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CLASSICAL POETIC TREASURY

अक्षर 'क' से शुरू होने वाले दोहे

24 प्रामाणिक दोहे उपलब्ध हैं।

🪔संत कबीरदास⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 6-8

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।

पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब॥

Kaal kare so aaj kar, aaj kare so ab. / Pal mein parlay hoyegi, bahuri karega kab.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी समय की महत्ता का बोध कराते हुए कहते हैं कि जो कार्य तुम कल पर टाल रहे हो, उसे आज ही पूरा करो और जिसे आज करना है, उसे इसी क्षण कर डालो। जीवन क्षणभंगुर है, एक पल में प्रलय (मृत्यु या अकस्मात संकट) आ सकती है, फिर बाद में तुम उस शुभ कार्य को कब कर पाओगे? आलस्य छोड़कर वर्तमान क्षण में तत्पर रहो।

English: What you intend to do tomorrow, accomplish today; what you plan for today, execute this very moment. In the blink of an eye catastrophe or death may arrive; when then will you accomplish what was left undone? Seize the present without procrastination.

काल करे सो आज कर • समय का महत्वपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढ़ै बन माहिं।

ऐसे घट-घट राम हैं, दुनिया देखै नाहिं॥

Kasturi kundali basai, mrig dhoondhai ban maahin. / Aise ghat-ghat ram hain, duniya dekhai naahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि कस्तूरी मृग की अपनी ही नाभि (कुंडलि) में सुगंधित कस्तूरी बसी होती है, किंतु इस सत्य से अनभिज्ञ होकर वह हिरण उस दिव्य सुगंध को ढूँढ़ने के लिए पूरे जंगल में भटकता फिरता है। ठीक इसी प्रकार, परमात्मा (राम) प्रत्येक प्राणी के अंतःकरण में विद्यमान हैं, किंतु अज्ञानी संसार उन्हें तीर्थों, मंदिरों और बाहरी स्थानों में खोजता रहता है।

English: The musk deer holds the fragrant musk within its own navel, yet unaware, wanders frantically through the forest in search of the aroma. In identical fashion, the Supreme Reality dwells within every beating heart, but an unaware world searches in external shrines.

कस्तूरी कुंडलि बसै • अंतर्यामी परमात्मापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 9-10

कबीर सूता क्या करे, जागो न जपो मुरारि।

एक दिन है सोवना, लंबे पाँव पसारि॥

Kabir soota kya kare, jaago na japo muraari. / Ek din hai sovna, lambe paanw pasaari.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी अज्ञान की निद्रा में सोए मनुष्य को जगाते हुए कहते हैं कि हे मानव! तू मोह-माया के प्रमाद में क्यों सोया पड़ा है? जाग और अपने प्रभु (मुरारि) का स्मरण कर। एक दिन जब मृत्यु आएगी, तब तो तुझे अनंत काल के लिए पाँव पसारकर चिरनिद्रा में सोना ही पड़ेगा। यह जीवन परमात्मा के भजन और सत्कर्मों का सुअवसर है।

English: Why dost thou remain slumbering in worldly illusion, O Kabir? Awake and meditate upon the Supreme Divine! A fateful day will inevitably come when you must sleep forever with legs outstretched in death. Waste not this precious waking life.

कबीर सूता क्या करे • आत्म-जागरणपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

कबीर खड़ा बाज़ार में, माँगे सबकी खैर।

ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर॥

Kabir khada bazaar mein, maange sabki khair. / Na kaahu se dosti, na kaahu se bair.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी अपनी निष्पक्ष और वीतराग दृष्टि को स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि कबीर संसार रूपी बाज़ार में खड़ा होकर सभी प्राणियों के कल्याण और मंगल की कामना करता है। न तो उसका किसी से विशेष स्वार्थपूर्ण लगाव या अंध-समर्थन है, और न ही किसी से कोई ईर्ष्या अथवा शत्रुता। सच्चा संत समदर्शी और निष्पक्ष होता है।

English: Kabir stands upright in the bustling marketplace of life, wishing peace and well-being for all humankind. He holds neither partisan attachment toward any, nor malice or enmity toward anyone. The enlightened sage embraces universal benevolence.

कबीर खड़ा बाज़ार में • समभावपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 6-8

करता था सो क्यों रहा, अब करि क्यों पछिताय।

बोया पेड़ बबूल का, आम कहाँ से खाय॥

Karta tha so kyon raha, ab kari kyon pachhitay. / Boya ped babool ka, aam kahan se khaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कर्मफल के अकाट्य सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि जब तू दुष्कर्म कर रहा था, तब तूने अपने कर्मों पर विचार क्यों नहीं किया? अब परिणाम सामने आने पर पछताने से क्या लाभ? यदि तूने बबूल (काँटों वाला पेड़) बोया है, तो उससे मीठे आम फलने की आशा कैसे कर सकता है? जैसा कर्म मनुष्य बोता है, वैसा ही फल उसे काटना पड़ता है।

English: Why did you heedlessly commit misdeeds while doing them, and why lament now when the consequence arrives? If you sowed thorny acacia seeds, how can you expect to harvest luscious mangoes? As a human sows in actions, so must they reap.

बोया पेड़ बबूल का • कर्म फलपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 9-10

कबीर संगति साधु की, कदे न निरफल होय।

चंदन होसी बावना, नींब न कहसी कोय॥

Kabir sangati saadhu ki, kade na nirphal hoy. / Chandan hosi baawana, neemb na kahsi koy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी सत्संगति की महिमा बताते हुए कहते हैं कि सज्जनों और संतों की संगति कभी भी व्यर्थ या निष्फल नहीं होती। जिस प्रकार चंदन के समीप रहने वाला साधारण बावना पेड़ भी चंदन की सुवास से महक उठता है और कोई उसे नीम या कड़वा नहीं कहता, उसी प्रकार सत्पुरुषों के संपर्क में आने से दुर्जन व्यक्ति भी सुधरकर श्रेष्ठ बन जाता है।

English: Companionship with righteous souls never goes in vain. Just as an ordinary dwarf shrub growing beside a sandalwood tree absorbs its heavenly perfume and none calls it bitter neem, noble company uplifts and transforms human character.

संगति साधु की • सत्संगपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🔥सामाजिक चेतना एवं आडंबर विरोध🎓 Class 11-12

काँकर पाथर जोरि कै, मसजिद लई बनाय।

ता चढ़ि मुल्ला बाँग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय॥

Kaankar paathar jori kai, masjid layi banaay. / Taa chadhee mulla baang de, kya bahra hua khudaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी धार्मिक आडंबर और ध्वनि-प्रदूषण पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि कंकड़-पत्थरों को जोड़कर मनुष्य ने मस्जिद का निर्माण कर लिया और उस पर चढ़कर मौलवी ज़ोर-ज़ोर से अज़ान की पुकार लगाता है। क्या ईश्वर बहरा हो गया है जो उसे चिल्लाकर पुकारना पड़े? परमात्मा तो अंतर्यामी हैं, वे हृदय की मूक प्रार्थना को भी सुनते हैं।

English: Gathering pebbles and stones, a mosque was built, and climbing atop it the priest screams loudly. Has the Almighty grown deaf that He must be summoned with shouting? The Divine knows the silent whispers of the sincere heart.

काँकर पाथर जोरि कै • पाखंड विरोधपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 11-12

कबीर माया पापणी, फंद ले बैठी हाट।

सब जग तो फंदे पड़ा, गया कबीरा काट॥

Kabir maya paapni, fand le baithi haat. / Sab jag to fande pada, gaya kabeera kaat.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि यह सांसारिक माया बड़ी पापिनी और छल-कपट से भरी है, जो संसार रूपी हाट (बाज़ार) में मोह-ममता का फंदा बिछाकर बैठी है। सारा संसार इस माया के फंदे में फँसकर दुख भोग रहा है, किंतु कबीर ने सद्गुरु के ज्ञान रूपी खड्ग से इस बंधन को काटकर मुक्ति प्राप्त कर ली है।

English: Worldly delusion (Maya) is a deceitful temptress that sits in the marketplace of life spreading her snares. The whole world fell trapped into her entanglements, but Kabir severed the illusory net with the sword of spiritual wisdom.

कबीर माया पापणी • माया मुक्तिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 9-10

कबीर यह तन जात है, सकै तो लेहु बहोरि।

नांगे हाथहुँ ते गए, जिनके लाख करोरि॥

Kabir yeh tan jaat hai, sakai to lehu bahori. / Naange haathahun te gaye, jinke laakh karori.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी चेतावनी देते हुए कहते हैं कि यह शरीर तो नष्ट होने ही वाला है, यदि संभव हो तो इसे प्रभु-भक्ति और सत्कर्मों में मोड़ लो। इस संसार से वे लोग भी खाली हाथ ही चले गए, जिनके पास लाखों-करोड़ों की अपार संपदा थी। अंत समय में न तो धन साथ जाता है और न ही भौतिक वैभव; केवल पुण्य और हरि-भक्ति ही साथ निभाते हैं।

English: This body is perishing swiftly, O Kabir; if you can, redirect it toward spiritual truth and virtue! Even those who amassed millions and billions departed this world completely empty-handed. True wealth is devotion and righteous action.

कबीर यह तन जात है • धन का नश्वर रूपपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

कबीर लोहा एक है, गढ़ने में है फेर।

ताहि का बख्तर बने, ताहि की शमशेर॥

Kabir loha ek hai, gadhne mein hai pher. / Taahi ka bakhtar bane, taahi ki shamsher.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि मूल धातु के रूप में लोहा एक ही होता है, परंतु लुहार के गढ़ने और ढालने के ढंग में अंतर होता है। उसी लोहे से रक्षा करने वाला कवच (बख्तर) भी बनता है और उसी लोहे से प्रहार करने वाली घातक तलवार (शमशेर) भी बनती है। इसी प्रकार सभी मनुष्य एक ही ईश्वर की संतान हैं, उनके संस्कार और विचार ही उन्हें रक्षक या विनाशक बनाते हैं।

English: Iron is fundamentally singular in essence; the difference lies solely in how it is forged. From the very same iron is fashioned protective armor (bakhtar), and from it is made the piercing sword (shamsher). All humans share the same divine source; character determines their destiny.

कबीर लोहा एक है • समानता और संस्कारपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

कबीर सो धन संचिए, जो आगैं कूं होय।

सीस चढ़ाए पोटली, ले जात न देख्या कोय॥

Kabir so dhan sanchiye, jo aagain koon hoy. / Sees chadhaaye potali, le jaat na dekhya koy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि मनुष्य को केवल उस सच्चे धन का संचय करना चाहिए, जो परलोक में और जीवन के अंतिम समय में काम आए, अर्थात् राम-नाम और परोपकार रूपी धन। भौतिक धन-दौलत की पोटली सिर पर बांधकर किसी भी व्यक्ति को मृत्यु के उपरांत साथ ले जाते नहीं देखा गया है। सांसारिक संपत्ति यहीं छूट जाती है, केवल सत्कर्म ही साथ जाते हैं।

English: Gather only that enduring wealth which accompanies you into the beyond, advises Kabir. For nobody has ever been witnessed carrying a bundle of amassed gold upon their head into the afterlife. True wealth is devotion and virtue.

कबीर सो धन संचिए • सच्चा धनपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 11-12

कबीर सीप समंद की, रटै पियास पियास।

समुंदहिं बूँद न आचवै, स्वाति बूँद की आस॥

Kabir seep samand ki, ratai piyaas piyaas. / Samundahin boond na aachavai, swati boond ki aas.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी अनन्य प्रेम का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि समुद्र में रहने वाली सीप प्यास-प्यास की रट लगाए रहती है। वह चारों ओर फैले अथाह खारे जल की एक बूँद भी ग्रहण नहीं करती, बल्कि केवल आकाश से बरसने वाली स्वाति नक्षत्र की बूँद की प्रतीक्षा करती है जिससे मोती बनता है। इसी प्रकार सच्चे भक्त को सांसारिक भोग नहीं, केवल प्रभु की कृपा चाहिए।

English: The oyster rests submerged in the ocean yet cries incessantly in thirst! It will not taste a drop of the saline sea, yearning solely for the pure drop of the celestial Swati rain that turns to pearl. Thus does the genuine devotee crave only divine grace.

कबीर सीप समंद की • अनन्य निष्ठापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 11-12

कबीर नाव जर्जरी, कूड़े खेवनहार।

हलके हलके तिरि गए, बूड़े जिन सिर भार॥

Kabir naav jarjari, koode khevanhaar. / Halke halke tiri gaye, boode jin sir bhaar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी संसार-सागर पार करने का रूपक प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि यह सांसारिक देह रूपी नाव अत्यंत जीर्ण-शीर्ण (जर्जर) है और अज्ञानी मल्लाह इसे चला रहे हैं। जो लोग सांसारिक वासनाओं, संग्रह और अहंकार के बोझ से मुक्त होकर 'हल्के' रहे, वे इस भवसागर को पार कर गए। किंतु जिनके सिर पर लोभ और मोह का भारी बोझ था, वे बीच मझधार में ही डूब गए।

English: Fragile and rickety is this worldly boat, steered by inept oarsmen. Those who kept themselves unburdened and light by shedding attachment sailed across safely; but those carrying heavy burdens of greed and ego drowned mid-stream.

कबीर नाव जर्जरी • भवसागर तरनापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

कामी क्रोधी लालची, इनसे भक्ति न होय।

भक्ति करे कोई सूरमा, जाति वरन कुल खोय॥

Kaami krodhi laalchi, inse bhakti na hoy. / Bhakti kare koyi soorma, jaati varan kul khoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि कामवासना से ग्रस्त, क्रोधी और लालची व्यक्तियों से कभी सच्ची ईश्वरीय भक्ति नहीं हो सकती। भक्ति का मार्ग तो किसी वीर योद्धा (सूरमा) का काम है, जो अपने अहंकार, जाति-वर्ण के अभिमान और कुल के घमंड को सर्वथा त्यागकर प्रभु के चरणों में अपना सर्वस्व समर्पित कर दे। भक्ति आत्म-बलिदान और निडरता की मांग करती है।

English: The lustful, the angry, and the greedy cannot practice authentic devotion. Devotion is the valiant path of a spiritual warrior, who fearlessly sheds all false pride of caste, color, and pedigree to surrender totally to the Divine.

कामी क्रोधी लालची • सच्ची भक्तिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 9-10

कबीर देह जो धरी, तो सहना परै विकार।

जैसे भांडे कुम्हार के, सहैं अगिनि की झार॥

Kabir deh jo dhari, to sahna parai vikaar. / Jaise bhaande kumhaar ke, sahain agini ki jhaar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि यदि आत्मा ने यह नश्वर भौतिक शरीर धारण किया है, तो उसे सुख-दुख, रोग और सांसारिक कष्टों की ज्वाला को सहन करना ही पड़ेगा। जिस प्रकार कुम्हार द्वारा बनाए गए कच्चे मिट्टी के बर्तनों को पकने और सुदृढ़ बनने के लिए आंवां (भट्टी) की धधकती आग की लपटों को सहना पड़ता है, उसी प्रकार जीवन के ताप से तपकर ही आत्मा कुंदन बनती है।

English: Having assumed mortal physical form, one must bear hardships, sorrow, and worldly tribulations. Just as clay pots fashioned by the potter must endure the scorching flames of the kiln to become strong, human trials purify the soul.

कबीर देह जो धरी • कष्ट सहनशीलतापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 9-10

कबीर संगति साधु की, बेगि करीजै जाय।

दुरमति दूरि गँवाइ सी, देसी सुमति बताय॥

Kabir sangati saadhu ki, begi kareejai jaay. / Durmati doori ganvaai si, desi sumati batay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि जैसे ही अवसर मिले, अविलंब जाकर सज्जनों और संतों की संगति कर लेनी चाहिए। संत पुरुषों का सान्निध्य मनुष्य के भीतर की समस्त दुर्बुद्धि, कुविचारों और दुर्गुणों को दूर भगा देता है और उसे श्रेष्ठ बुद्धि (सुमति), विवेक और सत्य मार्ग का दर्शन करा देता है। सत्संगति जीवन की दिशा बदल देती है।

English: Make haste without delay to seek the company of the wise and noble, advises Kabir. For virtuous companionship expels all wicked thoughts and ignorance from the mind, instilling righteous discernment and luminous wisdom.

संगति साधु की बेगि • सुमतिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 9-10

कहा कियो हम आइ करि, कहा करैंगे जाइ।

इन दोहू के बीच में, अवधि गँवाई आइ॥

Kaha kiyo hum aai kari, kaha karainge jaai. / In dohoo ke beech mein, avadhi ganvaayi aai.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी जीवन के व्यर्थ बीत जाने पर चेतावनी देते हुए कहते हैं कि इस संसार में जन्म लेकर हमने क्या सार्थक कर्म किया? और मृत्यु के उपरांत परलोक जाकर हम प्रभु को क्या मुँह दिखाएंगे? जन्म और मृत्यु के बीच की यह बहुमूल्य जीवन-अवधि हमने व्यर्थ की चिंताओं और सांसारिक प्रपंचों में ही गँवा दी। अतः समय रहते आत्म-कल्याण में लगो।

English: What worthy deed have we accomplished having arrived into this world, and what offering shall we present when we depart? Between birth and departure, we frittered away our allotted lifespan in trivial pursuits. Realize life’s sacred purpose before time expires.

कहा कियो हम आइ करि • जीवन का उद्देश्यपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 6-8

कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीति।

बिपति कसौटी जे कसे, तेई साँचे मीत॥

Kahi rahim sampati sage, banat bahut bahu reeti. / Bipati kasauti je kase, teyi saanche meet.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी सच्चे मित्र की पहचान बताते हुए कहते हैं कि जब हमारे पास धन-दौलत, पद और समृद्धि होती है, तब तो अनेक लोग अनेक प्रकार से बहाने बनाकर हमारे सगे-संबंधी और मित्र बनने का ढोंग करते हैं। परंतु जो व्यक्ति विपत्ति, संकट और निर्धनता के समय कसौटी पर खरा उतरे और साथ न छोड़े, वास्तव में वही सच्चा मित्र होता है। संकट ही मित्रता की सच्ची परीक्षा है।

English: When wealth and prosperity abound, countless people flock around pretending companionship in myriad ways. But those steadfast souls who endure the touchstone of adversity without fleeing are the only true friends.

कहि रहीम संपति सगे • सच्चा मित्रपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 6-8

कदली, सीप, भुजंग-मुख, स्वाति एक गुन तीन।

जैसी संगति बैठिए, तैसो ही फल दीन॥

Kadali, seep, bhujang-mukh, swati ek gun teen. / Jaisi sangati baithiye, taiso hi phal deen.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी संगति के निर्णायक प्रभाव को दर्शाते हुए कहते हैं कि स्वाति नक्षत्र की जल की बूँद तो एक ही होती है, किंतु अलग-अलग संगति के कारण उसके तीन भिन्न-भिन्न परिणाम होते हैं। केले (कदली) में पड़ने पर वह कपूर बन जाती है, सीप में पड़ने पर अनमोल मोती बन जाती है, और साँप (भुजंग) के मुख में पड़ने पर भयंकर विष बन जाती है। मनुष्य जिस प्रकार की संगति करता है, वैसा ही उसका स्वभाव और फल बन जाता है।

English: The celestial Swati raindrop is identical in essence, yet it manifests three completely different outcomes depending on where it falls: in the banana tree it turns to camphor, in the oyster to a pearl, and in the snake’s fangs to lethal venom. So does association shape fate.

कदली सीप भुजंग मुख • स्वाति बूँदपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

कमल पत्र पर जल रहे, रहिमन ताकी चाल।

जल में रहे जल ते अलग, संत जनन के हाल॥

Kamal patra par jal rahe, rahiman taaki chaal. / Jal mein rahe jal te alag, sant janan ke haal.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कमल के पत्ते (पुरइनि पात) का रूपक प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि कमल का पत्ता जल में ही रहता है, उस पर पानी की बूँदें गिरती भी हैं, किंतु वह पानी को अपने ऊपर चिपकने नहीं देता और पानी में रहकर भी उससे अलिप्त (अलग) रहता है। ठीक इसी प्रकार, सच्चे संत और ज्ञानी पुरुष भी सांसारिक मोह-माया के बीच रहते हुए भी उससे अनासक्त और निर्लिप्त रहते हैं।

English: Observe the lotus leaf: it lives immersed in the water, yet water droplets roll off without leaving a trace of wetness upon it. In identical manner, the enlightened saint dwells in the midst of worldly affairs completely unattached and spiritually free.

कमल पत्र पर जल रहे • अनासक्तिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

काज परे कछु और है, काज सरे कछु और।

रहिमन भँवरी के भए, नदी सिरावत मौर॥

Kaaj pare kachhu aur hai, kaaj sare kachhu aur. / Rahiman bhanvari ke bhaye, nadi siraavat maur.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी सांसारिक स्वार्थपरता पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहते हैं कि काम पड़ने पर लोगों का व्यवहार कुछ और होता है, और काम निकल जाने पर बिल्कुल बदल जाता है। जिस प्रकार विवाह के समय वर के सिर पर सजने वाले सेहरे (मौर) का बड़ा मान-सम्मान होता है, किंतु जैसे ही फेरे (भँवरी) पूरे होते हैं, उसी मौर को नदी में विसर्जित कर दिया जाता है। स्वार्थी संसार केवल काम निकलने तक आदर करता है।

English: People behave in one manner when they need a favor, and completely differently once their need has been fulfilled. Look at the wedding crown (maur): during marriage vows it is held sacred upon the groom’s head, but the moment the ceremony finishes, it is cast into the river.

काज परे कछु और है • स्वार्थपरतापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 11-12

काम क्रोध मद लोभ रत, गृहासक्त दुख रूप।

ते किम जानहिं रघुपतिहि, मूढ़ परे तम कूप॥

Kaam krodh mad lobh rat, grihasakt dukh roop. / Te kim jaanahin raghupatihi, moodh pare tam koop.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि जो मनुष्य निरंतर काम-वासना, क्रोध, अहंकार और लोभ में डूबे रहते हैं तथा सांसारिक आसक्ति के दुःखमय रूप में उलझे रहते हैं, वे अज्ञान के अंधे कुएँ में गिरे हुए मूर्ख उस सच्चिदानंद स्वरूप प्रभु रघुपति के अलौकिक तत्व को कभी नहीं जान सकते।

English: Those who remain endlessly entangled in sensual lust, wrath, arrogant vanity, greed, and blind domestic attachments dwell in the deep dark pit of ignorance. They can never perceive or comprehend the transcendent reality and supreme peace of the Divine.

काम क्रोध मद लोभ • आध्यात्मिक बोधपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 9-10

करम प्रधान बिस्व करि राखा। जो जस करइ सो तस फलु चाखा॥

सकल पदारथ एहिं जग माहीं। करमहीन नर पावत नाहीं॥

Karam pradhan biswa kari raakha. Jo jas karai so tas phalu chaakha. / Sakal padaarath ehin jag maahin. Karamheen nar paawat naahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कर्म के सार्वभौमिक सिद्धांत को प्रतिपादित करते हुए कहते हैं कि ईश्वर ने इस संपूर्ण जगत को कर्म-प्रधान बनाया है; यहाँ जो जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल भोगना पड़ता है। इस संसार में सभी वैभव, संपदा और सिद्धियाँ सुलभ हैं, परंतु केवल कर्महीन और आलसी व्यक्ति ही उन्हें प्राप्त नहीं कर पाता।

English: Tulsidas expounds the immutable law of karma: the Divine has made action the governing law of the cosmos; as a person acts, so shall they reap the fruits. All prosperity and worldly attainments exist here, yet the indolent and lazy who shun diligent effort remain forever deprived.

करम प्रधान बिस्व • कर्म की महत्तापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 6-8

का बरखा जब कृषी सुखानें। समय चूकि पुनि का पछितानें॥

अस जियँ जानि जानकी जानी। करि प्रनाम प्रभु चरन बिकानी॥

Ka barakha jab krishi sukhaane. Samay chooki puni ka pachhitaane. / As jiyan jaani jaanaki jaani. Kari pranaam prabhu charan bikaani.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी समय की महत्ता का लोकप्रसिद्ध सिद्धांत प्रस्तुत करते हैं कि जब सारी खेती सूख गई, तब वर्षा होने से क्या लाभ? और जब उचित अवसर हाथ से निकल गया, तब व्यर्थ पछताने से क्या लाभ? कार्य को सही समय पर तत्परता से पूरा करना ही बुद्धिमानी है।

English: Of what use is the torrential rain once the entire harvest has withered away? Similarly, what purpose does remorse serve once the opportune moment has slipped by? Tulsidas emphasizes that timely action alone yields success; procrastination leads only to regret.

का बरखा जब कृषी सुखानें • समय का महत्वपूरी व्याख्या व संदर्भ→