Naya ↔ पुराना
पुरानी परंपराओं को त्यागकर समाज ने नए विचारों को अंगीकार किया है।
पुराने अनुभव और नई सोच का संगम ही किसी भी कार्य में सफलता दिलाता है।
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Naya ↔ पुराना
पुरानी परंपराओं को त्यागकर समाज ने नए विचारों को अंगीकार किया है।
पुराने अनुभव और नई सोच का संगम ही किसी भी कार्य में सफलता दिलाता है।
Mota ↔ पतला
नियमित व्यायाम करने से मोटा व्यक्ति भी पतला और स्वस्थ हो सकता है।
पतला धागा भी जब मिलकर रस्सी का रूप लेता है तो भारी बोझ उठाने में सक्षम होता है।
Pavitra ↔ अपवित्र
मंदिर का वातावरण पवित्र होता है, किसी भी कुकृत्य से उसे अपवित्र न करें।
अपवित्र भावनाएं व्यक्ति के आंतरिक तेज को क्षीण कर देती हैं, जबकि पवित्र विचार उसे आलोकित करते हैं।
Pratyaksh ↔ अप्रत्यक्ष
प्रत्यक्ष प्रमाण के सामने परोक्ष या अप्रत्यक्ष तर्कों का कोई मूल्य नहीं रह जाता।
माता-पिता का स्नेह अप्रत्यक्ष रूप से हर संकट में हमारी रक्षा करता है।
Praacheen ↔ अर्वाचीन
प्राचीन काल के ऋषि-मुनियों का ज्ञान आज के अर्वाचीन विज्ञान से भी कहीं आगे था।
अर्वाचीन काल की आधुनिक तकनीकें प्राचीन ज्ञान के साथ मिलकर नवक्रांति ला रही हैं।
Puraatan ↔ नूतन
पुरातन रूढ़िवादिता को छोड़कर नूतन प्रगतिशील सोच अपनाना ही विकास का मूलमंत्र है।
वसंत में प्रकृति नूतन परिधान धारण कर हरियाली और नवऊर्जा से भर उठती है।
Gaadha ↔ पतला
दूध को उबालकर गाढ़ा किया जाता है, जबकि अधिक पानी मिलाने से वह पतला हो जाता है।
पतला धागा भी जब मिलकर रस्सी का रूप लेता है तो भारी बोझ उठाने में सक्षम होता है।
Swatantra ↔ परतंत्र
स्वतंत्र देश का नागरिक सिर उठाकर जीता है, जबकि परतंत्र समाज दासता की बेड़ियों में जकड़ा रहता है।
परतंत्र व्यक्ति स्वर्ण के पिंजरे में भी स्वतंत्रता के खुले आकाश के लिए तड़पता रहता है।
Anukool ↔ प्रतिकूल
अनुकूल परिस्थितियों में तो सभी सफल होते हैं, पर प्रतिकूल समय में टिकने वाला ही सच्चा वीर है।
प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य न खोना ही सच्चे साहसी और बुद्धिमान की पहचान है।
Poorna ↔ अपूर्ण
पूर्ण समर्पण से किया गया कार्य सफल होता है जबकि अपूर्ण निष्ठा विफलता लाती है।
बिना नैतिक आचरण के कोई भी ज्ञान अपूर्ण और निष्फल रह जाता है।
Rikt ↔ पूर्ण
वर्षा होने से रिक्त जलाशय जल से पूर्ण हो गए।
पूर्ण समर्पण से किया गया कार्य सफल होता है जबकि अपूर्ण निष्ठा विफलता लाती है।
Pramaanik ↔ अप्रामाणिक
इतिहासकारों ने केवल प्रामाणिक अभिलेखों को स्वीकार किया और अप्रामाणिक दंतकथाओं को खारिज कर दिया।
अप्रामाणिक सूचनाओं पर विश्वास करने से समाज में व्यर्थ की अफवाहें और अशांति फैलती है।
Praakritik ↔ कृत्रिम
प्राकृतिक आपदाओं से बचना मनुष्य के वश में नहीं, किंतु कृत्रिम प्रदूषण को रोका जा सकता है।
कृत्रिम सुगंध कुछ ही देर टिकती है, जबकि प्राकृतिक फूलों की महक वातावरण को महकाए रखती है।
Pakka ↔ कच्चा
पक्के मकान तेज आंधी का सामना कर लेते हैं जबकि कच्चे झोपड़े ढह जाते हैं।
कच्चा घड़ा पानी का भार नहीं सह पाता, भट्ठी में तपकर ही वह पक्का और उपयोगी बनता है।
Praveen ↔ अकुशल
संगीत में प्रवीण गायक सुर को साध लेता है, जिसे नौसिखिया नहीं पकड़ पाता।
अकुशल हाथों में बहुमूल्य औजार भी नष्ट हो जाते हैं, कुशलता अभ्यास से ही आती है।
Alpa ↔ प्रचुर
अल्प ज्ञान खतरनाक होता है, जबकि किसी विषय का प्रचुर ज्ञान आत्मविश्वास देता है।
वर्षा काल में प्रचुर जल मिलने से धरती शस्य-श्यामला और हरी-भरी हो जाती है।
Prakat ↔ गुप्त
सच्चाई को कितना भी छिपाओ, वह एक दिन प्रकट होकर ही रहती है।
गुप्त मंत्रणा की गोपनीयता बनाए रखना राज्य की सुरक्षा के लिए अनिवार्य होता है।
Prachhanna ↔ प्रकट
गांवों में प्रच्छन्न बेरोजगारी एक गंभीर समस्या है जिसे तुरंत पहचानना आवश्यक है।
सत्य को लाख छिपाने का प्रयास किया जाए, वह समय आने पर स्वतः प्रकट हो जाता है।
Pramukh ↔ सामान्य
सम्मेलन में प्रमुख हस्तियों का भव्य स्वागत हुआ।
सामान्य नागरिक की देशभक्ति ही किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति और संबल होती है।
Prasanna ↔ अप्रसन्न
सफलता की सूचना पाकर छात्र प्रसन्न हो गया।
छोटी-छोटी बातों पर अप्रसन्न होने की आदत व्यक्ति को चिड़चिड़ा बना देती है।
Khinna ↔ प्रसन्न
विफलता से खिन्न होने के स्थान पर नए उत्साह से प्रयास करो।
प्रसन्न चित्त व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थिति में भी सकारात्मक मार्ग खोज लेता है।
Praphulla ↔ म्लान
प्रातःकाल खिलता हुआ प्रफुल्ल कमल मन को भाता है जबकि धूप में वह म्लान हो जाता है।
ग्रीष्म की तीखी धूप में फूलों की कांति म्लान हो जाती है जिसे शाम की ओस संवारती है।
Parush ↔ कोमल
परुष वचन हृदय को छलनी कर देते हैं जबकि कोमल बोल मरहम का काम करते हैं।
फूलों की पंखुड़ियाँ कोमल होती हैं जबकि पर्वत की चट्टानें अत्यंत कठोर।
Agragaami ↔ पश्चगामी
अग्रगामी सोच राष्ट्र को प्रगति के पथ पर ले जाती है, पश्चगामी विचार पतन कराते हैं।
पश्चगामी सोच समाज को अंधविश्वास और कुरीतियों के गर्त में धकेल देती है।
Pragatisheel ↔ रूढ़िवादी
प्रगतिशील युवा समाज में बदलाव लाते हैं।
रूढ़िवादी परंपराओं को त्यागकर प्रगतिशील वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
Pradhaan ↔ गौण
कर्म ही मनुष्य का प्रधान धर्म है।
मुख्य उद्देश्य की सिद्धि के लिए गौण बातों पर अधिक समय व्यर्थ नहीं करना चाहिए।
Paripakwa ↔ अपरिपक्व
परिपक्व बुद्धि अनुभव से विकसित होती है, अपरिपक्व सोच जल्दबाजी में निर्णय लेती है।
अपरिपक्व निर्णय से भविष्य में गंभीर हानियों का सामना करना पड़ सकता है।
Praudh ↔ अल्पवयस्क
प्रौढ़ व्यक्ति जीवन की जटिलताओं को धैर्यपूर्वक संभालते हैं।
अल्पवयस्क बच्चों से श्रम कराना कानूनन अपराध और उनके अधिकारों का हनन है।
Prabal ↔ दुर्बल
सच्चाई का पक्ष हमेशा प्रबल होता है, असत्य कितना भी दुर्बल क्यों न हो टिक नहीं सकता।
न्यायपूर्ण समाज में सबल व्यक्ति कभी दुर्बल पर अत्याचार नहीं करता।
Utthaan ↔ पतन
परिश्रम और एकता राष्ट्र के उत्थान का मार्ग प्रशस्त करते हैं जबकि आपसी फूट पतन लाती है।
अहंकार बड़े-बड़े साम्राज्यों के पतन का प्रमुख कारण बना है।
Jay ↔ पराजय
धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने वाले की अंततः जय होती है और अधर्मी की पराजय।
साहसी खिलाड़ी पराजय से निराश होने के बजाय अपनी कमियों से सीख लेता है।
Vijay ↔ पराजय
सत्यमेव जयते — अंततः सत्य की ही विजय होती है।
साहसी खिलाड़ी पराजय से निराश होने के बजाय अपनी कमियों से सीख लेता है।
Tiraskaar ↔ पुरस्कार
सत्कर्म का पुरस्कार मिलता है जबकि दुराचार का तिरस्कार ही फल होता है।
उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छात्र को पुरस्कार मिला जबकि अनुशासनहीनता पर दंड दिया गया।
Prashansa ↔ निंदा
सच्चे मित्र सामने प्रशंसा करने के बजाय पीठ पीछे भी निंदा नहीं करते।
निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाय — कबीरदास जी के अनुसार निंदा करने वाला व्यक्ति सुधारक होता है।
Puraskaar ↔ दंड
उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छात्र को पुरस्कार मिला जबकि अनुशासनहीनता पर दंड दिया गया।
न्यायालय ने दोषी को कठोर दंड दिया।
Swadesh ↔ परदेश
स्वदेश की मिट्टी की खुशबू परदेश में रहने वाले प्रवासी को सदा अपनी ओर खींचती है।
परदेश में कितना भी धन मिले, स्वदेश जैसी आत्मीयता कहीं नहीं मिलती।
Aagman ↔ प्रस्थान
वसंत के आगमन से प्रकृति खिल उठती है, जबकि पतझड़ का प्रस्थान शीत का अंत करता है।
ट्रेन के प्रस्थान का समय घोषित होते ही यात्री प्लेटफॉर्म पर एकत्र हो गए।
Pravesh ↔ निकास
सभागार में प्रवेश के लिए अलग द्वार था और निकास के लिए दूसरा मार्ग।
वर्षा के जल का उचित निकास न होने से गलियों में पानी भर गया।
Pati ↔ पत्नी
गृहस्थ जीवन में पति और पत्नी गृहस्थी की गाड़ी के दो पहिये होते हैं।
सुख-दुख में साथ निभाने वाली पत्नी जीवन की सबसे मजबूत संबल होती है।
Purush ↔ स्त्री
संविधान की दृष्टि में पुरुष और स्त्री दोनों को समान अधिकार व अवसर प्राप्त हैं।
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः — जहां स्त्री का सम्मान होता है वहां देवों का वास होता है।
Maata ↔ पिता
माता का प्रेम संसार में सबसे निस्वार्थ और अनमोल माना गया है।
पिता परिवार का संबल और बालकों के भविष्य के कुशल मार्गदर्शक होते हैं।
Lekhak ↔ पाठक
लेखक अपनी कलम से समाज की विसंगतियों को उजागर करता है।
सच्चा लेखक वही है जो पाठक के हृदय को छू सके।
Swatantrata ↔ परतंत्रता
स्वतंत्रता सेनानियों के असीम बलिदान से देश को परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्ति मिली।
परतंत्रता मनुष्य के आत्मसम्मान और संस्कृति को नष्ट कर देती है।
Pakshapaata ↔ तटस्थता
न्यायाधीश को किसी भी पक्षपात से ऊपर उठकर केवल साक्ष्यों के आधार पर फैसला देना चाहिए।
पंचायती न्याय में निष्पक्षता और तटस्थता की नीति अपनाने से दोनों पक्षों का विश्वास बना रहता है।
Nirvaasana ↔ पुनर्वास
तानाशाह शासक ने अपने राजनीतिक विरोधियों को देश से निर्वासन की क्रूर सजा सुनाई।
बाढ़ पीड़ितों के लिए शासन ने सुरक्षित स्थल पर नए घरों का निर्माण कर पुनर्वास कराया।
Parnparaa ↔ आधुनिकता
भारतीय विवाह समारोहों में सदियों पुरानी समृद्ध परंपरा का दर्शन सहज ही होता है।
डिजिटल तकनीक और आधुनिकता ने जीवनशैली को सुगम व त्वरित बना दिया है।
Nivaasa ↔ प्रवास
अवकाश प्राप्त करने के उपरांत उन्होंने अपने पैतृक गांव में स्थायी निवास बना लिया।
उच्च शिक्षा और रोजगार के सिलसिले में युवाओं को वर्षों तक परदेस में प्रवास करना पड़ता है।
Pravaasee ↔ मूलनिवासी
उद्योगों में काम करने वाले कई प्रवासी श्रमिक त्योहारों पर अपने पैतृक गांव लौट आते हैं।
अंडमान के द्वीपों पर रहने वाले मूलनिवासी जनजातियों की अपनी विशिष्ट संस्कृति और परंपरा है।
Savaaree ↔ पैदल
दफ्तर जाने के लिए उन्होंने मेट्रो ट्रेन की सवारी को सबसे तेज और सुविधाजनक विकल्प माना।
स्वास्थ्य और फिटनेस बनाए रखने के लिए प्रातःकाल पैदल चलना एक उत्तम व्यायाम है।
Prakash ↔ अंधकार
ज्ञान का प्रकाश अज्ञान के गहन अंधकार को पूरी तरह मिटा देता है।
दीपक की एक छोटी सी लौ भी घने अंधकार पर प्रकाश की विजय सुनिश्चित करती है।
Aakash ↔ पाताल
सच्चे साधक की कीर्ति आकाश से लेकर पाताल तक सभी दिशाओं में गूंजती है।
राजा बलि ने अपना सर्वस्व अर्पित कर आकाश और पाताल दोनों लोकों में यश अर्जित किया।
Poornima ↔ अमावस्या
पूर्णिमा की रात जहां आलोकित होती है, वहीं अमावस्या की रात्रि घोर अंधकारमय रहती है।
अमावस्या के घने अंधेरे में दीवाली के दीप जलाकर प्रकाश पर्व मनाया जाता है।
Prabhat ↔ संध्या
प्रभात की ताजी किरणें उमंग लाती हैं और संध्या का शांत वातावरण विश्राम का संदेश देता है।
संध्या होते ही पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौट आते हैं जिन्हें वे प्रभात में छोड़ गए थे।
Poorva ↔ पश्चिम
सूर्य पूर्व दिशा से उदित होकर पश्चिम दिशा में अस्त होता है।
प्राचीन काल से व्यापारिक जहाजों का आवागमन पूर्व और पश्चिम के मध्य निरंतर रहा है।
Praachi ↔ प्रतीची
प्राची के भाल पर सिंदूरी सूर्य की छटा देखते ही प्रतीची का अंधकार स्वतः लुप्त हो गया।
संध्याकाल में प्रतीची में ढलता सूर्य प्राची के प्रभात का संदेश अग्रिम रूप से देता है।
Vasant ↔ पतझड़
पतझड़ में पेड़ पत्ते गिरा देते हैं, किंतु वसंत आते ही वे नवपल्लवों से सुशोभित हो उठते हैं।
जीवन का नियम है कि पतझड़ के उदास दिनों के बाद वसंत की सुनहरी बहार अवश्य आती है।
Pravah ↔ ठहराव
नदी का निरंतर प्रवाह जीवन की गतिशीलता सिखाता है, जबकि ठहराव सड़न उत्पन्न करता है।
जल में यदि प्रवाह न रहे और ठहराव आ जाए, तो वह अपनी ताजगी और निर्मलता खो देता है।
Paarthiv ↔ अपार्थिव
मनुष्य का शरीर पार्थिव तत्वों से निर्मित है, जबकि उसकी आत्मा अपार्थिव और अमर है।
संतों के चेहरे पर अपार्थिव तेज झलकता है जो पार्थिव प्रलोभनों से परे होता है।
Paala ↔ धूप
शीत लहर में पाला पड़ने से सब्जियों की फसल नष्ट हो जाती है, जिसे धूप ही बचा सकती है।
कड़कड़ाती धूप के बाद घने वृक्ष की शीतल छांव पथिक को नवजीवन प्रदान करती है।
Parvat ↔ मैदान
पर्वत पर चढ़ाई जितनी दुष्कर होती है, समतल मैदान में चलना उतना ही सुगम होता है।
विशाल मैदान कृषि और बस्तियों के लिए आदर्श होते हैं, जबकि पर्वत वनों और खनिजों से संपन्न हैं।
Pawan ↔ निर्वात
धरती के वायुमंडल में जीवनदायिनी पवन बहती है, जबकि अंतरिक्ष में निर्वात की स्थिति होती है।
प्रकाश की किरणें निर्वात में भी गमन कर सकती हैं, किंतु ध्वनि को संचरण हेतु वायु चाहिए।
Rateela ↔ पथरीला
थार मरुस्थल का विस्तार रेतीला है, जबकि अरावली पर्वतमाला का मार्ग पथरीला और दुर्गम है।
पथरीला रास्ता चलने में कष्टप्रद होता है, किंतु रेतीले धोरों पर पैर तेजी से फिसलते हैं।
Prasphutan ↔ मुरझाहट
वसंत में कलियों का प्रस्फुटन होता है और ज्येष्ठ की दोपहरी में फूलों की मुरझाहट देखी जाती है।
पानी मिलते ही मुरझाहट त्यागकर मुरझाए पौधे पुनः लहलहा उठे।
Parvatiya ↔ मैदानी
पर्वतीय क्षेत्रों की जीवनशैली कठोर होती है, जबकि मैदानी इलाकों में सुविधाएं अधिक सुलभ हैं।
मैदानी भाग में नदियों का बहाव धीमा और चौड़ा होता है, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में वह तीव्र होता है।
Salil ↔ पावक
कवि ने प्रकृति के संतुलन को दर्शाते हुए शीतल सलिल और प्रज्वलित पावक का वर्णन किया है।
पावक सब कुछ भस्म कर पवित्र कर देती है, और सलिल उस तपन को शांत कर तृप्ति देता है।
Praval ↔ शैवाल
समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र में कठोर प्रवाल और सूक्ष्म शैवाल का परस्पर सहजीवन अद्वितीय है।
तालाब की सतह पर हरी शैवाल फैलने से धूप नीचे नहीं पहुंच पाती।
Sadabahaar Van ↔ पर्णपाती वन
पश्चिमी घाट के सदाबहार वन जैव विविधता के विपुल भंडार हैं जो कभी पत्ते विहीन नहीं होते।
पर्णपाती वन शुष्क मौसम में पत्ते गिरा देते हैं, जबकि सदाबहार वन सालभर घने हरे-भरे रहते हैं।
Pallav ↔ पतझर
ऋतुराज वसंत के आते ही वृक्षों की शाखाएं कोमल पल्लव से लद जाती हैं।
पतझर में पत्तियां त्यागने के बाद ही वृक्षों पर वसंत में कोमल पल्लव लहलहाते हैं।
Shuddhata ↔ प्रदूषण
हिमालयी वातावरण की शुद्धता में सांस लेने से असाध्य रोग भी शांत होने लगते हैं।
औद्योगिक कारखानों का धुआं वायु में प्रदूषण बढ़ाता है, जिसे वृक्षारोपण से शुद्धता में बदला जा सकता है।
Taraai ↔ पहाड़
तराई के दलदली और नम क्षेत्र में घने जंगल उगते हैं, जो ऊंचे पहाड़ की शुष्कता से भिन्न हैं।
तराई के नम जंगलों से गुजरकर ही यात्री ऊंचे पहाड़ की बर्फीली चोटियों तक पहुंचते हैं।
Chakravaat ↔ प्रतिचक्रवात
चक्रवात आने पर भारी बारिश और तबाही होती है, जबकि प्रतिचक्रवात में मौसम साफ और शांत रहता है।
प्रतिचक्रवात वायुमंडलीय उच्च दबाव का क्षेत्र होता है जिसमें हवाएं बाहर की ओर प्रवाहित होती हैं।
Prem ↔ घृणा
सच्चा प्रेम वैर और शत्रुता की भावना को भी स्नेह में बदल देता है।
हृदय में घृणा पालने से स्वयं की मानसिक शांति नष्ट हो जाती है।
Prasannata ↔ खिन्नता
मित्रों से मिलकर उसके चेहरे पर स्वाभाविक प्रसन्नता झलकने लगी।
असफलता की सूचना पाकर उसके मन में गहरी खिन्नता छा गई।
Peeda ↔ राहत
चोट की तीव्र पीड़ा से घायल व्यक्ति कराह उठा।
औषधि का लेप लगते ही रोगी को भारी पीड़ा से राहत मिली।
Preeti ↔ द्वेष
परस्पर प्रीति और सौहार्द से ही परिवार का वातावरण सुखद रहता है।
हृदय में द्वेष रखने वाला मनुष्य कभी किसी का भला नहीं सोच सकता।
Aatmiyata ↔ परायापन
अतिथि का स्वागत ऐसी आत्मीयता से किया गया कि वह अभिभूत हो गया।
परिवार में मतभेद बढ़ने से सदस्यों के बीच परायापन पनपने लगता है।
Pulkit ↔ संतप्त
प्रियतम के आगमन का समाचार पाकर उसका रोम-रोम पुलकित हो गया।
कठोर विरह की ज्वाला में संतप्त हृदय को कहीं चैन नहीं था।
Pramatta ↔ अमत्त
धन और सत्ता के नशे में प्रमत्त व्यक्ति किसी के अधिकार का सम्मान नहीं करता।
अमत्त और संयमी मनुष्य हर विषम परिस्थिति में संतुलित रहता है।
Prafullit ↔ खिन्न
वर्षा की फुहारें पड़ते ही कृषक का हृदय प्रफुल्लित हो उठा।
फसल खराब होने की आशंका से किसान का मन खिन्न हो गया।
Uttejana ↔ प्रशांति
झूठी अफवाहों से समाज में अवांछित उत्तेजना फैल गई।
प्राकृतिक वातावरण में आत्मा को असीम प्रशांति मिलती है।
Prafullata ↔ म्लानता
प्रातःकालीन सैर से चेहरे पर अनूठी प्रफुल्लता आ जाती है।
बीमारी और चिंता के कारण चेहरे की म्लानता स्पष्ट दिखाई दे रही थी।
Udwignata ↔ प्रसन्नचित्तता
परीक्षा परिणाम से पूर्व छात्रों के मन में उद्विग्नता स्वाभाविक है।
ध्यान के अभ्यास से जीवन में प्रसन्नचित्तता बनी रहती है।
Hatotsah ↔ प्रोत्साहन
लगातार विफलता से खिलाड़ी का हतोत्साह बढ़ गया था।
कोच के प्रोत्साहन से उसने पुनः नए जोश से अभ्यास आरंभ किया।
Priyavadi ↔ अप्रियवादी
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात्—सत्य बोलो और प्रियवादी बनो।
अप्रियवादी व्यक्ति सच को भी इतने कड़वे ढंग से कहता है कि वह सबको चुभता है।
Shirsh ↔ पाद
मानव शरीर में शीर्ष सबसे संवेदनशील और विचारशील अंग माना जाता है।
शारीरिक संतुलन बनाए रखने में पाद अर्थात पैरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
Agra ↔ पश्च
मस्तिष्क का अग्र भाग तार्किक निर्णय लेने और चिंतन का केंद्र होता है।
कशेरुक दंड का पश्च भाग पूरे शरीर को सीधा और सुदृढ़ आधार प्रदान करता है।
Mukh ↔ पृष्ठ
मुख पर खिली सहज मुस्कान व्यक्ति के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को दर्शाती है।
पृष्ठ अर्थात पीठ के व्यायाम से रीढ़ की हड्डी लचीली और मजबूत बनी रहती है।
Krish ↔ पुष्ट
लंबी बीमारी के कारण उसका शरीर कृश और दुर्बल दिखाई देने लगा था।
संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से पहलवान का शरीर गठीला और पुष्ट बन गया।
Pangu ↔ गतिशील
दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर पंगु पर्वतारोही ने भी ऊँचे शिखर पर तिरंगा फहराया।
गतिशील धावक ने अपनी शारीरिक क्षमता के बल पर मैराथन दौड़ में प्रथम स्थान पाया।
Vaksha ↔ पीठ
प्राणायाम के गहन अभ्यास से वक्ष का फैलाव बढ़ता है और फेफड़े पूर्ण क्षमता से कार्य करते हैं।
दैनिक योगासनों से पीठ की कशेरुकाएं लचीली रहती हैं और रीढ़ की हड्डी सुदृढ़ बनी रहती है।
Udara ↔ पृष्ठ
संतुलित और सुपाच्य आहार लेने से उदर की पाचन क्रिया सुचारू और रोगमुक्त बनी रहती है।
लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठने से पृष्ठ और कटि प्रदेश में पीड़ा होने लगती है।
Karatala ↔ पादतल
उत्साहवर्धन और शास्त्रीय ताल वादन में करतल ध्वनि अर्थात तालियों की गूंज सुनाई देती है।
प्राकृतिक एक्यूप्रेशर चिकित्सा में पादतल के विशेष बिंदुओं पर दबाव डालकर उपचार किया जाता है।
Shirobhaaga ↔ पादभाग
शारीरिक संरचना के अध्ययन में शिरोभाग मस्तिष्क और प्रमुख ज्ञानेंद्रियों का आवास माना गया है।
मानव शरीर का पादभाग पूरे शरीर का भार वहन करने तथा गतिशीलता प्रदान करने का आधार है।
Urobhaaga ↔ पृष्ठभाग
तैराकी करते समय उरोभाग की मांसपेशियां जल के प्रतिरोध को चीरते हुए आगे बढ़ती हैं।
शरीर को सीधा और संतुलित रखने के लिए पृष्ठभाग की रीढ़ की मांसपेशियां निरंतर सक्रिय रहती हैं।
Agrakaaya ↔ पश्चकाय
शरीर रचना विज्ञान में अग्रकाय के अंतर्गत वक्ष, उदर और प्रमुख सम्मुख अंग सम्मिलित होते हैं।
रीढ़ की हड्डी और नितंब पश्चकाय के मुख्य संरचनात्मक आधार बिंदु होते हैं।
Pushtaanga ↔ कृशांग
नियमित व्यायाम और पौष्टिक आहार के सेवन से पहलवान का शरीर पुष्टांग और गठीला बन गया।
दीर्घकालिक कुपोषण और बीमारी के कारण रोगी अत्यंत कृशांग और अशक्त दिखाई देने लगा।
Shvaasa ↔ प्रश्वास
प्राणायाम की क्रिया में गहरी श्वास भीतर खींचकर फेफड़ों को प्राणवायु से भरा जाता है।
मन को शांत करने के लिए प्रश्वास के माध्यम से शरीर से धीरे-धीरे वायु बाहर छोड़ी जाती है।
Punya ↔ पाप
दीन-दुखियों की निःस्वार्थ सेवा करने से हृदय में पुण्य और आत्मिक शांति का संचय होता है।
किसी निर्दोष जीव को व्यर्थ पीड़ा पहुँचाना घोर पाप माना जाता है।
Paropkaar ↔ अपकार
वृक्ष और नदियाँ परोपकार के लिए ही फल और जल प्रदान करते हैं।
सज्जन व्यक्ति कभी किसी के साथ अपकार या अहित करने का विचार मन में नहीं लाते।
Dharmaatma ↔ पापात्मा
धर्मात्मा पुरुष सदैव दूसरों के सुख-दुख में सहभागी बनकर उनकी सेवा करते हैं।
पापात्मा मनुष्य दूसरों का धन हड़पने और निर्दोषों को सताने में ही सुख खोजता है।
Parmaarth ↔ स्वार्थ
संत कबीर ने जीवन भर परमार्थ और ज्ञान के प्रचार को ही अपना कर्तव्य माना।
अंधे स्वार्थ के वशीभूत होकर व्यक्ति अपने सगे-संबंधियों को भी हानि पहुँचा बैठता है।
Pravritti ↔ निवृत्ति
गृहस्थ आश्रम में सामाजिक व पारिवारिक कर्तव्यों की ओर मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है।
वानप्रस्थ और संन्यास आश्रम में व्यक्ति सांसारिक मोह से निवृत्ति की ओर अग्रसर होता है।
Shreya ↔ प्रेय
बुद्धिमान व्यक्ति श्रेय के मार्ग को चुनते हैं जो आत्मिक कल्याण की ओर ले जाता है।
अज्ञानी जन केवल प्रेय अर्थात् तात्कालिक सांसारिक सुखों के पीछे भागते रहते हैं।
Paavan ↔ कलुषित
गंगा के पावन जल और संतों की वाणी ने संपूर्ण वातावरण को पवित्र कर दिया।
कुत्सित विचारों से कलुषित मन कभी ईश्वर की सच्ची भक्ति नहीं कर सकता।
Aparigraha ↔ परिग्रह
अपरिग्रह का पालन करने वाला साधु केवल जीवन-यापन हेतु आवश्यक वस्तुएँ ही रखता है।
धन-संपत्ति के अत्यधिक परिग्रह से समाज में आर्थिक विषमता और अशांति फैलती है।
Paarlaukik ↔ ऐहिक
धार्मिक अनुष्ठानों का उद्देश्य पारलौकिक कल्याण और सद्गति की कामना करना होता है।
ऐहिक जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए परिश्रम करना भी आवश्यक है।
Punyavaan ↔ पापी
पुण्यवान पुरुष का जीवन सदा दूसरों के आंसू पोंछने में व्यतीत होता है।
पापी मनुष्य अपने बुरे कर्मों के कारण समाज में भय और घृणा का पात्र बनता है।
Punyaatma ↔ दुरात्मा
पुण्यात्मा साधक अपने तपोबल से संपूर्ण वातावरण को पवित्र कर देते हैं।
दुरात्मा व्यक्ति दूसरों की प्रगति देखकर भीतर ही भीतर ईर्ष्या से जलता रहता है।
Samdarshi ↔ पक्षपाती
सच्चा संत सभी प्राणियों के प्रति समदर्शी दृष्टि रखकर किसी में भेदभाव नहीं करता।
पक्षपाती अधिकारी अपने संबंधियों को अनुचित लाभ पहुँचाने का प्रयास करता है।
Nishpaksh ↔ पक्षपाती
निष्पक्ष पत्रकारिता ही किसी भी स्वतंत्र लोकतंत्र का चौथा मजबूत स्तंभ होती है।
पक्षपाती मीडिया समाचारों को तोड़-मरोड़ कर जनता के सामने पेश करता है।
Paropkaari ↔ स्वार्थी
परोपकारी व्यक्ति अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा निर्धनों के कल्याण में लगा देता है।
स्वार्थी मनुष्य केवल अपने निजी लाभ के लिए दूसरों का उपयोग करता है।
Pratishtha ↔ अप्रतिष्ठा
सत्य और निष्ठा के साथ कार्य करके उसने समाज में उच्च प्रतिष्ठा प्राप्त की।
झूठे वादों के कारण राजनेता को जनता के बीच अप्रतिष्ठा झेलनी पड़ी।
Poojya ↔ अपूज्य
माता-पिता और गुरुजन प्रत्येक व्यक्ति के लिए पूज्य होते हैं।
पापकर्मों में डूबा व्यक्ति अपने व्यवहार से स्वयं को अपूज्य बना लेता है।
Prashansneeya ↔ निंदनीय
आपदा के समय युवाओं का राहत कार्य अत्यंत प्रशंसनीय और प्रेरणादायक रहा।
संकट के समय दवाओं की कालाबाजारी करना एक अत्यंत निंदनीय और घृणित कृत्य है।
Punyakarm ↔ पापकर्म
भूखों को अन्न खिलाना और प्यासों को जल पिलाना सबसे बड़ा पुण्यकर्म है।
मासूम जीवों की हत्या करना घोर पापकर्म है जिसकी भरपाई संभव नहीं।
Paardarshi ↔ संदेहास्पद
परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाकर ही युवाओं में विश्वास बहाल किया जा सकता है।
संदेहास्पद सौदों के उजागर होने पर पूरी चयन समिति को भंग कर दिया गया।
Parhit ↔ स्वहित
परहित सरिस धरम नहिं भाई अर्थात् दूसरों का भला करने से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।
जो मनुष्य केवल स्वहित में लीन रहता है वह कभी सच्चे मित्र नहीं बना पाता।
Sahridaya ↔ पाषाणहृदय
सहृदय डॉक्टर ने गरीब मरीज की लाचारी देखकर उसकी पूरी फीस माफ कर दी।
पाषाणहृदय साहूकार ने अनाथ बच्चों की गिड़गिड़ाहट पर भी कोई दया नहीं दिखाई।
Praamaanikata ↔ अप्रामाणिकता
इतिहासकार ने प्राचीन शिलालेखों के आधार पर घटना की प्रामाणिकता सिद्ध की।
दस्तावेजों में अप्रामाणिकता पाए जाने पर पुलिस ने फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज किया।
Pratishthaavaan ↔ कलंकित
प्रतिष्ठावान उद्योगपति ने शहर में निःशुल्क अस्पताल का निर्माण करवा कर ख्याति पाई।
घूसखोरी के आरोप सिद्ध होने पर पूर्व मंत्री का नाम सदा के लिए कलंकित हो गया।
Paropkaarita ↔ स्वार्थपरता
भारतीय संस्कृति में परोपकारिता को सर्वोच्च मानवीय मूल्य के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।
समाज में बढ़ती स्वार्थपरता कमजोर वर्गों की उपेक्षा का कारण बन रही है।
Paaltu ↔ जंगली
कुत्ता और गाय मनुष्य के सबसे वफादार और उपयोगी पालतू पशु हैं।
जंगली जानवरों का शिकार करना वन्यजीव संरक्षण कानून के अंतर्गत दंडनीय है।
Paalya ↔ अपाल्य
भेड़ और बकरी स्वभाव से पाल्य पशु हैं जिन्हें मनुष्य सरलता से पाल लेता है।
तेंदुआ और लकड़बग्घा अपाल्य जीव हैं जिनका स्वभाव स्वतंत्र और हिंसक रहता है।
Keet ↔ पतंग
मिट्टी में रहने वाला कीट पत्तियों को कुतर कर पोषण पाता है।
पतंग रात के समय जलती हुई लौ के चारों ओर मंडराता है।
Pakwa ↔ अपक्व
पक्व फल पेड़ से अपने आप टूटकर नीचे गिर जाते हैं।
अपक्व भोजन का सेवन करने से पाचन क्रिया बिगड़ सकती है।
Teekha ↔ फीका
लाल मिर्च के कारण सब्जी का स्वाद बहुत तीखा और चटपटा हो गया था।
रोगी के लिए चिकित्सक ने फीका और बिना मिर्च-मसाले का दलिया खाने की सलाह दी।
Paachak ↔ अपाचक
भोजन के उपरांत भुने जीरे और हींग का चूर्ण पाचक औषधि का काम करता है।
अत्यधिक शीतल पेय भोजन के पाचन रस को धीमा करके अपाचक प्रभाव छोड़ता है।
Pyaas ↔ तृप्ति
धूप में दौड़ने के बाद कंठ सूख गया और असहनीय प्यास लगने लगी।
मटके का शीतल जल पीते ही तन-मन को अपार तृप्ति मिल गई।
Sadaabhojan ↔ पकवान
दाल, चावल और रोटी का सदाभोजन नित्य प्रति स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम है।
विवाह समारोह में बने घी और मावे के पकवान अधिक खाने से पेट भारी हो जाता है।
Poshak ↔ अपोषक
अंकुरित अनाज और बादाम शरीर के लिए अत्यंत पोषक आहार सिद्ध होते हैं।
मैदे से बने तले हुए स्नैक्स अपोषक होते हैं और केवल पेट भरते हैं।
Poushtik ↔ हानिकारक
बढ़ते बच्चों के लिए दूध, घी और फल पौष्टिक भोजन के प्रमुख घटक हैं।
सड़े तेल में तले फास्ट फूड का नियमित सेवन लिवर के लिए हानिकारक है।
Peya ↔ अपेय
नारियल पानी और नीबू शिकंजी गर्मियों में स्वास्थ्यवर्धक पेय माने जाते हैं।
मदिरा और दूषित नाले का पानी मानव स्वास्थ्य के लिए सर्वथा अपेय है।
Alpaahaar ↔ पूर्णाहार
यात्रा के दौरान उसने केवल फल और चाय का अल्पाहार लिया।
दोपहर के समय दाल-चावल, रोटी और सब्जी का पूर्णाहार ग्रहण करना चाहिए।
Mitaahaari ↔ पेटू
मिताहारी व्यक्ति सदा स्वस्थ रहता है और कभी अपच का शिकार नहीं होता।
पेटू मनुष्य स्वाद के चक्कर में आवश्यकता से अधिक ठूंस-ठूंस कर खा लेता है।
Upvaas ↔ पारण
एकादशी के दिन श्रद्धालु निर्जल उपवास रखकर आत्मशुद्धि करते हैं।
अगले दिन सूर्योदय के पश्चात पूजा करके पारण किया जाता है।
Pipaasa ↔ तृप्ति
रेगिस्तान की तपती रेत में मुसाफिर की पिपासा बढ़ती ही जा रही थी।
शीतल जल का घूंट भरते ही उसकी पिपासा शांत हो गई और तृप्ति मिली।
Jaaykedaar ↔ फीका
मसालों के सही संतुलन से दाल तड़का बेहद जायकेदार बना था।
नमक भूल जाने के कारण पूरा पुलाव एकदम फीका रह गया।
Salona ↔ फीका
मठरी और चकली का सलोना स्वाद चाय के साथ खूब जमता है।
उबले आलू बिना नमक-मिर्च के खाने में एकदम फीके लगते हैं।
Pakwata ↔ अपक्वता
केले में पक्वता आते ही छिलका पीला और गूदा मीठा हो जाता है।
अंगूर में अपक्वता रहने पर उसका स्वाद कसैला और खट्टा लगता है।
Phalaahaari ↔ अन्नाहारी
व्रत रखने वाले लोग फलाहारी भोजन के रूप में कूटू की पूरी और सिंघाड़ा लेते हैं।
साधारण दिनों में लोग अन्नाहारी होकर गेहूं और चावल पर निर्भर रहते हैं।
Doodhiya ↔ पानीदार
काजू और मलाई से बनी शाही पनीर की ग्रेवी एकदम दूधिया और गाढ़ी थी।
ढाबे की दाल में पानीदार झोल अधिक था और दाल के दाने कम।
Sattoo ↔ पकवान
गर्मियों में भुने चने का सत्तू घोलकर पीने से लू नहीं लगती।
त्योहारों पर घी और मेवे के पकवान घर-घर में बनाए जाते हैं।
Paachakata ↔ अपाचकता
हींग और अजवाइन मिलाने से दाल की पाचकता कई गुना बढ़ जाती है।
कच्चे मैदे की अपाचकता आंतों में रुकावट पैदा कर सकती है।
Praataraash ↔ रात्रिभोज
स्वस्थ दिनचर्या के लिए पौष्टिक प्रातराश लेना अत्यंत आवश्यक है।
सोने से कम से कम दो घंटे पहले हल्का रात्रिभोज कर लेना चाहिए।
Teekhapan ↔ फीकापन
काली मिर्च के तीखापन से सूप में ताजगी और गर्माहट आ गई।
मसालों के अभाव में उबली सब्जियों का फीकापन खाने में नीरस लगा।
Pishta ↔ अपिष्ट
चक्की में पिष्ट गेहूं के आटे से कोमल रोटियाँ बनती हैं।
अपिष्ट साबुत गेहूं को उबालकर दलिया बनाया जाता है।
Poori ↔ सादी-रोटी
त्योहारों पर हलवे के साथ गरमागरम पूरी बनाई जाती है।
दैनिक आहार में बिना तेल की सादी-रोटी खाना ही सर्वोत्तम है।
Chaashni ↔ पानी
रसगुल्लों को मीठी चाशनी में डुबोकर रखा जाता है।
प्यास बुझाने के लिए सादा पानी ही सबसे उत्तम पेय है।
Gaadhaapan ↔ पतलापन
मलाई और काजू के पेस्ट से खीर में गाढ़ापन आ गया।
अधिक पानी डाल देने से कढ़ी का पतलापन बढ़ गया।
Mel ↔ फूट
गाँव में सभी जातियों और वर्गों के बीच आपसी मेल और सद्भाव बना हुआ है।
स्वार्थी तत्वों ने अफवाहें फैलाकर समुदाय में फूट डालने की चेष्टा की।
Prabhu ↔ दास
भक्त हनुमान ने अपने प्रभु श्रीराम की सेवा में संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
स्वामी के प्रति निष्ठावान दास कठिन घड़ी में भी कभी पलायन नहीं करता।
Maargdarshak ↔ पथिक
पहाड़ों के दुर्गम रास्तों पर अनुभवी मार्गदर्शक की सहायता अनिवार्य होती है।
थका हुआ पथिक विश्राम करने के लिए घने बरगद की छाया में बैठ गया।
Phoopha ↔ बुआ
फूफा जी ने शादी समारोह में बारात का स्वागत बड़े सम्मान के साथ किया।
रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बुआ अपने भाइयों को राखी बांधने गाँव आई।
Putra ↔ पुत्री
श्रवण कुमार एक आदर्श पुत्र थे जिन्होंने माता-पिता को तीर्थयात्रा कराई।
पुत्री दोनों कुलों को अपनी योग्यता और संस्कारों से गौरवान्वित करती है।
Pota ↔ पोती
पोता अपने दादा जी की उंगली पकड़कर प्रतिदिन पार्क में टहलता है।
पोती ने दादी जी की चश्मे की खोज करके उन्हें आदरपूर्वक थमाया।
Paahuna ↔ यजमान
गाँव में दामाद का पाहुना के रूप में भव्य और भावुक स्वागत किया गया।
यजमान ने धार्मिक अनुष्ठान के बाद पुरोहितों और आगंतुकों को दक्षिणा दी।
Saajhedaar ↔ प्रतिद्वंद्वी
दोनों साझेदार मिलकर नई कंपनी को उन्नति के शिखर पर ले गए।
बाजार में प्रतिद्वंद्वी कंपनी ने ग्राहकों को लुभाने के लिए छूट की घोषणा की।
Paksh ↔ विपक्ष
सदन में पक्ष के सांसदों ने नए विधेयक का पुरजोर समर्थन किया।
विपक्ष ने विधेयक की कमियों को उजागर करते हुए संशोधन की मांग की।
Pakshdhar ↔ विरोधी
वह पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा के प्रबल पक्षधर हैं।
योजना के विरोधी लोगों ने निर्माण कार्य पर रोक लगाने की याचिका दायर की।
Poshankarta ↔ शोषक
माता-पिता अपनी संतान के प्राथमिक पोषणकर्ता और मार्गदर्शक होते हैं।
मजदूरों का खून पसीने की कमाई छीनने वाला शोषक समाज के लिए अभिशाप है।
Paalak ↔ पाल्य
यशोदा मैया ने भगवान कृष्ण के पालक के रूप में असीम वात्सल्य दिया।
पाल्य बालक अपने माता-पिता के संरक्षण में सुरक्षित अनुभव करता है।
Sagotra ↔ परगोत्र
प्राचीन परंपराओं में सगोत्र बंधुओं के बीच पारस्परिक सहयोग अनिवार्य माना जाता था।
विवाह संबंध स्थापित करने के लिए परगोत्र के परिवारों का चयन किया जाता है।
Swajan ↔ परजन
संकट के समय स्वजन ही सबसे पहले सहायता के लिए हाथ बढ़ाते हैं।
सच्चा साधु किसी को परजन न मानकर संपूर्ण संसार को अपना कुटुंब मानता है।
Aatmeeya ↔ पराया
मित्र की आत्मीय वाणी ने संकट के समय उसका खोया हुआ ढाढ़स लौटा दिया।
अहंकार के कारण व्यक्ति अपने ही सगे भाइयों को भी पराया समझने लगता है।
Apna ↔ पराया
विपत्ति के समय ही परीक्षा होती है कि कौन अपना है और कौन केवल दिखावे का साथी।
दूसरों की भलाई करने वाला व्यक्ति कभी किसी को पराया नहीं समझता।
Sahpaathee ↔ प्रतिद्वंद्वी
सहपाठी मिलकर कठिन विषयों पर चर्चा करते हैं और एक-दूसरे की सहायता करते हैं।
परीक्षा में प्रतिद्वंद्वी छात्र एक-दूसरे से आगे निकलने के लिए कड़ा परिश्रम करते हैं।
Poorvaj ↔ वंशज
हमारे पूर्वज पर्यावरण और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने के पक्षधर थे।
योग्य वंशज अपने कुल के गौरव और सद्विचारों को आगे बढ़ाते हैं।
Purkha ↔ औलाद
गाँव की यह विशाल हवेली पुरखा द्वारा सौ वर्ष पूर्व बनवाई गई थी।
सपूत औलाद अपने माता-पिता के त्याग को समझकर उनका मान बढ़ाती है।
Naayak ↔ प्रतिनायक
कथा का नायक सत्य और न्याय की रक्षा के लिए अंत तक संघर्ष करता है।
प्रतिनायक अपने छल और शक्ति के बल पर नायक के मार्ग में बाधाएं डालता है।
Sagotree ↔ परदेशी
तीर्थयात्रा पर अपने सगोत्री बंधु से मिलने पर उसे अत्यधिक आनंद हुआ।
परदेशी मुसाफिर का सहारा बनकर उसकी मदद करना मानवता का नियम है।
Sahkarmee ↔ प्रतिस्पर्धी
कार्यालय में सहकर्मी की सहायता से जटिल परियोजना समय पर पूरी हो गई।
पदोन्नति की दौड़ में दोनों प्रतिस्पर्धी अधिकारी अपना सर्वश्रेष्ठ दे रहे थे।
Peehar ↔ ससुराल
सावन के महीने में नवविवाहिता अपने पीहर जाकर झूले झूलती है।
ससुराल के दायित्वों को समझदारी से निभाना एक सुसंस्कृत बहू का गुण है।
Parijan ↔ अपरिचित
दीपावली के शुभ अवसर पर सभी परिजन एक साथ बैठकर लक्ष्मी पूजन करते हैं।
सड़क पर किसी अपरिचित व्यक्ति से अनावश्यक विवाद में नहीं उलझना चाहिए।
Prajapaalak ↔ अत्याचारी
प्रजापालक राजा के शासन में दीन-दुखी भी निर्भय होकर जीवन यापन करते थे।
अत्याचारी शासक ने भारी कर लगाकर प्रजा को भुखमरी के कगार पर धकेल दिया।
Sagotra-bandhu ↔ पराया
संकट की घड़ी में सगोत्र-बंधु एकजुट होकर एक-दूसरे की ढाल बन जाते हैं।
निःस्वार्थ सेवा करने वाले सज्जन किसी को भी पराया नहीं समझते।
Poonjipati ↔ सर्वहारा
पूँजीपति वर्ग उद्योगों में भारी धन निवेश करके रोजगार के अवसर बनाता है।
सर्वहारा वर्ग अपने खून-पसीने की कमाई से ही राष्ट्र का निर्माण करता है।
Pratiphal ↔ अपव्यय
शिक्षा पर किया गया निवेश जीवन भर सुंदर प्रतिफल देता है।
दिखावे की पार्टियों में लाखों रुपये उड़ाना कोरा अपव्यय है।
Poonji ↔ कर्ज
व्यवसाय शुरू करने के लिए उसने अपनी वर्षों की संचित पूँजी लगाई।
उच्च ब्याज पर लिया गया भारी कर्ज चुकाने में उसकी सारी आय चली जाती है।
Peshgee ↔ चुकता
मकान की बुकिंग के लिए क्रेता ने दस प्रतिशत पेशगी राशि जमा की।
अंतिम किस्त मिलते ही विक्रेता ने संपत्ति का हिसाब पूरी तरह चुकता कर दिया।
Parisampatti ↔ देनदारी
भूमि और भवन किसी भी औद्योगिक घराने की सबसे ठोस परिसंपत्ति होते हैं।
अनियंत्रित ऋणों के कारण कंपनी की देनदारी उसकी कुल संपत्ति से अधिक हो गई।
Phutkar ↔ थोक
फुटकर बाजार में सब्जियां थोड़ी ऊंची कीमतों पर मिलती हैं।
थोक मंडी में आलू की पूरी बोरी काफी कम दाम में मिल जाती है।
Batta ↔ प्रीमियम
पुराने मॉडल के मोबाइल फोन पर दुकानदार ने दस प्रतिशत बट्टा दिया।
दुर्लभ सिक्कों और नए आईपीओ के शेयरों को भारी प्रीमियम देकर खरीदा गया।
Svarn ↔ पीतल
विवाह के अवसर पर कन्या को शुद्ध स्वर्ण के आभूषण भेंट किए गए।
पूजा के बर्तनों के निर्माण के लिए पीतल धातु का उपयोग किया जाता है।
Paarasmani ↔ लोहा
कहावत है कि पारसमणि के स्पर्श मात्र से निकृष्ट धातु भी सोना बन जाती है।
पुलों और इमारतों की नींव को मजबूती देने के लिए भारी लोहा उपयोग में लाया जाता है।
Svaamitva ↔ पट्टा
रजिस्ट्री कराने के बाद ही भवन का पूर्ण स्वामित्व क्रेता को प्राप्त हुआ।
खनिज खनन के लिए सरकार ने कंपनी को बीस वर्षों का पट्टा जारी किया।
Vimudreekaran ↔ पुनर्मुद्रीकरण
कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने पुराने बड़े नोटों का विमुद्रीकरण किया।
नए सुरक्षा मानकों वाले नोट जारी करके अर्थव्यवस्था का पुनर्मुद्रीकरण तेजी से पूरा हुआ।
Arthadand ↔ पारितोषिक
यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर चालक पर दो हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
साहसी कार्य करने वाले बालक को गणतंत्र दिवस पर प्रशस्ति पत्र और नकद पारितोषिक दिया गया।
Parishramee ↔ आलसी
परिश्रमी विद्यार्थी निरंतर अभ्यास करके परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करता है।
आलसी व्यक्ति आज का काम कल पर टालकर अपने भविष्य को अंधकारमय बना लेता है।
Prayaas ↔ प्रमाद
निरंतर निष्ठावान प्रयास करने पर असंभव दिखने वाला लक्ष्य भी सुलभ हो जाता है।
कर्मचारियों के तनिक से प्रमाद के कारण पूरी निर्माण परियोजना में भारी व्यवधान आया।
Prashikshit ↔ अप्रशिक्षित
प्रशिक्षित बचाव दल ने बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
आधुनिक मशीनों को अप्रशिक्षित मजदूरों के हाथों में सौंपना जोखिम भरा है।
Shramajeevee ↔ परजीवी
श्रमजीवी इंसान अपने परिश्रम से रूखी-सूखी रोटी खाकर भी आत्मसम्मान से जीता है।
दूसरों की गाढ़ी कमाई पर पलने वाला परजीवी कभी सम्मान का पात्र नहीं हो सकता।
Pahal ↔ सन्नाटा
ग्राम प्रधान ने स्वच्छता अभियान में स्वयं आगे बढ़कर सराहनीय पहल की।
विपदा के समय अधिकारियों के कार्यालयों में सन्नाटा पसरा हुआ था।
Prabandhan ↔ कुप्रबंधन
कुशल प्रबंधन के कारण घाटे में चल रही कंपनी कुछ ही वर्षों में मुनाफे में आ गई।
वित्तीय कुप्रबंधन ने एक फलते-फूलते अंतरराष्ट्रीय बैंक को दिवालिया बना दिया।
Kaaryakaal ↔ पदमुक्ति
राष्ट्रपति का कार्यकाल संविधान के अनुसार पांच वर्षों के लिए निर्धारित है।
जांच आयोग की रिपोर्ट आने के बाद भ्रष्ट अधिकारी की तत्काल पदमुक्ति कर दी गई।
Svaavalamban ↔ परावलंबन
स्वावलंबन से मनुष्य का आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान बढ़ता है।
परावलंबन की आदत व्यक्ति को कमजोर और लाचार बना देती है।
Svaavalambee ↔ परावलंबी
स्वावलंबी नारी अपने परिश्रम से परिवार का भरण-पोषण करने में सक्षम है।
परावलंबी व्यक्ति छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी दूसरों का मुंह ताकता है।
Aatmanirbhar ↔ पराश्रित
देश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
विदेशी सहायता पर पराश्रित अर्थव्यवस्थाएं संकट के समय असहाय हो जाती हैं।
Aatmanirbharata ↔ पराश्रय
खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना राष्ट्र की पहली प्राथमिकता थी।
दूसरों के पराश्रय में जीने से व्यक्ति की अपनी मौलिक प्रतिभा कुंठित हो जाती है।
Parishramasheel ↔ प्रमादी
परिश्रमशील कार्यकर्ताओं के बल पर संस्था ने कई राष्ट्रीय पुरस्कार जीते।
प्रमादी कर्मचारी की लापरवाही से महत्वपूर्ण सरकारी फाइल खो गई।
Prayatna ↔ निष्प्रयत्न
कठिन गणित के प्रश्नों को बार-बार हल करने का प्रयत्न करना चाहिए।
बिना किसी प्रयत्न के निष्प्रयत्न बैठे रहने से कोई उपलब्धि हासिल नहीं होती।
Prayaasasheel ↔ आलसी
प्रयासशील छात्र हर असफलता को नई सीख मानकर पुनः प्रयास करता है।
आलसी व्यक्ति छोटी सी बाधा आते ही सब कुछ छोड़कर बैठ जाता है।
Prabandhak ↔ मजदूर
कुशल प्रबंधक पूरी परियोजना की रूपरेखा बनाकर कार्यों का आवंटन करता है।
मजदूर अपनी शारीरिक शक्ति से जमीन पर योजना को साकार रूप देता है।
Padonnati ↔ पदावनति
उत्कृष्ट सेवाओं के पुरस्कार स्वरूप कर्मचारी को प्रबंधक पद पर पदोन्नति मिली।
लापरवाही और अनुशासनहीनता साबित होने पर लिपिक की पदावनति कर दी गई।
Praveenata ↔ अकुशलता
सॉफ्टवेयर कोडिंग में अपनी प्रवीणता के कारण उसे विदेश में उच्च पद मिला।
तकनीकी अकुशलता के कारण डाटा ट्रांसफर में गंभीर त्रुटियां आ गईं।
Prashikshu ↔ प्रशिक्षक
प्रशिक्षु इंजीनियर वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में साइट पर काम सीख रहा है।
अनुभवी प्रशिक्षक ने नए छात्रों को मशीन संचालन के व्यावहारिक नियम सिखाए।
Pahalkarta ↔ अनुगामी
साहसी पहलकर्ता नए उद्योग स्थापित करके दूसरों के लिए मार्ग प्रशस्त करता है।
रूढ़िवादी अनुगामी केवल दूसरों द्वारा बनाए गए ढर्रे पर ही चलना जानता है।
Poorvakaal ↔ उत्तरकाल
पूर्वकाल में गुरुकुलों में छात्रों को समस्त विधाओं की शिक्षा दी जाती थी।
मुगल साम्राज्य के उत्तरकाल में क्षेत्रीय शक्तियों का तेजी से उदय हुआ।
Praagaitihaasik ↔ ऐतिहासिक
भीमबेटका की गुफाओं में प्रागैतिहासिक काल के शैलचित्र आज भी सुरक्षित हैं।
ताजमहल और लाल किला भारत के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारक हैं।
Praacheenata ↔ नवीनता
काशी नगरी अपनी अद्वितीय प्राचीनता और धार्मिक विरासत के लिए विश्वविख्यात है।
कला में नवीनता लाने के लिए युवा चित्रकार नए रंगों और तकनीकों का प्रयोग करते हैं।
Puraatanata ↔ आधुनिकता
ऐतिहासिक खंडहर अपनी पुरातनता से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
आधुनिकता की दौड़ में हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों को नहीं भूलना चाहिए।
Praatah ↔ सायं
प्रातः काल का भ्रमण स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए वरदान माना गया है।
सायं के समय मंदिर में शंख और घंटों की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
Poorvaahn ↔ अपराह्न
कार्यालय की महत्वपूर्ण बैठक पूर्वाह्न दस बजे आयोजित की गई है।
अपराह्न के समय धूप ढलने पर बच्चे मैदान में खेलने के लिए निकलते हैं।
Paurvaahnik ↔ अपराह्निक
वैदिक अनुष्ठानों में पौर्वाह्निक कृत्यों का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है।
अपराह्निक सभा में दिन भर के निर्णयों की समीक्षा की गई।
Pratyush ↔ प्रदोष
प्रत्यूष वेला में पूर्व दिशा में उगते सूर्य की स्वर्णिम किरणें अद्भुत लगती हैं।
प्रदोष काल में शिव मंदिर में विशेष दीप प्रज्वलित किए जाते हैं।
Praatahkaal ↔ सायंकाल
प्रातःकाल की स्वच्छ वायु में योग करने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।
सायंकाल की आरती में सम्मिलित होने के लिए मंदिर में भारी भीड़ उमड़ी।
Poorvasandhya ↔ उषावेला
स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर राष्ट्रपति ने राष्ट्र को संबोधित किया।
उषावेला में सूर्योदय होते ही नए दिन का हर्षोल्लास शुरू हुआ।
Praarambh ↔ समापन
शुभ कार्य का प्रारंभ सदैव ईश्वर वंदना के साथ किया जाता है।
वार्षिक खेल महोत्सव का समापन राष्ट्रगान और पुरस्कार वितरण के साथ हुआ।
Pratham ↔ अंतिम
दौड़ प्रतियोगिता में प्रथम आने वाले धावक को स्वर्ण पदक मिला।
अभियान के अंतिम चरण में सभी सैनिकों ने पूरी शक्ति झोंक दी।
Poorvavartee ↔ परवर्ती
पूर्ववर्ती सरकार की लोक-कल्याणकारी नीतियों को नए मंत्रिमंडल ने भी जारी रखा।
परवर्ती शासकों की अकर्मण्यता के कारण विशाल साम्राज्य का पतन हो गया।
Poorvagaamee ↔ पश्चगामी
वैज्ञानिक सोच मानव समाज को पूर्वगामी दिशा में आगे ले जाती है।
अंधविश्वास और कुरीतियां समाज को पश्चगामी बनाती हैं।
Poorvaardh ↔ उत्तरार्ध
बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में भारत में स्वाधीनता संग्राम अपने चरम पर था।
सदी के उत्तरार्ध में सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष विज्ञान में क्रांति आई।
Haaliya ↔ पुरातन
हालिया सर्वेक्षण के अनुसार युवाओं में तकनीकी शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ा है।
पुरातन परंपराओं में प्रकृति संरक्षण के कई सुंदर नियम निहित हैं।
Pal ↔ सदी
हवाई दुर्घटना में एक ही पल में सैकड़ों जिंदगियां काल के गाल में समा गईं।
गुलामी की बेड़ियों को काटने में देश को लगभग एक पूरी सदी लग गई।
Kishoraavastha ↔ प्रौढ़ावस्था
किशोरावस्था में शारीरिक और मानसिक बदलावों के कारण उचित मार्गदर्शन आवश्यक है।
प्रौढ़ावस्था में मनुष्य अपने अनुभवों से गंभीर और परिपक्व निर्णय लेता है।
Vasant ↔ पतझड़
वसन्त ऋतु में उपवन में रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं और प्रकृति मुस्काती है।
पतझड़ के आते ही पेड़ों के सूखे पत्ते टूटकर धरती पर बिखर जाते हैं।
Praacheenakaal ↔ आधुनिककाल
प्राचीनकाल में नालंदा विश्वविद्यालय विश्व भर के विद्वानों का प्रमुख केंद्र था।
आधुनिककाल में ऑनलाइन शिक्षा ने ज्ञान को घर-घर तक सुलभ बना दिया है।
Prabhaatavela ↔ सांध्यवेला
प्रभातवेला में पक्षियों का चहचहाना और बहती शीतल बयार मन मोह लेती है।
सांध्यवेला में सूर्यास्त का मनोरम दृश्य देखने लोग समुद्र तट पर एकत्र होते हैं।
Praarambhik ↔ अंतिम
प्रारंभिक चरण में नए व्यवसाय में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
प्रतियोगिता के अंतिम चरण में केवल दो सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी ही पहुंचे।
Praakkaaleen ↔ उत्तरकालीन
प्राक्कालीन सभ्यताओं के अवशेष सिंधु घाटी में आज भी दिखाई देते हैं।
उत्तरकालीन स्थापत्य कला में आधुनिक तकनीकों का गहरा प्रभाव झलकता है।
Navayug ↔ पुरातन-युग
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आगमन के साथ तकनीकी नवयुग की शुरुआत हुई है।
पुरातन-युग में संदेश भेजने के लिए कबूतरों और दूतों का उपयोग किया जाता था।
Paakshik ↔ वार्षिक
साहित्यिक पत्रिका पाक्षिक रूप से हर पंद्रह दिन में प्रकाशित होती है।
विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह एक प्रतिष्ठित वार्षिक उत्सव है।
Paraakrama ↔ पलायन
संकट और विपत्ति के समय पराक्रम का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Paraakramee ↔ कायर
संकट और विपत्ति के समय पराक्रमी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Yoddhaa ↔ पलायनवादी
संकट और विपत्ति के समय योद्धा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायनवादी का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aparaajeya ↔ पराजेय
संकट और विपत्ति के समय अपराजेय का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पराजेय का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Abhayadaana ↔ प्राणदंड
संकट और विपत्ति के समय अभयदान का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने प्राणदंड का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Prataapee ↔ तेजहीन
संकट और विपत्ति के समय प्रतापी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने तेजहीन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Purushaartha ↔ क्लीवता
संकट और विपत्ति के समय पुरुषार्थ का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने क्लीवता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Paurusha ↔ कायरता
संकट और विपत्ति के समय पौरुष का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Mukaabalaa ↔ पलायन
संकट और विपत्ति के समय मुकाबला का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Saamanaa ↔ पलायन
संकट और विपत्ति के समय सामना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aakramana ↔ प्रतिरक्षा
संकट और विपत्ति के समय आक्रमण का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने प्रतिरक्षा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aaghaata ↔ प्रत्याघात
संकट और विपत्ति के समय आघात का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने प्रत्याघात का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Prahaara ↔ रोक
संकट और विपत्ति के समय प्रहार का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रोक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Vaara ↔ प्रतिवार
संकट और विपत्ति के समय वार का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने प्रतिवार का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ajeyataa ↔ पराजेयता
संकट और विपत्ति के समय अजेयता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पराजेयता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Saahasa-pradarshana ↔ पलायन
संकट और विपत्ति के समय साहस-प्रदर्शन का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Praknpana ↔ स्थिरता
संकट और विपत्ति के समय प्रकंपन का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने स्थिरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Adiga-kadama ↔ पीछे-हटना
संकट और विपत्ति के समय अडिग-कदम का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पीछे-हटना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ajeya-durga ↔ पतनशील-किला
संकट और विपत्ति के समय अजेय-दुर्ग का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पतनशील-किला का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Paanditya ↔ मूर्खता
विद्या और बौद्धिक विकास में पांडित्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Prajnyaa ↔ मूढ़ता
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रज्ञा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूढ़ता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Prajnyaavaana ↔ मूढ़
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रज्ञावान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूढ़ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Paarngata ↔ अनाड़ी
विद्या और बौद्धिक विकास में पारंगत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनाड़ी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pathaneeya ↔ अपठनीय
विद्या और बौद्धिक विकास में पठनीय का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अपठनीय की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Grnthakaara ↔ पाठक
विद्या और बौद्धिक विकास में ग्रंथकार का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में पाठक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pravaktaa ↔ श्रोता
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रवक्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में श्रोता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pareekshaka ↔ परीक्षार्थी
विद्या और बौद्धिक विकास में परीक्षक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में परीक्षार्थी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pramaanita ↔ अप्रमाणित
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रमाणित का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अप्रमाणित की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Praaveenya ↔ अयोग्यता
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रावीण्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अयोग्यता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Deekshaa ↔ परित्याग
विद्या और बौद्धिक विकास में दीक्षा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में परित्याग की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Paathyakrama ↔ सह-पाठ्यक्रम
विद्या और बौद्धिक विकास में पाठ्यक्रम का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में सह-पाठ्यक्रम की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Prashnottaree ↔ मौन
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रश्नोत्तरी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मौन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Deekshaanta-samaaroha ↔ प्रवेश-उत्सव
विद्या और बौद्धिक विकास में दीक्षांत-समारोह का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में प्रवेश-उत्सव की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pustakeeya-jnyaana ↔ व्यावहारिक-अनुभव
विद्या और बौद्धिक विकास में पुस्तकीय-ज्ञान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में व्यावहारिक-अनुभव की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Medhaavee-chhaatra ↔ पिछड़ा-छात्र
विद्या और बौद्धिक विकास में मेधावी-छात्र का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में पिछड़ा-छात्र की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Prajnyaachakshu ↔ ज्ञानहीन
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रज्ञाचक्षु का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में ज्ञानहीन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Uchcha-shikshaa ↔ प्राथमिक-शिक्षा
विद्या और बौद्धिक विकास में उच्च-शिक्षा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में प्राथमिक-शिक्षा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Paathyapustaka ↔ कहानी-किताब
विद्या और बौद्धिक विकास में पाठ्यपुस्तक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कहानी-किताब की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Praadhyaapaka ↔ शिक्षार्थी
विद्या और बौद्धिक विकास में प्राध्यापक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में शिक्षार्थी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pratibhaashaalee ↔ प्रतिभाहीन
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रतिभाशाली का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में प्रतिभाहीन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Anukoola-mausama ↔ प्रतिकूल-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में अनुकूल-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में प्रतिकूल-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Moosalaadhaara-varshaa ↔ फुहार
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मूसलाधार-वर्षा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में फुहार का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Pavanaabhimukha ↔ पवनविमुख
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में पवनाभिमुख की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में पवनविमुख का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Puravaaee ↔ पछुआ
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में पुरवाई की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में पछुआ का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Pahaadee-havaa ↔ मैदानी-लू
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में पहाड़ी-हवा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मैदानी-लू का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Parvateeya-jalavaayu ↔ मरुस्थलीय-जलवायु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में पर्वतीय-जलवायु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मरुस्थलीय-जलवायु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Anukoola-pavana ↔ प्रतिकूल-पवन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में अनुकूल-पवन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में प्रतिकूल-पवन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Pavana-vega ↔ शांत-वायु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में पवन-वेग की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-वायु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Vasnta-bahaara ↔ पतझड़-का-सन्नाटा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वसंत-बहार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में पतझड़-का-सन्नाटा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aage ↔ पीछे
कठिन परिस्थितियों से घबराए बिना हमें निरंतर आगे बढ़ते रहने का संकल्प लेना चाहिए।
असफलता के भय से अपने कदम पीछे खींच लेना प्रगति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है।
Paas ↔ दूर
विद्यालय हमारे घर के बिलकुल पास होने के कारण बच्चों को आने-जाने में कोई असुविधा नहीं होती।
रोजगार की तलाश में युवाओं को अपने परिवार से बहुत दूर महानगरों में रहना पड़ता है।
Khona ↔ पाना
लापरवाही के कारण अपने बहुमूल्य दस्तावेज खोना भविष्य के लिए भारी पड़ सकता है।
सच्ची निष्ठा से कर्म करने पर मनवांछित फल पाना कोई असंभव बात नहीं है।
Pahunchana ↔ छूटना
समय पर स्टेशन पहुंचना यात्रा को सुखद और तनावमुक्त बनाए रखता है।
ट्रैफिक जाम में फंसने के कारण ऐन वक्त पर गाड़ी का छूटना भारी असुविधाजनक रहा।
Chhodna ↔ पकड़ना
स्वास्थ्य को हानि पहुंचाने वाली बुरी आदतों को तुरंत छोड़ना ही श्रेयस्कर है।
क्रिकेट मैच में जीत हासिल करने के लिए क्षेत्ररक्षक को हर कठिन कैच पकड़ना पड़ता है।
Utaarna ↔ पहनाना
घर में प्रवेश करने से पूर्व बाहर ही गंदे जूते उतारना स्वच्छता का परिचायक है।
माता ने अपने नन्हे बालक को उत्सव के लिए सुंदर नए वस्त्र पहनाना शुरू किया।