर (गोविंद) दोनों एक साथ खड़े हैं। मेरे मन में यह धर्मसंकट उत्पन्न हो गया कि मैं पहले किसके चरण स्पर्श करूँ। अंततः मैं अपने गुरु के चरणों पर ही बलिहारी जाता हूँ, जिन्होंने मुझे ईश्वर का साक्षात्कार कराया और प्रभु तक पहुँचने का मार्ग दिखाया। गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊँचा है।

English: Both my spiritual Guru and the Supreme Lord Govinda stand before me; to whose lotus feet should I bow first? I offer my total surrender and homage to the Guru first, for it was the Guru whose gracious light revealed the presence and path of the Divine.

गुरु गोविंद • गुरु महिमापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 6-8

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।

पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब॥

Kaal kare so aaj kar, aaj kare so ab. / Pal mein parlay hoyegi, bahuri karega kab.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी समय की महत्ता का बोध कराते हुए कहते हैं कि जो कार्य तुम कल पर टाल रहे हो, उसे आज ही पूरा करो और जिसे आज करना है, उसे इसी क्षण कर डालो। जीवन क्षणभंगुर है, एक पल में प्रलय (मृत्यु या अकस्मात संकट) आ सकती है, फिर बाद में तुम उस शुभ कार्य को कब कर पाओगे? आलस्य छोड़कर वर्तमान क्षण में तत्पर रहो।

English: What you intend to do tomorrow, accomplish today; what you plan for today, execute this very moment. In the blink of an eye catastrophe or death may arrive; when then will you accomplish what was left undone? Seize the present without procrastination.

काल करे सो आज कर • समय का महत्वपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🗣️मधुर वाणी एवं सद्व्यवहार🎓 Class 6-8

ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।

औरन को सीतल करै, आपहु सीतल होय॥

Aisi baani boliye, man ka aapa khoy. / Ouran ko seetal karai, aapahu seetal hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी मधुर वाणी के प्रयोग का उपदेश देते हुए कहते हैं कि हमें अपने अहंकार, क्रोध और घमंड को त्यागकर ऐसी विनम्र व मधुर वाणी में बात करनी चाहिए, जो सुनने वाले के हृदय को शीतलता और शांति प्रदान करे तथा स्वयं हमारे अपने मन को भी सुख और शांति से परिपूर्ण रखे। कटु वचन अग्नि के समान होते हैं, जबकि मधुर वचन अमृत जैसे होते हैं।

English: Speak such sweet and tender words, renouncing all egotism and pride, that cool and comfort the hearts of those who listen while bathing your own being in deep serenity and tranquility.

ऐसी बानी बोलिए • मधुर वचनपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

साईं इतना दीजिए, जा मे कुटुम समाय।

मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय॥

Sai itna dijiye, ja me kutum samay. / Main bhi bhookha na rahoon, saadhu na bhookha jaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी ईश्वर से परम संतोष और अपरिग्रह की प्रार्थना करते हुए कहते हैं कि हे प्रभु! मुझे केवल इतना ही धन-धान्य दीजिए जितने में मेरे परिवार का सादगी से निर्वाह हो सके। न तो मैं और मेरा परिवार भूखा रहे और न ही मेरे द्वार पर आया कोई अतिथि, साधु या भिक्षुक भूखे पेट वापस लौटे। लोभ और अति-संग्रह से मुक्ति ही सच्चा सुख है।

English: O Lord, bestow upon me only as much sustenance as suffices to maintain my household with dignity: that neither I remain starved, nor does any wandering ascetic or guest turn away hungry from my threshold. In noble contentment lies true wealth.

साईं इतना दीजिए • संतोषपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🌱विनम्रता एवं निरहंकार🎓 Class 6-8

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।

पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥

Bada hua to kya hua, jaise ped khajoor. / Panthi ko chhaya nahin, phal laage ati door.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि केवल धन, पद अथवा देह से बड़े हो जाने से कोई महान नहीं बन जाता, जैसे खजूर का पेड़ बहुत ऊँचा और विशाल होता है, किंतु न तो वह थके हुए राहगीर को छाया दे पाता है और न ही उसके फल किसी के सहज हाथ आते हैं क्योंकि वे बहुत ऊँचाई पर लगते हैं। परोपकार और सेवा भावना के बिना बड़प्पन सर्वथा व्यर्थ है।

English: What is the worth of greatness in status, wealth, or stature if it resembles the date palm tree? It offers no shade to weary travelers underneath, and its fruit hangs far out of reach. Greatness that serves nobody is utterly meaningless.

बड़ा हुआ तो क्या हुआ • पेड़ खजूरपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🔥सामाजिक चेतना एवं आडंबर विरोध🎓 Class 9-10

जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान।

मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान॥

Jaati na poocho saadhu ki, poochh lijiye gyaan. / Mol karo tarvaar ka, pada rahan do myaan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी जाति-पांति के भेदभाव का प्रखर विरोध करते हुए कहते हैं कि किसी ज्ञानी अथवा संत से उसकी जाति या कुल कभी नहीं पूछना चाहिए, बल्कि उसके ज्ञान और विचारों को ग्रहण करना चाहिए। जिस प्रकार तलवार का वास्तविक मूल्य उसकी तीक्ष्ण धार और इस्पात से होता है, न कि उसकी सुंदर म्यान से; उसी प्रकार मनुष्य का मूल्य उसके ज्ञान व चरित्र से है, कुल या जाति से नहीं।

English: Do not inquire about the caste or lineage of a sage; inquire instead into their wisdom and virtues. Assess the true value of the sword itself; let the outer decorative sheath lie unvalued. True worth lies in intrinsic character, not external identity.

जाति न पूछो साधु की • समानतापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 9-10

माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रूँदे मोय।

एक दिन ऐसा आएगा, मैं रूँदूंगी तोय॥

Maati kahe kumhaar se, tu kya roonde moy. / Ek din aisa aayega, main roondoongi toy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी नश्वरता का मर्म समझाते हुए रूपक का प्रयोग करते हैं: बर्तन बनाते समय कुम्हार जब मिट्टी को अपने पैरों से रौंदता है, तब मिट्टी उससे कहती है कि आज अपने घमंड में तू मुझे क्या रौंद रहा है? स्मरण रख, एक दिन ऐसा भी आएगा जब तेरी मृत्यु होगी और तू इसी मिट्टी में विलीन हो जाएगा, तब मैं तुझे अपने भीतर रौंदूँगी। संसार की नश्वरता के सम्मुख अहंकार मिथ्या है।

English: The clay speaks to the potter: Why dost thou tread upon me so arrogantly today? Remember, a day shall inevitably arrive when thou shalt perish and dissolve into dust, and then it is I who shall tread upon thee. Temporal pride is absurd before mortality.

माटी कहे कुम्हार से • नश्वरतापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढ़ै बन माहिं।

ऐसे घट-घट राम हैं, दुनिया देखै नाहिं॥

Kasturi kundali basai, mrig dhoondhai ban maahin. / Aise ghat-ghat ram hain, duniya dekhai naahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि कस्तूरी मृग की अपनी ही नाभि (कुंडलि) में सुगंधित कस्तूरी बसी होती है, किंतु इस सत्य से अनभिज्ञ होकर वह हिरण उस दिव्य सुगंध को ढूँढ़ने के लिए पूरे जंगल में भटकता फिरता है। ठीक इसी प्रकार, परमात्मा (राम) प्रत्येक प्राणी के अंतःकरण में विद्यमान हैं, किंतु अज्ञानी संसार उन्हें तीर्थों, मंदिरों और बाहरी स्थानों में खोजता रहता है।

English: The musk deer holds the fragrant musk within its own navel, yet unaware, wanders frantically through the forest in search of the aroma. In identical fashion, the Supreme Reality dwells within every beating heart, but an unaware world searches in external shrines.

कस्तूरी कुंडलि बसै • अंतर्यामी परमात्मापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 6-8

दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करै न कोय।

जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे को होय॥

Dukh mein sumiran sab kare, sukh mein karai na koy. / Jo sukh mein sumiran kare, to dukh kaahe ko hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी मानव स्वभाव की विसंगति पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं कि विपत्ति और दुख के समय तो हर मनुष्य ईश्वर को याद करता है, परंतु जब जीवन में सुख और संपन्नता होती है, तब कोई प्रभु का स्मरण नहीं करता। यदि मनुष्य सुख के दिनों में भी ईश्वर को निरंतर याद रखे और सदाचारी बना रहे, तो उसके जीवन में दुख का आगमन ही क्यों होगा?

English: In moments of anguish and sorrow, everyone turns to remember the Divine, but in times of prosperity and comfort, none bothers to recollect Him. If one remembers God with gratitude during joyful times, why would agony ever overcome him?

दुख में सुमिरन • ईश्वर स्मरणपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🌱विनम्रता एवं निरहंकार🎓 Class 6-8

तिनका कबहुँ ना निंदिये, जो पाँवन तर होय।

कबहुँ उड़ी आँखिन पड़े, तो पीर घनेरी होय॥

Tinka kabahun na nindiye, jo paanwan tar hoy. / Kabahun udi aankhin pade, to peer ghaneri hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि अपने पैरों के नीचे पड़े छोटे से तिनके की भी कभी उपेक्षा या अपमान नहीं करना चाहिए। यदि वही तुच्छ तिनका हवा के झोंके से उड़कर आँख में पड़ जाए, तो वह असहनीय असह्य वेदना और पीड़ा उत्पन्न कर देता है। अतः किसी भी दुर्बल, निर्धन अथवा छोटे व्यक्ति को तुच्छ समझकर उसका अनादर कभी न करें।

English: Never scorn or trample contemptuously upon a tiny speck of straw beneath your feet. Should a gust of wind blow it into your eye, it causes piercing and relentless pain. Never disparage or underestimate anyone, no matter how small or powerless they appear.

तिनका कबहुँ ना निंदिये • अनादर न करेंपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🔥सामाजिक चेतना एवं आडंबर विरोध🎓 Class 9-10

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।

कर का मनका डारि दे, मन का मनका फेर॥

Mala ferat jug bhaya, fira na man ka fer. / Kar ka manka daari de, man ka manka fer.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी बाह्याडंबरों पर कटाक्ष करते हुए कहते हैं कि हाथ में माला के दाने घुमाते-घुमाते युग बीत गए, किंतु मन के भीतर की चंचलता, वासना और छल-कपट दूर नहीं हुए। इसलिए हाथ की माला के मणके फेरना छोड़ दो और अपने अंतःकरण के मनके को फेरो, अर्थात् मन को शुद्ध, एकाग्र और निर्मल बनाओ। आंतरिक पवित्रता ही सच्ची साधना है।

English: Eons passed revolving rosary beads between the fingers, yet the restless wanderings and pretenses of the mind remained unchanged. Cast aside the physical rosary from your hand; instead turn and refine the inner beads of your own conscious mind.

माला फेरत जुग भया • बाह्याडंबर विरोधपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं।

सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माहिं॥

Jab main tha tab hari nahin, ab hari hain main naahin. / Sab andhiyara miti gaya, jab deepak dekhya maahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी अद्वैत आध्यात्मिक अनुभूति को व्यक्त करते हुए कहते हैं कि जब तक मेरे भीतर 'मैं' (अहंकार और पृथकता का भाव) विद्यमान था, तब तक ईश्वर (हरि) की अनुभूति नहीं थी। परंतु जब ईश्वर की कृपा और प्रकाश का अवतरण हुआ, तो मेरा अहंकार विलीन हो गया। जैसे दीपक के जलने से सारा अंधकार नष्ट हो जाता है, वैसे ही ज्ञान के प्रकाश से समस्त अज्ञान मिट गया।

English: So long as the egoistic sense of "I" dominated within, Divine presence was absent; now that God reigns within, the ego has ceased to exist. All inner darkness vanished completely when the spiritual lamp of wisdom was kindled in my soul.

जब मैं था तब हरि नहीं • अहंकार नाशपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⚖️सत्य एवं धर्म🎓 Class 6-8

साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।

जाके हिरदै साँच है, ताके हिरदै आप॥

Saanch barabar tap nahin, jhooth barabar paap. / Jaake hirdai saanch hai, taake hirdai aap.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी सत्य की सर्वोपरिता का प्रतिपादन करते हुए कहते हैं कि सत्य बोलने और आचरण करने के समान कोई महान तपस्या नहीं है, और असत्य व छल के समान कोई घोर पाप नहीं है। जिस मनुष्य के हृदय में सत्य, निष्कपटता और सत्यनिष्ठा का वास होता है, उसके हृदय में साक्षात् परमात्मा (आप) स्वयं निवास करते हैं।

English: There is no spiritual penance comparable to Truth, and no transgression as grievous as untruth. In whose heart Truth dwells unshakably, within that very sacred heart resides the Supreme Divine Himself.

साँच बराबर तप नहीं • सत्यनिष्ठापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।

माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय॥

Dheere-dheere re mana, dheere sab kuchh hoy. / Maali seenche sau ghada, ritu aaye phal hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी मन को धैर्य का उपदेश देते हुए कहते हैं कि हे मन! अधीर मत हो, जीवन में सब कुछ अपने स्वाभाविक क्रम और गति से ही पूर्ण होता है। भले ही माली किसी वृक्ष को सौ घड़े पानी से एक ही दिन में सींच दे, किंतु उस पर फल तभी लगेंगे जब उसकी अनुकूल ऋतु आएगी। अतः धैर्य और निरंतर प्रयास ही सफलता का आधार हैं।

English: Patience, O restless mind! Everything unfolds gradually in its rightful season. Even if the gardener pours a hundred pots of water upon a sapling at once, the tree bears fruit only when its ordained season arrives. Cultivate steadfast patience.

धीरे-धीरे रे मना • धैर्यपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 9-10

कबीर सूता क्या करे, जागो न जपो मुरारि।

एक दिन है सोवना, लंबे पाँव पसारि॥

Kabir soota kya kare, jaago na japo muraari. / Ek din hai sovna, lambe paanw pasaari.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी अज्ञान की निद्रा में सोए मनुष्य को जगाते हुए कहते हैं कि हे मानव! तू मोह-माया के प्रमाद में क्यों सोया पड़ा है? जाग और अपने प्रभु (मुरारि) का स्मरण कर। एक दिन जब मृत्यु आएगी, तब तो तुझे अनंत काल के लिए पाँव पसारकर चिरनिद्रा में सोना ही पड़ेगा। यह जीवन परमात्मा के भजन और सत्कर्मों का सुअवसर है।

English: Why dost thou remain slumbering in worldly illusion, O Kabir? Awake and meditate upon the Supreme Divine! A fateful day will inevitably come when you must sleep forever with legs outstretched in death. Waste not this precious waking life.

कबीर सूता क्या करे • आत्म-जागरणपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।

बिनु पानी, साबुन बिना, निरमल करे सुभाय॥

Nindak niyare rakhiye, aangan kuti chhavay. / Binu paani, saabun bina, nirmal kare subhay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि अपनी आलोचना और निंदा करने वाले व्यक्ति को सदैव अपने समीप रखना चाहिए, हो सके तो उसे अपने आँगन में कुटिया बनाकर रख लेना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि वह हमारी कमियों को उजागर करके बिना पानी और साबुन के ही हमारे स्वभाव और चरित्र को निर्मल व दोषरहित बना देता है। स्वस्थ आलोचना आत्म-सुधार का वरदान है।

English: Keep your critic close beside you, even build him a cottage in your own courtyard. For by incessantly pointing out your shortcomings, he purifies your character and temperament without the need for soap and water.

निंदक नियरे राखिए • आलोचना का महत्वपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

कबीर खड़ा बाज़ार में, माँगे सबकी खैर।

ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर॥

Kabir khada bazaar mein, maange sabki khair. / Na kaahu se dosti, na kaahu se bair.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी अपनी निष्पक्ष और वीतराग दृष्टि को स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि कबीर संसार रूपी बाज़ार में खड़ा होकर सभी प्राणियों के कल्याण और मंगल की कामना करता है। न तो उसका किसी से विशेष स्वार्थपूर्ण लगाव या अंध-समर्थन है, और न ही किसी से कोई ईर्ष्या अथवा शत्रुता। सच्चा संत समदर्शी और निष्पक्ष होता है।

English: Kabir stands upright in the bustling marketplace of life, wishing peace and well-being for all humankind. He holds neither partisan attachment toward any, nor malice or enmity toward anyone. The enlightened sage embraces universal benevolence.

कबीर खड़ा बाज़ार में • समभावपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 11-12

जल में कुंभ, कुंभ में जल है, बाहर भीतर पानी।

फूटा कुंभ जल जलहि समाना, यह तत कह्यौ गियानी॥

Jal mein kumbh, kumbh mein jal hai, baahar bheetar paani. / Foota kumbh jal jalahi samana, yeh tat kahyau giyani.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी जीवात्मा और परमात्मा के अद्वैत संबंध को घड़े और जल के रूपक से समझाते हैं: नदी के जल में भरा हुआ घड़ा तैर रहा है; घड़े के अंदर भी जल है और बाहर भी जल है। जब वह घड़ा (शरीर रूपी उपाधि) टूट जाता है, तो अंदर का जल बाहर के जल में एकाकार हो जाता है। इसी प्रकार देह के त्याग पर जीवात्मा परमात्मा में लीन हो जाती है।

English: A water pot floats immersed in the river; there is water inside the pitcher and water outside. Once the vessel breaks, the enclosed water merges seamlessly into the boundless waters. Thus does the enlightened soul dissolve into Supreme Divinity.

जल में कुंभ • अद्वैत दर्शनपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

माया मुई न मन मुआ, मरि मरि गया सरीर।

आसा तृष्णा ना मुई, कहि गए दास कबीर॥

Maya mui na man mua, mari mari gaya sareer. / Aasa trishna na mui, kahi gaye daas kabir.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी सांसारिक तृष्णा की प्रबलता पर दुख प्रकट करते हुए कहते हैं कि मनुष्य का शरीर बार-बार जन्म लेकर मृत्यु को प्राप्त हो जाता है, किंतु न तो सांसारिक माया समाप्त होती है और न ही मन की वासनाएं मरती हैं। सांसारिक आशाएं और अनंत तृष्णाएं मनुष्य के वृद्ध होने पर भी कभी क्षीण नहीं होतीं। वासनाओं से मुक्ति ही मोक्ष का मार्ग है।

English: Worldly illusion died not, nor did the cravings of the mind dissolve; only the physical bodies perished again and again. Desires and insatiable yearnings never perish on their own, proclaims servant Kabir. True peace demands transcending desire.

माया मुई न मन मुआ • तृष्णा त्यागपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 6-8

करता था सो क्यों रहा, अब करि क्यों पछिताय।

बोया पेड़ बबूल का, आम कहाँ से खाय॥

Karta tha so kyon raha, ab kari kyon pachhitay. / Boya ped babool ka, aam kahan se khaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कर्मफल के अकाट्य सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि जब तू दुष्कर्म कर रहा था, तब तूने अपने कर्मों पर विचार क्यों नहीं किया? अब परिणाम सामने आने पर पछताने से क्या लाभ? यदि तूने बबूल (काँटों वाला पेड़) बोया है, तो उससे मीठे आम फलने की आशा कैसे कर सकता है? जैसा कर्म मनुष्य बोता है, वैसा ही फल उसे काटना पड़ता है।

English: Why did you heedlessly commit misdeeds while doing them, and why lament now when the consequence arrives? If you sowed thorny acacia seeds, how can you expect to harvest luscious mangoes? As a human sows in actions, so must they reap.

बोया पेड़ बबूल का • कर्म फलपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 9-10

पानी केरा बुदबुदा, अस मानुस की जात।

एक दिना छिप जाएगा, ज्यों तारा परभात॥

Paani kera budbuda, as maanus ki jaat. / Ek dina chhip jaayega, jyon taara parbhaat.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी मानव जीवन की क्षणभंगुरता बताते हुए कहते हैं कि मनुष्य का यह नश्वर शरीर जल के बुलबुले के समान क्षणिक है, जो क्षणभर में फूटकर समाप्त हो जाता है। ठीक उसी प्रकार जैसे भोर (प्रभात) होते ही आकाश के तारे लुप्त हो जाते हैं, एक दिन यह देह भी इसी प्रकार विलीन हो जाएगी। अतः जीवन का सदुपयोग परोपकार और भक्ति में करो।

English: Human physical existence is fragile and fleeting like a momentary bubble upon water. Just as the morning star fades and vanishes into the dawn, so too will this mortal vessel disappear one day. Spend life in virtue and devotion.

पानी केरा बुदबुदा • जीवन की नश्वरतापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 9-10

कबीर संगति साधु की, कदे न निरफल होय।

चंदन होसी बावना, नींब न कहसी कोय॥

Kabir sangati saadhu ki, kade na nirphal hoy. / Chandan hosi baawana, neemb na kahsi koy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी सत्संगति की महिमा बताते हुए कहते हैं कि सज्जनों और संतों की संगति कभी भी व्यर्थ या निष्फल नहीं होती। जिस प्रकार चंदन के समीप रहने वाला साधारण बावना पेड़ भी चंदन की सुवास से महक उठता है और कोई उसे नीम या कड़वा नहीं कहता, उसी प्रकार सत्पुरुषों के संपर्क में आने से दुर्जन व्यक्ति भी सुधरकर श्रेष्ठ बन जाता है।

English: Companionship with righteous souls never goes in vain. Just as an ordinary dwarf shrub growing beside a sandalwood tree absorbs its heavenly perfume and none calls it bitter neem, noble company uplifts and transforms human character.

संगति साधु की • सत्संगपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 9-10

ऊँचे कुल का जनमिया, जे करनी ऊँच न होय।

सुबरन कलस सुरै भरा, साधू निंदै सोय॥

Oonche kul ka janamia, je karni oonch na hoy. / Subaran kalas surai bhara, saadhoo nindai soy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि यदि किसी मनुष्य के कर्म ऊँचे और श्रेष्ठ नहीं हैं, तो केवल किसी उच्च कुल अथवा प्रतिष्ठित खानदान में जन्म लेने से वह महान नहीं बन जाता। जिस प्रकार यदि सोने के कलश (सुवर्ण पात्र) में मदिरा (शराब) भरी हो, तो भी सज्जन और साधु पुरुष उसकी निंदा ही करते हैं; उसी प्रकार कुकर्म करने वाला कुलीन व्यक्ति भी सर्वत्र निंदनीय होता है।

English: Born into an exalted family or high lineage, if a person’s deeds are not elevated, what is the pride of birth? Even if a vessel is wrought of pure gold, if it is filled with intoxicating liquor, the wise condemn it. Nobility resides in action, not pedigree.

ऊँचे कुल का जनमिया • कर्म की श्रेष्ठतापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🔥सामाजिक चेतना एवं आडंबर विरोध🎓 Class 11-12

काँकर पाथर जोरि कै, मसजिद लई बनाय।

ता चढ़ि मुल्ला बाँग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय॥

Kaankar paathar jori kai, masjid layi banaay. / Taa chadhee mulla baang de, kya bahra hua khudaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी धार्मिक आडंबर और ध्वनि-प्रदूषण पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि कंकड़-पत्थरों को जोड़कर मनुष्य ने मस्जिद का निर्माण कर लिया और उस पर चढ़कर मौलवी ज़ोर-ज़ोर से अज़ान की पुकार लगाता है। क्या ईश्वर बहरा हो गया है जो उसे चिल्लाकर पुकारना पड़े? परमात्मा तो अंतर्यामी हैं, वे हृदय की मूक प्रार्थना को भी सुनते हैं।

English: Gathering pebbles and stones, a mosque was built, and climbing atop it the priest screams loudly. Has the Almighty grown deaf that He must be summoned with shouting? The Divine knows the silent whispers of the sincere heart.

काँकर पाथर जोरि कै • पाखंड विरोधपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🔥सामाजिक चेतना एवं आडंबर विरोध🎓 Class 11-12

पाहन पूजे हरि मिलैं, तो मैं पूजौं पहार।

ताते यह चाकी भली, पीस खाय संसार॥

Pahan pooje hari milain, to main poojaun pahaar. / Taate yeh chaaki bhali, pees khaay sansaar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी मूर्तिपूजा के रूढ़िवादी अंधानुकरण पर कटाक्ष करते हुए कहते हैं कि यदि निर्जीव पत्थर की मूर्ति पूजने मात्र से ईश्वर की प्राप्ति हो सकती है, तो मैं पूरे पहाड़ की पूजा करने को तैयार हूँ। उस पत्थर से तो घर में रखी पत्थर की चक्की कहीं अधिक उपयोगी और श्रेष्ठ है, जिसके पीसे हुए अन्न से सारा संसार अपना पेट भरता है। सजीव कर्मकांड निरर्थक पूजा से श्रेष्ठ है।

English: If worshipping stone idols yields the Supreme Divine, I would gladly worship an entire mountain! Far more beneficial than that silent stone is the humble household grinding stone, whose ground flour feeds and nourishes the whole world.

पाहन पूजे हरि मिलैं • मूर्तिपूजा पर व्यंग्यपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 11-12

हाड़ जलै ज्यों लाकड़ी, केस जलै ज्यों घास।

सब जग जलता देखि करि, भया कबीर उदास॥

Haad jalai jyon laakdi, kes jalai jyon ghaas. / Sab jag jalta dekhi kari, bhaya kabir udaas.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी श्मशान में जलती चिता के माध्यम से संसार की नश्वरता का चित्र खींचते हुए कहते हैं कि अंत में हड्डियाँ सूखी लकड़ी की तरह और केश घास की तरह भस्म हो जाते हैं। इस संपूर्ण संसार को मृत्यु और वासना की अग्नि में जलते हुए देखकर कबीर का मन सांसारिक मोह से विरक्त और उदास हो गया है। अतः सत्य प्रभु की शरण लो।

English: Bones burn away like dry timber, and hair incinerates like dry grass. Watching the entire mortal realm burning in the fires of transience and mortality, Kabir’s heart is moved to profound detachment and sorrow.

हाड़ जलै ज्यों लाकड़ी • वैराग्यपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 11-12

कबीर माया पापणी, फंद ले बैठी हाट।

सब जग तो फंदे पड़ा, गया कबीरा काट॥

Kabir maya paapni, fand le baithi haat. / Sab jag to fande pada, gaya kabeera kaat.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि यह सांसारिक माया बड़ी पापिनी और छल-कपट से भरी है, जो संसार रूपी हाट (बाज़ार) में मोह-ममता का फंदा बिछाकर बैठी है। सारा संसार इस माया के फंदे में फँसकर दुख भोग रहा है, किंतु कबीर ने सद्गुरु के ज्ञान रूपी खड्ग से इस बंधन को काटकर मुक्ति प्राप्त कर ली है।

English: Worldly delusion (Maya) is a deceitful temptress that sits in the marketplace of life spreading her snares. The whole world fell trapped into her entanglements, but Kabir severed the illusory net with the sword of spiritual wisdom.

कबीर माया पापणी • माया मुक्तिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

तन को जोगी सब करैं, मन को विरला कोय।

सब सिद्धि सहजे पाइए, जे मन जोगी होय॥

Tan ko jogi sab karain, man ko virla koy. / Sab siddhi sahje paaiye, je man jogi hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि गेरुए वस्त्र पहनकर, भस्म रमाकर शरीर को तो हर कोई योगी या संन्यासी बना लेता है, किंतु अपने चंचल मन को वासनाओं से विरक्त करके सच्चा योगी बनाने वाला कोई विरला ही साधक होता है। यदि मनुष्य का मन वासना-रहित और ईश्वर-लीन हो जाए, तो समस्त सिद्धियाँ और परम शांति सहज ही प्राप्त हो जाती हैं।

English: Everyone readily turns the physical body into an ascetic by draping saffron robes, but rare is the seeker who transforms the inner mind into a true yogi. All spiritual attainments and grace arrive effortlessly if the mind becomes detached and pure.

तन को जोगी सब करैं • मन की साधनापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

मांगन मरण समान है, मत माँगो कोई भीख।

मांगन से मरना भला, यह सतगुरु की सीख॥

Maangan maran samaan hai, mat maango koyi bheekh. / Maangan se marna bhala, yeh satguru ki seekh.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता का उपदेश देते हुए कहते हैं कि दूसरों के आगे हाथ फैलाना और याचना करना मृत्यु के समान अपमानजनक है, अतः किसी से कभी भीख मत माँगो। अपने सद्गुरु की यही सच्ची सीख है कि परमुखापेक्षी होकर जीने से तो स्वाभिमानपूर्वक मर जाना कहीं बेहतर है। स्वावलंबन ही मनुष्य का सच्चा गौरव है।

English: Begging and supplicating before others is akin to spiritual death; do not stoop to beg. This is the supreme counsel of the True Guru: it is far more honorable to perish with self-respect than to survive through humiliating dependency.

मांगन मरण समान है • स्वाभिमानपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⚖️सत्य एवं धर्म🎓 Class 9-10

झूठे को झूठा मिले, दूणा बंधे सनेह।

झूठे को साँचा मिले, तबहीं टूटे नेह॥

Jhoothe ko jhootha mile, doona bandhe saneh. / Jhoothe ko saancha mile, tabheen toote neh.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी सांसारिक कपट का यथार्थ चित्रण करते हुए कहते हैं कि जब एक झूठे और कपटी व्यक्ति को दूसरा वैसा ही झूठा व्यक्ति मिल जाता है, तो दोनों के बीच परस्पर स्वार्थ के कारण दुगना प्रेम और तालमेल दिखाई देता है। परंतु जैसे ही उस झूठे का सामना किसी सत्यवादी और स्पष्टवादी व्यक्ति से होता है, उसका सारा बनावटी प्रेम तुरंत टूट जाता है क्योंकि सत्य झूठ को सहन नहीं करता।

English: When an untruthful person encounters another liar, their selfish affection doubles in mutual convenience. But when an untruthful person confronts someone utterly truthful, their affinity breaks instantaneously, for falsehood cannot endure the mirror of truth.

झूठे को झूठा मिले • सत्य और असत्यपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 9-10

जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ।

मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ॥

Jin khoja tin paiya, gahre paani paith. / Main bapura boodan dara, raha kinaare baith.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी लगन और पुरुषार्थ का महत्त्व समझाते हुए कहते हैं कि जिन साहसी गोताखोरों ने गहरे पानी में उतरकर खोज की, उन्होंने अनमोल मोती प्राप्त कर लिए। परंतु मुझ जैसा कायर और अभागा डूबने के भय से किनारे पर ही बैठा रह गया और खाली हाथ रहा। जीवन में किसी भी महान लक्ष्य या आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए भय त्यागकर गहरे उतरना पड़ता है।

English: Those who dared to dive into the deep waters retrieved precious pearls of wisdom. But the timid fool who feared drowning merely sat idle on the shore, empty-handed. Attaining spiritual or worldly excellence requires fearless dedication.

जिन खोजा तिन पाइया • पुरुषार्थपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।

अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥

Ati ka bhala na bolna, ati ki bhali na choop. / Ati ka bhala na barasna, ati ki bhali na dhoop.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी जीवन में संतुलन और मर्यादा का संदेश देते हुए कहते हैं कि न तो बहुत अधिक बोलना अच्छा होता है और न ही आवश्यकता से अधिक चुप रहना। जिस प्रकार अत्यधिक मूसलाधार वर्षा बाढ़ लाकर विनाश करती है और अत्यधिक कड़ी धूप सूखा लाकर कष्ट देती है, उसी प्रकार जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अति हानिकारक होती है। संयम और संतुलन ही श्रेयस्कर है।

English: Excessive speech is harmful, and excessive silence is equally unfitting. Neither is torrential endless rainfall good, nor is an unrelenting harsh drought beneficial. In all realms of existence, golden moderation and balance are the key to harmony.

अति का भला न बोलना • संतुलनपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

वृच्छ कबहूँ नहिं फल भखैं, नदी न संचै नीर।

परमारथ के कारने, साधुन धरा सरीर॥

Vrikchh kabahun nahin phal bhakhain, nadi na sanchai neer. / Parmaarath ke kaarne, saadhun dhara sareer.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी परोपकार की महिमा बताते हुए कहते हैं कि वृक्ष कभी अपने फल स्वयं नहीं खाते, और नदियाँ कभी अपना जल स्वयं नहीं पीतीं, वे केवल दूसरों के जीवन और कल्याण के लिए समर्पित रहती हैं। ठीक इसी प्रकार, सज्जन और संत पुरुष भी परोपकार, सेवा और दीन-दुखियों के उद्धार के लिए ही मानव शरीर धारण करते हैं।

English: Trees never consume their own sweet fruits, nor do flowing rivers stockpile water for themselves. Solely for selfless benevolence and the upliftment of humanity do noble saints embody physical form on earth.

वृच्छ कबहूँ नहिं फल भखैं • परोपकारपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 9-10

दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारंबार।

तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि न लागे डार॥

Durlabh maanush janam hai, deh na baarambaar. / Taruvar jyon patta jhade, bahuri na laage daar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी मानव जीवन की अमूल्यता का बोध कराते हुए कहते हैं कि चौरासी लाख योनियों में यह मानव जन्म अत्यंत दुर्लभ है, यह देह बार-बार प्राप्त नहीं होती। जिस प्रकार वृक्ष की शाखा से एक बार पत्ता टूटकर नीचे गिर जाए, तो वह दोबारा उस डाल पर नहीं जुड़ सकता; उसी प्रकार बीता हुआ समय और मानव जीवन पुनः नहीं मिलता। अतः इसे व्यर्थ न गंवाएं।

English: Human birth is exceedingly precious and rare; this vessel is not granted again and again. Just as a dry leaf falling from a branch can never be reattached to the tree, so too lost opportunity and mortal life never return. Strive for spiritual realization now.

दुर्लभ मानुष जन्म है • मानव जीवन का महत्वपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 9-10

कबीर यह तन जात है, सकै तो लेहु बहोरि।

नांगे हाथहुँ ते गए, जिनके लाख करोरि॥

Kabir yeh tan jaat hai, sakai to lehu bahori. / Naange haathahun te gaye, jinke laakh karori.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी चेतावनी देते हुए कहते हैं कि यह शरीर तो नष्ट होने ही वाला है, यदि संभव हो तो इसे प्रभु-भक्ति और सत्कर्मों में मोड़ लो। इस संसार से वे लोग भी खाली हाथ ही चले गए, जिनके पास लाखों-करोड़ों की अपार संपदा थी। अंत समय में न तो धन साथ जाता है और न ही भौतिक वैभव; केवल पुण्य और हरि-भक्ति ही साथ निभाते हैं।

English: This body is perishing swiftly, O Kabir; if you can, redirect it toward spiritual truth and virtue! Even those who amassed millions and billions departed this world completely empty-handed. True wealth is devotion and righteous action.

कबीर यह तन जात है • धन का नश्वर रूपपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास📖गुरु महिमा एवं ज्ञान🎓 Class 9-10

सतगुरु की महिमा अनंत, अनंत किया उपकार।

लोचन अनंत उघाड़िया, अनंत दिखावणहार॥

Satguru ki mahima anant, anant kiya upkaar. / Lochan anant ughaadiya, anant dikhaavanhaar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी अपने सच्चे गुरु की वंदना करते हुए कहते हैं कि सद्गुरु की महिमा अपरंपार और असीम है, उन्होंने मुझ पर अनंत उपकार किए हैं। उन्होंने मेरे अज्ञान के चक्षुओं को खोलकर मुझे ज्ञान और प्रज्ञा के दिव्य नेत्र प्रदान किए, जिससे मुझे अनंत, अविनाशी परमात्मा का साक्षात्कार संभव हो सका।

English: Boundless and infinite is the glory of the True Guru, and countless are the blessings he showered upon me. He unsealed the divine eye of spiritual vision within me, revealing the infinite, immortal Supreme Reality.

सतगुरु की महिमा अनंत • गुरु वंदनापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 11-12

दीपक दीया तेल भरि, बाती दई अघट्ट।

पूरा किया बिसाहूणा, बहुरि न आऊँ हट्ट॥

Deepak diya tel bhari, baati dayi aghatt. / Poora kiya bishaahuna, bahuri na aaoon hatt.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी आध्यात्मिक मुक्ति की पूर्णता का वर्णन करते हुए कहते हैं कि सद्गुरु ने मुझे ईश्वरीय प्रेम रूपी तेल से भरा हुआ ज्ञान का दीपक प्रदान किया और उसमें ऐसी अखंड बत्ती लगा दी जो कभी बुझती नहीं। इसके प्रकाश से मैंने सांसारिक क्रय-विक्रय (कर्मों का लेन-देन) समाप्त कर लिया, अब मुझे दोबारा इस संसार रूपी बाज़ार (पुनर्जन्म) में नहीं आना पड़ेगा।

English: The Guru bestowed a lamp filled with the oil of divine love, fitted with an imperishable wick of eternal truth. Thus equipped, I concluded the buying and selling of karmic existence; never again shall I have to return to this worldly marketplace of rebirth.

दीपक दीया तेल भरि • मोक्षपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

कबीर लोहा एक है, गढ़ने में है फेर।

ताहि का बख्तर बने, ताहि की शमशेर॥

Kabir loha ek hai, gadhne mein hai pher. / Taahi ka bakhtar bane, taahi ki shamsher.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि मूल धातु के रूप में लोहा एक ही होता है, परंतु लुहार के गढ़ने और ढालने के ढंग में अंतर होता है। उसी लोहे से रक्षा करने वाला कवच (बख्तर) भी बनता है और उसी लोहे से प्रहार करने वाली घातक तलवार (शमशेर) भी बनती है। इसी प्रकार सभी मनुष्य एक ही ईश्वर की संतान हैं, उनके संस्कार और विचार ही उन्हें रक्षक या विनाशक बनाते हैं।

English: Iron is fundamentally singular in essence; the difference lies solely in how it is forged. From the very same iron is fashioned protective armor (bakhtar), and from it is made the piercing sword (shamsher). All humans share the same divine source; character determines their destiny.

कबीर लोहा एक है • समानता और संस्कारपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 11-12

जैसी प्रीति कुटंब की, तैसी हरि सों होय।

कहै कबीर बैकुंठ में, पला न पकड़े कोय॥

Jaisi preeti kutumb ki, taisi hari son hoy. / Kahai kabir baikunth mein, pala na pakde koy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि मनुष्य अपने परिवार, कुटुंब और सांसारिक बंधनों से जितना प्रगाढ़ और निस्वार्थ प्रेम करता है, यदि वैसा ही अनन्य प्रेम वह परमात्मा (हरि) से कर ले, तो उसे मोक्ष की प्राप्ति निश्चित है। कबीर कहते हैं कि तब परमधाम (बैकुंठ) के द्वार पर कोई उसका पल्लू पकड़ने वाला या रोकने वाला नहीं होगा; वह निर्बाध परम पद को प्राप्त करेगा।

English: If a soul could shower upon the Divine even a fraction of the fervent attachment and affection it squanders upon family and worldly kin, none could ever bar its entry into the heavenly realm of liberation, proclaims Kabir.

जैसी प्रीति कुटंब की • अनन्य भक्तिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

अवगुण कहूँ शराब का, आपा सब बिसराय।

मानुष तैं मर्कट भया, जग में हँसी कराय॥

Avagun kahun sharaab ka, aapa sab bisray. / Maanush tain markat bhaya, jag mein hansi karaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी मद्यपान और व्यसनों के दुष्परिणामों पर चेतावनी देते हुए कहते हैं कि शराब का सबसे बड़ा अवगुण यह है कि वह मनुष्य का सारा होश-ओ-हवास और आत्म-संयम भुला देती है। मदिरापान करने से बुद्धिमान मनुष्य भी बंदर (मर्कट) के समान लज्जाहीन और हास्यास्पद चेष्टाएं करने लगता है और पूरे संसार में अपनी जग-हंसाई करवाता है। नशामुक्त जीवन ही सम्मानजनक है।

English: Behold the terrible vice of intoxicants: it strips a person of all self-awareness and dignity. Under its influence, an intelligent human degenerates into an unhinged ape, inviting ridicule, shame, and ruin before the world.

अवगुण कहूँ शराब का • नशा मुक्तिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

कबीर सो धन संचिए, जो आगैं कूं होय।

सीस चढ़ाए पोटली, ले जात न देख्या कोय॥

Kabir so dhan sanchiye, jo aagain koon hoy. / Sees chadhaaye potali, le jaat na dekhya koy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि मनुष्य को केवल उस सच्चे धन का संचय करना चाहिए, जो परलोक में और जीवन के अंतिम समय में काम आए, अर्थात् राम-नाम और परोपकार रूपी धन। भौतिक धन-दौलत की पोटली सिर पर बांधकर किसी भी व्यक्ति को मृत्यु के उपरांत साथ ले जाते नहीं देखा गया है। सांसारिक संपत्ति यहीं छूट जाती है, केवल सत्कर्म ही साथ जाते हैं।

English: Gather only that enduring wealth which accompanies you into the beyond, advises Kabir. For nobody has ever been witnessed carrying a bundle of amassed gold upon their head into the afterlife. True wealth is devotion and virtue.

कबीर सो धन संचिए • सच्चा धनपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🌱विनम्रता एवं निरहंकार🎓 Class 6-8

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।

कहे कबीर हरि पाइए, मन ही की परतीत॥

Man ke haare haar hai, man ke jeete jeet. / Kahe kabir hari paaiye, man hi ki parteet.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी मनोबल और संकल्प-शक्ति का रहस्य बताते हुए कहते हैं कि यदि मन ने पराजय स्वीकार कर ली तो मनुष्य पराजित हो जाता है, और यदि मन में विजय का दृढ़ विश्वास है तो वह अवश्य विजयी होता है। कबीर कहते हैं कि परमात्मा की प्राप्ति भी मन के सच्चे विश्वास, आस्था और निष्ठा से ही संभव होती है। सारा खेल मन के संकल्प का है।

English: Defeat is determined by a surrendered mind; victory is won by an unconquered mind. Kabir declares that even the Supreme Divine is attained through the deep, unwavering conviction and devotion of the purified heart.

मन के हारे हार है • मनोबलपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

चिंता ऐसी डाकिनी, काटि कलेजा खाय।

बैद बिचारा क्या करे, कहाँ तलक दवा लगाय॥

Chinta aisi daakini, kaati kaleja khaay. / Baid bichaara kya kare, kahan talak dawa lagaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी मानसिक चिंता के घातक प्रभाव को स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि चिंता ऐसी डायन (डाकिनी) के समान है जो मनुष्य के कलेजे को अंदर ही अंदर कुतरकर खा जाती है। ऐसी स्थिति में बेचारा वैद्य (चिकित्सक) क्या कर सकता है और वह कहाँ तक दवा लगाएगा? क्योंकि चिंता का कोई बाह्य शारीरिक उपचार नहीं है; इसका समाधान केवल संतोष, ईश्वर-भरोसा और सकारात्मक चिंतन है।

English: Anxiety and worry are like a ravenous sorceress that devours the human heart from within. What can a poor physician prescribe, and where can he apply balm? Physical medicine cannot heal inner torment; peace is found in faith and contentment.

चिंता ऐसी डाकिनी • चिंता से मुक्तिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

सुखिया सब संसार है, खावै अरु सोवै।

दुखिया दास कबीर है, जागै अरु रोवै॥

Sukhiya sab sansaar hai, khaavai aru sovai. / Dukhiya daas kabir hai, jaagai aru rovai.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी सांसारिक अज्ञान पर खेद व्यक्त करते हुए कहते हैं कि यह सारा अज्ञानी संसार अपने आपको बहुत सुखी मानता है, क्योंकि वह केवल खाने-पीने और भोग-विलास की निद्रा में मस्त है। परंतु सच्चा दुखी तो ईश्वर का सेवक कबीर है, जो जागृत रहकर संसार की क्षणभंगुरता, आसन्न मृत्यु और परमात्मा से विछोह को देखकर तड़पता और रोता है। आध्यात्मिक जागरण संवेदनशील बना देता है।

English: Deliriously happy seems the ignorant world, simply eating, drinking, and sleeping in illusion. But deeply sorrowful is servant Kabir, who remains wide awake, weeping for mankind’s spiritual blindness and separation from the Divine.

सुखिया सब संसार है • आध्यात्मिक जागृतिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 11-12

कबीर सीप समंद की, रटै पियास पियास।

समुंदहिं बूँद न आचवै, स्वाति बूँद की आस॥

Kabir seep samand ki, ratai piyaas piyaas. / Samundahin boond na aachavai, swati boond ki aas.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी अनन्य प्रेम का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि समुद्र में रहने वाली सीप प्यास-प्यास की रट लगाए रहती है। वह चारों ओर फैले अथाह खारे जल की एक बूँद भी ग्रहण नहीं करती, बल्कि केवल आकाश से बरसने वाली स्वाति नक्षत्र की बूँद की प्रतीक्षा करती है जिससे मोती बनता है। इसी प्रकार सच्चे भक्त को सांसारिक भोग नहीं, केवल प्रभु की कृपा चाहिए।

English: The oyster rests submerged in the ocean yet cries incessantly in thirst! It will not taste a drop of the saline sea, yearning solely for the pure drop of the celestial Swati rain that turns to pearl. Thus does the genuine devotee crave only divine grace.

कबीर सीप समंद की • अनन्य निष्ठापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास📖गुरु महिमा एवं ज्ञान🎓 Class 6-8

सब धरती कागद करूँ, लेखनि सब बनराय।

सात समुंदर की मसि करूँ, गुरु गुन लिखा न जाय॥

Sab dharti kaagad karun, lekhani sab banraay. / Saat samundar ki masi karun, guru gun likha na jaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी गुरु की अनंत महिमा का बखान करते हुए कहते हैं कि यदि मैं संपूर्ण पृथ्वी को कागज़ बना लूँ, सारे जंगलों की वनस्पतियों को कलम (लेखनी) बना लूँ और सातों समुद्रों के जल को स्याही बना लूँ, तो भी सद्गुरु के उपकारों और उनके गुणों का वर्णन नहीं किया जा सकता। गुरु की कृपा असीम और अवर्णनीय है।

English: Were I to transform the entire earth into paper, turn all forests into pens, and make ink of the seven great oceans, even then the infinite virtues, grace, and blessings of the True Guru could never be fully written.

सब धरती कागद करूँ • गुरु महिमापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 11-12

कबीर नाव जर्जरी, कूड़े खेवनहार।

हलके हलके तिरि गए, बूड़े जिन सिर भार॥

Kabir naav jarjari, koode khevanhaar. / Halke halke tiri gaye, boode jin sir bhaar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी संसार-सागर पार करने का रूपक प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि यह सांसारिक देह रूपी नाव अत्यंत जीर्ण-शीर्ण (जर्जर) है और अज्ञानी मल्लाह इसे चला रहे हैं। जो लोग सांसारिक वासनाओं, संग्रह और अहंकार के बोझ से मुक्त होकर 'हल्के' रहे, वे इस भवसागर को पार कर गए। किंतु जिनके सिर पर लोभ और मोह का भारी बोझ था, वे बीच मझधार में ही डूब गए।

English: Fragile and rickety is this worldly boat, steered by inept oarsmen. Those who kept themselves unburdened and light by shedding attachment sailed across safely; but those carrying heavy burdens of greed and ego drowned mid-stream.

कबीर नाव जर्जरी • भवसागर तरनापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

कामी क्रोधी लालची, इनसे भक्ति न होय।

भक्ति करे कोई सूरमा, जाति वरन कुल खोय॥

Kaami krodhi laalchi, inse bhakti na hoy. / Bhakti kare koyi soorma, jaati varan kul khoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि कामवासना से ग्रस्त, क्रोधी और लालची व्यक्तियों से कभी सच्ची ईश्वरीय भक्ति नहीं हो सकती। भक्ति का मार्ग तो किसी वीर योद्धा (सूरमा) का काम है, जो अपने अहंकार, जाति-वर्ण के अभिमान और कुल के घमंड को सर्वथा त्यागकर प्रभु के चरणों में अपना सर्वस्व समर्पित कर दे। भक्ति आत्म-बलिदान और निडरता की मांग करती है।

English: The lustful, the angry, and the greedy cannot practice authentic devotion. Devotion is the valiant path of a spiritual warrior, who fearlessly sheds all false pride of caste, color, and pedigree to surrender totally to the Divine.

कामी क्रोधी लालची • सच्ची भक्तिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 11-12

नैना अंतरि आव तूँ, ज्यों हौं नैन झँपेउँ।

ना हौं देखूँ और कूँ, ना तुझ देखन देऊँ॥

Naina antari aav toon, jyon haun nain jhanpeun. / Na haun dekhoon aur koon, na tujh dekhan de-oon.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी जीवात्मा का परमात्मा के प्रति अनन्य, गोपनीय और प्रगाढ़ प्रेम व्यक्त करते हुए कहते हैं कि हे मेरे प्रियतम प्रभु! तुम मेरे नेत्रों के भीतर समा जाओ, और जैसे ही तुम प्रवेश करो, मैं अपनी पलकें मूँद लूँ। इसके पश्चात् न तो मैं इस संसार में किसी अन्य को देखूँ और न ही तुम्हें किसी और को देखने दूँ। यह माधुर्य भाव की अनन्य पराकाष्ठा है।

English: Step inside my eyes, beloved Lord, and the instant You enter, I shall close my eyelids shut. Thereafter, neither will I gaze upon anyone else in this world, nor shall I let anyone else behold You. Such is the supreme intimacy of divine love.

नैना अंतरि आव तूँ • अनन्य प्रेमपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 9-10

कबीर देह जो धरी, तो सहना परै विकार।

जैसे भांडे कुम्हार के, सहैं अगिनि की झार॥

Kabir deh jo dhari, to sahna parai vikaar. / Jaise bhaande kumhaar ke, sahain agini ki jhaar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि यदि आत्मा ने यह नश्वर भौतिक शरीर धारण किया है, तो उसे सुख-दुख, रोग और सांसारिक कष्टों की ज्वाला को सहन करना ही पड़ेगा। जिस प्रकार कुम्हार द्वारा बनाए गए कच्चे मिट्टी के बर्तनों को पकने और सुदृढ़ बनने के लिए आंवां (भट्टी) की धधकती आग की लपटों को सहना पड़ता है, उसी प्रकार जीवन के ताप से तपकर ही आत्मा कुंदन बनती है।

English: Having assumed mortal physical form, one must bear hardships, sorrow, and worldly tribulations. Just as clay pots fashioned by the potter must endure the scorching flames of the kiln to become strong, human trials purify the soul.

कबीर देह जो धरी • कष्ट सहनशीलतापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

जो तोको काँटा बुवै, ताहि बोव तू फूल।

तोहि फूल को फूल है, वाको है तिरसूल॥

Jo toko kaanta buvai, taahi bov tu phool. / Tohi phool ko phool hai, vaako hai tirsool.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी क्षमा, अहिंसा और सदाचार का अमर संदेश देते हुए कहते हैं कि जो व्यक्ति तुम्हारे मार्ग में काँटे बिछाए (बुराई या अहित करे), तुम बदले में उसके लिए भी फूल ही बिछाओ (उसका भी भला करो)। तुम्हारे शुभ कर्मों के बदले तुम्हें फूलों जैसी सुगंध व शांति मिलेगी, जबकि काँटे बोने वाले को अंततः अपने ही कर्मों का त्रिशूल जैसा तीखा दंड भुगतना पड़ेगा।

English: For him who scatters thorns along your path, plant sweet blossoms in return. To you, your noble flowers will yield fragrance and peace; while for him, his own sown thorns will transform into piercing tridents of karmic retribution.

जो तोको काँटा बुवै • क्षमा और भलाईपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 9-10

कबीर संगति साधु की, बेगि करीजै जाय।

दुरमति दूरि गँवाइ सी, देसी सुमति बताय॥

Kabir sangati saadhu ki, begi kareejai jaay. / Durmati doori ganvaai si, desi sumati batay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि जैसे ही अवसर मिले, अविलंब जाकर सज्जनों और संतों की संगति कर लेनी चाहिए। संत पुरुषों का सान्निध्य मनुष्य के भीतर की समस्त दुर्बुद्धि, कुविचारों और दुर्गुणों को दूर भगा देता है और उसे श्रेष्ठ बुद्धि (सुमति), विवेक और सत्य मार्ग का दर्शन करा देता है। सत्संगति जीवन की दिशा बदल देती है।

English: Make haste without delay to seek the company of the wise and noble, advises Kabir. For virtuous companionship expels all wicked thoughts and ignorance from the mind, instilling righteous discernment and luminous wisdom.

संगति साधु की बेगि • सुमतिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 9-10

कहा कियो हम आइ करि, कहा करैंगे जाइ।

इन दोहू के बीच में, अवधि गँवाई आइ॥

Kaha kiyo hum aai kari, kaha karainge jaai. / In dohoo ke beech mein, avadhi ganvaayi aai.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी जीवन के व्यर्थ बीत जाने पर चेतावनी देते हुए कहते हैं कि इस संसार में जन्म लेकर हमने क्या सार्थक कर्म किया? और मृत्यु के उपरांत परलोक जाकर हम प्रभु को क्या मुँह दिखाएंगे? जन्म और मृत्यु के बीच की यह बहुमूल्य जीवन-अवधि हमने व्यर्थ की चिंताओं और सांसारिक प्रपंचों में ही गँवा दी। अतः समय रहते आत्म-कल्याण में लगो।

English: What worthy deed have we accomplished having arrived into this world, and what offering shall we present when we depart? Between birth and departure, we frittered away our allotted lifespan in trivial pursuits. Realize life’s sacred purpose before time expires.

कहा कियो हम आइ करि • जीवन का उद्देश्यपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 6-8

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय।

टूटे पे फिर ना जुरे, जुरे गाँठ परि जाय॥

Rahiman dhaaga prem ka, mat toro chatkaay. / Toote pe phir na jure, jure gaanth pari jaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि प्रेम और आपसी विश्वास का संबंध एक कोमल और नाजुक धागे के समान होता है। इसे क्रोध, अहंकार या नासमझी के झटके से कभी नहीं तोड़ना चाहिए। यदि यह प्रेम रूपी धागा एक बार टूट जाता है, तो फिर पहले जैसा नहीं जुड़ता; और यदि बहुत प्रयास करके उसे जोड़ भी लिया जाए, तो उसमें सदा के लिए एक अविश्वास और संकोच की गाँठ पड़ जाती है।

English: Rahim counsels never to snap the delicate thread of love in a sudden fit of anger or ego. Once severed, it cannot be rejoined as before; and even if re-tied, an indelible knot of distrust and distance remains forever in the relationship.

रहिमन धागा प्रेम का • प्रेम का महत्वपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।

पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥

Rahiman paani rakhiye, bin paani sab soon. / Paani gaye na oobarai, moti, maanush, choon.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी श्लेष अलंकार का अप्रतिम प्रयोग करते हुए 'पानी' के संरक्षण का संदेश देते हैं। वे कहते हैं कि जीवन में पानी अवश्य बनाए रखना चाहिए, क्योंकि पानी के बिना सब कुछ व्यर्थ (शून्य) है। पानी (चमक/आभा) के बिना मोती मूल्यहीन है, पानी (सम्मान/प्रतिष्ठा/विनम्रता) के बिना मनुष्य का कोई अस्तित्व नहीं, और पानी (जल) के बिना चूना या आटा किसी काम का नहीं रहता।

English: Preserve water with the utmost care, for without water all creation becomes desolate, advises Rahim. When water is lost, three things lose all worth: the pearl loses its luster, human beings lose their honor and dignity, and flour or lime cannot bind into substance.

रहिमन पानी राखिए • पानी का महत्वपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 6-8

जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।

चंदन विष व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग॥

Jo rahim uttam prakriti, ka kari sakat kusang. / Chandan vish vyaapat nahin, lapte rahat bhujang.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि जिस मनुष्य का स्वभाव और चरित्र दृढ़, श्रेष्ठ तथा उत्तम होता है, बुरी संगति (कुसंग) उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती। जिस प्रकार चंदन के शीतल वृक्ष पर सदैव विषैले सर्प लिपटे रहते हैं, फिर भी चंदन में विष का लेशमात्र भी प्रभाव नहीं फैलता और वह अपनी सुगंध नहीं छोड़ता; उसी प्रकार सत्पुरुष दुर्जनों के बीच रहकर भी अपने सद्गुणों को बनाए रखते हैं।

English: For a person endowed with upright character and noble disposition, evil companionship can cause no corruption. Sandalwood trees remain eternally embraced by venomous serpents, yet not a trace of poison permeates their sweet, cooling fragrance.

जो रहीम उत्तम प्रकृति • सत्संगतिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🌱विनम्रता एवं निरहंकार🎓 Class 6-8

रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि।

जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तरवारि॥

Rahiman dekhi baden ko, laghu na dijiye daari. / Jahan kaam aavai sui, kaha karai tarvaari.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि किसी बड़े, धनी अथवा शक्तिशाली व्यक्ति को पाकर अपने पुराने, छोटे अथवा निर्धन मित्रों व सहायकों की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। प्रत्येक वस्तु और व्यक्ति का अपना एक विशिष्ट महत्त्व होता है। जिस स्थान पर फटे वस्त्र को सिलने के लिए छोटी सी सुई काम आती है, वहाँ विशाल और तीक्ष्ण तलवार कुछ भी नहीं कर सकती। समानता और आदर ही जीवन का सत्य है।

English: Upon encountering the wealthy or powerful, never discard or disrespect the humble and small, says Rahim. Where a tiny sewing needle is required to mend a cloth, what possible utility can a mighty battle sword have? Every entity possesses unique worth.

रहिमन देखि बड़ेन को • समानतापूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहिं न पान।

कहि रहीम पर काज हित, संपति संचहिं सुजान॥

Taruvar phal nahin khaat hai, sarvar piyahin na paan. / Kahi rahim par kaaj hit, sampati sanchahin sujaan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी परोपकार की महिमा बताते हुए कहते हैं कि वृक्ष कभी अपने फल स्वयं नहीं खाते, और सरोवर (तालाब) कभी अपना जल स्वयं नहीं पीते। प्रकृति का यह नियम है कि वे सब दूसरों के लिए ही जीवन धारण करते हैं। ठीक इसी प्रकार, सज्जन और ज्ञानी पुरुष भी जो धन-संपत्ति संचित करते हैं, वह अपने विलास के लिए नहीं, बल्कि परोपकार, दीन-सेवा और समाज-कल्याण के लिए करते हैं।

English: Trees never partake of their own fruits, nor do lakes drink their own waters. In identical selfless fashion, noble and wise souls accumulate wealth and resources solely for the welfare, charity, and upliftment of others.

तरुवर फल नहिं खात है • परोपकारपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

चित्रकूट में रमि रहे, रहिमन अवध-नरेस।

जा पर विपदा परत है, सो आवत यह देस॥

Chhitrakoot mein rami rahe, rahiman awadh-nares. / Jaa par vipda parat hai, so aawat yeh des.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी भगवान श्री रामचंद्र जी के वनवास का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि अयोध्या के चक्रवर्ती राजा श्री राम जब संकट में पड़े, तो वे चित्रकूट के शांत जंगलों में आकर रहने लगे। वास्तव में जिस मनुष्य पर कोई भारी विपत्ति या संकट आता है, वही शांति, संबल और आत्म-चिंतन के लिए ऐसे एकांत व पवित्र स्थानों की शरण में आता है। विपत्ति मनुष्य को धैर्यवान और अंतर्मुखी बनाती है।

English: Even the sovereign Emperor of Ayodhya, Lord Rama, made peaceful Chitrakoot his hermitage during his exile. Verily, whosoever is tested by overwhelming worldly tribulations seeks refuge in such sacred, tranquil retreats to find solace and spiritual strength.

चित्रकूट में रमि रहे • अवध नरेसपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 6-8

कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीति।

बिपति कसौटी जे कसे, तेई साँचे मीत॥

Kahi rahim sampati sage, banat bahut bahu reeti. / Bipati kasauti je kase, teyi saanche meet.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी सच्चे मित्र की पहचान बताते हुए कहते हैं कि जब हमारे पास धन-दौलत, पद और समृद्धि होती है, तब तो अनेक लोग अनेक प्रकार से बहाने बनाकर हमारे सगे-संबंधी और मित्र बनने का ढोंग करते हैं। परंतु जो व्यक्ति विपत्ति, संकट और निर्धनता के समय कसौटी पर खरा उतरे और साथ न छोड़े, वास्तव में वही सच्चा मित्र होता है। संकट ही मित्रता की सच्ची परीक्षा है।

English: When wealth and prosperity abound, countless people flock around pretending companionship in myriad ways. But those steadfast souls who endure the touchstone of adversity without fleeing are the only true friends.

कहि रहीम संपति सगे • सच्चा मित्रपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय।

सुनि अठिलैहैं लोग सब, बाँटि न लैहै कोय॥

Rahiman nij man ki bitha, man hi raakho goy. / Suni athilaihain log sab, baanti na laihai koy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी लोक-व्यवहार की अत्यंत सूक्ष्म चेतावनी देते हुए कहते हैं कि अपने मन के दुख, पीड़ा और गुप्त कष्टों को अपने मन के भीतर ही छिपाकर रखना चाहिए। संसार के लोगों के सामने अपना दुखड़ा रोने से कोई लाभ नहीं होता; लोग आपके दुख को सुनकर पीठ पीछे आपकी हँसी उड़ाएंगे और आनंद लेंगे, परंतु आपके दुख को बाँटने के लिए कोई भी आगे नहीं आएगा।

English: Conceal the sorrow and torment of your heart within your own quiet soul, advises Rahim. Upon hearing of your distress, people will merely mock and derive secret amusement behind your back; none will step forward to shoulder your burden.

रहिमन निज मन की बिथा • मन की व्यथापूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 6-8

रूठे सुजन मनाइए, जौ रूठैं सौ बार।

रहिमन फिरि फिरि पोइए, टूटे मुक्ताहार॥

Roothe sujan manaaiye, jau roothain sau baar. / Rahiman phiri phiri poiye, toote muktahaar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी सज्जनों के महत्त्व को बताते हुए कहते हैं कि यदि कोई सच्चा हितैषी अथवा सज्जन व्यक्ति किसी कारणवश आपसे रूठ जाए, तो उसे तुरंत मना लेना चाहिए, भले ही वह सौ बार रूठे। जिस प्रकार यदि मोतियों की बहुमूल्य माला टूट जाए, तो हम उन मोतियों को फेंकते नहीं बल्कि बार-बार धागे में पिरोकर सहेजते हैं; उसी प्रकार सज्जन पुरुष समाज के अनमोल मोती हैं, उन्हें खोना नहीं चाहिए।

English: Reconcile with a virtuous and wise friend even if they take offense a hundred times, counsels Rahim. Just as one repeatedly re-strings a broken necklace of genuine pearls rather than casting them aside, a noble soul is a treasure never to be lost.

रूठे सुजन मनाइए • सज्जनों का आदरपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🌱विनम्रता एवं निरहंकार🎓 Class 6-8

बड़े बड़ाई ना करैं, बड़े न बोलैं बोल।

रहिमन हीरा कब कहै, लाख टका मेरो मोल॥

Bade badai na karain, bade na bolain bol. / Rahiman heera kab kahai, laakh taka mero mol.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि जो लोग वास्तव में महान और गुणी होते हैं, वे कभी अपनी प्रशंसा स्वयं अपने मुँह से नहीं करते और न ही कभी अहंकार से भरे बड़े-बड़े बोल बोलते हैं। जिस प्रकार बहुमूल्य हीरा कभी स्वयं यह दावा नहीं करता कि मेरा मूल्य लाखों टके है; उसकी चमक और शुद्धता ही उसकी परख करा देती है। उसी प्रकार महान व्यक्तियों का कर्म ही उनकी महत्ता सिद्ध करता है।

English: Those genuinely great never boast of their own virtues, nor do they utter haughty, boastful words. When has a radiant diamond ever proclaimed loudly that its worth is millions? True brilliance speaks silently through intrinsic merit.

बड़े बड़ाई ना करैं • निरहंकारपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

एकै साधै सब सधै, सब साधे सब जाय।

रहिमन सींचै मूल को, फूलै फलै अघाय॥

Ekai saadhe sab sadhai, sab saadhe sab jaay. / Rahiman seenchai mool ko, phoolai phalai aghaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी जीवन में लक्ष्य की एकाग्रता और मूल तत्व को साधने का रहस्य समझाते हैं। वे कहते हैं कि एक मुख्य परम तत्व (ईश्वर या मूल कर्तव्य) को साध लेने से अन्य सभी कार्य स्वतः सिद्ध हो जाते हैं; किंतु यदि मनुष्य एक साथ सब कुछ पाने के फेर में भटकता है, तो उसके हाथ से सब कुछ निकल जाता है। जैसे वृक्ष की जड़ (मूल) को सींचने से तना, शाखाएं, फूल और फल सभी तृप्त होकर लहलहा उठते हैं।

English: By nurturing the single essential root, all branches flourish; by scattering effort on everything simultaneously, all is lost. When the gardener waters the primary roots of a tree, its stems, leaves, flowers, and fruits thrive in abundance.

एकै साधै सब सधै • मूल को सींचनापूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

रहिमन बिपतिहूँ भली, जे थोरे दिन होय।

हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय॥

Rahiman bipatihoon bhali, je thore din hoy. / Hit anhit ya jagat mein, jaani parat sab koy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी संकट के सकारात्मक पक्ष को उद्घाटित करते हुए कहते हैं कि यदि विपत्ति थोड़े दिनों के लिए आए, तो वह भी एक प्रकार से भली और हितकारी ही होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि उस अल्पकालिक संकट के समय में ही यह स्पष्ट रूप से प्रकट हो जाता है कि इस संसार में कौन हमारा वास्तविक हितैषी (शुभचिंतक) है और कौन हमारा अहित चाहने वाला अथवा स्वार्थी है। संकट संबंधों का सच्चा आईना है।

English: Adversity is truly a blessing in disguise if it lasts for but a brief season, proclaims Rahim. For during those trying moments alone is the veil lifted, revealing unmistakably who in this world is genuinely your well-wisher and who is merely a hollow fair-weather friend.

रहिमन बिपतिहूँ भली • विपत्ति की परखपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🗣️मधुर वाणी एवं सद्व्यवहार🎓 Class 9-10

अमृत ऐसे बचन में, रहिमन रिस की गाँस।

जैसे मिसरीहु में मिली, नीरस बाँस की फाँस॥

Amrit aise bachan mein, rahiman ris ki gaans. / Jaise misreehu mein mili, neeras baans ki faans.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी क्रोध के दुष्परिणाम को बताते हुए कहते हैं कि अत्यंत मधुर, अमृत तुल्य बातचीत के बीच में यदि क्रोध अथवा कटुता की एक भी बात आ जाए, तो वह पूरे संवाद के आनंद को नष्ट कर देती है। यह ठीक वैसा ही है जैसे स्वादिष्ट और मीठी मिश्री खाते समय यदि उसमें सूखी बाँस की फाँस आ जाए, तो वह मुँह के सारे स्वाद को बिगाड़ देती है और पीड़ा पहुँचाती है।

English: In words sweet as celestial nectar, a sudden thorn of fury ruins all beauty, cautions Rahim. It is precisely like discovering a dry, piercing splinter of bamboo lodged inside a piece of crystal candy, destroying all delight and causing pain.

अमृत ऐसे बचन में • क्रोध का त्यागपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🌱विनम्रता एवं निरहंकार🎓 Class 9-10

जो बड़ेन को लघु कहें, नहिं रहीम घटि जाहिं।

गिरधर मुरलीधर कहें, कछु दुख मानत नाहिं॥

Jo baden ko laghu kahain, nahin rahim ghati jaahin. / Giridhar murlidhar kahain, kachhu dukh maanat naahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि यदि कोई क्षुद्र बुद्धि वाला व्यक्ति किसी सचमुच महान व्यक्ति को छोटा या तुच्छ कह दे, तो इससे उस महान व्यक्ति का बड़प्पन तनिक भी कम नहीं होता। जैसे भगवान श्री कृष्ण को जिन्होंने गोवर्धन पर्वत उठाया था (गिरिधर), उन्हें यदि लोग केवल बांसुरी बजाने वाला (मुरलीधर) कहकर पुकारते हैं, तो वे तनिक भी बुरा नहीं मानते। सच्चा बड़प्पन निंदा से अप्रभावित रहता है।

English: If envious or small-minded people belittle those who are truly great, their stature does not diminish by a fraction. Lord Krishna lifted the Govardhan mountain (Giridhar), yet when people address Him simply as the flute-player (Murlidhar), He takes no offense whatsoever.

जो बड़ेन को लघु कहें • गिरधर मुरलीधरपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 6-8

रहिमन चुप ह्वै बैठिए, देखि दिनन को फेर।

जब नीके दिन आइहैं, बनत न लगिहै देर॥

Rahiman chup hvai baithiye, dekhi dinan ko pher. / Jab neeke din aaihain, banat na lagihai der.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी प्रतिकूल समय में धैर्य रखने की प्रेरणा देते हुए कहते हैं कि जब समय विपरीत और परिस्थितियाँ प्रतिकूल हों, तो व्यर्थ का विवाद या अशांति करने के बजाय मौन और शांत होकर समय के चक्र को देखना चाहिए। जब शुभ और अनुकूल दिन आएंगे, तब बिगड़े हुए कार्यों को बनते और सफलता प्राप्त होते तनिक भी देर नहीं लगेगी। धैर्य ही विपत्ति का सबसे बड़ा संबल है।

English: Remain calm and composed in quiet endurance during adverse times, observes Rahim. When favorable and auspicious days return, your endeavors will materialize without any delay. Patience through hardship guarantees victory.

रहिमन चुप ह्वै बैठिए • धैर्यपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)⚖️सत्य एवं धर्म🎓 Class 9-10

खैर, खून, खाँसी, खुसी, बैर, प्रीति, मदपान।

रहिमन दाबे ना दबें, जानत सकल जहान॥

Khair, khoon, khaansi, khusi, bair, preeti, madpaan. / Rahiman daabe na dabain, jaanat sakal jahaan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी मानव मनोविज्ञान का अकाट्य सत्य प्रकट करते हुए कहते हैं कि सात चीजें छिपाने से कभी नहीं छिपतीं: खैर (कुशल-क्षेम या कत्था), खून (हत्या या रक्तपात), खाँसी, खुशी (हार्दिक प्रसन्नता), बैर (शत्रुता), प्रीति (सच्चा प्रेम) और मदपान (शराब का नशा)। लाख प्रयास करने पर भी ये बातें संसार के सामने प्रकट होकर ही रहती हैं। अंतःकरण की सच्चाई छिप नहीं सकती।

English: Seven realities can never be concealed despite all efforts, declares Rahim: well-being, bloodshed, coughing, joy, enmity, genuine love, and intoxication. The entire world knows that these truths inevitably reveal themselves.

खैर खून खाँसी • सत्य का उद्घाटनपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 9-10

जे रहीम दीपक दसा, कुल कपूत गति सोय।

बारे उजियारो करै, बढ़े अँधेरो होय॥

Je rahim deepak dasa, kul kapoot gati soy. / Baare ujiyaaro karai, badhe andhero hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी श्लेष अलंकार के माध्यम से दीपक और कुपुत्र (कुल-कलंक) की समानता दिखाते हैं। दीपक को जब जलाते हैं (बारे) तो वह प्रकाश करता है, और जब वह बुझ जाता है (बढ़े) तो अंधकार छा जाता है। इसी प्रकार, जब कुल में कुपुत्र का जन्म होता है (बचपन/बारे) तो परिवार में खुशी का उजियारा होता है, किंतु जब वह बड़ा होता है (बढ़े) और कुकर्म करता है, तो पूरे कुल में बदनामी का घोर अंधकार फैल जाता है।

English: The fate of an unworthy son closely mirrors the condition of an oil lamp, explains Rahim. When kindled (or born in childhood), it brings bright illumination; but as it goes out (or as he grows up into wicked deeds), complete darkness engulfs the lineage.

जे रहीम दीपक दसा • कपूतपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 9-10

रहिमन ओछे नरन सौं, बैर भलो न प्रीत।

काटे चाटे श्वान के, दोऊ भाँति विपरीत॥

Rahiman oochhe naran saun, bair bhalo na preet. / Kaate chaate shwaan ke, do-u bhaanti vipreet.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी दुष्ट और नीच प्रकृति के लोगों से दूरी बनाए रखने की चेतावनी देते हुए कहते हैं कि ओछे (तुच्छ मानसिकता वाले) मनुष्यों से न तो मित्रता अच्छी होती है और न ही शत्रुता। यह ठीक कुत्ते (श्वान) के समान है; यदि वह काटे तो विषैला घाव करता है, और यदि वह चाटे तो अशुद्ध और लज्जित करता है। दोनों ही स्थितियों में हानि ही होती है, अतः उनसे निष्पक्ष दूरी ही श्रेयस्कर है।

English: Neither friendship nor enmity with vile, ignoble people is advisable, cautions Rahim. It resembles a rabid dog: if it bites, it poisons; if it licks, it defiles. Both extremes yield grief and dishonor.

रहिमन ओछे नरन सौं • दुष्ट संगतिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

रहिमन अँसुवा नयन ढरि, जिय दुख प्रगट करेइ।

जाहि निकारौ गेह तें, कस न भेद कहि देइ॥

Rahiman ansuwa nayan dhari, jiya dukh pragat kareyi. / Jaahi nikaaro geh tain, kas na bhed kahi deyi.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी घर के भेदी के मनोवैज्ञानिक सत्य को समझाते हुए कहते हैं कि आँखों से बहने वाले आँसू हृदय के भीतर के सारे गोपनीय दुख और वेदना को संसार के सामने प्रकट कर देते हैं। इसमें आश्चर्य कैसा? जिसे भी घर (आँखों रूपी घर) से बाहर निकाल दिया जाएगा, वह घर का सारा भेद बाहर वालों को क्यों नहीं बताएगा? आंतरिक बातों को बाहर प्रकट होने से रोकना चाहिए।

English: Tears streaming from the eyes unveil to the world all the sorrow hidden within the heart, observes Rahim. And why should they not? Whosoever is expelled from the house will naturally disclose every confidential secret to outsiders.

रहिमन अँसुवा नयन ढरि • घर का भेदपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

दीन सबन को लखत है, दीनहिं लखै न कोय।

जो रहीम दीनहिं लखै, दीनबंधु सम होय॥

Deen saban ko lakhat hai, deenahin lakhai na koy. / Jo rahim deenahin lakhai, deenbandhu sam hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी करुणा और सेवा का अमर संदेश देते हुए कहते हैं कि निर्धन और असहाय व्यक्ति सहायता की आशा से सबकी ओर देखता है, परंतु उस दीन-हीन की ओर कोई सहानुभूति से नहीं देखता। रहीम कहते हैं कि जो सहृदय व्यक्ति उस पीड़ित और असहाय की ओर करुणा से देखता है और उसकी सहायता करता है, वह साक्षात् ईश्वर (दीनबंधु) के समान पूज्य और महान हो जाता है।

English: The poor and destitute gaze yearningly upon everyone for aid, yet none looks kindly upon them. But he who gazes with heartfelt compassion and extends help to the downtrodden becomes akin to God, the true Friend of the Poor (Deenbandhu).

दीन सबन को लखत है • दीनबंधुपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

धनि रहीम जल पंक को, लघु जिय पिअत अघाय।

उदधि बड़ाई कौन है, जगत पिआसो जाय॥

Dhani rahim jal pank ko, laghu jiya piat aghaay. / Udadhi badai kaun hai, jagat piaaso jaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी उपयोगिता और परोपकार को बड़प्पन का सच्चा पैमाना बताते हुए कहते हैं कि कीचड़ से भरा वह छोटा सा गंदा जल भी धन्य है, जिसे पीकर छोटे-छोटे जीव-जंतु अपनी प्यास बुझा लेते हैं और तृप्त होते हैं। उस विशाल समुद्र की ऐसी बड़ाई किस काम की, जिसके पास अथाह जल होने पर भी उसका जल खारा होने के कारण सारा संसार उसके तट से प्यासा ही लौट जाता है? परोपकार विहीन विशालता व्यर्थ है।

English: Blessed indeed is the muddy puddle of water, for tiny creatures drink from it and are satisfied. What is the glory of the colossal ocean if the entire world must return thirsty from its shores because its waters are salty and useless? Greatness lies in utility.

धनि रहीम जल पंक को • उदधि बड़ाईपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 9-10

रहिमन प्रीति सराहिए, मिले होत रंग दून।

ज्यों जरदी हरदी तजै, तजै सफेदी चून॥

Rahiman preeti sarahiye, mile hot rang doon. / Jyon jardi hardi tajai, tajai safedi choon.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी सच्चे, समर्पित प्रेम की सराहना करते हुए कहते हैं कि सच्चा प्रेम वही है जिसमें दोनों पक्ष मिलकर एक हो जाएँ और दोनों का प्रेम दुगुना हो जाए। इसका सुंदर उदाहरण हल्दी और चूना हैं: जब पीली हल्दी और सफेद चूना परस्पर मिलते हैं, तो हल्दी अपना पीलापन छोड़ देती है और चूना अपनी सफेदी त्याग देता है, और दोनों मिलकर एक नवीन लाल (सिंदूरी) रंग रच देते हैं। सच्चा प्रेम अहंकार का विसर्जन है।

English: Praise that authentic love where two souls merge and their brilliance doubles, says Rahim. Consider turmeric and lime: turmeric surrenders its yellow hue and lime sheds its stark white, and in selfless union, they create a vibrant, beautiful crimson.

रहिमन प्रीति सराहिए • सच्चा प्रेमपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 6-8

कदली, सीप, भुजंग-मुख, स्वाति एक गुन तीन।

जैसी संगति बैठिए, तैसो ही फल दीन॥

Kadali, seep, bhujang-mukh, swati ek gun teen. / Jaisi sangati baithiye, taiso hi phal deen.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी संगति के निर्णायक प्रभाव को दर्शाते हुए कहते हैं कि स्वाति नक्षत्र की जल की बूँद तो एक ही होती है, किंतु अलग-अलग संगति के कारण उसके तीन भिन्न-भिन्न परिणाम होते हैं। केले (कदली) में पड़ने पर वह कपूर बन जाती है, सीप में पड़ने पर अनमोल मोती बन जाती है, और साँप (भुजंग) के मुख में पड़ने पर भयंकर विष बन जाती है। मनुष्य जिस प्रकार की संगति करता है, वैसा ही उसका स्वभाव और फल बन जाता है।

English: The celestial Swati raindrop is identical in essence, yet it manifests three completely different outcomes depending on where it falls: in the banana tree it turns to camphor, in the oyster to a pearl, and in the snake’s fangs to lethal venom. So does association shape fate.

कदली सीप भुजंग मुख • स्वाति बूँदपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 6-8

समय पाय फल होत है, समय पाय झरि जाय।

सदा रहे नहिं एक सी, का रहीम पछिताय॥

Samay paay phal hot hai, samay paay jhari jaay. / Sada rahe nahin ek si, ka rahim pachhitaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी काल के अटल नियम को समझाते हुए कहते हैं कि समय आने पर ही वृक्षों पर फल लगते हैं और समय पूरा होने पर वे स्वतः पककर गिर जाते हैं। संसार में कोई भी अवस्था, सुख या दुख सदैव एक जैसी नहीं रहती। जब परिवर्तन प्रकृति का नियम है, तो मनुष्य को समय के उतार-चढ़ाव पर व्यर्थ पछतावा या शोक क्यों करना चाहिए? समभाव से हर परिस्थिति को स्वीकार करना चाहिए।

English: Trees bear fruit when their appointed season arrives, and shed them when the time has run its course. No condition in this mortal realm remains permanent. When change is the immutable law of nature, why lament over the turning tides of fortune?

समय पाय फल होत है • काल चक्रपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

बिगरी बात बनै नहीं, लाख करौ किन कोय।

रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय॥

Bigri baat banai nahin, laakh karau kin koy. / Rahiman phaate doodh ko, mathe na maakhan hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी सामाजिक व व्यक्तिगत संबंधों में सावधानी बरतने का उपदेश देते हुए कहते हैं कि एक बार जब कोई बात या संबंध बिगड़ जाता है, तो चाहे लाखों उपाय कर लिए जाएँ, वह पुनः पहले जैसा सुदृढ़ नहीं बन पाता। जिस प्रकार एक बार दूध फट जाए, तो उसे कितना भी मथा जाए, उससे कभी मक्खन नहीं निकाला जा सकता। अतः बोलने और व्यवहार करने से पूर्व सोच-विचार आवश्यक है।

English: Once a relationship or situation is ruptured through thoughtlessness, no amount of contrivance can fully restore it, warns Rahim. Just as spoiled, curdled milk, no matter how vigorously churned, can never yield sweet butter, fractured bonds can never be wholly mended.

बिगरी बात बनै नहीं • फाटे दूधपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🌱विनम्रता एवं निरहंकार🎓 Class 6-8

छमा बड़न को चाहिये, छोटन को उतपात।

कह रहीम हरि का घट्यौ, जो भृगु मारी लात॥

Chhama badon ko chaahiye, chhotan ko utpaat. / Kah rahim hari ka ghatyau, jo bhrigu maari laat.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी क्षमाशीलता को श्रेष्ठ पुरुषों का स्वाभाविक गुण बताते हुए कहते हैं कि बड़ों को क्षमा करना शोभा देता है, और छोटों की चंचलता या उत्पात को सहन करना चाहिए। उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि महर्षि भृगु ने जब भगवान विष्णु की छाती पर क्रोधवश लात मारी थी, तब भी भगवान विष्णु ने क्षमा करते हुए उनका आदर किया; इससे प्रभु का क्या घट गया? क्षमा से मनुष्य की महिमा बढ़ती है, घटती नहीं।

English: Magnanimous forgiveness befits the great, while erratic agitation often characterizes the small. When sage Bhrigu insolently kicked Lord Vishnu upon His chest, what was diminished of the Lord’s glory by His gentle forgiveness? Forgiveness exalts nobility.

छमा बड़न को चाहिये • क्षमाशीलतापूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🗣️मधुर वाणी एवं सद्व्यवहार🎓 Class 6-8

रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल।

आप तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल॥

Rahiman jihwa baawari, kahi gayi sarag pataal. / Aap to kahi bheetar rahi, jooti khaat kapaal.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी वाणी के असंयम पर हास्य और व्यंग्य के साथ गंभीर चेतावनी देते हुए कहते हैं कि यह जीभ (जिह्वा) तो पगली है, जो बिना सोचे-समझे स्वर्ग और पाताल की अनर्गल बातें कह डालती है। वह तो बोलकर तुरंत मुँह के भीतर सुरक्षित छिप जाती है, किंतु उसके द्वारा कहे गए अनुचित शब्दों का दंड बेचारे सिर (कपाल) को जूतियों की मार सहकर भुगतना पड़ता है। जीभ पर नियंत्रण रखें।

English: The tongue is utterly reckless: it blurts out wild, unrestrained words reaching from heaven to the underworld. Having spoken, it slips safely back behind the teeth, while the poor head is left to suffer the blows and shoes of retribution. Guard the tongue.

रहिमन जिह्वा बावरी • वाणी संयमपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

रहिमन वे नर मर चुके, जे कहुँ माँगन जाहिं।

उनते पहिले वे मुए, जिन मुख निकसत नाहिं॥

Rahiman ve nar mar chuke, je kahun maangan jaahin. / Unte pahile ve muye, jin mukh niksat naahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी स्वाभिमान और दानशीलता दोनों का उपदेश देते हुए कहते हैं कि जो मनुष्य किसी के आगे हाथ फैलाने या याचना करने जाते हैं, वे तो आत्मसम्मान की दृष्टि से जीते जी मरे हुए के समान हैं। परंतु उनसे भी पहले वे लोग मृतप्राय हैं, जिनके द्वार पर याचक के आने पर उनके मुख से 'नाहीं' (इनकार) निकल जाता है और वे सामर्थ्य होते हुए भी दान नहीं देते।

English: Those people are already dead in self-respect who must go begging at another’s threshold, declares Rahim. But even before them perished those miserly souls from whose lips comes forth a refusal to help when they possess the means to give.

रहिमन वे नर मर चुके • दानशीलतापूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

रहिमन मोहि न सुहाय, अमिय पिआवै मान बिनु।

बरु विष देइ बुलाय, मान सहित मरिबो भलो॥

Rahiman mohi na suhaay, amiy piaavai maan binu. / Baru vish deyi bulaay, maan sahit maribo bhalo.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी अपने स्वाभिमान की अडिग भावना व्यक्त करते हुए कहते हैं कि यदि कोई अनादर और अपमान के साथ मुझे अमर करने वाला अमृत भी पिलाए, तो मुझे वह तनिक भी स्वीकार नहीं है। इसके विपरीत, यदि कोई पूरे सम्मान और आदर के साथ बुलाकर मुझे विष भी दे दे, तो स्वाभिमान की रक्षा करते हुए उस विष को पीकर मर जाना कहीं अधिक श्रेष्ठ और गौरवशाली है।

English: It pleases me not in the least if someone offers nectar stripped of respect, proclaims Rahim. Far better would it be if someone summons me with profound honor and offers poison; dying with self-respect is immeasurably more glorious than surviving in humiliation.

रहिमन मोहि न सुहाय • स्वाभिमानपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 6-8

जाल परे जल जात बहि, तजि मीनन को मोह।

रहिमन मछरी नीर को, तऊ न छाँड़ति छोह॥

Jaal pare jal jaat bahi, taji meenan ko moh. / Rahiman machhri neer ko, tau na chhaandati chhoh.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी सच्चे और एकतरफा प्रेम का अद्भुत उदाहरण मछली और जल के माध्यम से देते हैं। जब नदी में मछुआरा जाल फेंकता है, तो जल मछली का साथ छोड़कर तुरंत जाल से बाहर बह जाता है। परंतु मछली अपने प्रिय जल के प्रति इतना सच्चा और अनन्य प्रेम रखती है कि जल से अलग होते ही अपने प्राण त्याग देती है, किंतु जल के प्रति अपना मोह और प्रेम कभी नहीं छोड़ती।

English: When the fisherman casts his net into the river, the water swiftly flows away, abandoning its affection for the trapped fish. Yet the faithful fish loves the water so unconditionally that it surrenders its very life the moment it is parted from the stream.

जाल परे जल जात बहि • मछली और जलपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 9-10

मथत मथत माखन रहे, दही मही बिलगाय।

रहिमन सोई मीत है, भीर परे ठहराय॥

Mathat mathat maakhan rahe, dahi mahi bilgaay. / Rahiman soyi meet hai, bheer pare thahraay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी सच्चे मित्र की तुलना मक्खन से करते हुए कहते हैं कि जब दही को मथा जाता है, तो छाछ (मही) अलग हो जाती है, किंतु मक्खन मथने की प्रक्रिया के बाद भी अपने सार रूप में टिका रहता है और ऊपर उभर आता है। इसी प्रकार, जो व्यक्ति संकट, विपत्ति और परीक्षा की घड़ी में विचलित हुए बिना मित्र के साथ अडिग खड़ा रहे, वही वास्तव में सच्चा मित्र होता है।

English: Through relentless churning, the whey separates and flows away, but the wholesome butter remains steadfast and rises to the top. Rahim declares that he alone is a true friend who stays steadfastly beside you when adversity falls.

मथत मथत माखन रहे • मित्रता की परीक्षापूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

पावस देखि रहीम मन, कोइल साधे मौन।

अब दादुर वक्ता भए, हमको पूछत कौन॥

Paawas dekhi rahim man, koyil saadhe maun. / Ab daadur vakta bhaye, hamko poochhat kaun.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि वर्षा ऋतु (पावस) का आगमन देखकर कोयल ने मौन धारण कर लिया है। कोयल सोचती है कि अब तो मेंढक (दादुर) चारों ओर टर्र-टर्र की कर्कश ध्वनि करके मुख्य वक्ता बन बैठे हैं, ऐसे कोलाहल और मूर्खों की सभा में मेरी मधुर वाणी की कद्र करने वाला कौन है? जहाँ अज्ञानी और ढोंगी बोल रहे हों, वहाँ बुद्धिमानों को चुप रहना ही श्रेयस्कर है।

English: Witnessing the arrival of the monsoon downpours, the melodious cuckoo adopts silence, reflects Rahim. For now the croaking frogs have become the vocal orators; who in this cacophony will value sweet eloquence? Silence is wisdom where fools hold sway.

पावस देखि रहीम मन • कोयल और दादुरपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

रहिमन विद्या बुद्धि नहिं, धरम न ध्यान विवेक।

मानुष तन भुवि भार है, पशु बिनु पूँछ परेख॥

Rahiman vidya buddhi nahin, dharam na dhyan vivek. / Maanush tan bhuvi bhaar hai, pashu binu poonch parekh.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी ज्ञान और विवेक के अभाव में मानव जीवन की निरर्थकता बताते हुए कहते हैं कि जिस मनुष्य के पास न तो विद्या है, न सद्बुद्धि, न धर्म का आचरण है और न ही आत्म-चिंतन व विवेक है; ऐसा मनुष्य इस धरती पर केवल भार रूप है। वह केवल आकृति से मनुष्य दिखता है, परंतु वास्तव में वह बिना पूँछ और सींग वाले पशु के समान ही है। ज्ञान ही मनुष्य को पशुता से ऊपर उठाता है।

English: He who possesses neither learning nor intellect, neither righteousness nor contemplative discernment, is merely a heavy burden upon the earth. Though clothed in human form, he is in truth nothing more than a beast lacking a tail.

रहिमन विद्या बुद्धि नहिं • विवेक का महत्वपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

दीर्घ दोहा अरथ के, आखर थोरे आहिं।

ज्यों रहीम नट कुंडली, सिमटि कूदि चढ़ि जाहिं॥

Deergh doha arath ke, aakhar thore aahin. / Jyon rahim nat kundali, simti koodi chadhi jaahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी दोहा छंद के महात्म्य और गागर में सागर भरने की कला का वर्णन करते हुए कहते हैं कि दोहे में यद्यपि अक्षर (शब्द) थोड़े ही होते हैं, किंतु उनका अर्थ अत्यंत गूढ़, गंभीर और दीर्घ (विशाल) होता है। यह ठीक उस कुशल बाज़ीगर (नट) की तरह है, जो अपने विशाल शरीर को सिकोड़कर एक छोटे से लोहे के छल्ले (कुंडली) के भीतर से सहजतापूर्वक कूदकर बाहर निकल जाता है।

English: A classical doha contains few and concise letters, yet its embedded philosophical meaning is immensely vast and profound. It resembles a skilled acrobat who curls his entire frame tightly to leap effortlessly through a tiny circular hoop.

दीर्घ दोहा अरथ के • दोहा छंदपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🌱विनम्रता एवं निरहंकार🎓 Class 6-8

रहिमन रिस को मारिबो, सब प्रकार सुख होय।

रिस ते कबहूँ नहिं भलो, समुझि लेहु सब कोय॥

Rahiman ris ko maaribo, sab prakaar sukh hoy. / Ris te kabahun nahin bhalo, samujhi lehu sab koy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि अपने भीतर उठने वाले क्रोध (रिस) का दमन करना और उसे शांत कर देना ही हर प्रकार से सुख और शांति प्रदान करने वाला है। क्रोध से कभी किसी का कोई भला नहीं हुआ है, यह बात सभी को भलीभाँति समझ लेनी चाहिए। क्रोध विवेक को हर लेता है और संबंधों को भस्म कर देता है, अतः क्रोध पर विजय पाना ही सच्ची विजय है।

English: Subduing and conquering one’s inner anger yields unalloyed peace and well-being in every possible way, advises Rahim. Anger has never accomplished any good for anyone anywhere; let everyone realize this timeless truth.

रहिमन रिस को मारिबो • क्रोध निवारणपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 11-12

रहिमन बात अगम्य की, कहन सुनन की नाहिं।

जे जानत ते कहत नहिं, कहत ते जानत नाहिं॥

Rahiman baat agamy ki, kahan sunan ki naahin. / Je jaanat te kahat nahin, kahat te jaanat naahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी गूढ़ आत्मज्ञान और ईश्वरीय अनुभूति के रहस्य को प्रकट करते हुए कहते हैं कि उस अगम्य और असीम परमात्मा की बात केवल कहने और सुनने का विषय नहीं है। जो तत्ववेत्ता वास्तव में उस परमसत्य को जान लेते हैं, वे मौन हो जाते हैं और व्यर्थ नहीं बोलते; और जो केवल बड़ी-बड़ी बातें बनाते फिरते हैं, वे वास्तव में उस सत्य से सर्वथा अनभिज्ञ होते हैं।

English: The transcendental mystery of the Supreme Reality is beyond mere speaking and listening, observes Rahim. Those enlightened souls who truly realize it fall silent; while those who chatter endlessly about it remain utterly ignorant of its truth.

रहिमन बात अगम्य की • गूढ़ ज्ञानपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 6-8

जे गरीब पर हित करैं, ते रहीम बड़ लोग।

कहाँ सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग॥

Je gareeb par hit karain, te rahim bad log. / Kahan sudaama baapuro, krishna mitaayi jog.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि जो सामर्थ्यवान लोग निर्धनों और असहायों का भला करते हैं और उन्हें गले लगाते हैं, वास्तव में वे ही संसार में सबसे बड़े और महान लोग हैं। उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि कहाँ परम निर्धन और दीन सुदामा, और कहाँ द्वारकाधीश भगवान श्री कृष्ण! सांसारिक दृष्टि से सुदामा कृष्ण की मित्रता के योग्य नहीं थे, किंतु कृष्ण ने अपने असीम प्रेम और उदारता से उन्हें गले लगाकर मित्र का मान दिया।

English: Those who extend benevolent grace to the impoverished are the truly noble souls of this world. Where stood poor destitute Sudama in comparison to Lord Krishna, sovereign of Dwarka? Yet Krishna’s supreme magnanimity embraced him as His dearest friend.

जे गरीब पर हित करैं • कृष्ण सुदामापूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 9-10

सदा न काहू की रही, रहिमन यह गति जानि।

घटत बढ़त ज्यों चंदमा, त्यों सुख-दुख पहिचानि॥

Sada na kaahu ki rahi, rahiman yeh gati jaani. / Ghatat badhat jyon chandama, tyon sukh-dukh pahichaani.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि यह संसार का अटल नियम जान लो कि किसी की भी स्थिति सदैव एक जैसी नहीं रहती। जिस प्रकार चंद्रमा कभी घटता है (कृष्ण पक्ष) और कभी बढ़ता है (शुक्ल पक्ष), उसी प्रकार जीवन में सुख और दुख का चक्र भी निरंतर घटता और बढ़ता रहता है। सुख में अहंकारी नहीं होना चाहिए और दुख में निराश नहीं होना चाहिए।

English: Understand this inexorable rhythm of life: the circumstances of no human remain constant forever. Just as the moon waxes in illumination and wanes in shadow, recognize that joy and sorrow continually alternate in human existence.

सदा न काहू की रही • सुख दुख का चक्रपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

मन मोती अरु दूध रस, इनकी सहज सुभाय।

फट जाए तो ना मिले, कोटिन करो उपाय॥

Man moti aru doodh ras, inki sahaj subhaay. / Phat jaaye to na mile, kotin karo upaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि मनुष्य का मन, मोती और दूध का रस—इन तीनों का स्वाभाविक गुण अत्यंत नाजुक होता है। यदि मोती में एक बार दरार पड़ जाए, दूध एक बार फट जाए, अथवा मन में एक बार अविश्वास या कटुता आ जाए, तो करोड़ों उपाय करने पर भी वे अपनी पूर्व स्थिति में कभी वापस नहीं लौट सकते। अतः मन की पवित्रता और संबंधों की शुद्धि को सहेज कर रखें।

English: Human affection, radiant pearls, and pure milk share a delicate, fragile nature. Once cracked, spoiled, or fractured, no millions of remedies can ever restore them to their pristine integrity. Safeguard the purity of relationships.

मन मोती अरु दूध रस • नाजुक संबंधपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

आदर घटे तो नैन घटे, घटत सनेह गंभीर।

रहिमन तहाँ न जाइए, जहँ न मिलै सनमान॥

Aadar ghate to nain ghate, ghatat saneh gambheer. / Rahiman tahaan na jaaiye, jahan na milai sanmaan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी स्वाभिमान और सम्मान का पाठ पढ़ाते हुए कहते हैं कि जहाँ जाने से आँखों में आदर कम दिखाई दे, और जहाँ का प्रेम व स्नेह घटता हुआ प्रतीत हो, वहाँ कभी नहीं जाना चाहिए। जिस स्थान या व्यक्ति के यहाँ आपका उचित मान-सम्मान न हो, वहाँ जाकर बैठना अपने आत्मसम्मान को नष्ट करना है। स्वाभिमान से बड़ा कोई आभूषण नहीं है।

English: Where welcome diminishes in the host’s eyes and genuine affection withers into coldness, go not to that abode, urges Rahim. Where sincere honor and dignity are withheld, a self-respecting person must never linger.

आदर घटे तो नैन घटे • आत्मसम्मानपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

कमल पत्र पर जल रहे, रहिमन ताकी चाल।

जल में रहे जल ते अलग, संत जनन के हाल॥

Kamal patra par jal rahe, rahiman taaki chaal. / Jal mein rahe jal te alag, sant janan ke haal.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कमल के पत्ते (पुरइनि पात) का रूपक प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि कमल का पत्ता जल में ही रहता है, उस पर पानी की बूँदें गिरती भी हैं, किंतु वह पानी को अपने ऊपर चिपकने नहीं देता और पानी में रहकर भी उससे अलिप्त (अलग) रहता है। ठीक इसी प्रकार, सच्चे संत और ज्ञानी पुरुष भी सांसारिक मोह-माया के बीच रहते हुए भी उससे अनासक्त और निर्लिप्त रहते हैं।

English: Observe the lotus leaf: it lives immersed in the water, yet water droplets roll off without leaving a trace of wetness upon it. In identical manner, the enlightened saint dwells in the midst of worldly affairs completely unattached and spiritually free.

कमल पत्र पर जल रहे • अनासक्तिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 11-12

बलिहारी वा प्रेम की, जो मन बसै निरंतर।

कहि रहीम सोई भलो, मिटै जन्म को अंतर॥

Balihari wa prem ki, jo man basai nirantar. / Kahi rahim soyi bhalo, mitai janam ko antar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी अनन्य ईश्वरीय प्रेम की वंदना करते हुए कहते हैं कि मैं उस परम प्रेम पर न्योछावर जाता हूँ, जो मन में निरंतर अखंड रूप से बसा रहता है। केवल वही प्रेम सच्चा और कल्याणकारी है, जो जीव और ईश्वर के बीच के जन्म-जन्मांतर के अंतर और अज्ञान के पर्दे को मिटाकर आत्मा का परमात्मा से मिलन करा देता है।

English: I offer my deepest homage to that divine love which abides uninterrupted within the purified heart, declares Rahim. That alone is supreme devotion which dissolves the ancient chasm between the soul and God, granting liberation.

बलिहारी वा प्रेम की • ईश्वर प्रेमपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)⚖️सत्य एवं धर्म🎓 Class 9-10

रहिमन भेष बनाय के, कीजै नाहिं बड़ाई।

जैसे काच न कनक सम, चमकत है अधिकाई॥

Rahiman bhesh banaay ke, keejai naahin badai. / Jaise kaach na kanak sam, chamkat hai adhikai.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी बाह्य आडंबर और दिखावे का खंडन करते हुए कहते हैं कि केवल साधु या महात्मा का भेष बनाकर अपनी झूठी बड़ाई या प्रशंसा नहीं करानी चाहिए। जिस प्रकार चमकता हुआ काँच कभी शुद्ध सोने (कनक) के समान मूल्यवान नहीं हो सकता, भले ही वह धूप में सोने से भी अधिक चमकता हुआ दिखाई दे; उसी प्रकार बाह्य वेशभूषा से कोई महान नहीं बनता, आंतरिक गुण ही सच्चे आभूषण हैं।

English: Never seek unearned praise and status by donning the mere outward guise of holiness, warns Rahim. Just as glittering glass can never equal precious gold even if it sparkles brilliantly in sunlight, outer appearance can never substitute for authentic virtue.

रहिमन भेष बनाय के • आडंबर का खंडनपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 6-8

विद्या धन उद्यम बिना, कहो जु पावै कौन।

बिना डुलाए ना मिलै, ज्यों पंखा की पौन॥

Vidya dhan udyam bina, kaho ju paavai kaun. / Bina dulaaye na milai, jyon pankha ki paun.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी परिश्रम और पुरुषार्थ की महत्ता समझाते हुए कहते हैं कि भला बिना कठिन परिश्रम (उद्यम) और अभ्यास के विद्या रूपी अनमोल धन को कौन प्राप्त कर सकता है? यह ठीक हाथ के पंखे के समान है; जब तक हाथ से पंखा न डुलाया जाए, तब तक उसकी शीतल पवन (हवा) भी प्राप्त नहीं होती। विद्या और सफलता केवल निरंतर परिश्रम से ही अर्जित की जा सकती है।

English: Who has ever acquired the priceless treasure of knowledge without diligent labor and earnest effort? Even the cooling breeze of a hand-fan cannot be obtained unless you exert effort to move it. Dedicated industry is the sole key to wisdom.

विद्या धन उद्यम बिना • परिश्रमपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 6-8

चिंता कहुँ न कीजिए, भजहु राम भगवान।

जाहि दियो है चोंच सो, दैहै चुग्गा आन॥

Chinta kahun na keejiye, bhajahu ram bhagwaan. / Jaahi diyo hai chonch so, daihai chugga aan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और विश्वास का उपदेश देते हुए कहते हैं कि मनुष्य को आजीविका और भविष्य की व्यर्थ चिंता नहीं करनी चाहिए, बल्कि प्रभु श्री राम का भजन व स्मरण करना चाहिए। जिस विधाता ने पक्षी को चोंच दी है, उसने उसके लिए दाना (चुग्गा) भी निश्चित कर रखा है। परमात्मा सभी का पालनहार है, अतः चिंता छोड़कर निष्काम कर्म करो।

English: Harbor no anxious worries about survival; meditate instead upon the Supreme Lord. The compassionate Creator who gave the bird a beak has surely provided the grain to sustain it. Trust in divine providence.

चिंता कहुँ न कीजिए • ईश्वर पर विश्वासपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 9-10

हंस परे बक पाँति में, रहिमन होय न काज।

मोती तजि घोंघा चुगै, हँसै सकल समाज॥

Hans pare bak paanti mein, rahiman hoy na kaaj. / Moti taji ghongha chugai, hansai sakal samaaj.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि यदि कोई हंस (ज्ञानी व्यक्ति) बगुलों (ढोंगियों या दुर्जनों) की पंक्ति में जाकर बैठ जाए, तो उसका कोई भला नहीं होता। बगुले के संपर्क में आकर यदि वह अनमोल मोतियों को छोड़कर तुच्छ घोंघे चुगने लगे, तो सारा समाज उस पर हँसता है और उसकी प्रतिष्ठा गिर जाती है। श्रेष्ठ पुरुषों को अपनी संगति और मर्यादा का सदैव ध्यान रखना चाहिए।

English: If a majestic swan sits among a flock of deceitful herons, no good can result. If, seduced by their company, it abandons pearls to peck at river snails, the entire world laughs in derision. Keep company that matches your noble soul.

हंस परे बक पाँति में • मर्यादा और संगतिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

रहिमन सब घटि में बसै, अंतरजामी राम।

जैसे तिल में तेल है, त्यों घट-घट में धाम॥

Rahiman sab ghati mein basai, antarjaami ram. / Jaise til mein tel hai, tyon ghat-ghat mein dhaam.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी परमात्मा की सर्वव्यापकता को स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि वह अंतर्यामी परमात्मा प्रत्येक प्राणी के हृदय में विद्यमान है। जिस प्रकार तिल के छोटे से बीज के भीतर अदृश्य रूप से तेल समाया रहता है, ठीक उसी प्रकार प्रत्येक घट (शरीर) के भीतर साक्षात् प्रभु का दिव्य धाम है। उसे बाहर ढूँढ़ने के बजाय अपने अंतःकरण में खोजना चाहिए।

English: The omniscient Supreme Lord dwells within every mortal vessel, reveals Rahim. Just as oil is invisibly present throughout every sesame seed, so too does the divine abode reside within the core of every living heart.

रहिमन सब घटि में बसै • अंतर्यामी रामपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 11-12

रहिमन कठिन कुठार की, सहै न तनक चकोर।

चढ़ि के वृक्ष कुल्हाड़ पै, चोंच मार मुख छोर॥

Rahiman kathin kuthaar ki, sahai na tanak chakor. / Chadhi ke vriksh kulhaad pai, chonch maar mukh chhor.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी वृक्ष और पक्षियों के परस्पर संबंध व प्रेम की वीरता का वर्णन करते हुए कहते हैं कि जब कोई लकड़हारा कुल्हाड़ी से वृक्ष को काटने लगता है, तो वृक्ष पर रहने वाला चकोर पक्षी उस प्रहार को सहन नहीं कर पाता और साहसपूर्वक उस कुल्हाड़ी पर अपनी चोंच मारकर अपने आश्रयदाता वृक्ष की रक्षा का प्रयास करता है। आश्रयदाता के प्रति निष्ठा और कृतज्ञता ही सच्ची वीरता है।

English: When the harsh axe strikes the tree, the bird dwelling upon its branches cannot bear the wound to its benefactor, daring to peck at the axe blade in defense. Gratitude toward one’s protector inspires courageous loyalty.

कठिन कुठार की • कृतज्ञतापूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

काज परे कछु और है, काज सरे कछु और।

रहिमन भँवरी के भए, नदी सिरावत मौर॥

Kaaj pare kachhu aur hai, kaaj sare kachhu aur. / Rahiman bhanvari ke bhaye, nadi siraavat maur.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी सांसारिक स्वार्थपरता पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहते हैं कि काम पड़ने पर लोगों का व्यवहार कुछ और होता है, और काम निकल जाने पर बिल्कुल बदल जाता है। जिस प्रकार विवाह के समय वर के सिर पर सजने वाले सेहरे (मौर) का बड़ा मान-सम्मान होता है, किंतु जैसे ही फेरे (भँवरी) पूरे होते हैं, उसी मौर को नदी में विसर्जित कर दिया जाता है। स्वार्थी संसार केवल काम निकलने तक आदर करता है।

English: People behave in one manner when they need a favor, and completely differently once their need has been fulfilled. Look at the wedding crown (maur): during marriage vows it is held sacred upon the groom’s head, but the moment the ceremony finishes, it is cast into the river.

काज परे कछु और है • स्वार्थपरतापूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)⚖️सत्य एवं धर्म🎓 Class 9-10

रहिमन तहाँ न जाइए, जहाँ कपट को हेत।

हम तन ढारत ढेहुरी, वे मन ढारत रेत॥

Rahiman tahaan na jaaiye, jahan kapat ko het. / Ham tan dhaarat dhehuri, ve man dhaarat ret.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कपटपूर्ण और झूठे संबंधों से दूर रहने की चेतावनी देते हुए कहते हैं कि उस स्थान पर कभी नहीं जाना चाहिए जहाँ केवल कपट और छल का संबंध हो। जहाँ हम तो निष्कपट भाव से अपना तन-मन समर्पित करने जाते हैं, परंतु सामने वाले के मन में केवल छल की सूखी रेत भरी होती है जो कभी किसी को तृप्ति नहीं दे सकती। कपटी लोगों से दूर रहना ही हितकर है।

English: Never venture into associations where deceit and hypocrisy are the hidden foundation, cautions Rahim. You may approach with pure, wholesome devotion, while in their calculating minds lies only barren, shifting sand that can support nothing genuine.

रहिमन तहाँ न जाइए • कपट का त्यागपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

रहिमन पाँव कुपाथ में, धरत न कोऊ जानि।

कहु रहीम केहि भाँति अब, राखै लाज सयानि॥

Rahiman paanw kupaath mein, dharat na ko-u jaani. / Kahu rahim kehi bhaanti ab, raakhai laaj sayaani.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि कोई भी बुद्धिमान मनुष्य जान-बूझकर कुमार्ग (गलत रास्ते) पर अपना पाँव नहीं रखता। यदि असावधानी से गलत मार्ग पर कदम पड़ जाए, तो समझदार मनुष्य को तुरंत संभलकर अपनी मर्यादा और लज्जा की रक्षा कर लेनी चाहिए। भूल को पहचानकर तुरंत सही मार्ग पर लौट आना ही बुद्धिमत्ता का लक्षण है।

English: No discerning soul willingly places their foot upon an ignoble path, notes Rahim. If by momentary error one strays, true wisdom lies in turning back immediately to preserve honor and righteousness.

रहिमन पाँव कुपाथ में • सदाचारपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 9-10

रहिमन बहु गुनि संग मिलि, भइ रहीम मति हीन।

ज्यों जल संग कुसंग तें, भयो दूध मति हीन॥

Rahiman bahu guni sang mili, bhayi rahim mati heen. / Jyon jal sang kusang tain, bhayo doodh mati heen.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी संगति की सूक्ष्मता समझाते हुए कहते हैं कि कई बार अधिक चतुर और कुटिल लोगों की संगति में पड़कर अच्छी बुद्धि भी भ्रष्ट हो जाती है। जिस प्रकार यदि दूध में गंदा या बहुत अधिक पानी मिला दिया जाए, तो वह दूध अपने मूल गाढ़ेपन और स्वाद को खोकर बेकार हो जाता है; उसी प्रकार अयोग्य संगति श्रेष्ठ व्यक्ति के गुणों को भी नष्ट कर देती है।

English: Associating with calculating and corrupt minds can degrade even a sharp intellect, explains Rahim. Just as pure, wholesome milk loses its rich essence and nutritive worth when diluted with foul water, so does unprincipled company degrade human character.

रहिमन बहु गुनि संग मिलि • कुसंगति से हानिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🌱विनम्रता एवं निरहंकार🎓 Class 9-10

रहिमन छोटी बूँद तें, प्रगट भयो संसार।

अहंकार मन में कियो, सो नर मूरख ग्वार॥

Rahiman chhoti boond tain, pragat bhayo sansaar. / Ahankaar man mein kiyo, so nar moorakh gwaar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी मनुष्य के अस्तित्व की वास्तविकता का बोध कराते हुए कहते हैं कि जल की एक अत्यंत सूक्ष्म बूँद से इस संपूर्ण मानव देह और संसार की उत्पत्ति हुई है। जो मनुष्य इस नश्वर देह, रूप या धन पर घमंड करता है, वह वास्तव में परम मूर्ख और अज्ञानी है। अपनी उत्पत्ति की तुच्छता को स्मरण रखकर मनुष्य को अहंकार से मुक्त रहना चाहिए।

English: From a mere tiny droplet of fluid did this mortal body emerge, observes Rahim. The human who puffs up with overweening pride over this transient flesh is utterly foolish. True wisdom recognizes our humble origin and sheds arrogance.

रहिमन छोटी बूँद तें • अहंकार त्यागपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

रहिमन मन को मारिए, मत मन को ठहराय।

मन के मारे सुख लहै, मन के साधे जाय॥

Rahiman man ko maariye, mat man ko thahraay. / Man ke maare sukh lahai, man ke saadhe jaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि अपने चंचल मन की अनियंत्रित वासनाओं और कुइच्छाओं का दमन करना ही श्रेयस्कर है, मन को वासनाओं में स्वच्छंद भटकने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। जो साधक अपने मन की वासनाओं पर विजय पा लेता है, वही सच्चा आंतरिक सुख और शांति प्राप्त करता है; और जो मन को एकाग्र कर लेता है, उसके समस्त कार्य सिद्ध हो जाते हैं।

English: Master and subdue the wild cravings of the restless mind; grant it no free rein to wander into delusion. He who conquers the lower impulses of the mind attains serene happiness, and he who disciplines it achieves all goals.

रहिमन मन को मारिए • मन पर नियंत्रणपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

रहिमन लोहा एक है, बाजत घंटी-घंट।

ताहि का बख्तर बनै, ताहि का खड़ग प्रचंड॥

Rahiman loha ek hai, baajat ghanti-ghant. / Taahi ka bakhtar banai, taahi ka khadag prachand.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी लोहे के रूपक द्वारा समानता और उपयोगिता का रहस्य समझाते हैं। वे कहते हैं कि लोहा एक ही धातु है, जिससे मंदिर की मधुर ध्वनि उत्पन्न करने वाली घंटी भी बनती है, रक्षा करने वाला कवच (बख्तर) भी बनता है और विनाश करने वाली प्रचंड तलवार (खड़ग) भी बनती है। इसी प्रकार मानव एक ही मूल तत्व से बने हैं, उनके कर्म और संस्कार ही उनके स्वभाव को तय करते हैं।

English: Iron is fundamentally a single metal, yet from it is cast the melodious temple bell, the protective armor, and the lethal battle sword. All humans share the same divine source; individual choices forge their true character.

रहिमन लोहा एक है • कर्म भेदपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)⚖️सत्य एवं धर्म🎓 Class 9-10

रहिमन धर्म न छोड़िए, संकट परे हजार।

धर्म सहाई होत है, अंत समय संसार॥

Rahiman dharam na chhodie, sankat pare hazaar. / Dharam sahaayi hot hai, ant samay sansaar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी धर्म और सत्यनिष्ठा पर अडिग रहने का उपदेश देते हुए कहते हैं कि चाहे जीवन में हजारों संकट और विपत्तियां आ जाएं, फिर भी मनुष्य को अपने धर्म, नैतिकता और सत्य के मार्ग को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। जब जीवन के अंतिम समय में सारा संसार, धन-दौलत और सगे-संबंधी साथ छोड़ देते हैं, तब केवल मनुष्य का धर्म और सत्कर्म ही उसका सच्चा सहायक बनता है।

English: Never abandon the path of righteousness, even if a thousand perils beset you, urges Rahim. When mortal existence concludes and the entire world falls away, your moral virtue and righteous deeds alone stand as your steadfast protector.

रहिमन धर्म न छोड़िए • धर्म निष्ठापूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🗣️मधुर वाणी एवं सद्व्यवहार🎓 Class 9-10

रहिमन तब लगि मौन भल, जब लगि बोल न जान।

बोलत ही खुलि जात है, सब मूरख की बान॥

Rahiman tab lagi maun bhal, jab lagi bol na jaan. / Bolat hi khuli jaat hai, sab moorakh ki baan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी मौन के महत्त्व को प्रतिपादित करते हुए कहते हैं कि जब तक किसी विषय का यथार्थ ज्ञान न हो और उचित ढंग से बोलना न आता हो, तब तक मौन धारण किए रहना ही सबसे श्रेष्ठ है। क्योंकि एक मूर्ख व्यक्ति जब तक चुप रहता है तब तक उसकी मूर्खता छिपी रहती है, परंतु जैसे ही वह मुँह खोलता है, उसकी सारी अज्ञानता और मूर्खता संसार के सामने तुरंत प्रकट हो जाती है।

English: Silence is golden until one learns to speak with genuine wisdom, cautions Rahim. A fool remains undetected as long as he holds his tongue, but the instant he speaks, his ignorance is laid bare before everyone.

रहिमन तब लगि मौन भल • मौन का महत्वपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 11-12

रहिमन दुख सुख एक सम, जे नर धीर गंभीर।

सुख में भूलैं नाहिं कछु, दुख में धरैं न धीर॥

Rahiman dukh sukh ek sam, je nar dheer gambheer. / Sukh mein bhoolain naahin kachhu, dukh mein dharain na dheer.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी स्थितप्रज्ञ और गंभीर पुरुषों के लक्षण बताते हुए कहते हैं कि जो मनुष्य गंभीर, ज्ञानी और धैर्यवान होते हैं, वे सुख और दुख दोनों को एक समान समभाव से ग्रहण करते हैं। वे सुख आने पर अहंकार में अपना विवेक नहीं खोते और दुख आने पर कभी विचलित होकर अधीर नहीं होते। जीवन के द्वंद्वों में समत्व भाव ही सच्ची परिपक्वता है।

English: Those endowed with profound spiritual wisdom view joy and sorrow with identical equanimity. In times of prosperity they never lose their sober humility, and during adversity they never surrender their inner fortitude.

दुख सुख एक सम • समत्व भावपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 9-10

रहिमन करम की रेख पै, काहू को नहिं जोर।

जतन किए कछु ना बनै, जो कछु लिख्यो सो होर॥

Rahiman karam ki rekh pai, kaahu ko nahin jor. / Jatan kiye kachhu na banai, jo kachhu likhyo so hor.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी पूर्वसंचित कर्मों के विधान को स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि मनुष्य के कर्मों के फल पर किसी का कोई ज़ोर नहीं चलता। मनुष्य चाहे कितने भी बाहरी उपाय या यत्न कर ले, कर्मफल के अटल विधान को कोई टाल नहीं सकता। जो प्रारब्ध में लिखा है, वह घटित होकर ही रहता है। अतः फल की व्यर्थ आसक्ति छोड़कर निष्काम भाव से सत्कर्म करते रहना चाहिए।

English: Upon the indelible lines etched by destiny through past actions, no mortal holds absolute sway, says Rahim. Contrive what you will, the harvest of karmic law must inevitably be reaped. Focus therefore on performing righteous deeds in the present.

रहिमन करम की रेख • कर्म विधानपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 6-8

रहिमन ऐसी बुद्धि दे, मन नहिं होय मलीन।

पर उपकार करै सदा, रहै धर्म लवलीन॥

Rahiman aisi buddhi de, man nahin hoy maleen. / Par upkaar karai sada, rahai dharam lavleen.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी परमात्मा से प्रार्थना करते हुए कहते हैं कि हे प्रभु! मुझे ऐसी निर्मल और श्रेष्ठ बुद्धि प्रदान कीजिए जिससे मेरा मन कभी पाप, ईर्ष्या और वासना से मलिन न हो। मेरा जीवन सदा दूसरों के उपकार और सेवा में लगा रहे, और मेरा चित्त सदैव धर्म, सत्य और ईश्वरीय प्रेम में लीन रहे। परोपकार ही मनुष्य जीवन की सार्थकता है।

English: Grant me such pure and luminous intellect, O Lord, that my heart may never be defiled by vice or malice. May my life be spent perpetually in benevolent service to others, anchored firmly in truth and divine contemplation.

रहिमन ऐसी बुद्धि दे • सद्बुद्धि प्रार्थनापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास⚖️सत्य एवं धर्म🎓 Class 9-10

धरम न दूसर सत्य समाना। आगम निगम पुरान बखाना॥

बिप्र धेनु सुर संत हित, लीन्ह मनुज अवतार॥

Dharama na doosar satya samana. Aagam nigam puran bakhana. / Bipra dhenu sur sant hit, leenh manuj avatar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि सत्य के समान संसार में कोई दूसरा महान धर्म अथवा कर्तव्य नहीं है; चारों वेद, शास्त्र और पुराण भी इसी परम सत्य का गुणगान करते हैं। सत्य और धर्म की रक्षा हेतु ही प्रभु ने साधु-संतों, गौ और देवताओं के कल्याणार्थ मनुष्य रूप में अवतार धारण किया।

English: Goswami Tulsidas proclaims that there is no virtue or duty greater than truth in this universe, as celebrated by all Vedic scriptures and Puranas. It is solely to uphold truth and protect the righteous, the gentle, and the seekers that the Divine incarnates in human form.

धरम न दूसर सत्य समाना • सत्य की महिमापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 9-10

तुलसी काया खेत है, मनसा भयौ किसान।

पाप पुन्य दोउ बीज हैं, बुवै सो लुनै निदान॥

Tulsi kaaya khet hai, mansa bhayau kisaan. / Paap punya dou beej hain, buvai so lunai nidaan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी रूपक के माध्यम से समझाते हैं कि यह मानव शरीर एक उपजाऊ खेत के समान है और मनुष्य का चंचल मन उस खेत का किसान है। पाप और पुण्य कर्म ही दो प्रकार के बीज हैं; मनुष्य जैसा बीज अपने इस जीवन रूपी खेत में बोता है, अंततः उसे वैसा ही कर्मफल काटना पड़ता है।

English: Tulsidas draws a profound agricultural metaphor: this mortal body is a fertile field, and the conscious mind is the farmer. Sin and virtue are the two kinds of seeds sown; whatever actions one sows in this lifetime, exactly that harvest of destiny must one reap in the end.

काया खेत है • कर्म का फलपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🗣️मधुर वाणी एवं सद्व्यवहार🎓 Class 6-8

तुलसी मीठे बचन ते, सुख उपजत चहुं ओर।

बसीकरन इक मंत्र है, परिहरू बचन कठोर॥

Tulsi meethe bachan te, sukh upjat chahun or. / Baseekaran ik mantra hai, pariharu bachan kathor.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि मधुर और विनम्र वाणी बोलने से चारों ओर सुख, शांति और सौहार्द का वातावरण उत्पन्न होता है। मीठे बोल संसार को अपने वश में करने का सबसे अचूक व दिव्य वशीकरण मंत्र हैं, इसलिए मनुष्य को अपने भीतर से कठोर और कटु वचनों का सर्वथा त्याग कर देना चाहिए।

English: Tulsidas advises that sweet and gentle speech radiates happiness, peace, and goodwill in every direction. Pleasant words serve as the ultimate enchantment that wins over hearts; therefore, one should completely abandon harsh, abrasive, and hurtful language.

मीठे बचन • मधुर वाणीपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

दया धरम का मूल है, पाप मूल अभिमान।

तुलसी दया न छांड़िए, जब लग घट में प्रान॥

Daya dharam ka mool hai, paap mool abhimaan. / Tulsi daya na chhandiye, jab lag ghat mein praan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी स्पष्ट करते हैं कि दया और करुणा ही समस्त धर्मों की प्राथमिक जड़ हैं, जबकि अहंकार और घमंड ही सारे पापों और अनर्थों का मूल कारण है। जब तक शरीर में प्राण शेष हैं, मनुष्य को कभी भी अपने हृदय से प्राणिमात्र के प्रति दया भाव का त्याग नहीं करना चाहिए।

English: Compassion is the root of all righteousness and spiritual duty, whereas arrogant pride is the wellspring of all sin. Tulsidas urges us never to surrender or abandon mercy and empathy towards all living beings as long as breath resides within this physical vessel.

दया धरम का मूल है • करुणापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

तुलसी साथी विपत्ति के, विद्या विनय विवेक।

साहस सुकृति सुसत्यव्रत, राम भरोसो एक॥

Tulsi saathi vipatti ke, vidya vinay vivek. / Saahas sukriti susatyavrat, ram bharoso ek.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि घोर संकट और विपत्ति के समय मनुष्य के सच्चे साथी केवल छह गुण होते हैं—सच्ची विद्या (ज्ञान), विनम्रता, विवेक (उचित-अनुचित का बोध), आंतरिक साहस, सत्कर्म (सुकृति), सत्यनिष्ठा और सबसे बढ़कर एकमात्र परमपिता प्रभु राम पर अविचल भरोसा।

English: Tulsidas reflects that during times of deep adversity, a person has only six true companions: true learning, humility, moral discernment (viveka), fortitude, righteous deeds, adherence to truth, and an unwavering, total surrender to Divine Grace.

विपत्ति के साथी • धैर्य और विवेकपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

आवत ही हरषे नहीं, नैनन नहीं सनेह।

तुलसी तहाँ न जाइए, कंचन बरसे मेह॥

Aavat hi harshe nahin, nainan nahin saneh. / Tulsi tahan na jaiye, kanchan barse meh.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी स्वाभिमान और सामाजिक व्यवहार की सीख देते हुए कहते हैं कि जहाँ आपके पहुँचने पर गृहस्वामी का हृदय हर्षित न हो और उसके नेत्रों में स्नेह व आदर का भाव न झलके, उस स्थान पर कदापि नहीं जाना चाहिए, भले ही वहाँ सोने की ही वर्षा क्यों न हो रही हो।

English: Tulsidas teaches true self-respect: never visit a threshold where your arrival brings no genuine joy and where host’s eyes lack warmth and love, even if gold were showering abundantly like rain upon that wealthy home.

आवत ही हरषे नहीं • स्वाभिमानपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

तुलसी या संसार में, भाँति-भाँति के लोग।

सबसों हिलमिल चालिए, नदी नाव संजोग॥

Tulsi ya sansar mein, bhaanti-bhaanti ke log. / Sabson hilmil chaaliye, nadi naav sanjog.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि इस विशाल संसार में विभिन्न प्रकृति, विचार और स्वभाव के लोग रहते हैं। मनुष्य को सभी के साथ प्रेमपूर्वक और मिलनसारिता से सामंजस्य बिठाकर जीवन व्यतीत करना चाहिए, जैसे नदी और नाव का संयोग केवल यात्रा की अवधि तक का होता है।

English: In this vast transient world, one encounters diverse temperaments and dispositions. Tulsidas urges us to live cooperatively and harmoniously with everyone, realizing our mortal coexistence is as brief and passing as the momentary union between a boat and the flowing river.

भाँति-भाँति के लोग • सामंजस्यपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

तुलसी भरोसो एक को, एक बल एक आस।

एक राम घनश्याम हित, चातक तुलसीदास॥

Tulsi bharoso ek ko, ek bal ek aas. / Ek ram ghanshyam hit, chaatak tulsidas.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी अपनी अनन्य भक्ति की घोषणा करते हुए कहते हैं कि मुझे केवल एक ही प्रभु का भरोसा है, उन्हीं का परम बल है और उन्हीं से एकमात्र आशा है। जिस प्रकार पपीहा केवल स्वाति नक्षत्र के मेघ की प्रतीक्षा करता है, उसी प्रकार तुलसीदास भी केवल मेघस्वरूप प्रभु राम के अनन्य चातक हैं।

English: Tulsidas expresses absolute, undivided devotion: "My entire trust rests in One, my sole strength is in One, and my single hope resides in One alone." Just as the legendary Chataka bird pines exclusively for the monsoon raincloud, Tulsidas surrenders wholeheartedly to the cloud-dark beauty of Lord Rama.

एक भरोसो एक बल • अनन्य भक्तिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 11-12

काम क्रोध मद लोभ रत, गृहासक्त दुख रूप।

ते किम जानहिं रघुपतिहि, मूढ़ परे तम कूप॥

Kaam krodh mad lobh rat, grihasakt dukh roop. / Te kim jaanahin raghupatihi, moodh pare tam koop.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि जो मनुष्य निरंतर काम-वासना, क्रोध, अहंकार और लोभ में डूबे रहते हैं तथा सांसारिक आसक्ति के दुःखमय रूप में उलझे रहते हैं, वे अज्ञान के अंधे कुएँ में गिरे हुए मूर्ख उस सच्चिदानंद स्वरूप प्रभु रघुपति के अलौकिक तत्व को कभी नहीं जान सकते।

English: Those who remain endlessly entangled in sensual lust, wrath, arrogant vanity, greed, and blind domestic attachments dwell in the deep dark pit of ignorance. They can never perceive or comprehend the transcendent reality and supreme peace of the Divine.

काम क्रोध मद लोभ • आध्यात्मिक बोधपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

मुखिया मुख सो चाहिऐ, खान पान कहुँ एक।

पालइ पोषइ सकल अंग, तुलसी सहित बिबेक॥

Mukhiya mukh so chahiai, khaan paan kahun ek. / Palai poshai sakal ang, tulsi sahit bibek.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी श्रेष्ठ नेतृत्व का आदर्श प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि परिवार अथवा समाज का मुखिया मुख (मुँह) के समान होना चाहिए। मुँह भोजन और जल तो अकेला ही ग्रहण करता है, परंतु विवेकपूर्वक उस पोषण को शरीर के समस्त अंगों में समान रूप से वितरित कर उनका पोषण करता है।

English: Tulsidas outlines the timeless ideal of fair and conscientious leadership: a leader should function like the mouth. While the mouth alone consumes food and drink, it prudently distributes vitality, nourishing every limb and organ of the body with balanced wisdom.

मुखिया मुख सो चाहिये • नेतृत्व के गुणपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

सचिव बैद गुरु तीनि जौं, प्रिय बोलहिं भय आस।

राज धर्म तन तीनि कर, होइ बेगिहीं नास॥

Sachiv vaid gur teeni jaun, priya bolahin bhay aas. / Raaj dharam tan teeni kar, hoi begiheen naas.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी नीति का गूढ़ मर्म बताते हैं कि यदि मंत्री (सलाहकार), चिकित्सक (वैद्य) और गुरु—ये तीनों भयवश या किसी स्वार्थ-लाभ की आशा में आकर शासक या व्यक्ति से अप्रिय सत्य छिपाकर केवल मीठी और चाटुकारितापूर्ण बातें बोलने लगें, तो क्रमशः राज्य, स्वास्थ्य और धर्म का शीघ्र ही सर्वनाश हो जाता है।

English: If a minister, a physician, and a spiritual preceptor speak merely flattering words out of personal fear or greedy hope rather than stating the unvarnished truth, then the kingdom, physical health, and moral righteousness are swiftly and utterly destroyed.

सचिव बैद गुरु • सत्य सलाहपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास📖गुरु महिमा एवं ज्ञान🎓 Class 6-8

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।

बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

Shree guru charan saroj raj, nij manu mukuru sudhari. / Baranaun raghubar bimal jasu, jo daayaku phal chaari.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि अपने सद्गुरु के चरण-कमलों की पावन धूलि से अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ व निर्मल करके, मैं प्रभु श्री रामचंद्र जी के उस पवित्र व निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो जीवन के चारों परम पुरुषार्थों—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को प्रदान करने वाला है।

English: Purifying the mirror of my restless mind with the sacred dust of my spiritual Guru’s lotus feet, I sing the spotless glory of Lord Rama, the divine sovereign who bestows all four supreme fruits of human life: righteousness, prosperity, fulfillment, and liberation.

श्रीगुरु चरन सरोज रज • गुरु वंदनापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🌱विनम्रता एवं निरहंकार🎓 Class 6-8

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।

बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥

Buddhiheen tanu jaanike, sumiraun pawan-kumar. / Bal budhi bidya dehu mohin, harahu kales bikaar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी परम विनम्रता प्रकट करते हुए कहते हैं कि स्वयं को शारीरिक एवं बौद्धिक सामर्थ्य से हीन जानकर, मैं पवनपुत्र श्री हनुमान जी का स्मरण करता हूँ। हे प्रभु! मुझे शारीरिक बल, सद्बुद्धि और वास्तविक विद्या प्रदान करें तथा मेरे समस्त क्लेशों, दुःखों व अंतर्मन के विकारों को दूर कीजिए।

English: Conscious of my own inner shortcomings and intellectual limitations, I meditate upon the mighty son of the wind, Sri Hanuman. Bestow upon me physical vitality, discerning intellect, and true spiritual wisdom, and eradicate all inner afflictions, distress, and impurities.

बुद्धिहीन तनु जानिके • हनुमान प्रार्थनापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

तुलसी संत सुअंब तरु, फूलि फलहिं परहेत।

इतते ये पाहन हनहिं, उतते वे फल देत॥

Tulsi sant su-amb taru, phooli phalahin par-het. / It-te ye paahan hanahin, ut-te ve phal det.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी संतों के स्वभाव की तुलना आम के सुंदर वृक्ष से करते हुए कहते हैं कि संतजन आम के पेड़ की भाँति केवल परोपकार के लिए ही पुष्पित और फलित होते हैं। संसारी लोग भले ही अज्ञानतावश उन पर पत्थर मारें, परंतु बदले में वे सदैव मीठे फल और आशीष ही प्रदान करते हैं।

English: Tulsidas compares the nature of true saints to a noble mango tree that flowers and fruits purely for the welfare of others. Even when misguided people strike the branches with heavy stones, the magnanimous tree responds by showering sweet and nourishing fruit in return.

संत सुअंब तरु • संतों की महिमापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

तुलसी पावस के समै, धरी कोकिला मौन।

अब तो दादुर बोलिहहिं, हमैं पूछिहै कौन॥

Tulsi paavash ke samai, dhari kokila maun. / Ab to daadur bolihahin, hamain poochhihai kaun.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी प्रतीकात्मक रूप से कहते हैं कि वर्षा ऋतु (पावस) के आते ही कोयल ने मौन धारण कर लिया; क्योंकि वर्षा में तो चारों ओर केवल मेढक ही टर्राएंगे, ऐसी स्थिति में कोयल की सुरीली और ज्ञानपूर्ण आवाज को भला कौन सुनेगा और समझेगा! जब अज्ञानी मुखर हों, तो ज्ञानी को मौन रहना चाहिए।

English: Tulsidas observes that with the onset of the monsoon showers, the sweet cuckoo adopts total silence, realizing that loud frogs will dominate the atmosphere with their croaking. When foolish and boisterous voices drown out reason, wise individuals judiciously choose dignified silence.

पावस के समै • ज्ञानी का मौनपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

राम नाम मनिदीप धरु, जीहँ देहरीं द्वार।

तुलसी भीतर बाहिरहुँ, जौं चाहसि उजियार॥

Ram naam manideep dharu, jeehan dehreen dwaar. / Tulsi bheetar baahirahun, jaun chaahasi ujiyaar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि हे मनुष्य! यदि तू अपने अंतःकरण और बाह्य संसार दोनों में आध्यात्मिक प्रकाश और आनंद चाहता है, तो अपनी जिह्वा रूपी देहरी के द्वार पर 'राम' नाम रूपी मणि-दीपक को प्रज्वलित कर ले। जैसे देहरी पर रखा दीपक घर के अंदर और बाहर दोनों ओर प्रकाश फैलाता है, वैसे ही राम नाम भीतर-बाहर प्रकाश कर देता है।

English: Tulsidas counsels: if you yearn for the illuminating glow of truth and spiritual peace both within your inner heart and across your outer daily existence, place the jewel-lamp of Rama’s divine name upon the doorway threshold of your tongue.

राम नाम मनिदीप धरु • ईश्वर नाम जपपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

धीरज धर्म मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी॥

बृद्ध रोगबस जड़ धनहीना। अंध बधिर क्रोधी अति दीना॥

Dheeraj dharam mitra aru naari. Aapad kaal parikhiahin chaari. / Briddh rogbas jad dhanheena. Andh badhir krodhi ati deena.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि धीरज (धैर्य), धर्म, सच्चा मित्र और जीवनसंगिनी—इन चारों की वास्तविक परीक्षा विपत्ति, संकट और कठिन समय में ही होती है। सामान्य दिनों में सभी अनुकूल प्रतीत होते हैं, परंतु विपत्ति आने पर ही इनके चरित्र की दृढ़ता और समर्पण की प्रामाणिकता स्पष्ट होती है।

English: Tulsidas asserts that fortitude (patience), moral righteousness, a genuine loyal friend, and a life partner are truly tested only when calamity and severe adversity strike. Prosperity flatters relationships, but crises reveal true fidelity and moral depth.

धीरज धर्म मित्र अरु नारी • मित्र की परीक्षापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास⚖️सत्य एवं धर्म🎓 Class 9-10

परहित सरिस धरम नहिं भाई। पर पीड़ा सम नहिं अधमाई॥

निरनय सकल पुरान बेद कर। कहेउँ तात जानहिं कोबिद नर॥

Parhit saris dharama nahin bhai. Par peeda sam nahin adhamai. / Nirnay sakal puran bed kar. Kaheun taat jaanahin kobid nar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

श्री राम जी भरत जी से कहते हैं कि हे भाई! दूसरों की भलाई और परोपकार करने के समान कोई महान धर्म नहीं है, और दूसरों को कष्ट अथवा पीड़ा पहुँचाने के समान कोई नीच पाप नहीं है। समस्त वेदों और पुराणों का यही अंतिम व अकाट्य निष्कर्ष है, जिसे ज्ञानी पुरुष भली-भाँति जानते हैं।

English: Lord Rama explains to Bharata: "Dear brother, there is no higher virtue than helping and serving others, and there is no baser depravity than inflicting pain on fellow beings." This is the ultimate, definitive essence of all scriptures, understood by the truly wise.

परहित सरिस धरम नहिं भाई • परोपकारपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 9-10

जे न मित्र दुख होहिं दुखारी। तिन्हहि बिलोकत पातक भारी॥

निज दुख गिरि सम रज करि जाना। मित्रक दुख रज मेरु समाना॥

Je na mitra dukh hohin dukhari. Tinhahi bilokat paatak bhaari. / Nij dukh giri sam raj kari jaana. Mitrak dukh raj meru samana.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी सच्चे मित्र की परिभाषा देते हुए कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने मित्र के दुःख को देखकर स्वयं दुःखी नहीं होता, उसे देखने मात्र से भी बड़ा पाप लगता है। श्रेष्ठ मित्र वह है जो अपने पहाड़ जैसे बड़े दुःख को धूल के कण के समान छोटा समझे, और मित्र के धूल के कण जैसे छोटे कष्ट को सुमेरु पर्वत समान मानकर उसकी सहायता करे।

English: Tulsidas declares that one who remains indifferent to a friend’s sorrow incurs severe spiritual demerit. A noble friend trivializes his own mountain of suffering as a tiny speck of dust, while treating his friend’s minor distress as vast as Mount Sumeru, rushing whole-heartedly to support him.

जे न मित्र दुख • सच्चा मित्रपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 9-10

होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥

अस कहि लगे जपन हरिनामा। गई सती जहँ प्रभु सुखधामा॥

Hoihi soi jo ram rachi rakha. Ko kari tark badhaavai saakha. / As kahi lage japan harinama. Gai sati jahan prabhu sukhadhama.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी भगवान शिव के मुख से कहलवाते हैं कि संसार में अंततः वही घटित होता है, जो ईश्वर ने पूर्व से निश्चित कर रखा है। फिर व्यर्थ के कुतर्क और चिंताएँ करके अपनी मानसिक अशांति को क्यों बढ़ाया जाए? मनुष्य को निष्काम भाव से ईश्वर के विधान पर आस्था रखकर अपना कर्म करना चाहिए।

English: Lord Shiva reflects: "Ultimately, that alone unfolds in this universe which has been divinely ordained by Supreme Grace. Why then multiply worries and useless dialectics?" One should anchor oneself in calm surrender to cosmic law while continuing to fulfill life’s duties.

होइहि सोइ जो राम रचि राखा • ईश्वर की इच्छापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 9-10

करम प्रधान बिस्व करि राखा। जो जस करइ सो तस फलु चाखा॥

सकल पदारथ एहिं जग माहीं। करमहीन नर पावत नाहीं॥

Karam pradhan biswa kari raakha. Jo jas karai so tas phalu chaakha. / Sakal padaarath ehin jag maahin. Karamheen nar paawat naahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कर्म के सार्वभौमिक सिद्धांत को प्रतिपादित करते हुए कहते हैं कि ईश्वर ने इस संपूर्ण जगत को कर्म-प्रधान बनाया है; यहाँ जो जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल भोगना पड़ता है। इस संसार में सभी वैभव, संपदा और सिद्धियाँ सुलभ हैं, परंतु केवल कर्महीन और आलसी व्यक्ति ही उन्हें प्राप्त नहीं कर पाता।

English: Tulsidas expounds the immutable law of karma: the Divine has made action the governing law of the cosmos; as a person acts, so shall they reap the fruits. All prosperity and worldly attainments exist here, yet the indolent and lazy who shun diligent effort remain forever deprived.

करम प्रधान बिस्व • कर्म की महत्तापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 9-10

बिनु सतसंग बिबेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई॥

सठ सुधरहिं सतसंगति पाई। पारस परस कुधात सुहाई॥

Binu satsang bibek na hoi. Ram kripa binu sulabh na soi. / Sath sudharahin satsangati paai. Paras paras kudhaat suhaai.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी सत्संगति की अपार महिमा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि श्रेष्ठ संगति के बिना मनुष्य में कभी सद्विवेक उत्पन्न नहीं हो सकता, और सत्संग की प्राप्ति भी ईश्वर की विशेष कृपा के बिना सुलभ नहीं होती। दुष्ट और दुर्जन व्यक्ति भी सत्संग पाकर ऐसे सुधर जाते हैं, जैसे पारस के स्पर्श से निकृष्ट लोहा भी कंचन बन जाता है।

English: Tulsidas extols the transformational grace of noble company (satsang): without enlightened companionship, true discernment cannot awaken, nor can such company be attained without Divine Grace. Even the most hardened individuals are redeemed through holy company, just as base iron turns to pure gold upon touching the philosopher’s stone.

बिनु सतसंग बिबेक न होई • सत्संग महिमापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

जाकी रही भावना जैसी। प्रभु मूरति देखी तिन तैसी॥

देखहिं रूप महा रनधीरा। मनहुँ बीर रस धरे सरीरा॥

Jaaki rahi bhavana jaisi. Prabhu moorati dekhee tin taisee. / Dekhahin roop maha randheera. Manahun beer ras dhare sareera.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी जनकपुर के धनुष यज्ञ का प्रसंग बताते हुए कहते हैं कि जिस व्यक्ति की अंतर्मन में जैसी भावना और दृष्टिकोण होता है, उसे प्रभु का स्वरूप भी वैसा ही दिखाई पड़ता है। वीरों को वे साक्षात् वीर रस के स्वरूप लगे, भक्तों को परम दयालु और अन्यायी राजाओं को वे काल स्वरूप प्रतीत हुए। दृष्टिकोण ही वास्तविकता को आकार देता है।

English: Tulsidas depicts how human perception shapes our experience of truth: whatever internal intention and disposition one harbors, in that exact likeness does one perceive the Lord. Mighty warriors saw Rama as the personification of valor, seekers saw supreme divinity, and tyrants saw fearful doom.

जाकी रही भावना जैसी • दृष्टिकोणपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

भायँ कुभायँ अनख आलसहूँ। नाम जपत मंगल दिसि दसहूँ॥

सुमिरि सो नाम राम गुन गाथा। करउं नाइ रघुनाथहि माथा॥

Bhaayan kubhaayan anakh aalsahun. Naam japat mangal disi dasahun. / Sumiri so naam ram gun gaatha. Karaun naai raghunathahi maatha.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि चाहे प्रेम-श्रद्धा से (भायँ), विरोध-शत्रुता के भाव से (कुभायँ), क्रोध-खीझ से (अनख) अथवा आलस्य में ही क्यों न ईश्वर के पावन नाम का उच्चारण किया जाए, वह सदैव दसों दिशाओं में परम कल्याण और आनंद ही प्रदान करता है। नाम स्मरण कभी व्यर्थ नहीं जाता।

English: Tulsidas affirms the intrinsic power of Divine Remembrance: whether recited out of heartfelt reverence, casual indifference, defiance, or even sheer lethargy, the chanting of the Holy Name unfailingly brings auspicious blessings in all ten directions of existence.

भायँ कुभायँ अनख • नाम महिमापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

सुर नर मुनि सब कै यह रीती। स्वारथ लागि करहिं सब प्रीती॥

बालि बचन सुनि सहज सुहावा। राम कृपा करि हृदयँ लगावा॥

Sur nar muni sab kai yeh reeti. Swaarath laagi karahin sab preeti. / Baali bachan suni sahaj suhaawa. Ram kripa kari hridayan lagaawa.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी सांसारिक यथार्थ को उजागर करते हुए कहते हैं कि देवता, साधारण मनुष्य और मुनि—प्रायः सभी का यही सांसारिक स्वभाव देखा जाता है कि वे किसी न किसी स्वार्थ के कारण ही दूसरों से स्नेह व प्रेम का संबंध जोड़ते हैं। केवल परमेश्वर ही जीव से अहैतुकी और निस्वार्थ प्रेम करते हैं।

English: Tulsidas candidly reveals the transactional nature of the worldly realm: gods, mortals, and even many ascetics commonly cultivate attachments driven by underlying self-interest. Only the Supreme Lord loves unconditionally without any motive of personal gain.

सुर नर मुनि सब कै यह रीती • सांसारिक स्वार्थपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 11-12

समरथ कहुँ नहिं दोषु गोसाईं। रबि पावक सुरसरि की नाईं॥

अस संसय आनहिं मन माहीं। ज्ञान बिराग बिचार न जाहीं॥

Samrath kahun nahin doshu gosain. Rabi paawak surasari kee naain. / As sansay aanahin man maahin. Gyaan biraag bichaar na jaahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि जो पूर्ण समर्थ और सर्वव्यापी हैं, उन्हें कोई दोष स्पर्श नहीं करता; जैसे सूर्य, अग्नि और गंगा नदी सब कुछ भस्म अथवा शुद्ध कर देते हैं किंतु स्वयं कभी दूषित नहीं होते। सूर्य अपवित्र जल को भी सोखकर निर्मल वर्षा बनाता है, इसी प्रकार ईश्वर के न्याय पर संदेह नहीं करना चाहिए।

English: The truly transcendent and omnipotent Divine cannot be tainted by mundane flaws, much like the sun, fire, and the sacred river Ganges. The radiant sun absorbs moisture from all places yet purifies it into nourishing rain; divine authority operates beyond superficial mortal judgments.

समरथ कहुँ नहिं दोषु • ईश्वरीय सामर्थ्यपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

बिधि प्रपंचु गुन अवगुन साना। संसय बिबिध प्रकार बखाना॥

संत हंस गुन गहहिं पय, परिहरि बारि बिकारा॥

Bidhi prapanchu gun avagun saana. Sansay bibidh prakaar bakhaana. / Sant hans gun gahahin pay, parihari baari bikaara.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि विधाता ने इस संपूर्ण सृष्टि को गुण और अवगुण—दोनों को मिलाकर रचा है। किंतु जिस प्रकार राजहंस मिले हुए दूध और जल में से केवल शुद्ध दूध को ग्रहण कर लेता है और जल को छोड़ देता है, उसी प्रकार सच्चे संत पुरुष संसार के अवगुणों को त्यागकर केवल सद्गुणों को ही अपनाते हैं।

English: The Creator has woven this complex world with a mixture of virtues and flaws. Yet, just as the mythic swan drinks only the nourishing milk and separates out the water, enlightened sages extract only noble virtues from the world, effortlessly disregarding impurities.

संत हंस गुन गहहिं • विवेक और गुणग्राही दृष्टिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास⚖️सत्य एवं धर्म🎓 Class 9-10

निरमल मन जन सो मोहि पावा। मोहि कपट छल छिद्र न भावा॥

भेद भाउ नहिं जेहि घट होई। मोर परम प्रिय सेवक सोई॥

Nirmal man jan so mohi paawa. Mohi kapat chhal chhidra na bhaawa. / Bhed bhaau nahin jehi ghat hoi. Mor param priya sewak soi.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

श्री राम जी विभीषण से कहते हैं कि जिसका मन निर्मल, शुद्ध और निष्कपट होता है, वही जीव मुझे प्राप्त कर सकता है; मुझे कपट, छल-प्रपंच और दुर्भाव तनिक भी प्रिय नहीं हैं। जिसके अंतःकरण में ऊँच-नीच और छल का कोई भेदभाव नहीं होता, वही मेरा सबसे प्रिय अनन्य भक्त होता है।

English: Lord Rama declares to Vibhishana: "He whose heart is spotless, pure, and devoid of pretense attains Me; deceit, hypocrisy, and malice never find favor with Me." The seeker whose inner consciousness is free from duplicity and divisiveness is My dearest devotee.

निरमल मन जन सो मोहि पावा • निष्कपट भक्तिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 6-8

का बरखा जब कृषी सुखानें। समय चूकि पुनि का पछितानें॥

अस जियँ जानि जानकी जानी। करि प्रनाम प्रभु चरन बिकानी॥

Ka barakha jab krishi sukhaane. Samay chooki puni ka pachhitaane. / As jiyan jaani jaanaki jaani. Kari pranaam prabhu charan bikaani.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी समय की महत्ता का लोकप्रसिद्ध सिद्धांत प्रस्तुत करते हैं कि जब सारी खेती सूख गई, तब वर्षा होने से क्या लाभ? और जब उचित अवसर हाथ से निकल गया, तब व्यर्थ पछताने से क्या लाभ? कार्य को सही समय पर तत्परता से पूरा करना ही बुद्धिमानी है।

English: Of what use is the torrential rain once the entire harvest has withered away? Similarly, what purpose does remorse serve once the opportune moment has slipped by? Tulsidas emphasizes that timely action alone yields success; procrastination leads only to regret.

का बरखा जब कृषी सुखानें • समय का महत्वपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संदेहू॥

प्रभु पद प्रीति न कछु उपाधी। सो सुख कहि न सकइ मुनि आधी॥

Jehi ken jehi par satya sanehoo. So tehi milai na kachhu sandehoo. / Prabhu pad preeti na kachhu upaadhi. So sukh kahi na sakai muni aadhi.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि जिसका जिसके प्रति सच्चा, निस्वार्थ और निष्कपट प्रेम होता है, वह उसे अवश्य ही प्राप्त होता है; इसमें लेशमात्र भी संदेह नहीं है। विशुद्ध ईश्वरीय प्रेम और सत्यनिष्ठा की साधना कभी निष्फल नहीं जाती।

English: Tulsidas assures that wherever there is genuine, pure, and sincere love, union with the beloved object or ideal is inevitably attained beyond any shadow of doubt. Pure devotion and authentic affection possess irresistible spiritual power.

जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू • सच्चा प्रेमपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

तुलसी देखि सुबेषु भूलहिं, मूढ़ न चतुर नर।

सुंदर केकिहि पेखु, बचन सुधा सम असन अहि॥

Tulsi dekhi subeshu bhoolahin, moodh na chatur nar. / Sundar kekihi pekhu, bachan sudha sam asan ahi.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि केवल सुंदर बाह्य वेशभूषा और आडंबर को देखकर मूर्ख ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े चतुर लोग भी धोखा खा जाते हैं। उदाहरण के लिए मोर को देखो—उसका रूप अत्यंत मनोहारी और वाणी अमृत समान मीठी लगती है, परंतु उसका भोजन विषैला सर्प होता है। बाह्य दिखावे से सावधान रहना चाहिए।

English: Tulsidas warns that deceptive external appearances bewilder not just the naive, but even clever people. Look at the majestic peacock: its plumage is dazzling and its cry sounds sweet, yet its food is venomous serpents. Do not judge inner character merely by outer glamour.

देखि सुबेषु भूलहिं • दिखावे का भ्रमपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

तुलसी अपने राम को, रीझि भजो कै खीझि।

उलटो सीधा ऊपजै, खेत पड़े ते बीजि॥

Tulsi apne ram ko, reejhi bhajo kai kheejhi. / Ulto seedha oopjai, khet pade te beeji.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी सहज भक्ति का मार्ग दिखाते हुए कहते हैं कि अपने प्रभु श्री राम का स्मरण चाहे प्रसन्न होकर (रीझकर) करो अथवा क्रोध व झुंझलाहट में (खीझकर) करो, वह कल्याणकारी ही होता है। जिस प्रकार खेत में बीज सीधा गिरे या उलटा, वह अंकुरित होकर फसल अवश्य देता है, वैसे ही राम नाम कभी निष्फल नहीं होता।

English: Tulsidas beautifully illustrates effortless devotion: remember Lord Rama whether in delight or distress, joy or resentment. Just as a seed dropped in fertile soil sprouts into life regardless of whether it fell upright or upside down, remembrance of the Divine always bears auspicious fruit.

रीझि भजो कै खीझि • नाम की शक्तिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 11-12

तुलसी ममता राम सों, समता सब संसार।

राग न दोष न दुख हरन, दुरलभ यह व्यवहार॥

Tulsi mamata ram son, samata sab sansar. / Raag na dosh na dukh haran, durlabh yeh vyavahaar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी जीवन का सर्वोच्च आध्यात्मिक सूत्र बताते हैं कि मनुष्य का सारा ममत्व और अनन्य अनुराग केवल प्रभु श्री राम के प्रति होना चाहिए, और संसार के समस्त प्राणियों के प्रति समभाव (समानता की दृष्टि) होना चाहिए। जहाँ न किसी से आसक्ति (राग) हो और न द्वेष, ऐसा श्रेष्ठ आचरण संसार में अत्यंत दुर्लभ है।

English: Tulsidas encapsulates the highest spiritual wisdom: direct all exclusive attachment and affection toward the Divine, while maintaining equitable benevolence toward every being in the world. Living without personal cravings and without hostility is a rare and noble spiritual attainment.

ममता राम सों समता • समभावपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास⚖️सत्य एवं धर्म🎓 Class 9-10

तुलसी भलो सुवेष है, पै कहुँ कपट न होय।

काँचो कंचन सम लगे, कसौटी परखै कोय॥

Tulsi bhalo subesh hai, pai kahun kapat na hoy. / Kaancho kanchan sam lage, kasauti parkhai koy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि साधु अथवा भद्र पुरुष का वेश धारण करना अच्छी बात है, किंतु उसके भीतर छल-कपट नहीं होना चाहिए। नकली पीतल भी दूर से सोने जैसा चमकता है, परंतु कसौटी के पत्थर पर रगड़े जाने पर ही उसकी असलियत सामने आती है। चरित्र की शुद्धि ही वास्तविक कसौटी है।

English: Wearing an honorable or pious guise is commendable, provided there is no deceit lurking beneath it. Unrefined brass may sparkle like pure gold, yet a touchstone instantly exposes its true nature. Genuine moral purity cannot be faked.

भलो सुवेष है • कपट का त्यागपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

तुलसी सरिता नीर ज्यों, दीन्हें घटै न नीर।

दान दिए धन ना घटै, कहि गए संत प्रबीन॥

Tulsi sarita neer jyon, deenhein ghatai na neer. / Daan diye dhan na ghatai, kahi gaye sant praveen.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी दान और उदारता का महत्त्व समझाते हुए कहते हैं कि जिस प्रकार नदी से जल भर लेने पर नदी का अथाह जल कभी घटता नहीं, उसी प्रकार सत्पात्र को निस्वार्थ भाव से दान देने से व्यक्ति का धन कभी कम नहीं होता; यह बात सभी श्रेष्ठ एवं अनुभवी संतों ने प्रमाणित की है।

English: Tulsidas illuminates the virtue of generosity: just as taking water from a flowing river never diminishes the river’s reservoir, offering charitable gifts to the needy never depletes one’s wealth. Wise and experienced sages have proclaimed this timeless truth across eras.

दान दिए धन ना घटै • परोपकार और दानपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 9-10

तुलसी जस भव तस क्रिया, सो फल भोगै प्रानि।

ताते सुकृत सँभारिए, मन क्रम बचन प्रमानि॥

Tulsi jas bhav tas kriya, so phal bhogai praani. / Taate sukrit sambhaariye, man kram bachan pramaani.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि मनुष्य जैसी भावना रखता है, वैसा ही कर्म करता है और अंततः वैसा ही सुख-दुःख रूपी फल भोगता है। इसलिए बुद्धिमान मनुष्य को चाहिए कि वह मन, वचन और कर्म—तीनों से सदैव सत्कर्मों और धर्म के मार्ग का ही संचय करे।

English: Tulsidas teaches that a person’s inner intent shapes their actions, and corresponding actions inevitably dictate the joys and sorrows they must experience. Therefore, one should steadfastly cultivate righteous conduct through thought, speech, and deed.

जस भव तस क्रिया • कर्म का महत्वपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

तुलसी धन जोरिहिं कवन, जरइ सो जरनी माहिं।

जो न परारथ खरचहीं, तिनके घर फल नाहिं॥

Tulsi dhan jorihin kavan, jarai so jarani maahin. / Jo na paraarath kharchahin, tinke ghar phal naahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि केवल धन का संचय करने से क्या लाभ जो अंततः ईर्ष्या, भय और चिंताओं की अग्नि में जल जाए? जो लोग अपने उपार्जित धन को परोपकार, दीन-दुखियों की सेवा और सत्कार्यों में व्यय नहीं करते, उनका संचित धन उनके लिए कभी सुखदायी फल नहीं देता।

English: What is the worth of hoarding wealth only to be consumed by the anxieties and fires of possessiveness? Tulsidas emphasizes that those who never spend their means for the upliftment of others and philanthropic causes never taste the true fruit of their wealth.

धन जोरिहिं कवन • परोपकारपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

तुलसी जग में दोइ भले, एक संत एक ईश।

संत तरे भव पार करि, ईश नवावैं सीस॥

Tulsi jag mein doi bhale, ek sant ek eesh. / Sant tare bhav paar kari, eesh nawaawain sees.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि इस संसार में वास्तव में दो ही परम कल्याणकारी सत्ताएँ हैं—एक परोपकारी संत और दूसरे सर्वेश्वर प्रभु। संत स्वयं भवसागर पार करते हुए अन्य जीवों का भी उद्धार कर देते हैं, और साक्षात् ईश्वर भी संतों की पावन निष्ठा के समक्ष आदर से शीश नवाते हैं।

English: In this entire universe, there are essentially two supreme well-wishers: the self-realized saint and the Supreme Divine. The saint frees suffering souls from the cycle of worldly turmoil, and even the Lord Himself reveres the genuine surrender of His saints.

दोइ भले एक संत एक ईश • संत महिमापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

रिपु रुज पावक पाप प्रभु, अहि गनिअ न छोट करि।

असमंजस होइ अंत महुँ, कहहिं नीति सब धरि॥

Ripu ruj paawak paap prabhu, ahi gania na chhot kari. / Asamanjas hoi ant mahun, kahahin neeti sab dhari.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी व्यावहारिक नीति का उपदेश देते हुए कहते हैं कि शत्रु (रिपु), रोग (रुज), अग्नि (पावक), पाप, समर्थ स्वामी (प्रभु) और विषैला सर्प (अहि)—इन छह को कभी भी छोटा या नगण्य समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। समय रहते इन पर नियंत्रण न पाने पर अंत में भारी संकट उत्पन्न होता है।

English: Practical statesmanship and life wisdom dictate that six things must never be underestimated or dismissed as insignificant: an enemy, a disease, a spark of fire, a sinful transgression, an authoritative master, and a venomous snake. Neglecting them early invites fatal disaster later.

रिपु रुज पावक पाप • सावधानी और नीतिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

तुलसी ऐसी प्रीति कर, जैसी मीन कहुँ नीर।

छिन बिछुरे जल ते मरे, प्रान तजे नहिं धीर॥

Tulsi aisi preeti kar, jaisi meen kahun neer. / Chhin bichhure jal te mare, praan taje nahin dheer.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि ईश्वर के चरणों से ऐसा अनन्य और गहरा प्रेम करो, जैसा मछली का जल से होता है। जल से एक क्षण के लिए भी अलग होने पर वह तड़पकर अपने प्राण त्याग देती है, किंतु जल से विमुख नहीं होती। भक्ति में ऐसा ही समर्पण होना चाहिए।

English: Tulsidas advises that one’s love for the Divine should mirror the total absorption of a fish for water. The instant it is parted from water, it sacrifices its very life without hesitation; pure devotion demands such steadfast and unconditional love.

ऐसी प्रीति कर • अनन्य प्रेमपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास⚖️सत्य एवं धर्म🎓 Class 9-10

पर धन पत्थर जानिए, पर तिय मात समान।

एते पर हरि ना मिलें, तो तुलसीदास ज़मान॥

Par dhan patthar jaaniye, par tiya maat samaan. / Ete par hari na milen, to tulsidas zamaan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी सदाचार और पवित्रता की पराकाष्ठा बताते हुए कहते हैं कि जो मनुष्य पराये धन को मिट्टी-पत्थर के समान व्यर्थ समझता है और पराई स्त्री को अपनी माता के समान सम्माननीय मानता है; यदि इतना निष्पाप आचरण रखने पर भी उसे ईश्वर का साक्षात्कार न हो, तो तुलसीदास उसकी गारंटी लेते हैं।

English: Tulsidas vows with absolute moral conviction: he who regards another’s wealth as inert stone and looks upon another’s wife with the reverence due to one’s own mother—if even such a righteous soul fails to attain God, Tulsidas himself stands as guarantor.

पर धन पत्थर जानिए • सदाचारपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 6-8

तुलसी संगति साधु की, करै न कबहुँ अकाज।

पारस परस कुधात सब, कंचन होइ समाज॥

Tulsi sangati saadhu ki, karai na kabahun akaaj. / Paras paras kudhaat sab, kanchan hoi samaaj.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि संतों और सज्जनों की संगति कभी किसी का अहित या विनाश नहीं करती। जिस प्रकार पारस पत्थर के संपर्क में आने पर निकृष्ट और अपवित्र धातु भी शुद्ध स्वर्ण में रूपांतरित हो जाती है, उसी प्रकार सत्संगति व्यक्ति के संपूर्ण स्वभाव को दिव्य बना देती है।

English: Tulsidas declares that the association of holy and virtuous persons never causes harm or degradation. Just as the touch of the touchstone transforms coarse base metals into radiant gold, noble fellowship transmutes an ordinary mind into spiritual excellence.

संगति साधु की • सत्संग का प्रभावपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

तुलसी स्वारथ मीत सब, बिनु स्वारथ कोउ नाहिं।

एक राम निष्काम हित, बाक़ी माया माँहि॥

Tulsi swarath meet sab, binu swarath kou naahin. / Ek ram nishkaam hit, baaqi maaya maanhi.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि संसार के अधिकांश मित्र और सम्बन्धी स्वार्थ के कारण ही जुड़े हैं; बिना अपने प्रयोजन के कोई साथ नहीं खड़ा होता। केवल एक प्रभु श्री राम ही ऐसे हैं जो बिना किसी कामना या स्वार्थ के प्राणी का कल्याण करते हैं, शेष सारा संसार तो माया का प्रपंच है।

English: Tulsidas observes that worldly friendships are largely predicated upon selfish utility; rare is one who stands beside another without self-interest. Only Lord Rama bestows motiveless, unconditional grace and protection, while the rest of the world remains caught in illusory attachments.

स्वारथ मीत सब • निस्वार्थ प्रेमपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🗣️मधुर वाणी एवं सद्व्यवहार🎓 Class 6-8

तुलसी बचन सम्भारि के, बोलै सुजन विचार।

तीर कमानहुँ छूटिकै, नहिं आवै परवार॥

Tulsi bachan sambhaari ke, bolai sujan bichaar. / Teer kamaanahun chhootikai, nahin aavai parwaar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी वाणी के संयम का उपदेश देते हुए कहते हैं कि सज्जन पुरुष सदैव विचारपूर्वक और तोल-मोलकर ही शब्द बोलते हैं। क्योंकि जिस प्रकार धनुष की कमान से छूटा हुआ तीर कभी लौटकर वापस नहीं आता, उसी प्रकार मुख से निकले हुए कठोर वचन कभी वापस नहीं लिए जा सकते।

English: Tulsidas advises that a noble person always weighs their words with careful reflection before speaking. Just as an arrow shot from a drawn bow can never be recalled, hurtful words spoken in haste can never be retrieved and leave indelible wounds.

बचन सम्भारि के • वाणी का संयमपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास⚖️सत्य एवं धर्म🎓 Class 9-10

तुलसी भलो न होत है, कपट सनेह संजोग।

पाथर पर दुरबा जमै, तौ सुख पावै लोग॥

Tulsi bhalo na hot hai, kapat saneh sanjog. / Paathar par durba jamai, tau sukh paawai log.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि कपट और दिखावटी स्नेह का सम्बन्ध कभी भी किसी के लिए हितकारी और सुखद नहीं हो सकता। जैसे कठोर पत्थर पर कभी दूर्वा (हरी घास) नहीं उग सकती, वैसे ही कपटी प्रेम से किसी भी व्यक्ति को कभी वास्तविक सुख और शांति प्राप्त नहीं हो सकती।

English: Tulsidas remarks that a relationship based upon deceit and feigned affection can never yield lasting good or happiness. Just as soft green grass cannot take root upon barren granite, true peace and mutual joy can never blossom from insincere affection.

कपट सनेह संजोग • निष्कपटतापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

तुलसी भलो सुजान सों, बयरु प्रीति संताप।

मूरख सों हित अनहितहुँ, दोनों में बहु पाप॥

Tulsi bhalo sujaan son, bayaru preeti santaap. / Moorakh son hit anhit-hun, donon mein bahu paap.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी संगति और व्यवहार की समझ देते हुए कहते हैं कि ज्ञानी और समझदार व्यक्ति से भले ही मित्रता हो अथवा शत्रुता का संताप, वह मूर्ख से बेहतर है। क्योंकि अज्ञानी व मूर्ख व्यक्ति से न तो मित्रता हितकारी होती है और न ही शत्रुता; दोनों ही परिस्थितियों में केवल कष्ट और अनिष्ट ही प्राप्त होता है।

English: Tulsidas observes that dealing with a wise and cultured person—whether through friendship or even rivalry—is far preferable. With a foolish, obstinate person, both friendship and enmity bring endless grief and disaster.

भलो सुजान सों • मूर्ख की संगति से बचावपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 6-8

तुलसी अवसर चूकि कै, पछितावै मन माँहि।

समय गँवाए फेरि कहुँ, आवत पाछै नाहिं॥

Tulsi avsar chooki kai, pachhitaawai man maahin. / Samay ganwaaye pheri kahun, aavat paachhai naahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि जो मनुष्य उचित अवसर प्राप्त होने पर प्रमादवश चूक जाता है, वह बाद में अपने मन में केवल पश्चाताप करता रह जाता है। बीता हुआ समय संसार में किसी भी मूल्य पर कभी वापस लौटकर नहीं आता, इसलिए वर्तमान क्षण में ही सत्कर्म कर लेना चाहिए।

English: Tulsidas warns that one who misses the golden opportunity through carelessness is left only with silent regret. Once squandered, elapsed time never returns at any cost; hence, one must embrace the present moment for virtuous and diligent work.

अवसर चूकि कै • समय की कीमतपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

तुलसी राम सनेह बिनु, सब साधन निसफल।

जैसे अंक बिना सबै, बिंदी शून्य अमोल॥

Tulsi ram sneh binu, sab saadhan nisphal. / Jaise ank bina sabai, bindi shoonya amol.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी भक्ति के मूल तत्व को गणितीय दृष्टांत से समझाते हैं कि प्रभु के प्रति सच्चे प्रेम और समर्पण के बिना मनुष्य के सारे साधन, जप-तप और विद्या निष्फल हैं। जैसे संख्या के अंक के बिना केवल शून्यों (बिंदियों) का कोई मूल्य नहीं होता, परंतु अंक के जुड़ते ही उनका मूल्य दस गुना बढ़ जाता है, वैसे ही राम प्रेम से ही जीवन सार्थक होता है।

English: Tulsidas offers a striking mathematical analogy: without sincere love for the Divine, all spiritual rituals, austerities, and erudition are completely hollow. Just as zeros have no value unless preceded by an integer, human endeavors gain true significance only when grounded in divine devotion.

राम सनेह बिनु • भक्ति का मर्मपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🌱विनम्रता एवं निरहंकार🎓 Class 9-10

तुलसी अपने दोष तजि, परनिंदा तजि देह।

हरि सुमिरन में लीन रह, यह जीवन को गेह॥

Tulsi apne dosh taji, parninda taji deh. / Hari sumiran mein leen rah, yeh jeevan ko geh.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि मनुष्य को अपने अवगुणों को पहचानकर उन्हें त्यागना चाहिए और दूसरों की निंदा व छिद्रान्वेषण करने की बुरी आदत छोड़ देनी चाहिए। निरंतर प्रभु के पावन स्मरण में लीन रहना ही इस मानव जीवन का सच्चा घर और परम उद्देश्य है।

English: Tulsidas advises that one should abandon one’s own flaws and completely cease criticizing and slandering others. Remaining absorbed in contemplative remembrance of the Divine is the true dwelling and supreme purpose of this human existence.

परनिंदा तजि देह • आत्मसुधारपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

तुलसी करि परतीति जो, राम नाम अनुराग।

सो नर पावै मुक्ति पद, ज्यों तरुवर पावै भाग॥

Tulsi kari parteeti jo, ram naam anuraag. / So nar paawai mukti pad, jyon taruwar paawai bhaag.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि जो व्यक्ति पूर्ण विश्वास और निष्ठा के साथ प्रभु के नाम में सच्चा अनुराग रखता है, वह अवश्य ही मोक्ष और परम शांति को प्राप्त करता है, ठीक वैसे ही जैसे एक श्रेष्ठ वृक्ष ऋतु आने पर स्वाभाविक रूप से फल और छाया से समृद्ध हो जाता है।

English: He who holds deep conviction and heartfelt love for the sacred name of Rama effortlessly attains liberation and inner peace, just as a magnificent tree naturally flourishes with abundant fruit and cooling shade in its due season.

राम नाम अनुराग • मुक्ति पदपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

तुलसी जग में आइके, सबसों मिलिए धाय।

ना जानै केहि रूप में, नारायण मिलि जाय॥

Tulsi jag mein aai-ke, sabson miliye dhaay. / Na jaanai kehi roop mein, narayan mili jaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी सभी प्राणियों में ईश्वर का दर्शन करने की प्रेरणा देते हुए कहते हैं कि इस संसार में आकर प्रत्येक व्यक्ति से आत्मीयता, आदर और प्रेम से मिलना चाहिए। क्योंकि कोई नहीं जानता कि किस प्राणी, दीन अथवा अतिथि के रूप में साक्षात् प्रभु नारायण का साक्षात्कार हो जाए।

English: Tulsidas urges us to treat every human soul with warmth, honor, and love upon this earth. For one never knows in which humble form, stranger, or seeker the Supreme Lord Narayana might manifest to grace your threshold.

सबसों मिलिए धाय • प्राणिमात्र में ईश्वरपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 9-10

तुलसी दिवस गँवाइयो, सोइ कै बीती रात।

हीरा जनम अमोल था, कौड़ी बदले जात॥

Tulsi diwas ganwaaiyo, soi kai beeti raat. / Heera janam amol tha, kaudi badle jaat.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी चेतावनी देते हैं कि मनुष्य ने अपने दिन व्यर्थ के सांसारिक प्रपंचों में गँवा दिए और रातें अज्ञान की नींद में सोकर बिता दीं। यह दुर्लभ मानव जन्म हीरे के समान अमूल्य था, जिसे अज्ञानतावश मनुष्य ने कौड़ियों के भाव व्यर्थ नष्ट कर दिया।

English: Tulsidas laments the squandering of life: mortals waste the daytime in trivial worldly pursuits and pass the night in unconscious sleep. This precious human birth, invaluable like a priceless diamond, is foolishly bartered away for worthless cowrie shells.

हीरा जनम अमोल था • जीवन की नश्वरतापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 9-10

तुलसी नर का क्या बड़ा, समय बड़ा बलवान।

भीलन लूटीं गोपियाँ, वही अर्जुन वही बान॥

Tulsi nar ka kya bada, samay bada balwaan. / Bheelan looteen gopiyan, wahi arjun wahi baan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी काल और समय की सर्वोपरिता का वर्णन करते हुए कहते हैं कि मनुष्य स्वयं कभी महान अथवा अजेय नहीं होता, केवल समय ही सबसे अधिक बलवान होता है। वही महाधनुर्धर अर्जुन और वही गांडीव धनुष-बाण थे, परंतु समय प्रतिकूल होने पर सामान्य भीलों ने उनके सामने गोपियों को लूट लिया था।

English: Tulsidas reflects that no human being possesses intrinsic supremacy; time and destiny alone are all-powerful. It was the same invincible hero Arjuna wielding the same divine Gandiva bow, yet when time turned adverse, ordinary forest dwellers overpowered him and looted the herd.

समय बड़ा बलवान • काल की गतिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 9-10

तुलसी पूर्व जनम के, कर्म न मेटे कोय।

सुख दुख भोगै जीव सब, जैसा बीज तस होय॥

Tulsi poorav janam ke, karma na mete koy. / Sukh dukh bhogai jeev sab, jaisa beej tas hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि पूर्व जन्म में किए गए कर्मों के संचित फल को कोई भी शक्ति मिटा नहीं सकती। प्रत्येक जीव को अपने संचित कर्मों के अनुसार ही सुख अथवा दुःख भोगना पड़ता है; जैसा बीज बोया गया है, फल भी अंततः वैसा ही प्राप्त होता है।

English: Tulsidas states that the fruits of actions performed in past lives cannot be erased by anyone. Every living soul must undergo the inevitable cycles of joy and sorrow according to the seeds they have sown; the harvest of destiny matches the nature of the seed.

पूर्व जनम के कर्म • कर्म सिद्धांतपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

राम नाम कलि कामतरु, राम भगति सुरधेनु।

सकल सुमंगल मूल जग, चितवति चितवनि वेनु॥

Ram naam kali kaamtaru, ram bhagati surdhenu. / Sakal sumangal mool jag, chitwati chitwani venu.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि इस कलियुग में प्रभु राम का पावन नाम समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले कल्पवृक्ष (कामतरु) के समान है और राम-भक्ति समस्त सुखों को प्रदान करने वाली कामधेनु गाय के समान है। यह संसार के समस्त मंगलों और कल्याणों का मूल स्रोत है।

English: In this present age of discord (Kali Yuga), the sacred name of Rama is the wish-fulfilling tree (Kalpavriksha) and loving devotion to Rama is the wish-yielding divine cow (Kamadhenu), serving as the supreme foundation of all auspiciousness in the universe.

राम नाम कलि कामतरु • कलियुग में नामपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास📖गुरु महिमा एवं ज्ञान🎓 Class 9-10

मूरख हृदयँ न चेत, जौं गुर मिलहिं बिरंचि सम।

फूलइ फलइ न बेंत, जदपि सुधा बरषहिं जलद॥

Moorakh hridayan na chet, jaun gur milahin biranchi sam. / Phoolai phalai na bent, jadapi sudha barashahin jalad.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि मूर्ख और हठी व्यक्ति के हृदय में कभी ज्ञान का प्रकाश नहीं हो सकता, भले ही उसे साक्षात् ब्रह्मा के समान महान सद्गुरु ही क्यों न प्राप्त हो जाएँ। जिस प्रकार अमृत तुल्य वर्षा होने पर भी बाँस (बेंत) पर कभी फूल और फल नहीं आते, वैसे ही दुर्जन ज्ञान ग्रहण नहीं कर पाता।

English: Tulsidas observes that wisdom never dawns in the obstinate heart of a fool, even if he were instructed by an enlightened preceptor as great as Lord Brahma. Just as a cane reed never yields fragrant blossoms or sweet fruits even if monsoon clouds shower celestial nectar, the unreceptive mind remains barren.

मूरख हृदयँ न चेत • ज्ञान और पात्रतापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

अति सनेह जहँ होत है, तहाँ कलह को मूल।

तुलसी ज्यों अति नेह ते, कमल सूखि जल कूल॥

Ati sneh jahan hot hai, tahan kalah ko mool. / Tulsi jyon ati neh te, kamal sookhi jal kool.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी मनोवैज्ञानिक सत्य उजागर करते हुए कहते हैं कि जहाँ अत्यधिक मोह, आसक्ति और अपेक्षाएँ होती हैं, वहीं कलह और विवाद की जड़ें भी पनपती हैं। जैसे जल से अत्यधिक लगाव होने पर भी यदि जल सूख जाए तो किनारे का कमल कुम्हला जाता है, वैसे ही अति-आसक्ति अंततः दुःख का कारण बनती है।

English: Tulsidas reveals a keen insight into human psychology: excessive possessiveness, blind attachment, and over-dependence inevitably foster discord and disappointment. Moderation and inner detachment preserve harmony in human relationships.

अति सनेह जहँ होत है • अति-आसक्ति से बचावपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

उमा संत कइ यहि बड़ाई। मंद करत जो करइ भलाई॥

संत हृदय नवनीत समाना। कहा कबिन्ह परि कहै न जाना॥

Uma sant kai yahi badai. Mand karat jo karai bhalai. / Sant hriday navneet samana. Kaha kabinh pari kahai na jaana.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

भगवान शिव माता पार्वती (उमा) से कहते हैं कि हे उमा! सच्चे संतों की सबसे बड़ी महिमा यही है कि वे बुराई करने वाले का भी सदैव भला ही करते हैं। कवियों ने संतों के हृदय को मक्खन (नवनीत) के समान कोमल कहा है, परंतु मक्खन तो केवल अपने ताप से पिघलता है, जबकि संतों का हृदय दूसरों के दुःख से पिघल जाता है।

English: Lord Shiva tells Goddess Uma: "The supreme greatness of a true saint is that they respond with unconditional benevolence even toward those who act with malice." While poets compare a saint’s heart to soft butter, butter melts only under its own heat, whereas a saint’s heart melts at the suffering of others.

उमा संत कइ यहि बड़ाई • संत हृदयपूरी व्याख्या व संदर्भ→
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