Sundar ↔ कुरूप
बाहरी रूप से सुंदर दिखने वाले व्यक्ति के विचार भी सुंदर हों, यह आवश्यक नहीं; कभी-कभी कुरूप काया में भी सुंदर आत्मा वास करती है।
मन में यदि ईर्ष्या और द्वेष हो तो सुंदर चेहरा भी कुरूप और अप्रिय लगने लगता है।
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Sundar ↔ कुरूप
बाहरी रूप से सुंदर दिखने वाले व्यक्ति के विचार भी सुंदर हों, यह आवश्यक नहीं; कभी-कभी कुरूप काया में भी सुंदर आत्मा वास करती है।
मन में यदि ईर्ष्या और द्वेष हो तो सुंदर चेहरा भी कुरूप और अप्रिय लगने लगता है।
Achha ↔ बुरा
जीवन में अच्छा और बुरा समय दोनों आते हैं, किंतु धैर्यवान व्यक्ति कभी विचलित नहीं होता।
बुरा संग मनुष्य की बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है, जबकि अच्छा संग जीवन को संवारता है।
Bada ↔ छोटा
सच्चा बड़प्पन धन में बड़ा होने से नहीं, बल्कि छोटे लोगों का आदर करने से सिद्ध होता है।
संसार में कोई काम छोटा नहीं होता, हर ईमानदार प्रयास का बड़ा महत्व होता है।
Naya ↔ पुराना
पुरानी परंपराओं को त्यागकर समाज ने नए विचारों को अंगीकार किया है।
पुराने अनुभव और नई सोच का संगम ही किसी भी कार्य में सफलता दिलाता है।
Lamba ↔ छोटा
सड़क का रास्ता बहुत लंबा था, किंतु पगडंडी से यात्रा छोटी हो गई।
संसार में कोई काम छोटा नहीं होता, हर ईमानदार प्रयास का बड़ा महत्व होता है।
Mota ↔ पतला
नियमित व्यायाम करने से मोटा व्यक्ति भी पतला और स्वस्थ हो सकता है।
पतला धागा भी जब मिलकर रस्सी का रूप लेता है तो भारी बोझ उठाने में सक्षम होता है।
Bhaari ↔ हल्का
कठिन परिस्थितियों का भारी बोझ भी सकारात्मक सोच से हल्का लगने लगता है।
सच्चाई स्वीकार कर लेने से हृदय का भारी अपराधबोध हल्का और शांत हो जाता है।
Tez ↔ धीमा
कछुआ धीमा चलकर भी जीत गया जबकि तेज़ दौड़ने वाला खरगोश सोता रह गया।
धीमा किंतु निरंतर प्रयास खरगोश की तेज़ चाल वाले को भी पीछे छोड़ देता है।
Saral ↔ कठिन
गणित के इस सरल सवाल को उलझाकर जटिल मत बनाओ।
निरंतर अभ्यास से कठिन से कठिन विषय भी अत्यंत सरल प्रतीत होने लगते हैं।
Komal ↔ कठोर
फूलों की पंखुड़ियाँ कोमल होती हैं जबकि पर्वत की चट्टानें अत्यंत कठोर।
राजा का कठोर दंड देखकर सभासद विस्मित रह गए, किंतु रानी का हृदय अत्यंत कोमल था।
Meetha ↔ कड़वा
मीठे बोल सभी का मन मोह लेते हैं जबकि कड़वे वचन दूसरों को चोट पहुँचाते हैं।
सच्चाई कड़वी औषधि के समान होती है, किंतु अंत में उसका फल मीठा ही निकलता है।
Geela ↔ सूखा
धूप में गीले कपड़े तेजी से सूखकर सूखे हो जाते हैं।
प्रकृति के प्रकोप से बचना कठिन है; कभी सूखा धरती को सुखाता है तो कभी बाढ़ सब बहा ले जाती है।
Thanda ↔ गरम
सर्दियों में ठंडा पानी पीने के बजाय लोग गरम पेय पीना पसंद करते हैं।
शीत ऋतु की ठिठुरन में गरम चाय और अलाव की आंच अत्यंत सुखद लगती है।
Saaf ↔ गंदा
हमें अपने परिवेश को गंदा नहीं रहने देना चाहिए बल्कि हमेशा साफ़-सुथरा रखना चाहिए।
गंदा जल और वातावरण बीमारियों को न्योता देते हैं, इसलिए साफ-सफाई जीवन का आधार है।
Ameer ↔ गरीब
न्याय के दरबार में अमीर और गरीब दोनों के लिए कानून एक समान है।
गरीब व्यक्ति भी अपने स्वाभिमान और ईमानदारी के बल पर समाज में धनी से अधिक सम्मान पाता है।
Dhani ↔ निर्धन
धनी व्यक्ति यदि कृपण हो तो समाज में उसका सम्मान निर्धन ज्ञानी से कम ही होता है।
सच्चा दानी वह है जो निर्धन और असहाय लोगों की पीड़ा समझकर सहायता के लिए आगे आए।
Gahra ↔ उथला
नदी का यह भाग बहुत गहरा है, जबकि किनारों के समीप पानी उथला रहता है।
उथला पानी अधिक शोर करता है, जबकि गहरे जल की धारा शांत और गंभीर बहती है।
Chauda ↔ संकरा
राजमार्ग बहुत चौड़ा था, किंतु गाँव में प्रवेश करते ही रास्ता संकरा हो गया।
पहाड़ी रास्तों का संकरा मार्ग चालकों के संयम की परीक्षा लेता है जहां चौड़ी सड़कें दुर्लभ हैं।
Seedha ↔ टेढ़ा
सीधा रास्ता हमेशा टेढ़े और घुमावदार रास्तों की तुलना में कम समय लेता है।
टेढ़ा वृक्ष भी कठिन हवाओं को सह लेता है, जबकि सीधा पेड़ तूफान में उखड़ जाता है।
Uchit ↔ अनुचित
बुद्धिमान व्यक्ति उचित और अनुचित का भेद भली-भाँति समझते हैं।
अनुचित साधनों से प्राप्त सफलता क्षणिक होती है, उचित परिश्रम ही स्थायी यश दिलाता है।
Yogya ↔ अयोग्य
योग्य प्रशासक कठिन कार्य भी संभाल लेता है, जबकि अयोग्य व्यक्ति आसान काम भी बिगाड़ देता है।
अयोग्य व्यक्ति को महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व सौंपना संस्था को संकट में डाल देता है।
Samarth ↔ असमर्थ
समर्थ लोगों को समाज के असमर्थ और दुर्बल वर्ग की सहायता के लिए आगे आना चाहिए।
असमर्थ होने पर भी जो दूसरों की भलाई की भावना रखता है, उसका संकल्प कभी व्यर्थ नहीं जाता।
Shuddh ↔ अशुद्ध
शुद्ध जल स्वास्थ्यवर्धक होता है जबकि अशुद्ध पानी अनेक बीमारियों का कारण बनता है।
अशुद्ध विचारों को मन से बाहर निकालना ही साधना और आत्मशुद्धि का प्रथम चरण है।
Pavitra ↔ अपवित्र
मंदिर का वातावरण पवित्र होता है, किसी भी कुकृत्य से उसे अपवित्र न करें।
अपवित्र भावनाएं व्यक्ति के आंतरिक तेज को क्षीण कर देती हैं, जबकि पवित्र विचार उसे आलोकित करते हैं।
Spasht ↔ अस्पष्ट
वक्ता के विचार बिल्कुल स्पष्ट थे, उनमें कोई अस्पष्ट संकेत नहीं था।
अस्पष्ट निर्देश भ्रम उत्पन्न करते हैं, इसलिए संवाद सदा स्पष्ट और पारदर्शी होना चाहिए।
Pratyaksh ↔ अप्रत्यक्ष
प्रत्यक्ष प्रमाण के सामने परोक्ष या अप्रत्यक्ष तर्कों का कोई मूल्य नहीं रह जाता।
माता-पिता का स्नेह अप्रत्यक्ष रूप से हर संकट में हमारी रक्षा करता है।
Upasthit ↔ अनुपस्थित
समारोह में मुख्य अतिथि उपस्थित थे, किंतु कुछ प्रमुख वक्ता अनुपस्थित रहे।
कक्षा में अनुपस्थित रहने से छात्र महत्वपूर्ण पाठ के ज्ञान से वंचित रह जाता है।
Drishya ↔ अदृश्य
नेत्रों से दृश्य जगत का सौंदर्य देखा जा सकता है, किंतु ईश्वर की शक्ति अदृश्य रहती है।
वायु यद्यपि अदृश्य है, किंतु इसका स्पंदन और जीवनदायिनी शक्ति हर श्वास में प्रत्यक्ष है।
Gyaat ↔ अज्ञात
वैज्ञानिक ज्ञात तथ्यों के आधार पर अज्ञात रहस्यों की खोज में निरंतर जुटे रहते हैं।
अज्ञात भय से भयभीत होने के बजाय सत्य का ज्ञान प्राप्त कर उसका सामना करना चाहिए।
Sambhav ↔ असंभव
दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम से असंभव कार्य भी संभव बन जाते हैं।
कठिन परिश्रम और अटूट आत्मविश्वास से असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी संभव हो जाते हैं।
Aavashyak ↔ अनावश्यक
विद्यार्थी को केवल आवश्यक पुस्तकों पर ध्यान देना चाहिए और अनावश्यक सामग्री से बचना चाहिए।
अनावश्यक व्यय और चिंताओं से बचकर ही मनुष्य सुखी और शांत जीवन व्यतीत कर सकता है।
Upayogi ↔ अनुपयोगी
समय का सदुपयोग जीवन को उपयोगी बनाता है जबकि आलस्य इसे अनुपयोगी कर देता है।
अनुपयोगी समझकर फेंकी गई वस्तुएं भी पुनर्चक्रण द्वारा मूल्यवान बन जाती हैं।
Mahatvapurna ↔ महत्वहीन
बैठक में महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई और महत्वहीन मुद्दों को छोड़ दिया गया।
महत्वहीन बातों पर व्यर्थ विवाद करने से बहुमूल्य समय और ऊर्जा नष्ट होती है।
Shreshth ↔ निम्न
सत्कर्म करने वाला व्यक्ति समाज में श्रेष्ठ पद पाता है जबकि दुर्जन निम्न माना जाता है।
निम्न सोच मनुष्य के व्यक्तित्व को संकीर्ण बना देती है, जबकि श्रेष्ठ विचार उसे ऊंचा उठाते हैं।
Uttam ↔ अधम
चंदन का वृक्ष उत्तम प्रकृति का प्रतीक है, सर्पों के लिपटने पर भी वह अधम नहीं बनता।
अधम कर्म करने वाला व्यक्ति समाज में घृणा का पात्र बनता है और आत्मसम्मान खो बैठता है।
Utkrisht ↔ निकृष्ट
कलाकार ने उत्कृष्ट कृति का सृजन किया, जिसे देखकर निकृष्ट नकलची भी दंग रह गए।
निकृष्ट आचरण किसी भी उच्च कुल के व्यक्ति को भी कलंकित कर देता है।
Praacheen ↔ अर्वाचीन
प्राचीन काल के ऋषि-मुनियों का ज्ञान आज के अर्वाचीन विज्ञान से भी कहीं आगे था।
अर्वाचीन काल की आधुनिक तकनीकें प्राचीन ज्ञान के साथ मिलकर नवक्रांति ला रही हैं।
Puraatan ↔ नूतन
पुरातन रूढ़िवादिता को छोड़कर नूतन प्रगतिशील सोच अपनाना ही विकास का मूलमंत्र है।
वसंत में प्रकृति नूतन परिधान धारण कर हरियाली और नवऊर्जा से भर उठती है।
Sajeev ↔ निर्जीव
चित्रकार ने कैनवास पर ऐसा सजीव चित्र बनाया कि निर्जीव पत्थर भी बोलते नजर आए।
निर्जीव पत्थरों में भी मूर्तिकार अपनी छेनी से सजीव भाव उकेर देता है।
Chetan ↔ जड़
यह संपूर्ण ब्रह्मांड जड़ प्रकृति और चेतन आत्मा के परस्पर संयोग से संचालित होता है।
सृष्टि में जड़ प्रकृति और चेतन आत्मा के अनवरत संयोग से जीवन का चक्र चलता है।
Shaant ↔ अशांत
शांत समुद्र में यात्रा सुखद होती है जबकि अशांत लहरों में जहाज डगमगाने लगता है।
अशांत मन कभी भी सत्य का निर्णय नहीं ले पाता, इसलिए ध्यान द्वारा शांति पाना आवश्यक है।
Chanchal ↔ स्थिर
ध्यान लगाने से चंचल मन भी धीरे-धीरे स्थिर और एकाग्र हो जाता है।
स्थिर जल में ही सूर्य का निर्मल प्रतिबिंब स्पष्ट दिखाई देता है, चंचल लहरों में नहीं।
Madhur ↔ कटु
कोयल की मधुर वाणी सबको भाती है जबकि कौवे का कटु स्वर किसी को पसंद नहीं।
कटु वचन तीखे तीर की भांति हृदय को भेद देते हैं, जबकि मधुर वाणी घाव भर देती है।
Durbal ↔ सबल
न्यायपूर्ण समाज में सबल व्यक्ति कभी दुर्बल पर अत्याचार नहीं करता।
सबल का धर्म है कि वह दुर्बल की रक्षा करे, न कि उस पर अपना प्रभुत्व जमाए।
Balwaan ↔ निर्बल
सच्चा बलवान वही है जो निर्बल को सहारा देकर अपने बल का सदुपयोग करे।
निर्बल को सताने वाला कभी वास्तविक शांति और ईश्वर की कृपा प्राप्त नहीं कर सकता।
Shaktishaali ↔ शक्तिहीन
शक्तिशाली राष्ट्र का दायित्व है कि वह शक्तिहीन पड़ोसियों की संप्रभुता का आदर करे।
बिना नैतिक बल के मनुष्य बाह्य रूप से कितना भी संपन्न हो, आंतरिक रूप से शक्तिहीन रहता है।
Teevra ↔ मंद
तीव्र आंधी में विशाल वृक्ष उखड़ गए जबकि मंद समीर में तृण मुस्कुराते रहे।
मंद पवन की शीतल थपकी थके हुए पथिक को शांत विश्राम देती है।
Deergh ↔ ह्रस्व
व्याकरण में स्वरों का उच्चारण दीर्घ अथवा ह्रस्व अवधि में किया जाता है।
व्याकरण में ह्रस्व और दीर्घ स्वरों का सही उच्चारण अर्थ को स्पष्ट करता है।
Guru ↔ लघु
छंद शास्त्र में गुरु मात्रा का भार दो गिना जाता है जबकि लघु मात्रा का मान एक होता है।
लघु प्रयास भी यदि निरंतर किए जाएं तो बड़े से बड़े गुरुतर लक्ष्य को प्राप्त करा देते हैं।
Sookshma ↔ स्थूल
सूक्ष्म विचार ही कालांतर में स्थूल कर्मों और उपलब्धियों में रूपांतरित होते हैं।
मनुष्य की आंखें स्थूल पदार्थों को देख पाती हैं, किंतु अणु जैसे सूक्ष्म तत्वों को नहीं।
Saakaar ↔ निराकार
भक्त अपने आराध्य के साकार रूप की उपासना करते हैं, जबकि दार्शनिक निराकार ब्रह्म का चिंतन करते हैं।
भक्त साकार रूप में ईश्वर का ध्यान करते हैं, जबकि ज्ञानी निराकार ब्रह्म की अनुभूति करते हैं।
Saguna ↔ निर्गुण
सूरदास जी ने सगुण कृष्ण भक्ति का गान किया, वहीं कबीरदास जी ने निर्गुण राम की आराधना की।
निर्गुण संत कबीर ने परमात्मा को समस्त उपाधियों से परे एक रस माना है।
Nashwar ↔ अनश्वर
यह भौतिक शरीर नश्वर है, किंतु इसके भीतर स्थित चेतना अनश्वर और अमर है।
पार्थिव देह नश्वर है, किंतु उसमें विद्यमान आत्मतत्व अनश्वर और अविनाशी है।
Kshanik ↔ शाश्वत
सांसारिक सुख क्षणिक होते हैं, जबकि सत्य और करुणा का आनंद शाश्वत होता है।
सत्य और धर्म का मूल्य शाश्वत है जो युगों के परिवर्तन के बाद भी कभी नहीं मिटता।
Sthaayi ↔ अस्थायी
सच्चे मित्र स्थायी संबल बनते हैं, जबकि झूठे साथी केवल अस्थायी लाभ के लिए जुड़ते हैं।
संसार के समस्त सुख-दुख अस्थायी हैं, इसलिए सुख में अहंकार और दुख में विलाप अनुचित है।
Durlabh ↔ सुलभ
सच्चा मार्गदर्शन अत्यंत दुर्लभ होता है, जबकि व्यर्थ सलाह हर चौराहे पर सुलभ मिल जाती है।
जो ज्ञान सुलभ है उसकी उपेक्षा न करें, क्योंकि वह दुर्लभ अवसर का निर्माण करता है।
Dushkar ↔ सुकर
सत्य के मार्ग पर चलना दुष्कर हो सकता है, किंतु आत्मसंतोष के लिए यही सुकर मार्ग है।
अनुभवी मार्गदर्शक के सान्निध्य में अत्यंत दुष्कर कार्य भी सुकर और सरल बन जाता है।
Saghan ↔ विरल
तराई के सघन वनों की तुलना में पर्वतीय शिखरों पर वनस्पति विरल पाई जाती है।
पहाड़ों की अत्यधिक ऊंचाई पर विरल वायु के कारण सांस लेना कठिन हो जाता है।
Thos ↔ तरल
तापमान बढ़ने पर ठोस बर्फ पिघलकर तरल जल का रूप ले लेती है।
तापमान बढ़ने पर कठोर बर्फ पिघलकर तरल जल के रूप में बहने लगती है।
Gaadha ↔ पतला
दूध को उबालकर गाढ़ा किया जाता है, जबकि अधिक पानी मिलाने से वह पतला हो जाता है।
पतला धागा भी जब मिलकर रस्सी का रूप लेता है तो भारी बोझ उठाने में सक्षम होता है।
Khurdura ↔ चिकना
रेगमाल से रगड़ने पर खुरदुरी लकड़ी की सतह बिल्कुल चिकनी हो जाती है।
चिकने पत्थर पर पानी टिक नहीं पाता, जबकि खुरदुरी मिट्टी वर्षा की नमी को सोख लेती है।
Chamkila ↔ धुंधला
धूल जम जाने से चमकीला कांच भी धुंधला और मैला दिखाई देने लगता है।
कुहासे में धुंधला दिखने वाला मार्ग सूर्योदय के साथ स्पष्ट और आलोकित हो उठा।
Ujjwal ↔ धूमिल
कड़ी मेहनत से छात्र का भविष्य उज्ज्वल बनता है, जबकि कुसंगति उसे धूमिल कर देती है।
समय के थपेड़े ऐतिहासिक स्मारकों की चमक को धूमिल कर देते हैं जिसे संरक्षण की आवश्यकता होती है।
Shwet ↔ श्याम
श्वेत हंस और श्याम वर्ण का कौवा दोनों के रंग में गहरा अंतर होता है।
वर्षा ऋतु में आकाश में घिरते श्याम मेघ किसानों के हृदय में हर्ष का संचार करते हैं।
Teekshna ↔ कुंद
तीक्ष्ण बुद्धि वाला बालक शीघ्र सीखता है जबकि कुंद मस्तिष्क वाले को अधिक समय लगता है।
कुंद चाकू से फल काटना दुष्कर होता है, उसे तीक्ष्ण धार की आवश्यकता होती है।
Namra ↔ उद्दंड
नम्र स्वभाव के व्यक्ति की सब प्रशंसा करते हैं जबकि उद्दंड व्यवहार सभी को अखरता है।
उद्दंड आचरण छात्र की प्रतिष्ठा को धूमिल करता है, जबकि नम्र स्वभाव उसे सबका प्रिय बनाता है।
Vineet ↔ उद्धत
विनीत छात्र गुरुओं के प्रिय होते हैं, वहीं उद्धत स्वभाव वाले अपनी प्रतिष्ठा खो बैठते हैं।
अहंकार से भरा उद्धत व्यक्ति ज्ञानियों की संगति से भी कोई लाभ नहीं उठा पाता।
Susheel ↔ दुःशील
सुशील कन्या परिवार का गौरव बढ़ाती है जबकि दुःशील संतान बदनामी लाती है।
दुःशील संगति से अच्छे संस्कार भी नष्ट हो जाते हैं, इसलिए सुशील मित्रों की संगति करें।
Sajjan ↔ दुर्जन
सज्जन पुरुष सदा परोपकार में रत रहते हैं जबकि दुर्जन दूसरों को हानि पहुँचाने में।
दुर्जन की मीठी बातों से भी सावधान रहना चाहिए क्योंकि उसके मन में कपट छिपा रहता है।
Sadhu ↔ असाधु
साधु पुरुषों का सानिध्य पापों को हरता है जबकि असाधु संगति पतन की ओर ले जाती है।
असाधु प्रवृत्ति के लोग दूसरों के पतन में ही अपना हित तलाशते हैं।
Shisht ↔ अशिष्ट
शिष्ट आचरण सभ्य समाज की पहचान है, अशिष्ट बातें किसी को शोभा नहीं देतीं।
अशिष्ट व्यवहार किसी भी सुसंस्कृत सभा में स्वीकार्य नहीं होता, शिष्टाचार ही सम्मान दिलाता है।
Sabhya ↔ असभ्य
सभ्य राष्ट्र विवादों का हल शांतिपूर्ण संवाद से निकालते हैं, असभ्य युद्ध से नहीं।
असभ्य वाणी बोलने से अपनी ही हीनता प्रकट होती है, इसलिए मधुर और सभ्य बोलें।
Udaar ↔ अनुदार
उदार हृदय वाले लोग सर्वकल्याण सोचते हैं जबकि अनुदार व्यक्ति केवल अपने स्वार्थ तक सीमित रहते हैं।
अनुदार दृष्टिकोण समाज को बांटता है, जबकि उदार हृदय सबको अपना बना लेता है।
Kripan ↔ दानी
कृपण व्यक्ति धन संचय करके भी भूखा मरता है, जबकि दानी पुरुष दान देकर अमर हो जाता है।
सच्चा दानी अपने दिए गए दान का कभी ढिंढोरा नहीं पीटता, वह गुप्त भाव से उपकार करता है।
Dayalu ↔ निर्दयी
दयालु राजा अपनी प्रजा पर कृपा करता है जबकि निर्दयी शासक केवल अत्याचार ढहाता है।
निर्दयी शिकारी बेजुबान पशुओं पर अत्याचार करते समय किंचित भी संकोच नहीं करता।
Kroor ↔ दयावान
क्रूर शिकारी ने मूक पशु पर बाण चलाया, किंतु दयावान साधु ने उसकी जान बचाई।
दयावान मनुष्य पीड़ित प्राणियों के आंसू पोंछकर स्वयं को धन्य अनुभव करता है।
Swatantra ↔ परतंत्र
स्वतंत्र देश का नागरिक सिर उठाकर जीता है, जबकि परतंत्र समाज दासता की बेड़ियों में जकड़ा रहता है।
परतंत्र व्यक्ति स्वर्ण के पिंजरे में भी स्वतंत्रता के खुले आकाश के लिए तड़पता रहता है।
Anukool ↔ प्रतिकूल
अनुकूल परिस्थितियों में तो सभी सफल होते हैं, पर प्रतिकूल समय में टिकने वाला ही सच्चा वीर है।
प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य न खोना ही सच्चे साहसी और बुद्धिमान की पहचान है।
Subodh ↔ दुर्बोध
शिक्षक ने सुबोध भाषा में गणित समझाया, जिससे दुर्बोध सूत्र भी आसानी से समझ आ गए।
कठिन भाषा का दुर्बोध ग्रंथ गुरु की सरल व्याख्या से सुबोध और सुगम बन जाता है।
Vistrit ↔ संक्षिप्त
परीक्षा में विस्तृत उत्तर के स्थान पर संक्षिप्त और सारगर्भित बिंदु लिखना बेहतर होता है।
संक्षिप्त उत्तर में भी यदि मुख्य तथ्य समाहित हों तो वह विस्तृत निबंध से अधिक प्रभावी होता है।
Sankeern ↔ विस्तीर्ण
संकीर्ण मानसिकता वाले लोग हमेशा अपने दायरे में सिमटे रहते हैं जबकि विस्तीर्ण दृष्टि विश्व को अपना मानती है।
महासागर का विस्तीर्ण जलविस्तार क्षितिज के पार तक फैला दृष्टिगोचर होता है।
Vyaapak ↔ सीमित
इस नीति का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ा, इसका असर केवल सीमित क्षेत्र तक नहीं रहा।
सीमित साधनों के बावजूद दृढ संकल्प से मनुष्य असीम उपलब्धियां अर्जित कर सकता है।
Aseem ↔ ससीम
ईश्वर की अनुकंपा असीम होती है, जिसकी तुलना ससीम मानवीय क्षमताओं से नहीं की जा सकती।
मनुष्य की बुद्धि ससीम है, जबकि यह ब्रह्मांड असीम और अनंत रहस्यों से परिपूर्ण है।
Anant ↔ सांत
नीला आकाश अनंत प्रतीत होता है, जबकि धरती की सीमाएं सांत और निश्चित हैं।
भौतिक संसार का विस्तार सांत है, जबकि चेतना का परमात्मा रूप अनंत है।
Poorna ↔ अपूर्ण
पूर्ण समर्पण से किया गया कार्य सफल होता है जबकि अपूर्ण निष्ठा विफलता लाती है।
बिना नैतिक आचरण के कोई भी ज्ञान अपूर्ण और निष्फल रह जाता है।
Rikt ↔ पूर्ण
वर्षा होने से रिक्त जलाशय जल से पूर्ण हो गए।
पूर्ण समर्पण से किया गया कार्य सफल होता है जबकि अपूर्ण निष्ठा विफलता लाती है।
Asli ↔ नकली
असली हीरे की चमक सदा बनी रहती है, जबकि नकली आभूषण जल्द ही फीके पड़ जाते हैं।
नकली मोतियों की चमक कुछ ही दिनों में फीकी पड़ जाती है, असली रत्न सदा दमकता है।
Kathit ↔ अकथित
कथित शब्दों की अपेक्षा अकथित मौन कभी-कभी अधिक गहरा संदेश दे जाता है।
अनेक गहरे भाव अकथित रहकर भी आंखों की भाषा से स्वतः व्यक्त हो जाते हैं।
Sakriya ↔ निष्क्रिय
स्वास्थ्य के लिए सक्रिय जीवनशैली आवश्यक है, निष्क्रिय पड़े रहने से बीमारियां घेर लेती हैं।
निष्क्रिय रहकर केवल भाग्य के भरोसे बैठने से जीवन में कोई उपलब्धि हासिल नहीं होती।
Pramaanik ↔ अप्रामाणिक
इतिहासकारों ने केवल प्रामाणिक अभिलेखों को स्वीकार किया और अप्रामाणिक दंतकथाओं को खारिज कर दिया।
अप्रामाणिक सूचनाओं पर विश्वास करने से समाज में व्यर्थ की अफवाहें और अशांति फैलती है।
Swabhavik ↔ अस्वाभाविक
दुख में आंसू बहना स्वाभाविक प्रतिक्रिया है, कठोर होकर भावहीन बने रहना अस्वाभाविक है।
अस्वाभाविक व्यवहार से बनावटीपन झलकता है, सहजता ही व्यक्ति को गरिमा प्रदान करती है।
Praakritik ↔ कृत्रिम
प्राकृतिक आपदाओं से बचना मनुष्य के वश में नहीं, किंतु कृत्रिम प्रदूषण को रोका जा सकता है।
कृत्रिम सुगंध कुछ ही देर टिकती है, जबकि प्राकृतिक फूलों की महक वातावरण को महकाए रखती है।
Pakka ↔ कच्चा
पक्के मकान तेज आंधी का सामना कर लेते हैं जबकि कच्चे झोपड़े ढह जाते हैं।
कच्चा घड़ा पानी का भार नहीं सह पाता, भट्ठी में तपकर ही वह पक्का और उपयोगी बनता है।
Samriddh ↔ विपन्न
समृद्ध किसान खुशहाली से जीवन बिताता है जबकि विपन्न मजदूर दो वक्त की रोटी को तरसता है।
विपन्न वर्ग के उत्थान के बिना किसी भी राष्ट्र की संपूर्ण समृद्धि संभव नहीं है।
Sampanna ↔ विपन्न
साधनों से संपन्न होने पर भी मनुष्य यदि विनम्र न हो तो उसका वैभव व्यर्थ है।
विपन्न वर्ग के उत्थान के बिना किसी भी राष्ट्र की संपूर्ण समृद्धि संभव नहीं है।
Sukhee ↔ दुखी
संतोषी व्यक्ति सदा सुखी रहता है जबकि लोभी मनुष्य हमेशा दुखी ही रहता है।
दुखी जनों के कष्ट का निवारण करना ही मानव जीवन का सर्वोच्च कर्तव्य और पुण्य है।
Vidvaan ↔ मूर्ख
विद्वान की संगति विवेक जगाती है जबकि मूर्ख की संगति संकट पैदा करती है।
मूर्ख व्यक्ति को हितकारी उपदेश देना भी व्यर्थ जाता है, जैसे बंजर भूमि में बीज बोना।
Buddhimaan ↔ बुद्धिहीन
बुद्धिमान व्यक्ति संकट में समाधान खोजता है जबकि बुद्धिहीन घबराकर हाथ खड़े कर देता है।
बुद्धिहीन आचरण अपने ही हाथों अपनी हानि कराने का मार्ग प्रशस्त करता है।
Chatur ↔ मूढ़
चतुर व्यापारी लाभ कमा लेता है, जबकि सीधा और मूढ़ ग्राहक अक्सर ठगा जाता है।
मूढ़ स्वभाव का व्यक्ति अपने ही हठ के कारण बार-बार संकट में फंसता है।
Kushal ↔ अकुशल
कुशल कारीगर बारीक नक्काशी कर लेता है जबकि अकुशल मजदूर पत्थर भी ठीक से नहीं तराश पाता।
अकुशल हाथों में बहुमूल्य औजार भी नष्ट हो जाते हैं, कुशलता अभ्यास से ही आती है।
Daksha ↔ अदक्ष
दक्ष शल्य-चिकित्सक जटिल ऑपरेशन सरलता से कर देता है, नए व अदक्ष को सावधानी रखनी होती है।
अदक्ष कारीगर को समुचित प्रशिक्षण देकर निपुण बनाया जा सकता है।
Praveen ↔ अकुशल
संगीत में प्रवीण गायक सुर को साध लेता है, जिसे नौसिखिया नहीं पकड़ पाता।
अकुशल हाथों में बहुमूल्य औजार भी नष्ट हो जाते हैं, कुशलता अभ्यास से ही आती है।
Nipun ↔ अनिपुण
धनुर्विद्या में निपुण अर्जुन ने लक्ष्य पर अचूक संधान किया।
कला के क्षेत्र में निरंतर साधना ही अनिपुण शिक्षार्थी को कुशल कलाकार बनाती है।
Chokha ↔ खोटा
चोखा माल हर कोई खरीदता है, खोटा सिक्का कोई स्वीकार नहीं करता।
खोटा सिक्का बाज़ार में नहीं चलता, उसी प्रकार कपटी व्यक्ति का समाज में आदर नहीं होता।
Khara ↔ खोटा
खरा सोना आग में तपकर भी कुंदन बनता है जबकि खोटा धातु जलकर भस्म हो जाता है।
खोटा सिक्का बाज़ार में नहीं चलता, उसी प्रकार कपटी व्यक्ति का समाज में आदर नहीं होता।
Satya ↔ असत्य
सत्य वचन भले ही कड़वे लगें, पर असत्य मीठा होकर भी पतन कराता है।
असत्य का सहारा लेने वाले को एक झूठ छिपाने के लिए सौ नए झूठ बोलने पड़ते हैं।
Mithya ↔ सत्य
मिथ्या प्रपंच में उलझने के बजाय यथार्थ सत्य को समझना ही बुद्धिमानी है।
सत्य की राह कठिन अवश्य होती है, किंतु अंततः विजय सत्य की ही होती है।
Yathaarth ↔ काल्पनिक
काल्पनिक सपनों में जीने के बजाय यथार्थ जीवन की चुनौतियों का सामना करो।
काल्पनिक दुनिया में विचरने के बजाय कठोर यथार्थ का सामना करना ही बुद्धिमानी है।
Kaalpanik ↔ वास्तविक
उपन्यास की कहानी काल्पनिक होती है, किंतु उसके पात्र वास्तविक जीवन से प्रेरित लगते हैं।
समस्या का वास्तविक कारण जाने बिना उसका स्थायी समाधान खोजना असंभव है।
Vaastavik ↔ अवास्तविक
वास्तविक स्थिति जाने बिना किसी पर दोषारोपण करना उचित नहीं।
अवास्तविक अपेक्षाएं पालने से अंत में केवल निराशा और पश्चाताप ही हाथ लगता है।
Moodh ↔ ज्ञानी
मूढ़ व्यक्ति क्रोध में अपना ही अहित कर बैठता है, ज्ञानी सदा शांत रहता है।
सच्चा ज्ञानी विनम्रता धारण करता है, क्योंकि ज्ञान अहंकार को विनष्ट कर देता है।
Gyaani ↔ अज्ञानी
ज्ञानी पुरुष सबको आदर देता है, अज्ञानी अहंकार में चूर रहता है।
अज्ञानी को ज्ञान का प्रकाश देकर सही मार्ग पर लाना ही समाज का परम धर्म है।
Alpa ↔ प्रचुर
अल्प ज्ञान खतरनाक होता है, जबकि किसी विषय का प्रचुर ज्ञान आत्मविश्वास देता है।
वर्षा काल में प्रचुर जल मिलने से धरती शस्य-श्यामला और हरी-भरी हो जाती है।
Nyoon ↔ अधिक
खर्च को न्यूनतम रखना चाहिए और बचत को अधिक से अधिक बढ़ाना चाहिए।
किसी भी वस्तु का अधिक उपभोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है।
Adhik ↔ कम
अधिक बोलना मूर्खता की निशानी है, कम और सार्थक बोलना बुद्धिमत्ता है।
कम साधनों में भी संतोषपूर्वक जीवन जीने वाला व्यक्ति सदा सुखी रहता है।
Kam ↔ ज्यादा
कम संसाधनों में भी संतुष्ट रहना ज्यादा पाने की लालसा से श्रेष्ठ है।
आवश्यकता से ज्यादा संग्रह करने की प्रवृत्ति समाज में असंतुलन पैदा करती है।
Saras ↔ नीरस
कवि का काव्य अत्यंत सरस था, कोई भी श्रोता उसे नीरस नहीं कह सका।
नीरस व्याख्यान श्रोताओं को ऊब से भर देता है, उसमें रोचक उदाहरण होने चाहिए।
Rochak ↔ अरुचिकर
यह पुस्तक इतनी रोचक है कि पाठक को अरुचिकर विषयों में भी रुचि हो जाती है।
अरुचिकर भोजन भी भूख लगने पर स्वादिष्ट और तृप्तिकारी प्रतीत होने लगता है।
Drishyamaan ↔ अदृश्यमान
क्षितिज पर दृश्यमान पर्वत घने बादलों के आते ही अदृश्यमान हो गया।
सूक्ष्मदर्शी के बिना अदृश्यमान जीवाणु भी जल में उपस्थित रहकर रोग फैला सकते हैं।
Sushikshit ↔ अशिक्षित
सुशिक्षित समाज में कुप्रथाओं का कोई स्थान नहीं होता, अशिक्षित लोग ही अंधविश्वास में फंसते हैं।
अशिक्षित समाज को विद्या का प्रकाश देकर ही राष्ट्र की सर्वांगीण प्रगति संभव है।
Shikshit ↔ अशिक्षित
एक शिक्षित नागरिक अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों के प्रति भी सचेत रहता है।
अशिक्षित समाज को विद्या का प्रकाश देकर ही राष्ट्र की सर्वांगीण प्रगति संभव है।
Shraant ↔ अश्रांत
दिनभर के परिश्रम से श्रांत मजदूर रात्रि में गहरी नींद सोता है।
अश्रांत परिश्रमी व्यक्ति बिना थके अपने निर्धारित लक्ष्य की दिशा में अग्रसर रहता है।
Jaagrat ↔ सुषुप्त
जाग्रत राष्ट्र ही अपनी सीमाओं और अधिकारों की रक्षा कर सकता है, सुषुप्त समाज पिछड़ जाता है।
सुषुप्त प्रतिभा को उचित प्रोत्साहन मिलने पर वह अद्भुत चमत्कार कर दिखाती है।
Mukhar ↔ मूक
अन्याय के विरुद्ध मुखर आवाज उठाना जरूरी है, मूक दर्शक बने रहना कायरता है।
अन्याय के समक्ष मूक दर्शक बनकर रहना भी अपराध के भागीदार होने जैसा है।
Mook ↔ वाचाल
मूक होई वाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर गहन — ईश्वर कृपा से गूंगा भी वाचाल हो जाता है।
वाचाल व्यक्ति बिना विचारे बोलकर अक्सर अपनी ही गरिमा घटा लेता है।
Mitbhaashi ↔ वाचाल
मितभाषी नेता के हर शब्द का वजन होता है, वाचाल व्यक्ति की बात कोई गंभीरता से नहीं लेता।
वाचाल व्यक्ति बिना विचारे बोलकर अक्सर अपनी ही गरिमा घटा लेता है।
Mridu ↔ कठोर
मृदु वाणी शत्रु को भी मित्र बना लेती है, जबकि कठोर व्यवहार अपनों को भी दूर कर देता है।
राजा का कठोर दंड देखकर सभासद विस्मित रह गए, किंतु रानी का हृदय अत्यंत कोमल था।
Sheelvaan ↔ चरित्रहीन
शीलवान व्यक्ति विपत्ति में भी मर्यादा नहीं छोड़ता।
चरित्रहीन व्यक्ति धन और सत्ता पाकर भी कभी आत्मिक शांति प्राप्त नहीं कर पाता।
Deerghaayu ↔ अल्पायु
बुजुर्गों का आशीर्वाद होता है — दीर्घायु भव और यशस्वी बनो।
अल्पायु में ही स्वामी विवेकानंद ने अपने विचारों से संपूर्ण विश्व को आलोकित कर दिया।
Anuraagi ↔ विरागी
संसार का अनुरागी मनुष्य मोह में बंधता है, विरागी संन्यासी मोक्ष की ओर बढ़ता है।
विरागी साधु सांसारिक प्रलोभनों से मुक्त होकर आत्मतत्व के अनुसंधान में लीन रहता है।
Aasakt ↔ अनासक्त
कर्मफल में आसक्त होने के बजाय निष्काम भाव से अनासक्त होकर कर्म करो।
गीता का संदेश है कि कर्म अनासक्त भाव से करो और फल की चिंता मत करो।
Dhaarmik ↔ अधार्मिक
धार्मिक व्यक्ति सदा नीति-सम्मत राह चुनता है जबकि अधार्मिक अनीति की ओर आकर्षित होता है।
अधार्मिक आचरण समाज की नींव को खोखला कर कलह और अशांति को जन्म देता है।
Nyaayee ↔ अन्यायी
न्यायी न्यायाधीश पक्षपात नहीं करता, अन्यायी शासक का पतन अवश्यंभावी है।
अन्यायी शासक की सत्ता भले ही प्रचंड दिखे, किंतु अंततः उसका पतन निश्चित होता है।
Aastik ↔ नास्तिक
आस्तिक व्यक्ति ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास रखता है जबकि नास्तिक वैज्ञानिक तर्क मांगता है।
नास्तिक व्यक्ति ईश्वरीय सत्ता को अस्वीकार कर केवल प्रत्यक्ष प्रमाण पर विश्वास करता है।
Sugam ↔ दुर्गम
पुल बनने से नदी पार करना सुगम हो गया, अन्यथा पहले यह अत्यंत दुर्गम था।
पहाड़ी मार्ग पहले दुर्गम हुआ करते थे, किंतु नई सड़कों ने यात्रा को सुगम बना दिया है।
Mukhya ↔ गौण
शिक्षा का मुख्य उद्देश्य चरित्र निर्माण है, केवल उपाधि प्राप्त करना गौण है।
मुख्य उद्देश्य की सिद्धि के लिए गौण बातों पर अधिक समय व्यर्थ नहीं करना चाहिए।
Vishesh ↔ सामान्य
प्रत्येक बालक में कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है, कोई भी सामान्य नहीं होता।
सामान्य नागरिक की देशभक्ति ही किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति और संबल होती है।
Saadhaaran ↔ असाधारण
साधारण जीवन जीने वाले महापुरुषों के विचार असाधारण और प्रेरणादायी होते हैं।
असाधारण प्रतिभा भी कठिन परिश्रम के बिना अपना पूर्ण चमत्कार नहीं दिखा सकती।
Laukik ↔ अलौकिक
लौकिक सुख क्षणिक होते हैं जबकि पारलौकिक आनंद चिरस्थायी माना गया है।
हिमालय के धवल शिखरों पर अलौकिक शांति और दिव्य सौंदर्य की अनुभूति होती है।
Supt ↔ जाग्रत
मनुष्य के भीतर सुप्त शक्तियां सही प्रेरणा मिलते ही जाग्रत हो जाती हैं।
जाग्रत समाज ही अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सदा सजग रहता है।
Vyakti-gat ↔ सार्वजनिक
सार्वजनिक हित के सामने व्यक्तिगत स्वार्थ का त्याग करना ही सच्ची देशभक्ति है।
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना प्रत्येक देशवासी का पावन नागरिक कर्तव्य है।
Saarvajanik ↔ निजी
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना हर नागरिक का परम धर्म है।
निजी स्वार्थ को त्यागकर सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देना ही महानता है।
Prakat ↔ गुप्त
सच्चाई को कितना भी छिपाओ, वह एक दिन प्रकट होकर ही रहती है।
गुप्त मंत्रणा की गोपनीयता बनाए रखना राज्य की सुरक्षा के लिए अनिवार्य होता है।
Prachhanna ↔ प्रकट
गांवों में प्रच्छन्न बेरोजगारी एक गंभीर समस्या है जिसे तुरंत पहचानना आवश्यक है।
सत्य को लाख छिपाने का प्रयास किया जाए, वह समय आने पर स्वतः प्रकट हो जाता है।
Pramukh ↔ सामान्य
सम्मेलन में प्रमुख हस्तियों का भव्य स्वागत हुआ।
सामान्य नागरिक की देशभक्ति ही किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति और संबल होती है।
Roopwaan ↔ कुरूप
रूपवान चेहरे से अधिक मूल्यवान सुंदर और पवित्र हृदय होता है।
मन में यदि ईर्ष्या और द्वेष हो तो सुंदर चेहरा भी कुरूप और अप्रिय लगने लगता है।
Karkash ↔ मधुर
कर्कश ध्वनि कानों को चुभती है जबकि मधुर संगीत मन को शांत करता है।
कोयल की मधुर वाणी सबको भाती है जबकि कौवे का कटु स्वर किसी को पसंद नहीं।
Sureela ↔ बेसुरा
गायक का सुरीला कंठ सभा को मंत्रमुग्ध कर गया।
बेसुरा गायन कानों को खटकता है, जबकि सुरीली तान मन को आनंदित कर देती है।
Ugra ↔ शांत
उग्र रूप धारण किए बिना भी शांत और सौम्य वाणी से कठिन समस्याओं का समाधान हो सकता है।
शांत समुद्र में यात्रा सुखद होती है जबकि अशांत लहरों में जहाज डगमगाने लगता है।
Saumya ↔ उग्र
माता का सौम्य स्वभाव बालकों को सुरक्षा और स्नेह का संबल देता है।
उग्र स्वभाव व्यक्ति के विवेक को नष्ट कर संबंधों में कड़वाहट घोल देता है।
Aardra ↔ शुष्क
वर्षा ऋतु में वातावरण आर्द्र हो जाता है जिससे कपड़े देर से सूखते हैं।
रेगिस्तान की शुष्क पवन शरीर की नमी को सोख लेती है और प्यास बढ़ा देती है।
Tripta ↔ अतृप्त
स्वादिष्ट भोजन से पेट तृप्त हो गया किंतु ज्ञान की पिपासा सदा अतृप्त ही रहती है।
वासनाओं की अग्नि में जितना घी डाला जाए, वह उतनी ही अतृप्त रहकर भड़कती है।
Santusht ↔ असंतुष्ट
ईमानदार व्यक्ति थोड़े में भी संतुष्ट रहता है जबकि लोभी कभी संतुष्ट नहीं होता।
असंतुष्ट मन सदा दूसरों के सुख को देखकर ईर्ष्या की आग में जलता रहता है।
Prasanna ↔ अप्रसन्न
सफलता की सूचना पाकर छात्र प्रसन्न हो गया।
छोटी-छोटी बातों पर अप्रसन्न होने की आदत व्यक्ति को चिड़चिड़ा बना देती है।
Khinna ↔ प्रसन्न
विफलता से खिन्न होने के स्थान पर नए उत्साह से प्रयास करो।
प्रसन्न चित्त व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थिति में भी सकारात्मक मार्ग खोज लेता है।
Praphulla ↔ म्लान
प्रातःकाल खिलता हुआ प्रफुल्ल कमल मन को भाता है जबकि धूप में वह म्लान हो जाता है।
ग्रीष्म की तीखी धूप में फूलों की कांति म्लान हो जाती है जिसे शाम की ओस संवारती है।
Kutil ↔ सरल
कुटिल राजनीतिज्ञ अपनी बातों में फंसाते हैं जबकि सरल व्यक्ति सच्चाई बोलता है।
गणित के इस सरल सवाल को उलझाकर जटिल मत बनाओ।
Riju ↔ वक्र
गणित में ऋजु रेखा दो बिंदुओं के बीच सबसे छोटा मार्ग होती है, जबकि वक्र रेखा टेढ़ी होती है।
वक्र मार्ग चलने में समय और परिश्रम अधिक लेता है, सरल सीधा मार्ग श्रेयस्कर है।
Parush ↔ कोमल
परुष वचन हृदय को छलनी कर देते हैं जबकि कोमल बोल मरहम का काम करते हैं।
फूलों की पंखुड़ियाँ कोमल होती हैं जबकि पर्वत की चट्टानें अत्यंत कठोर।
Agragaami ↔ पश्चगामी
अग्रगामी सोच राष्ट्र को प्रगति के पथ पर ले जाती है, पश्चगामी विचार पतन कराते हैं।
पश्चगामी सोच समाज को अंधविश्वास और कुरीतियों के गर्त में धकेल देती है।
Pragatisheel ↔ रूढ़िवादी
प्रगतिशील युवा समाज में बदलाव लाते हैं।
रूढ़िवादी परंपराओं को त्यागकर प्रगतिशील वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
Udaaramana ↔ संकीर्णमना
उदारमना व्यक्ति सभी धर्मों का आदर करता है, संकीर्णमना द्वेष पालता है।
संकीर्णमना व्यक्ति कभी विशाल समाज का नेतृत्व नहीं कर सकता, उदारता ही सम्मान दिलाती है।
Chiraayu ↔ अल्पायु
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का संदेश चिरायु है, उसका कभी अंत नहीं होगा।
अल्पायु में ही स्वामी विवेकानंद ने अपने विचारों से संपूर्ण विश्व को आलोकित कर दिया।
Supraapya ↔ दुष्प्राप्य
आजकल इंटरनेट के माध्यम से ज्ञान सुप्राप्य हो गया है।
घने जंगलों में पाई जाने वाली संजीवनी बूटी अत्यंत दुष्प्राप्य मानी जाती है।
Anivaarya ↔ वैकल्पिक
परीक्षा में प्रथम खंड अनिवार्य है जबकि द्वितीय खंड में वैकल्पिक प्रश्न हैं।
वैकल्पिक ऊर्जा के स्रोतों को अपनाना पर्यावरण संरक्षण के लिए अनिवार्य हो चुका है।
Aichhik ↔ अनिवार्य
रक्तदान पूरी तरह ऐच्छिक सेवा है, किसी पर कोई बाध्यता नहीं।
स्वच्छता और पौष्टिक आहार अच्छे स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य शर्तें हैं।
Baadhyakaari ↔ गैर-बाध्यकारी
अदालत का यह फैसला सभी पक्षों के लिए बाध्यकारी है।
गैर-बाध्यकारी संधियों के उल्लंघन पर कोई कानूनी दंड नहीं होता, वे केवल नैतिक हैं।
Pradhaan ↔ गौण
कर्म ही मनुष्य का प्रधान धर्म है।
मुख्य उद्देश्य की सिद्धि के लिए गौण बातों पर अधिक समय व्यर्थ नहीं करना चाहिए।
Utsaahi ↔ अनुत्साही
उत्साही युवा हर चुनौती को अवसर बना लेते हैं।
अनुत्साही सैनिक सेना के मनोबल को गिरा देता है, उत्साह ही विजय की कुंजी है।
Sachest ↔ निश्चेष्ट
दवा लगते ही मरीज सचेष्ट हो उठा, पहले वह निश्चेष्ट पड़ा था।
संकट के समय निश्चेष्ट बैठने के बजाय सक्रिय होकर समाधान खोजना चाहिए।
Sukrit ↔ दुष्कृत
सुकृत कर्म करने से आत्मा को शांति मिलती है, दुष्कृत सदा पश्चाताप देता है।
दुष्कृत करने वाला भले ही कानून से बच जाए, अंतरात्मा के दंड से नहीं बच सकता।
Ureen ↔ ऋणी
माता-पिता के उपकारों से उऋण होना किसी भी संतान के लिए असंभव है।
माता-पिता के पावन उपकारों का मनुष्य आजीवन ऋणी रहता है जिसे चुकाना असंभव है।
Sachetan ↔ अचेतन
सचेतन नागरिक अपने देश के प्रति सदैव सजग रहता है।
अचेतन मन में दबी इच्छाएं और स्मृतियां मनुष्य के व्यवहार को प्रभावित करती हैं।
Paripakwa ↔ अपरिपक्व
परिपक्व बुद्धि अनुभव से विकसित होती है, अपरिपक्व सोच जल्दबाजी में निर्णय लेती है।
अपरिपक्व निर्णय से भविष्य में गंभीर हानियों का सामना करना पड़ सकता है।
Praudh ↔ अल्पवयस्क
प्रौढ़ व्यक्ति जीवन की जटिलताओं को धैर्यपूर्वक संभालते हैं।
अल्पवयस्क बच्चों से श्रम कराना कानूनन अपराध और उनके अधिकारों का हनन है।
Sugandhit ↔ दुर्गंधयुक्त
गुलाब का सुगंधित इत्र मन को मोह लेता है।
दुर्गंधयुक्त नाले संक्रामक रोगों का केंद्र बन जाते हैं जिन्हें ढकना आवश्यक है।
Suruchipoorna ↔ अरुचिकर
गृह-सज्जा सुरुचिपूर्ण ढंग से की गई थी।
अरुचिकर भोजन भी भूख लगने पर स्वादिष्ट और तृप्तिकारी प्रतीत होने लगता है।
Sulakshan ↔ कुलक्षण
सुलक्षण बालक परिवार का मान बढ़ाता है।
बचपन के कुलक्षण यदि समय रहते न सुधारे जाएं तो आगे चलकर विनाशकारी बनते हैं।
Saubhaagyashaali ↔ दुर्भाग्यशाली
वे सौभाग्यशाली हैं जिन्हें गुरु का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
दुर्भाग्यशाली मनुष्य भी यदि सतत परिश्रम करे तो अपने भाग्य की रेखाएं बदल सकता है।
Prabal ↔ दुर्बल
सच्चाई का पक्ष हमेशा प्रबल होता है, असत्य कितना भी दुर्बल क्यों न हो टिक नहीं सकता।
न्यायपूर्ण समाज में सबल व्यक्ति कभी दुर्बल पर अत्याचार नहीं करता।
Kanjoos ↔ उदार
कंजूस व्यक्ति आवश्यकता पड़ने पर भी खर्च नहीं करता।
उदार हृदय वाले लोग सर्वकल्याण सोचते हैं जबकि अनुदार व्यक्ति केवल अपने स्वार्थ तक सीमित रहते हैं।
Sarvagya ↔ अल्पज्ञ
संसार में केवल ईश्वर ही सर्वज्ञ है, मनुष्य तो अल्पज्ञ ही रहता है।
अल्पज्ञ व्यक्ति थोड़ा सा जानकर ही स्वयं को सर्वज्ञाता मानकर अहंकार करने लगता है।
Bahugya ↔ अल्पज्ञ
बहुज्ञ विद्वान हर विषय पर सारगर्भित विचार व्यक्त कर सकते हैं।
अल्पज्ञ व्यक्ति थोड़ा सा जानकर ही स्वयं को सर्वज्ञाता मानकर अहंकार करने लगता है।
Kritagya ↔ कृतघ्न
उपकार मानने वाला कृतज्ञ कहलाता है जबकि उपकार भूल जाने वाला कृतघ्न माना जाता है।
कृतघ्न व्यक्ति संकट में सहारा देने वाले उपकारी का भी उपकार भूल जाता है।
Din ↔ रात
परिश्रमी व्यक्ति दिन और रात की परवाह किए बिना अपने लक्ष्य की प्राप्ति में जुटा रहता है।
कठिन परिश्रम के बाद रात की नींद अत्यंत सुखद और शांतिपूर्ण होती है।
Jeevan ↔ मृत्यु
जीवन और मृत्यु ईश्वर के हाथ में है, मनुष्य का कर्तव्य केवल सत्कर्म करना है।
मृत्यु शाश्वत सत्य है, जो जन्म लेता है उसका अंत निश्चित है।
Janma ↔ मृत्यु
जन्म से कोई महान नहीं होता, व्यक्ति अपने कर्मों से महान बनता है।
मृत्यु शाश्वत सत्य है, जो जन्म लेता है उसका अंत निश्चित है।
Maran ↔ जीवन
जन्म और मरण का चक्र संसार का सनातन नियम है।
जीवन और मृत्यु ईश्वर के हाथ में है, मनुष्य का कर्तव्य केवल सत्कर्म करना है।
Aarambh ↔ अंत
किसी भी शुभ कार्य का आरंभ उत्साह से और अंत संतोष के साथ होना चाहिए।
अंत भला तो सब भला — कठिन शुरुआत के बाद भी सुखद अंत मन को शांति देता है।
Aadi ↔ अंत
संसार में जिसका आदि है उसका अंत भी सुनिश्चित है।
अंत भला तो सब भला — कठिन शुरुआत के बाद भी सुखद अंत मन को शांति देता है।
Iti ↔ अथ
ग्रंथ के आरंभ में अथ और समापन पर इति लिखा जाता है।
अथ योगानुशासनम् — महर्षि पतंजलि ने योग सूत्र का श्रीगणेश अथ शब्द से किया।
Uday ↔ अस्त
सूर्य का पूर्व में उदय और पश्चिम में अस्त होना प्रकृति का अटल नियम है।
शाम को सूर्य अस्त होते ही पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौटने लगते हैं।
Utthaan ↔ पतन
परिश्रम और एकता राष्ट्र के उत्थान का मार्ग प्रशस्त करते हैं जबकि आपसी फूट पतन लाती है।
अहंकार बड़े-बड़े साम्राज्यों के पतन का प्रमुख कारण बना है।
Unnati ↔ अवनति
शिक्षा और विज्ञान में उन्नति करने वाला देश कभी अवनति के गर्त में नहीं गिरता।
आलस्य और कुप्रबंधन व्यापार को अवनति की ओर धकेल देते हैं।
Nirmaan ↔ विनाश
राष्ट्र के निर्माण में वर्षों लग जाते हैं, जबकि विनाश कुछ ही पलों में हो सकता है।
युद्ध केवल विनाश और संहार लाता है, शांति में ही लोक-कल्याण का निर्माण संभव है।
Laabh ↔ हानि
व्यापार में लाभ और हानि सिक्के के दो पहलुओं की तरह साथ-साथ चलते हैं।
समय व्यर्थ गंवाने से जो हानि होती है उसकी भरपाई धन से भी नहीं हो सकती।
Jay ↔ पराजय
धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने वाले की अंततः जय होती है और अधर्मी की पराजय।
साहसी खिलाड़ी पराजय से निराश होने के बजाय अपनी कमियों से सीख लेता है।
Vijay ↔ पराजय
सत्यमेव जयते — अंततः सत्य की ही विजय होती है।
साहसी खिलाड़ी पराजय से निराश होने के बजाय अपनी कमियों से सीख लेता है।
Jeet ↔ हार
खेल में जीत और हार से बढ़कर खेल भावना का महत्व होता है।
हार मान लेना ही सबसे बड़ी असफलता है, निरंतर प्रयास ही जीत की कुंजी है।
Milan ↔ विरह
दीर्घ विरह के पश्चात पुराने मित्रों का मिलन अत्यंत भावुक कर देने वाला था।
काव्य में विरह की वेदना मिलन के सुख को और अधिक गहरा बना देती है।
Sanyog ↔ वियोग
श्रृंगार रस के दो पक्ष होते हैं — संयोग और वियोग।
प्रियजनों का वियोग हृदय को भारी पीड़ा पहुंचाता है।
Maan ↔ अपमान
सज्जन व्यक्ति मान मिलने पर अभिमानी नहीं होते और अपमान होने पर संयम नहीं खोते।
किसी निर्धन का अपमान करना मानवता के विरुद्ध घोर पाप है।
Apmaan ↔ सम्मान
किसी निर्धन का अपमान करना मानवता के विरुद्ध घोर पाप है।
गुरुजनों को यथोचित सम्मान देना चाहिए, किसी का तिरस्कार नहीं करना चाहिए।
Sammaan ↔ तिरस्कार
गुरुजनों को यथोचित सम्मान देना चाहिए, किसी का तिरस्कार नहीं करना चाहिए।
सत्कर्म का पुरस्कार मिलता है जबकि दुराचार का तिरस्कार ही फल होता है।
Tiraskaar ↔ पुरस्कार
सत्कर्म का पुरस्कार मिलता है जबकि दुराचार का तिरस्कार ही फल होता है।
उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छात्र को पुरस्कार मिला जबकि अनुशासनहीनता पर दंड दिया गया।
Yash ↔ अपयश
परोपकार से यश की प्राप्ति होती है, स्वार्थ केवल अपयश देता है।
गलत संगति में पड़ने से व्यक्ति को बिना कारण भी अपयश झेलना पड़ता है।
Keerti ↔ अपकीर्ति
दानवीर कर्ण की कीर्ति अमर है, दुर्योधन के कुकृत्यों ने उसे अपकीर्ति दी।
कुकर्मों से अर्जित अपकीर्ति कुल की पीढ़ियों तक बदनामी का कारण बन जाती है।
Prashansa ↔ निंदा
सच्चे मित्र सामने प्रशंसा करने के बजाय पीठ पीछे भी निंदा नहीं करते।
निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाय — कबीरदास जी के अनुसार निंदा करने वाला व्यक्ति सुधारक होता है।
Stuti ↔ निंदा
भक्त प्रभु की स्तुति करते हैं और अहंकार की निंदा करते हैं।
निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाय — कबीरदास जी के अनुसार निंदा करने वाला व्यक्ति सुधारक होता है।
Puraskaar ↔ दंड
उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छात्र को पुरस्कार मिला जबकि अनुशासनहीनता पर दंड दिया गया।
न्यायालय ने दोषी को कठोर दंड दिया।
Swami ↔ सेवक
दयालु स्वामी अपने सेवक को परिवार के सदस्य की भांति स्नेह देता है।
हनुमान जी भगवान श्रीराम के अनन्य सेवक और भक्त थे।
Raaja ↔ रंक
मृत्यु के द्वार पर राजा और रंक दोनों बराबर खड़े होते हैं।
समय का चक्र रंक को राजा और राजा को रंक बना देता है।
Maalik ↔ नौकर
सच्चा मालिक वही है जो नौकर के श्रम का यथोचित पारिश्रमिक समय पर दे।
नौकर की ईमानदारी देखकर मालिक ने उसे अपने व्यापार का प्रबंधक बना दिया।
Kraya ↔ विक्रय
व्यापार में क्रय और विक्रय के अंतर से ही लाभ निर्धारित होता है।
बाजार में अच्छी गुणवत्ता की वस्तुओं का विक्रय तेजी से होता है।
Aayaat ↔ निर्यात
देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आयात कम और निर्यात अधिक करना चाहिए।
भारतीय मसालों का विदेशों में बड़े पैमाने पर निर्यात होता है।
Aay ↔ व्यय
बुद्धिमान गृहस्थ अपनी आय के अनुसार ही व्यय करता है ताकि भविष्य सुरक्षित रहे।
अनावश्यक व्यय से बचकर बचत करना वित्तीय स्थिरता की नींव है।
Nakad ↔ उधार
दुकानदार ने नकद भुगतान पर छूट दी, उधार पर माल देने से मना कर दिया।
उधार लेना आसान है, किंतु उसे समय पर चुकाना ही सच्ची साख बनाता है।
Daata ↔ याचक
ईश्वर सबका परम दाता है, हम सब उसके सम्मुख याचक हैं।
दरवाजे पर आए याचक को खाली हाथ नहीं लौटाना चाहिए।
Grihastha ↔ संन्यासी
गृहस्थ धर्म निभाते हुए भी मनुष्य संन्यासी जैसी पवित्रता बनाए रख सकता है।
संन्यासी ने सांसारिक मोह-माया का त्याग कर सत्य की खोज शुरू की।
Naagarik ↔ ग्रामीण
नागरिक सुविधाओं का विस्तार ग्रामीण अंचलों तक पहुंचना आवश्यक है।
ग्रामीण जीवन की शांति और शुद्ध वायु शहरों की भागदौड़ में नहीं मिलती।
Graameen ↔ शहरी
ग्रामीण जीवन की शांति और शुद्ध वायु शहरों की भागदौड़ में नहीं मिलती।
शहरी चकाचौंध में कभी-कभी मनुष्य प्रकृति की सादगी और शांति को भूल बैठता है।
Shahar ↔ गाँव
शहर की चकाचौंध से दूर गाँव की सादगी मन को सुकून देती है।
भारत की आत्मा उसके गाँवों में बसती है, जिसे शहरों के विकास के साथ नहीं भूलना चाहिए।
Swadesh ↔ परदेश
स्वदेश की मिट्टी की खुशबू परदेश में रहने वाले प्रवासी को सदा अपनी ओर खींचती है।
परदेश में कितना भी धन मिले, स्वदेश जैसी आत्मीयता कहीं नहीं मिलती।
Desh ↔ विदेश
देश और विदेश दोनों में भारतीय संस्कृति की साख ऊंची है।
विदेश यात्रा से ज्ञान और दृष्टिकोण का विस्तार होता है।
Videsh ↔ स्वदेश
विदेश यात्रा से ज्ञान और दृष्टिकोण का विस्तार होता है।
स्वदेश की मिट्टी की खुशबू परदेश में रहने वाले प्रवासी को सदा अपनी ओर खींचती है।
Ekta ↔ अनेकता
अनेकता में एकता ही भारतीय राष्ट्र की सबसे अनूठी विशेषता है।
भाषा और वेशभूषा की अनेकता के बावजूद हम सब एक हैं।
Sangathan ↔ विघटन
मजबूत संगठन से कठिन लक्ष्य भी पा लिए जाते हैं, आंतरिक कलह से विघटन तय है।
राष्ट्रविरोधी ताकतें देश के विघटन का षड्यंत्र रचती हैं, जिसे सजग नागरिक विफल कर देते हैं।
Bandhan ↔ मुक्ति
अज्ञानता मनुष्य को बंधनों में जकड़ती है, ज्ञान उसे मुक्ति का मार्ग दिखाता है।
कुरीतियों और अंधविश्वासों से मुक्ति पाकर ही समाज प्रगति कर सकता है।
Niyam ↔ अनियम
यातायात के नियमों का पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य है।
दैनिक जीवन में अनियम और अनियमितता स्वास्थ्य तथा कार्य दोनों को बिगाड़ देती है।
Vaidh ↔ अवैध
व्यापार केवल वैध साधनों से करना चाहिए, अवैध धन कभी सुख नहीं देता।
प्रशासन ने अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाकर सरकारी भूमि को मुक्त कराया।
Vidhi ↔ निषेध
शास्त्रों में शुभ कार्यों के लिए विधि और पापकर्मों के लिए निषेध बताया गया है।
अस्पतालों में धूम्रपान पूर्णतः निषेध है।
Aagya ↔ अवज्ञा
सैनिक सेनापति की आज्ञा का अक्षरशः पालन करते हैं, अवज्ञा करने पर कोर्ट मार्शल होता है।
माता-पिता की अवज्ञा करने वाली संतान कभी सच्चे मन से सुखी नहीं रह सकती।
Kartavya ↔ अकर्तव्य
संकट के समय देश की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है।
कर्तव्य और अकर्तव्य का भेद समझकर ही धर्मसम्मत जीवन जिया जा सकता है।
Adhikaar ↔ कर्तव्य
अधिकारों की मांग के साथ-साथ कर्तव्यों का निर्वहन भी समान रूप से जरूरी है।
संकट के समय देश की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है।
Aagman ↔ प्रस्थान
वसंत के आगमन से प्रकृति खिल उठती है, जबकि पतझड़ का प्रस्थान शीत का अंत करता है।
ट्रेन के प्रस्थान का समय घोषित होते ही यात्री प्लेटफॉर्म पर एकत्र हो गए।
Pravesh ↔ निकास
सभागार में प्रवेश के लिए अलग द्वार था और निकास के लिए दूसरा मार्ग।
वर्षा के जल का उचित निकास न होने से गलियों में पानी भर गया।
Aaroh ↔ अवरोह
संगीत में स्वरों के आरोह और अवरोह का सही संतुलन ही राग की सुंदरता बढ़ाता है।
पर्वतारोही के लिए जितना कठिन आरोह होता है, उतना ही सावधानीपूर्वक अवरोह करना पड़ता है।
Chadhaav ↔ उतार
जीवन में उतार और चढ़ाव स्वाभाविक हैं, दोनों में समभाव रखना ही योग है।
कठिन पहाड़ी रास्ते पर तीव्र उतार के समय वाहन की गति नियंत्रित रखनी चाहिए।
Aadar ↔ अनादर
बड़ों का आदर करना हमारी संस्कृति का मूल आधार है।
किसी के अतिथि का अनादर करना भारतीय परंपरा के विपरीत है।
Swaagat ↔ तिरस्कार
अतिथि का द्वार पर आत्मीय स्वागत किया गया।
सत्कर्म का पुरस्कार मिलता है जबकि दुराचार का तिरस्कार ही फल होता है।
Samraat ↔ सामंत
सम्राट का आदेश पूरे साम्राज्य के सामंतों और जनता के लिए सर्वोपरि था।
सामंत अपने क्षेत्र में कर वसूलते थे और सम्राट को खिराज भेजते थे।
Var ↔ वधू
विवाह समारोह में वर और वधू दोनों ने अग्नि को साक्षी मानकर फेरे लिए।
ससुराल में नई वधू का पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत हुआ।
Pati ↔ पत्नी
गृहस्थ जीवन में पति और पत्नी गृहस्थी की गाड़ी के दो पहिये होते हैं।
सुख-दुख में साथ निभाने वाली पत्नी जीवन की सबसे मजबूत संबल होती है।
Purush ↔ स्त्री
संविधान की दृष्टि में पुरुष और स्त्री दोनों को समान अधिकार व अवसर प्राप्त हैं।
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः — जहां स्त्री का सम्मान होता है वहां देवों का वास होता है।
Nar ↔ नारी
राष्ट्र के निर्माण में नर और नारी दोनों का योगदान बराबर है।
नारी शक्ति का सम्मान ही किसी भी प्रगतिशील समाज का सच्चा मापदंड है।
Bhaai ↔ बहन
रक्षाबंधन पर भाई बहन की रक्षा का संकल्प दोहराता है।
भाई-बहन का रिश्ता निस्वार्थ स्नेह और अटूट विश्वास का प्रतीक है।
Maata ↔ पिता
माता का प्रेम संसार में सबसे निस्वार्थ और अनमोल माना गया है।
पिता परिवार का संबल और बालकों के भविष्य के कुशल मार्गदर्शक होते हैं।
Shikshak ↔ छात्र
कक्षा में शिक्षक ज्ञान प्रदान करते हैं और छात्र एकाग्रता से अध्ययन करते हैं।
अनुशासित छात्र अपने गुरु का आदर कर जीवन में महान ऊंचाइयां छूता है।
Shishya ↔ गुरु
सच्चा शिष्य गुरु द्वारा दिए गए ज्ञान को जनकल्याण में समर्पित करता है।
छंद शास्त्र में गुरु मात्रा का भार दो गिना जाता है जबकि लघु मात्रा का मान एक होता है।
Adhyaapak ↔ विद्यार्थी
एक समर्पित अध्यापक समाज के भविष्य का सच्चा निर्माता होता है।
विद्यार्थी जीवन कठिन तपस्या का काल होता है जिसमें चरित्र का निर्माण होता है।
Lekhak ↔ पाठक
लेखक अपनी कलम से समाज की विसंगतियों को उजागर करता है।
सच्चा लेखक वही है जो पाठक के हृदय को छू सके।
Vakta ↔ श्रोता
कुशल वक्ता अपने विचारों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है।
सभामंच पर ओजस्वी वक्ता और ध्यानमग्न श्रोता का सामंजस्य अद्भुत था।
Karta ↔ कर्म
व्याकरण में क्रिया का प्रभाव कर्ता अथवा कर्म पर पड़ता है।
संसार में कर्ता का मान उसके द्वारा किए गए निष्काम कर्म से ही निर्धारित होता है।
Bhokta ↔ त्यागी
मनुष्य अपने कर्मों का स्वयं ही कर्ता और भोक्ता होता है।
त्यागी पुरुष संसार के भोगों में लिप्त न होकर लोककल्याण में जीवन समर्पित करता है।
Swatantrata ↔ परतंत्रता
स्वतंत्रता सेनानियों के असीम बलिदान से देश को परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्ति मिली।
परतंत्रता मनुष्य के आत्मसम्मान और संस्कृति को नष्ट कर देती है।
Daasata ↔ मुक्ति
दासता से मुक्ति पाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग ने संघर्ष किया।
कुरीतियों और अंधविश्वासों से मुक्ति पाकर ही समाज प्रगति कर सकता है।
Vidya ↔ अविद्या
विद्या अंधकार को दूर कर प्रकाश फैलाती है, अविद्या मनुष्य को भटकाती है।
अविद्या के आवरण को हटाए बिना आत्मज्ञान की प्राप्ति असंभव है।
Gopneeya ↔ सार्वजनिक
सुरक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जाते।
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना प्रत्येक देशवासी का पावन नागरिक कर्तव्य है।
Vyasthi ↔ समष्टि
व्यष्टि और समष्टि के बीच संतुलन ही स्वस्थ समाज की पहचान है।
समष्टि के कल्याण में ही व्यष्टि का हित समाहित रहता है।
Lokatntra ↔ तानाशाही
लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को मतदान करने और अपने विचार व्यक्त करने का मूल अधिकार होता है।
तानाशाही में शासन की संपूर्ण शक्ति एक व्यक्ति के हाथों में केंद्रित हो जाती है और जनता के अधिकार छिन जाते हैं।
Ganatntra ↔ राजतंत्र
गणतंत्र की स्थापना के बाद देश का सर्वोच्च पद वंशानुगत न होकर जनता द्वारा निर्वाचित होने लगा।
प्राचीन राजतंत्र में राजा की इच्छा ही सर्वोपरि कानून मानी जाती थी और उत्तराधिकार परिवार में रहता था।
Snvidhaana ↔ अराजकता
संविधान देश के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है और शासन को मर्यादा में बांधता है।
कानून व्यवस्था के ध्वस्त होते ही समाज में अराजकता फैल जाती है और निर्बल वर्ग असुरक्षित हो जाता है।
Sattaaroodh ↔ विपक्षी
सत्तारूढ़ दल पर जनकल्याणकारी योजनाओं को निष्पक्ष रूप से धरातल पर उतारने की जवाबदेही होती है।
संसद में विपक्षी दल नीतियों की निष्पक्ष समीक्षा कर शासन की कमियों को उजागर करता है।
Sarvasammati ↔ मतभेद
ग्राम सुधार योजना का प्रस्ताव पंचायत में सभी सदस्यों की सर्वसम्मति से पारित हो गया।
बजट के आवंटन को लेकर समिति के सदस्यों के बीच गहरा मतभेद उभर कर सामने आया।
Sahabhaagitaa ↔ तटस्थता
स्वच्छ भारत अभियान की वास्तविक सफलता जन-सहभागिता पर ही पूरी तरह निर्भर करती है।
समाज की समस्याओं के प्रति जागरूक न होकर तटस्थता बरतना नागरिक दायित्वों की उपेक्षा है।
Svaichchhika ↔ बाध्यकारी
रक्तदान शिविर में युवाओं ने स्वैच्छिक रूप से आगे आकर बड़ी संख्या में रक्तदान किया।
यातायात के नियमों का पालन करना हर नागरिक के लिए बाध्यकारी होता है, न कि ऐच्छिक।
Jimmedaaree ↔ लापरवाही
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना प्रत्येक जागरूक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है।
सड़क पर कचरा फेंकने जैसी छोटी सी लापरवाही भी पूरे मोहल्ले में गंदगी फैला देती है।
Satyanishthaa ↔ भ्रष्टाचार
अधिकारी ने पूरी सत्यनिष्ठा के साथ सरकारी धन का सदुपयोग करते हुए निर्माण कार्य पूरा कराया।
भ्रष्टाचार के कारण समाज में योग्य व्यक्तियों का हक मारा जाता है और व्यवस्था कमजोर होती है।
Aatithya ↔ अनातिथ्य
भारतीय संस्कृति में आतिथ्य सत्कार को ईश्वर सेवा के समान आदरणीय माना गया है।
द्वार पर आए भूखे आगंतुक के साथ अनातिथ्य का व्यवहार करना सामाजिक मर्यादा के विपरीत है।
Snskriti ↔ विकृति
हमारे देश की प्राचीन संस्कृति विविधता में एकता और पारस्परिक सद्भाव का संदेश देती है।
नशाखोरी और अभद्रता समाज के ताने-बाने में पैदा होने वाली गंभीर विकृति के लक्षण हैं।
Saamaajika ↔ असामाजिक
सामूहिक विवाह और उत्सव सामाजिक मेलजोल व भाईचारे को सुदृढ़ करने के उत्तम माध्यम हैं।
सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले असामाजिक तत्वों पर पुलिस कड़ी नजर रखती है।
Saamudaayika ↔ व्यक्तिगत
गांव के विकास के लिए सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया जहाँ सभी एकत्र हो सकें।
सार्वजनिक निर्णय लेते समय व्यक्तिगत लाभ और स्वार्थ को पीछे रखना पड़ता है।
Samarasataa ↔ विषमता
समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने से ही राष्ट्र में वास्तविक समरसता स्थापित होती है।
आर्थिक और सामाजिक विषमता को दूर किए बिना एक सशक्त समाज का निर्माण संभव नहीं है।
Samaanataa ↔ असमानता
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव किए बिना समानता की गारंटी है।
अवसरों की असमानता से वंचित वर्गों के युवाओं का आत्मविश्वास डगमगा जाता है।
Bhedabhaava ↔ सद्भाव
विद्यालय में सभी छात्रों के साथ बिना किसी भेदभाव के समान व्यवहार किया जाना चाहिए।
विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सद्भाव बनाए रखने के लिए शांति समिति की बैठक आयोजित हुई।
Pakshapaata ↔ तटस्थता
न्यायाधीश को किसी भी पक्षपात से ऊपर उठकर केवल साक्ष्यों के आधार पर फैसला देना चाहिए।
पंचायती न्याय में निष्पक्षता और तटस्थता की नीति अपनाने से दोनों पक्षों का विश्वास बना रहता है।
Bahishkaara ↔ समावेशन
स्वाधीनता आंदोलन के समय विदेशी वस्तुओं का पूर्ण बहिष्कार कर स्वदेशी अपनाने का आह्वान किया गया।
दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में लाने के लिए नीतिगत समावेशन और विशेष सुविधाएं आवश्यक हैं।
Vibhaajana ↔ एकीकरण
स्वार्थपरक राजनीति समाज का विभाजन कर लोगों को परस्पर बांटने का प्रयास करती है।
सरदार पटेल ने सैकड़ों रियासतों का एकीकरण करके भारत को एक सूत्र में पिरोया।
Sveekriti ↔ अस्वीकृति
आधुनिक प्रगतिशील विचारों को समाज की स्वीकृति मिलने में कुछ समय अवश्य लगता है।
कुप्रथाओं और अंधविश्वासों की सार्वभौमिक अस्वीकृति से ही समाज उन्नत बन सकता है।
Sharana ↔ निष्कासन
युद्धग्रस्त क्षेत्र से आए असहाय परिवारों को शरण देकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
समाज विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर अपराधी का मोहल्ले से निष्कासन कर दिया गया।
Nirvaasana ↔ पुनर्वास
तानाशाह शासक ने अपने राजनीतिक विरोधियों को देश से निर्वासन की क्रूर सजा सुनाई।
बाढ़ पीड़ितों के लिए शासन ने सुरक्षित स्थल पर नए घरों का निर्माण कर पुनर्वास कराया।
Parnparaa ↔ आधुनिकता
भारतीय विवाह समारोहों में सदियों पुरानी समृद्ध परंपरा का दर्शन सहज ही होता है।
डिजिटल तकनीक और आधुनिकता ने जीवनशैली को सुगम व त्वरित बना दिया है।
Kureeti ↔ सुरीति
दहेज प्रथा जैसी अमानवीय कुरीति के विरुद्ध समाज के सभी प्रबुद्ध लोगों को आवाज उठानी चाहिए।
अतिथि सत्कार और बड़ों का आदर करना समाज की प्राचीन व कल्याणकारी सुरीति है।
Roodhi ↔ नवाचार
बिना सोचे-समझे पुरानी रूढ़ि को ढोते रहने से समाज की प्रगति अवरुद्ध हो जाती है।
कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में नए नवाचार अपनाने से ग्रामीण जीवन में क्रांति आ गई है।
Kuleena ↔ अकुलीन
प्राचीन काल में कुलीन परिवारों के आचार-विचार को समाज में आदर्श माना जाता था।
लोकतंत्र में व्यक्ति की योग्यता मायने रखती है, चाहे वह किसी भी अकुलीन परिवार से क्यों न हो।
Aabhijaatya ↔ जनसाधारण
राजदरबार का वैभवशाली आभिजात्य वर्ग सुख-सुविधाओं और ठाठ-बाट में जीवन व्यतीत करता था।
सच्चे लोकतंत्र का मुख्य उद्देश्य जनसाधारण के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना और उन्हें अधिकार देना है।
Ghareloo ↔ व्यावसायिक
गृहणियां घरेलू कार्यों के साथ-साथ परिवार के प्रत्येक सदस्य के स्वास्थ्य का ध्यान रखती हैं।
आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन पर नगर निगम ने प्रतिबंध लगा दिया है।
Mahala ↔ झोपड़ी
राजधानी के भव्य महल में संगमरमर के खंभे और विशाल उद्यान बने हुए थे।
नदी किनारे अपनी छोटी सी झोपड़ी में गरीब मछुआरा सादगी और संतोष से जीवन बिता रहा था।
Jhopadpattee ↔ अट्टालिका
महानगरों के किनारे बसी झोपड़पट्टी में पेयजल और स्वच्छता की भारी किल्लत रहती है।
शहर के आधुनिक हिस्से में शीशे और कंक्रीट से बनी भव्य अट्टालिकाएं आकाश छूती दिखाई देती हैं।
Nivaasa ↔ प्रवास
अवकाश प्राप्त करने के उपरांत उन्होंने अपने पैतृक गांव में स्थायी निवास बना लिया।
उच्च शिक्षा और रोजगार के सिलसिले में युवाओं को वर्षों तक परदेस में प्रवास करना पड़ता है।
Pravaasee ↔ मूलनिवासी
उद्योगों में काम करने वाले कई प्रवासी श्रमिक त्योहारों पर अपने पैतृक गांव लौट आते हैं।
अंडमान के द्वीपों पर रहने वाले मूलनिवासी जनजातियों की अपनी विशिष्ट संस्कृति और परंपरा है।
Shaharee ↔ देहाती
शहरी जीवन में तकनीकी सुविधाएं प्रचुर मात्रा में हैं परंतु प्रदूषण और भागदौड़ भी अधिक है।
देहाती परिवेश में खुली हवा, हरियाली और परस्पर मेलजोल की आत्मीयता देखने को मिलती है।
Kasbaa ↔ महानगर
हमारा छोटा सा कस्बा चारों ओर खेतों से घिरा हुआ शांत और सुरक्षित इलाका है।
मुंबई और दिल्ली जैसे विशाल महानगर चौबीसों घंटे दौड़ते रहने वाले आर्थिक केंद्र हैं।
Ekaakee ↔ सकुटुंब
अकेले फ्लैट में रहने वाला वृद्ध व्यक्ति एकाकी जीवन की तन्हाई से जूझ रहा था।
विवाह समारोह में पधारे सभी अतिथियों का सकुटुंब अर्थात परिवार सहित हार्दिक स्वागत किया गया।
Grihasthee ↔ वैराग्य
ईमानदारी से अपनी गृहस्थी संभालना और बाल-बच्चों का भरण-पोषण करना भी एक महान साधना है।
सांसारिक मोह-माया से विरक्त होकर उन्होंने वैराग्य धारण कर लिया और संन्यास मार्ग चुन लिया।
Vidhura ↔ सपत्नीक
पत्नी के देहांत के पश्चात वह वृद्ध व्यक्ति विधुर जीवन बिताते हुए एकांत में रहने लगा।
धार्मिक अनुष्ठान और यज्ञ में यजमान को सपत्नीक अर्थात पत्नी सहित बैठने का शास्त्रीय विधान है।
Shayana ↔ जागरण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार रात्रि में समय पर शयन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
परीक्षा की तैयारी के लिए छात्रों ने पूरी रात जागरण किया और पढ़ाई में जुटे रहे।
Aahaara ↔ निराहार
शारीरिक ऊर्जा बनाए रखने के लिए समय पर सुपाच्य और पौष्टिक आहार लेना आवश्यक है।
एकादशी के पावन पर्व पर श्रद्धालु पूरे दिन निराहार रहकर ईश्वर का ध्यान करते हैं।
Bhojana ↔ उपवास
दोपहर के समय परिवार के सभी सदस्यों ने एक साथ बैठकर प्रेमपूर्वक भोजन किया।
शारीरिक शुद्धि और संयम के उद्देश्य से उन्होंने सप्ताह में एक दिन उपवास रखने का नियम बनाया।
Svachchhataa ↔ गंदगी
आसपास स्वच्छता बनाए रखने से संक्रामक रोगों का फैलाव रुकता है और पर्यावरण सुंदर बनता है।
सड़क किनारे फैली गंदगी से दुर्गंध उठ रही थी और मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा था।
Svaasthyakara ↔ अस्वास्थ्यकर
हरी सब्जियां, ताजे फल और स्वच्छ पेयजल स्वास्थ्यकर जीवनशैली की आधारशिला हैं।
खुले में बिकने वाला दूषित भोजन और बासी खाद्य पदार्थ अस्वास्थ्यकर सिद्ध होते हैं।
Savaaree ↔ पैदल
दफ्तर जाने के लिए उन्होंने मेट्रो ट्रेन की सवारी को सबसे तेज और सुविधाजनक विकल्प माना।
स्वास्थ्य और फिटनेस बनाए रखने के लिए प्रातःकाल पैदल चलना एक उत्तम व्यायाम है।
Vyavasthaa ↔ अव्यवस्था
मेले में पुलिस प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण की चाक-चौबंद व्यवस्था कर रखी थी।
बिना योजना के आयोजित कार्यक्रम में भगदड़ मचने से चारों ओर अव्यवस्था फैल गई।
Anushaasana ↔ अनुशासनहीनता
कतार में खड़े होकर शांतिपूर्वक प्रतीक्षा करना सभ्य समाज के अनुशासन का परिचायक है।
कक्षा या सार्वजनिक स्थल पर अनुशासनहीनता दिखाने वाले छात्रों को चेतावनी दी गई।
Dndaneeya ↔ क्षम्य
पर्यावरण नियमों का उल्लंघन कर कचरा जलाना कानून के तहत एक दंडनीय अपराध है।
अनजाने में हुई छोटी-मोटी मानवीय भूल सदैव क्षम्य मानी जाती है।
Aparaadhee ↔ निरपराधी
न्यायालय ने साक्ष्यों की जांच के उपरांत उस शातिर ठग को अपराधी घोषित कर जेल भेज दिया।
सच्चे न्याय का सिद्धांत यही है कि किसी भी निर्दोष व निरपराधी को सजा न मिले।
Kaaraavaasa ↔ मुक्ति
गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में दोषी पाए जाने पर उसे पांच वर्ष का कठोर कारावास हुआ।
सजा की अवधि पूरी होने के उपरांत बंदी को जेल से सम्मानपूर्वक मुक्ति मिल गई।
Deshabhakta ↔ देशद्रोही
सीमा पर मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाला सैनिक सच्चा देशभक्त होता है।
देश की गोपनीय सुरक्षा जानकारियां शत्रुओं को बेचने वाला व्यक्ति अक्षम्य देशद्रोही है।
Suvyavasthaa ↔ कुव्यवस्था
स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत शहर की यातायात और जल सुव्यवस्था की सर्वत्र सराहना हुई।
अस्पताल में दवाओं की कमी और गंदगी प्रशासन की घोर कुव्यवस्था का जीता-जागता प्रमाण थी।
Sauhaarda ↔ कटुता
ईद और दीवाली पर एक-दूसरे के घर जाकर बधाई देने से समाज में आपसी सौहार्द प्रगाढ़ होता है।
अफवाहों और भड़काऊ भाषणों के कारण दोनों पक्षों के मध्य अविश्वास और कटुता उत्पन्न हो गई।
Vaimanasya ↔ सौमनस्य
पुरानी रंजिश और वैमनस्य को भुलाकर दोनों परिवारों ने आपस में हाथ मिला लिए।
पड़ोसियों के बीच प्रेम और सौमनस्य का वातावरण रहने से जीवन सुखमय बन जाता है।
Prakash ↔ अंधकार
ज्ञान का प्रकाश अज्ञान के गहन अंधकार को पूरी तरह मिटा देता है।
दीपक की एक छोटी सी लौ भी घने अंधकार पर प्रकाश की विजय सुनिश्चित करती है।
Dhoop ↔ छांव
कड़कड़ाती धूप के बाद घने वृक्ष की शीतल छांव पथिक को नवजीवन प्रदान करती है।
जीवन धूप और छांव की भांति सुख और दुख का अनवरत संगम है।
Chhaya ↔ धूप
पेड़ स्वयं कड़ी धूप सहकर दूसरों को सुखद छाया प्रदान करते हैं।
कड़कड़ाती धूप के बाद घने वृक्ष की शीतल छांव पथिक को नवजीवन प्रदान करती है।
Aatap ↔ छाया
ग्रीष्म ऋतु के प्रचंड आतप से बचने के लिए राहगीर सघन कुंज की छाया में विश्राम करते हैं।
पेड़ स्वयं कड़ी धूप सहकर दूसरों को सुखद छाया प्रदान करते हैं।
Jal ↔ अग्नि
सृष्टि के संतुलन हेतु शीतल जल और प्रज्वलित अग्नि दोनों तत्व अनिवार्य हैं।
अग्नि की भीषण लपटों को शांत करने के लिए प्रचुर मात्रा में जल की आवश्यकता होती है।
Thal ↔ जल
उभयचर प्राणी जल और थल दोनों ही स्थानों पर सुगमता से जीवन यापन कर सकते हैं।
सृष्टि के संतुलन हेतु शीतल जल और प्रज्वलित अग्नि दोनों तत्व अनिवार्य हैं।
Aakash ↔ पाताल
सच्चे साधक की कीर्ति आकाश से लेकर पाताल तक सभी दिशाओं में गूंजती है।
राजा बलि ने अपना सर्वस्व अर्पित कर आकाश और पाताल दोनों लोकों में यश अर्जित किया।
Dhara ↔ गगन
वर्षा की बूंदें गगन से गिरकर प्यासी धरा को तृप्त और हरा-भरा कर देती हैं।
विशाल गगन और शस्य-श्यामला धरा के मध्य प्रकृति की अनुपम शोभा दृष्टिगोचर होती है।
Avani ↔ अंबर
शरद पूर्णिमा की चांदनी अवनि से अंबर तक धवल चादर की तरह बिछ जाती है।
पक्षी खुले अंबर में उड़ान भरकर अवनि के मनोरम दृश्यों का अवलोकन करते हैं।
Vyom ↔ धरा
वैज्ञानिकों ने धरा से रॉकेट प्रक्षेपित कर अनंत व्योम के रहस्यों को उजागर किया।
वर्षा की बूंदें गगन से गिरकर प्यासी धरा को तृप्त और हरा-भरा कर देती हैं।
Bhoomi ↔ गगन
भूमि की उर्वरा शक्ति और गगन से प्राप्त धूप मिलकर फसलों को लहलहाते हैं।
विशाल गगन और शस्य-श्यामला धरा के मध्य प्रकृति की अनुपम शोभा दृष्टिगोचर होती है।
Jwaar ↔ भाटा
चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण से समुद्र में ज्वार और भाटा की चक्रीय प्रक्रिया घटित होती है।
भाटा के समय समुद्र का जलस्तर पीछे हट जाता है, जबकि ज्वार के समय लहरें तट को लांघती हैं।
Poornima ↔ अमावस्या
पूर्णिमा की रात जहां आलोकित होती है, वहीं अमावस्या की रात्रि घोर अंधकारमय रहती है।
अमावस्या के घने अंधेरे में दीवाली के दीप जलाकर प्रकाश पर्व मनाया जाता है।
Shukla Paksha ↔ कृष्ण पक्ष
हिंदू पंचांग में चंद्रमा की कलाओं के आधार पर शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष निर्धारित होते हैं।
कृष्ण पक्ष में रातें क्रमशः अंधेरी होती जाती हैं, जबकि शुक्ल पक्ष में चांदनी बढ़ती है।
Prabhat ↔ संध्या
प्रभात की ताजी किरणें उमंग लाती हैं और संध्या का शांत वातावरण विश्राम का संदेश देता है।
संध्या होते ही पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौट आते हैं जिन्हें वे प्रभात में छोड़ गए थे।
Usha ↔ संध्या
उषा की लालिमा नभ में बिखरते ही संपूर्ण प्रकृति में नवचेतना का संचार हो जाता है।
संध्या होते ही पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौट आते हैं जिन्हें वे प्रभात में छोड़ गए थे।
Bhor ↔ सांझ
किसान भोर होते ही खेतों पर चल पड़ते हैं और सांझ ढलने पर ही घर वापस लौटते हैं।
सांझ के झुटपुटे में चरवाहे अपनी गायों को चराकर गांव की ओर हांक लाते हैं।
Suryoday ↔ सूर्यास्त
सूर्योदय के समय पूर्व दिशा स्वर्णिम और सूर्यास्त के समय पश्चिम दिशा सिंदूरी दिखती है।
सूर्यास्त के साथ ही दिनभर की आपाधापी थम जाती है और शीतल निशा का आगमन होता है।
Udayachal ↔ अस्ताचल
सूर्य उदयाचल पर उदित होकर दिनभर आलोक बिखेरने के पश्चात अस्ताचल की ओर प्रस्थान करता है।
अस्ताचलगामी सूर्य की रश्मियां शांत सरोवरों पर मनोहारी प्रतिबिंब रचती हैं।
Uttar ↔ दक्षिण
ध्रुवतारा सदा उत्तर दिशा में चमकता है, जिसके विपरीत दक्षिण दिशा स्थित होती है।
हिमालय भारत के उत्तर में और हिंद महासागर दक्षिण दिशा में स्थित है।
Poorva ↔ पश्चिम
सूर्य पूर्व दिशा से उदित होकर पश्चिम दिशा में अस्त होता है।
प्राचीन काल से व्यापारिक जहाजों का आवागमन पूर्व और पश्चिम के मध्य निरंतर रहा है।
Praachi ↔ प्रतीची
प्राची के भाल पर सिंदूरी सूर्य की छटा देखते ही प्रतीची का अंधकार स्वतः लुप्त हो गया।
संध्याकाल में प्रतीची में ढलता सूर्य प्राची के प्रभात का संदेश अग्रिम रूप से देता है।
Udeechi ↔ अवाची
उदीची से बहती बर्फीली बयार ने अवाची की उष्णता को शीतलता में रूपांतरित कर दिया।
शास्त्रों में उदीची और अवाची को क्रमशः उत्तर और दक्षिण दिशा का द्योतक माना गया है।
Oordhva ↔ अधः
अग्नि की लौ सदा ऊर्ध्व गति करती है, जबकि जल का प्रवाह अधः दिशा में होता है।
सदाचारी विचार मनुष्य को ऊर्ध्व लोक की ओर उठाते हैं, जबकि हीन कर्म अधः पतन कराते हैं।
Upatyaka ↔ अधित्यका
पहाड़ की तलहटी वाली भूमि को उपत्यका और शिखर पर समतल भूमि को अधित्यका कहते हैं।
अधित्यका पर ठंडी और तीव्र हवाएं चलती हैं, जबकि उपत्यका में जलवायु मृदुल रहती है।
Shikhar ↔ तलहटी
पर्वतारोही तलहटी से कठिन चढ़ाई आरंभ कर अंततः बर्फ से ढके शिखर पर ध्वज फहराते हैं।
पर्वत की तलहटी में घने वन और नदियां बहती हैं, जबकि शिखर निर्जन और हिमच्छादित रहता है।
Ativrishti ↔ अनावृष्टि
अतिवृष्टि से जहां विनाशकारी बाढ़ आती है, वहीं अनावृष्टि से फसलों का अकाल पड़ जाता है।
किसानों के लिए अनावृष्टि का संकट अतिवृष्टि से भी अधिक गंभीर सिद्ध होता है।
Alpavrishti ↔ अतिवृष्टि
अल्पवृष्टि के कारण जलाशय सूखने लगे, जबकि पड़ोस के राज्य अतिवृष्टि से जलमग्न थे।
अतिवृष्टि से जहां विनाशकारी बाढ़ आती है, वहीं अनावृष्टि से फसलों का अकाल पड़ जाता है।
Vrishti ↔ अनावृष्टि
समय पर होने वाली वृष्टि भूमि को संवारती है, जबकि अनावृष्टि हरियाली को नष्ट कर देती है।
किसानों के लिए अनावृष्टि का संकट अतिवृष्टि से भी अधिक गंभीर सिद्ध होता है।
Baadh ↔ सूखा
नदियों में बाढ़ आने से गांव डूब जाते हैं, जबकि सूखे में पीने के पानी की किल्लत हो जाती है।
प्रकृति के प्रकोप से बचना कठिन है; कभी सूखा धरती को सुखाता है तो कभी बाढ़ सब बहा ले जाती है।
Urvar ↔ ऊसर
गंगा के मैदानों की उर्वर मिट्टी में प्रचुर अन्न उपजता है, जबकि ऊसर भूमि में तिनका भी नहीं उगता।
कठिन परिश्रम और वैज्ञानिक तकनीकों से किसान ऊसर भूमि को भी उर्वर बना देते हैं।
Upjaaoo ↔ बंजर
उपजाऊ मिट्टी देश की खाद्य सुरक्षा का आधार है, जिसे बंजर होने से बचाना हमारा कर्तव्य है।
सिंचाई की समुचित व्यवस्था होने पर बंजर जमीन भी उपजाऊ खेत में तब्दील हो जाती है।
Greeshm ↔ शीत
ग्रीष्म की तीखी तपन के पश्चात आने वाली शीत ऋतु तन और मन दोनों को राहत देती है।
शीत ऋतु में गुनगुनी धूप का आनंद ग्रीष्म ऋतु की छाया जैसा सुखद प्रतीत होता है।
Ushna ↔ शीतल
रेगिस्तान की उष्ण हवाओं के मध्य शीतल जल का झरना किसी वरदान से कम नहीं लगता।
पर्वतों से बहती शीतल बयार थके हुए यात्रियों की उष्ण थकान को पलभर में हर लेती है।
Tapt ↔ शीतल
तप्त बालू पर नंगे पैर चलना कठिन होता है, जबकि शीतल जलधारा में चलना अत्यंत सुखद है।
पर्वतों से बहती शीतल बयार थके हुए यात्रियों की उष्ण थकान को पलभर में हर लेती है।
Vasant ↔ पतझड़
पतझड़ में पेड़ पत्ते गिरा देते हैं, किंतु वसंत आते ही वे नवपल्लवों से सुशोभित हो उठते हैं।
जीवन का नियम है कि पतझड़ के उदास दिनों के बाद वसंत की सुनहरी बहार अवश्य आती है।
Aalok ↔ तिमिर
महापुरुषों के विचार समाज से अज्ञान रूपी तिमिर को हटाकर आलोक का प्रसार करते हैं।
एक नन्हा सा दीप भी गहन तिमिर को चीरकर आलोक की किरण बिखेरने में सक्षम होता है।
Jyoti ↔ तम
उपनिषद् का अमर संदेश है: तमसो मा ज्योतिर्गमय अर्थात् अंधकार से प्रकाश की ओर चलो।
सद्गुरु का सान्निध्य मन के अज्ञानांधकार तम को मिटाकर ज्ञान की पावन ज्योति जगाता है।
Jaagriti ↔ सुषुप्ति
प्रभात की प्रथम किरण के साथ प्रकृति में नव जागृति की लहर दौड़ जाती है।
शीत ऋतु में अनेक वन्य जीव सुषुप्ति में चले जाते हैं और वसंत में जागृति प्राप्त करते हैं।
Registaan ↔ नखलिस्तान
धधकते रेगिस्तान के मध्य हरा-भरा नखलिस्तान थके यात्रियों को अमृत तुल्य शांति देता है।
नखलिस्तान में खजूर के पेड़ और मीठे पानी का स्रोत मरुभूमि के यात्रियों का संबल बनता है।
Samudra ↔ मरुस्थल
पृथ्वी का एक छोर अपार जलराशि वाले समुद्र से भरा है तो दूसरा शुष्क मरुस्थल से आच्छादित है।
मरुस्थल में पानी की एक-एक बूंद बहुमूल्य मानी जाती है, जहां दूर-दूर तक केवल रेत ही रेत होती है।
Pravah ↔ ठहराव
नदी का निरंतर प्रवाह जीवन की गतिशीलता सिखाता है, जबकि ठहराव सड़न उत्पन्न करता है।
जल में यदि प्रवाह न रहे और ठहराव आ जाए, तो वह अपनी ताजगी और निर्मलता खो देता है।
Udgam ↔ संगम
गंगा का उद्गम गंगोत्री हिमनद से होता है और प्रयागराज में उसका त्रिवेणी संगम दर्शनीय है।
पर्वतों से निकली नदियां जब पावन संगम पर मिलती हैं तो वह तीर्थ बन जाता है।
Muhaana ↔ उद्गम
पर्वतों से निकलने वाला नदी का उद्गम संकरा होता है, किंतु समुद्र के निकट उसका मुहाना अत्यंत चौड़ा होता है।
गंगा का उद्गम गंगोत्री हिमनद से होता है और प्रयागराज में उसका त्रिवेणी संगम दर्शनीय है।
Surya ↔ चंद्र
सूर्य के तेज के समक्ष तारे छिप जाते हैं और चंद्र की शीतल आभा में नभ दमक उठता है।
सूर्य दिन में समस्त जगत को ऊर्जा प्रदान करता है और चंद्र रात्रि में शीतलता बिखरता है।
Naaisargik ↔ कृत्रिम
कश्मीर की घाटियों में नैसर्गिक सौंदर्य बिखरा पड़ा है, जिसकी तुलना किसी कृत्रिम रचना से नहीं हो सकती।
कृत्रिम सुगंध कुछ ही देर टिकती है, जबकि प्राकृतिक फूलों की महक वातावरण को महकाए रखती है।
Paarthiv ↔ अपार्थिव
मनुष्य का शरीर पार्थिव तत्वों से निर्मित है, जबकि उसकी आत्मा अपार्थिव और अमर है।
संतों के चेहरे पर अपार्थिव तेज झलकता है जो पार्थिव प्रलोभनों से परे होता है।
Saur ↔ चांद्र
खगोलशास्त्र में सौर वर्ष की गणना सूर्य की गति से और चांद्र मास की गणना चंद्रमा से होती है।
चांद्र कैलेंडर और सौर कैलेंडर के दिनों के अंतर को समायोजित करने के लिए अधिक मास आता है।
Dinkar ↔ निशाकर
दिनकर के उदय होते ही निशाकर की चांदनी आकाश में विलीन हो जाती है।
आकाश में निशाकर अपनी शीतल रश्मियों से धरती को शांत करता है जब दिनकर अस्त होता है।
Bhaanu ↔ शशि
भानु की प्रखर किरणें संपूर्ण जगत को प्रकाशवान करती हैं, जबकि शशि की किरणें सुखद शीतलता देती हैं।
नीले आकाश में पूर्णिमा का शशि भानु के अस्त होने के उपरांत मनमोहक रूप धर लेता है।
Toofan ↔ शांति
समुद्र में उठे भीषण तूफान के शांत होने पर ही चारों ओर सुखद शांति का वातावरण बना।
भीषण तूफान के थम जाने के बाद फैली गहरी शांति प्रकृति के नवजीवन का संकेत देती है।
Aandhi ↔ मंद समीर
रेत की भयानक आंधी थम जाने के बाद बहने वाला मंद समीर अत्यंत राहतकारी लगा।
आंधी की धूल भरी गर्जना के बाद बहने वाला मंद समीर हर पथिक को असीम राहत देता है।
Tarang ↔ निस्तब्धता
सरोवर में पत्ता गिरने से तरंग उठती है, जबकि बिना हलचल के उसमें निस्तब्धता छाई रहती है।
गहरे वन में रात के समय छाई निस्तब्धता को केवल दूर बहती नदी की कलकल ध्वनि तोड़ती है।
Kallol ↔ शांति
पवन के झोंकों से सरिता में कल्लोल होने लगा, जिससे जल की पूर्व शांति भंग हो गई।
भीषण तूफान के थम जाने के बाद फैली गहरी शांति प्रकृति के नवजीवन का संकेत देती है।
Megh ↔ धूप
आसमान में काले मेघ छाते ही तेज धूप छिप गई और मौसम सुहाना हो गया।
कड़कड़ाती धूप के बाद घने वृक्ष की शीतल छांव पथिक को नवजीवन प्रदान करती है।
Ghata ↔ धूप
सावन की घनी घटा घिरने से दिन में ही अंधेरा छा गया और धूप का नामोनिशान न रहा।
कड़कड़ाती धूप के बाद घने वृक्ष की शीतल छांव पथिक को नवजीवन प्रदान करती है।
Paala ↔ धूप
शीत लहर में पाला पड़ने से सब्जियों की फसल नष्ट हो जाती है, जिसे धूप ही बचा सकती है।
कड़कड़ाती धूप के बाद घने वृक्ष की शीतल छांव पथिक को नवजीवन प्रदान करती है।
Barf ↔ आग
बर्फ जैसी ठंडक को दूर करने के लिए अलाव की आग ही सहारा बनती है।
शीत की कड़कड़ाती बर्फ में अलाव की आग ही जीवनदायिनी गर्माहट प्रदान करती है।
Him ↔ ताप
सूर्य के प्रचंड ताप से हिमालय का पिघलता हिम पावन सदानीरा नदियों को जन्म देता है।
सूर्य का प्रचंड ताप पर्वतों के जमे हिम को पिघलाकर सदानीरा नदियों में बदल देता है।
Kshitij ↔ केंद्र
क्षितिज पर धरती और आकाश मिलते प्रतीत होते हैं, जबकि अंतरिक्ष का केंद्र अनंत में है।
क्षितिज की अनंत परिधि का संतुलन उसके स्थिर केंद्र पर ही टिका रहता है।
Dhundh ↔ स्पष्टता
सर्दियों की सुबह छाई घनी धुंध धूप खिलने पर अद्भुत स्पष्टता में बदल गई।
सर्दियों की सुबह छाई धुंध छंटते ही वातावरण में अद्भुत स्पष्टता फैल गई।
Kuhaasa ↔ स्वच्छ आकाश
पहाड़ी मार्ग पर कुहासा छाने से दृश्यता समाप्त हो गई, जो स्वच्छ आकाश होने पर ही लौटी।
पहाड़ी घाटियों में कुहासा हटने पर नीला स्वच्छ आकाश पर्यटकों का मन मोह लेता है।
Bramhand ↔ अणु
प्राचीन ऋषियों के अनुसार जो कुछ विशाल ब्रह्मांड में है, वह सूक्ष्मतम अणु में भी समाया है।
विज्ञान सिद्ध करता है कि एक छोटे से अणु के विखंडन से विराट ऊर्जा की उत्पत्ति होती है।
Anu ↔ विराट
विज्ञान सिद्ध करता है कि एक छोटे से अणु के विखंडन से विराट ऊर्जा की उत्पत्ति होती है।
सूक्ष्म अणु के विखंडन से विराट ऊर्जा की उत्पत्ति प्रकृति का विस्मयकारी नियम है।
Van ↔ मरु
हरे-भरे सघन वन वर्षा को आकर्षित करते हैं, जबकि शुष्क मरु में जल की बूंदें तरसती हैं।
वृक्षारोपण अभियान के माध्यम से मरु को भी हरे-भरे वन में बदला जा सकता है।
Aranya ↔ बस्ती
तपस्वी जन शांत अरण्य में साधना करते हैं और कोलाहलपूर्ण मानव बस्ती से दूर रहते हैं।
नदी किनारे बसी बस्ती में रौनक रहती है, जबकि नदी के पार बीहड़ अरण्य फैला है।
Dhaara ↔ भंवर
कुशल नाविक शांत धारा में नाव दौड़ाते हैं और खतरनाक भंवर से नौका को बचाते हैं।
भंवर में फंसी नाव को किनारे की ओर मोड़ना नाविक के धैर्य और पराक्रम की परीक्षा है।
Parvat ↔ मैदान
पर्वत पर चढ़ाई जितनी दुष्कर होती है, समतल मैदान में चलना उतना ही सुगम होता है।
विशाल मैदान कृषि और बस्तियों के लिए आदर्श होते हैं, जबकि पर्वत वनों और खनिजों से संपन्न हैं।
Saagar ↔ तट
उफनता सागर दूर तक जलमग्न दिखाई देता है और उसकी लहरें आकर शांत तट से टकराती हैं।
नाविक ने यात्रियों को सुरक्षित तट पर उतार दिया और पुनः उफनती मझधार में उतर गया।
Tat ↔ मझधार
नाविक ने यात्रियों को सुरक्षित तट पर उतार दिया और पुनः उफनती मझधार में उतर गया।
सच्चा मित्र वह है जो मझधार में नाव फंसने पर भी साथ न छोड़े और किनारे तक पहुंचाए।
Sukaal ↔ अकाल
पर्याप्त मानसूनी वर्षा से देश में सुकाल का वातावरण बना और अकाल का भय समाप्त हो गया।
अकाल के दिनों में अन्न की भारी कमी हो गई थी, किंतु सुकाल आते ही कोठार भर गए।
Hemant ↔ ग्रीष्म
हेमंत ऋतु में सुबह की ओस मन मोह लेती है, जो ग्रीष्म की चिलचिलाती धूप से बिल्कुल उलट है।
ग्रीष्म की तीखी तपन के पश्चात आने वाली शीत ऋतु तन और मन दोनों को राहत देती है।
Shishir ↔ ग्रीष्म
शिशिर की कंपकंपी छुड़ाने वाली ठंडक के बाद प्रकृति ग्रीष्म की तपन से तपती है।
ग्रीष्म की तीखी तपन के पश्चात आने वाली शीत ऋतु तन और मन दोनों को राहत देती है।
Varsha ↔ सूखा
वर्षा ऋतु में नदियां लबालब भर जाती हैं, जबकि सूखे में उनकी तलहटी की रेत दिखने लगती है।
प्रकृति के प्रकोप से बचना कठिन है; कभी सूखा धरती को सुखाता है तो कभी बाढ़ सब बहा ले जाती है।
Pawan ↔ निर्वात
धरती के वायुमंडल में जीवनदायिनी पवन बहती है, जबकि अंतरिक्ष में निर्वात की स्थिति होती है।
प्रकाश की किरणें निर्वात में भी गमन कर सकती हैं, किंतु ध्वनि को संचरण हेतु वायु चाहिए।
Nirvaat ↔ वायु
प्रकाश की किरणें निर्वात में भी गमन कर सकती हैं, किंतु ध्वनि को संचरण हेतु वायु चाहिए।
अंतरिक्ष के शून्य निर्वात में जीवन संभव नहीं, धरती की सघन वायु ही श्वास देती है।
Jwalant ↔ शांत
ज्वालामुखी से निकलता ज्वलंत लावा कुछ दिनों बाद ठंडा होकर शांत चट्टान बन जाता है।
शांत समुद्र में यात्रा सुखद होती है जबकि अशांत लहरों में जहाज डगमगाने लगता है।
Mareechika ↔ यथार्थ
रेगिस्तान में जल का भ्रम मरीचिका कहलाता है, जिसके पीछे भागने के बजाय यथार्थ को स्वीकारना चाहिए।
रेगिस्तान की छलती मरीचिका के भ्रम से निकलकर यथार्थ को स्वीकारना ही विवेक है।
Daldal ↔ ठोस भूमि
दलदल में पैर पड़ते ही व्यक्ति धंसने लगता है, इसलिए ठोस भूमि पर ही मार्ग बनाना सुरक्षित है।
दलदल के भ्रामक धंसाव से बचकर ठोस भूमि पर कदम रखना ही सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करता है।
Anoop ↔ जांगल
प्राचीन भूगोल में जलप्रचुर आर्द्र भूमि को अनूप और शुष्क झाड़ीदार प्रदेश को जांगल कहा जाता था।
जांगल प्रदेश में कांटेदार वनस्पतियां उगती हैं, जबकि अनूप भूमि में धान और कमल खिलते हैं।
Rateela ↔ पथरीला
थार मरुस्थल का विस्तार रेतीला है, जबकि अरावली पर्वतमाला का मार्ग पथरीला और दुर्गम है।
पथरीला रास्ता चलने में कष्टप्रद होता है, किंतु रेतीले धोरों पर पैर तेजी से फिसलते हैं।
Prasphutan ↔ मुरझाहट
वसंत में कलियों का प्रस्फुटन होता है और ज्येष्ठ की दोपहरी में फूलों की मुरझाहट देखी जाती है।
पानी मिलते ही मुरझाहट त्यागकर मुरझाए पौधे पुनः लहलहा उठे।
Oos ↔ धूप
हरी घास पर चमकती ओस की बूंदें सुबह की धूप खिलते ही भाप बनकर उड़ जाती हैं।
कड़कड़ाती धूप के बाद घने वृक्ष की शीतल छांव पथिक को नवजीवन प्रदान करती है।
Saavan ↔ भादों
लोकगीतों में सावन के झूले और भादों की घनघोर झड़ी का बड़ा मार्मिक वर्णन मिलता है।
सावन की फुहारों के पश्चात भादों की घनघोर झड़ी नदियों को लबालब भर देती है।
Sharad ↔ ग्रीष्म
शरद ऋतु का निर्मल आकाश और शांत रातें ग्रीष्म ऋतु के तपन भरे दिनों से सर्वथा भिन्न हैं।
ग्रीष्म की तीखी तपन के पश्चात आने वाली शीत ऋतु तन और मन दोनों को राहत देती है।
Ulka ↔ स्थिर तारा
क्षणभर चमककर बुझने वाली उल्का की तुलना नभ के स्थिर तारा से कभी नहीं की जा सकती।
आकाश में क्षणभर चमककर बुझने वाली उल्का स्थिर तारा की शाश्वत दीप्ति की बराबरी नहीं कर सकती।
Parvatiya ↔ मैदानी
पर्वतीय क्षेत्रों की जीवनशैली कठोर होती है, जबकि मैदानी इलाकों में सुविधाएं अधिक सुलभ हैं।
मैदानी भाग में नदियों का बहाव धीमा और चौड़ा होता है, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में वह तीव्र होता है।
Tateeya ↔ अंतर्देशीय
तटीय राज्यों में समकारी समुद्री जलवायु रहती है, जबकि अंतर्देशीय भागों में तापमान विषम होता है।
अंतर्देशीय क्षेत्रों में सर्दियों में भारी ठंड और गर्मियों में भीषण लू का सामना करना पड़ता है।
Salil ↔ पावक
कवि ने प्रकृति के संतुलन को दर्शाते हुए शीतल सलिल और प्रज्वलित पावक का वर्णन किया है।
पावक सब कुछ भस्म कर पवित्र कर देती है, और सलिल उस तपन को शांत कर तृप्ति देता है।
Ishaan ↔ नैऋत्य
वास्तुशास्त्र में ईशान कोण को अत्यंत शुभ और नैऋत्य कोण को स्थिरता का सूचक माना गया है।
नैऋत्य दिशा से आने वाले दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी बादल संपूर्ण उपमहाद्वीप में वर्षा लाते हैं।
Aagney ↔ वायव्य
आग्नेय कोण अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि वायव्य कोण वायु तत्व से संबंधित है।
वायव्य दिशा से आने वाली शीतल पछुआ हवाओं ने आग्नेय कोण की गर्माहट को कम कर दिया।
Nirmalta ↔ मलिनता
पर्वतीय झरनों के जल की निर्मलता मन मोह लेती है, जिसे औद्योगिक कचरे की मलिनता से बचाना आवश्यक है।
नदियों में अपशिष्ट बहाने से जल में मलिनता बढ़ जाती है और जलीय जीवन संकट में पड़ जाता है।
Aardrata ↔ शुष्कता
वर्षा काल में वातावरण में आर्द्रता बढ़ जाने से पसीना जल्दी नहीं सूखता।
मरुस्थल की हवा में अत्यधिक शुष्कता होती है, जबकि तटीय क्षेत्रों में उच्च आर्द्रता पाई जाती है।
Nirjhar ↔ स्थिर जल
चट्टानों को चीरकर बहता कलकल निर्झर गति का प्रतीक है, जबकि शांत सरोवर विश्राम का।
पहाड़ों का चंचल निर्झर बहकर अंततः घाटी के शांत स्थिर जल में विश्राम पाता है।
Bhoogarbha ↔ अंतरिक्ष
खनिज संपदा भूगर्भ में छिपी है, जबकि सौर ऊर्जा का अक्षय स्रोत अंतरिक्ष से प्राप्त होता है।
मानव ने एक ओर गहरे भूगर्भ का अध्ययन किया है तो दूसरी ओर अनंत अंतरिक्ष की थाह ली है।
Sthal ↔ जल
स्थल मंडल पर मानव सभ्यताएं विकसित हुईं, जबकि जल मंडल संपूर्ण जीवमंडल को जीवन देता है।
सृष्टि के संतुलन हेतु शीतल जल और प्रज्वलित अग्नि दोनों तत्व अनिवार्य हैं।
Praval ↔ शैवाल
समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र में कठोर प्रवाल और सूक्ष्म शैवाल का परस्पर सहजीवन अद्वितीय है।
तालाब की सतह पर हरी शैवाल फैलने से धूप नीचे नहीं पहुंच पाती।
Kohra ↔ धूप
सर्दियों की सुबह घना कोहरा छाने से यातायात धीमा हो गया, जो दोपहर की धूप में सामान्य हुआ।
कड़कड़ाती धूप के बाद घने वृक्ष की शीतल छांव पथिक को नवजीवन प्रदान करती है।
Baadal ↔ खुला आसमान
काले बादल हटते ही नीला खुला आसमान चमक उठा और चारों तरफ रोशनी फैल गई।
खगोलीय अवलोकन के लिए खुला आसमान अनिवार्य शर्त है, क्योंकि बादलों में तारे नहीं दिखते।
Sakriya Jwalamukhi ↔ सुप्त ज्वालामुखी
सक्रिय ज्वालामुखी के आसपास बस्तियां बसाना जोखिम भरा होता है।
सुप्त ज्वालामुखी सदियों तक शांत रहता है, जबकि सक्रिय ज्वालामुखी से निरंतर धुआं और लावा निकलता है।
Mrit Jwalamukhi ↔ जीवंत ज्वालामुखी
मृत ज्वालामुखी के क्रेटर में समय के साथ वर्षा का जल भरकर सुंदर झील का रूप ले लेता है।
मृत ज्वालामुखी सदियों तक शांत रहता है, जबकि जीवंत ज्वालामुखी से निरंतर लावा निकलता है।
Sam Jalvayu ↔ विषम जलवायु
मुंबई जैसे समुद्री शहरों में सालभर सम जलवायु रहती है, जबकि दिल्ली में विषम जलवायु पाई जाती है।
रेगिस्तानी इलाकों की विषम जलवायु में दिन में भीषण गर्मी और रात में तीखी ठंड पड़ती है।
Sadabahaar Van ↔ पर्णपाती वन
पश्चिमी घाट के सदाबहार वन जैव विविधता के विपुल भंडार हैं जो कभी पत्ते विहीन नहीं होते।
पर्णपाती वन शुष्क मौसम में पत्ते गिरा देते हैं, जबकि सदाबहार वन सालभर घने हरे-भरे रहते हैं।
Pallav ↔ पतझर
ऋतुराज वसंत के आते ही वृक्षों की शाखाएं कोमल पल्लव से लद जाती हैं।
पतझर में पत्तियां त्यागने के बाद ही वृक्षों पर वसंत में कोमल पल्लव लहलहाते हैं।
Shuddhata ↔ प्रदूषण
हिमालयी वातावरण की शुद्धता में सांस लेने से असाध्य रोग भी शांत होने लगते हैं।
औद्योगिक कारखानों का धुआं वायु में प्रदूषण बढ़ाता है, जिसे वृक्षारोपण से शुद्धता में बदला जा सकता है।
Kankad ↔ रेत
नदी की तलहटी में भारी कंकड़ नीचे बैठ जाते हैं, जबकि बारीक रेत पानी के साथ बहती है।
रेत पर महल बनाने के बजाय चट्टान जैसी मजबूत नींव पर मकान बनाना बुद्धिमानी है।
Chattan ↔ रेत
समुद्र की लहरें विशाल चट्टान से टकराकर लौट जाती हैं, किंतु रेत के टीलों को बहा ले जाती हैं।
रेत पर महल बनाने के बजाय चट्टान जैसी मजबूत नींव पर मकान बनाना बुद्धिमानी है।
Mitti ↔ चट्टान
नरम मिट्टी में बीज अंकुरित होकर पेड़ बन जाते हैं, जबकि नंगी चट्टान पर हरियाली नहीं उगती।
समुद्र की लहरें विशाल चट्टान से टकराकर लौट जाती हैं, किंतु रेत के टीलों को बहा ले जाती हैं।
Gart ↔ शिखर
महासागरों के तल में हजारों मीटर गहरे गर्त पाए जाते हैं, जहां सूर्य का प्रकाश कभी नहीं पहुंचता।
एक ओर आकाश छूता हिम शिखर है तो दूसरी ओर गहरी गर्त का अंधकार है।
Bayaar ↔ तूफान
प्रातःकाल बहने वाली ठंडी बयार शरीर में स्फूर्ति भरती है, जबकि आंधी भय पैदा करती है।
समुद्र में उठे भीषण तूफान के शांत होने पर ही चारों ओर सुखद शांति का वातावरण बना।
Dhoop-Chhaun ↔ एकरस मौसम
पहाड़ों का धूप-छांव भरा मौसम पल-पल में बदलता रहता है और पर्यटकों को चमत्कृत करता है।
पहाड़ों की बदलती धूप-छांव के विपरीत तटीय इलाकों में एकरस मौसम का अनुभव होता है।
Nakshatra ↔ ग्रह
आकाश में नक्षत्र अपनी स्थिति पर स्थिर रहते हैं, जबकि ग्रह सूर्य की परिक्रमा में गतिशील रहते हैं।
ग्रहों का अपना प्रकाश नहीं होता, वे सूर्य जैसे नक्षत्रों के प्रकाश से चमकते हैं।
Upagrah ↔ ग्रह
चंद्रमा पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है, जो निरंतर अपने ग्रह की परिक्रमा करता है।
ग्रहों का अपना प्रकाश नहीं होता, वे सूर्य जैसे नक्षत्रों के प्रकाश से चमकते हैं।
Taraai ↔ पहाड़
तराई के दलदली और नम क्षेत्र में घने जंगल उगते हैं, जो ऊंचे पहाड़ की शुष्कता से भिन्न हैं।
तराई के नम जंगलों से गुजरकर ही यात्री ऊंचे पहाड़ की बर्फीली चोटियों तक पहुंचते हैं।
Bhaabar ↔ तराई
भाबर के कंकरीले पत्थरों में नदियां विलुप्त हो जाती हैं और तराई के मैदान में पुनः प्रकट होती हैं।
तराई के दलदली और नम क्षेत्र में घने जंगल उगते हैं, जो ऊंचे पहाड़ की शुष्कता से भिन्न हैं।
Chakravaat ↔ प्रतिचक्रवात
चक्रवात आने पर भारी बारिश और तबाही होती है, जबकि प्रतिचक्रवात में मौसम साफ और शांत रहता है।
प्रतिचक्रवात वायुमंडलीय उच्च दबाव का क्षेत्र होता है जिसमें हवाएं बाहर की ओर प्रवाहित होती हैं।
Bhooskhalan ↔ स्थिर भूमि
भारी बारिश के कारण पहाड़ों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है, जहां स्थिर भूमि भी दरकने लगती है।
भूस्खलन के खतरे वाले ढलानों पर बस्तियां बसाने के बजाय स्थिर भूमि पर निर्माण सुरक्षित है।
Jal-Strot ↔ मरुभूमि
पहाड़ों के प्राकृतिक जलस्रोत घाटी के निवासियों की प्यास बुझाते हैं, जहां मरुभूमि का अभाव है।
मरुभूमि में मीलों तक हरियाली का नामोनिशान नहीं मिलता, जहां केवल कंटीले कैक्टस उगते हैं।
Loo ↔ शीत लहर
दोपहर में चलने वाली गर्म लू शरीर का जल सोख लेती है, इसलिए छाछ और पानी पीते रहना चाहिए।
जनवरी में शीत लहर से लोग कांप उठते हैं, जबकि मई-जून में लू से बचने के लिए घरों में बंद रहते हैं।
Jungle ↔ शहर
जंगल में वन्यजीव स्वतंत्र विचरण करते हैं, जबकि शहर में कंक्रीट की ऊंची इमारतें होती हैं।
प्रदूषण मुक्त जीवन जीने के लिए लोग कभी-कभी शहर का शोर छोड़कर जंगल की शांति की शरण लेते हैं।
Shasya-Shyaamla ↔ मरुस्थली
नहरों के पानी से राजस्थान की बंजर धरती भी शस्य-श्यामला उपजाऊ भूमि में बदल गई।
मरुस्थली में केवल रेतीले टीले और कंटीली झाड़ियां दृष्टिगोचर होती हैं।
Vaashp ↔ हिम
जल गर्म होकर वाष्प बनकर गगन में उड़ता है और अत्यधिक ठंड में हिम बनकर गिरता है।
सूर्य के प्रचंड ताप से हिमालय का पिघलता हिम पावन सदानीरा नदियों को जन्म देता है।
Garmi ↔ सर्दी
मई की भीषण गर्मी के पश्चात दिसंबर की कपकपाती सर्दी प्रकृति के ऋतुचक्र को पूर्ण करती है।
सर्दी के दिनों में गर्म चाय और धूप अत्यंत प्रिय लगती है, जो गर्मी में असह्य होती है।
Khushi ↔ दुख
सफलता मिलने पर पूरे परिवार में खुशी और उल्लास का माहौल बन गया।
संकट के समय धैर्य बनाए रखने से दुख और निराशा का प्रभाव कम हो जाता है।
Prem ↔ घृणा
सच्चा प्रेम वैर और शत्रुता की भावना को भी स्नेह में बदल देता है।
हृदय में घृणा पालने से स्वयं की मानसिक शांति नष्ट हो जाती है।
Asha ↔ निराशा
कठिन से कठिन समय में भी आशा की एक किरण जीवन को नई दिशा देती है।
असफलता से घबराकर निराशा के अंधकार में डूबना उचित नहीं है।
Krodh ↔ शांति
अत्यधिक क्रोध मनुष्य के विवेक और निर्णय लेने की क्षमता को नष्ट कर देता है।
विवाद के समय मानसिक शांति बनाए रखना ही सच्ची समझदारी है।
Harsh ↔ विषाद
उत्सव के अवसर पर चारों ओर हर्ष और आनंद की लहर दौड़ गई।
विपदा के क्षणों में मन को विषाद से उबारना आवश्यक होता है।
Utsah ↔ निरुत्साह
नवयुवकों का सच्चा उत्साह कठिन लक्ष्य को भी सुगम बना देता है।
निरंतर विफलता के कारण टीम में निरुत्साह फैलने लगा था।
Bhay ↔ साहस
मन में यदि अज्ञात का भय हो तो व्यक्ति आगे बढ़ने से हिचकिचाता है।
सच्चा साहस वही है जो विपत्ति के सामने निडर खड़ा रहे।
Anurag ↔ विराग
मातृभूमि के प्रति सच्चा अनुराग हर नागरिक के हृदय में होना चाहिए।
साधु पुरुषों का सांसारिक सुखों के प्रति विराग स्वाभाविक होता है।
Rag ↔ द्वेष
सांसारिक वस्तुओं के प्रति अंधा राग ही दुखों का मूल कारण बनता है।
दूसरों की उन्नति देखकर मन में द्वेष की भावना नहीं लानी चाहिए।
Santosh ↔ असंतोष
जीवन में सच्चा संतोष ही सबसे बड़ा धन माना गया है।
अकारण असंतोष मनुष्य को कभी सुखी नहीं रहने देता।
Dhairya ↔ अधैर्य
कठिनाइयों के बीच धैर्य रखना ही सफल मनुष्य की सबसे बड़ी पहचान है।
जल्दबाजी में अधैर्य दिखाना बनते हुए काम को बिगाड़ देता है।
Shanti ↔ अशांति
ध्यान और आत्मचिंतन से मन को गहन शांति की अनुभूति होती है।
आपसी अविश्वास के कारण पूरे समाज में अशांति फैल गई थी।
Prasannata ↔ खिन्नता
मित्रों से मिलकर उसके चेहरे पर स्वाभाविक प्रसन्नता झलकने लगी।
असफलता की सूचना पाकर उसके मन में गहरी खिन्नता छा गई।
Aanand ↔ शोक
सत्संग और संगीत के वातावरण में आत्मा को असीम आनंद मिलता है।
अप्रिय समाचार सुनकर पूरा नगर गहरे शोक में डूब गया।
Ullas ↔ अवसाद
विजय की घोषणा होते ही चारों ओर अपार उल्लास छा गया।
लगातार तनाव और असफलता व्यक्ति को गहरे अवसाद में धकेल सकती है।
Mamta ↔ निष्ठुरता
माँ की निस्वार्थ ममता हर संतान के लिए संसार का सबसे बड़ा संबल है।
मासूम जीवों पर अत्याचार करना घोर निष्ठुरता का परिचायक है।
Karuna ↔ क्रूरता
महात्मा बुद्ध के हृदय में सभी प्राणियों के प्रति अगाध करुणा थी।
युद्ध में दिखाई गई क्रूरता मानवता के माथे पर कलंक बन जाती है।
Daya ↔ निर्दयता
दीन-दुखियों पर दया करना मानव धर्म का सबसे प्रमुख अंग है।
लाचार पशुओं पर लाठी बरसाना मनुष्य की निर्दयता दर्शाता है।
Kshama ↔ दंड
क्षमा बलवानों का आभूषण है जो शत्रु को भी मित्र बना देती है।
न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोर दंड सुनाया।
Irshya ↔ सद्भाव
दूसरों की प्रतिष्ठा देखकर मन में ईर्ष्या पालना अपने ही सुख का नाश करना है।
सभी पड़ोसियों के प्रति सद्भाव रखने से समाज में शांति बनी रहती है।
Ahankar ↔ विनम्रता
रावण का मिथ्या अहंकार ही उसके समूल विनाश का कारण बना था।
विद्वान व्यक्तियों का सबसे बड़ा गुण उनकी सहज विनम्रता होती है।
Garv ↔ लज्जा
देश की रक्षा करते हुए प्राण न्योछावर करने वाले सैनिकों पर हमें गर्व है।
अनुचित आचरण करने पर व्यक्ति को समाज के सामने लज्जा उठानी पड़ती है।
Swabhiman ↔ हीनता
स्वाभिमान से जीना ही एक स्वतंत्र मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है।
गरीबी के कारण मन में कभी हीनता की भावना नहीं आने देनी चाहिए।
Moh ↔ विरक्ति
संतान के प्रति अंधा मोह कभी-कभी उचित और अनुचित का भेद भुला देता है।
संसार की नश्वरता को समझकर साधक के मन में विरक्ति उत्पन्न हो गई।
Trishna ↔ तृप्ति
धन की अंधी तृष्णा कभी शांत नहीं होती, वह बढ़ती ही जाती है।
सरल भोजन और शुद्ध विचारों से जीवन में सच्ची तृप्ति मिलती है।
Lobh ↔ त्याग
लोभ पाप का मूल है जो मनुष्य को अनैतिक मार्ग पर ले जाता है।
राष्ट्र सेवा के लिए अपना सर्वस्व त्याग करने वाले महापुरुष सदैव अमर रहते हैं।
Matsarya ↔ सौहार्द
मन में मात्सर्य और डाह रखने से मनुष्य अपनी ही शांति खो बैठता है।
पड़ोसियों के बीच आपसी सौहार्द से ही सुखमय जीवन संभव होता है।
Khed ↔ हर्ष
अपनी भूल का अहसास होने पर उसने विनम्रतापूर्वक खेद व्यक्त किया।
प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक मिलने पर विद्यालय में हर्ष छा गया।
Santap ↔ शीतलता
प्रियजन के वियोग का संताप हृदय को अंदर ही अंदर जलाता रहता है।
संतों के वचनों से तप्त मन को शीतलता और धैर्य प्राप्त होता है।
Peeda ↔ राहत
चोट की तीव्र पीड़ा से घायल व्यक्ति कराह उठा।
औषधि का लेप लगते ही रोगी को भारी पीड़ा से राहत मिली।
Vyatha ↔ सुख
दीन-दुखियों की मूक व्यथा देखकर परोपकारी व्यक्ति का हृदय द्रवित हो उठा।
संतुष्ट जीवन जीने वाले व्यक्ति को आत्मिक सुख का अनुभव होता है।
Sanshay ↔ विश्वास
संशय में पड़ा हुआ मनुष्य कभी कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाता।
सच्चे मित्रों के बीच अटूट विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति होता है।
Sandeh ↔ निश्चय
अकारण संदेह करने से प्रेमपूर्ण रिश्तों में भी दरार आ जाती है।
दृढ़ निश्चय के साथ काम करने पर कोई भी बाधा मार्ग नहीं रोक सकती।
Bhram ↔ यथार्थ
मृगतृष्णा के समान सांसारिक सुख केवल एक सुंदर भ्रम मात्र हैं।
कल्पना के आकाश से उतरकर यथार्थ की ठोस भूमि पर कार्य करना चाहिए।
Vyakulta ↔ स्थिरता
संकट के समय मन की व्याकुलता समस्याओं को और जटिल बना देती है।
मानसिक स्थिरता बनाए रखने से कठिन से कठिन परिस्थिति भी नियंत्रित हो जाती है।
Udweg ↔ शांतभाव
क्रोध और उद्वेग के क्षणों में लिया गया निर्णय प्रायः गलत साबित होता है।
योगी पुरुष हर परिस्थिति में शांतभाव धारण किए रहते हैं।
Chanchalta ↔ गंभीरता
बालकों की चंचलता स्वाभाविक और मन को मोहने वाली होती है।
महत्वपूर्ण विषयों पर विचार करते समय चेहरे पर गंभीरता आवश्यक है।
Kautuhal ↔ उदासीनता
वैज्ञानिक प्रयोगों के प्रति बच्चों का कौतूहल नई खोजों का बीज बोता है।
सामाजिक बुराइयों के प्रति उदासीनता बरतना नागरिकों को शोभा नहीं देता।
Ruchi ↔ अरुचि
साहित्य और कला के प्रति उसकी स्वाभाविक रुचि सराहनीय है।
अस्वस्थ भोजन के कारण बालक को पौष्टिक आहार से अरुचि होने लगी है।
Preeti ↔ द्वेष
परस्पर प्रीति और सौहार्द से ही परिवार का वातावरण सुखद रहता है।
हृदय में द्वेष रखने वाला मनुष्य कभी किसी का भला नहीं सोच सकता।
Sneh ↔ उपेक्षा
गुरुजनों का सच्चा स्नेह विद्यार्थियों के जीवन को प्रकाशमय बना देता है।
बुजुर्गों की उपेक्षा करना किसी भी सभ्य समाज के लिए अनुचित है।
Vatsalya ↔ उपेक्षा
माता-पिता का निस्वार्थ वात्सल्य संतान के सम्पूर्ण विकास का आधार है।
शिशुओं की उपेक्षा करने से उनका शारीरिक व मानसिक विकास बाधित होता है।
Sahanubhuti ↔ बेरुखी
विपदा के समय व्यक्त की गई सच्ची सहानुभूति पीड़ित को संबल देती है।
जरूरतमंदों के प्रति ऐसी बेरुखी दिखाना मानवीय मूल्यों के विपरीत है।
Samvedna ↔ संवेदनहीनता
कवि की गहरी संवेदना ही उसकी रचनाओं में अमर रस घोलती है।
सड़क दुर्घटना में पीड़ितों की मदद न करना घोर संवेदनहीनता का प्रमाण है।
Aatmiyata ↔ परायापन
अतिथि का स्वागत ऐसी आत्मीयता से किया गया कि वह अभिभूत हो गया।
परिवार में मतभेद बढ़ने से सदस्यों के बीच परायापन पनपने लगता है।
Apnapan ↔ बेगानापन
गाँव के लोगों के व्यवहार में जो अपनापन दिखता है, वह दुर्लभ है।
महानगरों की भीड़ में कभी-कभी मनुष्य बेगानापन महसूस करता है।
Nishtha ↔ विश्वासघात
सैनिकों ने मातृभूमि की रक्षा में अपनी अटूट निष्ठा का प्रमाण दिया।
मित्र के साथ विश्वासघात करना सबसे घृणित अपराध माना जाता है।
Bhakti ↔ विरक्ति
ईश्वर के प्रति अनन्य भक्ति हृदय को समस्त चिंताओं से मुक्त कर देती है।
धार्मिक आडंबरों को देखकर बुद्धिजीवियों में उनसे विरक्ति हो गई।
Shraddha ↔ अश्रद्धा
गुरुजनों के प्रति सच्ची श्रद्धा ही ज्ञान प्राप्ति का प्रथम द्वार है।
ज्ञान के प्रति अश्रद्धा रखने वाला व्यक्ति कभी शिक्षित नहीं हो सकता।
Aastha ↔ अनास्था
सत्य और धर्म पर दृढ़ आस्था रखने वाले व्यक्ति को कोई विचलित नहीं कर सकता।
संस्थानों के प्रति जनसाधारण की अनास्था लोकतंत्र के लिए घातक है।
Vishwas ↔ अविश्वास
व्यापार और साझेदारी की सफलता आपसी विश्वास पर ही टिकी होती है।
झूठ बोलने से साथियों के मन में अविश्वास पैदा हो जाता है।
Kritagyata ↔ कृतघ्नता
उपकार करने वाले के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना श्रेष्ठ संस्कारों की निशानी है।
सहायता प्राप्त करके भी उपकार भूल जाना घोर कृतघ्नता है।
Anugrah ↔ कोप
प्रभु के विशेष अनुग्रह से ही यह महान संकट टल सका।
राजा के भयानक कोप से सारा दरबार कांप उठा।
Kripa ↔ अवकृपा
गुरुजनों की कृपा से उसने परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया।
अधिकारी की अवकृपा के कारण योग्य कर्मचारी को पदोन्नति नहीं मिली।
Vardan ↔ अभिशाप
विज्ञान मानवता के लिए तब तक वरदान है जब तक उसका सदुपयोग हो।
यदि विनाशकारी अस्त्रों का प्रयोग हुआ तो विज्ञान एक अभिशाप बन जाएगा।
Aashish ↔ शाप
बड़ों का पावन आशीष जीवन की हर राह को आसान बना देता है।
पौराणिक कथाओं में क्रोधी ऋषियों के शाप से राजाओं का पतन वर्णित है।
Mangal ↔ अमंगल
नववर्ष के अवसर पर सभी ने एक-दूसरे के मंगल की कामना की।
समारोह के बीच अशुभ समाचार सुनकर सबने अमंगल की आशंका जताई।
Shubh ↔ अशुभ
गृह प्रवेश का यह मुहूर्त अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।
अशुभ संकेत देखकर यात्रा को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया।
Kalyan ↔ अकल्याण
राजा का मुख्य कर्तव्य अपनी प्रजा के सर्वांगीण कल्याण की चिंता करना है।
दुष्टों की संगति अंततः मनुष्य के अकल्याण का कारण बनती है।
Sumati ↔ कुमति
जहाँ सुमति तहाँ संपति नाना, यह नीतिवचन जीवन का सत्य है।
कुमति के वशीभूत होकर व्यक्ति अपने ही हितैषियों का अपमान कर बैठता है।
Subuddhi ↔ दुर्बुद्धि
ईश्वर से प्रार्थना है कि वह सबको सुबुद्धि और सद्विचार प्रदान करे।
दुर्बुद्धि के प्रभाव में आकर दुर्योधन ने पांडवों का अधिकार छीनने का प्रयास किया।
Sadbhavna ↔ दुर्भावना
विभिन्न समुदायों के बीच सद्भावना राष्ट्र की अखंडता का आधार है।
मन में दुर्भावना रखकर किया गया कोई भी कार्य सफल नहीं होता।
Dheer ↔ अधीर
विपत्तियों के आने पर धीर पुरुष कभी अपना संतुलन नहीं खोते।
ट्रेन के आने में देरी देखकर यात्री अधीर होने लगे।
Sahasi ↔ डरपोक
साहसी नाविकों ने उफनते समुद्र की विशाल लहरों को पार कर लिया।
डरपोक व्यक्ति छोटी सी परेशानी देखकर ही मैदान छोड़ देता है।
Nirbhay ↔ भयभीत
सत्य के मार्ग पर चलने वाला मनुष्य सदैव निर्भय रहता है।
शेर की दहाड़ सुनकर जंगल के सभी छोटे जीव भयभीत हो गए।
Nidar ↔ कातर
वह निडर बालक अंधकार में भी बिना किसी संकोच के आगे बढ़ता गया।
संकट की घड़ी में कातर दृष्टि से देखना कमजोरी की निशानी है।
Shoor ↔ भीरु
शूर सैनिक युद्धभूमि में अंतिम सांस तक वीरता से लड़े।
भीरु स्वभाव का व्यक्ति संघर्ष से सदा दूर भागता है।
Aanandit ↔ शोकाकुल
विवाह के शुभ अवसर पर सारा परिवार आनंदित था।
प्रियजन के अचानक निधन से सभी परिजन शोकाकुल हो उठे।
Harshit ↔ दुखी
अच्छे अंक प्राप्त करके छात्र का मन अत्यंत हर्षित था।
बीमारी के कारण असहाय रोगी दुखी और व्याकुल दिखाई दिया।
Mudit ↔ उदास
बच्चों की मीठी बातें सुनकर दादाजी का मन मुदित हो गया।
परीक्षा में मनचाहा फल न मिलने पर वह उदास बैठा रहा।
Pulkit ↔ संतप्त
प्रियतम के आगमन का समाचार पाकर उसका रोम-रोम पुलकित हो गया।
कठोर विरह की ज्वाला में संतप्त हृदय को कहीं चैन नहीं था।
Ullasit ↔ विषण्ण
होली के पावन पर्व पर सारा गाँव उल्लसित रंगों में रंग गया।
पराजय के उपरांत राजा विषण्ण भाव से महल के कोने में बैठा रहा।
Utsahit ↔ हतोत्साहित
अध्यापक की प्रशंसा सुनकर छात्र नए प्रोजेक्ट के लिए और उत्साहित हो गया।
कठोर आलोचना से किसी भी परिश्रमी को हतोत्साहित नहीं करना चाहिए।
Aashwast ↔ सशंक
चिकित्सक के सांत्वना भरे शब्दों से रोगी पूरी तरह आश्वस्त हो गया।
अपरिचित व्यक्ति के संदिग्ध व्यवहार से सब सशंक हो गए।
Nishchint ↔ चिंतित
पुत्री का विवाह संपन्न होने के बाद पिता निश्चिंत महसूस करने लगे।
परीक्षा की तिथि निकट आते ही छात्र चिंतित होने लगे।
Befikr ↔ फिक्रमंद
बाल्यावस्था में बच्चे भविष्य से बेफिक्र होकर खेलते हैं।
संतान के उज्ज्वल भविष्य के लिए माता-पिता सदैव फिक्रमंद रहते हैं।
Samyami ↔ असंयमी
संयमी व्यक्ति अपनी वाणी और इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखता है।
असंयमी खान-पान से व्यक्ति का स्वास्थ्य शीघ्र बिगड़ जाता है।
Ekagra ↔ विक्षिप्त
एकाग्र मन से अध्ययन करने पर जटिल विषय भी आसानी से समझ आ जाता है।
शोरगुल के वातावरण में मन विक्षिप्त होकर भटकने लगता है।
Sachet ↔ अचेत
सचेत नागरिक देश की सुरक्षा और स्वच्छता के प्रति जागरूक रहता है।
गंभीर दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति सड़क पर अचेत पड़ा था।
Satark ↔ असावधान
सीमा पर सतर्क सैनिक शत्रु की हर हलचल पर पैनी नजर रखते हैं।
असावधान चालक के कारण सड़क पर भारी दुर्घटना घट गई।
Jagrook ↔ उदासीन
जागरूक मतदाता ही लोकतंत्र की वास्तविक रीढ़ होते हैं।
पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर उदासीन बने रहना आत्मघाती है।
Sajag ↔ सुप्त
सजग पहरेदार ने रात में चोरों के षड्यंत्र को विफल कर दिया।
सर्दियों में अनेक जीव सुप्त अवस्था में चले जाते हैं।
Chaitanya ↔ जड़
मानव शरीर में वास करने वाली चैतन्य आत्मा ही समस्त कर्मों की साक्षी है।
पत्थर और मिट्टी जड़ पदार्थ हैं जिनमें चेतना का अभाव होता है।
Bhavuk ↔ कठोरहृदय
दीन-दुखियों की कथा सुनकर भावुक मनुष्य के आँसू निकल आते हैं।
कठोरहृदय व्यक्ति दूसरों के क्रंदन से भी अप्रभावित रहता है।
Sadashay ↔ दुराशय
सदाशय महापुरुष सदैव दूसरों के उत्थान का विचार करते हैं।
दुराशय व्यक्ति के मन में सदैव दूसरों को नीचा दिखाने का कुचक्र चलता रहता है।
Vatsal ↔ निष्ठुर
वत्सल पिता ने अपने दोनों बालकों को गले से लगा लिया।
निष्ठुर डाकुओं ने निरीह यात्रियों पर कोई दया नहीं दिखाई।
Kripalu ↔ क्रूर
कृपालु राजा ने गरीब प्रजा के सारे ऋण माफ कर दिए।
क्रूर शासक ने जनता पर भारी कर और यातनाएं लाद दीं।
Saday ↔ निर्दय
सदय न्यायाधीश ने अपराधी के पश्चाताप को देखकर सजा में नरमी बरती।
निर्दय शिकारी ने असहाय हिरण पर तीर चला दिया।
Utphull ↔ म्लान
सुखद वातावरण में बच्चों के चेहरे उत्फुल्ल कमल जैसे खिल उठे।
दुख की मार से पीड़ित व्यक्ति का मुखड़ा म्लान पड़ गया था।
Pramatta ↔ अमत्त
धन और सत्ता के नशे में प्रमत्त व्यक्ति किसी के अधिकार का सम्मान नहीं करता।
अमत्त और संयमी मनुष्य हर विषम परिस्थिति में संतुलित रहता है।
Namrata ↔ अकड़
नम्रता वह सद्गुण है जो कठोर हृदय को भी पिघला देता है।
मिथ्या अकड़ मनुष्य को अपनों से ही दूर कर देती है।
Vinay ↔ अविनय
विद्या ददाति विनयं—सच्ची शिक्षा मनुष्य को विनय और शील सिखाती है।
अविनय और अशिष्टता से बात करने वाला व्यक्ति कभी आदर नहीं पाता।
Sahansheelta ↔ असहिष्णुता
सहनशीलता विविधतापूर्ण समाज को एक सूत्र में पिरोए रखती है।
धार्मिक असहिष्णुता शांतिपूर्ण परिवेश में विष घोल देती है।
Sahishnu ↔ असहिष्णु
सहिष्णु व्यक्ति विपरीत विचारों का भी सम्मानपूर्वक श्रवण करता है।
असहिष्णु विचारधारा समाज को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट देती है।
Shantachitta ↔ उद्विग्न
शांतचित्त होकर कार्य करने से सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
भविष्य की अनिश्चितता से मन उद्विग्न और व्याकुल रहने लगा।
Prafullit ↔ खिन्न
वर्षा की फुहारें पड़ते ही कृषक का हृदय प्रफुल्लित हो उठा।
फसल खराब होने की आशंका से किसान का मन खिन्न हो गया।
Harshollas ↔ शोक
त्योहार के आगमन पर चारों दिशाओं में हर्षोल्लास छा गया।
अचानक आई विपत्ति ने पूरे उत्सव को शोक में बदल दिया।
Adheerta ↔ धैर्य
अधीरता में लिया गया कदम अक्सर नुकसान का कारण बनता है।
गंभीर संकट में भी धैर्य बनाए रखना महापुरुषों का लक्षण है।
Aavesh ↔ संयम
आवेश में आकर कोई भी अप्रिय वचन नहीं बोलना चाहिए।
संयम रखने से बड़े से बड़ा विवाद भी शांतिपूर्वक हल हो जाता है।
Uttejana ↔ प्रशांति
झूठी अफवाहों से समाज में अवांछित उत्तेजना फैल गई।
प्राकृतिक वातावरण में आत्मा को असीम प्रशांति मिलती है।
Shanka ↔ समाधान
मन में कोई भी शंका हो तो शिक्षक से बेझिझक पूछना चाहिए।
तर्कों और प्रमाणों से सभी जटिल प्रश्नों का समाधान हो गया।
Vishaktata ↔ अमृतत्व
कटु वचनों की विषाक्तता आपसी प्रेम को नष्ट कर देती है।
सत्य और प्रेम के वचनों में अमृतत्व का वास होता है।
Sadpravritti ↔ दुष्प्रवृत्ति
सत्संगति से बालकों में सद्प्रवृत्ति का विकास होता है।
बुरी संगति मन में दुष्प्रवृत्ति को जन्म देती है।
Sahanubhutik ↔ संवेदनशून्य
उसका सहानुभूतिक व्यवहार संकटग्रस्त लोगों के लिए संबल बना।
दर्द से कराहते व्यक्ति के प्रति संवेदनशून्य रुख निंदनीय है।
Prafullata ↔ म्लानता
प्रातःकालीन सैर से चेहरे पर अनूठी प्रफुल्लता आ जाती है।
बीमारी और चिंता के कारण चेहरे की म्लानता स्पष्ट दिखाई दे रही थी।
Aanandmay ↔ शोकमय
मित्रों का मिलन एक आनंदमय उत्सव बन गया।
आपदा के उपरांत बस्ती का वातावरण अत्यंत शोकमय था।
Mamtamayi ↔ निष्ठुरा
माँ की ममतामयी गोद में बच्चा सारे दुख भूल जाता है।
निष्ठुरा विमाता ने बालक के अधिकारों का हनन किया।
Sadbhavi ↔ दुर्भावी
सद्भावी पड़ोसी सुख और दुख दोनों में सदैव साथ खड़े रहते हैं।
दुर्भावी शत्रु सदा दूसरे के पतन की प्रतीक्षा में रहता है।
Udwignata ↔ प्रसन्नचित्तता
परीक्षा परिणाम से पूर्व छात्रों के मन में उद्विग्नता स्वाभाविक है।
ध्यान के अभ्यास से जीवन में प्रसन्नचित्तता बनी रहती है।
Hatotsah ↔ प्रोत्साहन
लगातार विफलता से खिलाड़ी का हतोत्साह बढ़ गया था।
कोच के प्रोत्साहन से उसने पुनः नए जोश से अभ्यास आरंभ किया।
Abhay ↔ भय
ईश्वर की शरण में जाने पर साधक को अभय का वरदान मिलता है।
शत्रु के भय से कांपते हुए सैनिक पीछे हटने लगे।
Amarsha ↔ सहिष्णुता
अपमान का स्मरण होते ही उसके मन में अमर्ष की ज्वाला भड़क उठी।
बुद्धिमानी इसी में है कि व्यक्ति कटु बातों पर भी सहिष्णुता बरते।
Saukhya ↔ दुख
सरल जीवन और सीमित इच्छाएं ही सच्चे सौख्य का रहस्य हैं।
लोभ और ईर्ष्या मनुष्य को कभी न खत्म होने वाले दुख में धकेलते हैं।
Klesh ↔ शांति
पारिवारिक क्लेश से घर का सारा आनंद नष्ट हो जाता है।
आपसी समझदारी से घर में पुनः सुख और शांति की स्थापना हुई।
Shokgrast ↔ आनंदमग्न
शोकग्रस्त परिवार को सांत्वना देने पूरा गाँव एकत्र हो गया।
उत्सव के संगीत में सब लोग आनंदमग्न होकर नाचने लगे।
Nirash ↔ आशावान
एक बार की असफलता से निराश होकर बैठना कायरता है।
कर्मठ मनुष्य हर संकट में भी आशावान बना रहता है।
Hatash ↔ उत्साही
विपदाओं से घिरने पर भी हताश न होना ही सफलता का मूल मंत्र है।
उत्साही सैनिक दुर्गम पहाड़ियों पर भी मुस्कुराते हुए चढ़ गए।
Rosh ↔ तुष्टि
अन्याय देखकर जनता के मन में भीषण रोष भड़क उठा।
न्यायसंगत निर्णय से दोनों पक्षों को पूर्ण तुष्टि प्राप्त हुई।
Daah ↔ सद्भाव
दूसरों की समृद्धि देखकर मन में डाह पालना अपनी ही काया को सुखाना है।
सद्भाव रखने वाला व्यक्ति सबकी प्रगति पर प्रसन्न होता है।
Umang ↔ उदासी
वसंत ऋतु के आगमन पर युवाओं के मन में नई उमंग जाग उठती है।
बार-बार की असफलता से उसके चेहरे पर उदासी छा गई।
Josh ↔ होश
युद्ध में सैनिकों का जोश आकाश गुंजा रहा था।
जोश के साथ-साथ होश रखना भी अत्यंत आवश्यक है ताकि भूल न हो।
Adheer ↔ शांत
परिणाम की प्रतीक्षा में उसका अधीर मन बार-बार घड़ी देख रहा था।
गहरे जल की तरह ज्ञानी पुरुष हर परिस्थिति में शांत रहता है।
Vyakul ↔ अविचलित
पुत्र के देर से लौटने पर माँ का मन व्याकुल होने लगा।
विशाल पर्वत के समान धीर पुरुष हर संकट में अविचलित रहता है।
Vichalit ↔ अविचलित
विपत्ति की आंधी भी सच्चे साधक को अपने संकल्प से विचलित नहीं कर सकती।
सत्यवादी हर प्रलोभन के सामने अविचलित और दृढ़ खड़ा रहता है।
Nishchal ↔ चंचल
उसका निश्चल प्रेम सभी औपचारिकताओं से परे और पवित्र है।
हवा के झोंके की तरह चंचल मन को वश में करना कठिन अभ्यास मांगता है।
Santushti ↔ असंतोष
कर्तव्य निष्ठा से पूरा करने के बाद मन को परम संतुष्टि मिलती है।
स्वार्थी मनुष्यों के मन का असंतोष कभी दूर नहीं होता।
Aatmasantosh ↔ आत्मग्लानि
सच्चाई के मार्ग पर चलने से जो आत्मसंतोष मिलता है, वह अनमोल है।
झूठ बोलकर लाभ उठाने के बाद भी मन में आत्मग्लानि बनी रहती है।
Sanshaygrast ↔ निसंशय
संशयग्रस्त व्यक्ति किसी भी नए कार्य की शुरुआत करने से डरता है।
निसंशय होकर आगे बढ़ने वाला कर्मवीर ही इतिहास रचता है।
Aatmavishwas ↔ आत्मसंदेह
कठिन परीक्षा में सफलता का सबसे बड़ा साधन दृढ़ आत्मविश्वास है।
आत्मसंदेह मनुष्य की आंतरिक क्षमताओं को नष्ट कर देता है।
Umangit ↔ मायूस
खेल के मैदान में खिलाड़ी उमंगित होकर भाग रहे थे।
मैच हारने के बाद टीम के सदस्य मायूस होकर बैठ गए।
Aananddayak ↔ कष्टप्रद
पहाड़ों की ताजी हवा में सैर करना अत्यंत आनंददायक अनुभव है।
भीषण गर्मी में लंबी पैदल यात्रा करना बहुत कष्टप्रद सिद्ध हुआ।
Sukhad ↔ दुखद
पुराने मित्रों से वर्षों बाद मिलना एक सुखद संयोग था।
विमान दुर्घटना का यह समाचार अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है।
Hridayasparshi ↔ हृदयहीन
उसकी हृदयस्पर्शी कविता सुनकर सभी श्रोताओं की आँखें भर आईं।
असहाय गरीबों पर अत्याचार करने वाला जमींदार एकदम हृदयहीन था।
Sauhardapoorna ↔ द्वेषपूर्ण
दोनों देशों के नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण वार्ता संपन्न हुई।
द्वेषपूर्ण प्रचार से समाज में कटुता और अविश्वास बढ़ता है।
Shantipriya ↔ युद्धप्रिय
भारत की परंपरा सदैव से एक शांतिप्रिय और सहिष्णु राष्ट्र की रही है।
युद्धप्रिय साम्राज्यवादी शासक पड़ोसी राज्यों पर आक्रमण करते रहते थे।
Samvedansheel ↔ संवेदनहीन
सम्वेदनशील शासन जनता की छोटी-बड़ी समस्याओं को तुरंत हल करता है।
जनता की पुकार पर संवेदनहीन बने रहना किसी भी सरकार को शोभा नहीं देता।
Dayavan ↔ निर्दयी
दयावान डॉक्टर ने गरीब मरीजों का निःशुल्क उपचार किया।
निर्दयी बंधुआ मालिक मजदूरों से रात-दिन बिना वेतन काम कराता था।
Mridubhashi ↔ कटुभाषी
मृदुभाषी व्यक्ति अपने मधुर वचनों से पराए को भी अपना बना लेता है।
कटुभाषी व्यक्ति से लोग बातचीत करने से कतराते हैं।
Madhurbhashi ↔ कर्कशभाषी
मधुरभाषी वक्ता के भाषण को सभा के सभी लोग मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे।
कर्कशभाषी नेता के चिल्लाने से सभा में असहजता फैल गई।
Priyavadi ↔ अप्रियवादी
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात्—सत्य बोलो और प्रियवादी बनो।
अप्रियवादी व्यक्ति सच को भी इतने कड़वे ढंग से कहता है कि वह सबको चुभता है।
Hansmukh ↔ रोतलू
हंसमुख स्वभाव का व्यक्ति जहाँ भी जाता है, वहाँ खुशियाँ बिखेर देता है।
रोतलू बच्चे को हर छोटी बात पर रोने की आदत पड़ जाती है।
Milansar ↔ एकांतप्रिय
उसका मिलनसार स्वभाव नए शहर में भी तुरंत दोस्त बना लेता है।
एकांतप्रिय लेखक भीड़-भाड़ से दूर एकांत में लिखना पसंद करता है।
Shirsh ↔ पाद
मानव शरीर में शीर्ष सबसे संवेदनशील और विचारशील अंग माना जाता है।
शारीरिक संतुलन बनाए रखने में पाद अर्थात पैरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
Agra ↔ पश्च
मस्तिष्क का अग्र भाग तार्किक निर्णय लेने और चिंतन का केंद्र होता है।
कशेरुक दंड का पश्च भाग पूरे शरीर को सीधा और सुदृढ़ आधार प्रदान करता है।
Mukh ↔ पृष्ठ
मुख पर खिली सहज मुस्कान व्यक्ति के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को दर्शाती है।
पृष्ठ अर्थात पीठ के व्यायाम से रीढ़ की हड्डी लचीली और मजबूत बनी रहती है।
Ang ↔ अनंग
मानव शरीर का प्रत्येक अंग एक-दूसरे के सहयोग से सुचारू रूप से कार्य करता है।
अनंग रूप में कामदेव भौतिक शरीर से रहित होकर केवल भाव रूप में विद्यमान माने जाते हैं।
Krish ↔ पुष्ट
लंबी बीमारी के कारण उसका शरीर कृश और दुर्बल दिखाई देने लगा था।
संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से पहलवान का शरीर गठीला और पुष्ट बन गया।
Swasth ↔ अस्वस्थ
स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
अस्वस्थ खान-पान और आलस्य से व्यक्ति का शरीर बीमारियों का घर बन जाता है।
Deerghkaay ↔ लघुकाय
दीर्घकाय रक्षक द्वार पर प्रहरी की भाँति दृढ़ता से खड़ा था।
लघुकाय बालक ने अपनी फुर्ती से बड़े-बड़े खिलाड़ियों को चकित कर दिया।
Netraheen ↔ दृष्टिवान
नेत्रहीन व्यक्तियों में स्पर्श और श्रवण की अद्भुत संवेदनशीलता पाई जाती है।
दृष्टिवान लोगों को अपनी आँखों की सुरक्षा और उचित देखभाल के प्रति सचेत रहना चाहिए।
Badhir ↔ श्रवणक्षम
बधिर छात्र संकेत भाषा की सहायता से संवाद स्थापित करने में निपुण था।
श्रवणक्षम व्यक्तियों को भी शोर-शराबे वाले वातावरण में कानों की रक्षा करनी चाहिए।
Pangu ↔ गतिशील
दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर पंगु पर्वतारोही ने भी ऊँचे शिखर पर तिरंगा फहराया।
गतिशील धावक ने अपनी शारीरिक क्षमता के बल पर मैराथन दौड़ में प्रथम स्थान पाया।
Dakshin ↔ वाम
हृदय शरीर के वाम भाग में और यकृत दक्षिण भाग में स्थित होता है।
वाम हाथ की अपेक्षा अधिकांश लोग दैनिक कार्यों में दक्षिण हाथ का प्रयोग करते हैं।
Uttaan ↔ अवतान
योगाभ्यास में शवासन के दौरान साधक उत्तान अवस्था में पीठ के बल विश्राम करता है।
मक्रासन करते समय साधक अवतान मुद्रा में पेट के बल लेटकर श्वास नियंत्रित करता है।
Rugna ↔ निरोग
रुग्ण शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए पौष्टिक आहार और समुचित विश्राम आवश्यक है।
निरोग काया को ही मानव जीवन का सबसे बड़ा सुख और वास्तविक धन कहा गया है।
Sudaul ↔ बेडौल
नियमित दंड-बैठक लगाने से युवक का शरीर सुडौल और आकर्षक बन गया।
दिनभर बैठे रहने और अस्वास्थ्यकर भोजन से शरीर बेडौल होकर भारी हो जाता है।
Tarun ↔ वृद्ध
तरुण अवस्था में शरीर में असीम ऊर्जा और नई उमंग का संचार रहता है।
वृद्ध अवस्था में शरीर की त्वचा झुर्रियों से भर जाती है और चाल धीमी हो जाती है।
Gaur ↔ श्याम
पहाड़ी अंचल में रहने वाले लोगों का शारीरिक वर्ण प्रायः गौर होता है।
भगवान कृष्ण के आकर्षक श्याम वर्ण की उपमा सजल मेघों से दी जाती है।
Lambotara ↔ नाटा
लंबोतरा कद होने के कारण उसे बास्केटबॉल टीम में सरलता से चुन लिया गया।
नाटा कद होने पर भी सैनिक की फुर्ती और बहादुरी अद्वितीय थी।
Sashakta ↔ अशक्त
सशक्त बाहों वाले मजदूर ने भारी पत्थर को क्षणभर में उठाकर किनारे रख दिया।
तीव्र ज्वर के कारण अशक्त हुआ रोगी बिना सहारे के बिस्तर से उठ नहीं पा रहा था।
Nirogi ↔ रोगी
निरोगी व्यक्ति हर मौसम के बदलाव को सहजता से सहन कर लेता है।
रोगी व्यक्ति को चिकित्सक के परामर्श के अनुसार दवा और परहेज रखना चाहिए।
Ksheenkaay ↔ हृष्टपुष्ट
कुपोषण के शिकार बच्चे क्षीणकाय होकर चलने-फिरने में भी कठिनाई महसूस करते हैं।
हृष्टपुष्ट शरीर वाले युवाओं ने मिट्टी के अखाड़े में कुश्ती का शानदार प्रदर्शन किया।
Oopari ↔ निचला
शरीर के ऊपरी भाग में फेफड़े, हृदय और मस्तिष्क जैसे नाजुक अंग सुरक्षित रहते हैं।
निचला भाग अर्थात् जांघें और पैर संपूर्ण शरीर का भार वहन करते हैं।
Baahari ↔ भीतरी
त्वचा शरीर की बाहरी सुरक्षा परत है जो धूल और संक्रमण से बचाती है।
भीतरी अंगों की कार्यप्रणाली को नियंत्रित रखने के लिए संतुलित रक्तचाप आवश्यक है।
Deh ↔ विदेह
पंचतत्वों से निर्मित यह भौतिक देह नश्वर है और समय के साथ ढल जाती है।
राजा जनक देह में रहते हुए भी आसक्तियों से परे होकर विदेह कहलाते थे।
Shaaririk ↔ मानसिक
कठिन दौड़ और तैराकी से शारीरिक सहनशक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
ध्यान और स्वाध्याय से मानसिक एकाग्रता और आंतरिक स्थिरता प्राप्त होती है।
Aindrik ↔ अतींद्रिय
रूप, रस, गंध और स्पर्श ऐंद्रिक प्रत्यक्ष के माध्यम से अनुभव किए जाते हैं।
परम समाधि की अनुभूति अतींद्रिय होती है जो चर्मचक्षुओं से नहीं जानी जा सकती।
Karnapriya ↔ कर्णकटु
बांसुरी की कर्णप्रिय धुन सुनकर कानों को अपार शांति का अनुभव हुआ।
वाहनों के हॉर्न का कर्णकटु शोर कानों के पर्दे को नुकसान पहुँचा सकता है।
Drishtiheen ↔ दृष्टिमान
दृष्टिहीन संगीतकार ने अपनी कर्ण-संवेदना के सहारे सुरों का अनूठा संसार रच दिया।
दृष्टिमान दर्शक प्रकृति के सतरंगी दृश्यों का आनंद अपनी आँखों से लेते हैं।
Angaheen ↔ सकलंग
दुर्घटना में अंगहीन हुए सैनिक ने कृत्रिम अंगों की सहायता से पुनः चलना सीखा।
सकलंग शरीर पाकर भी जो परिश्रम नहीं करता वह अपने सामर्थ्य का अपमान करता है।
Andha ↔ सुजाखा
अंधा राहगीर सफेद छड़ी की मदद से सड़क पार करने का प्रयास कर रहा था।
सुजाखा व्यक्ति दूर से ही आने वाले वाहन को देखकर सावधानी बरत लेता है।
Murchhit ↔ सजग
धूप की तपन न सह पाने के कारण छात्रा मैदान में मूर्च्छित होकर गिर पड़ी।
सजग चिकित्सक ने तुरंत प्राथमिक उपचार देकर उसके शरीर में चेतना लौटाई।
Spryshya ↔ अस्पृश्य
हाथ से छुआ जा सकने वाला भौतिक पदार्थ स्पृश्य संसार का अंग है।
प्रकाश और वायु जैसी सूक्ष्म तरंगें त्वचा से अस्पृश्य अथवा अमूर्त प्रतीत होती हैं।
Sashastra ↔ निहत्था
सीमा पर सशस्त्र प्रहरी हाथों में बंदूक लिए देश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं।
युद्ध के नियमों के अनुसार किसी निहत्थे व्यक्ति पर वार करना वर्जित है।
Daayaan ↔ बायाँ
लेखन और प्रमुख कार्यों के लिए अधिकांश लोग दायाँ हाथ प्राथमिकता से प्रयोग करते हैं।
कुछ लोग जन्मजात रूप से बायाँ हाथ अधिक कुशलता और गति से उपयोग करने में दक्ष होते हैं।
Nakha ↔ शिख
योग और आयुर्वेद में नख अर्थात पैर के नाखूनों की स्वच्छता और रंग से शारीरिक स्वास्थ्य परखा जाता है।
प्राचीन काव्य परंपरा में सौंदर्य का संपूर्ण वर्णन नख से शिख अर्थात पैर के अंगूठे से सिर की चोटी तक किया जाता था।
Vaksha ↔ पीठ
प्राणायाम के गहन अभ्यास से वक्ष का फैलाव बढ़ता है और फेफड़े पूर्ण क्षमता से कार्य करते हैं।
दैनिक योगासनों से पीठ की कशेरुकाएं लचीली रहती हैं और रीढ़ की हड्डी सुदृढ़ बनी रहती है।
Udara ↔ पृष्ठ
संतुलित और सुपाच्य आहार लेने से उदर की पाचन क्रिया सुचारू और रोगमुक्त बनी रहती है।
लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठने से पृष्ठ और कटि प्रदेश में पीड़ा होने लगती है।
Hathelee ↔ तलवा
ठंड के मौसम में दोनों हाथों की हथेली आपस में रगड़ने से शरीर में गर्माहट आती है।
नंगे पैर घास पर टहलने से पैर का तलवा प्राकृतिक रूप से ऊर्जावान और संवेदनशील बना रहता है।
Karatala ↔ पादतल
उत्साहवर्धन और शास्त्रीय ताल वादन में करतल ध्वनि अर्थात तालियों की गूंज सुनाई देती है।
प्राकृतिक एक्यूप्रेशर चिकित्सा में पादतल के विशेष बिंदुओं पर दबाव डालकर उपचार किया जाता है।
Shirobhaaga ↔ पादभाग
शारीरिक संरचना के अध्ययन में शिरोभाग मस्तिष्क और प्रमुख ज्ञानेंद्रियों का आवास माना गया है।
मानव शरीर का पादभाग पूरे शरीर का भार वहन करने तथा गतिशीलता प्रदान करने का आधार है।
Urobhaaga ↔ पृष्ठभाग
तैराकी करते समय उरोभाग की मांसपेशियां जल के प्रतिरोध को चीरते हुए आगे बढ़ती हैं।
शरीर को सीधा और संतुलित रखने के लिए पृष्ठभाग की रीढ़ की मांसपेशियां निरंतर सक्रिय रहती हैं।
Agrakaaya ↔ पश्चकाय
शरीर रचना विज्ञान में अग्रकाय के अंतर्गत वक्ष, उदर और प्रमुख सम्मुख अंग सम्मिलित होते हैं।
रीढ़ की हड्डी और नितंब पश्चकाय के मुख्य संरचनात्मक आधार बिंदु होते हैं।
Oordhvaanga ↔ अधोअंग
कसरत करते समय ऊर्ध्वांग अर्थात भुजाओं और कंधों को सुदृढ़ बनाने के लिए डंबल उठाए जाते हैं।
दौड़ने और कूदने से अधोअंग अर्थात जांघों और पैरों की मांसपेशियों में सशक्तिकरण आता है।
Pushtaanga ↔ कृशांग
नियमित व्यायाम और पौष्टिक आहार के सेवन से पहलवान का शरीर पुष्टांग और गठीला बन गया।
दीर्घकालिक कुपोषण और बीमारी के कारण रोगी अत्यंत कृशांग और अशक्त दिखाई देने लगा।
Sthoolakaaya ↔ कृशकाय
अत्यधिक वसायुक्त भोजन और निष्क्रिय दिनचर्या से व्यक्ति स्थूलकाय हो जाता है, जिससे गतिशीलता घटती है।
लंबी तपस्या और उपवास के कारण संन्यासी का शरीर अत्यंत कृशकाय परंतु तेजस्वी हो गया था।
Maansala ↔ अस्थिशेष
कठोर शारीरिक श्रम और नियमित कसरत से युवक की भुजाएं अत्यंत मांसल और मजबूत हो गईं।
अकाल और भुखमरी की विभीषिका में बच्चों के शरीर केवल अस्थिशेष अर्थात हड्डियों का ढांचा रह गए थे।
Kubadaa ↔ ऋजुकाय
अत्यधिक भार ढोने और रीढ़ की हड्डी के विकार से वह वृद्ध व्यक्ति कुबड़ा होकर चलने लगा।
योगासनों के नियमित अभ्यास से साधक का शरीर बुढ़ापे में भी सीधा और ऋजुकाय बना रहता है।
Khalvaata ↔ सकेश
उम्र ढलने के साथ सिर के बाल झड़ने से कई व्यक्तियों का मस्तक खल्वाट हो जाता है।
आयुर्वेदिक तेलों और उचित पोषण से सिर का भाग घने बालों से युक्त और सकेश बना रहता है।
Romila ↔ अरोम
शीत प्रधान प्रदेशों में रहने वाले प्राणियों की त्वचा रोमिल और घने रोओं से ढकी होती है।
छोटे नवजात शिशु की कोमल त्वचा प्रायः अरोम और चिकनी प्रतीत होती है।
Unmeelana ↔ निमीलन
प्रातःकाल सूर्य की प्रथम किरण पड़ते ही नेत्रों का उन्मीलन होता है और चेतनता लौट आती है।
गहरी ध्यानस्थ अवस्था में साधक के नेत्रों का स्वाभाविक निमीलन हो जाता है।
Shvaasa ↔ प्रश्वास
प्राणायाम की क्रिया में गहरी श्वास भीतर खींचकर फेफड़ों को प्राणवायु से भरा जाता है।
मन को शांत करने के लिए प्रश्वास के माध्यम से शरीर से धीरे-धीरे वायु बाहर छोड़ी जाती है।
Uchchhvaasa ↔ निःश्वास
कठिन शारीरिक श्रम के उपरांत खिलाड़ी का उच्छ्वास तेज गति से भीतर वायु खींचता है।
विश्राम की स्थिति में लंबा निःश्वास छोड़कर शरीर की संपूर्ण थकान दूर की जाती है।
Chaakshusha ↔ अचाक्षुष
इंद्रधनुष के सतरंगी दृश्य का अनुभव पूर्णतः चाक्षुष अर्थात आंखों से देखने योग्य होता है।
हवा की गति और गंध का प्रत्यक्ष बोध अचाक्षुष होता है, जिसे त्वचा और नासिका से महसूस किया जाता है।
Shravya ↔ अश्रव्य
मानव कर्ण केवल 20 हर्ट्ज से 20000 हर्ट्ज तक की श्रव्य ध्वनि तरंगों को सुन सकते हैं।
पराश्रव्य और अपश्रव्य तरंगें सामान्य मानव कान के लिए अश्रव्य होती हैं।
Adhomukha ↔ ऊर्ध्वमुख
लज्जा या निराशा के कारण व्यक्ति अधोमुख होकर भूमि की ओर देखने लगता है।
विजय और आत्मविश्वास के क्षणों में मनुष्य ऊर्ध्वमुख होकर आकाश की ओर निहारता है।
Sumukha ↔ दुर्मुख
सदा प्रसन्न रहने वाले बालक का सुमुख देखकर हर किसी का मन आनंदित हो उठता है।
सदा क्रोध और कटुता में डूबे रहने वाले व्यक्ति का चेहरा दुर्मुख और विकृत प्रतीत होता है।
Dntaheena ↔ दंतयुक्त
चार माह के शिशु का मुख दंतहीन होता है, इसलिए वह केवल तरल आहार ही ग्रहण करता है।
वयस्क होने पर मनुष्य का मुख बत्तीस दांतों से युक्त और सुदृढ़ दंतयुक्त हो जाता है।
Kaanaa ↔ सनेत्र
दुर्घटना में एक आंख की रोशनी खो देने से वह व्यक्ति काणा हो गया था।
स्वस्थ खानपान और नेत्र व्यायाम से दोनों आंखों की दृष्टि सनेत्र और स्पष्ट बनी रहती है।
Sachchaai ↔ झूठ
सच्चाई के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति को आरंभ में कठिनाइयाँ आती हैं किंतु अंत में विजय उसी की होती है।
झूठ का सहारा लेकर खड़ा किया गया व्यापार या संबंध अधिक समय तक टिक नहीं पाता।
Imaandaari ↔ बेईमानी
कर्मचारी की ईमानदारी और लगन को देखकर प्रबंधक ने उसे पदोन्नति प्रदान की।
बेईमानी से अर्जित किया गया धन व्यक्ति को समाज में कभी वास्तविक आदर नहीं दिला सकता।
Nyaay ↔ अन्याय
अदालत का प्रमुख कर्तव्य निष्पक्ष होकर प्रत्येक नागरिक को न्याय दिलाना है।
समाज में निर्बलों पर होने वाले अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना प्रत्येक जागरूक नागरिक का धर्म है।
Dharm ↔ अधर्म
सत्य, अहिंसा और परोपकार का आचरण करना ही मानव का सच्चा धर्म है।
अधर्म का मार्ग अपनाने वाले दुष्टों का विनाश अंततः निश्चित होता है।
Sadaachaar ↔ दुराचार
विद्यालय में विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ सदाचार और अनुशासन की भी शिक्षा दी जाती है।
दुराचार और कुसंगति में लिप्त व्यक्ति अपने कुल और समाज की प्रतिष्ठा को कलंकित करता है।
Punya ↔ पाप
दीन-दुखियों की निःस्वार्थ सेवा करने से हृदय में पुण्य और आत्मिक शांति का संचय होता है।
किसी निर्दोष जीव को व्यर्थ पीड़ा पहुँचाना घोर पाप माना जाता है।
Vivek ↔ अविवेक
संकट की घड़ी में विवेक और धैर्य से काम लेने वाला व्यक्ति हर विपत्ति पार कर लेता है।
क्रोध की अवस्था में अविवेक के वशीभूत होकर लिए गए निर्णय केवल पश्चाताप देते हैं।
Neeti ↔ अनीति
महात्मा विदुर ने शासक को सदा नीति और प्रजा-कल्याण के सिद्धांतों पर चलने का उपदेश दिया।
अनीति और स्वार्थ के बल पर स्थापित किया गया साम्राज्य कभी चिरस्थायी नहीं हो सकता।
Sadgun ↔ दुर्गुण
विनम्रता, सत्यवादिता और परोपकार जैसे सद्गुण व्यक्ति को महान बनाते हैं।
अहंकार, ईर्ष्या और लोभ जैसे दुर्गुण मनुष्य के समस्त पुण्यों को भस्म कर देते हैं।
Satkarm ↔ दुष्कर्म
जीवन में किए गए सत्कर्म ही मृत्यु के उपरांत व्यक्ति का नाम अमर रखते हैं।
दुष्कर्म करने वाला मनुष्य कानून की नजर से बच भी जाए, तो अंतरात्मा की अदालत से नहीं बच सकता।
Paropkaar ↔ अपकार
वृक्ष और नदियाँ परोपकार के लिए ही फल और जल प्रदान करते हैं।
सज्जन व्यक्ति कभी किसी के साथ अपकार या अहित करने का विचार मन में नहीं लाते।
Satyavaadi ↔ मिथ्यावादी
राजा हरिश्चंद्र को भारतीय इतिहास में सबसे महान सत्यवादी के रूप में स्मरण किया जाता है।
मिथ्यावादी व्यक्ति की बातों पर कोई भी समझदार इंसान कभी भरोसा नहीं करता।
Dharmaatma ↔ पापात्मा
धर्मात्मा पुरुष सदैव दूसरों के सुख-दुख में सहभागी बनकर उनकी सेवा करते हैं।
पापात्मा मनुष्य दूसरों का धन हड़पने और निर्दोषों को सताने में ही सुख खोजता है।
Satsang ↔ कुसंग
ज्ञानी संतों का सत्संग मनुष्य के विकारों को दूर कर जीवन को आलोकित करता है।
कुसंग में पड़कर अच्छे संस्कारों वाला युवक भी धीरे-धीरे नशीले पदार्थों की गिरफ्त में आ गया।
Sadaachaari ↔ दुराचारी
सदाचारी व्यक्ति समाज में जहाँ भी जाता है, अपने आचरण से सबका सम्मान पाता है।
दुराचारी व्यक्ति अपने नीच कर्मों के कारण अपनों के बीच भी तिरस्कृत रहता है।
Imaandaar ↔ बेईमान
ईमानदार अफसर ने रिश्वत के करोड़ों रुपयों के प्रलोभन को एक झटके में ठुकरा दिया।
बेईमान ठेकेदार ने घटिया सामग्री का प्रयोग कर पुल का निर्माण संकट में डाल दिया।
Sanyam ↔ असंयम
वाणी और इंद्रियों पर संयम रखने से मनुष्य अनेक व्यर्थ के विवादों से बच जाता है।
खान-पान में असंयम बरतने से शरीर रोगों का घर बन जाता है।
Tap ↔ भोग
ऋषि-मुनियों ने कठोर तप के बल पर आत्मज्ञान और परम शांति प्राप्त की।
क्षणभंगुर भोग विलास में लीन रहने से मनुष्य की आध्यात्मिक ऊर्जा क्षीण हो जाती है।
Tyaag ↔ ग्रहण
मातृभूमि की रक्षा के लिए सैनिकों का सर्वोच्च त्याग सदैव वंदनीय रहेगा।
केवल भौतिक सुखों का ग्रहण करना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए।
Niswarth ↔ स्वार्थी
निःस्वार्थ भाव से की गई समाजसेवा ही ईश्वर की सच्ची उपासना कहलाती है।
स्वार्थी मित्र केवल अपने काम के समय याद करता है और संकट में साथ छोड़ देता है।
Parmaarth ↔ स्वार्थ
संत कबीर ने जीवन भर परमार्थ और ज्ञान के प्रचार को ही अपना कर्तव्य माना।
अंधे स्वार्थ के वशीभूत होकर व्यक्ति अपने सगे-संबंधियों को भी हानि पहुँचा बैठता है।
Sadbuddhi ↔ दुर्बुद्धि
भगवान से प्रार्थना है कि वे सभी को सद्विचार और सद्बुद्धि प्रदान करें।
दुर्बुद्धि के प्रभाव में आकर दुर्योधन ने पांडवों के साथ संधि का प्रस्ताव ठुकरा दिया था।
Gyaan ↔ अज्ञान
सच्चा ज्ञान मनुष्य के अहंकार को मिटाकर उसे विनम्र और सहिष्णु बनाता है।
अज्ञान के अंधकार में भटकने वाला व्यक्ति अंधविश्वासों का शिकार बन जाता है।
Sahishnuta ↔ असहिष्णुता
धार्मिक सहिष्णुता और आपसी सौहार्द ही भारत की विविधता की वास्तविक पहचान है।
कट्टरता और असहिष्णुता समाज में वैमनस्य और हिंसा को जन्म देती है।
Udaarta ↔ संकीर्णता
राजा ने अपनी उदारता का परिचय देते हुए पराजित शत्रु को भी क्षमादान दे दिया।
विचारों की संकीर्णता मनुष्य को नए दृष्टिकोण और प्रगति को स्वीकार करने से रोकती है।
Maryaada ↔ अमर्यादा
भगवान राम ने जीवन के हर मोड़ पर मर्यादा और नैतिक मूल्यों की रक्षा की।
सभा में अमर्यादा पूर्ण आचरण करने वाले सदस्य को सदन से निष्कासित कर दिया गया।
Shuchita ↔ अशुचिता
सार्वजनिक जीवन में धन और विचारों की शुचिता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
मन में छिपी अशुचिता बाहरी पूजा-पाठ से कभी दूर नहीं की जा सकती।
Naitik ↔ अनैतिक
व्यापार में लाभ कमाने के लिए नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए।
अनैतिक साधनों से प्राप्त की गई सफलता क्षणिक और आत्मग्लानि से भरी होती है।
Vairaagya ↔ अनुराग
संसार की नश्वरता को देखकर राजकुमार सिद्धार्थ के मन में वैराग्य उत्पन्न हो गया।
अपने देश और संस्कृति के प्रति गहरा अनुराग रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
Moksh ↔ बंधन
भारतीय दर्शन में जीवन का अंतिम परम पुरुषार्थ मोक्ष की प्राप्ति माना गया है।
माया और तृष्णा के बंधन में जकड़ा मनुष्य कभी आंतरिक शांति का अनुभव नहीं कर पाता।
Ishwar ↔ अनीश्वर
सच्चे भक्त के लिए समस्त चराचर जगत में ईश्वर की सत्ता का वास है।
अनीश्वर वादी विचारधारा केवल भौतिक जगत को ही सत्य मानती है।
Pravritti ↔ निवृत्ति
गृहस्थ आश्रम में सामाजिक व पारिवारिक कर्तव्यों की ओर मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है।
वानप्रस्थ और संन्यास आश्रम में व्यक्ति सांसारिक मोह से निवृत्ति की ओर अग्रसर होता है।
Karm ↔ अकर्म
गीता में श्रीकृष्ण ने फल की चिंता किए बिना केवल निष्काम कर्म करने का संदेश दिया है।
कर्तव्य से विमुख होकर अकर्म की स्थिति में बैठना कायरता और पतन का लक्षण है।
Satyanishth ↔ भ्रष्ट
सत्यनिष्ठ न्यायाधीश ने किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया।
भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत के कारण जन-कल्याण की योजनाएँ अधूरी रह गईं।
Kartavyanishth ↔ कर्तव्यच्युत
कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मी ने भीषण बर्फबारी में भी अपनी चौकी नहीं छोड़ी।
कर्तव्यच्युत कर्मचारियों के कारण कार्यालय में जनता के आवश्यक कार्य लटकते रहे।
Nyaayochit ↔ अनुचित
मजदूरों को उनकी मेहनत का उचित पारिश्रमिक देना पूरी तरह न्यायोचित है।
बिना किसी प्रमाण के किसी पर झूठा आरोप लगाना अत्यंत अनुचित और निंदनीय है।
Supaatra ↔ कुपात्र
सुपात्र व्यक्ति को दिया गया दान विद्या और समाज-कल्याण के काम आता है।
कुपात्र को धन या अधिकार सौंपने से समाज में अराजकता और अव्यवस्था फैलती है।
Suyog ↔ कुयोग
विद्वानों के सान्निध्य में ज्ञान प्राप्त करने का सुयोग बड़े भाग्य से मिलता है।
यात्रा के समय कुयोग बनने से उनका सारा कार्यक्रम अस्त-व्यस्त हो गया।
Sushasan ↔ कुशासन
सुशासन की स्थापना तभी संभव है जब शासन में पारदर्शिता और जन-सुनवाई हो।
कुशासन और भ्रष्टाचार से त्रस्त होकर जनता ने अत्याचारी शासक को सत्ता से हटा दिया।
Sadgati ↔ दुर्गति
पवित्र कर्मों और निर्मल मन से जीवन जीने वाले को सद्गति प्राप्त होती है।
जुआ और मद्यपान की लत के कारण उस धनाढ्य परिवार की घोर दुर्गति हो गई।
Sadvichaar ↔ दुर्विचार
सद्विचार मनुष्य के अंतःकरण को शांति और आनंद से भर देते हैं।
ईर्ष्या और द्वेष से उपजे दुर्विचार मनुष्य की मानसिक शांति को छीन लेते हैं।
Hit ↔ अहित
सच्चे माता-पिता सदैव अपनी संतानों के सर्वांगीण हित की कामना करते हैं।
किसी निर्दोष व्यक्ति का अहित सोचना भी पाप की श्रेणी में आता है।
Shreya ↔ प्रेय
बुद्धिमान व्यक्ति श्रेय के मार्ग को चुनते हैं जो आत्मिक कल्याण की ओर ले जाता है।
अज्ञानी जन केवल प्रेय अर्थात् तात्कालिक सांसारिक सुखों के पीछे भागते रहते हैं।
Dharmnishth ↔ धर्मविमुख
धर्मनिष्ठ नागरिक नियमों और नैतिक मर्यादाओं का निष्ठापूर्वक पालन करता है।
कर्तव्य से धर्मविमुख होकर भागने वाला व्यक्ति समाज में विश्वसनीयता खो देता है।
Satyapriya ↔ मिथ्याप्रिय
सत्यप्रिय व्यक्ति कटु यथार्थ को भी धैर्य और साहस के साथ स्वीकार कर लेता है।
मिथ्याप्रिय चापलूस झूठी प्रशंसा करके अपने स्वामी को भ्रम में रखते हैं।
Sadmaarg ↔ कुमार्ग
गुरुजनों का मार्गदर्शन सदैव युवाओं को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
कुमार्ग पर चलकर कमाया गया नाम और शोहरत बहुत शीघ्र धूल में मिल जाती है।
Sumaarg ↔ उन्मार्ग
सत्संग और स्वाध्याय मनुष्य के मन को सदा सुमार्ग की ओर प्रेरित करते हैं।
उन्मार्ग पर भटकने वाला व्यक्ति अपने भविष्य और परिवार दोनों को संकट में डालता है।
Suneeti ↔ कुनीति
चाणक्य की सुनीति के आधार पर मौर्य साम्राज्य ने अद्वितीय वैभव प्राप्त किया।
कुनीति और षड्यंत्र के बल पर सत्ता हथियाने वाले शासक अधिक समय तक नहीं टिक पाते।
Paavan ↔ कलुषित
गंगा के पावन जल और संतों की वाणी ने संपूर्ण वातावरण को पवित्र कर दिया।
कुत्सित विचारों से कलुषित मन कभी ईश्वर की सच्ची भक्ति नहीं कर सकता।
Nirmal ↔ मलिन
छोटे बच्चों का निर्मल हृदय छल-कपट और दुर्भावना से सर्वथा मुक्त होता है।
लोभ और वासनाओं से मलिन हुआ अंतःकरण सत्य को देखने की क्षमता खो देता है।
Ahinsa ↔ हिंसा
महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा को स्वतंत्रता संग्राम का सबसे अचूक अस्त्र बनाया।
हिंसा से कभी किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता।
Asteya ↔ स्तेय
योग के यम नियमों में अस्तेय अर्थात् चोरी न करने के व्रत का बड़ा महत्व है।
स्तेय अर्थात् दूसरों की वस्तु पर अनाधिकृत अधिकार जमाना नैतिक दृष्टि से जघन्य अपराध है।
Aparigraha ↔ परिग्रह
अपरिग्रह का पालन करने वाला साधु केवल जीवन-यापन हेतु आवश्यक वस्तुएँ ही रखता है।
धन-संपत्ति के अत्यधिक परिग्रह से समाज में आर्थिक विषमता और अशांति फैलती है।
Brahmacharya ↔ व्यभिचार
विद्यार्थी जीवन में ब्रह्मचर्य और एकाग्रता बनाए रखने से मेधा शक्ति तीव्र होती है।
व्यभिचार और असंयम में लिप्त होने से मनुष्य का शारीरिक व नैतिक पतन हो जाता है।
Shaaleen ↔ अशिष्ट
शालीन व्यवहार करने वाले व्यक्ति की समाज में सभी लोग सराहना करते हैं।
अशिष्ट स्वभाव का व्यक्ति अपनी कड़वी बातों से दूसरों के मन को ठेस पहुँचाता है।
Shishtaachaar ↔ अशिष्टता
अतिथियों का सत्कार करते समय शिष्टाचार और सौम्यता का परिचय देना हमारी परंपरा है।
बड़ों के सामने अशिष्टता दिखाना सुसंस्कृत होने का लक्षण नहीं है।
Sabhyata ↔ बर्बरता
प्राचीन भारतीय सभ्यता ने विश्व को शांति, ज्ञान और सह-अस्तित्व का संदेश दिया।
युद्ध के दौरान निर्दोष नागरिकों पर अत्याचार करना बर्बरता की पराकाष्ठा है।
Titiksha ↔ असहनशीलता
सुख-दुख और शीत-उष्ण के द्वंद्वों को बिना शिकायत सहना ही तितिक्षा कहलाता है।
असहनशीलता के कारण छोटी-सी असुविधा भी व्यक्ति को विचलित कर देती है।
Daan ↔ याचना
सच्चा दान वही है जो बिना किसी दिखावे और स्वार्थ के सुपात्र को दिया जाए।
स्वाभिमानी व्यक्ति कभी किसी के सामने सहायता के लिए याचना नहीं करता।
Nyaaypoorn ↔ अन्यायपूर्ण
पंचों का निर्णय पूरी तरह न्यायपूर्ण और निष्पक्ष था जिससे दोनों पक्ष संतुष्ट हुए।
कमजोर पक्ष पर अन्यायपूर्ण शर्तें थोपना नैतिक दृष्टि से सर्वथा अनुचित है।
Dharmsammat ↔ धर्मविरुद्ध
शास्त्रों के अनुसार दीन-दुखियों की रक्षा करना ही धर्मसम्मत कर्म है।
किसी को धोखा देकर संपत्ति हड़पना धर्मविरुद्ध और दंडनीय आचरण है।
Vidhipoorn ↔ विधिहीन
संपत्ति का क्रय-विक्रय पूरी तरह विधिपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर संपन्न हुआ।
विधिहीन और अराजक व्यवस्था में दुर्बल लोगों के अधिकारों की रक्षा नहीं हो पाती।
Aadhyaatmik ↔ भौतिक
आध्यात्मिक चिंतन से आत्मा को शांति और जीवन को वास्तविक उद्देश्य मिलता है।
केवल भौतिक सुख-साधनों के संचय से मन की तृष्णा कभी शांत नहीं होती।
Paarlaukik ↔ ऐहिक
धार्मिक अनुष्ठानों का उद्देश्य पारलौकिक कल्याण और सद्गति की कामना करना होता है।
ऐहिक जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए परिश्रम करना भी आवश्यक है।
Punyavaan ↔ पापी
पुण्यवान पुरुष का जीवन सदा दूसरों के आंसू पोंछने में व्यतीत होता है।
पापी मनुष्य अपने बुरे कर्मों के कारण समाज में भय और घृणा का पात्र बनता है।
Punyaatma ↔ दुरात्मा
पुण्यात्मा साधक अपने तपोबल से संपूर्ण वातावरण को पवित्र कर देते हैं।
दुरात्मा व्यक्ति दूसरों की प्रगति देखकर भीतर ही भीतर ईर्ष्या से जलता रहता है।
Mahaatma ↔ दुरात्मा
महात्मा बुद्ध ने दया और करुणा का उपदेश देकर मानवता का मार्गदर्शन किया।
दुरात्मा शासक ने अपने अहंकार की तुष्टि के लिए प्रजा पर भारी अत्याचार किए।
Sukarmi ↔ कुकर्मी
सुकर्मी व्यक्ति अपने शुभ कर्मों से समाज के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करता है।
कुकर्मी अपराधी को अंततः न्यायालय द्वारा कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।
Supaatri ↔ अपात्री
मेधावी और परिश्रमी छात्रा को छात्रवृत्ति के लिए सुपात्री माना गया।
अनुचित साधनों का सहारा लेने वाली अपात्री छात्रा को चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
Samdarshi ↔ पक्षपाती
सच्चा संत सभी प्राणियों के प्रति समदर्शी दृष्टि रखकर किसी में भेदभाव नहीं करता।
पक्षपाती अधिकारी अपने संबंधियों को अनुचित लाभ पहुँचाने का प्रयास करता है।
Nishpaksh ↔ पक्षपाती
निष्पक्ष पत्रकारिता ही किसी भी स्वतंत्र लोकतंत्र का चौथा मजबूत स्तंभ होती है।
पक्षपाती मीडिया समाचारों को तोड़-मरोड़ कर जनता के सामने पेश करता है।
Avichal ↔ डांवाडोल
सत्य के प्रति उसकी निष्ठा कठिन से कठिन प्रलोभन के सामने भी अविचल रही।
कमजोर मनोबल वाले व्यक्ति का निर्णय थोड़ी-सी कठिनाई आते ही डांवाडोल हो जाता है।
Niswaarthata ↔ स्वार्थपरता
माँ का प्रेम अपनी संतान के प्रति निःस्वार्थता की पराकाष्ठा है।
आज के युग में स्वार्थपरता के कारण पारस्परिक संबंधों में दूरियाँ बढ़ती जा रही हैं।
Paropkaari ↔ स्वार्थी
परोपकारी व्यक्ति अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा निर्धनों के कल्याण में लगा देता है।
स्वार्थी मनुष्य केवल अपने निजी लाभ के लिए दूसरों का उपयोग करता है।
Vishwasneeya ↔ अविश्वसनीय
विश्वसनीय साथी जीवन के कठिन दौर में भी कभी साथ नहीं छोड़ता।
अविश्वसनीय व्यक्ति से गोपनीय बातें साझा करना खतरे से खाली नहीं होता।
Vishwaaspaatra ↔ दगाबाज
राजा ने अपने सबसे विश्वासपात्र मंत्री को राज्य का खजाना सौंपा।
दगाबाज शत्रु से भी अधिक घातक होता है क्योंकि वह पीठ पीछे वार करता है।
Nishkapat ↔ कपटी
निष्कपट व्यक्ति के मन में जो बात होती है, वही उसकी वाणी पर भी होती है।
कपटी व्यक्ति मीठी बातें बोलकर दूसरों को अपने जाल में फंसा लेता है।
Sachcha ↔ झूठा
सच्चा मित्र वही है जो विपत्ति के समय ढाल बनकर साथ खड़ा रहे।
झूठा इंसान अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों से कुछ समय के लिए ही भ्रमित कर सकता है।
Neki ↔ बदी
नेकी कर दरिया में डाल अर्थात् भलाई करके उसके बदले में कुछ पाने की अपेक्षा मत करो।
बदी का रास्ता अख्तियार करने वाले व्यक्ति को अंततः पश्चाताप की अग्नि में जलना पड़ता है।
Nek ↔ बद
नेक दिल इंसान हमेशा दूसरों के आंसुओं को पोंछने का प्रयास करता है।
बद नियत वाले व्यक्ति के साथ कोई भी सज्जन साझेदारी नहीं करना चाहता।
Neknaam ↔ बदनाम
अपने परोपकारी कार्यों के कारण वह पूरे शहर में एक नेकनाम नागरिक बन गया।
घोटाले में संलिप्त पाए जाने पर वह व्यापारी चारों ओर बदनाम हो गया।
Suyash ↔ अपयश
वैज्ञानिक ने अपने अविष्कार से पूरे विश्व में देश का सुयश फैलाया।
भ्रष्टाचार के आरोपों से अधिकारी को समाज में भारी अपयश का सामना करना पड़ा।
Sukeerti ↔ अपकीर्ति
त्याग और बलिदान से अर्जित की गई सुकीर्ति सदियों तक जीवित रहती है।
कायरता का प्रदर्शन करने से योद्धा की जीवन भर की कमाई अपकीर्ति में बदल गई।
Pratishtha ↔ अप्रतिष्ठा
सत्य और निष्ठा के साथ कार्य करके उसने समाज में उच्च प्रतिष्ठा प्राप्त की।
झूठे वादों के कारण राजनेता को जनता के बीच अप्रतिष्ठा झेलनी पड़ी।
Gaurav ↔ लाघव
स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान पर पूरे देश को असीम गौरव है।
अहंकार का त्याग कर विद्वान व्यक्ति भी विनम्रता और लाघव का आचरण करता है।
Satkaar ↔ निरादर
गृहस्थ ने अपने घर आए अतिथियों का बड़े प्रेम और सत्कार के साथ स्वागत किया।
विद्वान सभा में किसी योग्य व्यक्ति का निरादर करना अत्यंत अशोभनीय है।
Shraddheya ↔ अश्रद्धेय
श्रद्धेय गुरुजी के चरणों में बैठकर शिष्यों ने जीवन का गूढ़ ज्ञान प्राप्त किया।
चरित्रहीन आचरण के कारण वह व्यक्ति समाज की दृष्टि में अश्रद्धेय हो गया।
Poojya ↔ अपूज्य
माता-पिता और गुरुजन प्रत्येक व्यक्ति के लिए पूज्य होते हैं।
पापकर्मों में डूबा व्यक्ति अपने व्यवहार से स्वयं को अपूज्य बना लेता है।
Maanya ↔ अमान्य
संविधान के अंतर्गत बनाए गए नियम सभी नागरिकों के लिए मान्य होते हैं।
गलत दस्तावेजों के आधार पर किया गया आवेदन चयन समिति द्वारा अमान्य कर दिया गया।
Prashansneeya ↔ निंदनीय
आपदा के समय युवाओं का राहत कार्य अत्यंत प्रशंसनीय और प्रेरणादायक रहा।
संकट के समय दवाओं की कालाबाजारी करना एक अत्यंत निंदनीय और घृणित कृत्य है।
Shlaaghya ↔ गर्ह्य
शत्रु के समक्ष भी धर्म और शौर्य का पालन करना श्लाघ्य आचरण माना जाता है।
निहत्थे बंदियों पर अत्याचार करना युद्ध के नियमों में गर्ह्य अपराध है।
Stutya ↔ निंद्य
पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए उनके प्रयास सर्वथा स्तुत्य हैं।
सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँचाना कानून और समाज दोनों की नजर में निंद्य है।
Vandneeya ↔ तिरस्करणीय
देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर सैनिक समस्त देशवासियों के लिए वंदनीय हैं।
राष्ट्रद्रोह और गद्दारी में लिप्त व्यक्ति का आचरण सदा तिरस्करणीय होता है।
Hitaishi ↔ द्वेषी
सच्चा हितैषी वही है जो आपकी गलतियों पर पर्दा डालने के बजाय सही रास्ता दिखाए।
द्वेषी व्यक्ति दूसरों की उन्नति देखकर जलता है और षड्यंत्र रचता है।
Satyasandh ↔ वचनभंगी
सत्यसंध राजा दशरथ ने अपने वचनों की रक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगा दी।
वचनभंगी व्यक्ति पर कोई भी बुद्धिमान राजा या व्यापारी पुनः विश्वास नहीं करता।
Kartavyaparaayan ↔ कामचोर
कर्तव्यपरायण शिक्षक ने अवकाश के दिनों में भी विद्यार्थियों को अतिरिक्त पाठ पढ़ाया।
कामचोर कर्मचारी सदा काम से बचने के बहाने खोजता रहता है।
Neetigya ↔ अनीतिज्ञ
नीतिज्ञ मंत्री ने राजा को युद्ध के संकट से बचाकर शांति का मार्ग सुझाया।
अनीतिज्ञ सलाहकारों की संगति में रहकर राजा ने विनाशकारी निर्णय ले लिए।
Dharmparaayan ↔ धर्मभ्रष्ट
धर्मपरायण राजा के राज्य में प्रजा भय और अभाव से मुक्त होकर सुखपूर्वक रहती थी।
धर्मभ्रष्ट शासक ने प्रजा की संपदा को लूटकर अपने विलास पर व्यय कर दिया।
Saatvik ↔ तामसिक
सात्विक भोजन और शांत विचार मनुष्य के मन को निर्मल और तनावमुक्त रखते हैं।
तामसिक भोजन और आलस्य से शरीर में जड़ता और प्रमाद की वृद्धि होती है।
Punyakarm ↔ पापकर्म
भूखों को अन्न खिलाना और प्यासों को जल पिलाना सबसे बड़ा पुण्यकर्म है।
मासूम जीवों की हत्या करना घोर पापकर्म है जिसकी भरपाई संभव नहीं।
Ishwarbhakti ↔ ईश्वरविमुखता
ईश्वरभक्ति से व्यक्ति के हृदय में भय और अहंकार का नाश होकर शांति स्थापित होती है।
ईश्वरविमुखता और भौतिक अंधाधुंध दौड़ अंततः मानसिक अशांति की ओर ले जाती है।
Charitravaan ↔ चरित्रहीन
चरित्रवान युवा ही किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति और आधारशिला होते हैं।
चरित्रहीन व्यक्ति अपनी वासनाओं के वशीभूत होकर समाज के लिए कलंक बन जाता है।
Aadarshvaadi ↔ अवसरवादी
आदर्शवादी नेता ने अपने सिद्धांतों की रक्षा के लिए सत्ता का मोह त्याग दिया।
अवसरवादी राजनीतिज्ञ निजी लाभ देखकर पल भर में अपना पाला बदल लेते हैं।
Paardarshi ↔ संदेहास्पद
परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाकर ही युवाओं में विश्वास बहाल किया जा सकता है।
संदेहास्पद सौदों के उजागर होने पर पूरी चयन समिति को भंग कर दिया गया।
Sadprayaas ↔ दुष्प्रयास
समाज सुधारकों के सद्प्रयास से बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर रोक लग सकी।
शत्रु के दुष्प्रयास को सुरक्षा बलों ने अपनी सतर्कता से विफल कर दिया।
Karmathata ↔ अकर्मण्यता
किसान की कर्मठता के कारण ही बंजर धरती पर भी लहलहाती फसलें तैयार हो गईं।
अकर्मण्यता और आलस्य के कारण वह समृद्ध विरासत को भी सहेज नहीं सका।
Karmnishth ↔ अकर्मण्य
कर्मनिष्ठ कार्यकर्ता ने बिना किसी शिकायत के दिन-रात समाजसेवा का कार्य किया।
अकर्मण्य व्यक्ति केवल भाग्य को कोसता रहता है और स्वयं कोई प्रयास नहीं करता।
Kartavyaparaayanata ↔ कर्तव्यहीनता
सैनिकों की कर्तव्यपरायणता देश की संप्रभुता और सीमाओं की सबसे बड़ी रक्षक है।
प्रशासनिक कर्तव्यहीनता के कारण बाढ़ पीड़ितों तक समय पर राहत सामग्री नहीं पहुँच सकी।
Parhit ↔ स्वहित
परहित सरिस धरम नहिं भाई अर्थात् दूसरों का भला करने से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।
जो मनुष्य केवल स्वहित में लीन रहता है वह कभी सच्चे मित्र नहीं बना पाता।
Samanvay ↔ वैमनस्य
विभिन्न संस्कृतियों और विचारों के बीच समन्वय स्थापित करना ही शांति का मार्ग है।
सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने वाले तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आवश्यक है।
Sahridaya ↔ पाषाणहृदय
सहृदय डॉक्टर ने गरीब मरीज की लाचारी देखकर उसकी पूरी फीस माफ कर दी।
पाषाणहृदय साहूकार ने अनाथ बच्चों की गिड़गिड़ाहट पर भी कोई दया नहीं दिखाई।
Tyaagi ↔ भोगी
त्यागी महापुरुषों ने समाज को नई दिशा देने के लिए अपने संपूर्ण सुखों का उत्सर्ग कर दिया।
भोगी मनुष्य क्षणिक विलासिता के पीछे दौड़ते-दौड़ते जीवन का अमूल्य समय नष्ट कर देता है।
Gyaanvaan ↔ ज्ञानहीन
ज्ञानवान पुरुष अपनी विद्वत्ता का प्रदर्शन करने के बजाय मौन रहकर चिंतन करता है।
ज्ञानहीन व्यक्ति अधकचरे ज्ञान के आधार पर व्यर्थ का विवाद खड़ा करता है।
Neetisammat ↔ नीतिविरुद्ध
राजा ने केवल वही निर्णय लागू किए जो शास्त्रों और लोक-कल्याण की दृष्टि से नीतिसम्मत थे।
सत्ता हथियाने के लिए किया गया कोई भी नीतिविरुद्ध षड्यंत्र अंततः विनाश ही लाता है।
Sadvyavahaar ↔ दुर्व्यवहार
ग्राहकों के साथ सद्व्यवहार करने से व्यापार की साख और लोकप्रियता बढ़ती है।
बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले युवक को पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ा।
Samvedansheelata ↔ संवेदनहीनता
कवि की संवेदनशीलता ने प्रकृति और समाज के छिपे दर्दों को शब्दों में ढाल दिया।
दुर्घटना पीड़ितों को देखकर मदद न करना मानवीय संवेदनहीनता का दुखद उदाहरण है।
Praamaanikata ↔ अप्रामाणिकता
इतिहासकार ने प्राचीन शिलालेखों के आधार पर घटना की प्रामाणिकता सिद्ध की।
दस्तावेजों में अप्रामाणिकता पाए जाने पर पुलिस ने फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज किया।
Pratishthaavaan ↔ कलंकित
प्रतिष्ठावान उद्योगपति ने शहर में निःशुल्क अस्पताल का निर्माण करवा कर ख्याति पाई।
घूसखोरी के आरोप सिद्ध होने पर पूर्व मंत्री का नाम सदा के लिए कलंकित हो गया।
Sucharitra ↔ दुश्चरित्र
सुचरित्र मनुष्य कठिन परिस्थितियों में भी कभी असत्य और अधर्म का मार्ग नहीं चुनता।
दुश्चरित्र व्यक्ति अपने घृणित आचरण के कारण परिवार का विनाश कर देता है।
Dharmaacharan ↔ अधर्माचरण
दैनिक जीवन में धर्माचरण का पालन करने से मनुष्य का आत्मबल और तेज बढ़ता है।
अधर्माचरण और छल-प्रपंच से अर्जित धन कभी सुख और शांति नहीं दे सकता।
Sadbhaav ↔ दुर्भाव
त्योहारों का मूल संदेश समाज के सभी वर्गों के बीच आपसी सद्भाव और प्रेम बढ़ाना है।
पड़ोसियों के प्रति मन में दुर्भाव पालने से घर का वातावरण अशांत हो जाता है।
Saadhuta ↔ असाधुता
उनकी वाणी और व्यवहार में झलकती साधुता ने क्रूर डाकू का भी हृदय परिवर्तन कर दिया।
शत्रु की असाधुता और विश्वासघात के कारण शांति वार्ता बीच में ही टूट गई।
Sajjanta ↔ दुर्जनता
सज्जनता का गुण यही है कि वह दुष्टों के अपशब्दों का उत्तर भी मधुरता से देता है।
दुर्जनता और कुटिलता के कारण कोई भी सज्जन उसके साथ बैठना पसंद नहीं करता।
Paropkaarita ↔ स्वार्थपरता
भारतीय संस्कृति में परोपकारिता को सर्वोच्च मानवीय मूल्य के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।
समाज में बढ़ती स्वार्थपरता कमजोर वर्गों की उपेक्षा का कारण बन रही है।
Paaltu ↔ जंगली
कुत्ता और गाय मनुष्य के सबसे वफादार और उपयोगी पालतू पशु हैं।
जंगली जानवरों का शिकार करना वन्यजीव संरक्षण कानून के अंतर्गत दंडनीय है।
Maansahaari ↔ शाकाहारी
शेर और चीता विशुद्ध मांसाहारी जीव हैं जो शिकार पर निर्भर रहते हैं।
हाथी और हिरण जैसे शाकाहारी जीव घास और पत्तियों को खाकर जीवन यापन करते हैं।
Hinsak ↔ अहिंसक
जंगल में हिंसक भेड़ियों का झुंड देख कर यात्री भयभीत हो गए।
खरगोश अत्यंत अहिंसक और सीधा प्राणी है जो किसी को कष्ट नहीं पहुँचाता।
Jalchar ↔ थलचर
मछली और व्हेल जलचर प्राणी हैं जो गहरे समुद्र में निवास करते हैं।
घोड़ा और ऊँट थलचर जीव हैं जो जमीन पर तेजी से दौड़ सकते हैं।
Nabhchar ↔ भूचर
चील और बाज नभचर पक्षी हैं जो आकाश में ऊँची उड़ान भरते हैं।
गाय और भैंस जैसे भूचर पशु धरती पर विचरण करते हैं।
Vyshaila ↔ विषहीन
कोबरा एक अत्यंत विषैला सर्प है जिसके डंक से तुरंत मृत्यु हो सकती है।
धामन सांप पूरी तरह विषहीन होता है और चूहों को खाकर किसानों की मदद करता है।
Andaj ↔ जरायुज
पक्षी, सर्प और छिपकली अंडज प्राणी हैं जिनकी संतानों का जन्म अंडों से होता है।
मनुष्य, गाय और हिरण जरायुज प्राणी हैं जो सीधे बच्चों को जन्म देते हैं।
Shikaari ↔ शिकार
तेज नजरों वाला शिकारी बाज पलक झपकते ही झपट्टा मारता है।
कमजोर हिरण शिकारी शेर का शिकार बनने से बचने के लिए तेज दौड़ा।
Trinabhakshi ↔ मांसभक्षी
जंगल में तृणभक्षी हिरणों का बड़ा झुंड हरी घास चर रहा था।
मांसभक्षी बाघ अपनी भूख मिटाने के लिए शिकार की ताक में छिपा रहता है।
Vanya ↔ ग्राम्य
राष्ट्रीय उद्यान में अनेक दुर्लभ वन्य जीवों को प्राकृतिक आवास दिया गया है।
ग्राम्य पशु जैसे गाय और बकरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार हैं।
Dvipada ↔ चतुष्पद
पक्षी द्विपद प्राणी होते हैं जो दो पैरों पर चलते हैं और पंखों से उड़ते हैं।
घोड़ा और हाथी चतुष्पद जीव हैं जो चार मजबूत पैरों के सहारे भारी बोझ उठाते हैं।
Nishaachar ↔ दिवाचर
उल्लू और चमगादड़ निशाचर प्राणी हैं जो रात के अंधकार में सक्रिय होते हैं।
चिड़िया और कौआ दिवाचर पक्षी हैं जो सूर्योदय के साथ चहचहाने लगते हैं।
Paalya ↔ अपाल्य
भेड़ और बकरी स्वभाव से पाल्य पशु हैं जिन्हें मनुष्य सरलता से पाल लेता है।
तेंदुआ और लकड़बग्घा अपाल्य जीव हैं जिनका स्वभाव स्वतंत्र और हिंसक रहता है।
Danshtree ↔ अदंष्ट्री
चीता और सूअर दंष्ट्री प्राणी हैं जिनके नुकीले दांत शिकार को चीर डालते हैं।
कछुआ और पक्षी अदंष्ट्री जीव हैं जिनके मुख में दांतों के बजाय चोंच या जबड़ा होता है।
Sapaksh ↔ अपक्ष
सपक्ष पक्षी आकाश की ऊंचाइयों में बिना किसी सहारे के तैरते हैं।
सांप और केंचुआ अपक्ष जीव हैं जो जमीन पर रेंगकर आगे बढ़ते हैं।
Bhaarvaahi ↔ सवारी-पशु
गधा और खच्चर भारवाही पशु हैं जो पहाड़ी मार्गों पर माल ढोते हैं।
सफेद अरबी घोड़ा सवारी-पशु के रूप में अपनी गति और शान के लिए प्रसिद्ध है।
Dudhaaru ↔ सूखा
किसान के पास दो दुधारू गायें हैं जो रोज बीस लीटर दूध देती हैं।
सूखा गाय को भी किसान प्रेम से पौष्टिक चारा देकर सेवा करता है।
Bail ↔ गाय
बैल खेत जोतने और गाड़ी खींचने में किसान का अनमोल साथी है।
गाय अपने पौष्टिक दूध और शांत स्वभाव के कारण पूजनीय मानी जाती है।
Haathi ↔ हथिनी
हाथी अपने विशाल दांतों और भारी शरीर से जंगल का राजा जैसा प्रतीत होता है।
हथिनी अपने नन्हे बच्चे की सुरक्षा के लिए झुंड के साथ चलती है।
Sinh ↔ सिंहनी
सिंह अपनी घनी अयाल हिलाते हुए चट्टान पर शान से बैठा था।
सिंहनी अपने शावकों के भरण-पोषण के लिए शिकार की तलाश करती है।
Mayoor ↔ मयूरी
वर्षा ऋतु में मयूर अपने सतरंगी पंख फैलाकर मनमोहक नृत्य करता है।
मयूरी बिना चमकीले पंखों के चुपचाप झाड़ियों में अंडे सेती है।
Hans ↔ हंसी
मानसरोवर के निर्मल जल में धवल हंस तैर रहा था।
हंसी अपने साथी के साथ जीवन भर का अटूट संबंध निभाती है।
Mrig ↔ मृगी
सींगों वाला सुंदर मृग कुलांचें भरता हुआ वन में दौड़ रहा था।
मृगी अपने नन्हें छौने को स्तनपान कराती हुई चौकन्नी खड़ी थी।
Ashwa ↔ घोड़ी
तेज रफ्तार अश्व युद्धभूमि में अपने सवार को सुरक्षित निकाल लाया।
घोड़ी अपने नन्हें बछेड़े की देखभाल में लगी हुई थी।
Bakra ↔ बकरी
पहाड़ी बकरा चट्टानों पर संतुलन बनाकर छलांग लगाता है।
बकरी का दूध औषधीय गुणों से भरपूर और सुपाच्य माना जाता है।
Oont ↔ ऊँटनी
ऊँट रेगिस्तान के रेतीले टीलों पर भारी बोझ लेकर मीलों चलता है।
ऊँटनी का दूध मरुस्थल के निवासियों के लिए पोषण का बड़ा स्रोत है।
Sher ↔ शेरनी
शेर की दहाड़ सुनकर जंगल के सभी छोटे जीव छिपने लगे।
शेरनी अपनी संतान की रक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगा देती है।
Kutta ↔ कुतिया
पालतू कुत्ता रात भर जागकर घर की रखवाली करता है।
कुतिया अपने पिल्लों को सर्दी से बचाने के लिए पुआल में समेटे बैठी थी।
Bilaav ↔ बिल्ली
बिलाव रात के समय छत पर घूमते हुए चूहों की खोज में था।
पालतू बिल्ली रसोई में रखे दूध के कटोरे को चाटने लगी।
Mendhak ↔ मेंढकी
बरसात में नर मेंढक जोर-जोर से टर्र-टर्र की आवाज निकालता है।
मेंढकी तालाब के किनारे पानी में तैरते हुए सैकड़ों अंडे देती है।
Sarp ↔ सर्पिणी
फन फैलाए विशाल सर्प बांबी के मुहाने पर बैठा था।
पौराणिक कथाओं में इच्छाधारी सर्पिणी का रोचक वर्णन मिलता है।
Vaanar ↔ वानरी
वानर पेड़ की डालियों पर एक सिरे से दूसरे सिरे तक छलांग लगा रहा था।
वानरी अपने नन्हे बच्चे को छाती से चिपकाए हुए फल खा रही थी।
Murga ↔ मुर्गी
भोर होते ही मुर्गा बाँग देकर गाँव वालों को जगा देता है।
मुर्गी अपने अंडों को सेती है और नन्हें चूजों को दाना चुगना सिखाती है।
Cheel ↔ कबूतर
आकाश में मंडराती चील किसी भी छोटे जीव पर झपट सकती है।
कबूतर शांति का प्रतीक बनकर छतों पर दाना चुगता है।
Keet ↔ पतंग
मिट्टी में रहने वाला कीट पत्तियों को कुतर कर पोषण पाता है।
पतंग रात के समय जलती हुई लौ के चारों ओर मंडराता है।
Narpashu ↔ मादापशु
जंगली झुंड में नरपशु अपने इलाके की सीमाओं की रक्षा करता है।
मादापशु नवजात शावकों को आहार और सुरक्षा प्रदान करती है।
Khatta ↔ मधुर
कच्चे आम का स्वाद खट्टा होता है जो चटनी बनाने के काम आता है।
पके हुए पपीते का स्वाद अत्यंत मधुर और रुचिकर होता है।
Pakwa ↔ अपक्व
पक्व फल पेड़ से अपने आप टूटकर नीचे गिर जाते हैं।
अपक्व भोजन का सेवन करने से पाचन क्रिया बिगड़ सकती है।
Taaza ↔ बासी
प्रातःकाल खेत से तोड़ी गई ताज़ा सब्जियाँ स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं।
बासी भोजन खाने से पेट में संक्रमण और विषाक्तता हो सकती है।
Swaadisht ↔ बेस्वाद
दादी माँ के हाथ से बना हलवा अत्यंत स्वादिष्ट और सुगंधित था।
बिना नमक और मसालों की उबली सब्जी पूरी तरह बेस्वाद लग रही थी।
Teekha ↔ फीका
लाल मिर्च के कारण सब्जी का स्वाद बहुत तीखा और चटपटा हो गया था।
रोगी के लिए चिकित्सक ने फीका और बिना मिर्च-मसाले का दलिया खाने की सलाह दी।
Namkeen ↔ अलौना
शाम की चाय के साथ कुरकुरा नमकीन नाश्ता सबको बहुत पसंद आया।
उच्च रक्तचाप के मरीज को चिकित्सक ने अलौना भोजन करने का निर्देश दिया।
Garisht ↔ सुपाच्य
रात के समय अत्यधिक गरिष्ठ भोजन करने से नींद में खलल पड़ता है।
मूंग की दाल की खिचड़ी सुपाच्य और पौष्टिक भोजन मानी जाती है।
Supaachya-alt ↔ कुपाच्य
उबले हुए सेब और छाछ पेट के लिए सुपाच्य आहार हैं।
सड़क किनारे बिकने वाला तला-भुना जंक फूड कुपाच्य होकर पाचन तंत्र बिगाड़ता है।
Paachak ↔ अपाचक
भोजन के उपरांत भुने जीरे और हींग का चूर्ण पाचक औषधि का काम करता है।
अत्यधिक शीतल पेय भोजन के पाचन रस को धीमा करके अपाचक प्रभाव छोड़ता है।
Bhookh ↔ तृप्ति
दिनभर पैदल चलने के बाद शाम को तीव्र भूख लग आई थी।
मनपसंद थाली भर भोजन करने के बाद चेहरे पर तृप्ति का भाव दिखाई दिया।
Pyaas ↔ तृप्ति
धूप में दौड़ने के बाद कंठ सूख गया और असहनीय प्यास लगने लगी।
मटके का शीतल जल पीते ही तन-मन को अपार तृप्ति मिल गई।
Suswaadu ↔ अस्वादु
उत्सव में बने सुस्वादु पकवानों की सभी अतिथियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।
गलत अनुपात में मसाले डालने से पूरा सूप अस्वादु और पीने में अरुचिकर हो गया।
Snigdha ↔ रूखा
देसी घी से चुपड़ी स्निग्ध रोटियाँ शरीर में ओज और चिकनाई लाती हैं।
बिना घी-तेल की रूखी रोटी खाने में गले से मुश्किल से नीचे उतरती है।
Masaaledaar ↔ सादा
ढाबे की मसालेदार पनीर की सब्जी तीखी होने पर भी बहुत लोकप्रिय थी।
वृद्धजनों के लिए बिना मिर्च-मसालों का सादा उबला खाना ही उत्तम रहता है।
Shaakaahaar ↔ मांसाहार
अनाज, दलहन और ताजी हरी सब्जियों से युक्त शाकाहार शरीर को निरोगी रखता है।
अत्यधिक मांसाहार करने से कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी विकार बढ़ सकते हैं।
Sadaabhojan ↔ पकवान
दाल, चावल और रोटी का सदाभोजन नित्य प्रति स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम है।
विवाह समारोह में बने घी और मावे के पकवान अधिक खाने से पेट भारी हो जाता है।
Kadwa ↔ मधुर
नीम की पत्तियों और करेले का रस स्वाद में कड़वा किंतु रक्त-शोधक होता है।
गुलाब जामुन की चाशनी का स्वाद मधुर और मन को तृप्त करने वाला होता है।
Kasaila ↔ मधुर
कच्चे आंवले और हरड़ को चबाने पर पहला स्वाद कसैला महसूस होता है।
गन्ने के ताजे रस का स्वाद अत्यंत मधुर और शीतलता प्रदान करने वाला होता है।
Charpara ↔ मधुर
चाट में डाली गई सोंठ और हरी मिर्च से स्वाद चरपरा बन गया था।
खीर में घुली हुई मिश्री का स्वाद मधुर और शीतल अनुभव कराता है।
Khaara ↔ मधुर
समुद्र का पानी अत्यधिक खारा होने के कारण पीने योग्य नहीं होता।
पहाड़ी झरने का मधुर और शीतल जल थके यात्रियों की प्यास बुझाता है।
Sada ↔ ताज़ा
टोकरी में रखे एक सड़े टमाटर ने बाकी सब्जियों को भी दूषित कर दिया।
बगीचे से लाई गई ताज़ा ककड़ी खाने में कुरकुरी और रसीली थी।
Poshak ↔ अपोषक
अंकुरित अनाज और बादाम शरीर के लिए अत्यंत पोषक आहार सिद्ध होते हैं।
मैदे से बने तले हुए स्नैक्स अपोषक होते हैं और केवल पेट भरते हैं।
Poushtik ↔ हानिकारक
बढ़ते बच्चों के लिए दूध, घी और फल पौष्टिक भोजन के प्रमुख घटक हैं।
सड़े तेल में तले फास्ट फूड का नियमित सेवन लिवर के लिए हानिकारक है।
Bhojya ↔ अभोज्य
गेहूं, चावल और दालें मनुष्य के मुख्य भोज्य पदार्थों में गिने जाते हैं।
फफूंद लगी हुई ब्रेड अभोज्य हो जाती है और उसे फेंक देना ही उचित है।
Khaadya ↔ अखाद्य
खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने छापे मारे।
प्लास्टिक और रासायनिक रंग अखाद्य वस्तुएं हैं जिन्हें भोजन में नहीं मिलाना चाहिए।
Peya ↔ अपेय
नारियल पानी और नीबू शिकंजी गर्मियों में स्वास्थ्यवर्धक पेय माने जाते हैं।
मदिरा और दूषित नाले का पानी मानव स्वास्थ्य के लिए सर्वथा अपेय है।
Supeya ↔ कुपेय
हर्बल काढ़ा और छाछ शरीर को तरोताजा रखने वाले सुपेय हैं।
केमिकल युक्त कृत्रिम रंगीन शरबत कुपेय हैं जो बच्चों के गले को खराब करते हैं।
Raseela ↔ सूखा
दशहरी आम अत्यंत रसीला और मिठास से भरा फल होता है।
काजू और बादाम जैसे सूखे मेवे लंबे समय तक खराब नहीं होते।
Kurkura ↔ सीला
गरमागरम समोसे का ऊपरी आवरण एकदम कुरकुरा और खस्ता था।
बरसात की नमी के कारण डिब्बे में रखा बिस्कुट सीला और बेमजा हो गया।
Khasta ↔ कड़ा
कारीगर ने हलवाई की दुकान पर खस्ता कचौड़ियाँ तैयार कीं।
अधिक सेंकने के कारण तवे की रोटी कड़ा होकर चबाने में मुश्किल हो गई।
Ubla ↔ तला
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग उबला हुआ चना और मूंग नाश्ते में लेते हैं।
कड़ाही में अधिक तला हुआ भोजन वजन बढ़ाने और गैस का कारण बनता है।
Bhuna ↔ कच्चा
अलाव की राख में भुना हुआ भुट्टा गरमागरम खाने में बड़ा स्वादिष्ट लगता है।
कच्चा भुट्टा कड़ा होता है और बिना पकाए नहीं खाया जाता।
Sika ↔ अधपका
तंदूर में अच्छी तरह सिका हुआ नान खस्ता और सुगंधित था।
हड़बड़ी में निकाला गया अधपका पराठा खाने पर पेट में भारीपन हो गया।
Malaidaar ↔ मलाईरहित
गाढ़े मलाईदार दूध से बनी कुल्फी का स्वाद बेमिसाल होता है।
हृदयरोगियों को मलाईरहित टोंड दूध पीने का परामर्श दिया जाता है।
Meethaapan ↔ तीखापन
गाजर के हलवे में मावे और चीनी का मीठापन बहुत संतुलित था।
हरी मिर्च के तीखापन से उसकी आँखों से पानी निकलने लगा।
Khataas ↔ मिठास
नींबू के रस की तीखी खटास ने शिकंजी को ताजगी भरा बना दिया।
पके हुए आम की स्वाभाविक मिठास सबको आकर्षित करती है।
Kadwaahat ↔ मिठास
काली कॉफी की कड़वाहट कम करने के लिए उसने उसमें थोड़ा दूध मिलाया।
शहद की प्राकृतिक मिठास गले की खराश को शांत कर देती है।
Suvaasit ↔ बासी
केसर और इलायची से सुवासित खीर की महक पूरे घर में फैल गई।
तीन दिन पुराना बासी खाना खाने से फूड पॉइजनिंग का खतरा रहता है।
Shuddhghee ↔ वनस्पति
शुद्धघी में बने बेसन के लड्डू अपनी महक और स्वाद के लिए जाने जाते हैं।
वनस्पति घी का अत्यधिक उपयोग धमनियों में रुकावट पैदा कर सकता है।
Alpaahaar ↔ पूर्णाहार
यात्रा के दौरान उसने केवल फल और चाय का अल्पाहार लिया।
दोपहर के समय दाल-चावल, रोटी और सब्जी का पूर्णाहार ग्रहण करना चाहिए।
Mitaahaari ↔ पेटू
मिताहारी व्यक्ति सदा स्वस्थ रहता है और कभी अपच का शिकार नहीं होता।
पेटू मनुष्य स्वाद के चक्कर में आवश्यकता से अधिक ठूंस-ठूंस कर खा लेता है।
Alpaahaari ↔ बहुभोजी
योग साधक अल्पाहारी होते हैं ताकि उनका शरीर ध्यान के समय हल्का रहे।
पहलवान बहुभोजी होते हैं जिन्हें भारी व्यायाम के लिए अधिक कैलोरी चाहिए।
Upvaas ↔ पारण
एकादशी के दिन श्रद्धालु निर्जल उपवास रखकर आत्मशुद्धि करते हैं।
अगले दिन सूर्योदय के पश्चात पूजा करके पारण किया जाता है।
Vrat ↔ भोजन
शिवरात्रि के पावन पर्व पर उसने दिनभर फलाहार का व्रत रखा।
संध्या वंदना के बाद परिवार के सभी सदस्यों ने बैठकर भोजन किया।
Kshudha ↔ तृप्ति
कठोर श्रम के बाद क्षुधा शांत करने के लिए उसने गरम रोटियाँ खाईं।
संतुष्ट होकर थाली हटाने पर चेहरे पर पूर्ण तृप्ति के भाव झलक रहे थे।
Pipaasa ↔ तृप्ति
रेगिस्तान की तपती रेत में मुसाफिर की पिपासा बढ़ती ही जा रही थी।
शीतल जल का घूंट भरते ही उसकी पिपासा शांत हो गई और तृप्ति मिली।
Swaad ↔ बेस्वाद
ताजी पकी बासमती चावल की खीर का स्वाद ही निराला था।
अधिक पानी डाल देने से पूरी दाल बेस्वाद और पतली हो गई।
Swaadu ↔ अस्वादु
घी और मेवों से युक्त लड्डू अत्यंत स्वादु और मनभावन थे।
धूप में रखा रहने के कारण दूध फट गया और अस्वादु हो गया।
Lajeez ↔ बेमजा
शाही दावत में परोसी गई बिरयानी बेहद लजीज और खुशबूदार थी।
ठंडी और बासी कढ़ी का स्वाद एकदम बेमजा लग रहा था।
Ruchikar ↔ अरुचिकर
सजी हुई सलाद की थाली देखने में अत्यंत रुचिकर और ताजी लग रही थी।
जली हुई सब्जी की महक आने पर वह पूरी तरह अरुचिकर हो गई।
Jaaykedaar ↔ फीका
मसालों के सही संतुलन से दाल तड़का बेहद जायकेदार बना था।
नमक भूल जाने के कारण पूरा पुलाव एकदम फीका रह गया।
Salona ↔ फीका
मठरी और चकली का सलोना स्वाद चाय के साथ खूब जमता है।
उबले आलू बिना नमक-मिर्च के खाने में एकदम फीके लगते हैं।
Maadhurya ↔ कटुता
दूध की रबड़ी में केसर का माधुर्य घुलमिल गया था।
सड़े हुए तेल के कारण पूरियों में अजीब कटुता आ गई थी।
Tikta ↔ मधुर
चिरायता और गिलोय का स्वाद तिक्त होता है जो बुखार उतारता है।
मुनक्का और अंजीर का स्वाद मधुर तथा बलवर्धक होता है।
Kashaaya ↔ मधुर
त्रिफला चूर्ण का स्वाद कषाय होता है जो आंतों को साफ करता है।
मिश्री का स्वाद मधुर होता है जो पित्त को शांत करता है।
Lavan ↔ अलवण
सब्जी में उचित मात्रा में लवण मिलाने से उसका स्वाद निखरता है।
व्रत के फलाहार में अलवण भोजन ही ग्रहण किया जाता है।
Amla ↔ क्षार
सिरके और नीबू में प्राकृतिक अम्ल पाया जाता है जो खट्टापन देता है।
बेकिंग सोडा में क्षार होता है जो ढोकले को फूलाता है।
Aamleeya ↔ क्षारीय
अधिक कोला और सोड़ा पीने से पेट में अम्लीय प्रभाव बढ़ जाता है।
खीरे का रस और नारियल पानी पेट को क्षारीय आधार देकर एसिडिटी घटाते हैं।
Sugandhee ↔ गंधहीन
दालचीनी और लौंग रसोई के प्रसिद्ध सुगंधी मसाले हैं।
मैदा और कॉर्नफ्लोर गंधहीन घटक हैं जो केवल गाढ़ापन लाते हैं।
Chhaunk ↔ कच्चा
घी और जीरे के छौंक से अरहर की दाल में जान आ गई।
बिना पकाए कच्चा भोजन हर किसी के हाजमे को अनुकूल नहीं बैठता।
Tadka ↔ सादा
लहसुन और हींग के तड़के से कढ़ी का स्वाद चौगुना हो गया।
पेट खराब होने पर बिना तड़के की सादा खिचड़ी ही खानी चाहिए।
Pakwata ↔ अपक्वता
केले में पक्वता आते ही छिलका पीला और गूदा मीठा हो जाता है।
अंगूर में अपक्वता रहने पर उसका स्वाद कसैला और खट्टा लगता है।
Khameeri ↔ अखमीरी
खमीरी नान तंदूर में फूलकर स्पंज की तरह मुलायम बन जाती है।
रोजमर्रा की रोटी अखमीरी आटे से तवे पर सेकी जाती है।
Dahi ↔ दूध
गर्मी के दिनों में ठंडा दही पेट को ठंडक और प्रोबायोटिक लाभ देता है।
गुनगुना मीठा दूध रात को सोने से पहले पीने से अच्छी नींद आती है।
Mattha ↔ मक्खन
भुने जीरे वाला मट्ठा दोपहर के भोजन के बाद पीने से भारीपन दूर होता है।
ताजा निकला सफेद मक्खन गरमागरम पराठों पर पिघलकर स्वाद बढ़ाता है।
Garmaagarm ↔ ठंडा
बरसात में तवे से उतरी गरमागर्म जलेबी खाने का आनंद ही अलग है।
ठंडी हो चुकी चाय स्वाद और महक दोनों खो देती है।
Taazgi ↔ बासीपन
पुदीने और धनिए की ताज़गी चटनी के स्वाद को नया निखार देती है।
फ्रिज से बाहर रखे केक में दो दिन बाद बासीपन और दुर्गंध आने लगी।
Kuposhan ↔ सुपोषण
गरीबी और अभाव के कारण बच्चे कुपोषण का शिकार होकर दुर्बल हो जाते हैं।
आंगनवाड़ी में दिए जा रहे पौष्टिक आहार से बच्चों में सुपोषण का स्तर बढ़ा है।
Niraamish ↔ सामिष
मंदिर के भंडारे में केवल शुद्ध निरामिष भोजन ही परोसा जाता है।
तटीय इलाकों में मछली से बना सामिष भोजन मुख्य आहार के रूप में खाया जाता है।
Phalaahaari ↔ अन्नाहारी
व्रत रखने वाले लोग फलाहारी भोजन के रूप में कूटू की पूरी और सिंघाड़ा लेते हैं।
साधारण दिनों में लोग अन्नाहारी होकर गेहूं और चावल पर निर्भर रहते हैं।
Doodhiya ↔ पानीदार
काजू और मलाई से बनी शाही पनीर की ग्रेवी एकदम दूधिया और गाढ़ी थी।
ढाबे की दाल में पानीदार झोल अधिक था और दाल के दाने कम।
Ghol ↔ चूर्ण
बेसन का घोल तैयार करके पकौड़े तले जाते हैं।
धनिया और जीरे का चूर्ण मसालों के डिब्बे में सूखा रखा जाता है।
Chhana ↔ अछना
छलनी से छना हुआ मैदा एकदम चिकना और गांठ-रहित होता है।
अछना आटा चोकर सहित होने के कारण पाचन के लिए अधिक स्वास्थ्यवर्धक है।
Ubaala ↔ जमाया
चाय बनाने के लिए उसने दूध और पानी को पतीले में अच्छी तरह उबाला।
हलवाई ने मटके में जामन डालकर गाढ़ा मीठा दही जमाया।
Daanedaar ↔ चिकना
शुद्ध खोए से बना दानेदार कलाकंद मुंह में घुल जाता है।
मिक्सी में पिसी हुई चिकनी चटनी समोसे के साथ बहुत अच्छी लगती है।
Sattoo ↔ पकवान
गर्मियों में भुने चने का सत्तू घोलकर पीने से लू नहीं लगती।
त्योहारों पर घी और मेवे के पकवान घर-घर में बनाए जाते हैं।
Ruchya ↔ अरुच्य
अदरक और नीबू का अचार भोजन को अत्यंत रुच्य बना देता है।
बासी तेल की दुर्गंध से पूरी सब्जी अरुच्य हो गई और किसी ने नहीं खाई।
Suswaad ↔ कुस्वाद
पके हुए आम के पने का सुस्वाद हर किसी को ताजगी से भर देता है।
सड़ी हुई दाल का कुस्वाद आते ही उसने तुरंत मुंह धोया।
Subhojan ↔ कुभोजन
हरी सब्जियों, रोटी और छाछ का सुभोजन दीर्घायु प्रदान करता है।
बासी और अस्वच्छ स्थान पर बना कुभोजन शरीर को रोगों का घर बना देता है।
Atibhojan ↔ उपवास
दावत में अतिभोजन करने के कारण उसे रात भर पेट दर्द से जूझना पड़ा।
हफ्ते में एक दिन का उपवास पाचन तंत्र को विश्राम और ताजगी देता है।
Bhaksha ↔ अभक्ष
गेहूं और फल मानव के लिए सर्वमान्य भक्ष पदार्थ हैं।
सड़े-गले विषैले फल धार्मिक और स्वास्थ्य दोनों दृष्टि से अभक्ष हैं।
Bhakshya ↔ अभक्ष्य
ताजा पका हुआ भोजन ही शरीर के लिए भक्ष्य और लाभकारी होता है।
कीड़े लगी हुई दाल और सड़े फल स्वास्थ्य के लिए अभक्ष्य हैं।
Rasvaan ↔ नीरस
गर्मियों में रसवान संतरा और तरबूज शरीर में जल की कमी नहीं होने देते।
धूप में सूखा हुआ बेर एकदम नीरस और कड़ा हो जाता है।
Masaaladaar ↔ गंधरहित
गरम मसालों से युक्त मसालादार छोले भटूरों के साथ बहुत लोकप्रिय हैं।
बिना किसी तड़के का उबला पानी और सादा मांड गंधरहित होता है।
Dhoopit ↔ कच्चा
कोयले के धुएं से धूपित रायता एक विशेष सोंधा स्वाद देता है।
कच्चा दूध बिना उबाले पीने से पेट में जीवाणु जा सकते हैं।
Tapaaya ↔ ठंडाया
चाशनी बनाने के लिए चीनी के घोल को धीमी आंच पर तपाया गया।
मटके में रखकर शरबत को पीने से पहले खूब ठंडाया गया।
Ubkaai ↔ तृप्ति
सड़े हुए तेल की गंध सूंघते ही उसे उबकाई आने लगी।
शुद्ध घी की गरम खिचड़ी खाकर पेट को परम तृप्ति मिली।
Ajeerna ↔ सुजीर्ण
बिना भूख के अधिक खा लेने से पेट में अजीर्ण और खट्टी डकारें होने लगीं।
हल्का आहार लेने से भोजन का सुजीर्ण होकर शरीर को शक्ति मिलती है।
Mandaagni ↔ तीक्ष्णाग्नि
मंदाग्नि के रोगी को भारी गरिष्ठ भोजन से परहेज करना चाहिए।
तीक्ष्णाग्नि वाले युवा भारी भोजन को भी बहुत जल्दी पचा लेते हैं।
Paachakata ↔ अपाचकता
हींग और अजवाइन मिलाने से दाल की पाचकता कई गुना बढ़ जाती है।
कच्चे मैदे की अपाचकता आंतों में रुकावट पैदा कर सकती है।
Annapoorn ↔ अन्नहीन
नई फसल कटने के बाद किसान का भंडार अन्नपूर्ण हो गया।
अकाल के समय सूखा पड़ने से गाँव के गरीब परिवार अन्नहीन हो गए।
Jalpaan ↔ उपवास
सुबह की सैर से लौटने के बाद उसने फल और दूध का जलपान किया।
व्रत के दिन संध्या तक किसी भी प्रकार का जलपान न करके उपवास रखा जाता है।
Praataraash ↔ रात्रिभोज
स्वस्थ दिनचर्या के लिए पौष्टिक प्रातराश लेना अत्यंत आवश्यक है।
सोने से कम से कम दो घंटे पहले हल्का रात्रिभोज कर लेना चाहिए।
Madhurima ↔ तिक्तता
पके हुए गन्ने के रस की मधुरिमा मन को मोह लेती है।
अधिक उबल जाने से चाय में अप्रिय तिक्तता आ गई थी।
Kasailapan ↔ मिठास
कच्चे जामुन खाने पर मुंह में हल्का कसैलापन महसूस होता है।
पके हुए खरबूजे की मिठास गर्मी में सबको भाती है।
Teekhapan ↔ फीकापन
काली मिर्च के तीखापन से सूप में ताजगी और गर्माहट आ गई।
मसालों के अभाव में उबली सब्जियों का फीकापन खाने में नीरस लगा।
Namkeenpan ↔ अलौनापन
समुद्री नमकीनपन के कारण समुद्री शैवाल का स्वाद अनोखा होता है।
सब्जी में नमक न डालने से उसका अलौनापन गले से नहीं उतर रहा था।
Adhpaka ↔ सुरांधा
जल्दबाजी में तवे से उतारी गई अधपकी रोटी पेट में दर्द कर सकती है।
धीमी आंच पर पकी सुरांधा खीर का स्वाद बेमिसाल था।
Soup ↔ कड़ा
सर्दियों में टमाटर का गरमागरम सूप पीना स्वास्थ्यवर्धक होता है।
दांतों से चबाने के लिए कड़ा भुना हुआ चना ही पसंद किया जाता है।
Pishta ↔ अपिष्ट
चक्की में पिष्ट गेहूं के आटे से कोमल रोटियाँ बनती हैं।
अपिष्ट साबुत गेहूं को उबालकर दलिया बनाया जाता है।
Chokaryukt ↔ मैदा
चोकरयुक्त आटा खाने से पाचन सुगम रहता है और कब्ज नहीं होती।
बारीक छना मैदा आंतों में चिपकता है और स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।
Poori ↔ सादी-रोटी
त्योहारों पर हलवे के साथ गरमागरम पूरी बनाई जाती है।
दैनिक आहार में बिना तेल की सादी-रोटी खाना ही सर्वोत्तम है।
Lapsi ↔ सूखी-रोटी
गुड़ और घी से बनी लपसी सर्दियों में शरीर को ऊर्जा देती है।
सफर में सूखी-रोटी और अचार लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।
Chaashni ↔ पानी
रसगुल्लों को मीठी चाशनी में डुबोकर रखा जाता है।
प्यास बुझाने के लिए सादा पानी ही सबसे उत्तम पेय है।
Gaadhaapan ↔ पतलापन
मलाई और काजू के पेस्ट से खीर में गाढ़ापन आ गया।
अधिक पानी डाल देने से कढ़ी का पतलापन बढ़ गया।
Supakwa ↔ अपक्व
सुपक्व आम की महक से पूरा कमरा भर गया था।
अपक्व फल खाने से पेट में मरोड़ हो सकती है।
Suras ↔ नीरस
अनार का सुरस पेय शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाता है।
बासी हो जाने पर गन्ने का रस नीरस और खट्टा हो जाता है।
Madira ↔ दूध
मदिरा का सेवन बुद्धि और स्वास्थ्य दोनों का विनाश करता है।
गाय का ताजा दूध तन और मन को पवित्रता और बल प्रदान करता है।
Madya ↔ अमृत
मद्य पान करने वाले मनुष्य की समाज में प्रतिष्ठा समाप्त हो जाती है।
संतों की वाणी कानों के लिए अमृत तुल्य मधुर होती है।
Sharkara ↔ नमक
चाय में शर्करा अधिक होने से वह बहुत मीठी हो गई।
सब्जी में नमक संतुलित मात्रा में ही डालना चाहिए।
Roti ↔ भात
उत्तर भारत में गेहूं की गरम रोटी भोजन का मुख्य आधार है।
पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में दाल के साथ भात अधिक पसंद किया जाता है।
Annadaata ↔ भिखारी
खेतों में पसीना बहाने वाला किसान ही देश का सच्चा अन्नदाता है।
द्वार पर आए भूखे भिखारी को अन्न और जल देना मानवीय कर्तव्य है।
Bhandaar ↔ रिक्ति
अच्छी वर्षा के कारण सरकारी गोदामों में अनाज का भंडार भर गया।
युद्ध के समय अनाज की आपूर्ति रुकने से बाजार में राशन की रिक्ति हो गई।
Rasoiya ↔ अतिथि
दक्ष रसोइया स्वादिष्ट और स्वच्छ भोजन तैयार करने में निपुण था।
घर आए अतिथि का सत्कार प्रेमपूर्वक भोजन कराकर किया गया।
Vyanjan ↔ कच्चा-अन्न
दावत में छप्पन प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन परोसे गए थे।
गोदाम में रखा कच्चा-अन्न पकाने के बाद ही खाने योग्य बनता है।
Ghrit ↔ तेल
हवन और सात्विक भोजन में गाय के घृत का प्रयोग किया जाता है।
अचार और तीखे व्यंजनों में सरसों के तेल का तड़का लगाया जाता है।
Sharkaraayukt ↔ शर्करारहित
हलवाई की दुकान पर शर्करायुक्त मिठाइयाँ शीशे के डिब्बों में सजी थीं।
मधुमेह के रोगियों के लिए शर्करारहित चाय और बिस्कुट तैयार किए गए।
Masaaleyukt ↔ मसालेहीन
उत्सव के अवसर पर मसालेयुक्त पुलाव ने सभी का मन मोह लिया।
पेट की खराबी में डॉक्टर ने केवल मसालेहीन दलिया खाने की अनुमति दी।
Sondha ↔ बदबूदार
मिट्टी के चूल्हे पर पकी रोटी का सोंधा स्वाद दिल को छू लेता है।
धूप में खराब हुई सब्जी से बदबूदार महक आने लगी थी।
Rasdaar ↔ सूखा
चावल के साथ खाने के लिए आलू-मटर की रसदार सब्जी बनाई गई।
सफर में ले जाने के लिए उसने सूखे आलू और पूरियाँ पैक कीं।
Madhur-ras ↔ कटुरस
आयुर्वेद के अनुसार मधुररस शरीर को पोषण और बल प्रदान करता है।
नीम और कुटकी में पाया जाने वाला कटुरस खून को साफ करता है।
Amritmay ↔ विषैला
भूखे यात्री के लिए कुएं का मीठा पानी अमृतमय प्रतीत हुआ।
सड़े हुए मशरूम से बना सूप विषैला और जानलेवा साबित हो सकता है।
Supakwata ↔ कच्चापन
वृक्ष पर प्राकृतिक सुपक्वता पाने वाला अमरूद मीठा और मुलायम होता है।
जल्दबाजी में तोड़े गए फल का कच्चापन स्वाद को किरकिरा कर देता है।
Mishthaann ↔ नमकीन
दीपावली पर घर आए मेहमानों को काजू कतली और मिष्ठान्न भेंट किए गए।
चाय की चुस्की के साथ भुजिया और नमकीन परोसा गया।
Daal-roti ↔ छप्पन-भोग
संतोषी व्यक्ति अपनी गाढ़ी कमाई की दाल-रोटी में ही परम सुख मानता है।
मंदिर के उत्सव में भगवान को छप्पन-भोग का भव्य प्रसाद अर्पित किया गया।
Jala ↔ कच्चा
आंच तेज होने के कारण तवे पर पड़ा पराठा एक तरफ से जला निकला।
धीमी आंच पर कम सेकने से पूरी अंदर से कच्ची रह गई।
Gholak ↔ विलेय
खीर बनाते समय उबलता हुआ दूध मुख्य घोलक का कार्य करता है।
दूध में घुलने वाली चीनी और केसर विलेय के रूप में मिठास घोलते हैं।
Mitra ↔ शत्रु
सच्चा मित्र विपत्ति के समय ढाल बनकर साथ खड़ा रहता है।
कपटी शत्रु मीठी बातें बोलकर पीठ में छुरा घोंपने का अवसर खोजता है।
Mitrata ↔ शत्रुता
कृष्ण और सुदामा की निस्वार्थ मित्रता संसार में अमर उदाहरण है।
पुरानी शत्रुता को भुलाकर दोनों परिवारों ने आपस में सुलह कर ली।
Dost ↔ दुश्मन
बचपन का सच्चा दोस्त हर सुख-दुख में बिना बुलाए साथ निभाता है।
छिपकर वार करने वाले दुश्मन से सावधान रहना ही समझदारी है।
Dosti ↔ दुश्मनी
उनकी पक्की दोस्ती कॉलेज के दिनों से लेकर आज तक अटूट बनी हुई है।
जमीन के छोटे टुकड़े के लिए भाइयों में पीढ़ियों पुरानी दुश्मनी पैदा हो गई।
Sakhaa ↔ बैरी
अर्जुन ने महाभारत के धर्मयुद्ध में भगवान कृष्ण को अपना सखा और सारथी बनाया।
हृदय में द्वेष पालने वाला बैरी सदा दूसरे की बर्बादी के षड्यंत्र रचता है।
Sahelee ↔ सौत
दुल्हन अपनी सहेली के साथ अपने मन की खुशियाँ और चिंताएँ साझा कर रही थी।
प्राचीन राजमहलों में सौत के आपसी षड्यंत्रों के कारण अशांति फैली रहती थी।
Sulah ↔ जंग
दोनों कबीलों के बुजुर्गों ने बातचीत करके शांतिपूर्ण सुलह कर ली।
विनाशकारी जंग में किसी भी पक्ष की वास्तविक जीत नहीं होती।
Sandhi ↔ विग्रह
दो पड़ोसी देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए ऐतिहासिक संधि हुई।
नीतिशास्त्र में विग्रह अर्थात् युद्ध को अंतिम विकल्प के रूप में देखा गया है।
Mel ↔ फूट
गाँव में सभी जातियों और वर्गों के बीच आपसी मेल और सद्भाव बना हुआ है।
स्वार्थी तत्वों ने अफवाहें फैलाकर समुदाय में फूट डालने की चेष्टा की।
Gathbandhan ↔ बिखराव
छोटे दलों ने मिलकर सरकार बनाने के लिए मजबूत गठबंधन तैयार किया।
पारस्परिक अविश्वास के कारण राजनीतिक मोर्चे में बिखराव आ गया।
Mitrabhaav ↔ वैरभाव
पड़ोसियों के साथ मित्रभाव रखने से रोजमर्रा की समस्याएं सरलता से सुलझ जाती हैं।
मन में अकारण वैरभाव पालने से व्यक्ति का अपना मानसिक स्वास्थ्य नष्ट होता है।
Prabhu ↔ दास
भक्त हनुमान ने अपने प्रभु श्रीराम की सेवा में संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
स्वामी के प्रति निष्ठावान दास कठिन घड़ी में भी कभी पलायन नहीं करता।
Shaasak ↔ शासित
एक दूरदर्शी शासक प्रजा के कल्याण को ही अपना सर्वोच्च धर्म समझता है।
शासित जनता के अधिकारों का सम्मान करना किसी भी न्यायप्रिय व्यवस्था की पहली शर्त है।
Adhikaari ↔ अधीनस्थ
जिले के वरिष्ठ अधिकारी ने कानून-व्यवस्था की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई।
अधीनस्थ कर्मचारियों ने निष्ठापूर्वक दिए गए निर्देशों का पालन किया।
Neta ↔ अनुयायी
सच्चा नेता संकट की स्थिति में आगे रहकर दल का मार्गदर्शन करता है।
अनुयायी अपने मार्गदर्शक के आदर्शों पर चलकर समाज में बदलाव लाते हैं।
Maargdarshak ↔ पथिक
पहाड़ों के दुर्गम रास्तों पर अनुभवी मार्गदर्शक की सहायता अनिवार्य होती है।
थका हुआ पथिक विश्राम करने के लिए घने बरगद की छाया में बैठ गया।
Agraj ↔ अनुज
अग्रज का कर्तव्य होता है कि वह छोटे भाइयों को सन्मार्ग और सुरक्षा प्रदान करे।
अनुज लक्ष्मण ने वनवास में भी अपने बड़े भाई श्रीराम की निरंतर सेवा की।
Agraja ↔ अनुजा
अग्रजा अपनी छोटी बहनों को पढ़ाई और संस्कारों में मार्गदर्शन देती है।
अनुजा अपनी बड़ी बहन के पदचिह्नों पर चलकर परीक्षा में सफल हुई।
Jeth ↔ देवर
पारंपरिक परिवार में जेठ का आदर ससुर के समान माना जाता है।
देवर और भाभी का रिश्ता पारिवारिक हंसी-मजाक और आत्मीयता से भरा होता है।
Saas ↔ ससुर
स्नेहशील सास ने नई बहू का स्वागत अपनी बेटी की भाँति किया।
ससुर ने दामाद को पारिवारिक व्यापार में पूरा सहयोग और आशीर्वाद दिया।
Bahoo ↔ दामाद
सुलक्षणा बहू ने अपनी सेवा और व्यवहार से पूरे ससुराल का दिल जीत लिया।
दामाद के घर आने पर ससुराल में विशेष सत्कार और दावत का प्रबंध किया गया।
Nanad ↔ देवर
ननद ने अपनी नई भाभी का गृह-प्रवेश में आरती उतारकर स्वागत किया।
देवर अपनी भाभी के घरेलू कामों में हमेशा हाथ बंटाता था।
Jeeja ↔ साला
जीजा जी के आगमन पर ससुराल में सभी छोटे-बड़े प्रसन्न हो उठे।
साला अपनी बहन की ससुराल में कुशलता का समाचार लेने पहुँचा।
Bhaabhi ↔ ननद
भाभी ने अपनी ननद के विवाह की तैयारियाँ बड़े उत्साह के साथ पूरी कीं।
ननद छुट्टियों में मायके आकर भाभी के साथ सुख-दुख साझा करती है।
Taaoo ↔ ताई
पिता के बड़े भाई ताऊ जी परिवार के सभी बड़े निर्णय लेते हैं।
ताई जी ने त्योहार पर सभी भतीजों के लिए स्वादिष्ट पकवान बनाए।
Mousa ↔ मौसी
मौसा जी बच्चों के लिए शहर से नई-नई पुस्तकें और खिलौने लाए।
मौसी अपनी बहन के बच्चों को माँ जैसा ही निस्वार्थ दुलार देती है।
Phoopha ↔ बुआ
फूफा जी ने शादी समारोह में बारात का स्वागत बड़े सम्मान के साथ किया।
रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बुआ अपने भाइयों को राखी बांधने गाँव आई।
Daada ↔ दादी
दादा जी शाम को पोते-पोतियों को नैतिक मूल्यों की रोचक कहानियाँ सुनाते हैं।
दादी जी परिवार की कुशल क्षेम के लिए नित्य पूजा-अर्चना करती हैं।
Naana ↔ नानी
गर्मियों की छुट्टियों में बच्चे नाना जी के गाँव जाकर खूब आनंद लेते हैं।
नानी जी के हाथ का बना आम का अचार पूरे परिवार में प्रसिद्ध है।
Chaacha ↔ चाची
चाचा जी ने अपने भतीजे को फुटबॉल खेलने का सही तरीका सिखाया।
चाची जी ने पूरे परिवार के लिए गरमागरम नाश्ता तैयार किया।
Maama ↔ मामी
मामा जी अपने भांजे के जन्मदिन पर सुंदर साइकिल उपहार में लाए।
मामी जी ने भांजी को अपनी गोद में लेकर खूब लाड़-प्यार किया।
Beta ↔ बेटी
परिश्रमी बेटा अपने वृद्ध माता-पिता का सहारा बनकर उनकी सेवा करता है।
मेधावी बेटी ने उच्च शिक्षा प्राप्त कर पूरे परिवार का नाम रोशन किया।
Putra ↔ पुत्री
श्रवण कुमार एक आदर्श पुत्र थे जिन्होंने माता-पिता को तीर्थयात्रा कराई।
पुत्री दोनों कुलों को अपनी योग्यता और संस्कारों से गौरवान्वित करती है।
Pota ↔ पोती
पोता अपने दादा जी की उंगली पकड़कर प्रतिदिन पार्क में टहलता है।
पोती ने दादी जी की चश्मे की खोज करके उन्हें आदरपूर्वक थमाया।
Naati ↔ नातिन
नाना जी अपने नन्हे नाती को कंधों पर बिठाकर मेला दिखाने ले गए।
नातिन अपनी नानी जी को रामायण की चौपाइयाँ पढ़कर सुनाती है।
Bhateeja ↔ भतीजी
भतीजा अपने चाचा जी के साथ दुकान के काम-काज में हाथ बंटाता है।
भतीजी ने वार्षिक परीक्षा में प्रथम स्थान पाकर चाचा जी का आशीर्वाद लिया।
Bhaanja ↔ भांजी
मामा जी के घर आते ही भांजा उनसे नए-नए खिलौनों की मांग करने लगा।
भांजी ने अपनी मामा-मामी के लिए हाथ से सुंदर ग्रीटिंग कार्ड बनाया।
Atithi ↔ मेजबान
भारतीय संस्कृति में अतिथि देवो भवः कहकर मेहमान का आदर किया जाता है।
मेजबान ने अतिथियों की सुविधा और खान-पान का अत्यंत उत्तम प्रबंध किया।
Paahuna ↔ यजमान
गाँव में दामाद का पाहुना के रूप में भव्य और भावुक स्वागत किया गया।
यजमान ने धार्मिक अनुष्ठान के बाद पुरोहितों और आगंतुकों को दक्षिणा दी।
Darshak ↔ अभिनेता
नाटक के मार्मिक दृश्य को देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध और भावुक हो गए।
कुशल अभिनेता ने अपने जीवंत अभिनय से मंच पर पात्र को साकार कर दिया।
Graahak ↔ विक्रेता
ग्राहक ने सामान खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता और मूल्य की जांच की।
ईमानदार विक्रेता ग्राहकों को उचित दाम पर सही वस्तु उपलब्ध कराता है।
Kreta ↔ विक्रेता
भूमि रजिस्ट्री के समय क्रेता ने समस्त राशि का भुगतान चेक द्वारा किया।
विक्रेता ने आवश्यक कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करके मालिकाना हक सौंपा।
Rindaata ↔ ऋणी
बैंक ऋणदाता के रूप में व्यापार आरंभ करने हेतु आसान ब्याज पर पूंजी देता है।
ऋणी व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह समय पर मूलधन और ब्याज चुका दे।
Saahukaar ↔ देनदार
प्राचीन समय में साहूकार ग्रामीणों को फसल की बुवाई के लिए ऋण देते थे।
ईमानदार देनदार ने फसल कटते ही साहूकार का संपूर्ण हिसाब चुकता कर दिया।
Saajhedaar ↔ प्रतिद्वंद्वी
दोनों साझेदार मिलकर नई कंपनी को उन्नति के शिखर पर ले गए।
बाजार में प्रतिद्वंद्वी कंपनी ने ग्राहकों को लुभाने के लिए छूट की घोषणा की।
Sahayogi ↔ विरोधी
परियोजना को समय पर पूरा करने में प्रत्येक सहयोगी का योगदान महत्वपूर्ण था।
चुनाव में विरोधी पक्ष ने सत्ताधारी दल की नीतियों की कड़ी आलोचना की।
Paksh ↔ विपक्ष
सदन में पक्ष के सांसदों ने नए विधेयक का पुरजोर समर्थन किया।
विपक्ष ने विधेयक की कमियों को उजागर करते हुए संशोधन की मांग की।
Pakshdhar ↔ विरोधी
वह पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा के प्रबल पक्षधर हैं।
योजना के विरोधी लोगों ने निर्माण कार्य पर रोक लगाने की याचिका दायर की।
Samarthak ↔ विरोधी
रैली में हजारों समर्थक झंडे लहराते हुए अपने उम्मीदवार का उत्साह बढ़ा रहे थे।
विरोधी दल ने जनता को जागरूक करने के लिए पर्चे बांटे।
Rakshak ↔ भक्षक
कानून के रक्षक पुलिसकर्मियों का दायित्व जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
जो रक्षक ही भक्षक बन जाए, उससे समाज की रक्षा कौन कर सकता है।
Poshankarta ↔ शोषक
माता-पिता अपनी संतान के प्राथमिक पोषणकर्ता और मार्गदर्शक होते हैं।
मजदूरों का खून पसीने की कमाई छीनने वाला शोषक समाज के लिए अभिशाप है।
Abhibhaavak ↔ आश्रित
विद्यालय की बैठक में अभिभावक अपने बच्चों की प्रगति पर चर्चा करने पहुंचे।
बुजुर्ग और छोटे बच्चे परिवार के अन्य सदस्यों पर आश्रित होते हैं।
Paalak ↔ पाल्य
यशोदा मैया ने भगवान कृष्ण के पालक के रूप में असीम वात्सल्य दिया।
पाल्य बालक अपने माता-पिता के संरक्षण में सुरक्षित अनुभव करता है।
Sagotra ↔ परगोत्र
प्राचीन परंपराओं में सगोत्र बंधुओं के बीच पारस्परिक सहयोग अनिवार्य माना जाता था।
विवाह संबंध स्थापित करने के लिए परगोत्र के परिवारों का चयन किया जाता है।
Sagotreeya ↔ विजातीय
त्योहार पर सभी सगोत्रीय संबंधी एक साथ पैतृक घर में एकत्र हुए।
विजातीय लोगों के बीच भी सौहार्द और मित्रता स्थापित की जा सकती है।
Swadeshee ↔ विदेशी
स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना और साथी देशवासियों का सहयोग करना देशभक्ति है।
विदेशी पर्यटकों का आतिथ्य सत्कार करना भारतीय संस्कृति की परंपरा है।
Swajan ↔ परजन
संकट के समय स्वजन ही सबसे पहले सहायता के लिए हाथ बढ़ाते हैं।
सच्चा साधु किसी को परजन न मानकर संपूर्ण संसार को अपना कुटुंब मानता है।
Aatmeeya ↔ पराया
मित्र की आत्मीय वाणी ने संकट के समय उसका खोया हुआ ढाढ़स लौटा दिया।
अहंकार के कारण व्यक्ति अपने ही सगे भाइयों को भी पराया समझने लगता है।
Apna ↔ पराया
विपत्ति के समय ही परीक्षा होती है कि कौन अपना है और कौन केवल दिखावे का साथी।
दूसरों की भलाई करने वाला व्यक्ति कभी किसी को पराया नहीं समझता।
Sambaddha ↔ असंबद्ध
महाविद्यालय विश्वविद्यालय से विधिवत संबद्ध होकर शिक्षा प्रदान करता है।
विवाद से पूरी तरह असंबद्ध लोगों को मुकदमे में घसीटना अनुचित है।
Saamanjasya ↔ टकराव
पारिवारिक सामंजस्य और आपसी समझ से घर में शांति का वातावरण रहता है।
अहंकार के टकराव के कारण वर्षों पुराने व्यावसायिक साझेदार अलग हो गए।
Saujanya ↔ कटुता
पड़ोसियों के बीच का सौजन्य त्योहारों की खुशियों को कई गुना बढ़ा देता है।
आपसी कटुता को त्याग कर ही समाज में शांति और सहयोग का निर्माण हो सकता है।
Samarpan ↔ विद्रोह
सैनिकों का देश के प्रति अटूट समर्पण सीमाओं की सुरक्षा का आधार है।
अत्याचारी शासक के विरुद्ध जनता ने एकजुट होकर खुला विद्रोह कर दिया।
Vafaadaari ↔ बेवफाई
सेवक की वर्षों की वफादारी के बदले स्वामी ने उसे पारिवारिक सदस्य जैसा माना।
व्यापार में साझेदार की बेवफाई के कारण कंपनी दिवालिया होने के कगार पर आ गई।
Vafaadaar ↔ बेवफा
वफादार सिपाही ने राजा की प्राणरक्षा के लिए अपने सीने पर तीर झेल लिया।
बेवफा मित्र ने लालच में आकर शत्रु को गुप्त भेद बता दिए।
Nishthaavaan ↔ विद्रोही
निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने दिन-रात परिश्रम करके संगठन को सशक्त बनाया।
विद्रोही गुटों ने सरकारी प्रतिष्ठानों पर हमला करके कानून को चुनौती दी।
Aagyaakaari ↔ उद्दंड
आज्ञाकारी बालक अपने गुरुजनों और बड़ों के वचनों का कभी उल्लंघन नहीं करता।
उद्दंड छात्र अनुशासन की अवहेलना कर कक्षा में बाधा उत्पन्न करता है।
Anugat ↔ बागी
अनुगत सेनापति ने राजा के हर आदेश का तत्काल और निष्ठापूर्वक पालन किया।
बागी सरदारों ने सामंतशाही के विरुद्ध हथियार उठाकर जंग का ऐलान कर दिया।
Sahchar ↔ एकाकी
यात्रा के दौरान एक समझदार सहचर मिलने से लंबा मार्ग भी सहज कट जाता है।
एकाकी जीवन जीने वाला व्यक्ति अपने सुख-दुख साझा करने के लिए तरसता है।
Sahpaathee ↔ प्रतिद्वंद्वी
सहपाठी मिलकर कठिन विषयों पर चर्चा करते हैं और एक-दूसरे की सहायता करते हैं।
परीक्षा में प्रतिद्वंद्वी छात्र एक-दूसरे से आगे निकलने के लिए कड़ा परिश्रम करते हैं।
Samvayask ↔ वृद्ध
समवयस्क मित्रों के समूह में युवक खुलकर अपने विचार और सपने व्यक्त करते हैं।
वृद्ध परिजनों के अनुभवों से सीख लेकर युवा जीवन की गलतियों से बच सकते हैं।
Jyeshtha ↔ कनिष्ठ
परिवार में ज्येष्ठ सदस्य की राय को सर्वोच्च सम्मान और प्राथमिकता दी जाती है।
कनिष्ठ कर्मचारियों के उत्साह और नई सोच को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
Varishtha ↔ कनिष्ठ
वरिष्ठ अधिकारियों का अनुभव कठिन प्रशासनिक चुनौतियों को सुलझाने में काम आता है।
कनिष्ठ सहायकों ने आंकड़ों का संकलन करके रिपोर्ट समय पर पूरी की।
Poorvaj ↔ वंशज
हमारे पूर्वज पर्यावरण और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने के पक्षधर थे।
योग्य वंशज अपने कुल के गौरव और सद्विचारों को आगे बढ़ाते हैं।
Purkha ↔ औलाद
गाँव की यह विशाल हवेली पुरखा द्वारा सौ वर्ष पूर्व बनवाई गई थी।
सपूत औलाद अपने माता-पिता के त्याग को समझकर उनका मान बढ़ाती है।
Maata-pita ↔ संतान
माता-पिता अपनी संतान के सुख और प्रगति के लिए सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं।
संतान का धर्म है कि वह बड़े होकर अपने वृद्ध अभिभावकों का आदर और संबल बने।
Doolha ↔ दुल्हन
घोड़ी पर सवार दूल्हा बारात के साथ विवाह मंडप की ओर अग्रसर हुआ।
लाल जोड़े में सजी दुल्हन का स्वागत मंगल गीतों और आरती से किया गया।
Yuvak ↔ युवती
देश के ऊर्जावान युवक राष्ट्र निर्माण के कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।
प्रतिभाशाली युवती ने खेल और विज्ञान दोनों क्षेत्रों में अपनी धाक जमाई।
Kishoree ↔ किशोर
किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए सरकार ने विशेष योजनाएं बनाई हैं।
किशोर अवस्था में सही मार्गदर्शन मिलने पर बालक उत्तम चरित्रवान बनता है।
Naayak ↔ प्रतिनायक
कथा का नायक सत्य और न्याय की रक्षा के लिए अंत तक संघर्ष करता है।
प्रतिनायक अपने छल और शक्ति के बल पर नायक के मार्ग में बाधाएं डालता है।
Mahaaraanee ↔ महाराज
महारानी ने प्रजा के संकट को देखकर अन्न के सरकारी भंडार खुलवा दिए।
महाराज ने राजदरबार में न्याय की घोषणा करते हुए अपराधियों को दंड दिया।
Nawaab ↔ बेगम
नवाब अपने ठाठ-बाट और कला-प्रेम के लिए रियासत में प्रसिद्ध थे।
बेगम ने अनाथों की शिक्षा और सहायता के लिए विशाल दान दिया।
Suhaagin ↔ विधवा
करवा चौथ पर सुहागिन स्त्रियाँ पति की दीर्घायु के लिए निर्जल व्रत रखती हैं।
पति के निधन के बाद विधवा महिला ने साहसपूर्वक अपने बच्चों का पालन-पोषण किया।
Sadhwa ↔ विधवा
मंगल उत्सव में सधवा स्त्रियों द्वारा मंगल कलश की स्थापना की जाती है।
कठिन परिस्थितियों में भी उस विधवा माँ ने कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया।
Vidur ↔ सधुर
पत्नी के देहांत के पश्चात विदुर पुरुष एकाकी जीवन बिताने लगा।
सधुर गृहस्थ अपनी पत्नी के सहयोग से गृहस्थी के समस्त दायित्व निभाता है।
Avivaahit ↔ विवाहित
अविवाहित युवा अपनी पढ़ाई और करियर पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रहा था।
विवाहित दंपति ने मिलकर नए गृहस्थ जीवन की सुंदर शुरुआत की।
Kunwaara ↔ विवाहित
कुँवारा लड़का नौकरी लगने के बाद ही विवाह बंधन में बंधना चाहता था।
विवाहित पुरुष अपने परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी निष्ठा से उठाता है।
Kutumb ↔ एकांत
बड़े कुटुंब में रहकर बच्चे मिल-बांटकर खाने और सहयोग के संस्कार सीखते हैं।
भीड़-भाड़ से दूर एकांत में रहने पर व्यक्ति आत्मचिंतन कर पाता है।
Sakutumb ↔ अकेला
निमंत्रण पत्र पर आदरपूर्वक लिखा था कि आप समारोह में सकुशल व सकुटुंब पधारें।
अजनबी शहर में अकेला रहने पर व्यक्ति को परिजनों की कमी बहुत खलती है।
Naat-rishta ↔ बेगानापन
गाँव में हर व्यक्ति एक-दूसरे से किसी न किसी नात-रिश्ते से जुड़ा होता है।
महानगरों की भागदौड़ में पड़ोसियों के बीच भी अजीब बेगानापन दिखाई देता है।
Sagotree ↔ परदेशी
तीर्थयात्रा पर अपने सगोत्री बंधु से मिलने पर उसे अत्यधिक आनंद हुआ।
परदेशी मुसाफिर का सहारा बनकर उसकी मदद करना मानवता का नियम है।
Sadmitra ↔ कुमित्र
सद्मित्र विपत्ति के समय ढाल बनकर रक्षा करता है और सही सलाह देता है।
कुमित्र केवल मौज-मस्ती के समय साथ रहता है और संकट आते ही किनारा कर लेता है।
Suhrid ↔ शत्रु
सच्चा सुहृद आपके अवगुणों को अकेले में समझाता है और गुणों की प्रशंसा करता है।
शत्रु सदा आपकी दुर्बलताओं का लाभ उठाकर आघात करने की ताक में रहता है।
Sagotraj ↔ अगोत्रज
सगोत्रज भाइयों ने पैतृक संपत्ति के विभाजन का मामला आपस में सुलझा लिया।
अगोत्रज व्यापारी के साथ पारदर्शी समझौते के आधार पर अनुबंध किया गया।
Sahkarmee ↔ प्रतिस्पर्धी
कार्यालय में सहकर्मी की सहायता से जटिल परियोजना समय पर पूरी हो गई।
पदोन्नति की दौड़ में दोनों प्रतिस्पर्धी अधिकारी अपना सर्वश्रेष्ठ दे रहे थे।
Sahyoddha ↔ शत्रुयोद्धा
युद्धभूमि में घायल सहयोद्धा को बचाने के लिए सैनिक ने अपनी जान जोखिम में डाली।
शत्रुयोद्धा के पराजित होने पर भी उसके साथ युद्ध-नियमों के अनुसार सम्मान का व्यवहार किया गया।
Mitrapaksh ↔ शत्रुपक्ष
विश्वयुद्ध में मित्रपक्ष की सेनाओं ने संयुक्त रणनीति बनाकर विजय प्राप्त की।
शत्रुपक्ष की हर चाल पर खुफिया एजेंसियों द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही थी।
Sadbhaavpoorn ↔ वैरभावपूर्ण
दोनों संप्रदायों के बीच सद्भावपूर्ण वातावरण से शहर में अमन-चैन बना रहा।
वैरभावपूर्ण टिप्पणियों से समाज का ताना-बाना छिन्न-भिन्न हो सकता है।
Kutumbi ↔ अजनबी
संकट के समय सभी कुटुंबी एक छत के नीचे जमा होकर सहायता करते हैं।
अजनबी व्यक्ति से कोई भी निजी जानकारी साझा करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।
Sahodar ↔ अन्योधर
सहोदर भाइयों के बीच का प्रेम बचपन की स्मृतियों से सींचा हुआ होता है।
अन्योधर भाई होने पर भी दोनों ने पैतृक संपत्ति के मामले को शांति से सुलझाया।
Baaraati ↔ घराती
ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते हुए बाराती विवाह स्थल पर पहुंचे।
घराती पक्ष ने द्वार पर फूल बरसाकर बारात का गर्मजोशी से स्वागत किया।
Maayka ↔ ससुराल
त्योहार पर मायका आकर बेटी अपने बचपन की सहेलियों से मिलकर भावुक हो गई।
ससुराल में उसने अपने मधुर व्यवहार से सभी परिजनों को अपना बना लिया।
Peehar ↔ ससुराल
सावन के महीने में नवविवाहिता अपने पीहर जाकर झूले झूलती है।
ससुराल के दायित्वों को समझदारी से निभाना एक सुसंस्कृत बहू का गुण है।
Varpaksh ↔ वधूपक्ष
वरपक्ष ने सादगीपूर्ण और बिना दहेज के विवाह का अनुकरणीय निर्णय लिया।
वधूपक्ष ने आतिथ्य सत्कार में कोई कमी न छोड़ते हुए भव्य प्रबंध किए।
Saga ↔ सौतेला
सगा भाई हर सुख-दुख में बिना किसी स्वार्थ के दीवार की तरह खड़ा रहता है।
सौतेला व्यवहार छोड़कर उसने सभी बच्चों को एक समान वात्सल्य दिया।
Jethaani ↔ देवरानी
जेठानी ने घर की बड़ी बहू के रूप में रसोई और पूजा का प्रबंध संभाला।
देवरानी अपनी जेठानी का आदर बड़ी बहन की तरह करती थी।
Maitree ↔ वैर
दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान से मैत्री के नए युग का सूत्रपात हुआ।
पुरानी बातों को लेकर मन में वैर पाले रखना केवल विनाश की ओर ले जाता है।
Bandhutva ↔ विद्वेष
संविधान की प्रस्तावना में सभी नागरिकों के मध्य बंधुत्व की भावना को सर्वोपरि माना गया है।
सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
Parijan ↔ अपरिचित
दीपावली के शुभ अवसर पर सभी परिजन एक साथ बैठकर लक्ष्मी पूजन करते हैं।
सड़क पर किसी अपरिचित व्यक्ति से अनावश्यक विवाद में नहीं उलझना चाहिए।
Naatedaar ↔ अजनबी
विवाह के शुभ अवसर पर दूर-दराज से नातेदार घर पहुंचे।
रेल यात्रा में साथ बैठे अजनबी व्यक्ति से भी उसने शालीनता से बात की।
Rishtedaar ↔ गैर
सच्चे रिश्तेदार वही होते हैं जो केवल सुख में ही नहीं, दुख में भी बराबर खड़े रहते हैं।
कभी-कभी मुश्किल समय में अपने दूर हो जाते हैं और गैर भी मददगार साबित होते हैं।
Samdhee ↔ समधिन
वर और वधू के पिता आपस में समधी बनकर एक-दूसरे से गले मिले।
विवाह के मंडप में दोनों परिवारों की समधिन ने मिलकर मंगल गीत गाए।
Grihaswaami ↔ किरायेदार
गृहस्वामी ने मकान की रंगाई-पुताई करवाकर उसे नया रूप दिया।
किरायेदार ने प्रत्येक माह की पहली तारीख को ईमानदारी से किराया चुका दिया।
Niyokta ↔ कर्मचारी
एक सहृदय नियोक्ता अपने कर्मचारियों के कल्याण और स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखता है।
परिश्रमी कर्मचारी अपनी लगन और मेहनत से कंपनी को सफलता की नई ऊंचाइयों पर ले गया।
Prajapaalak ↔ अत्याचारी
प्रजापालक राजा के शासन में दीन-दुखी भी निर्भय होकर जीवन यापन करते थे।
अत्याचारी शासक ने भारी कर लगाकर प्रजा को भुखमरी के कगार पर धकेल दिया।
Sagotra-bandhu ↔ पराया
संकट की घड़ी में सगोत्र-बंधु एकजुट होकर एक-दूसरे की ढाल बन जाते हैं।
निःस्वार्थ सेवा करने वाले सज्जन किसी को भी पराया नहीं समझते।
Kutumbjan ↔ गैर
विवाह के निमंत्रण पर सभी कुटुंबजन एकत्र होकर उत्सव का आनंद ले रहे थे।
मुश्किल वक्त में अक्सर गैर भी परिजनों से बढ़कर सहारा बन जाते हैं।
Sahodara ↔ अन्योदरा
सहोदरा बहनें एक-दूसरे के सुख-दुख को बिना कहे ही समझ लेती हैं।
अन्योदरा बहन के साथ भी उसने कभी सौतेला व्यवहार नहीं किया और पूरा मान दिया।
Nanadoi ↔ ननद
त्योहार के अवसर पर ननदोई जी का ससुराल में आदरपूर्वक सत्कार किया गया।
ननद ने अपने मायके आकर बचपन की यादें ताजा कीं।
Samkaksh ↔ अधीनस्थ
समकक्ष अधिकारियों ने मिलकर नीति निर्माण पर विचार-विमर्श किया।
अधीनस्थ कर्मचारियों ने वरिष्ठों के मार्गदर्शन में काम पूरा किया।
Sahmat ↔ असहमत
व्यापारिक समझौते की शर्तों पर दोनों भागीदार पूरी तरह सहमत थे।
परियोजना के बजट को लेकर कई सदस्य असहमत होकर पुनर्विचार की मांग करने लगे।
Mitrarashtra ↔ शत्रुराष्ट्र
आपदा के समय मित्रराष्ट्र ने तुरंत राहत सामग्री और दवाएं भेजीं।
शत्रुराष्ट्र की सीमा पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर सेना सतर्क रहती है।
Sandhikarta ↔ युद्धोन्मादी
कुशल संधिकर्ता ने बातचीत के जरिए दो देशों को युद्ध के कगार से बचा लिया।
युद्धोन्मादी नेताओं के भड़काऊ बयानों ने सीमा पर तनाव और बढ़ा दिया।
Mitramandalee ↔ शत्रुदल
शाम को पार्क में मित्रमंडली बैठकर हँसी-मजाक और विचार साझा करती है।
शत्रुदल ने राजा के खिलाफ षड्यंत्र रचने के लिए गुप्त बैठक की।
Mahanga ↔ सस्ता
आजकल बाजार में सोने के आभूषण बहुत महंगे हो गए हैं।
थोक बाजार से सामान खरीदने पर वस्तुएं काफी सस्ती मिल जाती हैं।
Keemti ↔ कम-मूल्य
दादी माँ का कीमती हार तिजोरी में सुरक्षित रखा गया है।
दैनिक उपयोग की वस्तुएं कम-मूल्य वाली होने से आसानी से खरीदी जा सकती हैं।
Amoolya ↔ तुच्छ
गुरु का मार्गदर्शन जीवन में अमूल्य संपत्ति के समान होता है।
क्षणिक क्रोध के लिए तुच्छ वस्तु के पीछे संबंध बिगाड़ना समझदारी नहीं।
Bahumoolya ↔ कौड़ी-का
संग्रहालय में प्राचीन राजाओं के बहुमूल्य रत्न प्रदर्शित हैं।
धोखेबाज व्यापारी ने खरीदार को कौड़ी-का नकली पत्थर थमा दिया।
Moolyavaan ↔ मूल्यहीन
यह ऐतिहासिक पांडुलिपि अत्यंत मूल्यवान राष्ट्रीय धरोहर है।
पुराने अनुपयोगी कागजात अब पूरी तरह मूल्यहीन हो चुके हैं।
Anmol ↔ सस्ता
माता-पिता का स्नेह संसार की सबसे अनमोल निधि है।
सस्ता सामान अक्सर टिकाऊ नहीं होता और शीघ्र खराब हो जाता है।
Vaibhav ↔ दैन्य
राजमहल का अद्वितीय वैभव देखकर सभी विदेशी राजदूत चकित रह गए।
भीषण अकाल के कारण संपूर्ण जनपद में दैन्य और लाचारी छा गई।
Aishvarya ↔ दारिद्र्य
अहंकारी मनुष्य अत्यधिक ऐश्वर्य पाकर भी मानसिक शांति नहीं पाता।
कठोर श्रम और निरंतर निष्ठा से परिवार ने दारिद्र्य पर विजय प्राप्त की।
Sampannata ↔ दरिद्रता
हरित क्रांति के फलस्वरूप गांव में आर्थिक संपन्नता लौट आई।
उचित रोजगार के अभाव में समाज के कई वर्ग दरिद्रता में जीवन बिता रहे हैं।
Dhanaadhya ↔ कंगाल
धनाढ्य सेठ ने नगर में विशाल चिकित्सालय का निर्माण करवाया।
जुआ खेलने की लत ने अमीर व्यापारी को एक ही वर्ष में कंगाल बना दिया।
Kuber ↔ दरिद्र
व्यापार में अप्रत्याशित सफलता से वह रातों-रात कुबेर बन बैठा।
सच्चे संत दरिद्र की झोपड़ी में भी प्रेम से भोजन ग्रहण करते हैं।
Daulatmand ↔ मुफ़लिस
दौलतमंद लोग समाज के वंचित वर्गों की शिक्षा के लिए धन दान करते हैं।
अचानक आई मंदी ने कई संपन्न परिवारों को मुफ़लिस कर दिया।
Kangaali ↔ खुशहाली
लगातार सूखा पड़ने से किसानों के घर में कंगाली छा गई।
अच्छी पैदावार और उचित मूल्य मिलने से संपूर्ण अंचल में खुशहाली लौट आई।
Ameeri ↔ गरीबी
अमीरी का घमंड कभी भी इंसानियत पर भारी नहीं पड़ना चाहिए।
ईमानदारी और लगन से काम करके उसने गरीबी के अंधकार को दूर भगाया।
Sadhan ↔ निर्धन
सधन वर्ग को जरूरतमंद नागरिकों की सहायता हेतु सदैव तत्पर रहना चाहिए।
निर्धन बच्चों को विद्यालय में मुफ्त पाठ्य-पुस्तकें वितरित की गईं।
Maalomaal ↔ तंगहाल
बंपर फसल की बिक्री के बाद मंडी के सभी आढ़ती मालोमाल हो गए।
कारोबार ठप हो जाने के कारण वह कई महीनों से तंगहाल चल रहा है।
Lakhpati ↔ भिखारी
कड़े परिश्रम और बुद्धिमत्ता के बल पर वह एक दशक में लखपति बन गया।
चौराहे पर भीख मांगते भिखारी को देखकर हर सहृदय व्यक्ति का मन पसीज जाता है।
Poonjipati ↔ सर्वहारा
पूँजीपति वर्ग उद्योगों में भारी धन निवेश करके रोजगार के अवसर बनाता है।
सर्वहारा वर्ग अपने खून-पसीने की कमाई से ही राष्ट्र का निर्माण करता है।
Udyogpati ↔ श्रमिक
उद्योगपति ने नई स्वचालित इकाई स्थापित करने का निर्णय लिया।
श्रमिक के निरंतर पसीने से ही विशाल कल-कारखाने सुचारू चलते हैं।
Jameendaar ↔ भूमिहीन
रियासत काल में जमींदार किसानों से भारी लगान वसूल करते थे।
भूमि सुधार कानूनों के तहत भूमिहीन श्रमिकों को कृषि योग्य पट्टे बांटे गए।
Saamant ↔ किसान
मध्यकाल में सामंत प्रजा पर मनमाने कर लगाकर अपना खजाना भरते थे।
देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ धरती पुत्र किसान है जो अन्न उपजाता है।
Lakshmeevaan ↔ लक्ष्मीहीन
सत्कर्मों के प्रभाव से वह सदा लक्ष्मीवान और सम्मानित रहा।
आलस्य और व्यसनों के कारण संपन्न व्यक्ति भी अंततः लक्ष्मीहीन हो जाता है।
Vibhav ↔ विपन्नता
अयोध्या नगरी का अप्रतिम विभव देख सब मंत्रमुग्ध हो गए।
बाढ़ के विनाश ने समृद्ध नगर को विपन्नता के कगार पर धकेल दिया।
Dhaneemaani ↔ दीनहीन
शहर के सभी धनीमानी लोग दान उत्सव में सम्मिलित हुए।
कड़ाके की ठंड में दीनहीन लोगों को गर्म कंबल बांटे गए।
Shreemant ↔ निर्धन
श्रीमंत परिवारों ने कन्या विवाह कोष में मुक्तहस्त दान दिया।
निर्धन परिवारों को शासकीय योजनाओं से पक्के आवास प्रदान किए गए।
Munaafa ↔ घाटा
व्यापार में सही समय पर माल बेचने से दूकानदार को भारी मुनाफा हुआ।
परिवहन की लागत बढ़ने के कारण कंपनी को इस तिमाही घाटा सहना पड़ा।
Nafa ↔ नुकसान
व्यापार में सदैव नफा और नुकसान का संतुलन ध्यान में रखना पड़ता है।
आग लगने से गोदाम में रखे माल का लाखों रुपयों का नुकसान हो गया।
Faayedemand ↔ नुकसानदेह
दीर्घकालिक सरकारी बांड में निवेश करना बेहद फायदेमंद सिद्ध हुआ।
बिना सोचे-समझे शेयर बाजार में सट्टा लगाना वित्तीय रूप से नुकसानदेह है।
Laabhdaayak ↔ हानिकारक
सोलर पैनल लगवाने से बिजली का खर्च कम होना अत्यंत लाभदायक रहा।
भारी ब्याज पर कर्ज लेना किसी भी छोटे व्यवसाय के लिए हानिकारक होता है।
Adhishesh ↔ घाटा
इस वित्तीय वर्ष के अंत में बजट में दस करोड़ का अधिशेष दर्ज हुआ।
अनावश्यक सरकारी व्यय बढ़ने से वित्तीय घाटा तेजी से बढ़ गया।
Laabhaansh ↔ हानि
कंपनी के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर शेयरधारकों को बीस प्रतिशत लाभांश मिला।
उत्पाद की मांग घटने से चालू वित्तीय वर्ष में भारी हानि उठानी पड़ी।
Pratiphal ↔ अपव्यय
शिक्षा पर किया गया निवेश जीवन भर सुंदर प्रतिफल देता है।
दिखावे की पार्टियों में लाखों रुपये उड़ाना कोरा अपव्यय है।
Arthalaabh ↔ अर्थहानि
नई तकनीक अपनाने से उत्पादन लागत घटी और भारी अर्थलाभ हुआ।
अनुबंध टूटने के कारण फर्म को भारी अर्थहानि का सामना करना पड़ा।
Dhanaagaman ↔ धनहानि
त्योहारों के मौसम में दुकानों में बिक्री बढ़ते ही धनागमन बढ़ जाता है।
गलत निवेश योजनाओं में पूंजी लगाने से व्यापारियों को भयंकर धनहानि हुई।
Sakal-laabh ↔ शुद्ध-लाभ
खाते के अनुसार बिक्री पर पचास लाख रुपये का सकल-लाभ हुआ।
करों और भत्तों के भुगतान के पश्चात शुद्ध-लाभ तीस लाख रुपये बचा।
Bachat ↔ फिजूलखर्ची
हर महीने वेतन से थोड़ी-थोड़ी बचत करना भविष्य को सुरक्षित बनाता है।
दिखावे की फिजूलखर्ची से बड़े-बड़े अमीर भी कर्ज के जाल में फंस जाते हैं।
Kifaayat ↔ अपव्यय
गृहस्थी के प्रबंधन में किफायत बरतने से संकट के समय सहायता मिलती है।
सार्वजनिक धन का अपव्यय किसी भी लोक-कल्याणकारी सरकार के लिए अनुचित है।
Kifaayati ↔ खर्चीला
सार्वजनिक बस सेवा आम नागरिकों के लिए अत्यंत किफायती माध्यम है।
निजी विमान से यात्रा करना बहुत खर्चीला और विलासितापूर्ण शौक है।
Mitavyayee ↔ अपव्ययी
मितव्ययी व्यक्ति सोच-समझकर ही आवश्यक वस्तुओं पर धन लगाता है।
अपव्ययी पुत्र ने अपने पूर्वजों की संचित पैतृक संपत्ति कुछ ही वर्षों में उड़ा दी।
Mitavyayita ↔ अपव्ययिता
गांधीजी ने जीवन में सादगी और मितव्ययिता के महत्व पर सदा बल दिया।
उत्सवों में अनावश्यक अपव्ययिता समाज में दिखावे की होड़ पैदा करती है।
Sanchay ↔ अपव्यय
बुजुर्गों ने सदा धर्मपूर्वक धन के संचय की सीख दी है।
संसाधनों का अपव्यय आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों पर कुठाराघात है।
Arjan ↔ व्यय
ज्ञान और धन का अर्जन कठिन साधना और समर्पण मांगता है।
आय से अधिक व्यय करने वाला व्यक्ति कभी भी चिंतामुक्त नहीं रह सकता।
Kamaai ↔ खर्च
कड़ी धूप में पसीना बहाकर उसने महीने भर की कमाई जुटाई।
दवाइयों और इलाज का खर्च अचानक बढ़ जाने से बजट बिगड़ गया।
Kamaaoo ↔ निठल्ला
परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य होने के नाते उस पर भारी जिम्मेदारी है।
दिन भर ताश खेलकर समय बर्बाद करने वाला निठल्ला व्यक्ति समाज में मान नहीं पाता।
Udhaari ↔ नकद-भुगतान
उधारी पर माल बेचने से दुकानदार की कार्यशील पूंजी फंस जाती है।
नकद-भुगतान करने पर व्यापारी ग्राहकों को पांच प्रतिशत की विशेष छूट देते हैं।
Nakadee ↔ उधारी
आपातकालीन जरूरतों के लिए घर में कुछ नकदी रखना सदैव बुद्धिमानी है।
उधारी के बोझ तले दबा व्यापारी चैन की नींद नहीं सो पाता।
Rinamukt ↔ ऋणग्रस्त
बैंक का सारा कर्ज चुकाकर किसान आखिरकार ऋणमुक्त हो गया।
सूखे के चलते ब्याज पर ब्याज जुड़ने से किसान परिवार ऋणग्रस्त बना रहा।
Mahaajan ↔ कर्जदार
पुराने समय में महाजन ऊंचे ब्याज पर किसानों को धन उधार देते थे।
कर्जदार ने फसल बिकते ही अपना पुराना हिसाब चुकता कर दिया।
Divaaliya ↔ समर्थ
सट्टे में भारी नुकसान उठाने के बाद व्यापारी दिवालिया घोषित हो गया।
वित्तीय रूप से समर्थ कंपनी ने घाटे में चल रहे कारखाने को खरीद लिया।
Rinashodhan ↔ दिवालियापन
नियमित किस्तों द्वारा ऋणशोधन करने से ग्राहक का क्रेडिट स्कोर सुधरता है।
भारी कर्ज न चुका पाने पर न्यायालय ने कंपनी के दिवालियापन पर मुहर लगाई।
Poonji ↔ कर्ज
व्यवसाय शुरू करने के लिए उसने अपनी वर्षों की संचित पूँजी लगाई।
उच्च ब्याज पर लिया गया भारी कर्ज चुकाने में उसकी सारी आय चली जाती है।
Shulk ↔ निःशुल्क
परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए सभी विद्यार्थियों को निर्धारित शुल्क भरना पड़ा।
सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में पाठ्य-पुस्तकें और भोजन पूरी तरह निःशुल्क प्रदान किए जाते हैं।
Sashulk ↔ मुफ्त
विशिष्ट परामर्श प्राप्त करने के लिए यह सेवा सशुल्क उपलब्ध कराई जाती है।
सार्वजनिक पुस्तकालय में वाचनालय की सुविधा सभी पाठकों के लिए मुफ्त है।
Savetan ↔ अवैतनिक
कर्मचारियों को बीमारी के दौरान नियमानुसार सवेतन अवकाश दिया जाता है।
समाजसेवी संस्था में सचिव का पद पूरी तरह अवैतनिक और सेवाभावी है।
Savaitanik ↔ मानद
महाविद्यालय के प्राचार्य का पद एक स्थायी सवेतनिक पद है।
खेल संघ के अध्यक्ष का पद मानद है जिसके लिए कोई पारिश्रमिक नहीं मिलता।
Kardaata ↔ करचोर
ईमानदार करदाता के पैसों से ही देश की सड़कों और अस्पतालों का निर्माण होता है।
आय छुपाने वाले करचोर व्यापारियों पर आयकर विभाग ने छापा मारा।
Karmukti ↔ कराधान
कृषि आय पर सरकार द्वारा दी गई करमुक्ति से छोटे किसानों को राहत मिलती है।
विलासिता की वस्तुओं पर भारी कराधान लागू करके राजस्व जुटाया जाता है।
Karvanchana ↔ करअनुपालन
विदेशों में कालाधन जमा करके करवंचना करना गंभीर अपराध माना जाता है।
सच्चे देशभक्त समय पर करअनुपालन सुनिश्चित करके राष्ट्र-निर्माण में सहयोग करते हैं।
Maalgujaari ↔ माफी
अकाल के बावजूद सामंत किसानों से मालगुजारी की पाई-पाई वसूलते थे।
फसल बर्बाद होने पर सरकार ने संपूर्ण जनपद की मालगुजारी की माफी घोषित कर दी।
Lagaan ↔ रियायत
औपनिवेशिक शासन में भारी लगान के बोझ ने किसानों की कमर तोड़ दी थी।
प्राकृतिक आपदा के समय सहकारी समितियों ने ऋण में विशेष रियायत दी।
Agrim ↔ बकाया
मकान मालिक ने अनुबंध करते समय दो माह का अग्रिम किराया लिया।
बिजली का पिछला बकाया बिल जमा न करने पर कनेक्शन काट दिया गया।
Peshgee ↔ चुकता
मकान की बुकिंग के लिए क्रेता ने दस प्रतिशत पेशगी राशि जमा की।
अंतिम किस्त मिलते ही विक्रेता ने संपत्ति का हिसाब पूरी तरह चुकता कर दिया।
Bayaana ↔ अंतिम-भुगतान
जमीन का सौदा पक्का होते ही खरीदार ने बयाना के रूप में एक लाख रुपये दिए।
रजिस्ट्री के दिन बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से अंतिम-भुगतान संपन्न किया गया।
Kist ↔ एकमुश्त
कार ऋण की मासिक किस्त बैंक खाते से स्वतः कट जाती है।
लॉटरी जीतने पर उसे पूरी धनराशि एकमुश्त चेक द्वारा प्राप्त हुई।
Bhatta ↔ कटौती
कर्मचारियों को महंगाई से निपटने के लिए अतिरिक्त यात्रा भत्ता दिया जाता है।
भविष्य निधि के नाम पर वेतन से प्रतिमाह अनिवार्य कटौती की जाती है।
Dendaari ↔ लेनदारी
व्यापार में देनदारी बढ़ते ही संस्था की साख प्रभावित होने लगती है।
बाजार से अपनी पुरानी लेनदारी वसूल करने के लिए कंपनी ने कड़े कदम उठाए।
Parisampatti ↔ देनदारी
भूमि और भवन किसी भी औद्योगिक घराने की सबसे ठोस परिसंपत्ति होते हैं।
अनियंत्रित ऋणों के कारण कंपनी की देनदारी उसकी कुल संपत्ति से अधिक हो गई।
Aasti ↔ दायित्व
तुलन-पत्र (बैलेंस शीट) में हर कंपनी की आस्ति का स्पष्ट ब्यौरा होता है।
बैंक ऋण समय पर न लौटाने से यह कानूनी दायित्व बन जाता है।
Sakal ↔ शुद्ध
देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) इस वर्ष सात प्रतिशत बढ़ा।
मूल्यह्रास और कर घटाने के बाद फर्म की शुद्ध आय सामने आती है।
Aavak ↔ जावक
फसल के दिनों में मंडी में अनाज की आवक चरम पर पहुंच जाती है।
कारखाने से तैयार माल की जावक देश के विभिन्न राज्यों में हो रही है।
Jama ↔ निकासी
बचत खाते में नियमित रूप से धन जमा करने पर उचित ब्याज मिलता है।
एटीएम से नकदी की निकासी करते समय सावधानी बरतना आवश्यक है।
Aaharan ↔ जमा
अचानक चिकित्सा खर्च के लिए उसने अपनी भविष्य निधि से आहरण किया।
वेतन आते ही खाते में धन का नया जमा दर्ज हो गया।
Nivesh ↔ विनिवेश
स्टार्टअप कंपनियों में विदेशी निवेशकों ने भारी निवेश किया है।
घाटे में चल रहे सरकारी उपक्रमों में सरकार विनिवेश की नीति अपनाती है।
Saakh ↔ अनादर
समय पर ऋण चुकाने से व्यापारी की बाजार में साख बढ़ जाती है।
चेक बाउंस होने से वित्तीय संस्थाओं में व्यापारी का अनादर होता है।
Dhanaadesh ↔ नकदी
बड़ी व्यावसायिक खरीद का भुगतान धनादेश द्वारा करना अधिक सुरक्षित रहता है।
सब्जी मंडी में छोटे विक्रेताओं को तुरंत नकदी में भुगतान करना पड़ता है।
Thok ↔ खुदरा
थोक व्यापारी बड़े ट्रकों में सीधे कारखाने से माल मंगवाते हैं।
खुदरा दुकानदार मोहल्लों में ग्राहकों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में वस्तुएं बेचते हैं।
Phutkar ↔ थोक
फुटकर बाजार में सब्जियां थोड़ी ऊंची कीमतों पर मिलती हैं।
थोक मंडी में आलू की पूरी बोरी काफी कम दाम में मिल जाती है।
Laagat-moolya ↔ विक्रय-मूल्य
वस्तु के उत्पादन पर आई सामग्री और मजदूरी उसका लागत-मूल्य तय करती है।
व्यापारी लाभ जोड़ने के पश्चात ही वस्तु का विक्रय-मूल्य निर्धारित करता है।
Ankit-moolya ↔ वास्तविक-मूल्य
दुकानदार ने पुस्तक के अंकित-मूल्य पर बीस प्रतिशत की छूट दी।
छूट घटाने के बाद जो भुगतान किया गया, वही वस्तु का वास्तविक-मूल्य था।
Baajaar-bhaav ↔ सरकारी-दर
मंडी में गेहूं का बाजार-भाव प्रतिदिन की मांग और आपूर्ति पर निर्भर करता है।
राशन की दुकान पर गरीबों को अनाज निर्धारित सरकारी-दर पर उपलब्ध कराया जाता है।
Kaalaadhan ↔ सफेदधन
कर न चुकाकर छिपाया गया कालाधन देश की अर्थव्यवस्था को खोखला करता है।
ईमानदारी से अर्जित और कर-चुकाया सफेदधन व्यक्ति को निश्चिंतता प्रदान करता है।
Aghoshit-aay ↔ घोषित-आय
छापेमारी के दौरान जांच दल ने करोड़ों की अघोषित-आय पकड़ी।
वार्षिक आयकर रिटर्न में व्यक्ति अपनी समस्त घोषित-आय का विवरण प्रस्तुत करता है।
Kaalaabaajaari ↔ उचित-दर
संकट के समय दवाओं की कालाबजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
सहकारी समिति उचित-दर पर नागरिकों को अनिवार्य सामग्री उपलब्ध कराती है।
Munaafaakhori ↔ सेवाभाव
आपदा के समय मुनाफाखोरी करना मानवता के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
सच्चे स्वयंसेवक सेवाभाव से प्रेरित होकर संकटग्रस्तों को निःशुल्क राहत बांटते हैं।
Jamaakhori ↔ खुला-बाजार
अनाज की कृत्रिम कमी पैदा करने के लिए व्यापारियों ने जमाखोरी शुरू कर दी।
खुला-बाजार होने के कारण सभी खरीदारों को बिना किसी बाधा के माल मिल रहा है।
Tejee ↔ मंदी
अर्थव्यवस्था में सुधार होते ही शेयर बाजार में भारी तेजी देखने को मिली।
वैश्विक मंदी के कारण कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में छंटनी की नौबत आ गई।
Uchhaal ↔ गिरावट
उत्पाद की मांग बढ़ते ही कंपनी के शेयरों में जबर्दस्त उछाल आया।
कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट से परिवहन उद्योग को राहत मिली।
Bikree ↔ खरीद
त्योहारी सीजन में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की बिक्री में भारी इजाफा हुआ।
कच्चे माल की समय पर खरीद न होने से उत्पादन कुछ दिनों के लिए रुक गया।
Batta ↔ प्रीमियम
पुराने मॉडल के मोबाइल फोन पर दुकानदार ने दस प्रतिशत बट्टा दिया।
दुर्लभ सिक्कों और नए आईपीओ के शेयरों को भारी प्रीमियम देकर खरीदा गया।
Chhoot ↔ अधिभार
नए साल के उपलक्ष्य में कपड़ों की खरीद पर बीस प्रतिशत छूट मिल रही है।
अत्यधिक बिजली खपत करने वाले औद्योगिक उपभोक्ताओं पर विशेष अधिभार लगाया गया।
Dalaali ↔ मजदूरी
जमीन के सौदे में बिचौलिए ने दोनों पक्षों से भारी दलाली वसूल की।
दिन भर धूप में ईंटें ढोने के बाद श्रमिक को उसकी पसीने की मजदूरी मिली।
Hundee ↔ नकदी
प्राचीन काल में दूरस्थ नगरों के व्यापार के लिए हुंडी का प्रचलन था।
स्थानीय दैनिक लेन-देन में लोग आज भी नकदी पर अधिक भरोसा करते हैं।
Sikka ↔ कागजी-मुद्रा
पुरातात्विक खुदाई में गुप्त काल का सोने का प्राचीन सिक्का प्राप्त हुआ।
आधुनिक अर्थव्यवस्था का अधिकांश नकद लेन-देन कागजी-मुद्रा द्वारा संपन्न होता है।
Mudrasfeeti ↔ मुद्राअवस्फीति
मुद्रास्फीति बढ़ने से दैनिक उपभोग की आवश्यक वस्तुएं आम जनता की पहुंच से बाहर हो जाती हैं।
मुद्राअवस्फीति के दौर में मांग कम होने से उद्योगों में उत्पादन घटाना पड़ता है।
Moolyavriddhi ↔ मूल्यह्रास
शहरी क्षेत्र में जमीन की कीमतों में अप्रत्याशित मूल्यवृद्धि हुई है।
पुरानी मशीनों के निरंतर उपयोग से उनके मूल्यह्रास को बही-खाते में दर्ज किया गया।
Svarn ↔ पीतल
विवाह के अवसर पर कन्या को शुद्ध स्वर्ण के आभूषण भेंट किए गए।
पूजा के बर्तनों के निर्माण के लिए पीतल धातु का उपयोग किया जाता है।
Rajat ↔ रांगा
खेल प्रतियोगिता में विजेता को स्वर्ण तथा उपविजेता को रजत पदक दिया गया।
बर्तनों की कलई करने के लिए रांगा धातु का प्रयोग किया जाता है।
Ratna ↔ कंकर
पारखी जौहरी ने धूल में पड़े असली रत्न को तुरंत पहचान लिया।
सड़क निर्माण के लिए मजदूरों ने ढेर सारे कंकर बिछाए।
Heera ↔ कांच
हीरा अपनी कठोरता और अद्वितीय चमक के लिए संसार भर में प्रसिद्ध है।
चमकदार होने के बावजूद कांच कभी हीरे की बराबरी नहीं कर सकता।
Mukta ↔ घोंघा
गहरे समुद्र में गोता लगाकर तैराक ने बहुमूल्य मुक्ता खोज निकाला।
रेत के तट पर बच्चे खेलने के लिए घोंघा और सीपियां एकत्र कर रहे थे।
Paarasmani ↔ लोहा
कहावत है कि पारसमणि के स्पर्श मात्र से निकृष्ट धातु भी सोना बन जाती है।
पुलों और इमारतों की नींव को मजबूती देने के लिए भारी लोहा उपयोग में लाया जाता है।
Arthavaan ↔ अर्थहीन
अनुभवी चार्टर्ड एकाउंटेंट ने फर्म के लिए अत्यंत अर्थवान योजना प्रस्तुत की।
बिना किसी शोध के किया गया वित्तीय निवेश पूरी तरह अर्थहीन साबित हुआ।
Lakshmi ↔ अलक्ष्मी
दीपावली की रात श्रद्धालु माता लक्ष्मी का विधिपूर्वक पूजन करते हैं।
घर में कलह और गंदगी रहने से अलक्ष्मी का वास माना जाता है।
Shree ↔ श्रीहीन
धर्म और सत्य के आचरण से राजा का सिंहासन श्री और सम्मान से चमकता रहा।
पराजय और विपन्नता के बाद वह प्रतापी राजा पूरी तरह श्रीहीन दिखाई देने लगा।
Vaibhavshaalee ↔ दीन
वैभवशाली महलों में रहने वाले राजा को प्रजा की कठिनाइयों का आभास होना चाहिए।
दीन और असहाय वृद्धों की सेवा करना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है।
Dhanvaan ↔ कंगाल
धनवान व्यक्ति यदि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझे तो कई बुराइयां मिट सकती हैं।
व्यापार में धोखाधड़ी का शिकार होकर वह देखते ही देखते कंगाल हो गया।
Svaamitva ↔ पट्टा
रजिस्ट्री कराने के बाद ही भवन का पूर्ण स्वामित्व क्रेता को प्राप्त हुआ।
खनिज खनन के लिए सरकार ने कंपनी को बीस वर्षों का पट्टा जारी किया।
Aadhat ↔ मजदूरी
कृषि मंडी में आढ़त का कार्य करने वाले व्यापारी किसानों और मिलों को जोड़ते हैं।
कड़ी मेहनत के बाद शाम को पल्लेदार अपनी दैनिक मजदूरी लेकर घर लौटा।
Share ↔ ऋणपत्र
कंपनी के विकास में सीधी भागीदारी के लिए उसने इक्विटी शेयर खरीदे।
निश्चित ब्याज की गारंटी चाहने वाले निवेशकों ने सुरक्षित ऋणपत्र में धन लगाया।
Byaaj ↔ मूलधन
ऋण की अदायगी में पहले ब्याज कटता है और बाद में मूलधन घटता है।
बैंक की सावधि जमा योजना में उसका मूलधन पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
Upbhokta ↔ उत्पादक
जागरूक उपभोक्ता सदैव वस्तुओं की गुणवत्ता और एक्सपायरी डेट देखकर खरीदारी करता है।
उत्पादक नई तकनीक का इस्तेमाल करके लागत कम करने का प्रयास करता है।
Aapoorti ↔ मांग
बाजार में प्याज की भरपूर आपूर्ति होने से कीमतों में गिरावट आई।
त्योहारों पर मिठाइयों और खोए की मांग कई गुना बढ़ जाती है।
Adhishulk ↔ छूट
हवाई यात्रा के टिकट पर व्यस्त समय के दौरान विशेष अधिशुल्क जोड़ दिया गया।
छात्रों को शैक्षणिक भ्रमण के लिए रेल टिकट में पचास प्रतिशत छूट दी गई।
Khajaana ↔ खाली-तिजोरी
पुरातत्वविदों को किले के तहखाने में सोने के सिक्कों से भरा खजाना मिला।
युद्ध के निरंतर खर्चों ने राजशाही की खाली-तिजोरी को दुनिया के सामने उजागर कर दिया।
Sampatti ↔ विपत्ति
सम्पत्ति में सभी लोग मित्र बनने के लिए आगे आते हैं।
सच्चे मित्र की परीक्षा केवल विपत्ति और कठिनाइयों में ही होती है।
Dhanaarjan ↔ धनक्षय
नैतिक मार्ग पर चलकर किया गया धनार्जन ही परिवार में स्थायी सुख लाता है।
जुआ और नशा धनक्षय के सबसे बड़े और विनाशकारी कारण माने गए हैं।
Arthopaarjan ↔ अर्थव्यय
शिक्षा पूरी करने के बाद युवक ने सम्मानजनक अर्थोपार्जन का साधन खोजा।
विलासितापूर्ण जीवनशैली पर किया गया अर्थव्यय व्यक्ति को बचत से वंचित कर देता है।
Sikke ↔ खोटे-सिक्के
टक्साल से जारी किए गए नए तांबे और निकल के सिक्के बाजार में आ गए।
धोखेबाजों द्वारा फैलाए गए खोटे-सिक्के पकड़ने के लिए पुलिस ने अभियान चलाया।
Khara-sona ↔ खोटा-सिक्का
कठिन परिस्थितियों की अग्नि-परीक्षा में तपकर ही खरा-सोना चमकता है।
विपत्ति के समय कपटी व्यक्ति खोटा-सिक्का साबित हुआ और किसी काम न आया।
Taksaal ↔ बाजार
सरकार की आधिकारिक टक्साल में नए सुरक्षा मानकों वाले सिक्के ढाले जाते हैं।
सिक्के टक्साल से निकलकर खुले बाजार में खरीदारी और बिक्री के माध्यम बनते हैं।
Raajkosh ↔ निजी-कोष
जनता द्वारा दिए गए करों से राजकोष भरता है जिसका उपयोग विकास कार्यों में होता है।
ट्रस्ट के अध्यक्ष ने जन-कल्याण के कार्यों के लिए अपने निजी-कोष से दस लाख दिए।
Achal-sampatti ↔ चल-संपत्ति
मकान, जमीन और फ्लैट अचल-संपत्ति की श्रेणी में आते हैं जिन्हें स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।
सोना, नकदी और वाहन चल-संपत्ति माने जाते हैं जिन्हें आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है।
Karyogya ↔ करमुक्त
वार्षिक सीमा से अधिक अर्जित वेतन करयोग्य आय की श्रेणी में शामिल होता है।
कृषि से होने वाली आय हमारे देश में पूरी तरह करमुक्त रखी गई है।
Vimudreekaran ↔ पुनर्मुद्रीकरण
कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने पुराने बड़े नोटों का विमुद्रीकरण किया।
नए सुरक्षा मानकों वाले नोट जारी करके अर्थव्यवस्था का पुनर्मुद्रीकरण तेजी से पूरा हुआ।
Arthadand ↔ पारितोषिक
यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर चालक पर दो हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
साहसी कार्य करने वाले बालक को गणतंत्र दिवस पर प्रशस्ति पत्र और नकद पारितोषिक दिया गया।
Lekhaapareekshit ↔ गैर-लेखापरीक्षित
कंपनी ने निवेशकों के विश्वास के लिए अपनी लेखापरीक्षित वित्तीय रिपोर्ट सार्वजनिक की।
गैर-लेखापरीक्षित खातों पर बैंक कभी भी बड़ा औद्योगिक ऋण स्वीकृत नहीं करते।
Dhankuber ↔ कंगाल
विशाल बहुराष्ट्रीय कंपनियों का स्वामी नगर का सबसे बड़ा धनकुबेर माना जाता है।
सट्टेबाजी के दलदल में फंसकर वह धनकुबेर से कंगाल बन गया।
Laabhaanvit ↔ हानिग्रस्त
सरकारी सब्सिडी योजना से ग्रामीण क्षेत्र के लाखों किसान लाभांवित हुए।
बाढ़ में फसल डूब जाने के कारण हानिग्रस्त किसानों को विशेष आर्थिक पैकेज दिया गया।
Parishramee ↔ आलसी
परिश्रमी विद्यार्थी निरंतर अभ्यास करके परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करता है।
आलसी व्यक्ति आज का काम कल पर टालकर अपने भविष्य को अंधकारमय बना लेता है।
Udyamee ↔ अकर्मण्य
उद्यमी मनुष्य कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी नए अवसर तलाश लेता है।
अकर्मण्य लोग हाथ पर हाथ धरे बैठे रहकर केवल भाग्य को दोष देते रहते हैं।
Udyam ↔ आलस्य
उद्यम ही सफलता की एकमात्र और वास्तविक कुंजी माना गया है।
आलस्य मनुष्य के शरीर में रहने वाला उसका सबसे बड़ा शत्रु है।
Shram ↔ विश्राम
खेतों में दिन-रात कठोर श्रम करने के बाद ही फसल पकती है।
थके हुए मजदूरों ने वृक्ष की शीतल छाया में बैठकर कुछ देर विश्राम किया।
Udyogee ↔ निरुद्योगी
उद्योगी व्यक्ति कभी किसी के आगे हाथ फैलाने की नौबत नहीं आने देता।
निरुद्योगी स्वभाव के कारण वह पैतृक व्यापार को भी संभाल नहीं सका।
Prayaas ↔ प्रमाद
निरंतर निष्ठावान प्रयास करने पर असंभव दिखने वाला लक्ष्य भी सुलभ हो जाता है।
कर्मचारियों के तनिक से प्रमाद के कारण पूरी निर्माण परियोजना में भारी व्यवधान आया।
Mehnat ↔ सुस्ती
किसान की कड़ी मेहनत का ही परिणाम है कि देश का अन्न भंडार भरा है।
सुबह की सुस्ती को त्यागकर व्यायाम करना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
Mehnatee ↔ काहिल
मेहनती मजदूर ने सूर्यास्त तक सारा भारी सामान सुरक्षित उतार दिया।
काहिल व्यक्ति काम से बचने के लिए सदैव झूठे बहाने बनाता रहता है।
Kaaryarat ↔ सेवानिवृत्त
वह पिछले बीस वर्षों से इस प्रतिष्ठित संस्थान में सफलतापूर्वक कार्यरत है।
साठ वर्ष की आयु पूर्ण होने पर वरिष्ठ अधिकारी ससम्मान सेवानिवृत्त हो गए।
Rojgaar ↔ बेरोजगार
नए कारखानों के खुलने से क्षेत्र के हजारों युवाओं को सम्मानजनक रोजगार मिला।
डिग्री हासिल करने के बावजूद उपयुक्त कौशल न होने से युवक बेरोजगार भटक रहा था।
Rojgaaree ↔ बेरोजगारी
कौशल विकास कार्यक्रमों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगारी के नए अवसर सृजित हुए।
आर्थिक मंदी के कारण कई विकसित देशों में भी बेरोजगारी की दर बढ़ गई।
Kaamgaar ↔ निठल्ला
कारखाने का हर कामगार अपने कार्य को पूरी निष्ठा और तत्परता से पूरा करता है।
दिन भर चौराहे पर समय गंवाने वाले निठल्ले व्यक्ति को कोई गंभीरता से नहीं लेता।
Shilpee ↔ अनाड़ी
कुशल शिल्पी ने संगमरमर के पत्थर को तराशकर सजीव मूर्ति का रूप दे दिया।
अनाड़ी कारीगर ने महंगे लकड़ी के दरवाजे को काटकर पूरी तरह बिगाड़ दिया।
Kaareegar ↔ नौसिखिया
अनुभवी कारीगर ने पुरानी घड़ी के बारीक पुर्जों को कुछ ही मिनटों में ठीक कर दिया।
नौसिखिया चालक को अभी व्यस्त मार्गों पर वाहन चलाने का अनुभव नहीं है।
Abhyaasee ↔ अनभ्यासी
संगीत का नियमित अभ्यासी गायक मंच पर बिना किसी झिझक के गाता है।
अनभ्यासी लेखक के लिए एक छोटा सा निबंध लिखना भी दुष्कर हो जाता है।
Prashikshit ↔ अप्रशिक्षित
प्रशिक्षित बचाव दल ने बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
आधुनिक मशीनों को अप्रशिक्षित मजदूरों के हाथों में सौंपना जोखिम भरा है।
Vyaavasaayik ↔ अव्यावसायिक
सफल होने के लिए कार्यस्थल पर पूर्णतः व्यावसायिक दृष्टिकोण अपनाना पड़ता है।
अव्यावसायिक व्यवहार के कारण कई प्रतिभाशाली लोग भी अपने करियर में पिछड़ जाते हैं।
Saadhana ↔ लापरवाही
शास्त्रीय गायन वर्षों की अटूट साधना और गुरु-सेवा से सिद्ध होता है।
अस्पताल में दवाओं के रखरखाव में तनिक भी लापरवाही जानलेवा हो सकती है।
Lagan ↔ अनमनापन
विद्यार्थी की सच्ची लगन देखकर गुरु ने उसे अपने सभी गूढ़ रहस्य सिखाए।
कार्य में अनमनापन रहने से कोई भी कार्य समय पर और सफाई से पूरा नहीं हो पाता।
Tatpar ↔ ढीला
सैनिक देश की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर करने को सदा तत्पर रहते हैं।
ढीला और सुस्त कर्मचारी समय पर आदेशों का पालन करने में असफल रहता है।
Tatparata ↔ शिथिलता
अग्निशमन दल ने अद्भुत तत्परता दिखाते हुए आग को कुछ ही पलों में बुझा दिया।
प्रशासनिक शिथिलता के चलते विकास योजनाएं वर्षों तक अधूरी पड़ी रहीं।
Fuurtee ↔ मंदी
खिलाड़ी ने गजब की फुर्ती दिखाते हुए सीमा रेखा पर शानदार कैच लपका।
कारोबार में आई मंदी के कारण बाजार की हलचल शांत पड़ गई।
Karmasheelta ↔ अकर्मण्यता
जापान के नागरिकों की निरंतर कर्मशीलता ने युद्ध के बाद देश को समृद्ध बनाया।
अकर्मण्यता किसी भी समाज को पतन और पराधीनता के गर्त में धकेल देती है।
Udyamasheelta ↔ निष्क्रियता
युवाओं की उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए नए ऋण कार्यक्रम आरंभ किए गए।
प्रशासन की निष्क्रियता के कारण जन-समस्याएं दिनों-दिन गंभीर रूप लेती गईं।
Kaaryakushal ↔ कार्यअक्षम
कार्यकुशल प्रबंधक हर परियोजना को समय सीमा से पूर्व ही पूर्ण करवा लेता है।
कार्यअक्षम कर्मियों को पुनः बुनियादी प्रशिक्षण प्रदान करने का निर्णय लिया गया।
Kaaryadakshata ↔ कार्यअक्षमता
कंप्यूटर तकनीक के उपयोग से कार्यालयीन कार्यदक्षता में भारी वृद्धि हुई।
संसाधनों की कमी और कार्यअक्षमता के कारण उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त न हो सका।
Utpaadak ↔ अनुत्पादक
उद्योगों में उत्पादक श्रम को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष बोनस दिया जाता है।
अनुत्पादक व्यय पर रोक लगाकर बजट को घाटे से बाहर निकाला जा सकता है।
Utpaadakata ↔ अनुत्पादकता
आधुनिक कृषि उपकरणों ने प्रति हेक्टेयर उत्पादकता को दोगुना कर दिया।
कारखाने में बार-बार बिजली गुल होने से भारी अनुत्पादकता की स्थिति पैदा हो गई।
Shramajeevee ↔ परजीवी
श्रमजीवी इंसान अपने परिश्रम से रूखी-सूखी रोटी खाकर भी आत्मसम्मान से जीता है।
दूसरों की गाढ़ी कमाई पर पलने वाला परजीवी कभी सम्मान का पात्र नहीं हो सकता।
Shramasaadhya ↔ अनायास
पहाड़ काटकर मार्ग बनाना अत्यंत श्रमसाध्य और जोखिम भरा कार्य था।
प्रकृति की कृपा से फसल को अनायास ही पर्याप्त वर्षा का जल मिल गया।
Pahal ↔ सन्नाटा
ग्राम प्रधान ने स्वच्छता अभियान में स्वयं आगे बढ़कर सराहनीय पहल की।
विपदा के समय अधिकारियों के कार्यालयों में सन्नाटा पसरा हुआ था।
Srijan ↔ विनाश
कवि और चित्रकार अपनी कल्पना शक्ति से सुंदर कला का सृजन करते हैं।
युद्ध की विभीषिका केवल विनाश और जन-हानि लेकर आती है।
Rachanaatmak ↔ ध्वंसात्मक
युवाओं की असीम ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों में लगाना राष्ट्रहित में है।
अराजक तत्वों की ध्वंसात्मक गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
Srijanaatmak ↔ संहारकारी
वैज्ञानिकों ने मानव कल्याण के लिए नई ऊर्जा के सृजनात्मक स्रोत खोजे।
परमाणु हथियारों की संहारकारी क्षमता संपूर्ण मानव सभ्यता को मिटा सकती है।
Niyojan ↔ अनियोजन
उचित आर्थिक नियोजन के बिना कोई भी बड़ा उद्योग सफल नहीं हो सकता।
अनियोजन और अव्यवस्था के कारण अच्छा-खासा प्रोजेक्ट भी समय से पिछड़ गया।
Yojanaabaddh ↔ अनियोजित
योजनाबद्ध तरीके से अध्ययन करने वाले छात्र परीक्षा में घबराते नहीं हैं।
अनियोजित शहरीकरण के कारण महानगरों में जलभराव की गंभीर समस्या खड़ी हो गई।
Sangathit ↔ असंगठित
संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को पेंशन और स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिलता है।
असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा दिलाने के लिए कानून बनाए गए हैं।
Prabandhan ↔ कुप्रबंधन
कुशल प्रबंधन के कारण घाटे में चल रही कंपनी कुछ ही वर्षों में मुनाफे में आ गई।
वित्तीय कुप्रबंधन ने एक फलते-फूलते अंतरराष्ट्रीय बैंक को दिवालिया बना दिया।
Suprabandh ↔ कुप्रबंध
मेले में लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बावजूद पुलिस के सुप्रबंध से कोई अनहोनी नहीं हुई।
हवाई अड्डे पर कुप्रबंध के चलते यात्रियों को घंटों तक अपनी उड़ानों की प्रतीक्षा करनी पड़ी।
Kaaryaanvayan ↔ स्थगन
नीतियों का कागजों से धरातल पर सफल कार्यान्वयन ही लोकतंत्र की वास्तविक विजय है।
बजट की कमी के कारण महत्वपूर्ण सड़क निर्माण योजना का अनिश्चितकाल के लिए स्थगन हो गया।
Siddhi ↔ असिद्धि
कठोर तपस्या और निरंतर श्रम के पश्चात साधक को आत्मज्ञान की सिद्धि प्राप्त हुई।
प्रयासों में ढिलाई रखने पर कार्य में असिद्धि का मुंह देखना पड़ता है।
Kritakaarya ↔ अकृतकार्य
कठिन अभियान को सफलतापूर्वक पूरा करके कृतकार्य सैनिक गर्व से लौटे।
योजना के अभाव में अकृतकार्य दल को खाली हाथ वापस आना पड़ा।
Saphal ↔ असफल
दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम से साधारण बालक भी सफल नागरिक बन सकता है।
शुरुआती दौर में असफल होने पर भी साहसी व्यक्ति कभी निराश नहीं होता।
Kaaragar ↔ बेकार
बुखार के उपचार के लिए यह पारंपरिक घरेलू औषधि अत्यंत कारगर सिद्ध हुई।
घटिया सामग्री से तैयार किया गया औजार कुछ ही दिनों में बेकार साबित हुआ।
Sakriyata ↔ निष्क्रियता
पर्यावरण संरक्षण के प्रति युवाओं की बढ़ती सक्रियता एक सुखद संकेत है।
प्रशासन की निष्क्रियता के कारण ऐतिहासिक इमारतों की हालत जर्जर हो रही है।
Daayitva ↔ गैरजिम्मेदारी
एक जागरूक नागरिक होने के नाते मतदान करना हमारा परम दायित्व है।
कार्यस्थल पर गैरजिम्मेदारी बरतने से पूरी टीम की साख पर धब्बा लग सकता है।
Jawaabdehee ↔ मनमानी
लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में जनता के प्रति सरकार की जवाबदेही तय होती है।
तानाशाह शासक की मनमानी से पूरे देश की व्यवस्था तहस-नहस हो गई।
Athak ↔ थका-हारा
अथक प्रयासों के बल पर वैज्ञानिक दल ने मंगल अभियान को सफल बनाया।
दिन भर की चिलचिलाती धूप में मजदूरी करने के बाद वह थका-हारा घर लौटा।
Aklaant ↔ क्लांत
अक्लांत परिश्रमी व्यक्ति लक्ष्य प्राप्ति तक कभी रुकने का नाम नहीं लेता।
लंबी दौड़ पूरी करने के बाद धावक अत्यंत क्लांत अवस्था में जमीन पर बैठ गया।
Shramadaan ↔ आरामपरस्ती
गांव के युवाओं ने मिलकर श्रमदान द्वारा टूटे हुए तटबंध की मरम्मत कर दी।
आरामपरस्ती में डूबा व्यक्ति जीवन में कोई ठोस मुकाम हासिल नहीं कर पाता।
Utsaahpoorvak ↔ बेमन-से
विद्यार्थियों ने विज्ञान प्रदर्शनी की तैयारी में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
बिना रुचि के बेमन-से किया गया कार्य कभी भी प्रभावशाली परिणाम नहीं देता।
Talleen ↔ बेपरवाह
मूर्तिकार अपनी कलाकृति को अंतिम रूप देने में पूरी तरह तल्लीन था।
कर्तव्य के प्रति बेपरवाह व्यक्ति आवश्यक दिशा-निर्देशों की भी अनदेखी कर देता है।
Dhyeyanishth ↔ लक्ष्यहीन
ध्येयनिष्ठ युवा हर बाधा को पार करते हुए सफलता के शिखर पर पहुंचते हैं।
स्पष्ट योजना न होने से लक्ष्यहीन जीवन जीने वाले लोग बीच में ही भटक जाते हैं।
Lakshyavedhee ↔ दिशाहीन
अर्जुन की लक्ष्यवेधी दृष्टि केवल चिड़िया की आंख पर केंद्रित थी।
दिशाहीन प्रयासों से बहुमूल्य समय और ऊर्जा व्यर्थ ही नष्ट होती है।
Dridhasankalp ↔ अनिर्णय
दृढ़संकल्प के बल पर पर्वतारोही ने माउंट एवरेस्ट की चोटी फतह की।
लगातार अनिर्णय की स्थिति में बने रहने से अच्छे अवसर हाथ से निकल जाते हैं।
Udyog ↔ विश्राम
कठोर उद्योग करने से ही राष्ट्र की संपन्नता और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
लंबे समय तक काम करने के बाद मन और शरीर दोनों को उचित विश्राम चाहिए।
Kaaryabhaar ↔ अवकाश
नए पद पर पदोन्नत होते ही अधिकारी पर भारी कार्यभार आ गया।
साल भर की निरंतर व्यस्तता के बाद कर्मचारियों को ग्रीष्मकालीन अवकाश मिला।
Kaaryakaal ↔ पदमुक्ति
राष्ट्रपति का कार्यकाल संविधान के अनुसार पांच वर्षों के लिए निर्धारित है।
जांच आयोग की रिपोर्ट आने के बाद भ्रष्ट अधिकारी की तत्काल पदमुक्ति कर दी गई।
Kaaryadivas ↔ छुट्टी
बैंक सप्ताह में पांच कार्यदिवस ग्राहकों की सेवा के लिए खुले रहते हैं।
राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर सभी शैक्षणिक संस्थानों में सार्वजनिक छुट्टी घोषित की गई।
Kaaryaavadhi ↔ विश्रामकाल
कारखाने में कर्मचारियों की दैनिक कार्यावधि आठ घंटे तय की गई है।
दोपहर में आधे घंटे का विश्रामकाल मिलने से श्रमिकों की थकान दूर हो जाती है।
Shramabal ↔ यंत्रबल
कृषि और निर्माण कार्यों में आज भी विशाल श्रमबल की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
यंत्रबल के बढ़ते उपयोग ने भारी काम को बहुत कम समय में संभव बना दिया है।
Hastashilp ↔ यांत्रिकी
भारतीय हस्तशिल्प की वस्तुएं अपनी कलात्मकता के लिए विश्व भर में सराही जाती हैं।
आधुनिक यांत्रिकी ने बड़े पैमाने पर एक जैसी वस्तुओं का तीव्र उत्पादन सुलभ किया है।
Hastanirmit ↔ यंत्रनिर्मित
कालीनों के हस्तनिर्मित नमूने अपनी अनूठी बुनावट के लिए महंगे बिकते हैं।
यंत्रनिर्मित वस्त्र सस्ते और टिकाऊ होने के कारण आम बाजार में लोकप्रिय हैं।
Vetanbhogee ↔ स्वरोजगारी
वेतनभोगी कर्मचारी को माह के अंत में मिलने वाले निश्चित वेतन पर निर्भर रहना पड़ता है।
स्वरोजगारी व्यक्ति अपनी लगन और समय के अनुसार स्वतंत्र रूप से कमाई करता है।
Naukareepesha ↔ व्यापारी
नौकरीपेशा लोगों को हर महीने अपने खर्चे बजट के अनुरूप तय करने होते हैं।
व्यापारी जोखिम उठाकर पूंजी लगाता है और लाभ-हानि का सामना करता है।
Rojgaaronmukh ↔ अनुत्पादक
युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं।
कोरी सैद्धांतिक बातें सिखाना आधुनिक युग में अनुत्पादक सिद्ध होता है।
Jeevikopaarjan ↔ दानवृत्ति
ईमानदारी से किया गया जीविकोपार्जन व्यक्ति को गौरव और संतोष प्रदान करता है।
सक्षम होते हुए भी दानवृत्ति पर निर्भर रहना मनुष्य के आत्मसम्मान को गिराता है।
Svaavalamban ↔ परावलंबन
स्वावलंबन से मनुष्य का आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान बढ़ता है।
परावलंबन की आदत व्यक्ति को कमजोर और लाचार बना देती है।
Svaavalambee ↔ परावलंबी
स्वावलंबी नारी अपने परिश्रम से परिवार का भरण-पोषण करने में सक्षम है।
परावलंबी व्यक्ति छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी दूसरों का मुंह ताकता है।
Aatmanirbhar ↔ पराश्रित
देश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
विदेशी सहायता पर पराश्रित अर्थव्यवस्थाएं संकट के समय असहाय हो जाती हैं।
Aatmanirbharata ↔ पराश्रय
खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना राष्ट्र की पहली प्राथमिकता थी।
दूसरों के पराश्रय में जीने से व्यक्ति की अपनी मौलिक प्रतिभा कुंठित हो जाती है।
Parishramasheel ↔ प्रमादी
परिश्रमशील कार्यकर्ताओं के बल पर संस्था ने कई राष्ट्रीय पुरस्कार जीते।
प्रमादी कर्मचारी की लापरवाही से महत्वपूर्ण सरकारी फाइल खो गई।
Udyamavaan ↔ अकर्मण्य
उद्यमवान पुरुष अपने बाहुबल से बंजर भूमि को भी उपजाऊ बना देता है।
अकर्मण्य व्यक्ति उत्तम अवसर मिलने पर भी कोई कदम नहीं उठाता।
Karmaveer ↔ वाकवीर
कर्मवीर मनुष्य मौन रहकर काम करता है और उसकी सफलता स्वयं बोलती है।
मंच से बड़ी-बड़ी बातें करने वाला वाकवीर जमीन पर कोई ठोस काम नहीं करता।
Karmath ↔ बातूनी
कर्मठ समाजसेवियों ने महामारी के समय दिन-रात पीड़ितों की सेवा की।
बातूनी लोग केवल चर्चाएं करते रहते हैं किंतु काम करने का समय आने पर भाग जाते हैं।
Kriyaasheel ↔ सुस्त
सदा क्रियाशील रहने वाला व्यक्ति वृद्धावस्था में भी स्वस्थ और प्रसन्न रहता है।
सुस्त स्वभाव के कारण वह दिन भर बिस्तर पर ही पड़ा रहता है।
Kriyaasheelta ↔ जड़ता
प्रकृति की निरंतर क्रियाशीलता हमें बिना थके आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
मानसिक जड़ता त्यागकर ही समाज नए वैज्ञानिक विचारों को स्वीकार कर सकता है।
Cheshta ↔ निश्चेष्टता
गिरने के बाद फिर से उठने की सच्ची चेष्टा ही मनुष्य की पहचान है।
रोग के कारण रोगी पूर्ण निश्चेष्टता की स्थिति में बिस्तर पर पड़ा रहा।
Prayatna ↔ निष्प्रयत्न
कठिन गणित के प्रश्नों को बार-बार हल करने का प्रयत्न करना चाहिए।
बिना किसी प्रयत्न के निष्प्रयत्न बैठे रहने से कोई उपलब्धि हासिल नहीं होती।
Yatna ↔ अयत्न
जंगल की आग बुझाने के लिए ग्रामीणों ने हर संभव यत्न किया।
सिद्ध संतों के मुख से ज्ञान की बातें अयत्न ही प्रवाहित होती हैं।
Saprayaas ↔ अनायास
विदेशी भाषा सीखने के लिए सप्रयास व्याकरण और शब्दावली रटनी पड़ती है।
मातृभाषा तो बच्चा अपने परिवार में अनायास ही बोलना सीख जाता है।
Prayaasasheel ↔ आलसी
प्रयासशील छात्र हर असफलता को नई सीख मानकर पुनः प्रयास करता है।
आलसी व्यक्ति छोटी सी बाधा आते ही सब कुछ छोड़कर बैठ जाता है।
Saadhya ↔ असाध्य
नियमित व्यायाम और संतुलित आहार से कई रोग पूरी तरह साध्य हो जाते हैं।
लापरवाही के चलते जब रोग अंतिम चरण में पहुंच जाए तो वह असाध्य बन जाता है।
Susaadhya ↔ दुःसाध्य
पारस्परिक सहयोग और तालमेल से जटिल कार्य भी सुसाध्य बन जाता है।
दुर्गम बर्फीले पहाड़ों पर चढ़ना अकेले किसी के लिए भी दुःसाध्य कार्य है।
Shramasheel ↔ अनुद्यमी
श्रमशील समुदाय अपनी कड़ी मेहनत से बंजर धरती पर भी फसलें उगा लेता है।
अनुद्यमी लोग संसाधनों से संपन्न होकर भी कोई नया कार्य आरंभ नहीं कर पाते।
Karmaparaayan ↔ कर्तव्यविमुख
कर्मपरायण सैनिक सीमा पर विषम परिस्थितियों में भी अपने मोर्चे पर डटे रहते हैं।
संकट के समय कर्तव्यविमुख होकर भाग जाने वाले अधिकारी को बर्खास्त कर दिया गया।
Kartavyanishtha ↔ कर्तव्यहीनता
पुलिस अधीक्षक की अद्भुत कर्तव्यनिष्ठा के कारण जिले में कानून व्यवस्था मजबूत हुई।
ड्यूटी के दौरान सोने वाले गार्ड को कर्तव्यहीनता के आरोप में निलंबित किया गया।
Kaamchor ↔ कर्मनिष्ठ
कामचोर व्यक्ति काम के समय बहाने बनाकर छुपने की कोशिश करता है।
कर्मनिष्ठ वैज्ञानिक ने दिन-रात प्रयोगशाला में रहकर नई वैक्सीन तैयार की।
Kaaryanishtha ↔ कामचोरी
कर्मचारियों की उच्च कार्यनिष्ठा ने कंपनी को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित किया।
सरकारी दफ्तरों में कामचोरी की प्रवृत्ति से आम नागरिकों को भारी परेशानी होती है।
Kaaryaarambh ↔ कार्यावसान
शुभ मुहूर्त में भूमि-पूजन के साथ विशाल अस्पताल निर्माण का कार्यारंभ हुआ।
समारोह के कार्यावसान पर सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।
Karmakshetra ↔ विश्रामस्थल
मानव जीवन एक कर्मक्षेत्र है जहाँ हर व्यक्ति को अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है।
तीर्थयात्रा की समाप्ति पर यात्रियों ने विश्रामस्थल में रात्रि बिताई।
Shramapriya ↔ आरामपसंद
श्रमप्रिय किसान अपने हाथों से कुदाल चलाकर पसीना बहाने में गर्व अनुभव करता है।
आरामपसंद व्यक्ति वातानुकूलित कमरे से बाहर निकलने में भी कतराता है।
Karmayogee ↔ भोगवादी
गीता में श्रीकृष्ण ने निष्काम कर्मयोगी बनने का अमर उपदेश दिया है।
भोगवादी व्यक्ति केवल क्षणिक शारीरिक सुखों के पीछे भागता रहता है।
Prabandhak ↔ मजदूर
कुशल प्रबंधक पूरी परियोजना की रूपरेखा बनाकर कार्यों का आवंटन करता है।
मजदूर अपनी शारीरिक शक्ति से जमीन पर योजना को साकार रूप देता है।
Adheekshak ↔ अधीनस्थ
अधीक्षक ने सभी वार्डों का औचक निरीक्षण करके व्यवस्था का जायजा लिया।
अधीनस्थ कर्मचारियों ने अधीक्षक द्वारा दिए गए निर्देशों का तुरंत पालन किया।
Padonnati ↔ पदावनति
उत्कृष्ट सेवाओं के पुरस्कार स्वरूप कर्मचारी को प्रबंधक पद पर पदोन्नति मिली।
लापरवाही और अनुशासनहीनता साबित होने पर लिपिक की पदावनति कर दी गई।
Niyukti ↔ बर्खास्तगी
कड़े साक्षात्कार और परीक्षा के बाद प्रतिभाशाली शिक्षक की नियुक्ति हुई।
भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए जाने पर अधिकारी की तत्काल प्रभाव से बर्खास्तगी कर दी गई।
Bhartee ↔ छंटनी
सेना में नवयुवकों के लिए खुली भर्ती रैली का आयोजन किया गया।
आर्थिक मंदी के कारण आईटी कंपनी ने सैकड़ों कर्मचारियों की छंटनी कर दी।
Kaaryavaahee ↔ उदासीनता
शिकायत मिलते ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दोषी फैक्ट्री पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की।
प्रशासन की उदासीनता के कारण सड़क के गड्ढे महीनों तक नहीं भरे गए।
Kaaryaanubhav ↔ अनभिज्ञता
दस वर्षों के कार्यानुभव के आधार पर उन्हें इस विशाल परियोजना का प्रमुख बनाया गया।
नियमों के प्रति अनभिज्ञता के कारण नए कर्मचारी से फॉर्म भरने में त्रुटि हो गई।
Shramamoolya ↔ मुफ्तखोरी
सभ्य समाज में हर मजदूर को उसके श्रममूल्य का उचित सम्मान मिलना चाहिए।
मुफ्तखोरी की आदत व्यक्ति को अकर्मण्य और समाज पर बोझ बना देती है।
Shramasaadhana ↔ आरामपरस्ती
श्रमसाधना से ही मनुष्य इतिहास रचता है और समाज को नई दिशा देता है।
आरामपरस्ती के कारण कई सभ्यताओं का वैभव धूल में मिल गया।
Nipunata ↔ अकुशलता
सर्जन ने अद्भुत निपुणता के साथ जटिल हृदय प्रत्यारोपण पूरा किया।
ड्राइवर की अकुशलता के कारण बस मोड़ पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
Kaaryaadesh ↔ कार्यमुक्ति
विभाग ने संवेदक को पुल निर्माण का औपचारिक कार्यादेश जारी कर दिया।
परियोजना सफलतापूर्वक पूरी होने पर तकनीकी विशेषज्ञों को कार्यमुक्ति दे दी गई।
Shilp ↔ विनाश
प्राचीन मंदिरों का बेजोड़ शिल्प आज भी स्थापत्य कला का शिखर माना जाता है।
भूकंप के विनाश ने कई ऐतिहासिक स्मारकों को मलबे में तब्दील कर दिया।
Kartavyabodh ↔ लापरवाही
डॉक्टर ने गहरे कर्तव्यबोध से प्रेरित होकर आधी रात को आपात ऑपरेशन किया।
चिकित्सक की तनिक सी लापरवाही मरीज के जीवन को संकट में डाल सकती है।
Hastakala ↔ यंत्रकला
मिट्टी के खिलौने और हाथ से बुनी साड़ियां भारतीय हस्तकला की पहचान हैं।
आधुनिक रोबोटिक्स और स्वचालित यंत्रकला ने विनिर्माण क्षेत्र में क्रांति ला दी है।
Kaaryakushalta ↔ अक्षमता
कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए नियमित कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं।
नेतृत्व की अक्षमता के चलते कंपनी घाटे से उबरने में विफल रही।
Saadhak ↔ बाधक
अनुशासन और एकाग्रता अध्ययन में सदा साधक सिद्ध होते हैं।
अनावश्यक मोबाइल फोन का उपयोग विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ा बाधक तत्व है।
Anubhavee ↔ नौसिखिया
तूफान में जहाज को सुरक्षित किनारे लाने का श्रेय अनुभवी नाविक को जाता है।
नौसिखिया तैराक को गहरे पानी में जाने से पहले प्रशिक्षक की सहायता लेनी चाहिए।
Praveenata ↔ अकुशलता
सॉफ्टवेयर कोडिंग में अपनी प्रवीणता के कारण उसे विदेश में उच्च पद मिला।
तकनीकी अकुशलता के कारण डाटा ट्रांसफर में गंभीर त्रुटियां आ गईं।
Athak-parishram ↔ आलस्य
किसानों के अथक-परिश्रम से ही बंजर धरती पर लहलहाती फसलें खड़ी हुईं।
आलस्य के कारण मनुष्य सुनहरे अवसर भी अपने हाथों से गंवा देता है।
Utpaadan ↔ उपभोग
नए कारखाने के चालू होने से सीमेंट का उत्पादन दोगुना हो गया।
गर्मियों के मौसम में बिजली और पानी का उपभोग अत्यधिक बढ़ जाता है।
Kaaryapranaalee ↔ अव्यवस्था
पारदर्शी कार्यप्रणाली अपनाने से कार्यालय में भ्रष्टाचार समाप्त हो गया।
अव्यवस्था के चलते अस्पताल में मरीजों को घंटों कतार में खड़े रहना पड़ा।
Kaaryaadhyaksh ↔ सहायक
कार्याध्यक्ष ने पूरी टीम को समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित करके सौंपे।
सहायक ने आवश्यक दस्तावेज और रिपोर्ट तैयार करके तुरंत प्रस्तुत की।
Majdoori ↔ मुफ्तखोरी
ईमानदार मजदूर अपने पसीने की मजदूरी से परिवार का सम्मानपूर्वक पोषण करता है।
मुफ्तखोरी की आदत व्यक्ति की कार्यक्षमता और आत्मसम्मान को नष्ट कर देती है।
Shram-sammaan ↔ श्रम-अवमानना
सभ्य समाज में झाड़ू लगाने वाले से लेकर वैज्ञानिक तक सभी के श्रम-सम्मान की भावना होनी चाहिए।
शारीरिक कार्य करने वालों की श्रम-अवमानना करना सामंती मानसिकता का परिचायक है।
Karmaleen ↔ उदासीन
कर्मलीन वैज्ञानिक चौबीसों घंटे शोध प्रयोगशाला में अनुसंधान में जुटे रहे।
कंपनी के संकट के प्रति उदासीन कर्मचारियों को चेतावनी जारी की गई।
Suvyavasthit ↔ अव्यवस्थित
सुव्यवस्थित पुस्तकालय में कोई भी पुस्तक ढूंढना अत्यंत सरल होता है।
अव्यवस्थित दफ्तर में फाइलें इधर-उधर बिखरी रहने से कामकाज बाधित होता है।
Kaaryadaksh ↔ अयोग्य
कार्यदक्ष अभियंता ने मशीन की खराबी को तुरंत पहचानकर ठीक कर दिया।
अयोग्य कर्मियों के कारण महत्वपूर्ण परियोजना समय पर पूरी न हो सकी।
Prashikshu ↔ प्रशिक्षक
प्रशिक्षु इंजीनियर वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में साइट पर काम सीख रहा है।
अनुभवी प्रशिक्षक ने नए छात्रों को मशीन संचालन के व्यावहारिक नियम सिखाए।
Udyogaparaayan ↔ सुस्त
उद्योगपरायण समाज निरंतर नवाचार करके विश्व स्तर पर अग्रणी बन जाता है।
सुस्त मानसिकता वाले लोग हमेशा बदलाव और नए काम से घबराते हैं।
Shramasaadhak ↔ आरामतलब
श्रमसाधक युवक ने अपनी बाहों के बल पर परिवार की तकदीर बदल दी।
आरामतलब पुत्र पैतृक संपत्ति के सहारे जीवन बिताने का सपना देखता रहा।
Kaaryatatpar ↔ ढीला-ढाला
कार्यतत्पर सिपाही ने संकेत मिलते ही त्वरित कार्यवाही की।
ढीला-ढाला रवैया अपनाने वाले कर्मचारियों को कार्यालय से चेतावनी पत्र दिया गया।
Kartavyapaalan ↔ कर्तव्यभंग
डॉक्टरों द्वारा निष्ठापूर्वक कर्तव्यपालन से कई गंभीर मरीजों की जान बच सकी।
ड्यूटी से बिना बताए गायब रहना स्पष्ट रूप से कर्तव्यभंग की श्रेणी में आता है।
Shramanishtha ↔ आलस्य
सच्ची श्रमनिष्ठा ही किसी भी साधारण श्रमिक को असाधारण व्यक्तित्व बनाती है।
आलस्य में डूबा मनुष्य अपने भीतर छिपी प्रतिभा को भी कभी पहचान नहीं पाता।
Pahalkarta ↔ अनुगामी
साहसी पहलकर्ता नए उद्योग स्थापित करके दूसरों के लिए मार्ग प्रशस्त करता है।
रूढ़िवादी अनुगामी केवल दूसरों द्वारा बनाए गए ढर्रे पर ही चलना जानता है।
Bhoot ↔ भविष्य
भूत की गलतियों से सीख लेकर ही मनुष्य अपने जीवन को संवार सकता है।
भविष्य की चिंता में वर्तमान के सुखद पलों को गंवाना बुद्धिमानी नहीं है।
Ateet ↔ अनागत
इतिहासकार अतीत के गौरवशाली अध्यायों की खोज में लगे रहते हैं।
अनागत संकट की पूर्व तैयारी कर लेने से समाज सुरक्षित रहता है।
Sanaatan ↔ सामयिक
सत्य और अहिंसा के नैतिक मूल्य सनातन हैं जो हर युग में प्रासंगिक रहते हैं।
फैशन और रुझान केवल सामयिक होते हैं जो कुछ ही महीनों में बदल जाते हैं।
Nitya ↔ अनित्य
आत्मा को नित्य और अविनाशी माना गया है जिसका कभी नाश नहीं होता।
संसार के सभी भौतिक सुख अनित्य हैं और समय के साथ समाप्त हो जाते हैं।
Chirantan ↔ नश्वर
प्रेम और करुणा की चिरंतन भावनाएं मानव हृदय को जोड़कर रखती हैं।
मानव देह नश्वर है, इसलिए अहंकार का त्याग करके सत्कर्म करने चाहिए।
Kaalajayee ↔ क्षणभंगुर
तुलसीदास रचित रामचरितमानस एक कालजयी महाकाव्य है जो सदियों से पूज्य है।
पानी का बुलबुला क्षणभंगुर होता है जो हवा के तनिक से झोंके से फूट जाता है।
Poorvakaal ↔ उत्तरकाल
पूर्वकाल में गुरुकुलों में छात्रों को समस्त विधाओं की शिक्षा दी जाती थी।
मुगल साम्राज्य के उत्तरकाल में क्षेत्रीय शक्तियों का तेजी से उदय हुआ।
Aadikaal ↔ आधुनिक-काल
हिंदी साहित्य के आदिकाल में वीरगाथाओं और रासो काव्यों की रचना हुई।
आधुनिक-काल में गद्य साहित्य और तकनीकी विधाओं का अभूतपूर्व विकास हुआ।
Praagaitihaasik ↔ ऐतिहासिक
भीमबेटका की गुफाओं में प्रागैतिहासिक काल के शैलचित्र आज भी सुरक्षित हैं।
ताजमहल और लाल किला भारत के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारक हैं।
Madhyakaaleen ↔ आधुनिककालीन
मध्यकालीन भारत में भक्ति आंदोलन ने समाज में समरसता का संदेश दिया।
आधुनिककालीन समाज में वैज्ञानिक अनुसंधान और डिजिटल क्रांति का बोलबाला है।
Praacheenata ↔ नवीनता
काशी नगरी अपनी अद्वितीय प्राचीनता और धार्मिक विरासत के लिए विश्वविख्यात है।
कला में नवीनता लाने के लिए युवा चित्रकार नए रंगों और तकनीकों का प्रयोग करते हैं।
Puraatanata ↔ आधुनिकता
ऐतिहासिक खंडहर अपनी पुरातनता से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
आधुनिकता की दौड़ में हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों को नहीं भूलना चाहिए।
Samakaaleen ↔ असमकालीन
तुलसीदास और अकबर एक ही कालखंड के प्रसिद्ध समकालीन व्यक्तित्व थे।
कालिदास और कबीर सर्वथा असमकालीन कवि थे जिनके जीवनकाल में सदियों का अंतर था।
Kaalaateet ↔ कालबद्ध
उपनिषदों का आध्यात्मिक ज्ञान कालातीत है जिसकी महत्ता कभी समाप्त नहीं होती।
सरकारी योजनाओं का कार्यान्वयन कालबद्ध कार्यक्रम के तहत पूरा किया जाना चाहिए।
Ushaakaal ↔ संध्याकाल
उषाकाल में आकाश में फैली लालिमा मन को असीम शांति प्रदान करती है।
संध्याकाल होते ही पक्षी अपने घोंसलों की ओर चहचहाते हुए लौटने लगते हैं।
Praatah ↔ सायं
प्रातः काल का भ्रमण स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए वरदान माना गया है।
सायं के समय मंदिर में शंख और घंटों की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
Diva ↔ रात्रि
दिवा के समय सूर्य का प्रखर प्रकाश संपूर्ण सृष्टि को प्रकाशित करता है।
रात्रि के अंधकार में आकाश में अनगिनत तारे टिमटिमाते नजर आते हैं।
Madhyaahn ↔ मध्यरात्रि
ग्रीष्म ऋतु में मध्याह्न के समय सूर्य की तपन असहनीय हो जाती है।
मध्यरात्रि के सन्नाटे में दूर से आती रेलगाड़ी की सीटी सुनाई दे रही थी।
Poorvaahn ↔ अपराह्न
कार्यालय की महत्वपूर्ण बैठक पूर्वाह्न दस बजे आयोजित की गई है।
अपराह्न के समय धूप ढलने पर बच्चे मैदान में खेलने के लिए निकलते हैं।
Paurvaahnik ↔ अपराह्निक
वैदिक अनुष्ठानों में पौर्वाह्निक कृत्यों का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है।
अपराह्निक सभा में दिन भर के निर्णयों की समीक्षा की गई।
Pratyush ↔ प्रदोष
प्रत्यूष वेला में पूर्व दिशा में उगते सूर्य की स्वर्णिम किरणें अद्भुत लगती हैं।
प्रदोष काल में शिव मंदिर में विशेष दीप प्रज्वलित किए जाते हैं।
Arunoday ↔ गोधूलि
अरुणोदय होते ही पक्षियों का सुमधुर कलरव वन में गूंजने लगा।
गोधूलि बेला में चरवाहे अपनी गायों को चराकर घर की ओर लौटने लगे।
Savera ↔ शाम
जब जागो तभी सवेरा — इस लोकोक्ति का अर्थ है कि सुधार कभी भी संभव है।
काम समाप्त करके सभी मजदूर थके कदमों से शाम को घर लौटते हैं।
Praatahkaal ↔ सायंकाल
प्रातःकाल की स्वच्छ वायु में योग करने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।
सायंकाल की आरती में सम्मिलित होने के लिए मंदिर में भारी भीड़ उमड़ी।
Tadake ↔ देर-रात
किसान तड़के ही हल-बैल लेकर अपने खेतों की ओर चल पड़ा।
परीक्षा की तैयारी में विद्यार्थी देर-रात तक जागकर पढ़ाई करते रहे।
Poorvasandhya ↔ उषावेला
स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर राष्ट्रपति ने राष्ट्र को संबोधित किया।
उषावेला में सूर्योदय होते ही नए दिन का हर्षोल्लास शुरू हुआ।
Uttaraayan ↔ दक्षिणायन
मकर संक्रांति के पर्व पर सूर्य उत्तरायण में प्रवेश करता है।
दक्षिणायन की अवधि में रातें लंबी और दिन छोटे होने लगते हैं।
Sheeghra ↔ विलंब
सूचना मिलते ही एम्बुलेंस शीघ्र घटनास्थल पर पहुंच गई।
यातायात जाम के कारण बैठक में पहुंचने में आधा घंटा विलंब हो गया।
Jaldee ↔ देरी
ट्रेन पकड़ने के लिए हमें घर से जल्दी निकलना पड़ेगा।
कागजी कार्रवाई में देरी होने के कारण पासपोर्ट बनने में समय लगा।
Tatkaal ↔ विलंबित
ऑनलाइन भुगतान प्रणाली से पैसा तत्काल दूसरे खाते में स्थानांतरित हो जाता है।
तकनीकी खराबी के कारण उड़ान का प्रस्थान कई घंटों के लिए विलंबित हो गया।
Satvar ↔ मंथन
सेनापति ने परिस्थिति का आकलन करके सत्वर निर्णय लिया।
नीतियों पर गहरा विचार-मंथन करने में महीनों का समय लग गया।
Atisheeghra ↔ धीमे
रोगी की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे अतिशीघ्र अस्पताल पहुंचाया गया।
पहाड़ी रास्तों पर वाहन को बहुत धीमे और संभलकर चलाना चाहिए।
Tvarit ↔ धीमा
आपदा प्रबंधन दल ने त्वरित राहत अभियान चलाकर हजारों लोगों को बचाया।
प्रशासनिक प्रक्रियाओं का धीमा चलना आम जनता में असंतोष उत्पन्न करता है।
Drut ↔ मंथर
संगीतकार ने तबले पर द्रुत लय में शानदार तान छेड़ी।
नदी की मंथर गति देखकर मन में शांति का संचार होता है।
Drutagaamee ↔ मंदगामी
बुलेट ट्रेन जैसी द्रुतगामी रेलगाड़ियां महानगरों की दूरी मिनटों में तय कर देती हैं।
भारी लोड से लदी बैलगाड़ी मंदगामी चाल से कच्ची सड़क पर आगे बढ़ रही थी।
Avilamb ↔ सविंलब
आदेश प्राप्त होते ही पुलिस दल अविलंब घटनास्थल के लिए रवाना हो गया।
तकनीकी बाधाओं के कारण परियोजना की रिपोर्ट सविंलब प्रस्तुत की जा सकी।
Tvara ↔ विलंब
जीवन रक्षक कार्यों में तनिक भी त्वरा दिखाना वरदान सिद्ध होता है।
अनावश्यक कागजी औपचारिकताओं में विलंब के कारण कई परियोजनाएं अधूरी रह जाती हैं।
Sheeghrata ↔ धीमापन
डॉक्टरों की सूझबूझ और शीघ्रता से जहर का असर फैलने से पहले रोक लिया गया।
दफ्तर के कामकाज में धीमापन नागरिकों की परेशानी का कारण बनता है।
Jaldbaajee ↔ धैर्य
सड़क पार करते समय जल्दबाजी करने से गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
कठिन समय में धैर्य धारण करने से ही मनुष्य सही मार्ग खोज पाता है।
Utaavalee ↔ ठहराव
बिना सोचे-समझे निर्णय लेने में उतावली दिखाना भविष्य में भारी पड़ सकता है।
अनुभवी नेता के भाषण में अद्भुत ठहराव और गंभीरता दिखाई देती है।
Saamayik ↔ असामयिक
किसानों को समय पर खाद-बीज का वितरण एक अत्यंत सामयिक कदम था।
युवा खिलाड़ी के असामयिक निधन से संपूर्ण खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
Samayochit ↔ असामयिक
अग्निशामकों की समयोचित सहायता से विशाल मॉल को जलने से बचा लिया गया।
फसल कटाई के समय असामयिक ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
Kusamay ↔ सुसमय
कुसमय में धैर्य खोना अपनी ही परेशानियों को और बढ़ाने जैसा है।
सुसमय आने पर मनुष्य के सोए हुए भाग्य के द्वार भी खुल जाते हैं।
Kuvela ↔ सुवेला
आधी रात को किसी के घर कुवेला दस्तक देना शिष्टाचार के विरुद्ध है।
प्रातः काल की सुवेला में किए गए शुभ संकल्प अवश्य पूर्ण होते हैं।
Samayabaddh ↔ अनियत
मेट्रो रेल परियोजना को समयबद्ध तरीके से तीन वर्षों में पूर्ण कर लिया गया।
अनियत कार्यप्रणाली के कारण कई अदालतें मुकदमों के बोझ तले दबी रहती हैं।
Samayapaalak ↔ देर-लतीफ
समयपालक कर्मचारी सदा कार्यालय में समय से दस मिनट पहले उपस्थित होता है।
देर-लतीफ अधिकारियों के कारण कई महत्वपूर्ण बैठकें समय पर शुरू नहीं हो पातीं।
Samayanishtha ↔ अनियमितता
जर्मनी और जापान में नागरिकों की समयनिष्ठा पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।
दफ्तरों में उपस्थिति की अनियमितता को रोकने के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी लगाई गई।
Samay-poorv ↔ समय-पश्चात
अस्पताल में समय-पूर्व जन्मे शिशुओं को विशेष इनक्यूबेटर में रखा जाता है।
नियत समय-पश्चात जमा किए गए परीक्षा फॉर्म अस्वीकार कर दिए गए।
Praarambh ↔ समापन
शुभ कार्य का प्रारंभ सदैव ईश्वर वंदना के साथ किया जाता है।
वार्षिक खेल महोत्सव का समापन राष्ट्रगान और पुरस्कार वितरण के साथ हुआ।
Udbhav ↔ अवसान
हिमालय की चोटियों से पवित्र गंगा नदी का उद्भव होता है।
दिन ढलते ही सूर्य के अवसान के साथ ही चारों ओर गोधूलि बेला छा गई।
Pratham ↔ अंतिम
दौड़ प्रतियोगिता में प्रथम आने वाले धावक को स्वर्ण पदक मिला।
अभियान के अंतिम चरण में सभी सैनिकों ने पूरी शक्ति झोंक दी।
Poorvavartee ↔ परवर्ती
पूर्ववर्ती सरकार की लोक-कल्याणकारी नीतियों को नए मंत्रिमंडल ने भी जारी रखा।
परवर्ती शासकों की अकर्मण्यता के कारण विशाल साम्राज्य का पतन हो गया।
Poorvagaamee ↔ पश्चगामी
वैज्ञानिक सोच मानव समाज को पूर्वगामी दिशा में आगे ले जाती है।
अंधविश्वास और कुरीतियां समाज को पश्चगामी बनाती हैं।
Aadya ↔ अन्त्य
ऋग्वेद मानव जाति की सबसे आद्य लिखित कृति माना जाता है।
काव्य के अन्त्य चरण में कवि ने अपनी आध्यात्मिक अनुभूतियों को समेटा है।
Poorvaardh ↔ उत्तरार्ध
बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में भारत में स्वाधीनता संग्राम अपने चरम पर था।
सदी के उत्तरार्ध में सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष विज्ञान में क्रांति आई।
Aagaamee ↔ विगत
आगामी चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
विगत वर्ष में देश ने खाद्यान्न उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया।
Bhaavee ↔ भूतपूर्व
आज के विद्यार्थी ही राष्ट्र के भावी कर्णधार और नीति-निर्माता हैं।
भूतपूर्व सैनिकों के पुनर्वास के लिए सरकार कई कल्याणकारी योजनाएं चलाती है।
Yugaantakaaree ↔ रूढ़िबद्ध
डिजिटल क्रांति ने मानव इतिहास में युगांतकारी परिवर्तन उपस्थित किया।
रूढ़िबद्ध समाज नए परिवर्तनों को स्वीकार करने में संकोच करता है।
Vartamaan ↔ अतीत
जो मनुष्य अपने वर्तमान को संवार लेता है, उसका भविष्य स्वतः सुंदर हो जाता है।
अतीत के दुखों को बार-बार याद करने से केवल निराशा ही हाथ लगती है।
Haaliya ↔ पुरातन
हालिया सर्वेक्षण के अनुसार युवाओं में तकनीकी शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ा है।
पुरातन परंपराओं में प्रकृति संरक्षण के कई सुंदर नियम निहित हैं।
Aaj ↔ कल
आज का काम आज ही पूरा कर लेना बुद्धिमान व्यक्ति का लक्षण है।
कल क्या होगा, यह कोई नहीं जानता; अतः सत्कर्म में देर न करें।
Ab ↔ तब
अब संभल जाने का समय आ गया है, अन्यथा बहुत देर हो जाएगी।
जब संकट आया था, तब सभी पड़ोसियों ने एकजुट होकर मदद की थी।
Sada ↔ कभी-नहीं
सत्यवादी मनुष्य सदा सत्य के मार्ग पर ही अडिग रहता है।
ईमानदार व्यक्ति कभी-नहीं बेईमानी का धन अपने घर में लाने की सोचता।
Sarvada ↔ कदाचित
ईश्वर की कृपा समस्त प्राणियों पर सर्वदा समान रूप से बरसती है।
कदाचित ही ऐसा होता है जब मरुस्थल में मूसलाधार वर्षा देखने को मिले।
Nityaprati ↔ यदा-कदा
वह नित्यप्रति सुबह पांच बजे उठकर व्यायामशाला जाता है।
व्यस्तता के कारण वह यदा-कदा ही अपने पैतृक गांव जा पाता है।
Anaadi ↔ सांत
सृष्टि का प्रवाह अनादि काल से निरंतर चला आ रहा है।
भौतिक संसार की हर वस्तु सांत और सीमित सीमाओं में बंधी है।
Chirasthaayee ↔ अल्पकालिक
सत्य और धर्म के आधार पर स्थापित संबंध चिरस्थायी होते हैं।
क्रोध का आवेश अल्पकालिक होता है, किंतु उसका दुष्परिणाम लंबा खिंच सकता है।
Deerghakaalik ↔ अल्पकालिक
शिक्षा और स्वास्थ्य में दीर्घकालिक निवेश राष्ट्र की नींव को सुदृढ़ करता है।
संकट से तुरंत निपटने के लिए अल्पकालिक वित्तीय उपाय किए गए।
Deerghakaaleen ↔ अल्पकालीन
पर्यावरण संकट से निपटने के लिए दीर्घकालीन नीति की तत्काल आवश्यकता है।
मौसम की मार से निपटने हेतु किसानों को अल्पकालीन ऋण दिया गया।
Chiranjeevee ↔ अल्पायु
पौराणिक कथाओं में अश्वत्थामा और हनुमान को चिरंजीवी माना गया है।
रोग के कारण प्रतिभाशाली संगीतकार अल्पायु में ही संसार छोड़ गया।
Kshanikata ↔ स्थायित्व
साधु-संत भौतिक सुखों की क्षणिकता को समझाकर विरक्ति का उपदेश देते हैं।
सत्य और न्याय पर आधारित समाज में ही वास्तविक स्थायित्व आ सकता है।
Chirkaal ↔ अल्पकाल
तपस्वियों ने चिरकाल तक वनों में तपस्या करके ज्ञान प्राप्त किया।
अल्पकाल में ही नए व्यापार ने बाजार में अपनी मजबूत धाक जमा ली।
Chirasthaayitva ↔ नश्वरता
कालिदास के नाटकों का चिरस्थायित्व उनकी अनूठी भाषा और भाव में निहित है।
मानव जीवन की नश्वरता को समझकर व्यक्ति को विनम्र रहना चाहिए।
Kshanabhangurata ↔ अमरता
संसार के वैभव की क्षणभंगुरता को देखकर सिद्धार्थ ने संन्यास लिया।
महान बलिदानियों को राष्ट्र के इतिहास में अमरता प्राप्त होती है।
Nirantar ↔ रुक-रुककर
निरंतर बहने वाली नदी चट्टानों को भी काटकर अपना मार्ग बना लेती है।
रुक-रुककर हो रही बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।
Satat ↔ खंडित
सतत विकास का लक्ष्य प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
बार-बार बिजली जाने से उत्पादन का चक्र खंडित हो गया।
Aviraam ↔ सविराम
डॉक्टरों ने चौबीस घंटे तक अविराम काम करके सभी घायलों की जान बचाई।
कक्षा में सविराम भाषण देने से विद्यार्थियों का ध्यान भटकने से बचता है।
Sadaabahaar ↔ मौसमी
उष्णकटिबंधीय वनों के सदाबहार वृक्ष वर्ष भर हरे-भरे रहते हैं।
मौसमी फल केवल वर्ष के विशेष महीनों में ही बाजार में उपलब्ध होते हैं।
Vaarshik ↔ दैनिक
कंपनी अपनी वार्षिक वित्तीय रिपोर्ट प्रतिवर्ष मार्च के महीने में जारी करती है।
दैनिक समाचार पत्र सुबह-सुबह पाठकों के घर पहुंच जाता है।
Yugaant ↔ युगारंभ
महाभारत का युद्ध द्वापर युग के युगान्त का सूचक माना जाता है।
आजादी मिलने के साथ ही आधुनिक भारत के एक नए युगारंभ की नींव पड़ी।
Kshan ↔ युग
एक क्षण की असावधानी से वर्षों की मेहनत नष्ट हो सकती है।
कठिन तपस्या के बाद कई युगों तक धर्म का राज स्थापित रहा।
Pal ↔ सदी
हवाई दुर्घटना में एक ही पल में सैकड़ों जिंदगियां काल के गाल में समा गईं।
गुलामी की बेड़ियों को काटने में देश को लगभग एक पूरी सदी लग गई।
Sadyah ↔ चिर
सद्यः घटित घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत रवाना हुई।
चिर संचित ज्ञान ही वृद्धावस्था में मनुष्य का सच्चा मार्गदर्शक बनता है।
Aashu ↔ दीर्घ
आशु कवि ने दिए गए विषय पर तुरंत ही सुंदर पंक्तियों की रचना कर दी।
दीर्घ कानूनी प्रक्रिया के कारण मुकदमे का फैसला आने में वर्षों लग गए।
Shaishav ↔ वार्धक्य
शैशव काल में बच्चे की मानसिक और शारीरिक देखभाल अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वार्धक्य में शरीर शिथिल हो जाने पर अपनों के स्नेह और सहारे की आवश्यकता होती है।
Baalyaavastha ↔ वृद्धावस्था
बाल्यावस्था में सीखे गए अच्छे संस्कार जीवन भर साथ निभाते हैं।
वृद्धावस्था में स्वास्थ्य का ध्यान रखना और शांत रहना सबसे बड़ा सुख है।
Kishoraavastha ↔ प्रौढ़ावस्था
किशोरावस्था में शारीरिक और मानसिक बदलावों के कारण उचित मार्गदर्शन आवश्यक है।
प्रौढ़ावस्था में मनुष्य अपने अनुभवों से गंभीर और परिपक्व निर्णय लेता है।
Yauvan ↔ वार्धक्य
यौवन के उत्साह और ऊर्जा को सही दिशा देकर इतिहास बदला जा सकता है।
वार्धक्य में बाल सफेद और हड्डियां कमजोर हो जाना प्रकृति का अकाट्य नियम है।
Jara ↔ यौवन
जरा और व्याधि से कोई भी प्राणी बच नहीं सकता, यह संसार का नियम है।
यौवन के उन्माद में कभी भी दूसरों के प्रति अनादर की भावना नहीं लानी चाहिए।
Sadyojaat ↔ वृद्ध
सद्योजात शिशु की कोमल मुस्कान हर किसी का दिल मोह लेती है।
परिवार के वयोवृद्ध बुजुर्गों का आशीर्वाद घर में शांति और समृद्धि लाता है।
Yuva ↔ वृद्ध
देश की अर्थव्यवस्था में युवा शक्ति का योगदान सर्वोपरि है।
वृद्ध नागरिकों के अनुभवों से मार्गदर्शन पाकर युवा गलतियों से बच सकते हैं।
Amar ↔ मर्त्य
देश पर मर मिटने वाले अमर शहीदों का नाम इतिहास के पन्नों में सदा जीवित रहेगा।
मर्त्य मनुष्य को इस नश्वर संसार की क्षणभंगुरता को स्वीकार करना ही पड़ता है।
Vasant ↔ पतझड़
वसन्त ऋतु में उपवन में रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं और प्रकृति मुस्काती है।
पतझड़ के आते ही पेड़ों के सूखे पत्ते टूटकर धरती पर बिखर जाते हैं।
Varshaaritu ↔ शुष्क-ऋतु
वर्षाऋतु के आगमन से धरती की प्यास बुझती है और हरियाली छा जाती है।
शुष्क-ऋतु में तेज धूप और जल स्रोतों के सूखने से जंगलों में आग का खतरा बढ़ जाता है।
Sanvatsar ↔ माह
भारतीय कालगणना में प्रत्येक संवत्सर का अपना विशिष्ट नाम और महत्व होता है।
कठोर मेहनत के बाद एक ही माह में उसने अपना काम पूरा कर दिखाया।
Yugaantar ↔ ठहराव
इंटरनेट के आविष्कार ने सूचना और संचार के क्षेत्र में युगांतर उपस्थित कर दिया।
राजनीतिक ठहराव के कारण देश के कई विकास कार्य लंबे समय तक अटके रहे।
Yugapravartak ↔ रूढ़िवादी
राजा राममोहन राय जैसे युगप्रवर्तक विचारकों ने सती प्रथा जैसी कुरीतियों को मिटाया।
रूढ़िवादी मानसिकता वाले लोग समाज में हर नए सुधार का विरोध करते हैं।
Praacheenakaal ↔ आधुनिककाल
प्राचीनकाल में नालंदा विश्वविद्यालय विश्व भर के विद्वानों का प्रमुख केंद्र था।
आधुनिककाल में ऑनलाइन शिक्षा ने ज्ञान को घर-घर तक सुलभ बना दिया है।
Vartamaanakaal ↔ भूतकाल
वर्तमानकाल में उठाया गया ठोस कदम ही हमारे उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करता है।
भूतकाल की यादों में ही खोए रहने से वर्तमान के कर्तव्य प्रभावित होते हैं।
Bhavishyakaal ↔ भूतकाल
पर्यावरणविद् भविष्यकाल में जल संकट की गंभीर चेतावनी दे रहे हैं।
भूतकाल की गलतियों को दोहराने से बचना हर विवेकशील मनुष्य का कर्तव्य है।
Kaalik ↔ त्रैकालिक
राजनीतिक सत्ताएं कालिक होती हैं जो कुछ वर्षों के बाद समाप्त हो जाती हैं।
ईश्वरीय सत्य त्रैकालिक है जो भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों में एक समान रहता है।
Avinaashee ↔ विनाशी
आत्मा को अविनाशी बताया गया है जिस पर समय और मृत्यु का कोई वश नहीं चलता।
मिट्टी से बना घड़ा विनाशी है जो जरा सी चोट से टूटकर नष्ट हो जाता है।
Ajar ↔ जीर्ण
देवताओं को अजर और अमर माना जाता है जिन पर वृद्धावस्था का प्रभाव नहीं होता।
सदियों पुरानी हवेली अब जीर्ण अवस्था में पहुंच चुकी है जिसकी दीवारें दरक रही हैं।
Chiranaveen ↔ जीर्णशीर्ण
प्रकृति का सौंदर्य चिरनवीन है जो हर ऋतु में नए रूप में प्रकट होता है।
सड़क किनारे जीर्णशीर्ण मकान कभी भी गिर सकता है, अतः सतर्कता आवश्यक है।
Yugayugaantar ↔ क्षणभर
भारत की ऋषि परंपरा का ज्ञान युगयुगांतर से मानवता का कल्याण करता आ रहा है।
क्षणिक क्रोध में क्षणभर के लिए मनुष्य अपने विवेक पर नियंत्रण खो बैठता है।
Anaagatkaal ↔ अतीतकाल
अनागतकाल के खतरों को भांपकर ही अंतरिक्ष वैज्ञानिक नए ग्रहों की खोज कर रहे हैं।
अतीतकाल के ऐतिहासिक अवशेष हमारी सभ्यता की समृद्ध कहानी कहते हैं।
Prabhaatavela ↔ सांध्यवेला
प्रभातवेला में पक्षियों का चहचहाना और बहती शीतल बयार मन मोह लेती है।
सांध्यवेला में सूर्यास्त का मनोरम दृश्य देखने लोग समुद्र तट पर एकत्र होते हैं।
Madhyamkaal ↔ अंतकाल
परियोजना के मध्यमकाल में वित्तीय और तकनीकी संसाधनों की समीक्षा की गई।
अंतकाल निकट आने पर व्यक्ति समस्त सांसारिक मोह-माया से विरक्त हो जाता है।
Praarambhik ↔ अंतिम
प्रारंभिक चरण में नए व्यवसाय में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
प्रतियोगिता के अंतिम चरण में केवल दो सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी ही पहुंचे।
Nisha ↔ दिवा
घनी निशा के अंधकार में जुगनू चमकते हुए सुंदर दिखाई दे रहे थे।
दिवा के समय किसान अपने खेतों में मेहनत करते हैं।
Nisheeth ↔ मध्याह्न
निशीथ की नीरवता में घड़ी की टिक-टिक भी साफ सुनाई दे रही थी।
मध्याह्न की कड़ी धूप में पशु भी पेड़ों की छाया में शरण लेते हैं।
Kaalaavadhi ↔ क्षण
ऋण चुकाने के लिए बैंक ने पांच वर्ष की कालावधि निर्धारित की है।
एक क्षण की लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
Deerghasootree ↔ क्षिप्रकारी
दीर्घसूत्री व्यक्ति साधारण से कार्य को भी महीनों तक लटकाए रखता है।
क्षिप्रकारी सेनापति ने संकट की सूचना पाते ही तुरंत पलटवार कर दिया।
Deerghasootrata ↔ त्वरा
प्रशासनिक दीर्घसूत्रता के कारण अनेक जनहितकारी फाइलें वर्षों तक दबी रहती हैं।
आपदा राहत में दिखाई गई त्वरा से सैकड़ों जानें बचाई जा सकीं।
Kshiprata ↔ मंथरता
तीरंदाज ने अद्भुत क्षिप्रता से प्रत्यंचा खींचकर बाण छोड़ दिया।
कछुए की मंथरता के बावजूद उसकी निरंतरता ने उसे विजयी बनाया।
Drutagati ↔ मंदगति
द्रुतगति से चलने वाले वाहनों के लिए नए एक्सप्रेसवे का निर्माण किया गया।
कोहरे के कारण रेलगाड़ियां मंदगति से आगे बढ़ रही थीं।
Kaalakram ↔ व्यतिक्रम
इतिहासकार ने राजाओं के शासनकाल को सही कालक्रम में दर्ज किया।
घटनाओं के व्यतिक्रम से पाठक भ्रमित हो गए और सही समय समझ न सके।
Kaalaanukramik ↔ अक्रमिक
पुस्तकालय में ऐतिहासिक अभिलेख कालानुक्रमिक क्रम में सजाए गए हैं।
अक्रमिक रूप से रखी गई फाइलों में से महत्वपूर्ण दस्तावेज खोजना कठिन हो गया।
Praakkaaleen ↔ उत्तरकालीन
प्राक्कालीन सभ्यताओं के अवशेष सिंधु घाटी में आज भी दिखाई देते हैं।
उत्तरकालीन स्थापत्य कला में आधुनिक तकनीकों का गहरा प्रभाव झलकता है।
Chirprateekshit ↔ अकस्मात
वैज्ञानिकों की वर्षों की मेहनत के बाद चिरप्रतीक्षित सफलता आखिरकार मिल ही गई।
अकस्मात आई आंधी ने कई कच्चे मकानों की छतें उड़ा दीं।
Dinamaan ↔ रात्रिमान
ग्रीष्म ऋतु में दिनमान बड़ा और रात्रिमान छोटा हो जाता है।
शीत ऋतु में रात्रिमान लंबा होने के कारण रातें ठंडी और लंबी प्रतीत होती हैं।
Ahoraatra ↔ क्षणमात्र
अस्पताल में आपातकालीन सेवा अहोरात्र उपलब्ध रहती है।
क्षणमात्र के निर्णय से खेल का पूरा पासा पलट गया।
Amaratva ↔ मर्त्यता
सत्य और परोपकार के मार्ग पर चलने वाले महापुरुष अमरत्व प्राप्त करते हैं।
मानव देह की मर्त्यता को पहचानकर व्यक्ति को अभिमान से दूर रहना चाहिए।
Nityata ↔ अनित्यता
भारतीय दर्शन में ब्रह्म की नित्यता को ही परम सत्य माना गया है।
सांसारिक सुखों की अनित्यता को समझकर व्यक्ति विरक्त हो जाता है।
Shaashvatata ↔ क्षणभंगुरता
नैतिक मूल्यों की शाश्वतता समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है।
संसार के भौतिक सुखों की क्षणभंगुरता को देखकर संतों ने वैराग्य अपनाया।
Chirasthaayita ↔ क्षणिकता
संगमरमर के भव्य मंदिरों की चिरस्थायिता सदियों तक बनी रहती है।
पानी के बुलबुलों की क्षणिकता हमें जीवन की नश्वरता याद दिलाती है।
Svarnayug ↔ अंधकारयुग
गुप्त काल को भारतीय कला और साहित्य का स्वर्णयुग कहा जाता है।
साम्राज्य के पतन के बाद देश कई दशकों तक अंधकारयुग में डूबा रहा।
Navayug ↔ पुरातन-युग
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आगमन के साथ तकनीकी नवयुग की शुरुआत हुई है।
पुरातन-युग में संदेश भेजने के लिए कबूतरों और दूतों का उपयोग किया जाता था।
Satyug ↔ कलियुग
सतयुग में सत्य और धर्म का चारों चरणों में पालन होता था।
कलियुग में स्वार्थ और लोभ के बढ़ने से नैतिक मूल्यों में गिरावट आई है।
Agrasochee ↔ अतीतगामी
अग्रसोची नेतृत्व आने वाले बीस वर्षों की चुनौतियों की पूर्व तैयारी करता है।
अतीतगामी लोग केवल पुरानी बातों का रोना रोते रहते हैं और आगे नहीं बढ़ते।
Deerghakaaleen-yojana ↔ तात्कालिक-उपाय
नदी जल विवाद के स्थायी हल के लिए एक दीर्घकालीन-योजना तैयार की गई।
बाढ़ के पानी को रोकने के लिए रेत की बोरियां रखना केवल एक तात्कालिक-उपाय था।
Paakshik ↔ वार्षिक
साहित्यिक पत्रिका पाक्षिक रूप से हर पंद्रह दिन में प्रकाशित होती है।
विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह एक प्रतिष्ठित वार्षिक उत्सव है।
Traimaasik ↔ वार्षिक
कंपनी हर तीन महीने बाद अपने त्रैमासिक वित्तीय परिणाम घोषित करती है।
वार्षिक बजट में पूरे साल की आय और व्यय का विस्तृत ब्यौरा होता है।
Tatkaalata ↔ विलंबन
साइबर सुरक्षा में तत्कालता ही हैकिंग हमलों से सिस्टम को बचा सकती है।
कागजी प्रक्रियाओं के विलंबन से पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है।
Sheeghragaamita ↔ मंदगामिता
एक्सप्रेस ट्रेनों की शीघ्रगामिता से यात्रियों के यात्रा समय में बड़ी बचत हुई।
जाम में फंसे वाहनों की मंदगामिता से शहर में वायु प्रदूषण बढ़ जाता है।
Sharadritu ↔ ग्रीष्मऋतु
शरदऋतु में आकाश स्वच्छ और रातें सुहावनी तथा शीतल होने लगती हैं।
ग्रीष्मऋतु की चिलचिलाती धूप और लू से जनजीवन व्याकुल हो उठता है।
Ajarata ↔ जराग्रस्तता
योगियों की साधना उनके चेहरे पर अद्भुत तेज और अजरता बनाए रखती है।
आयु बढ़ने के साथ जराग्रस्तता से अंगों में शिथिलता आना स्वाभाविक है।
Chiranjeevita ↔ अल्पायुष्य
पौराणिक पात्र मार्कंडेय को भगवान शिव से चिरंजीविता का वरदान प्राप्त था।
अस्वस्थ खान-पान और प्रदूषण के कारण आधुनिक युग में अल्पायुष्य का खतरा बढ़ गया है।
Saahasa ↔ कायरता
संकट और विपत्ति के समय साहस का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shoorataa ↔ भीरुता
संकट और विपत्ति के समय शूरता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भीरुता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veerataa ↔ कायरता
संकट और विपत्ति के समय वीरता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbheeka ↔ डरपोक
संकट और विपत्ति के समय निर्भीक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डरपोक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbheekataa ↔ भयभीतता
संकट और विपत्ति के समय निर्भीकता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयभीतता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nidarataa ↔ कातरता
संकट और विपत्ति के समय निडरता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bahaadura ↔ डरपोक
संकट और विपत्ति के समय बहादुर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डरपोक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bahaaduree ↔ बुजदिली
संकट और विपत्ति के समय बहादुरी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने बुजदिली का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dabnga ↔ दब्बू
संकट और विपत्ति के समय दबंग का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने दब्बू का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dabngaee ↔ दब्बू्पन
संकट और विपत्ति के समय दबंगई का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने दब्बू्पन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Paraakrama ↔ पलायन
संकट और विपत्ति के समय पराक्रम का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Paraakramee ↔ कायर
संकट और विपत्ति के समय पराक्रमी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Yoddhaa ↔ पलायनवादी
संकट और विपत्ति के समय योद्धा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायनवादी का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranadheera ↔ रणचोर
संकट और विपत्ति के समय रणधीर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रणचोर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranabaankuraa ↔ कातर
संकट और विपत्ति के समय रणबांकुरा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dilera ↔ बुजदिल
संकट और विपत्ति के समय दिलेर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने बुजदिल का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dileree ↔ बुजदिली
संकट और विपत्ति के समय दिलेरी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने बुजदिली का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Himmatee ↔ कमहिम्मत
संकट और विपत्ति के समय हिम्मती का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कमहिम्मत का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Himmata ↔ मायूसी
संकट और विपत्ति के समय हिम्मत का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने मायूसी का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Hausalaamnda ↔ हताश
संकट और विपत्ति के समय हौसलामंद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने हताश का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Adiga ↔ डांवाडोल
संकट और विपत्ति के समय अडिग का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डांवाडोल का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aknpita ↔ थरथराता
संकट और विपत्ति के समय अकंपित का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने थरथराता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veera ↔ कायर
संकट और विपत्ति के समय वीर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nihshnka ↔ शंकित
संकट और विपत्ति के समय निःशंक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शंकित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shnkaakula ↔ निश्चिंत
संकट और विपत्ति के समय शंकाकुल का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने निश्चिंत का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aatnkamukta ↔ आतंकित
संकट और विपत्ति के समय आतंकमुक्त का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने आतंकित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bhayamukta ↔ भयग्रस्त
संकट और विपत्ति के समय भयमुक्त का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयग्रस्त का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Traasa ↔ राहत
संकट और विपत्ति के समय त्रास का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने राहत का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dahashata ↔ अमन
संकट और विपत्ति के समय दहशत का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अमन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dahashatagarda ↔ रक्षक
संकट और विपत्ति के समय दहशतगर्द का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रक्षक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Khaupha ↔ सुकून
संकट और विपत्ति के समय खौफ का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुकून का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aashnkita ↔ आश्वस्त
संकट और विपत्ति के समय आशंकित का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने आश्वस्त का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Adamya ↔ दब्बू
संकट और विपत्ति के समय अदम्य का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने दब्बू का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Vijetaa ↔ विजित
संकट और विपत्ति के समय विजेता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने विजित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aparaajeya ↔ पराजेय
संकट और विपत्ति के समय अपराजेय का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पराजेय का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ajeya ↔ जेय
संकट और विपत्ति के समय अजेय का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने जेय का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranashoora ↔ रणकातर
संकट और विपत्ति के समय रणशूर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रणकातर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Kaatara ↔ अकातर
संकट और विपत्ति के समय कातर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अकातर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Kaatarataa ↔ धीरता
संकट और विपत्ति के समय कातरता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने धीरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Saahasika ↔ कायरतापूर्ण
संकट और विपत्ति के समय साहसिक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरतापूर्ण का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dridhchetaa ↔ भयभीत
संकट और विपत्ति के समय दृढ़चेता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयभीत का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Jigaravaalaa ↔ डरपोक
संकट और विपत्ति के समय जिगरवाला का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डरपोक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbhayataa ↔ भीरुता
संकट और विपत्ति के समय निर्भयता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भीरुता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Abhayadaana ↔ प्राणदंड
संकट और विपत्ति के समय अभयदान का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने प्राणदंड का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Prataapee ↔ तेजहीन
संकट और विपत्ति के समय प्रतापी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने तेजहीन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ojasvee ↔ निस्तेज
संकट और विपत्ति के समय ओजस्वी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने निस्तेज का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Tejasvee ↔ कांतिहीन
संकट और विपत्ति के समय तेजस्वी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कांतिहीन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shaurya ↔ कायरता
संकट और विपत्ति के समय शौर्य का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shauryavaana ↔ कातर
संकट और विपत्ति के समय शौर्यवान का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Purushaartha ↔ क्लीवता
संकट और विपत्ति के समय पुरुषार्थ का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने क्लीवता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Paurusha ↔ कायरता
संकट और विपत्ति के समय पौरुष का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shooraveera ↔ डरपोक
संकट और विपत्ति के समय शूरवीर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डरपोक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Mahaaveera ↔ कातर
संकट और विपत्ति के समय महावीर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Yuddharata ↔ आत्मसमर्पित
संकट और विपत्ति के समय युद्धरत का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने आत्मसमर्पित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Vidroha ↔ दमन
संकट और विपत्ति के समय विद्रोह का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने दमन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Kraantikaaree ↔ दब्बू
संकट और विपत्ति के समय क्रांतिकारी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने दब्बू का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Baagee ↔ आज्ञाकारी
संकट और विपत्ति के समय बागी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने आज्ञाकारी का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Mukaabalaa ↔ पलायन
संकट और विपत्ति के समय मुकाबला का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Datakara ↔ डरकर
संकट और विपत्ति के समय डटकर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डरकर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Saamanaa ↔ पलायन
संकट और विपत्ति के समय सामना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Adigataa ↔ कातरता
संकट और विपत्ति के समय अडिगता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirdvndva ↔ द्वंद्वग्रस्त
संकट और विपत्ति के समय निर्द्वंद्व का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने द्वंद्वग्रस्त का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nihsnkocha ↔ संकोची
संकट और विपत्ति के समय निःसंकोच का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने संकोची का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bebaaka ↔ दब्बू
संकट और विपत्ति के समय बेबाक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने दब्बू का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ladaakoo ↔ शांतिप्रिय
संकट और विपत्ति के समय लड़ाकू का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांतिप्रिय का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aakraamaka ↔ रक्षात्मक
संकट और विपत्ति के समय आक्रामक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रक्षात्मक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aakramana ↔ प्रतिरक्षा
संकट और विपत्ति के समय आक्रमण का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने प्रतिरक्षा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Hamalaa ↔ बचाव
संकट और विपत्ति के समय हमला का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने बचाव का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aaghaata ↔ प्रत्याघात
संकट और विपत्ति के समय आघात का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने प्रत्याघात का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Prahaara ↔ रोक
संकट और विपत्ति के समय प्रहार का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रोक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Vaara ↔ प्रतिवार
संकट और विपत्ति के समय वार का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने प्रतिवार का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Rakshaarthee ↔ शरणदाता
संकट और विपत्ति के समय रक्षार्थी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शरणदाता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sharanaarthee ↔ शरणदाता
संकट और विपत्ति के समय शरणार्थी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शरणदाता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Traanadaataa ↔ संहारक
संकट और विपत्ति के समय त्राणदाता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने संहारक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Muktidaataa ↔ बंधककर्ता
संकट और विपत्ति के समय मुक्तिदाता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने बंधककर्ता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Apaharanakartaa ↔ रक्षक
संकट और विपत्ति के समय अपहरणकर्ता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रक्षक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Rananaada ↔ युद्धविराम
संकट और विपत्ति के समय रणनाद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने युद्धविराम का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shnkhanaada ↔ शांति
संकट और विपत्ति के समय शंखनाद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांति का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Yuddhonmaada ↔ शांतिवार्ता
संकट और विपत्ति के समय युद्धोन्माद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांतिवार्ता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Surakshaa ↔ असुरक्षा
संकट और विपत्ति के समय सुरक्षा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने असुरक्षा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Surakshita ↔ असुरक्षित
संकट और विपत्ति के समय सुरक्षित का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने असुरक्षित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Snrakshita ↔ असंरक्षित
संकट और विपत्ति के समय संरक्षित का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने असंरक्षित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Jokhima ↔ सुरक्षा
संकट और विपत्ति के समय जोखिम का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुरक्षा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Khataranaaka ↔ हानिरहित
संकट और विपत्ति के समय खतरनाक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने हानिरहित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sakushala ↔ संकटग्रस्त
संकट और विपत्ति के समय सकुशल का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने संकटग्रस्त का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Abhayamudraa ↔ भयभीत-मुद्रा
संकट और विपत्ति के समय अभयमुद्रा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयभीत-मुद्रा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veerarasa ↔ भयानक-रस
संकट और विपत्ति के समय वीररस का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयानक-रस का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bhayaanaka ↔ मनोहर
संकट और विपत्ति के समय भयानक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने मनोहर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Daraavanaa ↔ आकर्षक
संकट और विपत्ति के समय डरावना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने आकर्षक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Khauphanaaka ↔ सुहावना
संकट और विपत्ति के समय खौफनाक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुहावना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bhayaavaha ↔ सुखद
संकट और विपत्ति के समय भयावह का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुखद का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bhayaprada ↔ अभयकारी
संकट और विपत्ति के समय भयप्रद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अभयकारी का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Traasada ↔ सुखांत
संकट और विपत्ति के समय त्रासद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुखांत का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Kaanpanaa ↔ अडिग-रहना
संकट और विपत्ति के समय कांपना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अडिग-रहना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Tharatharaanaa ↔ स्थिर-रहना
संकट और विपत्ति के समय थरथराना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने स्थिर-रहना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Hadbadaahata ↔ धैर्य
संकट और विपत्ति के समय हड़बड़ाहट का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने धैर्य का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ghabaraahata ↔ शांति
संकट और विपत्ति के समय घबराहट का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांति का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sanasaneekheja ↔ सामान्य
संकट और विपत्ति के समय सनसनीखेज का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सामान्य का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranakshetra ↔ शांतिस्थल
संकट और विपत्ति के समय रणक्षेत्र का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांतिस्थल का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Yoddhaa-bhaava ↔ कातर-भाव
संकट और विपत्ति के समय योद्धा-भाव का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातर-भाव का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nidara-mana ↔ शंकित-मन
संकट और विपत्ति के समय निडर-मन का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शंकित-मन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ajeyataa ↔ पराजेयता
संकट और विपत्ति के समय अजेयता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पराजेयता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranakaushala ↔ अनाड़ीपन
संकट और विपत्ति के समय रणकौशल का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अनाड़ीपन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veeragaathaa ↔ अपमानकथा
संकट और विपत्ति के समय वीरगाथा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अपमानकथा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Saahasa-pradarshana ↔ पलायन
संकट और विपत्ति के समय साहस-प्रदर्शन का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Atala-iraadaa ↔ डांवाडोल-मन
संकट और विपत्ति के समय अटल-इरादा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डांवाडोल-मन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Praknpana ↔ स्थिरता
संकट और विपत्ति के समय प्रकंपन का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने स्थिरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbhaya-bhaava ↔ डर-का-भाव
संकट और विपत्ति के समय निर्भय-भाव का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डर-का-भाव का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Adiga-kadama ↔ पीछे-हटना
संकट और विपत्ति के समय अडिग-कदम का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पीछे-हटना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Hausale-vaalaa ↔ टूटे-मन-वाला
संकट और विपत्ति के समय हौसले-वाला का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने टूटे-मन-वाला का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dilera-javaana ↔ बुजदिल-भगोड़ा
संकट और विपत्ति के समय दिलेर-जवान का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने बुजदिल-भगोड़ा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbheeka-svara ↔ कांपती-आवाज
संकट और विपत्ति के समय निर्भीक-स्वर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कांपती-आवाज का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Seenaajoree ↔ विनम्रता
संकट और विपत्ति के समय सीनाजोरी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने विनम्रता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranonmaada ↔ शांति-चेतना
संकट और विपत्ति के समय रणोन्माद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांति-चेतना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ladaakaa ↔ सुलहपसंद
संकट और विपत्ति के समय लड़ाका का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुलहपसंद का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranavijaya ↔ रणपराजय
संकट और विपत्ति के समय रणविजय का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रणपराजय का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ajeya-durga ↔ पतनशील-किला
संकट और विपत्ति के समय अजेय-दुर्ग का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पतनशील-किला का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sinha-garjanaa ↔ गीदड़-भभकी
संकट और विपत्ति के समय सिंह-गर्जना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने गीदड़-भभकी का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veera-sapoota ↔ कायर-पुत्र
संकट और विपत्ति के समय वीर-सपूत का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायर-पुत्र का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shaurya-gaathaa ↔ कायरता-का-दाग
संकट और विपत्ति के समय शौर्य-गाथा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता-का-दाग का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbhaya-drishti ↔ झुकी-नजरें
संकट और विपत्ति के समय निर्भय-दृष्टि का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने झुकी-नजरें का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sashastreekarana ↔ निःशस्त्रीकरण
संकट और विपत्ति के समय सशस्त्रीकरण का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने निःशस्त्रीकरण का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sainyabala ↔ अहिंसाबल
संकट और विपत्ति के समय सैन्यबल का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अहिंसाबल का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranabhoomi ↔ तपोभूमि
संकट और विपत्ति के समय रणभूमि का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने तपोभूमि का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Saakshara ↔ निरक्षर
विद्या और बौद्धिक विकास में साक्षर का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में निरक्षर की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Saaksharataa ↔ निरक्षरता
विद्या और बौद्धिक विकास में साक्षरता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में निरक्षरता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shikshaa ↔ अशिक्षा
विद्या और बौद्धिक विकास में शिक्षा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशिक्षा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidushee ↔ मूर्खा
विद्या और बौद्धिक विकास में विदुषी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Paanditya ↔ मूर्खता
विद्या और बौद्धिक विकास में पांडित्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Adhyetaa ↔ अनपढ़
विद्या और बौद्धिक विकास में अध्येता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनपढ़ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Maneeshee ↔ मंदबुद्धि
विद्या और बौद्धिक विकास में मनीषी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मंदबुद्धि की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Prajnyaa ↔ मूढ़ता
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रज्ञा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूढ़ता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Prajnyaavaana ↔ मूढ़
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रज्ञावान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूढ़ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Medhaavee ↔ जड़बुद्धि
विद्या और बौद्धिक विकास में मेधावी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में जड़बुद्धि की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kushaagrabuddhi ↔ मंदबुद्धि
विद्या और बौद्धिक विकास में कुशाग्रबुद्धि का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मंदबुद्धि की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vijnya ↔ अविज्ञ
विद्या और बौद्धिक विकास में विज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अविज्ञ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Suvijnya ↔ अल्पज्ञ
विद्या और बौद्धिक विकास में सुविज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अल्पज्ञ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Paarngata ↔ अनाड़ी
विद्या और बौद्धिक विकास में पारंगत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनाड़ी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Adhyayanasheela ↔ लापरवाह
विद्या और बौद्धिक विकास में अध्ययनशील का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में लापरवाह की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Svaadhyaaya ↔ अनाभ्यास
विद्या और बौद्धिक विकास में स्वाध्याय का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनाभ्यास की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pathaneeya ↔ अपठनीय
विद्या और बौद्धिक विकास में पठनीय का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अपठनीय की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Supaathya ↔ दुर्पाठ्य
विद्या और बौद्धिक विकास में सुपाठ्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में दुर्पाठ्य की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Grnthakaara ↔ पाठक
विद्या और बौद्धिक विकास में ग्रंथकार का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में पाठक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pravaktaa ↔ श्रोता
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रवक्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में श्रोता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shodhakartaa ↔ साधारण-छात्र
विद्या और बौद्धिक विकास में शोधकर्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में साधारण-छात्र की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Anusndhaana ↔ अज्ञान
विद्या और बौद्धिक विकास में अनुसंधान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञान की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pareekshaka ↔ परीक्षार्थी
विद्या और बौद्धिक विकास में परीक्षक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में परीक्षार्थी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Utteerna ↔ अनुत्तीर्ण
विद्या और बौद्धिक विकास में उत्तीर्ण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनुत्तीर्ण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Medhaa ↔ मूढ़ता
विद्या और बौद्धिक विकास में मेधा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूढ़ता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bauddhika ↔ अबौद्धिक
विद्या और बौद्धिक विकास में बौद्धिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अबौद्धिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Saiddhaantika ↔ व्यावहारिक
विद्या और बौद्धिक विकास में सैद्धांतिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में व्यावहारिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tathyapoorna ↔ काल्पनिक
विद्या और बौद्धिक विकास में तथ्यपूर्ण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में काल्पनिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pramaanita ↔ अप्रमाणित
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रमाणित का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अप्रमाणित की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Taarkika ↔ कुतार्किक
विद्या और बौद्धिक विकास में तार्किक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुतार्किक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tarkasngata ↔ असंगत
विद्या और बौद्धिक विकास में तर्कसंगत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में असंगत की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sutarka ↔ कुतर्क
विद्या और बौद्धिक विकास में सुतर्क का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुतर्क की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastraartha ↔ वितंडा
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्रार्थ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में वितंडा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Snvaada ↔ विवाद
विद्या और बौद्धिक विकास में संवाद का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विवाद की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bodhagamya ↔ क्लिष्ट
विद्या और बौद्धिक विकास में बोधगम्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में क्लिष्ट की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Saralaartha ↔ गूढ़ार्थ
विद्या और बौद्धिक विकास में सरलार्थ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में गूढ़ार्थ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shabdaadnbara ↔ सरल-भाषा
विद्या और बौद्धिक विकास में शब्दाडंबर का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में सरल-भाषा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vyaakaranasammata ↔ अशुद्ध
विद्या और बौद्धिक विकास में व्याकरणसम्मत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशुद्ध की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shuddha-vartanee ↔ अशुद्ध-वर्तनी
विद्या और बौद्धिक विकास में शुद्ध-वर्तनी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशुद्ध-वर्तनी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shuddhochchaarana ↔ अशुद्धोच्चारण
विद्या और बौद्धिक विकास में शुद्धोच्चारण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशुद्धोच्चारण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Knthastha ↔ विस्मृत
विद्या और बौद्धिक विकास में कंठस्थ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विस्मृत की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Smarana ↔ विस्मरण
विद्या और बौद्धिक विकास में स्मरण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विस्मरण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Smriti ↔ विस्मृति
विद्या और बौद्धिक विकास में स्मृति का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विस्मृति की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Smaranashakti ↔ भूलक्कड़पन
विद्या और बौद्धिक विकास में स्मरणशक्ति का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में भूलक्कड़पन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Teekshnabuddhi ↔ स्थूलबुद्धि
विद्या और बौद्धिक विकास में तीक्ष्णबुद्धि का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में स्थूलबुद्धि की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sookshmadarshee ↔ अदूरदर्शी
विद्या और बौद्धिक विकास में सूक्ष्मदर्शी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अदूरदर्शी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidyaadhyayana ↔ समय-बर्बादी
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्याध्ययन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में समय-बर्बादी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidyaarthee ↔ विद्याविमुख
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्यार्थी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विद्याविमुख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaanapipaasu ↔ उदासीन
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञानपिपासु का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में उदासीन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jijnyaasaa ↔ उदासीनता
विद्या और बौद्धिक विकास में जिज्ञासा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में उदासीनता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jijnyaasu ↔ अजिज्ञासु
विद्या और बौद्धिक विकास में जिज्ञासु का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अजिज्ञासु की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tatvajnyaanee ↔ मूढ़मति
विद्या और बौद्धिक विकास में तत्वज्ञानी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूढ़मति की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tatvavettaa ↔ अज्ञानी
विद्या और बौद्धिक विकास में तत्ववेत्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञानी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sadvidyaa ↔ कुविद्या
विद्या और बौद्धिक विकास में सद्विद्या का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुविद्या की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Aksharajnyaana ↔ अंगूठाछाप
विद्या और बौद्धिक विकास में अक्षरज्ञान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अंगूठाछाप की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kaavyamarmajnya ↔ अरसिक
विद्या और बौद्धिक विकास में काव्यमर्मज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अरसिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Rasika ↔ अरसिक
विद्या और बौद्धिक विकास में रसिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अरसिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Marmajnya ↔ अनभिज्ञ
विद्या और बौद्धिक विकास में मर्मज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनभिज्ञ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Gunagraahee ↔ दोषदर्शी
विद्या और बौद्धिक विकास में गुणग्राही का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में दोषदर्शी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastrajnya ↔ शास्त्रविहीन
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्रज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में शास्त्रविहीन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tathyaparaka ↔ भ्रामक
विद्या और बौद्धिक विकास में तथ्यपरक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में भ्रामक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vyaakhyaa ↔ संक्षेप
विद्या और बौद्धिक विकास में व्याख्या का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में संक्षेप की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Teekaa ↔ मूलपाठ
विद्या और बौद्धिक विकास में टीका का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूलपाठ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bhaashya ↔ संक्षिप्त-टिप्पणी
विद्या और बौद्धिक विकास में भाष्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में संक्षिप्त-टिप्पणी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Siddhaanta ↔ अटकल
विद्या और बौद्धिक विकास में सिद्धांत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अटकल की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Avadhaaranaa ↔ भ्रांति
विद्या और बौद्धिक विकास में अवधारणा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में भ्रांति की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vivekasheela ↔ अविवेकपूर्ण
विद्या और बौद्धिक विकास में विवेकशील का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अविवेकपूर्ण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sushikshaa ↔ कुशिक्षा
विद्या और बौद्धिक विकास में सुशिक्षा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुशिक्षा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Snskaara ↔ कुसंस्कार
विद्या और बौद्धिक विकास में संस्कार का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुसंस्कार की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Chhaatravritti ↔ अर्थदंड
विद्या और बौद्धिक विकास में छात्रवृत्ति का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अर्थदंड की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Praaveenya ↔ अयोग्यता
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रावीण्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अयोग्यता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Deekshaa ↔ परित्याग
विद्या और बौद्धिक विकास में दीक्षा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में परित्याग की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Upaadhi ↔ उपाधि-हरण
विद्या और बौद्धिक विकास में उपाधि का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में उपाधि-हरण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaikshanika ↔ अशैक्षणिक
विद्या और बौद्धिक विकास में शैक्षणिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशैक्षणिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Paathyakrama ↔ सह-पाठ्यक्रम
विद्या और बौद्धिक विकास में पाठ्यक्रम का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में सह-पाठ्यक्रम की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaanaarjana ↔ अज्ञानता
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञानार्जन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञानता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidyaadaana ↔ विद्यावंचन
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्यादान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विद्यावंचन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidyaanuraagee ↔ विद्याद्वेषी
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्यानुरागी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विद्याद्वेषी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaanadeepaka ↔ अज्ञान-अंधकार
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञानदीपक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञान-अंधकार की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Buddhimattaa ↔ मूर्खता
विद्या और बौद्धिक विकास में बुद्धिमत्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastrasammata ↔ शास्त्रविरुद्ध
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्रसम्मत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में शास्त्रविरुद्ध की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tarkasheela ↔ अंधविश्वासी
विद्या और बौद्धिक विकास में तर्कशील का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अंधविश्वासी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Prashnottaree ↔ मौन
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रश्नोत्तरी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मौन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kakshaa-shikshana ↔ स्व-अध्ययन
विद्या और बौद्धिक विकास में कक्षा-शिक्षण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में स्व-अध्ययन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Knthastheekarana ↔ रटना-छोड़ना
विद्या और बौद्धिक विकास में कंठस्थीकरण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में रटना-छोड़ना की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bodha ↔ अज्ञान
विद्या और बौद्धिक विकास में बोध का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञान की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaanodaya ↔ अंधविश्वास
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञानोदय का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अंधविश्वास की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Deekshaanta-samaaroha ↔ प्रवेश-उत्सव
विद्या और बौद्धिक विकास में दीक्षांत-समारोह का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में प्रवेश-उत्सव की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shikshaanuraagee ↔ अध्ययन-विमुख
विद्या और बौद्धिक विकास में शिक्षानुरागी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अध्ययन-विमुख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pustakeeya-jnyaana ↔ व्यावहारिक-अनुभव
विद्या और बौद्धिक विकास में पुस्तकीय-ज्ञान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में व्यावहारिक-अनुभव की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidvattaa ↔ अज्ञान
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्वत्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञान की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Medhaavee-chhaatra ↔ पिछड़ा-छात्र
विद्या और बौद्धिक विकास में मेधावी-छात्र का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में पिछड़ा-छात्र की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastravettaa ↔ मूर्ख
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्रवेत्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्ख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Prajnyaachakshu ↔ ज्ञानहीन
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रज्ञाचक्षु का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में ज्ञानहीन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidvata-sabhaa ↔ मूर्ख-मंडली
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्वत-सभा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्ख-मंडली की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Akshara ↔ निरक्षर
विद्या और बौद्धिक विकास में अक्षर का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में निरक्षर की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Uchcha-shikshaa ↔ प्राथमिक-शिक्षा
विद्या और बौद्धिक विकास में उच्च-शिक्षा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में प्राथमिक-शिक्षा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaanachakshu ↔ मोहांध
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञानचक्षु का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मोहांध की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Adhyayana ↔ अनाभ्यास
विद्या और बौद्धिक विकास में अध्ययन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनाभ्यास की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Paathyapustaka ↔ कहानी-किताब
विद्या और बौद्धिक विकास में पाठ्यपुस्तक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कहानी-किताब की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shodha-patra ↔ सामान्य-लेख
विद्या और बौद्धिक विकास में शोध-पत्र का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में सामान्य-लेख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaana-prakaasha ↔ अज्ञान-तिमिर
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञान-प्रकाश का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञान-तिमिर की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidyaavaana ↔ मूर्ख
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्यावान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्ख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sadgrntha ↔ कुसाहित्य
विद्या और बौद्धिक विकास में सद्ग्रंथ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुसाहित्य की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaanagngaa ↔ अविद्या-गर्त
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञानगंगा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अविद्या-गर्त की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Suvichaara ↔ कुविचार
विद्या और बौद्धिक विकास में सुविचार का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुविचार की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bauddhikataa ↔ अज्ञानता
विद्या और बौद्धिक विकास में बौद्धिकता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञानता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidvatajana ↔ मूर्खजन
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्वतजन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खजन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaana-pipaasaa ↔ संतुष्टि
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञान-पिपासा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में संतुष्टि की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastra-pramaana ↔ लोक-भ्रांति
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्र-प्रमाण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में लोक-भ्रांति की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidvattaapoorna ↔ मूर्खतापूर्ण
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्वत्तापूर्ण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खतापूर्ण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Saahityika ↔ असाहित्यिक
विद्या और बौद्धिक विकास में साहित्यिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में असाहित्यिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vyaakaranika ↔ अव्याकरणिक
विद्या और बौद्धिक विकास में व्याकरणिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अव्याकरणिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vaijnyaanika ↔ अवैज्ञानिक
विद्या और बौद्धिक विकास में वैज्ञानिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अवैज्ञानिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Daarshanika ↔ अदार्शनिक
विद्या और बौद्धिक विकास में दार्शनिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अदार्शनिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shodhaparaka ↔ मनगढ़ंत
विद्या और बौद्धिक विकास में शोधपरक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मनगढ़ंत की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Aachaarya ↔ अंतेवासी
विद्या और बौद्धिक विकास में आचार्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अंतेवासी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Praadhyaapaka ↔ शिक्षार्थी
विद्या और बौद्धिक विकास में प्राध्यापक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में शिक्षार्थी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Subodhataa ↔ दुर्बोधता
विद्या और बौद्धिक विकास में सुबोधता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में दुर्बोधता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Spashtataa ↔ अस्पष्टता
विद्या और बौद्धिक विकास में स्पष्टता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अस्पष्टता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tathya ↔ भ्रम
विद्या और बौद्धिक विकास में तथ्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में भ्रम की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Adhyaapana ↔ अध्ययन
विद्या और बौद्धिक विकास में अध्यापन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अध्ययन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Samaalochanaa ↔ अंधी-प्रशंसा
विद्या और बौद्धिक विकास में समालोचना का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अंधी-प्रशंसा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Moolyaankana ↔ उपेक्षा
विद्या और बौद्धिक विकास में मूल्यांकन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में उपेक्षा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kushaagrataa ↔ मंदता
विद्या और बौद्धिक विकास में कुशाग्रता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मंदता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pratibhaashaalee ↔ प्रतिभाहीन
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रतिभाशाली का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में प्रतिभाहीन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Maneeshaa ↔ मूढ़ता
विद्या और बौद्धिक विकास में मनीषा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूढ़ता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Chintanasheela ↔ अविवेकशील
विद्या और बौद्धिक विकास में चिंतनशील का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अविवेकशील की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Manana ↔ विस्मरण
विद्या और बौद्धिक विकास में मनन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विस्मरण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tatva-meemaansaa ↔ कोरी-कल्पना
विद्या और बौद्धिक विकास में तत्व-मीमांसा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कोरी-कल्पना की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sheetalataa ↔ उष्णता
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतलता की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्णता का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Suvrishti ↔ अकाल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सुवृष्टि की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अकाल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jalaplaavana ↔ अनावृष्टि
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में जलप्लावन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अनावृष्टि का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Meghaachchhanna ↔ मेघरहित
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मेघाच्छन्न की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मेघरहित का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Ghane-baadala ↔ साफ-आकाश
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में घने-बादल की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में साफ-आकाश का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Nirmala-aakaasha ↔ धुंधला-आकाश
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में निर्मल-आकाश की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में धुंधला-आकाश का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Bavndara ↔ शांत-हवा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बवंडर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-हवा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jhnjhaavaata ↔ मंद-समीर
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में झंझावात की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मंद-समीर का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sameera ↔ झंझा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में समीर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में झंझा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Ushna-mausama ↔ शीत-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उष्ण-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शीत-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Kadaake-kee-thnda ↔ भीषण-गर्मी
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में कड़ाके-की-ठंड की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में भीषण-गर्मी का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Tushaara ↔ घाम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तुषार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में घाम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Himapaata ↔ धूप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में हिमपात की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में धूप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Olaavrishti ↔ सामान्य-वर्षा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में ओलावृष्टि की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सामान्य-वर्षा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Umasa ↔ सुहावना-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उमस की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सुहावना-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Umasadaara ↔ खुशनुमा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उमसदार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में खुशनुमा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Garamee ↔ सरदी
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में गरमी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सरदी का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Suhaavanaa ↔ कष्टप्रद
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सुहावना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में कष्टप्रद का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Anukoola-mausama ↔ प्रतिकूल-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में अनुकूल-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में प्रतिकूल-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Toophaanee ↔ शांत
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तूफानी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aandhee-toophaana ↔ शांत-वातावरण
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आंधी-तूफान की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-वातावरण का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Meghagarjana ↔ नीरवता
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मेघगर्जन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में नीरवता का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Tadita ↔ शांत-आकाश
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तड़ित की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-आकाश का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Moosalaadhaara-varshaa ↔ फुहार
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मूसलाधार-वर्षा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में फुहार का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jhamaajhama ↔ बूंदाबांदी
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में झमाझम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में बूंदाबांदी का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jhadee ↔ खुला-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में झड़ी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में खुला-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jalavrishti ↔ अनावृष्टि
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में जलवृष्टि की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अनावृष्टि का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Himashaila ↔ तप्त-मरुस्थल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में हिमशैल की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तप्त-मरुस्थल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Ushnakatibndha ↔ शीतकटिबंध
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उष्णकटिबंध की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शीतकटिबंध का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Samasheetoshna ↔ चरम-जलवायु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में समशीतोष्ण की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में चरम-जलवायु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jalavaayu ↔ मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में जलवायु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Rituparivartana ↔ स्थिर-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में ऋतुपरिवर्तन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में स्थिर-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Nidaagha ↔ शिशिर
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में निदाघ की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शिशिर का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Ghaama ↔ छांव
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में घाम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में छांव का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Pavanaabhimukha ↔ पवनविमुख
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में पवनाभिमुख की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में पवनविमुख का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Puravaaee ↔ पछुआ
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में पुरवाई की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में पछुआ का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheetakaala ↔ ग्रीष्मकाल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतकाल की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में ग्रीष्मकाल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Varshaakaala ↔ शुष्ककाल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वर्षाकाल की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शुष्ककाल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Anaavrita ↔ मेघावृत्त
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में अनावृत की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मेघावृत्त का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Tuhina ↔ अग्नि
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तुहिन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अग्नि का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Neehaara ↔ धूप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में नीहार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में धूप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Vaashpeekarana ↔ संघनन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वाष्पीकरण की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में संघनन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Namee ↔ सूखापन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में नमी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखापन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Geelaapana ↔ सूखापन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में गीलापन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखापन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jalabharaava ↔ सूखा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में जलभराव की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sailaaba ↔ अकाल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सैलाब की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अकाल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Kaalee-ghataa ↔ उजली-धूप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में काली-घटा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उजली-धूप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Havaadaara ↔ घुटनभरा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में हवादार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में घुटनभरा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheetaprada ↔ तापप्रद
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतप्रद की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तापप्रद का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Himapaata-yukta ↔ बर्फहीन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में हिमपात-युक्त की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में बर्फहीन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Taapamaana-vriddhi ↔ तापमान-गिरावट
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तापमान-वृद्धि की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तापमान-गिरावट का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Galana ↔ तपन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में गलन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तपन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Dhoolabharee-aandhee ↔ स्वच्छ-हवा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में धूलभरी-आंधी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में स्वच्छ-हवा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Reta-kaa-toophaana ↔ शांत-रेगिस्तान
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में रेत-का-तूफान की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-रेगिस्तान का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Barphaanee-toophaana ↔ खिला-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बर्फानी-तूफान की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में खिला-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Osa-kee-boonden ↔ तपती-रेत
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में ओस-की-बूंदें की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तपती-रेत का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sookhaa-peedita ↔ बाढ़-ग्रस्त
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सूखा-पीड़ित की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में बाढ़-ग्रस्त का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Baadalaviheena ↔ घटाटोप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बादलविहीन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में घटाटोप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-lahara ↔ लू-का-प्रकोप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-लहर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में लू-का-प्रकोप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Soorya-prakaasha ↔ मेघ-छाया
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सूर्य-प्रकाश की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मेघ-छाया का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheetprakop ↔ उष्ण-राहत
पहाड़ों पर बर्फबारी के कारण मैदानी क्षेत्रों में भीषण शीतप्रकोप बढ़ गया।
दोपहर में धूप निकलने से कड़ाके की सर्दी में लोगों को उष्ण-राहत मिली।
Himjhanjha ↔ शांत-हिमपात
पहाड़ी दर्रों में उठी तीव्र हिमझंझा ने पर्वतारोहियों का मार्ग अवरुद्ध कर दिया।
घाटी में हो रहे शांत-हिमपात से देवदार के वृक्षों पर बर्फ की सुंदर परत जम गई।
Vasnta-ritu ↔ शिशिर-ऋतु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वसंत-ऋतु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शिशिर-ऋतु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-vaayu ↔ उष्ण-पवन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-वायु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्ण-पवन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aardra-havaa ↔ शुष्क-पवन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आर्द्र-हवा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शुष्क-पवन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Himavrishti ↔ अंगार-वृष्टि
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में हिमवृष्टि की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अंगार-वृष्टि का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jalamagna ↔ मरुस्थलीय
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में जलमग्न की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मरुस्थलीय का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Svachchha-aakaasha ↔ मेघाच्छन्नता
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में स्वच्छ-आकाश की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मेघाच्छन्नता का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Taapamaana-sntulana ↔ चरम-तापमान
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तापमान-संतुलन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में चरम-तापमान का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-shaama ↔ तपती-दोपहर
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-शाम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तपती-दोपहर का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Hima-kana ↔ ज्वाला
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में हिम-कण की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में ज्वाला का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Pahaadee-havaa ↔ मैदानी-लू
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में पहाड़ी-हवा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मैदानी-लू का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Samudree-sameera ↔ मरुस्थली-हवा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में समुद्री-समीर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मरुस्थली-हवा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Megha-garjanaa ↔ नीरव-आकाश
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मेघ-गर्जना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में नीरव-आकाश का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Bijalee-chamakanaa ↔ अंधेरी-रात
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बिजली-चमकना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अंधेरी-रात का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jhnjhaavaatee-mausama ↔ शांत-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में झंझावाती-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Varshaa-boonden ↔ रेत-कण
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वर्षा-बूंदें की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में रेत-कण का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-bindu ↔ क्वथनांक
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-बिंदु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में क्वथनांक का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Himaachchhaadita ↔ धूप-खिली
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में हिमाच्छादित की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में धूप-खिली का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Barpha-kee-chaadara ↔ तपा-धरातल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बर्फ-की-चादर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तपा-धरातल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Varshaa-maapee ↔ शुष्कता-मापी
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वर्षा-मापी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शुष्कता-मापी का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aasamaana-khulanaa ↔ बादल-छाना
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आसमान-खुलना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में बादल-छाना का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Baadala-phatanaa ↔ सूखा-पड़ना
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बादल-फटना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखा-पड़ना का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Atisheeta ↔ अतितप्त
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में अतिशीत की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अतितप्त का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Himapaata-ritu ↔ उष्ण-ऋतु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में हिमपात-ऋतु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्ण-ऋतु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheetala-phuhaara ↔ गरम-हवा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतल-फुहार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में गरम-हवा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Barasaata ↔ सूखा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बरसात की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Kuhaase-daara ↔ धूप-खिला
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में कुहासे-दार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में धूप-खिला का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Meghayukta ↔ मेघरहित
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मेघयुक्त की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मेघरहित का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheetoshna-katibndha ↔ उष्ण-कटिबंध
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतोष्ण-कटिबंध की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्ण-कटिबंध का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-prabhaava ↔ उष्ण-प्रभाव
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-प्रभाव की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्ण-प्रभाव का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Varshaa-prachura ↔ वर्षा-विहीन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वर्षा-प्रचुर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में वर्षा-विहीन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Hariyaalee-mausama ↔ सूखा-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में हरियाली-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखा-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-ritu ↔ ग्रीष्म-ऋतु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-ऋतु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में ग्रीष्म-ऋतु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aandhee-paanee ↔ खिला-धूप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आंधी-पानी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में खिला-धूप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Hima-tushaara ↔ ग्रीष्म-तपन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में हिम-तुषार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में ग्रीष्म-तपन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Mausama-anukoolataa ↔ मौसम-विषमता
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मौसम-अनुकूलता की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मौसम-विषमता का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Meghamaalaa ↔ नीलांबर
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मेघमाला की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में नीलांबर का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Tadita-jhnjhaa ↔ शांत-नभ
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तड़ित-झंझा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-नभ का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Baadala-ghiranaa ↔ धूप-खिलना
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बादल-घिरना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में धूप-खिलना का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aakaasha-meghaachchhanna ↔ आकाश-स्वच्छ
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आकाश-मेघाच्छन्न की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में आकाश-स्वच्छ का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Dhundhalaa-mausama ↔ साफ-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में धुंधला-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में साफ-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Ghanaa-koharaa ↔ तेज-धूप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में घना-कोहरा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तेज-धूप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-havaa ↔ गर्म-हवा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-हवा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में गर्म-हवा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Umasabharaa-dina ↔ सुहावनी-शाम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उमसभरा-दिन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सुहावनी-शाम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Chilachilaatee-dhoopa ↔ शीतल-छाया
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में चिलचिलाती-धूप की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शीतल-छाया का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Teja-barasaata ↔ धीमी-फुहार
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तेज-बरसात की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में धीमी-फुहार का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sookhaa-mausama ↔ बरसाती-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सूखा-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में बरसाती-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Himayuga ↔ उष्णकाल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में हिमयुग की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्णकाल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Dhruveeya-sheeta ↔ विषुवतीय-ताप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में ध्रुवीय-शीत की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में विषुवतीय-ताप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Parvateeya-jalavaayu ↔ मरुस्थलीय-जलवायु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में पर्वतीय-जलवायु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मरुस्थलीय-जलवायु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Tateeya-mausama ↔ महाद्वीपीय-जलवायु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तटीय-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में महाद्वीपीय-जलवायु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Anukoola-pavana ↔ प्रतिकूल-पवन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में अनुकूल-पवन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में प्रतिकूल-पवन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Pavana-vega ↔ शांत-वायु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में पवन-वेग की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-वायु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Kaale-megha ↔ श्वेत-मेघ
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में काले-मेघ की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में श्वेत-मेघ का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Ghataatopa-andheraa ↔ निर्मल-उजाला
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में घटाटोप-अंधेरा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में निर्मल-उजाला का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Barasaatee-raata ↔ तारों-भरी-रात
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बरसाती-रात की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तारों-भरी-रात का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Bijalee-kee-kadka ↔ आकाश-की-शांति
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बिजली-की-कड़क की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में आकाश-की-शांति का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Himashikhara ↔ तप्त-घाटी
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में हिमशिखर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तप्त-घाटी का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Geelee-mittee ↔ सूखी-धूल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में गीली-मिट्टी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखी-धूल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Vasnta-bahaara ↔ पतझड़-का-सन्नाटा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वसंत-बहार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में पतझड़-का-सन्नाटा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Kuharaa-yukta ↔ धूप-खिला
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में कुहरा-युक्त की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में धूप-खिला का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aardra-vaayumndala ↔ शुष्क-वायुमंडल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आर्द्र-वायुमंडल की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शुष्क-वायुमंडल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Uchcha-vaayudaaba ↔ निम्न-वायुदाब
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उच्च-वायुदाब की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में निम्न-वायुदाब का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Svarg ↔ नरक
धार्मिक मान्यताओं में पवित्र आचरण और परोपकार करने वाली आत्माओं को स्वर्ग का अधिकारी बताया गया है।
पाप, क्रूरता और दुष्ट कर्मों में लिप्त रहने वाले मनुष्य को नरक की यातनाएं झेलनी पड़ती हैं।
Aage ↔ पीछे
कठिन परिस्थितियों से घबराए बिना हमें निरंतर आगे बढ़ते रहने का संकल्प लेना चाहिए।
असफलता के भय से अपने कदम पीछे खींच लेना प्रगति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है।
Oopar ↔ नीचे
विमान जब बादलों के ऊपर पहुंचता है तो नीचे की धरती अत्यंत छोटी और सुरम्य दिखाई देती है।
पहाड़ से नीचे उतरते समय फिसलन भरे पत्थरों पर बहुत संभलकर कदम रखना पड़ता है।
Andar ↔ बाहर
मूसलाधार बारिश शुरू होते ही सभी लोग भीगने से बचने के लिए कमरे के अंदर चले गए।
खुली धूप और शुद्ध हवा का आनंद लेने के लिए बालक घर से बाहर मैदान में खेलने दौड़े।
Aana ↔ जाना
त्योहार के अवसर पर दूर-दराज से रिश्तेदारों का घर आना वातावरण को उल्लासपूर्ण बना देता है।
छुट्टियां समाप्त होते ही परदेस वापस जाना हर किसी के मन को भावुक कर देता है।
Khareedna ↔ बेचना
किसान अपनी मेहनत की कमाई से नई फसल के लिए उन्नत बीज और खाद खरीदना चाहता था।
मंडी में अच्छी कीमत मिलते ही व्यापारी ने अपना सारा अनाज बेचना उचित समझा।
Jeetna ↔ हारना
खिलाड़ी का मुख्य ध्येय केवल मुकाबला जीतना ही नहीं, बल्कि खेल भावना का परिचय देना भी है।
मैच में हारना निराशाजनक हो सकता है, परंतु यह नई सीख और अनुभव भी प्रदान करता है।
Lena ↔ देना
बुजुर्गों से आशीर्वाद और मार्गदर्शन लेना हर युवा के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।
जरूरतमंदों को निःस्वार्थ भाव से सहायता देना समाज सेवा का सबसे उत्तम उदाहरण है।
Uthna ↔ बैठना
प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व बिस्तर से उठना स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
दिनभर की भागदौड़ के बाद शांत मुद्रा में बैठना मानसिक शांति प्रदान करता है।
Hansna ↔ रोना
मित्रों के साथ खुलकर हंसना हर प्रकार के मानसिक तनाव और चिंता को दूर भगा देता है।
प्रियजन के अचानक बिछुड़ने पर किसी का भी रोना अत्यंत स्वाभाविक और मार्मिक होता है।
Jaagna ↔ सोना
देश की सीमाओं पर तैनात पहरेदारों का रात भर जागना ही नागरिकों को सुरक्षित रखता है।
समय पर सोना और पर्याप्त नींद लेना मस्तिष्क की एकाग्रता के लिए आवश्यक है।
Paas ↔ दूर
विद्यालय हमारे घर के बिलकुल पास होने के कारण बच्चों को आने-जाने में कोई असुविधा नहीं होती।
रोजगार की तलाश में युवाओं को अपने परिवार से बहुत दूर महानगरों में रहना पड़ता है।
Yahan ↔ वहाँ
यहाँ पुस्तकालय में पूर्ण शांति और अध्ययन के लिए आदर्श वातावरण बना हुआ है।
वहाँ चौराहे पर अत्यधिक शोरगुल और वाहनों की भारी भीड़ लगी रहती है।
Idhar ↔ उधर
कृपया इधर आइए और अपनी समस्या के बारे में विस्तार से चर्चा कीजिए।
बिना किसी निश्चित उद्देश्य के इधर-उधर भटकने से कीमती समय नष्ट होता है।
Khushboo ↔ बदबू
बगीचे में खिले चमेली और गुलाब के फूलों की खुशबू पूरे वातावरण को महका देती है।
कूड़े-कचरे के ढेर से उठती बदबू के कारण रास्ते से गुजरना दूभर हो जाता है।
Aasmaan ↔ जमीन
पंछी उन्मुक्त होकर नीले आसमान की ऊंचाइयों में अपने पंख फैलाकर उड़ते हैं।
कितनी भी ऊंचाई हासिल कर लो, पैर हमेशा जमीन पर टिके रहने चाहिए।
Khula ↔ बंद
ताजी हवा के आवागमन के लिए प्रातःकाल खिड़कियां खुला रखना उत्तम रहता है।
रात के समय सुरक्षा की दृष्टि से मुख्य द्वार को बंद रखना अनिवार्य है।
Sakht ↔ नरम
कक्षा में अनुशासन बनाए रखने के लिए अध्यापक को कभी-कभी सख्त रुख अपनाना पड़ता है।
बच्चों की नादानियों पर क्रोधित होने के बजाय उनके साथ नरम व्यवहार करना चाहिए।
Majboot ↔ कमजोर
मजबूत नींव पर बना भवन बड़े से बड़े भूकंप और तूफान को भी आसानी से झेल लेता है।
कुपोषण के कारण बालक शारीरिक रूप से कमजोर और रोगग्रस्त हो गया था।
Ujaala ↔ अंधेरा
सूर्य की पहली किरण निकलते ही चारों ओर फैला घना अंधेरा छंट गया और उजाला छा गया।
बिजली चले जाने पर पूरे मोहल्ले में घना अंधेरा छा गया और लोग मोमबत्तियां ढूंढने लगे।
Chadhna ↔ उतरना
पर्वतारोही कठिन बर्फीली चट्टानों पर चढ़ना अपनी साधना और लक्ष्य मानते हैं।
ढलान से नीचे उतरना कभी-कभी चढ़ाई करने से भी अधिक सावधानी की मांग करता है।
Girna ↔ उठना
ठोकर खाकर जमीन पर गिरना मनुष्य की असफलता नहीं, बल्कि सीख का अवसर है।
सच्चा वीर वही है जो हर बार गिरकर पुनः उठना और संघर्ष करना जानता है।
Khona ↔ पाना
लापरवाही के कारण अपने बहुमूल्य दस्तावेज खोना भविष्य के लिए भारी पड़ सकता है।
सच्ची निष्ठा से कर्म करने पर मनवांछित फल पाना कोई असंभव बात नहीं है।
Jodna ↔ घटाना
गणित में संख्याओं को जोड़ना और उनका योग निकालना सबसे पहला बुनियादी नियम है।
फिजूलखर्ची में कटौती करके अनावश्यक व्यय को घटाना ही बचत की कुंजी है।
Doobna ↔ उतराना
भारी लोहे की कील पानी में डालते ही पेंदे में डूबना शुरू कर देती है।
हल्की सूखी लकड़ी और कॉर्क पानी की सतह पर तैरना और उतराना जारी रखते हैं।
Jalna ↔ बुझना
अंगीठी में सूखी लकड़ियों का जलना कड़कड़ाती ठंड में सबको गर्माहट देता है।
हवा का तेज झोंका आते ही दीये की लौ का बुझना स्वाभाविक था।
Seekhna ↔ सिखाना
विद्यार्थी जीवन में नई-नई विधाएं और भाषाएं सीखना भविष्य को उज्ज्वल बनाता है।
एक कुशल शिक्षक का दायित्व है कि वह छात्रों को जीवन के नैतिक मूल्य सिखाना न भूले।
Kehna ↔ सुनना
बिना सोचे-समझे किसी को कटु वचन कहना बाद में पश्चाताप का कारण बनता है।
संवाद में केवल अपनी बात थोपने के बजाय दूसरों के विचारों को भी ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए।
Bolna ↔ चुप रहना
सभा में सत्य और न्याय के पक्ष में निडर होकर बोलना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
मूर्खों के निरर्थक विवाद में उलझने से कहीं बेहतर है चुप रहना और शांति बनाए रखना।
Jeena ↔ मरना
स्वाभिमान और सत्यनिष्ठा के साथ जीना ही मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता है।
कायरता और अपमान के साए में घुट-घुट कर जीने से देश के लिए मरना कहीं अधिक श्रेष्ठ है।
Apnaana ↔ ठुकराना
सच्चे मित्र वही हैं जो हमारी कमियों के बावजूद हमें खुले दिल से अपनाना जानते हैं।
अनैतिक लाभ और रिश्वत के प्रस्ताव को एक स्वाभिमानी अधिकारी ने तुरंत ठुकराना श्रेयस्कर समझा।
Roothna ↔ मनाना
छोटी-छोटी बातों पर अपनों से रूठना केवल संबंधों में अनावश्यक दूरी बढ़ाता है।
नाराज मित्र को प्यार और आत्मीयता से मनाना सच्ची मित्रता की निशानी है।
Kholna ↔ बाँधना
पार्सल की जटिल गांठ को कैंची से काटने के बजाय धीरे-धीरे खोलना चाहिए।
सामान को सुरक्षित रखने के लिए उसे मजबूत रस्सी से कसकर बाँधना जरूरी होता है।
Sajaana ↔ बिगाड़ना
दीपावली के पावन पर्व पर रंगोली और दीपकों से घर के आंगन को सजाना परंपरा है।
क्रोध और आवेश में आकर अपनी बनी-बनाई बात बिगाड़ना बुद्धिमानी नहीं है।
Pahunchana ↔ छूटना
समय पर स्टेशन पहुंचना यात्रा को सुखद और तनावमुक्त बनाए रखता है।
ट्रैफिक जाम में फंसने के कारण ऐन वक्त पर गाड़ी का छूटना भारी असुविधाजनक रहा।
Chhodna ↔ पकड़ना
स्वास्थ्य को हानि पहुंचाने वाली बुरी आदतों को तुरंत छोड़ना ही श्रेयस्कर है।
क्रिकेट मैच में जीत हासिल करने के लिए क्षेत्ररक्षक को हर कठिन कैच पकड़ना पड़ता है।
Utaarna ↔ पहनाना
घर में प्रवेश करने से पूर्व बाहर ही गंदे जूते उतारना स्वच्छता का परिचायक है।
माता ने अपने नन्हे बालक को उत्सव के लिए सुंदर नए वस्त्र पहनाना शुरू किया।
Bikherna ↔ समेटना
तेज हवा ने मेज पर रखे महत्वपूर्ण कागजात को पूरे कमरे में बिखेरना शुरू कर दिया।
काम पूरा होते ही औजारों और बस्तों को व्यवस्थित रूप से समेटना एक अच्छी आदत है।
Ubaalna ↔ जमाना
पानी को अच्छी तरह उबालना उसमें मौजूद हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट कर देता है।
गर्मियों में ताजगी के लिए फ्रीजर में पानी रखकर बर्फ जमाना बहुत आसान है।
Bona ↔ काटना
बरसात की शुरुआत होते ही किसान खेतों में अन्न के नए बीज बोना शुरू करते हैं।
कहावत प्रसिद्ध है कि जैसा बीज बोओगे, वैसा ही फल भविष्य में काटना पड़ेगा।
Suljhaana ↔ उलझाना
बुद्धिमान मध्यस्थ ने दोनों पक्षों के बीच विवाद को शांतिपूर्वक सुलझाना संभव बनाया।
सरल और स्पष्ट बात में व्यर्थ के तर्क जोड़कर उसे और अधिक उलझाना नासमझी है।
Failna ↔ सिकुड़ना
इंटरनेट और संचार माध्यमों के प्रसार से ज्ञान का दायरा तेजी से फैलना जारी है।
कड़ाके की ठंड में जीव-जंतु अपने शरीर को सिकोड़कर बैठ जाते हैं ताकि ठंड कम लगे।
Hataana ↔ लगाना
सड़क के बीच में गिरे भारी पत्थर को हटाना राहगीरों की सुरक्षा के लिए जरूरी था।
पर्यावरण को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाना चाहिए।
Dikhaana ↔ छिपाना
चित्रकार ने अपनी कला प्रदर्शनी में अपनी सर्वश्रेष्ठ कृतियां दिखाना पसंद किया।
अपराध करने के बाद कोई भी अपराधी सच्चाई को लंबे समय तक छिपाना नहीं सकता।
Khilna ↔ मुरझाना
वसंत ऋतु के आते ही उपवन में रंग-बिरंगी कलियों का खिलना मन मोह लेता है।
तीखी धूप और पानी के अभाव में कोमल पौधों का मुरझाना स्वाभाविक है।
Thoda ↔ बहुत
संतोषी व्यक्ति थोड़ा सा मिलने पर भी प्रभु का धन्यवाद करते हुए प्रसन्न रहता है।
लालची व्यक्ति के पास बहुत धन-दौलत होने के बावजूद उसकी तृष्णा कभी शांत नहीं होती।
Chamakna ↔ धुंधलाना
रात के शांत आकाश में ध्रुव तारे का चमकना नाविकों को सही दिशा दिखाता है।
धूल और नमी की परत जम जाने से दर्पण का धुंधलाना स्वाभाविक है।
Chalna ↔ रुकना
जीवन निरंतर आगे चलने का नाम है, इसलिए मुश्किलों में भी कदम आगे बढ़ाते रहना चाहिए।
थक जाने पर थोड़ी देर रुकना उचित है, किंतु हिम्मत हारकर बैठ जाना अनुचित है।
Badhna ↔ घटना
निरंतर अभ्यास और परिश्रम से मनुष्य का ज्ञान और आत्मविश्वास तेजी से बढ़ता है।
लापरवाही और आलस्य के कारण व्यापार में लाभ घटने लगता है।
Khada ↔ बैठा
बुजुर्गों और गुरुजनों के सम्मान में कक्षा के सभी विद्यार्थी आदरपूर्वक खड़े हो गए।
लंबी यात्रा की थकान के बाद पेड़ की शीतल छाया में बैठा यात्री सुखद विश्राम पा सका।