Achha ↔ बुरा
जीवन में अच्छा और बुरा समय दोनों आते हैं, किंतु धैर्यवान व्यक्ति कभी विचलित नहीं होता।
बुरा संग मनुष्य की बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है, जबकि अच्छा संग जीवन को संवारता है।
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Achha ↔ बुरा
जीवन में अच्छा और बुरा समय दोनों आते हैं, किंतु धैर्यवान व्यक्ति कभी विचलित नहीं होता।
बुरा संग मनुष्य की बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है, जबकि अच्छा संग जीवन को संवारता है।
Bada ↔ छोटा
सच्चा बड़प्पन धन में बड़ा होने से नहीं, बल्कि छोटे लोगों का आदर करने से सिद्ध होता है।
संसार में कोई काम छोटा नहीं होता, हर ईमानदार प्रयास का बड़ा महत्व होता है।
Bhaari ↔ हल्का
कठिन परिस्थितियों का भारी बोझ भी सकारात्मक सोच से हल्का लगने लगता है।
सच्चाई स्वीकार कर लेने से हृदय का भारी अपराधबोध हल्का और शांत हो जाता है।
Balwaan ↔ निर्बल
सच्चा बलवान वही है जो निर्बल को सहारा देकर अपने बल का सदुपयोग करे।
निर्बल को सताने वाला कभी वास्तविक शांति और ईश्वर की कृपा प्राप्त नहीं कर सकता।
Buddhimaan ↔ बुद्धिहीन
बुद्धिमान व्यक्ति संकट में समाधान खोजता है जबकि बुद्धिहीन घबराकर हाथ खड़े कर देता है।
बुद्धिहीन आचरण अपने ही हाथों अपनी हानि कराने का मार्ग प्रशस्त करता है।
Sureela ↔ बेसुरा
गायक का सुरीला कंठ सभा को मंत्रमुग्ध कर गया।
बेसुरा गायन कानों को खटकता है, जबकि सुरीली तान मन को आनंदित कर देती है।
Baadhyakaari ↔ गैर-बाध्यकारी
अदालत का यह फैसला सभी पक्षों के लिए बाध्यकारी है।
गैर-बाध्यकारी संधियों के उल्लंघन पर कोई कानूनी दंड नहीं होता, वे केवल नैतिक हैं।
Bahugya ↔ अल्पज्ञ
बहुज्ञ विद्वान हर विषय पर सारगर्भित विचार व्यक्त कर सकते हैं।
अल्पज्ञ व्यक्ति थोड़ा सा जानकर ही स्वयं को सर्वज्ञाता मानकर अहंकार करने लगता है।
Bandhan ↔ मुक्ति
अज्ञानता मनुष्य को बंधनों में जकड़ती है, ज्ञान उसे मुक्ति का मार्ग दिखाता है।
कुरीतियों और अंधविश्वासों से मुक्ति पाकर ही समाज प्रगति कर सकता है।
Bhaai ↔ बहन
रक्षाबंधन पर भाई बहन की रक्षा का संकल्प दोहराता है।
भाई-बहन का रिश्ता निस्वार्थ स्नेह और अटूट विश्वास का प्रतीक है।
Bhokta ↔ त्यागी
मनुष्य अपने कर्मों का स्वयं ही कर्ता और भोक्ता होता है।
त्यागी पुरुष संसार के भोगों में लिप्त न होकर लोककल्याण में जीवन समर्पित करता है।
Svaichchhika ↔ बाध्यकारी
रक्तदान शिविर में युवाओं ने स्वैच्छिक रूप से आगे आकर बड़ी संख्या में रक्तदान किया।
यातायात के नियमों का पालन करना हर नागरिक के लिए बाध्यकारी होता है, न कि ऐच्छिक।
Satyanishthaa ↔ भ्रष्टाचार
अधिकारी ने पूरी सत्यनिष्ठा के साथ सरकारी धन का सदुपयोग करते हुए निर्माण कार्य पूरा कराया।
भ्रष्टाचार के कारण समाज में योग्य व्यक्तियों का हक मारा जाता है और व्यवस्था कमजोर होती है।
Bhedabhaava ↔ सद्भाव
विद्यालय में सभी छात्रों के साथ बिना किसी भेदभाव के समान व्यवहार किया जाना चाहिए।
विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सद्भाव बनाए रखने के लिए शांति समिति की बैठक आयोजित हुई।
Bahishkaara ↔ समावेशन
स्वाधीनता आंदोलन के समय विदेशी वस्तुओं का पूर्ण बहिष्कार कर स्वदेशी अपनाने का आह्वान किया गया।
दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में लाने के लिए नीतिगत समावेशन और विशेष सुविधाएं आवश्यक हैं।
Bhojana ↔ उपवास
दोपहर के समय परिवार के सभी सदस्यों ने एक साथ बैठकर प्रेमपूर्वक भोजन किया।
शारीरिक शुद्धि और संयम के उद्देश्य से उन्होंने सप्ताह में एक दिन उपवास रखने का नियम बनाया।
Bhoomi ↔ गगन
भूमि की उर्वरा शक्ति और गगन से प्राप्त धूप मिलकर फसलों को लहलहाते हैं।
विशाल गगन और शस्य-श्यामला धरा के मध्य प्रकृति की अनुपम शोभा दृष्टिगोचर होती है।
Jwaar ↔ भाटा
चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण से समुद्र में ज्वार और भाटा की चक्रीय प्रक्रिया घटित होती है।
भाटा के समय समुद्र का जलस्तर पीछे हट जाता है, जबकि ज्वार के समय लहरें तट को लांघती हैं।
Bhor ↔ सांझ
किसान भोर होते ही खेतों पर चल पड़ते हैं और सांझ ढलने पर ही घर वापस लौटते हैं।
सांझ के झुटपुटे में चरवाहे अपनी गायों को चराकर गांव की ओर हांक लाते हैं।
Baadh ↔ सूखा
नदियों में बाढ़ आने से गांव डूब जाते हैं, जबकि सूखे में पीने के पानी की किल्लत हो जाती है।
प्रकृति के प्रकोप से बचना कठिन है; कभी सूखा धरती को सुखाता है तो कभी बाढ़ सब बहा ले जाती है।
Upjaaoo ↔ बंजर
उपजाऊ मिट्टी देश की खाद्य सुरक्षा का आधार है, जिसे बंजर होने से बचाना हमारा कर्तव्य है।
सिंचाई की समुचित व्यवस्था होने पर बंजर जमीन भी उपजाऊ खेत में तब्दील हो जाती है।
Bhaanu ↔ शशि
भानु की प्रखर किरणें संपूर्ण जगत को प्रकाशवान करती हैं, जबकि शशि की किरणें सुखद शीतलता देती हैं।
नीले आकाश में पूर्णिमा का शशि भानु के अस्त होने के उपरांत मनमोहक रूप धर लेता है।
Barf ↔ आग
बर्फ जैसी ठंडक को दूर करने के लिए अलाव की आग ही सहारा बनती है।
शीत की कड़कड़ाती बर्फ में अलाव की आग ही जीवनदायिनी गर्माहट प्रदान करती है।
Bramhand ↔ अणु
प्राचीन ऋषियों के अनुसार जो कुछ विशाल ब्रह्मांड में है, वह सूक्ष्मतम अणु में भी समाया है।
विज्ञान सिद्ध करता है कि एक छोटे से अणु के विखंडन से विराट ऊर्जा की उत्पत्ति होती है।
Aranya ↔ बस्ती
तपस्वी जन शांत अरण्य में साधना करते हैं और कोलाहलपूर्ण मानव बस्ती से दूर रहते हैं।
नदी किनारे बसी बस्ती में रौनक रहती है, जबकि नदी के पार बीहड़ अरण्य फैला है।
Dhaara ↔ भंवर
कुशल नाविक शांत धारा में नाव दौड़ाते हैं और खतरनाक भंवर से नौका को बचाते हैं।
भंवर में फंसी नाव को किनारे की ओर मोड़ना नाविक के धैर्य और पराक्रम की परीक्षा है।
Saavan ↔ भादों
लोकगीतों में सावन के झूले और भादों की घनघोर झड़ी का बड़ा मार्मिक वर्णन मिलता है।
सावन की फुहारों के पश्चात भादों की घनघोर झड़ी नदियों को लबालब भर देती है।
Bhoogarbha ↔ अंतरिक्ष
खनिज संपदा भूगर्भ में छिपी है, जबकि सौर ऊर्जा का अक्षय स्रोत अंतरिक्ष से प्राप्त होता है।
मानव ने एक ओर गहरे भूगर्भ का अध्ययन किया है तो दूसरी ओर अनंत अंतरिक्ष की थाह ली है।
Baadal ↔ खुला आसमान
काले बादल हटते ही नीला खुला आसमान चमक उठा और चारों तरफ रोशनी फैल गई।
खगोलीय अवलोकन के लिए खुला आसमान अनिवार्य शर्त है, क्योंकि बादलों में तारे नहीं दिखते।
Bayaar ↔ तूफान
प्रातःकाल बहने वाली ठंडी बयार शरीर में स्फूर्ति भरती है, जबकि आंधी भय पैदा करती है।
समुद्र में उठे भीषण तूफान के शांत होने पर ही चारों ओर सुखद शांति का वातावरण बना।
Bhaabar ↔ तराई
भाबर के कंकरीले पत्थरों में नदियां विलुप्त हो जाती हैं और तराई के मैदान में पुनः प्रकट होती हैं।
तराई के दलदली और नम क्षेत्र में घने जंगल उगते हैं, जो ऊंचे पहाड़ की शुष्कता से भिन्न हैं।
Bhooskhalan ↔ स्थिर भूमि
भारी बारिश के कारण पहाड़ों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है, जहां स्थिर भूमि भी दरकने लगती है।
भूस्खलन के खतरे वाले ढलानों पर बस्तियां बसाने के बजाय स्थिर भूमि पर निर्माण सुरक्षित है।
Bhay ↔ साहस
मन में यदि अज्ञात का भय हो तो व्यक्ति आगे बढ़ने से हिचकिचाता है।
सच्चा साहस वही है जो विपत्ति के सामने निडर खड़ा रहे।
Bhram ↔ यथार्थ
मृगतृष्णा के समान सांसारिक सुख केवल एक सुंदर भ्रम मात्र हैं।
कल्पना के आकाश से उतरकर यथार्थ की ठोस भूमि पर कार्य करना चाहिए।
Sahanubhuti ↔ बेरुखी
विपदा के समय व्यक्त की गई सच्ची सहानुभूति पीड़ित को संबल देती है।
जरूरतमंदों के प्रति ऐसी बेरुखी दिखाना मानवीय मूल्यों के विपरीत है।
Apnapan ↔ बेगानापन
गाँव के लोगों के व्यवहार में जो अपनापन दिखता है, वह दुर्लभ है।
महानगरों की भीड़ में कभी-कभी मनुष्य बेगानापन महसूस करता है।
Bhakti ↔ विरक्ति
ईश्वर के प्रति अनन्य भक्ति हृदय को समस्त चिंताओं से मुक्त कर देती है।
धार्मिक आडंबरों को देखकर बुद्धिजीवियों में उनसे विरक्ति हो गई।
Nirbhay ↔ भयभीत
सत्य के मार्ग पर चलने वाला मनुष्य सदैव निर्भय रहता है।
शेर की दहाड़ सुनकर जंगल के सभी छोटे जीव भयभीत हो गए।
Shoor ↔ भीरु
शूर सैनिक युद्धभूमि में अंतिम सांस तक वीरता से लड़े।
भीरु स्वभाव का व्यक्ति संघर्ष से सदा दूर भागता है।
Befikr ↔ फिक्रमंद
बाल्यावस्था में बच्चे भविष्य से बेफिक्र होकर खेलते हैं।
संतान के उज्ज्वल भविष्य के लिए माता-पिता सदैव फिक्रमंद रहते हैं।
Bhavuk ↔ कठोरहृदय
दीन-दुखियों की कथा सुनकर भावुक मनुष्य के आँसू निकल आते हैं।
कठोरहृदय व्यक्ति दूसरों के क्रंदन से भी अप्रभावित रहता है।
Abhay ↔ भय
ईश्वर की शरण में जाने पर साधक को अभय का वरदान मिलता है।
शत्रु के भय से कांपते हुए सैनिक पीछे हटने लगे।
Badhir ↔ श्रवणक्षम
बधिर छात्र संकेत भाषा की सहायता से संवाद स्थापित करने में निपुण था।
श्रवणक्षम व्यक्तियों को भी शोर-शराबे वाले वातावरण में कानों की रक्षा करनी चाहिए।
Sudaul ↔ बेडौल
नियमित दंड-बैठक लगाने से युवक का शरीर सुडौल और आकर्षक बन गया।
दिनभर बैठे रहने और अस्वास्थ्यकर भोजन से शरीर बेडौल होकर भारी हो जाता है।
Baahari ↔ भीतरी
त्वचा शरीर की बाहरी सुरक्षा परत है जो धूल और संक्रमण से बचाती है।
भीतरी अंगों की कार्यप्रणाली को नियंत्रित रखने के लिए संतुलित रक्तचाप आवश्यक है।
Daayaan ↔ बायाँ
लेखन और प्रमुख कार्यों के लिए अधिकांश लोग दायाँ हाथ प्राथमिकता से प्रयोग करते हैं।
कुछ लोग जन्मजात रूप से बायाँ हाथ अधिक कुशलता और गति से उपयोग करने में दक्ष होते हैं।
Imaandaari ↔ बेईमानी
कर्मचारी की ईमानदारी और लगन को देखकर प्रबंधक ने उसे पदोन्नति प्रदान की।
बेईमानी से अर्जित किया गया धन व्यक्ति को समाज में कभी वास्तविक आदर नहीं दिला सकता।
Imaandaar ↔ बेईमान
ईमानदार अफसर ने रिश्वत के करोड़ों रुपयों के प्रलोभन को एक झटके में ठुकरा दिया।
बेईमान ठेकेदार ने घटिया सामग्री का प्रयोग कर पुल का निर्माण संकट में डाल दिया।
Tap ↔ भोग
ऋषि-मुनियों ने कठोर तप के बल पर आत्मज्ञान और परम शांति प्राप्त की।
क्षणभंगुर भोग विलास में लीन रहने से मनुष्य की आध्यात्मिक ऊर्जा क्षीण हो जाती है।
Moksh ↔ बंधन
भारतीय दर्शन में जीवन का अंतिम परम पुरुषार्थ मोक्ष की प्राप्ति माना गया है।
माया और तृष्णा के बंधन में जकड़ा मनुष्य कभी आंतरिक शांति का अनुभव नहीं कर पाता।
Satyanishth ↔ भ्रष्ट
सत्यनिष्ठ न्यायाधीश ने किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया।
भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत के कारण जन-कल्याण की योजनाएँ अधूरी रह गईं।
Brahmacharya ↔ व्यभिचार
विद्यार्थी जीवन में ब्रह्मचर्य और एकाग्रता बनाए रखने से मेधा शक्ति तीव्र होती है।
व्यभिचार और असंयम में लिप्त होने से मनुष्य का शारीरिक व नैतिक पतन हो जाता है।
Sabhyata ↔ बर्बरता
प्राचीन भारतीय सभ्यता ने विश्व को शांति, ज्ञान और सह-अस्तित्व का संदेश दिया।
युद्ध के दौरान निर्दोष नागरिकों पर अत्याचार करना बर्बरता की पराकाष्ठा है।
Aadhyaatmik ↔ भौतिक
आध्यात्मिक चिंतन से आत्मा को शांति और जीवन को वास्तविक उद्देश्य मिलता है।
केवल भौतिक सुख-साधनों के संचय से मन की तृष्णा कभी शांत नहीं होती।
Neki ↔ बदी
नेकी कर दरिया में डाल अर्थात् भलाई करके उसके बदले में कुछ पाने की अपेक्षा मत करो।
बदी का रास्ता अख्तियार करने वाले व्यक्ति को अंततः पश्चाताप की अग्नि में जलना पड़ता है।
Nek ↔ बद
नेक दिल इंसान हमेशा दूसरों के आंसुओं को पोंछने का प्रयास करता है।
बद नियत वाले व्यक्ति के साथ कोई भी सज्जन साझेदारी नहीं करना चाहता।
Neknaam ↔ बदनाम
अपने परोपकारी कार्यों के कारण वह पूरे शहर में एक नेकनाम नागरिक बन गया।
घोटाले में संलिप्त पाए जाने पर वह व्यापारी चारों ओर बदनाम हो गया।
Tyaagi ↔ भोगी
त्यागी महापुरुषों ने समाज को नई दिशा देने के लिए अपने संपूर्ण सुखों का उत्सर्ग कर दिया।
भोगी मनुष्य क्षणिक विलासिता के पीछे दौड़ते-दौड़ते जीवन का अमूल्य समय नष्ट कर देता है।
Nabhchar ↔ भूचर
चील और बाज नभचर पक्षी हैं जो आकाश में ऊँची उड़ान भरते हैं।
गाय और भैंस जैसे भूचर पशु धरती पर विचरण करते हैं।
Bhaarvaahi ↔ सवारी-पशु
गधा और खच्चर भारवाही पशु हैं जो पहाड़ी मार्गों पर माल ढोते हैं।
सफेद अरबी घोड़ा सवारी-पशु के रूप में अपनी गति और शान के लिए प्रसिद्ध है।
Bail ↔ गाय
बैल खेत जोतने और गाड़ी खींचने में किसान का अनमोल साथी है।
गाय अपने पौष्टिक दूध और शांत स्वभाव के कारण पूजनीय मानी जाती है।
Bakra ↔ बकरी
पहाड़ी बकरा चट्टानों पर संतुलन बनाकर छलांग लगाता है।
बकरी का दूध औषधीय गुणों से भरपूर और सुपाच्य माना जाता है।
Bilaav ↔ बिल्ली
बिलाव रात के समय छत पर घूमते हुए चूहों की खोज में था।
पालतू बिल्ली रसोई में रखे दूध के कटोरे को चाटने लगी।
Taaza ↔ बासी
प्रातःकाल खेत से तोड़ी गई ताज़ा सब्जियाँ स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं।
बासी भोजन खाने से पेट में संक्रमण और विषाक्तता हो सकती है।
Swaadisht ↔ बेस्वाद
दादी माँ के हाथ से बना हलवा अत्यंत स्वादिष्ट और सुगंधित था।
बिना नमक और मसालों की उबली सब्जी पूरी तरह बेस्वाद लग रही थी।
Bhookh ↔ तृप्ति
दिनभर पैदल चलने के बाद शाम को तीव्र भूख लग आई थी।
मनपसंद थाली भर भोजन करने के बाद चेहरे पर तृप्ति का भाव दिखाई दिया।
Bhojya ↔ अभोज्य
गेहूं, चावल और दालें मनुष्य के मुख्य भोज्य पदार्थों में गिने जाते हैं।
फफूंद लगी हुई ब्रेड अभोज्य हो जाती है और उसे फेंक देना ही उचित है।
Bhuna ↔ कच्चा
अलाव की राख में भुना हुआ भुट्टा गरमागरम खाने में बड़ा स्वादिष्ट लगता है।
कच्चा भुट्टा कड़ा होता है और बिना पकाए नहीं खाया जाता।
Suvaasit ↔ बासी
केसर और इलायची से सुवासित खीर की महक पूरे घर में फैल गई।
तीन दिन पुराना बासी खाना खाने से फूड पॉइजनिंग का खतरा रहता है।
Alpaahaari ↔ बहुभोजी
योग साधक अल्पाहारी होते हैं ताकि उनका शरीर ध्यान के समय हल्का रहे।
पहलवान बहुभोजी होते हैं जिन्हें भारी व्यायाम के लिए अधिक कैलोरी चाहिए।
Vrat ↔ भोजन
शिवरात्रि के पावन पर्व पर उसने दिनभर फलाहार का व्रत रखा।
संध्या वंदना के बाद परिवार के सभी सदस्यों ने बैठकर भोजन किया।
Swaad ↔ बेस्वाद
ताजी पकी बासमती चावल की खीर का स्वाद ही निराला था।
अधिक पानी डाल देने से पूरी दाल बेस्वाद और पतली हो गई।
Lajeez ↔ बेमजा
शाही दावत में परोसी गई बिरयानी बेहद लजीज और खुशबूदार थी।
ठंडी और बासी कढ़ी का स्वाद एकदम बेमजा लग रहा था।
Taazgi ↔ बासीपन
पुदीने और धनिए की ताज़गी चटनी के स्वाद को नया निखार देती है।
फ्रिज से बाहर रखे केक में दो दिन बाद बासीपन और दुर्गंध आने लगी।
Bhaksha ↔ अभक्ष
गेहूं और फल मानव के लिए सर्वमान्य भक्ष पदार्थ हैं।
सड़े-गले विषैले फल धार्मिक और स्वास्थ्य दोनों दृष्टि से अभक्ष हैं।
Bhakshya ↔ अभक्ष्य
ताजा पका हुआ भोजन ही शरीर के लिए भक्ष्य और लाभकारी होता है।
कीड़े लगी हुई दाल और सड़े फल स्वास्थ्य के लिए अभक्ष्य हैं।
Roti ↔ भात
उत्तर भारत में गेहूं की गरम रोटी भोजन का मुख्य आधार है।
पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में दाल के साथ भात अधिक पसंद किया जाता है।
Annadaata ↔ भिखारी
खेतों में पसीना बहाने वाला किसान ही देश का सच्चा अन्नदाता है।
द्वार पर आए भूखे भिखारी को अन्न और जल देना मानवीय कर्तव्य है।
Bhandaar ↔ रिक्ति
अच्छी वर्षा के कारण सरकारी गोदामों में अनाज का भंडार भर गया।
युद्ध के समय अनाज की आपूर्ति रुकने से बाजार में राशन की रिक्ति हो गई।
Sondha ↔ बदबूदार
मिट्टी के चूल्हे पर पकी रोटी का सोंधा स्वाद दिल को छू लेता है।
धूप में खराब हुई सब्जी से बदबूदार महक आने लगी थी।
Sakhaa ↔ बैरी
अर्जुन ने महाभारत के धर्मयुद्ध में भगवान कृष्ण को अपना सखा और सारथी बनाया।
हृदय में द्वेष पालने वाला बैरी सदा दूसरे की बर्बादी के षड्यंत्र रचता है।
Gathbandhan ↔ बिखराव
छोटे दलों ने मिलकर सरकार बनाने के लिए मजबूत गठबंधन तैयार किया।
पारस्परिक अविश्वास के कारण राजनीतिक मोर्चे में बिखराव आ गया।
Bahoo ↔ दामाद
सुलक्षणा बहू ने अपनी सेवा और व्यवहार से पूरे ससुराल का दिल जीत लिया।
दामाद के घर आने पर ससुराल में विशेष सत्कार और दावत का प्रबंध किया गया।
Bhaabhi ↔ ननद
भाभी ने अपनी ननद के विवाह की तैयारियाँ बड़े उत्साह के साथ पूरी कीं।
ननद छुट्टियों में मायके आकर भाभी के साथ सुख-दुख साझा करती है।
Phoopha ↔ बुआ
फूफा जी ने शादी समारोह में बारात का स्वागत बड़े सम्मान के साथ किया।
रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बुआ अपने भाइयों को राखी बांधने गाँव आई।
Beta ↔ बेटी
परिश्रमी बेटा अपने वृद्ध माता-पिता का सहारा बनकर उनकी सेवा करता है।
मेधावी बेटी ने उच्च शिक्षा प्राप्त कर पूरे परिवार का नाम रोशन किया।
Bhateeja ↔ भतीजी
भतीजा अपने चाचा जी के साथ दुकान के काम-काज में हाथ बंटाता है।
भतीजी ने वार्षिक परीक्षा में प्रथम स्थान पाकर चाचा जी का आशीर्वाद लिया।
Bhaanja ↔ भांजी
मामा जी के घर आते ही भांजा उनसे नए-नए खिलौनों की मांग करने लगा।
भांजी ने अपनी मामा-मामी के लिए हाथ से सुंदर ग्रीटिंग कार्ड बनाया।
Rakshak ↔ भक्षक
कानून के रक्षक पुलिसकर्मियों का दायित्व जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
जो रक्षक ही भक्षक बन जाए, उससे समाज की रक्षा कौन कर सकता है।
Vafaadaari ↔ बेवफाई
सेवक की वर्षों की वफादारी के बदले स्वामी ने उसे पारिवारिक सदस्य जैसा माना।
व्यापार में साझेदार की बेवफाई के कारण कंपनी दिवालिया होने के कगार पर आ गई।
Vafaadaar ↔ बेवफा
वफादार सिपाही ने राजा की प्राणरक्षा के लिए अपने सीने पर तीर झेल लिया।
बेवफा मित्र ने लालच में आकर शत्रु को गुप्त भेद बता दिए।
Anugat ↔ बागी
अनुगत सेनापति ने राजा के हर आदेश का तत्काल और निष्ठापूर्वक पालन किया।
बागी सरदारों ने सामंतशाही के विरुद्ध हथियार उठाकर जंग का ऐलान कर दिया।
Nawaab ↔ बेगम
नवाब अपने ठाठ-बाट और कला-प्रेम के लिए रियासत में प्रसिद्ध थे।
बेगम ने अनाथों की शिक्षा और सहायता के लिए विशाल दान दिया।
Naat-rishta ↔ बेगानापन
गाँव में हर व्यक्ति एक-दूसरे से किसी न किसी नात-रिश्ते से जुड़ा होता है।
महानगरों की भागदौड़ में पड़ोसियों के बीच भी अजीब बेगानापन दिखाई देता है।
Baaraati ↔ घराती
ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते हुए बाराती विवाह स्थल पर पहुंचे।
घराती पक्ष ने द्वार पर फूल बरसाकर बारात का गर्मजोशी से स्वागत किया।
Bandhutva ↔ विद्वेष
संविधान की प्रस्तावना में सभी नागरिकों के मध्य बंधुत्व की भावना को सर्वोपरि माना गया है।
सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
Bahumoolya ↔ कौड़ी-का
संग्रहालय में प्राचीन राजाओं के बहुमूल्य रत्न प्रदर्शित हैं।
धोखेबाज व्यापारी ने खरीदार को कौड़ी-का नकली पत्थर थमा दिया।
Lakhpati ↔ भिखारी
कड़े परिश्रम और बुद्धिमत्ता के बल पर वह एक दशक में लखपति बन गया।
चौराहे पर भीख मांगते भिखारी को देखकर हर सहृदय व्यक्ति का मन पसीज जाता है।
Jameendaar ↔ भूमिहीन
रियासत काल में जमींदार किसानों से भारी लगान वसूल करते थे।
भूमि सुधार कानूनों के तहत भूमिहीन श्रमिकों को कृषि योग्य पट्टे बांटे गए।
Bachat ↔ फिजूलखर्ची
हर महीने वेतन से थोड़ी-थोड़ी बचत करना भविष्य को सुरक्षित बनाता है।
दिखावे की फिजूलखर्ची से बड़े-बड़े अमीर भी कर्ज के जाल में फंस जाते हैं।
Agrim ↔ बकाया
मकान मालिक ने अनुबंध करते समय दो माह का अग्रिम किराया लिया।
बिजली का पिछला बकाया बिल जमा न करने पर कनेक्शन काट दिया गया।
Bayaana ↔ अंतिम-भुगतान
जमीन का सौदा पक्का होते ही खरीदार ने बयाना के रूप में एक लाख रुपये दिए।
रजिस्ट्री के दिन बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से अंतिम-भुगतान संपन्न किया गया।
Bhatta ↔ कटौती
कर्मचारियों को महंगाई से निपटने के लिए अतिरिक्त यात्रा भत्ता दिया जाता है।
भविष्य निधि के नाम पर वेतन से प्रतिमाह अनिवार्य कटौती की जाती है।
Baajaar-bhaav ↔ सरकारी-दर
मंडी में गेहूं का बाजार-भाव प्रतिदिन की मांग और आपूर्ति पर निर्भर करता है।
राशन की दुकान पर गरीबों को अनाज निर्धारित सरकारी-दर पर उपलब्ध कराया जाता है।
Bikree ↔ खरीद
त्योहारी सीजन में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की बिक्री में भारी इजाफा हुआ।
कच्चे माल की समय पर खरीद न होने से उत्पादन कुछ दिनों के लिए रुक गया।
Batta ↔ प्रीमियम
पुराने मॉडल के मोबाइल फोन पर दुकानदार ने दस प्रतिशत बट्टा दिया।
दुर्लभ सिक्कों और नए आईपीओ के शेयरों को भारी प्रीमियम देकर खरीदा गया।
Byaaj ↔ मूलधन
ऋण की अदायगी में पहले ब्याज कटता है और बाद में मूलधन घटता है।
बैंक की सावधि जमा योजना में उसका मूलधन पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
Taksaal ↔ बाजार
सरकार की आधिकारिक टक्साल में नए सुरक्षा मानकों वाले सिक्के ढाले जाते हैं।
सिक्के टक्साल से निकलकर खुले बाजार में खरीदारी और बिक्री के माध्यम बनते हैं।
Rojgaar ↔ बेरोजगार
नए कारखानों के खुलने से क्षेत्र के हजारों युवाओं को सम्मानजनक रोजगार मिला।
डिग्री हासिल करने के बावजूद उपयुक्त कौशल न होने से युवक बेरोजगार भटक रहा था।
Rojgaaree ↔ बेरोजगारी
कौशल विकास कार्यक्रमों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगारी के नए अवसर सृजित हुए।
आर्थिक मंदी के कारण कई विकसित देशों में भी बेरोजगारी की दर बढ़ गई।
Kaaragar ↔ बेकार
बुखार के उपचार के लिए यह पारंपरिक घरेलू औषधि अत्यंत कारगर सिद्ध हुई।
घटिया सामग्री से तैयार किया गया औजार कुछ ही दिनों में बेकार साबित हुआ।
Utsaahpoorvak ↔ बेमन-से
विद्यार्थियों ने विज्ञान प्रदर्शनी की तैयारी में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
बिना रुचि के बेमन-से किया गया कार्य कभी भी प्रभावशाली परिणाम नहीं देता।
Talleen ↔ बेपरवाह
मूर्तिकार अपनी कलाकृति को अंतिम रूप देने में पूरी तरह तल्लीन था।
कर्तव्य के प्रति बेपरवाह व्यक्ति आवश्यक दिशा-निर्देशों की भी अनदेखी कर देता है।
Karmath ↔ बातूनी
कर्मठ समाजसेवियों ने महामारी के समय दिन-रात पीड़ितों की सेवा की।
बातूनी लोग केवल चर्चाएं करते रहते हैं किंतु काम करने का समय आने पर भाग जाते हैं।
Karmayogee ↔ भोगवादी
गीता में श्रीकृष्ण ने निष्काम कर्मयोगी बनने का अमर उपदेश दिया है।
भोगवादी व्यक्ति केवल क्षणिक शारीरिक सुखों के पीछे भागता रहता है।
Niyukti ↔ बर्खास्तगी
कड़े साक्षात्कार और परीक्षा के बाद प्रतिभाशाली शिक्षक की नियुक्ति हुई।
भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए जाने पर अधिकारी की तत्काल प्रभाव से बर्खास्तगी कर दी गई।
Bhartee ↔ छंटनी
सेना में नवयुवकों के लिए खुली भर्ती रैली का आयोजन किया गया।
आर्थिक मंदी के कारण आईटी कंपनी ने सैकड़ों कर्मचारियों की छंटनी कर दी।
Saadhak ↔ बाधक
अनुशासन और एकाग्रता अध्ययन में सदा साधक सिद्ध होते हैं।
अनावश्यक मोबाइल फोन का उपयोग विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ा बाधक तत्व है।
Bhoot ↔ भविष्य
भूत की गलतियों से सीख लेकर ही मनुष्य अपने जीवन को संवार सकता है।
भविष्य की चिंता में वर्तमान के सुखद पलों को गंवाना बुद्धिमानी नहीं है।
Bhaavee ↔ भूतपूर्व
आज के विद्यार्थी ही राष्ट्र के भावी कर्णधार और नीति-निर्माता हैं।
भूतपूर्व सैनिकों के पुनर्वास के लिए सरकार कई कल्याणकारी योजनाएं चलाती है।
Baalyaavastha ↔ वृद्धावस्था
बाल्यावस्था में सीखे गए अच्छे संस्कार जीवन भर साथ निभाते हैं।
वृद्धावस्था में स्वास्थ्य का ध्यान रखना और शांत रहना सबसे बड़ा सुख है।
Vartamaanakaal ↔ भूतकाल
वर्तमानकाल में उठाया गया ठोस कदम ही हमारे उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करता है।
भूतकाल की यादों में ही खोए रहने से वर्तमान के कर्तव्य प्रभावित होते हैं।
Bhavishyakaal ↔ भूतकाल
पर्यावरणविद् भविष्यकाल में जल संकट की गंभीर चेतावनी दे रहे हैं।
भूतकाल की गलतियों को दोहराने से बचना हर विवेकशील मनुष्य का कर्तव्य है।
Shoorataa ↔ भीरुता
संकट और विपत्ति के समय शूरता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भीरुता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbheekataa ↔ भयभीतता
संकट और विपत्ति के समय निर्भीकता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयभीतता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bahaadura ↔ डरपोक
संकट और विपत्ति के समय बहादुर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डरपोक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bahaaduree ↔ बुजदिली
संकट और विपत्ति के समय बहादुरी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने बुजदिली का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dilera ↔ बुजदिल
संकट और विपत्ति के समय दिलेर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने बुजदिल का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dileree ↔ बुजदिली
संकट और विपत्ति के समय दिलेरी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने बुजदिली का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bhayamukta ↔ भयग्रस्त
संकट और विपत्ति के समय भयमुक्त का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयग्रस्त का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dridhchetaa ↔ भयभीत
संकट और विपत्ति के समय दृढ़चेता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयभीत का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbhayataa ↔ भीरुता
संकट और विपत्ति के समय निर्भयता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भीरुता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Baagee ↔ आज्ञाकारी
संकट और विपत्ति के समय बागी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने आज्ञाकारी का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bebaaka ↔ दब्बू
संकट और विपत्ति के समय बेबाक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने दब्बू का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Hamalaa ↔ बचाव
संकट और विपत्ति के समय हमला का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने बचाव का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Muktidaataa ↔ बंधककर्ता
संकट और विपत्ति के समय मुक्तिदाता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने बंधककर्ता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Abhayamudraa ↔ भयभीत-मुद्रा
संकट और विपत्ति के समय अभयमुद्रा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयभीत-मुद्रा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veerarasa ↔ भयानक-रस
संकट और विपत्ति के समय वीररस का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयानक-रस का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bhayaanaka ↔ मनोहर
संकट और विपत्ति के समय भयानक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने मनोहर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bhayaavaha ↔ सुखद
संकट और विपत्ति के समय भयावह का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुखद का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bhayaprada ↔ अभयकारी
संकट और विपत्ति के समय भयप्रद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अभयकारी का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dilera-javaana ↔ बुजदिल-भगोड़ा
संकट और विपत्ति के समय दिलेर-जवान का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने बुजदिल-भगोड़ा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bauddhika ↔ अबौद्धिक
विद्या और बौद्धिक विकास में बौद्धिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अबौद्धिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bodhagamya ↔ क्लिष्ट
विद्या और बौद्धिक विकास में बोधगम्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में क्लिष्ट की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Smaranashakti ↔ भूलक्कड़पन
विद्या और बौद्धिक विकास में स्मरणशक्ति का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में भूलक्कड़पन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tathyaparaka ↔ भ्रामक
विद्या और बौद्धिक विकास में तथ्यपरक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में भ्रामक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bhaashya ↔ संक्षिप्त-टिप्पणी
विद्या और बौद्धिक विकास में भाष्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में संक्षिप्त-टिप्पणी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Avadhaaranaa ↔ भ्रांति
विद्या और बौद्धिक विकास में अवधारणा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में भ्रांति की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Buddhimattaa ↔ मूर्खता
विद्या और बौद्धिक विकास में बुद्धिमत्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bodha ↔ अज्ञान
विद्या और बौद्धिक विकास में बोध का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञान की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bauddhikataa ↔ अज्ञानता
विद्या और बौद्धिक विकास में बौद्धिकता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञानता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tathya ↔ भ्रम
विद्या और बौद्धिक विकास में तथ्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में भ्रम की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bavndara ↔ शांत-हवा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बवंडर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-हवा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Kadaake-kee-thnda ↔ भीषण-गर्मी
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में कड़ाके-की-ठंड की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में भीषण-गर्मी का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jhamaajhama ↔ बूंदाबांदी
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में झमाझम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में बूंदाबांदी का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Himapaata-yukta ↔ बर्फहीन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में हिमपात-युक्त की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में बर्फहीन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Barphaanee-toophaana ↔ खिला-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बर्फानी-तूफान की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में खिला-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sookhaa-peedita ↔ बाढ़-ग्रस्त
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सूखा-पीड़ित की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में बाढ़-ग्रस्त का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Baadalaviheena ↔ घटाटोप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बादलविहीन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में घटाटोप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Bijalee-chamakanaa ↔ अंधेरी-रात
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बिजली-चमकना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अंधेरी-रात का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Barpha-kee-chaadara ↔ तपा-धरातल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बर्फ-की-चादर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तपा-धरातल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aasamaana-khulanaa ↔ बादल-छाना
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आसमान-खुलना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में बादल-छाना का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Baadala-phatanaa ↔ सूखा-पड़ना
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बादल-फटना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखा-पड़ना का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Barasaata ↔ सूखा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बरसात की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Baadala-ghiranaa ↔ धूप-खिलना
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बादल-घिरना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में धूप-खिलना का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sookhaa-mausama ↔ बरसाती-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सूखा-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में बरसाती-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Barasaatee-raata ↔ तारों-भरी-रात
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बरसाती-रात की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तारों-भरी-रात का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Bijalee-kee-kadka ↔ आकाश-की-शांति
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बिजली-की-कड़क की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में आकाश-की-शांति का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Andar ↔ बाहर
मूसलाधार बारिश शुरू होते ही सभी लोग भीगने से बचने के लिए कमरे के अंदर चले गए।
खुली धूप और शुद्ध हवा का आनंद लेने के लिए बालक घर से बाहर मैदान में खेलने दौड़े।
Khareedna ↔ बेचना
किसान अपनी मेहनत की कमाई से नई फसल के लिए उन्नत बीज और खाद खरीदना चाहता था।
मंडी में अच्छी कीमत मिलते ही व्यापारी ने अपना सारा अनाज बेचना उचित समझा।
Uthna ↔ बैठना
प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व बिस्तर से उठना स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
दिनभर की भागदौड़ के बाद शांत मुद्रा में बैठना मानसिक शांति प्रदान करता है।
Khushboo ↔ बदबू
बगीचे में खिले चमेली और गुलाब के फूलों की खुशबू पूरे वातावरण को महका देती है।
कूड़े-कचरे के ढेर से उठती बदबू के कारण रास्ते से गुजरना दूभर हो जाता है।
Khula ↔ बंद
ताजी हवा के आवागमन के लिए प्रातःकाल खिड़कियां खुला रखना उत्तम रहता है।
रात के समय सुरक्षा की दृष्टि से मुख्य द्वार को बंद रखना अनिवार्य है।
Jalna ↔ बुझना
अंगीठी में सूखी लकड़ियों का जलना कड़कड़ाती ठंड में सबको गर्माहट देता है।
हवा का तेज झोंका आते ही दीये की लौ का बुझना स्वाभाविक था।
Bolna ↔ चुप रहना
सभा में सत्य और न्याय के पक्ष में निडर होकर बोलना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
मूर्खों के निरर्थक विवाद में उलझने से कहीं बेहतर है चुप रहना और शांति बनाए रखना।
Kholna ↔ बाँधना
पार्सल की जटिल गांठ को कैंची से काटने के बजाय धीरे-धीरे खोलना चाहिए।
सामान को सुरक्षित रखने के लिए उसे मजबूत रस्सी से कसकर बाँधना जरूरी होता है।
Sajaana ↔ बिगाड़ना
दीपावली के पावन पर्व पर रंगोली और दीपकों से घर के आंगन को सजाना परंपरा है।
क्रोध और आवेश में आकर अपनी बनी-बनाई बात बिगाड़ना बुद्धिमानी नहीं है।
Bikherna ↔ समेटना
तेज हवा ने मेज पर रखे महत्वपूर्ण कागजात को पूरे कमरे में बिखेरना शुरू कर दिया।
काम पूरा होते ही औजारों और बस्तों को व्यवस्थित रूप से समेटना एक अच्छी आदत है।
Bona ↔ काटना
बरसात की शुरुआत होते ही किसान खेतों में अन्न के नए बीज बोना शुरू करते हैं।
कहावत प्रसिद्ध है कि जैसा बीज बोओगे, वैसा ही फल भविष्य में काटना पड़ेगा।
Thoda ↔ बहुत
संतोषी व्यक्ति थोड़ा सा मिलने पर भी प्रभु का धन्यवाद करते हुए प्रसन्न रहता है।
लालची व्यक्ति के पास बहुत धन-दौलत होने के बावजूद उसकी तृष्णा कभी शांत नहीं होती।
Badhna ↔ घटना
निरंतर अभ्यास और परिश्रम से मनुष्य का ज्ञान और आत्मविश्वास तेजी से बढ़ता है।
लापरवाही और आलस्य के कारण व्यापार में लाभ घटने लगता है।
Khada ↔ बैठा
बुजुर्गों और गुरुजनों के सम्मान में कक्षा के सभी विद्यार्थी आदरपूर्वक खड़े हो गए।
लंबी यात्रा की थकान के बाद पेड़ की शीतल छाया में बैठा यात्री सुखद विश्राम पा सका।