Gahra ↔ उथला
नदी का यह भाग बहुत गहरा है, जबकि किनारों के समीप पानी उथला रहता है।
उथला पानी अधिक शोर करता है, जबकि गहरे जल की धारा शांत और गंभीर बहती है।
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Gahra ↔ उथला
नदी का यह भाग बहुत गहरा है, जबकि किनारों के समीप पानी उथला रहता है।
उथला पानी अधिक शोर करता है, जबकि गहरे जल की धारा शांत और गंभीर बहती है।
Uchit ↔ अनुचित
बुद्धिमान व्यक्ति उचित और अनुचित का भेद भली-भाँति समझते हैं।
अनुचित साधनों से प्राप्त सफलता क्षणिक होती है, उचित परिश्रम ही स्थायी यश दिलाता है।
Upasthit ↔ अनुपस्थित
समारोह में मुख्य अतिथि उपस्थित थे, किंतु कुछ प्रमुख वक्ता अनुपस्थित रहे।
कक्षा में अनुपस्थित रहने से छात्र महत्वपूर्ण पाठ के ज्ञान से वंचित रह जाता है।
Upayogi ↔ अनुपयोगी
समय का सदुपयोग जीवन को उपयोगी बनाता है जबकि आलस्य इसे अनुपयोगी कर देता है।
अनुपयोगी समझकर फेंकी गई वस्तुएं भी पुनर्चक्रण द्वारा मूल्यवान बन जाती हैं।
Uttam ↔ अधम
चंदन का वृक्ष उत्तम प्रकृति का प्रतीक है, सर्पों के लिपटने पर भी वह अधम नहीं बनता।
अधम कर्म करने वाला व्यक्ति समाज में घृणा का पात्र बनता है और आत्मसम्मान खो बैठता है।
Utkrisht ↔ निकृष्ट
कलाकार ने उत्कृष्ट कृति का सृजन किया, जिसे देखकर निकृष्ट नकलची भी दंग रह गए।
निकृष्ट आचरण किसी भी उच्च कुल के व्यक्ति को भी कलंकित कर देता है।
Ujjwal ↔ धूमिल
कड़ी मेहनत से छात्र का भविष्य उज्ज्वल बनता है, जबकि कुसंगति उसे धूमिल कर देती है।
समय के थपेड़े ऐतिहासिक स्मारकों की चमक को धूमिल कर देते हैं जिसे संरक्षण की आवश्यकता होती है।
Namra ↔ उद्दंड
नम्र स्वभाव के व्यक्ति की सब प्रशंसा करते हैं जबकि उद्दंड व्यवहार सभी को अखरता है।
उद्दंड आचरण छात्र की प्रतिष्ठा को धूमिल करता है, जबकि नम्र स्वभाव उसे सबका प्रिय बनाता है।
Vineet ↔ उद्धत
विनीत छात्र गुरुओं के प्रिय होते हैं, वहीं उद्धत स्वभाव वाले अपनी प्रतिष्ठा खो बैठते हैं।
अहंकार से भरा उद्धत व्यक्ति ज्ञानियों की संगति से भी कोई लाभ नहीं उठा पाता।
Udaar ↔ अनुदार
उदार हृदय वाले लोग सर्वकल्याण सोचते हैं जबकि अनुदार व्यक्ति केवल अपने स्वार्थ तक सीमित रहते हैं।
अनुदार दृष्टिकोण समाज को बांटता है, जबकि उदार हृदय सबको अपना बना लेता है।
Ugra ↔ शांत
उग्र रूप धारण किए बिना भी शांत और सौम्य वाणी से कठिन समस्याओं का समाधान हो सकता है।
शांत समुद्र में यात्रा सुखद होती है जबकि अशांत लहरों में जहाज डगमगाने लगता है।
Saumya ↔ उग्र
माता का सौम्य स्वभाव बालकों को सुरक्षा और स्नेह का संबल देता है।
उग्र स्वभाव व्यक्ति के विवेक को नष्ट कर संबंधों में कड़वाहट घोल देता है।
Udaaramana ↔ संकीर्णमना
उदारमना व्यक्ति सभी धर्मों का आदर करता है, संकीर्णमना द्वेष पालता है।
संकीर्णमना व्यक्ति कभी विशाल समाज का नेतृत्व नहीं कर सकता, उदारता ही सम्मान दिलाती है।
Utsaahi ↔ अनुत्साही
उत्साही युवा हर चुनौती को अवसर बना लेते हैं।
अनुत्साही सैनिक सेना के मनोबल को गिरा देता है, उत्साह ही विजय की कुंजी है।
Ureen ↔ ऋणी
माता-पिता के उपकारों से उऋण होना किसी भी संतान के लिए असंभव है।
माता-पिता के पावन उपकारों का मनुष्य आजीवन ऋणी रहता है जिसे चुकाना असंभव है।
Kanjoos ↔ उदार
कंजूस व्यक्ति आवश्यकता पड़ने पर भी खर्च नहीं करता।
उदार हृदय वाले लोग सर्वकल्याण सोचते हैं जबकि अनुदार व्यक्ति केवल अपने स्वार्थ तक सीमित रहते हैं।
Uday ↔ अस्त
सूर्य का पूर्व में उदय और पश्चिम में अस्त होना प्रकृति का अटल नियम है।
शाम को सूर्य अस्त होते ही पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौटने लगते हैं।
Utthaan ↔ पतन
परिश्रम और एकता राष्ट्र के उत्थान का मार्ग प्रशस्त करते हैं जबकि आपसी फूट पतन लाती है।
अहंकार बड़े-बड़े साम्राज्यों के पतन का प्रमुख कारण बना है।
Unnati ↔ अवनति
शिक्षा और विज्ञान में उन्नति करने वाला देश कभी अवनति के गर्त में नहीं गिरता।
आलस्य और कुप्रबंधन व्यापार को अवनति की ओर धकेल देते हैं।
Nakad ↔ उधार
दुकानदार ने नकद भुगतान पर छूट दी, उधार पर माल देने से मना कर दिया।
उधार लेना आसान है, किंतु उसे समय पर चुकाना ही सच्ची साख बनाता है।
Chadhaav ↔ उतार
जीवन में उतार और चढ़ाव स्वाभाविक हैं, दोनों में समभाव रखना ही योग है।
कठिन पहाड़ी रास्ते पर तीव्र उतार के समय वाहन की गति नियंत्रित रखनी चाहिए।
Bhojana ↔ उपवास
दोपहर के समय परिवार के सभी सदस्यों ने एक साथ बैठकर प्रेमपूर्वक भोजन किया।
शारीरिक शुद्धि और संयम के उद्देश्य से उन्होंने सप्ताह में एक दिन उपवास रखने का नियम बनाया।
Usha ↔ संध्या
उषा की लालिमा नभ में बिखरते ही संपूर्ण प्रकृति में नवचेतना का संचार हो जाता है।
संध्या होते ही पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौट आते हैं जिन्हें वे प्रभात में छोड़ गए थे।
Udayachal ↔ अस्ताचल
सूर्य उदयाचल पर उदित होकर दिनभर आलोक बिखेरने के पश्चात अस्ताचल की ओर प्रस्थान करता है।
अस्ताचलगामी सूर्य की रश्मियां शांत सरोवरों पर मनोहारी प्रतिबिंब रचती हैं।
Uttar ↔ दक्षिण
ध्रुवतारा सदा उत्तर दिशा में चमकता है, जिसके विपरीत दक्षिण दिशा स्थित होती है।
हिमालय भारत के उत्तर में और हिंद महासागर दक्षिण दिशा में स्थित है।
Udeechi ↔ अवाची
उदीची से बहती बर्फीली बयार ने अवाची की उष्णता को शीतलता में रूपांतरित कर दिया।
शास्त्रों में उदीची और अवाची को क्रमशः उत्तर और दक्षिण दिशा का द्योतक माना गया है।
Upatyaka ↔ अधित्यका
पहाड़ की तलहटी वाली भूमि को उपत्यका और शिखर पर समतल भूमि को अधित्यका कहते हैं।
अधित्यका पर ठंडी और तीव्र हवाएं चलती हैं, जबकि उपत्यका में जलवायु मृदुल रहती है।
Urvar ↔ ऊसर
गंगा के मैदानों की उर्वर मिट्टी में प्रचुर अन्न उपजता है, जबकि ऊसर भूमि में तिनका भी नहीं उगता।
कठिन परिश्रम और वैज्ञानिक तकनीकों से किसान ऊसर भूमि को भी उर्वर बना देते हैं।
Upjaaoo ↔ बंजर
उपजाऊ मिट्टी देश की खाद्य सुरक्षा का आधार है, जिसे बंजर होने से बचाना हमारा कर्तव्य है।
सिंचाई की समुचित व्यवस्था होने पर बंजर जमीन भी उपजाऊ खेत में तब्दील हो जाती है।
Ushna ↔ शीतल
रेगिस्तान की उष्ण हवाओं के मध्य शीतल जल का झरना किसी वरदान से कम नहीं लगता।
पर्वतों से बहती शीतल बयार थके हुए यात्रियों की उष्ण थकान को पलभर में हर लेती है।
Udgam ↔ संगम
गंगा का उद्गम गंगोत्री हिमनद से होता है और प्रयागराज में उसका त्रिवेणी संगम दर्शनीय है।
पर्वतों से निकली नदियां जब पावन संगम पर मिलती हैं तो वह तीर्थ बन जाता है।
Muhaana ↔ उद्गम
पर्वतों से निकलने वाला नदी का उद्गम संकरा होता है, किंतु समुद्र के निकट उसका मुहाना अत्यंत चौड़ा होता है।
गंगा का उद्गम गंगोत्री हिमनद से होता है और प्रयागराज में उसका त्रिवेणी संगम दर्शनीय है।
Ulka ↔ स्थिर तारा
क्षणभर चमककर बुझने वाली उल्का की तुलना नभ के स्थिर तारा से कभी नहीं की जा सकती।
आकाश में क्षणभर चमककर बुझने वाली उल्का स्थिर तारा की शाश्वत दीप्ति की बराबरी नहीं कर सकती।
Upagrah ↔ ग्रह
चंद्रमा पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है, जो निरंतर अपने ग्रह की परिक्रमा करता है।
ग्रहों का अपना प्रकाश नहीं होता, वे सूर्य जैसे नक्षत्रों के प्रकाश से चमकते हैं।
Utsah ↔ निरुत्साह
नवयुवकों का सच्चा उत्साह कठिन लक्ष्य को भी सुगम बना देता है।
निरंतर विफलता के कारण टीम में निरुत्साह फैलने लगा था।
Ullas ↔ अवसाद
विजय की घोषणा होते ही चारों ओर अपार उल्लास छा गया।
लगातार तनाव और असफलता व्यक्ति को गहरे अवसाद में धकेल सकती है।
Udweg ↔ शांतभाव
क्रोध और उद्वेग के क्षणों में लिया गया निर्णय प्रायः गलत साबित होता है।
योगी पुरुष हर परिस्थिति में शांतभाव धारण किए रहते हैं।
Kautuhal ↔ उदासीनता
वैज्ञानिक प्रयोगों के प्रति बच्चों का कौतूहल नई खोजों का बीज बोता है।
सामाजिक बुराइयों के प्रति उदासीनता बरतना नागरिकों को शोभा नहीं देता।
Sneh ↔ उपेक्षा
गुरुजनों का सच्चा स्नेह विद्यार्थियों के जीवन को प्रकाशमय बना देता है।
बुजुर्गों की उपेक्षा करना किसी भी सभ्य समाज के लिए अनुचित है।
Vatsalya ↔ उपेक्षा
माता-पिता का निस्वार्थ वात्सल्य संतान के सम्पूर्ण विकास का आधार है।
शिशुओं की उपेक्षा करने से उनका शारीरिक व मानसिक विकास बाधित होता है।
Mudit ↔ उदास
बच्चों की मीठी बातें सुनकर दादाजी का मन मुदित हो गया।
परीक्षा में मनचाहा फल न मिलने पर वह उदास बैठा रहा।
Ullasit ↔ विषण्ण
होली के पावन पर्व पर सारा गाँव उल्लसित रंगों में रंग गया।
पराजय के उपरांत राजा विषण्ण भाव से महल के कोने में बैठा रहा।
Utsahit ↔ हतोत्साहित
अध्यापक की प्रशंसा सुनकर छात्र नए प्रोजेक्ट के लिए और उत्साहित हो गया।
कठोर आलोचना से किसी भी परिश्रमी को हतोत्साहित नहीं करना चाहिए।
Jagrook ↔ उदासीन
जागरूक मतदाता ही लोकतंत्र की वास्तविक रीढ़ होते हैं।
पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर उदासीन बने रहना आत्मघाती है।
Utphull ↔ म्लान
सुखद वातावरण में बच्चों के चेहरे उत्फुल्ल कमल जैसे खिल उठे।
दुख की मार से पीड़ित व्यक्ति का मुखड़ा म्लान पड़ गया था।
Shantachitta ↔ उद्विग्न
शांतचित्त होकर कार्य करने से सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
भविष्य की अनिश्चितता से मन उद्विग्न और व्याकुल रहने लगा।
Uttejana ↔ प्रशांति
झूठी अफवाहों से समाज में अवांछित उत्तेजना फैल गई।
प्राकृतिक वातावरण में आत्मा को असीम प्रशांति मिलती है।
Udwignata ↔ प्रसन्नचित्तता
परीक्षा परिणाम से पूर्व छात्रों के मन में उद्विग्नता स्वाभाविक है।
ध्यान के अभ्यास से जीवन में प्रसन्नचित्तता बनी रहती है।
Hatash ↔ उत्साही
विपदाओं से घिरने पर भी हताश न होना ही सफलता का मूल मंत्र है।
उत्साही सैनिक दुर्गम पहाड़ियों पर भी मुस्कुराते हुए चढ़ गए।
Umang ↔ उदासी
वसंत ऋतु के आगमन पर युवाओं के मन में नई उमंग जाग उठती है।
बार-बार की असफलता से उसके चेहरे पर उदासी छा गई।
Umangit ↔ मायूस
खेल के मैदान में खिलाड़ी उमंगित होकर भाग रहे थे।
मैच हारने के बाद टीम के सदस्य मायूस होकर बैठ गए।
Uttaan ↔ अवतान
योगाभ्यास में शवासन के दौरान साधक उत्तान अवस्था में पीठ के बल विश्राम करता है।
मक्रासन करते समय साधक अवतान मुद्रा में पेट के बल लेटकर श्वास नियंत्रित करता है।
Udara ↔ पृष्ठ
संतुलित और सुपाच्य आहार लेने से उदर की पाचन क्रिया सुचारू और रोगमुक्त बनी रहती है।
लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठने से पृष्ठ और कटि प्रदेश में पीड़ा होने लगती है।
Urobhaaga ↔ पृष्ठभाग
तैराकी करते समय उरोभाग की मांसपेशियां जल के प्रतिरोध को चीरते हुए आगे बढ़ती हैं।
शरीर को सीधा और संतुलित रखने के लिए पृष्ठभाग की रीढ़ की मांसपेशियां निरंतर सक्रिय रहती हैं।
Unmeelana ↔ निमीलन
प्रातःकाल सूर्य की प्रथम किरण पड़ते ही नेत्रों का उन्मीलन होता है और चेतनता लौट आती है।
गहरी ध्यानस्थ अवस्था में साधक के नेत्रों का स्वाभाविक निमीलन हो जाता है।
Uchchhvaasa ↔ निःश्वास
कठिन शारीरिक श्रम के उपरांत खिलाड़ी का उच्छ्वास तेज गति से भीतर वायु खींचता है।
विश्राम की स्थिति में लंबा निःश्वास छोड़कर शरीर की संपूर्ण थकान दूर की जाती है।
Udaarta ↔ संकीर्णता
राजा ने अपनी उदारता का परिचय देते हुए पराजित शत्रु को भी क्षमादान दे दिया।
विचारों की संकीर्णता मनुष्य को नए दृष्टिकोण और प्रगति को स्वीकार करने से रोकती है।
Sumaarg ↔ उन्मार्ग
सत्संग और स्वाध्याय मनुष्य के मन को सदा सुमार्ग की ओर प्रेरित करते हैं।
उन्मार्ग पर भटकने वाला व्यक्ति अपने भविष्य और परिवार दोनों को संकट में डालता है।
Ubla ↔ तला
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग उबला हुआ चना और मूंग नाश्ते में लेते हैं।
कड़ाही में अधिक तला हुआ भोजन वजन बढ़ाने और गैस का कारण बनता है।
Upvaas ↔ पारण
एकादशी के दिन श्रद्धालु निर्जल उपवास रखकर आत्मशुद्धि करते हैं।
अगले दिन सूर्योदय के पश्चात पूजा करके पारण किया जाता है।
Ubaala ↔ जमाया
चाय बनाने के लिए उसने दूध और पानी को पतीले में अच्छी तरह उबाला।
हलवाई ने मटके में जामन डालकर गाढ़ा मीठा दही जमाया।
Atibhojan ↔ उपवास
दावत में अतिभोजन करने के कारण उसे रात भर पेट दर्द से जूझना पड़ा।
हफ्ते में एक दिन का उपवास पाचन तंत्र को विश्राम और ताजगी देता है।
Ubkaai ↔ तृप्ति
सड़े हुए तेल की गंध सूंघते ही उसे उबकाई आने लगी।
शुद्ध घी की गरम खिचड़ी खाकर पेट को परम तृप्ति मिली।
Jalpaan ↔ उपवास
सुबह की सैर से लौटने के बाद उसने फल और दूध का जलपान किया।
व्रत के दिन संध्या तक किसी भी प्रकार का जलपान न करके उपवास रखा जाता है।
Aagyaakaari ↔ उद्दंड
आज्ञाकारी बालक अपने गुरुजनों और बड़ों के वचनों का कभी उल्लंघन नहीं करता।
उद्दंड छात्र अनुशासन की अवहेलना कर कक्षा में बाधा उत्पन्न करता है।
Udyogpati ↔ श्रमिक
उद्योगपति ने नई स्वचालित इकाई स्थापित करने का निर्णय लिया।
श्रमिक के निरंतर पसीने से ही विशाल कल-कारखाने सुचारू चलते हैं।
Udhaari ↔ नकद-भुगतान
उधारी पर माल बेचने से दुकानदार की कार्यशील पूंजी फंस जाती है।
नकद-भुगतान करने पर व्यापारी ग्राहकों को पांच प्रतिशत की विशेष छूट देते हैं।
Nakadee ↔ उधारी
आपातकालीन जरूरतों के लिए घर में कुछ नकदी रखना सदैव बुद्धिमानी है।
उधारी के बोझ तले दबा व्यापारी चैन की नींद नहीं सो पाता।
Kaalaabaajaari ↔ उचित-दर
संकट के समय दवाओं की कालाबजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
सहकारी समिति उचित-दर पर नागरिकों को अनिवार्य सामग्री उपलब्ध कराती है।
Uchhaal ↔ गिरावट
उत्पाद की मांग बढ़ते ही कंपनी के शेयरों में जबर्दस्त उछाल आया।
कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट से परिवहन उद्योग को राहत मिली।
Upbhokta ↔ उत्पादक
जागरूक उपभोक्ता सदैव वस्तुओं की गुणवत्ता और एक्सपायरी डेट देखकर खरीदारी करता है।
उत्पादक नई तकनीक का इस्तेमाल करके लागत कम करने का प्रयास करता है।
Udyamee ↔ अकर्मण्य
उद्यमी मनुष्य कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी नए अवसर तलाश लेता है।
अकर्मण्य लोग हाथ पर हाथ धरे बैठे रहकर केवल भाग्य को दोष देते रहते हैं।
Udyam ↔ आलस्य
उद्यम ही सफलता की एकमात्र और वास्तविक कुंजी माना गया है।
आलस्य मनुष्य के शरीर में रहने वाला उसका सबसे बड़ा शत्रु है।
Udyogee ↔ निरुद्योगी
उद्योगी व्यक्ति कभी किसी के आगे हाथ फैलाने की नौबत नहीं आने देता।
निरुद्योगी स्वभाव के कारण वह पैतृक व्यापार को भी संभाल नहीं सका।
Udyamasheelta ↔ निष्क्रियता
युवाओं की उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए नए ऋण कार्यक्रम आरंभ किए गए।
प्रशासन की निष्क्रियता के कारण जन-समस्याएं दिनों-दिन गंभीर रूप लेती गईं।
Utpaadak ↔ अनुत्पादक
उद्योगों में उत्पादक श्रम को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष बोनस दिया जाता है।
अनुत्पादक व्यय पर रोक लगाकर बजट को घाटे से बाहर निकाला जा सकता है।
Utpaadakata ↔ अनुत्पादकता
आधुनिक कृषि उपकरणों ने प्रति हेक्टेयर उत्पादकता को दोगुना कर दिया।
कारखाने में बार-बार बिजली गुल होने से भारी अनुत्पादकता की स्थिति पैदा हो गई।
Utsaahpoorvak ↔ बेमन-से
विद्यार्थियों ने विज्ञान प्रदर्शनी की तैयारी में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
बिना रुचि के बेमन-से किया गया कार्य कभी भी प्रभावशाली परिणाम नहीं देता।
Udyog ↔ विश्राम
कठोर उद्योग करने से ही राष्ट्र की संपन्नता और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
लंबे समय तक काम करने के बाद मन और शरीर दोनों को उचित विश्राम चाहिए।
Udyamavaan ↔ अकर्मण्य
उद्यमवान पुरुष अपने बाहुबल से बंजर भूमि को भी उपजाऊ बना देता है।
अकर्मण्य व्यक्ति उत्तम अवसर मिलने पर भी कोई कदम नहीं उठाता।
Kaaryavaahee ↔ उदासीनता
शिकायत मिलते ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दोषी फैक्ट्री पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की।
प्रशासन की उदासीनता के कारण सड़क के गड्ढे महीनों तक नहीं भरे गए।
Utpaadan ↔ उपभोग
नए कारखाने के चालू होने से सीमेंट का उत्पादन दोगुना हो गया।
गर्मियों के मौसम में बिजली और पानी का उपभोग अत्यधिक बढ़ जाता है।
Karmaleen ↔ उदासीन
कर्मलीन वैज्ञानिक चौबीसों घंटे शोध प्रयोगशाला में अनुसंधान में जुटे रहे।
कंपनी के संकट के प्रति उदासीन कर्मचारियों को चेतावनी जारी की गई।
Udyogaparaayan ↔ सुस्त
उद्योगपरायण समाज निरंतर नवाचार करके विश्व स्तर पर अग्रणी बन जाता है।
सुस्त मानसिकता वाले लोग हमेशा बदलाव और नए काम से घबराते हैं।
Poorvakaal ↔ उत्तरकाल
पूर्वकाल में गुरुकुलों में छात्रों को समस्त विधाओं की शिक्षा दी जाती थी।
मुगल साम्राज्य के उत्तरकाल में क्षेत्रीय शक्तियों का तेजी से उदय हुआ।
Ushaakaal ↔ संध्याकाल
उषाकाल में आकाश में फैली लालिमा मन को असीम शांति प्रदान करती है।
संध्याकाल होते ही पक्षी अपने घोंसलों की ओर चहचहाते हुए लौटने लगते हैं।
Poorvasandhya ↔ उषावेला
स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर राष्ट्रपति ने राष्ट्र को संबोधित किया।
उषावेला में सूर्योदय होते ही नए दिन का हर्षोल्लास शुरू हुआ।
Uttaraayan ↔ दक्षिणायन
मकर संक्रांति के पर्व पर सूर्य उत्तरायण में प्रवेश करता है।
दक्षिणायन की अवधि में रातें लंबी और दिन छोटे होने लगते हैं।
Utaavalee ↔ ठहराव
बिना सोचे-समझे निर्णय लेने में उतावली दिखाना भविष्य में भारी पड़ सकता है।
अनुभवी नेता के भाषण में अद्भुत ठहराव और गंभीरता दिखाई देती है।
Udbhav ↔ अवसान
हिमालय की चोटियों से पवित्र गंगा नदी का उद्भव होता है।
दिन ढलते ही सूर्य के अवसान के साथ ही चारों ओर गोधूलि बेला छा गई।
Poorvaardh ↔ उत्तरार्ध
बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में भारत में स्वाधीनता संग्राम अपने चरम पर था।
सदी के उत्तरार्ध में सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष विज्ञान में क्रांति आई।
Praakkaaleen ↔ उत्तरकालीन
प्राक्कालीन सभ्यताओं के अवशेष सिंधु घाटी में आज भी दिखाई देते हैं।
उत्तरकालीन स्थापत्य कला में आधुनिक तकनीकों का गहरा प्रभाव झलकता है।
Utteerna ↔ अनुत्तीर्ण
विद्या और बौद्धिक विकास में उत्तीर्ण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनुत्तीर्ण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaanapipaasu ↔ उदासीन
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञानपिपासु का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में उदासीन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jijnyaasaa ↔ उदासीनता
विद्या और बौद्धिक विकास में जिज्ञासा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में उदासीनता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Upaadhi ↔ उपाधि-हरण
विद्या और बौद्धिक विकास में उपाधि का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में उपाधि-हरण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Uchcha-shikshaa ↔ प्राथमिक-शिक्षा
विद्या और बौद्धिक विकास में उच्च-शिक्षा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में प्राथमिक-शिक्षा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Moolyaankana ↔ उपेक्षा
विद्या और बौद्धिक विकास में मूल्यांकन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में उपेक्षा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sheetalataa ↔ उष्णता
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतलता की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्णता का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Ushna-mausama ↔ शीत-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उष्ण-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शीत-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Umasa ↔ सुहावना-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उमस की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सुहावना-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Umasadaara ↔ खुशनुमा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उमसदार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में खुशनुमा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Ushnakatibndha ↔ शीतकटिबंध
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उष्णकटिबंध की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शीतकटिबंध का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Kaalee-ghataa ↔ उजली-धूप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में काली-घटा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उजली-धूप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheetprakop ↔ उष्ण-राहत
पहाड़ों पर बर्फबारी के कारण मैदानी क्षेत्रों में भीषण शीतप्रकोप बढ़ गया।
दोपहर में धूप निकलने से कड़ाके की सर्दी में लोगों को उष्ण-राहत मिली।
Sheeta-vaayu ↔ उष्ण-पवन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-वायु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्ण-पवन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Himapaata-ritu ↔ उष्ण-ऋतु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में हिमपात-ऋतु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्ण-ऋतु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheetoshna-katibndha ↔ उष्ण-कटिबंध
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतोष्ण-कटिबंध की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्ण-कटिबंध का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-prabhaava ↔ उष्ण-प्रभाव
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-प्रभाव की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्ण-प्रभाव का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Umasabharaa-dina ↔ सुहावनी-शाम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उमसभरा-दिन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सुहावनी-शाम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Himayuga ↔ उष्णकाल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में हिमयुग की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्णकाल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Uchcha-vaayudaaba ↔ निम्न-वायुदाब
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उच्च-वायुदाब की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में निम्न-वायुदाब का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Uthna ↔ बैठना
प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व बिस्तर से उठना स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
दिनभर की भागदौड़ के बाद शांत मुद्रा में बैठना मानसिक शांति प्रदान करता है।
Idhar ↔ उधर
कृपया इधर आइए और अपनी समस्या के बारे में विस्तार से चर्चा कीजिए।
बिना किसी निश्चित उद्देश्य के इधर-उधर भटकने से कीमती समय नष्ट होता है।
Ujaala ↔ अंधेरा
सूर्य की पहली किरण निकलते ही चारों ओर फैला घना अंधेरा छंट गया और उजाला छा गया।
बिजली चले जाने पर पूरे मोहल्ले में घना अंधेरा छा गया और लोग मोमबत्तियां ढूंढने लगे।
Chadhna ↔ उतरना
पर्वतारोही कठिन बर्फीली चट्टानों पर चढ़ना अपनी साधना और लक्ष्य मानते हैं।
ढलान से नीचे उतरना कभी-कभी चढ़ाई करने से भी अधिक सावधानी की मांग करता है।
Girna ↔ उठना
ठोकर खाकर जमीन पर गिरना मनुष्य की असफलता नहीं, बल्कि सीख का अवसर है।
सच्चा वीर वही है जो हर बार गिरकर पुनः उठना और संघर्ष करना जानता है।
Doobna ↔ उतराना
भारी लोहे की कील पानी में डालते ही पेंदे में डूबना शुरू कर देती है।
हल्की सूखी लकड़ी और कॉर्क पानी की सतह पर तैरना और उतराना जारी रखते हैं।
Utaarna ↔ पहनाना
घर में प्रवेश करने से पूर्व बाहर ही गंदे जूते उतारना स्वच्छता का परिचायक है।
माता ने अपने नन्हे बालक को उत्सव के लिए सुंदर नए वस्त्र पहनाना शुरू किया।
Ubaalna ↔ जमाना
पानी को अच्छी तरह उबालना उसमें मौजूद हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट कर देता है।
गर्मियों में ताजगी के लिए फ्रीजर में पानी रखकर बर्फ जमाना बहुत आसान है।
Suljhaana ↔ उलझाना
बुद्धिमान मध्यस्थ ने दोनों पक्षों के बीच विवाद को शांतिपूर्वक सुलझाना संभव बनाया।
सरल और स्पष्ट बात में व्यर्थ के तर्क जोड़कर उसे और अधिक उलझाना नासमझी है।