Rikt ↔ पूर्ण
वर्षा होने से रिक्त जलाशय जल से पूर्ण हो गए।
पूर्ण समर्पण से किया गया कार्य सफल होता है जबकि अपूर्ण निष्ठा विफलता लाती है।
Showing 75 Hindi antonym entries transliterated starting with 'R'.
Rikt ↔ पूर्ण
वर्षा होने से रिक्त जलाशय जल से पूर्ण हो गए।
पूर्ण समर्पण से किया गया कार्य सफल होता है जबकि अपूर्ण निष्ठा विफलता लाती है।
Rochak ↔ अरुचिकर
यह पुस्तक इतनी रोचक है कि पाठक को अरुचिकर विषयों में भी रुचि हो जाती है।
अरुचिकर भोजन भी भूख लगने पर स्वादिष्ट और तृप्तिकारी प्रतीत होने लगता है।
Roopwaan ↔ कुरूप
रूपवान चेहरे से अधिक मूल्यवान सुंदर और पवित्र हृदय होता है।
मन में यदि ईर्ष्या और द्वेष हो तो सुंदर चेहरा भी कुरूप और अप्रिय लगने लगता है।
Riju ↔ वक्र
गणित में ऋजु रेखा दो बिंदुओं के बीच सबसे छोटा मार्ग होती है, जबकि वक्र रेखा टेढ़ी होती है।
वक्र मार्ग चलने में समय और परिश्रम अधिक लेता है, सरल सीधा मार्ग श्रेयस्कर है।
Pragatisheel ↔ रूढ़िवादी
प्रगतिशील युवा समाज में बदलाव लाते हैं।
रूढ़िवादी परंपराओं को त्यागकर प्रगतिशील वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
Ureen ↔ ऋणी
माता-पिता के उपकारों से उऋण होना किसी भी संतान के लिए असंभव है।
माता-पिता के पावन उपकारों का मनुष्य आजीवन ऋणी रहता है जिसे चुकाना असंभव है।
Din ↔ रात
परिश्रमी व्यक्ति दिन और रात की परवाह किए बिना अपने लक्ष्य की प्राप्ति में जुटा रहता है।
कठिन परिश्रम के बाद रात की नींद अत्यंत सुखद और शांतिपूर्ण होती है।
Raaja ↔ रंक
मृत्यु के द्वार पर राजा और रंक दोनों बराबर खड़े होते हैं।
समय का चक्र रंक को राजा और राजा को रंक बना देता है।
Ganatntra ↔ राजतंत्र
गणतंत्र की स्थापना के बाद देश का सर्वोच्च पद वंशानुगत न होकर जनता द्वारा निर्वाचित होने लगा।
प्राचीन राजतंत्र में राजा की इच्छा ही सर्वोपरि कानून मानी जाती थी और उत्तराधिकार परिवार में रहता था।
Roodhi ↔ नवाचार
बिना सोचे-समझे पुरानी रूढ़ि को ढोते रहने से समाज की प्रगति अवरुद्ध हो जाती है।
कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में नए नवाचार अपनाने से ग्रामीण जीवन में क्रांति आ गई है।
Registaan ↔ नखलिस्तान
धधकते रेगिस्तान के मध्य हरा-भरा नखलिस्तान थके यात्रियों को अमृत तुल्य शांति देता है।
नखलिस्तान में खजूर के पेड़ और मीठे पानी का स्रोत मरुभूमि के यात्रियों का संबल बनता है।
Rateela ↔ पथरीला
थार मरुस्थल का विस्तार रेतीला है, जबकि अरावली पर्वतमाला का मार्ग पथरीला और दुर्गम है।
पथरीला रास्ता चलने में कष्टप्रद होता है, किंतु रेतीले धोरों पर पैर तेजी से फिसलते हैं।
Kankad ↔ रेत
नदी की तलहटी में भारी कंकड़ नीचे बैठ जाते हैं, जबकि बारीक रेत पानी के साथ बहती है।
रेत पर महल बनाने के बजाय चट्टान जैसी मजबूत नींव पर मकान बनाना बुद्धिमानी है।
Chattan ↔ रेत
समुद्र की लहरें विशाल चट्टान से टकराकर लौट जाती हैं, किंतु रेत के टीलों को बहा ले जाती हैं।
रेत पर महल बनाने के बजाय चट्टान जैसी मजबूत नींव पर मकान बनाना बुद्धिमानी है।
Rag ↔ द्वेष
सांसारिक वस्तुओं के प्रति अंधा राग ही दुखों का मूल कारण बनता है।
दूसरों की उन्नति देखकर मन में द्वेष की भावना नहीं लानी चाहिए।
Peeda ↔ राहत
चोट की तीव्र पीड़ा से घायल व्यक्ति कराह उठा।
औषधि का लेप लगते ही रोगी को भारी पीड़ा से राहत मिली।
Ruchi ↔ अरुचि
साहित्य और कला के प्रति उसकी स्वाभाविक रुचि सराहनीय है।
अस्वस्थ भोजन के कारण बालक को पौष्टिक आहार से अरुचि होने लगी है।
Rosh ↔ तुष्टि
अन्याय देखकर जनता के मन में भीषण रोष भड़क उठा।
न्यायसंगत निर्णय से दोनों पक्षों को पूर्ण तुष्टि प्राप्त हुई।
Hansmukh ↔ रोतलू
हंसमुख स्वभाव का व्यक्ति जहाँ भी जाता है, वहाँ खुशियाँ बिखेर देता है।
रोतलू बच्चे को हर छोटी बात पर रोने की आदत पड़ जाती है।
Rugna ↔ निरोग
रुग्ण शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए पौष्टिक आहार और समुचित विश्राम आवश्यक है।
निरोग काया को ही मानव जीवन का सबसे बड़ा सुख और वास्तविक धन कहा गया है।
Nirogi ↔ रोगी
निरोगी व्यक्ति हर मौसम के बदलाव को सहजता से सहन कर लेता है।
रोगी व्यक्ति को चिकित्सक के परामर्श के अनुसार दवा और परहेज रखना चाहिए।
Kubadaa ↔ ऋजुकाय
अत्यधिक भार ढोने और रीढ़ की हड्डी के विकार से वह वृद्ध व्यक्ति कुबड़ा होकर चलने लगा।
योगासनों के नियमित अभ्यास से साधक का शरीर बुढ़ापे में भी सीधा और ऋजुकाय बना रहता है।
Romila ↔ अरोम
शीत प्रधान प्रदेशों में रहने वाले प्राणियों की त्वचा रोमिल और घने रोओं से ढकी होती है।
छोटे नवजात शिशु की कोमल त्वचा प्रायः अरोम और चिकनी प्रतीत होती है।
Snigdha ↔ रूखा
देसी घी से चुपड़ी स्निग्ध रोटियाँ शरीर में ओज और चिकनाई लाती हैं।
बिना घी-तेल की रूखी रोटी खाने में गले से मुश्किल से नीचे उतरती है।
Raseela ↔ सूखा
दशहरी आम अत्यंत रसीला और मिठास से भरा फल होता है।
काजू और बादाम जैसे सूखे मेवे लंबे समय तक खराब नहीं होते।
Ruchikar ↔ अरुचिकर
सजी हुई सलाद की थाली देखने में अत्यंत रुचिकर और ताजी लग रही थी।
जली हुई सब्जी की महक आने पर वह पूरी तरह अरुचिकर हो गई।
Ruchya ↔ अरुच्य
अदरक और नीबू का अचार भोजन को अत्यंत रुच्य बना देता है।
बासी तेल की दुर्गंध से पूरी सब्जी अरुच्य हो गई और किसी ने नहीं खाई।
Rasvaan ↔ नीरस
गर्मियों में रसवान संतरा और तरबूज शरीर में जल की कमी नहीं होने देते।
धूप में सूखा हुआ बेर एकदम नीरस और कड़ा हो जाता है।
Praataraash ↔ रात्रिभोज
स्वस्थ दिनचर्या के लिए पौष्टिक प्रातराश लेना अत्यंत आवश्यक है।
सोने से कम से कम दो घंटे पहले हल्का रात्रिभोज कर लेना चाहिए।
Roti ↔ भात
उत्तर भारत में गेहूं की गरम रोटी भोजन का मुख्य आधार है।
पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में दाल के साथ भात अधिक पसंद किया जाता है।
Bhandaar ↔ रिक्ति
अच्छी वर्षा के कारण सरकारी गोदामों में अनाज का भंडार भर गया।
युद्ध के समय अनाज की आपूर्ति रुकने से बाजार में राशन की रिक्ति हो गई।
Rasoiya ↔ अतिथि
दक्ष रसोइया स्वादिष्ट और स्वच्छ भोजन तैयार करने में निपुण था।
घर आए अतिथि का सत्कार प्रेमपूर्वक भोजन कराकर किया गया।
Rasdaar ↔ सूखा
चावल के साथ खाने के लिए आलू-मटर की रसदार सब्जी बनाई गई।
सफर में ले जाने के लिए उसने सूखे आलू और पूरियाँ पैक कीं।
Rindaata ↔ ऋणी
बैंक ऋणदाता के रूप में व्यापार आरंभ करने हेतु आसान ब्याज पर पूंजी देता है।
ऋणी व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह समय पर मूलधन और ब्याज चुका दे।
Rakshak ↔ भक्षक
कानून के रक्षक पुलिसकर्मियों का दायित्व जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
जो रक्षक ही भक्षक बन जाए, उससे समाज की रक्षा कौन कर सकता है।
Rishtedaar ↔ गैर
सच्चे रिश्तेदार वही होते हैं जो केवल सुख में ही नहीं, दुख में भी बराबर खड़े रहते हैं।
कभी-कभी मुश्किल समय में अपने दूर हो जाते हैं और गैर भी मददगार साबित होते हैं।
Rinamukt ↔ ऋणग्रस्त
बैंक का सारा कर्ज चुकाकर किसान आखिरकार ऋणमुक्त हो गया।
सूखे के चलते ब्याज पर ब्याज जुड़ने से किसान परिवार ऋणग्रस्त बना रहा।
Rinashodhan ↔ दिवालियापन
नियमित किस्तों द्वारा ऋणशोधन करने से ग्राहक का क्रेडिट स्कोर सुधरता है।
भारी कर्ज न चुका पाने पर न्यायालय ने कंपनी के दिवालियापन पर मुहर लगाई।
Lagaan ↔ रियायत
औपनिवेशिक शासन में भारी लगान के बोझ ने किसानों की कमर तोड़ दी थी।
प्राकृतिक आपदा के समय सहकारी समितियों ने ऋण में विशेष रियायत दी।
Rajat ↔ रांगा
खेल प्रतियोगिता में विजेता को स्वर्ण तथा उपविजेता को रजत पदक दिया गया।
बर्तनों की कलई करने के लिए रांगा धातु का प्रयोग किया जाता है।
Ratna ↔ कंकर
पारखी जौहरी ने धूल में पड़े असली रत्न को तुरंत पहचान लिया।
सड़क निर्माण के लिए मजदूरों ने ढेर सारे कंकर बिछाए।
Share ↔ ऋणपत्र
कंपनी के विकास में सीधी भागीदारी के लिए उसने इक्विटी शेयर खरीदे।
निश्चित ब्याज की गारंटी चाहने वाले निवेशकों ने सुरक्षित ऋणपत्र में धन लगाया।
Raajkosh ↔ निजी-कोष
जनता द्वारा दिए गए करों से राजकोष भरता है जिसका उपयोग विकास कार्यों में होता है।
ट्रस्ट के अध्यक्ष ने जन-कल्याण के कार्यों के लिए अपने निजी-कोष से दस लाख दिए।
Rojgaar ↔ बेरोजगार
नए कारखानों के खुलने से क्षेत्र के हजारों युवाओं को सम्मानजनक रोजगार मिला।
डिग्री हासिल करने के बावजूद उपयुक्त कौशल न होने से युवक बेरोजगार भटक रहा था।
Rojgaaree ↔ बेरोजगारी
कौशल विकास कार्यक्रमों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगारी के नए अवसर सृजित हुए।
आर्थिक मंदी के कारण कई विकसित देशों में भी बेरोजगारी की दर बढ़ गई।
Rachanaatmak ↔ ध्वंसात्मक
युवाओं की असीम ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों में लगाना राष्ट्रहित में है।
अराजक तत्वों की ध्वंसात्मक गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
Rojgaaronmukh ↔ अनुत्पादक
युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं।
कोरी सैद्धांतिक बातें सिखाना आधुनिक युग में अनुत्पादक सिद्ध होता है।
Diva ↔ रात्रि
दिवा के समय सूर्य का प्रखर प्रकाश संपूर्ण सृष्टि को प्रकाशित करता है।
रात्रि के अंधकार में आकाश में अनगिनत तारे टिमटिमाते नजर आते हैं।
Yugaantakaaree ↔ रूढ़िबद्ध
डिजिटल क्रांति ने मानव इतिहास में युगांतकारी परिवर्तन उपस्थित किया।
रूढ़िबद्ध समाज नए परिवर्तनों को स्वीकार करने में संकोच करता है।
Nirantar ↔ रुक-रुककर
निरंतर बहने वाली नदी चट्टानों को भी काटकर अपना मार्ग बना लेती है।
रुक-रुककर हो रही बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।
Yugapravartak ↔ रूढ़िवादी
राजा राममोहन राय जैसे युगप्रवर्तक विचारकों ने सती प्रथा जैसी कुरीतियों को मिटाया।
रूढ़िवादी मानसिकता वाले लोग समाज में हर नए सुधार का विरोध करते हैं।
Dinamaan ↔ रात्रिमान
ग्रीष्म ऋतु में दिनमान बड़ा और रात्रिमान छोटा हो जाता है।
शीत ऋतु में रात्रिमान लंबा होने के कारण रातें ठंडी और लंबी प्रतीत होती हैं।
Ranadheera ↔ रणचोर
संकट और विपत्ति के समय रणधीर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रणचोर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranabaankuraa ↔ कातर
संकट और विपत्ति के समय रणबांकुरा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Traasa ↔ राहत
संकट और विपत्ति के समय त्रास का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने राहत का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dahashatagarda ↔ रक्षक
संकट और विपत्ति के समय दहशतगर्द का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रक्षक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranashoora ↔ रणकातर
संकट और विपत्ति के समय रणशूर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रणकातर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aakraamaka ↔ रक्षात्मक
संकट और विपत्ति के समय आक्रामक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रक्षात्मक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Prahaara ↔ रोक
संकट और विपत्ति के समय प्रहार का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रोक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Rakshaarthee ↔ शरणदाता
संकट और विपत्ति के समय रक्षार्थी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शरणदाता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Apaharanakartaa ↔ रक्षक
संकट और विपत्ति के समय अपहरणकर्ता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रक्षक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Rananaada ↔ युद्धविराम
संकट और विपत्ति के समय रणनाद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने युद्धविराम का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranakshetra ↔ शांतिस्थल
संकट और विपत्ति के समय रणक्षेत्र का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांतिस्थल का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranakaushala ↔ अनाड़ीपन
संकट और विपत्ति के समय रणकौशल का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अनाड़ीपन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranonmaada ↔ शांति-चेतना
संकट और विपत्ति के समय रणोन्माद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांति-चेतना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranavijaya ↔ रणपराजय
संकट और विपत्ति के समय रणविजय का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रणपराजय का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranabhoomi ↔ तपोभूमि
संकट और विपत्ति के समय रणभूमि का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने तपोभूमि का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Rasika ↔ अरसिक
विद्या और बौद्धिक विकास में रसिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अरसिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Knthastheekarana ↔ रटना-छोड़ना
विद्या और बौद्धिक विकास में कंठस्थीकरण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में रटना-छोड़ना की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Rituparivartana ↔ स्थिर-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में ऋतुपरिवर्तन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में स्थिर-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Reta-kaa-toophaana ↔ शांत-रेगिस्तान
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में रेत-का-तूफान की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-रेगिस्तान का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Varshaa-boonden ↔ रेत-कण
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वर्षा-बूंदें की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में रेत-कण का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Hansna ↔ रोना
मित्रों के साथ खुलकर हंसना हर प्रकार के मानसिक तनाव और चिंता को दूर भगा देता है।
प्रियजन के अचानक बिछुड़ने पर किसी का भी रोना अत्यंत स्वाभाविक और मार्मिक होता है।
Roothna ↔ मनाना
छोटी-छोटी बातों पर अपनों से रूठना केवल संबंधों में अनावश्यक दूरी बढ़ाता है।
नाराज मित्र को प्यार और आत्मीयता से मनाना सच्ची मित्रता की निशानी है।
Chalna ↔ रुकना
जीवन निरंतर आगे चलने का नाम है, इसलिए मुश्किलों में भी कदम आगे बढ़ाते रहना चाहिए।
थक जाने पर थोड़ी देर रुकना उचित है, किंतु हिम्मत हारकर बैठ जाना अनुचित है।