Bhaari ↔ हल्का
कठिन परिस्थितियों का भारी बोझ भी सकारात्मक सोच से हल्का लगने लगता है।
सच्चाई स्वीकार कर लेने से हृदय का भारी अपराधबोध हल्का और शांत हो जाता है।
अक्षर 'भ' से प्रारंभ होने वाले कुल 67 विपरीतार्थक शब्द युग्म नीचे दिए गए हैं:
Bhaari ↔ हल्का
कठिन परिस्थितियों का भारी बोझ भी सकारात्मक सोच से हल्का लगने लगता है।
सच्चाई स्वीकार कर लेने से हृदय का भारी अपराधबोध हल्का और शांत हो जाता है।
Bhaai ↔ बहन
रक्षाबंधन पर भाई बहन की रक्षा का संकल्प दोहराता है।
भाई-बहन का रिश्ता निस्वार्थ स्नेह और अटूट विश्वास का प्रतीक है।
Bhokta ↔ त्यागी
मनुष्य अपने कर्मों का स्वयं ही कर्ता और भोक्ता होता है।
त्यागी पुरुष संसार के भोगों में लिप्त न होकर लोककल्याण में जीवन समर्पित करता है।
Satyanishthaa ↔ भ्रष्टाचार
अधिकारी ने पूरी सत्यनिष्ठा के साथ सरकारी धन का सदुपयोग करते हुए निर्माण कार्य पूरा कराया।
भ्रष्टाचार के कारण समाज में योग्य व्यक्तियों का हक मारा जाता है और व्यवस्था कमजोर होती है।
Bhedabhaava ↔ सद्भाव
विद्यालय में सभी छात्रों के साथ बिना किसी भेदभाव के समान व्यवहार किया जाना चाहिए।
विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सद्भाव बनाए रखने के लिए शांति समिति की बैठक आयोजित हुई।
Bhojana ↔ उपवास
दोपहर के समय परिवार के सभी सदस्यों ने एक साथ बैठकर प्रेमपूर्वक भोजन किया।
शारीरिक शुद्धि और संयम के उद्देश्य से उन्होंने सप्ताह में एक दिन उपवास रखने का नियम बनाया।
Bhoomi ↔ गगन
भूमि की उर्वरा शक्ति और गगन से प्राप्त धूप मिलकर फसलों को लहलहाते हैं।
विशाल गगन और शस्य-श्यामला धरा के मध्य प्रकृति की अनुपम शोभा दृष्टिगोचर होती है।
Jwaar ↔ भाटा
चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण से समुद्र में ज्वार और भाटा की चक्रीय प्रक्रिया घटित होती है।
भाटा के समय समुद्र का जलस्तर पीछे हट जाता है, जबकि ज्वार के समय लहरें तट को लांघती हैं।
Bhor ↔ सांझ
किसान भोर होते ही खेतों पर चल पड़ते हैं और सांझ ढलने पर ही घर वापस लौटते हैं।
सांझ के झुटपुटे में चरवाहे अपनी गायों को चराकर गांव की ओर हांक लाते हैं।
Bhaanu ↔ शशि
भानु की प्रखर किरणें संपूर्ण जगत को प्रकाशवान करती हैं, जबकि शशि की किरणें सुखद शीतलता देती हैं।
नीले आकाश में पूर्णिमा का शशि भानु के अस्त होने के उपरांत मनमोहक रूप धर लेता है।
Dhaara ↔ भंवर
कुशल नाविक शांत धारा में नाव दौड़ाते हैं और खतरनाक भंवर से नौका को बचाते हैं।
भंवर में फंसी नाव को किनारे की ओर मोड़ना नाविक के धैर्य और पराक्रम की परीक्षा है।
Saavan ↔ भादों
लोकगीतों में सावन के झूले और भादों की घनघोर झड़ी का बड़ा मार्मिक वर्णन मिलता है।
सावन की फुहारों के पश्चात भादों की घनघोर झड़ी नदियों को लबालब भर देती है।
Bhoogarbha ↔ अंतरिक्ष
खनिज संपदा भूगर्भ में छिपी है, जबकि सौर ऊर्जा का अक्षय स्रोत अंतरिक्ष से प्राप्त होता है।
मानव ने एक ओर गहरे भूगर्भ का अध्ययन किया है तो दूसरी ओर अनंत अंतरिक्ष की थाह ली है।
Bhaabar ↔ तराई
भाबर के कंकरीले पत्थरों में नदियां विलुप्त हो जाती हैं और तराई के मैदान में पुनः प्रकट होती हैं।
तराई के दलदली और नम क्षेत्र में घने जंगल उगते हैं, जो ऊंचे पहाड़ की शुष्कता से भिन्न हैं।
Bhooskhalan ↔ स्थिर भूमि
भारी बारिश के कारण पहाड़ों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है, जहां स्थिर भूमि भी दरकने लगती है।
भूस्खलन के खतरे वाले ढलानों पर बस्तियां बसाने के बजाय स्थिर भूमि पर निर्माण सुरक्षित है।
Bhay ↔ साहस
मन में यदि अज्ञात का भय हो तो व्यक्ति आगे बढ़ने से हिचकिचाता है।
सच्चा साहस वही है जो विपत्ति के सामने निडर खड़ा रहे।
Bhram ↔ यथार्थ
मृगतृष्णा के समान सांसारिक सुख केवल एक सुंदर भ्रम मात्र हैं।
कल्पना के आकाश से उतरकर यथार्थ की ठोस भूमि पर कार्य करना चाहिए।
Bhakti ↔ विरक्ति
ईश्वर के प्रति अनन्य भक्ति हृदय को समस्त चिंताओं से मुक्त कर देती है।
धार्मिक आडंबरों को देखकर बुद्धिजीवियों में उनसे विरक्ति हो गई।
Nirbhay ↔ भयभीत
सत्य के मार्ग पर चलने वाला मनुष्य सदैव निर्भय रहता है।
शेर की दहाड़ सुनकर जंगल के सभी छोटे जीव भयभीत हो गए।
Shoor ↔ भीरु
शूर सैनिक युद्धभूमि में अंतिम सांस तक वीरता से लड़े।
भीरु स्वभाव का व्यक्ति संघर्ष से सदा दूर भागता है।
Bhavuk ↔ कठोरहृदय
दीन-दुखियों की कथा सुनकर भावुक मनुष्य के आँसू निकल आते हैं।
कठोरहृदय व्यक्ति दूसरों के क्रंदन से भी अप्रभावित रहता है।
Abhay ↔ भय
ईश्वर की शरण में जाने पर साधक को अभय का वरदान मिलता है।
शत्रु के भय से कांपते हुए सैनिक पीछे हटने लगे।
Baahari ↔ भीतरी
त्वचा शरीर की बाहरी सुरक्षा परत है जो धूल और संक्रमण से बचाती है।
भीतरी अंगों की कार्यप्रणाली को नियंत्रित रखने के लिए संतुलित रक्तचाप आवश्यक है।
Tap ↔ भोग
ऋषि-मुनियों ने कठोर तप के बल पर आत्मज्ञान और परम शांति प्राप्त की।
क्षणभंगुर भोग विलास में लीन रहने से मनुष्य की आध्यात्मिक ऊर्जा क्षीण हो जाती है।
Satyanishth ↔ भ्रष्ट
सत्यनिष्ठ न्यायाधीश ने किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया।
भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत के कारण जन-कल्याण की योजनाएँ अधूरी रह गईं।
Aadhyaatmik ↔ भौतिक
आध्यात्मिक चिंतन से आत्मा को शांति और जीवन को वास्तविक उद्देश्य मिलता है।
केवल भौतिक सुख-साधनों के संचय से मन की तृष्णा कभी शांत नहीं होती।
Tyaagi ↔ भोगी
त्यागी महापुरुषों ने समाज को नई दिशा देने के लिए अपने संपूर्ण सुखों का उत्सर्ग कर दिया।
भोगी मनुष्य क्षणिक विलासिता के पीछे दौड़ते-दौड़ते जीवन का अमूल्य समय नष्ट कर देता है।
Nabhchar ↔ भूचर
चील और बाज नभचर पक्षी हैं जो आकाश में ऊँची उड़ान भरते हैं।
गाय और भैंस जैसे भूचर पशु धरती पर विचरण करते हैं।
Bhaarvaahi ↔ सवारी-पशु
गधा और खच्चर भारवाही पशु हैं जो पहाड़ी मार्गों पर माल ढोते हैं।
सफेद अरबी घोड़ा सवारी-पशु के रूप में अपनी गति और शान के लिए प्रसिद्ध है।
Bhookh ↔ तृप्ति
दिनभर पैदल चलने के बाद शाम को तीव्र भूख लग आई थी।
मनपसंद थाली भर भोजन करने के बाद चेहरे पर तृप्ति का भाव दिखाई दिया।
Bhojya ↔ अभोज्य
गेहूं, चावल और दालें मनुष्य के मुख्य भोज्य पदार्थों में गिने जाते हैं।
फफूंद लगी हुई ब्रेड अभोज्य हो जाती है और उसे फेंक देना ही उचित है।
Bhuna ↔ कच्चा
अलाव की राख में भुना हुआ भुट्टा गरमागरम खाने में बड़ा स्वादिष्ट लगता है।
कच्चा भुट्टा कड़ा होता है और बिना पकाए नहीं खाया जाता।
Vrat ↔ भोजन
शिवरात्रि के पावन पर्व पर उसने दिनभर फलाहार का व्रत रखा।
संध्या वंदना के बाद परिवार के सभी सदस्यों ने बैठकर भोजन किया।
Bhaksha ↔ अभक्ष
गेहूं और फल मानव के लिए सर्वमान्य भक्ष पदार्थ हैं।
सड़े-गले विषैले फल धार्मिक और स्वास्थ्य दोनों दृष्टि से अभक्ष हैं।
Bhakshya ↔ अभक्ष्य
ताजा पका हुआ भोजन ही शरीर के लिए भक्ष्य और लाभकारी होता है।
कीड़े लगी हुई दाल और सड़े फल स्वास्थ्य के लिए अभक्ष्य हैं।
Roti ↔ भात
उत्तर भारत में गेहूं की गरम रोटी भोजन का मुख्य आधार है।
पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में दाल के साथ भात अधिक पसंद किया जाता है।
Annadaata ↔ भिखारी
खेतों में पसीना बहाने वाला किसान ही देश का सच्चा अन्नदाता है।
द्वार पर आए भूखे भिखारी को अन्न और जल देना मानवीय कर्तव्य है।
Bhandaar ↔ रिक्ति
अच्छी वर्षा के कारण सरकारी गोदामों में अनाज का भंडार भर गया।
युद्ध के समय अनाज की आपूर्ति रुकने से बाजार में राशन की रिक्ति हो गई।
Bhaabhi ↔ ननद
भाभी ने अपनी ननद के विवाह की तैयारियाँ बड़े उत्साह के साथ पूरी कीं।
ननद छुट्टियों में मायके आकर भाभी के साथ सुख-दुख साझा करती है।
Bhateeja ↔ भतीजी
भतीजा अपने चाचा जी के साथ दुकान के काम-काज में हाथ बंटाता है।
भतीजी ने वार्षिक परीक्षा में प्रथम स्थान पाकर चाचा जी का आशीर्वाद लिया।
Bhaanja ↔ भांजी
मामा जी के घर आते ही भांजा उनसे नए-नए खिलौनों की मांग करने लगा।
भांजी ने अपनी मामा-मामी के लिए हाथ से सुंदर ग्रीटिंग कार्ड बनाया।
Rakshak ↔ भक्षक
कानून के रक्षक पुलिसकर्मियों का दायित्व जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
जो रक्षक ही भक्षक बन जाए, उससे समाज की रक्षा कौन कर सकता है।
Lakhpati ↔ भिखारी
कड़े परिश्रम और बुद्धिमत्ता के बल पर वह एक दशक में लखपति बन गया।
चौराहे पर भीख मांगते भिखारी को देखकर हर सहृदय व्यक्ति का मन पसीज जाता है।
Jameendaar ↔ भूमिहीन
रियासत काल में जमींदार किसानों से भारी लगान वसूल करते थे।
भूमि सुधार कानूनों के तहत भूमिहीन श्रमिकों को कृषि योग्य पट्टे बांटे गए।
Bhatta ↔ कटौती
कर्मचारियों को महंगाई से निपटने के लिए अतिरिक्त यात्रा भत्ता दिया जाता है।
भविष्य निधि के नाम पर वेतन से प्रतिमाह अनिवार्य कटौती की जाती है।
Karmayogee ↔ भोगवादी
गीता में श्रीकृष्ण ने निष्काम कर्मयोगी बनने का अमर उपदेश दिया है।
भोगवादी व्यक्ति केवल क्षणिक शारीरिक सुखों के पीछे भागता रहता है।
Bhartee ↔ छंटनी
सेना में नवयुवकों के लिए खुली भर्ती रैली का आयोजन किया गया।
आर्थिक मंदी के कारण आईटी कंपनी ने सैकड़ों कर्मचारियों की छंटनी कर दी।
Bhoot ↔ भविष्य
भूत की गलतियों से सीख लेकर ही मनुष्य अपने जीवन को संवार सकता है।
भविष्य की चिंता में वर्तमान के सुखद पलों को गंवाना बुद्धिमानी नहीं है।
Bhaavee ↔ भूतपूर्व
आज के विद्यार्थी ही राष्ट्र के भावी कर्णधार और नीति-निर्माता हैं।
भूतपूर्व सैनिकों के पुनर्वास के लिए सरकार कई कल्याणकारी योजनाएं चलाती है।
Vartamaanakaal ↔ भूतकाल
वर्तमानकाल में उठाया गया ठोस कदम ही हमारे उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करता है।
भूतकाल की यादों में ही खोए रहने से वर्तमान के कर्तव्य प्रभावित होते हैं।
Bhavishyakaal ↔ भूतकाल
पर्यावरणविद् भविष्यकाल में जल संकट की गंभीर चेतावनी दे रहे हैं।
भूतकाल की गलतियों को दोहराने से बचना हर विवेकशील मनुष्य का कर्तव्य है।
Shoorataa ↔ भीरुता
संकट और विपत्ति के समय शूरता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भीरुता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbheekataa ↔ भयभीतता
संकट और विपत्ति के समय निर्भीकता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयभीतता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bhayamukta ↔ भयग्रस्त
संकट और विपत्ति के समय भयमुक्त का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयग्रस्त का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dridhchetaa ↔ भयभीत
संकट और विपत्ति के समय दृढ़चेता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयभीत का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbhayataa ↔ भीरुता
संकट और विपत्ति के समय निर्भयता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भीरुता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Abhayamudraa ↔ भयभीत-मुद्रा
संकट और विपत्ति के समय अभयमुद्रा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयभीत-मुद्रा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veerarasa ↔ भयानक-रस
संकट और विपत्ति के समय वीररस का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयानक-रस का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bhayaanaka ↔ मनोहर
संकट और विपत्ति के समय भयानक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने मनोहर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bhayaavaha ↔ सुखद
संकट और विपत्ति के समय भयावह का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुखद का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bhayaprada ↔ अभयकारी
संकट और विपत्ति के समय भयप्रद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अभयकारी का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Smaranashakti ↔ भूलक्कड़पन
विद्या और बौद्धिक विकास में स्मरणशक्ति का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में भूलक्कड़पन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tathyaparaka ↔ भ्रामक
विद्या और बौद्धिक विकास में तथ्यपरक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में भ्रामक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bhaashya ↔ संक्षिप्त-टिप्पणी
विद्या और बौद्धिक विकास में भाष्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में संक्षिप्त-टिप्पणी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Avadhaaranaa ↔ भ्रांति
विद्या और बौद्धिक विकास में अवधारणा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में भ्रांति की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tathya ↔ भ्रम
विद्या और बौद्धिक विकास में तथ्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में भ्रम की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kadaake-kee-thnda ↔ भीषण-गर्मी
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में कड़ाके-की-ठंड की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में भीषण-गर्मी का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।