दोहा छंद (13-11 मात्राएँ)
Classical Couplet (दोहा)

जाल परे जल जात बहि, तजि मीनन को मोह।रहिमन मछरी नीर को, तऊ न छाँड़ति छोह॥

Jaal pare jal jaat bahi, taji meenan ko moh. Rahiman machhri neer ko, tau na chhaandati chhoh.

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Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या)

हिंदी सरल व्याख्या (Hindi Vyakhya):

रहीम जी सच्चे और एकतरफा प्रेम का अद्भुत उदाहरण मछली और जल के माध्यम से देते हैं। जब नदी में मछुआरा जाल फेंकता है, तो जल मछली का साथ छोड़कर तुरंत जाल से बाहर बह जाता है। परंतु मछली अपने प्रिय जल के प्रति इतना सच्चा और अनन्य प्रेम रखती है कि जल से अलग होते ही अपने प्राण त्याग देती है, किंतु जल के प्रति अपना मोह और प्रेम कभी नहीं छोड़ती।

English Translation & Meaning:

When the fisherman casts his net into the river, the water swiftly flows away, abandoning its affection for the trapped fish. Yet the faithful fish loves the water so unconditionally that it surrenders its very life the moment it is parted from the stream.

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Literary Context & Source (साहित्यिक संदर्भ व स्रोत)

मूल ग्रंथ / संकलन: रहीम सतसई (अनन्य प्रेम)
काव्य विधा: दोहा (मात्रिक छंद)

रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) का यह दोहा 16वीं-17वीं शताब्दी (मध्यकालीन नीति व शृंगार काव्य) की अमर साहित्यिक धरोहर है। यह दोहा मध्यकालीन भक्ति एवं नीति काव्य परंपरा का अत्यंत प्रामाणिक अंश है जो जीवन के व्यावहारिक सत्य, सदाचार और मानवीय चेतना को जागृत करता है।

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"जाल परे जल जात बहि, तजि मीनन को मोह।" दोहे के रचयिता कौन हैं?▼

यह प्रसिद्ध एवं प्रामाणिक दोहा रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) द्वारा रचित है। यह दोहा 'रहीम सतसई (अनन्य प्रेम)' में संकलित है।

"जाल परे जल जात बहि, तजि मीनन को मोह।" दोहे का सरल हिंदी भावार्थ (व्याख्या) क्या है?▼

रहीम जी सच्चे और एकतरफा प्रेम का अद्भुत उदाहरण मछली और जल के माध्यम से देते हैं। जब नदी में मछुआरा जाल फेंकता है, तो जल मछली का साथ छोड़कर तुरंत जाल से बाहर बह जाता है। परंतु मछली अपने प्रिय जल के प्रति इतना सच्चा और अनन्य प्रेम रखती है कि जल से अलग होते ही अपने प्राण त्याग देती है, किंतु जल के प्रति अपना मोह और प्रेम कभी नहीं छोड़ती।

What is the English meaning of the doha "जाल परे जल जात बहि, तजि मीनन को मोह।"?▼

When the fisherman casts his net into the river, the water swiftly flows away, abandoning its affection for the trapped fish. Yet the faithful fish loves the water so unconditionally that it surrenders its very life the moment it is parted from the stream.

यह दोहा किस विषय और जीवन-मूल्य पर आधारित है?▼

यह दोहा मुख्य रूप से 'भक्ति एवं आध्यात्म' (Devotion & Spirituality) विषय पर आधारित है, जो मानव जीवन में सदाचार, विवेक और आत्म-सुधार की प्रेरणा देता है।

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रहिमन बात अगम्य की, कहन सुनन की नाहिं।

जे जानत ते कहत नहिं, कहत ते जानत नाहिं॥

Rahiman baat agamy ki, kahan sunan ki naahin. / Je jaanat te kahat nahin, kahat te jaanat naahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी गूढ़ आत्मज्ञान और ईश्वरीय अनुभूति के रहस्य को प्रकट करते हुए कहते हैं कि उस अगम्य और असीम परमात्मा की बात केवल कहने और सुनने का विषय नहीं है। जो तत्ववेत्ता वास्तव में उस परमसत्य को जान लेते हैं, वे मौन हो जाते हैं और व्यर्थ नहीं बोलते; और जो केवल बड़ी-बड़ी बातें बनाते फिरते हैं, वे वास्तव में उस सत्य से सर्वथा अनभिज्ञ होते हैं।

English: The transcendental mystery of the Supreme Reality is beyond mere speaking and listening, observes Rahim. Those enlightened souls who truly realize it fall silent; while those who chatter endlessly about it remain utterly ignorant of its truth.

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कमल पत्र पर जल रहे, रहिमन ताकी चाल।

जल में रहे जल ते अलग, संत जनन के हाल॥

Kamal patra par jal rahe, rahiman taaki chaal. / Jal mein rahe jal te alag, sant janan ke haal.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कमल के पत्ते (पुरइनि पात) का रूपक प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि कमल का पत्ता जल में ही रहता है, उस पर पानी की बूँदें गिरती भी हैं, किंतु वह पानी को अपने ऊपर चिपकने नहीं देता और पानी में रहकर भी उससे अलिप्त (अलग) रहता है। ठीक इसी प्रकार, सच्चे संत और ज्ञानी पुरुष भी सांसारिक मोह-माया के बीच रहते हुए भी उससे अनासक्त और निर्लिप्त रहते हैं।

English: Observe the lotus leaf: it lives immersed in the water, yet water droplets roll off without leaving a trace of wetness upon it. In identical manner, the enlightened saint dwells in the midst of worldly affairs completely unattached and spiritually free.

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बलिहारी वा प्रेम की, जो मन बसै निरंतर।

कहि रहीम सोई भलो, मिटै जन्म को अंतर॥

Balihari wa prem ki, jo man basai nirantar. / Kahi rahim soyi bhalo, mitai janam ko antar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी अनन्य ईश्वरीय प्रेम की वंदना करते हुए कहते हैं कि मैं उस परम प्रेम पर न्योछावर जाता हूँ, जो मन में निरंतर अखंड रूप से बसा रहता है। केवल वही प्रेम सच्चा और कल्याणकारी है, जो जीव और ईश्वर के बीच के जन्म-जन्मांतर के अंतर और अज्ञान के पर्दे को मिटाकर आत्मा का परमात्मा से मिलन करा देता है।

English: I offer my deepest homage to that divine love which abides uninterrupted within the purified heart, declares Rahim. That alone is supreme devotion which dissolves the ancient chasm between the soul and God, granting liberation.

बलिहारी वा प्रेम की • ईश्वर प्रेमपूरी व्याख्या व संदर्भ→
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चिंता कहुँ न कीजिए, भजहु राम भगवान।

जाहि दियो है चोंच सो, दैहै चुग्गा आन॥

Chinta kahun na keejiye, bhajahu ram bhagwaan. / Jaahi diyo hai chonch so, daihai chugga aan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और विश्वास का उपदेश देते हुए कहते हैं कि मनुष्य को आजीविका और भविष्य की व्यर्थ चिंता नहीं करनी चाहिए, बल्कि प्रभु श्री राम का भजन व स्मरण करना चाहिए। जिस विधाता ने पक्षी को चोंच दी है, उसने उसके लिए दाना (चुग्गा) भी निश्चित कर रखा है। परमात्मा सभी का पालनहार है, अतः चिंता छोड़कर निष्काम कर्म करो।

English: Harbor no anxious worries about survival; meditate instead upon the Supreme Lord. The compassionate Creator who gave the bird a beak has surely provided the grain to sustain it. Trust in divine providence.

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