Chauda ↔ संकरा
राजमार्ग बहुत चौड़ा था, किंतु गाँव में प्रवेश करते ही रास्ता संकरा हो गया।
पहाड़ी रास्तों का संकरा मार्ग चालकों के संयम की परीक्षा लेता है जहां चौड़ी सड़कें दुर्लभ हैं।
अक्षर 'च' से प्रारंभ होने वाले कुल 50 विपरीतार्थक शब्द युग्म नीचे दिए गए हैं:
Chauda ↔ संकरा
राजमार्ग बहुत चौड़ा था, किंतु गाँव में प्रवेश करते ही रास्ता संकरा हो गया।
पहाड़ी रास्तों का संकरा मार्ग चालकों के संयम की परीक्षा लेता है जहां चौड़ी सड़कें दुर्लभ हैं।
Chetan ↔ जड़
यह संपूर्ण ब्रह्मांड जड़ प्रकृति और चेतन आत्मा के परस्पर संयोग से संचालित होता है।
सृष्टि में जड़ प्रकृति और चेतन आत्मा के अनवरत संयोग से जीवन का चक्र चलता है।
Chanchal ↔ स्थिर
ध्यान लगाने से चंचल मन भी धीरे-धीरे स्थिर और एकाग्र हो जाता है।
स्थिर जल में ही सूर्य का निर्मल प्रतिबिंब स्पष्ट दिखाई देता है, चंचल लहरों में नहीं।
Khurdura ↔ चिकना
रेगमाल से रगड़ने पर खुरदुरी लकड़ी की सतह बिल्कुल चिकनी हो जाती है।
चिकने पत्थर पर पानी टिक नहीं पाता, जबकि खुरदुरी मिट्टी वर्षा की नमी को सोख लेती है।
Chamkila ↔ धुंधला
धूल जम जाने से चमकीला कांच भी धुंधला और मैला दिखाई देने लगता है।
कुहासे में धुंधला दिखने वाला मार्ग सूर्योदय के साथ स्पष्ट और आलोकित हो उठा।
Chatur ↔ मूढ़
चतुर व्यापारी लाभ कमा लेता है, जबकि सीधा और मूढ़ ग्राहक अक्सर ठगा जाता है।
मूढ़ स्वभाव का व्यक्ति अपने ही हठ के कारण बार-बार संकट में फंसता है।
Chokha ↔ खोटा
चोखा माल हर कोई खरीदता है, खोटा सिक्का कोई स्वीकार नहीं करता।
खोटा सिक्का बाज़ार में नहीं चलता, उसी प्रकार कपटी व्यक्ति का समाज में आदर नहीं होता।
Sheelvaan ↔ चरित्रहीन
शीलवान व्यक्ति विपत्ति में भी मर्यादा नहीं छोड़ता।
चरित्रहीन व्यक्ति धन और सत्ता पाकर भी कभी आत्मिक शांति प्राप्त नहीं कर पाता।
Chiraayu ↔ अल्पायु
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का संदेश चिरायु है, उसका कभी अंत नहीं होगा।
अल्पायु में ही स्वामी विवेकानंद ने अपने विचारों से संपूर्ण विश्व को आलोकित कर दिया।
Chadhaav ↔ उतार
जीवन में उतार और चढ़ाव स्वाभाविक हैं, दोनों में समभाव रखना ही योग है।
कठिन पहाड़ी रास्ते पर तीव्र उतार के समय वाहन की गति नियंत्रित रखनी चाहिए।
Surya ↔ चंद्र
सूर्य के तेज के समक्ष तारे छिप जाते हैं और चंद्र की शीतल आभा में नभ दमक उठता है।
सूर्य दिन में समस्त जगत को ऊर्जा प्रदान करता है और चंद्र रात्रि में शीतलता बिखरता है।
Saur ↔ चांद्र
खगोलशास्त्र में सौर वर्ष की गणना सूर्य की गति से और चांद्र मास की गणना चंद्रमा से होती है।
चांद्र कैलेंडर और सौर कैलेंडर के दिनों के अंतर को समायोजित करने के लिए अधिक मास आता है।
Chattan ↔ रेत
समुद्र की लहरें विशाल चट्टान से टकराकर लौट जाती हैं, किंतु रेत के टीलों को बहा ले जाती हैं।
रेत पर महल बनाने के बजाय चट्टान जैसी मजबूत नींव पर मकान बनाना बुद्धिमानी है।
Mitti ↔ चट्टान
नरम मिट्टी में बीज अंकुरित होकर पेड़ बन जाते हैं, जबकि नंगी चट्टान पर हरियाली नहीं उगती।
समुद्र की लहरें विशाल चट्टान से टकराकर लौट जाती हैं, किंतु रेत के टीलों को बहा ले जाती हैं।
Chakravaat ↔ प्रतिचक्रवात
चक्रवात आने पर भारी बारिश और तबाही होती है, जबकि प्रतिचक्रवात में मौसम साफ और शांत रहता है।
प्रतिचक्रवात वायुमंडलीय उच्च दबाव का क्षेत्र होता है जिसमें हवाएं बाहर की ओर प्रवाहित होती हैं।
Chanchalta ↔ गंभीरता
बालकों की चंचलता स्वाभाविक और मन को मोहने वाली होती है।
महत्वपूर्ण विषयों पर विचार करते समय चेहरे पर गंभीरता आवश्यक है।
Nishchint ↔ चिंतित
पुत्री का विवाह संपन्न होने के बाद पिता निश्चिंत महसूस करने लगे।
परीक्षा की तिथि निकट आते ही छात्र चिंतित होने लगे।
Chaitanya ↔ जड़
मानव शरीर में वास करने वाली चैतन्य आत्मा ही समस्त कर्मों की साक्षी है।
पत्थर और मिट्टी जड़ पदार्थ हैं जिनमें चेतना का अभाव होता है।
Nishchal ↔ चंचल
उसका निश्चल प्रेम सभी औपचारिकताओं से परे और पवित्र है।
हवा के झोंके की तरह चंचल मन को वश में करना कठिन अभ्यास मांगता है।
Chaakshusha ↔ अचाक्षुष
इंद्रधनुष के सतरंगी दृश्य का अनुभव पूर्णतः चाक्षुष अर्थात आंखों से देखने योग्य होता है।
हवा की गति और गंध का प्रत्यक्ष बोध अचाक्षुष होता है, जिसे त्वचा और नासिका से महसूस किया जाता है।
Charitravaan ↔ चरित्रहीन
चरित्रवान युवा ही किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति और आधारशिला होते हैं।
चरित्रहीन व्यक्ति अपनी वासनाओं के वशीभूत होकर समाज के लिए कलंक बन जाता है।
Dvipada ↔ चतुष्पद
पक्षी द्विपद प्राणी होते हैं जो दो पैरों पर चलते हैं और पंखों से उड़ते हैं।
घोड़ा और हाथी चतुष्पद जीव हैं जो चार मजबूत पैरों के सहारे भारी बोझ उठाते हैं।
Cheel ↔ कबूतर
आकाश में मंडराती चील किसी भी छोटे जीव पर झपट सकती है।
कबूतर शांति का प्रतीक बनकर छतों पर दाना चुगता है।
Charpara ↔ मधुर
चाट में डाली गई सोंठ और हरी मिर्च से स्वाद चरपरा बन गया था।
खीर में घुली हुई मिश्री का स्वाद मधुर और शीतल अनुभव कराता है।
Ghol ↔ चूर्ण
बेसन का घोल तैयार करके पकौड़े तले जाते हैं।
धनिया और जीरे का चूर्ण मसालों के डिब्बे में सूखा रखा जाता है।
Daanedaar ↔ चिकना
शुद्ध खोए से बना दानेदार कलाकंद मुंह में घुल जाता है।
मिक्सी में पिसी हुई चिकनी चटनी समोसे के साथ बहुत अच्छी लगती है।
Chokaryukt ↔ मैदा
चोकरयुक्त आटा खाने से पाचन सुगम रहता है और कब्ज नहीं होती।
बारीक छना मैदा आंतों में चिपकता है और स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।
Chaashni ↔ पानी
रसगुल्लों को मीठी चाशनी में डुबोकर रखा जाता है।
प्यास बुझाने के लिए सादा पानी ही सबसे उत्तम पेय है।
Chaacha ↔ चाची
चाचा जी ने अपने भतीजे को फुटबॉल खेलने का सही तरीका सिखाया।
चाची जी ने पूरे परिवार के लिए गरमागरम नाश्ता तैयार किया।
Peshgee ↔ चुकता
मकान की बुकिंग के लिए क्रेता ने दस प्रतिशत पेशगी राशि जमा की।
अंतिम किस्त मिलते ही विक्रेता ने संपत्ति का हिसाब पूरी तरह चुकता कर दिया।
Achal-sampatti ↔ चल-संपत्ति
मकान, जमीन और फ्लैट अचल-संपत्ति की श्रेणी में आते हैं जिन्हें स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।
सोना, नकदी और वाहन चल-संपत्ति माने जाते हैं जिन्हें आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है।
Cheshta ↔ निश्चेष्टता
गिरने के बाद फिर से उठने की सच्ची चेष्टा ही मनुष्य की पहचान है।
रोग के कारण रोगी पूर्ण निश्चेष्टता की स्थिति में बिस्तर पर पड़ा रहा।
Chirantan ↔ नश्वर
प्रेम और करुणा की चिरंतन भावनाएं मानव हृदय को जोड़कर रखती हैं।
मानव देह नश्वर है, इसलिए अहंकार का त्याग करके सत्कर्म करने चाहिए।
Chirasthaayee ↔ अल्पकालिक
सत्य और धर्म के आधार पर स्थापित संबंध चिरस्थायी होते हैं।
क्रोध का आवेश अल्पकालिक होता है, किंतु उसका दुष्परिणाम लंबा खिंच सकता है।
Chiranjeevee ↔ अल्पायु
पौराणिक कथाओं में अश्वत्थामा और हनुमान को चिरंजीवी माना गया है।
रोग के कारण प्रतिभाशाली संगीतकार अल्पायु में ही संसार छोड़ गया।
Chirkaal ↔ अल्पकाल
तपस्वियों ने चिरकाल तक वनों में तपस्या करके ज्ञान प्राप्त किया।
अल्पकाल में ही नए व्यापार ने बाजार में अपनी मजबूत धाक जमा ली।
Chirasthaayitva ↔ नश्वरता
कालिदास के नाटकों का चिरस्थायित्व उनकी अनूठी भाषा और भाव में निहित है।
मानव जीवन की नश्वरता को समझकर व्यक्ति को विनम्र रहना चाहिए।
Sadyah ↔ चिर
सद्यः घटित घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत रवाना हुई।
चिर संचित ज्ञान ही वृद्धावस्था में मनुष्य का सच्चा मार्गदर्शक बनता है।
Chiranaveen ↔ जीर्णशीर्ण
प्रकृति का सौंदर्य चिरनवीन है जो हर ऋतु में नए रूप में प्रकट होता है।
सड़क किनारे जीर्णशीर्ण मकान कभी भी गिर सकता है, अतः सतर्कता आवश्यक है।
Chirprateekshit ↔ अकस्मात
वैज्ञानिकों की वर्षों की मेहनत के बाद चिरप्रतीक्षित सफलता आखिरकार मिल ही गई।
अकस्मात आई आंधी ने कई कच्चे मकानों की छतें उड़ा दीं।
Chirasthaayita ↔ क्षणिकता
संगमरमर के भव्य मंदिरों की चिरस्थायिता सदियों तक बनी रहती है।
पानी के बुलबुलों की क्षणिकता हमें जीवन की नश्वरता याद दिलाती है।
Chiranjeevita ↔ अल्पायुष्य
पौराणिक पात्र मार्कंडेय को भगवान शिव से चिरंजीविता का वरदान प्राप्त था।
अस्वस्थ खान-पान और प्रदूषण के कारण आधुनिक युग में अल्पायुष्य का खतरा बढ़ गया है।
Chintanasheela ↔ अविवेकशील
विद्या और बौद्धिक विकास में चिंतनशील का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अविवेकशील की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Samasheetoshna ↔ चरम-जलवायु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में समशीतोष्ण की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में चरम-जलवायु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Taapamaana-sntulana ↔ चरम-तापमान
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तापमान-संतुलन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में चरम-तापमान का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Chilachilaatee-dhoopa ↔ शीतल-छाया
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में चिलचिलाती-धूप की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शीतल-छाया का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Chadhna ↔ उतरना
पर्वतारोही कठिन बर्फीली चट्टानों पर चढ़ना अपनी साधना और लक्ष्य मानते हैं।
ढलान से नीचे उतरना कभी-कभी चढ़ाई करने से भी अधिक सावधानी की मांग करता है।
Bolna ↔ चुप रहना
सभा में सत्य और न्याय के पक्ष में निडर होकर बोलना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
मूर्खों के निरर्थक विवाद में उलझने से कहीं बेहतर है चुप रहना और शांति बनाए रखना।
Chamakna ↔ धुंधलाना
रात के शांत आकाश में ध्रुव तारे का चमकना नाविकों को सही दिशा दिखाता है।
धूल और नमी की परत जम जाने से दर्पण का धुंधलाना स्वाभाविक है।
Chalna ↔ रुकना
जीवन निरंतर आगे चलने का नाम है, इसलिए मुश्किलों में भी कदम आगे बढ़ाते रहना चाहिए।
थक जाने पर थोड़ी देर रुकना उचित है, किंतु हिम्मत हारकर बैठ जाना अनुचित है।