Geela ↔ सूखा
धूप में गीले कपड़े तेजी से सूखकर सूखे हो जाते हैं।
प्रकृति के प्रकोप से बचना कठिन है; कभी सूखा धरती को सुखाता है तो कभी बाढ़ सब बहा ले जाती है।
अक्षर 'ग' से प्रारंभ होने वाले कुल 69 विपरीतार्थक शब्द युग्म नीचे दिए गए हैं:
Geela ↔ सूखा
धूप में गीले कपड़े तेजी से सूखकर सूखे हो जाते हैं।
प्रकृति के प्रकोप से बचना कठिन है; कभी सूखा धरती को सुखाता है तो कभी बाढ़ सब बहा ले जाती है।
Thanda ↔ गरम
सर्दियों में ठंडा पानी पीने के बजाय लोग गरम पेय पीना पसंद करते हैं।
शीत ऋतु की ठिठुरन में गरम चाय और अलाव की आंच अत्यंत सुखद लगती है।
Saaf ↔ गंदा
हमें अपने परिवेश को गंदा नहीं रहने देना चाहिए बल्कि हमेशा साफ़-सुथरा रखना चाहिए।
गंदा जल और वातावरण बीमारियों को न्योता देते हैं, इसलिए साफ-सफाई जीवन का आधार है।
Ameer ↔ गरीब
न्याय के दरबार में अमीर और गरीब दोनों के लिए कानून एक समान है।
गरीब व्यक्ति भी अपने स्वाभिमान और ईमानदारी के बल पर समाज में धनी से अधिक सम्मान पाता है।
Gahra ↔ उथला
नदी का यह भाग बहुत गहरा है, जबकि किनारों के समीप पानी उथला रहता है।
उथला पानी अधिक शोर करता है, जबकि गहरे जल की धारा शांत और गंभीर बहती है।
Guru ↔ लघु
छंद शास्त्र में गुरु मात्रा का भार दो गिना जाता है जबकि लघु मात्रा का मान एक होता है।
लघु प्रयास भी यदि निरंतर किए जाएं तो बड़े से बड़े गुरुतर लक्ष्य को प्राप्त करा देते हैं।
Gaadha ↔ पतला
दूध को उबालकर गाढ़ा किया जाता है, जबकि अधिक पानी मिलाने से वह पतला हो जाता है।
पतला धागा भी जब मिलकर रस्सी का रूप लेता है तो भारी बोझ उठाने में सक्षम होता है।
Mukhya ↔ गौण
शिक्षा का मुख्य उद्देश्य चरित्र निर्माण है, केवल उपाधि प्राप्त करना गौण है।
मुख्य उद्देश्य की सिद्धि के लिए गौण बातों पर अधिक समय व्यर्थ नहीं करना चाहिए।
Prakat ↔ गुप्त
सच्चाई को कितना भी छिपाओ, वह एक दिन प्रकट होकर ही रहती है।
गुप्त मंत्रणा की गोपनीयता बनाए रखना राज्य की सुरक्षा के लिए अनिवार्य होता है।
Baadhyakaari ↔ गैर-बाध्यकारी
अदालत का यह फैसला सभी पक्षों के लिए बाध्यकारी है।
गैर-बाध्यकारी संधियों के उल्लंघन पर कोई कानूनी दंड नहीं होता, वे केवल नैतिक हैं।
Pradhaan ↔ गौण
कर्म ही मनुष्य का प्रधान धर्म है।
मुख्य उद्देश्य की सिद्धि के लिए गौण बातों पर अधिक समय व्यर्थ नहीं करना चाहिए।
Grihastha ↔ संन्यासी
गृहस्थ धर्म निभाते हुए भी मनुष्य संन्यासी जैसी पवित्रता बनाए रख सकता है।
संन्यासी ने सांसारिक मोह-माया का त्याग कर सत्य की खोज शुरू की।
Naagarik ↔ ग्रामीण
नागरिक सुविधाओं का विस्तार ग्रामीण अंचलों तक पहुंचना आवश्यक है।
ग्रामीण जीवन की शांति और शुद्ध वायु शहरों की भागदौड़ में नहीं मिलती।
Graameen ↔ शहरी
ग्रामीण जीवन की शांति और शुद्ध वायु शहरों की भागदौड़ में नहीं मिलती।
शहरी चकाचौंध में कभी-कभी मनुष्य प्रकृति की सादगी और शांति को भूल बैठता है।
Shahar ↔ गाँव
शहर की चकाचौंध से दूर गाँव की सादगी मन को सुकून देती है।
भारत की आत्मा उसके गाँवों में बसती है, जिसे शहरों के विकास के साथ नहीं भूलना चाहिए।
Shishya ↔ गुरु
सच्चा शिष्य गुरु द्वारा दिए गए ज्ञान को जनकल्याण में समर्पित करता है।
छंद शास्त्र में गुरु मात्रा का भार दो गिना जाता है जबकि लघु मात्रा का मान एक होता है।
Gopneeya ↔ सार्वजनिक
सुरक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जाते।
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना प्रत्येक देशवासी का पावन नागरिक कर्तव्य है।
Ganatntra ↔ राजतंत्र
गणतंत्र की स्थापना के बाद देश का सर्वोच्च पद वंशानुगत न होकर जनता द्वारा निर्वाचित होने लगा।
प्राचीन राजतंत्र में राजा की इच्छा ही सर्वोपरि कानून मानी जाती थी और उत्तराधिकार परिवार में रहता था।
Grihasthee ↔ वैराग्य
ईमानदारी से अपनी गृहस्थी संभालना और बाल-बच्चों का भरण-पोषण करना भी एक महान साधना है।
सांसारिक मोह-माया से विरक्त होकर उन्होंने वैराग्य धारण कर लिया और संन्यास मार्ग चुन लिया।
Svachchhataa ↔ गंदगी
आसपास स्वच्छता बनाए रखने से संक्रामक रोगों का फैलाव रुकता है और पर्यावरण सुंदर बनता है।
सड़क किनारे फैली गंदगी से दुर्गंध उठ रही थी और मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा था।
Dhara ↔ गगन
वर्षा की बूंदें गगन से गिरकर प्यासी धरा को तृप्त और हरा-भरा कर देती हैं।
विशाल गगन और शस्य-श्यामला धरा के मध्य प्रकृति की अनुपम शोभा दृष्टिगोचर होती है।
Bhoomi ↔ गगन
भूमि की उर्वरा शक्ति और गगन से प्राप्त धूप मिलकर फसलों को लहलहाते हैं।
विशाल गगन और शस्य-श्यामला धरा के मध्य प्रकृति की अनुपम शोभा दृष्टिगोचर होती है।
Greeshm ↔ शीत
ग्रीष्म की तीखी तपन के पश्चात आने वाली शीत ऋतु तन और मन दोनों को राहत देती है।
शीत ऋतु में गुनगुनी धूप का आनंद ग्रीष्म ऋतु की छाया जैसा सुखद प्रतीत होता है।
Hemant ↔ ग्रीष्म
हेमंत ऋतु में सुबह की ओस मन मोह लेती है, जो ग्रीष्म की चिलचिलाती धूप से बिल्कुल उलट है।
ग्रीष्म की तीखी तपन के पश्चात आने वाली शीत ऋतु तन और मन दोनों को राहत देती है।
Shishir ↔ ग्रीष्म
शिशिर की कंपकंपी छुड़ाने वाली ठंडक के बाद प्रकृति ग्रीष्म की तपन से तपती है।
ग्रीष्म की तीखी तपन के पश्चात आने वाली शीत ऋतु तन और मन दोनों को राहत देती है।
Sharad ↔ ग्रीष्म
शरद ऋतु का निर्मल आकाश और शांत रातें ग्रीष्म ऋतु के तपन भरे दिनों से सर्वथा भिन्न हैं।
ग्रीष्म की तीखी तपन के पश्चात आने वाली शीत ऋतु तन और मन दोनों को राहत देती है।
Gart ↔ शिखर
महासागरों के तल में हजारों मीटर गहरे गर्त पाए जाते हैं, जहां सूर्य का प्रकाश कभी नहीं पहुंचता।
एक ओर आकाश छूता हिम शिखर है तो दूसरी ओर गहरी गर्त का अंधकार है।
Nakshatra ↔ ग्रह
आकाश में नक्षत्र अपनी स्थिति पर स्थिर रहते हैं, जबकि ग्रह सूर्य की परिक्रमा में गतिशील रहते हैं।
ग्रहों का अपना प्रकाश नहीं होता, वे सूर्य जैसे नक्षत्रों के प्रकाश से चमकते हैं।
Upagrah ↔ ग्रह
चंद्रमा पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है, जो निरंतर अपने ग्रह की परिक्रमा करता है।
ग्रहों का अपना प्रकाश नहीं होता, वे सूर्य जैसे नक्षत्रों के प्रकाश से चमकते हैं।
Garmi ↔ सर्दी
मई की भीषण गर्मी के पश्चात दिसंबर की कपकपाती सर्दी प्रकृति के ऋतुचक्र को पूर्ण करती है।
सर्दी के दिनों में गर्म चाय और धूप अत्यंत प्रिय लगती है, जो गर्मी में असह्य होती है।
Garv ↔ लज्जा
देश की रक्षा करते हुए प्राण न्योछावर करने वाले सैनिकों पर हमें गर्व है।
अनुचित आचरण करने पर व्यक्ति को समाज के सामने लज्जा उठानी पड़ती है।
Chanchalta ↔ गंभीरता
बालकों की चंचलता स्वाभाविक और मन को मोहने वाली होती है।
महत्वपूर्ण विषयों पर विचार करते समय चेहरे पर गंभीरता आवश्यक है।
Pangu ↔ गतिशील
दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर पंगु पर्वतारोही ने भी ऊँचे शिखर पर तिरंगा फहराया।
गतिशील धावक ने अपनी शारीरिक क्षमता के बल पर मैराथन दौड़ में प्रथम स्थान पाया।
Gaur ↔ श्याम
पहाड़ी अंचल में रहने वाले लोगों का शारीरिक वर्ण प्रायः गौर होता है।
भगवान कृष्ण के आकर्षक श्याम वर्ण की उपमा सजल मेघों से दी जाती है।
Tyaag ↔ ग्रहण
मातृभूमि की रक्षा के लिए सैनिकों का सर्वोच्च त्याग सदैव वंदनीय रहेगा।
केवल भौतिक सुखों का ग्रहण करना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए।
Gaurav ↔ लाघव
स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान पर पूरे देश को असीम गौरव है।
अहंकार का त्याग कर विद्वान व्यक्ति भी विनम्रता और लाघव का आचरण करता है।
Shlaaghya ↔ गर्ह्य
शत्रु के समक्ष भी धर्म और शौर्य का पालन करना श्लाघ्य आचरण माना जाता है।
निहत्थे बंदियों पर अत्याचार करना युद्ध के नियमों में गर्ह्य अपराध है।
Vanya ↔ ग्राम्य
राष्ट्रीय उद्यान में अनेक दुर्लभ वन्य जीवों को प्राकृतिक आवास दिया गया है।
ग्राम्य पशु जैसे गाय और बकरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार हैं।
Bail ↔ गाय
बैल खेत जोतने और गाड़ी खींचने में किसान का अनमोल साथी है।
गाय अपने पौष्टिक दूध और शांत स्वभाव के कारण पूजनीय मानी जाती है।
Garisht ↔ सुपाच्य
रात के समय अत्यधिक गरिष्ठ भोजन करने से नींद में खलल पड़ता है।
मूंग की दाल की खिचड़ी सुपाच्य और पौष्टिक भोजन मानी जाती है।
Sugandhee ↔ गंधहीन
दालचीनी और लौंग रसोई के प्रसिद्ध सुगंधी मसाले हैं।
मैदा और कॉर्नफ्लोर गंधहीन घटक हैं जो केवल गाढ़ापन लाते हैं।
Garmaagarm ↔ ठंडा
बरसात में तवे से उतरी गरमागर्म जलेबी खाने का आनंद ही अलग है।
ठंडी हो चुकी चाय स्वाद और महक दोनों खो देती है।
Masaaladaar ↔ गंधरहित
गरम मसालों से युक्त मसालादार छोले भटूरों के साथ बहुत लोकप्रिय हैं।
बिना किसी तड़के का उबला पानी और सादा मांड गंधरहित होता है।
Gaadhaapan ↔ पतलापन
मलाई और काजू के पेस्ट से खीर में गाढ़ापन आ गया।
अधिक पानी डाल देने से कढ़ी का पतलापन बढ़ गया।
Gathbandhan ↔ बिखराव
छोटे दलों ने मिलकर सरकार बनाने के लिए मजबूत गठबंधन तैयार किया।
पारस्परिक अविश्वास के कारण राजनीतिक मोर्चे में बिखराव आ गया।
Graahak ↔ विक्रेता
ग्राहक ने सामान खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता और मूल्य की जांच की।
ईमानदार विक्रेता ग्राहकों को उचित दाम पर सही वस्तु उपलब्ध कराता है।
Rishtedaar ↔ गैर
सच्चे रिश्तेदार वही होते हैं जो केवल सुख में ही नहीं, दुख में भी बराबर खड़े रहते हैं।
कभी-कभी मुश्किल समय में अपने दूर हो जाते हैं और गैर भी मददगार साबित होते हैं।
Grihaswaami ↔ किरायेदार
गृहस्वामी ने मकान की रंगाई-पुताई करवाकर उसे नया रूप दिया।
किरायेदार ने प्रत्येक माह की पहली तारीख को ईमानदारी से किराया चुका दिया।
Kutumbjan ↔ गैर
विवाह के निमंत्रण पर सभी कुटुंबजन एकत्र होकर उत्सव का आनंद ले रहे थे।
मुश्किल वक्त में अक्सर गैर भी परिजनों से बढ़कर सहारा बन जाते हैं।
Ameeri ↔ गरीबी
अमीरी का घमंड कभी भी इंसानियत पर भारी नहीं पड़ना चाहिए।
ईमानदारी और लगन से काम करके उसने गरीबी के अंधकार को दूर भगाया।
Uchhaal ↔ गिरावट
उत्पाद की मांग बढ़ते ही कंपनी के शेयरों में जबर्दस्त उछाल आया।
कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट से परिवहन उद्योग को राहत मिली।
Lekhaapareekshit ↔ गैर-लेखापरीक्षित
कंपनी ने निवेशकों के विश्वास के लिए अपनी लेखापरीक्षित वित्तीय रिपोर्ट सार्वजनिक की।
गैर-लेखापरीक्षित खातों पर बैंक कभी भी बड़ा औद्योगिक ऋण स्वीकृत नहीं करते।
Daayitva ↔ गैरजिम्मेदारी
एक जागरूक नागरिक होने के नाते मतदान करना हमारा परम दायित्व है।
कार्यस्थल पर गैरजिम्मेदारी बरतने से पूरी टीम की साख पर धब्बा लग सकता है।
Arunoday ↔ गोधूलि
अरुणोदय होते ही पक्षियों का सुमधुर कलरव वन में गूंजने लगा।
गोधूलि बेला में चरवाहे अपनी गायों को चराकर घर की ओर लौटने लगे।
Sharadritu ↔ ग्रीष्मऋतु
शरदऋतु में आकाश स्वच्छ और रातें सुहावनी तथा शीतल होने लगती हैं।
ग्रीष्मऋतु की चिलचिलाती धूप और लू से जनजीवन व्याकुल हो उठता है।
Sinha-garjanaa ↔ गीदड़-भभकी
संकट और विपत्ति के समय सिंह-गर्जना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने गीदड़-भभकी का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Grnthakaara ↔ पाठक
विद्या और बौद्धिक विकास में ग्रंथकार का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में पाठक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Saralaartha ↔ गूढ़ार्थ
विद्या और बौद्धिक विकास में सरलार्थ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में गूढ़ार्थ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Gunagraahee ↔ दोषदर्शी
विद्या और बौद्धिक विकास में गुणग्राही का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में दोषदर्शी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Garamee ↔ सरदी
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में गरमी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सरदी का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheetakaala ↔ ग्रीष्मकाल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतकाल की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में ग्रीष्मकाल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Geelaapana ↔ सूखापन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में गीलापन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखापन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Galana ↔ तपन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में गलन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तपन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheetala-phuhaara ↔ गरम-हवा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतल-फुहार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में गरम-हवा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-ritu ↔ ग्रीष्म-ऋतु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-ऋतु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में ग्रीष्म-ऋतु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Hima-tushaara ↔ ग्रीष्म-तपन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में हिम-तुषार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में ग्रीष्म-तपन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-havaa ↔ गर्म-हवा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-हवा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में गर्म-हवा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Geelee-mittee ↔ सूखी-धूल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में गीली-मिट्टी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखी-धूल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Girna ↔ उठना
ठोकर खाकर जमीन पर गिरना मनुष्य की असफलता नहीं, बल्कि सीख का अवसर है।
सच्चा वीर वही है जो हर बार गिरकर पुनः उठना और संघर्ष करना जानता है।