🪔संत कबीरदास⚖️सत्य एवं धर्म🎓 Class 9-10🎓 Class 11-12🎓 Competitive Exams
दोहा छंद (13-11 मात्राएँ)
Classical Couplet (दोहा)

झूठे को झूठा मिले, दूणा बंधे सनेह।झूठे को साँचा मिले, तबहीं टूटे नेह॥

Jhoothe ko jhootha mile, doona bandhe saneh. Jhoothe ko saancha mile, tabheen toote neh.

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Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या)

हिंदी सरल व्याख्या (Hindi Vyakhya):

कबीरदास जी सांसारिक कपट का यथार्थ चित्रण करते हुए कहते हैं कि जब एक झूठे और कपटी व्यक्ति को दूसरा वैसा ही झूठा व्यक्ति मिल जाता है, तो दोनों के बीच परस्पर स्वार्थ के कारण दुगना प्रेम और तालमेल दिखाई देता है। परंतु जैसे ही उस झूठे का सामना किसी सत्यवादी और स्पष्टवादी व्यक्ति से होता है, उसका सारा बनावटी प्रेम तुरंत टूट जाता है क्योंकि सत्य झूठ को सहन नहीं करता।

English Translation & Meaning:

When an untruthful person encounters another liar, their selfish affection doubles in mutual convenience. But when an untruthful person confronts someone utterly truthful, their affinity breaks instantaneously, for falsehood cannot endure the mirror of truth.

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Literary Context & Source (साहित्यिक संदर्भ व स्रोत)

मूल ग्रंथ / संकलन: कबीर बीजक (साखी)
काव्य विधा: दोहा (मात्रिक छंद)

संत कबीरदास का यह दोहा 15वीं शताब्दी (भक्तिकाल - निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा) की अमर साहित्यिक धरोहर है। यह दोहा मध्यकालीन भक्ति एवं नीति काव्य परंपरा का अत्यंत प्रामाणिक अंश है जो जीवन के व्यावहारिक सत्य, सदाचार और मानवीय चेतना को जागृत करता है।

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"झूठे को झूठा मिले, दूणा बंधे सनेह।" दोहे के रचयिता कौन हैं?▼

यह प्रसिद्ध एवं प्रामाणिक दोहा संत कबीरदास द्वारा रचित है। यह दोहा 'कबीर बीजक (साखी)' में संकलित है।

"झूठे को झूठा मिले, दूणा बंधे सनेह।" दोहे का सरल हिंदी भावार्थ (व्याख्या) क्या है?▼

कबीरदास जी सांसारिक कपट का यथार्थ चित्रण करते हुए कहते हैं कि जब एक झूठे और कपटी व्यक्ति को दूसरा वैसा ही झूठा व्यक्ति मिल जाता है, तो दोनों के बीच परस्पर स्वार्थ के कारण दुगना प्रेम और तालमेल दिखाई देता है। परंतु जैसे ही उस झूठे का सामना किसी सत्यवादी और स्पष्टवादी व्यक्ति से होता है, उसका सारा बनावटी प्रेम तुरंत टूट जाता है क्योंकि सत्य झूठ को सहन नहीं करता।

What is the English meaning of the doha "झूठे को झूठा मिले, दूणा बंधे सनेह।"?▼

When an untruthful person encounters another liar, their selfish affection doubles in mutual convenience. But when an untruthful person confronts someone utterly truthful, their affinity breaks instantaneously, for falsehood cannot endure the mirror of truth.

यह दोहा किस विषय और जीवन-मूल्य पर आधारित है?▼

यह दोहा मुख्य रूप से 'सत्य एवं धर्म' (Truth & Righteousness) विषय पर आधारित है, जो मानव जीवन में सदाचार, विवेक और आत्म-सुधार की प्रेरणा देता है।

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साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।

जाके हिरदै साँच है, ताके हिरदै आप॥

Saanch barabar tap nahin, jhooth barabar paap. / Jaake hirdai saanch hai, taake hirdai aap.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी सत्य की सर्वोपरिता का प्रतिपादन करते हुए कहते हैं कि सत्य बोलने और आचरण करने के समान कोई महान तपस्या नहीं है, और असत्य व छल के समान कोई घोर पाप नहीं है। जिस मनुष्य के हृदय में सत्य, निष्कपटता और सत्यनिष्ठा का वास होता है, उसके हृदय में साक्षात् परमात्मा (आप) स्वयं निवास करते हैं।

English: There is no spiritual penance comparable to Truth, and no transgression as grievous as untruth. In whose heart Truth dwells unshakably, within that very sacred heart resides the Supreme Divine Himself.

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बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।

जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥

Bura jo dekhan main chala, bura na miliya koy. / Jo dil khoja aapna, mujhse bura na koy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि जब मैं संसार में दूसरों की बुराइयाँ और दोष ढूँढ़ने निकला, तो मुझे कोई भी वास्तव में बुरा नहीं मिला। परंतु जब मैंने अंतर्मुखी होकर अपने ही मन और हृदय की गहराइयों में झाँका, तो मुझे ज्ञात हुआ कि संसार में मुझसे अधिक अवगुणों से भरा कोई दूसरा नहीं है। यह दोहा आत्म-समीक्षा और निरहंकारिता का सर्वोच्च संदेश देता है।

English: When I set out to search for evil and fault in the world, I could find no truly wicked person. But when I probed deep into my own heart and mind, I realized that none was more flawed than myself. True transformation begins with honest self-introspection rather than judging others.

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पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।

ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥

Pothi padhi padhi jag mua, pandit bhaya na koy. / Dhai aakhar prem ka, padhe so pandit hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि संसार भर के लोग मोटे-मोटे धार्मिक ग्रंथ और शास्त्र पढ़-पढ़कर मृत्यु को प्राप्त हो गए, किंतु केवल किताबी ज्ञान से कोई भी सच्चा ज्ञानी अथवा पंडित नहीं बन सका। वास्तव में जो व्यक्ति प्रेम के केवल ढाई अक्षर का मर्म समझ लेता है और प्राणिमात्र से निष्कपट ईश्वरीय प्रेम करता है, वही सच्चा ज्ञानी और तत्ववेत्ता है।

English: Countless generations passed away perusing heavy treatises and scriptures, yet none attained true wisdom through mere bookish knowledge. He who truly comprehends and lives the two and a half letters of unconditional divine love is the truly enlightened sage.

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गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय।

बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय॥

Guru govind do-u khade, kaake laagun paay. / Balihari guru aapno, govind diyo batay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि मेरे समक्ष मेरे गुरु और साक्षात् ईश्वर (गोविंद) दोनों एक साथ खड़े हैं। मेरे मन में यह धर्मसंकट उत्पन्न हो गया कि मैं पहले किसके चरण स्पर्श करूँ। अंततः मैं अपने गुरु के चरणों पर ही बलिहारी जाता हूँ, जिन्होंने मुझे ईश्वर का साक्षात्कार कराया और प्रभु तक पहुँचने का मार्ग दिखाया। गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊँचा है।

English: Both my spiritual Guru and the Supreme Lord Govinda stand before me; to whose lotus feet should I bow first? I offer my total surrender and homage to the Guru first, for it was the Guru whose gracious light revealed the presence and path of the Divine.

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