ख
CLASSICAL POETIC TREASURY

अक्षर 'ख' से शुरू होने वाले दोहे

1 प्रामाणिक दोहे उपलब्ध हैं।

📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)⚖️सत्य एवं धर्म🎓 Class 9-10

खैर, खून, खाँसी, खुसी, बैर, प्रीति, मदपान।

रहिमन दाबे ना दबें, जानत सकल जहान॥

Khair, khoon, khaansi, khusi, bair, preeti, madpaan. / Rahiman daabe na dabain, jaanat sakal jahaan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी मानव मनोविज्ञान का अकाट्य सत्य प्रकट करते हुए कहते हैं कि सात चीजें छिपाने से कभी नहीं छिपतीं: खैर (कुशल-क्षेम या कत्था), खून (हत्या या रक्तपात), खाँसी, खुशी (हार्दिक प्रसन्नता), बैर (शत्रुता), प्रीति (सच्चा प्रेम) और मदपान (शराब का नशा)। लाख प्रयास करने पर भी ये बातें संसार के सामने प्रकट होकर ही रहती हैं। अंतःकरण की सच्चाई छिप नहीं सकती।

English: Seven realities can never be concealed despite all efforts, declares Rahim: well-being, bloodshed, coughing, joy, enmity, genuine love, and intoxication. The entire world knows that these truths inevitably reveal themselves.

खैर खून खाँसी • सत्य का उद्घाटनपूरी व्याख्या व संदर्भ→