Mota ↔ पतला
नियमित व्यायाम करने से मोटा व्यक्ति भी पतला और स्वस्थ हो सकता है।
पतला धागा भी जब मिलकर रस्सी का रूप लेता है तो भारी बोझ उठाने में सक्षम होता है।
अक्षर 'म' से प्रारंभ होने वाले कुल 208 विपरीतार्थक शब्द युग्म नीचे दिए गए हैं:
Mota ↔ पतला
नियमित व्यायाम करने से मोटा व्यक्ति भी पतला और स्वस्थ हो सकता है।
पतला धागा भी जब मिलकर रस्सी का रूप लेता है तो भारी बोझ उठाने में सक्षम होता है।
Meetha ↔ कड़वा
मीठे बोल सभी का मन मोह लेते हैं जबकि कड़वे वचन दूसरों को चोट पहुँचाते हैं।
सच्चाई कड़वी औषधि के समान होती है, किंतु अंत में उसका फल मीठा ही निकलता है।
Mahatvapurna ↔ महत्वहीन
बैठक में महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई और महत्वहीन मुद्दों को छोड़ दिया गया।
महत्वहीन बातों पर व्यर्थ विवाद करने से बहुमूल्य समय और ऊर्जा नष्ट होती है।
Madhur ↔ कटु
कोयल की मधुर वाणी सबको भाती है जबकि कौवे का कटु स्वर किसी को पसंद नहीं।
कटु वचन तीखे तीर की भांति हृदय को भेद देते हैं, जबकि मधुर वाणी घाव भर देती है।
Teevra ↔ मंद
तीव्र आंधी में विशाल वृक्ष उखड़ गए जबकि मंद समीर में तृण मुस्कुराते रहे।
मंद पवन की शीतल थपकी थके हुए पथिक को शांत विश्राम देती है।
Vidvaan ↔ मूर्ख
विद्वान की संगति विवेक जगाती है जबकि मूर्ख की संगति संकट पैदा करती है।
मूर्ख व्यक्ति को हितकारी उपदेश देना भी व्यर्थ जाता है, जैसे बंजर भूमि में बीज बोना।
Chatur ↔ मूढ़
चतुर व्यापारी लाभ कमा लेता है, जबकि सीधा और मूढ़ ग्राहक अक्सर ठगा जाता है।
मूढ़ स्वभाव का व्यक्ति अपने ही हठ के कारण बार-बार संकट में फंसता है।
Mithya ↔ सत्य
मिथ्या प्रपंच में उलझने के बजाय यथार्थ सत्य को समझना ही बुद्धिमानी है।
सत्य की राह कठिन अवश्य होती है, किंतु अंततः विजय सत्य की ही होती है।
Moodh ↔ ज्ञानी
मूढ़ व्यक्ति क्रोध में अपना ही अहित कर बैठता है, ज्ञानी सदा शांत रहता है।
सच्चा ज्ञानी विनम्रता धारण करता है, क्योंकि ज्ञान अहंकार को विनष्ट कर देता है।
Mukhar ↔ मूक
अन्याय के विरुद्ध मुखर आवाज उठाना जरूरी है, मूक दर्शक बने रहना कायरता है।
अन्याय के समक्ष मूक दर्शक बनकर रहना भी अपराध के भागीदार होने जैसा है।
Mook ↔ वाचाल
मूक होई वाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर गहन — ईश्वर कृपा से गूंगा भी वाचाल हो जाता है।
वाचाल व्यक्ति बिना विचारे बोलकर अक्सर अपनी ही गरिमा घटा लेता है।
Mitbhaashi ↔ वाचाल
मितभाषी नेता के हर शब्द का वजन होता है, वाचाल व्यक्ति की बात कोई गंभीरता से नहीं लेता।
वाचाल व्यक्ति बिना विचारे बोलकर अक्सर अपनी ही गरिमा घटा लेता है।
Mridu ↔ कठोर
मृदु वाणी शत्रु को भी मित्र बना लेती है, जबकि कठोर व्यवहार अपनों को भी दूर कर देता है।
राजा का कठोर दंड देखकर सभासद विस्मित रह गए, किंतु रानी का हृदय अत्यंत कोमल था।
Mukhya ↔ गौण
शिक्षा का मुख्य उद्देश्य चरित्र निर्माण है, केवल उपाधि प्राप्त करना गौण है।
मुख्य उद्देश्य की सिद्धि के लिए गौण बातों पर अधिक समय व्यर्थ नहीं करना चाहिए।
Karkash ↔ मधुर
कर्कश ध्वनि कानों को चुभती है जबकि मधुर संगीत मन को शांत करता है।
कोयल की मधुर वाणी सबको भाती है जबकि कौवे का कटु स्वर किसी को पसंद नहीं।
Praphulla ↔ म्लान
प्रातःकाल खिलता हुआ प्रफुल्ल कमल मन को भाता है जबकि धूप में वह म्लान हो जाता है।
ग्रीष्म की तीखी धूप में फूलों की कांति म्लान हो जाती है जिसे शाम की ओस संवारती है।
Jeevan ↔ मृत्यु
जीवन और मृत्यु ईश्वर के हाथ में है, मनुष्य का कर्तव्य केवल सत्कर्म करना है।
मृत्यु शाश्वत सत्य है, जो जन्म लेता है उसका अंत निश्चित है।
Janma ↔ मृत्यु
जन्म से कोई महान नहीं होता, व्यक्ति अपने कर्मों से महान बनता है।
मृत्यु शाश्वत सत्य है, जो जन्म लेता है उसका अंत निश्चित है।
Maran ↔ जीवन
जन्म और मरण का चक्र संसार का सनातन नियम है।
जीवन और मृत्यु ईश्वर के हाथ में है, मनुष्य का कर्तव्य केवल सत्कर्म करना है।
Milan ↔ विरह
दीर्घ विरह के पश्चात पुराने मित्रों का मिलन अत्यंत भावुक कर देने वाला था।
काव्य में विरह की वेदना मिलन के सुख को और अधिक गहरा बना देती है।
Maan ↔ अपमान
सज्जन व्यक्ति मान मिलने पर अभिमानी नहीं होते और अपमान होने पर संयम नहीं खोते।
किसी निर्धन का अपमान करना मानवता के विरुद्ध घोर पाप है।
Maalik ↔ नौकर
सच्चा मालिक वही है जो नौकर के श्रम का यथोचित पारिश्रमिक समय पर दे।
नौकर की ईमानदारी देखकर मालिक ने उसे अपने व्यापार का प्रबंधक बना दिया।
Bandhan ↔ मुक्ति
अज्ञानता मनुष्य को बंधनों में जकड़ती है, ज्ञान उसे मुक्ति का मार्ग दिखाता है।
कुरीतियों और अंधविश्वासों से मुक्ति पाकर ही समाज प्रगति कर सकता है।
Maata ↔ पिता
माता का प्रेम संसार में सबसे निस्वार्थ और अनमोल माना गया है।
पिता परिवार का संबल और बालकों के भविष्य के कुशल मार्गदर्शक होते हैं।
Daasata ↔ मुक्ति
दासता से मुक्ति पाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग ने संघर्ष किया।
कुरीतियों और अंधविश्वासों से मुक्ति पाकर ही समाज प्रगति कर सकता है।
Sarvasammati ↔ मतभेद
ग्राम सुधार योजना का प्रस्ताव पंचायत में सभी सदस्यों की सर्वसम्मति से पारित हो गया।
बजट के आवंटन को लेकर समिति के सदस्यों के बीच गहरा मतभेद उभर कर सामने आया।
Mahala ↔ झोपड़ी
राजधानी के भव्य महल में संगमरमर के खंभे और विशाल उद्यान बने हुए थे।
नदी किनारे अपनी छोटी सी झोपड़ी में गरीब मछुआरा सादगी और संतोष से जीवन बिता रहा था।
Pravaasee ↔ मूलनिवासी
उद्योगों में काम करने वाले कई प्रवासी श्रमिक त्योहारों पर अपने पैतृक गांव लौट आते हैं।
अंडमान के द्वीपों पर रहने वाले मूलनिवासी जनजातियों की अपनी विशिष्ट संस्कृति और परंपरा है।
Kasbaa ↔ महानगर
हमारा छोटा सा कस्बा चारों ओर खेतों से घिरा हुआ शांत और सुरक्षित इलाका है।
मुंबई और दिल्ली जैसे विशाल महानगर चौबीसों घंटे दौड़ते रहने वाले आर्थिक केंद्र हैं।
Kaaraavaasa ↔ मुक्ति
गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में दोषी पाए जाने पर उसे पांच वर्ष का कठोर कारावास हुआ।
सजा की अवधि पूरी होने के उपरांत बंदी को जेल से सम्मानपूर्वक मुक्ति मिल गई।
Samudra ↔ मरुस्थल
पृथ्वी का एक छोर अपार जलराशि वाले समुद्र से भरा है तो दूसरा शुष्क मरुस्थल से आच्छादित है।
मरुस्थल में पानी की एक-एक बूंद बहुमूल्य मानी जाती है, जहां दूर-दूर तक केवल रेत ही रेत होती है।
Muhaana ↔ उद्गम
पर्वतों से निकलने वाला नदी का उद्गम संकरा होता है, किंतु समुद्र के निकट उसका मुहाना अत्यंत चौड़ा होता है।
गंगा का उद्गम गंगोत्री हिमनद से होता है और प्रयागराज में उसका त्रिवेणी संगम दर्शनीय है।
Aandhi ↔ मंद समीर
रेत की भयानक आंधी थम जाने के बाद बहने वाला मंद समीर अत्यंत राहतकारी लगा।
आंधी की धूल भरी गर्जना के बाद बहने वाला मंद समीर हर पथिक को असीम राहत देता है।
Megh ↔ धूप
आसमान में काले मेघ छाते ही तेज धूप छिप गई और मौसम सुहाना हो गया।
कड़कड़ाती धूप के बाद घने वृक्ष की शीतल छांव पथिक को नवजीवन प्रदान करती है।
Van ↔ मरु
हरे-भरे सघन वन वर्षा को आकर्षित करते हैं, जबकि शुष्क मरु में जल की बूंदें तरसती हैं।
वृक्षारोपण अभियान के माध्यम से मरु को भी हरे-भरे वन में बदला जा सकता है।
Parvat ↔ मैदान
पर्वत पर चढ़ाई जितनी दुष्कर होती है, समतल मैदान में चलना उतना ही सुगम होता है।
विशाल मैदान कृषि और बस्तियों के लिए आदर्श होते हैं, जबकि पर्वत वनों और खनिजों से संपन्न हैं।
Tat ↔ मझधार
नाविक ने यात्रियों को सुरक्षित तट पर उतार दिया और पुनः उफनती मझधार में उतर गया।
सच्चा मित्र वह है जो मझधार में नाव फंसने पर भी साथ न छोड़े और किनारे तक पहुंचाए।
Mareechika ↔ यथार्थ
रेगिस्तान में जल का भ्रम मरीचिका कहलाता है, जिसके पीछे भागने के बजाय यथार्थ को स्वीकारना चाहिए।
रेगिस्तान की छलती मरीचिका के भ्रम से निकलकर यथार्थ को स्वीकारना ही विवेक है।
Prasphutan ↔ मुरझाहट
वसंत में कलियों का प्रस्फुटन होता है और ज्येष्ठ की दोपहरी में फूलों की मुरझाहट देखी जाती है।
पानी मिलते ही मुरझाहट त्यागकर मुरझाए पौधे पुनः लहलहा उठे।
Parvatiya ↔ मैदानी
पर्वतीय क्षेत्रों की जीवनशैली कठोर होती है, जबकि मैदानी इलाकों में सुविधाएं अधिक सुलभ हैं।
मैदानी भाग में नदियों का बहाव धीमा और चौड़ा होता है, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में वह तीव्र होता है।
Nirmalta ↔ मलिनता
पर्वतीय झरनों के जल की निर्मलता मन मोह लेती है, जिसे औद्योगिक कचरे की मलिनता से बचाना आवश्यक है।
नदियों में अपशिष्ट बहाने से जल में मलिनता बढ़ जाती है और जलीय जीवन संकट में पड़ जाता है।
Mrit Jwalamukhi ↔ जीवंत ज्वालामुखी
मृत ज्वालामुखी के क्रेटर में समय के साथ वर्षा का जल भरकर सुंदर झील का रूप ले लेता है।
मृत ज्वालामुखी सदियों तक शांत रहता है, जबकि जीवंत ज्वालामुखी से निरंतर लावा निकलता है।
Mitti ↔ चट्टान
नरम मिट्टी में बीज अंकुरित होकर पेड़ बन जाते हैं, जबकि नंगी चट्टान पर हरियाली नहीं उगती।
समुद्र की लहरें विशाल चट्टान से टकराकर लौट जाती हैं, किंतु रेत के टीलों को बहा ले जाती हैं।
Jal-Strot ↔ मरुभूमि
पहाड़ों के प्राकृतिक जलस्रोत घाटी के निवासियों की प्यास बुझाते हैं, जहां मरुभूमि का अभाव है।
मरुभूमि में मीलों तक हरियाली का नामोनिशान नहीं मिलता, जहां केवल कंटीले कैक्टस उगते हैं।
Shasya-Shyaamla ↔ मरुस्थली
नहरों के पानी से राजस्थान की बंजर धरती भी शस्य-श्यामला उपजाऊ भूमि में बदल गई।
मरुस्थली में केवल रेतीले टीले और कंटीली झाड़ियां दृष्टिगोचर होती हैं।
Mamta ↔ निष्ठुरता
माँ की निस्वार्थ ममता हर संतान के लिए संसार का सबसे बड़ा संबल है।
मासूम जीवों पर अत्याचार करना घोर निष्ठुरता का परिचायक है।
Moh ↔ विरक्ति
संतान के प्रति अंधा मोह कभी-कभी उचित और अनुचित का भेद भुला देता है।
संसार की नश्वरता को समझकर साधक के मन में विरक्ति उत्पन्न हो गई।
Matsarya ↔ सौहार्द
मन में मात्सर्य और डाह रखने से मनुष्य अपनी ही शांति खो बैठता है।
पड़ोसियों के बीच आपसी सौहार्द से ही सुखमय जीवन संभव होता है।
Mangal ↔ अमंगल
नववर्ष के अवसर पर सभी ने एक-दूसरे के मंगल की कामना की।
समारोह के बीच अशुभ समाचार सुनकर सबने अमंगल की आशंका जताई।
Mudit ↔ उदास
बच्चों की मीठी बातें सुनकर दादाजी का मन मुदित हो गया।
परीक्षा में मनचाहा फल न मिलने पर वह उदास बैठा रहा।
Utphull ↔ म्लान
सुखद वातावरण में बच्चों के चेहरे उत्फुल्ल कमल जैसे खिल उठे।
दुख की मार से पीड़ित व्यक्ति का मुखड़ा म्लान पड़ गया था।
Prafullata ↔ म्लानता
प्रातःकालीन सैर से चेहरे पर अनूठी प्रफुल्लता आ जाती है।
बीमारी और चिंता के कारण चेहरे की म्लानता स्पष्ट दिखाई दे रही थी।
Mamtamayi ↔ निष्ठुरा
माँ की ममतामयी गोद में बच्चा सारे दुख भूल जाता है।
निष्ठुरा विमाता ने बालक के अधिकारों का हनन किया।
Umangit ↔ मायूस
खेल के मैदान में खिलाड़ी उमंगित होकर भाग रहे थे।
मैच हारने के बाद टीम के सदस्य मायूस होकर बैठ गए।
Mridubhashi ↔ कटुभाषी
मृदुभाषी व्यक्ति अपने मधुर वचनों से पराए को भी अपना बना लेता है।
कटुभाषी व्यक्ति से लोग बातचीत करने से कतराते हैं।
Madhurbhashi ↔ कर्कशभाषी
मधुरभाषी वक्ता के भाषण को सभा के सभी लोग मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे।
कर्कशभाषी नेता के चिल्लाने से सभा में असहजता फैल गई।
Milansar ↔ एकांतप्रिय
उसका मिलनसार स्वभाव नए शहर में भी तुरंत दोस्त बना लेता है।
एकांतप्रिय लेखक भीड़-भाड़ से दूर एकांत में लिखना पसंद करता है।
Mukh ↔ पृष्ठ
मुख पर खिली सहज मुस्कान व्यक्ति के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को दर्शाती है।
पृष्ठ अर्थात पीठ के व्यायाम से रीढ़ की हड्डी लचीली और मजबूत बनी रहती है।
Shaaririk ↔ मानसिक
कठिन दौड़ और तैराकी से शारीरिक सहनशक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
ध्यान और स्वाध्याय से मानसिक एकाग्रता और आंतरिक स्थिरता प्राप्त होती है।
Murchhit ↔ सजग
धूप की तपन न सह पाने के कारण छात्रा मैदान में मूर्च्छित होकर गिर पड़ी।
सजग चिकित्सक ने तुरंत प्राथमिक उपचार देकर उसके शरीर में चेतना लौटाई।
Maansala ↔ अस्थिशेष
कठोर शारीरिक श्रम और नियमित कसरत से युवक की भुजाएं अत्यंत मांसल और मजबूत हो गईं।
अकाल और भुखमरी की विभीषिका में बच्चों के शरीर केवल अस्थिशेष अर्थात हड्डियों का ढांचा रह गए थे।
Satyavaadi ↔ मिथ्यावादी
राजा हरिश्चंद्र को भारतीय इतिहास में सबसे महान सत्यवादी के रूप में स्मरण किया जाता है।
मिथ्यावादी व्यक्ति की बातों पर कोई भी समझदार इंसान कभी भरोसा नहीं करता।
Maryaada ↔ अमर्यादा
भगवान राम ने जीवन के हर मोड़ पर मर्यादा और नैतिक मूल्यों की रक्षा की।
सभा में अमर्यादा पूर्ण आचरण करने वाले सदस्य को सदन से निष्कासित कर दिया गया।
Moksh ↔ बंधन
भारतीय दर्शन में जीवन का अंतिम परम पुरुषार्थ मोक्ष की प्राप्ति माना गया है।
माया और तृष्णा के बंधन में जकड़ा मनुष्य कभी आंतरिक शांति का अनुभव नहीं कर पाता।
Satyapriya ↔ मिथ्याप्रिय
सत्यप्रिय व्यक्ति कटु यथार्थ को भी धैर्य और साहस के साथ स्वीकार कर लेता है।
मिथ्याप्रिय चापलूस झूठी प्रशंसा करके अपने स्वामी को भ्रम में रखते हैं।
Nirmal ↔ मलिन
छोटे बच्चों का निर्मल हृदय छल-कपट और दुर्भावना से सर्वथा मुक्त होता है।
लोभ और वासनाओं से मलिन हुआ अंतःकरण सत्य को देखने की क्षमता खो देता है।
Mahaatma ↔ दुरात्मा
महात्मा बुद्ध ने दया और करुणा का उपदेश देकर मानवता का मार्गदर्शन किया।
दुरात्मा शासक ने अपने अहंकार की तुष्टि के लिए प्रजा पर भारी अत्याचार किए।
Maanya ↔ अमान्य
संविधान के अंतर्गत बनाए गए नियम सभी नागरिकों के लिए मान्य होते हैं।
गलत दस्तावेजों के आधार पर किया गया आवेदन चयन समिति द्वारा अमान्य कर दिया गया।
Maansahaari ↔ शाकाहारी
शेर और चीता विशुद्ध मांसाहारी जीव हैं जो शिकार पर निर्भर रहते हैं।
हाथी और हिरण जैसे शाकाहारी जीव घास और पत्तियों को खाकर जीवन यापन करते हैं।
Trinabhakshi ↔ मांसभक्षी
जंगल में तृणभक्षी हिरणों का बड़ा झुंड हरी घास चर रहा था।
मांसभक्षी बाघ अपनी भूख मिटाने के लिए शिकार की ताक में छिपा रहता है।
Mayoor ↔ मयूरी
वर्षा ऋतु में मयूर अपने सतरंगी पंख फैलाकर मनमोहक नृत्य करता है।
मयूरी बिना चमकीले पंखों के चुपचाप झाड़ियों में अंडे सेती है।
Mrig ↔ मृगी
सींगों वाला सुंदर मृग कुलांचें भरता हुआ वन में दौड़ रहा था।
मृगी अपने नन्हें छौने को स्तनपान कराती हुई चौकन्नी खड़ी थी।
Mendhak ↔ मेंढकी
बरसात में नर मेंढक जोर-जोर से टर्र-टर्र की आवाज निकालता है।
मेंढकी तालाब के किनारे पानी में तैरते हुए सैकड़ों अंडे देती है।
Murga ↔ मुर्गी
भोर होते ही मुर्गा बाँग देकर गाँव वालों को जगा देता है।
मुर्गी अपने अंडों को सेती है और नन्हें चूजों को दाना चुगना सिखाती है।
Narpashu ↔ मादापशु
जंगली झुंड में नरपशु अपने इलाके की सीमाओं की रक्षा करता है।
मादापशु नवजात शावकों को आहार और सुरक्षा प्रदान करती है।
Khatta ↔ मधुर
कच्चे आम का स्वाद खट्टा होता है जो चटनी बनाने के काम आता है।
पके हुए पपीते का स्वाद अत्यंत मधुर और रुचिकर होता है।
Masaaledaar ↔ सादा
ढाबे की मसालेदार पनीर की सब्जी तीखी होने पर भी बहुत लोकप्रिय थी।
वृद्धजनों के लिए बिना मिर्च-मसालों का सादा उबला खाना ही उत्तम रहता है।
Shaakaahaar ↔ मांसाहार
अनाज, दलहन और ताजी हरी सब्जियों से युक्त शाकाहार शरीर को निरोगी रखता है।
अत्यधिक मांसाहार करने से कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी विकार बढ़ सकते हैं।
Kadwa ↔ मधुर
नीम की पत्तियों और करेले का रस स्वाद में कड़वा किंतु रक्त-शोधक होता है।
गुलाब जामुन की चाशनी का स्वाद मधुर और मन को तृप्त करने वाला होता है।
Kasaila ↔ मधुर
कच्चे आंवले और हरड़ को चबाने पर पहला स्वाद कसैला महसूस होता है।
गन्ने के ताजे रस का स्वाद अत्यंत मधुर और शीतलता प्रदान करने वाला होता है।
Charpara ↔ मधुर
चाट में डाली गई सोंठ और हरी मिर्च से स्वाद चरपरा बन गया था।
खीर में घुली हुई मिश्री का स्वाद मधुर और शीतल अनुभव कराता है।
Khaara ↔ मधुर
समुद्र का पानी अत्यधिक खारा होने के कारण पीने योग्य नहीं होता।
पहाड़ी झरने का मधुर और शीतल जल थके यात्रियों की प्यास बुझाता है।
Malaidaar ↔ मलाईरहित
गाढ़े मलाईदार दूध से बनी कुल्फी का स्वाद बेमिसाल होता है।
हृदयरोगियों को मलाईरहित टोंड दूध पीने का परामर्श दिया जाता है।
Meethaapan ↔ तीखापन
गाजर के हलवे में मावे और चीनी का मीठापन बहुत संतुलित था।
हरी मिर्च के तीखापन से उसकी आँखों से पानी निकलने लगा।
Khataas ↔ मिठास
नींबू के रस की तीखी खटास ने शिकंजी को ताजगी भरा बना दिया।
पके हुए आम की स्वाभाविक मिठास सबको आकर्षित करती है।
Kadwaahat ↔ मिठास
काली कॉफी की कड़वाहट कम करने के लिए उसने उसमें थोड़ा दूध मिलाया।
शहद की प्राकृतिक मिठास गले की खराश को शांत कर देती है।
Mitaahaari ↔ पेटू
मिताहारी व्यक्ति सदा स्वस्थ रहता है और कभी अपच का शिकार नहीं होता।
पेटू मनुष्य स्वाद के चक्कर में आवश्यकता से अधिक ठूंस-ठूंस कर खा लेता है।
Maadhurya ↔ कटुता
दूध की रबड़ी में केसर का माधुर्य घुलमिल गया था।
सड़े हुए तेल के कारण पूरियों में अजीब कटुता आ गई थी।
Tikta ↔ मधुर
चिरायता और गिलोय का स्वाद तिक्त होता है जो बुखार उतारता है।
मुनक्का और अंजीर का स्वाद मधुर तथा बलवर्धक होता है।
Kashaaya ↔ मधुर
त्रिफला चूर्ण का स्वाद कषाय होता है जो आंतों को साफ करता है।
मिश्री का स्वाद मधुर होता है जो पित्त को शांत करता है।
Mattha ↔ मक्खन
भुने जीरे वाला मट्ठा दोपहर के भोजन के बाद पीने से भारीपन दूर होता है।
ताजा निकला सफेद मक्खन गरमागरम पराठों पर पिघलकर स्वाद बढ़ाता है।
Masaaladaar ↔ गंधरहित
गरम मसालों से युक्त मसालादार छोले भटूरों के साथ बहुत लोकप्रिय हैं।
बिना किसी तड़के का उबला पानी और सादा मांड गंधरहित होता है।
Mandaagni ↔ तीक्ष्णाग्नि
मंदाग्नि के रोगी को भारी गरिष्ठ भोजन से परहेज करना चाहिए।
तीक्ष्णाग्नि वाले युवा भारी भोजन को भी बहुत जल्दी पचा लेते हैं।
Madhurima ↔ तिक्तता
पके हुए गन्ने के रस की मधुरिमा मन को मोह लेती है।
अधिक उबल जाने से चाय में अप्रिय तिक्तता आ गई थी।
Kasailapan ↔ मिठास
कच्चे जामुन खाने पर मुंह में हल्का कसैलापन महसूस होता है।
पके हुए खरबूजे की मिठास गर्मी में सबको भाती है।
Chokaryukt ↔ मैदा
चोकरयुक्त आटा खाने से पाचन सुगम रहता है और कब्ज नहीं होती।
बारीक छना मैदा आंतों में चिपकता है और स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।
Madira ↔ दूध
मदिरा का सेवन बुद्धि और स्वास्थ्य दोनों का विनाश करता है।
गाय का ताजा दूध तन और मन को पवित्रता और बल प्रदान करता है।
Madya ↔ अमृत
मद्य पान करने वाले मनुष्य की समाज में प्रतिष्ठा समाप्त हो जाती है।
संतों की वाणी कानों के लिए अमृत तुल्य मधुर होती है।
Masaaleyukt ↔ मसालेहीन
उत्सव के अवसर पर मसालेयुक्त पुलाव ने सभी का मन मोह लिया।
पेट की खराबी में डॉक्टर ने केवल मसालेहीन दलिया खाने की अनुमति दी।
Madhur-ras ↔ कटुरस
आयुर्वेद के अनुसार मधुररस शरीर को पोषण और बल प्रदान करता है।
नीम और कुटकी में पाया जाने वाला कटुरस खून को साफ करता है।
Mishthaann ↔ नमकीन
दीपावली पर घर आए मेहमानों को काजू कतली और मिष्ठान्न भेंट किए गए।
चाय की चुस्की के साथ भुजिया और नमकीन परोसा गया।
Mitra ↔ शत्रु
सच्चा मित्र विपत्ति के समय ढाल बनकर साथ खड़ा रहता है।
कपटी शत्रु मीठी बातें बोलकर पीठ में छुरा घोंपने का अवसर खोजता है।
Mitrata ↔ शत्रुता
कृष्ण और सुदामा की निस्वार्थ मित्रता संसार में अमर उदाहरण है।
पुरानी शत्रुता को भुलाकर दोनों परिवारों ने आपस में सुलह कर ली।
Mel ↔ फूट
गाँव में सभी जातियों और वर्गों के बीच आपसी मेल और सद्भाव बना हुआ है।
स्वार्थी तत्वों ने अफवाहें फैलाकर समुदाय में फूट डालने की चेष्टा की।
Mitrabhaav ↔ वैरभाव
पड़ोसियों के साथ मित्रभाव रखने से रोजमर्रा की समस्याएं सरलता से सुलझ जाती हैं।
मन में अकारण वैरभाव पालने से व्यक्ति का अपना मानसिक स्वास्थ्य नष्ट होता है।
Maargdarshak ↔ पथिक
पहाड़ों के दुर्गम रास्तों पर अनुभवी मार्गदर्शक की सहायता अनिवार्य होती है।
थका हुआ पथिक विश्राम करने के लिए घने बरगद की छाया में बैठ गया।
Mousa ↔ मौसी
मौसा जी बच्चों के लिए शहर से नई-नई पुस्तकें और खिलौने लाए।
मौसी अपनी बहन के बच्चों को माँ जैसा ही निस्वार्थ दुलार देती है।
Maama ↔ मामी
मामा जी अपने भांजे के जन्मदिन पर सुंदर साइकिल उपहार में लाए।
मामी जी ने भांजी को अपनी गोद में लेकर खूब लाड़-प्यार किया।
Atithi ↔ मेजबान
भारतीय संस्कृति में अतिथि देवो भवः कहकर मेहमान का आदर किया जाता है।
मेजबान ने अतिथियों की सुविधा और खान-पान का अत्यंत उत्तम प्रबंध किया।
Maata-pita ↔ संतान
माता-पिता अपनी संतान के सुख और प्रगति के लिए सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं।
संतान का धर्म है कि वह बड़े होकर अपने वृद्ध अभिभावकों का आदर और संबल बने।
Mahaaraanee ↔ महाराज
महारानी ने प्रजा के संकट को देखकर अन्न के सरकारी भंडार खुलवा दिए।
महाराज ने राजदरबार में न्याय की घोषणा करते हुए अपराधियों को दंड दिया।
Mitrapaksh ↔ शत्रुपक्ष
विश्वयुद्ध में मित्रपक्ष की सेनाओं ने संयुक्त रणनीति बनाकर विजय प्राप्त की।
शत्रुपक्ष की हर चाल पर खुफिया एजेंसियों द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही थी।
Maayka ↔ ससुराल
त्योहार पर मायका आकर बेटी अपने बचपन की सहेलियों से मिलकर भावुक हो गई।
ससुराल में उसने अपने मधुर व्यवहार से सभी परिजनों को अपना बना लिया।
Maitree ↔ वैर
दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान से मैत्री के नए युग का सूत्रपात हुआ।
पुरानी बातों को लेकर मन में वैर पाले रखना केवल विनाश की ओर ले जाता है।
Mitrarashtra ↔ शत्रुराष्ट्र
आपदा के समय मित्रराष्ट्र ने तुरंत राहत सामग्री और दवाएं भेजीं।
शत्रुराष्ट्र की सीमा पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर सेना सतर्क रहती है।
Mitramandalee ↔ शत्रुदल
शाम को पार्क में मित्रमंडली बैठकर हँसी-मजाक और विचार साझा करती है।
शत्रुदल ने राजा के खिलाफ षड्यंत्र रचने के लिए गुप्त बैठक की।
Mahanga ↔ सस्ता
आजकल बाजार में सोने के आभूषण बहुत महंगे हो गए हैं।
थोक बाजार से सामान खरीदने पर वस्तुएं काफी सस्ती मिल जाती हैं।
Moolyavaan ↔ मूल्यहीन
यह ऐतिहासिक पांडुलिपि अत्यंत मूल्यवान राष्ट्रीय धरोहर है।
पुराने अनुपयोगी कागजात अब पूरी तरह मूल्यहीन हो चुके हैं।
Daulatmand ↔ मुफ़लिस
दौलतमंद लोग समाज के वंचित वर्गों की शिक्षा के लिए धन दान करते हैं।
अचानक आई मंदी ने कई संपन्न परिवारों को मुफ़लिस कर दिया।
Maalomaal ↔ तंगहाल
बंपर फसल की बिक्री के बाद मंडी के सभी आढ़ती मालोमाल हो गए।
कारोबार ठप हो जाने के कारण वह कई महीनों से तंगहाल चल रहा है।
Munaafa ↔ घाटा
व्यापार में सही समय पर माल बेचने से दूकानदार को भारी मुनाफा हुआ।
परिवहन की लागत बढ़ने के कारण कंपनी को इस तिमाही घाटा सहना पड़ा।
Mitavyayee ↔ अपव्ययी
मितव्ययी व्यक्ति सोच-समझकर ही आवश्यक वस्तुओं पर धन लगाता है।
अपव्ययी पुत्र ने अपने पूर्वजों की संचित पैतृक संपत्ति कुछ ही वर्षों में उड़ा दी।
Mitavyayita ↔ अपव्ययिता
गांधीजी ने जीवन में सादगी और मितव्ययिता के महत्व पर सदा बल दिया।
उत्सवों में अनावश्यक अपव्ययिता समाज में दिखावे की होड़ पैदा करती है।
Mahaajan ↔ कर्जदार
पुराने समय में महाजन ऊंचे ब्याज पर किसानों को धन उधार देते थे।
कर्जदार ने फसल बिकते ही अपना पुराना हिसाब चुकता कर दिया।
Sashulk ↔ मुफ्त
विशिष्ट परामर्श प्राप्त करने के लिए यह सेवा सशुल्क उपलब्ध कराई जाती है।
सार्वजनिक पुस्तकालय में वाचनालय की सुविधा सभी पाठकों के लिए मुफ्त है।
Savaitanik ↔ मानद
महाविद्यालय के प्राचार्य का पद एक स्थायी सवेतनिक पद है।
खेल संघ के अध्यक्ष का पद मानद है जिसके लिए कोई पारिश्रमिक नहीं मिलता।
Maalgujaari ↔ माफी
अकाल के बावजूद सामंत किसानों से मालगुजारी की पाई-पाई वसूलते थे।
फसल बर्बाद होने पर सरकार ने संपूर्ण जनपद की मालगुजारी की माफी घोषित कर दी।
Munaafaakhori ↔ सेवाभाव
आपदा के समय मुनाफाखोरी करना मानवता के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
सच्चे स्वयंसेवक सेवाभाव से प्रेरित होकर संकटग्रस्तों को निःशुल्क राहत बांटते हैं।
Tejee ↔ मंदी
अर्थव्यवस्था में सुधार होते ही शेयर बाजार में भारी तेजी देखने को मिली।
वैश्विक मंदी के कारण कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में छंटनी की नौबत आ गई।
Dalaali ↔ मजदूरी
जमीन के सौदे में बिचौलिए ने दोनों पक्षों से भारी दलाली वसूल की।
दिन भर धूप में ईंटें ढोने के बाद श्रमिक को उसकी पसीने की मजदूरी मिली।
Mudrasfeeti ↔ मुद्राअवस्फीति
मुद्रास्फीति बढ़ने से दैनिक उपभोग की आवश्यक वस्तुएं आम जनता की पहुंच से बाहर हो जाती हैं।
मुद्राअवस्फीति के दौर में मांग कम होने से उद्योगों में उत्पादन घटाना पड़ता है।
Moolyavriddhi ↔ मूल्यह्रास
शहरी क्षेत्र में जमीन की कीमतों में अप्रत्याशित मूल्यवृद्धि हुई है।
पुरानी मशीनों के निरंतर उपयोग से उनके मूल्यह्रास को बही-खाते में दर्ज किया गया।
Mukta ↔ घोंघा
गहरे समुद्र में गोता लगाकर तैराक ने बहुमूल्य मुक्ता खोज निकाला।
रेत के तट पर बच्चे खेलने के लिए घोंघा और सीपियां एकत्र कर रहे थे।
Aadhat ↔ मजदूरी
कृषि मंडी में आढ़त का कार्य करने वाले व्यापारी किसानों और मिलों को जोड़ते हैं।
कड़ी मेहनत के बाद शाम को पल्लेदार अपनी दैनिक मजदूरी लेकर घर लौटा।
Byaaj ↔ मूलधन
ऋण की अदायगी में पहले ब्याज कटता है और बाद में मूलधन घटता है।
बैंक की सावधि जमा योजना में उसका मूलधन पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
Aapoorti ↔ मांग
बाजार में प्याज की भरपूर आपूर्ति होने से कीमतों में गिरावट आई।
त्योहारों पर मिठाइयों और खोए की मांग कई गुना बढ़ जाती है।
Mehnat ↔ सुस्ती
किसान की कड़ी मेहनत का ही परिणाम है कि देश का अन्न भंडार भरा है।
सुबह की सुस्ती को त्यागकर व्यायाम करना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
Mehnatee ↔ काहिल
मेहनती मजदूर ने सूर्यास्त तक सारा भारी सामान सुरक्षित उतार दिया।
काहिल व्यक्ति काम से बचने के लिए सदैव झूठे बहाने बनाता रहता है।
Fuurtee ↔ मंदी
खिलाड़ी ने गजब की फुर्ती दिखाते हुए सीमा रेखा पर शानदार कैच लपका।
कारोबार में आई मंदी के कारण बाजार की हलचल शांत पड़ गई।
Jawaabdehee ↔ मनमानी
लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में जनता के प्रति सरकार की जवाबदेही तय होती है।
तानाशाह शासक की मनमानी से पूरे देश की व्यवस्था तहस-नहस हो गई।
Prabandhak ↔ मजदूर
कुशल प्रबंधक पूरी परियोजना की रूपरेखा बनाकर कार्यों का आवंटन करता है।
मजदूर अपनी शारीरिक शक्ति से जमीन पर योजना को साकार रूप देता है।
Shramamoolya ↔ मुफ्तखोरी
सभ्य समाज में हर मजदूर को उसके श्रममूल्य का उचित सम्मान मिलना चाहिए।
मुफ्तखोरी की आदत व्यक्ति को अकर्मण्य और समाज पर बोझ बना देती है।
Majdoori ↔ मुफ्तखोरी
ईमानदार मजदूर अपने पसीने की मजदूरी से परिवार का सम्मानपूर्वक पोषण करता है।
मुफ्तखोरी की आदत व्यक्ति की कार्यक्षमता और आत्मसम्मान को नष्ट कर देती है।
Madhyakaaleen ↔ आधुनिककालीन
मध्यकालीन भारत में भक्ति आंदोलन ने समाज में समरसता का संदेश दिया।
आधुनिककालीन समाज में वैज्ञानिक अनुसंधान और डिजिटल क्रांति का बोलबाला है।
Madhyaahn ↔ मध्यरात्रि
ग्रीष्म ऋतु में मध्याह्न के समय सूर्य की तपन असहनीय हो जाती है।
मध्यरात्रि के सन्नाटे में दूर से आती रेलगाड़ी की सीटी सुनाई दे रही थी।
Satvar ↔ मंथन
सेनापति ने परिस्थिति का आकलन करके सत्वर निर्णय लिया।
नीतियों पर गहरा विचार-मंथन करने में महीनों का समय लग गया।
Drut ↔ मंथर
संगीतकार ने तबले पर द्रुत लय में शानदार तान छेड़ी।
नदी की मंथर गति देखकर मन में शांति का संचार होता है।
Drutagaamee ↔ मंदगामी
बुलेट ट्रेन जैसी द्रुतगामी रेलगाड़ियां महानगरों की दूरी मिनटों में तय कर देती हैं।
भारी लोड से लदी बैलगाड़ी मंदगामी चाल से कच्ची सड़क पर आगे बढ़ रही थी।
Sadaabahaar ↔ मौसमी
उष्णकटिबंधीय वनों के सदाबहार वृक्ष वर्ष भर हरे-भरे रहते हैं।
मौसमी फल केवल वर्ष के विशेष महीनों में ही बाजार में उपलब्ध होते हैं।
Amar ↔ मर्त्य
देश पर मर मिटने वाले अमर शहीदों का नाम इतिहास के पन्नों में सदा जीवित रहेगा।
मर्त्य मनुष्य को इस नश्वर संसार की क्षणभंगुरता को स्वीकार करना ही पड़ता है।
Sanvatsar ↔ माह
भारतीय कालगणना में प्रत्येक संवत्सर का अपना विशिष्ट नाम और महत्व होता है।
कठोर मेहनत के बाद एक ही माह में उसने अपना काम पूरा कर दिखाया।
Madhyamkaal ↔ अंतकाल
परियोजना के मध्यमकाल में वित्तीय और तकनीकी संसाधनों की समीक्षा की गई।
अंतकाल निकट आने पर व्यक्ति समस्त सांसारिक मोह-माया से विरक्त हो जाता है।
Nisheeth ↔ मध्याह्न
निशीथ की नीरवता में घड़ी की टिक-टिक भी साफ सुनाई दे रही थी।
मध्याह्न की कड़ी धूप में पशु भी पेड़ों की छाया में शरण लेते हैं।
Kshiprata ↔ मंथरता
तीरंदाज ने अद्भुत क्षिप्रता से प्रत्यंचा खींचकर बाण छोड़ दिया।
कछुए की मंथरता के बावजूद उसकी निरंतरता ने उसे विजयी बनाया।
Drutagati ↔ मंदगति
द्रुतगति से चलने वाले वाहनों के लिए नए एक्सप्रेसवे का निर्माण किया गया।
कोहरे के कारण रेलगाड़ियां मंदगति से आगे बढ़ रही थीं।
Amaratva ↔ मर्त्यता
सत्य और परोपकार के मार्ग पर चलने वाले महापुरुष अमरत्व प्राप्त करते हैं।
मानव देह की मर्त्यता को पहचानकर व्यक्ति को अभिमान से दूर रहना चाहिए।
Sheeghragaamita ↔ मंदगामिता
एक्सप्रेस ट्रेनों की शीघ्रगामिता से यात्रियों के यात्रा समय में बड़ी बचत हुई।
जाम में फंसे वाहनों की मंदगामिता से शहर में वायु प्रदूषण बढ़ जाता है।
Himmata ↔ मायूसी
संकट और विपत्ति के समय हिम्मत का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने मायूसी का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Mahaaveera ↔ कातर
संकट और विपत्ति के समय महावीर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Mukaabalaa ↔ पलायन
संकट और विपत्ति के समय मुकाबला का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Muktidaataa ↔ बंधककर्ता
संकट और विपत्ति के समय मुक्तिदाता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने बंधककर्ता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bhayaanaka ↔ मनोहर
संकट और विपत्ति के समय भयानक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने मनोहर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Vidushee ↔ मूर्खा
विद्या और बौद्धिक विकास में विदुषी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Paanditya ↔ मूर्खता
विद्या और बौद्धिक विकास में पांडित्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Maneeshee ↔ मंदबुद्धि
विद्या और बौद्धिक विकास में मनीषी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मंदबुद्धि की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Prajnyaa ↔ मूढ़ता
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रज्ञा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूढ़ता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Prajnyaavaana ↔ मूढ़
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रज्ञावान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूढ़ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Medhaavee ↔ जड़बुद्धि
विद्या और बौद्धिक विकास में मेधावी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में जड़बुद्धि की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kushaagrabuddhi ↔ मंदबुद्धि
विद्या और बौद्धिक विकास में कुशाग्रबुद्धि का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मंदबुद्धि की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Medhaa ↔ मूढ़ता
विद्या और बौद्धिक विकास में मेधा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूढ़ता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tatvajnyaanee ↔ मूढ़मति
विद्या और बौद्धिक विकास में तत्वज्ञानी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूढ़मति की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Marmajnya ↔ अनभिज्ञ
विद्या और बौद्धिक विकास में मर्मज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनभिज्ञ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Teekaa ↔ मूलपाठ
विद्या और बौद्धिक विकास में टीका का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूलपाठ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Buddhimattaa ↔ मूर्खता
विद्या और बौद्धिक विकास में बुद्धिमत्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Prashnottaree ↔ मौन
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रश्नोत्तरी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मौन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Medhaavee-chhaatra ↔ पिछड़ा-छात्र
विद्या और बौद्धिक विकास में मेधावी-छात्र का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में पिछड़ा-छात्र की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastravettaa ↔ मूर्ख
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्रवेत्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्ख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidvata-sabhaa ↔ मूर्ख-मंडली
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्वत-सभा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्ख-मंडली की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaanachakshu ↔ मोहांध
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञानचक्षु का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मोहांध की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidyaavaana ↔ मूर्ख
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्यावान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्ख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidvatajana ↔ मूर्खजन
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्वतजन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खजन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidvattaapoorna ↔ मूर्खतापूर्ण
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्वत्तापूर्ण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खतापूर्ण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shodhaparaka ↔ मनगढ़ंत
विद्या और बौद्धिक विकास में शोधपरक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मनगढ़ंत की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Moolyaankana ↔ उपेक्षा
विद्या और बौद्धिक विकास में मूल्यांकन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में उपेक्षा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kushaagrataa ↔ मंदता
विद्या और बौद्धिक विकास में कुशाग्रता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मंदता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Maneeshaa ↔ मूढ़ता
विद्या और बौद्धिक विकास में मनीषा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूढ़ता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Manana ↔ विस्मरण
विद्या और बौद्धिक विकास में मनन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विस्मरण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Meghaachchhanna ↔ मेघरहित
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मेघाच्छन्न की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मेघरहित का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jhnjhaavaata ↔ मंद-समीर
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में झंझावात की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मंद-समीर का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Meghagarjana ↔ नीरवता
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मेघगर्जन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में नीरवता का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Moosalaadhaara-varshaa ↔ फुहार
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मूसलाधार-वर्षा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में फुहार का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jalavaayu ↔ मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में जलवायु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Anaavrita ↔ मेघावृत्त
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में अनावृत की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मेघावृत्त का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Soorya-prakaasha ↔ मेघ-छाया
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सूर्य-प्रकाश की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मेघ-छाया का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jalamagna ↔ मरुस्थलीय
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में जलमग्न की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मरुस्थलीय का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Svachchha-aakaasha ↔ मेघाच्छन्नता
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में स्वच्छ-आकाश की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मेघाच्छन्नता का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Pahaadee-havaa ↔ मैदानी-लू
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में पहाड़ी-हवा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मैदानी-लू का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Samudree-sameera ↔ मरुस्थली-हवा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में समुद्री-समीर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मरुस्थली-हवा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Megha-garjanaa ↔ नीरव-आकाश
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मेघ-गर्जना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में नीरव-आकाश का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Meghayukta ↔ मेघरहित
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मेघयुक्त की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मेघरहित का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Mausama-anukoolataa ↔ मौसम-विषमता
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मौसम-अनुकूलता की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मौसम-विषमता का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Meghamaalaa ↔ नीलांबर
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मेघमाला की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में नीलांबर का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Parvateeya-jalavaayu ↔ मरुस्थलीय-जलवायु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में पर्वतीय-जलवायु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मरुस्थलीय-जलवायु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Tateeya-mausama ↔ महाद्वीपीय-जलवायु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तटीय-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में महाद्वीपीय-जलवायु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Majboot ↔ कमजोर
मजबूत नींव पर बना भवन बड़े से बड़े भूकंप और तूफान को भी आसानी से झेल लेता है।
कुपोषण के कारण बालक शारीरिक रूप से कमजोर और रोगग्रस्त हो गया था।
Jeena ↔ मरना
स्वाभिमान और सत्यनिष्ठा के साथ जीना ही मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता है।
कायरता और अपमान के साए में घुट-घुट कर जीने से देश के लिए मरना कहीं अधिक श्रेष्ठ है।
Roothna ↔ मनाना
छोटी-छोटी बातों पर अपनों से रूठना केवल संबंधों में अनावश्यक दूरी बढ़ाता है।
नाराज मित्र को प्यार और आत्मीयता से मनाना सच्ची मित्रता की निशानी है।
Khilna ↔ मुरझाना
वसंत ऋतु के आते ही उपवन में रंग-बिरंगी कलियों का खिलना मन मोह लेता है।
तीखी धूप और पानी के अभाव में कोमल पौधों का मुरझाना स्वाभाविक है।