Drishya ↔ अदृश्य
नेत्रों से दृश्य जगत का सौंदर्य देखा जा सकता है, किंतु ईश्वर की शक्ति अदृश्य रहती है।
वायु यद्यपि अदृश्य है, किंतु इसका स्पंदन और जीवनदायिनी शक्ति हर श्वास में प्रत्यक्ष है।
अक्षर 'द' से प्रारंभ होने वाले कुल 149 विपरीतार्थक शब्द युग्म नीचे दिए गए हैं:
Drishya ↔ अदृश्य
नेत्रों से दृश्य जगत का सौंदर्य देखा जा सकता है, किंतु ईश्वर की शक्ति अदृश्य रहती है।
वायु यद्यपि अदृश्य है, किंतु इसका स्पंदन और जीवनदायिनी शक्ति हर श्वास में प्रत्यक्ष है।
Durbal ↔ सबल
न्यायपूर्ण समाज में सबल व्यक्ति कभी दुर्बल पर अत्याचार नहीं करता।
सबल का धर्म है कि वह दुर्बल की रक्षा करे, न कि उस पर अपना प्रभुत्व जमाए।
Deergh ↔ ह्रस्व
व्याकरण में स्वरों का उच्चारण दीर्घ अथवा ह्रस्व अवधि में किया जाता है।
व्याकरण में ह्रस्व और दीर्घ स्वरों का सही उच्चारण अर्थ को स्पष्ट करता है।
Durlabh ↔ सुलभ
सच्चा मार्गदर्शन अत्यंत दुर्लभ होता है, जबकि व्यर्थ सलाह हर चौराहे पर सुलभ मिल जाती है।
जो ज्ञान सुलभ है उसकी उपेक्षा न करें, क्योंकि वह दुर्लभ अवसर का निर्माण करता है।
Dushkar ↔ सुकर
सत्य के मार्ग पर चलना दुष्कर हो सकता है, किंतु आत्मसंतोष के लिए यही सुकर मार्ग है।
अनुभवी मार्गदर्शक के सान्निध्य में अत्यंत दुष्कर कार्य भी सुकर और सरल बन जाता है।
Susheel ↔ दुःशील
सुशील कन्या परिवार का गौरव बढ़ाती है जबकि दुःशील संतान बदनामी लाती है।
दुःशील संगति से अच्छे संस्कार भी नष्ट हो जाते हैं, इसलिए सुशील मित्रों की संगति करें।
Sajjan ↔ दुर्जन
सज्जन पुरुष सदा परोपकार में रत रहते हैं जबकि दुर्जन दूसरों को हानि पहुँचाने में।
दुर्जन की मीठी बातों से भी सावधान रहना चाहिए क्योंकि उसके मन में कपट छिपा रहता है।
Kripan ↔ दानी
कृपण व्यक्ति धन संचय करके भी भूखा मरता है, जबकि दानी पुरुष दान देकर अमर हो जाता है।
सच्चा दानी अपने दिए गए दान का कभी ढिंढोरा नहीं पीटता, वह गुप्त भाव से उपकार करता है।
Dayalu ↔ निर्दयी
दयालु राजा अपनी प्रजा पर कृपा करता है जबकि निर्दयी शासक केवल अत्याचार ढहाता है।
निर्दयी शिकारी बेजुबान पशुओं पर अत्याचार करते समय किंचित भी संकोच नहीं करता।
Kroor ↔ दयावान
क्रूर शिकारी ने मूक पशु पर बाण चलाया, किंतु दयावान साधु ने उसकी जान बचाई।
दयावान मनुष्य पीड़ित प्राणियों के आंसू पोंछकर स्वयं को धन्य अनुभव करता है।
Subodh ↔ दुर्बोध
शिक्षक ने सुबोध भाषा में गणित समझाया, जिससे दुर्बोध सूत्र भी आसानी से समझ आ गए।
कठिन भाषा का दुर्बोध ग्रंथ गुरु की सरल व्याख्या से सुबोध और सुगम बन जाता है।
Sukhee ↔ दुखी
संतोषी व्यक्ति सदा सुखी रहता है जबकि लोभी मनुष्य हमेशा दुखी ही रहता है।
दुखी जनों के कष्ट का निवारण करना ही मानव जीवन का सर्वोच्च कर्तव्य और पुण्य है।
Daksha ↔ अदक्ष
दक्ष शल्य-चिकित्सक जटिल ऑपरेशन सरलता से कर देता है, नए व अदक्ष को सावधानी रखनी होती है।
अदक्ष कारीगर को समुचित प्रशिक्षण देकर निपुण बनाया जा सकता है।
Drishyamaan ↔ अदृश्यमान
क्षितिज पर दृश्यमान पर्वत घने बादलों के आते ही अदृश्यमान हो गया।
सूक्ष्मदर्शी के बिना अदृश्यमान जीवाणु भी जल में उपस्थित रहकर रोग फैला सकते हैं।
Deerghaayu ↔ अल्पायु
बुजुर्गों का आशीर्वाद होता है — दीर्घायु भव और यशस्वी बनो।
अल्पायु में ही स्वामी विवेकानंद ने अपने विचारों से संपूर्ण विश्व को आलोकित कर दिया।
Sugam ↔ दुर्गम
पुल बनने से नदी पार करना सुगम हो गया, अन्यथा पहले यह अत्यंत दुर्गम था।
पहाड़ी मार्ग पहले दुर्गम हुआ करते थे, किंतु नई सड़कों ने यात्रा को सुगम बना दिया है।
Supraapya ↔ दुष्प्राप्य
आजकल इंटरनेट के माध्यम से ज्ञान सुप्राप्य हो गया है।
घने जंगलों में पाई जाने वाली संजीवनी बूटी अत्यंत दुष्प्राप्य मानी जाती है।
Sukrit ↔ दुष्कृत
सुकृत कर्म करने से आत्मा को शांति मिलती है, दुष्कृत सदा पश्चाताप देता है।
दुष्कृत करने वाला भले ही कानून से बच जाए, अंतरात्मा के दंड से नहीं बच सकता।
Sugandhit ↔ दुर्गंधयुक्त
गुलाब का सुगंधित इत्र मन को मोह लेता है।
दुर्गंधयुक्त नाले संक्रामक रोगों का केंद्र बन जाते हैं जिन्हें ढकना आवश्यक है।
Saubhaagyashaali ↔ दुर्भाग्यशाली
वे सौभाग्यशाली हैं जिन्हें गुरु का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
दुर्भाग्यशाली मनुष्य भी यदि सतत परिश्रम करे तो अपने भाग्य की रेखाएं बदल सकता है।
Prabal ↔ दुर्बल
सच्चाई का पक्ष हमेशा प्रबल होता है, असत्य कितना भी दुर्बल क्यों न हो टिक नहीं सकता।
न्यायपूर्ण समाज में सबल व्यक्ति कभी दुर्बल पर अत्याचार नहीं करता।
Din ↔ रात
परिश्रमी व्यक्ति दिन और रात की परवाह किए बिना अपने लक्ष्य की प्राप्ति में जुटा रहता है।
कठिन परिश्रम के बाद रात की नींद अत्यंत सुखद और शांतिपूर्ण होती है।
Puraskaar ↔ दंड
उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छात्र को पुरस्कार मिला जबकि अनुशासनहीनता पर दंड दिया गया।
न्यायालय ने दोषी को कठोर दंड दिया।
Daata ↔ याचक
ईश्वर सबका परम दाता है, हम सब उसके सम्मुख याचक हैं।
दरवाजे पर आए याचक को खाली हाथ नहीं लौटाना चाहिए।
Desh ↔ विदेश
देश और विदेश दोनों में भारतीय संस्कृति की साख ऊंची है।
विदेश यात्रा से ज्ञान और दृष्टिकोण का विस्तार होता है।
Daasata ↔ मुक्ति
दासता से मुक्ति पाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग ने संघर्ष किया।
कुरीतियों और अंधविश्वासों से मुक्ति पाकर ही समाज प्रगति कर सकता है।
Shaharee ↔ देहाती
शहरी जीवन में तकनीकी सुविधाएं प्रचुर मात्रा में हैं परंतु प्रदूषण और भागदौड़ भी अधिक है।
देहाती परिवेश में खुली हवा, हरियाली और परस्पर मेलजोल की आत्मीयता देखने को मिलती है।
Dndaneeya ↔ क्षम्य
पर्यावरण नियमों का उल्लंघन कर कचरा जलाना कानून के तहत एक दंडनीय अपराध है।
अनजाने में हुई छोटी-मोटी मानवीय भूल सदैव क्षम्य मानी जाती है।
Deshabhakta ↔ देशद्रोही
सीमा पर मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाला सैनिक सच्चा देशभक्त होता है।
देश की गोपनीय सुरक्षा जानकारियां शत्रुओं को बेचने वाला व्यक्ति अक्षम्य देशद्रोही है।
Uttar ↔ दक्षिण
ध्रुवतारा सदा उत्तर दिशा में चमकता है, जिसके विपरीत दक्षिण दिशा स्थित होती है।
हिमालय भारत के उत्तर में और हिंद महासागर दक्षिण दिशा में स्थित है।
Dinkar ↔ निशाकर
दिनकर के उदय होते ही निशाकर की चांदनी आकाश में विलीन हो जाती है।
आकाश में निशाकर अपनी शीतल रश्मियों से धरती को शांत करता है जब दिनकर अस्त होता है।
Daldal ↔ ठोस भूमि
दलदल में पैर पड़ते ही व्यक्ति धंसने लगता है, इसलिए ठोस भूमि पर ही मार्ग बनाना सुरक्षित है।
दलदल के भ्रामक धंसाव से बचकर ठोस भूमि पर कदम रखना ही सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करता है।
Khushi ↔ दुख
सफलता मिलने पर पूरे परिवार में खुशी और उल्लास का माहौल बन गया।
संकट के समय धैर्य बनाए रखने से दुख और निराशा का प्रभाव कम हो जाता है।
Rag ↔ द्वेष
सांसारिक वस्तुओं के प्रति अंधा राग ही दुखों का मूल कारण बनता है।
दूसरों की उन्नति देखकर मन में द्वेष की भावना नहीं लानी चाहिए।
Daya ↔ निर्दयता
दीन-दुखियों पर दया करना मानव धर्म का सबसे प्रमुख अंग है।
लाचार पशुओं पर लाठी बरसाना मनुष्य की निर्दयता दर्शाता है।
Kshama ↔ दंड
क्षमा बलवानों का आभूषण है जो शत्रु को भी मित्र बना देती है।
न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोर दंड सुनाया।
Preeti ↔ द्वेष
परस्पर प्रीति और सौहार्द से ही परिवार का वातावरण सुखद रहता है।
हृदय में द्वेष रखने वाला मनुष्य कभी किसी का भला नहीं सोच सकता।
Subuddhi ↔ दुर्बुद्धि
ईश्वर से प्रार्थना है कि वह सबको सुबुद्धि और सद्विचार प्रदान करे।
दुर्बुद्धि के प्रभाव में आकर दुर्योधन ने पांडवों का अधिकार छीनने का प्रयास किया।
Sadbhavna ↔ दुर्भावना
विभिन्न समुदायों के बीच सद्भावना राष्ट्र की अखंडता का आधार है।
मन में दुर्भावना रखकर किया गया कोई भी कार्य सफल नहीं होता।
Harshit ↔ दुखी
अच्छे अंक प्राप्त करके छात्र का मन अत्यंत हर्षित था।
बीमारी के कारण असहाय रोगी दुखी और व्याकुल दिखाई दिया।
Sadashay ↔ दुराशय
सदाशय महापुरुष सदैव दूसरों के उत्थान का विचार करते हैं।
दुराशय व्यक्ति के मन में सदैव दूसरों को नीचा दिखाने का कुचक्र चलता रहता है।
Sadpravritti ↔ दुष्प्रवृत्ति
सत्संगति से बालकों में सद्प्रवृत्ति का विकास होता है।
बुरी संगति मन में दुष्प्रवृत्ति को जन्म देती है।
Sadbhavi ↔ दुर्भावी
सद्भावी पड़ोसी सुख और दुख दोनों में सदैव साथ खड़े रहते हैं।
दुर्भावी शत्रु सदा दूसरे के पतन की प्रतीक्षा में रहता है।
Saukhya ↔ दुख
सरल जीवन और सीमित इच्छाएं ही सच्चे सौख्य का रहस्य हैं।
लोभ और ईर्ष्या मनुष्य को कभी न खत्म होने वाले दुख में धकेलते हैं।
Sukhad ↔ दुखद
पुराने मित्रों से वर्षों बाद मिलना एक सुखद संयोग था।
विमान दुर्घटना का यह समाचार अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है।
Sauhardapoorna ↔ द्वेषपूर्ण
दोनों देशों के नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण वार्ता संपन्न हुई।
द्वेषपूर्ण प्रचार से समाज में कटुता और अविश्वास बढ़ता है।
Dayavan ↔ निर्दयी
दयावान डॉक्टर ने गरीब मरीजों का निःशुल्क उपचार किया।
निर्दयी बंधुआ मालिक मजदूरों से रात-दिन बिना वेतन काम कराता था।
Deerghkaay ↔ लघुकाय
दीर्घकाय रक्षक द्वार पर प्रहरी की भाँति दृढ़ता से खड़ा था।
लघुकाय बालक ने अपनी फुर्ती से बड़े-बड़े खिलाड़ियों को चकित कर दिया।
Netraheen ↔ दृष्टिवान
नेत्रहीन व्यक्तियों में स्पर्श और श्रवण की अद्भुत संवेदनशीलता पाई जाती है।
दृष्टिवान लोगों को अपनी आँखों की सुरक्षा और उचित देखभाल के प्रति सचेत रहना चाहिए।
Dakshin ↔ वाम
हृदय शरीर के वाम भाग में और यकृत दक्षिण भाग में स्थित होता है।
वाम हाथ की अपेक्षा अधिकांश लोग दैनिक कार्यों में दक्षिण हाथ का प्रयोग करते हैं।
Deh ↔ विदेह
पंचतत्वों से निर्मित यह भौतिक देह नश्वर है और समय के साथ ढल जाती है।
राजा जनक देह में रहते हुए भी आसक्तियों से परे होकर विदेह कहलाते थे।
Drishtiheen ↔ दृष्टिमान
दृष्टिहीन संगीतकार ने अपनी कर्ण-संवेदना के सहारे सुरों का अनूठा संसार रच दिया।
दृष्टिमान दर्शक प्रकृति के सतरंगी दृश्यों का आनंद अपनी आँखों से लेते हैं।
Daayaan ↔ बायाँ
लेखन और प्रमुख कार्यों के लिए अधिकांश लोग दायाँ हाथ प्राथमिकता से प्रयोग करते हैं।
कुछ लोग जन्मजात रूप से बायाँ हाथ अधिक कुशलता और गति से उपयोग करने में दक्ष होते हैं।
Sumukha ↔ दुर्मुख
सदा प्रसन्न रहने वाले बालक का सुमुख देखकर हर किसी का मन आनंदित हो उठता है।
सदा क्रोध और कटुता में डूबे रहने वाले व्यक्ति का चेहरा दुर्मुख और विकृत प्रतीत होता है।
Dntaheena ↔ दंतयुक्त
चार माह के शिशु का मुख दंतहीन होता है, इसलिए वह केवल तरल आहार ही ग्रहण करता है।
वयस्क होने पर मनुष्य का मुख बत्तीस दांतों से युक्त और सुदृढ़ दंतयुक्त हो जाता है।
Sadaachaar ↔ दुराचार
विद्यालय में विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ सदाचार और अनुशासन की भी शिक्षा दी जाती है।
दुराचार और कुसंगति में लिप्त व्यक्ति अपने कुल और समाज की प्रतिष्ठा को कलंकित करता है।
Sadgun ↔ दुर्गुण
विनम्रता, सत्यवादिता और परोपकार जैसे सद्गुण व्यक्ति को महान बनाते हैं।
अहंकार, ईर्ष्या और लोभ जैसे दुर्गुण मनुष्य के समस्त पुण्यों को भस्म कर देते हैं।
Satkarm ↔ दुष्कर्म
जीवन में किए गए सत्कर्म ही मृत्यु के उपरांत व्यक्ति का नाम अमर रखते हैं।
दुष्कर्म करने वाला मनुष्य कानून की नजर से बच भी जाए, तो अंतरात्मा की अदालत से नहीं बच सकता।
Sadaachaari ↔ दुराचारी
सदाचारी व्यक्ति समाज में जहाँ भी जाता है, अपने आचरण से सबका सम्मान पाता है।
दुराचारी व्यक्ति अपने नीच कर्मों के कारण अपनों के बीच भी तिरस्कृत रहता है।
Sadbuddhi ↔ दुर्बुद्धि
भगवान से प्रार्थना है कि वे सभी को सद्विचार और सद्बुद्धि प्रदान करें।
दुर्बुद्धि के प्रभाव में आकर दुर्योधन ने पांडवों के साथ संधि का प्रस्ताव ठुकरा दिया था।
Sadgati ↔ दुर्गति
पवित्र कर्मों और निर्मल मन से जीवन जीने वाले को सद्गति प्राप्त होती है।
जुआ और मद्यपान की लत के कारण उस धनाढ्य परिवार की घोर दुर्गति हो गई।
Sadvichaar ↔ दुर्विचार
सद्विचार मनुष्य के अंतःकरण को शांति और आनंद से भर देते हैं।
ईर्ष्या और द्वेष से उपजे दुर्विचार मनुष्य की मानसिक शांति को छीन लेते हैं।
Daan ↔ याचना
सच्चा दान वही है जो बिना किसी दिखावे और स्वार्थ के सुपात्र को दिया जाए।
स्वाभिमानी व्यक्ति कभी किसी के सामने सहायता के लिए याचना नहीं करता।
Punyaatma ↔ दुरात्मा
पुण्यात्मा साधक अपने तपोबल से संपूर्ण वातावरण को पवित्र कर देते हैं।
दुरात्मा व्यक्ति दूसरों की प्रगति देखकर भीतर ही भीतर ईर्ष्या से जलता रहता है।
Mahaatma ↔ दुरात्मा
महात्मा बुद्ध ने दया और करुणा का उपदेश देकर मानवता का मार्गदर्शन किया।
दुरात्मा शासक ने अपने अहंकार की तुष्टि के लिए प्रजा पर भारी अत्याचार किए।
Vishwaaspaatra ↔ दगाबाज
राजा ने अपने सबसे विश्वासपात्र मंत्री को राज्य का खजाना सौंपा।
दगाबाज शत्रु से भी अधिक घातक होता है क्योंकि वह पीठ पीछे वार करता है।
Hitaishi ↔ द्वेषी
सच्चा हितैषी वही है जो आपकी गलतियों पर पर्दा डालने के बजाय सही रास्ता दिखाए।
द्वेषी व्यक्ति दूसरों की उन्नति देखकर जलता है और षड्यंत्र रचता है।
Sadprayaas ↔ दुष्प्रयास
समाज सुधारकों के सद्प्रयास से बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर रोक लग सकी।
शत्रु के दुष्प्रयास को सुरक्षा बलों ने अपनी सतर्कता से विफल कर दिया।
Sadvyavahaar ↔ दुर्व्यवहार
ग्राहकों के साथ सद्व्यवहार करने से व्यापार की साख और लोकप्रियता बढ़ती है।
बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले युवक को पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ा।
Sucharitra ↔ दुश्चरित्र
सुचरित्र मनुष्य कठिन परिस्थितियों में भी कभी असत्य और अधर्म का मार्ग नहीं चुनता।
दुश्चरित्र व्यक्ति अपने घृणित आचरण के कारण परिवार का विनाश कर देता है।
Sadbhaav ↔ दुर्भाव
त्योहारों का मूल संदेश समाज के सभी वर्गों के बीच आपसी सद्भाव और प्रेम बढ़ाना है।
पड़ोसियों के प्रति मन में दुर्भाव पालने से घर का वातावरण अशांत हो जाता है।
Sajjanta ↔ दुर्जनता
सज्जनता का गुण यही है कि वह दुष्टों के अपशब्दों का उत्तर भी मधुरता से देता है।
दुर्जनता और कुटिलता के कारण कोई भी सज्जन उसके साथ बैठना पसंद नहीं करता।
Dvipada ↔ चतुष्पद
पक्षी द्विपद प्राणी होते हैं जो दो पैरों पर चलते हैं और पंखों से उड़ते हैं।
घोड़ा और हाथी चतुष्पद जीव हैं जो चार मजबूत पैरों के सहारे भारी बोझ उठाते हैं।
Nishaachar ↔ दिवाचर
उल्लू और चमगादड़ निशाचर प्राणी हैं जो रात के अंधकार में सक्रिय होते हैं।
चिड़िया और कौआ दिवाचर पक्षी हैं जो सूर्योदय के साथ चहचहाने लगते हैं।
Danshtree ↔ अदंष्ट्री
चीता और सूअर दंष्ट्री प्राणी हैं जिनके नुकीले दांत शिकार को चीर डालते हैं।
कछुआ और पक्षी अदंष्ट्री जीव हैं जिनके मुख में दांतों के बजाय चोंच या जबड़ा होता है।
Dudhaaru ↔ सूखा
किसान के पास दो दुधारू गायें हैं जो रोज बीस लीटर दूध देती हैं।
सूखा गाय को भी किसान प्रेम से पौष्टिक चारा देकर सेवा करता है।
Dahi ↔ दूध
गर्मी के दिनों में ठंडा दही पेट को ठंडक और प्रोबायोटिक लाभ देता है।
गुनगुना मीठा दूध रात को सोने से पहले पीने से अच्छी नींद आती है।
Doodhiya ↔ पानीदार
काजू और मलाई से बनी शाही पनीर की ग्रेवी एकदम दूधिया और गाढ़ी थी।
ढाबे की दाल में पानीदार झोल अधिक था और दाल के दाने कम।
Daanedaar ↔ चिकना
शुद्ध खोए से बना दानेदार कलाकंद मुंह में घुल जाता है।
मिक्सी में पिसी हुई चिकनी चटनी समोसे के साथ बहुत अच्छी लगती है।
Madira ↔ दूध
मदिरा का सेवन बुद्धि और स्वास्थ्य दोनों का विनाश करता है।
गाय का ताजा दूध तन और मन को पवित्रता और बल प्रदान करता है।
Daal-roti ↔ छप्पन-भोग
संतोषी व्यक्ति अपनी गाढ़ी कमाई की दाल-रोटी में ही परम सुख मानता है।
मंदिर के उत्सव में भगवान को छप्पन-भोग का भव्य प्रसाद अर्पित किया गया।
Dost ↔ दुश्मन
बचपन का सच्चा दोस्त हर सुख-दुख में बिना बुलाए साथ निभाता है।
छिपकर वार करने वाले दुश्मन से सावधान रहना ही समझदारी है।
Dosti ↔ दुश्मनी
उनकी पक्की दोस्ती कॉलेज के दिनों से लेकर आज तक अटूट बनी हुई है।
जमीन के छोटे टुकड़े के लिए भाइयों में पीढ़ियों पुरानी दुश्मनी पैदा हो गई।
Prabhu ↔ दास
भक्त हनुमान ने अपने प्रभु श्रीराम की सेवा में संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
स्वामी के प्रति निष्ठावान दास कठिन घड़ी में भी कभी पलायन नहीं करता।
Jeth ↔ देवर
पारंपरिक परिवार में जेठ का आदर ससुर के समान माना जाता है।
देवर और भाभी का रिश्ता पारिवारिक हंसी-मजाक और आत्मीयता से भरा होता है।
Bahoo ↔ दामाद
सुलक्षणा बहू ने अपनी सेवा और व्यवहार से पूरे ससुराल का दिल जीत लिया।
दामाद के घर आने पर ससुराल में विशेष सत्कार और दावत का प्रबंध किया गया।
Nanad ↔ देवर
ननद ने अपनी नई भाभी का गृह-प्रवेश में आरती उतारकर स्वागत किया।
देवर अपनी भाभी के घरेलू कामों में हमेशा हाथ बंटाता था।
Daada ↔ दादी
दादा जी शाम को पोते-पोतियों को नैतिक मूल्यों की रोचक कहानियाँ सुनाते हैं।
दादी जी परिवार की कुशल क्षेम के लिए नित्य पूजा-अर्चना करती हैं।
Darshak ↔ अभिनेता
नाटक के मार्मिक दृश्य को देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध और भावुक हो गए।
कुशल अभिनेता ने अपने जीवंत अभिनय से मंच पर पात्र को साकार कर दिया।
Saahukaar ↔ देनदार
प्राचीन समय में साहूकार ग्रामीणों को फसल की बुवाई के लिए ऋण देते थे।
ईमानदार देनदार ने फसल कटते ही साहूकार का संपूर्ण हिसाब चुकता कर दिया।
Doolha ↔ दुल्हन
घोड़ी पर सवार दूल्हा बारात के साथ विवाह मंडप की ओर अग्रसर हुआ।
लाल जोड़े में सजी दुल्हन का स्वागत मंगल गीतों और आरती से किया गया।
Jethaani ↔ देवरानी
जेठानी ने घर की बड़ी बहू के रूप में रसोई और पूजा का प्रबंध संभाला।
देवरानी अपनी जेठानी का आदर बड़ी बहन की तरह करती थी।
Vaibhav ↔ दैन्य
राजमहल का अद्वितीय वैभव देखकर सभी विदेशी राजदूत चकित रह गए।
भीषण अकाल के कारण संपूर्ण जनपद में दैन्य और लाचारी छा गई।
Aishvarya ↔ दारिद्र्य
अहंकारी मनुष्य अत्यधिक ऐश्वर्य पाकर भी मानसिक शांति नहीं पाता।
कठोर श्रम और निरंतर निष्ठा से परिवार ने दारिद्र्य पर विजय प्राप्त की।
Sampannata ↔ दरिद्रता
हरित क्रांति के फलस्वरूप गांव में आर्थिक संपन्नता लौट आई।
उचित रोजगार के अभाव में समाज के कई वर्ग दरिद्रता में जीवन बिता रहे हैं।
Kuber ↔ दरिद्र
व्यापार में अप्रत्याशित सफलता से वह रातों-रात कुबेर बन बैठा।
सच्चे संत दरिद्र की झोपड़ी में भी प्रेम से भोजन ग्रहण करते हैं।
Daulatmand ↔ मुफ़लिस
दौलतमंद लोग समाज के वंचित वर्गों की शिक्षा के लिए धन दान करते हैं।
अचानक आई मंदी ने कई संपन्न परिवारों को मुफ़लिस कर दिया।
Dhaneemaani ↔ दीनहीन
शहर के सभी धनीमानी लोग दान उत्सव में सम्मिलित हुए।
कड़ाके की ठंड में दीनहीन लोगों को गर्म कंबल बांटे गए।
Divaaliya ↔ समर्थ
सट्टे में भारी नुकसान उठाने के बाद व्यापारी दिवालिया घोषित हो गया।
वित्तीय रूप से समर्थ कंपनी ने घाटे में चल रहे कारखाने को खरीद लिया।
Rinashodhan ↔ दिवालियापन
नियमित किस्तों द्वारा ऋणशोधन करने से ग्राहक का क्रेडिट स्कोर सुधरता है।
भारी कर्ज न चुका पाने पर न्यायालय ने कंपनी के दिवालियापन पर मुहर लगाई।
Dendaari ↔ लेनदारी
व्यापार में देनदारी बढ़ते ही संस्था की साख प्रभावित होने लगती है।
बाजार से अपनी पुरानी लेनदारी वसूल करने के लिए कंपनी ने कड़े कदम उठाए।
Parisampatti ↔ देनदारी
भूमि और भवन किसी भी औद्योगिक घराने की सबसे ठोस परिसंपत्ति होते हैं।
अनियंत्रित ऋणों के कारण कंपनी की देनदारी उसकी कुल संपत्ति से अधिक हो गई।
Aasti ↔ दायित्व
तुलन-पत्र (बैलेंस शीट) में हर कंपनी की आस्ति का स्पष्ट ब्यौरा होता है।
बैंक ऋण समय पर न लौटाने से यह कानूनी दायित्व बन जाता है।
Dalaali ↔ मजदूरी
जमीन के सौदे में बिचौलिए ने दोनों पक्षों से भारी दलाली वसूल की।
दिन भर धूप में ईंटें ढोने के बाद श्रमिक को उसकी पसीने की मजदूरी मिली।
Vaibhavshaalee ↔ दीन
वैभवशाली महलों में रहने वाले राजा को प्रजा की कठिनाइयों का आभास होना चाहिए।
दीन और असहाय वृद्धों की सेवा करना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है।
Daayitva ↔ गैरजिम्मेदारी
एक जागरूक नागरिक होने के नाते मतदान करना हमारा परम दायित्व है।
कार्यस्थल पर गैरजिम्मेदारी बरतने से पूरी टीम की साख पर धब्बा लग सकता है।
Lakshyavedhee ↔ दिशाहीन
अर्जुन की लक्ष्यवेधी दृष्टि केवल चिड़िया की आंख पर केंद्रित थी।
दिशाहीन प्रयासों से बहुमूल्य समय और ऊर्जा व्यर्थ ही नष्ट होती है।
Dridhasankalp ↔ अनिर्णय
दृढ़संकल्प के बल पर पर्वतारोही ने माउंट एवरेस्ट की चोटी फतह की।
लगातार अनिर्णय की स्थिति में बने रहने से अच्छे अवसर हाथ से निकल जाते हैं।
Jeevikopaarjan ↔ दानवृत्ति
ईमानदारी से किया गया जीविकोपार्जन व्यक्ति को गौरव और संतोष प्रदान करता है।
सक्षम होते हुए भी दानवृत्ति पर निर्भर रहना मनुष्य के आत्मसम्मान को गिराता है।
Susaadhya ↔ दुःसाध्य
पारस्परिक सहयोग और तालमेल से जटिल कार्य भी सुसाध्य बन जाता है।
दुर्गम बर्फीले पहाड़ों पर चढ़ना अकेले किसी के लिए भी दुःसाध्य कार्य है।
Diva ↔ रात्रि
दिवा के समय सूर्य का प्रखर प्रकाश संपूर्ण सृष्टि को प्रकाशित करता है।
रात्रि के अंधकार में आकाश में अनगिनत तारे टिमटिमाते नजर आते हैं।
Tadake ↔ देर-रात
किसान तड़के ही हल-बैल लेकर अपने खेतों की ओर चल पड़ा।
परीक्षा की तैयारी में विद्यार्थी देर-रात तक जागकर पढ़ाई करते रहे।
Uttaraayan ↔ दक्षिणायन
मकर संक्रांति के पर्व पर सूर्य उत्तरायण में प्रवेश करता है।
दक्षिणायन की अवधि में रातें लंबी और दिन छोटे होने लगते हैं।
Jaldee ↔ देरी
ट्रेन पकड़ने के लिए हमें घर से जल्दी निकलना पड़ेगा।
कागजी कार्रवाई में देरी होने के कारण पासपोर्ट बनने में समय लगा।
Drut ↔ मंथर
संगीतकार ने तबले पर द्रुत लय में शानदार तान छेड़ी।
नदी की मंथर गति देखकर मन में शांति का संचार होता है।
Drutagaamee ↔ मंदगामी
बुलेट ट्रेन जैसी द्रुतगामी रेलगाड़ियां महानगरों की दूरी मिनटों में तय कर देती हैं।
भारी लोड से लदी बैलगाड़ी मंदगामी चाल से कच्ची सड़क पर आगे बढ़ रही थी।
Samayapaalak ↔ देर-लतीफ
समयपालक कर्मचारी सदा कार्यालय में समय से दस मिनट पहले उपस्थित होता है।
देर-लतीफ अधिकारियों के कारण कई महत्वपूर्ण बैठकें समय पर शुरू नहीं हो पातीं।
Deerghakaalik ↔ अल्पकालिक
शिक्षा और स्वास्थ्य में दीर्घकालिक निवेश राष्ट्र की नींव को सुदृढ़ करता है।
संकट से तुरंत निपटने के लिए अल्पकालिक वित्तीय उपाय किए गए।
Deerghakaaleen ↔ अल्पकालीन
पर्यावरण संकट से निपटने के लिए दीर्घकालीन नीति की तत्काल आवश्यकता है।
मौसम की मार से निपटने हेतु किसानों को अल्पकालीन ऋण दिया गया।
Vaarshik ↔ दैनिक
कंपनी अपनी वार्षिक वित्तीय रिपोर्ट प्रतिवर्ष मार्च के महीने में जारी करती है।
दैनिक समाचार पत्र सुबह-सुबह पाठकों के घर पहुंच जाता है।
Aashu ↔ दीर्घ
आशु कवि ने दिए गए विषय पर तुरंत ही सुंदर पंक्तियों की रचना कर दी।
दीर्घ कानूनी प्रक्रिया के कारण मुकदमे का फैसला आने में वर्षों लग गए।
Nisha ↔ दिवा
घनी निशा के अंधकार में जुगनू चमकते हुए सुंदर दिखाई दे रहे थे।
दिवा के समय किसान अपने खेतों में मेहनत करते हैं।
Deerghasootree ↔ क्षिप्रकारी
दीर्घसूत्री व्यक्ति साधारण से कार्य को भी महीनों तक लटकाए रखता है।
क्षिप्रकारी सेनापति ने संकट की सूचना पाते ही तुरंत पलटवार कर दिया।
Deerghasootrata ↔ त्वरा
प्रशासनिक दीर्घसूत्रता के कारण अनेक जनहितकारी फाइलें वर्षों तक दबी रहती हैं।
आपदा राहत में दिखाई गई त्वरा से सैकड़ों जानें बचाई जा सकीं।
Drutagati ↔ मंदगति
द्रुतगति से चलने वाले वाहनों के लिए नए एक्सप्रेसवे का निर्माण किया गया।
कोहरे के कारण रेलगाड़ियां मंदगति से आगे बढ़ रही थीं।
Dinamaan ↔ रात्रिमान
ग्रीष्म ऋतु में दिनमान बड़ा और रात्रिमान छोटा हो जाता है।
शीत ऋतु में रात्रिमान लंबा होने के कारण रातें ठंडी और लंबी प्रतीत होती हैं।
Deerghakaaleen-yojana ↔ तात्कालिक-उपाय
नदी जल विवाद के स्थायी हल के लिए एक दीर्घकालीन-योजना तैयार की गई।
बाढ़ के पानी को रोकने के लिए रेत की बोरियां रखना केवल एक तात्कालिक-उपाय था।
Dabnga ↔ दब्बू
संकट और विपत्ति के समय दबंग का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने दब्बू का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dabngaee ↔ दब्बू्पन
संकट और विपत्ति के समय दबंगई का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने दब्बू्पन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dilera ↔ बुजदिल
संकट और विपत्ति के समय दिलेर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने बुजदिल का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dileree ↔ बुजदिली
संकट और विपत्ति के समय दिलेरी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने बुजदिली का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dahashata ↔ अमन
संकट और विपत्ति के समय दहशत का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अमन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dahashatagarda ↔ रक्षक
संकट और विपत्ति के समय दहशतगर्द का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रक्षक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Adamya ↔ दब्बू
संकट और विपत्ति के समय अदम्य का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने दब्बू का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dridhchetaa ↔ भयभीत
संकट और विपत्ति के समय दृढ़चेता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयभीत का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Vidroha ↔ दमन
संकट और विपत्ति के समय विद्रोह का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने दमन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Kraantikaaree ↔ दब्बू
संकट और विपत्ति के समय क्रांतिकारी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने दब्बू का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirdvndva ↔ द्वंद्वग्रस्त
संकट और विपत्ति के समय निर्द्वंद्व का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने द्वंद्वग्रस्त का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bebaaka ↔ दब्बू
संकट और विपत्ति के समय बेबाक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने दब्बू का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dilera-javaana ↔ बुजदिल-भगोड़ा
संकट और विपत्ति के समय दिलेर-जवान का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने बुजदिल-भगोड़ा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Supaathya ↔ दुर्पाठ्य
विद्या और बौद्धिक विकास में सुपाठ्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में दुर्पाठ्य की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Gunagraahee ↔ दोषदर्शी
विद्या और बौद्धिक विकास में गुणग्राही का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में दोषदर्शी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Deekshaa ↔ परित्याग
विद्या और बौद्धिक विकास में दीक्षा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में परित्याग की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Deekshaanta-samaaroha ↔ प्रवेश-उत्सव
विद्या और बौद्धिक विकास में दीक्षांत-समारोह का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में प्रवेश-उत्सव की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Daarshanika ↔ अदार्शनिक
विद्या और बौद्धिक विकास में दार्शनिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अदार्शनिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Subodhataa ↔ दुर्बोधता
विद्या और बौद्धिक विकास में सुबोधता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में दुर्बोधता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Lena ↔ देना
बुजुर्गों से आशीर्वाद और मार्गदर्शन लेना हर युवा के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।
जरूरतमंदों को निःस्वार्थ भाव से सहायता देना समाज सेवा का सबसे उत्तम उदाहरण है।
Paas ↔ दूर
विद्यालय हमारे घर के बिलकुल पास होने के कारण बच्चों को आने-जाने में कोई असुविधा नहीं होती।
रोजगार की तलाश में युवाओं को अपने परिवार से बहुत दूर महानगरों में रहना पड़ता है।
Dikhaana ↔ छिपाना
चित्रकार ने अपनी कला प्रदर्शनी में अपनी सर्वश्रेष्ठ कृतियां दिखाना पसंद किया।
अपराध करने के बाद कोई भी अपराधी सच्चाई को लंबे समय तक छिपाना नहीं सकता।