दोहा छंद (13-11 मात्राएँ)
Classical Couplet (दोहा)

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

Shree guru charan saroj raj, nij manu mukuru sudhari. Baranaun raghubar bimal jasu, jo daayaku phal chaari.

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Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या)

हिंदी सरल व्याख्या (Hindi Vyakhya):

गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि अपने सद्गुरु के चरण-कमलों की पावन धूलि से अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ व निर्मल करके, मैं प्रभु श्री रामचंद्र जी के उस पवित्र व निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो जीवन के चारों परम पुरुषार्थों—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को प्रदान करने वाला है।

English Translation & Meaning:

Purifying the mirror of my restless mind with the sacred dust of my spiritual Guru’s lotus feet, I sing the spotless glory of Lord Rama, the divine sovereign who bestows all four supreme fruits of human life: righteousness, prosperity, fulfillment, and liberation.

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Literary Context & Source (साहित्यिक संदर्भ व स्रोत)

मूल ग्रंथ / संकलन: रामचरितमानस / हनुमान चालीसा
काव्य विधा: दोहा (मात्रिक छंद)

गोस्वामी तुलसीदास का यह दोहा 16वीं शताब्दी (भक्तिकाल - सगुण रामाश्रयी शाखा) की अमर साहित्यिक धरोहर है। यह दोहा मध्यकालीन भक्ति एवं नीति काव्य परंपरा का अत्यंत प्रामाणिक अंश है जो जीवन के व्यावहारिक सत्य, सदाचार और मानवीय चेतना को जागृत करता है।

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"श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।" दोहे के रचयिता कौन हैं?▼

यह प्रसिद्ध एवं प्रामाणिक दोहा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित है। यह दोहा 'रामचरितमानस / हनुमान चालीसा' में संकलित है।

"श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।" दोहे का सरल हिंदी भावार्थ (व्याख्या) क्या है?▼

गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि अपने सद्गुरु के चरण-कमलों की पावन धूलि से अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ व निर्मल करके, मैं प्रभु श्री रामचंद्र जी के उस पवित्र व निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो जीवन के चारों परम पुरुषार्थों—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को प्रदान करने वाला है।

What is the English meaning of the doha "श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।"?▼

Purifying the mirror of my restless mind with the sacred dust of my spiritual Guru’s lotus feet, I sing the spotless glory of Lord Rama, the divine sovereign who bestows all four supreme fruits of human life: righteousness, prosperity, fulfillment, and liberation.

यह दोहा किस विषय और जीवन-मूल्य पर आधारित है?▼

यह दोहा मुख्य रूप से 'गुरु महिमा एवं ज्ञान' (Guru & Knowledge) विषय पर आधारित है, जो मानव जीवन में सदाचार, विवेक और आत्म-सुधार की प्रेरणा देता है।

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मूरख हृदयँ न चेत, जौं गुर मिलहिं बिरंचि सम।

फूलइ फलइ न बेंत, जदपि सुधा बरषहिं जलद॥

Moorakh hridayan na chet, jaun gur milahin biranchi sam. / Phoolai phalai na bent, jadapi sudha barashahin jalad.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि मूर्ख और हठी व्यक्ति के हृदय में कभी ज्ञान का प्रकाश नहीं हो सकता, भले ही उसे साक्षात् ब्रह्मा के समान महान सद्गुरु ही क्यों न प्राप्त हो जाएँ। जिस प्रकार अमृत तुल्य वर्षा होने पर भी बाँस (बेंत) पर कभी फूल और फल नहीं आते, वैसे ही दुर्जन ज्ञान ग्रहण नहीं कर पाता।

English: Tulsidas observes that wisdom never dawns in the obstinate heart of a fool, even if he were instructed by an enlightened preceptor as great as Lord Brahma. Just as a cane reed never yields fragrant blossoms or sweet fruits even if monsoon clouds shower celestial nectar, the unreceptive mind remains barren.

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धरम न दूसर सत्य समाना। आगम निगम पुरान बखाना॥

बिप्र धेनु सुर संत हित, लीन्ह मनुज अवतार॥

Dharama na doosar satya samana. Aagam nigam puran bakhana. / Bipra dhenu sur sant hit, leenh manuj avatar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि सत्य के समान संसार में कोई दूसरा महान धर्म अथवा कर्तव्य नहीं है; चारों वेद, शास्त्र और पुराण भी इसी परम सत्य का गुणगान करते हैं। सत्य और धर्म की रक्षा हेतु ही प्रभु ने साधु-संतों, गौ और देवताओं के कल्याणार्थ मनुष्य रूप में अवतार धारण किया।

English: Goswami Tulsidas proclaims that there is no virtue or duty greater than truth in this universe, as celebrated by all Vedic scriptures and Puranas. It is solely to uphold truth and protect the righteous, the gentle, and the seekers that the Divine incarnates in human form.

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तुलसी काया खेत है, मनसा भयौ किसान।

पाप पुन्य दोउ बीज हैं, बुवै सो लुनै निदान॥

Tulsi kaaya khet hai, mansa bhayau kisaan. / Paap punya dou beej hain, buvai so lunai nidaan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी रूपक के माध्यम से समझाते हैं कि यह मानव शरीर एक उपजाऊ खेत के समान है और मनुष्य का चंचल मन उस खेत का किसान है। पाप और पुण्य कर्म ही दो प्रकार के बीज हैं; मनुष्य जैसा बीज अपने इस जीवन रूपी खेत में बोता है, अंततः उसे वैसा ही कर्मफल काटना पड़ता है।

English: Tulsidas draws a profound agricultural metaphor: this mortal body is a fertile field, and the conscious mind is the farmer. Sin and virtue are the two kinds of seeds sown; whatever actions one sows in this lifetime, exactly that harvest of destiny must one reap in the end.

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तुलसी मीठे बचन ते, सुख उपजत चहुं ओर।

बसीकरन इक मंत्र है, परिहरू बचन कठोर॥

Tulsi meethe bachan te, sukh upjat chahun or. / Baseekaran ik mantra hai, pariharu bachan kathor.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि मधुर और विनम्र वाणी बोलने से चारों ओर सुख, शांति और सौहार्द का वातावरण उत्पन्न होता है। मीठे बोल संसार को अपने वश में करने का सबसे अचूक व दिव्य वशीकरण मंत्र हैं, इसलिए मनुष्य को अपने भीतर से कठोर और कटु वचनों का सर्वथा त्याग कर देना चाहिए।

English: Tulsidas advises that sweet and gentle speech radiates happiness, peace, and goodwill in every direction. Pleasant words serve as the ultimate enchantment that wins over hearts; therefore, one should completely abandon harsh, abrasive, and hurtful language.

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