Tez ↔ धीमा
कछुआ धीमा चलकर भी जीत गया जबकि तेज़ दौड़ने वाला खरगोश सोता रह गया।
धीमा किंतु निरंतर प्रयास खरगोश की तेज़ चाल वाले को भी पीछे छोड़ देता है।
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Tez ↔ धीमा
कछुआ धीमा चलकर भी जीत गया जबकि तेज़ दौड़ने वाला खरगोश सोता रह गया।
धीमा किंतु निरंतर प्रयास खरगोश की तेज़ चाल वाले को भी पीछे छोड़ देता है।
Thanda ↔ गरम
सर्दियों में ठंडा पानी पीने के बजाय लोग गरम पेय पीना पसंद करते हैं।
शीत ऋतु की ठिठुरन में गरम चाय और अलाव की आंच अत्यंत सुखद लगती है।
Seedha ↔ टेढ़ा
सीधा रास्ता हमेशा टेढ़े और घुमावदार रास्तों की तुलना में कम समय लेता है।
टेढ़ा वृक्ष भी कठिन हवाओं को सह लेता है, जबकि सीधा पेड़ तूफान में उखड़ जाता है।
Teevra ↔ मंद
तीव्र आंधी में विशाल वृक्ष उखड़ गए जबकि मंद समीर में तृण मुस्कुराते रहे।
मंद पवन की शीतल थपकी थके हुए पथिक को शांत विश्राम देती है।
Thos ↔ तरल
तापमान बढ़ने पर ठोस बर्फ पिघलकर तरल जल का रूप ले लेती है।
तापमान बढ़ने पर कठोर बर्फ पिघलकर तरल जल के रूप में बहने लगती है।
Teekshna ↔ कुंद
तीक्ष्ण बुद्धि वाला बालक शीघ्र सीखता है जबकि कुंद मस्तिष्क वाले को अधिक समय लगता है।
कुंद चाकू से फल काटना दुष्कर होता है, उसे तीक्ष्ण धार की आवश्यकता होती है।
Tripta ↔ अतृप्त
स्वादिष्ट भोजन से पेट तृप्त हो गया किंतु ज्ञान की पिपासा सदा अतृप्त ही रहती है।
वासनाओं की अग्नि में जितना घी डाला जाए, वह उतनी ही अतृप्त रहकर भड़कती है।
Sammaan ↔ तिरस्कार
गुरुजनों को यथोचित सम्मान देना चाहिए, किसी का तिरस्कार नहीं करना चाहिए।
सत्कर्म का पुरस्कार मिलता है जबकि दुराचार का तिरस्कार ही फल होता है।
Tiraskaar ↔ पुरस्कार
सत्कर्म का पुरस्कार मिलता है जबकि दुराचार का तिरस्कार ही फल होता है।
उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छात्र को पुरस्कार मिला जबकि अनुशासनहीनता पर दंड दिया गया।
Swaagat ↔ तिरस्कार
अतिथि का द्वार पर आत्मीय स्वागत किया गया।
सत्कर्म का पुरस्कार मिलता है जबकि दुराचार का तिरस्कार ही फल होता है।
Bhokta ↔ त्यागी
मनुष्य अपने कर्मों का स्वयं ही कर्ता और भोक्ता होता है।
त्यागी पुरुष संसार के भोगों में लिप्त न होकर लोककल्याण में जीवन समर्पित करता है।
Lokatntra ↔ तानाशाही
लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को मतदान करने और अपने विचार व्यक्त करने का मूल अधिकार होता है।
तानाशाही में शासन की संपूर्ण शक्ति एक व्यक्ति के हाथों में केंद्रित हो जाती है और जनता के अधिकार छिन जाते हैं।
Sahabhaagitaa ↔ तटस्थता
स्वच्छ भारत अभियान की वास्तविक सफलता जन-सहभागिता पर ही पूरी तरह निर्भर करती है।
समाज की समस्याओं के प्रति जागरूक न होकर तटस्थता बरतना नागरिक दायित्वों की उपेक्षा है।
Pakshapaata ↔ तटस्थता
न्यायाधीश को किसी भी पक्षपात से ऊपर उठकर केवल साक्ष्यों के आधार पर फैसला देना चाहिए।
पंचायती न्याय में निष्पक्षता और तटस्थता की नीति अपनाने से दोनों पक्षों का विश्वास बना रहता है।
Thal ↔ जल
उभयचर प्राणी जल और थल दोनों ही स्थानों पर सुगमता से जीवन यापन कर सकते हैं।
सृष्टि के संतुलन हेतु शीतल जल और प्रज्वलित अग्नि दोनों तत्व अनिवार्य हैं।
Shikhar ↔ तलहटी
पर्वतारोही तलहटी से कठिन चढ़ाई आरंभ कर अंततः बर्फ से ढके शिखर पर ध्वज फहराते हैं।
पर्वत की तलहटी में घने वन और नदियां बहती हैं, जबकि शिखर निर्जन और हिमच्छादित रहता है।
Tapt ↔ शीतल
तप्त बालू पर नंगे पैर चलना कठिन होता है, जबकि शीतल जलधारा में चलना अत्यंत सुखद है।
पर्वतों से बहती शीतल बयार थके हुए यात्रियों की उष्ण थकान को पलभर में हर लेती है।
Aalok ↔ तिमिर
महापुरुषों के विचार समाज से अज्ञान रूपी तिमिर को हटाकर आलोक का प्रसार करते हैं।
एक नन्हा सा दीप भी गहन तिमिर को चीरकर आलोक की किरण बिखेरने में सक्षम होता है।
Jyoti ↔ तम
उपनिषद् का अमर संदेश है: तमसो मा ज्योतिर्गमय अर्थात् अंधकार से प्रकाश की ओर चलो।
सद्गुरु का सान्निध्य मन के अज्ञानांधकार तम को मिटाकर ज्ञान की पावन ज्योति जगाता है।
Pravah ↔ ठहराव
नदी का निरंतर प्रवाह जीवन की गतिशीलता सिखाता है, जबकि ठहराव सड़न उत्पन्न करता है।
जल में यदि प्रवाह न रहे और ठहराव आ जाए, तो वह अपनी ताजगी और निर्मलता खो देता है।
Toofan ↔ शांति
समुद्र में उठे भीषण तूफान के शांत होने पर ही चारों ओर सुखद शांति का वातावरण बना।
भीषण तूफान के थम जाने के बाद फैली गहरी शांति प्रकृति के नवजीवन का संकेत देती है।
Tarang ↔ निस्तब्धता
सरोवर में पत्ता गिरने से तरंग उठती है, जबकि बिना हलचल के उसमें निस्तब्धता छाई रहती है।
गहरे वन में रात के समय छाई निस्तब्धता को केवल दूर बहती नदी की कलकल ध्वनि तोड़ती है।
Him ↔ ताप
सूर्य के प्रचंड ताप से हिमालय का पिघलता हिम पावन सदानीरा नदियों को जन्म देता है।
सूर्य का प्रचंड ताप पर्वतों के जमे हिम को पिघलाकर सदानीरा नदियों में बदल देता है।
Saagar ↔ तट
उफनता सागर दूर तक जलमग्न दिखाई देता है और उसकी लहरें आकर शांत तट से टकराती हैं।
नाविक ने यात्रियों को सुरक्षित तट पर उतार दिया और पुनः उफनती मझधार में उतर गया।
Tat ↔ मझधार
नाविक ने यात्रियों को सुरक्षित तट पर उतार दिया और पुनः उफनती मझधार में उतर गया।
सच्चा मित्र वह है जो मझधार में नाव फंसने पर भी साथ न छोड़े और किनारे तक पहुंचाए।
Daldal ↔ ठोस भूमि
दलदल में पैर पड़ते ही व्यक्ति धंसने लगता है, इसलिए ठोस भूमि पर ही मार्ग बनाना सुरक्षित है।
दलदल के भ्रामक धंसाव से बचकर ठोस भूमि पर कदम रखना ही सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करता है।
Tateeya ↔ अंतर्देशीय
तटीय राज्यों में समकारी समुद्री जलवायु रहती है, जबकि अंतर्देशीय भागों में तापमान विषम होता है।
अंतर्देशीय क्षेत्रों में सर्दियों में भारी ठंड और गर्मियों में भीषण लू का सामना करना पड़ता है।
Bayaar ↔ तूफान
प्रातःकाल बहने वाली ठंडी बयार शरीर में स्फूर्ति भरती है, जबकि आंधी भय पैदा करती है।
समुद्र में उठे भीषण तूफान के शांत होने पर ही चारों ओर सुखद शांति का वातावरण बना।
Taraai ↔ पहाड़
तराई के दलदली और नम क्षेत्र में घने जंगल उगते हैं, जो ऊंचे पहाड़ की शुष्कता से भिन्न हैं।
तराई के नम जंगलों से गुजरकर ही यात्री ऊंचे पहाड़ की बर्फीली चोटियों तक पहुंचते हैं।
Bhaabar ↔ तराई
भाबर के कंकरीले पत्थरों में नदियां विलुप्त हो जाती हैं और तराई के मैदान में पुनः प्रकट होती हैं।
तराई के दलदली और नम क्षेत्र में घने जंगल उगते हैं, जो ऊंचे पहाड़ की शुष्कता से भिन्न हैं।
Trishna ↔ तृप्ति
धन की अंधी तृष्णा कभी शांत नहीं होती, वह बढ़ती ही जाती है।
सरल भोजन और शुद्ध विचारों से जीवन में सच्ची तृप्ति मिलती है।
Lobh ↔ त्याग
लोभ पाप का मूल है जो मनुष्य को अनैतिक मार्ग पर ले जाता है।
राष्ट्र सेवा के लिए अपना सर्वस्व त्याग करने वाले महापुरुष सदैव अमर रहते हैं।
Rosh ↔ तुष्टि
अन्याय देखकर जनता के मन में भीषण रोष भड़क उठा।
न्यायसंगत निर्णय से दोनों पक्षों को पूर्ण तुष्टि प्राप्त हुई।
Tarun ↔ वृद्ध
तरुण अवस्था में शरीर में असीम ऊर्जा और नई उमंग का संचार रहता है।
वृद्ध अवस्था में शरीर की त्वचा झुर्रियों से भर जाती है और चाल धीमी हो जाती है।
Hathelee ↔ तलवा
ठंड के मौसम में दोनों हाथों की हथेली आपस में रगड़ने से शरीर में गर्माहट आती है।
नंगे पैर घास पर टहलने से पैर का तलवा प्राकृतिक रूप से ऊर्जावान और संवेदनशील बना रहता है।
Tap ↔ भोग
ऋषि-मुनियों ने कठोर तप के बल पर आत्मज्ञान और परम शांति प्राप्त की।
क्षणभंगुर भोग विलास में लीन रहने से मनुष्य की आध्यात्मिक ऊर्जा क्षीण हो जाती है।
Tyaag ↔ ग्रहण
मातृभूमि की रक्षा के लिए सैनिकों का सर्वोच्च त्याग सदैव वंदनीय रहेगा।
केवल भौतिक सुखों का ग्रहण करना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए।
Titiksha ↔ असहनशीलता
सुख-दुख और शीत-उष्ण के द्वंद्वों को बिना शिकायत सहना ही तितिक्षा कहलाता है।
असहनशीलता के कारण छोटी-सी असुविधा भी व्यक्ति को विचलित कर देती है।
Vandneeya ↔ तिरस्करणीय
देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर सैनिक समस्त देशवासियों के लिए वंदनीय हैं।
राष्ट्रद्रोह और गद्दारी में लिप्त व्यक्ति का आचरण सदा तिरस्करणीय होता है।
Saatvik ↔ तामसिक
सात्विक भोजन और शांत विचार मनुष्य के मन को निर्मल और तनावमुक्त रखते हैं।
तामसिक भोजन और आलस्य से शरीर में जड़ता और प्रमाद की वृद्धि होती है।
Tyaagi ↔ भोगी
त्यागी महापुरुषों ने समाज को नई दिशा देने के लिए अपने संपूर्ण सुखों का उत्सर्ग कर दिया।
भोगी मनुष्य क्षणिक विलासिता के पीछे दौड़ते-दौड़ते जीवन का अमूल्य समय नष्ट कर देता है।
Jalchar ↔ थलचर
मछली और व्हेल जलचर प्राणी हैं जो गहरे समुद्र में निवास करते हैं।
घोड़ा और ऊँट थलचर जीव हैं जो जमीन पर तेजी से दौड़ सकते हैं।
Trinabhakshi ↔ मांसभक्षी
जंगल में तृणभक्षी हिरणों का बड़ा झुंड हरी घास चर रहा था।
मांसभक्षी बाघ अपनी भूख मिटाने के लिए शिकार की ताक में छिपा रहता है।
Taaza ↔ बासी
प्रातःकाल खेत से तोड़ी गई ताज़ा सब्जियाँ स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं।
बासी भोजन खाने से पेट में संक्रमण और विषाक्तता हो सकती है।
Teekha ↔ फीका
लाल मिर्च के कारण सब्जी का स्वाद बहुत तीखा और चटपटा हो गया था।
रोगी के लिए चिकित्सक ने फीका और बिना मिर्च-मसाले का दलिया खाने की सलाह दी।
Bhookh ↔ तृप्ति
दिनभर पैदल चलने के बाद शाम को तीव्र भूख लग आई थी।
मनपसंद थाली भर भोजन करने के बाद चेहरे पर तृप्ति का भाव दिखाई दिया।
Pyaas ↔ तृप्ति
धूप में दौड़ने के बाद कंठ सूख गया और असहनीय प्यास लगने लगी।
मटके का शीतल जल पीते ही तन-मन को अपार तृप्ति मिल गई।
Sada ↔ ताज़ा
टोकरी में रखे एक सड़े टमाटर ने बाकी सब्जियों को भी दूषित कर दिया।
बगीचे से लाई गई ताज़ा ककड़ी खाने में कुरकुरी और रसीली थी।
Ubla ↔ तला
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग उबला हुआ चना और मूंग नाश्ते में लेते हैं।
कड़ाही में अधिक तला हुआ भोजन वजन बढ़ाने और गैस का कारण बनता है।
Meethaapan ↔ तीखापन
गाजर के हलवे में मावे और चीनी का मीठापन बहुत संतुलित था।
हरी मिर्च के तीखापन से उसकी आँखों से पानी निकलने लगा।
Kshudha ↔ तृप्ति
कठोर श्रम के बाद क्षुधा शांत करने के लिए उसने गरम रोटियाँ खाईं।
संतुष्ट होकर थाली हटाने पर चेहरे पर पूर्ण तृप्ति के भाव झलक रहे थे।
Pipaasa ↔ तृप्ति
रेगिस्तान की तपती रेत में मुसाफिर की पिपासा बढ़ती ही जा रही थी।
शीतल जल का घूंट भरते ही उसकी पिपासा शांत हो गई और तृप्ति मिली।
Tikta ↔ मधुर
चिरायता और गिलोय का स्वाद तिक्त होता है जो बुखार उतारता है।
मुनक्का और अंजीर का स्वाद मधुर तथा बलवर्धक होता है।
Tadka ↔ सादा
लहसुन और हींग के तड़के से कढ़ी का स्वाद चौगुना हो गया।
पेट खराब होने पर बिना तड़के की सादा खिचड़ी ही खानी चाहिए।
Garmaagarm ↔ ठंडा
बरसात में तवे से उतरी गरमागर्म जलेबी खाने का आनंद ही अलग है।
ठंडी हो चुकी चाय स्वाद और महक दोनों खो देती है।
Taazgi ↔ बासीपन
पुदीने और धनिए की ताज़गी चटनी के स्वाद को नया निखार देती है।
फ्रिज से बाहर रखे केक में दो दिन बाद बासीपन और दुर्गंध आने लगी।
Tapaaya ↔ ठंडाया
चाशनी बनाने के लिए चीनी के घोल को धीमी आंच पर तपाया गया।
मटके में रखकर शरबत को पीने से पहले खूब ठंडाया गया।
Ubkaai ↔ तृप्ति
सड़े हुए तेल की गंध सूंघते ही उसे उबकाई आने लगी।
शुद्ध घी की गरम खिचड़ी खाकर पेट को परम तृप्ति मिली।
Mandaagni ↔ तीक्ष्णाग्नि
मंदाग्नि के रोगी को भारी गरिष्ठ भोजन से परहेज करना चाहिए।
तीक्ष्णाग्नि वाले युवा भारी भोजन को भी बहुत जल्दी पचा लेते हैं।
Madhurima ↔ तिक्तता
पके हुए गन्ने के रस की मधुरिमा मन को मोह लेती है।
अधिक उबल जाने से चाय में अप्रिय तिक्तता आ गई थी।
Teekhapan ↔ फीकापन
काली मिर्च के तीखापन से सूप में ताजगी और गर्माहट आ गई।
मसालों के अभाव में उबली सब्जियों का फीकापन खाने में नीरस लगा।
Ghrit ↔ तेल
हवन और सात्विक भोजन में गाय के घृत का प्रयोग किया जाता है।
अचार और तीखे व्यंजनों में सरसों के तेल का तड़का लगाया जाता है।
Taaoo ↔ ताई
पिता के बड़े भाई ताऊ जी परिवार के सभी बड़े निर्णय लेते हैं।
ताई जी ने त्योहार पर सभी भतीजों के लिए स्वादिष्ट पकवान बनाए।
Saamanjasya ↔ टकराव
पारिवारिक सामंजस्य और आपसी समझ से घर में शांति का वातावरण रहता है।
अहंकार के टकराव के कारण वर्षों पुराने व्यावसायिक साझेदार अलग हो गए।
Amoolya ↔ तुच्छ
गुरु का मार्गदर्शन जीवन में अमूल्य संपत्ति के समान होता है।
क्षणिक क्रोध के लिए तुच्छ वस्तु के पीछे संबंध बिगाड़ना समझदारी नहीं।
Maalomaal ↔ तंगहाल
बंपर फसल की बिक्री के बाद मंडी के सभी आढ़ती मालोमाल हो गए।
कारोबार ठप हो जाने के कारण वह कई महीनों से तंगहाल चल रहा है।
Thok ↔ खुदरा
थोक व्यापारी बड़े ट्रकों में सीधे कारखाने से माल मंगवाते हैं।
खुदरा दुकानदार मोहल्लों में ग्राहकों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में वस्तुएं बेचते हैं।
Phutkar ↔ थोक
फुटकर बाजार में सब्जियां थोड़ी ऊंची कीमतों पर मिलती हैं।
थोक मंडी में आलू की पूरी बोरी काफी कम दाम में मिल जाती है।
Tejee ↔ मंदी
अर्थव्यवस्था में सुधार होते ही शेयर बाजार में भारी तेजी देखने को मिली।
वैश्विक मंदी के कारण कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में छंटनी की नौबत आ गई।
Taksaal ↔ बाजार
सरकार की आधिकारिक टक्साल में नए सुरक्षा मानकों वाले सिक्के ढाले जाते हैं।
सिक्के टक्साल से निकलकर खुले बाजार में खरीदारी और बिक्री के माध्यम बनते हैं।
Tatpar ↔ ढीला
सैनिक देश की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर करने को सदा तत्पर रहते हैं।
ढीला और सुस्त कर्मचारी समय पर आदेशों का पालन करने में असफल रहता है।
Tatparata ↔ शिथिलता
अग्निशमन दल ने अद्भुत तत्परता दिखाते हुए आग को कुछ ही पलों में बुझा दिया।
प्रशासनिक शिथिलता के चलते विकास योजनाएं वर्षों तक अधूरी पड़ी रहीं।
Athak ↔ थका-हारा
अथक प्रयासों के बल पर वैज्ञानिक दल ने मंगल अभियान को सफल बनाया।
दिन भर की चिलचिलाती धूप में मजदूरी करने के बाद वह थका-हारा घर लौटा।
Talleen ↔ बेपरवाह
मूर्तिकार अपनी कलाकृति को अंतिम रूप देने में पूरी तरह तल्लीन था।
कर्तव्य के प्रति बेपरवाह व्यक्ति आवश्यक दिशा-निर्देशों की भी अनदेखी कर देता है।
Tadake ↔ देर-रात
किसान तड़के ही हल-बैल लेकर अपने खेतों की ओर चल पड़ा।
परीक्षा की तैयारी में विद्यार्थी देर-रात तक जागकर पढ़ाई करते रहे।
Tatkaal ↔ विलंबित
ऑनलाइन भुगतान प्रणाली से पैसा तत्काल दूसरे खाते में स्थानांतरित हो जाता है।
तकनीकी खराबी के कारण उड़ान का प्रस्थान कई घंटों के लिए विलंबित हो गया।
Tvarit ↔ धीमा
आपदा प्रबंधन दल ने त्वरित राहत अभियान चलाकर हजारों लोगों को बचाया।
प्रशासनिक प्रक्रियाओं का धीमा चलना आम जनता में असंतोष उत्पन्न करता है।
Tvara ↔ विलंब
जीवन रक्षक कार्यों में तनिक भी त्वरा दिखाना वरदान सिद्ध होता है।
अनावश्यक कागजी औपचारिकताओं में विलंब के कारण कई परियोजनाएं अधूरी रह जाती हैं।
Utaavalee ↔ ठहराव
बिना सोचे-समझे निर्णय लेने में उतावली दिखाना भविष्य में भारी पड़ सकता है।
अनुभवी नेता के भाषण में अद्भुत ठहराव और गंभीरता दिखाई देती है।
Ab ↔ तब
अब संभल जाने का समय आ गया है, अन्यथा बहुत देर हो जाएगी।
जब संकट आया था, तब सभी पड़ोसियों ने एकजुट होकर मदद की थी।
Yugaantar ↔ ठहराव
इंटरनेट के आविष्कार ने सूचना और संचार के क्षेत्र में युगांतर उपस्थित कर दिया।
राजनीतिक ठहराव के कारण देश के कई विकास कार्य लंबे समय तक अटके रहे।
Kaalik ↔ त्रैकालिक
राजनीतिक सत्ताएं कालिक होती हैं जो कुछ वर्षों के बाद समाप्त हो जाती हैं।
ईश्वरीय सत्य त्रैकालिक है जो भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों में एक समान रहता है।
Deerghasootrata ↔ त्वरा
प्रशासनिक दीर्घसूत्रता के कारण अनेक जनहितकारी फाइलें वर्षों तक दबी रहती हैं।
आपदा राहत में दिखाई गई त्वरा से सैकड़ों जानें बचाई जा सकीं।
Deerghakaaleen-yojana ↔ तात्कालिक-उपाय
नदी जल विवाद के स्थायी हल के लिए एक दीर्घकालीन-योजना तैयार की गई।
बाढ़ के पानी को रोकने के लिए रेत की बोरियां रखना केवल एक तात्कालिक-उपाय था।
Traimaasik ↔ वार्षिक
कंपनी हर तीन महीने बाद अपने त्रैमासिक वित्तीय परिणाम घोषित करती है।
वार्षिक बजट में पूरे साल की आय और व्यय का विस्तृत ब्यौरा होता है।
Tatkaalata ↔ विलंबन
साइबर सुरक्षा में तत्कालता ही हैकिंग हमलों से सिस्टम को बचा सकती है।
कागजी प्रक्रियाओं के विलंबन से पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है।
Aknpita ↔ थरथराता
संकट और विपत्ति के समय अकंपित का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने थरथराता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Traasa ↔ राहत
संकट और विपत्ति के समय त्रास का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने राहत का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Prataapee ↔ तेजहीन
संकट और विपत्ति के समय प्रतापी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने तेजहीन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Tejasvee ↔ कांतिहीन
संकट और विपत्ति के समय तेजस्वी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कांतिहीन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Traanadaataa ↔ संहारक
संकट और विपत्ति के समय त्राणदाता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने संहारक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Traasada ↔ सुखांत
संकट और विपत्ति के समय त्रासद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुखांत का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Tharatharaanaa ↔ स्थिर-रहना
संकट और विपत्ति के समय थरथराना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने स्थिर-रहना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Hausale-vaalaa ↔ टूटे-मन-वाला
संकट और विपत्ति के समय हौसले-वाला का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने टूटे-मन-वाला का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranabhoomi ↔ तपोभूमि
संकट और विपत्ति के समय रणभूमि का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने तपोभूमि का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Tathyapoorna ↔ काल्पनिक
विद्या और बौद्धिक विकास में तथ्यपूर्ण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में काल्पनिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Taarkika ↔ कुतार्किक
विद्या और बौद्धिक विकास में तार्किक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुतार्किक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tarkasngata ↔ असंगत
विद्या और बौद्धिक विकास में तर्कसंगत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में असंगत की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Teekshnabuddhi ↔ स्थूलबुद्धि
विद्या और बौद्धिक विकास में तीक्ष्णबुद्धि का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में स्थूलबुद्धि की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tatvajnyaanee ↔ मूढ़मति
विद्या और बौद्धिक विकास में तत्वज्ञानी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूढ़मति की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tatvavettaa ↔ अज्ञानी
विद्या और बौद्धिक विकास में तत्ववेत्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञानी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tathyaparaka ↔ भ्रामक
विद्या और बौद्धिक विकास में तथ्यपरक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में भ्रामक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Teekaa ↔ मूलपाठ
विद्या और बौद्धिक विकास में टीका का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूलपाठ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tarkasheela ↔ अंधविश्वासी
विद्या और बौद्धिक विकास में तर्कशील का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अंधविश्वासी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tathya ↔ भ्रम
विद्या और बौद्धिक विकास में तथ्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में भ्रम की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tatva-meemaansaa ↔ कोरी-कल्पना
विद्या और बौद्धिक विकास में तत्व-मीमांसा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कोरी-कल्पना की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tushaara ↔ घाम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तुषार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में घाम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Toophaanee ↔ शांत
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तूफानी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Tadita ↔ शांत-आकाश
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तड़ित की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-आकाश का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Himashaila ↔ तप्त-मरुस्थल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में हिमशैल की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तप्त-मरुस्थल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Tuhina ↔ अग्नि
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तुहिन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अग्नि का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheetaprada ↔ तापप्रद
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतप्रद की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तापप्रद का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Taapamaana-vriddhi ↔ तापमान-गिरावट
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तापमान-वृद्धि की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तापमान-गिरावट का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Galana ↔ तपन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में गलन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तपन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Osa-kee-boonden ↔ तपती-रेत
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में ओस-की-बूंदें की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तपती-रेत का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Taapamaana-sntulana ↔ चरम-तापमान
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तापमान-संतुलन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में चरम-तापमान का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-shaama ↔ तपती-दोपहर
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-शाम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तपती-दोपहर का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Barpha-kee-chaadara ↔ तपा-धरातल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बर्फ-की-चादर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तपा-धरातल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Tadita-jhnjhaa ↔ शांत-नभ
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तड़ित-झंझा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-नभ का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Ghanaa-koharaa ↔ तेज-धूप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में घना-कोहरा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तेज-धूप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Teja-barasaata ↔ धीमी-फुहार
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तेज-बरसात की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में धीमी-फुहार का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Tateeya-mausama ↔ महाद्वीपीय-जलवायु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तटीय-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में महाद्वीपीय-जलवायु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Barasaatee-raata ↔ तारों-भरी-रात
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बरसाती-रात की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तारों-भरी-रात का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Himashikhara ↔ तप्त-घाटी
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में हिमशिखर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में तप्त-घाटी का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Apnaana ↔ ठुकराना
सच्चे मित्र वही हैं जो हमारी कमियों के बावजूद हमें खुले दिल से अपनाना जानते हैं।
अनैतिक लाभ और रिश्वत के प्रस्ताव को एक स्वाभिमानी अधिकारी ने तुरंत ठुकराना श्रेयस्कर समझा।
Thoda ↔ बहुत
संतोषी व्यक्ति थोड़ा सा मिलने पर भी प्रभु का धन्यवाद करते हुए प्रसन्न रहता है।
लालची व्यक्ति के पास बहुत धन-दौलत होने के बावजूद उसकी तृष्णा कभी शांत नहीं होती।