Achha ↔ बुरा
जीवन में अच्छा और बुरा समय दोनों आते हैं, किंतु धैर्यवान व्यक्ति कभी विचलित नहीं होता।
बुरा संग मनुष्य की बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है, जबकि अच्छा संग जीवन को संवारता है।
अक्षर 'अ' से प्रारंभ होने वाले कुल 457 विपरीतार्थक शब्द युग्म नीचे दिए गए हैं:
Achha ↔ बुरा
जीवन में अच्छा और बुरा समय दोनों आते हैं, किंतु धैर्यवान व्यक्ति कभी विचलित नहीं होता।
बुरा संग मनुष्य की बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है, जबकि अच्छा संग जीवन को संवारता है।
Ameer ↔ गरीब
न्याय के दरबार में अमीर और गरीब दोनों के लिए कानून एक समान है।
गरीब व्यक्ति भी अपने स्वाभिमान और ईमानदारी के बल पर समाज में धनी से अधिक सम्मान पाता है।
Uchit ↔ अनुचित
बुद्धिमान व्यक्ति उचित और अनुचित का भेद भली-भाँति समझते हैं।
अनुचित साधनों से प्राप्त सफलता क्षणिक होती है, उचित परिश्रम ही स्थायी यश दिलाता है।
Yogya ↔ अयोग्य
योग्य प्रशासक कठिन कार्य भी संभाल लेता है, जबकि अयोग्य व्यक्ति आसान काम भी बिगाड़ देता है।
अयोग्य व्यक्ति को महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व सौंपना संस्था को संकट में डाल देता है।
Samarth ↔ असमर्थ
समर्थ लोगों को समाज के असमर्थ और दुर्बल वर्ग की सहायता के लिए आगे आना चाहिए।
असमर्थ होने पर भी जो दूसरों की भलाई की भावना रखता है, उसका संकल्प कभी व्यर्थ नहीं जाता।
Shuddh ↔ अशुद्ध
शुद्ध जल स्वास्थ्यवर्धक होता है जबकि अशुद्ध पानी अनेक बीमारियों का कारण बनता है।
अशुद्ध विचारों को मन से बाहर निकालना ही साधना और आत्मशुद्धि का प्रथम चरण है।
Pavitra ↔ अपवित्र
मंदिर का वातावरण पवित्र होता है, किसी भी कुकृत्य से उसे अपवित्र न करें।
अपवित्र भावनाएं व्यक्ति के आंतरिक तेज को क्षीण कर देती हैं, जबकि पवित्र विचार उसे आलोकित करते हैं।
Spasht ↔ अस्पष्ट
वक्ता के विचार बिल्कुल स्पष्ट थे, उनमें कोई अस्पष्ट संकेत नहीं था।
अस्पष्ट निर्देश भ्रम उत्पन्न करते हैं, इसलिए संवाद सदा स्पष्ट और पारदर्शी होना चाहिए।
Pratyaksh ↔ अप्रत्यक्ष
प्रत्यक्ष प्रमाण के सामने परोक्ष या अप्रत्यक्ष तर्कों का कोई मूल्य नहीं रह जाता।
माता-पिता का स्नेह अप्रत्यक्ष रूप से हर संकट में हमारी रक्षा करता है।
Upasthit ↔ अनुपस्थित
समारोह में मुख्य अतिथि उपस्थित थे, किंतु कुछ प्रमुख वक्ता अनुपस्थित रहे।
कक्षा में अनुपस्थित रहने से छात्र महत्वपूर्ण पाठ के ज्ञान से वंचित रह जाता है।
Drishya ↔ अदृश्य
नेत्रों से दृश्य जगत का सौंदर्य देखा जा सकता है, किंतु ईश्वर की शक्ति अदृश्य रहती है।
वायु यद्यपि अदृश्य है, किंतु इसका स्पंदन और जीवनदायिनी शक्ति हर श्वास में प्रत्यक्ष है।
Gyaat ↔ अज्ञात
वैज्ञानिक ज्ञात तथ्यों के आधार पर अज्ञात रहस्यों की खोज में निरंतर जुटे रहते हैं।
अज्ञात भय से भयभीत होने के बजाय सत्य का ज्ञान प्राप्त कर उसका सामना करना चाहिए।
Sambhav ↔ असंभव
दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम से असंभव कार्य भी संभव बन जाते हैं।
कठिन परिश्रम और अटूट आत्मविश्वास से असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी संभव हो जाते हैं।
Aavashyak ↔ अनावश्यक
विद्यार्थी को केवल आवश्यक पुस्तकों पर ध्यान देना चाहिए और अनावश्यक सामग्री से बचना चाहिए।
अनावश्यक व्यय और चिंताओं से बचकर ही मनुष्य सुखी और शांत जीवन व्यतीत कर सकता है।
Upayogi ↔ अनुपयोगी
समय का सदुपयोग जीवन को उपयोगी बनाता है जबकि आलस्य इसे अनुपयोगी कर देता है।
अनुपयोगी समझकर फेंकी गई वस्तुएं भी पुनर्चक्रण द्वारा मूल्यवान बन जाती हैं।
Uttam ↔ अधम
चंदन का वृक्ष उत्तम प्रकृति का प्रतीक है, सर्पों के लिपटने पर भी वह अधम नहीं बनता।
अधम कर्म करने वाला व्यक्ति समाज में घृणा का पात्र बनता है और आत्मसम्मान खो बैठता है।
Praacheen ↔ अर्वाचीन
प्राचीन काल के ऋषि-मुनियों का ज्ञान आज के अर्वाचीन विज्ञान से भी कहीं आगे था।
अर्वाचीन काल की आधुनिक तकनीकें प्राचीन ज्ञान के साथ मिलकर नवक्रांति ला रही हैं।
Shaant ↔ अशांत
शांत समुद्र में यात्रा सुखद होती है जबकि अशांत लहरों में जहाज डगमगाने लगता है।
अशांत मन कभी भी सत्य का निर्णय नहीं ले पाता, इसलिए ध्यान द्वारा शांति पाना आवश्यक है।
Nashwar ↔ अनश्वर
यह भौतिक शरीर नश्वर है, किंतु इसके भीतर स्थित चेतना अनश्वर और अमर है।
पार्थिव देह नश्वर है, किंतु उसमें विद्यमान आत्मतत्व अनश्वर और अविनाशी है।
Sthaayi ↔ अस्थायी
सच्चे मित्र स्थायी संबल बनते हैं, जबकि झूठे साथी केवल अस्थायी लाभ के लिए जुड़ते हैं।
संसार के समस्त सुख-दुख अस्थायी हैं, इसलिए सुख में अहंकार और दुख में विलाप अनुचित है।
Sadhu ↔ असाधु
साधु पुरुषों का सानिध्य पापों को हरता है जबकि असाधु संगति पतन की ओर ले जाती है।
असाधु प्रवृत्ति के लोग दूसरों के पतन में ही अपना हित तलाशते हैं।
Shisht ↔ अशिष्ट
शिष्ट आचरण सभ्य समाज की पहचान है, अशिष्ट बातें किसी को शोभा नहीं देतीं।
अशिष्ट व्यवहार किसी भी सुसंस्कृत सभा में स्वीकार्य नहीं होता, शिष्टाचार ही सम्मान दिलाता है।
Sabhya ↔ असभ्य
सभ्य राष्ट्र विवादों का हल शांतिपूर्ण संवाद से निकालते हैं, असभ्य युद्ध से नहीं।
असभ्य वाणी बोलने से अपनी ही हीनता प्रकट होती है, इसलिए मधुर और सभ्य बोलें।
Udaar ↔ अनुदार
उदार हृदय वाले लोग सर्वकल्याण सोचते हैं जबकि अनुदार व्यक्ति केवल अपने स्वार्थ तक सीमित रहते हैं।
अनुदार दृष्टिकोण समाज को बांटता है, जबकि उदार हृदय सबको अपना बना लेता है।
Anukool ↔ प्रतिकूल
अनुकूल परिस्थितियों में तो सभी सफल होते हैं, पर प्रतिकूल समय में टिकने वाला ही सच्चा वीर है।
प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य न खोना ही सच्चे साहसी और बुद्धिमान की पहचान है।
Aseem ↔ ससीम
ईश्वर की अनुकंपा असीम होती है, जिसकी तुलना ससीम मानवीय क्षमताओं से नहीं की जा सकती।
मनुष्य की बुद्धि ससीम है, जबकि यह ब्रह्मांड असीम और अनंत रहस्यों से परिपूर्ण है।
Anant ↔ सांत
नीला आकाश अनंत प्रतीत होता है, जबकि धरती की सीमाएं सांत और निश्चित हैं।
भौतिक संसार का विस्तार सांत है, जबकि चेतना का परमात्मा रूप अनंत है।
Poorna ↔ अपूर्ण
पूर्ण समर्पण से किया गया कार्य सफल होता है जबकि अपूर्ण निष्ठा विफलता लाती है।
बिना नैतिक आचरण के कोई भी ज्ञान अपूर्ण और निष्फल रह जाता है।
Asli ↔ नकली
असली हीरे की चमक सदा बनी रहती है, जबकि नकली आभूषण जल्द ही फीके पड़ जाते हैं।
नकली मोतियों की चमक कुछ ही दिनों में फीकी पड़ जाती है, असली रत्न सदा दमकता है।
Kathit ↔ अकथित
कथित शब्दों की अपेक्षा अकथित मौन कभी-कभी अधिक गहरा संदेश दे जाता है।
अनेक गहरे भाव अकथित रहकर भी आंखों की भाषा से स्वतः व्यक्त हो जाते हैं।
Pramaanik ↔ अप्रामाणिक
इतिहासकारों ने केवल प्रामाणिक अभिलेखों को स्वीकार किया और अप्रामाणिक दंतकथाओं को खारिज कर दिया।
अप्रामाणिक सूचनाओं पर विश्वास करने से समाज में व्यर्थ की अफवाहें और अशांति फैलती है।
Swabhavik ↔ अस्वाभाविक
दुख में आंसू बहना स्वाभाविक प्रतिक्रिया है, कठोर होकर भावहीन बने रहना अस्वाभाविक है।
अस्वाभाविक व्यवहार से बनावटीपन झलकता है, सहजता ही व्यक्ति को गरिमा प्रदान करती है।
Kushal ↔ अकुशल
कुशल कारीगर बारीक नक्काशी कर लेता है जबकि अकुशल मजदूर पत्थर भी ठीक से नहीं तराश पाता।
अकुशल हाथों में बहुमूल्य औजार भी नष्ट हो जाते हैं, कुशलता अभ्यास से ही आती है।
Daksha ↔ अदक्ष
दक्ष शल्य-चिकित्सक जटिल ऑपरेशन सरलता से कर देता है, नए व अदक्ष को सावधानी रखनी होती है।
अदक्ष कारीगर को समुचित प्रशिक्षण देकर निपुण बनाया जा सकता है।
Praveen ↔ अकुशल
संगीत में प्रवीण गायक सुर को साध लेता है, जिसे नौसिखिया नहीं पकड़ पाता।
अकुशल हाथों में बहुमूल्य औजार भी नष्ट हो जाते हैं, कुशलता अभ्यास से ही आती है।
Nipun ↔ अनिपुण
धनुर्विद्या में निपुण अर्जुन ने लक्ष्य पर अचूक संधान किया।
कला के क्षेत्र में निरंतर साधना ही अनिपुण शिक्षार्थी को कुशल कलाकार बनाती है।
Satya ↔ असत्य
सत्य वचन भले ही कड़वे लगें, पर असत्य मीठा होकर भी पतन कराता है।
असत्य का सहारा लेने वाले को एक झूठ छिपाने के लिए सौ नए झूठ बोलने पड़ते हैं।
Vaastavik ↔ अवास्तविक
वास्तविक स्थिति जाने बिना किसी पर दोषारोपण करना उचित नहीं।
अवास्तविक अपेक्षाएं पालने से अंत में केवल निराशा और पश्चाताप ही हाथ लगता है।
Gyaani ↔ अज्ञानी
ज्ञानी पुरुष सबको आदर देता है, अज्ञानी अहंकार में चूर रहता है।
अज्ञानी को ज्ञान का प्रकाश देकर सही मार्ग पर लाना ही समाज का परम धर्म है।
Alpa ↔ प्रचुर
अल्प ज्ञान खतरनाक होता है, जबकि किसी विषय का प्रचुर ज्ञान आत्मविश्वास देता है।
वर्षा काल में प्रचुर जल मिलने से धरती शस्य-श्यामला और हरी-भरी हो जाती है।
Nyoon ↔ अधिक
खर्च को न्यूनतम रखना चाहिए और बचत को अधिक से अधिक बढ़ाना चाहिए।
किसी भी वस्तु का अधिक उपभोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है।
Adhik ↔ कम
अधिक बोलना मूर्खता की निशानी है, कम और सार्थक बोलना बुद्धिमत्ता है।
कम साधनों में भी संतोषपूर्वक जीवन जीने वाला व्यक्ति सदा सुखी रहता है।
Rochak ↔ अरुचिकर
यह पुस्तक इतनी रोचक है कि पाठक को अरुचिकर विषयों में भी रुचि हो जाती है।
अरुचिकर भोजन भी भूख लगने पर स्वादिष्ट और तृप्तिकारी प्रतीत होने लगता है।
Drishyamaan ↔ अदृश्यमान
क्षितिज पर दृश्यमान पर्वत घने बादलों के आते ही अदृश्यमान हो गया।
सूक्ष्मदर्शी के बिना अदृश्यमान जीवाणु भी जल में उपस्थित रहकर रोग फैला सकते हैं।
Sushikshit ↔ अशिक्षित
सुशिक्षित समाज में कुप्रथाओं का कोई स्थान नहीं होता, अशिक्षित लोग ही अंधविश्वास में फंसते हैं।
अशिक्षित समाज को विद्या का प्रकाश देकर ही राष्ट्र की सर्वांगीण प्रगति संभव है।
Shikshit ↔ अशिक्षित
एक शिक्षित नागरिक अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों के प्रति भी सचेत रहता है।
अशिक्षित समाज को विद्या का प्रकाश देकर ही राष्ट्र की सर्वांगीण प्रगति संभव है।
Shraant ↔ अश्रांत
दिनभर के परिश्रम से श्रांत मजदूर रात्रि में गहरी नींद सोता है।
अश्रांत परिश्रमी व्यक्ति बिना थके अपने निर्धारित लक्ष्य की दिशा में अग्रसर रहता है।
Deerghaayu ↔ अल्पायु
बुजुर्गों का आशीर्वाद होता है — दीर्घायु भव और यशस्वी बनो।
अल्पायु में ही स्वामी विवेकानंद ने अपने विचारों से संपूर्ण विश्व को आलोकित कर दिया।
Anuraagi ↔ विरागी
संसार का अनुरागी मनुष्य मोह में बंधता है, विरागी संन्यासी मोक्ष की ओर बढ़ता है।
विरागी साधु सांसारिक प्रलोभनों से मुक्त होकर आत्मतत्व के अनुसंधान में लीन रहता है।
Aasakt ↔ अनासक्त
कर्मफल में आसक्त होने के बजाय निष्काम भाव से अनासक्त होकर कर्म करो।
गीता का संदेश है कि कर्म अनासक्त भाव से करो और फल की चिंता मत करो।
Dhaarmik ↔ अधार्मिक
धार्मिक व्यक्ति सदा नीति-सम्मत राह चुनता है जबकि अधार्मिक अनीति की ओर आकर्षित होता है।
अधार्मिक आचरण समाज की नींव को खोखला कर कलह और अशांति को जन्म देता है।
Nyaayee ↔ अन्यायी
न्यायी न्यायाधीश पक्षपात नहीं करता, अन्यायी शासक का पतन अवश्यंभावी है।
अन्यायी शासक की सत्ता भले ही प्रचंड दिखे, किंतु अंततः उसका पतन निश्चित होता है।
Saadhaaran ↔ असाधारण
साधारण जीवन जीने वाले महापुरुषों के विचार असाधारण और प्रेरणादायी होते हैं।
असाधारण प्रतिभा भी कठिन परिश्रम के बिना अपना पूर्ण चमत्कार नहीं दिखा सकती।
Laukik ↔ अलौकिक
लौकिक सुख क्षणिक होते हैं जबकि पारलौकिक आनंद चिरस्थायी माना गया है।
हिमालय के धवल शिखरों पर अलौकिक शांति और दिव्य सौंदर्य की अनुभूति होती है।
Tripta ↔ अतृप्त
स्वादिष्ट भोजन से पेट तृप्त हो गया किंतु ज्ञान की पिपासा सदा अतृप्त ही रहती है।
वासनाओं की अग्नि में जितना घी डाला जाए, वह उतनी ही अतृप्त रहकर भड़कती है।
Santusht ↔ असंतुष्ट
ईमानदार व्यक्ति थोड़े में भी संतुष्ट रहता है जबकि लोभी कभी संतुष्ट नहीं होता।
असंतुष्ट मन सदा दूसरों के सुख को देखकर ईर्ष्या की आग में जलता रहता है।
Prasanna ↔ अप्रसन्न
सफलता की सूचना पाकर छात्र प्रसन्न हो गया।
छोटी-छोटी बातों पर अप्रसन्न होने की आदत व्यक्ति को चिड़चिड़ा बना देती है।
Agragaami ↔ पश्चगामी
अग्रगामी सोच राष्ट्र को प्रगति के पथ पर ले जाती है, पश्चगामी विचार पतन कराते हैं।
पश्चगामी सोच समाज को अंधविश्वास और कुरीतियों के गर्त में धकेल देती है।
Chiraayu ↔ अल्पायु
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का संदेश चिरायु है, उसका कभी अंत नहीं होगा।
अल्पायु में ही स्वामी विवेकानंद ने अपने विचारों से संपूर्ण विश्व को आलोकित कर दिया।
Anivaarya ↔ वैकल्पिक
परीक्षा में प्रथम खंड अनिवार्य है जबकि द्वितीय खंड में वैकल्पिक प्रश्न हैं।
वैकल्पिक ऊर्जा के स्रोतों को अपनाना पर्यावरण संरक्षण के लिए अनिवार्य हो चुका है।
Aichhik ↔ अनिवार्य
रक्तदान पूरी तरह ऐच्छिक सेवा है, किसी पर कोई बाध्यता नहीं।
स्वच्छता और पौष्टिक आहार अच्छे स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य शर्तें हैं।
Utsaahi ↔ अनुत्साही
उत्साही युवा हर चुनौती को अवसर बना लेते हैं।
अनुत्साही सैनिक सेना के मनोबल को गिरा देता है, उत्साह ही विजय की कुंजी है।
Sachetan ↔ अचेतन
सचेतन नागरिक अपने देश के प्रति सदैव सजग रहता है।
अचेतन मन में दबी इच्छाएं और स्मृतियां मनुष्य के व्यवहार को प्रभावित करती हैं।
Paripakwa ↔ अपरिपक्व
परिपक्व बुद्धि अनुभव से विकसित होती है, अपरिपक्व सोच जल्दबाजी में निर्णय लेती है।
अपरिपक्व निर्णय से भविष्य में गंभीर हानियों का सामना करना पड़ सकता है।
Praudh ↔ अल्पवयस्क
प्रौढ़ व्यक्ति जीवन की जटिलताओं को धैर्यपूर्वक संभालते हैं।
अल्पवयस्क बच्चों से श्रम कराना कानूनन अपराध और उनके अधिकारों का हनन है।
Suruchipoorna ↔ अरुचिकर
गृह-सज्जा सुरुचिपूर्ण ढंग से की गई थी।
अरुचिकर भोजन भी भूख लगने पर स्वादिष्ट और तृप्तिकारी प्रतीत होने लगता है।
Sarvagya ↔ अल्पज्ञ
संसार में केवल ईश्वर ही सर्वज्ञ है, मनुष्य तो अल्पज्ञ ही रहता है।
अल्पज्ञ व्यक्ति थोड़ा सा जानकर ही स्वयं को सर्वज्ञाता मानकर अहंकार करने लगता है।
Bahugya ↔ अल्पज्ञ
बहुज्ञ विद्वान हर विषय पर सारगर्भित विचार व्यक्त कर सकते हैं।
अल्पज्ञ व्यक्ति थोड़ा सा जानकर ही स्वयं को सर्वज्ञाता मानकर अहंकार करने लगता है।
Aarambh ↔ अंत
किसी भी शुभ कार्य का आरंभ उत्साह से और अंत संतोष के साथ होना चाहिए।
अंत भला तो सब भला — कठिन शुरुआत के बाद भी सुखद अंत मन को शांति देता है।
Aadi ↔ अंत
संसार में जिसका आदि है उसका अंत भी सुनिश्चित है।
अंत भला तो सब भला — कठिन शुरुआत के बाद भी सुखद अंत मन को शांति देता है।
Iti ↔ अथ
ग्रंथ के आरंभ में अथ और समापन पर इति लिखा जाता है।
अथ योगानुशासनम् — महर्षि पतंजलि ने योग सूत्र का श्रीगणेश अथ शब्द से किया।
Uday ↔ अस्त
सूर्य का पूर्व में उदय और पश्चिम में अस्त होना प्रकृति का अटल नियम है।
शाम को सूर्य अस्त होते ही पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौटने लगते हैं।
Unnati ↔ अवनति
शिक्षा और विज्ञान में उन्नति करने वाला देश कभी अवनति के गर्त में नहीं गिरता।
आलस्य और कुप्रबंधन व्यापार को अवनति की ओर धकेल देते हैं।
Maan ↔ अपमान
सज्जन व्यक्ति मान मिलने पर अभिमानी नहीं होते और अपमान होने पर संयम नहीं खोते।
किसी निर्धन का अपमान करना मानवता के विरुद्ध घोर पाप है।
Apmaan ↔ सम्मान
किसी निर्धन का अपमान करना मानवता के विरुद्ध घोर पाप है।
गुरुजनों को यथोचित सम्मान देना चाहिए, किसी का तिरस्कार नहीं करना चाहिए।
Yash ↔ अपयश
परोपकार से यश की प्राप्ति होती है, स्वार्थ केवल अपयश देता है।
गलत संगति में पड़ने से व्यक्ति को बिना कारण भी अपयश झेलना पड़ता है।
Keerti ↔ अपकीर्ति
दानवीर कर्ण की कीर्ति अमर है, दुर्योधन के कुकृत्यों ने उसे अपकीर्ति दी।
कुकर्मों से अर्जित अपकीर्ति कुल की पीढ़ियों तक बदनामी का कारण बन जाती है।
Ekta ↔ अनेकता
अनेकता में एकता ही भारतीय राष्ट्र की सबसे अनूठी विशेषता है।
भाषा और वेशभूषा की अनेकता के बावजूद हम सब एक हैं।
Niyam ↔ अनियम
यातायात के नियमों का पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य है।
दैनिक जीवन में अनियम और अनियमितता स्वास्थ्य तथा कार्य दोनों को बिगाड़ देती है।
Vaidh ↔ अवैध
व्यापार केवल वैध साधनों से करना चाहिए, अवैध धन कभी सुख नहीं देता।
प्रशासन ने अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाकर सरकारी भूमि को मुक्त कराया।
Aagya ↔ अवज्ञा
सैनिक सेनापति की आज्ञा का अक्षरशः पालन करते हैं, अवज्ञा करने पर कोर्ट मार्शल होता है।
माता-पिता की अवज्ञा करने वाली संतान कभी सच्चे मन से सुखी नहीं रह सकती।
Kartavya ↔ अकर्तव्य
संकट के समय देश की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है।
कर्तव्य और अकर्तव्य का भेद समझकर ही धर्मसम्मत जीवन जिया जा सकता है।
Adhikaar ↔ कर्तव्य
अधिकारों की मांग के साथ-साथ कर्तव्यों का निर्वहन भी समान रूप से जरूरी है।
संकट के समय देश की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है।
Aaroh ↔ अवरोह
संगीत में स्वरों के आरोह और अवरोह का सही संतुलन ही राग की सुंदरता बढ़ाता है।
पर्वतारोही के लिए जितना कठिन आरोह होता है, उतना ही सावधानीपूर्वक अवरोह करना पड़ता है।
Aadar ↔ अनादर
बड़ों का आदर करना हमारी संस्कृति का मूल आधार है।
किसी के अतिथि का अनादर करना भारतीय परंपरा के विपरीत है।
Adhyaapak ↔ विद्यार्थी
एक समर्पित अध्यापक समाज के भविष्य का सच्चा निर्माता होता है।
विद्यार्थी जीवन कठिन तपस्या का काल होता है जिसमें चरित्र का निर्माण होता है।
Vidya ↔ अविद्या
विद्या अंधकार को दूर कर प्रकाश फैलाती है, अविद्या मनुष्य को भटकाती है।
अविद्या के आवरण को हटाए बिना आत्मज्ञान की प्राप्ति असंभव है।
Snvidhaana ↔ अराजकता
संविधान देश के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है और शासन को मर्यादा में बांधता है।
कानून व्यवस्था के ध्वस्त होते ही समाज में अराजकता फैल जाती है और निर्बल वर्ग असुरक्षित हो जाता है।
Aatithya ↔ अनातिथ्य
भारतीय संस्कृति में आतिथ्य सत्कार को ईश्वर सेवा के समान आदरणीय माना गया है।
द्वार पर आए भूखे आगंतुक के साथ अनातिथ्य का व्यवहार करना सामाजिक मर्यादा के विपरीत है।
Saamaajika ↔ असामाजिक
सामूहिक विवाह और उत्सव सामाजिक मेलजोल व भाईचारे को सुदृढ़ करने के उत्तम माध्यम हैं।
सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले असामाजिक तत्वों पर पुलिस कड़ी नजर रखती है।
Samaanataa ↔ असमानता
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव किए बिना समानता की गारंटी है।
अवसरों की असमानता से वंचित वर्गों के युवाओं का आत्मविश्वास डगमगा जाता है।
Sveekriti ↔ अस्वीकृति
आधुनिक प्रगतिशील विचारों को समाज की स्वीकृति मिलने में कुछ समय अवश्य लगता है।
कुप्रथाओं और अंधविश्वासों की सार्वभौमिक अस्वीकृति से ही समाज उन्नत बन सकता है।
Kuleena ↔ अकुलीन
प्राचीन काल में कुलीन परिवारों के आचार-विचार को समाज में आदर्श माना जाता था।
लोकतंत्र में व्यक्ति की योग्यता मायने रखती है, चाहे वह किसी भी अकुलीन परिवार से क्यों न हो।
Jhopadpattee ↔ अट्टालिका
महानगरों के किनारे बसी झोपड़पट्टी में पेयजल और स्वच्छता की भारी किल्लत रहती है।
शहर के आधुनिक हिस्से में शीशे और कंक्रीट से बनी भव्य अट्टालिकाएं आकाश छूती दिखाई देती हैं।
Svaasthyakara ↔ अस्वास्थ्यकर
हरी सब्जियां, ताजे फल और स्वच्छ पेयजल स्वास्थ्यकर जीवनशैली की आधारशिला हैं।
खुले में बिकने वाला दूषित भोजन और बासी खाद्य पदार्थ अस्वास्थ्यकर सिद्ध होते हैं।
Vyavasthaa ↔ अव्यवस्था
मेले में पुलिस प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण की चाक-चौबंद व्यवस्था कर रखी थी।
बिना योजना के आयोजित कार्यक्रम में भगदड़ मचने से चारों ओर अव्यवस्था फैल गई।
Anushaasana ↔ अनुशासनहीनता
कतार में खड़े होकर शांतिपूर्वक प्रतीक्षा करना सभ्य समाज के अनुशासन का परिचायक है।
कक्षा या सार्वजनिक स्थल पर अनुशासनहीनता दिखाने वाले छात्रों को चेतावनी दी गई।
Aparaadhee ↔ निरपराधी
न्यायालय ने साक्ष्यों की जांच के उपरांत उस शातिर ठग को अपराधी घोषित कर जेल भेज दिया।
सच्चे न्याय का सिद्धांत यही है कि किसी भी निर्दोष व निरपराधी को सजा न मिले।
Prakash ↔ अंधकार
ज्ञान का प्रकाश अज्ञान के गहन अंधकार को पूरी तरह मिटा देता है।
दीपक की एक छोटी सी लौ भी घने अंधकार पर प्रकाश की विजय सुनिश्चित करती है।
Jal ↔ अग्नि
सृष्टि के संतुलन हेतु शीतल जल और प्रज्वलित अग्नि दोनों तत्व अनिवार्य हैं।
अग्नि की भीषण लपटों को शांत करने के लिए प्रचुर मात्रा में जल की आवश्यकता होती है।
Avani ↔ अंबर
शरद पूर्णिमा की चांदनी अवनि से अंबर तक धवल चादर की तरह बिछ जाती है।
पक्षी खुले अंबर में उड़ान भरकर अवनि के मनोरम दृश्यों का अवलोकन करते हैं।
Poornima ↔ अमावस्या
पूर्णिमा की रात जहां आलोकित होती है, वहीं अमावस्या की रात्रि घोर अंधकारमय रहती है।
अमावस्या के घने अंधेरे में दीवाली के दीप जलाकर प्रकाश पर्व मनाया जाता है।
Udayachal ↔ अस्ताचल
सूर्य उदयाचल पर उदित होकर दिनभर आलोक बिखेरने के पश्चात अस्ताचल की ओर प्रस्थान करता है।
अस्ताचलगामी सूर्य की रश्मियां शांत सरोवरों पर मनोहारी प्रतिबिंब रचती हैं।
Udeechi ↔ अवाची
उदीची से बहती बर्फीली बयार ने अवाची की उष्णता को शीतलता में रूपांतरित कर दिया।
शास्त्रों में उदीची और अवाची को क्रमशः उत्तर और दक्षिण दिशा का द्योतक माना गया है।
Oordhva ↔ अधः
अग्नि की लौ सदा ऊर्ध्व गति करती है, जबकि जल का प्रवाह अधः दिशा में होता है।
सदाचारी विचार मनुष्य को ऊर्ध्व लोक की ओर उठाते हैं, जबकि हीन कर्म अधः पतन कराते हैं।
Upatyaka ↔ अधित्यका
पहाड़ की तलहटी वाली भूमि को उपत्यका और शिखर पर समतल भूमि को अधित्यका कहते हैं।
अधित्यका पर ठंडी और तीव्र हवाएं चलती हैं, जबकि उपत्यका में जलवायु मृदुल रहती है।
Ativrishti ↔ अनावृष्टि
अतिवृष्टि से जहां विनाशकारी बाढ़ आती है, वहीं अनावृष्टि से फसलों का अकाल पड़ जाता है।
किसानों के लिए अनावृष्टि का संकट अतिवृष्टि से भी अधिक गंभीर सिद्ध होता है।
Alpavrishti ↔ अतिवृष्टि
अल्पवृष्टि के कारण जलाशय सूखने लगे, जबकि पड़ोस के राज्य अतिवृष्टि से जलमग्न थे।
अतिवृष्टि से जहां विनाशकारी बाढ़ आती है, वहीं अनावृष्टि से फसलों का अकाल पड़ जाता है।
Vrishti ↔ अनावृष्टि
समय पर होने वाली वृष्टि भूमि को संवारती है, जबकि अनावृष्टि हरियाली को नष्ट कर देती है।
किसानों के लिए अनावृष्टि का संकट अतिवृष्टि से भी अधिक गंभीर सिद्ध होता है।
Paarthiv ↔ अपार्थिव
मनुष्य का शरीर पार्थिव तत्वों से निर्मित है, जबकि उसकी आत्मा अपार्थिव और अमर है।
संतों के चेहरे पर अपार्थिव तेज झलकता है जो पार्थिव प्रलोभनों से परे होता है।
Bramhand ↔ अणु
प्राचीन ऋषियों के अनुसार जो कुछ विशाल ब्रह्मांड में है, वह सूक्ष्मतम अणु में भी समाया है।
विज्ञान सिद्ध करता है कि एक छोटे से अणु के विखंडन से विराट ऊर्जा की उत्पत्ति होती है।
Anu ↔ विराट
विज्ञान सिद्ध करता है कि एक छोटे से अणु के विखंडन से विराट ऊर्जा की उत्पत्ति होती है।
सूक्ष्म अणु के विखंडन से विराट ऊर्जा की उत्पत्ति प्रकृति का विस्मयकारी नियम है।
Aranya ↔ बस्ती
तपस्वी जन शांत अरण्य में साधना करते हैं और कोलाहलपूर्ण मानव बस्ती से दूर रहते हैं।
नदी किनारे बसी बस्ती में रौनक रहती है, जबकि नदी के पार बीहड़ अरण्य फैला है।
Sukaal ↔ अकाल
पर्याप्त मानसूनी वर्षा से देश में सुकाल का वातावरण बना और अकाल का भय समाप्त हो गया।
अकाल के दिनों में अन्न की भारी कमी हो गई थी, किंतु सुकाल आते ही कोठार भर गए।
Anoop ↔ जांगल
प्राचीन भूगोल में जलप्रचुर आर्द्र भूमि को अनूप और शुष्क झाड़ीदार प्रदेश को जांगल कहा जाता था।
जांगल प्रदेश में कांटेदार वनस्पतियां उगती हैं, जबकि अनूप भूमि में धान और कमल खिलते हैं।
Tateeya ↔ अंतर्देशीय
तटीय राज्यों में समकारी समुद्री जलवायु रहती है, जबकि अंतर्देशीय भागों में तापमान विषम होता है।
अंतर्देशीय क्षेत्रों में सर्दियों में भारी ठंड और गर्मियों में भीषण लू का सामना करना पड़ता है।
Bhoogarbha ↔ अंतरिक्ष
खनिज संपदा भूगर्भ में छिपी है, जबकि सौर ऊर्जा का अक्षय स्रोत अंतरिक्ष से प्राप्त होता है।
मानव ने एक ओर गहरे भूगर्भ का अध्ययन किया है तो दूसरी ओर अनंत अंतरिक्ष की थाह ली है।
Anurag ↔ विराग
मातृभूमि के प्रति सच्चा अनुराग हर नागरिक के हृदय में होना चाहिए।
साधु पुरुषों का सांसारिक सुखों के प्रति विराग स्वाभाविक होता है।
Santosh ↔ असंतोष
जीवन में सच्चा संतोष ही सबसे बड़ा धन माना गया है।
अकारण असंतोष मनुष्य को कभी सुखी नहीं रहने देता।
Dhairya ↔ अधैर्य
कठिनाइयों के बीच धैर्य रखना ही सफल मनुष्य की सबसे बड़ी पहचान है।
जल्दबाजी में अधैर्य दिखाना बनते हुए काम को बिगाड़ देता है।
Shanti ↔ अशांति
ध्यान और आत्मचिंतन से मन को गहन शांति की अनुभूति होती है।
आपसी अविश्वास के कारण पूरे समाज में अशांति फैल गई थी।
Ullas ↔ अवसाद
विजय की घोषणा होते ही चारों ओर अपार उल्लास छा गया।
लगातार तनाव और असफलता व्यक्ति को गहरे अवसाद में धकेल सकती है।
Ahankar ↔ विनम्रता
रावण का मिथ्या अहंकार ही उसके समूल विनाश का कारण बना था।
विद्वान व्यक्तियों का सबसे बड़ा गुण उनकी सहज विनम्रता होती है।
Ruchi ↔ अरुचि
साहित्य और कला के प्रति उसकी स्वाभाविक रुचि सराहनीय है।
अस्वस्थ भोजन के कारण बालक को पौष्टिक आहार से अरुचि होने लगी है।
Apnapan ↔ बेगानापन
गाँव के लोगों के व्यवहार में जो अपनापन दिखता है, वह दुर्लभ है।
महानगरों की भीड़ में कभी-कभी मनुष्य बेगानापन महसूस करता है।
Shraddha ↔ अश्रद्धा
गुरुजनों के प्रति सच्ची श्रद्धा ही ज्ञान प्राप्ति का प्रथम द्वार है।
ज्ञान के प्रति अश्रद्धा रखने वाला व्यक्ति कभी शिक्षित नहीं हो सकता।
Aastha ↔ अनास्था
सत्य और धर्म पर दृढ़ आस्था रखने वाले व्यक्ति को कोई विचलित नहीं कर सकता।
संस्थानों के प्रति जनसाधारण की अनास्था लोकतंत्र के लिए घातक है।
Vishwas ↔ अविश्वास
व्यापार और साझेदारी की सफलता आपसी विश्वास पर ही टिकी होती है।
झूठ बोलने से साथियों के मन में अविश्वास पैदा हो जाता है।
Anugrah ↔ कोप
प्रभु के विशेष अनुग्रह से ही यह महान संकट टल सका।
राजा के भयानक कोप से सारा दरबार कांप उठा।
Kripa ↔ अवकृपा
गुरुजनों की कृपा से उसने परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया।
अधिकारी की अवकृपा के कारण योग्य कर्मचारी को पदोन्नति नहीं मिली।
Vardan ↔ अभिशाप
विज्ञान मानवता के लिए तब तक वरदान है जब तक उसका सदुपयोग हो।
यदि विनाशकारी अस्त्रों का प्रयोग हुआ तो विज्ञान एक अभिशाप बन जाएगा।
Mangal ↔ अमंगल
नववर्ष के अवसर पर सभी ने एक-दूसरे के मंगल की कामना की।
समारोह के बीच अशुभ समाचार सुनकर सबने अमंगल की आशंका जताई।
Shubh ↔ अशुभ
गृह प्रवेश का यह मुहूर्त अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।
अशुभ संकेत देखकर यात्रा को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया।
Kalyan ↔ अकल्याण
राजा का मुख्य कर्तव्य अपनी प्रजा के सर्वांगीण कल्याण की चिंता करना है।
दुष्टों की संगति अंततः मनुष्य के अकल्याण का कारण बनती है।
Dheer ↔ अधीर
विपत्तियों के आने पर धीर पुरुष कभी अपना संतुलन नहीं खोते।
ट्रेन के आने में देरी देखकर यात्री अधीर होने लगे।
Samyami ↔ असंयमी
संयमी व्यक्ति अपनी वाणी और इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखता है।
असंयमी खान-पान से व्यक्ति का स्वास्थ्य शीघ्र बिगड़ जाता है।
Sachet ↔ अचेत
सचेत नागरिक देश की सुरक्षा और स्वच्छता के प्रति जागरूक रहता है।
गंभीर दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति सड़क पर अचेत पड़ा था।
Satark ↔ असावधान
सीमा पर सतर्क सैनिक शत्रु की हर हलचल पर पैनी नजर रखते हैं।
असावधान चालक के कारण सड़क पर भारी दुर्घटना घट गई।
Pramatta ↔ अमत्त
धन और सत्ता के नशे में प्रमत्त व्यक्ति किसी के अधिकार का सम्मान नहीं करता।
अमत्त और संयमी मनुष्य हर विषम परिस्थिति में संतुलित रहता है।
Namrata ↔ अकड़
नम्रता वह सद्गुण है जो कठोर हृदय को भी पिघला देता है।
मिथ्या अकड़ मनुष्य को अपनों से ही दूर कर देती है।
Vinay ↔ अविनय
विद्या ददाति विनयं—सच्ची शिक्षा मनुष्य को विनय और शील सिखाती है।
अविनय और अशिष्टता से बात करने वाला व्यक्ति कभी आदर नहीं पाता।
Sahansheelta ↔ असहिष्णुता
सहनशीलता विविधतापूर्ण समाज को एक सूत्र में पिरोए रखती है।
धार्मिक असहिष्णुता शांतिपूर्ण परिवेश में विष घोल देती है।
Sahishnu ↔ असहिष्णु
सहिष्णु व्यक्ति विपरीत विचारों का भी सम्मानपूर्वक श्रवण करता है।
असहिष्णु विचारधारा समाज को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट देती है।
Adheerta ↔ धैर्य
अधीरता में लिया गया कदम अक्सर नुकसान का कारण बनता है।
गंभीर संकट में भी धैर्य बनाए रखना महापुरुषों का लक्षण है।
Vishaktata ↔ अमृतत्व
कटु वचनों की विषाक्तता आपसी प्रेम को नष्ट कर देती है।
सत्य और प्रेम के वचनों में अमृतत्व का वास होता है।
Abhay ↔ भय
ईश्वर की शरण में जाने पर साधक को अभय का वरदान मिलता है।
शत्रु के भय से कांपते हुए सैनिक पीछे हटने लगे।
Amarsha ↔ सहिष्णुता
अपमान का स्मरण होते ही उसके मन में अमर्ष की ज्वाला भड़क उठी।
बुद्धिमानी इसी में है कि व्यक्ति कटु बातों पर भी सहिष्णुता बरते।
Adheer ↔ शांत
परिणाम की प्रतीक्षा में उसका अधीर मन बार-बार घड़ी देख रहा था।
गहरे जल की तरह ज्ञानी पुरुष हर परिस्थिति में शांत रहता है।
Vyakul ↔ अविचलित
पुत्र के देर से लौटने पर माँ का मन व्याकुल होने लगा।
विशाल पर्वत के समान धीर पुरुष हर संकट में अविचलित रहता है।
Vichalit ↔ अविचलित
विपत्ति की आंधी भी सच्चे साधक को अपने संकल्प से विचलित नहीं कर सकती।
सत्यवादी हर प्रलोभन के सामने अविचलित और दृढ़ खड़ा रहता है।
Santushti ↔ असंतोष
कर्तव्य निष्ठा से पूरा करने के बाद मन को परम संतुष्टि मिलती है।
स्वार्थी मनुष्यों के मन का असंतोष कभी दूर नहीं होता।
Priyavadi ↔ अप्रियवादी
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात्—सत्य बोलो और प्रियवादी बनो।
अप्रियवादी व्यक्ति सच को भी इतने कड़वे ढंग से कहता है कि वह सबको चुभता है।
Agra ↔ पश्च
मस्तिष्क का अग्र भाग तार्किक निर्णय लेने और चिंतन का केंद्र होता है।
कशेरुक दंड का पश्च भाग पूरे शरीर को सीधा और सुदृढ़ आधार प्रदान करता है।
Ang ↔ अनंग
मानव शरीर का प्रत्येक अंग एक-दूसरे के सहयोग से सुचारू रूप से कार्य करता है।
अनंग रूप में कामदेव भौतिक शरीर से रहित होकर केवल भाव रूप में विद्यमान माने जाते हैं।
Swasth ↔ अस्वस्थ
स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
अस्वस्थ खान-पान और आलस्य से व्यक्ति का शरीर बीमारियों का घर बन जाता है।
Uttaan ↔ अवतान
योगाभ्यास में शवासन के दौरान साधक उत्तान अवस्था में पीठ के बल विश्राम करता है।
मक्रासन करते समय साधक अवतान मुद्रा में पेट के बल लेटकर श्वास नियंत्रित करता है।
Sashakta ↔ अशक्त
सशक्त बाहों वाले मजदूर ने भारी पत्थर को क्षणभर में उठाकर किनारे रख दिया।
तीव्र ज्वर के कारण अशक्त हुआ रोगी बिना सहारे के बिस्तर से उठ नहीं पा रहा था।
Aindrik ↔ अतींद्रिय
रूप, रस, गंध और स्पर्श ऐंद्रिक प्रत्यक्ष के माध्यम से अनुभव किए जाते हैं।
परम समाधि की अनुभूति अतींद्रिय होती है जो चर्मचक्षुओं से नहीं जानी जा सकती।
Angaheen ↔ सकलंग
दुर्घटना में अंगहीन हुए सैनिक ने कृत्रिम अंगों की सहायता से पुनः चलना सीखा।
सकलंग शरीर पाकर भी जो परिश्रम नहीं करता वह अपने सामर्थ्य का अपमान करता है।
Andha ↔ सुजाखा
अंधा राहगीर सफेद छड़ी की मदद से सड़क पार करने का प्रयास कर रहा था।
सुजाखा व्यक्ति दूर से ही आने वाले वाहन को देखकर सावधानी बरत लेता है।
Spryshya ↔ अस्पृश्य
हाथ से छुआ जा सकने वाला भौतिक पदार्थ स्पृश्य संसार का अंग है।
प्रकाश और वायु जैसी सूक्ष्म तरंगें त्वचा से अस्पृश्य अथवा अमूर्त प्रतीत होती हैं।
Agrakaaya ↔ पश्चकाय
शरीर रचना विज्ञान में अग्रकाय के अंतर्गत वक्ष, उदर और प्रमुख सम्मुख अंग सम्मिलित होते हैं।
रीढ़ की हड्डी और नितंब पश्चकाय के मुख्य संरचनात्मक आधार बिंदु होते हैं।
Oordhvaanga ↔ अधोअंग
कसरत करते समय ऊर्ध्वांग अर्थात भुजाओं और कंधों को सुदृढ़ बनाने के लिए डंबल उठाए जाते हैं।
दौड़ने और कूदने से अधोअंग अर्थात जांघों और पैरों की मांसपेशियों में सशक्तिकरण आता है।
Maansala ↔ अस्थिशेष
कठोर शारीरिक श्रम और नियमित कसरत से युवक की भुजाएं अत्यंत मांसल और मजबूत हो गईं।
अकाल और भुखमरी की विभीषिका में बच्चों के शरीर केवल अस्थिशेष अर्थात हड्डियों का ढांचा रह गए थे।
Romila ↔ अरोम
शीत प्रधान प्रदेशों में रहने वाले प्राणियों की त्वचा रोमिल और घने रोओं से ढकी होती है।
छोटे नवजात शिशु की कोमल त्वचा प्रायः अरोम और चिकनी प्रतीत होती है।
Chaakshusha ↔ अचाक्षुष
इंद्रधनुष के सतरंगी दृश्य का अनुभव पूर्णतः चाक्षुष अर्थात आंखों से देखने योग्य होता है।
हवा की गति और गंध का प्रत्यक्ष बोध अचाक्षुष होता है, जिसे त्वचा और नासिका से महसूस किया जाता है।
Shravya ↔ अश्रव्य
मानव कर्ण केवल 20 हर्ट्ज से 20000 हर्ट्ज तक की श्रव्य ध्वनि तरंगों को सुन सकते हैं।
पराश्रव्य और अपश्रव्य तरंगें सामान्य मानव कान के लिए अश्रव्य होती हैं।
Adhomukha ↔ ऊर्ध्वमुख
लज्जा या निराशा के कारण व्यक्ति अधोमुख होकर भूमि की ओर देखने लगता है।
विजय और आत्मविश्वास के क्षणों में मनुष्य ऊर्ध्वमुख होकर आकाश की ओर निहारता है।
Nyaay ↔ अन्याय
अदालत का प्रमुख कर्तव्य निष्पक्ष होकर प्रत्येक नागरिक को न्याय दिलाना है।
समाज में निर्बलों पर होने वाले अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना प्रत्येक जागरूक नागरिक का धर्म है।
Dharm ↔ अधर्म
सत्य, अहिंसा और परोपकार का आचरण करना ही मानव का सच्चा धर्म है।
अधर्म का मार्ग अपनाने वाले दुष्टों का विनाश अंततः निश्चित होता है।
Vivek ↔ अविवेक
संकट की घड़ी में विवेक और धैर्य से काम लेने वाला व्यक्ति हर विपत्ति पार कर लेता है।
क्रोध की अवस्था में अविवेक के वशीभूत होकर लिए गए निर्णय केवल पश्चाताप देते हैं।
Neeti ↔ अनीति
महात्मा विदुर ने शासक को सदा नीति और प्रजा-कल्याण के सिद्धांतों पर चलने का उपदेश दिया।
अनीति और स्वार्थ के बल पर स्थापित किया गया साम्राज्य कभी चिरस्थायी नहीं हो सकता।
Paropkaar ↔ अपकार
वृक्ष और नदियाँ परोपकार के लिए ही फल और जल प्रदान करते हैं।
सज्जन व्यक्ति कभी किसी के साथ अपकार या अहित करने का विचार मन में नहीं लाते।
Sanyam ↔ असंयम
वाणी और इंद्रियों पर संयम रखने से मनुष्य अनेक व्यर्थ के विवादों से बच जाता है।
खान-पान में असंयम बरतने से शरीर रोगों का घर बन जाता है।
Gyaan ↔ अज्ञान
सच्चा ज्ञान मनुष्य के अहंकार को मिटाकर उसे विनम्र और सहिष्णु बनाता है।
अज्ञान के अंधकार में भटकने वाला व्यक्ति अंधविश्वासों का शिकार बन जाता है।
Sahishnuta ↔ असहिष्णुता
धार्मिक सहिष्णुता और आपसी सौहार्द ही भारत की विविधता की वास्तविक पहचान है।
कट्टरता और असहिष्णुता समाज में वैमनस्य और हिंसा को जन्म देती है।
Maryaada ↔ अमर्यादा
भगवान राम ने जीवन के हर मोड़ पर मर्यादा और नैतिक मूल्यों की रक्षा की।
सभा में अमर्यादा पूर्ण आचरण करने वाले सदस्य को सदन से निष्कासित कर दिया गया।
Shuchita ↔ अशुचिता
सार्वजनिक जीवन में धन और विचारों की शुचिता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
मन में छिपी अशुचिता बाहरी पूजा-पाठ से कभी दूर नहीं की जा सकती।
Naitik ↔ अनैतिक
व्यापार में लाभ कमाने के लिए नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए।
अनैतिक साधनों से प्राप्त की गई सफलता क्षणिक और आत्मग्लानि से भरी होती है।
Vairaagya ↔ अनुराग
संसार की नश्वरता को देखकर राजकुमार सिद्धार्थ के मन में वैराग्य उत्पन्न हो गया।
अपने देश और संस्कृति के प्रति गहरा अनुराग रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
Ishwar ↔ अनीश्वर
सच्चे भक्त के लिए समस्त चराचर जगत में ईश्वर की सत्ता का वास है।
अनीश्वर वादी विचारधारा केवल भौतिक जगत को ही सत्य मानती है।
Karm ↔ अकर्म
गीता में श्रीकृष्ण ने फल की चिंता किए बिना केवल निष्काम कर्म करने का संदेश दिया है।
कर्तव्य से विमुख होकर अकर्म की स्थिति में बैठना कायरता और पतन का लक्षण है।
Nyaayochit ↔ अनुचित
मजदूरों को उनकी मेहनत का उचित पारिश्रमिक देना पूरी तरह न्यायोचित है।
बिना किसी प्रमाण के किसी पर झूठा आरोप लगाना अत्यंत अनुचित और निंदनीय है।
Hit ↔ अहित
सच्चे माता-पिता सदैव अपनी संतानों के सर्वांगीण हित की कामना करते हैं।
किसी निर्दोष व्यक्ति का अहित सोचना भी पाप की श्रेणी में आता है।
Ahinsa ↔ हिंसा
महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा को स्वतंत्रता संग्राम का सबसे अचूक अस्त्र बनाया।
हिंसा से कभी किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता।
Asteya ↔ स्तेय
योग के यम नियमों में अस्तेय अर्थात् चोरी न करने के व्रत का बड़ा महत्व है।
स्तेय अर्थात् दूसरों की वस्तु पर अनाधिकृत अधिकार जमाना नैतिक दृष्टि से जघन्य अपराध है।
Aparigraha ↔ परिग्रह
अपरिग्रह का पालन करने वाला साधु केवल जीवन-यापन हेतु आवश्यक वस्तुएँ ही रखता है।
धन-संपत्ति के अत्यधिक परिग्रह से समाज में आर्थिक विषमता और अशांति फैलती है।
Shaaleen ↔ अशिष्ट
शालीन व्यवहार करने वाले व्यक्ति की समाज में सभी लोग सराहना करते हैं।
अशिष्ट स्वभाव का व्यक्ति अपनी कड़वी बातों से दूसरों के मन को ठेस पहुँचाता है।
Shishtaachaar ↔ अशिष्टता
अतिथियों का सत्कार करते समय शिष्टाचार और सौम्यता का परिचय देना हमारी परंपरा है।
बड़ों के सामने अशिष्टता दिखाना सुसंस्कृत होने का लक्षण नहीं है।
Titiksha ↔ असहनशीलता
सुख-दुख और शीत-उष्ण के द्वंद्वों को बिना शिकायत सहना ही तितिक्षा कहलाता है।
असहनशीलता के कारण छोटी-सी असुविधा भी व्यक्ति को विचलित कर देती है।
Nyaaypoorn ↔ अन्यायपूर्ण
पंचों का निर्णय पूरी तरह न्यायपूर्ण और निष्पक्ष था जिससे दोनों पक्ष संतुष्ट हुए।
कमजोर पक्ष पर अन्यायपूर्ण शर्तें थोपना नैतिक दृष्टि से सर्वथा अनुचित है।
Supaatri ↔ अपात्री
मेधावी और परिश्रमी छात्रा को छात्रवृत्ति के लिए सुपात्री माना गया।
अनुचित साधनों का सहारा लेने वाली अपात्री छात्रा को चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
Avichal ↔ डांवाडोल
सत्य के प्रति उसकी निष्ठा कठिन से कठिन प्रलोभन के सामने भी अविचल रही।
कमजोर मनोबल वाले व्यक्ति का निर्णय थोड़ी-सी कठिनाई आते ही डांवाडोल हो जाता है।
Vishwasneeya ↔ अविश्वसनीय
विश्वसनीय साथी जीवन के कठिन दौर में भी कभी साथ नहीं छोड़ता।
अविश्वसनीय व्यक्ति से गोपनीय बातें साझा करना खतरे से खाली नहीं होता।
Suyash ↔ अपयश
वैज्ञानिक ने अपने अविष्कार से पूरे विश्व में देश का सुयश फैलाया।
भ्रष्टाचार के आरोपों से अधिकारी को समाज में भारी अपयश का सामना करना पड़ा।
Sukeerti ↔ अपकीर्ति
त्याग और बलिदान से अर्जित की गई सुकीर्ति सदियों तक जीवित रहती है।
कायरता का प्रदर्शन करने से योद्धा की जीवन भर की कमाई अपकीर्ति में बदल गई।
Pratishtha ↔ अप्रतिष्ठा
सत्य और निष्ठा के साथ कार्य करके उसने समाज में उच्च प्रतिष्ठा प्राप्त की।
झूठे वादों के कारण राजनेता को जनता के बीच अप्रतिष्ठा झेलनी पड़ी।
Shraddheya ↔ अश्रद्धेय
श्रद्धेय गुरुजी के चरणों में बैठकर शिष्यों ने जीवन का गूढ़ ज्ञान प्राप्त किया।
चरित्रहीन आचरण के कारण वह व्यक्ति समाज की दृष्टि में अश्रद्धेय हो गया।
Poojya ↔ अपूज्य
माता-पिता और गुरुजन प्रत्येक व्यक्ति के लिए पूज्य होते हैं।
पापकर्मों में डूबा व्यक्ति अपने व्यवहार से स्वयं को अपूज्य बना लेता है।
Maanya ↔ अमान्य
संविधान के अंतर्गत बनाए गए नियम सभी नागरिकों के लिए मान्य होते हैं।
गलत दस्तावेजों के आधार पर किया गया आवेदन चयन समिति द्वारा अमान्य कर दिया गया।
Neetigya ↔ अनीतिज्ञ
नीतिज्ञ मंत्री ने राजा को युद्ध के संकट से बचाकर शांति का मार्ग सुझाया।
अनीतिज्ञ सलाहकारों की संगति में रहकर राजा ने विनाशकारी निर्णय ले लिए।
Aadarshvaadi ↔ अवसरवादी
आदर्शवादी नेता ने अपने सिद्धांतों की रक्षा के लिए सत्ता का मोह त्याग दिया।
अवसरवादी राजनीतिज्ञ निजी लाभ देखकर पल भर में अपना पाला बदल लेते हैं।
Karmathata ↔ अकर्मण्यता
किसान की कर्मठता के कारण ही बंजर धरती पर भी लहलहाती फसलें तैयार हो गईं।
अकर्मण्यता और आलस्य के कारण वह समृद्ध विरासत को भी सहेज नहीं सका।
Karmnishth ↔ अकर्मण्य
कर्मनिष्ठ कार्यकर्ता ने बिना किसी शिकायत के दिन-रात समाजसेवा का कार्य किया।
अकर्मण्य व्यक्ति केवल भाग्य को कोसता रहता है और स्वयं कोई प्रयास नहीं करता।
Praamaanikata ↔ अप्रामाणिकता
इतिहासकार ने प्राचीन शिलालेखों के आधार पर घटना की प्रामाणिकता सिद्ध की।
दस्तावेजों में अप्रामाणिकता पाए जाने पर पुलिस ने फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज किया।
Dharmaacharan ↔ अधर्माचरण
दैनिक जीवन में धर्माचरण का पालन करने से मनुष्य का आत्मबल और तेज बढ़ता है।
अधर्माचरण और छल-प्रपंच से अर्जित धन कभी सुख और शांति नहीं दे सकता।
Saadhuta ↔ असाधुता
उनकी वाणी और व्यवहार में झलकती साधुता ने क्रूर डाकू का भी हृदय परिवर्तन कर दिया।
शत्रु की असाधुता और विश्वासघात के कारण शांति वार्ता बीच में ही टूट गई।
Hinsak ↔ अहिंसक
जंगल में हिंसक भेड़ियों का झुंड देख कर यात्री भयभीत हो गए।
खरगोश अत्यंत अहिंसक और सीधा प्राणी है जो किसी को कष्ट नहीं पहुँचाता।
Andaj ↔ जरायुज
पक्षी, सर्प और छिपकली अंडज प्राणी हैं जिनकी संतानों का जन्म अंडों से होता है।
मनुष्य, गाय और हिरण जरायुज प्राणी हैं जो सीधे बच्चों को जन्म देते हैं।
Paalya ↔ अपाल्य
भेड़ और बकरी स्वभाव से पाल्य पशु हैं जिन्हें मनुष्य सरलता से पाल लेता है।
तेंदुआ और लकड़बग्घा अपाल्य जीव हैं जिनका स्वभाव स्वतंत्र और हिंसक रहता है।
Danshtree ↔ अदंष्ट्री
चीता और सूअर दंष्ट्री प्राणी हैं जिनके नुकीले दांत शिकार को चीर डालते हैं।
कछुआ और पक्षी अदंष्ट्री जीव हैं जिनके मुख में दांतों के बजाय चोंच या जबड़ा होता है।
Sapaksh ↔ अपक्ष
सपक्ष पक्षी आकाश की ऊंचाइयों में बिना किसी सहारे के तैरते हैं।
सांप और केंचुआ अपक्ष जीव हैं जो जमीन पर रेंगकर आगे बढ़ते हैं।
Ashwa ↔ घोड़ी
तेज रफ्तार अश्व युद्धभूमि में अपने सवार को सुरक्षित निकाल लाया।
घोड़ी अपने नन्हें बछेड़े की देखभाल में लगी हुई थी।
Pakwa ↔ अपक्व
पक्व फल पेड़ से अपने आप टूटकर नीचे गिर जाते हैं।
अपक्व भोजन का सेवन करने से पाचन क्रिया बिगड़ सकती है।
Namkeen ↔ अलौना
शाम की चाय के साथ कुरकुरा नमकीन नाश्ता सबको बहुत पसंद आया।
उच्च रक्तचाप के मरीज को चिकित्सक ने अलौना भोजन करने का निर्देश दिया।
Paachak ↔ अपाचक
भोजन के उपरांत भुने जीरे और हींग का चूर्ण पाचक औषधि का काम करता है।
अत्यधिक शीतल पेय भोजन के पाचन रस को धीमा करके अपाचक प्रभाव छोड़ता है।
Suswaadu ↔ अस्वादु
उत्सव में बने सुस्वादु पकवानों की सभी अतिथियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।
गलत अनुपात में मसाले डालने से पूरा सूप अस्वादु और पीने में अरुचिकर हो गया।
Poshak ↔ अपोषक
अंकुरित अनाज और बादाम शरीर के लिए अत्यंत पोषक आहार सिद्ध होते हैं।
मैदे से बने तले हुए स्नैक्स अपोषक होते हैं और केवल पेट भरते हैं।
Bhojya ↔ अभोज्य
गेहूं, चावल और दालें मनुष्य के मुख्य भोज्य पदार्थों में गिने जाते हैं।
फफूंद लगी हुई ब्रेड अभोज्य हो जाती है और उसे फेंक देना ही उचित है।
Khaadya ↔ अखाद्य
खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने छापे मारे।
प्लास्टिक और रासायनिक रंग अखाद्य वस्तुएं हैं जिन्हें भोजन में नहीं मिलाना चाहिए।
Peya ↔ अपेय
नारियल पानी और नीबू शिकंजी गर्मियों में स्वास्थ्यवर्धक पेय माने जाते हैं।
मदिरा और दूषित नाले का पानी मानव स्वास्थ्य के लिए सर्वथा अपेय है।
Sika ↔ अधपका
तंदूर में अच्छी तरह सिका हुआ नान खस्ता और सुगंधित था।
हड़बड़ी में निकाला गया अधपका पराठा खाने पर पेट में भारीपन हो गया।
Alpaahaar ↔ पूर्णाहार
यात्रा के दौरान उसने केवल फल और चाय का अल्पाहार लिया।
दोपहर के समय दाल-चावल, रोटी और सब्जी का पूर्णाहार ग्रहण करना चाहिए।
Alpaahaari ↔ बहुभोजी
योग साधक अल्पाहारी होते हैं ताकि उनका शरीर ध्यान के समय हल्का रहे।
पहलवान बहुभोजी होते हैं जिन्हें भारी व्यायाम के लिए अधिक कैलोरी चाहिए।
Swaadu ↔ अस्वादु
घी और मेवों से युक्त लड्डू अत्यंत स्वादु और मनभावन थे।
धूप में रखा रहने के कारण दूध फट गया और अस्वादु हो गया।
Ruchikar ↔ अरुचिकर
सजी हुई सलाद की थाली देखने में अत्यंत रुचिकर और ताजी लग रही थी।
जली हुई सब्जी की महक आने पर वह पूरी तरह अरुचिकर हो गई।
Lavan ↔ अलवण
सब्जी में उचित मात्रा में लवण मिलाने से उसका स्वाद निखरता है।
व्रत के फलाहार में अलवण भोजन ही ग्रहण किया जाता है।
Amla ↔ क्षार
सिरके और नीबू में प्राकृतिक अम्ल पाया जाता है जो खट्टापन देता है।
बेकिंग सोडा में क्षार होता है जो ढोकले को फूलाता है।
Aamleeya ↔ क्षारीय
अधिक कोला और सोड़ा पीने से पेट में अम्लीय प्रभाव बढ़ जाता है।
खीरे का रस और नारियल पानी पेट को क्षारीय आधार देकर एसिडिटी घटाते हैं।
Pakwata ↔ अपक्वता
केले में पक्वता आते ही छिलका पीला और गूदा मीठा हो जाता है।
अंगूर में अपक्वता रहने पर उसका स्वाद कसैला और खट्टा लगता है।
Khameeri ↔ अखमीरी
खमीरी नान तंदूर में फूलकर स्पंज की तरह मुलायम बन जाती है।
रोजमर्रा की रोटी अखमीरी आटे से तवे पर सेकी जाती है।
Phalaahaari ↔ अन्नाहारी
व्रत रखने वाले लोग फलाहारी भोजन के रूप में कूटू की पूरी और सिंघाड़ा लेते हैं।
साधारण दिनों में लोग अन्नाहारी होकर गेहूं और चावल पर निर्भर रहते हैं।
Chhana ↔ अछना
छलनी से छना हुआ मैदा एकदम चिकना और गांठ-रहित होता है।
अछना आटा चोकर सहित होने के कारण पाचन के लिए अधिक स्वास्थ्यवर्धक है।
Ruchya ↔ अरुच्य
अदरक और नीबू का अचार भोजन को अत्यंत रुच्य बना देता है।
बासी तेल की दुर्गंध से पूरी सब्जी अरुच्य हो गई और किसी ने नहीं खाई।
Atibhojan ↔ उपवास
दावत में अतिभोजन करने के कारण उसे रात भर पेट दर्द से जूझना पड़ा।
हफ्ते में एक दिन का उपवास पाचन तंत्र को विश्राम और ताजगी देता है।
Bhaksha ↔ अभक्ष
गेहूं और फल मानव के लिए सर्वमान्य भक्ष पदार्थ हैं।
सड़े-गले विषैले फल धार्मिक और स्वास्थ्य दोनों दृष्टि से अभक्ष हैं।
Bhakshya ↔ अभक्ष्य
ताजा पका हुआ भोजन ही शरीर के लिए भक्ष्य और लाभकारी होता है।
कीड़े लगी हुई दाल और सड़े फल स्वास्थ्य के लिए अभक्ष्य हैं।
Ajeerna ↔ सुजीर्ण
बिना भूख के अधिक खा लेने से पेट में अजीर्ण और खट्टी डकारें होने लगीं।
हल्का आहार लेने से भोजन का सुजीर्ण होकर शरीर को शक्ति मिलती है।
Paachakata ↔ अपाचकता
हींग और अजवाइन मिलाने से दाल की पाचकता कई गुना बढ़ जाती है।
कच्चे मैदे की अपाचकता आंतों में रुकावट पैदा कर सकती है।
Annapoorn ↔ अन्नहीन
नई फसल कटने के बाद किसान का भंडार अन्नपूर्ण हो गया।
अकाल के समय सूखा पड़ने से गाँव के गरीब परिवार अन्नहीन हो गए।
Namkeenpan ↔ अलौनापन
समुद्री नमकीनपन के कारण समुद्री शैवाल का स्वाद अनोखा होता है।
सब्जी में नमक न डालने से उसका अलौनापन गले से नहीं उतर रहा था।
Adhpaka ↔ सुरांधा
जल्दबाजी में तवे से उतारी गई अधपकी रोटी पेट में दर्द कर सकती है।
धीमी आंच पर पकी सुरांधा खीर का स्वाद बेमिसाल था।
Pishta ↔ अपिष्ट
चक्की में पिष्ट गेहूं के आटे से कोमल रोटियाँ बनती हैं।
अपिष्ट साबुत गेहूं को उबालकर दलिया बनाया जाता है।
Supakwa ↔ अपक्व
सुपक्व आम की महक से पूरा कमरा भर गया था।
अपक्व फल खाने से पेट में मरोड़ हो सकती है।
Madya ↔ अमृत
मद्य पान करने वाले मनुष्य की समाज में प्रतिष्ठा समाप्त हो जाती है।
संतों की वाणी कानों के लिए अमृत तुल्य मधुर होती है।
Annadaata ↔ भिखारी
खेतों में पसीना बहाने वाला किसान ही देश का सच्चा अन्नदाता है।
द्वार पर आए भूखे भिखारी को अन्न और जल देना मानवीय कर्तव्य है।
Rasoiya ↔ अतिथि
दक्ष रसोइया स्वादिष्ट और स्वच्छ भोजन तैयार करने में निपुण था।
घर आए अतिथि का सत्कार प्रेमपूर्वक भोजन कराकर किया गया।
Amritmay ↔ विषैला
भूखे यात्री के लिए कुएं का मीठा पानी अमृतमय प्रतीत हुआ।
सड़े हुए मशरूम से बना सूप विषैला और जानलेवा साबित हो सकता है।
Adhikaari ↔ अधीनस्थ
जिले के वरिष्ठ अधिकारी ने कानून-व्यवस्था की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई।
अधीनस्थ कर्मचारियों ने निष्ठापूर्वक दिए गए निर्देशों का पालन किया।
Neta ↔ अनुयायी
सच्चा नेता संकट की स्थिति में आगे रहकर दल का मार्गदर्शन करता है।
अनुयायी अपने मार्गदर्शक के आदर्शों पर चलकर समाज में बदलाव लाते हैं।
Agraj ↔ अनुज
अग्रज का कर्तव्य होता है कि वह छोटे भाइयों को सन्मार्ग और सुरक्षा प्रदान करे।
अनुज लक्ष्मण ने वनवास में भी अपने बड़े भाई श्रीराम की निरंतर सेवा की।
Agraja ↔ अनुजा
अग्रजा अपनी छोटी बहनों को पढ़ाई और संस्कारों में मार्गदर्शन देती है।
अनुजा अपनी बड़ी बहन के पदचिह्नों पर चलकर परीक्षा में सफल हुई।
Atithi ↔ मेजबान
भारतीय संस्कृति में अतिथि देवो भवः कहकर मेहमान का आदर किया जाता है।
मेजबान ने अतिथियों की सुविधा और खान-पान का अत्यंत उत्तम प्रबंध किया।
Darshak ↔ अभिनेता
नाटक के मार्मिक दृश्य को देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध और भावुक हो गए।
कुशल अभिनेता ने अपने जीवंत अभिनय से मंच पर पात्र को साकार कर दिया।
Abhibhaavak ↔ आश्रित
विद्यालय की बैठक में अभिभावक अपने बच्चों की प्रगति पर चर्चा करने पहुंचे।
बुजुर्ग और छोटे बच्चे परिवार के अन्य सदस्यों पर आश्रित होते हैं।
Apna ↔ पराया
विपत्ति के समय ही परीक्षा होती है कि कौन अपना है और कौन केवल दिखावे का साथी।
दूसरों की भलाई करने वाला व्यक्ति कभी किसी को पराया नहीं समझता।
Sambaddha ↔ असंबद्ध
महाविद्यालय विश्वविद्यालय से विधिवत संबद्ध होकर शिक्षा प्रदान करता है।
विवाद से पूरी तरह असंबद्ध लोगों को मुकदमे में घसीटना अनुचित है।
Anugat ↔ बागी
अनुगत सेनापति ने राजा के हर आदेश का तत्काल और निष्ठापूर्वक पालन किया।
बागी सरदारों ने सामंतशाही के विरुद्ध हथियार उठाकर जंग का ऐलान कर दिया।
Avivaahit ↔ विवाहित
अविवाहित युवा अपनी पढ़ाई और करियर पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रहा था।
विवाहित दंपति ने मिलकर नए गृहस्थ जीवन की सुंदर शुरुआत की।
Sakutumb ↔ अकेला
निमंत्रण पत्र पर आदरपूर्वक लिखा था कि आप समारोह में सकुशल व सकुटुंब पधारें।
अजनबी शहर में अकेला रहने पर व्यक्ति को परिजनों की कमी बहुत खलती है।
Sagotraj ↔ अगोत्रज
सगोत्रज भाइयों ने पैतृक संपत्ति के विभाजन का मामला आपस में सुलझा लिया।
अगोत्रज व्यापारी के साथ पारदर्शी समझौते के आधार पर अनुबंध किया गया।
Kutumbi ↔ अजनबी
संकट के समय सभी कुटुंबी एक छत के नीचे जमा होकर सहायता करते हैं।
अजनबी व्यक्ति से कोई भी निजी जानकारी साझा करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।
Sahodar ↔ अन्योधर
सहोदर भाइयों के बीच का प्रेम बचपन की स्मृतियों से सींचा हुआ होता है।
अन्योधर भाई होने पर भी दोनों ने पैतृक संपत्ति के मामले को शांति से सुलझाया।
Parijan ↔ अपरिचित
दीपावली के शुभ अवसर पर सभी परिजन एक साथ बैठकर लक्ष्मी पूजन करते हैं।
सड़क पर किसी अपरिचित व्यक्ति से अनावश्यक विवाद में नहीं उलझना चाहिए।
Naatedaar ↔ अजनबी
विवाह के शुभ अवसर पर दूर-दराज से नातेदार घर पहुंचे।
रेल यात्रा में साथ बैठे अजनबी व्यक्ति से भी उसने शालीनता से बात की।
Prajapaalak ↔ अत्याचारी
प्रजापालक राजा के शासन में दीन-दुखी भी निर्भय होकर जीवन यापन करते थे।
अत्याचारी शासक ने भारी कर लगाकर प्रजा को भुखमरी के कगार पर धकेल दिया।
Sahodara ↔ अन्योदरा
सहोदरा बहनें एक-दूसरे के सुख-दुख को बिना कहे ही समझ लेती हैं।
अन्योदरा बहन के साथ भी उसने कभी सौतेला व्यवहार नहीं किया और पूरा मान दिया।
Samkaksh ↔ अधीनस्थ
समकक्ष अधिकारियों ने मिलकर नीति निर्माण पर विचार-विमर्श किया।
अधीनस्थ कर्मचारियों ने वरिष्ठों के मार्गदर्शन में काम पूरा किया।
Sahmat ↔ असहमत
व्यापारिक समझौते की शर्तों पर दोनों भागीदार पूरी तरह सहमत थे।
परियोजना के बजट को लेकर कई सदस्य असहमत होकर पुनर्विचार की मांग करने लगे।
Amoolya ↔ तुच्छ
गुरु का मार्गदर्शन जीवन में अमूल्य संपत्ति के समान होता है।
क्षणिक क्रोध के लिए तुच्छ वस्तु के पीछे संबंध बिगाड़ना समझदारी नहीं।
Anmol ↔ सस्ता
माता-पिता का स्नेह संसार की सबसे अनमोल निधि है।
सस्ता सामान अक्सर टिकाऊ नहीं होता और शीघ्र खराब हो जाता है।
Ameeri ↔ गरीबी
अमीरी का घमंड कभी भी इंसानियत पर भारी नहीं पड़ना चाहिए।
ईमानदारी और लगन से काम करके उसने गरीबी के अंधकार को दूर भगाया।
Adhishesh ↔ घाटा
इस वित्तीय वर्ष के अंत में बजट में दस करोड़ का अधिशेष दर्ज हुआ।
अनावश्यक सरकारी व्यय बढ़ने से वित्तीय घाटा तेजी से बढ़ गया।
Pratiphal ↔ अपव्यय
शिक्षा पर किया गया निवेश जीवन भर सुंदर प्रतिफल देता है।
दिखावे की पार्टियों में लाखों रुपये उड़ाना कोरा अपव्यय है।
Arthalaabh ↔ अर्थहानि
नई तकनीक अपनाने से उत्पादन लागत घटी और भारी अर्थलाभ हुआ।
अनुबंध टूटने के कारण फर्म को भारी अर्थहानि का सामना करना पड़ा।
Kifaayat ↔ अपव्यय
गृहस्थी के प्रबंधन में किफायत बरतने से संकट के समय सहायता मिलती है।
सार्वजनिक धन का अपव्यय किसी भी लोक-कल्याणकारी सरकार के लिए अनुचित है।
Mitavyayee ↔ अपव्ययी
मितव्ययी व्यक्ति सोच-समझकर ही आवश्यक वस्तुओं पर धन लगाता है।
अपव्ययी पुत्र ने अपने पूर्वजों की संचित पैतृक संपत्ति कुछ ही वर्षों में उड़ा दी।
Mitavyayita ↔ अपव्ययिता
गांधीजी ने जीवन में सादगी और मितव्ययिता के महत्व पर सदा बल दिया।
उत्सवों में अनावश्यक अपव्ययिता समाज में दिखावे की होड़ पैदा करती है।
Sanchay ↔ अपव्यय
बुजुर्गों ने सदा धर्मपूर्वक धन के संचय की सीख दी है।
संसाधनों का अपव्यय आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों पर कुठाराघात है।
Arjan ↔ व्यय
ज्ञान और धन का अर्जन कठिन साधना और समर्पण मांगता है।
आय से अधिक व्यय करने वाला व्यक्ति कभी भी चिंतामुक्त नहीं रह सकता।
Savetan ↔ अवैतनिक
कर्मचारियों को बीमारी के दौरान नियमानुसार सवेतन अवकाश दिया जाता है।
समाजसेवी संस्था में सचिव का पद पूरी तरह अवैतनिक और सेवाभावी है।
Agrim ↔ बकाया
मकान मालिक ने अनुबंध करते समय दो माह का अग्रिम किराया लिया।
बिजली का पिछला बकाया बिल जमा न करने पर कनेक्शन काट दिया गया।
Bayaana ↔ अंतिम-भुगतान
जमीन का सौदा पक्का होते ही खरीदार ने बयाना के रूप में एक लाख रुपये दिए।
रजिस्ट्री के दिन बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से अंतिम-भुगतान संपन्न किया गया।
Saakh ↔ अनादर
समय पर ऋण चुकाने से व्यापारी की बाजार में साख बढ़ जाती है।
चेक बाउंस होने से वित्तीय संस्थाओं में व्यापारी का अनादर होता है।
Ankit-moolya ↔ वास्तविक-मूल्य
दुकानदार ने पुस्तक के अंकित-मूल्य पर बीस प्रतिशत की छूट दी।
छूट घटाने के बाद जो भुगतान किया गया, वही वस्तु का वास्तविक-मूल्य था।
Aghoshit-aay ↔ घोषित-आय
छापेमारी के दौरान जांच दल ने करोड़ों की अघोषित-आय पकड़ी।
वार्षिक आयकर रिटर्न में व्यक्ति अपनी समस्त घोषित-आय का विवरण प्रस्तुत करता है।
Chhoot ↔ अधिभार
नए साल के उपलक्ष्य में कपड़ों की खरीद पर बीस प्रतिशत छूट मिल रही है।
अत्यधिक बिजली खपत करने वाले औद्योगिक उपभोक्ताओं पर विशेष अधिभार लगाया गया।
Arthavaan ↔ अर्थहीन
अनुभवी चार्टर्ड एकाउंटेंट ने फर्म के लिए अत्यंत अर्थवान योजना प्रस्तुत की।
बिना किसी शोध के किया गया वित्तीय निवेश पूरी तरह अर्थहीन साबित हुआ।
Lakshmi ↔ अलक्ष्मी
दीपावली की रात श्रद्धालु माता लक्ष्मी का विधिपूर्वक पूजन करते हैं।
घर में कलह और गंदगी रहने से अलक्ष्मी का वास माना जाता है।
Adhishulk ↔ छूट
हवाई यात्रा के टिकट पर व्यस्त समय के दौरान विशेष अधिशुल्क जोड़ दिया गया।
छात्रों को शैक्षणिक भ्रमण के लिए रेल टिकट में पचास प्रतिशत छूट दी गई।
Arthopaarjan ↔ अर्थव्यय
शिक्षा पूरी करने के बाद युवक ने सम्मानजनक अर्थोपार्जन का साधन खोजा।
विलासितापूर्ण जीवनशैली पर किया गया अर्थव्यय व्यक्ति को बचत से वंचित कर देता है।
Achal-sampatti ↔ चल-संपत्ति
मकान, जमीन और फ्लैट अचल-संपत्ति की श्रेणी में आते हैं जिन्हें स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।
सोना, नकदी और वाहन चल-संपत्ति माने जाते हैं जिन्हें आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है।
Arthadand ↔ पारितोषिक
यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर चालक पर दो हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
साहसी कार्य करने वाले बालक को गणतंत्र दिवस पर प्रशस्ति पत्र और नकद पारितोषिक दिया गया।
Udyamee ↔ अकर्मण्य
उद्यमी मनुष्य कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी नए अवसर तलाश लेता है।
अकर्मण्य लोग हाथ पर हाथ धरे बैठे रहकर केवल भाग्य को दोष देते रहते हैं।
Shilpee ↔ अनाड़ी
कुशल शिल्पी ने संगमरमर के पत्थर को तराशकर सजीव मूर्ति का रूप दे दिया।
अनाड़ी कारीगर ने महंगे लकड़ी के दरवाजे को काटकर पूरी तरह बिगाड़ दिया।
Abhyaasee ↔ अनभ्यासी
संगीत का नियमित अभ्यासी गायक मंच पर बिना किसी झिझक के गाता है।
अनभ्यासी लेखक के लिए एक छोटा सा निबंध लिखना भी दुष्कर हो जाता है।
Prashikshit ↔ अप्रशिक्षित
प्रशिक्षित बचाव दल ने बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
आधुनिक मशीनों को अप्रशिक्षित मजदूरों के हाथों में सौंपना जोखिम भरा है।
Vyaavasaayik ↔ अव्यावसायिक
सफल होने के लिए कार्यस्थल पर पूर्णतः व्यावसायिक दृष्टिकोण अपनाना पड़ता है।
अव्यावसायिक व्यवहार के कारण कई प्रतिभाशाली लोग भी अपने करियर में पिछड़ जाते हैं।
Lagan ↔ अनमनापन
विद्यार्थी की सच्ची लगन देखकर गुरु ने उसे अपने सभी गूढ़ रहस्य सिखाए।
कार्य में अनमनापन रहने से कोई भी कार्य समय पर और सफाई से पूरा नहीं हो पाता।
Karmasheelta ↔ अकर्मण्यता
जापान के नागरिकों की निरंतर कर्मशीलता ने युद्ध के बाद देश को समृद्ध बनाया।
अकर्मण्यता किसी भी समाज को पतन और पराधीनता के गर्त में धकेल देती है।
Utpaadak ↔ अनुत्पादक
उद्योगों में उत्पादक श्रम को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष बोनस दिया जाता है।
अनुत्पादक व्यय पर रोक लगाकर बजट को घाटे से बाहर निकाला जा सकता है।
Utpaadakata ↔ अनुत्पादकता
आधुनिक कृषि उपकरणों ने प्रति हेक्टेयर उत्पादकता को दोगुना कर दिया।
कारखाने में बार-बार बिजली गुल होने से भारी अनुत्पादकता की स्थिति पैदा हो गई।
Shramasaadhya ↔ अनायास
पहाड़ काटकर मार्ग बनाना अत्यंत श्रमसाध्य और जोखिम भरा कार्य था।
प्रकृति की कृपा से फसल को अनायास ही पर्याप्त वर्षा का जल मिल गया।
Niyojan ↔ अनियोजन
उचित आर्थिक नियोजन के बिना कोई भी बड़ा उद्योग सफल नहीं हो सकता।
अनियोजन और अव्यवस्था के कारण अच्छा-खासा प्रोजेक्ट भी समय से पिछड़ गया।
Yojanaabaddh ↔ अनियोजित
योजनाबद्ध तरीके से अध्ययन करने वाले छात्र परीक्षा में घबराते नहीं हैं।
अनियोजित शहरीकरण के कारण महानगरों में जलभराव की गंभीर समस्या खड़ी हो गई।
Sangathit ↔ असंगठित
संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को पेंशन और स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिलता है।
असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा दिलाने के लिए कानून बनाए गए हैं।
Siddhi ↔ असिद्धि
कठोर तपस्या और निरंतर श्रम के पश्चात साधक को आत्मज्ञान की सिद्धि प्राप्त हुई।
प्रयासों में ढिलाई रखने पर कार्य में असिद्धि का मुंह देखना पड़ता है।
Kritakaarya ↔ अकृतकार्य
कठिन अभियान को सफलतापूर्वक पूरा करके कृतकार्य सैनिक गर्व से लौटे।
योजना के अभाव में अकृतकार्य दल को खाली हाथ वापस आना पड़ा।
Saphal ↔ असफल
दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम से साधारण बालक भी सफल नागरिक बन सकता है।
शुरुआती दौर में असफल होने पर भी साहसी व्यक्ति कभी निराश नहीं होता।
Athak ↔ थका-हारा
अथक प्रयासों के बल पर वैज्ञानिक दल ने मंगल अभियान को सफल बनाया।
दिन भर की चिलचिलाती धूप में मजदूरी करने के बाद वह थका-हारा घर लौटा।
Aklaant ↔ क्लांत
अक्लांत परिश्रमी व्यक्ति लक्ष्य प्राप्ति तक कभी रुकने का नाम नहीं लेता।
लंबी दौड़ पूरी करने के बाद धावक अत्यंत क्लांत अवस्था में जमीन पर बैठ गया।
Dridhasankalp ↔ अनिर्णय
दृढ़संकल्प के बल पर पर्वतारोही ने माउंट एवरेस्ट की चोटी फतह की।
लगातार अनिर्णय की स्थिति में बने रहने से अच्छे अवसर हाथ से निकल जाते हैं।
Kaaryabhaar ↔ अवकाश
नए पद पर पदोन्नत होते ही अधिकारी पर भारी कार्यभार आ गया।
साल भर की निरंतर व्यस्तता के बाद कर्मचारियों को ग्रीष्मकालीन अवकाश मिला।
Rojgaaronmukh ↔ अनुत्पादक
युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं।
कोरी सैद्धांतिक बातें सिखाना आधुनिक युग में अनुत्पादक सिद्ध होता है।
Udyamavaan ↔ अकर्मण्य
उद्यमवान पुरुष अपने बाहुबल से बंजर भूमि को भी उपजाऊ बना देता है।
अकर्मण्य व्यक्ति उत्तम अवसर मिलने पर भी कोई कदम नहीं उठाता।
Yatna ↔ अयत्न
जंगल की आग बुझाने के लिए ग्रामीणों ने हर संभव यत्न किया।
सिद्ध संतों के मुख से ज्ञान की बातें अयत्न ही प्रवाहित होती हैं।
Saprayaas ↔ अनायास
विदेशी भाषा सीखने के लिए सप्रयास व्याकरण और शब्दावली रटनी पड़ती है।
मातृभाषा तो बच्चा अपने परिवार में अनायास ही बोलना सीख जाता है।
Saadhya ↔ असाध्य
नियमित व्यायाम और संतुलित आहार से कई रोग पूरी तरह साध्य हो जाते हैं।
लापरवाही के चलते जब रोग अंतिम चरण में पहुंच जाए तो वह असाध्य बन जाता है।
Shramasheel ↔ अनुद्यमी
श्रमशील समुदाय अपनी कड़ी मेहनत से बंजर धरती पर भी फसलें उगा लेता है।
अनुद्यमी लोग संसाधनों से संपन्न होकर भी कोई नया कार्य आरंभ नहीं कर पाते।
Adheekshak ↔ अधीनस्थ
अधीक्षक ने सभी वार्डों का औचक निरीक्षण करके व्यवस्था का जायजा लिया।
अधीनस्थ कर्मचारियों ने अधीक्षक द्वारा दिए गए निर्देशों का तुरंत पालन किया।
Kaaryaanubhav ↔ अनभिज्ञता
दस वर्षों के कार्यानुभव के आधार पर उन्हें इस विशाल परियोजना का प्रमुख बनाया गया।
नियमों के प्रति अनभिज्ञता के कारण नए कर्मचारी से फॉर्म भरने में त्रुटि हो गई।
Nipunata ↔ अकुशलता
सर्जन ने अद्भुत निपुणता के साथ जटिल हृदय प्रत्यारोपण पूरा किया।
ड्राइवर की अकुशलता के कारण बस मोड़ पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
Kaaryakushalta ↔ अक्षमता
कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए नियमित कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं।
नेतृत्व की अक्षमता के चलते कंपनी घाटे से उबरने में विफल रही।
Anubhavee ↔ नौसिखिया
तूफान में जहाज को सुरक्षित किनारे लाने का श्रेय अनुभवी नाविक को जाता है।
नौसिखिया तैराक को गहरे पानी में जाने से पहले प्रशिक्षक की सहायता लेनी चाहिए।
Praveenata ↔ अकुशलता
सॉफ्टवेयर कोडिंग में अपनी प्रवीणता के कारण उसे विदेश में उच्च पद मिला।
तकनीकी अकुशलता के कारण डाटा ट्रांसफर में गंभीर त्रुटियां आ गईं।
Athak-parishram ↔ आलस्य
किसानों के अथक-परिश्रम से ही बंजर धरती पर लहलहाती फसलें खड़ी हुईं।
आलस्य के कारण मनुष्य सुनहरे अवसर भी अपने हाथों से गंवा देता है।
Kaaryapranaalee ↔ अव्यवस्था
पारदर्शी कार्यप्रणाली अपनाने से कार्यालय में भ्रष्टाचार समाप्त हो गया।
अव्यवस्था के चलते अस्पताल में मरीजों को घंटों कतार में खड़े रहना पड़ा।
Suvyavasthit ↔ अव्यवस्थित
सुव्यवस्थित पुस्तकालय में कोई भी पुस्तक ढूंढना अत्यंत सरल होता है।
अव्यवस्थित दफ्तर में फाइलें इधर-उधर बिखरी रहने से कामकाज बाधित होता है।
Kaaryadaksh ↔ अयोग्य
कार्यदक्ष अभियंता ने मशीन की खराबी को तुरंत पहचानकर ठीक कर दिया।
अयोग्य कर्मियों के कारण महत्वपूर्ण परियोजना समय पर पूरी न हो सकी।
Pahalkarta ↔ अनुगामी
साहसी पहलकर्ता नए उद्योग स्थापित करके दूसरों के लिए मार्ग प्रशस्त करता है।
रूढ़िवादी अनुगामी केवल दूसरों द्वारा बनाए गए ढर्रे पर ही चलना जानता है।
Ateet ↔ अनागत
इतिहासकार अतीत के गौरवशाली अध्यायों की खोज में लगे रहते हैं।
अनागत संकट की पूर्व तैयारी कर लेने से समाज सुरक्षित रहता है।
Nitya ↔ अनित्य
आत्मा को नित्य और अविनाशी माना गया है जिसका कभी नाश नहीं होता।
संसार के सभी भौतिक सुख अनित्य हैं और समय के साथ समाप्त हो जाते हैं।
Samakaaleen ↔ असमकालीन
तुलसीदास और अकबर एक ही कालखंड के प्रसिद्ध समकालीन व्यक्तित्व थे।
कालिदास और कबीर सर्वथा असमकालीन कवि थे जिनके जीवनकाल में सदियों का अंतर था।
Poorvaahn ↔ अपराह्न
कार्यालय की महत्वपूर्ण बैठक पूर्वाह्न दस बजे आयोजित की गई है।
अपराह्न के समय धूप ढलने पर बच्चे मैदान में खेलने के लिए निकलते हैं।
Paurvaahnik ↔ अपराह्निक
वैदिक अनुष्ठानों में पौर्वाह्निक कृत्यों का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है।
अपराह्निक सभा में दिन भर के निर्णयों की समीक्षा की गई।
Arunoday ↔ गोधूलि
अरुणोदय होते ही पक्षियों का सुमधुर कलरव वन में गूंजने लगा।
गोधूलि बेला में चरवाहे अपनी गायों को चराकर घर की ओर लौटने लगे।
Atisheeghra ↔ धीमे
रोगी की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे अतिशीघ्र अस्पताल पहुंचाया गया।
पहाड़ी रास्तों पर वाहन को बहुत धीमे और संभलकर चलाना चाहिए।
Avilamb ↔ सविंलब
आदेश प्राप्त होते ही पुलिस दल अविलंब घटनास्थल के लिए रवाना हो गया।
तकनीकी बाधाओं के कारण परियोजना की रिपोर्ट सविंलब प्रस्तुत की जा सकी।
Saamayik ↔ असामयिक
किसानों को समय पर खाद-बीज का वितरण एक अत्यंत सामयिक कदम था।
युवा खिलाड़ी के असामयिक निधन से संपूर्ण खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
Samayochit ↔ असामयिक
अग्निशामकों की समयोचित सहायता से विशाल मॉल को जलने से बचा लिया गया।
फसल कटाई के समय असामयिक ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
Samayabaddh ↔ अनियत
मेट्रो रेल परियोजना को समयबद्ध तरीके से तीन वर्षों में पूर्ण कर लिया गया।
अनियत कार्यप्रणाली के कारण कई अदालतें मुकदमों के बोझ तले दबी रहती हैं।
Samayanishtha ↔ अनियमितता
जर्मनी और जापान में नागरिकों की समयनिष्ठा पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।
दफ्तरों में उपस्थिति की अनियमितता को रोकने के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी लगाई गई।
Udbhav ↔ अवसान
हिमालय की चोटियों से पवित्र गंगा नदी का उद्भव होता है।
दिन ढलते ही सूर्य के अवसान के साथ ही चारों ओर गोधूलि बेला छा गई।
Pratham ↔ अंतिम
दौड़ प्रतियोगिता में प्रथम आने वाले धावक को स्वर्ण पदक मिला।
अभियान के अंतिम चरण में सभी सैनिकों ने पूरी शक्ति झोंक दी।
Aadya ↔ अन्त्य
ऋग्वेद मानव जाति की सबसे आद्य लिखित कृति माना जाता है।
काव्य के अन्त्य चरण में कवि ने अपनी आध्यात्मिक अनुभूतियों को समेटा है।
Vartamaan ↔ अतीत
जो मनुष्य अपने वर्तमान को संवार लेता है, उसका भविष्य स्वतः सुंदर हो जाता है।
अतीत के दुखों को बार-बार याद करने से केवल निराशा ही हाथ लगती है।
Ab ↔ तब
अब संभल जाने का समय आ गया है, अन्यथा बहुत देर हो जाएगी।
जब संकट आया था, तब सभी पड़ोसियों ने एकजुट होकर मदद की थी।
Anaadi ↔ सांत
सृष्टि का प्रवाह अनादि काल से निरंतर चला आ रहा है।
भौतिक संसार की हर वस्तु सांत और सीमित सीमाओं में बंधी है।
Chirasthaayee ↔ अल्पकालिक
सत्य और धर्म के आधार पर स्थापित संबंध चिरस्थायी होते हैं।
क्रोध का आवेश अल्पकालिक होता है, किंतु उसका दुष्परिणाम लंबा खिंच सकता है।
Deerghakaalik ↔ अल्पकालिक
शिक्षा और स्वास्थ्य में दीर्घकालिक निवेश राष्ट्र की नींव को सुदृढ़ करता है।
संकट से तुरंत निपटने के लिए अल्पकालिक वित्तीय उपाय किए गए।
Deerghakaaleen ↔ अल्पकालीन
पर्यावरण संकट से निपटने के लिए दीर्घकालीन नीति की तत्काल आवश्यकता है।
मौसम की मार से निपटने हेतु किसानों को अल्पकालीन ऋण दिया गया।
Chiranjeevee ↔ अल्पायु
पौराणिक कथाओं में अश्वत्थामा और हनुमान को चिरंजीवी माना गया है।
रोग के कारण प्रतिभाशाली संगीतकार अल्पायु में ही संसार छोड़ गया।
Chirkaal ↔ अल्पकाल
तपस्वियों ने चिरकाल तक वनों में तपस्या करके ज्ञान प्राप्त किया।
अल्पकाल में ही नए व्यापार ने बाजार में अपनी मजबूत धाक जमा ली।
Kshanabhangurata ↔ अमरता
संसार के वैभव की क्षणभंगुरता को देखकर सिद्धार्थ ने संन्यास लिया।
महान बलिदानियों को राष्ट्र के इतिहास में अमरता प्राप्त होती है।
Aviraam ↔ सविराम
डॉक्टरों ने चौबीस घंटे तक अविराम काम करके सभी घायलों की जान बचाई।
कक्षा में सविराम भाषण देने से विद्यार्थियों का ध्यान भटकने से बचता है।
Amar ↔ मर्त्य
देश पर मर मिटने वाले अमर शहीदों का नाम इतिहास के पन्नों में सदा जीवित रहेगा।
मर्त्य मनुष्य को इस नश्वर संसार की क्षणभंगुरता को स्वीकार करना ही पड़ता है।
Avinaashee ↔ विनाशी
आत्मा को अविनाशी बताया गया है जिस पर समय और मृत्यु का कोई वश नहीं चलता।
मिट्टी से बना घड़ा विनाशी है जो जरा सी चोट से टूटकर नष्ट हो जाता है।
Ajar ↔ जीर्ण
देवताओं को अजर और अमर माना जाता है जिन पर वृद्धावस्था का प्रभाव नहीं होता।
सदियों पुरानी हवेली अब जीर्ण अवस्था में पहुंच चुकी है जिसकी दीवारें दरक रही हैं।
Anaagatkaal ↔ अतीतकाल
अनागतकाल के खतरों को भांपकर ही अंतरिक्ष वैज्ञानिक नए ग्रहों की खोज कर रहे हैं।
अतीतकाल के ऐतिहासिक अवशेष हमारी सभ्यता की समृद्ध कहानी कहते हैं।
Madhyamkaal ↔ अंतकाल
परियोजना के मध्यमकाल में वित्तीय और तकनीकी संसाधनों की समीक्षा की गई।
अंतकाल निकट आने पर व्यक्ति समस्त सांसारिक मोह-माया से विरक्त हो जाता है।
Praarambhik ↔ अंतिम
प्रारंभिक चरण में नए व्यवसाय में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
प्रतियोगिता के अंतिम चरण में केवल दो सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी ही पहुंचे।
Kaalaanukramik ↔ अक्रमिक
पुस्तकालय में ऐतिहासिक अभिलेख कालानुक्रमिक क्रम में सजाए गए हैं।
अक्रमिक रूप से रखी गई फाइलों में से महत्वपूर्ण दस्तावेज खोजना कठिन हो गया।
Chirprateekshit ↔ अकस्मात
वैज्ञानिकों की वर्षों की मेहनत के बाद चिरप्रतीक्षित सफलता आखिरकार मिल ही गई।
अकस्मात आई आंधी ने कई कच्चे मकानों की छतें उड़ा दीं।
Ahoraatra ↔ क्षणमात्र
अस्पताल में आपातकालीन सेवा अहोरात्र उपलब्ध रहती है।
क्षणमात्र के निर्णय से खेल का पूरा पासा पलट गया।
Amaratva ↔ मर्त्यता
सत्य और परोपकार के मार्ग पर चलने वाले महापुरुष अमरत्व प्राप्त करते हैं।
मानव देह की मर्त्यता को पहचानकर व्यक्ति को अभिमान से दूर रहना चाहिए।
Nityata ↔ अनित्यता
भारतीय दर्शन में ब्रह्म की नित्यता को ही परम सत्य माना गया है।
सांसारिक सुखों की अनित्यता को समझकर व्यक्ति विरक्त हो जाता है।
Svarnayug ↔ अंधकारयुग
गुप्त काल को भारतीय कला और साहित्य का स्वर्णयुग कहा जाता है।
साम्राज्य के पतन के बाद देश कई दशकों तक अंधकारयुग में डूबा रहा।
Agrasochee ↔ अतीतगामी
अग्रसोची नेतृत्व आने वाले बीस वर्षों की चुनौतियों की पूर्व तैयारी करता है।
अतीतगामी लोग केवल पुरानी बातों का रोना रोते रहते हैं और आगे नहीं बढ़ते।
Ajarata ↔ जराग्रस्तता
योगियों की साधना उनके चेहरे पर अद्भुत तेज और अजरता बनाए रखती है।
आयु बढ़ने के साथ जराग्रस्तता से अंगों में शिथिलता आना स्वाभाविक है।
Chiranjeevita ↔ अल्पायुष्य
पौराणिक पात्र मार्कंडेय को भगवान शिव से चिरंजीविता का वरदान प्राप्त था।
अस्वस्थ खान-पान और प्रदूषण के कारण आधुनिक युग में अल्पायुष्य का खतरा बढ़ गया है।
Adiga ↔ डांवाडोल
संकट और विपत्ति के समय अडिग का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डांवाडोल का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aknpita ↔ थरथराता
संकट और विपत्ति के समय अकंपित का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने थरथराता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dahashata ↔ अमन
संकट और विपत्ति के समय दहशत का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अमन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Adamya ↔ दब्बू
संकट और विपत्ति के समय अदम्य का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने दब्बू का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aparaajeya ↔ पराजेय
संकट और विपत्ति के समय अपराजेय का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पराजेय का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ajeya ↔ जेय
संकट और विपत्ति के समय अजेय का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने जेय का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Kaatara ↔ अकातर
संकट और विपत्ति के समय कातर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अकातर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Abhayadaana ↔ प्राणदंड
संकट और विपत्ति के समय अभयदान का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने प्राणदंड का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Adigataa ↔ कातरता
संकट और विपत्ति के समय अडिगता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Apaharanakartaa ↔ रक्षक
संकट और विपत्ति के समय अपहरणकर्ता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रक्षक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Surakshaa ↔ असुरक्षा
संकट और विपत्ति के समय सुरक्षा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने असुरक्षा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Surakshita ↔ असुरक्षित
संकट और विपत्ति के समय सुरक्षित का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने असुरक्षित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Snrakshita ↔ असंरक्षित
संकट और विपत्ति के समय संरक्षित का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने असंरक्षित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Abhayamudraa ↔ भयभीत-मुद्रा
संकट और विपत्ति के समय अभयमुद्रा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयभीत-मुद्रा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bhayaprada ↔ अभयकारी
संकट और विपत्ति के समय भयप्रद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अभयकारी का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Kaanpanaa ↔ अडिग-रहना
संकट और विपत्ति के समय कांपना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अडिग-रहना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ajeyataa ↔ पराजेयता
संकट और विपत्ति के समय अजेयता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पराजेयता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranakaushala ↔ अनाड़ीपन
संकट और विपत्ति के समय रणकौशल का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अनाड़ीपन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veeragaathaa ↔ अपमानकथा
संकट और विपत्ति के समय वीरगाथा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अपमानकथा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Atala-iraadaa ↔ डांवाडोल-मन
संकट और विपत्ति के समय अटल-इरादा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डांवाडोल-मन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Adiga-kadama ↔ पीछे-हटना
संकट और विपत्ति के समय अडिग-कदम का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पीछे-हटना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ajeya-durga ↔ पतनशील-किला
संकट और विपत्ति के समय अजेय-दुर्ग का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पतनशील-किला का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sainyabala ↔ अहिंसाबल
संकट और विपत्ति के समय सैन्यबल का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अहिंसाबल का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shikshaa ↔ अशिक्षा
विद्या और बौद्धिक विकास में शिक्षा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशिक्षा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Adhyetaa ↔ अनपढ़
विद्या और बौद्धिक विकास में अध्येता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनपढ़ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vijnya ↔ अविज्ञ
विद्या और बौद्धिक विकास में विज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अविज्ञ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Suvijnya ↔ अल्पज्ञ
विद्या और बौद्धिक विकास में सुविज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अल्पज्ञ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Paarngata ↔ अनाड़ी
विद्या और बौद्धिक विकास में पारंगत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनाड़ी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Adhyayanasheela ↔ लापरवाह
विद्या और बौद्धिक विकास में अध्ययनशील का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में लापरवाह की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Svaadhyaaya ↔ अनाभ्यास
विद्या और बौद्धिक विकास में स्वाध्याय का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनाभ्यास की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pathaneeya ↔ अपठनीय
विद्या और बौद्धिक विकास में पठनीय का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अपठनीय की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Anusndhaana ↔ अज्ञान
विद्या और बौद्धिक विकास में अनुसंधान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञान की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Utteerna ↔ अनुत्तीर्ण
विद्या और बौद्धिक विकास में उत्तीर्ण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनुत्तीर्ण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bauddhika ↔ अबौद्धिक
विद्या और बौद्धिक विकास में बौद्धिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अबौद्धिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pramaanita ↔ अप्रमाणित
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रमाणित का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अप्रमाणित की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tarkasngata ↔ असंगत
विद्या और बौद्धिक विकास में तर्कसंगत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में असंगत की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vyaakaranasammata ↔ अशुद्ध
विद्या और बौद्धिक विकास में व्याकरणसम्मत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशुद्ध की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shuddha-vartanee ↔ अशुद्ध-वर्तनी
विद्या और बौद्धिक विकास में शुद्ध-वर्तनी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशुद्ध-वर्तनी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shuddhochchaarana ↔ अशुद्धोच्चारण
विद्या और बौद्धिक विकास में शुद्धोच्चारण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशुद्धोच्चारण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sookshmadarshee ↔ अदूरदर्शी
विद्या और बौद्धिक विकास में सूक्ष्मदर्शी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अदूरदर्शी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jijnyaasu ↔ अजिज्ञासु
विद्या और बौद्धिक विकास में जिज्ञासु का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अजिज्ञासु की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tatvavettaa ↔ अज्ञानी
विद्या और बौद्धिक विकास में तत्ववेत्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञानी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Aksharajnyaana ↔ अंगूठाछाप
विद्या और बौद्धिक विकास में अक्षरज्ञान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अंगूठाछाप की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kaavyamarmajnya ↔ अरसिक
विद्या और बौद्धिक विकास में काव्यमर्मज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अरसिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Rasika ↔ अरसिक
विद्या और बौद्धिक विकास में रसिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अरसिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Marmajnya ↔ अनभिज्ञ
विद्या और बौद्धिक विकास में मर्मज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनभिज्ञ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Siddhaanta ↔ अटकल
विद्या और बौद्धिक विकास में सिद्धांत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अटकल की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Avadhaaranaa ↔ भ्रांति
विद्या और बौद्धिक विकास में अवधारणा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में भ्रांति की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vivekasheela ↔ अविवेकपूर्ण
विद्या और बौद्धिक विकास में विवेकशील का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अविवेकपूर्ण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Chhaatravritti ↔ अर्थदंड
विद्या और बौद्धिक विकास में छात्रवृत्ति का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अर्थदंड की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Praaveenya ↔ अयोग्यता
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रावीण्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अयोग्यता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaikshanika ↔ अशैक्षणिक
विद्या और बौद्धिक विकास में शैक्षणिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशैक्षणिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaanaarjana ↔ अज्ञानता
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञानार्जन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञानता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaanadeepaka ↔ अज्ञान-अंधकार
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञानदीपक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञान-अंधकार की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tarkasheela ↔ अंधविश्वासी
विद्या और बौद्धिक विकास में तर्कशील का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अंधविश्वासी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bodha ↔ अज्ञान
विद्या और बौद्धिक विकास में बोध का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञान की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaanodaya ↔ अंधविश्वास
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञानोदय का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अंधविश्वास की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shikshaanuraagee ↔ अध्ययन-विमुख
विद्या और बौद्धिक विकास में शिक्षानुरागी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अध्ययन-विमुख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidvattaa ↔ अज्ञान
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्वत्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञान की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Akshara ↔ निरक्षर
विद्या और बौद्धिक विकास में अक्षर का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में निरक्षर की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Adhyayana ↔ अनाभ्यास
विद्या और बौद्धिक विकास में अध्ययन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनाभ्यास की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaana-prakaasha ↔ अज्ञान-तिमिर
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञान-प्रकाश का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञान-तिमिर की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaanagngaa ↔ अविद्या-गर्त
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञानगंगा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अविद्या-गर्त की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bauddhikataa ↔ अज्ञानता
विद्या और बौद्धिक विकास में बौद्धिकता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञानता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Saahityika ↔ असाहित्यिक
विद्या और बौद्धिक विकास में साहित्यिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में असाहित्यिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vyaakaranika ↔ अव्याकरणिक
विद्या और बौद्धिक विकास में व्याकरणिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अव्याकरणिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vaijnyaanika ↔ अवैज्ञानिक
विद्या और बौद्धिक विकास में वैज्ञानिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अवैज्ञानिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Daarshanika ↔ अदार्शनिक
विद्या और बौद्धिक विकास में दार्शनिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अदार्शनिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Aachaarya ↔ अंतेवासी
विद्या और बौद्धिक विकास में आचार्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अंतेवासी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Spashtataa ↔ अस्पष्टता
विद्या और बौद्धिक विकास में स्पष्टता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अस्पष्टता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Adhyaapana ↔ अध्ययन
विद्या और बौद्धिक विकास में अध्यापन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अध्ययन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Samaalochanaa ↔ अंधी-प्रशंसा
विद्या और बौद्धिक विकास में समालोचना का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अंधी-प्रशंसा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Chintanasheela ↔ अविवेकशील
विद्या और बौद्धिक विकास में चिंतनशील का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अविवेकशील की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Suvrishti ↔ अकाल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सुवृष्टि की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अकाल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jalaplaavana ↔ अनावृष्टि
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में जलप्लावन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अनावृष्टि का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Anukoola-mausama ↔ प्रतिकूल-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में अनुकूल-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में प्रतिकूल-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jalavrishti ↔ अनावृष्टि
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में जलवृष्टि की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अनावृष्टि का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Anaavrita ↔ मेघावृत्त
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में अनावृत की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मेघावृत्त का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Tuhina ↔ अग्नि
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तुहिन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अग्नि का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sailaaba ↔ अकाल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सैलाब की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अकाल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Himavrishti ↔ अंगार-वृष्टि
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में हिमवृष्टि की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अंगार-वृष्टि का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Bijalee-chamakanaa ↔ अंधेरी-रात
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बिजली-चमकना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अंधेरी-रात का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Atisheeta ↔ अतितप्त
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में अतिशीत की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अतितप्त का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Anukoola-pavana ↔ प्रतिकूल-पवन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में अनुकूल-पवन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में प्रतिकूल-पवन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Andar ↔ बाहर
मूसलाधार बारिश शुरू होते ही सभी लोग भीगने से बचने के लिए कमरे के अंदर चले गए।
खुली धूप और शुद्ध हवा का आनंद लेने के लिए बालक घर से बाहर मैदान में खेलने दौड़े।
Ujaala ↔ अंधेरा
सूर्य की पहली किरण निकलते ही चारों ओर फैला घना अंधेरा छंट गया और उजाला छा गया।
बिजली चले जाने पर पूरे मोहल्ले में घना अंधेरा छा गया और लोग मोमबत्तियां ढूंढने लगे।
Apnaana ↔ ठुकराना
सच्चे मित्र वही हैं जो हमारी कमियों के बावजूद हमें खुले दिल से अपनाना जानते हैं।
अनैतिक लाभ और रिश्वत के प्रस्ताव को एक स्वाभिमानी अधिकारी ने तुरंत ठुकराना श्रेयस्कर समझा।