द
CLASSICAL POETIC TREASURY

अक्षर 'द' से शुरू होने वाले दोहे

6 प्रामाणिक दोहे उपलब्ध हैं।

🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 6-8

दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करै न कोय।

जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे को होय॥

Dukh mein sumiran sab kare, sukh mein karai na koy. / Jo sukh mein sumiran kare, to dukh kaahe ko hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी मानव स्वभाव की विसंगति पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं कि विपत्ति और दुख के समय तो हर मनुष्य ईश्वर को याद करता है, परंतु जब जीवन में सुख और संपन्नता होती है, तब कोई प्रभु का स्मरण नहीं करता। यदि मनुष्य सुख के दिनों में भी ईश्वर को निरंतर याद रखे और सदाचारी बना रहे, तो उसके जीवन में दुख का आगमन ही क्यों होगा?

English: In moments of anguish and sorrow, everyone turns to remember the Divine, but in times of prosperity and comfort, none bothers to recollect Him. If one remembers God with gratitude during joyful times, why would agony ever overcome him?

दुख में सुमिरन • ईश्वर स्मरणपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 9-10

दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारंबार।

तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि न लागे डार॥

Durlabh maanush janam hai, deh na baarambaar. / Taruvar jyon patta jhade, bahuri na laage daar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी मानव जीवन की अमूल्यता का बोध कराते हुए कहते हैं कि चौरासी लाख योनियों में यह मानव जन्म अत्यंत दुर्लभ है, यह देह बार-बार प्राप्त नहीं होती। जिस प्रकार वृक्ष की शाखा से एक बार पत्ता टूटकर नीचे गिर जाए, तो वह दोबारा उस डाल पर नहीं जुड़ सकता; उसी प्रकार बीता हुआ समय और मानव जीवन पुनः नहीं मिलता। अतः इसे व्यर्थ न गंवाएं।

English: Human birth is exceedingly precious and rare; this vessel is not granted again and again. Just as a dry leaf falling from a branch can never be reattached to the tree, so too lost opportunity and mortal life never return. Strive for spiritual realization now.

दुर्लभ मानुष जन्म है • मानव जीवन का महत्वपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 11-12

दीपक दीया तेल भरि, बाती दई अघट्ट।

पूरा किया बिसाहूणा, बहुरि न आऊँ हट्ट॥

Deepak diya tel bhari, baati dayi aghatt. / Poora kiya bishaahuna, bahuri na aaoon hatt.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी आध्यात्मिक मुक्ति की पूर्णता का वर्णन करते हुए कहते हैं कि सद्गुरु ने मुझे ईश्वरीय प्रेम रूपी तेल से भरा हुआ ज्ञान का दीपक प्रदान किया और उसमें ऐसी अखंड बत्ती लगा दी जो कभी बुझती नहीं। इसके प्रकाश से मैंने सांसारिक क्रय-विक्रय (कर्मों का लेन-देन) समाप्त कर लिया, अब मुझे दोबारा इस संसार रूपी बाज़ार (पुनर्जन्म) में नहीं आना पड़ेगा।

English: The Guru bestowed a lamp filled with the oil of divine love, fitted with an imperishable wick of eternal truth. Thus equipped, I concluded the buying and selling of karmic existence; never again shall I have to return to this worldly marketplace of rebirth.

दीपक दीया तेल भरि • मोक्षपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

दीन सबन को लखत है, दीनहिं लखै न कोय।

जो रहीम दीनहिं लखै, दीनबंधु सम होय॥

Deen saban ko lakhat hai, deenahin lakhai na koy. / Jo rahim deenahin lakhai, deenbandhu sam hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी करुणा और सेवा का अमर संदेश देते हुए कहते हैं कि निर्धन और असहाय व्यक्ति सहायता की आशा से सबकी ओर देखता है, परंतु उस दीन-हीन की ओर कोई सहानुभूति से नहीं देखता। रहीम कहते हैं कि जो सहृदय व्यक्ति उस पीड़ित और असहाय की ओर करुणा से देखता है और उसकी सहायता करता है, वह साक्षात् ईश्वर (दीनबंधु) के समान पूज्य और महान हो जाता है।

English: The poor and destitute gaze yearningly upon everyone for aid, yet none looks kindly upon them. But he who gazes with heartfelt compassion and extends help to the downtrodden becomes akin to God, the true Friend of the Poor (Deenbandhu).

दीन सबन को लखत है • दीनबंधुपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

दीर्घ दोहा अरथ के, आखर थोरे आहिं।

ज्यों रहीम नट कुंडली, सिमटि कूदि चढ़ि जाहिं॥

Deergh doha arath ke, aakhar thore aahin. / Jyon rahim nat kundali, simti koodi chadhi jaahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी दोहा छंद के महात्म्य और गागर में सागर भरने की कला का वर्णन करते हुए कहते हैं कि दोहे में यद्यपि अक्षर (शब्द) थोड़े ही होते हैं, किंतु उनका अर्थ अत्यंत गूढ़, गंभीर और दीर्घ (विशाल) होता है। यह ठीक उस कुशल बाज़ीगर (नट) की तरह है, जो अपने विशाल शरीर को सिकोड़कर एक छोटे से लोहे के छल्ले (कुंडली) के भीतर से सहजतापूर्वक कूदकर बाहर निकल जाता है।

English: A classical doha contains few and concise letters, yet its embedded philosophical meaning is immensely vast and profound. It resembles a skilled acrobat who curls his entire frame tightly to leap effortlessly through a tiny circular hoop.

दीर्घ दोहा अरथ के • दोहा छंदपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

दया धरम का मूल है, पाप मूल अभिमान।

तुलसी दया न छांड़िए, जब लग घट में प्रान॥

Daya dharam ka mool hai, paap mool abhimaan. / Tulsi daya na chhandiye, jab lag ghat mein praan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी स्पष्ट करते हैं कि दया और करुणा ही समस्त धर्मों की प्राथमिक जड़ हैं, जबकि अहंकार और घमंड ही सारे पापों और अनर्थों का मूल कारण है। जब तक शरीर में प्राण शेष हैं, मनुष्य को कभी भी अपने हृदय से प्राणिमात्र के प्रति दया भाव का त्याग नहीं करना चाहिए।

English: Compassion is the root of all righteousness and spiritual duty, whereas arrogant pride is the wellspring of all sin. Tulsidas urges us never to surrender or abandon mercy and empathy towards all living beings as long as breath resides within this physical vessel.

दया धरम का मूल है • करुणापूरी व्याख्या व संदर्भ→