🪔संत कबीरदास📖गुरु महिमा एवं ज्ञान🎓 Class 6-8🎓 Class 9-10🎓 Class 11-12🎓 Competitive Exams
दोहा छंद (13-11 मात्राएँ)
Classical Couplet (दोहा)

गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय।बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय॥

Guru govind do-u khade, kaake laagun paay. Balihari guru aapno, govind diyo batay.

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Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या)

हिंदी सरल व्याख्या (Hindi Vyakhya):

कबीरदास जी कहते हैं कि मेरे समक्ष मेरे गुरु और साक्षात् ईश्वर (गोविंद) दोनों एक साथ खड़े हैं। मेरे मन में यह धर्मसंकट उत्पन्न हो गया कि मैं पहले किसके चरण स्पर्श करूँ। अंततः मैं अपने गुरु के चरणों पर ही बलिहारी जाता हूँ, जिन्होंने मुझे ईश्वर का साक्षात्कार कराया और प्रभु तक पहुँचने का मार्ग दिखाया। गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊँचा है।

English Translation & Meaning:

Both my spiritual Guru and the Supreme Lord Govinda stand before me; to whose lotus feet should I bow first? I offer my total surrender and homage to the Guru first, for it was the Guru whose gracious light revealed the presence and path of the Divine.

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Literary Context & Source (साहित्यिक संदर्भ व स्रोत)

मूल ग्रंथ / संकलन: कबीर बीजक (गुरुदेव को अंग)
काव्य विधा: दोहा (मात्रिक छंद)

संत कबीरदास का यह दोहा 15वीं शताब्दी (भक्तिकाल - निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा) की अमर साहित्यिक धरोहर है। यह दोहा मध्यकालीन भक्ति एवं नीति काव्य परंपरा का अत्यंत प्रामाणिक अंश है जो जीवन के व्यावहारिक सत्य, सदाचार और मानवीय चेतना को जागृत करता है।

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"गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय।" दोहे के रचयिता कौन हैं?▼

यह प्रसिद्ध एवं प्रामाणिक दोहा संत कबीरदास द्वारा रचित है। यह दोहा 'कबीर बीजक (गुरुदेव को अंग)' में संकलित है।

"गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय।" दोहे का सरल हिंदी भावार्थ (व्याख्या) क्या है?▼

कबीरदास जी कहते हैं कि मेरे समक्ष मेरे गुरु और साक्षात् ईश्वर (गोविंद) दोनों एक साथ खड़े हैं। मेरे मन में यह धर्मसंकट उत्पन्न हो गया कि मैं पहले किसके चरण स्पर्श करूँ। अंततः मैं अपने गुरु के चरणों पर ही बलिहारी जाता हूँ, जिन्होंने मुझे ईश्वर का साक्षात्कार कराया और प्रभु तक पहुँचने का मार्ग दिखाया। गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊँचा है।

What is the English meaning of the doha "गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय।"?▼

Both my spiritual Guru and the Supreme Lord Govinda stand before me; to whose lotus feet should I bow first? I offer my total surrender and homage to the Guru first, for it was the Guru whose gracious light revealed the presence and path of the Divine.

यह दोहा किस विषय और जीवन-मूल्य पर आधारित है?▼

यह दोहा मुख्य रूप से 'गुरु महिमा एवं ज्ञान' (Guru & Knowledge) विषय पर आधारित है, जो मानव जीवन में सदाचार, विवेक और आत्म-सुधार की प्रेरणा देता है।

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सतगुरु की महिमा अनंत, अनंत किया उपकार।

लोचन अनंत उघाड़िया, अनंत दिखावणहार॥

Satguru ki mahima anant, anant kiya upkaar. / Lochan anant ughaadiya, anant dikhaavanhaar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी अपने सच्चे गुरु की वंदना करते हुए कहते हैं कि सद्गुरु की महिमा अपरंपार और असीम है, उन्होंने मुझ पर अनंत उपकार किए हैं। उन्होंने मेरे अज्ञान के चक्षुओं को खोलकर मुझे ज्ञान और प्रज्ञा के दिव्य नेत्र प्रदान किए, जिससे मुझे अनंत, अविनाशी परमात्मा का साक्षात्कार संभव हो सका।

English: Boundless and infinite is the glory of the True Guru, and countless are the blessings he showered upon me. He unsealed the divine eye of spiritual vision within me, revealing the infinite, immortal Supreme Reality.

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सब धरती कागद करूँ, लेखनि सब बनराय।

सात समुंदर की मसि करूँ, गुरु गुन लिखा न जाय॥

Sab dharti kaagad karun, lekhani sab banraay. / Saat samundar ki masi karun, guru gun likha na jaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी गुरु की अनंत महिमा का बखान करते हुए कहते हैं कि यदि मैं संपूर्ण पृथ्वी को कागज़ बना लूँ, सारे जंगलों की वनस्पतियों को कलम (लेखनी) बना लूँ और सातों समुद्रों के जल को स्याही बना लूँ, तो भी सद्गुरु के उपकारों और उनके गुणों का वर्णन नहीं किया जा सकता। गुरु की कृपा असीम और अवर्णनीय है।

English: Were I to transform the entire earth into paper, turn all forests into pens, and make ink of the seven great oceans, even then the infinite virtues, grace, and blessings of the True Guru could never be fully written.

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जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥

Bura jo dekhan main chala, bura na miliya koy. / Jo dil khoja aapna, mujhse bura na koy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि जब मैं संसार में दूसरों की बुराइयाँ और दोष ढूँढ़ने निकला, तो मुझे कोई भी वास्तव में बुरा नहीं मिला। परंतु जब मैंने अंतर्मुखी होकर अपने ही मन और हृदय की गहराइयों में झाँका, तो मुझे ज्ञात हुआ कि संसार में मुझसे अधिक अवगुणों से भरा कोई दूसरा नहीं है। यह दोहा आत्म-समीक्षा और निरहंकारिता का सर्वोच्च संदेश देता है।

English: When I set out to search for evil and fault in the world, I could find no truly wicked person. But when I probed deep into my own heart and mind, I realized that none was more flawed than myself. True transformation begins with honest self-introspection rather than judging others.

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पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।

ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥

Pothi padhi padhi jag mua, pandit bhaya na koy. / Dhai aakhar prem ka, padhe so pandit hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि संसार भर के लोग मोटे-मोटे धार्मिक ग्रंथ और शास्त्र पढ़-पढ़कर मृत्यु को प्राप्त हो गए, किंतु केवल किताबी ज्ञान से कोई भी सच्चा ज्ञानी अथवा पंडित नहीं बन सका। वास्तव में जो व्यक्ति प्रेम के केवल ढाई अक्षर का मर्म समझ लेता है और प्राणिमात्र से निष्कपट ईश्वरीय प्रेम करता है, वही सच्चा ज्ञानी और तत्ववेत्ता है।

English: Countless generations passed away perusing heavy treatises and scriptures, yet none attained true wisdom through mere bookish knowledge. He who truly comprehends and lives the two and a half letters of unconditional divine love is the truly enlightened sage.

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