दोहा छंद (13-11 मात्राएँ)
Classical Couplet (दोहा)

समय पाय फल होत है, समय पाय झरि जाय।सदा रहे नहिं एक सी, का रहीम पछिताय॥

Samay paay phal hot hai, samay paay jhari jaay. Sada rahe nahin ek si, ka rahim pachhitaay.

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Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या)

हिंदी सरल व्याख्या (Hindi Vyakhya):

रहीम जी काल के अटल नियम को समझाते हुए कहते हैं कि समय आने पर ही वृक्षों पर फल लगते हैं और समय पूरा होने पर वे स्वतः पककर गिर जाते हैं। संसार में कोई भी अवस्था, सुख या दुख सदैव एक जैसी नहीं रहती। जब परिवर्तन प्रकृति का नियम है, तो मनुष्य को समय के उतार-चढ़ाव पर व्यर्थ पछतावा या शोक क्यों करना चाहिए? समभाव से हर परिस्थिति को स्वीकार करना चाहिए।

English Translation & Meaning:

Trees bear fruit when their appointed season arrives, and shed them when the time has run its course. No condition in this mortal realm remains permanent. When change is the immutable law of nature, why lament over the turning tides of fortune?

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Literary Context & Source (साहित्यिक संदर्भ व स्रोत)

मूल ग्रंथ / संकलन: रहीम सतसई (समय की गति)
काव्य विधा: दोहा (मात्रिक छंद)

रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) का यह दोहा 16वीं-17वीं शताब्दी (मध्यकालीन नीति व शृंगार काव्य) की अमर साहित्यिक धरोहर है। यह दोहा मध्यकालीन भक्ति एवं नीति काव्य परंपरा का अत्यंत प्रामाणिक अंश है जो जीवन के व्यावहारिक सत्य, सदाचार और मानवीय चेतना को जागृत करता है।

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"समय पाय फल होत है, समय पाय झरि जाय।" दोहे के रचयिता कौन हैं?▼

यह प्रसिद्ध एवं प्रामाणिक दोहा रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) द्वारा रचित है। यह दोहा 'रहीम सतसई (समय की गति)' में संकलित है।

"समय पाय फल होत है, समय पाय झरि जाय।" दोहे का सरल हिंदी भावार्थ (व्याख्या) क्या है?▼

रहीम जी काल के अटल नियम को समझाते हुए कहते हैं कि समय आने पर ही वृक्षों पर फल लगते हैं और समय पूरा होने पर वे स्वतः पककर गिर जाते हैं। संसार में कोई भी अवस्था, सुख या दुख सदैव एक जैसी नहीं रहती। जब परिवर्तन प्रकृति का नियम है, तो मनुष्य को समय के उतार-चढ़ाव पर व्यर्थ पछतावा या शोक क्यों करना चाहिए? समभाव से हर परिस्थिति को स्वीकार करना चाहिए।

What is the English meaning of the doha "समय पाय फल होत है, समय पाय झरि जाय।"?▼

Trees bear fruit when their appointed season arrives, and shed them when the time has run its course. No condition in this mortal realm remains permanent. When change is the immutable law of nature, why lament over the turning tides of fortune?

यह दोहा किस विषय और जीवन-मूल्य पर आधारित है?▼

यह दोहा मुख्य रूप से 'समय एवं नश्वरता' (Time & Transience) विषय पर आधारित है, जो मानव जीवन में सदाचार, विवेक और आत्म-सुधार की प्रेरणा देता है।

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रहिमन चुप ह्वै बैठिए, देखि दिनन को फेर।

जब नीके दिन आइहैं, बनत न लगिहै देर॥

Rahiman chup hvai baithiye, dekhi dinan ko pher. / Jab neeke din aaihain, banat na lagihai der.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी प्रतिकूल समय में धैर्य रखने की प्रेरणा देते हुए कहते हैं कि जब समय विपरीत और परिस्थितियाँ प्रतिकूल हों, तो व्यर्थ का विवाद या अशांति करने के बजाय मौन और शांत होकर समय के चक्र को देखना चाहिए। जब शुभ और अनुकूल दिन आएंगे, तब बिगड़े हुए कार्यों को बनते और सफलता प्राप्त होते तनिक भी देर नहीं लगेगी। धैर्य ही विपत्ति का सबसे बड़ा संबल है।

English: Remain calm and composed in quiet endurance during adverse times, observes Rahim. When favorable and auspicious days return, your endeavors will materialize without any delay. Patience through hardship guarantees victory.

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सदा न काहू की रही, रहिमन यह गति जानि।

घटत बढ़त ज्यों चंदमा, त्यों सुख-दुख पहिचानि॥

Sada na kaahu ki rahi, rahiman yeh gati jaani. / Ghatat badhat jyon chandama, tyon sukh-dukh pahichaani.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि यह संसार का अटल नियम जान लो कि किसी की भी स्थिति सदैव एक जैसी नहीं रहती। जिस प्रकार चंद्रमा कभी घटता है (कृष्ण पक्ष) और कभी बढ़ता है (शुक्ल पक्ष), उसी प्रकार जीवन में सुख और दुख का चक्र भी निरंतर घटता और बढ़ता रहता है। सुख में अहंकारी नहीं होना चाहिए और दुख में निराश नहीं होना चाहिए।

English: Understand this inexorable rhythm of life: the circumstances of no human remain constant forever. Just as the moon waxes in illumination and wanes in shadow, recognize that joy and sorrow continually alternate in human existence.

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रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय।

टूटे पे फिर ना जुरे, जुरे गाँठ परि जाय॥

Rahiman dhaaga prem ka, mat toro chatkaay. / Toote pe phir na jure, jure gaanth pari jaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि प्रेम और आपसी विश्वास का संबंध एक कोमल और नाजुक धागे के समान होता है। इसे क्रोध, अहंकार या नासमझी के झटके से कभी नहीं तोड़ना चाहिए। यदि यह प्रेम रूपी धागा एक बार टूट जाता है, तो फिर पहले जैसा नहीं जुड़ता; और यदि बहुत प्रयास करके उसे जोड़ भी लिया जाए, तो उसमें सदा के लिए एक अविश्वास और संकोच की गाँठ पड़ जाती है।

English: Rahim counsels never to snap the delicate thread of love in a sudden fit of anger or ego. Once severed, it cannot be rejoined as before; and even if re-tied, an indelible knot of distrust and distance remains forever in the relationship.

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रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।

पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥

Rahiman paani rakhiye, bin paani sab soon. / Paani gaye na oobarai, moti, maanush, choon.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी श्लेष अलंकार का अप्रतिम प्रयोग करते हुए 'पानी' के संरक्षण का संदेश देते हैं। वे कहते हैं कि जीवन में पानी अवश्य बनाए रखना चाहिए, क्योंकि पानी के बिना सब कुछ व्यर्थ (शून्य) है। पानी (चमक/आभा) के बिना मोती मूल्यहीन है, पानी (सम्मान/प्रतिष्ठा/विनम्रता) के बिना मनुष्य का कोई अस्तित्व नहीं, और पानी (जल) के बिना चूना या आटा किसी काम का नहीं रहता।

English: Preserve water with the utmost care, for without water all creation becomes desolate, advises Rahim. When water is lost, three things lose all worth: the pearl loses its luster, human beings lose their honor and dignity, and flour or lime cannot bind into substance.

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