Shuddh ↔ अशुद्ध
शुद्ध जल स्वास्थ्यवर्धक होता है जबकि अशुद्ध पानी अनेक बीमारियों का कारण बनता है।
अशुद्ध विचारों को मन से बाहर निकालना ही साधना और आत्मशुद्धि का प्रथम चरण है।
अक्षर 'श' से प्रारंभ होने वाले कुल 180 विपरीतार्थक शब्द युग्म नीचे दिए गए हैं:
Shuddh ↔ अशुद्ध
शुद्ध जल स्वास्थ्यवर्धक होता है जबकि अशुद्ध पानी अनेक बीमारियों का कारण बनता है।
अशुद्ध विचारों को मन से बाहर निकालना ही साधना और आत्मशुद्धि का प्रथम चरण है।
Shreshth ↔ निम्न
सत्कर्म करने वाला व्यक्ति समाज में श्रेष्ठ पद पाता है जबकि दुर्जन निम्न माना जाता है।
निम्न सोच मनुष्य के व्यक्तित्व को संकीर्ण बना देती है, जबकि श्रेष्ठ विचार उसे ऊंचा उठाते हैं।
Shaant ↔ अशांत
शांत समुद्र में यात्रा सुखद होती है जबकि अशांत लहरों में जहाज डगमगाने लगता है।
अशांत मन कभी भी सत्य का निर्णय नहीं ले पाता, इसलिए ध्यान द्वारा शांति पाना आवश्यक है।
Shaktishaali ↔ शक्तिहीन
शक्तिशाली राष्ट्र का दायित्व है कि वह शक्तिहीन पड़ोसियों की संप्रभुता का आदर करे।
बिना नैतिक बल के मनुष्य बाह्य रूप से कितना भी संपन्न हो, आंतरिक रूप से शक्तिहीन रहता है।
Kshanik ↔ शाश्वत
सांसारिक सुख क्षणिक होते हैं, जबकि सत्य और करुणा का आनंद शाश्वत होता है।
सत्य और धर्म का मूल्य शाश्वत है जो युगों के परिवर्तन के बाद भी कभी नहीं मिटता।
Shwet ↔ श्याम
श्वेत हंस और श्याम वर्ण का कौवा दोनों के रंग में गहरा अंतर होता है।
वर्षा ऋतु में आकाश में घिरते श्याम मेघ किसानों के हृदय में हर्ष का संचार करते हैं।
Shisht ↔ अशिष्ट
शिष्ट आचरण सभ्य समाज की पहचान है, अशिष्ट बातें किसी को शोभा नहीं देतीं।
अशिष्ट व्यवहार किसी भी सुसंस्कृत सभा में स्वीकार्य नहीं होता, शिष्टाचार ही सम्मान दिलाता है।
Shikshit ↔ अशिक्षित
एक शिक्षित नागरिक अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों के प्रति भी सचेत रहता है।
अशिक्षित समाज को विद्या का प्रकाश देकर ही राष्ट्र की सर्वांगीण प्रगति संभव है।
Shraant ↔ अश्रांत
दिनभर के परिश्रम से श्रांत मजदूर रात्रि में गहरी नींद सोता है।
अश्रांत परिश्रमी व्यक्ति बिना थके अपने निर्धारित लक्ष्य की दिशा में अग्रसर रहता है।
Sheelvaan ↔ चरित्रहीन
शीलवान व्यक्ति विपत्ति में भी मर्यादा नहीं छोड़ता।
चरित्रहीन व्यक्ति धन और सत्ता पाकर भी कभी आत्मिक शांति प्राप्त नहीं कर पाता।
Ugra ↔ शांत
उग्र रूप धारण किए बिना भी शांत और सौम्य वाणी से कठिन समस्याओं का समाधान हो सकता है।
शांत समुद्र में यात्रा सुखद होती है जबकि अशांत लहरों में जहाज डगमगाने लगता है।
Aardra ↔ शुष्क
वर्षा ऋतु में वातावरण आर्द्र हो जाता है जिससे कपड़े देर से सूखते हैं।
रेगिस्तान की शुष्क पवन शरीर की नमी को सोख लेती है और प्यास बढ़ा देती है।
Graameen ↔ शहरी
ग्रामीण जीवन की शांति और शुद्ध वायु शहरों की भागदौड़ में नहीं मिलती।
शहरी चकाचौंध में कभी-कभी मनुष्य प्रकृति की सादगी और शांति को भूल बैठता है।
Shahar ↔ गाँव
शहर की चकाचौंध से दूर गाँव की सादगी मन को सुकून देती है।
भारत की आत्मा उसके गाँवों में बसती है, जिसे शहरों के विकास के साथ नहीं भूलना चाहिए।
Shikshak ↔ छात्र
कक्षा में शिक्षक ज्ञान प्रदान करते हैं और छात्र एकाग्रता से अध्ययन करते हैं।
अनुशासित छात्र अपने गुरु का आदर कर जीवन में महान ऊंचाइयां छूता है।
Shishya ↔ गुरु
सच्चा शिष्य गुरु द्वारा दिए गए ज्ञान को जनकल्याण में समर्पित करता है।
छंद शास्त्र में गुरु मात्रा का भार दो गिना जाता है जबकि लघु मात्रा का मान एक होता है।
Vakta ↔ श्रोता
कुशल वक्ता अपने विचारों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है।
सभामंच पर ओजस्वी वक्ता और ध्यानमग्न श्रोता का सामंजस्य अद्भुत था।
Sharana ↔ निष्कासन
युद्धग्रस्त क्षेत्र से आए असहाय परिवारों को शरण देकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
समाज विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर अपराधी का मोहल्ले से निष्कासन कर दिया गया।
Shaharee ↔ देहाती
शहरी जीवन में तकनीकी सुविधाएं प्रचुर मात्रा में हैं परंतु प्रदूषण और भागदौड़ भी अधिक है।
देहाती परिवेश में खुली हवा, हरियाली और परस्पर मेलजोल की आत्मीयता देखने को मिलती है।
Shayana ↔ जागरण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार रात्रि में समय पर शयन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
परीक्षा की तैयारी के लिए छात्रों ने पूरी रात जागरण किया और पढ़ाई में जुटे रहे।
Shukla Paksha ↔ कृष्ण पक्ष
हिंदू पंचांग में चंद्रमा की कलाओं के आधार पर शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष निर्धारित होते हैं।
कृष्ण पक्ष में रातें क्रमशः अंधेरी होती जाती हैं, जबकि शुक्ल पक्ष में चांदनी बढ़ती है।
Shikhar ↔ तलहटी
पर्वतारोही तलहटी से कठिन चढ़ाई आरंभ कर अंततः बर्फ से ढके शिखर पर ध्वज फहराते हैं।
पर्वत की तलहटी में घने वन और नदियां बहती हैं, जबकि शिखर निर्जन और हिमच्छादित रहता है।
Greeshm ↔ शीत
ग्रीष्म की तीखी तपन के पश्चात आने वाली शीत ऋतु तन और मन दोनों को राहत देती है।
शीत ऋतु में गुनगुनी धूप का आनंद ग्रीष्म ऋतु की छाया जैसा सुखद प्रतीत होता है।
Ushna ↔ शीतल
रेगिस्तान की उष्ण हवाओं के मध्य शीतल जल का झरना किसी वरदान से कम नहीं लगता।
पर्वतों से बहती शीतल बयार थके हुए यात्रियों की उष्ण थकान को पलभर में हर लेती है।
Tapt ↔ शीतल
तप्त बालू पर नंगे पैर चलना कठिन होता है, जबकि शीतल जलधारा में चलना अत्यंत सुखद है।
पर्वतों से बहती शीतल बयार थके हुए यात्रियों की उष्ण थकान को पलभर में हर लेती है।
Bhaanu ↔ शशि
भानु की प्रखर किरणें संपूर्ण जगत को प्रकाशवान करती हैं, जबकि शशि की किरणें सुखद शीतलता देती हैं।
नीले आकाश में पूर्णिमा का शशि भानु के अस्त होने के उपरांत मनमोहक रूप धर लेता है।
Toofan ↔ शांति
समुद्र में उठे भीषण तूफान के शांत होने पर ही चारों ओर सुखद शांति का वातावरण बना।
भीषण तूफान के थम जाने के बाद फैली गहरी शांति प्रकृति के नवजीवन का संकेत देती है।
Kallol ↔ शांति
पवन के झोंकों से सरिता में कल्लोल होने लगा, जिससे जल की पूर्व शांति भंग हो गई।
भीषण तूफान के थम जाने के बाद फैली गहरी शांति प्रकृति के नवजीवन का संकेत देती है।
Shishir ↔ ग्रीष्म
शिशिर की कंपकंपी छुड़ाने वाली ठंडक के बाद प्रकृति ग्रीष्म की तपन से तपती है।
ग्रीष्म की तीखी तपन के पश्चात आने वाली शीत ऋतु तन और मन दोनों को राहत देती है।
Jwalant ↔ शांत
ज्वालामुखी से निकलता ज्वलंत लावा कुछ दिनों बाद ठंडा होकर शांत चट्टान बन जाता है।
शांत समुद्र में यात्रा सुखद होती है जबकि अशांत लहरों में जहाज डगमगाने लगता है।
Sharad ↔ ग्रीष्म
शरद ऋतु का निर्मल आकाश और शांत रातें ग्रीष्म ऋतु के तपन भरे दिनों से सर्वथा भिन्न हैं।
ग्रीष्म की तीखी तपन के पश्चात आने वाली शीत ऋतु तन और मन दोनों को राहत देती है।
Aardrata ↔ शुष्कता
वर्षा काल में वातावरण में आर्द्रता बढ़ जाने से पसीना जल्दी नहीं सूखता।
मरुस्थल की हवा में अत्यधिक शुष्कता होती है, जबकि तटीय क्षेत्रों में उच्च आर्द्रता पाई जाती है।
Praval ↔ शैवाल
समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र में कठोर प्रवाल और सूक्ष्म शैवाल का परस्पर सहजीवन अद्वितीय है।
तालाब की सतह पर हरी शैवाल फैलने से धूप नीचे नहीं पहुंच पाती।
Shuddhata ↔ प्रदूषण
हिमालयी वातावरण की शुद्धता में सांस लेने से असाध्य रोग भी शांत होने लगते हैं।
औद्योगिक कारखानों का धुआं वायु में प्रदूषण बढ़ाता है, जिसे वृक्षारोपण से शुद्धता में बदला जा सकता है।
Gart ↔ शिखर
महासागरों के तल में हजारों मीटर गहरे गर्त पाए जाते हैं, जहां सूर्य का प्रकाश कभी नहीं पहुंचता।
एक ओर आकाश छूता हिम शिखर है तो दूसरी ओर गहरी गर्त का अंधकार है।
Loo ↔ शीत लहर
दोपहर में चलने वाली गर्म लू शरीर का जल सोख लेती है, इसलिए छाछ और पानी पीते रहना चाहिए।
जनवरी में शीत लहर से लोग कांप उठते हैं, जबकि मई-जून में लू से बचने के लिए घरों में बंद रहते हैं।
Jungle ↔ शहर
जंगल में वन्यजीव स्वतंत्र विचरण करते हैं, जबकि शहर में कंक्रीट की ऊंची इमारतें होती हैं।
प्रदूषण मुक्त जीवन जीने के लिए लोग कभी-कभी शहर का शोर छोड़कर जंगल की शांति की शरण लेते हैं।
Shasya-Shyaamla ↔ मरुस्थली
नहरों के पानी से राजस्थान की बंजर धरती भी शस्य-श्यामला उपजाऊ भूमि में बदल गई।
मरुस्थली में केवल रेतीले टीले और कंटीली झाड़ियां दृष्टिगोचर होती हैं।
Krodh ↔ शांति
अत्यधिक क्रोध मनुष्य के विवेक और निर्णय लेने की क्षमता को नष्ट कर देता है।
विवाद के समय मानसिक शांति बनाए रखना ही सच्ची समझदारी है।
Shanti ↔ अशांति
ध्यान और आत्मचिंतन से मन को गहन शांति की अनुभूति होती है।
आपसी अविश्वास के कारण पूरे समाज में अशांति फैल गई थी।
Aanand ↔ शोक
सत्संग और संगीत के वातावरण में आत्मा को असीम आनंद मिलता है।
अप्रिय समाचार सुनकर पूरा नगर गहरे शोक में डूब गया।
Santap ↔ शीतलता
प्रियजन के वियोग का संताप हृदय को अंदर ही अंदर जलाता रहता है।
संतों के वचनों से तप्त मन को शीतलता और धैर्य प्राप्त होता है।
Udweg ↔ शांतभाव
क्रोध और उद्वेग के क्षणों में लिया गया निर्णय प्रायः गलत साबित होता है।
योगी पुरुष हर परिस्थिति में शांतभाव धारण किए रहते हैं।
Shraddha ↔ अश्रद्धा
गुरुजनों के प्रति सच्ची श्रद्धा ही ज्ञान प्राप्ति का प्रथम द्वार है।
ज्ञान के प्रति अश्रद्धा रखने वाला व्यक्ति कभी शिक्षित नहीं हो सकता।
Aashish ↔ शाप
बड़ों का पावन आशीष जीवन की हर राह को आसान बना देता है।
पौराणिक कथाओं में क्रोधी ऋषियों के शाप से राजाओं का पतन वर्णित है।
Shubh ↔ अशुभ
गृह प्रवेश का यह मुहूर्त अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।
अशुभ संकेत देखकर यात्रा को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया।
Shoor ↔ भीरु
शूर सैनिक युद्धभूमि में अंतिम सांस तक वीरता से लड़े।
भीरु स्वभाव का व्यक्ति संघर्ष से सदा दूर भागता है।
Aanandit ↔ शोकाकुल
विवाह के शुभ अवसर पर सारा परिवार आनंदित था।
प्रियजन के अचानक निधन से सभी परिजन शोकाकुल हो उठे।
Shantachitta ↔ उद्विग्न
शांतचित्त होकर कार्य करने से सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
भविष्य की अनिश्चितता से मन उद्विग्न और व्याकुल रहने लगा।
Harshollas ↔ शोक
त्योहार के आगमन पर चारों दिशाओं में हर्षोल्लास छा गया।
अचानक आई विपत्ति ने पूरे उत्सव को शोक में बदल दिया।
Shanka ↔ समाधान
मन में कोई भी शंका हो तो शिक्षक से बेझिझक पूछना चाहिए।
तर्कों और प्रमाणों से सभी जटिल प्रश्नों का समाधान हो गया।
Aanandmay ↔ शोकमय
मित्रों का मिलन एक आनंदमय उत्सव बन गया।
आपदा के उपरांत बस्ती का वातावरण अत्यंत शोकमय था।
Klesh ↔ शांति
पारिवारिक क्लेश से घर का सारा आनंद नष्ट हो जाता है।
आपसी समझदारी से घर में पुनः सुख और शांति की स्थापना हुई।
Shokgrast ↔ आनंदमग्न
शोकग्रस्त परिवार को सांत्वना देने पूरा गाँव एकत्र हो गया।
उत्सव के संगीत में सब लोग आनंदमग्न होकर नाचने लगे।
Adheer ↔ शांत
परिणाम की प्रतीक्षा में उसका अधीर मन बार-बार घड़ी देख रहा था।
गहरे जल की तरह ज्ञानी पुरुष हर परिस्थिति में शांत रहता है।
Shantipriya ↔ युद्धप्रिय
भारत की परंपरा सदैव से एक शांतिप्रिय और सहिष्णु राष्ट्र की रही है।
युद्धप्रिय साम्राज्यवादी शासक पड़ोसी राज्यों पर आक्रमण करते रहते थे।
Shirsh ↔ पाद
मानव शरीर में शीर्ष सबसे संवेदनशील और विचारशील अंग माना जाता है।
शारीरिक संतुलन बनाए रखने में पाद अर्थात पैरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
Badhir ↔ श्रवणक्षम
बधिर छात्र संकेत भाषा की सहायता से संवाद स्थापित करने में निपुण था।
श्रवणक्षम व्यक्तियों को भी शोर-शराबे वाले वातावरण में कानों की रक्षा करनी चाहिए।
Gaur ↔ श्याम
पहाड़ी अंचल में रहने वाले लोगों का शारीरिक वर्ण प्रायः गौर होता है।
भगवान कृष्ण के आकर्षक श्याम वर्ण की उपमा सजल मेघों से दी जाती है।
Shaaririk ↔ मानसिक
कठिन दौड़ और तैराकी से शारीरिक सहनशक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
ध्यान और स्वाध्याय से मानसिक एकाग्रता और आंतरिक स्थिरता प्राप्त होती है।
Nakha ↔ शिख
योग और आयुर्वेद में नख अर्थात पैर के नाखूनों की स्वच्छता और रंग से शारीरिक स्वास्थ्य परखा जाता है।
प्राचीन काव्य परंपरा में सौंदर्य का संपूर्ण वर्णन नख से शिख अर्थात पैर के अंगूठे से सिर की चोटी तक किया जाता था।
Shirobhaaga ↔ पादभाग
शारीरिक संरचना के अध्ययन में शिरोभाग मस्तिष्क और प्रमुख ज्ञानेंद्रियों का आवास माना गया है।
मानव शरीर का पादभाग पूरे शरीर का भार वहन करने तथा गतिशीलता प्रदान करने का आधार है।
Shvaasa ↔ प्रश्वास
प्राणायाम की क्रिया में गहरी श्वास भीतर खींचकर फेफड़ों को प्राणवायु से भरा जाता है।
मन को शांत करने के लिए प्रश्वास के माध्यम से शरीर से धीरे-धीरे वायु बाहर छोड़ी जाती है।
Shravya ↔ अश्रव्य
मानव कर्ण केवल 20 हर्ट्ज से 20000 हर्ट्ज तक की श्रव्य ध्वनि तरंगों को सुन सकते हैं।
पराश्रव्य और अपश्रव्य तरंगें सामान्य मानव कान के लिए अश्रव्य होती हैं।
Shuchita ↔ अशुचिता
सार्वजनिक जीवन में धन और विचारों की शुचिता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
मन में छिपी अशुचिता बाहरी पूजा-पाठ से कभी दूर नहीं की जा सकती।
Shreya ↔ प्रेय
बुद्धिमान व्यक्ति श्रेय के मार्ग को चुनते हैं जो आत्मिक कल्याण की ओर ले जाता है।
अज्ञानी जन केवल प्रेय अर्थात् तात्कालिक सांसारिक सुखों के पीछे भागते रहते हैं।
Shaaleen ↔ अशिष्ट
शालीन व्यवहार करने वाले व्यक्ति की समाज में सभी लोग सराहना करते हैं।
अशिष्ट स्वभाव का व्यक्ति अपनी कड़वी बातों से दूसरों के मन को ठेस पहुँचाता है।
Shishtaachaar ↔ अशिष्टता
अतिथियों का सत्कार करते समय शिष्टाचार और सौम्यता का परिचय देना हमारी परंपरा है।
बड़ों के सामने अशिष्टता दिखाना सुसंस्कृत होने का लक्षण नहीं है।
Shraddheya ↔ अश्रद्धेय
श्रद्धेय गुरुजी के चरणों में बैठकर शिष्यों ने जीवन का गूढ़ ज्ञान प्राप्त किया।
चरित्रहीन आचरण के कारण वह व्यक्ति समाज की दृष्टि में अश्रद्धेय हो गया।
Shlaaghya ↔ गर्ह्य
शत्रु के समक्ष भी धर्म और शौर्य का पालन करना श्लाघ्य आचरण माना जाता है।
निहत्थे बंदियों पर अत्याचार करना युद्ध के नियमों में गर्ह्य अपराध है।
Maansahaari ↔ शाकाहारी
शेर और चीता विशुद्ध मांसाहारी जीव हैं जो शिकार पर निर्भर रहते हैं।
हाथी और हिरण जैसे शाकाहारी जीव घास और पत्तियों को खाकर जीवन यापन करते हैं।
Shikaari ↔ शिकार
तेज नजरों वाला शिकारी बाज पलक झपकते ही झपट्टा मारता है।
कमजोर हिरण शिकारी शेर का शिकार बनने से बचने के लिए तेज दौड़ा।
Sher ↔ शेरनी
शेर की दहाड़ सुनकर जंगल के सभी छोटे जीव छिपने लगे।
शेरनी अपनी संतान की रक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगा देती है।
Shaakaahaar ↔ मांसाहार
अनाज, दलहन और ताजी हरी सब्जियों से युक्त शाकाहार शरीर को निरोगी रखता है।
अत्यधिक मांसाहार करने से कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी विकार बढ़ सकते हैं।
Shuddhghee ↔ वनस्पति
शुद्धघी में बने बेसन के लड्डू अपनी महक और स्वाद के लिए जाने जाते हैं।
वनस्पति घी का अत्यधिक उपयोग धमनियों में रुकावट पैदा कर सकता है।
Sharkara ↔ नमक
चाय में शर्करा अधिक होने से वह बहुत मीठी हो गई।
सब्जी में नमक संतुलित मात्रा में ही डालना चाहिए।
Sharkaraayukt ↔ शर्करारहित
हलवाई की दुकान पर शर्करायुक्त मिठाइयाँ शीशे के डिब्बों में सजी थीं।
मधुमेह के रोगियों के लिए शर्करारहित चाय और बिस्कुट तैयार किए गए।
Mitra ↔ शत्रु
सच्चा मित्र विपत्ति के समय ढाल बनकर साथ खड़ा रहता है।
कपटी शत्रु मीठी बातें बोलकर पीठ में छुरा घोंपने का अवसर खोजता है।
Mitrata ↔ शत्रुता
कृष्ण और सुदामा की निस्वार्थ मित्रता संसार में अमर उदाहरण है।
पुरानी शत्रुता को भुलाकर दोनों परिवारों ने आपस में सुलह कर ली।
Shaasak ↔ शासित
एक दूरदर्शी शासक प्रजा के कल्याण को ही अपना सर्वोच्च धर्म समझता है।
शासित जनता के अधिकारों का सम्मान करना किसी भी न्यायप्रिय व्यवस्था की पहली शर्त है।
Poshankarta ↔ शोषक
माता-पिता अपनी संतान के प्राथमिक पोषणकर्ता और मार्गदर्शक होते हैं।
मजदूरों का खून पसीने की कमाई छीनने वाला शोषक समाज के लिए अभिशाप है।
Suhrid ↔ शत्रु
सच्चा सुहृद आपके अवगुणों को अकेले में समझाता है और गुणों की प्रशंसा करता है।
शत्रु सदा आपकी दुर्बलताओं का लाभ उठाकर आघात करने की ताक में रहता है।
Sahyoddha ↔ शत्रुयोद्धा
युद्धभूमि में घायल सहयोद्धा को बचाने के लिए सैनिक ने अपनी जान जोखिम में डाली।
शत्रुयोद्धा के पराजित होने पर भी उसके साथ युद्ध-नियमों के अनुसार सम्मान का व्यवहार किया गया।
Mitrapaksh ↔ शत्रुपक्ष
विश्वयुद्ध में मित्रपक्ष की सेनाओं ने संयुक्त रणनीति बनाकर विजय प्राप्त की।
शत्रुपक्ष की हर चाल पर खुफिया एजेंसियों द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही थी।
Mitrarashtra ↔ शत्रुराष्ट्र
आपदा के समय मित्रराष्ट्र ने तुरंत राहत सामग्री और दवाएं भेजीं।
शत्रुराष्ट्र की सीमा पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर सेना सतर्क रहती है।
Mitramandalee ↔ शत्रुदल
शाम को पार्क में मित्रमंडली बैठकर हँसी-मजाक और विचार साझा करती है।
शत्रुदल ने राजा के खिलाफ षड्यंत्र रचने के लिए गुप्त बैठक की।
Udyogpati ↔ श्रमिक
उद्योगपति ने नई स्वचालित इकाई स्थापित करने का निर्णय लिया।
श्रमिक के निरंतर पसीने से ही विशाल कल-कारखाने सुचारू चलते हैं।
Shreemant ↔ निर्धन
श्रीमंत परिवारों ने कन्या विवाह कोष में मुक्तहस्त दान दिया।
निर्धन परिवारों को शासकीय योजनाओं से पक्के आवास प्रदान किए गए।
Sakal-laabh ↔ शुद्ध-लाभ
खाते के अनुसार बिक्री पर पचास लाख रुपये का सकल-लाभ हुआ।
करों और भत्तों के भुगतान के पश्चात शुद्ध-लाभ तीस लाख रुपये बचा।
Shulk ↔ निःशुल्क
परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए सभी विद्यार्थियों को निर्धारित शुल्क भरना पड़ा।
सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में पाठ्य-पुस्तकें और भोजन पूरी तरह निःशुल्क प्रदान किए जाते हैं।
Sakal ↔ शुद्ध
देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) इस वर्ष सात प्रतिशत बढ़ा।
मूल्यह्रास और कर घटाने के बाद फर्म की शुद्ध आय सामने आती है।
Shree ↔ श्रीहीन
धर्म और सत्य के आचरण से राजा का सिंहासन श्री और सम्मान से चमकता रहा।
पराजय और विपन्नता के बाद वह प्रतापी राजा पूरी तरह श्रीहीन दिखाई देने लगा।
Share ↔ ऋणपत्र
कंपनी के विकास में सीधी भागीदारी के लिए उसने इक्विटी शेयर खरीदे।
निश्चित ब्याज की गारंटी चाहने वाले निवेशकों ने सुरक्षित ऋणपत्र में धन लगाया।
Shram ↔ विश्राम
खेतों में दिन-रात कठोर श्रम करने के बाद ही फसल पकती है।
थके हुए मजदूरों ने वृक्ष की शीतल छाया में बैठकर कुछ देर विश्राम किया।
Shilpee ↔ अनाड़ी
कुशल शिल्पी ने संगमरमर के पत्थर को तराशकर सजीव मूर्ति का रूप दे दिया।
अनाड़ी कारीगर ने महंगे लकड़ी के दरवाजे को काटकर पूरी तरह बिगाड़ दिया।
Tatparata ↔ शिथिलता
अग्निशमन दल ने अद्भुत तत्परता दिखाते हुए आग को कुछ ही पलों में बुझा दिया।
प्रशासनिक शिथिलता के चलते विकास योजनाएं वर्षों तक अधूरी पड़ी रहीं।
Shramajeevee ↔ परजीवी
श्रमजीवी इंसान अपने परिश्रम से रूखी-सूखी रोटी खाकर भी आत्मसम्मान से जीता है।
दूसरों की गाढ़ी कमाई पर पलने वाला परजीवी कभी सम्मान का पात्र नहीं हो सकता।
Shramasaadhya ↔ अनायास
पहाड़ काटकर मार्ग बनाना अत्यंत श्रमसाध्य और जोखिम भरा कार्य था।
प्रकृति की कृपा से फसल को अनायास ही पर्याप्त वर्षा का जल मिल गया।
Shramadaan ↔ आरामपरस्ती
गांव के युवाओं ने मिलकर श्रमदान द्वारा टूटे हुए तटबंध की मरम्मत कर दी।
आरामपरस्ती में डूबा व्यक्ति जीवन में कोई ठोस मुकाम हासिल नहीं कर पाता।
Shramabal ↔ यंत्रबल
कृषि और निर्माण कार्यों में आज भी विशाल श्रमबल की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
यंत्रबल के बढ़ते उपयोग ने भारी काम को बहुत कम समय में संभव बना दिया है।
Shramasheel ↔ अनुद्यमी
श्रमशील समुदाय अपनी कड़ी मेहनत से बंजर धरती पर भी फसलें उगा लेता है।
अनुद्यमी लोग संसाधनों से संपन्न होकर भी कोई नया कार्य आरंभ नहीं कर पाते।
Shramapriya ↔ आरामपसंद
श्रमप्रिय किसान अपने हाथों से कुदाल चलाकर पसीना बहाने में गर्व अनुभव करता है।
आरामपसंद व्यक्ति वातानुकूलित कमरे से बाहर निकलने में भी कतराता है।
Shramamoolya ↔ मुफ्तखोरी
सभ्य समाज में हर मजदूर को उसके श्रममूल्य का उचित सम्मान मिलना चाहिए।
मुफ्तखोरी की आदत व्यक्ति को अकर्मण्य और समाज पर बोझ बना देती है।
Shramasaadhana ↔ आरामपरस्ती
श्रमसाधना से ही मनुष्य इतिहास रचता है और समाज को नई दिशा देता है।
आरामपरस्ती के कारण कई सभ्यताओं का वैभव धूल में मिल गया।
Shilp ↔ विनाश
प्राचीन मंदिरों का बेजोड़ शिल्प आज भी स्थापत्य कला का शिखर माना जाता है।
भूकंप के विनाश ने कई ऐतिहासिक स्मारकों को मलबे में तब्दील कर दिया।
Shram-sammaan ↔ श्रम-अवमानना
सभ्य समाज में झाड़ू लगाने वाले से लेकर वैज्ञानिक तक सभी के श्रम-सम्मान की भावना होनी चाहिए।
शारीरिक कार्य करने वालों की श्रम-अवमानना करना सामंती मानसिकता का परिचायक है।
Shramasaadhak ↔ आरामतलब
श्रमसाधक युवक ने अपनी बाहों के बल पर परिवार की तकदीर बदल दी।
आरामतलब पुत्र पैतृक संपत्ति के सहारे जीवन बिताने का सपना देखता रहा।
Shramanishtha ↔ आलस्य
सच्ची श्रमनिष्ठा ही किसी भी साधारण श्रमिक को असाधारण व्यक्तित्व बनाती है।
आलस्य में डूबा मनुष्य अपने भीतर छिपी प्रतिभा को भी कभी पहचान नहीं पाता।
Savera ↔ शाम
जब जागो तभी सवेरा — इस लोकोक्ति का अर्थ है कि सुधार कभी भी संभव है।
काम समाप्त करके सभी मजदूर थके कदमों से शाम को घर लौटते हैं।
Sheeghra ↔ विलंब
सूचना मिलते ही एम्बुलेंस शीघ्र घटनास्थल पर पहुंच गई।
यातायात जाम के कारण बैठक में पहुंचने में आधा घंटा विलंब हो गया।
Sheeghrata ↔ धीमापन
डॉक्टरों की सूझबूझ और शीघ्रता से जहर का असर फैलने से पहले रोक लिया गया।
दफ्तर के कामकाज में धीमापन नागरिकों की परेशानी का कारण बनता है।
Shaishav ↔ वार्धक्य
शैशव काल में बच्चे की मानसिक और शारीरिक देखभाल अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वार्धक्य में शरीर शिथिल हो जाने पर अपनों के स्नेह और सहारे की आवश्यकता होती है।
Varshaaritu ↔ शुष्क-ऋतु
वर्षाऋतु के आगमन से धरती की प्यास बुझती है और हरियाली छा जाती है।
शुष्क-ऋतु में तेज धूप और जल स्रोतों के सूखने से जंगलों में आग का खतरा बढ़ जाता है।
Shaashvatata ↔ क्षणभंगुरता
नैतिक मूल्यों की शाश्वतता समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है।
संसार के भौतिक सुखों की क्षणभंगुरता को देखकर संतों ने वैराग्य अपनाया।
Sheeghragaamita ↔ मंदगामिता
एक्सप्रेस ट्रेनों की शीघ्रगामिता से यात्रियों के यात्रा समय में बड़ी बचत हुई।
जाम में फंसे वाहनों की मंदगामिता से शहर में वायु प्रदूषण बढ़ जाता है।
Sharadritu ↔ ग्रीष्मऋतु
शरदऋतु में आकाश स्वच्छ और रातें सुहावनी तथा शीतल होने लगती हैं।
ग्रीष्मऋतु की चिलचिलाती धूप और लू से जनजीवन व्याकुल हो उठता है।
Shoorataa ↔ भीरुता
संकट और विपत्ति के समय शूरता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भीरुता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nihshnka ↔ शंकित
संकट और विपत्ति के समय निःशंक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शंकित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shnkaakula ↔ निश्चिंत
संकट और विपत्ति के समय शंकाकुल का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने निश्चिंत का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shaurya ↔ कायरता
संकट और विपत्ति के समय शौर्य का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shauryavaana ↔ कातर
संकट और विपत्ति के समय शौर्यवान का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shooraveera ↔ डरपोक
संकट और विपत्ति के समय शूरवीर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डरपोक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ladaakoo ↔ शांतिप्रिय
संकट और विपत्ति के समय लड़ाकू का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांतिप्रिय का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Rakshaarthee ↔ शरणदाता
संकट और विपत्ति के समय रक्षार्थी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शरणदाता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sharanaarthee ↔ शरणदाता
संकट और विपत्ति के समय शरणार्थी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शरणदाता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shnkhanaada ↔ शांति
संकट और विपत्ति के समय शंखनाद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांति का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Yuddhonmaada ↔ शांतिवार्ता
संकट और विपत्ति के समय युद्धोन्माद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांतिवार्ता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ghabaraahata ↔ शांति
संकट और विपत्ति के समय घबराहट का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांति का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranakshetra ↔ शांतिस्थल
संकट और विपत्ति के समय रणक्षेत्र का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांतिस्थल का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nidara-mana ↔ शंकित-मन
संकट और विपत्ति के समय निडर-मन का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शंकित-मन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranonmaada ↔ शांति-चेतना
संकट और विपत्ति के समय रणोन्माद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांति-चेतना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shaurya-gaathaa ↔ कायरता-का-दाग
संकट और विपत्ति के समय शौर्य-गाथा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता-का-दाग का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shikshaa ↔ अशिक्षा
विद्या और बौद्धिक विकास में शिक्षा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशिक्षा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pravaktaa ↔ श्रोता
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रवक्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में श्रोता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shodhakartaa ↔ साधारण-छात्र
विद्या और बौद्धिक विकास में शोधकर्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में साधारण-छात्र की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastraartha ↔ वितंडा
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्रार्थ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में वितंडा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shabdaadnbara ↔ सरल-भाषा
विद्या और बौद्धिक विकास में शब्दाडंबर का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में सरल-भाषा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shuddha-vartanee ↔ अशुद्ध-वर्तनी
विद्या और बौद्धिक विकास में शुद्ध-वर्तनी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशुद्ध-वर्तनी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shuddhochchaarana ↔ अशुद्धोच्चारण
विद्या और बौद्धिक विकास में शुद्धोच्चारण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशुद्धोच्चारण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastrajnya ↔ शास्त्रविहीन
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्रज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में शास्त्रविहीन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaikshanika ↔ अशैक्षणिक
विद्या और बौद्धिक विकास में शैक्षणिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशैक्षणिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastrasammata ↔ शास्त्रविरुद्ध
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्रसम्मत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में शास्त्रविरुद्ध की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shikshaanuraagee ↔ अध्ययन-विमुख
विद्या और बौद्धिक विकास में शिक्षानुरागी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अध्ययन-विमुख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastravettaa ↔ मूर्ख
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्रवेत्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्ख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shodha-patra ↔ सामान्य-लेख
विद्या और बौद्धिक विकास में शोध-पत्र का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में सामान्य-लेख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastra-pramaana ↔ लोक-भ्रांति
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्र-प्रमाण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में लोक-भ्रांति की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shodhaparaka ↔ मनगढ़ंत
विद्या और बौद्धिक विकास में शोधपरक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मनगढ़ंत की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Praadhyaapaka ↔ शिक्षार्थी
विद्या और बौद्धिक विकास में प्राध्यापक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में शिक्षार्थी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sheetalataa ↔ उष्णता
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतलता की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्णता का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Bavndara ↔ शांत-हवा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बवंडर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-हवा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Ushna-mausama ↔ शीत-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उष्ण-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शीत-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Toophaanee ↔ शांत
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तूफानी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aandhee-toophaana ↔ शांत-वातावरण
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आंधी-तूफान की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-वातावरण का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Tadita ↔ शांत-आकाश
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तड़ित की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-आकाश का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Ushnakatibndha ↔ शीतकटिबंध
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उष्णकटिबंध की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शीतकटिबंध का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Nidaagha ↔ शिशिर
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में निदाघ की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शिशिर का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheetakaala ↔ ग्रीष्मकाल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतकाल की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में ग्रीष्मकाल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Varshaakaala ↔ शुष्ककाल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वर्षाकाल की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शुष्ककाल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheetaprada ↔ तापप्रद
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतप्रद की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तापप्रद का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Reta-kaa-toophaana ↔ शांत-रेगिस्तान
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में रेत-का-तूफान की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-रेगिस्तान का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-lahara ↔ लू-का-प्रकोप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-लहर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में लू-का-प्रकोप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheetprakop ↔ उष्ण-राहत
पहाड़ों पर बर्फबारी के कारण मैदानी क्षेत्रों में भीषण शीतप्रकोप बढ़ गया।
दोपहर में धूप निकलने से कड़ाके की सर्दी में लोगों को उष्ण-राहत मिली।
Himjhanjha ↔ शांत-हिमपात
पहाड़ी दर्रों में उठी तीव्र हिमझंझा ने पर्वतारोहियों का मार्ग अवरुद्ध कर दिया।
घाटी में हो रहे शांत-हिमपात से देवदार के वृक्षों पर बर्फ की सुंदर परत जम गई।
Vasnta-ritu ↔ शिशिर-ऋतु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वसंत-ऋतु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शिशिर-ऋतु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-vaayu ↔ उष्ण-पवन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-वायु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्ण-पवन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aardra-havaa ↔ शुष्क-पवन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आर्द्र-हवा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शुष्क-पवन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-shaama ↔ तपती-दोपहर
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-शाम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तपती-दोपहर का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jhnjhaavaatee-mausama ↔ शांत-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में झंझावाती-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-bindu ↔ क्वथनांक
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-बिंदु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में क्वथनांक का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Varshaa-maapee ↔ शुष्कता-मापी
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वर्षा-मापी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शुष्कता-मापी का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheetala-phuhaara ↔ गरम-हवा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतल-फुहार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में गरम-हवा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheetoshna-katibndha ↔ उष्ण-कटिबंध
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतोष्ण-कटिबंध की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्ण-कटिबंध का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-prabhaava ↔ उष्ण-प्रभाव
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-प्रभाव की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्ण-प्रभाव का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-ritu ↔ ग्रीष्म-ऋतु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-ऋतु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में ग्रीष्म-ऋतु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Tadita-jhnjhaa ↔ शांत-नभ
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तड़ित-झंझा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-नभ का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-havaa ↔ गर्म-हवा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-हवा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में गर्म-हवा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Chilachilaatee-dhoopa ↔ शीतल-छाया
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में चिलचिलाती-धूप की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शीतल-छाया का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Pavana-vega ↔ शांत-वायु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में पवन-वेग की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-वायु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Kaale-megha ↔ श्वेत-मेघ
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में काले-मेघ की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में श्वेत-मेघ का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aardra-vaayumndala ↔ शुष्क-वायुमंडल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आर्द्र-वायुमंडल की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शुष्क-वायुमंडल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।