Naya ↔ पुराना
पुरानी परंपराओं को त्यागकर समाज ने नए विचारों को अंगीकार किया है।
पुराने अनुभव और नई सोच का संगम ही किसी भी कार्य में सफलता दिलाता है।
अक्षर 'न' से प्रारंभ होने वाले कुल 179 विपरीतार्थक शब्द युग्म नीचे दिए गए हैं:
Naya ↔ पुराना
पुरानी परंपराओं को त्यागकर समाज ने नए विचारों को अंगीकार किया है।
पुराने अनुभव और नई सोच का संगम ही किसी भी कार्य में सफलता दिलाता है।
Dhani ↔ निर्धन
धनी व्यक्ति यदि कृपण हो तो समाज में उसका सम्मान निर्धन ज्ञानी से कम ही होता है।
सच्चा दानी वह है जो निर्धन और असहाय लोगों की पीड़ा समझकर सहायता के लिए आगे आए।
Shreshth ↔ निम्न
सत्कर्म करने वाला व्यक्ति समाज में श्रेष्ठ पद पाता है जबकि दुर्जन निम्न माना जाता है।
निम्न सोच मनुष्य के व्यक्तित्व को संकीर्ण बना देती है, जबकि श्रेष्ठ विचार उसे ऊंचा उठाते हैं।
Utkrisht ↔ निकृष्ट
कलाकार ने उत्कृष्ट कृति का सृजन किया, जिसे देखकर निकृष्ट नकलची भी दंग रह गए।
निकृष्ट आचरण किसी भी उच्च कुल के व्यक्ति को भी कलंकित कर देता है।
Puraatan ↔ नूतन
पुरातन रूढ़िवादिता को छोड़कर नूतन प्रगतिशील सोच अपनाना ही विकास का मूलमंत्र है।
वसंत में प्रकृति नूतन परिधान धारण कर हरियाली और नवऊर्जा से भर उठती है।
Sajeev ↔ निर्जीव
चित्रकार ने कैनवास पर ऐसा सजीव चित्र बनाया कि निर्जीव पत्थर भी बोलते नजर आए।
निर्जीव पत्थरों में भी मूर्तिकार अपनी छेनी से सजीव भाव उकेर देता है।
Balwaan ↔ निर्बल
सच्चा बलवान वही है जो निर्बल को सहारा देकर अपने बल का सदुपयोग करे।
निर्बल को सताने वाला कभी वास्तविक शांति और ईश्वर की कृपा प्राप्त नहीं कर सकता।
Saakaar ↔ निराकार
भक्त अपने आराध्य के साकार रूप की उपासना करते हैं, जबकि दार्शनिक निराकार ब्रह्म का चिंतन करते हैं।
भक्त साकार रूप में ईश्वर का ध्यान करते हैं, जबकि ज्ञानी निराकार ब्रह्म की अनुभूति करते हैं।
Saguna ↔ निर्गुण
सूरदास जी ने सगुण कृष्ण भक्ति का गान किया, वहीं कबीरदास जी ने निर्गुण राम की आराधना की।
निर्गुण संत कबीर ने परमात्मा को समस्त उपाधियों से परे एक रस माना है।
Nashwar ↔ अनश्वर
यह भौतिक शरीर नश्वर है, किंतु इसके भीतर स्थित चेतना अनश्वर और अमर है।
पार्थिव देह नश्वर है, किंतु उसमें विद्यमान आत्मतत्व अनश्वर और अविनाशी है।
Namra ↔ उद्दंड
नम्र स्वभाव के व्यक्ति की सब प्रशंसा करते हैं जबकि उद्दंड व्यवहार सभी को अखरता है।
उद्दंड आचरण छात्र की प्रतिष्ठा को धूमिल करता है, जबकि नम्र स्वभाव उसे सबका प्रिय बनाता है।
Dayalu ↔ निर्दयी
दयालु राजा अपनी प्रजा पर कृपा करता है जबकि निर्दयी शासक केवल अत्याचार ढहाता है।
निर्दयी शिकारी बेजुबान पशुओं पर अत्याचार करते समय किंचित भी संकोच नहीं करता।
Asli ↔ नकली
असली हीरे की चमक सदा बनी रहती है, जबकि नकली आभूषण जल्द ही फीके पड़ जाते हैं।
नकली मोतियों की चमक कुछ ही दिनों में फीकी पड़ जाती है, असली रत्न सदा दमकता है।
Sakriya ↔ निष्क्रिय
स्वास्थ्य के लिए सक्रिय जीवनशैली आवश्यक है, निष्क्रिय पड़े रहने से बीमारियां घेर लेती हैं।
निष्क्रिय रहकर केवल भाग्य के भरोसे बैठने से जीवन में कोई उपलब्धि हासिल नहीं होती।
Nipun ↔ अनिपुण
धनुर्विद्या में निपुण अर्जुन ने लक्ष्य पर अचूक संधान किया।
कला के क्षेत्र में निरंतर साधना ही अनिपुण शिक्षार्थी को कुशल कलाकार बनाती है।
Nyoon ↔ अधिक
खर्च को न्यूनतम रखना चाहिए और बचत को अधिक से अधिक बढ़ाना चाहिए।
किसी भी वस्तु का अधिक उपभोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है।
Saras ↔ नीरस
कवि का काव्य अत्यंत सरस था, कोई भी श्रोता उसे नीरस नहीं कह सका।
नीरस व्याख्यान श्रोताओं को ऊब से भर देता है, उसमें रोचक उदाहरण होने चाहिए।
Nyaayee ↔ अन्यायी
न्यायी न्यायाधीश पक्षपात नहीं करता, अन्यायी शासक का पतन अवश्यंभावी है।
अन्यायी शासक की सत्ता भले ही प्रचंड दिखे, किंतु अंततः उसका पतन निश्चित होता है।
Aastik ↔ नास्तिक
आस्तिक व्यक्ति ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास रखता है जबकि नास्तिक वैज्ञानिक तर्क मांगता है।
नास्तिक व्यक्ति ईश्वरीय सत्ता को अस्वीकार कर केवल प्रत्यक्ष प्रमाण पर विश्वास करता है।
Saarvajanik ↔ निजी
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना हर नागरिक का परम धर्म है।
निजी स्वार्थ को त्यागकर सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देना ही महानता है।
Sachest ↔ निश्चेष्ट
दवा लगते ही मरीज सचेष्ट हो उठा, पहले वह निश्चेष्ट पड़ा था।
संकट के समय निश्चेष्ट बैठने के बजाय सक्रिय होकर समाधान खोजना चाहिए।
Nirmaan ↔ विनाश
राष्ट्र के निर्माण में वर्षों लग जाते हैं, जबकि विनाश कुछ ही पलों में हो सकता है।
युद्ध केवल विनाश और संहार लाता है, शांति में ही लोक-कल्याण का निर्माण संभव है।
Prashansa ↔ निंदा
सच्चे मित्र सामने प्रशंसा करने के बजाय पीठ पीछे भी निंदा नहीं करते।
निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाय — कबीरदास जी के अनुसार निंदा करने वाला व्यक्ति सुधारक होता है।
Stuti ↔ निंदा
भक्त प्रभु की स्तुति करते हैं और अहंकार की निंदा करते हैं।
निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाय — कबीरदास जी के अनुसार निंदा करने वाला व्यक्ति सुधारक होता है।
Maalik ↔ नौकर
सच्चा मालिक वही है जो नौकर के श्रम का यथोचित पारिश्रमिक समय पर दे।
नौकर की ईमानदारी देखकर मालिक ने उसे अपने व्यापार का प्रबंधक बना दिया।
Aayaat ↔ निर्यात
देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आयात कम और निर्यात अधिक करना चाहिए।
भारतीय मसालों का विदेशों में बड़े पैमाने पर निर्यात होता है।
Nakad ↔ उधार
दुकानदार ने नकद भुगतान पर छूट दी, उधार पर माल देने से मना कर दिया।
उधार लेना आसान है, किंतु उसे समय पर चुकाना ही सच्ची साख बनाता है।
Naagarik ↔ ग्रामीण
नागरिक सुविधाओं का विस्तार ग्रामीण अंचलों तक पहुंचना आवश्यक है।
ग्रामीण जीवन की शांति और शुद्ध वायु शहरों की भागदौड़ में नहीं मिलती।
Niyam ↔ अनियम
यातायात के नियमों का पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य है।
दैनिक जीवन में अनियम और अनियमितता स्वास्थ्य तथा कार्य दोनों को बिगाड़ देती है।
Vidhi ↔ निषेध
शास्त्रों में शुभ कार्यों के लिए विधि और पापकर्मों के लिए निषेध बताया गया है।
अस्पतालों में धूम्रपान पूर्णतः निषेध है।
Pravesh ↔ निकास
सभागार में प्रवेश के लिए अलग द्वार था और निकास के लिए दूसरा मार्ग।
वर्षा के जल का उचित निकास न होने से गलियों में पानी भर गया।
Nar ↔ नारी
राष्ट्र के निर्माण में नर और नारी दोनों का योगदान बराबर है।
नारी शक्ति का सम्मान ही किसी भी प्रगतिशील समाज का सच्चा मापदंड है।
Sharana ↔ निष्कासन
युद्धग्रस्त क्षेत्र से आए असहाय परिवारों को शरण देकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
समाज विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर अपराधी का मोहल्ले से निष्कासन कर दिया गया।
Nirvaasana ↔ पुनर्वास
तानाशाह शासक ने अपने राजनीतिक विरोधियों को देश से निर्वासन की क्रूर सजा सुनाई।
बाढ़ पीड़ितों के लिए शासन ने सुरक्षित स्थल पर नए घरों का निर्माण कर पुनर्वास कराया।
Roodhi ↔ नवाचार
बिना सोचे-समझे पुरानी रूढ़ि को ढोते रहने से समाज की प्रगति अवरुद्ध हो जाती है।
कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में नए नवाचार अपनाने से ग्रामीण जीवन में क्रांति आ गई है।
Nivaasa ↔ प्रवास
अवकाश प्राप्त करने के उपरांत उन्होंने अपने पैतृक गांव में स्थायी निवास बना लिया।
उच्च शिक्षा और रोजगार के सिलसिले में युवाओं को वर्षों तक परदेस में प्रवास करना पड़ता है।
Aahaara ↔ निराहार
शारीरिक ऊर्जा बनाए रखने के लिए समय पर सुपाच्य और पौष्टिक आहार लेना आवश्यक है।
एकादशी के पावन पर्व पर श्रद्धालु पूरे दिन निराहार रहकर ईश्वर का ध्यान करते हैं।
Aparaadhee ↔ निरपराधी
न्यायालय ने साक्ष्यों की जांच के उपरांत उस शातिर ठग को अपराधी घोषित कर जेल भेज दिया।
सच्चे न्याय का सिद्धांत यही है कि किसी भी निर्दोष व निरपराधी को सजा न मिले।
Registaan ↔ नखलिस्तान
धधकते रेगिस्तान के मध्य हरा-भरा नखलिस्तान थके यात्रियों को अमृत तुल्य शांति देता है।
नखलिस्तान में खजूर के पेड़ और मीठे पानी का स्रोत मरुभूमि के यात्रियों का संबल बनता है।
Naaisargik ↔ कृत्रिम
कश्मीर की घाटियों में नैसर्गिक सौंदर्य बिखरा पड़ा है, जिसकी तुलना किसी कृत्रिम रचना से नहीं हो सकती।
कृत्रिम सुगंध कुछ ही देर टिकती है, जबकि प्राकृतिक फूलों की महक वातावरण को महकाए रखती है।
Dinkar ↔ निशाकर
दिनकर के उदय होते ही निशाकर की चांदनी आकाश में विलीन हो जाती है।
आकाश में निशाकर अपनी शीतल रश्मियों से धरती को शांत करता है जब दिनकर अस्त होता है।
Tarang ↔ निस्तब्धता
सरोवर में पत्ता गिरने से तरंग उठती है, जबकि बिना हलचल के उसमें निस्तब्धता छाई रहती है।
गहरे वन में रात के समय छाई निस्तब्धता को केवल दूर बहती नदी की कलकल ध्वनि तोड़ती है।
Pawan ↔ निर्वात
धरती के वायुमंडल में जीवनदायिनी पवन बहती है, जबकि अंतरिक्ष में निर्वात की स्थिति होती है।
प्रकाश की किरणें निर्वात में भी गमन कर सकती हैं, किंतु ध्वनि को संचरण हेतु वायु चाहिए।
Nirvaat ↔ वायु
प्रकाश की किरणें निर्वात में भी गमन कर सकती हैं, किंतु ध्वनि को संचरण हेतु वायु चाहिए।
अंतरिक्ष के शून्य निर्वात में जीवन संभव नहीं, धरती की सघन वायु ही श्वास देती है।
Ishaan ↔ नैऋत्य
वास्तुशास्त्र में ईशान कोण को अत्यंत शुभ और नैऋत्य कोण को स्थिरता का सूचक माना गया है।
नैऋत्य दिशा से आने वाले दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी बादल संपूर्ण उपमहाद्वीप में वर्षा लाते हैं।
Nirmalta ↔ मलिनता
पर्वतीय झरनों के जल की निर्मलता मन मोह लेती है, जिसे औद्योगिक कचरे की मलिनता से बचाना आवश्यक है।
नदियों में अपशिष्ट बहाने से जल में मलिनता बढ़ जाती है और जलीय जीवन संकट में पड़ जाता है।
Nirjhar ↔ स्थिर जल
चट्टानों को चीरकर बहता कलकल निर्झर गति का प्रतीक है, जबकि शांत सरोवर विश्राम का।
पहाड़ों का चंचल निर्झर बहकर अंततः घाटी के शांत स्थिर जल में विश्राम पाता है।
Nakshatra ↔ ग्रह
आकाश में नक्षत्र अपनी स्थिति पर स्थिर रहते हैं, जबकि ग्रह सूर्य की परिक्रमा में गतिशील रहते हैं।
ग्रहों का अपना प्रकाश नहीं होता, वे सूर्य जैसे नक्षत्रों के प्रकाश से चमकते हैं।
Asha ↔ निराशा
कठिन से कठिन समय में भी आशा की एक किरण जीवन को नई दिशा देती है।
असफलता से घबराकर निराशा के अंधकार में डूबना उचित नहीं है।
Utsah ↔ निरुत्साह
नवयुवकों का सच्चा उत्साह कठिन लक्ष्य को भी सुगम बना देता है।
निरंतर विफलता के कारण टीम में निरुत्साह फैलने लगा था।
Mamta ↔ निष्ठुरता
माँ की निस्वार्थ ममता हर संतान के लिए संसार का सबसे बड़ा संबल है।
मासूम जीवों पर अत्याचार करना घोर निष्ठुरता का परिचायक है।
Daya ↔ निर्दयता
दीन-दुखियों पर दया करना मानव धर्म का सबसे प्रमुख अंग है।
लाचार पशुओं पर लाठी बरसाना मनुष्य की निर्दयता दर्शाता है।
Sandeh ↔ निश्चय
अकारण संदेह करने से प्रेमपूर्ण रिश्तों में भी दरार आ जाती है।
दृढ़ निश्चय के साथ काम करने पर कोई भी बाधा मार्ग नहीं रोक सकती।
Nishtha ↔ विश्वासघात
सैनिकों ने मातृभूमि की रक्षा में अपनी अटूट निष्ठा का प्रमाण दिया।
मित्र के साथ विश्वासघात करना सबसे घृणित अपराध माना जाता है।
Nirbhay ↔ भयभीत
सत्य के मार्ग पर चलने वाला मनुष्य सदैव निर्भय रहता है।
शेर की दहाड़ सुनकर जंगल के सभी छोटे जीव भयभीत हो गए।
Nidar ↔ कातर
वह निडर बालक अंधकार में भी बिना किसी संकोच के आगे बढ़ता गया।
संकट की घड़ी में कातर दृष्टि से देखना कमजोरी की निशानी है।
Nishchint ↔ चिंतित
पुत्री का विवाह संपन्न होने के बाद पिता निश्चिंत महसूस करने लगे।
परीक्षा की तिथि निकट आते ही छात्र चिंतित होने लगे।
Vatsal ↔ निष्ठुर
वत्सल पिता ने अपने दोनों बालकों को गले से लगा लिया।
निष्ठुर डाकुओं ने निरीह यात्रियों पर कोई दया नहीं दिखाई।
Saday ↔ निर्दय
सदय न्यायाधीश ने अपराधी के पश्चाताप को देखकर सजा में नरमी बरती।
निर्दय शिकारी ने असहाय हिरण पर तीर चला दिया।
Namrata ↔ अकड़
नम्रता वह सद्गुण है जो कठोर हृदय को भी पिघला देता है।
मिथ्या अकड़ मनुष्य को अपनों से ही दूर कर देती है।
Mamtamayi ↔ निष्ठुरा
माँ की ममतामयी गोद में बच्चा सारे दुख भूल जाता है।
निष्ठुरा विमाता ने बालक के अधिकारों का हनन किया।
Nirash ↔ आशावान
एक बार की असफलता से निराश होकर बैठना कायरता है।
कर्मठ मनुष्य हर संकट में भी आशावान बना रहता है।
Nishchal ↔ चंचल
उसका निश्चल प्रेम सभी औपचारिकताओं से परे और पवित्र है।
हवा के झोंके की तरह चंचल मन को वश में करना कठिन अभ्यास मांगता है।
Sanshaygrast ↔ निसंशय
संशयग्रस्त व्यक्ति किसी भी नए कार्य की शुरुआत करने से डरता है।
निसंशय होकर आगे बढ़ने वाला कर्मवीर ही इतिहास रचता है।
Dayavan ↔ निर्दयी
दयावान डॉक्टर ने गरीब मरीजों का निःशुल्क उपचार किया।
निर्दयी बंधुआ मालिक मजदूरों से रात-दिन बिना वेतन काम कराता था।
Netraheen ↔ दृष्टिवान
नेत्रहीन व्यक्तियों में स्पर्श और श्रवण की अद्भुत संवेदनशीलता पाई जाती है।
दृष्टिवान लोगों को अपनी आँखों की सुरक्षा और उचित देखभाल के प्रति सचेत रहना चाहिए।
Rugna ↔ निरोग
रुग्ण शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए पौष्टिक आहार और समुचित विश्राम आवश्यक है।
निरोग काया को ही मानव जीवन का सबसे बड़ा सुख और वास्तविक धन कहा गया है।
Lambotara ↔ नाटा
लंबोतरा कद होने के कारण उसे बास्केटबॉल टीम में सरलता से चुन लिया गया।
नाटा कद होने पर भी सैनिक की फुर्ती और बहादुरी अद्वितीय थी।
Nirogi ↔ रोगी
निरोगी व्यक्ति हर मौसम के बदलाव को सहजता से सहन कर लेता है।
रोगी व्यक्ति को चिकित्सक के परामर्श के अनुसार दवा और परहेज रखना चाहिए।
Oopari ↔ निचला
शरीर के ऊपरी भाग में फेफड़े, हृदय और मस्तिष्क जैसे नाजुक अंग सुरक्षित रहते हैं।
निचला भाग अर्थात् जांघें और पैर संपूर्ण शरीर का भार वहन करते हैं।
Sashastra ↔ निहत्था
सीमा पर सशस्त्र प्रहरी हाथों में बंदूक लिए देश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं।
युद्ध के नियमों के अनुसार किसी निहत्थे व्यक्ति पर वार करना वर्जित है।
Nakha ↔ शिख
योग और आयुर्वेद में नख अर्थात पैर के नाखूनों की स्वच्छता और रंग से शारीरिक स्वास्थ्य परखा जाता है।
प्राचीन काव्य परंपरा में सौंदर्य का संपूर्ण वर्णन नख से शिख अर्थात पैर के अंगूठे से सिर की चोटी तक किया जाता था।
Unmeelana ↔ निमीलन
प्रातःकाल सूर्य की प्रथम किरण पड़ते ही नेत्रों का उन्मीलन होता है और चेतनता लौट आती है।
गहरी ध्यानस्थ अवस्था में साधक के नेत्रों का स्वाभाविक निमीलन हो जाता है।
Uchchhvaasa ↔ निःश्वास
कठिन शारीरिक श्रम के उपरांत खिलाड़ी का उच्छ्वास तेज गति से भीतर वायु खींचता है।
विश्राम की स्थिति में लंबा निःश्वास छोड़कर शरीर की संपूर्ण थकान दूर की जाती है।
Nyaay ↔ अन्याय
अदालत का प्रमुख कर्तव्य निष्पक्ष होकर प्रत्येक नागरिक को न्याय दिलाना है।
समाज में निर्बलों पर होने वाले अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना प्रत्येक जागरूक नागरिक का धर्म है।
Neeti ↔ अनीति
महात्मा विदुर ने शासक को सदा नीति और प्रजा-कल्याण के सिद्धांतों पर चलने का उपदेश दिया।
अनीति और स्वार्थ के बल पर स्थापित किया गया साम्राज्य कभी चिरस्थायी नहीं हो सकता।
Niswarth ↔ स्वार्थी
निःस्वार्थ भाव से की गई समाजसेवा ही ईश्वर की सच्ची उपासना कहलाती है।
स्वार्थी मित्र केवल अपने काम के समय याद करता है और संकट में साथ छोड़ देता है।
Naitik ↔ अनैतिक
व्यापार में लाभ कमाने के लिए नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए।
अनैतिक साधनों से प्राप्त की गई सफलता क्षणिक और आत्मग्लानि से भरी होती है।
Pravritti ↔ निवृत्ति
गृहस्थ आश्रम में सामाजिक व पारिवारिक कर्तव्यों की ओर मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है।
वानप्रस्थ और संन्यास आश्रम में व्यक्ति सांसारिक मोह से निवृत्ति की ओर अग्रसर होता है।
Nyaayochit ↔ अनुचित
मजदूरों को उनकी मेहनत का उचित पारिश्रमिक देना पूरी तरह न्यायोचित है।
बिना किसी प्रमाण के किसी पर झूठा आरोप लगाना अत्यंत अनुचित और निंदनीय है।
Nirmal ↔ मलिन
छोटे बच्चों का निर्मल हृदय छल-कपट और दुर्भावना से सर्वथा मुक्त होता है।
लोभ और वासनाओं से मलिन हुआ अंतःकरण सत्य को देखने की क्षमता खो देता है।
Nyaaypoorn ↔ अन्यायपूर्ण
पंचों का निर्णय पूरी तरह न्यायपूर्ण और निष्पक्ष था जिससे दोनों पक्ष संतुष्ट हुए।
कमजोर पक्ष पर अन्यायपूर्ण शर्तें थोपना नैतिक दृष्टि से सर्वथा अनुचित है।
Nishpaksh ↔ पक्षपाती
निष्पक्ष पत्रकारिता ही किसी भी स्वतंत्र लोकतंत्र का चौथा मजबूत स्तंभ होती है।
पक्षपाती मीडिया समाचारों को तोड़-मरोड़ कर जनता के सामने पेश करता है।
Niswaarthata ↔ स्वार्थपरता
माँ का प्रेम अपनी संतान के प्रति निःस्वार्थता की पराकाष्ठा है।
आज के युग में स्वार्थपरता के कारण पारस्परिक संबंधों में दूरियाँ बढ़ती जा रही हैं।
Nishkapat ↔ कपटी
निष्कपट व्यक्ति के मन में जो बात होती है, वही उसकी वाणी पर भी होती है।
कपटी व्यक्ति मीठी बातें बोलकर दूसरों को अपने जाल में फंसा लेता है।
Neki ↔ बदी
नेकी कर दरिया में डाल अर्थात् भलाई करके उसके बदले में कुछ पाने की अपेक्षा मत करो।
बदी का रास्ता अख्तियार करने वाले व्यक्ति को अंततः पश्चाताप की अग्नि में जलना पड़ता है।
Nek ↔ बद
नेक दिल इंसान हमेशा दूसरों के आंसुओं को पोंछने का प्रयास करता है।
बद नियत वाले व्यक्ति के साथ कोई भी सज्जन साझेदारी नहीं करना चाहता।
Neknaam ↔ बदनाम
अपने परोपकारी कार्यों के कारण वह पूरे शहर में एक नेकनाम नागरिक बन गया।
घोटाले में संलिप्त पाए जाने पर वह व्यापारी चारों ओर बदनाम हो गया।
Satkaar ↔ निरादर
गृहस्थ ने अपने घर आए अतिथियों का बड़े प्रेम और सत्कार के साथ स्वागत किया।
विद्वान सभा में किसी योग्य व्यक्ति का निरादर करना अत्यंत अशोभनीय है।
Prashansneeya ↔ निंदनीय
आपदा के समय युवाओं का राहत कार्य अत्यंत प्रशंसनीय और प्रेरणादायक रहा।
संकट के समय दवाओं की कालाबाजारी करना एक अत्यंत निंदनीय और घृणित कृत्य है।
Stutya ↔ निंद्य
पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए उनके प्रयास सर्वथा स्तुत्य हैं।
सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँचाना कानून और समाज दोनों की नजर में निंद्य है।
Neetigya ↔ अनीतिज्ञ
नीतिज्ञ मंत्री ने राजा को युद्ध के संकट से बचाकर शांति का मार्ग सुझाया।
अनीतिज्ञ सलाहकारों की संगति में रहकर राजा ने विनाशकारी निर्णय ले लिए।
Neetisammat ↔ नीतिविरुद्ध
राजा ने केवल वही निर्णय लागू किए जो शास्त्रों और लोक-कल्याण की दृष्टि से नीतिसम्मत थे।
सत्ता हथियाने के लिए किया गया कोई भी नीतिविरुद्ध षड्यंत्र अंततः विनाश ही लाता है।
Nabhchar ↔ भूचर
चील और बाज नभचर पक्षी हैं जो आकाश में ऊँची उड़ान भरते हैं।
गाय और भैंस जैसे भूचर पशु धरती पर विचरण करते हैं।
Nishaachar ↔ दिवाचर
उल्लू और चमगादड़ निशाचर प्राणी हैं जो रात के अंधकार में सक्रिय होते हैं।
चिड़िया और कौआ दिवाचर पक्षी हैं जो सूर्योदय के साथ चहचहाने लगते हैं।
Narpashu ↔ मादापशु
जंगली झुंड में नरपशु अपने इलाके की सीमाओं की रक्षा करता है।
मादापशु नवजात शावकों को आहार और सुरक्षा प्रदान करती है।
Namkeen ↔ अलौना
शाम की चाय के साथ कुरकुरा नमकीन नाश्ता सबको बहुत पसंद आया।
उच्च रक्तचाप के मरीज को चिकित्सक ने अलौना भोजन करने का निर्देश दिया।
Niraamish ↔ सामिष
मंदिर के भंडारे में केवल शुद्ध निरामिष भोजन ही परोसा जाता है।
तटीय इलाकों में मछली से बना सामिष भोजन मुख्य आहार के रूप में खाया जाता है।
Rasvaan ↔ नीरस
गर्मियों में रसवान संतरा और तरबूज शरीर में जल की कमी नहीं होने देते।
धूप में सूखा हुआ बेर एकदम नीरस और कड़ा हो जाता है।
Namkeenpan ↔ अलौनापन
समुद्री नमकीनपन के कारण समुद्री शैवाल का स्वाद अनोखा होता है।
सब्जी में नमक न डालने से उसका अलौनापन गले से नहीं उतर रहा था।
Suras ↔ नीरस
अनार का सुरस पेय शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाता है।
बासी हो जाने पर गन्ने का रस नीरस और खट्टा हो जाता है।
Sharkara ↔ नमक
चाय में शर्करा अधिक होने से वह बहुत मीठी हो गई।
सब्जी में नमक संतुलित मात्रा में ही डालना चाहिए।
Mishthaann ↔ नमकीन
दीपावली पर घर आए मेहमानों को काजू कतली और मिष्ठान्न भेंट किए गए।
चाय की चुस्की के साथ भुजिया और नमकीन परोसा गया।
Neta ↔ अनुयायी
सच्चा नेता संकट की स्थिति में आगे रहकर दल का मार्गदर्शन करता है।
अनुयायी अपने मार्गदर्शक के आदर्शों पर चलकर समाज में बदलाव लाते हैं।
Nanad ↔ देवर
ननद ने अपनी नई भाभी का गृह-प्रवेश में आरती उतारकर स्वागत किया।
देवर अपनी भाभी के घरेलू कामों में हमेशा हाथ बंटाता था।
Bhaabhi ↔ ननद
भाभी ने अपनी ननद के विवाह की तैयारियाँ बड़े उत्साह के साथ पूरी कीं।
ननद छुट्टियों में मायके आकर भाभी के साथ सुख-दुख साझा करती है।
Naana ↔ नानी
गर्मियों की छुट्टियों में बच्चे नाना जी के गाँव जाकर खूब आनंद लेते हैं।
नानी जी के हाथ का बना आम का अचार पूरे परिवार में प्रसिद्ध है।
Naati ↔ नातिन
नाना जी अपने नन्हे नाती को कंधों पर बिठाकर मेला दिखाने ले गए।
नातिन अपनी नानी जी को रामायण की चौपाइयाँ पढ़कर सुनाती है।
Nishthaavaan ↔ विद्रोही
निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने दिन-रात परिश्रम करके संगठन को सशक्त बनाया।
विद्रोही गुटों ने सरकारी प्रतिष्ठानों पर हमला करके कानून को चुनौती दी।
Naayak ↔ प्रतिनायक
कथा का नायक सत्य और न्याय की रक्षा के लिए अंत तक संघर्ष करता है।
प्रतिनायक अपने छल और शक्ति के बल पर नायक के मार्ग में बाधाएं डालता है।
Nawaab ↔ बेगम
नवाब अपने ठाठ-बाट और कला-प्रेम के लिए रियासत में प्रसिद्ध थे।
बेगम ने अनाथों की शिक्षा और सहायता के लिए विशाल दान दिया।
Naat-rishta ↔ बेगानापन
गाँव में हर व्यक्ति एक-दूसरे से किसी न किसी नात-रिश्ते से जुड़ा होता है।
महानगरों की भागदौड़ में पड़ोसियों के बीच भी अजीब बेगानापन दिखाई देता है।
Naatedaar ↔ अजनबी
विवाह के शुभ अवसर पर दूर-दराज से नातेदार घर पहुंचे।
रेल यात्रा में साथ बैठे अजनबी व्यक्ति से भी उसने शालीनता से बात की।
Niyokta ↔ कर्मचारी
एक सहृदय नियोक्ता अपने कर्मचारियों के कल्याण और स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखता है।
परिश्रमी कर्मचारी अपनी लगन और मेहनत से कंपनी को सफलता की नई ऊंचाइयों पर ले गया।
Nanadoi ↔ ननद
त्योहार के अवसर पर ननदोई जी का ससुराल में आदरपूर्वक सत्कार किया गया।
ननद ने अपने मायके आकर बचपन की यादें ताजा कीं।
Sadhan ↔ निर्धन
सधन वर्ग को जरूरतमंद नागरिकों की सहायता हेतु सदैव तत्पर रहना चाहिए।
निर्धन बच्चों को विद्यालय में मुफ्त पाठ्य-पुस्तकें वितरित की गईं।
Shreemant ↔ निर्धन
श्रीमंत परिवारों ने कन्या विवाह कोष में मुक्तहस्त दान दिया।
निर्धन परिवारों को शासकीय योजनाओं से पक्के आवास प्रदान किए गए।
Nafa ↔ नुकसान
व्यापार में सदैव नफा और नुकसान का संतुलन ध्यान में रखना पड़ता है।
आग लगने से गोदाम में रखे माल का लाखों रुपयों का नुकसान हो गया।
Faayedemand ↔ नुकसानदेह
दीर्घकालिक सरकारी बांड में निवेश करना बेहद फायदेमंद सिद्ध हुआ।
बिना सोचे-समझे शेयर बाजार में सट्टा लगाना वित्तीय रूप से नुकसानदेह है।
Kamaaoo ↔ निठल्ला
परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य होने के नाते उस पर भारी जिम्मेदारी है।
दिन भर ताश खेलकर समय बर्बाद करने वाला निठल्ला व्यक्ति समाज में मान नहीं पाता।
Udhaari ↔ नकद-भुगतान
उधारी पर माल बेचने से दुकानदार की कार्यशील पूंजी फंस जाती है।
नकद-भुगतान करने पर व्यापारी ग्राहकों को पांच प्रतिशत की विशेष छूट देते हैं।
Nakadee ↔ उधारी
आपातकालीन जरूरतों के लिए घर में कुछ नकदी रखना सदैव बुद्धिमानी है।
उधारी के बोझ तले दबा व्यापारी चैन की नींद नहीं सो पाता।
Shulk ↔ निःशुल्क
परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए सभी विद्यार्थियों को निर्धारित शुल्क भरना पड़ा।
सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में पाठ्य-पुस्तकें और भोजन पूरी तरह निःशुल्क प्रदान किए जाते हैं।
Jama ↔ निकासी
बचत खाते में नियमित रूप से धन जमा करने पर उचित ब्याज मिलता है।
एटीएम से नकदी की निकासी करते समय सावधानी बरतना आवश्यक है।
Nivesh ↔ विनिवेश
स्टार्टअप कंपनियों में विदेशी निवेशकों ने भारी निवेश किया है।
घाटे में चल रहे सरकारी उपक्रमों में सरकार विनिवेश की नीति अपनाती है।
Dhanaadesh ↔ नकदी
बड़ी व्यावसायिक खरीद का भुगतान धनादेश द्वारा करना अधिक सुरक्षित रहता है।
सब्जी मंडी में छोटे विक्रेताओं को तुरंत नकदी में भुगतान करना पड़ता है।
Hundee ↔ नकदी
प्राचीन काल में दूरस्थ नगरों के व्यापार के लिए हुंडी का प्रचलन था।
स्थानीय दैनिक लेन-देन में लोग आज भी नकदी पर अधिक भरोसा करते हैं।
Raajkosh ↔ निजी-कोष
जनता द्वारा दिए गए करों से राजकोष भरता है जिसका उपयोग विकास कार्यों में होता है।
ट्रस्ट के अध्यक्ष ने जन-कल्याण के कार्यों के लिए अपने निजी-कोष से दस लाख दिए।
Udyogee ↔ निरुद्योगी
उद्योगी व्यक्ति कभी किसी के आगे हाथ फैलाने की नौबत नहीं आने देता।
निरुद्योगी स्वभाव के कारण वह पैतृक व्यापार को भी संभाल नहीं सका।
Kaamgaar ↔ निठल्ला
कारखाने का हर कामगार अपने कार्य को पूरी निष्ठा और तत्परता से पूरा करता है।
दिन भर चौराहे पर समय गंवाने वाले निठल्ले व्यक्ति को कोई गंभीरता से नहीं लेता।
Kaareegar ↔ नौसिखिया
अनुभवी कारीगर ने पुरानी घड़ी के बारीक पुर्जों को कुछ ही मिनटों में ठीक कर दिया।
नौसिखिया चालक को अभी व्यस्त मार्गों पर वाहन चलाने का अनुभव नहीं है।
Udyamasheelta ↔ निष्क्रियता
युवाओं की उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए नए ऋण कार्यक्रम आरंभ किए गए।
प्रशासन की निष्क्रियता के कारण जन-समस्याएं दिनों-दिन गंभीर रूप लेती गईं।
Niyojan ↔ अनियोजन
उचित आर्थिक नियोजन के बिना कोई भी बड़ा उद्योग सफल नहीं हो सकता।
अनियोजन और अव्यवस्था के कारण अच्छा-खासा प्रोजेक्ट भी समय से पिछड़ गया।
Sakriyata ↔ निष्क्रियता
पर्यावरण संरक्षण के प्रति युवाओं की बढ़ती सक्रियता एक सुखद संकेत है।
प्रशासन की निष्क्रियता के कारण ऐतिहासिक इमारतों की हालत जर्जर हो रही है।
Naukareepesha ↔ व्यापारी
नौकरीपेशा लोगों को हर महीने अपने खर्चे बजट के अनुरूप तय करने होते हैं।
व्यापारी जोखिम उठाकर पूंजी लगाता है और लाभ-हानि का सामना करता है।
Cheshta ↔ निश्चेष्टता
गिरने के बाद फिर से उठने की सच्ची चेष्टा ही मनुष्य की पहचान है।
रोग के कारण रोगी पूर्ण निश्चेष्टता की स्थिति में बिस्तर पर पड़ा रहा।
Prayatna ↔ निष्प्रयत्न
कठिन गणित के प्रश्नों को बार-बार हल करने का प्रयत्न करना चाहिए।
बिना किसी प्रयत्न के निष्प्रयत्न बैठे रहने से कोई उपलब्धि हासिल नहीं होती।
Niyukti ↔ बर्खास्तगी
कड़े साक्षात्कार और परीक्षा के बाद प्रतिभाशाली शिक्षक की नियुक्ति हुई।
भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए जाने पर अधिकारी की तत्काल प्रभाव से बर्खास्तगी कर दी गई।
Nipunata ↔ अकुशलता
सर्जन ने अद्भुत निपुणता के साथ जटिल हृदय प्रत्यारोपण पूरा किया।
ड्राइवर की अकुशलता के कारण बस मोड़ पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
Anubhavee ↔ नौसिखिया
तूफान में जहाज को सुरक्षित किनारे लाने का श्रेय अनुभवी नाविक को जाता है।
नौसिखिया तैराक को गहरे पानी में जाने से पहले प्रशिक्षक की सहायता लेनी चाहिए।
Nitya ↔ अनित्य
आत्मा को नित्य और अविनाशी माना गया है जिसका कभी नाश नहीं होता।
संसार के सभी भौतिक सुख अनित्य हैं और समय के साथ समाप्त हो जाते हैं।
Chirantan ↔ नश्वर
प्रेम और करुणा की चिरंतन भावनाएं मानव हृदय को जोड़कर रखती हैं।
मानव देह नश्वर है, इसलिए अहंकार का त्याग करके सत्कर्म करने चाहिए।
Praacheenata ↔ नवीनता
काशी नगरी अपनी अद्वितीय प्राचीनता और धार्मिक विरासत के लिए विश्वविख्यात है।
कला में नवीनता लाने के लिए युवा चित्रकार नए रंगों और तकनीकों का प्रयोग करते हैं।
Nityaprati ↔ यदा-कदा
वह नित्यप्रति सुबह पांच बजे उठकर व्यायामशाला जाता है।
व्यस्तता के कारण वह यदा-कदा ही अपने पैतृक गांव जा पाता है।
Chirasthaayitva ↔ नश्वरता
कालिदास के नाटकों का चिरस्थायित्व उनकी अनूठी भाषा और भाव में निहित है।
मानव जीवन की नश्वरता को समझकर व्यक्ति को विनम्र रहना चाहिए।
Nirantar ↔ रुक-रुककर
निरंतर बहने वाली नदी चट्टानों को भी काटकर अपना मार्ग बना लेती है।
रुक-रुककर हो रही बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।
Nisha ↔ दिवा
घनी निशा के अंधकार में जुगनू चमकते हुए सुंदर दिखाई दे रहे थे।
दिवा के समय किसान अपने खेतों में मेहनत करते हैं।
Nisheeth ↔ मध्याह्न
निशीथ की नीरवता में घड़ी की टिक-टिक भी साफ सुनाई दे रही थी।
मध्याह्न की कड़ी धूप में पशु भी पेड़ों की छाया में शरण लेते हैं।
Nityata ↔ अनित्यता
भारतीय दर्शन में ब्रह्म की नित्यता को ही परम सत्य माना गया है।
सांसारिक सुखों की अनित्यता को समझकर व्यक्ति विरक्त हो जाता है।
Navayug ↔ पुरातन-युग
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आगमन के साथ तकनीकी नवयुग की शुरुआत हुई है।
पुरातन-युग में संदेश भेजने के लिए कबूतरों और दूतों का उपयोग किया जाता था।
Nirbheeka ↔ डरपोक
संकट और विपत्ति के समय निर्भीक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डरपोक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbheekataa ↔ भयभीतता
संकट और विपत्ति के समय निर्भीकता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयभीतता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nidarataa ↔ कातरता
संकट और विपत्ति के समय निडरता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nihshnka ↔ शंकित
संकट और विपत्ति के समय निःशंक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शंकित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shnkaakula ↔ निश्चिंत
संकट और विपत्ति के समय शंकाकुल का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने निश्चिंत का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbhayataa ↔ भीरुता
संकट और विपत्ति के समय निर्भयता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भीरुता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ojasvee ↔ निस्तेज
संकट और विपत्ति के समय ओजस्वी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने निस्तेज का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirdvndva ↔ द्वंद्वग्रस्त
संकट और विपत्ति के समय निर्द्वंद्व का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने द्वंद्वग्रस्त का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nihsnkocha ↔ संकोची
संकट और विपत्ति के समय निःसंकोच का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने संकोची का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nidara-mana ↔ शंकित-मन
संकट और विपत्ति के समय निडर-मन का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शंकित-मन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbhaya-bhaava ↔ डर-का-भाव
संकट और विपत्ति के समय निर्भय-भाव का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डर-का-भाव का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbheeka-svara ↔ कांपती-आवाज
संकट और विपत्ति के समय निर्भीक-स्वर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कांपती-आवाज का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbhaya-drishti ↔ झुकी-नजरें
संकट और विपत्ति के समय निर्भय-दृष्टि का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने झुकी-नजरें का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sashastreekarana ↔ निःशस्त्रीकरण
संकट और विपत्ति के समय सशस्त्रीकरण का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने निःशस्त्रीकरण का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Saakshara ↔ निरक्षर
विद्या और बौद्धिक विकास में साक्षर का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में निरक्षर की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Saaksharataa ↔ निरक्षरता
विद्या और बौद्धिक विकास में साक्षरता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में निरक्षरता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Akshara ↔ निरक्षर
विद्या और बौद्धिक विकास में अक्षर का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में निरक्षर की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Nirmala-aakaasha ↔ धुंधला-आकाश
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में निर्मल-आकाश की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में धुंधला-आकाश का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Meghagarjana ↔ नीरवता
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मेघगर्जन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में नीरवता का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Nidaagha ↔ शिशिर
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में निदाघ की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शिशिर का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Neehaara ↔ धूप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में नीहार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में धूप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Namee ↔ सूखापन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में नमी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखापन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Megha-garjanaa ↔ नीरव-आकाश
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मेघ-गर्जना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में नीरव-आकाश का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Meghamaalaa ↔ नीलांबर
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मेघमाला की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में नीलांबर का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Ghataatopa-andheraa ↔ निर्मल-उजाला
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में घटाटोप-अंधेरा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में निर्मल-उजाला का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Uchcha-vaayudaaba ↔ निम्न-वायुदाब
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उच्च-वायुदाब की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में निम्न-वायुदाब का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Svarg ↔ नरक
धार्मिक मान्यताओं में पवित्र आचरण और परोपकार करने वाली आत्माओं को स्वर्ग का अधिकारी बताया गया है।
पाप, क्रूरता और दुष्ट कर्मों में लिप्त रहने वाले मनुष्य को नरक की यातनाएं झेलनी पड़ती हैं।
Oopar ↔ नीचे
विमान जब बादलों के ऊपर पहुंचता है तो नीचे की धरती अत्यंत छोटी और सुरम्य दिखाई देती है।
पहाड़ से नीचे उतरते समय फिसलन भरे पत्थरों पर बहुत संभलकर कदम रखना पड़ता है।
Sakht ↔ नरम
कक्षा में अनुशासन बनाए रखने के लिए अध्यापक को कभी-कभी सख्त रुख अपनाना पड़ता है।
बच्चों की नादानियों पर क्रोधित होने के बजाय उनके साथ नरम व्यवहार करना चाहिए।