च
CLASSICAL POETIC TREASURY

अक्षर 'च' से शुरू होने वाले दोहे

3 प्रामाणिक दोहे उपलब्ध हैं।

🪔संत कबीरदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

चिंता ऐसी डाकिनी, काटि कलेजा खाय।

बैद बिचारा क्या करे, कहाँ तलक दवा लगाय॥

Chinta aisi daakini, kaati kaleja khaay. / Baid bichaara kya kare, kahan talak dawa lagaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी मानसिक चिंता के घातक प्रभाव को स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि चिंता ऐसी डायन (डाकिनी) के समान है जो मनुष्य के कलेजे को अंदर ही अंदर कुतरकर खा जाती है। ऐसी स्थिति में बेचारा वैद्य (चिकित्सक) क्या कर सकता है और वह कहाँ तक दवा लगाएगा? क्योंकि चिंता का कोई बाह्य शारीरिक उपचार नहीं है; इसका समाधान केवल संतोष, ईश्वर-भरोसा और सकारात्मक चिंतन है।

English: Anxiety and worry are like a ravenous sorceress that devours the human heart from within. What can a poor physician prescribe, and where can he apply balm? Physical medicine cannot heal inner torment; peace is found in faith and contentment.

चिंता ऐसी डाकिनी • चिंता से मुक्तिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

चित्रकूट में रमि रहे, रहिमन अवध-नरेस।

जा पर विपदा परत है, सो आवत यह देस॥

Chhitrakoot mein rami rahe, rahiman awadh-nares. / Jaa par vipda parat hai, so aawat yeh des.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी भगवान श्री रामचंद्र जी के वनवास का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि अयोध्या के चक्रवर्ती राजा श्री राम जब संकट में पड़े, तो वे चित्रकूट के शांत जंगलों में आकर रहने लगे। वास्तव में जिस मनुष्य पर कोई भारी विपत्ति या संकट आता है, वही शांति, संबल और आत्म-चिंतन के लिए ऐसे एकांत व पवित्र स्थानों की शरण में आता है। विपत्ति मनुष्य को धैर्यवान और अंतर्मुखी बनाती है।

English: Even the sovereign Emperor of Ayodhya, Lord Rama, made peaceful Chitrakoot his hermitage during his exile. Verily, whosoever is tested by overwhelming worldly tribulations seeks refuge in such sacred, tranquil retreats to find solace and spiritual strength.

चित्रकूट में रमि रहे • अवध नरेसपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 6-8

चिंता कहुँ न कीजिए, भजहु राम भगवान।

जाहि दियो है चोंच सो, दैहै चुग्गा आन॥

Chinta kahun na keejiye, bhajahu ram bhagwaan. / Jaahi diyo hai chonch so, daihai chugga aan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और विश्वास का उपदेश देते हुए कहते हैं कि मनुष्य को आजीविका और भविष्य की व्यर्थ चिंता नहीं करनी चाहिए, बल्कि प्रभु श्री राम का भजन व स्मरण करना चाहिए। जिस विधाता ने पक्षी को चोंच दी है, उसने उसके लिए दाना (चुग्गा) भी निश्चित कर रखा है। परमात्मा सभी का पालनहार है, अतः चिंता छोड़कर निष्काम कर्म करो।

English: Harbor no anxious worries about survival; meditate instead upon the Supreme Lord. The compassionate Creator who gave the bird a beak has surely provided the grain to sustain it. Trust in divine providence.

चिंता कहुँ न कीजिए • ईश्वर पर विश्वासपूरी व्याख्या व संदर्भ→