श
CLASSICAL POETIC TREASURY

अक्षर 'श' से शुरू होने वाले दोहे

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🌸गोस्वामी तुलसीदास📖गुरु महिमा एवं ज्ञान🎓 Class 6-8

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।

बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

Shree guru charan saroj raj, nij manu mukuru sudhari. / Baranaun raghubar bimal jasu, jo daayaku phal chaari.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि अपने सद्गुरु के चरण-कमलों की पावन धूलि से अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ व निर्मल करके, मैं प्रभु श्री रामचंद्र जी के उस पवित्र व निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो जीवन के चारों परम पुरुषार्थों—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को प्रदान करने वाला है।

English: Purifying the mirror of my restless mind with the sacred dust of my spiritual Guru’s lotus feet, I sing the spotless glory of Lord Rama, the divine sovereign who bestows all four supreme fruits of human life: righteousness, prosperity, fulfillment, and liberation.

श्रीगुरु चरन सरोज रज • गुरु वंदनापूरी व्याख्या व संदर्भ→