Aavashyak ↔ अनावश्यक
विद्यार्थी को केवल आवश्यक पुस्तकों पर ध्यान देना चाहिए और अनावश्यक सामग्री से बचना चाहिए।
अनावश्यक व्यय और चिंताओं से बचकर ही मनुष्य सुखी और शांत जीवन व्यतीत कर सकता है।
अक्षर 'आ' से प्रारंभ होने वाले कुल 85 विपरीतार्थक शब्द युग्म नीचे दिए गए हैं:
Aavashyak ↔ अनावश्यक
विद्यार्थी को केवल आवश्यक पुस्तकों पर ध्यान देना चाहिए और अनावश्यक सामग्री से बचना चाहिए।
अनावश्यक व्यय और चिंताओं से बचकर ही मनुष्य सुखी और शांत जीवन व्यतीत कर सकता है।
Aasakt ↔ अनासक्त
कर्मफल में आसक्त होने के बजाय निष्काम भाव से अनासक्त होकर कर्म करो।
गीता का संदेश है कि कर्म अनासक्त भाव से करो और फल की चिंता मत करो।
Aastik ↔ नास्तिक
आस्तिक व्यक्ति ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास रखता है जबकि नास्तिक वैज्ञानिक तर्क मांगता है।
नास्तिक व्यक्ति ईश्वरीय सत्ता को अस्वीकार कर केवल प्रत्यक्ष प्रमाण पर विश्वास करता है।
Aardra ↔ शुष्क
वर्षा ऋतु में वातावरण आर्द्र हो जाता है जिससे कपड़े देर से सूखते हैं।
रेगिस्तान की शुष्क पवन शरीर की नमी को सोख लेती है और प्यास बढ़ा देती है।
Aarambh ↔ अंत
किसी भी शुभ कार्य का आरंभ उत्साह से और अंत संतोष के साथ होना चाहिए।
अंत भला तो सब भला — कठिन शुरुआत के बाद भी सुखद अंत मन को शांति देता है।
Aadi ↔ अंत
संसार में जिसका आदि है उसका अंत भी सुनिश्चित है।
अंत भला तो सब भला — कठिन शुरुआत के बाद भी सुखद अंत मन को शांति देता है।
Aayaat ↔ निर्यात
देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आयात कम और निर्यात अधिक करना चाहिए।
भारतीय मसालों का विदेशों में बड़े पैमाने पर निर्यात होता है।
Aay ↔ व्यय
बुद्धिमान गृहस्थ अपनी आय के अनुसार ही व्यय करता है ताकि भविष्य सुरक्षित रहे।
अनावश्यक व्यय से बचकर बचत करना वित्तीय स्थिरता की नींव है।
Aagya ↔ अवज्ञा
सैनिक सेनापति की आज्ञा का अक्षरशः पालन करते हैं, अवज्ञा करने पर कोर्ट मार्शल होता है।
माता-पिता की अवज्ञा करने वाली संतान कभी सच्चे मन से सुखी नहीं रह सकती।
Aagman ↔ प्रस्थान
वसंत के आगमन से प्रकृति खिल उठती है, जबकि पतझड़ का प्रस्थान शीत का अंत करता है।
ट्रेन के प्रस्थान का समय घोषित होते ही यात्री प्लेटफॉर्म पर एकत्र हो गए।
Aaroh ↔ अवरोह
संगीत में स्वरों के आरोह और अवरोह का सही संतुलन ही राग की सुंदरता बढ़ाता है।
पर्वतारोही के लिए जितना कठिन आरोह होता है, उतना ही सावधानीपूर्वक अवरोह करना पड़ता है।
Aadar ↔ अनादर
बड़ों का आदर करना हमारी संस्कृति का मूल आधार है।
किसी के अतिथि का अनादर करना भारतीय परंपरा के विपरीत है।
Aatithya ↔ अनातिथ्य
भारतीय संस्कृति में आतिथ्य सत्कार को ईश्वर सेवा के समान आदरणीय माना गया है।
द्वार पर आए भूखे आगंतुक के साथ अनातिथ्य का व्यवहार करना सामाजिक मर्यादा के विपरीत है।
Parnparaa ↔ आधुनिकता
भारतीय विवाह समारोहों में सदियों पुरानी समृद्ध परंपरा का दर्शन सहज ही होता है।
डिजिटल तकनीक और आधुनिकता ने जीवनशैली को सुगम व त्वरित बना दिया है।
Aabhijaatya ↔ जनसाधारण
राजदरबार का वैभवशाली आभिजात्य वर्ग सुख-सुविधाओं और ठाठ-बाट में जीवन व्यतीत करता था।
सच्चे लोकतंत्र का मुख्य उद्देश्य जनसाधारण के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना और उन्हें अधिकार देना है।
Aahaara ↔ निराहार
शारीरिक ऊर्जा बनाए रखने के लिए समय पर सुपाच्य और पौष्टिक आहार लेना आवश्यक है।
एकादशी के पावन पर्व पर श्रद्धालु पूरे दिन निराहार रहकर ईश्वर का ध्यान करते हैं।
Aatap ↔ छाया
ग्रीष्म ऋतु के प्रचंड आतप से बचने के लिए राहगीर सघन कुंज की छाया में विश्राम करते हैं।
पेड़ स्वयं कड़ी धूप सहकर दूसरों को सुखद छाया प्रदान करते हैं।
Aakash ↔ पाताल
सच्चे साधक की कीर्ति आकाश से लेकर पाताल तक सभी दिशाओं में गूंजती है।
राजा बलि ने अपना सर्वस्व अर्पित कर आकाश और पाताल दोनों लोकों में यश अर्जित किया।
Aalok ↔ तिमिर
महापुरुषों के विचार समाज से अज्ञान रूपी तिमिर को हटाकर आलोक का प्रसार करते हैं।
एक नन्हा सा दीप भी गहन तिमिर को चीरकर आलोक की किरण बिखेरने में सक्षम होता है।
Aandhi ↔ मंद समीर
रेत की भयानक आंधी थम जाने के बाद बहने वाला मंद समीर अत्यंत राहतकारी लगा।
आंधी की धूल भरी गर्जना के बाद बहने वाला मंद समीर हर पथिक को असीम राहत देता है।
Barf ↔ आग
बर्फ जैसी ठंडक को दूर करने के लिए अलाव की आग ही सहारा बनती है।
शीत की कड़कड़ाती बर्फ में अलाव की आग ही जीवनदायिनी गर्माहट प्रदान करती है।
Aagney ↔ वायव्य
आग्नेय कोण अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि वायव्य कोण वायु तत्व से संबंधित है।
वायव्य दिशा से आने वाली शीतल पछुआ हवाओं ने आग्नेय कोण की गर्माहट को कम कर दिया।
Aardrata ↔ शुष्कता
वर्षा काल में वातावरण में आर्द्रता बढ़ जाने से पसीना जल्दी नहीं सूखता।
मरुस्थल की हवा में अत्यधिक शुष्कता होती है, जबकि तटीय क्षेत्रों में उच्च आर्द्रता पाई जाती है।
Asha ↔ निराशा
कठिन से कठिन समय में भी आशा की एक किरण जीवन को नई दिशा देती है।
असफलता से घबराकर निराशा के अंधकार में डूबना उचित नहीं है।
Aanand ↔ शोक
सत्संग और संगीत के वातावरण में आत्मा को असीम आनंद मिलता है।
अप्रिय समाचार सुनकर पूरा नगर गहरे शोक में डूब गया।
Aatmiyata ↔ परायापन
अतिथि का स्वागत ऐसी आत्मीयता से किया गया कि वह अभिभूत हो गया।
परिवार में मतभेद बढ़ने से सदस्यों के बीच परायापन पनपने लगता है।
Aastha ↔ अनास्था
सत्य और धर्म पर दृढ़ आस्था रखने वाले व्यक्ति को कोई विचलित नहीं कर सकता।
संस्थानों के प्रति जनसाधारण की अनास्था लोकतंत्र के लिए घातक है।
Aashish ↔ शाप
बड़ों का पावन आशीष जीवन की हर राह को आसान बना देता है।
पौराणिक कथाओं में क्रोधी ऋषियों के शाप से राजाओं का पतन वर्णित है।
Aanandit ↔ शोकाकुल
विवाह के शुभ अवसर पर सारा परिवार आनंदित था।
प्रियजन के अचानक निधन से सभी परिजन शोकाकुल हो उठे।
Aashwast ↔ सशंक
चिकित्सक के सांत्वना भरे शब्दों से रोगी पूरी तरह आश्वस्त हो गया।
अपरिचित व्यक्ति के संदिग्ध व्यवहार से सब सशंक हो गए।
Aavesh ↔ संयम
आवेश में आकर कोई भी अप्रिय वचन नहीं बोलना चाहिए।
संयम रखने से बड़े से बड़ा विवाद भी शांतिपूर्वक हल हो जाता है।
Aanandmay ↔ शोकमय
मित्रों का मिलन एक आनंदमय उत्सव बन गया।
आपदा के उपरांत बस्ती का वातावरण अत्यंत शोकमय था।
Shokgrast ↔ आनंदमग्न
शोकग्रस्त परिवार को सांत्वना देने पूरा गाँव एकत्र हो गया।
उत्सव के संगीत में सब लोग आनंदमग्न होकर नाचने लगे।
Nirash ↔ आशावान
एक बार की असफलता से निराश होकर बैठना कायरता है।
कर्मठ मनुष्य हर संकट में भी आशावान बना रहता है।
Aatmasantosh ↔ आत्मग्लानि
सच्चाई के मार्ग पर चलने से जो आत्मसंतोष मिलता है, वह अनमोल है।
झूठ बोलकर लाभ उठाने के बाद भी मन में आत्मग्लानि बनी रहती है।
Aatmavishwas ↔ आत्मसंदेह
कठिन परीक्षा में सफलता का सबसे बड़ा साधन दृढ़ आत्मविश्वास है।
आत्मसंदेह मनुष्य की आंतरिक क्षमताओं को नष्ट कर देता है।
Aananddayak ↔ कष्टप्रद
पहाड़ों की ताजी हवा में सैर करना अत्यंत आनंददायक अनुभव है।
भीषण गर्मी में लंबी पैदल यात्रा करना बहुत कष्टप्रद सिद्ध हुआ।
Aadhyaatmik ↔ भौतिक
आध्यात्मिक चिंतन से आत्मा को शांति और जीवन को वास्तविक उद्देश्य मिलता है।
केवल भौतिक सुख-साधनों के संचय से मन की तृष्णा कभी शांत नहीं होती।
Aadarshvaadi ↔ अवसरवादी
आदर्शवादी नेता ने अपने सिद्धांतों की रक्षा के लिए सत्ता का मोह त्याग दिया।
अवसरवादी राजनीतिज्ञ निजी लाभ देखकर पल भर में अपना पाला बदल लेते हैं।
Abhibhaavak ↔ आश्रित
विद्यालय की बैठक में अभिभावक अपने बच्चों की प्रगति पर चर्चा करने पहुंचे।
बुजुर्ग और छोटे बच्चे परिवार के अन्य सदस्यों पर आश्रित होते हैं।
Aatmeeya ↔ पराया
मित्र की आत्मीय वाणी ने संकट के समय उसका खोया हुआ ढाढ़स लौटा दिया।
अहंकार के कारण व्यक्ति अपने ही सगे भाइयों को भी पराया समझने लगता है।
Aagyaakaari ↔ उद्दंड
आज्ञाकारी बालक अपने गुरुजनों और बड़ों के वचनों का कभी उल्लंघन नहीं करता।
उद्दंड छात्र अनुशासन की अवहेलना कर कक्षा में बाधा उत्पन्न करता है।
Aasti ↔ दायित्व
तुलन-पत्र (बैलेंस शीट) में हर कंपनी की आस्ति का स्पष्ट ब्यौरा होता है।
बैंक ऋण समय पर न लौटाने से यह कानूनी दायित्व बन जाता है।
Aavak ↔ जावक
फसल के दिनों में मंडी में अनाज की आवक चरम पर पहुंच जाती है।
कारखाने से तैयार माल की जावक देश के विभिन्न राज्यों में हो रही है।
Aaharan ↔ जमा
अचानक चिकित्सा खर्च के लिए उसने अपनी भविष्य निधि से आहरण किया।
वेतन आते ही खाते में धन का नया जमा दर्ज हो गया।
Aadhat ↔ मजदूरी
कृषि मंडी में आढ़त का कार्य करने वाले व्यापारी किसानों और मिलों को जोड़ते हैं।
कड़ी मेहनत के बाद शाम को पल्लेदार अपनी दैनिक मजदूरी लेकर घर लौटा।
Aapoorti ↔ मांग
बाजार में प्याज की भरपूर आपूर्ति होने से कीमतों में गिरावट आई।
त्योहारों पर मिठाइयों और खोए की मांग कई गुना बढ़ जाती है।
Parishramee ↔ आलसी
परिश्रमी विद्यार्थी निरंतर अभ्यास करके परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करता है।
आलसी व्यक्ति आज का काम कल पर टालकर अपने भविष्य को अंधकारमय बना लेता है।
Udyam ↔ आलस्य
उद्यम ही सफलता की एकमात्र और वास्तविक कुंजी माना गया है।
आलस्य मनुष्य के शरीर में रहने वाला उसका सबसे बड़ा शत्रु है।
Shramadaan ↔ आरामपरस्ती
गांव के युवाओं ने मिलकर श्रमदान द्वारा टूटे हुए तटबंध की मरम्मत कर दी।
आरामपरस्ती में डूबा व्यक्ति जीवन में कोई ठोस मुकाम हासिल नहीं कर पाता।
Aatmanirbhar ↔ पराश्रित
देश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
विदेशी सहायता पर पराश्रित अर्थव्यवस्थाएं संकट के समय असहाय हो जाती हैं।
Aatmanirbharata ↔ पराश्रय
खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना राष्ट्र की पहली प्राथमिकता थी।
दूसरों के पराश्रय में जीने से व्यक्ति की अपनी मौलिक प्रतिभा कुंठित हो जाती है।
Prayaasasheel ↔ आलसी
प्रयासशील छात्र हर असफलता को नई सीख मानकर पुनः प्रयास करता है।
आलसी व्यक्ति छोटी सी बाधा आते ही सब कुछ छोड़कर बैठ जाता है।
Shramapriya ↔ आरामपसंद
श्रमप्रिय किसान अपने हाथों से कुदाल चलाकर पसीना बहाने में गर्व अनुभव करता है।
आरामपसंद व्यक्ति वातानुकूलित कमरे से बाहर निकलने में भी कतराता है।
Shramasaadhana ↔ आरामपरस्ती
श्रमसाधना से ही मनुष्य इतिहास रचता है और समाज को नई दिशा देता है।
आरामपरस्ती के कारण कई सभ्यताओं का वैभव धूल में मिल गया।
Athak-parishram ↔ आलस्य
किसानों के अथक-परिश्रम से ही बंजर धरती पर लहलहाती फसलें खड़ी हुईं।
आलस्य के कारण मनुष्य सुनहरे अवसर भी अपने हाथों से गंवा देता है।
Shramasaadhak ↔ आरामतलब
श्रमसाधक युवक ने अपनी बाहों के बल पर परिवार की तकदीर बदल दी।
आरामतलब पुत्र पैतृक संपत्ति के सहारे जीवन बिताने का सपना देखता रहा।
Shramanishtha ↔ आलस्य
सच्ची श्रमनिष्ठा ही किसी भी साधारण श्रमिक को असाधारण व्यक्तित्व बनाती है।
आलस्य में डूबा मनुष्य अपने भीतर छिपी प्रतिभा को भी कभी पहचान नहीं पाता।
Aadikaal ↔ आधुनिक-काल
हिंदी साहित्य के आदिकाल में वीरगाथाओं और रासो काव्यों की रचना हुई।
आधुनिक-काल में गद्य साहित्य और तकनीकी विधाओं का अभूतपूर्व विकास हुआ।
Madhyakaaleen ↔ आधुनिककालीन
मध्यकालीन भारत में भक्ति आंदोलन ने समाज में समरसता का संदेश दिया।
आधुनिककालीन समाज में वैज्ञानिक अनुसंधान और डिजिटल क्रांति का बोलबाला है।
Puraatanata ↔ आधुनिकता
ऐतिहासिक खंडहर अपनी पुरातनता से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
आधुनिकता की दौड़ में हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों को नहीं भूलना चाहिए।
Aadya ↔ अन्त्य
ऋग्वेद मानव जाति की सबसे आद्य लिखित कृति माना जाता है।
काव्य के अन्त्य चरण में कवि ने अपनी आध्यात्मिक अनुभूतियों को समेटा है।
Aagaamee ↔ विगत
आगामी चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
विगत वर्ष में देश ने खाद्यान्न उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया।
Aaj ↔ कल
आज का काम आज ही पूरा कर लेना बुद्धिमान व्यक्ति का लक्षण है।
कल क्या होगा, यह कोई नहीं जानता; अतः सत्कर्म में देर न करें।
Aashu ↔ दीर्घ
आशु कवि ने दिए गए विषय पर तुरंत ही सुंदर पंक्तियों की रचना कर दी।
दीर्घ कानूनी प्रक्रिया के कारण मुकदमे का फैसला आने में वर्षों लग गए।
Praacheenakaal ↔ आधुनिककाल
प्राचीनकाल में नालंदा विश्वविद्यालय विश्व भर के विद्वानों का प्रमुख केंद्र था।
आधुनिककाल में ऑनलाइन शिक्षा ने ज्ञान को घर-घर तक सुलभ बना दिया है।
Aatnkamukta ↔ आतंकित
संकट और विपत्ति के समय आतंकमुक्त का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने आतंकित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aashnkita ↔ आश्वस्त
संकट और विपत्ति के समय आशंकित का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने आश्वस्त का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Yuddharata ↔ आत्मसमर्पित
संकट और विपत्ति के समय युद्धरत का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने आत्मसमर्पित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Baagee ↔ आज्ञाकारी
संकट और विपत्ति के समय बागी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने आज्ञाकारी का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aakraamaka ↔ रक्षात्मक
संकट और विपत्ति के समय आक्रामक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रक्षात्मक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aakramana ↔ प्रतिरक्षा
संकट और विपत्ति के समय आक्रमण का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने प्रतिरक्षा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aaghaata ↔ प्रत्याघात
संकट और विपत्ति के समय आघात का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने प्रत्याघात का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Daraavanaa ↔ आकर्षक
संकट और विपत्ति के समय डरावना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने आकर्षक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aachaarya ↔ अंतेवासी
विद्या और बौद्धिक विकास में आचार्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अंतेवासी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Aandhee-toophaana ↔ शांत-वातावरण
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आंधी-तूफान की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-वातावरण का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aardra-havaa ↔ शुष्क-पवन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आर्द्र-हवा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शुष्क-पवन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aasamaana-khulanaa ↔ बादल-छाना
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आसमान-खुलना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में बादल-छाना का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aandhee-paanee ↔ खिला-धूप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आंधी-पानी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में खिला-धूप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aakaasha-meghaachchhanna ↔ आकाश-स्वच्छ
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आकाश-मेघाच्छन्न की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में आकाश-स्वच्छ का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Bijalee-kee-kadka ↔ आकाश-की-शांति
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बिजली-की-कड़क की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में आकाश-की-शांति का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aardra-vaayumndala ↔ शुष्क-वायुमंडल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आर्द्र-वायुमंडल की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शुष्क-वायुमंडल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aage ↔ पीछे
कठिन परिस्थितियों से घबराए बिना हमें निरंतर आगे बढ़ते रहने का संकल्प लेना चाहिए।
असफलता के भय से अपने कदम पीछे खींच लेना प्रगति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है।
Aana ↔ जाना
त्योहार के अवसर पर दूर-दराज से रिश्तेदारों का घर आना वातावरण को उल्लासपूर्ण बना देता है।
छुट्टियां समाप्त होते ही परदेस वापस जाना हर किसी के मन को भावुक कर देता है।
Aasmaan ↔ जमीन
पंछी उन्मुक्त होकर नीले आसमान की ऊंचाइयों में अपने पंख फैलाकर उड़ते हैं।
कितनी भी ऊंचाई हासिल कर लो, पैर हमेशा जमीन पर टिके रहने चाहिए।