दोहा छंद (13-11 मात्राएँ)
Classical Couplet (दोहा)

कबीर नाव जर्जरी, कूड़े खेवनहार।हलके हलके तिरि गए, बूड़े जिन सिर भार॥

Kabir naav jarjari, koode khevanhaar. Halke halke tiri gaye, boode jin sir bhaar.

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Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या)

हिंदी सरल व्याख्या (Hindi Vyakhya):

कबीरदास जी संसार-सागर पार करने का रूपक प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि यह सांसारिक देह रूपी नाव अत्यंत जीर्ण-शीर्ण (जर्जर) है और अज्ञानी मल्लाह इसे चला रहे हैं। जो लोग सांसारिक वासनाओं, संग्रह और अहंकार के बोझ से मुक्त होकर 'हल्के' रहे, वे इस भवसागर को पार कर गए। किंतु जिनके सिर पर लोभ और मोह का भारी बोझ था, वे बीच मझधार में ही डूब गए।

English Translation & Meaning:

Fragile and rickety is this worldly boat, steered by inept oarsmen. Those who kept themselves unburdened and light by shedding attachment sailed across safely; but those carrying heavy burdens of greed and ego drowned mid-stream.

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Literary Context & Source (साहित्यिक संदर्भ व स्रोत)

मूल ग्रंथ / संकलन: कबीर बीजक (साखी)
काव्य विधा: दोहा (मात्रिक छंद)

संत कबीरदास का यह दोहा 15वीं शताब्दी (भक्तिकाल - निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा) की अमर साहित्यिक धरोहर है। यह दोहा मध्यकालीन भक्ति एवं नीति काव्य परंपरा का अत्यंत प्रामाणिक अंश है जो जीवन के व्यावहारिक सत्य, सदाचार और मानवीय चेतना को जागृत करता है।

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"कबीर नाव जर्जरी, कूड़े खेवनहार।" दोहे के रचयिता कौन हैं?▼

यह प्रसिद्ध एवं प्रामाणिक दोहा संत कबीरदास द्वारा रचित है। यह दोहा 'कबीर बीजक (साखी)' में संकलित है।

"कबीर नाव जर्जरी, कूड़े खेवनहार।" दोहे का सरल हिंदी भावार्थ (व्याख्या) क्या है?▼

कबीरदास जी संसार-सागर पार करने का रूपक प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि यह सांसारिक देह रूपी नाव अत्यंत जीर्ण-शीर्ण (जर्जर) है और अज्ञानी मल्लाह इसे चला रहे हैं। जो लोग सांसारिक वासनाओं, संग्रह और अहंकार के बोझ से मुक्त होकर 'हल्के' रहे, वे इस भवसागर को पार कर गए। किंतु जिनके सिर पर लोभ और मोह का भारी बोझ था, वे बीच मझधार में ही डूब गए।

What is the English meaning of the doha "कबीर नाव जर्जरी, कूड़े खेवनहार।"?▼

Fragile and rickety is this worldly boat, steered by inept oarsmen. Those who kept themselves unburdened and light by shedding attachment sailed across safely; but those carrying heavy burdens of greed and ego drowned mid-stream.

यह दोहा किस विषय और जीवन-मूल्य पर आधारित है?▼

यह दोहा मुख्य रूप से 'भक्ति एवं आध्यात्म' (Devotion & Spirituality) विषय पर आधारित है, जो मानव जीवन में सदाचार, विवेक और आत्म-सुधार की प्रेरणा देता है।

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पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।

ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥

Pothi padhi padhi jag mua, pandit bhaya na koy. / Dhai aakhar prem ka, padhe so pandit hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि संसार भर के लोग मोटे-मोटे धार्मिक ग्रंथ और शास्त्र पढ़-पढ़कर मृत्यु को प्राप्त हो गए, किंतु केवल किताबी ज्ञान से कोई भी सच्चा ज्ञानी अथवा पंडित नहीं बन सका। वास्तव में जो व्यक्ति प्रेम के केवल ढाई अक्षर का मर्म समझ लेता है और प्राणिमात्र से निष्कपट ईश्वरीय प्रेम करता है, वही सच्चा ज्ञानी और तत्ववेत्ता है।

English: Countless generations passed away perusing heavy treatises and scriptures, yet none attained true wisdom through mere bookish knowledge. He who truly comprehends and lives the two and a half letters of unconditional divine love is the truly enlightened sage.

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कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढ़ै बन माहिं।

ऐसे घट-घट राम हैं, दुनिया देखै नाहिं॥

Kasturi kundali basai, mrig dhoondhai ban maahin. / Aise ghat-ghat ram hain, duniya dekhai naahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि कस्तूरी मृग की अपनी ही नाभि (कुंडलि) में सुगंधित कस्तूरी बसी होती है, किंतु इस सत्य से अनभिज्ञ होकर वह हिरण उस दिव्य सुगंध को ढूँढ़ने के लिए पूरे जंगल में भटकता फिरता है। ठीक इसी प्रकार, परमात्मा (राम) प्रत्येक प्राणी के अंतःकरण में विद्यमान हैं, किंतु अज्ञानी संसार उन्हें तीर्थों, मंदिरों और बाहरी स्थानों में खोजता रहता है।

English: The musk deer holds the fragrant musk within its own navel, yet unaware, wanders frantically through the forest in search of the aroma. In identical fashion, the Supreme Reality dwells within every beating heart, but an unaware world searches in external shrines.

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दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करै न कोय।

जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे को होय॥

Dukh mein sumiran sab kare, sukh mein karai na koy. / Jo sukh mein sumiran kare, to dukh kaahe ko hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी मानव स्वभाव की विसंगति पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं कि विपत्ति और दुख के समय तो हर मनुष्य ईश्वर को याद करता है, परंतु जब जीवन में सुख और संपन्नता होती है, तब कोई प्रभु का स्मरण नहीं करता। यदि मनुष्य सुख के दिनों में भी ईश्वर को निरंतर याद रखे और सदाचारी बना रहे, तो उसके जीवन में दुख का आगमन ही क्यों होगा?

English: In moments of anguish and sorrow, everyone turns to remember the Divine, but in times of prosperity and comfort, none bothers to recollect Him. If one remembers God with gratitude during joyful times, why would agony ever overcome him?

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जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं।

सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माहिं॥

Jab main tha tab hari nahin, ab hari hain main naahin. / Sab andhiyara miti gaya, jab deepak dekhya maahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी अद्वैत आध्यात्मिक अनुभूति को व्यक्त करते हुए कहते हैं कि जब तक मेरे भीतर 'मैं' (अहंकार और पृथकता का भाव) विद्यमान था, तब तक ईश्वर (हरि) की अनुभूति नहीं थी। परंतु जब ईश्वर की कृपा और प्रकाश का अवतरण हुआ, तो मेरा अहंकार विलीन हो गया। जैसे दीपक के जलने से सारा अंधकार नष्ट हो जाता है, वैसे ही ज्ञान के प्रकाश से समस्त अज्ञान मिट गया।

English: So long as the egoistic sense of "I" dominated within, Divine presence was absent; now that God reigns within, the ego has ceased to exist. All inner darkness vanished completely when the spiritual lamp of wisdom was kindled in my soul.

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