Saghan ↔ विरल
तराई के सघन वनों की तुलना में पर्वतीय शिखरों पर वनस्पति विरल पाई जाती है।
पहाड़ों की अत्यधिक ऊंचाई पर विरल वायु के कारण सांस लेना कठिन हो जाता है।
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Saghan ↔ विरल
तराई के सघन वनों की तुलना में पर्वतीय शिखरों पर वनस्पति विरल पाई जाती है।
पहाड़ों की अत्यधिक ऊंचाई पर विरल वायु के कारण सांस लेना कठिन हो जाता है।
Vineet ↔ उद्धत
विनीत छात्र गुरुओं के प्रिय होते हैं, वहीं उद्धत स्वभाव वाले अपनी प्रतिष्ठा खो बैठते हैं।
अहंकार से भरा उद्धत व्यक्ति ज्ञानियों की संगति से भी कोई लाभ नहीं उठा पाता।
Vistrit ↔ संक्षिप्त
परीक्षा में विस्तृत उत्तर के स्थान पर संक्षिप्त और सारगर्भित बिंदु लिखना बेहतर होता है।
संक्षिप्त उत्तर में भी यदि मुख्य तथ्य समाहित हों तो वह विस्तृत निबंध से अधिक प्रभावी होता है।
Sankeern ↔ विस्तीर्ण
संकीर्ण मानसिकता वाले लोग हमेशा अपने दायरे में सिमटे रहते हैं जबकि विस्तीर्ण दृष्टि विश्व को अपना मानती है।
महासागर का विस्तीर्ण जलविस्तार क्षितिज के पार तक फैला दृष्टिगोचर होता है।
Vyaapak ↔ सीमित
इस नीति का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ा, इसका असर केवल सीमित क्षेत्र तक नहीं रहा।
सीमित साधनों के बावजूद दृढ संकल्प से मनुष्य असीम उपलब्धियां अर्जित कर सकता है।
Samriddh ↔ विपन्न
समृद्ध किसान खुशहाली से जीवन बिताता है जबकि विपन्न मजदूर दो वक्त की रोटी को तरसता है।
विपन्न वर्ग के उत्थान के बिना किसी भी राष्ट्र की संपूर्ण समृद्धि संभव नहीं है।
Sampanna ↔ विपन्न
साधनों से संपन्न होने पर भी मनुष्य यदि विनम्र न हो तो उसका वैभव व्यर्थ है।
विपन्न वर्ग के उत्थान के बिना किसी भी राष्ट्र की संपूर्ण समृद्धि संभव नहीं है।
Vidvaan ↔ मूर्ख
विद्वान की संगति विवेक जगाती है जबकि मूर्ख की संगति संकट पैदा करती है।
मूर्ख व्यक्ति को हितकारी उपदेश देना भी व्यर्थ जाता है, जैसे बंजर भूमि में बीज बोना।
Kaalpanik ↔ वास्तविक
उपन्यास की कहानी काल्पनिक होती है, किंतु उसके पात्र वास्तविक जीवन से प्रेरित लगते हैं।
समस्या का वास्तविक कारण जाने बिना उसका स्थायी समाधान खोजना असंभव है।
Vaastavik ↔ अवास्तविक
वास्तविक स्थिति जाने बिना किसी पर दोषारोपण करना उचित नहीं।
अवास्तविक अपेक्षाएं पालने से अंत में केवल निराशा और पश्चाताप ही हाथ लगता है।
Mook ↔ वाचाल
मूक होई वाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर गहन — ईश्वर कृपा से गूंगा भी वाचाल हो जाता है।
वाचाल व्यक्ति बिना विचारे बोलकर अक्सर अपनी ही गरिमा घटा लेता है।
Mitbhaashi ↔ वाचाल
मितभाषी नेता के हर शब्द का वजन होता है, वाचाल व्यक्ति की बात कोई गंभीरता से नहीं लेता।
वाचाल व्यक्ति बिना विचारे बोलकर अक्सर अपनी ही गरिमा घटा लेता है।
Anuraagi ↔ विरागी
संसार का अनुरागी मनुष्य मोह में बंधता है, विरागी संन्यासी मोक्ष की ओर बढ़ता है।
विरागी साधु सांसारिक प्रलोभनों से मुक्त होकर आत्मतत्व के अनुसंधान में लीन रहता है।
Vishesh ↔ सामान्य
प्रत्येक बालक में कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है, कोई भी सामान्य नहीं होता।
सामान्य नागरिक की देशभक्ति ही किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति और संबल होती है।
Vyakti-gat ↔ सार्वजनिक
सार्वजनिक हित के सामने व्यक्तिगत स्वार्थ का त्याग करना ही सच्ची देशभक्ति है।
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना प्रत्येक देशवासी का पावन नागरिक कर्तव्य है।
Riju ↔ वक्र
गणित में ऋजु रेखा दो बिंदुओं के बीच सबसे छोटा मार्ग होती है, जबकि वक्र रेखा टेढ़ी होती है।
वक्र मार्ग चलने में समय और परिश्रम अधिक लेता है, सरल सीधा मार्ग श्रेयस्कर है।
Anivaarya ↔ वैकल्पिक
परीक्षा में प्रथम खंड अनिवार्य है जबकि द्वितीय खंड में वैकल्पिक प्रश्न हैं।
वैकल्पिक ऊर्जा के स्रोतों को अपनाना पर्यावरण संरक्षण के लिए अनिवार्य हो चुका है।
Nirmaan ↔ विनाश
राष्ट्र के निर्माण में वर्षों लग जाते हैं, जबकि विनाश कुछ ही पलों में हो सकता है।
युद्ध केवल विनाश और संहार लाता है, शांति में ही लोक-कल्याण का निर्माण संभव है।
Vijay ↔ पराजय
सत्यमेव जयते — अंततः सत्य की ही विजय होती है।
साहसी खिलाड़ी पराजय से निराश होने के बजाय अपनी कमियों से सीख लेता है।
Milan ↔ विरह
दीर्घ विरह के पश्चात पुराने मित्रों का मिलन अत्यंत भावुक कर देने वाला था।
काव्य में विरह की वेदना मिलन के सुख को और अधिक गहरा बना देती है।
Sanyog ↔ वियोग
श्रृंगार रस के दो पक्ष होते हैं — संयोग और वियोग।
प्रियजनों का वियोग हृदय को भारी पीड़ा पहुंचाता है।
Kraya ↔ विक्रय
व्यापार में क्रय और विक्रय के अंतर से ही लाभ निर्धारित होता है।
बाजार में अच्छी गुणवत्ता की वस्तुओं का विक्रय तेजी से होता है।
Aay ↔ व्यय
बुद्धिमान गृहस्थ अपनी आय के अनुसार ही व्यय करता है ताकि भविष्य सुरक्षित रहे।
अनावश्यक व्यय से बचकर बचत करना वित्तीय स्थिरता की नींव है।
Desh ↔ विदेश
देश और विदेश दोनों में भारतीय संस्कृति की साख ऊंची है।
विदेश यात्रा से ज्ञान और दृष्टिकोण का विस्तार होता है।
Videsh ↔ स्वदेश
विदेश यात्रा से ज्ञान और दृष्टिकोण का विस्तार होता है।
स्वदेश की मिट्टी की खुशबू परदेश में रहने वाले प्रवासी को सदा अपनी ओर खींचती है।
Sangathan ↔ विघटन
मजबूत संगठन से कठिन लक्ष्य भी पा लिए जाते हैं, आंतरिक कलह से विघटन तय है।
राष्ट्रविरोधी ताकतें देश के विघटन का षड्यंत्र रचती हैं, जिसे सजग नागरिक विफल कर देते हैं।
Vaidh ↔ अवैध
व्यापार केवल वैध साधनों से करना चाहिए, अवैध धन कभी सुख नहीं देता।
प्रशासन ने अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाकर सरकारी भूमि को मुक्त कराया।
Vidhi ↔ निषेध
शास्त्रों में शुभ कार्यों के लिए विधि और पापकर्मों के लिए निषेध बताया गया है।
अस्पतालों में धूम्रपान पूर्णतः निषेध है।
Var ↔ वधू
विवाह समारोह में वर और वधू दोनों ने अग्नि को साक्षी मानकर फेरे लिए।
ससुराल में नई वधू का पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत हुआ।
Adhyaapak ↔ विद्यार्थी
एक समर्पित अध्यापक समाज के भविष्य का सच्चा निर्माता होता है।
विद्यार्थी जीवन कठिन तपस्या का काल होता है जिसमें चरित्र का निर्माण होता है।
Vakta ↔ श्रोता
कुशल वक्ता अपने विचारों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है।
सभामंच पर ओजस्वी वक्ता और ध्यानमग्न श्रोता का सामंजस्य अद्भुत था।
Vidya ↔ अविद्या
विद्या अंधकार को दूर कर प्रकाश फैलाती है, अविद्या मनुष्य को भटकाती है।
अविद्या के आवरण को हटाए बिना आत्मज्ञान की प्राप्ति असंभव है।
Vyasthi ↔ समष्टि
व्यष्टि और समष्टि के बीच संतुलन ही स्वस्थ समाज की पहचान है।
समष्टि के कल्याण में ही व्यष्टि का हित समाहित रहता है।
Sattaaroodh ↔ विपक्षी
सत्तारूढ़ दल पर जनकल्याणकारी योजनाओं को निष्पक्ष रूप से धरातल पर उतारने की जवाबदेही होती है।
संसद में विपक्षी दल नीतियों की निष्पक्ष समीक्षा कर शासन की कमियों को उजागर करता है।
Snskriti ↔ विकृति
हमारे देश की प्राचीन संस्कृति विविधता में एकता और पारस्परिक सद्भाव का संदेश देती है।
नशाखोरी और अभद्रता समाज के ताने-बाने में पैदा होने वाली गंभीर विकृति के लक्षण हैं।
Saamudaayika ↔ व्यक्तिगत
गांव के विकास के लिए सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया जहाँ सभी एकत्र हो सकें।
सार्वजनिक निर्णय लेते समय व्यक्तिगत लाभ और स्वार्थ को पीछे रखना पड़ता है।
Samarasataa ↔ विषमता
समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने से ही राष्ट्र में वास्तविक समरसता स्थापित होती है।
आर्थिक और सामाजिक विषमता को दूर किए बिना एक सशक्त समाज का निर्माण संभव नहीं है।
Vibhaajana ↔ एकीकरण
स्वार्थपरक राजनीति समाज का विभाजन कर लोगों को परस्पर बांटने का प्रयास करती है।
सरदार पटेल ने सैकड़ों रियासतों का एकीकरण करके भारत को एक सूत्र में पिरोया।
Ghareloo ↔ व्यावसायिक
गृहणियां घरेलू कार्यों के साथ-साथ परिवार के प्रत्येक सदस्य के स्वास्थ्य का ध्यान रखती हैं।
आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन पर नगर निगम ने प्रतिबंध लगा दिया है।
Grihasthee ↔ वैराग्य
ईमानदारी से अपनी गृहस्थी संभालना और बाल-बच्चों का भरण-पोषण करना भी एक महान साधना है।
सांसारिक मोह-माया से विरक्त होकर उन्होंने वैराग्य धारण कर लिया और संन्यास मार्ग चुन लिया।
Vidhura ↔ सपत्नीक
पत्नी के देहांत के पश्चात वह वृद्ध व्यक्ति विधुर जीवन बिताते हुए एकांत में रहने लगा।
धार्मिक अनुष्ठान और यज्ञ में यजमान को सपत्नीक अर्थात पत्नी सहित बैठने का शास्त्रीय विधान है।
Vyavasthaa ↔ अव्यवस्था
मेले में पुलिस प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण की चाक-चौबंद व्यवस्था कर रखी थी।
बिना योजना के आयोजित कार्यक्रम में भगदड़ मचने से चारों ओर अव्यवस्था फैल गई।
Vaimanasya ↔ सौमनस्य
पुरानी रंजिश और वैमनस्य को भुलाकर दोनों परिवारों ने आपस में हाथ मिला लिए।
पड़ोसियों के बीच प्रेम और सौमनस्य का वातावरण रहने से जीवन सुखमय बन जाता है।
Vyom ↔ धरा
वैज्ञानिकों ने धरा से रॉकेट प्रक्षेपित कर अनंत व्योम के रहस्यों को उजागर किया।
वर्षा की बूंदें गगन से गिरकर प्यासी धरा को तृप्त और हरा-भरा कर देती हैं।
Vrishti ↔ अनावृष्टि
समय पर होने वाली वृष्टि भूमि को संवारती है, जबकि अनावृष्टि हरियाली को नष्ट कर देती है।
किसानों के लिए अनावृष्टि का संकट अतिवृष्टि से भी अधिक गंभीर सिद्ध होता है।
Vasant ↔ पतझड़
पतझड़ में पेड़ पत्ते गिरा देते हैं, किंतु वसंत आते ही वे नवपल्लवों से सुशोभित हो उठते हैं।
जीवन का नियम है कि पतझड़ के उदास दिनों के बाद वसंत की सुनहरी बहार अवश्य आती है।
Anu ↔ विराट
विज्ञान सिद्ध करता है कि एक छोटे से अणु के विखंडन से विराट ऊर्जा की उत्पत्ति होती है।
सूक्ष्म अणु के विखंडन से विराट ऊर्जा की उत्पत्ति प्रकृति का विस्मयकारी नियम है।
Van ↔ मरु
हरे-भरे सघन वन वर्षा को आकर्षित करते हैं, जबकि शुष्क मरु में जल की बूंदें तरसती हैं।
वृक्षारोपण अभियान के माध्यम से मरु को भी हरे-भरे वन में बदला जा सकता है।
Varsha ↔ सूखा
वर्षा ऋतु में नदियां लबालब भर जाती हैं, जबकि सूखे में उनकी तलहटी की रेत दिखने लगती है।
प्रकृति के प्रकोप से बचना कठिन है; कभी सूखा धरती को सुखाता है तो कभी बाढ़ सब बहा ले जाती है।
Nirvaat ↔ वायु
प्रकाश की किरणें निर्वात में भी गमन कर सकती हैं, किंतु ध्वनि को संचरण हेतु वायु चाहिए।
अंतरिक्ष के शून्य निर्वात में जीवन संभव नहीं, धरती की सघन वायु ही श्वास देती है।
Aagney ↔ वायव्य
आग्नेय कोण अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि वायव्य कोण वायु तत्व से संबंधित है।
वायव्य दिशा से आने वाली शीतल पछुआ हवाओं ने आग्नेय कोण की गर्माहट को कम कर दिया।
Sam Jalvayu ↔ विषम जलवायु
मुंबई जैसे समुद्री शहरों में सालभर सम जलवायु रहती है, जबकि दिल्ली में विषम जलवायु पाई जाती है।
रेगिस्तानी इलाकों की विषम जलवायु में दिन में भीषण गर्मी और रात में तीखी ठंड पड़ती है।
Vaashp ↔ हिम
जल गर्म होकर वाष्प बनकर गगन में उड़ता है और अत्यधिक ठंड में हिम बनकर गिरता है।
सूर्य के प्रचंड ताप से हिमालय का पिघलता हिम पावन सदानीरा नदियों को जन्म देता है।
Harsh ↔ विषाद
उत्सव के अवसर पर चारों ओर हर्ष और आनंद की लहर दौड़ गई।
विपदा के क्षणों में मन को विषाद से उबारना आवश्यक होता है।
Anurag ↔ विराग
मातृभूमि के प्रति सच्चा अनुराग हर नागरिक के हृदय में होना चाहिए।
साधु पुरुषों का सांसारिक सुखों के प्रति विराग स्वाभाविक होता है।
Ahankar ↔ विनम्रता
रावण का मिथ्या अहंकार ही उसके समूल विनाश का कारण बना था।
विद्वान व्यक्तियों का सबसे बड़ा गुण उनकी सहज विनम्रता होती है।
Moh ↔ विरक्ति
संतान के प्रति अंधा मोह कभी-कभी उचित और अनुचित का भेद भुला देता है।
संसार की नश्वरता को समझकर साधक के मन में विरक्ति उत्पन्न हो गई।
Vyatha ↔ सुख
दीन-दुखियों की मूक व्यथा देखकर परोपकारी व्यक्ति का हृदय द्रवित हो उठा।
संतुष्ट जीवन जीने वाले व्यक्ति को आत्मिक सुख का अनुभव होता है।
Sanshay ↔ विश्वास
संशय में पड़ा हुआ मनुष्य कभी कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाता।
सच्चे मित्रों के बीच अटूट विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति होता है।
Vyakulta ↔ स्थिरता
संकट के समय मन की व्याकुलता समस्याओं को और जटिल बना देती है।
मानसिक स्थिरता बनाए रखने से कठिन से कठिन परिस्थिति भी नियंत्रित हो जाती है।
Vatsalya ↔ उपेक्षा
माता-पिता का निस्वार्थ वात्सल्य संतान के सम्पूर्ण विकास का आधार है।
शिशुओं की उपेक्षा करने से उनका शारीरिक व मानसिक विकास बाधित होता है।
Nishtha ↔ विश्वासघात
सैनिकों ने मातृभूमि की रक्षा में अपनी अटूट निष्ठा का प्रमाण दिया।
मित्र के साथ विश्वासघात करना सबसे घृणित अपराध माना जाता है।
Bhakti ↔ विरक्ति
ईश्वर के प्रति अनन्य भक्ति हृदय को समस्त चिंताओं से मुक्त कर देती है।
धार्मिक आडंबरों को देखकर बुद्धिजीवियों में उनसे विरक्ति हो गई।
Vishwas ↔ अविश्वास
व्यापार और साझेदारी की सफलता आपसी विश्वास पर ही टिकी होती है।
झूठ बोलने से साथियों के मन में अविश्वास पैदा हो जाता है।
Vardan ↔ अभिशाप
विज्ञान मानवता के लिए तब तक वरदान है जब तक उसका सदुपयोग हो।
यदि विनाशकारी अस्त्रों का प्रयोग हुआ तो विज्ञान एक अभिशाप बन जाएगा।
Ullasit ↔ विषण्ण
होली के पावन पर्व पर सारा गाँव उल्लसित रंगों में रंग गया।
पराजय के उपरांत राजा विषण्ण भाव से महल के कोने में बैठा रहा।
Ekagra ↔ विक्षिप्त
एकाग्र मन से अध्ययन करने पर जटिल विषय भी आसानी से समझ आ जाता है।
शोरगुल के वातावरण में मन विक्षिप्त होकर भटकने लगता है।
Vatsal ↔ निष्ठुर
वत्सल पिता ने अपने दोनों बालकों को गले से लगा लिया।
निष्ठुर डाकुओं ने निरीह यात्रियों पर कोई दया नहीं दिखाई।
Vinay ↔ अविनय
विद्या ददाति विनयं—सच्ची शिक्षा मनुष्य को विनय और शील सिखाती है।
अविनय और अशिष्टता से बात करने वाला व्यक्ति कभी आदर नहीं पाता।
Vishaktata ↔ अमृतत्व
कटु वचनों की विषाक्तता आपसी प्रेम को नष्ट कर देती है।
सत्य और प्रेम के वचनों में अमृतत्व का वास होता है।
Vyakul ↔ अविचलित
पुत्र के देर से लौटने पर माँ का मन व्याकुल होने लगा।
विशाल पर्वत के समान धीर पुरुष हर संकट में अविचलित रहता है।
Vichalit ↔ अविचलित
विपत्ति की आंधी भी सच्चे साधक को अपने संकल्प से विचलित नहीं कर सकती।
सत्यवादी हर प्रलोभन के सामने अविचलित और दृढ़ खड़ा रहता है।
Dakshin ↔ वाम
हृदय शरीर के वाम भाग में और यकृत दक्षिण भाग में स्थित होता है।
वाम हाथ की अपेक्षा अधिकांश लोग दैनिक कार्यों में दक्षिण हाथ का प्रयोग करते हैं।
Tarun ↔ वृद्ध
तरुण अवस्था में शरीर में असीम ऊर्जा और नई उमंग का संचार रहता है।
वृद्ध अवस्था में शरीर की त्वचा झुर्रियों से भर जाती है और चाल धीमी हो जाती है।
Deh ↔ विदेह
पंचतत्वों से निर्मित यह भौतिक देह नश्वर है और समय के साथ ढल जाती है।
राजा जनक देह में रहते हुए भी आसक्तियों से परे होकर विदेह कहलाते थे।
Vaksha ↔ पीठ
प्राणायाम के गहन अभ्यास से वक्ष का फैलाव बढ़ता है और फेफड़े पूर्ण क्षमता से कार्य करते हैं।
दैनिक योगासनों से पीठ की कशेरुकाएं लचीली रहती हैं और रीढ़ की हड्डी सुदृढ़ बनी रहती है।
Vivek ↔ अविवेक
संकट की घड़ी में विवेक और धैर्य से काम लेने वाला व्यक्ति हर विपत्ति पार कर लेता है।
क्रोध की अवस्था में अविवेक के वशीभूत होकर लिए गए निर्णय केवल पश्चाताप देते हैं।
Vairaagya ↔ अनुराग
संसार की नश्वरता को देखकर राजकुमार सिद्धार्थ के मन में वैराग्य उत्पन्न हो गया।
अपने देश और संस्कृति के प्रति गहरा अनुराग रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
Brahmacharya ↔ व्यभिचार
विद्यार्थी जीवन में ब्रह्मचर्य और एकाग्रता बनाए रखने से मेधा शक्ति तीव्र होती है।
व्यभिचार और असंयम में लिप्त होने से मनुष्य का शारीरिक व नैतिक पतन हो जाता है।
Vidhipoorn ↔ विधिहीन
संपत्ति का क्रय-विक्रय पूरी तरह विधिपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर संपन्न हुआ।
विधिहीन और अराजक व्यवस्था में दुर्बल लोगों के अधिकारों की रक्षा नहीं हो पाती।
Vishwasneeya ↔ अविश्वसनीय
विश्वसनीय साथी जीवन के कठिन दौर में भी कभी साथ नहीं छोड़ता।
अविश्वसनीय व्यक्ति से गोपनीय बातें साझा करना खतरे से खाली नहीं होता।
Vishwaaspaatra ↔ दगाबाज
राजा ने अपने सबसे विश्वासपात्र मंत्री को राज्य का खजाना सौंपा।
दगाबाज शत्रु से भी अधिक घातक होता है क्योंकि वह पीठ पीछे वार करता है।
Vandneeya ↔ तिरस्करणीय
देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर सैनिक समस्त देशवासियों के लिए वंदनीय हैं।
राष्ट्रद्रोह और गद्दारी में लिप्त व्यक्ति का आचरण सदा तिरस्करणीय होता है।
Satyasandh ↔ वचनभंगी
सत्यसंध राजा दशरथ ने अपने वचनों की रक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगा दी।
वचनभंगी व्यक्ति पर कोई भी बुद्धिमान राजा या व्यापारी पुनः विश्वास नहीं करता।
Samanvay ↔ वैमनस्य
विभिन्न संस्कृतियों और विचारों के बीच समन्वय स्थापित करना ही शांति का मार्ग है।
सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने वाले तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आवश्यक है।
Vyshaila ↔ विषहीन
कोबरा एक अत्यंत विषैला सर्प है जिसके डंक से तुरंत मृत्यु हो सकती है।
धामन सांप पूरी तरह विषहीन होता है और चूहों को खाकर किसानों की मदद करता है।
Vanya ↔ ग्राम्य
राष्ट्रीय उद्यान में अनेक दुर्लभ वन्य जीवों को प्राकृतिक आवास दिया गया है।
ग्राम्य पशु जैसे गाय और बकरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार हैं।
Vaanar ↔ वानरी
वानर पेड़ की डालियों पर एक सिरे से दूसरे सिरे तक छलांग लगा रहा था।
वानरी अपने नन्हे बच्चे को छाती से चिपकाए हुए फल खा रही थी।
Shuddhghee ↔ वनस्पति
शुद्धघी में बने बेसन के लड्डू अपनी महक और स्वाद के लिए जाने जाते हैं।
वनस्पति घी का अत्यधिक उपयोग धमनियों में रुकावट पैदा कर सकता है।
Vrat ↔ भोजन
शिवरात्रि के पावन पर्व पर उसने दिनभर फलाहार का व्रत रखा।
संध्या वंदना के बाद परिवार के सभी सदस्यों ने बैठकर भोजन किया।
Vyanjan ↔ कच्चा-अन्न
दावत में छप्पन प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन परोसे गए थे।
गोदाम में रखा कच्चा-अन्न पकाने के बाद ही खाने योग्य बनता है।
Amritmay ↔ विषैला
भूखे यात्री के लिए कुएं का मीठा पानी अमृतमय प्रतीत हुआ।
सड़े हुए मशरूम से बना सूप विषैला और जानलेवा साबित हो सकता है।
Gholak ↔ विलेय
खीर बनाते समय उबलता हुआ दूध मुख्य घोलक का कार्य करता है।
दूध में घुलने वाली चीनी और केसर विलेय के रूप में मिठास घोलते हैं।
Sandhi ↔ विग्रह
दो पड़ोसी देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए ऐतिहासिक संधि हुई।
नीतिशास्त्र में विग्रह अर्थात् युद्ध को अंतिम विकल्प के रूप में देखा गया है।
Mitrabhaav ↔ वैरभाव
पड़ोसियों के साथ मित्रभाव रखने से रोजमर्रा की समस्याएं सरलता से सुलझ जाती हैं।
मन में अकारण वैरभाव पालने से व्यक्ति का अपना मानसिक स्वास्थ्य नष्ट होता है।
Graahak ↔ विक्रेता
ग्राहक ने सामान खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता और मूल्य की जांच की।
ईमानदार विक्रेता ग्राहकों को उचित दाम पर सही वस्तु उपलब्ध कराता है।
Kreta ↔ विक्रेता
भूमि रजिस्ट्री के समय क्रेता ने समस्त राशि का भुगतान चेक द्वारा किया।
विक्रेता ने आवश्यक कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करके मालिकाना हक सौंपा।
Sahayogi ↔ विरोधी
परियोजना को समय पर पूरा करने में प्रत्येक सहयोगी का योगदान महत्वपूर्ण था।
चुनाव में विरोधी पक्ष ने सत्ताधारी दल की नीतियों की कड़ी आलोचना की।
Paksh ↔ विपक्ष
सदन में पक्ष के सांसदों ने नए विधेयक का पुरजोर समर्थन किया।
विपक्ष ने विधेयक की कमियों को उजागर करते हुए संशोधन की मांग की।
Pakshdhar ↔ विरोधी
वह पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा के प्रबल पक्षधर हैं।
योजना के विरोधी लोगों ने निर्माण कार्य पर रोक लगाने की याचिका दायर की।
Samarthak ↔ विरोधी
रैली में हजारों समर्थक झंडे लहराते हुए अपने उम्मीदवार का उत्साह बढ़ा रहे थे।
विरोधी दल ने जनता को जागरूक करने के लिए पर्चे बांटे।
Sagotreeya ↔ विजातीय
त्योहार पर सभी सगोत्रीय संबंधी एक साथ पैतृक घर में एकत्र हुए।
विजातीय लोगों के बीच भी सौहार्द और मित्रता स्थापित की जा सकती है।
Swadeshee ↔ विदेशी
स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना और साथी देशवासियों का सहयोग करना देशभक्ति है।
विदेशी पर्यटकों का आतिथ्य सत्कार करना भारतीय संस्कृति की परंपरा है।
Samarpan ↔ विद्रोह
सैनिकों का देश के प्रति अटूट समर्पण सीमाओं की सुरक्षा का आधार है।
अत्याचारी शासक के विरुद्ध जनता ने एकजुट होकर खुला विद्रोह कर दिया।
Vafaadaari ↔ बेवफाई
सेवक की वर्षों की वफादारी के बदले स्वामी ने उसे पारिवारिक सदस्य जैसा माना।
व्यापार में साझेदार की बेवफाई के कारण कंपनी दिवालिया होने के कगार पर आ गई।
Vafaadaar ↔ बेवफा
वफादार सिपाही ने राजा की प्राणरक्षा के लिए अपने सीने पर तीर झेल लिया।
बेवफा मित्र ने लालच में आकर शत्रु को गुप्त भेद बता दिए।
Nishthaavaan ↔ विद्रोही
निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने दिन-रात परिश्रम करके संगठन को सशक्त बनाया।
विद्रोही गुटों ने सरकारी प्रतिष्ठानों पर हमला करके कानून को चुनौती दी।
Samvayask ↔ वृद्ध
समवयस्क मित्रों के समूह में युवक खुलकर अपने विचार और सपने व्यक्त करते हैं।
वृद्ध परिजनों के अनुभवों से सीख लेकर युवा जीवन की गलतियों से बच सकते हैं।
Varishtha ↔ कनिष्ठ
वरिष्ठ अधिकारियों का अनुभव कठिन प्रशासनिक चुनौतियों को सुलझाने में काम आता है।
कनिष्ठ सहायकों ने आंकड़ों का संकलन करके रिपोर्ट समय पर पूरी की।
Poorvaj ↔ वंशज
हमारे पूर्वज पर्यावरण और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने के पक्षधर थे।
योग्य वंशज अपने कुल के गौरव और सद्विचारों को आगे बढ़ाते हैं।
Suhaagin ↔ विधवा
करवा चौथ पर सुहागिन स्त्रियाँ पति की दीर्घायु के लिए निर्जल व्रत रखती हैं।
पति के निधन के बाद विधवा महिला ने साहसपूर्वक अपने बच्चों का पालन-पोषण किया।
Sadhwa ↔ विधवा
मंगल उत्सव में सधवा स्त्रियों द्वारा मंगल कलश की स्थापना की जाती है।
कठिन परिस्थितियों में भी उस विधवा माँ ने कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया।
Vidur ↔ सधुर
पत्नी के देहांत के पश्चात विदुर पुरुष एकाकी जीवन बिताने लगा।
सधुर गृहस्थ अपनी पत्नी के सहयोग से गृहस्थी के समस्त दायित्व निभाता है।
Avivaahit ↔ विवाहित
अविवाहित युवा अपनी पढ़ाई और करियर पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रहा था।
विवाहित दंपति ने मिलकर नए गृहस्थ जीवन की सुंदर शुरुआत की।
Kunwaara ↔ विवाहित
कुँवारा लड़का नौकरी लगने के बाद ही विवाह बंधन में बंधना चाहता था।
विवाहित पुरुष अपने परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी निष्ठा से उठाता है।
Sadbhaavpoorn ↔ वैरभावपूर्ण
दोनों संप्रदायों के बीच सद्भावपूर्ण वातावरण से शहर में अमन-चैन बना रहा।
वैरभावपूर्ण टिप्पणियों से समाज का ताना-बाना छिन्न-भिन्न हो सकता है।
Varpaksh ↔ वधूपक्ष
वरपक्ष ने सादगीपूर्ण और बिना दहेज के विवाह का अनुकरणीय निर्णय लिया।
वधूपक्ष ने आतिथ्य सत्कार में कोई कमी न छोड़ते हुए भव्य प्रबंध किए।
Maitree ↔ वैर
दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान से मैत्री के नए युग का सूत्रपात हुआ।
पुरानी बातों को लेकर मन में वैर पाले रखना केवल विनाश की ओर ले जाता है।
Bandhutva ↔ विद्वेष
संविधान की प्रस्तावना में सभी नागरिकों के मध्य बंधुत्व की भावना को सर्वोपरि माना गया है।
सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
Vaibhav ↔ दैन्य
राजमहल का अद्वितीय वैभव देखकर सभी विदेशी राजदूत चकित रह गए।
भीषण अकाल के कारण संपूर्ण जनपद में दैन्य और लाचारी छा गई।
Vibhav ↔ विपन्नता
अयोध्या नगरी का अप्रतिम विभव देख सब मंत्रमुग्ध हो गए।
बाढ़ के विनाश ने समृद्ध नगर को विपन्नता के कगार पर धकेल दिया।
Arjan ↔ व्यय
ज्ञान और धन का अर्जन कठिन साधना और समर्पण मांगता है।
आय से अधिक व्यय करने वाला व्यक्ति कभी भी चिंतामुक्त नहीं रह सकता।
Nivesh ↔ विनिवेश
स्टार्टअप कंपनियों में विदेशी निवेशकों ने भारी निवेश किया है।
घाटे में चल रहे सरकारी उपक्रमों में सरकार विनिवेश की नीति अपनाती है।
Laagat-moolya ↔ विक्रय-मूल्य
वस्तु के उत्पादन पर आई सामग्री और मजदूरी उसका लागत-मूल्य तय करती है।
व्यापारी लाभ जोड़ने के पश्चात ही वस्तु का विक्रय-मूल्य निर्धारित करता है।
Ankit-moolya ↔ वास्तविक-मूल्य
दुकानदार ने पुस्तक के अंकित-मूल्य पर बीस प्रतिशत की छूट दी।
छूट घटाने के बाद जो भुगतान किया गया, वही वस्तु का वास्तविक-मूल्य था।
Vaibhavshaalee ↔ दीन
वैभवशाली महलों में रहने वाले राजा को प्रजा की कठिनाइयों का आभास होना चाहिए।
दीन और असहाय वृद्धों की सेवा करना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है।
Sampatti ↔ विपत्ति
सम्पत्ति में सभी लोग मित्र बनने के लिए आगे आते हैं।
सच्चे मित्र की परीक्षा केवल विपत्ति और कठिनाइयों में ही होती है।
Vimudreekaran ↔ पुनर्मुद्रीकरण
कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने पुराने बड़े नोटों का विमुद्रीकरण किया।
नए सुरक्षा मानकों वाले नोट जारी करके अर्थव्यवस्था का पुनर्मुद्रीकरण तेजी से पूरा हुआ।
Shram ↔ विश्राम
खेतों में दिन-रात कठोर श्रम करने के बाद ही फसल पकती है।
थके हुए मजदूरों ने वृक्ष की शीतल छाया में बैठकर कुछ देर विश्राम किया।
Vyaavasaayik ↔ अव्यावसायिक
सफल होने के लिए कार्यस्थल पर पूर्णतः व्यावसायिक दृष्टिकोण अपनाना पड़ता है।
अव्यावसायिक व्यवहार के कारण कई प्रतिभाशाली लोग भी अपने करियर में पिछड़ जाते हैं।
Srijan ↔ विनाश
कवि और चित्रकार अपनी कल्पना शक्ति से सुंदर कला का सृजन करते हैं।
युद्ध की विभीषिका केवल विनाश और जन-हानि लेकर आती है।
Udyog ↔ विश्राम
कठोर उद्योग करने से ही राष्ट्र की संपन्नता और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
लंबे समय तक काम करने के बाद मन और शरीर दोनों को उचित विश्राम चाहिए।
Kaaryaavadhi ↔ विश्रामकाल
कारखाने में कर्मचारियों की दैनिक कार्यावधि आठ घंटे तय की गई है।
दोपहर में आधे घंटे का विश्रामकाल मिलने से श्रमिकों की थकान दूर हो जाती है।
Vetanbhogee ↔ स्वरोजगारी
वेतनभोगी कर्मचारी को माह के अंत में मिलने वाले निश्चित वेतन पर निर्भर रहना पड़ता है।
स्वरोजगारी व्यक्ति अपनी लगन और समय के अनुसार स्वतंत्र रूप से कमाई करता है।
Naukareepesha ↔ व्यापारी
नौकरीपेशा लोगों को हर महीने अपने खर्चे बजट के अनुरूप तय करने होते हैं।
व्यापारी जोखिम उठाकर पूंजी लगाता है और लाभ-हानि का सामना करता है।
Karmaveer ↔ वाकवीर
कर्मवीर मनुष्य मौन रहकर काम करता है और उसकी सफलता स्वयं बोलती है।
मंच से बड़ी-बड़ी बातें करने वाला वाकवीर जमीन पर कोई ठोस काम नहीं करता।
Karmakshetra ↔ विश्रामस्थल
मानव जीवन एक कर्मक्षेत्र है जहाँ हर व्यक्ति को अपने कर्मों का फल भोगना पड़ता है।
तीर्थयात्रा की समाप्ति पर यात्रियों ने विश्रामस्थल में रात्रि बिताई।
Shilp ↔ विनाश
प्राचीन मंदिरों का बेजोड़ शिल्प आज भी स्थापत्य कला का शिखर माना जाता है।
भूकंप के विनाश ने कई ऐतिहासिक स्मारकों को मलबे में तब्दील कर दिया।
Sheeghra ↔ विलंब
सूचना मिलते ही एम्बुलेंस शीघ्र घटनास्थल पर पहुंच गई।
यातायात जाम के कारण बैठक में पहुंचने में आधा घंटा विलंब हो गया।
Tatkaal ↔ विलंबित
ऑनलाइन भुगतान प्रणाली से पैसा तत्काल दूसरे खाते में स्थानांतरित हो जाता है।
तकनीकी खराबी के कारण उड़ान का प्रस्थान कई घंटों के लिए विलंबित हो गया।
Tvara ↔ विलंब
जीवन रक्षक कार्यों में तनिक भी त्वरा दिखाना वरदान सिद्ध होता है।
अनावश्यक कागजी औपचारिकताओं में विलंब के कारण कई परियोजनाएं अधूरी रह जाती हैं।
Aagaamee ↔ विगत
आगामी चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
विगत वर्ष में देश ने खाद्यान्न उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया।
Vartamaan ↔ अतीत
जो मनुष्य अपने वर्तमान को संवार लेता है, उसका भविष्य स्वतः सुंदर हो जाता है।
अतीत के दुखों को बार-बार याद करने से केवल निराशा ही हाथ लगती है।
Vaarshik ↔ दैनिक
कंपनी अपनी वार्षिक वित्तीय रिपोर्ट प्रतिवर्ष मार्च के महीने में जारी करती है।
दैनिक समाचार पत्र सुबह-सुबह पाठकों के घर पहुंच जाता है।
Shaishav ↔ वार्धक्य
शैशव काल में बच्चे की मानसिक और शारीरिक देखभाल अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वार्धक्य में शरीर शिथिल हो जाने पर अपनों के स्नेह और सहारे की आवश्यकता होती है।
Baalyaavastha ↔ वृद्धावस्था
बाल्यावस्था में सीखे गए अच्छे संस्कार जीवन भर साथ निभाते हैं।
वृद्धावस्था में स्वास्थ्य का ध्यान रखना और शांत रहना सबसे बड़ा सुख है।
Yauvan ↔ वार्धक्य
यौवन के उत्साह और ऊर्जा को सही दिशा देकर इतिहास बदला जा सकता है।
वार्धक्य में बाल सफेद और हड्डियां कमजोर हो जाना प्रकृति का अकाट्य नियम है।
Sadyojaat ↔ वृद्ध
सद्योजात शिशु की कोमल मुस्कान हर किसी का दिल मोह लेती है।
परिवार के वयोवृद्ध बुजुर्गों का आशीर्वाद घर में शांति और समृद्धि लाता है।
Yuva ↔ वृद्ध
देश की अर्थव्यवस्था में युवा शक्ति का योगदान सर्वोपरि है।
वृद्ध नागरिकों के अनुभवों से मार्गदर्शन पाकर युवा गलतियों से बच सकते हैं।
Vasant ↔ पतझड़
वसन्त ऋतु में उपवन में रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं और प्रकृति मुस्काती है।
पतझड़ के आते ही पेड़ों के सूखे पत्ते टूटकर धरती पर बिखर जाते हैं।
Varshaaritu ↔ शुष्क-ऋतु
वर्षाऋतु के आगमन से धरती की प्यास बुझती है और हरियाली छा जाती है।
शुष्क-ऋतु में तेज धूप और जल स्रोतों के सूखने से जंगलों में आग का खतरा बढ़ जाता है।
Vartamaanakaal ↔ भूतकाल
वर्तमानकाल में उठाया गया ठोस कदम ही हमारे उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करता है।
भूतकाल की यादों में ही खोए रहने से वर्तमान के कर्तव्य प्रभावित होते हैं।
Avinaashee ↔ विनाशी
आत्मा को अविनाशी बताया गया है जिस पर समय और मृत्यु का कोई वश नहीं चलता।
मिट्टी से बना घड़ा विनाशी है जो जरा सी चोट से टूटकर नष्ट हो जाता है।
Kaalakram ↔ व्यतिक्रम
इतिहासकार ने राजाओं के शासनकाल को सही कालक्रम में दर्ज किया।
घटनाओं के व्यतिक्रम से पाठक भ्रमित हो गए और सही समय समझ न सके।
Paakshik ↔ वार्षिक
साहित्यिक पत्रिका पाक्षिक रूप से हर पंद्रह दिन में प्रकाशित होती है।
विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह एक प्रतिष्ठित वार्षिक उत्सव है।
Traimaasik ↔ वार्षिक
कंपनी हर तीन महीने बाद अपने त्रैमासिक वित्तीय परिणाम घोषित करती है।
वार्षिक बजट में पूरे साल की आय और व्यय का विस्तृत ब्यौरा होता है।
Tatkaalata ↔ विलंबन
साइबर सुरक्षा में तत्कालता ही हैकिंग हमलों से सिस्टम को बचा सकती है।
कागजी प्रक्रियाओं के विलंबन से पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है।
Veerataa ↔ कायरता
संकट और विपत्ति के समय वीरता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veera ↔ कायर
संकट और विपत्ति के समय वीर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Vijetaa ↔ विजित
संकट और विपत्ति के समय विजेता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने विजित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Vidroha ↔ दमन
संकट और विपत्ति के समय विद्रोह का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने दमन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Vaara ↔ प्रतिवार
संकट और विपत्ति के समय वार का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने प्रतिवार का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veerarasa ↔ भयानक-रस
संकट और विपत्ति के समय वीररस का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयानक-रस का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veeragaathaa ↔ अपमानकथा
संकट और विपत्ति के समय वीरगाथा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अपमानकथा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Seenaajoree ↔ विनम्रता
संकट और विपत्ति के समय सीनाजोरी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने विनम्रता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veera-sapoota ↔ कायर-पुत्र
संकट और विपत्ति के समय वीर-सपूत का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायर-पुत्र का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Vidushee ↔ मूर्खा
विद्या और बौद्धिक विकास में विदुषी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vijnya ↔ अविज्ञ
विद्या और बौद्धिक विकास में विज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अविज्ञ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Saiddhaantika ↔ व्यावहारिक
विद्या और बौद्धिक विकास में सैद्धांतिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में व्यावहारिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastraartha ↔ वितंडा
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्रार्थ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में वितंडा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Snvaada ↔ विवाद
विद्या और बौद्धिक विकास में संवाद का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विवाद की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vyaakaranasammata ↔ अशुद्ध
विद्या और बौद्धिक विकास में व्याकरणसम्मत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशुद्ध की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Knthastha ↔ विस्मृत
विद्या और बौद्धिक विकास में कंठस्थ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विस्मृत की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Smarana ↔ विस्मरण
विद्या और बौद्धिक विकास में स्मरण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विस्मरण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Smriti ↔ विस्मृति
विद्या और बौद्धिक विकास में स्मृति का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विस्मृति की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidyaadhyayana ↔ समय-बर्बादी
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्याध्ययन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में समय-बर्बादी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidyaarthee ↔ विद्याविमुख
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्यार्थी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विद्याविमुख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vyaakhyaa ↔ संक्षेप
विद्या और बौद्धिक विकास में व्याख्या का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में संक्षेप की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vivekasheela ↔ अविवेकपूर्ण
विद्या और बौद्धिक विकास में विवेकशील का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अविवेकपूर्ण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidyaadaana ↔ विद्यावंचन
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्यादान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विद्यावंचन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidyaanuraagee ↔ विद्याद्वेषी
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्यानुरागी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विद्याद्वेषी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pustakeeya-jnyaana ↔ व्यावहारिक-अनुभव
विद्या और बौद्धिक विकास में पुस्तकीय-ज्ञान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में व्यावहारिक-अनुभव की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidvattaa ↔ अज्ञान
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्वत्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञान की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidvata-sabhaa ↔ मूर्ख-मंडली
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्वत-सभा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्ख-मंडली की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidyaavaana ↔ मूर्ख
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्यावान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्ख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidvatajana ↔ मूर्खजन
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्वतजन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खजन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidvattaapoorna ↔ मूर्खतापूर्ण
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्वत्तापूर्ण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खतापूर्ण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vyaakaranika ↔ अव्याकरणिक
विद्या और बौद्धिक विकास में व्याकरणिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अव्याकरणिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vaijnyaanika ↔ अवैज्ञानिक
विद्या और बौद्धिक विकास में वैज्ञानिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अवैज्ञानिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Manana ↔ विस्मरण
विद्या और बौद्धिक विकास में मनन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विस्मरण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Varshaakaala ↔ शुष्ककाल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वर्षाकाल की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शुष्ककाल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Vaashpeekarana ↔ संघनन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वाष्पीकरण की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में संघनन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Vasnta-ritu ↔ शिशिर-ऋतु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वसंत-ऋतु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शिशिर-ऋतु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Varshaa-boonden ↔ रेत-कण
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वर्षा-बूंदें की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में रेत-कण का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Varshaa-maapee ↔ शुष्कता-मापी
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वर्षा-मापी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शुष्कता-मापी का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Varshaa-prachura ↔ वर्षा-विहीन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वर्षा-प्रचुर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में वर्षा-विहीन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Dhruveeya-sheeta ↔ विषुवतीय-ताप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में ध्रुवीय-शीत की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में विषुवतीय-ताप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Vasnta-bahaara ↔ पतझड़-का-सन्नाटा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वसंत-बहार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में पतझड़-का-सन्नाटा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Yahan ↔ वहाँ
यहाँ पुस्तकालय में पूर्ण शांति और अध्ययन के लिए आदर्श वातावरण बना हुआ है।
वहाँ चौराहे पर अत्यधिक शोरगुल और वाहनों की भारी भीड़ लगी रहती है।