दोहा छंद (13-11 मात्राएँ)
Classical Couplet (दोहा)

रहिमन वे नर मर चुके, जे कहुँ माँगन जाहिं।उनते पहिले वे मुए, जिन मुख निकसत नाहिं॥

Rahiman ve nar mar chuke, je kahun maangan jaahin. Unte pahile ve muye, jin mukh niksat naahin.

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Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या)

हिंदी सरल व्याख्या (Hindi Vyakhya):

रहीम जी स्वाभिमान और दानशीलता दोनों का उपदेश देते हुए कहते हैं कि जो मनुष्य किसी के आगे हाथ फैलाने या याचना करने जाते हैं, वे तो आत्मसम्मान की दृष्टि से जीते जी मरे हुए के समान हैं। परंतु उनसे भी पहले वे लोग मृतप्राय हैं, जिनके द्वार पर याचक के आने पर उनके मुख से 'नाहीं' (इनकार) निकल जाता है और वे सामर्थ्य होते हुए भी दान नहीं देते।

English Translation & Meaning:

Those people are already dead in self-respect who must go begging at another’s threshold, declares Rahim. But even before them perished those miserly souls from whose lips comes forth a refusal to help when they possess the means to give.

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Literary Context & Source (साहित्यिक संदर्भ व स्रोत)

मूल ग्रंथ / संकलन: रहीम सतसई (याचना व दान)
काव्य विधा: दोहा (मात्रिक छंद)

रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) का यह दोहा 16वीं-17वीं शताब्दी (मध्यकालीन नीति व शृंगार काव्य) की अमर साहित्यिक धरोहर है। यह दोहा मध्यकालीन भक्ति एवं नीति काव्य परंपरा का अत्यंत प्रामाणिक अंश है जो जीवन के व्यावहारिक सत्य, सदाचार और मानवीय चेतना को जागृत करता है।

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"रहिमन वे नर मर चुके, जे कहुँ माँगन जाहिं।" दोहे के रचयिता कौन हैं?▼

यह प्रसिद्ध एवं प्रामाणिक दोहा रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) द्वारा रचित है। यह दोहा 'रहीम सतसई (याचना व दान)' में संकलित है।

"रहिमन वे नर मर चुके, जे कहुँ माँगन जाहिं।" दोहे का सरल हिंदी भावार्थ (व्याख्या) क्या है?▼

रहीम जी स्वाभिमान और दानशीलता दोनों का उपदेश देते हुए कहते हैं कि जो मनुष्य किसी के आगे हाथ फैलाने या याचना करने जाते हैं, वे तो आत्मसम्मान की दृष्टि से जीते जी मरे हुए के समान हैं। परंतु उनसे भी पहले वे लोग मृतप्राय हैं, जिनके द्वार पर याचक के आने पर उनके मुख से 'नाहीं' (इनकार) निकल जाता है और वे सामर्थ्य होते हुए भी दान नहीं देते।

What is the English meaning of the doha "रहिमन वे नर मर चुके, जे कहुँ माँगन जाहिं।"?▼

Those people are already dead in self-respect who must go begging at another’s threshold, declares Rahim. But even before them perished those miserly souls from whose lips comes forth a refusal to help when they possess the means to give.

यह दोहा किस विषय और जीवन-मूल्य पर आधारित है?▼

यह दोहा मुख्य रूप से 'नीति एवं सदाचार' (Wisdom & Morals) विषय पर आधारित है, जो मानव जीवन में सदाचार, विवेक और आत्म-सुधार की प्रेरणा देता है।

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रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।

पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥

Rahiman paani rakhiye, bin paani sab soon. / Paani gaye na oobarai, moti, maanush, choon.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी श्लेष अलंकार का अप्रतिम प्रयोग करते हुए 'पानी' के संरक्षण का संदेश देते हैं। वे कहते हैं कि जीवन में पानी अवश्य बनाए रखना चाहिए, क्योंकि पानी के बिना सब कुछ व्यर्थ (शून्य) है। पानी (चमक/आभा) के बिना मोती मूल्यहीन है, पानी (सम्मान/प्रतिष्ठा/विनम्रता) के बिना मनुष्य का कोई अस्तित्व नहीं, और पानी (जल) के बिना चूना या आटा किसी काम का नहीं रहता।

English: Preserve water with the utmost care, for without water all creation becomes desolate, advises Rahim. When water is lost, three things lose all worth: the pearl loses its luster, human beings lose their honor and dignity, and flour or lime cannot bind into substance.

रहिमन पानी राखिए • पानी का महत्वपूरी व्याख्या व संदर्भ→
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तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहिं न पान।

कहि रहीम पर काज हित, संपति संचहिं सुजान॥

Taruvar phal nahin khaat hai, sarvar piyahin na paan. / Kahi rahim par kaaj hit, sampati sanchahin sujaan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी परोपकार की महिमा बताते हुए कहते हैं कि वृक्ष कभी अपने फल स्वयं नहीं खाते, और सरोवर (तालाब) कभी अपना जल स्वयं नहीं पीते। प्रकृति का यह नियम है कि वे सब दूसरों के लिए ही जीवन धारण करते हैं। ठीक इसी प्रकार, सज्जन और ज्ञानी पुरुष भी जो धन-संपत्ति संचित करते हैं, वह अपने विलास के लिए नहीं, बल्कि परोपकार, दीन-सेवा और समाज-कल्याण के लिए करते हैं।

English: Trees never partake of their own fruits, nor do lakes drink their own waters. In identical selfless fashion, noble and wise souls accumulate wealth and resources solely for the welfare, charity, and upliftment of others.

तरुवर फल नहिं खात है • परोपकारपूरी व्याख्या व संदर्भ→
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चित्रकूट में रमि रहे, रहिमन अवध-नरेस।

जा पर विपदा परत है, सो आवत यह देस॥

Chhitrakoot mein rami rahe, rahiman awadh-nares. / Jaa par vipda parat hai, so aawat yeh des.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी भगवान श्री रामचंद्र जी के वनवास का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि अयोध्या के चक्रवर्ती राजा श्री राम जब संकट में पड़े, तो वे चित्रकूट के शांत जंगलों में आकर रहने लगे। वास्तव में जिस मनुष्य पर कोई भारी विपत्ति या संकट आता है, वही शांति, संबल और आत्म-चिंतन के लिए ऐसे एकांत व पवित्र स्थानों की शरण में आता है। विपत्ति मनुष्य को धैर्यवान और अंतर्मुखी बनाती है।

English: Even the sovereign Emperor of Ayodhya, Lord Rama, made peaceful Chitrakoot his hermitage during his exile. Verily, whosoever is tested by overwhelming worldly tribulations seeks refuge in such sacred, tranquil retreats to find solace and spiritual strength.

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रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय।

सुनि अठिलैहैं लोग सब, बाँटि न लैहै कोय॥

Rahiman nij man ki bitha, man hi raakho goy. / Suni athilaihain log sab, baanti na laihai koy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी लोक-व्यवहार की अत्यंत सूक्ष्म चेतावनी देते हुए कहते हैं कि अपने मन के दुख, पीड़ा और गुप्त कष्टों को अपने मन के भीतर ही छिपाकर रखना चाहिए। संसार के लोगों के सामने अपना दुखड़ा रोने से कोई लाभ नहीं होता; लोग आपके दुख को सुनकर पीठ पीछे आपकी हँसी उड़ाएंगे और आनंद लेंगे, परंतु आपके दुख को बाँटने के लिए कोई भी आगे नहीं आएगा।

English: Conceal the sorrow and torment of your heart within your own quiet soul, advises Rahim. Upon hearing of your distress, people will merely mock and derive secret amusement behind your back; none will step forward to shoulder your burden.

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