J
CLASSICAL POETIC TREASURY

Couplets Starting with 'J'

15 प्रामाणिक दोहे उपलब्ध हैं।

🪔संत कबीरदास🔥सामाजिक चेतना एवं आडंबर विरोध🎓 Class 9-10

जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान।

मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान॥

Jaati na poocho saadhu ki, poochh lijiye gyaan. / Mol karo tarvaar ka, pada rahan do myaan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी जाति-पांति के भेदभाव का प्रखर विरोध करते हुए कहते हैं कि किसी ज्ञानी अथवा संत से उसकी जाति या कुल कभी नहीं पूछना चाहिए, बल्कि उसके ज्ञान और विचारों को ग्रहण करना चाहिए। जिस प्रकार तलवार का वास्तविक मूल्य उसकी तीक्ष्ण धार और इस्पात से होता है, न कि उसकी सुंदर म्यान से; उसी प्रकार मनुष्य का मूल्य उसके ज्ञान व चरित्र से है, कुल या जाति से नहीं।

English: Do not inquire about the caste or lineage of a sage; inquire instead into their wisdom and virtues. Assess the true value of the sword itself; let the outer decorative sheath lie unvalued. True worth lies in intrinsic character, not external identity.

जाति न पूछो साधु की • समानतापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं।

सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माहिं॥

Jab main tha tab hari nahin, ab hari hain main naahin. / Sab andhiyara miti gaya, jab deepak dekhya maahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी अद्वैत आध्यात्मिक अनुभूति को व्यक्त करते हुए कहते हैं कि जब तक मेरे भीतर 'मैं' (अहंकार और पृथकता का भाव) विद्यमान था, तब तक ईश्वर (हरि) की अनुभूति नहीं थी। परंतु जब ईश्वर की कृपा और प्रकाश का अवतरण हुआ, तो मेरा अहंकार विलीन हो गया। जैसे दीपक के जलने से सारा अंधकार नष्ट हो जाता है, वैसे ही ज्ञान के प्रकाश से समस्त अज्ञान मिट गया।

English: So long as the egoistic sense of "I" dominated within, Divine presence was absent; now that God reigns within, the ego has ceased to exist. All inner darkness vanished completely when the spiritual lamp of wisdom was kindled in my soul.

जब मैं था तब हरि नहीं • अहंकार नाशपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 11-12

जल में कुंभ, कुंभ में जल है, बाहर भीतर पानी।

फूटा कुंभ जल जलहि समाना, यह तत कह्यौ गियानी॥

Jal mein kumbh, kumbh mein jal hai, baahar bheetar paani. / Foota kumbh jal jalahi samana, yeh tat kahyau giyani.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी जीवात्मा और परमात्मा के अद्वैत संबंध को घड़े और जल के रूपक से समझाते हैं: नदी के जल में भरा हुआ घड़ा तैर रहा है; घड़े के अंदर भी जल है और बाहर भी जल है। जब वह घड़ा (शरीर रूपी उपाधि) टूट जाता है, तो अंदर का जल बाहर के जल में एकाकार हो जाता है। इसी प्रकार देह के त्याग पर जीवात्मा परमात्मा में लीन हो जाती है।

English: A water pot floats immersed in the river; there is water inside the pitcher and water outside. Once the vessel breaks, the enclosed water merges seamlessly into the boundless waters. Thus does the enlightened soul dissolve into Supreme Divinity.

जल में कुंभ • अद्वैत दर्शनपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⚖️सत्य एवं धर्म🎓 Class 9-10

झूठे को झूठा मिले, दूणा बंधे सनेह।

झूठे को साँचा मिले, तबहीं टूटे नेह॥

Jhoothe ko jhootha mile, doona bandhe saneh. / Jhoothe ko saancha mile, tabheen toote neh.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी सांसारिक कपट का यथार्थ चित्रण करते हुए कहते हैं कि जब एक झूठे और कपटी व्यक्ति को दूसरा वैसा ही झूठा व्यक्ति मिल जाता है, तो दोनों के बीच परस्पर स्वार्थ के कारण दुगना प्रेम और तालमेल दिखाई देता है। परंतु जैसे ही उस झूठे का सामना किसी सत्यवादी और स्पष्टवादी व्यक्ति से होता है, उसका सारा बनावटी प्रेम तुरंत टूट जाता है क्योंकि सत्य झूठ को सहन नहीं करता।

English: When an untruthful person encounters another liar, their selfish affection doubles in mutual convenience. But when an untruthful person confronts someone utterly truthful, their affinity breaks instantaneously, for falsehood cannot endure the mirror of truth.

झूठे को झूठा मिले • सत्य और असत्यपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 9-10

जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ।

मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ॥

Jin khoja tin paiya, gahre paani paith. / Main bapura boodan dara, raha kinaare baith.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी लगन और पुरुषार्थ का महत्त्व समझाते हुए कहते हैं कि जिन साहसी गोताखोरों ने गहरे पानी में उतरकर खोज की, उन्होंने अनमोल मोती प्राप्त कर लिए। परंतु मुझ जैसा कायर और अभागा डूबने के भय से किनारे पर ही बैठा रह गया और खाली हाथ रहा। जीवन में किसी भी महान लक्ष्य या आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए भय त्यागकर गहरे उतरना पड़ता है।

English: Those who dared to dive into the deep waters retrieved precious pearls of wisdom. But the timid fool who feared drowning merely sat idle on the shore, empty-handed. Attaining spiritual or worldly excellence requires fearless dedication.

जिन खोजा तिन पाइया • पुरुषार्थपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 11-12

जैसी प्रीति कुटंब की, तैसी हरि सों होय।

कहै कबीर बैकुंठ में, पला न पकड़े कोय॥

Jaisi preeti kutumb ki, taisi hari son hoy. / Kahai kabir baikunth mein, pala na pakde koy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि मनुष्य अपने परिवार, कुटुंब और सांसारिक बंधनों से जितना प्रगाढ़ और निस्वार्थ प्रेम करता है, यदि वैसा ही अनन्य प्रेम वह परमात्मा (हरि) से कर ले, तो उसे मोक्ष की प्राप्ति निश्चित है। कबीर कहते हैं कि तब परमधाम (बैकुंठ) के द्वार पर कोई उसका पल्लू पकड़ने वाला या रोकने वाला नहीं होगा; वह निर्बाध परम पद को प्राप्त करेगा।

English: If a soul could shower upon the Divine even a fraction of the fervent attachment and affection it squanders upon family and worldly kin, none could ever bar its entry into the heavenly realm of liberation, proclaims Kabir.

जैसी प्रीति कुटंब की • अनन्य भक्तिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

जो तोको काँटा बुवै, ताहि बोव तू फूल।

तोहि फूल को फूल है, वाको है तिरसूल॥

Jo toko kaanta buvai, taahi bov tu phool. / Tohi phool ko phool hai, vaako hai tirsool.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी क्षमा, अहिंसा और सदाचार का अमर संदेश देते हुए कहते हैं कि जो व्यक्ति तुम्हारे मार्ग में काँटे बिछाए (बुराई या अहित करे), तुम बदले में उसके लिए भी फूल ही बिछाओ (उसका भी भला करो)। तुम्हारे शुभ कर्मों के बदले तुम्हें फूलों जैसी सुगंध व शांति मिलेगी, जबकि काँटे बोने वाले को अंततः अपने ही कर्मों का त्रिशूल जैसा तीखा दंड भुगतना पड़ेगा।

English: For him who scatters thorns along your path, plant sweet blossoms in return. To you, your noble flowers will yield fragrance and peace; while for him, his own sown thorns will transform into piercing tridents of karmic retribution.

जो तोको काँटा बुवै • क्षमा और भलाईपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 6-8

जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।

चंदन विष व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग॥

Jo rahim uttam prakriti, ka kari sakat kusang. / Chandan vish vyaapat nahin, lapte rahat bhujang.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि जिस मनुष्य का स्वभाव और चरित्र दृढ़, श्रेष्ठ तथा उत्तम होता है, बुरी संगति (कुसंग) उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती। जिस प्रकार चंदन के शीतल वृक्ष पर सदैव विषैले सर्प लिपटे रहते हैं, फिर भी चंदन में विष का लेशमात्र भी प्रभाव नहीं फैलता और वह अपनी सुगंध नहीं छोड़ता; उसी प्रकार सत्पुरुष दुर्जनों के बीच रहकर भी अपने सद्गुणों को बनाए रखते हैं।

English: For a person endowed with upright character and noble disposition, evil companionship can cause no corruption. Sandalwood trees remain eternally embraced by venomous serpents, yet not a trace of poison permeates their sweet, cooling fragrance.

जो रहीम उत्तम प्रकृति • सत्संगतिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🌱विनम्रता एवं निरहंकार🎓 Class 9-10

जो बड़ेन को लघु कहें, नहिं रहीम घटि जाहिं।

गिरधर मुरलीधर कहें, कछु दुख मानत नाहिं॥

Jo baden ko laghu kahain, nahin rahim ghati jaahin. / Giridhar murlidhar kahain, kachhu dukh maanat naahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि यदि कोई क्षुद्र बुद्धि वाला व्यक्ति किसी सचमुच महान व्यक्ति को छोटा या तुच्छ कह दे, तो इससे उस महान व्यक्ति का बड़प्पन तनिक भी कम नहीं होता। जैसे भगवान श्री कृष्ण को जिन्होंने गोवर्धन पर्वत उठाया था (गिरिधर), उन्हें यदि लोग केवल बांसुरी बजाने वाला (मुरलीधर) कहकर पुकारते हैं, तो वे तनिक भी बुरा नहीं मानते। सच्चा बड़प्पन निंदा से अप्रभावित रहता है।

English: If envious or small-minded people belittle those who are truly great, their stature does not diminish by a fraction. Lord Krishna lifted the Govardhan mountain (Giridhar), yet when people address Him simply as the flute-player (Murlidhar), He takes no offense whatsoever.

जो बड़ेन को लघु कहें • गिरधर मुरलीधरपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 9-10

जे रहीम दीपक दसा, कुल कपूत गति सोय।

बारे उजियारो करै, बढ़े अँधेरो होय॥

Je rahim deepak dasa, kul kapoot gati soy. / Baare ujiyaaro karai, badhe andhero hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी श्लेष अलंकार के माध्यम से दीपक और कुपुत्र (कुल-कलंक) की समानता दिखाते हैं। दीपक को जब जलाते हैं (बारे) तो वह प्रकाश करता है, और जब वह बुझ जाता है (बढ़े) तो अंधकार छा जाता है। इसी प्रकार, जब कुल में कुपुत्र का जन्म होता है (बचपन/बारे) तो परिवार में खुशी का उजियारा होता है, किंतु जब वह बड़ा होता है (बढ़े) और कुकर्म करता है, तो पूरे कुल में बदनामी का घोर अंधकार फैल जाता है।

English: The fate of an unworthy son closely mirrors the condition of an oil lamp, explains Rahim. When kindled (or born in childhood), it brings bright illumination; but as it goes out (or as he grows up into wicked deeds), complete darkness engulfs the lineage.

जे रहीम दीपक दसा • कपूतपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 6-8

जाल परे जल जात बहि, तजि मीनन को मोह।

रहिमन मछरी नीर को, तऊ न छाँड़ति छोह॥

Jaal pare jal jaat bahi, taji meenan ko moh. / Rahiman machhri neer ko, tau na chhaandati chhoh.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी सच्चे और एकतरफा प्रेम का अद्भुत उदाहरण मछली और जल के माध्यम से देते हैं। जब नदी में मछुआरा जाल फेंकता है, तो जल मछली का साथ छोड़कर तुरंत जाल से बाहर बह जाता है। परंतु मछली अपने प्रिय जल के प्रति इतना सच्चा और अनन्य प्रेम रखती है कि जल से अलग होते ही अपने प्राण त्याग देती है, किंतु जल के प्रति अपना मोह और प्रेम कभी नहीं छोड़ती।

English: When the fisherman casts his net into the river, the water swiftly flows away, abandoning its affection for the trapped fish. Yet the faithful fish loves the water so unconditionally that it surrenders its very life the moment it is parted from the stream.

जाल परे जल जात बहि • मछली और जलपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 6-8

जे गरीब पर हित करैं, ते रहीम बड़ लोग।

कहाँ सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग॥

Je gareeb par hit karain, te rahim bad log. / Kahan sudaama baapuro, krishna mitaayi jog.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि जो सामर्थ्यवान लोग निर्धनों और असहायों का भला करते हैं और उन्हें गले लगाते हैं, वास्तव में वे ही संसार में सबसे बड़े और महान लोग हैं। उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि कहाँ परम निर्धन और दीन सुदामा, और कहाँ द्वारकाधीश भगवान श्री कृष्ण! सांसारिक दृष्टि से सुदामा कृष्ण की मित्रता के योग्य नहीं थे, किंतु कृष्ण ने अपने असीम प्रेम और उदारता से उन्हें गले लगाकर मित्र का मान दिया।

English: Those who extend benevolent grace to the impoverished are the truly noble souls of this world. Where stood poor destitute Sudama in comparison to Lord Krishna, sovereign of Dwarka? Yet Krishna’s supreme magnanimity embraced him as His dearest friend.

जे गरीब पर हित करैं • कृष्ण सुदामापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 9-10

जे न मित्र दुख होहिं दुखारी। तिन्हहि बिलोकत पातक भारी॥

निज दुख गिरि सम रज करि जाना। मित्रक दुख रज मेरु समाना॥

Je na mitra dukh hohin dukhari. Tinhahi bilokat paatak bhaari. / Nij dukh giri sam raj kari jaana. Mitrak dukh raj meru samana.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी सच्चे मित्र की परिभाषा देते हुए कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने मित्र के दुःख को देखकर स्वयं दुःखी नहीं होता, उसे देखने मात्र से भी बड़ा पाप लगता है। श्रेष्ठ मित्र वह है जो अपने पहाड़ जैसे बड़े दुःख को धूल के कण के समान छोटा समझे, और मित्र के धूल के कण जैसे छोटे कष्ट को सुमेरु पर्वत समान मानकर उसकी सहायता करे।

English: Tulsidas declares that one who remains indifferent to a friend’s sorrow incurs severe spiritual demerit. A noble friend trivializes his own mountain of suffering as a tiny speck of dust, while treating his friend’s minor distress as vast as Mount Sumeru, rushing whole-heartedly to support him.

जे न मित्र दुख • सच्चा मित्रपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

जाकी रही भावना जैसी। प्रभु मूरति देखी तिन तैसी॥

देखहिं रूप महा रनधीरा। मनहुँ बीर रस धरे सरीरा॥

Jaaki rahi bhavana jaisi. Prabhu moorati dekhee tin taisee. / Dekhahin roop maha randheera. Manahun beer ras dhare sareera.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी जनकपुर के धनुष यज्ञ का प्रसंग बताते हुए कहते हैं कि जिस व्यक्ति की अंतर्मन में जैसी भावना और दृष्टिकोण होता है, उसे प्रभु का स्वरूप भी वैसा ही दिखाई पड़ता है। वीरों को वे साक्षात् वीर रस के स्वरूप लगे, भक्तों को परम दयालु और अन्यायी राजाओं को वे काल स्वरूप प्रतीत हुए। दृष्टिकोण ही वास्तविकता को आकार देता है।

English: Tulsidas depicts how human perception shapes our experience of truth: whatever internal intention and disposition one harbors, in that exact likeness does one perceive the Lord. Mighty warriors saw Rama as the personification of valor, seekers saw supreme divinity, and tyrants saw fearful doom.

जाकी रही भावना जैसी • दृष्टिकोणपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🌸गोस्वामी तुलसीदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संदेहू॥

प्रभु पद प्रीति न कछु उपाधी। सो सुख कहि न सकइ मुनि आधी॥

Jehi ken jehi par satya sanehoo. So tehi milai na kachhu sandehoo. / Prabhu pad preeti na kachhu upaadhi. So sukh kahi na sakai muni aadhi.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि जिसका जिसके प्रति सच्चा, निस्वार्थ और निष्कपट प्रेम होता है, वह उसे अवश्य ही प्राप्त होता है; इसमें लेशमात्र भी संदेह नहीं है। विशुद्ध ईश्वरीय प्रेम और सत्यनिष्ठा की साधना कभी निष्फल नहीं जाती।

English: Tulsidas assures that wherever there is genuine, pure, and sincere love, union with the beloved object or ideal is inevitably attained beyond any shadow of doubt. Pure devotion and authentic affection possess irresistible spiritual power.

जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू • सच्चा प्रेमपूरी व्याख्या व संदर्भ→