दोहा छंद (13-11 मात्राएँ)
Classical Couplet (दोहा)

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥

Bura jo dekhan main chala, bura na miliya koy. Jo dil khoja aapna, mujhse bura na koy.

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Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या)

हिंदी सरल व्याख्या (Hindi Vyakhya):

कबीरदास जी कहते हैं कि जब मैं संसार में दूसरों की बुराइयाँ और दोष ढूँढ़ने निकला, तो मुझे कोई भी वास्तव में बुरा नहीं मिला। परंतु जब मैंने अंतर्मुखी होकर अपने ही मन और हृदय की गहराइयों में झाँका, तो मुझे ज्ञात हुआ कि संसार में मुझसे अधिक अवगुणों से भरा कोई दूसरा नहीं है। यह दोहा आत्म-समीक्षा और निरहंकारिता का सर्वोच्च संदेश देता है।

English Translation & Meaning:

When I set out to search for evil and fault in the world, I could find no truly wicked person. But when I probed deep into my own heart and mind, I realized that none was more flawed than myself. True transformation begins with honest self-introspection rather than judging others.

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Literary Context & Source (साहित्यिक संदर्भ व स्रोत)

मूल ग्रंथ / संकलन: कबीर बीजक (साखी ग्रंथावली)
काव्य विधा: दोहा (मात्रिक छंद)

संत कबीरदास का यह दोहा 15वीं शताब्दी (भक्तिकाल - निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा) की अमर साहित्यिक धरोहर है। यह दोहा मध्यकालीन भक्ति एवं नीति काव्य परंपरा का अत्यंत प्रामाणिक अंश है जो जीवन के व्यावहारिक सत्य, सदाचार और मानवीय चेतना को जागृत करता है।

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"बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।" दोहे के रचयिता कौन हैं?▼

यह प्रसिद्ध एवं प्रामाणिक दोहा संत कबीरदास द्वारा रचित है। यह दोहा 'कबीर बीजक (साखी ग्रंथावली)' में संकलित है।

"बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।" दोहे का सरल हिंदी भावार्थ (व्याख्या) क्या है?▼

कबीरदास जी कहते हैं कि जब मैं संसार में दूसरों की बुराइयाँ और दोष ढूँढ़ने निकला, तो मुझे कोई भी वास्तव में बुरा नहीं मिला। परंतु जब मैंने अंतर्मुखी होकर अपने ही मन और हृदय की गहराइयों में झाँका, तो मुझे ज्ञात हुआ कि संसार में मुझसे अधिक अवगुणों से भरा कोई दूसरा नहीं है। यह दोहा आत्म-समीक्षा और निरहंकारिता का सर्वोच्च संदेश देता है।

What is the English meaning of the doha "बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।"?▼

When I set out to search for evil and fault in the world, I could find no truly wicked person. But when I probed deep into my own heart and mind, I realized that none was more flawed than myself. True transformation begins with honest self-introspection rather than judging others.

यह दोहा किस विषय और जीवन-मूल्य पर आधारित है?▼

यह दोहा मुख्य रूप से 'विनम्रता एवं निरहंकार' (Humility & Ego) विषय पर आधारित है, जो मानव जीवन में सदाचार, विवेक और आत्म-सुधार की प्रेरणा देता है।

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बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।

पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥

Bada hua to kya hua, jaise ped khajoor. / Panthi ko chhaya nahin, phal laage ati door.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि केवल धन, पद अथवा देह से बड़े हो जाने से कोई महान नहीं बन जाता, जैसे खजूर का पेड़ बहुत ऊँचा और विशाल होता है, किंतु न तो वह थके हुए राहगीर को छाया दे पाता है और न ही उसके फल किसी के सहज हाथ आते हैं क्योंकि वे बहुत ऊँचाई पर लगते हैं। परोपकार और सेवा भावना के बिना बड़प्पन सर्वथा व्यर्थ है।

English: What is the worth of greatness in status, wealth, or stature if it resembles the date palm tree? It offers no shade to weary travelers underneath, and its fruit hangs far out of reach. Greatness that serves nobody is utterly meaningless.

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तिनका कबहुँ ना निंदिये, जो पाँवन तर होय।

कबहुँ उड़ी आँखिन पड़े, तो पीर घनेरी होय॥

Tinka kabahun na nindiye, jo paanwan tar hoy. / Kabahun udi aankhin pade, to peer ghaneri hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि अपने पैरों के नीचे पड़े छोटे से तिनके की भी कभी उपेक्षा या अपमान नहीं करना चाहिए। यदि वही तुच्छ तिनका हवा के झोंके से उड़कर आँख में पड़ जाए, तो वह असहनीय असह्य वेदना और पीड़ा उत्पन्न कर देता है। अतः किसी भी दुर्बल, निर्धन अथवा छोटे व्यक्ति को तुच्छ समझकर उसका अनादर कभी न करें।

English: Never scorn or trample contemptuously upon a tiny speck of straw beneath your feet. Should a gust of wind blow it into your eye, it causes piercing and relentless pain. Never disparage or underestimate anyone, no matter how small or powerless they appear.

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मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।

कहे कबीर हरि पाइए, मन ही की परतीत॥

Man ke haare haar hai, man ke jeete jeet. / Kahe kabir hari paaiye, man hi ki parteet.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी मनोबल और संकल्प-शक्ति का रहस्य बताते हुए कहते हैं कि यदि मन ने पराजय स्वीकार कर ली तो मनुष्य पराजित हो जाता है, और यदि मन में विजय का दृढ़ विश्वास है तो वह अवश्य विजयी होता है। कबीर कहते हैं कि परमात्मा की प्राप्ति भी मन के सच्चे विश्वास, आस्था और निष्ठा से ही संभव होती है। सारा खेल मन के संकल्प का है।

English: Defeat is determined by a surrendered mind; victory is won by an unconquered mind. Kabir declares that even the Supreme Divine is attained through the deep, unwavering conviction and devotion of the purified heart.

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पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।

ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥

Pothi padhi padhi jag mua, pandit bhaya na koy. / Dhai aakhar prem ka, padhe so pandit hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि संसार भर के लोग मोटे-मोटे धार्मिक ग्रंथ और शास्त्र पढ़-पढ़कर मृत्यु को प्राप्त हो गए, किंतु केवल किताबी ज्ञान से कोई भी सच्चा ज्ञानी अथवा पंडित नहीं बन सका। वास्तव में जो व्यक्ति प्रेम के केवल ढाई अक्षर का मर्म समझ लेता है और प्राणिमात्र से निष्कपट ईश्वरीय प्रेम करता है, वही सच्चा ज्ञानी और तत्ववेत्ता है।

English: Countless generations passed away perusing heavy treatises and scriptures, yet none attained true wisdom through mere bookish knowledge. He who truly comprehends and lives the two and a half letters of unconditional divine love is the truly enlightened sage.

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