Sundar ↔ कुरूप
बाहरी रूप से सुंदर दिखने वाले व्यक्ति के विचार भी सुंदर हों, यह आवश्यक नहीं; कभी-कभी कुरूप काया में भी सुंदर आत्मा वास करती है।
मन में यदि ईर्ष्या और द्वेष हो तो सुंदर चेहरा भी कुरूप और अप्रिय लगने लगता है।
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Sundar ↔ कुरूप
बाहरी रूप से सुंदर दिखने वाले व्यक्ति के विचार भी सुंदर हों, यह आवश्यक नहीं; कभी-कभी कुरूप काया में भी सुंदर आत्मा वास करती है।
मन में यदि ईर्ष्या और द्वेष हो तो सुंदर चेहरा भी कुरूप और अप्रिय लगने लगता है।
Saral ↔ कठिन
गणित के इस सरल सवाल को उलझाकर जटिल मत बनाओ।
निरंतर अभ्यास से कठिन से कठिन विषय भी अत्यंत सरल प्रतीत होने लगते हैं।
Geela ↔ सूखा
धूप में गीले कपड़े तेजी से सूखकर सूखे हो जाते हैं।
प्रकृति के प्रकोप से बचना कठिन है; कभी सूखा धरती को सुखाता है तो कभी बाढ़ सब बहा ले जाती है।
Saaf ↔ गंदा
हमें अपने परिवेश को गंदा नहीं रहने देना चाहिए बल्कि हमेशा साफ़-सुथरा रखना चाहिए।
गंदा जल और वातावरण बीमारियों को न्योता देते हैं, इसलिए साफ-सफाई जीवन का आधार है।
Chauda ↔ संकरा
राजमार्ग बहुत चौड़ा था, किंतु गाँव में प्रवेश करते ही रास्ता संकरा हो गया।
पहाड़ी रास्तों का संकरा मार्ग चालकों के संयम की परीक्षा लेता है जहां चौड़ी सड़कें दुर्लभ हैं।
Seedha ↔ टेढ़ा
सीधा रास्ता हमेशा टेढ़े और घुमावदार रास्तों की तुलना में कम समय लेता है।
टेढ़ा वृक्ष भी कठिन हवाओं को सह लेता है, जबकि सीधा पेड़ तूफान में उखड़ जाता है।
Samarth ↔ असमर्थ
समर्थ लोगों को समाज के असमर्थ और दुर्बल वर्ग की सहायता के लिए आगे आना चाहिए।
असमर्थ होने पर भी जो दूसरों की भलाई की भावना रखता है, उसका संकल्प कभी व्यर्थ नहीं जाता।
Shuddh ↔ अशुद्ध
शुद्ध जल स्वास्थ्यवर्धक होता है जबकि अशुद्ध पानी अनेक बीमारियों का कारण बनता है।
अशुद्ध विचारों को मन से बाहर निकालना ही साधना और आत्मशुद्धि का प्रथम चरण है।
Spasht ↔ अस्पष्ट
वक्ता के विचार बिल्कुल स्पष्ट थे, उनमें कोई अस्पष्ट संकेत नहीं था।
अस्पष्ट निर्देश भ्रम उत्पन्न करते हैं, इसलिए संवाद सदा स्पष्ट और पारदर्शी होना चाहिए।
Sambhav ↔ असंभव
दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम से असंभव कार्य भी संभव बन जाते हैं।
कठिन परिश्रम और अटूट आत्मविश्वास से असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी संभव हो जाते हैं।
Shreshth ↔ निम्न
सत्कर्म करने वाला व्यक्ति समाज में श्रेष्ठ पद पाता है जबकि दुर्जन निम्न माना जाता है।
निम्न सोच मनुष्य के व्यक्तित्व को संकीर्ण बना देती है, जबकि श्रेष्ठ विचार उसे ऊंचा उठाते हैं।
Sajeev ↔ निर्जीव
चित्रकार ने कैनवास पर ऐसा सजीव चित्र बनाया कि निर्जीव पत्थर भी बोलते नजर आए।
निर्जीव पत्थरों में भी मूर्तिकार अपनी छेनी से सजीव भाव उकेर देता है।
Shaant ↔ अशांत
शांत समुद्र में यात्रा सुखद होती है जबकि अशांत लहरों में जहाज डगमगाने लगता है।
अशांत मन कभी भी सत्य का निर्णय नहीं ले पाता, इसलिए ध्यान द्वारा शांति पाना आवश्यक है।
Chanchal ↔ स्थिर
ध्यान लगाने से चंचल मन भी धीरे-धीरे स्थिर और एकाग्र हो जाता है।
स्थिर जल में ही सूर्य का निर्मल प्रतिबिंब स्पष्ट दिखाई देता है, चंचल लहरों में नहीं।
Durbal ↔ सबल
न्यायपूर्ण समाज में सबल व्यक्ति कभी दुर्बल पर अत्याचार नहीं करता।
सबल का धर्म है कि वह दुर्बल की रक्षा करे, न कि उस पर अपना प्रभुत्व जमाए।
Shaktishaali ↔ शक्तिहीन
शक्तिशाली राष्ट्र का दायित्व है कि वह शक्तिहीन पड़ोसियों की संप्रभुता का आदर करे।
बिना नैतिक बल के मनुष्य बाह्य रूप से कितना भी संपन्न हो, आंतरिक रूप से शक्तिहीन रहता है।
Sookshma ↔ स्थूल
सूक्ष्म विचार ही कालांतर में स्थूल कर्मों और उपलब्धियों में रूपांतरित होते हैं।
मनुष्य की आंखें स्थूल पदार्थों को देख पाती हैं, किंतु अणु जैसे सूक्ष्म तत्वों को नहीं।
Saakaar ↔ निराकार
भक्त अपने आराध्य के साकार रूप की उपासना करते हैं, जबकि दार्शनिक निराकार ब्रह्म का चिंतन करते हैं।
भक्त साकार रूप में ईश्वर का ध्यान करते हैं, जबकि ज्ञानी निराकार ब्रह्म की अनुभूति करते हैं।
Saguna ↔ निर्गुण
सूरदास जी ने सगुण कृष्ण भक्ति का गान किया, वहीं कबीरदास जी ने निर्गुण राम की आराधना की।
निर्गुण संत कबीर ने परमात्मा को समस्त उपाधियों से परे एक रस माना है।
Kshanik ↔ शाश्वत
सांसारिक सुख क्षणिक होते हैं, जबकि सत्य और करुणा का आनंद शाश्वत होता है।
सत्य और धर्म का मूल्य शाश्वत है जो युगों के परिवर्तन के बाद भी कभी नहीं मिटता।
Sthaayi ↔ अस्थायी
सच्चे मित्र स्थायी संबल बनते हैं, जबकि झूठे साथी केवल अस्थायी लाभ के लिए जुड़ते हैं।
संसार के समस्त सुख-दुख अस्थायी हैं, इसलिए सुख में अहंकार और दुख में विलाप अनुचित है।
Durlabh ↔ सुलभ
सच्चा मार्गदर्शन अत्यंत दुर्लभ होता है, जबकि व्यर्थ सलाह हर चौराहे पर सुलभ मिल जाती है।
जो ज्ञान सुलभ है उसकी उपेक्षा न करें, क्योंकि वह दुर्लभ अवसर का निर्माण करता है।
Dushkar ↔ सुकर
सत्य के मार्ग पर चलना दुष्कर हो सकता है, किंतु आत्मसंतोष के लिए यही सुकर मार्ग है।
अनुभवी मार्गदर्शक के सान्निध्य में अत्यंत दुष्कर कार्य भी सुकर और सरल बन जाता है।
Saghan ↔ विरल
तराई के सघन वनों की तुलना में पर्वतीय शिखरों पर वनस्पति विरल पाई जाती है।
पहाड़ों की अत्यधिक ऊंचाई पर विरल वायु के कारण सांस लेना कठिन हो जाता है।
Shwet ↔ श्याम
श्वेत हंस और श्याम वर्ण का कौवा दोनों के रंग में गहरा अंतर होता है।
वर्षा ऋतु में आकाश में घिरते श्याम मेघ किसानों के हृदय में हर्ष का संचार करते हैं।
Susheel ↔ दुःशील
सुशील कन्या परिवार का गौरव बढ़ाती है जबकि दुःशील संतान बदनामी लाती है।
दुःशील संगति से अच्छे संस्कार भी नष्ट हो जाते हैं, इसलिए सुशील मित्रों की संगति करें।
Sajjan ↔ दुर्जन
सज्जन पुरुष सदा परोपकार में रत रहते हैं जबकि दुर्जन दूसरों को हानि पहुँचाने में।
दुर्जन की मीठी बातों से भी सावधान रहना चाहिए क्योंकि उसके मन में कपट छिपा रहता है।
Sadhu ↔ असाधु
साधु पुरुषों का सानिध्य पापों को हरता है जबकि असाधु संगति पतन की ओर ले जाती है।
असाधु प्रवृत्ति के लोग दूसरों के पतन में ही अपना हित तलाशते हैं।
Shisht ↔ अशिष्ट
शिष्ट आचरण सभ्य समाज की पहचान है, अशिष्ट बातें किसी को शोभा नहीं देतीं।
अशिष्ट व्यवहार किसी भी सुसंस्कृत सभा में स्वीकार्य नहीं होता, शिष्टाचार ही सम्मान दिलाता है।
Sabhya ↔ असभ्य
सभ्य राष्ट्र विवादों का हल शांतिपूर्ण संवाद से निकालते हैं, असभ्य युद्ध से नहीं।
असभ्य वाणी बोलने से अपनी ही हीनता प्रकट होती है, इसलिए मधुर और सभ्य बोलें।
Swatantra ↔ परतंत्र
स्वतंत्र देश का नागरिक सिर उठाकर जीता है, जबकि परतंत्र समाज दासता की बेड़ियों में जकड़ा रहता है।
परतंत्र व्यक्ति स्वर्ण के पिंजरे में भी स्वतंत्रता के खुले आकाश के लिए तड़पता रहता है।
Subodh ↔ दुर्बोध
शिक्षक ने सुबोध भाषा में गणित समझाया, जिससे दुर्बोध सूत्र भी आसानी से समझ आ गए।
कठिन भाषा का दुर्बोध ग्रंथ गुरु की सरल व्याख्या से सुबोध और सुगम बन जाता है।
Vistrit ↔ संक्षिप्त
परीक्षा में विस्तृत उत्तर के स्थान पर संक्षिप्त और सारगर्भित बिंदु लिखना बेहतर होता है।
संक्षिप्त उत्तर में भी यदि मुख्य तथ्य समाहित हों तो वह विस्तृत निबंध से अधिक प्रभावी होता है।
Sankeern ↔ विस्तीर्ण
संकीर्ण मानसिकता वाले लोग हमेशा अपने दायरे में सिमटे रहते हैं जबकि विस्तीर्ण दृष्टि विश्व को अपना मानती है।
महासागर का विस्तीर्ण जलविस्तार क्षितिज के पार तक फैला दृष्टिगोचर होता है।
Vyaapak ↔ सीमित
इस नीति का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ा, इसका असर केवल सीमित क्षेत्र तक नहीं रहा।
सीमित साधनों के बावजूद दृढ संकल्प से मनुष्य असीम उपलब्धियां अर्जित कर सकता है।
Aseem ↔ ससीम
ईश्वर की अनुकंपा असीम होती है, जिसकी तुलना ससीम मानवीय क्षमताओं से नहीं की जा सकती।
मनुष्य की बुद्धि ससीम है, जबकि यह ब्रह्मांड असीम और अनंत रहस्यों से परिपूर्ण है।
Anant ↔ सांत
नीला आकाश अनंत प्रतीत होता है, जबकि धरती की सीमाएं सांत और निश्चित हैं।
भौतिक संसार का विस्तार सांत है, जबकि चेतना का परमात्मा रूप अनंत है।
Sakriya ↔ निष्क्रिय
स्वास्थ्य के लिए सक्रिय जीवनशैली आवश्यक है, निष्क्रिय पड़े रहने से बीमारियां घेर लेती हैं।
निष्क्रिय रहकर केवल भाग्य के भरोसे बैठने से जीवन में कोई उपलब्धि हासिल नहीं होती।
Swabhavik ↔ अस्वाभाविक
दुख में आंसू बहना स्वाभाविक प्रतिक्रिया है, कठोर होकर भावहीन बने रहना अस्वाभाविक है।
अस्वाभाविक व्यवहार से बनावटीपन झलकता है, सहजता ही व्यक्ति को गरिमा प्रदान करती है।
Samriddh ↔ विपन्न
समृद्ध किसान खुशहाली से जीवन बिताता है जबकि विपन्न मजदूर दो वक्त की रोटी को तरसता है।
विपन्न वर्ग के उत्थान के बिना किसी भी राष्ट्र की संपूर्ण समृद्धि संभव नहीं है।
Sampanna ↔ विपन्न
साधनों से संपन्न होने पर भी मनुष्य यदि विनम्र न हो तो उसका वैभव व्यर्थ है।
विपन्न वर्ग के उत्थान के बिना किसी भी राष्ट्र की संपूर्ण समृद्धि संभव नहीं है।
Sukhee ↔ दुखी
संतोषी व्यक्ति सदा सुखी रहता है जबकि लोभी मनुष्य हमेशा दुखी ही रहता है।
दुखी जनों के कष्ट का निवारण करना ही मानव जीवन का सर्वोच्च कर्तव्य और पुण्य है।
Satya ↔ असत्य
सत्य वचन भले ही कड़वे लगें, पर असत्य मीठा होकर भी पतन कराता है।
असत्य का सहारा लेने वाले को एक झूठ छिपाने के लिए सौ नए झूठ बोलने पड़ते हैं।
Mithya ↔ सत्य
मिथ्या प्रपंच में उलझने के बजाय यथार्थ सत्य को समझना ही बुद्धिमानी है।
सत्य की राह कठिन अवश्य होती है, किंतु अंततः विजय सत्य की ही होती है।
Saras ↔ नीरस
कवि का काव्य अत्यंत सरस था, कोई भी श्रोता उसे नीरस नहीं कह सका।
नीरस व्याख्यान श्रोताओं को ऊब से भर देता है, उसमें रोचक उदाहरण होने चाहिए।
Sushikshit ↔ अशिक्षित
सुशिक्षित समाज में कुप्रथाओं का कोई स्थान नहीं होता, अशिक्षित लोग ही अंधविश्वास में फंसते हैं।
अशिक्षित समाज को विद्या का प्रकाश देकर ही राष्ट्र की सर्वांगीण प्रगति संभव है।
Shikshit ↔ अशिक्षित
एक शिक्षित नागरिक अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों के प्रति भी सचेत रहता है।
अशिक्षित समाज को विद्या का प्रकाश देकर ही राष्ट्र की सर्वांगीण प्रगति संभव है।
Shraant ↔ अश्रांत
दिनभर के परिश्रम से श्रांत मजदूर रात्रि में गहरी नींद सोता है।
अश्रांत परिश्रमी व्यक्ति बिना थके अपने निर्धारित लक्ष्य की दिशा में अग्रसर रहता है।
Jaagrat ↔ सुषुप्त
जाग्रत राष्ट्र ही अपनी सीमाओं और अधिकारों की रक्षा कर सकता है, सुषुप्त समाज पिछड़ जाता है।
सुषुप्त प्रतिभा को उचित प्रोत्साहन मिलने पर वह अद्भुत चमत्कार कर दिखाती है।
Sheelvaan ↔ चरित्रहीन
शीलवान व्यक्ति विपत्ति में भी मर्यादा नहीं छोड़ता।
चरित्रहीन व्यक्ति धन और सत्ता पाकर भी कभी आत्मिक शांति प्राप्त नहीं कर पाता।
Sugam ↔ दुर्गम
पुल बनने से नदी पार करना सुगम हो गया, अन्यथा पहले यह अत्यंत दुर्गम था।
पहाड़ी मार्ग पहले दुर्गम हुआ करते थे, किंतु नई सड़कों ने यात्रा को सुगम बना दिया है।
Vishesh ↔ सामान्य
प्रत्येक बालक में कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है, कोई भी सामान्य नहीं होता।
सामान्य नागरिक की देशभक्ति ही किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति और संबल होती है।
Saadhaaran ↔ असाधारण
साधारण जीवन जीने वाले महापुरुषों के विचार असाधारण और प्रेरणादायी होते हैं।
असाधारण प्रतिभा भी कठिन परिश्रम के बिना अपना पूर्ण चमत्कार नहीं दिखा सकती।
Supt ↔ जाग्रत
मनुष्य के भीतर सुप्त शक्तियां सही प्रेरणा मिलते ही जाग्रत हो जाती हैं।
जाग्रत समाज ही अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सदा सजग रहता है।
Vyakti-gat ↔ सार्वजनिक
सार्वजनिक हित के सामने व्यक्तिगत स्वार्थ का त्याग करना ही सच्ची देशभक्ति है।
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना प्रत्येक देशवासी का पावन नागरिक कर्तव्य है।
Saarvajanik ↔ निजी
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना हर नागरिक का परम धर्म है।
निजी स्वार्थ को त्यागकर सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देना ही महानता है।
Pramukh ↔ सामान्य
सम्मेलन में प्रमुख हस्तियों का भव्य स्वागत हुआ।
सामान्य नागरिक की देशभक्ति ही किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति और संबल होती है।
Sureela ↔ बेसुरा
गायक का सुरीला कंठ सभा को मंत्रमुग्ध कर गया।
बेसुरा गायन कानों को खटकता है, जबकि सुरीली तान मन को आनंदित कर देती है।
Ugra ↔ शांत
उग्र रूप धारण किए बिना भी शांत और सौम्य वाणी से कठिन समस्याओं का समाधान हो सकता है।
शांत समुद्र में यात्रा सुखद होती है जबकि अशांत लहरों में जहाज डगमगाने लगता है।
Saumya ↔ उग्र
माता का सौम्य स्वभाव बालकों को सुरक्षा और स्नेह का संबल देता है।
उग्र स्वभाव व्यक्ति के विवेक को नष्ट कर संबंधों में कड़वाहट घोल देता है।
Aardra ↔ शुष्क
वर्षा ऋतु में वातावरण आर्द्र हो जाता है जिससे कपड़े देर से सूखते हैं।
रेगिस्तान की शुष्क पवन शरीर की नमी को सोख लेती है और प्यास बढ़ा देती है।
Santusht ↔ असंतुष्ट
ईमानदार व्यक्ति थोड़े में भी संतुष्ट रहता है जबकि लोभी कभी संतुष्ट नहीं होता।
असंतुष्ट मन सदा दूसरों के सुख को देखकर ईर्ष्या की आग में जलता रहता है।
Kutil ↔ सरल
कुटिल राजनीतिज्ञ अपनी बातों में फंसाते हैं जबकि सरल व्यक्ति सच्चाई बोलता है।
गणित के इस सरल सवाल को उलझाकर जटिल मत बनाओ।
Udaaramana ↔ संकीर्णमना
उदारमना व्यक्ति सभी धर्मों का आदर करता है, संकीर्णमना द्वेष पालता है।
संकीर्णमना व्यक्ति कभी विशाल समाज का नेतृत्व नहीं कर सकता, उदारता ही सम्मान दिलाती है।
Supraapya ↔ दुष्प्राप्य
आजकल इंटरनेट के माध्यम से ज्ञान सुप्राप्य हो गया है।
घने जंगलों में पाई जाने वाली संजीवनी बूटी अत्यंत दुष्प्राप्य मानी जाती है।
Sachest ↔ निश्चेष्ट
दवा लगते ही मरीज सचेष्ट हो उठा, पहले वह निश्चेष्ट पड़ा था।
संकट के समय निश्चेष्ट बैठने के बजाय सक्रिय होकर समाधान खोजना चाहिए।
Sukrit ↔ दुष्कृत
सुकृत कर्म करने से आत्मा को शांति मिलती है, दुष्कृत सदा पश्चाताप देता है।
दुष्कृत करने वाला भले ही कानून से बच जाए, अंतरात्मा के दंड से नहीं बच सकता।
Sachetan ↔ अचेतन
सचेतन नागरिक अपने देश के प्रति सदैव सजग रहता है।
अचेतन मन में दबी इच्छाएं और स्मृतियां मनुष्य के व्यवहार को प्रभावित करती हैं।
Sugandhit ↔ दुर्गंधयुक्त
गुलाब का सुगंधित इत्र मन को मोह लेता है।
दुर्गंधयुक्त नाले संक्रामक रोगों का केंद्र बन जाते हैं जिन्हें ढकना आवश्यक है।
Suruchipoorna ↔ अरुचिकर
गृह-सज्जा सुरुचिपूर्ण ढंग से की गई थी।
अरुचिकर भोजन भी भूख लगने पर स्वादिष्ट और तृप्तिकारी प्रतीत होने लगता है।
Sulakshan ↔ कुलक्षण
सुलक्षण बालक परिवार का मान बढ़ाता है।
बचपन के कुलक्षण यदि समय रहते न सुधारे जाएं तो आगे चलकर विनाशकारी बनते हैं।
Saubhaagyashaali ↔ दुर्भाग्यशाली
वे सौभाग्यशाली हैं जिन्हें गुरु का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
दुर्भाग्यशाली मनुष्य भी यदि सतत परिश्रम करे तो अपने भाग्य की रेखाएं बदल सकता है।
Sarvagya ↔ अल्पज्ञ
संसार में केवल ईश्वर ही सर्वज्ञ है, मनुष्य तो अल्पज्ञ ही रहता है।
अल्पज्ञ व्यक्ति थोड़ा सा जानकर ही स्वयं को सर्वज्ञाता मानकर अहंकार करने लगता है।
Sanyog ↔ वियोग
श्रृंगार रस के दो पक्ष होते हैं — संयोग और वियोग।
प्रियजनों का वियोग हृदय को भारी पीड़ा पहुंचाता है।
Apmaan ↔ सम्मान
किसी निर्धन का अपमान करना मानवता के विरुद्ध घोर पाप है।
गुरुजनों को यथोचित सम्मान देना चाहिए, किसी का तिरस्कार नहीं करना चाहिए।
Sammaan ↔ तिरस्कार
गुरुजनों को यथोचित सम्मान देना चाहिए, किसी का तिरस्कार नहीं करना चाहिए।
सत्कर्म का पुरस्कार मिलता है जबकि दुराचार का तिरस्कार ही फल होता है।
Stuti ↔ निंदा
भक्त प्रभु की स्तुति करते हैं और अहंकार की निंदा करते हैं।
निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाय — कबीरदास जी के अनुसार निंदा करने वाला व्यक्ति सुधारक होता है।
Swami ↔ सेवक
दयालु स्वामी अपने सेवक को परिवार के सदस्य की भांति स्नेह देता है।
हनुमान जी भगवान श्रीराम के अनन्य सेवक और भक्त थे।
Grihastha ↔ संन्यासी
गृहस्थ धर्म निभाते हुए भी मनुष्य संन्यासी जैसी पवित्रता बनाए रख सकता है।
संन्यासी ने सांसारिक मोह-माया का त्याग कर सत्य की खोज शुरू की।
Graameen ↔ शहरी
ग्रामीण जीवन की शांति और शुद्ध वायु शहरों की भागदौड़ में नहीं मिलती।
शहरी चकाचौंध में कभी-कभी मनुष्य प्रकृति की सादगी और शांति को भूल बैठता है।
Shahar ↔ गाँव
शहर की चकाचौंध से दूर गाँव की सादगी मन को सुकून देती है।
भारत की आत्मा उसके गाँवों में बसती है, जिसे शहरों के विकास के साथ नहीं भूलना चाहिए।
Swadesh ↔ परदेश
स्वदेश की मिट्टी की खुशबू परदेश में रहने वाले प्रवासी को सदा अपनी ओर खींचती है।
परदेश में कितना भी धन मिले, स्वदेश जैसी आत्मीयता कहीं नहीं मिलती।
Videsh ↔ स्वदेश
विदेश यात्रा से ज्ञान और दृष्टिकोण का विस्तार होता है।
स्वदेश की मिट्टी की खुशबू परदेश में रहने वाले प्रवासी को सदा अपनी ओर खींचती है।
Sangathan ↔ विघटन
मजबूत संगठन से कठिन लक्ष्य भी पा लिए जाते हैं, आंतरिक कलह से विघटन तय है।
राष्ट्रविरोधी ताकतें देश के विघटन का षड्यंत्र रचती हैं, जिसे सजग नागरिक विफल कर देते हैं।
Swaagat ↔ तिरस्कार
अतिथि का द्वार पर आत्मीय स्वागत किया गया।
सत्कर्म का पुरस्कार मिलता है जबकि दुराचार का तिरस्कार ही फल होता है।
Samraat ↔ सामंत
सम्राट का आदेश पूरे साम्राज्य के सामंतों और जनता के लिए सर्वोपरि था।
सामंत अपने क्षेत्र में कर वसूलते थे और सम्राट को खिराज भेजते थे।
Purush ↔ स्त्री
संविधान की दृष्टि में पुरुष और स्त्री दोनों को समान अधिकार व अवसर प्राप्त हैं।
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः — जहां स्त्री का सम्मान होता है वहां देवों का वास होता है।
Shikshak ↔ छात्र
कक्षा में शिक्षक ज्ञान प्रदान करते हैं और छात्र एकाग्रता से अध्ययन करते हैं।
अनुशासित छात्र अपने गुरु का आदर कर जीवन में महान ऊंचाइयां छूता है।
Shishya ↔ गुरु
सच्चा शिष्य गुरु द्वारा दिए गए ज्ञान को जनकल्याण में समर्पित करता है।
छंद शास्त्र में गुरु मात्रा का भार दो गिना जाता है जबकि लघु मात्रा का मान एक होता है।
Vakta ↔ श्रोता
कुशल वक्ता अपने विचारों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है।
सभामंच पर ओजस्वी वक्ता और ध्यानमग्न श्रोता का सामंजस्य अद्भुत था।
Swatantrata ↔ परतंत्रता
स्वतंत्रता सेनानियों के असीम बलिदान से देश को परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्ति मिली।
परतंत्रता मनुष्य के आत्मसम्मान और संस्कृति को नष्ट कर देती है।
Gopneeya ↔ सार्वजनिक
सुरक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जाते।
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना प्रत्येक देशवासी का पावन नागरिक कर्तव्य है।
Vyasthi ↔ समष्टि
व्यष्टि और समष्टि के बीच संतुलन ही स्वस्थ समाज की पहचान है।
समष्टि के कल्याण में ही व्यष्टि का हित समाहित रहता है।
Snvidhaana ↔ अराजकता
संविधान देश के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है और शासन को मर्यादा में बांधता है।
कानून व्यवस्था के ध्वस्त होते ही समाज में अराजकता फैल जाती है और निर्बल वर्ग असुरक्षित हो जाता है।
Sattaaroodh ↔ विपक्षी
सत्तारूढ़ दल पर जनकल्याणकारी योजनाओं को निष्पक्ष रूप से धरातल पर उतारने की जवाबदेही होती है।
संसद में विपक्षी दल नीतियों की निष्पक्ष समीक्षा कर शासन की कमियों को उजागर करता है।
Sarvasammati ↔ मतभेद
ग्राम सुधार योजना का प्रस्ताव पंचायत में सभी सदस्यों की सर्वसम्मति से पारित हो गया।
बजट के आवंटन को लेकर समिति के सदस्यों के बीच गहरा मतभेद उभर कर सामने आया।
Sahabhaagitaa ↔ तटस्थता
स्वच्छ भारत अभियान की वास्तविक सफलता जन-सहभागिता पर ही पूरी तरह निर्भर करती है।
समाज की समस्याओं के प्रति जागरूक न होकर तटस्थता बरतना नागरिक दायित्वों की उपेक्षा है।
Svaichchhika ↔ बाध्यकारी
रक्तदान शिविर में युवाओं ने स्वैच्छिक रूप से आगे आकर बड़ी संख्या में रक्तदान किया।
यातायात के नियमों का पालन करना हर नागरिक के लिए बाध्यकारी होता है, न कि ऐच्छिक।
Satyanishthaa ↔ भ्रष्टाचार
अधिकारी ने पूरी सत्यनिष्ठा के साथ सरकारी धन का सदुपयोग करते हुए निर्माण कार्य पूरा कराया।
भ्रष्टाचार के कारण समाज में योग्य व्यक्तियों का हक मारा जाता है और व्यवस्था कमजोर होती है।
Snskriti ↔ विकृति
हमारे देश की प्राचीन संस्कृति विविधता में एकता और पारस्परिक सद्भाव का संदेश देती है।
नशाखोरी और अभद्रता समाज के ताने-बाने में पैदा होने वाली गंभीर विकृति के लक्षण हैं।
Saamaajika ↔ असामाजिक
सामूहिक विवाह और उत्सव सामाजिक मेलजोल व भाईचारे को सुदृढ़ करने के उत्तम माध्यम हैं।
सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले असामाजिक तत्वों पर पुलिस कड़ी नजर रखती है।
Saamudaayika ↔ व्यक्तिगत
गांव के विकास के लिए सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया जहाँ सभी एकत्र हो सकें।
सार्वजनिक निर्णय लेते समय व्यक्तिगत लाभ और स्वार्थ को पीछे रखना पड़ता है।
Samarasataa ↔ विषमता
समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने से ही राष्ट्र में वास्तविक समरसता स्थापित होती है।
आर्थिक और सामाजिक विषमता को दूर किए बिना एक सशक्त समाज का निर्माण संभव नहीं है।
Samaanataa ↔ असमानता
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव किए बिना समानता की गारंटी है।
अवसरों की असमानता से वंचित वर्गों के युवाओं का आत्मविश्वास डगमगा जाता है।
Bhedabhaava ↔ सद्भाव
विद्यालय में सभी छात्रों के साथ बिना किसी भेदभाव के समान व्यवहार किया जाना चाहिए।
विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सद्भाव बनाए रखने के लिए शांति समिति की बैठक आयोजित हुई।
Bahishkaara ↔ समावेशन
स्वाधीनता आंदोलन के समय विदेशी वस्तुओं का पूर्ण बहिष्कार कर स्वदेशी अपनाने का आह्वान किया गया।
दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में लाने के लिए नीतिगत समावेशन और विशेष सुविधाएं आवश्यक हैं।
Sveekriti ↔ अस्वीकृति
आधुनिक प्रगतिशील विचारों को समाज की स्वीकृति मिलने में कुछ समय अवश्य लगता है।
कुप्रथाओं और अंधविश्वासों की सार्वभौमिक अस्वीकृति से ही समाज उन्नत बन सकता है।
Sharana ↔ निष्कासन
युद्धग्रस्त क्षेत्र से आए असहाय परिवारों को शरण देकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
समाज विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर अपराधी का मोहल्ले से निष्कासन कर दिया गया।
Kureeti ↔ सुरीति
दहेज प्रथा जैसी अमानवीय कुरीति के विरुद्ध समाज के सभी प्रबुद्ध लोगों को आवाज उठानी चाहिए।
अतिथि सत्कार और बड़ों का आदर करना समाज की प्राचीन व कल्याणकारी सुरीति है।
Shaharee ↔ देहाती
शहरी जीवन में तकनीकी सुविधाएं प्रचुर मात्रा में हैं परंतु प्रदूषण और भागदौड़ भी अधिक है।
देहाती परिवेश में खुली हवा, हरियाली और परस्पर मेलजोल की आत्मीयता देखने को मिलती है।
Ekaakee ↔ सकुटुंब
अकेले फ्लैट में रहने वाला वृद्ध व्यक्ति एकाकी जीवन की तन्हाई से जूझ रहा था।
विवाह समारोह में पधारे सभी अतिथियों का सकुटुंब अर्थात परिवार सहित हार्दिक स्वागत किया गया।
Vidhura ↔ सपत्नीक
पत्नी के देहांत के पश्चात वह वृद्ध व्यक्ति विधुर जीवन बिताते हुए एकांत में रहने लगा।
धार्मिक अनुष्ठान और यज्ञ में यजमान को सपत्नीक अर्थात पत्नी सहित बैठने का शास्त्रीय विधान है।
Shayana ↔ जागरण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार रात्रि में समय पर शयन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
परीक्षा की तैयारी के लिए छात्रों ने पूरी रात जागरण किया और पढ़ाई में जुटे रहे।
Svachchhataa ↔ गंदगी
आसपास स्वच्छता बनाए रखने से संक्रामक रोगों का फैलाव रुकता है और पर्यावरण सुंदर बनता है।
सड़क किनारे फैली गंदगी से दुर्गंध उठ रही थी और मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा था।
Svaasthyakara ↔ अस्वास्थ्यकर
हरी सब्जियां, ताजे फल और स्वच्छ पेयजल स्वास्थ्यकर जीवनशैली की आधारशिला हैं।
खुले में बिकने वाला दूषित भोजन और बासी खाद्य पदार्थ अस्वास्थ्यकर सिद्ध होते हैं।
Savaaree ↔ पैदल
दफ्तर जाने के लिए उन्होंने मेट्रो ट्रेन की सवारी को सबसे तेज और सुविधाजनक विकल्प माना।
स्वास्थ्य और फिटनेस बनाए रखने के लिए प्रातःकाल पैदल चलना एक उत्तम व्यायाम है।
Suvyavasthaa ↔ कुव्यवस्था
स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत शहर की यातायात और जल सुव्यवस्था की सर्वत्र सराहना हुई।
अस्पताल में दवाओं की कमी और गंदगी प्रशासन की घोर कुव्यवस्था का जीता-जागता प्रमाण थी।
Sauhaarda ↔ कटुता
ईद और दीवाली पर एक-दूसरे के घर जाकर बधाई देने से समाज में आपसी सौहार्द प्रगाढ़ होता है।
अफवाहों और भड़काऊ भाषणों के कारण दोनों पक्षों के मध्य अविश्वास और कटुता उत्पन्न हो गई।
Vaimanasya ↔ सौमनस्य
पुरानी रंजिश और वैमनस्य को भुलाकर दोनों परिवारों ने आपस में हाथ मिला लिए।
पड़ोसियों के बीच प्रेम और सौमनस्य का वातावरण रहने से जीवन सुखमय बन जाता है।
Shukla Paksha ↔ कृष्ण पक्ष
हिंदू पंचांग में चंद्रमा की कलाओं के आधार पर शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष निर्धारित होते हैं।
कृष्ण पक्ष में रातें क्रमशः अंधेरी होती जाती हैं, जबकि शुक्ल पक्ष में चांदनी बढ़ती है।
Prabhat ↔ संध्या
प्रभात की ताजी किरणें उमंग लाती हैं और संध्या का शांत वातावरण विश्राम का संदेश देता है।
संध्या होते ही पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौट आते हैं जिन्हें वे प्रभात में छोड़ गए थे।
Usha ↔ संध्या
उषा की लालिमा नभ में बिखरते ही संपूर्ण प्रकृति में नवचेतना का संचार हो जाता है।
संध्या होते ही पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौट आते हैं जिन्हें वे प्रभात में छोड़ गए थे।
Bhor ↔ सांझ
किसान भोर होते ही खेतों पर चल पड़ते हैं और सांझ ढलने पर ही घर वापस लौटते हैं।
सांझ के झुटपुटे में चरवाहे अपनी गायों को चराकर गांव की ओर हांक लाते हैं।
Suryoday ↔ सूर्यास्त
सूर्योदय के समय पूर्व दिशा स्वर्णिम और सूर्यास्त के समय पश्चिम दिशा सिंदूरी दिखती है।
सूर्यास्त के साथ ही दिनभर की आपाधापी थम जाती है और शीतल निशा का आगमन होता है।
Shikhar ↔ तलहटी
पर्वतारोही तलहटी से कठिन चढ़ाई आरंभ कर अंततः बर्फ से ढके शिखर पर ध्वज फहराते हैं।
पर्वत की तलहटी में घने वन और नदियां बहती हैं, जबकि शिखर निर्जन और हिमच्छादित रहता है।
Baadh ↔ सूखा
नदियों में बाढ़ आने से गांव डूब जाते हैं, जबकि सूखे में पीने के पानी की किल्लत हो जाती है।
प्रकृति के प्रकोप से बचना कठिन है; कभी सूखा धरती को सुखाता है तो कभी बाढ़ सब बहा ले जाती है।
Greeshm ↔ शीत
ग्रीष्म की तीखी तपन के पश्चात आने वाली शीत ऋतु तन और मन दोनों को राहत देती है।
शीत ऋतु में गुनगुनी धूप का आनंद ग्रीष्म ऋतु की छाया जैसा सुखद प्रतीत होता है।
Ushna ↔ शीतल
रेगिस्तान की उष्ण हवाओं के मध्य शीतल जल का झरना किसी वरदान से कम नहीं लगता।
पर्वतों से बहती शीतल बयार थके हुए यात्रियों की उष्ण थकान को पलभर में हर लेती है।
Tapt ↔ शीतल
तप्त बालू पर नंगे पैर चलना कठिन होता है, जबकि शीतल जलधारा में चलना अत्यंत सुखद है।
पर्वतों से बहती शीतल बयार थके हुए यात्रियों की उष्ण थकान को पलभर में हर लेती है।
Jaagriti ↔ सुषुप्ति
प्रभात की प्रथम किरण के साथ प्रकृति में नव जागृति की लहर दौड़ जाती है।
शीत ऋतु में अनेक वन्य जीव सुषुप्ति में चले जाते हैं और वसंत में जागृति प्राप्त करते हैं।
Samudra ↔ मरुस्थल
पृथ्वी का एक छोर अपार जलराशि वाले समुद्र से भरा है तो दूसरा शुष्क मरुस्थल से आच्छादित है।
मरुस्थल में पानी की एक-एक बूंद बहुमूल्य मानी जाती है, जहां दूर-दूर तक केवल रेत ही रेत होती है।
Udgam ↔ संगम
गंगा का उद्गम गंगोत्री हिमनद से होता है और प्रयागराज में उसका त्रिवेणी संगम दर्शनीय है।
पर्वतों से निकली नदियां जब पावन संगम पर मिलती हैं तो वह तीर्थ बन जाता है।
Surya ↔ चंद्र
सूर्य के तेज के समक्ष तारे छिप जाते हैं और चंद्र की शीतल आभा में नभ दमक उठता है।
सूर्य दिन में समस्त जगत को ऊर्जा प्रदान करता है और चंद्र रात्रि में शीतलता बिखरता है।
Saur ↔ चांद्र
खगोलशास्त्र में सौर वर्ष की गणना सूर्य की गति से और चांद्र मास की गणना चंद्रमा से होती है।
चांद्र कैलेंडर और सौर कैलेंडर के दिनों के अंतर को समायोजित करने के लिए अधिक मास आता है।
Bhaanu ↔ शशि
भानु की प्रखर किरणें संपूर्ण जगत को प्रकाशवान करती हैं, जबकि शशि की किरणें सुखद शीतलता देती हैं।
नीले आकाश में पूर्णिमा का शशि भानु के अस्त होने के उपरांत मनमोहक रूप धर लेता है।
Toofan ↔ शांति
समुद्र में उठे भीषण तूफान के शांत होने पर ही चारों ओर सुखद शांति का वातावरण बना।
भीषण तूफान के थम जाने के बाद फैली गहरी शांति प्रकृति के नवजीवन का संकेत देती है।
Kallol ↔ शांति
पवन के झोंकों से सरिता में कल्लोल होने लगा, जिससे जल की पूर्व शांति भंग हो गई।
भीषण तूफान के थम जाने के बाद फैली गहरी शांति प्रकृति के नवजीवन का संकेत देती है।
Dhundh ↔ स्पष्टता
सर्दियों की सुबह छाई घनी धुंध धूप खिलने पर अद्भुत स्पष्टता में बदल गई।
सर्दियों की सुबह छाई धुंध छंटते ही वातावरण में अद्भुत स्पष्टता फैल गई।
Kuhaasa ↔ स्वच्छ आकाश
पहाड़ी मार्ग पर कुहासा छाने से दृश्यता समाप्त हो गई, जो स्वच्छ आकाश होने पर ही लौटी।
पहाड़ी घाटियों में कुहासा हटने पर नीला स्वच्छ आकाश पर्यटकों का मन मोह लेता है।
Saagar ↔ तट
उफनता सागर दूर तक जलमग्न दिखाई देता है और उसकी लहरें आकर शांत तट से टकराती हैं।
नाविक ने यात्रियों को सुरक्षित तट पर उतार दिया और पुनः उफनती मझधार में उतर गया।
Sukaal ↔ अकाल
पर्याप्त मानसूनी वर्षा से देश में सुकाल का वातावरण बना और अकाल का भय समाप्त हो गया।
अकाल के दिनों में अन्न की भारी कमी हो गई थी, किंतु सुकाल आते ही कोठार भर गए।
Shishir ↔ ग्रीष्म
शिशिर की कंपकंपी छुड़ाने वाली ठंडक के बाद प्रकृति ग्रीष्म की तपन से तपती है।
ग्रीष्म की तीखी तपन के पश्चात आने वाली शीत ऋतु तन और मन दोनों को राहत देती है।
Varsha ↔ सूखा
वर्षा ऋतु में नदियां लबालब भर जाती हैं, जबकि सूखे में उनकी तलहटी की रेत दिखने लगती है।
प्रकृति के प्रकोप से बचना कठिन है; कभी सूखा धरती को सुखाता है तो कभी बाढ़ सब बहा ले जाती है।
Jwalant ↔ शांत
ज्वालामुखी से निकलता ज्वलंत लावा कुछ दिनों बाद ठंडा होकर शांत चट्टान बन जाता है।
शांत समुद्र में यात्रा सुखद होती है जबकि अशांत लहरों में जहाज डगमगाने लगता है।
Saavan ↔ भादों
लोकगीतों में सावन के झूले और भादों की घनघोर झड़ी का बड़ा मार्मिक वर्णन मिलता है।
सावन की फुहारों के पश्चात भादों की घनघोर झड़ी नदियों को लबालब भर देती है।
Sharad ↔ ग्रीष्म
शरद ऋतु का निर्मल आकाश और शांत रातें ग्रीष्म ऋतु के तपन भरे दिनों से सर्वथा भिन्न हैं।
ग्रीष्म की तीखी तपन के पश्चात आने वाली शीत ऋतु तन और मन दोनों को राहत देती है।
Ulka ↔ स्थिर तारा
क्षणभर चमककर बुझने वाली उल्का की तुलना नभ के स्थिर तारा से कभी नहीं की जा सकती।
आकाश में क्षणभर चमककर बुझने वाली उल्का स्थिर तारा की शाश्वत दीप्ति की बराबरी नहीं कर सकती।
Salil ↔ पावक
कवि ने प्रकृति के संतुलन को दर्शाते हुए शीतल सलिल और प्रज्वलित पावक का वर्णन किया है।
पावक सब कुछ भस्म कर पवित्र कर देती है, और सलिल उस तपन को शांत कर तृप्ति देता है।
Aardrata ↔ शुष्कता
वर्षा काल में वातावरण में आर्द्रता बढ़ जाने से पसीना जल्दी नहीं सूखता।
मरुस्थल की हवा में अत्यधिक शुष्कता होती है, जबकि तटीय क्षेत्रों में उच्च आर्द्रता पाई जाती है।
Nirjhar ↔ स्थिर जल
चट्टानों को चीरकर बहता कलकल निर्झर गति का प्रतीक है, जबकि शांत सरोवर विश्राम का।
पहाड़ों का चंचल निर्झर बहकर अंततः घाटी के शांत स्थिर जल में विश्राम पाता है।
Sthal ↔ जल
स्थल मंडल पर मानव सभ्यताएं विकसित हुईं, जबकि जल मंडल संपूर्ण जीवमंडल को जीवन देता है।
सृष्टि के संतुलन हेतु शीतल जल और प्रज्वलित अग्नि दोनों तत्व अनिवार्य हैं।
Praval ↔ शैवाल
समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र में कठोर प्रवाल और सूक्ष्म शैवाल का परस्पर सहजीवन अद्वितीय है।
तालाब की सतह पर हरी शैवाल फैलने से धूप नीचे नहीं पहुंच पाती।
Sakriya Jwalamukhi ↔ सुप्त ज्वालामुखी
सक्रिय ज्वालामुखी के आसपास बस्तियां बसाना जोखिम भरा होता है।
सुप्त ज्वालामुखी सदियों तक शांत रहता है, जबकि सक्रिय ज्वालामुखी से निरंतर धुआं और लावा निकलता है।
Sam Jalvayu ↔ विषम जलवायु
मुंबई जैसे समुद्री शहरों में सालभर सम जलवायु रहती है, जबकि दिल्ली में विषम जलवायु पाई जाती है।
रेगिस्तानी इलाकों की विषम जलवायु में दिन में भीषण गर्मी और रात में तीखी ठंड पड़ती है।
Sadabahaar Van ↔ पर्णपाती वन
पश्चिमी घाट के सदाबहार वन जैव विविधता के विपुल भंडार हैं जो कभी पत्ते विहीन नहीं होते।
पर्णपाती वन शुष्क मौसम में पत्ते गिरा देते हैं, जबकि सदाबहार वन सालभर घने हरे-भरे रहते हैं।
Shuddhata ↔ प्रदूषण
हिमालयी वातावरण की शुद्धता में सांस लेने से असाध्य रोग भी शांत होने लगते हैं।
औद्योगिक कारखानों का धुआं वायु में प्रदूषण बढ़ाता है, जिसे वृक्षारोपण से शुद्धता में बदला जा सकता है।
Gart ↔ शिखर
महासागरों के तल में हजारों मीटर गहरे गर्त पाए जाते हैं, जहां सूर्य का प्रकाश कभी नहीं पहुंचता।
एक ओर आकाश छूता हिम शिखर है तो दूसरी ओर गहरी गर्त का अंधकार है।
Bhooskhalan ↔ स्थिर भूमि
भारी बारिश के कारण पहाड़ों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है, जहां स्थिर भूमि भी दरकने लगती है।
भूस्खलन के खतरे वाले ढलानों पर बस्तियां बसाने के बजाय स्थिर भूमि पर निर्माण सुरक्षित है।
Loo ↔ शीत लहर
दोपहर में चलने वाली गर्म लू शरीर का जल सोख लेती है, इसलिए छाछ और पानी पीते रहना चाहिए।
जनवरी में शीत लहर से लोग कांप उठते हैं, जबकि मई-जून में लू से बचने के लिए घरों में बंद रहते हैं।
Jungle ↔ शहर
जंगल में वन्यजीव स्वतंत्र विचरण करते हैं, जबकि शहर में कंक्रीट की ऊंची इमारतें होती हैं।
प्रदूषण मुक्त जीवन जीने के लिए लोग कभी-कभी शहर का शोर छोड़कर जंगल की शांति की शरण लेते हैं।
Shasya-Shyaamla ↔ मरुस्थली
नहरों के पानी से राजस्थान की बंजर धरती भी शस्य-श्यामला उपजाऊ भूमि में बदल गई।
मरुस्थली में केवल रेतीले टीले और कंटीली झाड़ियां दृष्टिगोचर होती हैं।
Garmi ↔ सर्दी
मई की भीषण गर्मी के पश्चात दिसंबर की कपकपाती सर्दी प्रकृति के ऋतुचक्र को पूर्ण करती है।
सर्दी के दिनों में गर्म चाय और धूप अत्यंत प्रिय लगती है, जो गर्मी में असह्य होती है।
Krodh ↔ शांति
अत्यधिक क्रोध मनुष्य के विवेक और निर्णय लेने की क्षमता को नष्ट कर देता है।
विवाद के समय मानसिक शांति बनाए रखना ही सच्ची समझदारी है।
Bhay ↔ साहस
मन में यदि अज्ञात का भय हो तो व्यक्ति आगे बढ़ने से हिचकिचाता है।
सच्चा साहस वही है जो विपत्ति के सामने निडर खड़ा रहे।
Santosh ↔ असंतोष
जीवन में सच्चा संतोष ही सबसे बड़ा धन माना गया है।
अकारण असंतोष मनुष्य को कभी सुखी नहीं रहने देता।
Shanti ↔ अशांति
ध्यान और आत्मचिंतन से मन को गहन शांति की अनुभूति होती है।
आपसी अविश्वास के कारण पूरे समाज में अशांति फैल गई थी।
Aanand ↔ शोक
सत्संग और संगीत के वातावरण में आत्मा को असीम आनंद मिलता है।
अप्रिय समाचार सुनकर पूरा नगर गहरे शोक में डूब गया।
Irshya ↔ सद्भाव
दूसरों की प्रतिष्ठा देखकर मन में ईर्ष्या पालना अपने ही सुख का नाश करना है।
सभी पड़ोसियों के प्रति सद्भाव रखने से समाज में शांति बनी रहती है।
Swabhiman ↔ हीनता
स्वाभिमान से जीना ही एक स्वतंत्र मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है।
गरीबी के कारण मन में कभी हीनता की भावना नहीं आने देनी चाहिए।
Matsarya ↔ सौहार्द
मन में मात्सर्य और डाह रखने से मनुष्य अपनी ही शांति खो बैठता है।
पड़ोसियों के बीच आपसी सौहार्द से ही सुखमय जीवन संभव होता है।
Santap ↔ शीतलता
प्रियजन के वियोग का संताप हृदय को अंदर ही अंदर जलाता रहता है।
संतों के वचनों से तप्त मन को शीतलता और धैर्य प्राप्त होता है।
Vyatha ↔ सुख
दीन-दुखियों की मूक व्यथा देखकर परोपकारी व्यक्ति का हृदय द्रवित हो उठा।
संतुष्ट जीवन जीने वाले व्यक्ति को आत्मिक सुख का अनुभव होता है।
Sanshay ↔ विश्वास
संशय में पड़ा हुआ मनुष्य कभी कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाता।
सच्चे मित्रों के बीच अटूट विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति होता है।
Sandeh ↔ निश्चय
अकारण संदेह करने से प्रेमपूर्ण रिश्तों में भी दरार आ जाती है।
दृढ़ निश्चय के साथ काम करने पर कोई भी बाधा मार्ग नहीं रोक सकती।
Vyakulta ↔ स्थिरता
संकट के समय मन की व्याकुलता समस्याओं को और जटिल बना देती है।
मानसिक स्थिरता बनाए रखने से कठिन से कठिन परिस्थिति भी नियंत्रित हो जाती है।
Udweg ↔ शांतभाव
क्रोध और उद्वेग के क्षणों में लिया गया निर्णय प्रायः गलत साबित होता है।
योगी पुरुष हर परिस्थिति में शांतभाव धारण किए रहते हैं।
Sneh ↔ उपेक्षा
गुरुजनों का सच्चा स्नेह विद्यार्थियों के जीवन को प्रकाशमय बना देता है।
बुजुर्गों की उपेक्षा करना किसी भी सभ्य समाज के लिए अनुचित है।
Sahanubhuti ↔ बेरुखी
विपदा के समय व्यक्त की गई सच्ची सहानुभूति पीड़ित को संबल देती है।
जरूरतमंदों के प्रति ऐसी बेरुखी दिखाना मानवीय मूल्यों के विपरीत है।
Samvedna ↔ संवेदनहीनता
कवि की गहरी संवेदना ही उसकी रचनाओं में अमर रस घोलती है।
सड़क दुर्घटना में पीड़ितों की मदद न करना घोर संवेदनहीनता का प्रमाण है।
Shraddha ↔ अश्रद्धा
गुरुजनों के प्रति सच्ची श्रद्धा ही ज्ञान प्राप्ति का प्रथम द्वार है।
ज्ञान के प्रति अश्रद्धा रखने वाला व्यक्ति कभी शिक्षित नहीं हो सकता।
Aashish ↔ शाप
बड़ों का पावन आशीष जीवन की हर राह को आसान बना देता है।
पौराणिक कथाओं में क्रोधी ऋषियों के शाप से राजाओं का पतन वर्णित है।
Shubh ↔ अशुभ
गृह प्रवेश का यह मुहूर्त अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।
अशुभ संकेत देखकर यात्रा को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया।
Sumati ↔ कुमति
जहाँ सुमति तहाँ संपति नाना, यह नीतिवचन जीवन का सत्य है।
कुमति के वशीभूत होकर व्यक्ति अपने ही हितैषियों का अपमान कर बैठता है।
Subuddhi ↔ दुर्बुद्धि
ईश्वर से प्रार्थना है कि वह सबको सुबुद्धि और सद्विचार प्रदान करे।
दुर्बुद्धि के प्रभाव में आकर दुर्योधन ने पांडवों का अधिकार छीनने का प्रयास किया।
Sadbhavna ↔ दुर्भावना
विभिन्न समुदायों के बीच सद्भावना राष्ट्र की अखंडता का आधार है।
मन में दुर्भावना रखकर किया गया कोई भी कार्य सफल नहीं होता।
Sahasi ↔ डरपोक
साहसी नाविकों ने उफनते समुद्र की विशाल लहरों को पार कर लिया।
डरपोक व्यक्ति छोटी सी परेशानी देखकर ही मैदान छोड़ देता है।
Shoor ↔ भीरु
शूर सैनिक युद्धभूमि में अंतिम सांस तक वीरता से लड़े।
भीरु स्वभाव का व्यक्ति संघर्ष से सदा दूर भागता है।
Aanandit ↔ शोकाकुल
विवाह के शुभ अवसर पर सारा परिवार आनंदित था।
प्रियजन के अचानक निधन से सभी परिजन शोकाकुल हो उठे।
Pulkit ↔ संतप्त
प्रियतम के आगमन का समाचार पाकर उसका रोम-रोम पुलकित हो गया।
कठोर विरह की ज्वाला में संतप्त हृदय को कहीं चैन नहीं था।
Aashwast ↔ सशंक
चिकित्सक के सांत्वना भरे शब्दों से रोगी पूरी तरह आश्वस्त हो गया।
अपरिचित व्यक्ति के संदिग्ध व्यवहार से सब सशंक हो गए।
Samyami ↔ असंयमी
संयमी व्यक्ति अपनी वाणी और इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखता है।
असंयमी खान-पान से व्यक्ति का स्वास्थ्य शीघ्र बिगड़ जाता है।
Sachet ↔ अचेत
सचेत नागरिक देश की सुरक्षा और स्वच्छता के प्रति जागरूक रहता है।
गंभीर दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति सड़क पर अचेत पड़ा था।
Satark ↔ असावधान
सीमा पर सतर्क सैनिक शत्रु की हर हलचल पर पैनी नजर रखते हैं।
असावधान चालक के कारण सड़क पर भारी दुर्घटना घट गई।
Sajag ↔ सुप्त
सजग पहरेदार ने रात में चोरों के षड्यंत्र को विफल कर दिया।
सर्दियों में अनेक जीव सुप्त अवस्था में चले जाते हैं।
Sadashay ↔ दुराशय
सदाशय महापुरुष सदैव दूसरों के उत्थान का विचार करते हैं।
दुराशय व्यक्ति के मन में सदैव दूसरों को नीचा दिखाने का कुचक्र चलता रहता है।
Saday ↔ निर्दय
सदय न्यायाधीश ने अपराधी के पश्चाताप को देखकर सजा में नरमी बरती।
निर्दय शिकारी ने असहाय हिरण पर तीर चला दिया।
Sahansheelta ↔ असहिष्णुता
सहनशीलता विविधतापूर्ण समाज को एक सूत्र में पिरोए रखती है।
धार्मिक असहिष्णुता शांतिपूर्ण परिवेश में विष घोल देती है।
Sahishnu ↔ असहिष्णु
सहिष्णु व्यक्ति विपरीत विचारों का भी सम्मानपूर्वक श्रवण करता है।
असहिष्णु विचारधारा समाज को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट देती है।
Shantachitta ↔ उद्विग्न
शांतचित्त होकर कार्य करने से सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
भविष्य की अनिश्चितता से मन उद्विग्न और व्याकुल रहने लगा।
Harshollas ↔ शोक
त्योहार के आगमन पर चारों दिशाओं में हर्षोल्लास छा गया।
अचानक आई विपत्ति ने पूरे उत्सव को शोक में बदल दिया।
Aavesh ↔ संयम
आवेश में आकर कोई भी अप्रिय वचन नहीं बोलना चाहिए।
संयम रखने से बड़े से बड़ा विवाद भी शांतिपूर्वक हल हो जाता है।
Shanka ↔ समाधान
मन में कोई भी शंका हो तो शिक्षक से बेझिझक पूछना चाहिए।
तर्कों और प्रमाणों से सभी जटिल प्रश्नों का समाधान हो गया।
Sadpravritti ↔ दुष्प्रवृत्ति
सत्संगति से बालकों में सद्प्रवृत्ति का विकास होता है।
बुरी संगति मन में दुष्प्रवृत्ति को जन्म देती है।
Sahanubhutik ↔ संवेदनशून्य
उसका सहानुभूतिक व्यवहार संकटग्रस्त लोगों के लिए संबल बना।
दर्द से कराहते व्यक्ति के प्रति संवेदनशून्य रुख निंदनीय है।
Aanandmay ↔ शोकमय
मित्रों का मिलन एक आनंदमय उत्सव बन गया।
आपदा के उपरांत बस्ती का वातावरण अत्यंत शोकमय था।
Sadbhavi ↔ दुर्भावी
सद्भावी पड़ोसी सुख और दुख दोनों में सदैव साथ खड़े रहते हैं।
दुर्भावी शत्रु सदा दूसरे के पतन की प्रतीक्षा में रहता है।
Amarsha ↔ सहिष्णुता
अपमान का स्मरण होते ही उसके मन में अमर्ष की ज्वाला भड़क उठी।
बुद्धिमानी इसी में है कि व्यक्ति कटु बातों पर भी सहिष्णुता बरते।
Saukhya ↔ दुख
सरल जीवन और सीमित इच्छाएं ही सच्चे सौख्य का रहस्य हैं।
लोभ और ईर्ष्या मनुष्य को कभी न खत्म होने वाले दुख में धकेलते हैं।
Klesh ↔ शांति
पारिवारिक क्लेश से घर का सारा आनंद नष्ट हो जाता है।
आपसी समझदारी से घर में पुनः सुख और शांति की स्थापना हुई।
Shokgrast ↔ आनंदमग्न
शोकग्रस्त परिवार को सांत्वना देने पूरा गाँव एकत्र हो गया।
उत्सव के संगीत में सब लोग आनंदमग्न होकर नाचने लगे।
Daah ↔ सद्भाव
दूसरों की समृद्धि देखकर मन में डाह पालना अपनी ही काया को सुखाना है।
सद्भाव रखने वाला व्यक्ति सबकी प्रगति पर प्रसन्न होता है।
Adheer ↔ शांत
परिणाम की प्रतीक्षा में उसका अधीर मन बार-बार घड़ी देख रहा था।
गहरे जल की तरह ज्ञानी पुरुष हर परिस्थिति में शांत रहता है।
Santushti ↔ असंतोष
कर्तव्य निष्ठा से पूरा करने के बाद मन को परम संतुष्टि मिलती है।
स्वार्थी मनुष्यों के मन का असंतोष कभी दूर नहीं होता।
Sanshaygrast ↔ निसंशय
संशयग्रस्त व्यक्ति किसी भी नए कार्य की शुरुआत करने से डरता है।
निसंशय होकर आगे बढ़ने वाला कर्मवीर ही इतिहास रचता है।
Sukhad ↔ दुखद
पुराने मित्रों से वर्षों बाद मिलना एक सुखद संयोग था।
विमान दुर्घटना का यह समाचार अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है।
Sauhardapoorna ↔ द्वेषपूर्ण
दोनों देशों के नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण वार्ता संपन्न हुई।
द्वेषपूर्ण प्रचार से समाज में कटुता और अविश्वास बढ़ता है।
Shantipriya ↔ युद्धप्रिय
भारत की परंपरा सदैव से एक शांतिप्रिय और सहिष्णु राष्ट्र की रही है।
युद्धप्रिय साम्राज्यवादी शासक पड़ोसी राज्यों पर आक्रमण करते रहते थे।
Samvedansheel ↔ संवेदनहीन
सम्वेदनशील शासन जनता की छोटी-बड़ी समस्याओं को तुरंत हल करता है।
जनता की पुकार पर संवेदनहीन बने रहना किसी भी सरकार को शोभा नहीं देता।
Shirsh ↔ पाद
मानव शरीर में शीर्ष सबसे संवेदनशील और विचारशील अंग माना जाता है।
शारीरिक संतुलन बनाए रखने में पाद अर्थात पैरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
Swasth ↔ अस्वस्थ
स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
अस्वस्थ खान-पान और आलस्य से व्यक्ति का शरीर बीमारियों का घर बन जाता है।
Badhir ↔ श्रवणक्षम
बधिर छात्र संकेत भाषा की सहायता से संवाद स्थापित करने में निपुण था।
श्रवणक्षम व्यक्तियों को भी शोर-शराबे वाले वातावरण में कानों की रक्षा करनी चाहिए।
Sudaul ↔ बेडौल
नियमित दंड-बैठक लगाने से युवक का शरीर सुडौल और आकर्षक बन गया।
दिनभर बैठे रहने और अस्वास्थ्यकर भोजन से शरीर बेडौल होकर भारी हो जाता है।
Gaur ↔ श्याम
पहाड़ी अंचल में रहने वाले लोगों का शारीरिक वर्ण प्रायः गौर होता है।
भगवान कृष्ण के आकर्षक श्याम वर्ण की उपमा सजल मेघों से दी जाती है।
Sashakta ↔ अशक्त
सशक्त बाहों वाले मजदूर ने भारी पत्थर को क्षणभर में उठाकर किनारे रख दिया।
तीव्र ज्वर के कारण अशक्त हुआ रोगी बिना सहारे के बिस्तर से उठ नहीं पा रहा था।
Shaaririk ↔ मानसिक
कठिन दौड़ और तैराकी से शारीरिक सहनशक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
ध्यान और स्वाध्याय से मानसिक एकाग्रता और आंतरिक स्थिरता प्राप्त होती है।
Angaheen ↔ सकलंग
दुर्घटना में अंगहीन हुए सैनिक ने कृत्रिम अंगों की सहायता से पुनः चलना सीखा।
सकलंग शरीर पाकर भी जो परिश्रम नहीं करता वह अपने सामर्थ्य का अपमान करता है।
Andha ↔ सुजाखा
अंधा राहगीर सफेद छड़ी की मदद से सड़क पार करने का प्रयास कर रहा था।
सुजाखा व्यक्ति दूर से ही आने वाले वाहन को देखकर सावधानी बरत लेता है।
Murchhit ↔ सजग
धूप की तपन न सह पाने के कारण छात्रा मैदान में मूर्च्छित होकर गिर पड़ी।
सजग चिकित्सक ने तुरंत प्राथमिक उपचार देकर उसके शरीर में चेतना लौटाई।
Spryshya ↔ अस्पृश्य
हाथ से छुआ जा सकने वाला भौतिक पदार्थ स्पृश्य संसार का अंग है।
प्रकाश और वायु जैसी सूक्ष्म तरंगें त्वचा से अस्पृश्य अथवा अमूर्त प्रतीत होती हैं।
Sashastra ↔ निहत्था
सीमा पर सशस्त्र प्रहरी हाथों में बंदूक लिए देश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं।
युद्ध के नियमों के अनुसार किसी निहत्थे व्यक्ति पर वार करना वर्जित है।
Nakha ↔ शिख
योग और आयुर्वेद में नख अर्थात पैर के नाखूनों की स्वच्छता और रंग से शारीरिक स्वास्थ्य परखा जाता है।
प्राचीन काव्य परंपरा में सौंदर्य का संपूर्ण वर्णन नख से शिख अर्थात पैर के अंगूठे से सिर की चोटी तक किया जाता था।
Shirobhaaga ↔ पादभाग
शारीरिक संरचना के अध्ययन में शिरोभाग मस्तिष्क और प्रमुख ज्ञानेंद्रियों का आवास माना गया है।
मानव शरीर का पादभाग पूरे शरीर का भार वहन करने तथा गतिशीलता प्रदान करने का आधार है।
Sthoolakaaya ↔ कृशकाय
अत्यधिक वसायुक्त भोजन और निष्क्रिय दिनचर्या से व्यक्ति स्थूलकाय हो जाता है, जिससे गतिशीलता घटती है।
लंबी तपस्या और उपवास के कारण संन्यासी का शरीर अत्यंत कृशकाय परंतु तेजस्वी हो गया था।
Khalvaata ↔ सकेश
उम्र ढलने के साथ सिर के बाल झड़ने से कई व्यक्तियों का मस्तक खल्वाट हो जाता है।
आयुर्वेदिक तेलों और उचित पोषण से सिर का भाग घने बालों से युक्त और सकेश बना रहता है।
Shvaasa ↔ प्रश्वास
प्राणायाम की क्रिया में गहरी श्वास भीतर खींचकर फेफड़ों को प्राणवायु से भरा जाता है।
मन को शांत करने के लिए प्रश्वास के माध्यम से शरीर से धीरे-धीरे वायु बाहर छोड़ी जाती है।
Shravya ↔ अश्रव्य
मानव कर्ण केवल 20 हर्ट्ज से 20000 हर्ट्ज तक की श्रव्य ध्वनि तरंगों को सुन सकते हैं।
पराश्रव्य और अपश्रव्य तरंगें सामान्य मानव कान के लिए अश्रव्य होती हैं।
Sumukha ↔ दुर्मुख
सदा प्रसन्न रहने वाले बालक का सुमुख देखकर हर किसी का मन आनंदित हो उठता है।
सदा क्रोध और कटुता में डूबे रहने वाले व्यक्ति का चेहरा दुर्मुख और विकृत प्रतीत होता है।
Kaanaa ↔ सनेत्र
दुर्घटना में एक आंख की रोशनी खो देने से वह व्यक्ति काणा हो गया था।
स्वस्थ खानपान और नेत्र व्यायाम से दोनों आंखों की दृष्टि सनेत्र और स्पष्ट बनी रहती है।
Sachchaai ↔ झूठ
सच्चाई के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति को आरंभ में कठिनाइयाँ आती हैं किंतु अंत में विजय उसी की होती है।
झूठ का सहारा लेकर खड़ा किया गया व्यापार या संबंध अधिक समय तक टिक नहीं पाता।
Sadaachaar ↔ दुराचार
विद्यालय में विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ सदाचार और अनुशासन की भी शिक्षा दी जाती है।
दुराचार और कुसंगति में लिप्त व्यक्ति अपने कुल और समाज की प्रतिष्ठा को कलंकित करता है।
Sadgun ↔ दुर्गुण
विनम्रता, सत्यवादिता और परोपकार जैसे सद्गुण व्यक्ति को महान बनाते हैं।
अहंकार, ईर्ष्या और लोभ जैसे दुर्गुण मनुष्य के समस्त पुण्यों को भस्म कर देते हैं।
Satkarm ↔ दुष्कर्म
जीवन में किए गए सत्कर्म ही मृत्यु के उपरांत व्यक्ति का नाम अमर रखते हैं।
दुष्कर्म करने वाला मनुष्य कानून की नजर से बच भी जाए, तो अंतरात्मा की अदालत से नहीं बच सकता।
Satyavaadi ↔ मिथ्यावादी
राजा हरिश्चंद्र को भारतीय इतिहास में सबसे महान सत्यवादी के रूप में स्मरण किया जाता है।
मिथ्यावादी व्यक्ति की बातों पर कोई भी समझदार इंसान कभी भरोसा नहीं करता।
Satsang ↔ कुसंग
ज्ञानी संतों का सत्संग मनुष्य के विकारों को दूर कर जीवन को आलोकित करता है।
कुसंग में पड़कर अच्छे संस्कारों वाला युवक भी धीरे-धीरे नशीले पदार्थों की गिरफ्त में आ गया।
Sadaachaari ↔ दुराचारी
सदाचारी व्यक्ति समाज में जहाँ भी जाता है, अपने आचरण से सबका सम्मान पाता है।
दुराचारी व्यक्ति अपने नीच कर्मों के कारण अपनों के बीच भी तिरस्कृत रहता है।
Sanyam ↔ असंयम
वाणी और इंद्रियों पर संयम रखने से मनुष्य अनेक व्यर्थ के विवादों से बच जाता है।
खान-पान में असंयम बरतने से शरीर रोगों का घर बन जाता है।
Niswarth ↔ स्वार्थी
निःस्वार्थ भाव से की गई समाजसेवा ही ईश्वर की सच्ची उपासना कहलाती है।
स्वार्थी मित्र केवल अपने काम के समय याद करता है और संकट में साथ छोड़ देता है।
Parmaarth ↔ स्वार्थ
संत कबीर ने जीवन भर परमार्थ और ज्ञान के प्रचार को ही अपना कर्तव्य माना।
अंधे स्वार्थ के वशीभूत होकर व्यक्ति अपने सगे-संबंधियों को भी हानि पहुँचा बैठता है।
Sadbuddhi ↔ दुर्बुद्धि
भगवान से प्रार्थना है कि वे सभी को सद्विचार और सद्बुद्धि प्रदान करें।
दुर्बुद्धि के प्रभाव में आकर दुर्योधन ने पांडवों के साथ संधि का प्रस्ताव ठुकरा दिया था।
Sahishnuta ↔ असहिष्णुता
धार्मिक सहिष्णुता और आपसी सौहार्द ही भारत की विविधता की वास्तविक पहचान है।
कट्टरता और असहिष्णुता समाज में वैमनस्य और हिंसा को जन्म देती है।
Udaarta ↔ संकीर्णता
राजा ने अपनी उदारता का परिचय देते हुए पराजित शत्रु को भी क्षमादान दे दिया।
विचारों की संकीर्णता मनुष्य को नए दृष्टिकोण और प्रगति को स्वीकार करने से रोकती है।
Shuchita ↔ अशुचिता
सार्वजनिक जीवन में धन और विचारों की शुचिता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
मन में छिपी अशुचिता बाहरी पूजा-पाठ से कभी दूर नहीं की जा सकती।
Satyanishth ↔ भ्रष्ट
सत्यनिष्ठ न्यायाधीश ने किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया।
भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत के कारण जन-कल्याण की योजनाएँ अधूरी रह गईं।
Supaatra ↔ कुपात्र
सुपात्र व्यक्ति को दिया गया दान विद्या और समाज-कल्याण के काम आता है।
कुपात्र को धन या अधिकार सौंपने से समाज में अराजकता और अव्यवस्था फैलती है।
Suyog ↔ कुयोग
विद्वानों के सान्निध्य में ज्ञान प्राप्त करने का सुयोग बड़े भाग्य से मिलता है।
यात्रा के समय कुयोग बनने से उनका सारा कार्यक्रम अस्त-व्यस्त हो गया।
Sushasan ↔ कुशासन
सुशासन की स्थापना तभी संभव है जब शासन में पारदर्शिता और जन-सुनवाई हो।
कुशासन और भ्रष्टाचार से त्रस्त होकर जनता ने अत्याचारी शासक को सत्ता से हटा दिया।
Sadgati ↔ दुर्गति
पवित्र कर्मों और निर्मल मन से जीवन जीने वाले को सद्गति प्राप्त होती है।
जुआ और मद्यपान की लत के कारण उस धनाढ्य परिवार की घोर दुर्गति हो गई।
Sadvichaar ↔ दुर्विचार
सद्विचार मनुष्य के अंतःकरण को शांति और आनंद से भर देते हैं।
ईर्ष्या और द्वेष से उपजे दुर्विचार मनुष्य की मानसिक शांति को छीन लेते हैं।
Shreya ↔ प्रेय
बुद्धिमान व्यक्ति श्रेय के मार्ग को चुनते हैं जो आत्मिक कल्याण की ओर ले जाता है।
अज्ञानी जन केवल प्रेय अर्थात् तात्कालिक सांसारिक सुखों के पीछे भागते रहते हैं।
Satyapriya ↔ मिथ्याप्रिय
सत्यप्रिय व्यक्ति कटु यथार्थ को भी धैर्य और साहस के साथ स्वीकार कर लेता है।
मिथ्याप्रिय चापलूस झूठी प्रशंसा करके अपने स्वामी को भ्रम में रखते हैं।
Sadmaarg ↔ कुमार्ग
गुरुजनों का मार्गदर्शन सदैव युवाओं को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
कुमार्ग पर चलकर कमाया गया नाम और शोहरत बहुत शीघ्र धूल में मिल जाती है।
Sumaarg ↔ उन्मार्ग
सत्संग और स्वाध्याय मनुष्य के मन को सदा सुमार्ग की ओर प्रेरित करते हैं।
उन्मार्ग पर भटकने वाला व्यक्ति अपने भविष्य और परिवार दोनों को संकट में डालता है।
Suneeti ↔ कुनीति
चाणक्य की सुनीति के आधार पर मौर्य साम्राज्य ने अद्वितीय वैभव प्राप्त किया।
कुनीति और षड्यंत्र के बल पर सत्ता हथियाने वाले शासक अधिक समय तक नहीं टिक पाते।
Asteya ↔ स्तेय
योग के यम नियमों में अस्तेय अर्थात् चोरी न करने के व्रत का बड़ा महत्व है।
स्तेय अर्थात् दूसरों की वस्तु पर अनाधिकृत अधिकार जमाना नैतिक दृष्टि से जघन्य अपराध है।
Shaaleen ↔ अशिष्ट
शालीन व्यवहार करने वाले व्यक्ति की समाज में सभी लोग सराहना करते हैं।
अशिष्ट स्वभाव का व्यक्ति अपनी कड़वी बातों से दूसरों के मन को ठेस पहुँचाता है।
Shishtaachaar ↔ अशिष्टता
अतिथियों का सत्कार करते समय शिष्टाचार और सौम्यता का परिचय देना हमारी परंपरा है।
बड़ों के सामने अशिष्टता दिखाना सुसंस्कृत होने का लक्षण नहीं है।
Sabhyata ↔ बर्बरता
प्राचीन भारतीय सभ्यता ने विश्व को शांति, ज्ञान और सह-अस्तित्व का संदेश दिया।
युद्ध के दौरान निर्दोष नागरिकों पर अत्याचार करना बर्बरता की पराकाष्ठा है।
Sukarmi ↔ कुकर्मी
सुकर्मी व्यक्ति अपने शुभ कर्मों से समाज के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करता है।
कुकर्मी अपराधी को अंततः न्यायालय द्वारा कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।
Supaatri ↔ अपात्री
मेधावी और परिश्रमी छात्रा को छात्रवृत्ति के लिए सुपात्री माना गया।
अनुचित साधनों का सहारा लेने वाली अपात्री छात्रा को चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
Samdarshi ↔ पक्षपाती
सच्चा संत सभी प्राणियों के प्रति समदर्शी दृष्टि रखकर किसी में भेदभाव नहीं करता।
पक्षपाती अधिकारी अपने संबंधियों को अनुचित लाभ पहुँचाने का प्रयास करता है।
Niswaarthata ↔ स्वार्थपरता
माँ का प्रेम अपनी संतान के प्रति निःस्वार्थता की पराकाष्ठा है।
आज के युग में स्वार्थपरता के कारण पारस्परिक संबंधों में दूरियाँ बढ़ती जा रही हैं।
Paropkaari ↔ स्वार्थी
परोपकारी व्यक्ति अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा निर्धनों के कल्याण में लगा देता है।
स्वार्थी मनुष्य केवल अपने निजी लाभ के लिए दूसरों का उपयोग करता है।
Sachcha ↔ झूठा
सच्चा मित्र वही है जो विपत्ति के समय ढाल बनकर साथ खड़ा रहे।
झूठा इंसान अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों से कुछ समय के लिए ही भ्रमित कर सकता है।
Suyash ↔ अपयश
वैज्ञानिक ने अपने अविष्कार से पूरे विश्व में देश का सुयश फैलाया।
भ्रष्टाचार के आरोपों से अधिकारी को समाज में भारी अपयश का सामना करना पड़ा।
Sukeerti ↔ अपकीर्ति
त्याग और बलिदान से अर्जित की गई सुकीर्ति सदियों तक जीवित रहती है।
कायरता का प्रदर्शन करने से योद्धा की जीवन भर की कमाई अपकीर्ति में बदल गई।
Satkaar ↔ निरादर
गृहस्थ ने अपने घर आए अतिथियों का बड़े प्रेम और सत्कार के साथ स्वागत किया।
विद्वान सभा में किसी योग्य व्यक्ति का निरादर करना अत्यंत अशोभनीय है।
Shraddheya ↔ अश्रद्धेय
श्रद्धेय गुरुजी के चरणों में बैठकर शिष्यों ने जीवन का गूढ़ ज्ञान प्राप्त किया।
चरित्रहीन आचरण के कारण वह व्यक्ति समाज की दृष्टि में अश्रद्धेय हो गया।
Shlaaghya ↔ गर्ह्य
शत्रु के समक्ष भी धर्म और शौर्य का पालन करना श्लाघ्य आचरण माना जाता है।
निहत्थे बंदियों पर अत्याचार करना युद्ध के नियमों में गर्ह्य अपराध है।
Stutya ↔ निंद्य
पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए उनके प्रयास सर्वथा स्तुत्य हैं।
सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँचाना कानून और समाज दोनों की नजर में निंद्य है।
Satyasandh ↔ वचनभंगी
सत्यसंध राजा दशरथ ने अपने वचनों की रक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगा दी।
वचनभंगी व्यक्ति पर कोई भी बुद्धिमान राजा या व्यापारी पुनः विश्वास नहीं करता।
Saatvik ↔ तामसिक
सात्विक भोजन और शांत विचार मनुष्य के मन को निर्मल और तनावमुक्त रखते हैं।
तामसिक भोजन और आलस्य से शरीर में जड़ता और प्रमाद की वृद्धि होती है।
Paardarshi ↔ संदेहास्पद
परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाकर ही युवाओं में विश्वास बहाल किया जा सकता है।
संदेहास्पद सौदों के उजागर होने पर पूरी चयन समिति को भंग कर दिया गया।
Sadprayaas ↔ दुष्प्रयास
समाज सुधारकों के सद्प्रयास से बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर रोक लग सकी।
शत्रु के दुष्प्रयास को सुरक्षा बलों ने अपनी सतर्कता से विफल कर दिया।
Parhit ↔ स्वहित
परहित सरिस धरम नहिं भाई अर्थात् दूसरों का भला करने से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।
जो मनुष्य केवल स्वहित में लीन रहता है वह कभी सच्चे मित्र नहीं बना पाता।
Samanvay ↔ वैमनस्य
विभिन्न संस्कृतियों और विचारों के बीच समन्वय स्थापित करना ही शांति का मार्ग है।
सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने वाले तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आवश्यक है।
Sahridaya ↔ पाषाणहृदय
सहृदय डॉक्टर ने गरीब मरीज की लाचारी देखकर उसकी पूरी फीस माफ कर दी।
पाषाणहृदय साहूकार ने अनाथ बच्चों की गिड़गिड़ाहट पर भी कोई दया नहीं दिखाई।
Sadvyavahaar ↔ दुर्व्यवहार
ग्राहकों के साथ सद्व्यवहार करने से व्यापार की साख और लोकप्रियता बढ़ती है।
बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले युवक को पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ा।
Samvedansheelata ↔ संवेदनहीनता
कवि की संवेदनशीलता ने प्रकृति और समाज के छिपे दर्दों को शब्दों में ढाल दिया।
दुर्घटना पीड़ितों को देखकर मदद न करना मानवीय संवेदनहीनता का दुखद उदाहरण है।
Sucharitra ↔ दुश्चरित्र
सुचरित्र मनुष्य कठिन परिस्थितियों में भी कभी असत्य और अधर्म का मार्ग नहीं चुनता।
दुश्चरित्र व्यक्ति अपने घृणित आचरण के कारण परिवार का विनाश कर देता है।
Sadbhaav ↔ दुर्भाव
त्योहारों का मूल संदेश समाज के सभी वर्गों के बीच आपसी सद्भाव और प्रेम बढ़ाना है।
पड़ोसियों के प्रति मन में दुर्भाव पालने से घर का वातावरण अशांत हो जाता है।
Saadhuta ↔ असाधुता
उनकी वाणी और व्यवहार में झलकती साधुता ने क्रूर डाकू का भी हृदय परिवर्तन कर दिया।
शत्रु की असाधुता और विश्वासघात के कारण शांति वार्ता बीच में ही टूट गई।
Sajjanta ↔ दुर्जनता
सज्जनता का गुण यही है कि वह दुष्टों के अपशब्दों का उत्तर भी मधुरता से देता है।
दुर्जनता और कुटिलता के कारण कोई भी सज्जन उसके साथ बैठना पसंद नहीं करता।
Paropkaarita ↔ स्वार्थपरता
भारतीय संस्कृति में परोपकारिता को सर्वोच्च मानवीय मूल्य के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।
समाज में बढ़ती स्वार्थपरता कमजोर वर्गों की उपेक्षा का कारण बन रही है।
Maansahaari ↔ शाकाहारी
शेर और चीता विशुद्ध मांसाहारी जीव हैं जो शिकार पर निर्भर रहते हैं।
हाथी और हिरण जैसे शाकाहारी जीव घास और पत्तियों को खाकर जीवन यापन करते हैं।
Shikaari ↔ शिकार
तेज नजरों वाला शिकारी बाज पलक झपकते ही झपट्टा मारता है।
कमजोर हिरण शिकारी शेर का शिकार बनने से बचने के लिए तेज दौड़ा।
Sapaksh ↔ अपक्ष
सपक्ष पक्षी आकाश की ऊंचाइयों में बिना किसी सहारे के तैरते हैं।
सांप और केंचुआ अपक्ष जीव हैं जो जमीन पर रेंगकर आगे बढ़ते हैं।
Bhaarvaahi ↔ सवारी-पशु
गधा और खच्चर भारवाही पशु हैं जो पहाड़ी मार्गों पर माल ढोते हैं।
सफेद अरबी घोड़ा सवारी-पशु के रूप में अपनी गति और शान के लिए प्रसिद्ध है।
Dudhaaru ↔ सूखा
किसान के पास दो दुधारू गायें हैं जो रोज बीस लीटर दूध देती हैं।
सूखा गाय को भी किसान प्रेम से पौष्टिक चारा देकर सेवा करता है।
Sinh ↔ सिंहनी
सिंह अपनी घनी अयाल हिलाते हुए चट्टान पर शान से बैठा था।
सिंहनी अपने शावकों के भरण-पोषण के लिए शिकार की तलाश करती है।
Sher ↔ शेरनी
शेर की दहाड़ सुनकर जंगल के सभी छोटे जीव छिपने लगे।
शेरनी अपनी संतान की रक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगा देती है।
Sarp ↔ सर्पिणी
फन फैलाए विशाल सर्प बांबी के मुहाने पर बैठा था।
पौराणिक कथाओं में इच्छाधारी सर्पिणी का रोचक वर्णन मिलता है।
Swaadisht ↔ बेस्वाद
दादी माँ के हाथ से बना हलवा अत्यंत स्वादिष्ट और सुगंधित था।
बिना नमक और मसालों की उबली सब्जी पूरी तरह बेस्वाद लग रही थी।
Garisht ↔ सुपाच्य
रात के समय अत्यधिक गरिष्ठ भोजन करने से नींद में खलल पड़ता है।
मूंग की दाल की खिचड़ी सुपाच्य और पौष्टिक भोजन मानी जाती है।
Supaachya-alt ↔ कुपाच्य
उबले हुए सेब और छाछ पेट के लिए सुपाच्य आहार हैं।
सड़क किनारे बिकने वाला तला-भुना जंक फूड कुपाच्य होकर पाचन तंत्र बिगाड़ता है।
Suswaadu ↔ अस्वादु
उत्सव में बने सुस्वादु पकवानों की सभी अतिथियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।
गलत अनुपात में मसाले डालने से पूरा सूप अस्वादु और पीने में अरुचिकर हो गया।
Snigdha ↔ रूखा
देसी घी से चुपड़ी स्निग्ध रोटियाँ शरीर में ओज और चिकनाई लाती हैं।
बिना घी-तेल की रूखी रोटी खाने में गले से मुश्किल से नीचे उतरती है।
Masaaledaar ↔ सादा
ढाबे की मसालेदार पनीर की सब्जी तीखी होने पर भी बहुत लोकप्रिय थी।
वृद्धजनों के लिए बिना मिर्च-मसालों का सादा उबला खाना ही उत्तम रहता है।
Shaakaahaar ↔ मांसाहार
अनाज, दलहन और ताजी हरी सब्जियों से युक्त शाकाहार शरीर को निरोगी रखता है।
अत्यधिक मांसाहार करने से कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी विकार बढ़ सकते हैं।
Sadaabhojan ↔ पकवान
दाल, चावल और रोटी का सदाभोजन नित्य प्रति स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम है।
विवाह समारोह में बने घी और मावे के पकवान अधिक खाने से पेट भारी हो जाता है।
Sada ↔ ताज़ा
टोकरी में रखे एक सड़े टमाटर ने बाकी सब्जियों को भी दूषित कर दिया।
बगीचे से लाई गई ताज़ा ककड़ी खाने में कुरकुरी और रसीली थी।
Supeya ↔ कुपेय
हर्बल काढ़ा और छाछ शरीर को तरोताजा रखने वाले सुपेय हैं।
केमिकल युक्त कृत्रिम रंगीन शरबत कुपेय हैं जो बच्चों के गले को खराब करते हैं।
Raseela ↔ सूखा
दशहरी आम अत्यंत रसीला और मिठास से भरा फल होता है।
काजू और बादाम जैसे सूखे मेवे लंबे समय तक खराब नहीं होते।
Kurkura ↔ सीला
गरमागरम समोसे का ऊपरी आवरण एकदम कुरकुरा और खस्ता था।
बरसात की नमी के कारण डिब्बे में रखा बिस्कुट सीला और बेमजा हो गया।
Sika ↔ अधपका
तंदूर में अच्छी तरह सिका हुआ नान खस्ता और सुगंधित था।
हड़बड़ी में निकाला गया अधपका पराठा खाने पर पेट में भारीपन हो गया।
Suvaasit ↔ बासी
केसर और इलायची से सुवासित खीर की महक पूरे घर में फैल गई।
तीन दिन पुराना बासी खाना खाने से फूड पॉइजनिंग का खतरा रहता है।
Shuddhghee ↔ वनस्पति
शुद्धघी में बने बेसन के लड्डू अपनी महक और स्वाद के लिए जाने जाते हैं।
वनस्पति घी का अत्यधिक उपयोग धमनियों में रुकावट पैदा कर सकता है।
Swaad ↔ बेस्वाद
ताजी पकी बासमती चावल की खीर का स्वाद ही निराला था।
अधिक पानी डाल देने से पूरी दाल बेस्वाद और पतली हो गई।
Swaadu ↔ अस्वादु
घी और मेवों से युक्त लड्डू अत्यंत स्वादु और मनभावन थे।
धूप में रखा रहने के कारण दूध फट गया और अस्वादु हो गया।
Salona ↔ फीका
मठरी और चकली का सलोना स्वाद चाय के साथ खूब जमता है।
उबले आलू बिना नमक-मिर्च के खाने में एकदम फीके लगते हैं।
Sugandhee ↔ गंधहीन
दालचीनी और लौंग रसोई के प्रसिद्ध सुगंधी मसाले हैं।
मैदा और कॉर्नफ्लोर गंधहीन घटक हैं जो केवल गाढ़ापन लाते हैं।
Tadka ↔ सादा
लहसुन और हींग के तड़के से कढ़ी का स्वाद चौगुना हो गया।
पेट खराब होने पर बिना तड़के की सादा खिचड़ी ही खानी चाहिए।
Kuposhan ↔ सुपोषण
गरीबी और अभाव के कारण बच्चे कुपोषण का शिकार होकर दुर्बल हो जाते हैं।
आंगनवाड़ी में दिए जा रहे पौष्टिक आहार से बच्चों में सुपोषण का स्तर बढ़ा है।
Niraamish ↔ सामिष
मंदिर के भंडारे में केवल शुद्ध निरामिष भोजन ही परोसा जाता है।
तटीय इलाकों में मछली से बना सामिष भोजन मुख्य आहार के रूप में खाया जाता है।
Sattoo ↔ पकवान
गर्मियों में भुने चने का सत्तू घोलकर पीने से लू नहीं लगती।
त्योहारों पर घी और मेवे के पकवान घर-घर में बनाए जाते हैं।
Suswaad ↔ कुस्वाद
पके हुए आम के पने का सुस्वाद हर किसी को ताजगी से भर देता है।
सड़ी हुई दाल का कुस्वाद आते ही उसने तुरंत मुंह धोया।
Subhojan ↔ कुभोजन
हरी सब्जियों, रोटी और छाछ का सुभोजन दीर्घायु प्रदान करता है।
बासी और अस्वच्छ स्थान पर बना कुभोजन शरीर को रोगों का घर बना देता है।
Ajeerna ↔ सुजीर्ण
बिना भूख के अधिक खा लेने से पेट में अजीर्ण और खट्टी डकारें होने लगीं।
हल्का आहार लेने से भोजन का सुजीर्ण होकर शरीर को शक्ति मिलती है।
Adhpaka ↔ सुरांधा
जल्दबाजी में तवे से उतारी गई अधपकी रोटी पेट में दर्द कर सकती है।
धीमी आंच पर पकी सुरांधा खीर का स्वाद बेमिसाल था।
Soup ↔ कड़ा
सर्दियों में टमाटर का गरमागरम सूप पीना स्वास्थ्यवर्धक होता है।
दांतों से चबाने के लिए कड़ा भुना हुआ चना ही पसंद किया जाता है।
Poori ↔ सादी-रोटी
त्योहारों पर हलवे के साथ गरमागरम पूरी बनाई जाती है।
दैनिक आहार में बिना तेल की सादी-रोटी खाना ही सर्वोत्तम है।
Lapsi ↔ सूखी-रोटी
गुड़ और घी से बनी लपसी सर्दियों में शरीर को ऊर्जा देती है।
सफर में सूखी-रोटी और अचार लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।
Supakwa ↔ अपक्व
सुपक्व आम की महक से पूरा कमरा भर गया था।
अपक्व फल खाने से पेट में मरोड़ हो सकती है।
Suras ↔ नीरस
अनार का सुरस पेय शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाता है।
बासी हो जाने पर गन्ने का रस नीरस और खट्टा हो जाता है।
Sharkara ↔ नमक
चाय में शर्करा अधिक होने से वह बहुत मीठी हो गई।
सब्जी में नमक संतुलित मात्रा में ही डालना चाहिए।
Sharkaraayukt ↔ शर्करारहित
हलवाई की दुकान पर शर्करायुक्त मिठाइयाँ शीशे के डिब्बों में सजी थीं।
मधुमेह के रोगियों के लिए शर्करारहित चाय और बिस्कुट तैयार किए गए।
Sondha ↔ बदबूदार
मिट्टी के चूल्हे पर पकी रोटी का सोंधा स्वाद दिल को छू लेता है।
धूप में खराब हुई सब्जी से बदबूदार महक आने लगी थी।
Rasdaar ↔ सूखा
चावल के साथ खाने के लिए आलू-मटर की रसदार सब्जी बनाई गई।
सफर में ले जाने के लिए उसने सूखे आलू और पूरियाँ पैक कीं।
Supakwata ↔ कच्चापन
वृक्ष पर प्राकृतिक सुपक्वता पाने वाला अमरूद मीठा और मुलायम होता है।
जल्दबाजी में तोड़े गए फल का कच्चापन स्वाद को किरकिरा कर देता है।
Mitra ↔ शत्रु
सच्चा मित्र विपत्ति के समय ढाल बनकर साथ खड़ा रहता है।
कपटी शत्रु मीठी बातें बोलकर पीठ में छुरा घोंपने का अवसर खोजता है।
Mitrata ↔ शत्रुता
कृष्ण और सुदामा की निस्वार्थ मित्रता संसार में अमर उदाहरण है।
पुरानी शत्रुता को भुलाकर दोनों परिवारों ने आपस में सुलह कर ली।
Sakhaa ↔ बैरी
अर्जुन ने महाभारत के धर्मयुद्ध में भगवान कृष्ण को अपना सखा और सारथी बनाया।
हृदय में द्वेष पालने वाला बैरी सदा दूसरे की बर्बादी के षड्यंत्र रचता है।
Sahelee ↔ सौत
दुल्हन अपनी सहेली के साथ अपने मन की खुशियाँ और चिंताएँ साझा कर रही थी।
प्राचीन राजमहलों में सौत के आपसी षड्यंत्रों के कारण अशांति फैली रहती थी।
Sulah ↔ जंग
दोनों कबीलों के बुजुर्गों ने बातचीत करके शांतिपूर्ण सुलह कर ली।
विनाशकारी जंग में किसी भी पक्ष की वास्तविक जीत नहीं होती।
Sandhi ↔ विग्रह
दो पड़ोसी देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए ऐतिहासिक संधि हुई।
नीतिशास्त्र में विग्रह अर्थात् युद्ध को अंतिम विकल्प के रूप में देखा गया है।
Shaasak ↔ शासित
एक दूरदर्शी शासक प्रजा के कल्याण को ही अपना सर्वोच्च धर्म समझता है।
शासित जनता के अधिकारों का सम्मान करना किसी भी न्यायप्रिय व्यवस्था की पहली शर्त है।
Saas ↔ ससुर
स्नेहशील सास ने नई बहू का स्वागत अपनी बेटी की भाँति किया।
ससुर ने दामाद को पारिवारिक व्यापार में पूरा सहयोग और आशीर्वाद दिया।
Jeeja ↔ साला
जीजा जी के आगमन पर ससुराल में सभी छोटे-बड़े प्रसन्न हो उठे।
साला अपनी बहन की ससुराल में कुशलता का समाचार लेने पहुँचा।
Saahukaar ↔ देनदार
प्राचीन समय में साहूकार ग्रामीणों को फसल की बुवाई के लिए ऋण देते थे।
ईमानदार देनदार ने फसल कटते ही साहूकार का संपूर्ण हिसाब चुकता कर दिया।
Saajhedaar ↔ प्रतिद्वंद्वी
दोनों साझेदार मिलकर नई कंपनी को उन्नति के शिखर पर ले गए।
बाजार में प्रतिद्वंद्वी कंपनी ने ग्राहकों को लुभाने के लिए छूट की घोषणा की।
Sahayogi ↔ विरोधी
परियोजना को समय पर पूरा करने में प्रत्येक सहयोगी का योगदान महत्वपूर्ण था।
चुनाव में विरोधी पक्ष ने सत्ताधारी दल की नीतियों की कड़ी आलोचना की।
Samarthak ↔ विरोधी
रैली में हजारों समर्थक झंडे लहराते हुए अपने उम्मीदवार का उत्साह बढ़ा रहे थे।
विरोधी दल ने जनता को जागरूक करने के लिए पर्चे बांटे।
Poshankarta ↔ शोषक
माता-पिता अपनी संतान के प्राथमिक पोषणकर्ता और मार्गदर्शक होते हैं।
मजदूरों का खून पसीने की कमाई छीनने वाला शोषक समाज के लिए अभिशाप है।
Sagotra ↔ परगोत्र
प्राचीन परंपराओं में सगोत्र बंधुओं के बीच पारस्परिक सहयोग अनिवार्य माना जाता था।
विवाह संबंध स्थापित करने के लिए परगोत्र के परिवारों का चयन किया जाता है।
Sagotreeya ↔ विजातीय
त्योहार पर सभी सगोत्रीय संबंधी एक साथ पैतृक घर में एकत्र हुए।
विजातीय लोगों के बीच भी सौहार्द और मित्रता स्थापित की जा सकती है।
Swadeshee ↔ विदेशी
स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना और साथी देशवासियों का सहयोग करना देशभक्ति है।
विदेशी पर्यटकों का आतिथ्य सत्कार करना भारतीय संस्कृति की परंपरा है।
Swajan ↔ परजन
संकट के समय स्वजन ही सबसे पहले सहायता के लिए हाथ बढ़ाते हैं।
सच्चा साधु किसी को परजन न मानकर संपूर्ण संसार को अपना कुटुंब मानता है।
Sambaddha ↔ असंबद्ध
महाविद्यालय विश्वविद्यालय से विधिवत संबद्ध होकर शिक्षा प्रदान करता है।
विवाद से पूरी तरह असंबद्ध लोगों को मुकदमे में घसीटना अनुचित है।
Saamanjasya ↔ टकराव
पारिवारिक सामंजस्य और आपसी समझ से घर में शांति का वातावरण रहता है।
अहंकार के टकराव के कारण वर्षों पुराने व्यावसायिक साझेदार अलग हो गए।
Saujanya ↔ कटुता
पड़ोसियों के बीच का सौजन्य त्योहारों की खुशियों को कई गुना बढ़ा देता है।
आपसी कटुता को त्याग कर ही समाज में शांति और सहयोग का निर्माण हो सकता है।
Samarpan ↔ विद्रोह
सैनिकों का देश के प्रति अटूट समर्पण सीमाओं की सुरक्षा का आधार है।
अत्याचारी शासक के विरुद्ध जनता ने एकजुट होकर खुला विद्रोह कर दिया।
Sahchar ↔ एकाकी
यात्रा के दौरान एक समझदार सहचर मिलने से लंबा मार्ग भी सहज कट जाता है।
एकाकी जीवन जीने वाला व्यक्ति अपने सुख-दुख साझा करने के लिए तरसता है।
Sahpaathee ↔ प्रतिद्वंद्वी
सहपाठी मिलकर कठिन विषयों पर चर्चा करते हैं और एक-दूसरे की सहायता करते हैं।
परीक्षा में प्रतिद्वंद्वी छात्र एक-दूसरे से आगे निकलने के लिए कड़ा परिश्रम करते हैं।
Samvayask ↔ वृद्ध
समवयस्क मित्रों के समूह में युवक खुलकर अपने विचार और सपने व्यक्त करते हैं।
वृद्ध परिजनों के अनुभवों से सीख लेकर युवा जीवन की गलतियों से बच सकते हैं।
Maata-pita ↔ संतान
माता-पिता अपनी संतान के सुख और प्रगति के लिए सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं।
संतान का धर्म है कि वह बड़े होकर अपने वृद्ध अभिभावकों का आदर और संबल बने।
Suhaagin ↔ विधवा
करवा चौथ पर सुहागिन स्त्रियाँ पति की दीर्घायु के लिए निर्जल व्रत रखती हैं।
पति के निधन के बाद विधवा महिला ने साहसपूर्वक अपने बच्चों का पालन-पोषण किया।
Sadhwa ↔ विधवा
मंगल उत्सव में सधवा स्त्रियों द्वारा मंगल कलश की स्थापना की जाती है।
कठिन परिस्थितियों में भी उस विधवा माँ ने कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया।
Vidur ↔ सधुर
पत्नी के देहांत के पश्चात विदुर पुरुष एकाकी जीवन बिताने लगा।
सधुर गृहस्थ अपनी पत्नी के सहयोग से गृहस्थी के समस्त दायित्व निभाता है।
Sakutumb ↔ अकेला
निमंत्रण पत्र पर आदरपूर्वक लिखा था कि आप समारोह में सकुशल व सकुटुंब पधारें।
अजनबी शहर में अकेला रहने पर व्यक्ति को परिजनों की कमी बहुत खलती है।
Sagotree ↔ परदेशी
तीर्थयात्रा पर अपने सगोत्री बंधु से मिलने पर उसे अत्यधिक आनंद हुआ।
परदेशी मुसाफिर का सहारा बनकर उसकी मदद करना मानवता का नियम है।
Sadmitra ↔ कुमित्र
सद्मित्र विपत्ति के समय ढाल बनकर रक्षा करता है और सही सलाह देता है।
कुमित्र केवल मौज-मस्ती के समय साथ रहता है और संकट आते ही किनारा कर लेता है।
Suhrid ↔ शत्रु
सच्चा सुहृद आपके अवगुणों को अकेले में समझाता है और गुणों की प्रशंसा करता है।
शत्रु सदा आपकी दुर्बलताओं का लाभ उठाकर आघात करने की ताक में रहता है।
Sagotraj ↔ अगोत्रज
सगोत्रज भाइयों ने पैतृक संपत्ति के विभाजन का मामला आपस में सुलझा लिया।
अगोत्रज व्यापारी के साथ पारदर्शी समझौते के आधार पर अनुबंध किया गया।
Sahkarmee ↔ प्रतिस्पर्धी
कार्यालय में सहकर्मी की सहायता से जटिल परियोजना समय पर पूरी हो गई।
पदोन्नति की दौड़ में दोनों प्रतिस्पर्धी अधिकारी अपना सर्वश्रेष्ठ दे रहे थे।
Sahyoddha ↔ शत्रुयोद्धा
युद्धभूमि में घायल सहयोद्धा को बचाने के लिए सैनिक ने अपनी जान जोखिम में डाली।
शत्रुयोद्धा के पराजित होने पर भी उसके साथ युद्ध-नियमों के अनुसार सम्मान का व्यवहार किया गया।
Mitrapaksh ↔ शत्रुपक्ष
विश्वयुद्ध में मित्रपक्ष की सेनाओं ने संयुक्त रणनीति बनाकर विजय प्राप्त की।
शत्रुपक्ष की हर चाल पर खुफिया एजेंसियों द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही थी।
Sadbhaavpoorn ↔ वैरभावपूर्ण
दोनों संप्रदायों के बीच सद्भावपूर्ण वातावरण से शहर में अमन-चैन बना रहा।
वैरभावपूर्ण टिप्पणियों से समाज का ताना-बाना छिन्न-भिन्न हो सकता है।
Sahodar ↔ अन्योधर
सहोदर भाइयों के बीच का प्रेम बचपन की स्मृतियों से सींचा हुआ होता है।
अन्योधर भाई होने पर भी दोनों ने पैतृक संपत्ति के मामले को शांति से सुलझाया।
Maayka ↔ ससुराल
त्योहार पर मायका आकर बेटी अपने बचपन की सहेलियों से मिलकर भावुक हो गई।
ससुराल में उसने अपने मधुर व्यवहार से सभी परिजनों को अपना बना लिया।
Peehar ↔ ससुराल
सावन के महीने में नवविवाहिता अपने पीहर जाकर झूले झूलती है।
ससुराल के दायित्वों को समझदारी से निभाना एक सुसंस्कृत बहू का गुण है।
Saga ↔ सौतेला
सगा भाई हर सुख-दुख में बिना किसी स्वार्थ के दीवार की तरह खड़ा रहता है।
सौतेला व्यवहार छोड़कर उसने सभी बच्चों को एक समान वात्सल्य दिया।
Samdhee ↔ समधिन
वर और वधू के पिता आपस में समधी बनकर एक-दूसरे से गले मिले।
विवाह के मंडप में दोनों परिवारों की समधिन ने मिलकर मंगल गीत गाए।
Sagotra-bandhu ↔ पराया
संकट की घड़ी में सगोत्र-बंधु एकजुट होकर एक-दूसरे की ढाल बन जाते हैं।
निःस्वार्थ सेवा करने वाले सज्जन किसी को भी पराया नहीं समझते।
Sahodara ↔ अन्योदरा
सहोदरा बहनें एक-दूसरे के सुख-दुख को बिना कहे ही समझ लेती हैं।
अन्योदरा बहन के साथ भी उसने कभी सौतेला व्यवहार नहीं किया और पूरा मान दिया।
Samkaksh ↔ अधीनस्थ
समकक्ष अधिकारियों ने मिलकर नीति निर्माण पर विचार-विमर्श किया।
अधीनस्थ कर्मचारियों ने वरिष्ठों के मार्गदर्शन में काम पूरा किया।
Sahmat ↔ असहमत
व्यापारिक समझौते की शर्तों पर दोनों भागीदार पूरी तरह सहमत थे।
परियोजना के बजट को लेकर कई सदस्य असहमत होकर पुनर्विचार की मांग करने लगे।
Mitrarashtra ↔ शत्रुराष्ट्र
आपदा के समय मित्रराष्ट्र ने तुरंत राहत सामग्री और दवाएं भेजीं।
शत्रुराष्ट्र की सीमा पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर सेना सतर्क रहती है।
Sandhikarta ↔ युद्धोन्मादी
कुशल संधिकर्ता ने बातचीत के जरिए दो देशों को युद्ध के कगार से बचा लिया।
युद्धोन्मादी नेताओं के भड़काऊ बयानों ने सीमा पर तनाव और बढ़ा दिया।
Mitramandalee ↔ शत्रुदल
शाम को पार्क में मित्रमंडली बैठकर हँसी-मजाक और विचार साझा करती है।
शत्रुदल ने राजा के खिलाफ षड्यंत्र रचने के लिए गुप्त बैठक की।
Mahanga ↔ सस्ता
आजकल बाजार में सोने के आभूषण बहुत महंगे हो गए हैं।
थोक बाजार से सामान खरीदने पर वस्तुएं काफी सस्ती मिल जाती हैं।
Anmol ↔ सस्ता
माता-पिता का स्नेह संसार की सबसे अनमोल निधि है।
सस्ता सामान अक्सर टिकाऊ नहीं होता और शीघ्र खराब हो जाता है।
Sampannata ↔ दरिद्रता
हरित क्रांति के फलस्वरूप गांव में आर्थिक संपन्नता लौट आई।
उचित रोजगार के अभाव में समाज के कई वर्ग दरिद्रता में जीवन बिता रहे हैं।
Sadhan ↔ निर्धन
सधन वर्ग को जरूरतमंद नागरिकों की सहायता हेतु सदैव तत्पर रहना चाहिए।
निर्धन बच्चों को विद्यालय में मुफ्त पाठ्य-पुस्तकें वितरित की गईं।
Poonjipati ↔ सर्वहारा
पूँजीपति वर्ग उद्योगों में भारी धन निवेश करके रोजगार के अवसर बनाता है।
सर्वहारा वर्ग अपने खून-पसीने की कमाई से ही राष्ट्र का निर्माण करता है।
Udyogpati ↔ श्रमिक
उद्योगपति ने नई स्वचालित इकाई स्थापित करने का निर्णय लिया।
श्रमिक के निरंतर पसीने से ही विशाल कल-कारखाने सुचारू चलते हैं।
Saamant ↔ किसान
मध्यकाल में सामंत प्रजा पर मनमाने कर लगाकर अपना खजाना भरते थे।
देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ धरती पुत्र किसान है जो अन्न उपजाता है।
Shreemant ↔ निर्धन
श्रीमंत परिवारों ने कन्या विवाह कोष में मुक्तहस्त दान दिया।
निर्धन परिवारों को शासकीय योजनाओं से पक्के आवास प्रदान किए गए।
Sakal-laabh ↔ शुद्ध-लाभ
खाते के अनुसार बिक्री पर पचास लाख रुपये का सकल-लाभ हुआ।
करों और भत्तों के भुगतान के पश्चात शुद्ध-लाभ तीस लाख रुपये बचा।
Sanchay ↔ अपव्यय
बुजुर्गों ने सदा धर्मपूर्वक धन के संचय की सीख दी है।
संसाधनों का अपव्यय आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों पर कुठाराघात है।
Divaaliya ↔ समर्थ
सट्टे में भारी नुकसान उठाने के बाद व्यापारी दिवालिया घोषित हो गया।
वित्तीय रूप से समर्थ कंपनी ने घाटे में चल रहे कारखाने को खरीद लिया।
Shulk ↔ निःशुल्क
परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए सभी विद्यार्थियों को निर्धारित शुल्क भरना पड़ा।
सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में पाठ्य-पुस्तकें और भोजन पूरी तरह निःशुल्क प्रदान किए जाते हैं।
Sashulk ↔ मुफ्त
विशिष्ट परामर्श प्राप्त करने के लिए यह सेवा सशुल्क उपलब्ध कराई जाती है।
सार्वजनिक पुस्तकालय में वाचनालय की सुविधा सभी पाठकों के लिए मुफ्त है।
Savetan ↔ अवैतनिक
कर्मचारियों को बीमारी के दौरान नियमानुसार सवेतन अवकाश दिया जाता है।
समाजसेवी संस्था में सचिव का पद पूरी तरह अवैतनिक और सेवाभावी है।
Savaitanik ↔ मानद
महाविद्यालय के प्राचार्य का पद एक स्थायी सवेतनिक पद है।
खेल संघ के अध्यक्ष का पद मानद है जिसके लिए कोई पारिश्रमिक नहीं मिलता।
Sakal ↔ शुद्ध
देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) इस वर्ष सात प्रतिशत बढ़ा।
मूल्यह्रास और कर घटाने के बाद फर्म की शुद्ध आय सामने आती है।
Saakh ↔ अनादर
समय पर ऋण चुकाने से व्यापारी की बाजार में साख बढ़ जाती है।
चेक बाउंस होने से वित्तीय संस्थाओं में व्यापारी का अनादर होता है।
Baajaar-bhaav ↔ सरकारी-दर
मंडी में गेहूं का बाजार-भाव प्रतिदिन की मांग और आपूर्ति पर निर्भर करता है।
राशन की दुकान पर गरीबों को अनाज निर्धारित सरकारी-दर पर उपलब्ध कराया जाता है।
Kaalaadhan ↔ सफेदधन
कर न चुकाकर छिपाया गया कालाधन देश की अर्थव्यवस्था को खोखला करता है।
ईमानदारी से अर्जित और कर-चुकाया सफेदधन व्यक्ति को निश्चिंतता प्रदान करता है।
Munaafaakhori ↔ सेवाभाव
आपदा के समय मुनाफाखोरी करना मानवता के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
सच्चे स्वयंसेवक सेवाभाव से प्रेरित होकर संकटग्रस्तों को निःशुल्क राहत बांटते हैं।
Sikka ↔ कागजी-मुद्रा
पुरातात्विक खुदाई में गुप्त काल का सोने का प्राचीन सिक्का प्राप्त हुआ।
आधुनिक अर्थव्यवस्था का अधिकांश नकद लेन-देन कागजी-मुद्रा द्वारा संपन्न होता है।
Svarn ↔ पीतल
विवाह के अवसर पर कन्या को शुद्ध स्वर्ण के आभूषण भेंट किए गए।
पूजा के बर्तनों के निर्माण के लिए पीतल धातु का उपयोग किया जाता है।
Shree ↔ श्रीहीन
धर्म और सत्य के आचरण से राजा का सिंहासन श्री और सम्मान से चमकता रहा।
पराजय और विपन्नता के बाद वह प्रतापी राजा पूरी तरह श्रीहीन दिखाई देने लगा।
Svaamitva ↔ पट्टा
रजिस्ट्री कराने के बाद ही भवन का पूर्ण स्वामित्व क्रेता को प्राप्त हुआ।
खनिज खनन के लिए सरकार ने कंपनी को बीस वर्षों का पट्टा जारी किया।
Share ↔ ऋणपत्र
कंपनी के विकास में सीधी भागीदारी के लिए उसने इक्विटी शेयर खरीदे।
निश्चित ब्याज की गारंटी चाहने वाले निवेशकों ने सुरक्षित ऋणपत्र में धन लगाया।
Sampatti ↔ विपत्ति
सम्पत्ति में सभी लोग मित्र बनने के लिए आगे आते हैं।
सच्चे मित्र की परीक्षा केवल विपत्ति और कठिनाइयों में ही होती है।
Sikke ↔ खोटे-सिक्के
टक्साल से जारी किए गए नए तांबे और निकल के सिक्के बाजार में आ गए।
धोखेबाजों द्वारा फैलाए गए खोटे-सिक्के पकड़ने के लिए पुलिस ने अभियान चलाया।
Shram ↔ विश्राम
खेतों में दिन-रात कठोर श्रम करने के बाद ही फसल पकती है।
थके हुए मजदूरों ने वृक्ष की शीतल छाया में बैठकर कुछ देर विश्राम किया।
Mehnat ↔ सुस्ती
किसान की कड़ी मेहनत का ही परिणाम है कि देश का अन्न भंडार भरा है।
सुबह की सुस्ती को त्यागकर व्यायाम करना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
Kaaryarat ↔ सेवानिवृत्त
वह पिछले बीस वर्षों से इस प्रतिष्ठित संस्थान में सफलतापूर्वक कार्यरत है।
साठ वर्ष की आयु पूर्ण होने पर वरिष्ठ अधिकारी ससम्मान सेवानिवृत्त हो गए।
Shilpee ↔ अनाड़ी
कुशल शिल्पी ने संगमरमर के पत्थर को तराशकर सजीव मूर्ति का रूप दे दिया।
अनाड़ी कारीगर ने महंगे लकड़ी के दरवाजे को काटकर पूरी तरह बिगाड़ दिया।
Saadhana ↔ लापरवाही
शास्त्रीय गायन वर्षों की अटूट साधना और गुरु-सेवा से सिद्ध होता है।
अस्पताल में दवाओं के रखरखाव में तनिक भी लापरवाही जानलेवा हो सकती है।
Tatparata ↔ शिथिलता
अग्निशमन दल ने अद्भुत तत्परता दिखाते हुए आग को कुछ ही पलों में बुझा दिया।
प्रशासनिक शिथिलता के चलते विकास योजनाएं वर्षों तक अधूरी पड़ी रहीं।
Shramajeevee ↔ परजीवी
श्रमजीवी इंसान अपने परिश्रम से रूखी-सूखी रोटी खाकर भी आत्मसम्मान से जीता है।
दूसरों की गाढ़ी कमाई पर पलने वाला परजीवी कभी सम्मान का पात्र नहीं हो सकता।
Shramasaadhya ↔ अनायास
पहाड़ काटकर मार्ग बनाना अत्यंत श्रमसाध्य और जोखिम भरा कार्य था।
प्रकृति की कृपा से फसल को अनायास ही पर्याप्त वर्षा का जल मिल गया।
Pahal ↔ सन्नाटा
ग्राम प्रधान ने स्वच्छता अभियान में स्वयं आगे बढ़कर सराहनीय पहल की।
विपदा के समय अधिकारियों के कार्यालयों में सन्नाटा पसरा हुआ था।
Srijan ↔ विनाश
कवि और चित्रकार अपनी कल्पना शक्ति से सुंदर कला का सृजन करते हैं।
युद्ध की विभीषिका केवल विनाश और जन-हानि लेकर आती है।
Srijanaatmak ↔ संहारकारी
वैज्ञानिकों ने मानव कल्याण के लिए नई ऊर्जा के सृजनात्मक स्रोत खोजे।
परमाणु हथियारों की संहारकारी क्षमता संपूर्ण मानव सभ्यता को मिटा सकती है।
Sangathit ↔ असंगठित
संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को पेंशन और स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिलता है।
असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा दिलाने के लिए कानून बनाए गए हैं।
Suprabandh ↔ कुप्रबंध
मेले में लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बावजूद पुलिस के सुप्रबंध से कोई अनहोनी नहीं हुई।
हवाई अड्डे पर कुप्रबंध के चलते यात्रियों को घंटों तक अपनी उड़ानों की प्रतीक्षा करनी पड़ी।
Kaaryaanvayan ↔ स्थगन
नीतियों का कागजों से धरातल पर सफल कार्यान्वयन ही लोकतंत्र की वास्तविक विजय है।
बजट की कमी के कारण महत्वपूर्ण सड़क निर्माण योजना का अनिश्चितकाल के लिए स्थगन हो गया।
Siddhi ↔ असिद्धि
कठोर तपस्या और निरंतर श्रम के पश्चात साधक को आत्मज्ञान की सिद्धि प्राप्त हुई।
प्रयासों में ढिलाई रखने पर कार्य में असिद्धि का मुंह देखना पड़ता है।
Saphal ↔ असफल
दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम से साधारण बालक भी सफल नागरिक बन सकता है।
शुरुआती दौर में असफल होने पर भी साहसी व्यक्ति कभी निराश नहीं होता।
Sakriyata ↔ निष्क्रियता
पर्यावरण संरक्षण के प्रति युवाओं की बढ़ती सक्रियता एक सुखद संकेत है।
प्रशासन की निष्क्रियता के कारण ऐतिहासिक इमारतों की हालत जर्जर हो रही है।
Shramadaan ↔ आरामपरस्ती
गांव के युवाओं ने मिलकर श्रमदान द्वारा टूटे हुए तटबंध की मरम्मत कर दी।
आरामपरस्ती में डूबा व्यक्ति जीवन में कोई ठोस मुकाम हासिल नहीं कर पाता।
Shramabal ↔ यंत्रबल
कृषि और निर्माण कार्यों में आज भी विशाल श्रमबल की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
यंत्रबल के बढ़ते उपयोग ने भारी काम को बहुत कम समय में संभव बना दिया है।
Vetanbhogee ↔ स्वरोजगारी
वेतनभोगी कर्मचारी को माह के अंत में मिलने वाले निश्चित वेतन पर निर्भर रहना पड़ता है।
स्वरोजगारी व्यक्ति अपनी लगन और समय के अनुसार स्वतंत्र रूप से कमाई करता है।
Svaavalamban ↔ परावलंबन
स्वावलंबन से मनुष्य का आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान बढ़ता है।
परावलंबन की आदत व्यक्ति को कमजोर और लाचार बना देती है।
Svaavalambee ↔ परावलंबी
स्वावलंबी नारी अपने परिश्रम से परिवार का भरण-पोषण करने में सक्षम है।
परावलंबी व्यक्ति छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी दूसरों का मुंह ताकता है।
Kriyaasheel ↔ सुस्त
सदा क्रियाशील रहने वाला व्यक्ति वृद्धावस्था में भी स्वस्थ और प्रसन्न रहता है।
सुस्त स्वभाव के कारण वह दिन भर बिस्तर पर ही पड़ा रहता है।
Saprayaas ↔ अनायास
विदेशी भाषा सीखने के लिए सप्रयास व्याकरण और शब्दावली रटनी पड़ती है।
मातृभाषा तो बच्चा अपने परिवार में अनायास ही बोलना सीख जाता है।
Saadhya ↔ असाध्य
नियमित व्यायाम और संतुलित आहार से कई रोग पूरी तरह साध्य हो जाते हैं।
लापरवाही के चलते जब रोग अंतिम चरण में पहुंच जाए तो वह असाध्य बन जाता है।
Susaadhya ↔ दुःसाध्य
पारस्परिक सहयोग और तालमेल से जटिल कार्य भी सुसाध्य बन जाता है।
दुर्गम बर्फीले पहाड़ों पर चढ़ना अकेले किसी के लिए भी दुःसाध्य कार्य है।
Shramasheel ↔ अनुद्यमी
श्रमशील समुदाय अपनी कड़ी मेहनत से बंजर धरती पर भी फसलें उगा लेता है।
अनुद्यमी लोग संसाधनों से संपन्न होकर भी कोई नया कार्य आरंभ नहीं कर पाते।
Shramapriya ↔ आरामपसंद
श्रमप्रिय किसान अपने हाथों से कुदाल चलाकर पसीना बहाने में गर्व अनुभव करता है।
आरामपसंद व्यक्ति वातानुकूलित कमरे से बाहर निकलने में भी कतराता है।
Shramamoolya ↔ मुफ्तखोरी
सभ्य समाज में हर मजदूर को उसके श्रममूल्य का उचित सम्मान मिलना चाहिए।
मुफ्तखोरी की आदत व्यक्ति को अकर्मण्य और समाज पर बोझ बना देती है।
Shramasaadhana ↔ आरामपरस्ती
श्रमसाधना से ही मनुष्य इतिहास रचता है और समाज को नई दिशा देता है।
आरामपरस्ती के कारण कई सभ्यताओं का वैभव धूल में मिल गया।
Shilp ↔ विनाश
प्राचीन मंदिरों का बेजोड़ शिल्प आज भी स्थापत्य कला का शिखर माना जाता है।
भूकंप के विनाश ने कई ऐतिहासिक स्मारकों को मलबे में तब्दील कर दिया।
Saadhak ↔ बाधक
अनुशासन और एकाग्रता अध्ययन में सदा साधक सिद्ध होते हैं।
अनावश्यक मोबाइल फोन का उपयोग विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ा बाधक तत्व है।
Kaaryaadhyaksh ↔ सहायक
कार्याध्यक्ष ने पूरी टीम को समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित करके सौंपे।
सहायक ने आवश्यक दस्तावेज और रिपोर्ट तैयार करके तुरंत प्रस्तुत की।
Shram-sammaan ↔ श्रम-अवमानना
सभ्य समाज में झाड़ू लगाने वाले से लेकर वैज्ञानिक तक सभी के श्रम-सम्मान की भावना होनी चाहिए।
शारीरिक कार्य करने वालों की श्रम-अवमानना करना सामंती मानसिकता का परिचायक है।
Suvyavasthit ↔ अव्यवस्थित
सुव्यवस्थित पुस्तकालय में कोई भी पुस्तक ढूंढना अत्यंत सरल होता है।
अव्यवस्थित दफ्तर में फाइलें इधर-उधर बिखरी रहने से कामकाज बाधित होता है।
Udyogaparaayan ↔ सुस्त
उद्योगपरायण समाज निरंतर नवाचार करके विश्व स्तर पर अग्रणी बन जाता है।
सुस्त मानसिकता वाले लोग हमेशा बदलाव और नए काम से घबराते हैं।
Shramasaadhak ↔ आरामतलब
श्रमसाधक युवक ने अपनी बाहों के बल पर परिवार की तकदीर बदल दी।
आरामतलब पुत्र पैतृक संपत्ति के सहारे जीवन बिताने का सपना देखता रहा।
Shramanishtha ↔ आलस्य
सच्ची श्रमनिष्ठा ही किसी भी साधारण श्रमिक को असाधारण व्यक्तित्व बनाती है।
आलस्य में डूबा मनुष्य अपने भीतर छिपी प्रतिभा को भी कभी पहचान नहीं पाता।
Sanaatan ↔ सामयिक
सत्य और अहिंसा के नैतिक मूल्य सनातन हैं जो हर युग में प्रासंगिक रहते हैं।
फैशन और रुझान केवल सामयिक होते हैं जो कुछ ही महीनों में बदल जाते हैं।
Samakaaleen ↔ असमकालीन
तुलसीदास और अकबर एक ही कालखंड के प्रसिद्ध समकालीन व्यक्तित्व थे।
कालिदास और कबीर सर्वथा असमकालीन कवि थे जिनके जीवनकाल में सदियों का अंतर था।
Ushaakaal ↔ संध्याकाल
उषाकाल में आकाश में फैली लालिमा मन को असीम शांति प्रदान करती है।
संध्याकाल होते ही पक्षी अपने घोंसलों की ओर चहचहाते हुए लौटने लगते हैं।
Praatah ↔ सायं
प्रातः काल का भ्रमण स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए वरदान माना गया है।
सायं के समय मंदिर में शंख और घंटों की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
Savera ↔ शाम
जब जागो तभी सवेरा — इस लोकोक्ति का अर्थ है कि सुधार कभी भी संभव है।
काम समाप्त करके सभी मजदूर थके कदमों से शाम को घर लौटते हैं।
Praatahkaal ↔ सायंकाल
प्रातःकाल की स्वच्छ वायु में योग करने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।
सायंकाल की आरती में सम्मिलित होने के लिए मंदिर में भारी भीड़ उमड़ी।
Sheeghra ↔ विलंब
सूचना मिलते ही एम्बुलेंस शीघ्र घटनास्थल पर पहुंच गई।
यातायात जाम के कारण बैठक में पहुंचने में आधा घंटा विलंब हो गया।
Satvar ↔ मंथन
सेनापति ने परिस्थिति का आकलन करके सत्वर निर्णय लिया।
नीतियों पर गहरा विचार-मंथन करने में महीनों का समय लग गया।
Avilamb ↔ सविंलब
आदेश प्राप्त होते ही पुलिस दल अविलंब घटनास्थल के लिए रवाना हो गया।
तकनीकी बाधाओं के कारण परियोजना की रिपोर्ट सविंलब प्रस्तुत की जा सकी।
Sheeghrata ↔ धीमापन
डॉक्टरों की सूझबूझ और शीघ्रता से जहर का असर फैलने से पहले रोक लिया गया।
दफ्तर के कामकाज में धीमापन नागरिकों की परेशानी का कारण बनता है।
Saamayik ↔ असामयिक
किसानों को समय पर खाद-बीज का वितरण एक अत्यंत सामयिक कदम था।
युवा खिलाड़ी के असामयिक निधन से संपूर्ण खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
Samayochit ↔ असामयिक
अग्निशामकों की समयोचित सहायता से विशाल मॉल को जलने से बचा लिया गया।
फसल कटाई के समय असामयिक ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
Kusamay ↔ सुसमय
कुसमय में धैर्य खोना अपनी ही परेशानियों को और बढ़ाने जैसा है।
सुसमय आने पर मनुष्य के सोए हुए भाग्य के द्वार भी खुल जाते हैं।
Kuvela ↔ सुवेला
आधी रात को किसी के घर कुवेला दस्तक देना शिष्टाचार के विरुद्ध है।
प्रातः काल की सुवेला में किए गए शुभ संकल्प अवश्य पूर्ण होते हैं।
Samayabaddh ↔ अनियत
मेट्रो रेल परियोजना को समयबद्ध तरीके से तीन वर्षों में पूर्ण कर लिया गया।
अनियत कार्यप्रणाली के कारण कई अदालतें मुकदमों के बोझ तले दबी रहती हैं।
Samayapaalak ↔ देर-लतीफ
समयपालक कर्मचारी सदा कार्यालय में समय से दस मिनट पहले उपस्थित होता है।
देर-लतीफ अधिकारियों के कारण कई महत्वपूर्ण बैठकें समय पर शुरू नहीं हो पातीं।
Samayanishtha ↔ अनियमितता
जर्मनी और जापान में नागरिकों की समयनिष्ठा पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।
दफ्तरों में उपस्थिति की अनियमितता को रोकने के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी लगाई गई।
Samay-poorv ↔ समय-पश्चात
अस्पताल में समय-पूर्व जन्मे शिशुओं को विशेष इनक्यूबेटर में रखा जाता है।
नियत समय-पश्चात जमा किए गए परीक्षा फॉर्म अस्वीकार कर दिए गए।
Praarambh ↔ समापन
शुभ कार्य का प्रारंभ सदैव ईश्वर वंदना के साथ किया जाता है।
वार्षिक खेल महोत्सव का समापन राष्ट्रगान और पुरस्कार वितरण के साथ हुआ।
Sada ↔ कभी-नहीं
सत्यवादी मनुष्य सदा सत्य के मार्ग पर ही अडिग रहता है।
ईमानदार व्यक्ति कभी-नहीं बेईमानी का धन अपने घर में लाने की सोचता।
Sarvada ↔ कदाचित
ईश्वर की कृपा समस्त प्राणियों पर सर्वदा समान रूप से बरसती है।
कदाचित ही ऐसा होता है जब मरुस्थल में मूसलाधार वर्षा देखने को मिले।
Anaadi ↔ सांत
सृष्टि का प्रवाह अनादि काल से निरंतर चला आ रहा है।
भौतिक संसार की हर वस्तु सांत और सीमित सीमाओं में बंधी है।
Kshanikata ↔ स्थायित्व
साधु-संत भौतिक सुखों की क्षणिकता को समझाकर विरक्ति का उपदेश देते हैं।
सत्य और न्याय पर आधारित समाज में ही वास्तविक स्थायित्व आ सकता है।
Satat ↔ खंडित
सतत विकास का लक्ष्य प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
बार-बार बिजली जाने से उत्पादन का चक्र खंडित हो गया।
Aviraam ↔ सविराम
डॉक्टरों ने चौबीस घंटे तक अविराम काम करके सभी घायलों की जान बचाई।
कक्षा में सविराम भाषण देने से विद्यार्थियों का ध्यान भटकने से बचता है।
Sadaabahaar ↔ मौसमी
उष्णकटिबंधीय वनों के सदाबहार वृक्ष वर्ष भर हरे-भरे रहते हैं।
मौसमी फल केवल वर्ष के विशेष महीनों में ही बाजार में उपलब्ध होते हैं।
Pal ↔ सदी
हवाई दुर्घटना में एक ही पल में सैकड़ों जिंदगियां काल के गाल में समा गईं।
गुलामी की बेड़ियों को काटने में देश को लगभग एक पूरी सदी लग गई।
Sadyah ↔ चिर
सद्यः घटित घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत रवाना हुई।
चिर संचित ज्ञान ही वृद्धावस्था में मनुष्य का सच्चा मार्गदर्शक बनता है।
Shaishav ↔ वार्धक्य
शैशव काल में बच्चे की मानसिक और शारीरिक देखभाल अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वार्धक्य में शरीर शिथिल हो जाने पर अपनों के स्नेह और सहारे की आवश्यकता होती है।
Sadyojaat ↔ वृद्ध
सद्योजात शिशु की कोमल मुस्कान हर किसी का दिल मोह लेती है।
परिवार के वयोवृद्ध बुजुर्गों का आशीर्वाद घर में शांति और समृद्धि लाता है।
Varshaaritu ↔ शुष्क-ऋतु
वर्षाऋतु के आगमन से धरती की प्यास बुझती है और हरियाली छा जाती है।
शुष्क-ऋतु में तेज धूप और जल स्रोतों के सूखने से जंगलों में आग का खतरा बढ़ जाता है।
Sanvatsar ↔ माह
भारतीय कालगणना में प्रत्येक संवत्सर का अपना विशिष्ट नाम और महत्व होता है।
कठोर मेहनत के बाद एक ही माह में उसने अपना काम पूरा कर दिखाया।
Prabhaatavela ↔ सांध्यवेला
प्रभातवेला में पक्षियों का चहचहाना और बहती शीतल बयार मन मोह लेती है।
सांध्यवेला में सूर्यास्त का मनोरम दृश्य देखने लोग समुद्र तट पर एकत्र होते हैं।
Shaashvatata ↔ क्षणभंगुरता
नैतिक मूल्यों की शाश्वतता समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है।
संसार के भौतिक सुखों की क्षणभंगुरता को देखकर संतों ने वैराग्य अपनाया।
Svarnayug ↔ अंधकारयुग
गुप्त काल को भारतीय कला और साहित्य का स्वर्णयुग कहा जाता है।
साम्राज्य के पतन के बाद देश कई दशकों तक अंधकारयुग में डूबा रहा।
Satyug ↔ कलियुग
सतयुग में सत्य और धर्म का चारों चरणों में पालन होता था।
कलियुग में स्वार्थ और लोभ के बढ़ने से नैतिक मूल्यों में गिरावट आई है।
Sheeghragaamita ↔ मंदगामिता
एक्सप्रेस ट्रेनों की शीघ्रगामिता से यात्रियों के यात्रा समय में बड़ी बचत हुई।
जाम में फंसे वाहनों की मंदगामिता से शहर में वायु प्रदूषण बढ़ जाता है।
Sharadritu ↔ ग्रीष्मऋतु
शरदऋतु में आकाश स्वच्छ और रातें सुहावनी तथा शीतल होने लगती हैं।
ग्रीष्मऋतु की चिलचिलाती धूप और लू से जनजीवन व्याकुल हो उठता है।
Saahasa ↔ कायरता
संकट और विपत्ति के समय साहस का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shoorataa ↔ भीरुता
संकट और विपत्ति के समय शूरता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भीरुता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nihshnka ↔ शंकित
संकट और विपत्ति के समय निःशंक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शंकित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shnkaakula ↔ निश्चिंत
संकट और विपत्ति के समय शंकाकुल का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने निश्चिंत का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Khaupha ↔ सुकून
संकट और विपत्ति के समय खौफ का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुकून का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Saahasika ↔ कायरतापूर्ण
संकट और विपत्ति के समय साहसिक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरतापूर्ण का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shaurya ↔ कायरता
संकट और विपत्ति के समय शौर्य का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shauryavaana ↔ कातर
संकट और विपत्ति के समय शौर्यवान का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shooraveera ↔ डरपोक
संकट और विपत्ति के समय शूरवीर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डरपोक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Saamanaa ↔ पलायन
संकट और विपत्ति के समय सामना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nihsnkocha ↔ संकोची
संकट और विपत्ति के समय निःसंकोच का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने संकोची का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ladaakoo ↔ शांतिप्रिय
संकट और विपत्ति के समय लड़ाकू का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांतिप्रिय का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Rakshaarthee ↔ शरणदाता
संकट और विपत्ति के समय रक्षार्थी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शरणदाता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sharanaarthee ↔ शरणदाता
संकट और विपत्ति के समय शरणार्थी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शरणदाता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Traanadaataa ↔ संहारक
संकट और विपत्ति के समय त्राणदाता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने संहारक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shnkhanaada ↔ शांति
संकट और विपत्ति के समय शंखनाद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांति का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Yuddhonmaada ↔ शांतिवार्ता
संकट और विपत्ति के समय युद्धोन्माद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांतिवार्ता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Surakshaa ↔ असुरक्षा
संकट और विपत्ति के समय सुरक्षा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने असुरक्षा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Surakshita ↔ असुरक्षित
संकट और विपत्ति के समय सुरक्षित का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने असुरक्षित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Snrakshita ↔ असंरक्षित
संकट और विपत्ति के समय संरक्षित का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने असंरक्षित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Jokhima ↔ सुरक्षा
संकट और विपत्ति के समय जोखिम का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुरक्षा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sakushala ↔ संकटग्रस्त
संकट और विपत्ति के समय सकुशल का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने संकटग्रस्त का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Khauphanaaka ↔ सुहावना
संकट और विपत्ति के समय खौफनाक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुहावना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bhayaavaha ↔ सुखद
संकट और विपत्ति के समय भयावह का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुखद का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Traasada ↔ सुखांत
संकट और विपत्ति के समय त्रासद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुखांत का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Tharatharaanaa ↔ स्थिर-रहना
संकट और विपत्ति के समय थरथराना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने स्थिर-रहना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ghabaraahata ↔ शांति
संकट और विपत्ति के समय घबराहट का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांति का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sanasaneekheja ↔ सामान्य
संकट और विपत्ति के समय सनसनीखेज का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सामान्य का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranakshetra ↔ शांतिस्थल
संकट और विपत्ति के समय रणक्षेत्र का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांतिस्थल का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nidara-mana ↔ शंकित-मन
संकट और विपत्ति के समय निडर-मन का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शंकित-मन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Saahasa-pradarshana ↔ पलायन
संकट और विपत्ति के समय साहस-प्रदर्शन का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Praknpana ↔ स्थिरता
संकट और विपत्ति के समय प्रकंपन का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने स्थिरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Seenaajoree ↔ विनम्रता
संकट और विपत्ति के समय सीनाजोरी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने विनम्रता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranonmaada ↔ शांति-चेतना
संकट और विपत्ति के समय रणोन्माद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांति-चेतना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ladaakaa ↔ सुलहपसंद
संकट और विपत्ति के समय लड़ाका का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुलहपसंद का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sinha-garjanaa ↔ गीदड़-भभकी
संकट और विपत्ति के समय सिंह-गर्जना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने गीदड़-भभकी का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shaurya-gaathaa ↔ कायरता-का-दाग
संकट और विपत्ति के समय शौर्य-गाथा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता-का-दाग का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sashastreekarana ↔ निःशस्त्रीकरण
संकट और विपत्ति के समय सशस्त्रीकरण का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने निःशस्त्रीकरण का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sainyabala ↔ अहिंसाबल
संकट और विपत्ति के समय सैन्यबल का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अहिंसाबल का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Saakshara ↔ निरक्षर
विद्या और बौद्धिक विकास में साक्षर का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में निरक्षर की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Saaksharataa ↔ निरक्षरता
विद्या और बौद्धिक विकास में साक्षरता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में निरक्षरता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shikshaa ↔ अशिक्षा
विद्या और बौद्धिक विकास में शिक्षा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशिक्षा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Suvijnya ↔ अल्पज्ञ
विद्या और बौद्धिक विकास में सुविज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अल्पज्ञ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Svaadhyaaya ↔ अनाभ्यास
विद्या और बौद्धिक विकास में स्वाध्याय का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनाभ्यास की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Supaathya ↔ दुर्पाठ्य
विद्या और बौद्धिक विकास में सुपाठ्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में दुर्पाठ्य की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pravaktaa ↔ श्रोता
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रवक्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में श्रोता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shodhakartaa ↔ साधारण-छात्र
विद्या और बौद्धिक विकास में शोधकर्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में साधारण-छात्र की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Saiddhaantika ↔ व्यावहारिक
विद्या और बौद्धिक विकास में सैद्धांतिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में व्यावहारिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sutarka ↔ कुतर्क
विद्या और बौद्धिक विकास में सुतर्क का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुतर्क की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastraartha ↔ वितंडा
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्रार्थ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में वितंडा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Snvaada ↔ विवाद
विद्या और बौद्धिक विकास में संवाद का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विवाद की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Saralaartha ↔ गूढ़ार्थ
विद्या और बौद्धिक विकास में सरलार्थ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में गूढ़ार्थ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shabdaadnbara ↔ सरल-भाषा
विद्या और बौद्धिक विकास में शब्दाडंबर का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में सरल-भाषा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shuddha-vartanee ↔ अशुद्ध-वर्तनी
विद्या और बौद्धिक विकास में शुद्ध-वर्तनी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशुद्ध-वर्तनी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shuddhochchaarana ↔ अशुद्धोच्चारण
विद्या और बौद्धिक विकास में शुद्धोच्चारण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशुद्धोच्चारण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Smarana ↔ विस्मरण
विद्या और बौद्धिक विकास में स्मरण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विस्मरण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Smriti ↔ विस्मृति
विद्या और बौद्धिक विकास में स्मृति का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विस्मृति की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Smaranashakti ↔ भूलक्कड़पन
विद्या और बौद्धिक विकास में स्मरणशक्ति का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में भूलक्कड़पन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Teekshnabuddhi ↔ स्थूलबुद्धि
विद्या और बौद्धिक विकास में तीक्ष्णबुद्धि का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में स्थूलबुद्धि की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sookshmadarshee ↔ अदूरदर्शी
विद्या और बौद्धिक विकास में सूक्ष्मदर्शी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अदूरदर्शी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidyaadhyayana ↔ समय-बर्बादी
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्याध्ययन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में समय-बर्बादी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sadvidyaa ↔ कुविद्या
विद्या और बौद्धिक विकास में सद्विद्या का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुविद्या की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastrajnya ↔ शास्त्रविहीन
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्रज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में शास्त्रविहीन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vyaakhyaa ↔ संक्षेप
विद्या और बौद्धिक विकास में व्याख्या का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में संक्षेप की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bhaashya ↔ संक्षिप्त-टिप्पणी
विद्या और बौद्धिक विकास में भाष्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में संक्षिप्त-टिप्पणी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Siddhaanta ↔ अटकल
विद्या और बौद्धिक विकास में सिद्धांत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अटकल की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sushikshaa ↔ कुशिक्षा
विद्या और बौद्धिक विकास में सुशिक्षा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुशिक्षा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Snskaara ↔ कुसंस्कार
विद्या और बौद्धिक विकास में संस्कार का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुसंस्कार की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaikshanika ↔ अशैक्षणिक
विद्या और बौद्धिक विकास में शैक्षणिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशैक्षणिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Paathyakrama ↔ सह-पाठ्यक्रम
विद्या और बौद्धिक विकास में पाठ्यक्रम का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में सह-पाठ्यक्रम की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastrasammata ↔ शास्त्रविरुद्ध
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्रसम्मत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में शास्त्रविरुद्ध की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kakshaa-shikshana ↔ स्व-अध्ययन
विद्या और बौद्धिक विकास में कक्षा-शिक्षण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में स्व-अध्ययन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shikshaanuraagee ↔ अध्ययन-विमुख
विद्या और बौद्धिक विकास में शिक्षानुरागी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अध्ययन-विमुख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastravettaa ↔ मूर्ख
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्रवेत्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्ख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shodha-patra ↔ सामान्य-लेख
विद्या और बौद्धिक विकास में शोध-पत्र का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में सामान्य-लेख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sadgrntha ↔ कुसाहित्य
विद्या और बौद्धिक विकास में सद्ग्रंथ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुसाहित्य की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Suvichaara ↔ कुविचार
विद्या और बौद्धिक विकास में सुविचार का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुविचार की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaana-pipaasaa ↔ संतुष्टि
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञान-पिपासा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में संतुष्टि की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastra-pramaana ↔ लोक-भ्रांति
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्र-प्रमाण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में लोक-भ्रांति की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Saahityika ↔ असाहित्यिक
विद्या और बौद्धिक विकास में साहित्यिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में असाहित्यिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shodhaparaka ↔ मनगढ़ंत
विद्या और बौद्धिक विकास में शोधपरक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मनगढ़ंत की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Praadhyaapaka ↔ शिक्षार्थी
विद्या और बौद्धिक विकास में प्राध्यापक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में शिक्षार्थी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Subodhataa ↔ दुर्बोधता
विद्या और बौद्धिक विकास में सुबोधता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में दुर्बोधता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Spashtataa ↔ अस्पष्टता
विद्या और बौद्धिक विकास में स्पष्टता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अस्पष्टता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Samaalochanaa ↔ अंधी-प्रशंसा
विद्या और बौद्धिक विकास में समालोचना का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अंधी-प्रशंसा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sheetalataa ↔ उष्णता
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतलता की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्णता का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Suvrishti ↔ अकाल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सुवृष्टि की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अकाल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Ghane-baadala ↔ साफ-आकाश
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में घने-बादल की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में साफ-आकाश का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Bavndara ↔ शांत-हवा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बवंडर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-हवा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sameera ↔ झंझा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में समीर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में झंझा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Ushna-mausama ↔ शीत-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उष्ण-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शीत-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Olaavrishti ↔ सामान्य-वर्षा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में ओलावृष्टि की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सामान्य-वर्षा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Umasa ↔ सुहावना-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उमस की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सुहावना-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Garamee ↔ सरदी
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में गरमी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सरदी का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Suhaavanaa ↔ कष्टप्रद
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सुहावना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में कष्टप्रद का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Toophaanee ↔ शांत
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तूफानी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aandhee-toophaana ↔ शांत-वातावरण
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आंधी-तूफान की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-वातावरण का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Tadita ↔ शांत-आकाश
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तड़ित की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-आकाश का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Ushnakatibndha ↔ शीतकटिबंध
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उष्णकटिबंध की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शीतकटिबंध का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Samasheetoshna ↔ चरम-जलवायु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में समशीतोष्ण की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में चरम-जलवायु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Rituparivartana ↔ स्थिर-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में ऋतुपरिवर्तन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में स्थिर-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Nidaagha ↔ शिशिर
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में निदाघ की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शिशिर का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheetakaala ↔ ग्रीष्मकाल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतकाल की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में ग्रीष्मकाल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Varshaakaala ↔ शुष्ककाल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वर्षाकाल की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शुष्ककाल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Vaashpeekarana ↔ संघनन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वाष्पीकरण की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में संघनन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Namee ↔ सूखापन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में नमी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखापन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Geelaapana ↔ सूखापन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में गीलापन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखापन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jalabharaava ↔ सूखा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में जलभराव की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sailaaba ↔ अकाल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सैलाब की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अकाल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheetaprada ↔ तापप्रद
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतप्रद की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तापप्रद का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Dhoolabharee-aandhee ↔ स्वच्छ-हवा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में धूलभरी-आंधी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में स्वच्छ-हवा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Reta-kaa-toophaana ↔ शांत-रेगिस्तान
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में रेत-का-तूफान की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-रेगिस्तान का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sookhaa-peedita ↔ बाढ़-ग्रस्त
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सूखा-पीड़ित की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में बाढ़-ग्रस्त का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-lahara ↔ लू-का-प्रकोप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-लहर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में लू-का-प्रकोप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Soorya-prakaasha ↔ मेघ-छाया
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सूर्य-प्रकाश की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मेघ-छाया का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheetprakop ↔ उष्ण-राहत
पहाड़ों पर बर्फबारी के कारण मैदानी क्षेत्रों में भीषण शीतप्रकोप बढ़ गया।
दोपहर में धूप निकलने से कड़ाके की सर्दी में लोगों को उष्ण-राहत मिली।
Himjhanjha ↔ शांत-हिमपात
पहाड़ी दर्रों में उठी तीव्र हिमझंझा ने पर्वतारोहियों का मार्ग अवरुद्ध कर दिया।
घाटी में हो रहे शांत-हिमपात से देवदार के वृक्षों पर बर्फ की सुंदर परत जम गई।
Vasnta-ritu ↔ शिशिर-ऋतु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वसंत-ऋतु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शिशिर-ऋतु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-vaayu ↔ उष्ण-पवन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-वायु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्ण-पवन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aardra-havaa ↔ शुष्क-पवन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आर्द्र-हवा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शुष्क-पवन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Svachchha-aakaasha ↔ मेघाच्छन्नता
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में स्वच्छ-आकाश की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मेघाच्छन्नता का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-shaama ↔ तपती-दोपहर
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-शाम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तपती-दोपहर का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Samudree-sameera ↔ मरुस्थली-हवा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में समुद्री-समीर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मरुस्थली-हवा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jhnjhaavaatee-mausama ↔ शांत-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में झंझावाती-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-bindu ↔ क्वथनांक
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-बिंदु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में क्वथनांक का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Varshaa-maapee ↔ शुष्कता-मापी
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वर्षा-मापी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शुष्कता-मापी का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Baadala-phatanaa ↔ सूखा-पड़ना
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बादल-फटना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखा-पड़ना का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheetala-phuhaara ↔ गरम-हवा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतल-फुहार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में गरम-हवा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Barasaata ↔ सूखा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बरसात की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheetoshna-katibndha ↔ उष्ण-कटिबंध
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतोष्ण-कटिबंध की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्ण-कटिबंध का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-prabhaava ↔ उष्ण-प्रभाव
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-प्रभाव की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्ण-प्रभाव का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Hariyaalee-mausama ↔ सूखा-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में हरियाली-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखा-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-ritu ↔ ग्रीष्म-ऋतु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-ऋतु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में ग्रीष्म-ऋतु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Tadita-jhnjhaa ↔ शांत-नभ
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तड़ित-झंझा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-नभ का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Dhundhalaa-mausama ↔ साफ-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में धुंधला-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में साफ-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-havaa ↔ गर्म-हवा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-हवा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में गर्म-हवा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Umasabharaa-dina ↔ सुहावनी-शाम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उमसभरा-दिन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सुहावनी-शाम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Chilachilaatee-dhoopa ↔ शीतल-छाया
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में चिलचिलाती-धूप की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शीतल-छाया का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sookhaa-mausama ↔ बरसाती-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सूखा-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में बरसाती-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Pavana-vega ↔ शांत-वायु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में पवन-वेग की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-वायु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Kaale-megha ↔ श्वेत-मेघ
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में काले-मेघ की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में श्वेत-मेघ का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Geelee-mittee ↔ सूखी-धूल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में गीली-मिट्टी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखी-धूल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aardra-vaayumndala ↔ शुष्क-वायुमंडल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आर्द्र-वायुमंडल की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शुष्क-वायुमंडल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Svarg ↔ नरक
धार्मिक मान्यताओं में पवित्र आचरण और परोपकार करने वाली आत्माओं को स्वर्ग का अधिकारी बताया गया है।
पाप, क्रूरता और दुष्ट कर्मों में लिप्त रहने वाले मनुष्य को नरक की यातनाएं झेलनी पड़ती हैं।
Jaagna ↔ सोना
देश की सीमाओं पर तैनात पहरेदारों का रात भर जागना ही नागरिकों को सुरक्षित रखता है।
समय पर सोना और पर्याप्त नींद लेना मस्तिष्क की एकाग्रता के लिए आवश्यक है।
Sakht ↔ नरम
कक्षा में अनुशासन बनाए रखने के लिए अध्यापक को कभी-कभी सख्त रुख अपनाना पड़ता है।
बच्चों की नादानियों पर क्रोधित होने के बजाय उनके साथ नरम व्यवहार करना चाहिए।
Seekhna ↔ सिखाना
विद्यार्थी जीवन में नई-नई विधाएं और भाषाएं सीखना भविष्य को उज्ज्वल बनाता है।
एक कुशल शिक्षक का दायित्व है कि वह छात्रों को जीवन के नैतिक मूल्य सिखाना न भूले।
Kehna ↔ सुनना
बिना सोचे-समझे किसी को कटु वचन कहना बाद में पश्चाताप का कारण बनता है।
संवाद में केवल अपनी बात थोपने के बजाय दूसरों के विचारों को भी ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए।
Sajaana ↔ बिगाड़ना
दीपावली के पावन पर्व पर रंगोली और दीपकों से घर के आंगन को सजाना परंपरा है।
क्रोध और आवेश में आकर अपनी बनी-बनाई बात बिगाड़ना बुद्धिमानी नहीं है।
Bikherna ↔ समेटना
तेज हवा ने मेज पर रखे महत्वपूर्ण कागजात को पूरे कमरे में बिखेरना शुरू कर दिया।
काम पूरा होते ही औजारों और बस्तों को व्यवस्थित रूप से समेटना एक अच्छी आदत है।
Suljhaana ↔ उलझाना
बुद्धिमान मध्यस्थ ने दोनों पक्षों के बीच विवाद को शांतिपूर्वक सुलझाना संभव बनाया।
सरल और स्पष्ट बात में व्यर्थ के तर्क जोड़कर उसे और अधिक उलझाना नासमझी है।
Failna ↔ सिकुड़ना
इंटरनेट और संचार माध्यमों के प्रसार से ज्ञान का दायरा तेजी से फैलना जारी है।
कड़ाके की ठंड में जीव-जंतु अपने शरीर को सिकोड़कर बैठ जाते हैं ताकि ठंड कम लगे।