Sundar ↔ कुरूप
बाहरी रूप से सुंदर दिखने वाले व्यक्ति के विचार भी सुंदर हों, यह आवश्यक नहीं; कभी-कभी कुरूप काया में भी सुंदर आत्मा वास करती है।
मन में यदि ईर्ष्या और द्वेष हो तो सुंदर चेहरा भी कुरूप और अप्रिय लगने लगता है।
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Sundar ↔ कुरूप
बाहरी रूप से सुंदर दिखने वाले व्यक्ति के विचार भी सुंदर हों, यह आवश्यक नहीं; कभी-कभी कुरूप काया में भी सुंदर आत्मा वास करती है।
मन में यदि ईर्ष्या और द्वेष हो तो सुंदर चेहरा भी कुरूप और अप्रिय लगने लगता है।
Saral ↔ कठिन
गणित के इस सरल सवाल को उलझाकर जटिल मत बनाओ।
निरंतर अभ्यास से कठिन से कठिन विषय भी अत्यंत सरल प्रतीत होने लगते हैं।
Komal ↔ कठोर
फूलों की पंखुड़ियाँ कोमल होती हैं जबकि पर्वत की चट्टानें अत्यंत कठोर।
राजा का कठोर दंड देखकर सभासद विस्मित रह गए, किंतु रानी का हृदय अत्यंत कोमल था।
Meetha ↔ कड़वा
मीठे बोल सभी का मन मोह लेते हैं जबकि कड़वे वचन दूसरों को चोट पहुँचाते हैं।
सच्चाई कड़वी औषधि के समान होती है, किंतु अंत में उसका फल मीठा ही निकलता है।
Madhur ↔ कटु
कोयल की मधुर वाणी सबको भाती है जबकि कौवे का कटु स्वर किसी को पसंद नहीं।
कटु वचन तीखे तीर की भांति हृदय को भेद देते हैं, जबकि मधुर वाणी घाव भर देती है।
Kshanik ↔ शाश्वत
सांसारिक सुख क्षणिक होते हैं, जबकि सत्य और करुणा का आनंद शाश्वत होता है।
सत्य और धर्म का मूल्य शाश्वत है जो युगों के परिवर्तन के बाद भी कभी नहीं मिटता।
Khurdura ↔ चिकना
रेगमाल से रगड़ने पर खुरदुरी लकड़ी की सतह बिल्कुल चिकनी हो जाती है।
चिकने पत्थर पर पानी टिक नहीं पाता, जबकि खुरदुरी मिट्टी वर्षा की नमी को सोख लेती है।
Teekshna ↔ कुंद
तीक्ष्ण बुद्धि वाला बालक शीघ्र सीखता है जबकि कुंद मस्तिष्क वाले को अधिक समय लगता है।
कुंद चाकू से फल काटना दुष्कर होता है, उसे तीक्ष्ण धार की आवश्यकता होती है।
Kripan ↔ दानी
कृपण व्यक्ति धन संचय करके भी भूखा मरता है, जबकि दानी पुरुष दान देकर अमर हो जाता है।
सच्चा दानी अपने दिए गए दान का कभी ढिंढोरा नहीं पीटता, वह गुप्त भाव से उपकार करता है।
Kroor ↔ दयावान
क्रूर शिकारी ने मूक पशु पर बाण चलाया, किंतु दयावान साधु ने उसकी जान बचाई।
दयावान मनुष्य पीड़ित प्राणियों के आंसू पोंछकर स्वयं को धन्य अनुभव करता है।
Kathit ↔ अकथित
कथित शब्दों की अपेक्षा अकथित मौन कभी-कभी अधिक गहरा संदेश दे जाता है।
अनेक गहरे भाव अकथित रहकर भी आंखों की भाषा से स्वतः व्यक्त हो जाते हैं।
Praakritik ↔ कृत्रिम
प्राकृतिक आपदाओं से बचना मनुष्य के वश में नहीं, किंतु कृत्रिम प्रदूषण को रोका जा सकता है।
कृत्रिम सुगंध कुछ ही देर टिकती है, जबकि प्राकृतिक फूलों की महक वातावरण को महकाए रखती है।
Pakka ↔ कच्चा
पक्के मकान तेज आंधी का सामना कर लेते हैं जबकि कच्चे झोपड़े ढह जाते हैं।
कच्चा घड़ा पानी का भार नहीं सह पाता, भट्ठी में तपकर ही वह पक्का और उपयोगी बनता है।
Kushal ↔ अकुशल
कुशल कारीगर बारीक नक्काशी कर लेता है जबकि अकुशल मजदूर पत्थर भी ठीक से नहीं तराश पाता।
अकुशल हाथों में बहुमूल्य औजार भी नष्ट हो जाते हैं, कुशलता अभ्यास से ही आती है।
Chokha ↔ खोटा
चोखा माल हर कोई खरीदता है, खोटा सिक्का कोई स्वीकार नहीं करता।
खोटा सिक्का बाज़ार में नहीं चलता, उसी प्रकार कपटी व्यक्ति का समाज में आदर नहीं होता।
Khara ↔ खोटा
खरा सोना आग में तपकर भी कुंदन बनता है जबकि खोटा धातु जलकर भस्म हो जाता है।
खोटा सिक्का बाज़ार में नहीं चलता, उसी प्रकार कपटी व्यक्ति का समाज में आदर नहीं होता।
Yathaarth ↔ काल्पनिक
काल्पनिक सपनों में जीने के बजाय यथार्थ जीवन की चुनौतियों का सामना करो।
काल्पनिक दुनिया में विचरने के बजाय कठोर यथार्थ का सामना करना ही बुद्धिमानी है।
Kaalpanik ↔ वास्तविक
उपन्यास की कहानी काल्पनिक होती है, किंतु उसके पात्र वास्तविक जीवन से प्रेरित लगते हैं।
समस्या का वास्तविक कारण जाने बिना उसका स्थायी समाधान खोजना असंभव है।
Adhik ↔ कम
अधिक बोलना मूर्खता की निशानी है, कम और सार्थक बोलना बुद्धिमत्ता है।
कम साधनों में भी संतोषपूर्वक जीवन जीने वाला व्यक्ति सदा सुखी रहता है।
Kam ↔ ज्यादा
कम संसाधनों में भी संतुष्ट रहना ज्यादा पाने की लालसा से श्रेष्ठ है।
आवश्यकता से ज्यादा संग्रह करने की प्रवृत्ति समाज में असंतुलन पैदा करती है।
Mridu ↔ कठोर
मृदु वाणी शत्रु को भी मित्र बना लेती है, जबकि कठोर व्यवहार अपनों को भी दूर कर देता है।
राजा का कठोर दंड देखकर सभासद विस्मित रह गए, किंतु रानी का हृदय अत्यंत कोमल था।
Roopwaan ↔ कुरूप
रूपवान चेहरे से अधिक मूल्यवान सुंदर और पवित्र हृदय होता है।
मन में यदि ईर्ष्या और द्वेष हो तो सुंदर चेहरा भी कुरूप और अप्रिय लगने लगता है।
Karkash ↔ मधुर
कर्कश ध्वनि कानों को चुभती है जबकि मधुर संगीत मन को शांत करता है।
कोयल की मधुर वाणी सबको भाती है जबकि कौवे का कटु स्वर किसी को पसंद नहीं।
Khinna ↔ प्रसन्न
विफलता से खिन्न होने के स्थान पर नए उत्साह से प्रयास करो।
प्रसन्न चित्त व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थिति में भी सकारात्मक मार्ग खोज लेता है।
Kutil ↔ सरल
कुटिल राजनीतिज्ञ अपनी बातों में फंसाते हैं जबकि सरल व्यक्ति सच्चाई बोलता है।
गणित के इस सरल सवाल को उलझाकर जटिल मत बनाओ।
Parush ↔ कोमल
परुष वचन हृदय को छलनी कर देते हैं जबकि कोमल बोल मरहम का काम करते हैं।
फूलों की पंखुड़ियाँ कोमल होती हैं जबकि पर्वत की चट्टानें अत्यंत कठोर।
Sulakshan ↔ कुलक्षण
सुलक्षण बालक परिवार का मान बढ़ाता है।
बचपन के कुलक्षण यदि समय रहते न सुधारे जाएं तो आगे चलकर विनाशकारी बनते हैं।
Kanjoos ↔ उदार
कंजूस व्यक्ति आवश्यकता पड़ने पर भी खर्च नहीं करता।
उदार हृदय वाले लोग सर्वकल्याण सोचते हैं जबकि अनुदार व्यक्ति केवल अपने स्वार्थ तक सीमित रहते हैं।
Kritagya ↔ कृतघ्न
उपकार मानने वाला कृतज्ञ कहलाता है जबकि उपकार भूल जाने वाला कृतघ्न माना जाता है।
कृतघ्न व्यक्ति संकट में सहारा देने वाले उपकारी का भी उपकार भूल जाता है।
Keerti ↔ अपकीर्ति
दानवीर कर्ण की कीर्ति अमर है, दुर्योधन के कुकृत्यों ने उसे अपकीर्ति दी।
कुकर्मों से अर्जित अपकीर्ति कुल की पीढ़ियों तक बदनामी का कारण बन जाती है।
Kraya ↔ विक्रय
व्यापार में क्रय और विक्रय के अंतर से ही लाभ निर्धारित होता है।
बाजार में अच्छी गुणवत्ता की वस्तुओं का विक्रय तेजी से होता है।
Kartavya ↔ अकर्तव्य
संकट के समय देश की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है।
कर्तव्य और अकर्तव्य का भेद समझकर ही धर्मसम्मत जीवन जिया जा सकता है।
Adhikaar ↔ कर्तव्य
अधिकारों की मांग के साथ-साथ कर्तव्यों का निर्वहन भी समान रूप से जरूरी है।
संकट के समय देश की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है।
Karta ↔ कर्म
व्याकरण में क्रिया का प्रभाव कर्ता अथवा कर्म पर पड़ता है।
संसार में कर्ता का मान उसके द्वारा किए गए निष्काम कर्म से ही निर्धारित होता है।
Kureeti ↔ सुरीति
दहेज प्रथा जैसी अमानवीय कुरीति के विरुद्ध समाज के सभी प्रबुद्ध लोगों को आवाज उठानी चाहिए।
अतिथि सत्कार और बड़ों का आदर करना समाज की प्राचीन व कल्याणकारी सुरीति है।
Kuleena ↔ अकुलीन
प्राचीन काल में कुलीन परिवारों के आचार-विचार को समाज में आदर्श माना जाता था।
लोकतंत्र में व्यक्ति की योग्यता मायने रखती है, चाहे वह किसी भी अकुलीन परिवार से क्यों न हो।
Kasbaa ↔ महानगर
हमारा छोटा सा कस्बा चारों ओर खेतों से घिरा हुआ शांत और सुरक्षित इलाका है।
मुंबई और दिल्ली जैसे विशाल महानगर चौबीसों घंटे दौड़ते रहने वाले आर्थिक केंद्र हैं।
Dndaneeya ↔ क्षम्य
पर्यावरण नियमों का उल्लंघन कर कचरा जलाना कानून के तहत एक दंडनीय अपराध है।
अनजाने में हुई छोटी-मोटी मानवीय भूल सदैव क्षम्य मानी जाती है।
Kaaraavaasa ↔ मुक्ति
गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में दोषी पाए जाने पर उसे पांच वर्ष का कठोर कारावास हुआ।
सजा की अवधि पूरी होने के उपरांत बंदी को जेल से सम्मानपूर्वक मुक्ति मिल गई।
Suvyavasthaa ↔ कुव्यवस्था
स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत शहर की यातायात और जल सुव्यवस्था की सर्वत्र सराहना हुई।
अस्पताल में दवाओं की कमी और गंदगी प्रशासन की घोर कुव्यवस्था का जीता-जागता प्रमाण थी।
Sauhaarda ↔ कटुता
ईद और दीवाली पर एक-दूसरे के घर जाकर बधाई देने से समाज में आपसी सौहार्द प्रगाढ़ होता है।
अफवाहों और भड़काऊ भाषणों के कारण दोनों पक्षों के मध्य अविश्वास और कटुता उत्पन्न हो गई।
Shukla Paksha ↔ कृष्ण पक्ष
हिंदू पंचांग में चंद्रमा की कलाओं के आधार पर शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष निर्धारित होते हैं।
कृष्ण पक्ष में रातें क्रमशः अंधेरी होती जाती हैं, जबकि शुक्ल पक्ष में चांदनी बढ़ती है।
Naaisargik ↔ कृत्रिम
कश्मीर की घाटियों में नैसर्गिक सौंदर्य बिखरा पड़ा है, जिसकी तुलना किसी कृत्रिम रचना से नहीं हो सकती।
कृत्रिम सुगंध कुछ ही देर टिकती है, जबकि प्राकृतिक फूलों की महक वातावरण को महकाए रखती है।
Kallol ↔ शांति
पवन के झोंकों से सरिता में कल्लोल होने लगा, जिससे जल की पूर्व शांति भंग हो गई।
भीषण तूफान के थम जाने के बाद फैली गहरी शांति प्रकृति के नवजीवन का संकेत देती है।
Kshitij ↔ केंद्र
क्षितिज पर धरती और आकाश मिलते प्रतीत होते हैं, जबकि अंतरिक्ष का केंद्र अनंत में है।
क्षितिज की अनंत परिधि का संतुलन उसके स्थिर केंद्र पर ही टिका रहता है।
Kuhaasa ↔ स्वच्छ आकाश
पहाड़ी मार्ग पर कुहासा छाने से दृश्यता समाप्त हो गई, जो स्वच्छ आकाश होने पर ही लौटी।
पहाड़ी घाटियों में कुहासा हटने पर नीला स्वच्छ आकाश पर्यटकों का मन मोह लेता है।
Kohra ↔ धूप
सर्दियों की सुबह घना कोहरा छाने से यातायात धीमा हो गया, जो दोपहर की धूप में सामान्य हुआ।
कड़कड़ाती धूप के बाद घने वृक्ष की शीतल छांव पथिक को नवजीवन प्रदान करती है।
Baadal ↔ खुला आसमान
काले बादल हटते ही नीला खुला आसमान चमक उठा और चारों तरफ रोशनी फैल गई।
खगोलीय अवलोकन के लिए खुला आसमान अनिवार्य शर्त है, क्योंकि बादलों में तारे नहीं दिखते।
Kankad ↔ रेत
नदी की तलहटी में भारी कंकड़ नीचे बैठ जाते हैं, जबकि बारीक रेत पानी के साथ बहती है।
रेत पर महल बनाने के बजाय चट्टान जैसी मजबूत नींव पर मकान बनाना बुद्धिमानी है।
Khushi ↔ दुख
सफलता मिलने पर पूरे परिवार में खुशी और उल्लास का माहौल बन गया।
संकट के समय धैर्य बनाए रखने से दुख और निराशा का प्रभाव कम हो जाता है।
Krodh ↔ शांति
अत्यधिक क्रोध मनुष्य के विवेक और निर्णय लेने की क्षमता को नष्ट कर देता है।
विवाद के समय मानसिक शांति बनाए रखना ही सच्ची समझदारी है।
Prasannata ↔ खिन्नता
मित्रों से मिलकर उसके चेहरे पर स्वाभाविक प्रसन्नता झलकने लगी।
असफलता की सूचना पाकर उसके मन में गहरी खिन्नता छा गई।
Karuna ↔ क्रूरता
महात्मा बुद्ध के हृदय में सभी प्राणियों के प्रति अगाध करुणा थी।
युद्ध में दिखाई गई क्रूरता मानवता के माथे पर कलंक बन जाती है।
Kshama ↔ दंड
क्षमा बलवानों का आभूषण है जो शत्रु को भी मित्र बना देती है।
न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोर दंड सुनाया।
Khed ↔ हर्ष
अपनी भूल का अहसास होने पर उसने विनम्रतापूर्वक खेद व्यक्त किया।
प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक मिलने पर विद्यालय में हर्ष छा गया।
Kautuhal ↔ उदासीनता
वैज्ञानिक प्रयोगों के प्रति बच्चों का कौतूहल नई खोजों का बीज बोता है।
सामाजिक बुराइयों के प्रति उदासीनता बरतना नागरिकों को शोभा नहीं देता।
Kritagyata ↔ कृतघ्नता
उपकार करने वाले के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना श्रेष्ठ संस्कारों की निशानी है।
सहायता प्राप्त करके भी उपकार भूल जाना घोर कृतघ्नता है।
Anugrah ↔ कोप
प्रभु के विशेष अनुग्रह से ही यह महान संकट टल सका।
राजा के भयानक कोप से सारा दरबार कांप उठा।
Kripa ↔ अवकृपा
गुरुजनों की कृपा से उसने परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया।
अधिकारी की अवकृपा के कारण योग्य कर्मचारी को पदोन्नति नहीं मिली।
Kalyan ↔ अकल्याण
राजा का मुख्य कर्तव्य अपनी प्रजा के सर्वांगीण कल्याण की चिंता करना है।
दुष्टों की संगति अंततः मनुष्य के अकल्याण का कारण बनती है।
Sumati ↔ कुमति
जहाँ सुमति तहाँ संपति नाना, यह नीतिवचन जीवन का सत्य है।
कुमति के वशीभूत होकर व्यक्ति अपने ही हितैषियों का अपमान कर बैठता है।
Nidar ↔ कातर
वह निडर बालक अंधकार में भी बिना किसी संकोच के आगे बढ़ता गया।
संकट की घड़ी में कातर दृष्टि से देखना कमजोरी की निशानी है।
Bhavuk ↔ कठोरहृदय
दीन-दुखियों की कथा सुनकर भावुक मनुष्य के आँसू निकल आते हैं।
कठोरहृदय व्यक्ति दूसरों के क्रंदन से भी अप्रभावित रहता है।
Kripalu ↔ क्रूर
कृपालु राजा ने गरीब प्रजा के सारे ऋण माफ कर दिए।
क्रूर शासक ने जनता पर भारी कर और यातनाएं लाद दीं।
Prafullit ↔ खिन्न
वर्षा की फुहारें पड़ते ही कृषक का हृदय प्रफुल्लित हो उठा।
फसल खराब होने की आशंका से किसान का मन खिन्न हो गया।
Klesh ↔ शांति
पारिवारिक क्लेश से घर का सारा आनंद नष्ट हो जाता है।
आपसी समझदारी से घर में पुनः सुख और शांति की स्थापना हुई।
Aananddayak ↔ कष्टप्रद
पहाड़ों की ताजी हवा में सैर करना अत्यंत आनंददायक अनुभव है।
भीषण गर्मी में लंबी पैदल यात्रा करना बहुत कष्टप्रद सिद्ध हुआ।
Mridubhashi ↔ कटुभाषी
मृदुभाषी व्यक्ति अपने मधुर वचनों से पराए को भी अपना बना लेता है।
कटुभाषी व्यक्ति से लोग बातचीत करने से कतराते हैं।
Madhurbhashi ↔ कर्कशभाषी
मधुरभाषी वक्ता के भाषण को सभा के सभी लोग मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे।
कर्कशभाषी नेता के चिल्लाने से सभा में असहजता फैल गई।
Krish ↔ पुष्ट
लंबी बीमारी के कारण उसका शरीर कृश और दुर्बल दिखाई देने लगा था।
संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से पहलवान का शरीर गठीला और पुष्ट बन गया।
Ksheenkaay ↔ हृष्टपुष्ट
कुपोषण के शिकार बच्चे क्षीणकाय होकर चलने-फिरने में भी कठिनाई महसूस करते हैं।
हृष्टपुष्ट शरीर वाले युवाओं ने मिट्टी के अखाड़े में कुश्ती का शानदार प्रदर्शन किया।
Karnapriya ↔ कर्णकटु
बांसुरी की कर्णप्रिय धुन सुनकर कानों को अपार शांति का अनुभव हुआ।
वाहनों के हॉर्न का कर्णकटु शोर कानों के पर्दे को नुकसान पहुँचा सकता है।
Karatala ↔ पादतल
उत्साहवर्धन और शास्त्रीय ताल वादन में करतल ध्वनि अर्थात तालियों की गूंज सुनाई देती है।
प्राकृतिक एक्यूप्रेशर चिकित्सा में पादतल के विशेष बिंदुओं पर दबाव डालकर उपचार किया जाता है।
Pushtaanga ↔ कृशांग
नियमित व्यायाम और पौष्टिक आहार के सेवन से पहलवान का शरीर पुष्टांग और गठीला बन गया।
दीर्घकालिक कुपोषण और बीमारी के कारण रोगी अत्यंत कृशांग और अशक्त दिखाई देने लगा।
Sthoolakaaya ↔ कृशकाय
अत्यधिक वसायुक्त भोजन और निष्क्रिय दिनचर्या से व्यक्ति स्थूलकाय हो जाता है, जिससे गतिशीलता घटती है।
लंबी तपस्या और उपवास के कारण संन्यासी का शरीर अत्यंत कृशकाय परंतु तेजस्वी हो गया था।
Kubadaa ↔ ऋजुकाय
अत्यधिक भार ढोने और रीढ़ की हड्डी के विकार से वह वृद्ध व्यक्ति कुबड़ा होकर चलने लगा।
योगासनों के नियमित अभ्यास से साधक का शरीर बुढ़ापे में भी सीधा और ऋजुकाय बना रहता है।
Khalvaata ↔ सकेश
उम्र ढलने के साथ सिर के बाल झड़ने से कई व्यक्तियों का मस्तक खल्वाट हो जाता है।
आयुर्वेदिक तेलों और उचित पोषण से सिर का भाग घने बालों से युक्त और सकेश बना रहता है।
Kaanaa ↔ सनेत्र
दुर्घटना में एक आंख की रोशनी खो देने से वह व्यक्ति काणा हो गया था।
स्वस्थ खानपान और नेत्र व्यायाम से दोनों आंखों की दृष्टि सनेत्र और स्पष्ट बनी रहती है।
Satsang ↔ कुसंग
ज्ञानी संतों का सत्संग मनुष्य के विकारों को दूर कर जीवन को आलोकित करता है।
कुसंग में पड़कर अच्छे संस्कारों वाला युवक भी धीरे-धीरे नशीले पदार्थों की गिरफ्त में आ गया।
Karm ↔ अकर्म
गीता में श्रीकृष्ण ने फल की चिंता किए बिना केवल निष्काम कर्म करने का संदेश दिया है।
कर्तव्य से विमुख होकर अकर्म की स्थिति में बैठना कायरता और पतन का लक्षण है।
Kartavyanishth ↔ कर्तव्यच्युत
कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मी ने भीषण बर्फबारी में भी अपनी चौकी नहीं छोड़ी।
कर्तव्यच्युत कर्मचारियों के कारण कार्यालय में जनता के आवश्यक कार्य लटकते रहे।
Supaatra ↔ कुपात्र
सुपात्र व्यक्ति को दिया गया दान विद्या और समाज-कल्याण के काम आता है।
कुपात्र को धन या अधिकार सौंपने से समाज में अराजकता और अव्यवस्था फैलती है।
Suyog ↔ कुयोग
विद्वानों के सान्निध्य में ज्ञान प्राप्त करने का सुयोग बड़े भाग्य से मिलता है।
यात्रा के समय कुयोग बनने से उनका सारा कार्यक्रम अस्त-व्यस्त हो गया।
Sushasan ↔ कुशासन
सुशासन की स्थापना तभी संभव है जब शासन में पारदर्शिता और जन-सुनवाई हो।
कुशासन और भ्रष्टाचार से त्रस्त होकर जनता ने अत्याचारी शासक को सत्ता से हटा दिया।
Sadmaarg ↔ कुमार्ग
गुरुजनों का मार्गदर्शन सदैव युवाओं को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
कुमार्ग पर चलकर कमाया गया नाम और शोहरत बहुत शीघ्र धूल में मिल जाती है।
Suneeti ↔ कुनीति
चाणक्य की सुनीति के आधार पर मौर्य साम्राज्य ने अद्वितीय वैभव प्राप्त किया।
कुनीति और षड्यंत्र के बल पर सत्ता हथियाने वाले शासक अधिक समय तक नहीं टिक पाते।
Paavan ↔ कलुषित
गंगा के पावन जल और संतों की वाणी ने संपूर्ण वातावरण को पवित्र कर दिया।
कुत्सित विचारों से कलुषित मन कभी ईश्वर की सच्ची भक्ति नहीं कर सकता।
Sukarmi ↔ कुकर्मी
सुकर्मी व्यक्ति अपने शुभ कर्मों से समाज के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करता है।
कुकर्मी अपराधी को अंततः न्यायालय द्वारा कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।
Nishkapat ↔ कपटी
निष्कपट व्यक्ति के मन में जो बात होती है, वही उसकी वाणी पर भी होती है।
कपटी व्यक्ति मीठी बातें बोलकर दूसरों को अपने जाल में फंसा लेता है।
Kartavyaparaayan ↔ कामचोर
कर्तव्यपरायण शिक्षक ने अवकाश के दिनों में भी विद्यार्थियों को अतिरिक्त पाठ पढ़ाया।
कामचोर कर्मचारी सदा काम से बचने के बहाने खोजता रहता है।
Karmathata ↔ अकर्मण्यता
किसान की कर्मठता के कारण ही बंजर धरती पर भी लहलहाती फसलें तैयार हो गईं।
अकर्मण्यता और आलस्य के कारण वह समृद्ध विरासत को भी सहेज नहीं सका।
Karmnishth ↔ अकर्मण्य
कर्मनिष्ठ कार्यकर्ता ने बिना किसी शिकायत के दिन-रात समाजसेवा का कार्य किया।
अकर्मण्य व्यक्ति केवल भाग्य को कोसता रहता है और स्वयं कोई प्रयास नहीं करता।
Kartavyaparaayanata ↔ कर्तव्यहीनता
सैनिकों की कर्तव्यपरायणता देश की संप्रभुता और सीमाओं की सबसे बड़ी रक्षक है।
प्रशासनिक कर्तव्यहीनता के कारण बाढ़ पीड़ितों तक समय पर राहत सामग्री नहीं पहुँच सकी।
Pratishthaavaan ↔ कलंकित
प्रतिष्ठावान उद्योगपति ने शहर में निःशुल्क अस्पताल का निर्माण करवा कर ख्याति पाई।
घूसखोरी के आरोप सिद्ध होने पर पूर्व मंत्री का नाम सदा के लिए कलंकित हो गया।
Kutta ↔ कुतिया
पालतू कुत्ता रात भर जागकर घर की रखवाली करता है।
कुतिया अपने पिल्लों को सर्दी से बचाने के लिए पुआल में समेटे बैठी थी।
Cheel ↔ कबूतर
आकाश में मंडराती चील किसी भी छोटे जीव पर झपट सकती है।
कबूतर शांति का प्रतीक बनकर छतों पर दाना चुगता है।
Keet ↔ पतंग
मिट्टी में रहने वाला कीट पत्तियों को कुतर कर पोषण पाता है।
पतंग रात के समय जलती हुई लौ के चारों ओर मंडराता है।
Khatta ↔ मधुर
कच्चे आम का स्वाद खट्टा होता है जो चटनी बनाने के काम आता है।
पके हुए पपीते का स्वाद अत्यंत मधुर और रुचिकर होता है।
Supaachya-alt ↔ कुपाच्य
उबले हुए सेब और छाछ पेट के लिए सुपाच्य आहार हैं।
सड़क किनारे बिकने वाला तला-भुना जंक फूड कुपाच्य होकर पाचन तंत्र बिगाड़ता है।
Kadwa ↔ मधुर
नीम की पत्तियों और करेले का रस स्वाद में कड़वा किंतु रक्त-शोधक होता है।
गुलाब जामुन की चाशनी का स्वाद मधुर और मन को तृप्त करने वाला होता है।
Kasaila ↔ मधुर
कच्चे आंवले और हरड़ को चबाने पर पहला स्वाद कसैला महसूस होता है।
गन्ने के ताजे रस का स्वाद अत्यंत मधुर और शीतलता प्रदान करने वाला होता है।
Khaara ↔ मधुर
समुद्र का पानी अत्यधिक खारा होने के कारण पीने योग्य नहीं होता।
पहाड़ी झरने का मधुर और शीतल जल थके यात्रियों की प्यास बुझाता है।
Khaadya ↔ अखाद्य
खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने छापे मारे।
प्लास्टिक और रासायनिक रंग अखाद्य वस्तुएं हैं जिन्हें भोजन में नहीं मिलाना चाहिए।
Supeya ↔ कुपेय
हर्बल काढ़ा और छाछ शरीर को तरोताजा रखने वाले सुपेय हैं।
केमिकल युक्त कृत्रिम रंगीन शरबत कुपेय हैं जो बच्चों के गले को खराब करते हैं।
Kurkura ↔ सीला
गरमागरम समोसे का ऊपरी आवरण एकदम कुरकुरा और खस्ता था।
बरसात की नमी के कारण डिब्बे में रखा बिस्कुट सीला और बेमजा हो गया।
Khasta ↔ कड़ा
कारीगर ने हलवाई की दुकान पर खस्ता कचौड़ियाँ तैयार कीं।
अधिक सेंकने के कारण तवे की रोटी कड़ा होकर चबाने में मुश्किल हो गई।
Bhuna ↔ कच्चा
अलाव की राख में भुना हुआ भुट्टा गरमागरम खाने में बड़ा स्वादिष्ट लगता है।
कच्चा भुट्टा कड़ा होता है और बिना पकाए नहीं खाया जाता।
Khataas ↔ मिठास
नींबू के रस की तीखी खटास ने शिकंजी को ताजगी भरा बना दिया।
पके हुए आम की स्वाभाविक मिठास सबको आकर्षित करती है।
Kadwaahat ↔ मिठास
काली कॉफी की कड़वाहट कम करने के लिए उसने उसमें थोड़ा दूध मिलाया।
शहद की प्राकृतिक मिठास गले की खराश को शांत कर देती है।
Kshudha ↔ तृप्ति
कठोर श्रम के बाद क्षुधा शांत करने के लिए उसने गरम रोटियाँ खाईं।
संतुष्ट होकर थाली हटाने पर चेहरे पर पूर्ण तृप्ति के भाव झलक रहे थे।
Maadhurya ↔ कटुता
दूध की रबड़ी में केसर का माधुर्य घुलमिल गया था।
सड़े हुए तेल के कारण पूरियों में अजीब कटुता आ गई थी।
Kashaaya ↔ मधुर
त्रिफला चूर्ण का स्वाद कषाय होता है जो आंतों को साफ करता है।
मिश्री का स्वाद मधुर होता है जो पित्त को शांत करता है।
Amla ↔ क्षार
सिरके और नीबू में प्राकृतिक अम्ल पाया जाता है जो खट्टापन देता है।
बेकिंग सोडा में क्षार होता है जो ढोकले को फूलाता है।
Aamleeya ↔ क्षारीय
अधिक कोला और सोड़ा पीने से पेट में अम्लीय प्रभाव बढ़ जाता है।
खीरे का रस और नारियल पानी पेट को क्षारीय आधार देकर एसिडिटी घटाते हैं।
Chhaunk ↔ कच्चा
घी और जीरे के छौंक से अरहर की दाल में जान आ गई।
बिना पकाए कच्चा भोजन हर किसी के हाजमे को अनुकूल नहीं बैठता।
Khameeri ↔ अखमीरी
खमीरी नान तंदूर में फूलकर स्पंज की तरह मुलायम बन जाती है।
रोजमर्रा की रोटी अखमीरी आटे से तवे पर सेकी जाती है।
Kuposhan ↔ सुपोषण
गरीबी और अभाव के कारण बच्चे कुपोषण का शिकार होकर दुर्बल हो जाते हैं।
आंगनवाड़ी में दिए जा रहे पौष्टिक आहार से बच्चों में सुपोषण का स्तर बढ़ा है।
Suswaad ↔ कुस्वाद
पके हुए आम के पने का सुस्वाद हर किसी को ताजगी से भर देता है।
सड़ी हुई दाल का कुस्वाद आते ही उसने तुरंत मुंह धोया।
Subhojan ↔ कुभोजन
हरी सब्जियों, रोटी और छाछ का सुभोजन दीर्घायु प्रदान करता है।
बासी और अस्वच्छ स्थान पर बना कुभोजन शरीर को रोगों का घर बना देता है।
Dhoopit ↔ कच्चा
कोयले के धुएं से धूपित रायता एक विशेष सोंधा स्वाद देता है।
कच्चा दूध बिना उबाले पीने से पेट में जीवाणु जा सकते हैं।
Kasailapan ↔ मिठास
कच्चे जामुन खाने पर मुंह में हल्का कसैलापन महसूस होता है।
पके हुए खरबूजे की मिठास गर्मी में सबको भाती है।
Soup ↔ कड़ा
सर्दियों में टमाटर का गरमागरम सूप पीना स्वास्थ्यवर्धक होता है।
दांतों से चबाने के लिए कड़ा भुना हुआ चना ही पसंद किया जाता है।
Vyanjan ↔ कच्चा-अन्न
दावत में छप्पन प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन परोसे गए थे।
गोदाम में रखा कच्चा-अन्न पकाने के बाद ही खाने योग्य बनता है।
Madhur-ras ↔ कटुरस
आयुर्वेद के अनुसार मधुररस शरीर को पोषण और बल प्रदान करता है।
नीम और कुटकी में पाया जाने वाला कटुरस खून को साफ करता है।
Supakwata ↔ कच्चापन
वृक्ष पर प्राकृतिक सुपक्वता पाने वाला अमरूद मीठा और मुलायम होता है।
जल्दबाजी में तोड़े गए फल का कच्चापन स्वाद को किरकिरा कर देता है।
Jala ↔ कच्चा
आंच तेज होने के कारण तवे पर पड़ा पराठा एक तरफ से जला निकला।
धीमी आंच पर कम सेकने से पूरी अंदर से कच्ची रह गई।
Kreta ↔ विक्रेता
भूमि रजिस्ट्री के समय क्रेता ने समस्त राशि का भुगतान चेक द्वारा किया।
विक्रेता ने आवश्यक कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करके मालिकाना हक सौंपा।
Saujanya ↔ कटुता
पड़ोसियों के बीच का सौजन्य त्योहारों की खुशियों को कई गुना बढ़ा देता है।
आपसी कटुता को त्याग कर ही समाज में शांति और सहयोग का निर्माण हो सकता है।
Jyeshtha ↔ कनिष्ठ
परिवार में ज्येष्ठ सदस्य की राय को सर्वोच्च सम्मान और प्राथमिकता दी जाती है।
कनिष्ठ कर्मचारियों के उत्साह और नई सोच को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
Varishtha ↔ कनिष्ठ
वरिष्ठ अधिकारियों का अनुभव कठिन प्रशासनिक चुनौतियों को सुलझाने में काम आता है।
कनिष्ठ सहायकों ने आंकड़ों का संकलन करके रिपोर्ट समय पर पूरी की।
Kishoree ↔ किशोर
किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए सरकार ने विशेष योजनाएं बनाई हैं।
किशोर अवस्था में सही मार्गदर्शन मिलने पर बालक उत्तम चरित्रवान बनता है।
Kunwaara ↔ विवाहित
कुँवारा लड़का नौकरी लगने के बाद ही विवाह बंधन में बंधना चाहता था।
विवाहित पुरुष अपने परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी निष्ठा से उठाता है।
Kutumb ↔ एकांत
बड़े कुटुंब में रहकर बच्चे मिल-बांटकर खाने और सहयोग के संस्कार सीखते हैं।
भीड़-भाड़ से दूर एकांत में रहने पर व्यक्ति आत्मचिंतन कर पाता है।
Sadmitra ↔ कुमित्र
सद्मित्र विपत्ति के समय ढाल बनकर रक्षा करता है और सही सलाह देता है।
कुमित्र केवल मौज-मस्ती के समय साथ रहता है और संकट आते ही किनारा कर लेता है।
Kutumbi ↔ अजनबी
संकट के समय सभी कुटुंबी एक छत के नीचे जमा होकर सहायता करते हैं।
अजनबी व्यक्ति से कोई भी निजी जानकारी साझा करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।
Grihaswaami ↔ किरायेदार
गृहस्वामी ने मकान की रंगाई-पुताई करवाकर उसे नया रूप दिया।
किरायेदार ने प्रत्येक माह की पहली तारीख को ईमानदारी से किराया चुका दिया।
Niyokta ↔ कर्मचारी
एक सहृदय नियोक्ता अपने कर्मचारियों के कल्याण और स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखता है।
परिश्रमी कर्मचारी अपनी लगन और मेहनत से कंपनी को सफलता की नई ऊंचाइयों पर ले गया।
Kutumbjan ↔ गैर
विवाह के निमंत्रण पर सभी कुटुंबजन एकत्र होकर उत्सव का आनंद ले रहे थे।
मुश्किल वक्त में अक्सर गैर भी परिजनों से बढ़कर सहारा बन जाते हैं।
Keemti ↔ कम-मूल्य
दादी माँ का कीमती हार तिजोरी में सुरक्षित रखा गया है।
दैनिक उपयोग की वस्तुएं कम-मूल्य वाली होने से आसानी से खरीदी जा सकती हैं।
Bahumoolya ↔ कौड़ी-का
संग्रहालय में प्राचीन राजाओं के बहुमूल्य रत्न प्रदर्शित हैं।
धोखेबाज व्यापारी ने खरीदार को कौड़ी-का नकली पत्थर थमा दिया।
Dhanaadhya ↔ कंगाल
धनाढ्य सेठ ने नगर में विशाल चिकित्सालय का निर्माण करवाया।
जुआ खेलने की लत ने अमीर व्यापारी को एक ही वर्ष में कंगाल बना दिया।
Kuber ↔ दरिद्र
व्यापार में अप्रत्याशित सफलता से वह रातों-रात कुबेर बन बैठा।
सच्चे संत दरिद्र की झोपड़ी में भी प्रेम से भोजन ग्रहण करते हैं।
Kangaali ↔ खुशहाली
लगातार सूखा पड़ने से किसानों के घर में कंगाली छा गई।
अच्छी पैदावार और उचित मूल्य मिलने से संपूर्ण अंचल में खुशहाली लौट आई।
Saamant ↔ किसान
मध्यकाल में सामंत प्रजा पर मनमाने कर लगाकर अपना खजाना भरते थे।
देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ धरती पुत्र किसान है जो अन्न उपजाता है।
Kifaayat ↔ अपव्यय
गृहस्थी के प्रबंधन में किफायत बरतने से संकट के समय सहायता मिलती है।
सार्वजनिक धन का अपव्यय किसी भी लोक-कल्याणकारी सरकार के लिए अनुचित है।
Kifaayati ↔ खर्चीला
सार्वजनिक बस सेवा आम नागरिकों के लिए अत्यंत किफायती माध्यम है।
निजी विमान से यात्रा करना बहुत खर्चीला और विलासितापूर्ण शौक है।
Kamaai ↔ खर्च
कड़ी धूप में पसीना बहाकर उसने महीने भर की कमाई जुटाई।
दवाइयों और इलाज का खर्च अचानक बढ़ जाने से बजट बिगड़ गया।
Kamaaoo ↔ निठल्ला
परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य होने के नाते उस पर भारी जिम्मेदारी है।
दिन भर ताश खेलकर समय बर्बाद करने वाला निठल्ला व्यक्ति समाज में मान नहीं पाता।
Mahaajan ↔ कर्जदार
पुराने समय में महाजन ऊंचे ब्याज पर किसानों को धन उधार देते थे।
कर्जदार ने फसल बिकते ही अपना पुराना हिसाब चुकता कर दिया।
Poonji ↔ कर्ज
व्यवसाय शुरू करने के लिए उसने अपनी वर्षों की संचित पूँजी लगाई।
उच्च ब्याज पर लिया गया भारी कर्ज चुकाने में उसकी सारी आय चली जाती है।
Kardaata ↔ करचोर
ईमानदार करदाता के पैसों से ही देश की सड़कों और अस्पतालों का निर्माण होता है।
आय छुपाने वाले करचोर व्यापारियों पर आयकर विभाग ने छापा मारा।
Karmukti ↔ कराधान
कृषि आय पर सरकार द्वारा दी गई करमुक्ति से छोटे किसानों को राहत मिलती है।
विलासिता की वस्तुओं पर भारी कराधान लागू करके राजस्व जुटाया जाता है।
Karvanchana ↔ करअनुपालन
विदेशों में कालाधन जमा करके करवंचना करना गंभीर अपराध माना जाता है।
सच्चे देशभक्त समय पर करअनुपालन सुनिश्चित करके राष्ट्र-निर्माण में सहयोग करते हैं।
Kist ↔ एकमुश्त
कार ऋण की मासिक किस्त बैंक खाते से स्वतः कट जाती है।
लॉटरी जीतने पर उसे पूरी धनराशि एकमुश्त चेक द्वारा प्राप्त हुई।
Bhatta ↔ कटौती
कर्मचारियों को महंगाई से निपटने के लिए अतिरिक्त यात्रा भत्ता दिया जाता है।
भविष्य निधि के नाम पर वेतन से प्रतिमाह अनिवार्य कटौती की जाती है।
Thok ↔ खुदरा
थोक व्यापारी बड़े ट्रकों में सीधे कारखाने से माल मंगवाते हैं।
खुदरा दुकानदार मोहल्लों में ग्राहकों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में वस्तुएं बेचते हैं।
Kaalaadhan ↔ सफेदधन
कर न चुकाकर छिपाया गया कालाधन देश की अर्थव्यवस्था को खोखला करता है।
ईमानदारी से अर्जित और कर-चुकाया सफेदधन व्यक्ति को निश्चिंतता प्रदान करता है।
Kaalaabaajaari ↔ उचित-दर
संकट के समय दवाओं की कालाबजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
सहकारी समिति उचित-दर पर नागरिकों को अनिवार्य सामग्री उपलब्ध कराती है।
Jamaakhori ↔ खुला-बाजार
अनाज की कृत्रिम कमी पैदा करने के लिए व्यापारियों ने जमाखोरी शुरू कर दी।
खुला-बाजार होने के कारण सभी खरीदारों को बिना किसी बाधा के माल मिल रहा है।
Bikree ↔ खरीद
त्योहारी सीजन में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की बिक्री में भारी इजाफा हुआ।
कच्चे माल की समय पर खरीद न होने से उत्पादन कुछ दिनों के लिए रुक गया।
Sikka ↔ कागजी-मुद्रा
पुरातात्विक खुदाई में गुप्त काल का सोने का प्राचीन सिक्का प्राप्त हुआ।
आधुनिक अर्थव्यवस्था का अधिकांश नकद लेन-देन कागजी-मुद्रा द्वारा संपन्न होता है।
Ratna ↔ कंकर
पारखी जौहरी ने धूल में पड़े असली रत्न को तुरंत पहचान लिया।
सड़क निर्माण के लिए मजदूरों ने ढेर सारे कंकर बिछाए।
Heera ↔ कांच
हीरा अपनी कठोरता और अद्वितीय चमक के लिए संसार भर में प्रसिद्ध है।
चमकदार होने के बावजूद कांच कभी हीरे की बराबरी नहीं कर सकता।
Dhanvaan ↔ कंगाल
धनवान व्यक्ति यदि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझे तो कई बुराइयां मिट सकती हैं।
व्यापार में धोखाधड़ी का शिकार होकर वह देखते ही देखते कंगाल हो गया।
Khajaana ↔ खाली-तिजोरी
पुरातत्वविदों को किले के तहखाने में सोने के सिक्कों से भरा खजाना मिला।
युद्ध के निरंतर खर्चों ने राजशाही की खाली-तिजोरी को दुनिया के सामने उजागर कर दिया।
Sikke ↔ खोटे-सिक्के
टक्साल से जारी किए गए नए तांबे और निकल के सिक्के बाजार में आ गए।
धोखेबाजों द्वारा फैलाए गए खोटे-सिक्के पकड़ने के लिए पुलिस ने अभियान चलाया।
Khara-sona ↔ खोटा-सिक्का
कठिन परिस्थितियों की अग्नि-परीक्षा में तपकर ही खरा-सोना चमकता है।
विपत्ति के समय कपटी व्यक्ति खोटा-सिक्का साबित हुआ और किसी काम न आया।
Karyogya ↔ करमुक्त
वार्षिक सीमा से अधिक अर्जित वेतन करयोग्य आय की श्रेणी में शामिल होता है।
कृषि से होने वाली आय हमारे देश में पूरी तरह करमुक्त रखी गई है।
Dhankuber ↔ कंगाल
विशाल बहुराष्ट्रीय कंपनियों का स्वामी नगर का सबसे बड़ा धनकुबेर माना जाता है।
सट्टेबाजी के दलदल में फंसकर वह धनकुबेर से कंगाल बन गया।
Mehnatee ↔ काहिल
मेहनती मजदूर ने सूर्यास्त तक सारा भारी सामान सुरक्षित उतार दिया।
काहिल व्यक्ति काम से बचने के लिए सदैव झूठे बहाने बनाता रहता है।
Kaaryarat ↔ सेवानिवृत्त
वह पिछले बीस वर्षों से इस प्रतिष्ठित संस्थान में सफलतापूर्वक कार्यरत है।
साठ वर्ष की आयु पूर्ण होने पर वरिष्ठ अधिकारी ससम्मान सेवानिवृत्त हो गए।
Kaamgaar ↔ निठल्ला
कारखाने का हर कामगार अपने कार्य को पूरी निष्ठा और तत्परता से पूरा करता है।
दिन भर चौराहे पर समय गंवाने वाले निठल्ले व्यक्ति को कोई गंभीरता से नहीं लेता।
Kaareegar ↔ नौसिखिया
अनुभवी कारीगर ने पुरानी घड़ी के बारीक पुर्जों को कुछ ही मिनटों में ठीक कर दिया।
नौसिखिया चालक को अभी व्यस्त मार्गों पर वाहन चलाने का अनुभव नहीं है।
Karmasheelta ↔ अकर्मण्यता
जापान के नागरिकों की निरंतर कर्मशीलता ने युद्ध के बाद देश को समृद्ध बनाया।
अकर्मण्यता किसी भी समाज को पतन और पराधीनता के गर्त में धकेल देती है।
Kaaryakushal ↔ कार्यअक्षम
कार्यकुशल प्रबंधक हर परियोजना को समय सीमा से पूर्व ही पूर्ण करवा लेता है।
कार्यअक्षम कर्मियों को पुनः बुनियादी प्रशिक्षण प्रदान करने का निर्णय लिया गया।
Kaaryadakshata ↔ कार्यअक्षमता
कंप्यूटर तकनीक के उपयोग से कार्यालयीन कार्यदक्षता में भारी वृद्धि हुई।
संसाधनों की कमी और कार्यअक्षमता के कारण उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त न हो सका।
Prabandhan ↔ कुप्रबंधन
कुशल प्रबंधन के कारण घाटे में चल रही कंपनी कुछ ही वर्षों में मुनाफे में आ गई।
वित्तीय कुप्रबंधन ने एक फलते-फूलते अंतरराष्ट्रीय बैंक को दिवालिया बना दिया।
Suprabandh ↔ कुप्रबंध
मेले में लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बावजूद पुलिस के सुप्रबंध से कोई अनहोनी नहीं हुई।
हवाई अड्डे पर कुप्रबंध के चलते यात्रियों को घंटों तक अपनी उड़ानों की प्रतीक्षा करनी पड़ी।
Kaaryaanvayan ↔ स्थगन
नीतियों का कागजों से धरातल पर सफल कार्यान्वयन ही लोकतंत्र की वास्तविक विजय है।
बजट की कमी के कारण महत्वपूर्ण सड़क निर्माण योजना का अनिश्चितकाल के लिए स्थगन हो गया।
Kritakaarya ↔ अकृतकार्य
कठिन अभियान को सफलतापूर्वक पूरा करके कृतकार्य सैनिक गर्व से लौटे।
योजना के अभाव में अकृतकार्य दल को खाली हाथ वापस आना पड़ा।
Kaaragar ↔ बेकार
बुखार के उपचार के लिए यह पारंपरिक घरेलू औषधि अत्यंत कारगर सिद्ध हुई।
घटिया सामग्री से तैयार किया गया औजार कुछ ही दिनों में बेकार साबित हुआ।
Aklaant ↔ क्लांत
अक्लांत परिश्रमी व्यक्ति लक्ष्य प्राप्ति तक कभी रुकने का नाम नहीं लेता।
लंबी दौड़ पूरी करने के बाद धावक अत्यंत क्लांत अवस्था में जमीन पर बैठ गया।
Kaaryabhaar ↔ अवकाश
नए पद पर पदोन्नत होते ही अधिकारी पर भारी कार्यभार आ गया।
साल भर की निरंतर व्यस्तता के बाद कर्मचारियों को ग्रीष्मकालीन अवकाश मिला।
Kaaryakaal ↔ पदमुक्ति
राष्ट्रपति का कार्यकाल संविधान के अनुसार पांच वर्षों के लिए निर्धारित है।
जांच आयोग की रिपोर्ट आने के बाद भ्रष्ट अधिकारी की तत्काल पदमुक्ति कर दी गई।
Kaaryadivas ↔ छुट्टी
बैंक सप्ताह में पांच कार्यदिवस ग्राहकों की सेवा के लिए खुले रहते हैं।
राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर सभी शैक्षणिक संस्थानों में सार्वजनिक छुट्टी घोषित की गई।
Kaaryaavadhi ↔ विश्रामकाल
कारखाने में कर्मचारियों की दैनिक कार्यावधि आठ घंटे तय की गई है।
दोपहर में आधे घंटे का विश्रामकाल मिलने से श्रमिकों की थकान दूर हो जाती है।
Karmaveer ↔ वाकवीर
कर्मवीर मनुष्य मौन रहकर काम करता है और उसकी सफलता स्वयं बोलती है।
मंच से बड़ी-बड़ी बातें करने वाला वाकवीर जमीन पर कोई ठोस काम नहीं करता।
Karmath ↔ बातूनी
कर्मठ समाजसेवियों ने महामारी के समय दिन-रात पीड़ितों की सेवा की।
बातूनी लोग केवल चर्चाएं करते रहते हैं किंतु काम करने का समय आने पर भाग जाते हैं।
Kriyaasheel ↔ सुस्त
सदा क्रियाशील रहने वाला व्यक्ति वृद्धावस्था में भी स्वस्थ और प्रसन्न रहता है।
सुस्त स्वभाव के कारण वह दिन भर बिस्तर पर ही पड़ा रहता है।
Kriyaasheelta ↔ जड़ता
प्रकृति की निरंतर क्रियाशीलता हमें बिना थके आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
मानसिक जड़ता त्यागकर ही समाज नए वैज्ञानिक विचारों को स्वीकार कर सकता है।
Karmaparaayan ↔ कर्तव्यविमुख
कर्मपरायण सैनिक सीमा पर विषम परिस्थितियों में भी अपने मोर्चे पर डटे रहते हैं।
संकट के समय कर्तव्यविमुख होकर भाग जाने वाले अधिकारी को बर्खास्त कर दिया गया।
Kartavyanishtha ↔ कर्तव्यहीनता
पुलिस अधीक्षक की अद्भुत कर्तव्यनिष्ठा के कारण जिले में कानून व्यवस्था मजबूत हुई।
ड्यूटी के दौरान सोने वाले गार्ड को कर्तव्यहीनता के आरोप में निलंबित किया गया।
Kaamchor ↔ कर्मनिष्ठ
कामचोर व्यक्ति काम के समय बहाने बनाकर छुपने की कोशिश करता है।
कर्मनिष्ठ वैज्ञानिक ने दिन-रात प्रयोगशाला में रहकर नई वैक्सीन तैयार की।
Kaaryanishtha ↔ कामचोरी
कर्मचारियों की उच्च कार्यनिष्ठा ने कंपनी को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित किया।
सरकारी दफ्तरों में कामचोरी की प्रवृत्ति से आम नागरिकों को भारी परेशानी होती है।
Kaaryaarambh ↔ कार्यावसान
शुभ मुहूर्त में भूमि-पूजन के साथ विशाल अस्पताल निर्माण का कार्यारंभ हुआ।
समारोह के कार्यावसान पर सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।
Karmakshetra ↔ विश्रामस्थल
मानव जीवन एक कर्मक्षेत्र है जहाँ हर व्यक्ति को अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है।
तीर्थयात्रा की समाप्ति पर यात्रियों ने विश्रामस्थल में रात्रि बिताई।
Karmayogee ↔ भोगवादी
गीता में श्रीकृष्ण ने निष्काम कर्मयोगी बनने का अमर उपदेश दिया है।
भोगवादी व्यक्ति केवल क्षणिक शारीरिक सुखों के पीछे भागता रहता है।
Kaaryavaahee ↔ उदासीनता
शिकायत मिलते ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दोषी फैक्ट्री पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की।
प्रशासन की उदासीनता के कारण सड़क के गड्ढे महीनों तक नहीं भरे गए।
Kaaryaanubhav ↔ अनभिज्ञता
दस वर्षों के कार्यानुभव के आधार पर उन्हें इस विशाल परियोजना का प्रमुख बनाया गया।
नियमों के प्रति अनभिज्ञता के कारण नए कर्मचारी से फॉर्म भरने में त्रुटि हो गई।
Kaaryaadesh ↔ कार्यमुक्ति
विभाग ने संवेदक को पुल निर्माण का औपचारिक कार्यादेश जारी कर दिया।
परियोजना सफलतापूर्वक पूरी होने पर तकनीकी विशेषज्ञों को कार्यमुक्ति दे दी गई।
Kartavyabodh ↔ लापरवाही
डॉक्टर ने गहरे कर्तव्यबोध से प्रेरित होकर आधी रात को आपात ऑपरेशन किया।
चिकित्सक की तनिक सी लापरवाही मरीज के जीवन को संकट में डाल सकती है।
Kaaryakushalta ↔ अक्षमता
कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए नियमित कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं।
नेतृत्व की अक्षमता के चलते कंपनी घाटे से उबरने में विफल रही।
Kaaryapranaalee ↔ अव्यवस्था
पारदर्शी कार्यप्रणाली अपनाने से कार्यालय में भ्रष्टाचार समाप्त हो गया।
अव्यवस्था के चलते अस्पताल में मरीजों को घंटों कतार में खड़े रहना पड़ा।
Kaaryaadhyaksh ↔ सहायक
कार्याध्यक्ष ने पूरी टीम को समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित करके सौंपे।
सहायक ने आवश्यक दस्तावेज और रिपोर्ट तैयार करके तुरंत प्रस्तुत की।
Karmaleen ↔ उदासीन
कर्मलीन वैज्ञानिक चौबीसों घंटे शोध प्रयोगशाला में अनुसंधान में जुटे रहे।
कंपनी के संकट के प्रति उदासीन कर्मचारियों को चेतावनी जारी की गई।
Kaaryadaksh ↔ अयोग्य
कार्यदक्ष अभियंता ने मशीन की खराबी को तुरंत पहचानकर ठीक कर दिया।
अयोग्य कर्मियों के कारण महत्वपूर्ण परियोजना समय पर पूरी न हो सकी।
Kaaryatatpar ↔ ढीला-ढाला
कार्यतत्पर सिपाही ने संकेत मिलते ही त्वरित कार्यवाही की।
ढीला-ढाला रवैया अपनाने वाले कर्मचारियों को कार्यालय से चेतावनी पत्र दिया गया।
Kartavyapaalan ↔ कर्तव्यभंग
डॉक्टरों द्वारा निष्ठापूर्वक कर्तव्यपालन से कई गंभीर मरीजों की जान बच सकी।
ड्यूटी से बिना बताए गायब रहना स्पष्ट रूप से कर्तव्यभंग की श्रेणी में आता है।
Kaalajayee ↔ क्षणभंगुर
तुलसीदास रचित रामचरितमानस एक कालजयी महाकाव्य है जो सदियों से पूज्य है।
पानी का बुलबुला क्षणभंगुर होता है जो हवा के तनिक से झोंके से फूट जाता है।
Kaalaateet ↔ कालबद्ध
उपनिषदों का आध्यात्मिक ज्ञान कालातीत है जिसकी महत्ता कभी समाप्त नहीं होती।
सरकारी योजनाओं का कार्यान्वयन कालबद्ध कार्यक्रम के तहत पूरा किया जाना चाहिए।
Kusamay ↔ सुसमय
कुसमय में धैर्य खोना अपनी ही परेशानियों को और बढ़ाने जैसा है।
सुसमय आने पर मनुष्य के सोए हुए भाग्य के द्वार भी खुल जाते हैं।
Kuvela ↔ सुवेला
आधी रात को किसी के घर कुवेला दस्तक देना शिष्टाचार के विरुद्ध है।
प्रातः काल की सुवेला में किए गए शुभ संकल्प अवश्य पूर्ण होते हैं।
Aaj ↔ कल
आज का काम आज ही पूरा कर लेना बुद्धिमान व्यक्ति का लक्षण है।
कल क्या होगा, यह कोई नहीं जानता; अतः सत्कर्म में देर न करें।
Sada ↔ कभी-नहीं
सत्यवादी मनुष्य सदा सत्य के मार्ग पर ही अडिग रहता है।
ईमानदार व्यक्ति कभी-नहीं बेईमानी का धन अपने घर में लाने की सोचता।
Sarvada ↔ कदाचित
ईश्वर की कृपा समस्त प्राणियों पर सर्वदा समान रूप से बरसती है।
कदाचित ही ऐसा होता है जब मरुस्थल में मूसलाधार वर्षा देखने को मिले।
Kshanikata ↔ स्थायित्व
साधु-संत भौतिक सुखों की क्षणिकता को समझाकर विरक्ति का उपदेश देते हैं।
सत्य और न्याय पर आधारित समाज में ही वास्तविक स्थायित्व आ सकता है।
Kshanabhangurata ↔ अमरता
संसार के वैभव की क्षणभंगुरता को देखकर सिद्धार्थ ने संन्यास लिया।
महान बलिदानियों को राष्ट्र के इतिहास में अमरता प्राप्त होती है।
Satat ↔ खंडित
सतत विकास का लक्ष्य प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
बार-बार बिजली जाने से उत्पादन का चक्र खंडित हो गया।
Kshan ↔ युग
एक क्षण की असावधानी से वर्षों की मेहनत नष्ट हो सकती है।
कठिन तपस्या के बाद कई युगों तक धर्म का राज स्थापित रहा।
Kishoraavastha ↔ प्रौढ़ावस्था
किशोरावस्था में शारीरिक और मानसिक बदलावों के कारण उचित मार्गदर्शन आवश्यक है।
प्रौढ़ावस्था में मनुष्य अपने अनुभवों से गंभीर और परिपक्व निर्णय लेता है।
Kaalik ↔ त्रैकालिक
राजनीतिक सत्ताएं कालिक होती हैं जो कुछ वर्षों के बाद समाप्त हो जाती हैं।
ईश्वरीय सत्य त्रैकालिक है जो भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों में एक समान रहता है।
Yugayugaantar ↔ क्षणभर
भारत की ऋषि परंपरा का ज्ञान युगयुगांतर से मानवता का कल्याण करता आ रहा है।
क्षणिक क्रोध में क्षणभर के लिए मनुष्य अपने विवेक पर नियंत्रण खो बैठता है।
Kaalaavadhi ↔ क्षण
ऋण चुकाने के लिए बैंक ने पांच वर्ष की कालावधि निर्धारित की है।
एक क्षण की लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
Deerghasootree ↔ क्षिप्रकारी
दीर्घसूत्री व्यक्ति साधारण से कार्य को भी महीनों तक लटकाए रखता है।
क्षिप्रकारी सेनापति ने संकट की सूचना पाते ही तुरंत पलटवार कर दिया।
Kshiprata ↔ मंथरता
तीरंदाज ने अद्भुत क्षिप्रता से प्रत्यंचा खींचकर बाण छोड़ दिया।
कछुए की मंथरता के बावजूद उसकी निरंतरता ने उसे विजयी बनाया।
Kaalakram ↔ व्यतिक्रम
इतिहासकार ने राजाओं के शासनकाल को सही कालक्रम में दर्ज किया।
घटनाओं के व्यतिक्रम से पाठक भ्रमित हो गए और सही समय समझ न सके।
Kaalaanukramik ↔ अक्रमिक
पुस्तकालय में ऐतिहासिक अभिलेख कालानुक्रमिक क्रम में सजाए गए हैं।
अक्रमिक रूप से रखी गई फाइलों में से महत्वपूर्ण दस्तावेज खोजना कठिन हो गया।
Ahoraatra ↔ क्षणमात्र
अस्पताल में आपातकालीन सेवा अहोरात्र उपलब्ध रहती है।
क्षणमात्र के निर्णय से खेल का पूरा पासा पलट गया।
Shaashvatata ↔ क्षणभंगुरता
नैतिक मूल्यों की शाश्वतता समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है।
संसार के भौतिक सुखों की क्षणभंगुरता को देखकर संतों ने वैराग्य अपनाया।
Chirasthaayita ↔ क्षणिकता
संगमरमर के भव्य मंदिरों की चिरस्थायिता सदियों तक बनी रहती है।
पानी के बुलबुलों की क्षणिकता हमें जीवन की नश्वरता याद दिलाती है।
Satyug ↔ कलियुग
सतयुग में सत्य और धर्म का चारों चरणों में पालन होता था।
कलियुग में स्वार्थ और लोभ के बढ़ने से नैतिक मूल्यों में गिरावट आई है।
Saahasa ↔ कायरता
संकट और विपत्ति के समय साहस का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veerataa ↔ कायरता
संकट और विपत्ति के समय वीरता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nidarataa ↔ कातरता
संकट और विपत्ति के समय निडरता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Paraakramee ↔ कायर
संकट और विपत्ति के समय पराक्रमी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranabaankuraa ↔ कातर
संकट और विपत्ति के समय रणबांकुरा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Himmatee ↔ कमहिम्मत
संकट और विपत्ति के समय हिम्मती का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कमहिम्मत का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veera ↔ कायर
संकट और विपत्ति के समय वीर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Khaupha ↔ सुकून
संकट और विपत्ति के समय खौफ का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुकून का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Kaatara ↔ अकातर
संकट और विपत्ति के समय कातर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अकातर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Kaatarataa ↔ धीरता
संकट और विपत्ति के समय कातरता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने धीरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Saahasika ↔ कायरतापूर्ण
संकट और विपत्ति के समय साहसिक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरतापूर्ण का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Tejasvee ↔ कांतिहीन
संकट और विपत्ति के समय तेजस्वी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कांतिहीन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shaurya ↔ कायरता
संकट और विपत्ति के समय शौर्य का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shauryavaana ↔ कातर
संकट और विपत्ति के समय शौर्यवान का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Purushaartha ↔ क्लीवता
संकट और विपत्ति के समय पुरुषार्थ का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने क्लीवता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Paurusha ↔ कायरता
संकट और विपत्ति के समय पौरुष का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Mahaaveera ↔ कातर
संकट और विपत्ति के समय महावीर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Kraantikaaree ↔ दब्बू
संकट और विपत्ति के समय क्रांतिकारी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने दब्बू का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Adigataa ↔ कातरता
संकट और विपत्ति के समय अडिगता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Khataranaaka ↔ हानिरहित
संकट और विपत्ति के समय खतरनाक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने हानिरहित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Khauphanaaka ↔ सुहावना
संकट और विपत्ति के समय खौफनाक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुहावना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Kaanpanaa ↔ अडिग-रहना
संकट और विपत्ति के समय कांपना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अडिग-रहना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Yoddhaa-bhaava ↔ कातर-भाव
संकट और विपत्ति के समय योद्धा-भाव का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातर-भाव का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbheeka-svara ↔ कांपती-आवाज
संकट और विपत्ति के समय निर्भीक-स्वर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कांपती-आवाज का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veera-sapoota ↔ कायर-पुत्र
संकट और विपत्ति के समय वीर-सपूत का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायर-पुत्र का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shaurya-gaathaa ↔ कायरता-का-दाग
संकट और विपत्ति के समय शौर्य-गाथा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता-का-दाग का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Kushaagrabuddhi ↔ मंदबुद्धि
विद्या और बौद्धिक विकास में कुशाग्रबुद्धि का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मंदबुद्धि की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tathyapoorna ↔ काल्पनिक
विद्या और बौद्धिक विकास में तथ्यपूर्ण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में काल्पनिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Taarkika ↔ कुतार्किक
विद्या और बौद्धिक विकास में तार्किक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुतार्किक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sutarka ↔ कुतर्क
विद्या और बौद्धिक विकास में सुतर्क का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुतर्क की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bodhagamya ↔ क्लिष्ट
विद्या और बौद्धिक विकास में बोधगम्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में क्लिष्ट की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Knthastha ↔ विस्मृत
विद्या और बौद्धिक विकास में कंठस्थ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विस्मृत की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sadvidyaa ↔ कुविद्या
विद्या और बौद्धिक विकास में सद्विद्या का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुविद्या की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kaavyamarmajnya ↔ अरसिक
विद्या और बौद्धिक विकास में काव्यमर्मज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अरसिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sushikshaa ↔ कुशिक्षा
विद्या और बौद्धिक विकास में सुशिक्षा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुशिक्षा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Snskaara ↔ कुसंस्कार
विद्या और बौद्धिक विकास में संस्कार का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुसंस्कार की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kakshaa-shikshana ↔ स्व-अध्ययन
विद्या और बौद्धिक विकास में कक्षा-शिक्षण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में स्व-अध्ययन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Knthastheekarana ↔ रटना-छोड़ना
विद्या और बौद्धिक विकास में कंठस्थीकरण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में रटना-छोड़ना की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Paathyapustaka ↔ कहानी-किताब
विद्या और बौद्धिक विकास में पाठ्यपुस्तक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कहानी-किताब की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sadgrntha ↔ कुसाहित्य
विद्या और बौद्धिक विकास में सद्ग्रंथ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुसाहित्य की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Suvichaara ↔ कुविचार
विद्या और बौद्धिक विकास में सुविचार का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुविचार की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kushaagrataa ↔ मंदता
विद्या और बौद्धिक विकास में कुशाग्रता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मंदता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tatva-meemaansaa ↔ कोरी-कल्पना
विद्या और बौद्धिक विकास में तत्व-मीमांसा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कोरी-कल्पना की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kadaake-kee-thnda ↔ भीषण-गर्मी
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में कड़ाके-की-ठंड की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में भीषण-गर्मी का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Umasadaara ↔ खुशनुमा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उमसदार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में खुशनुमा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Suhaavanaa ↔ कष्टप्रद
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सुहावना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में कष्टप्रद का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jhadee ↔ खुला-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में झड़ी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में खुला-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Kaalee-ghataa ↔ उजली-धूप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में काली-घटा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उजली-धूप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Barphaanee-toophaana ↔ खिला-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बर्फानी-तूफान की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में खिला-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-bindu ↔ क्वथनांक
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-बिंदु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में क्वथनांक का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Kuhaase-daara ↔ धूप-खिला
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में कुहासे-दार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में धूप-खिला का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aandhee-paanee ↔ खिला-धूप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आंधी-पानी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में खिला-धूप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Kaale-megha ↔ श्वेत-मेघ
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में काले-मेघ की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में श्वेत-मेघ का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Kuharaa-yukta ↔ धूप-खिला
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में कुहरा-युक्त की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में धूप-खिला का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Khareedna ↔ बेचना
किसान अपनी मेहनत की कमाई से नई फसल के लिए उन्नत बीज और खाद खरीदना चाहता था।
मंडी में अच्छी कीमत मिलते ही व्यापारी ने अपना सारा अनाज बेचना उचित समझा।
Khushboo ↔ बदबू
बगीचे में खिले चमेली और गुलाब के फूलों की खुशबू पूरे वातावरण को महका देती है।
कूड़े-कचरे के ढेर से उठती बदबू के कारण रास्ते से गुजरना दूभर हो जाता है।
Khula ↔ बंद
ताजी हवा के आवागमन के लिए प्रातःकाल खिड़कियां खुला रखना उत्तम रहता है।
रात के समय सुरक्षा की दृष्टि से मुख्य द्वार को बंद रखना अनिवार्य है।
Majboot ↔ कमजोर
मजबूत नींव पर बना भवन बड़े से बड़े भूकंप और तूफान को भी आसानी से झेल लेता है।
कुपोषण के कारण बालक शारीरिक रूप से कमजोर और रोगग्रस्त हो गया था।
Khona ↔ पाना
लापरवाही के कारण अपने बहुमूल्य दस्तावेज खोना भविष्य के लिए भारी पड़ सकता है।
सच्ची निष्ठा से कर्म करने पर मनवांछित फल पाना कोई असंभव बात नहीं है।
Kehna ↔ सुनना
बिना सोचे-समझे किसी को कटु वचन कहना बाद में पश्चाताप का कारण बनता है।
संवाद में केवल अपनी बात थोपने के बजाय दूसरों के विचारों को भी ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए।
Kholna ↔ बाँधना
पार्सल की जटिल गांठ को कैंची से काटने के बजाय धीरे-धीरे खोलना चाहिए।
सामान को सुरक्षित रखने के लिए उसे मजबूत रस्सी से कसकर बाँधना जरूरी होता है।
Bona ↔ काटना
बरसात की शुरुआत होते ही किसान खेतों में अन्न के नए बीज बोना शुरू करते हैं।
कहावत प्रसिद्ध है कि जैसा बीज बोओगे, वैसा ही फल भविष्य में काटना पड़ेगा।
Khilna ↔ मुरझाना
वसंत ऋतु के आते ही उपवन में रंग-बिरंगी कलियों का खिलना मन मोह लेता है।
तीखी धूप और पानी के अभाव में कोमल पौधों का मुरझाना स्वाभाविक है।
Khada ↔ बैठा
बुजुर्गों और गुरुजनों के सम्मान में कक्षा के सभी विद्यार्थी आदरपूर्वक खड़े हो गए।
लंबी यात्रा की थकान के बाद पेड़ की शीतल छाया में बैठा यात्री सुखद विश्राम पा सका।