दोहा छंद (13-11 मात्राएँ)
Classical Couplet (दोहा)

कबीर देह जो धरी, तो सहना परै विकार।जैसे भांडे कुम्हार के, सहैं अगिनि की झार॥

Kabir deh jo dhari, to sahna parai vikaar. Jaise bhaande kumhaar ke, sahain agini ki jhaar.

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Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या)

हिंदी सरल व्याख्या (Hindi Vyakhya):

कबीरदास जी कहते हैं कि यदि आत्मा ने यह नश्वर भौतिक शरीर धारण किया है, तो उसे सुख-दुख, रोग और सांसारिक कष्टों की ज्वाला को सहन करना ही पड़ेगा। जिस प्रकार कुम्हार द्वारा बनाए गए कच्चे मिट्टी के बर्तनों को पकने और सुदृढ़ बनने के लिए आंवां (भट्टी) की धधकती आग की लपटों को सहना पड़ता है, उसी प्रकार जीवन के ताप से तपकर ही आत्मा कुंदन बनती है।

English Translation & Meaning:

Having assumed mortal physical form, one must bear hardships, sorrow, and worldly tribulations. Just as clay pots fashioned by the potter must endure the scorching flames of the kiln to become strong, human trials purify the soul.

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Literary Context & Source (साहित्यिक संदर्भ व स्रोत)

मूल ग्रंथ / संकलन: कबीर साखी (धैर्य को अंग)
काव्य विधा: दोहा (मात्रिक छंद)

संत कबीरदास का यह दोहा 15वीं शताब्दी (भक्तिकाल - निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा) की अमर साहित्यिक धरोहर है। यह दोहा मध्यकालीन भक्ति एवं नीति काव्य परंपरा का अत्यंत प्रामाणिक अंश है जो जीवन के व्यावहारिक सत्य, सदाचार और मानवीय चेतना को जागृत करता है।

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"कबीर देह जो धरी, तो सहना परै विकार।" दोहे के रचयिता कौन हैं?▼

यह प्रसिद्ध एवं प्रामाणिक दोहा संत कबीरदास द्वारा रचित है। यह दोहा 'कबीर साखी (धैर्य को अंग)' में संकलित है।

"कबीर देह जो धरी, तो सहना परै विकार।" दोहे का सरल हिंदी भावार्थ (व्याख्या) क्या है?▼

कबीरदास जी कहते हैं कि यदि आत्मा ने यह नश्वर भौतिक शरीर धारण किया है, तो उसे सुख-दुख, रोग और सांसारिक कष्टों की ज्वाला को सहन करना ही पड़ेगा। जिस प्रकार कुम्हार द्वारा बनाए गए कच्चे मिट्टी के बर्तनों को पकने और सुदृढ़ बनने के लिए आंवां (भट्टी) की धधकती आग की लपटों को सहना पड़ता है, उसी प्रकार जीवन के ताप से तपकर ही आत्मा कुंदन बनती है।

What is the English meaning of the doha "कबीर देह जो धरी, तो सहना परै विकार।"?▼

Having assumed mortal physical form, one must bear hardships, sorrow, and worldly tribulations. Just as clay pots fashioned by the potter must endure the scorching flames of the kiln to become strong, human trials purify the soul.

यह दोहा किस विषय और जीवन-मूल्य पर आधारित है?▼

यह दोहा मुख्य रूप से 'कर्म एवं पुरुषार्थ' (Karma & Action) विषय पर आधारित है, जो मानव जीवन में सदाचार, विवेक और आत्म-सुधार की प्रेरणा देता है।

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करता था सो क्यों रहा, अब करि क्यों पछिताय।

बोया पेड़ बबूल का, आम कहाँ से खाय॥

Karta tha so kyon raha, ab kari kyon pachhitay. / Boya ped babool ka, aam kahan se khaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कर्मफल के अकाट्य सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि जब तू दुष्कर्म कर रहा था, तब तूने अपने कर्मों पर विचार क्यों नहीं किया? अब परिणाम सामने आने पर पछताने से क्या लाभ? यदि तूने बबूल (काँटों वाला पेड़) बोया है, तो उससे मीठे आम फलने की आशा कैसे कर सकता है? जैसा कर्म मनुष्य बोता है, वैसा ही फल उसे काटना पड़ता है।

English: Why did you heedlessly commit misdeeds while doing them, and why lament now when the consequence arrives? If you sowed thorny acacia seeds, how can you expect to harvest luscious mangoes? As a human sows in actions, so must they reap.

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ऊँचे कुल का जनमिया, जे करनी ऊँच न होय।

सुबरन कलस सुरै भरा, साधू निंदै सोय॥

Oonche kul ka janamia, je karni oonch na hoy. / Subaran kalas surai bhara, saadhoo nindai soy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि यदि किसी मनुष्य के कर्म ऊँचे और श्रेष्ठ नहीं हैं, तो केवल किसी उच्च कुल अथवा प्रतिष्ठित खानदान में जन्म लेने से वह महान नहीं बन जाता। जिस प्रकार यदि सोने के कलश (सुवर्ण पात्र) में मदिरा (शराब) भरी हो, तो भी सज्जन और साधु पुरुष उसकी निंदा ही करते हैं; उसी प्रकार कुकर्म करने वाला कुलीन व्यक्ति भी सर्वत्र निंदनीय होता है।

English: Born into an exalted family or high lineage, if a person’s deeds are not elevated, what is the pride of birth? Even if a vessel is wrought of pure gold, if it is filled with intoxicating liquor, the wise condemn it. Nobility resides in action, not pedigree.

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जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ।

मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ॥

Jin khoja tin paiya, gahre paani paith. / Main bapura boodan dara, raha kinaare baith.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी लगन और पुरुषार्थ का महत्त्व समझाते हुए कहते हैं कि जिन साहसी गोताखोरों ने गहरे पानी में उतरकर खोज की, उन्होंने अनमोल मोती प्राप्त कर लिए। परंतु मुझ जैसा कायर और अभागा डूबने के भय से किनारे पर ही बैठा रह गया और खाली हाथ रहा। जीवन में किसी भी महान लक्ष्य या आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए भय त्यागकर गहरे उतरना पड़ता है।

English: Those who dared to dive into the deep waters retrieved precious pearls of wisdom. But the timid fool who feared drowning merely sat idle on the shore, empty-handed. Attaining spiritual or worldly excellence requires fearless dedication.

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बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।

जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥

Bura jo dekhan main chala, bura na miliya koy. / Jo dil khoja aapna, mujhse bura na koy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि जब मैं संसार में दूसरों की बुराइयाँ और दोष ढूँढ़ने निकला, तो मुझे कोई भी वास्तव में बुरा नहीं मिला। परंतु जब मैंने अंतर्मुखी होकर अपने ही मन और हृदय की गहराइयों में झाँका, तो मुझे ज्ञात हुआ कि संसार में मुझसे अधिक अवगुणों से भरा कोई दूसरा नहीं है। यह दोहा आत्म-समीक्षा और निरहंकारिता का सर्वोच्च संदेश देता है।

English: When I set out to search for evil and fault in the world, I could find no truly wicked person. But when I probed deep into my own heart and mind, I realized that none was more flawed than myself. True transformation begins with honest self-introspection rather than judging others.

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