V
CLASSICAL POETIC TREASURY

Couplets Starting with 'V'

2 प्रामाणिक दोहे उपलब्ध हैं।

🪔संत कबीरदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

वृच्छ कबहूँ नहिं फल भखैं, नदी न संचै नीर।

परमारथ के कारने, साधुन धरा सरीर॥

Vrikchh kabahun nahin phal bhakhain, nadi na sanchai neer. / Parmaarath ke kaarne, saadhun dhara sareer.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी परोपकार की महिमा बताते हुए कहते हैं कि वृक्ष कभी अपने फल स्वयं नहीं खाते, और नदियाँ कभी अपना जल स्वयं नहीं पीतीं, वे केवल दूसरों के जीवन और कल्याण के लिए समर्पित रहती हैं। ठीक इसी प्रकार, सज्जन और संत पुरुष भी परोपकार, सेवा और दीन-दुखियों के उद्धार के लिए ही मानव शरीर धारण करते हैं।

English: Trees never consume their own sweet fruits, nor do flowing rivers stockpile water for themselves. Solely for selfless benevolence and the upliftment of humanity do noble saints embody physical form on earth.

वृच्छ कबहूँ नहिं फल भखैं • परोपकारपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 6-8

विद्या धन उद्यम बिना, कहो जु पावै कौन।

बिना डुलाए ना मिलै, ज्यों पंखा की पौन॥

Vidya dhan udyam bina, kaho ju paavai kaun. / Bina dulaaye na milai, jyon pankha ki paun.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी परिश्रम और पुरुषार्थ की महत्ता समझाते हुए कहते हैं कि भला बिना कठिन परिश्रम (उद्यम) और अभ्यास के विद्या रूपी अनमोल धन को कौन प्राप्त कर सकता है? यह ठीक हाथ के पंखे के समान है; जब तक हाथ से पंखा न डुलाया जाए, तब तक उसकी शीतल पवन (हवा) भी प्राप्त नहीं होती। विद्या और सफलता केवल निरंतर परिश्रम से ही अर्जित की जा सकती है।

English: Who has ever acquired the priceless treasure of knowledge without diligent labor and earnest effort? Even the cooling breeze of a hand-fan cannot be obtained unless you exert effort to move it. Dedicated industry is the sole key to wisdom.

विद्या धन उद्यम बिना • परिश्रमपूरी व्याख्या व संदर्भ→