दोहा छंद (13-11 मात्राएँ)
Classical Couplet (दोहा)

काँकर पाथर जोरि कै, मसजिद लई बनाय।ता चढ़ि मुल्ला बाँग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय॥

Kaankar paathar jori kai, masjid layi banaay. Taa chadhee mulla baang de, kya bahra hua khudaay.

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Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या)

हिंदी सरल व्याख्या (Hindi Vyakhya):

कबीरदास जी धार्मिक आडंबर और ध्वनि-प्रदूषण पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि कंकड़-पत्थरों को जोड़कर मनुष्य ने मस्जिद का निर्माण कर लिया और उस पर चढ़कर मौलवी ज़ोर-ज़ोर से अज़ान की पुकार लगाता है। क्या ईश्वर बहरा हो गया है जो उसे चिल्लाकर पुकारना पड़े? परमात्मा तो अंतर्यामी हैं, वे हृदय की मूक प्रार्थना को भी सुनते हैं।

English Translation & Meaning:

Gathering pebbles and stones, a mosque was built, and climbing atop it the priest screams loudly. Has the Almighty grown deaf that He must be summoned with shouting? The Divine knows the silent whispers of the sincere heart.

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Literary Context & Source (साहित्यिक संदर्भ व स्रोत)

मूल ग्रंथ / संकलन: कबीर बीजक (आडंबर विरोध)
काव्य विधा: दोहा (मात्रिक छंद)

संत कबीरदास का यह दोहा 15वीं शताब्दी (भक्तिकाल - निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा) की अमर साहित्यिक धरोहर है। यह दोहा मध्यकालीन भक्ति एवं नीति काव्य परंपरा का अत्यंत प्रामाणिक अंश है जो जीवन के व्यावहारिक सत्य, सदाचार और मानवीय चेतना को जागृत करता है।

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"काँकर पाथर जोरि कै, मसजिद लई बनाय।" दोहे के रचयिता कौन हैं?▼

यह प्रसिद्ध एवं प्रामाणिक दोहा संत कबीरदास द्वारा रचित है। यह दोहा 'कबीर बीजक (आडंबर विरोध)' में संकलित है।

"काँकर पाथर जोरि कै, मसजिद लई बनाय।" दोहे का सरल हिंदी भावार्थ (व्याख्या) क्या है?▼

कबीरदास जी धार्मिक आडंबर और ध्वनि-प्रदूषण पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि कंकड़-पत्थरों को जोड़कर मनुष्य ने मस्जिद का निर्माण कर लिया और उस पर चढ़कर मौलवी ज़ोर-ज़ोर से अज़ान की पुकार लगाता है। क्या ईश्वर बहरा हो गया है जो उसे चिल्लाकर पुकारना पड़े? परमात्मा तो अंतर्यामी हैं, वे हृदय की मूक प्रार्थना को भी सुनते हैं।

What is the English meaning of the doha "काँकर पाथर जोरि कै, मसजिद लई बनाय।"?▼

Gathering pebbles and stones, a mosque was built, and climbing atop it the priest screams loudly. Has the Almighty grown deaf that He must be summoned with shouting? The Divine knows the silent whispers of the sincere heart.

यह दोहा किस विषय और जीवन-मूल्य पर आधारित है?▼

यह दोहा मुख्य रूप से 'सामाजिक चेतना एवं आडंबर विरोध' (Social Reform & Rationality) विषय पर आधारित है, जो मानव जीवन में सदाचार, विवेक और आत्म-सुधार की प्रेरणा देता है।

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जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान।

मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान॥

Jaati na poocho saadhu ki, poochh lijiye gyaan. / Mol karo tarvaar ka, pada rahan do myaan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी जाति-पांति के भेदभाव का प्रखर विरोध करते हुए कहते हैं कि किसी ज्ञानी अथवा संत से उसकी जाति या कुल कभी नहीं पूछना चाहिए, बल्कि उसके ज्ञान और विचारों को ग्रहण करना चाहिए। जिस प्रकार तलवार का वास्तविक मूल्य उसकी तीक्ष्ण धार और इस्पात से होता है, न कि उसकी सुंदर म्यान से; उसी प्रकार मनुष्य का मूल्य उसके ज्ञान व चरित्र से है, कुल या जाति से नहीं।

English: Do not inquire about the caste or lineage of a sage; inquire instead into their wisdom and virtues. Assess the true value of the sword itself; let the outer decorative sheath lie unvalued. True worth lies in intrinsic character, not external identity.

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माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।

कर का मनका डारि दे, मन का मनका फेर॥

Mala ferat jug bhaya, fira na man ka fer. / Kar ka manka daari de, man ka manka fer.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी बाह्याडंबरों पर कटाक्ष करते हुए कहते हैं कि हाथ में माला के दाने घुमाते-घुमाते युग बीत गए, किंतु मन के भीतर की चंचलता, वासना और छल-कपट दूर नहीं हुए। इसलिए हाथ की माला के मणके फेरना छोड़ दो और अपने अंतःकरण के मनके को फेरो, अर्थात् मन को शुद्ध, एकाग्र और निर्मल बनाओ। आंतरिक पवित्रता ही सच्ची साधना है।

English: Eons passed revolving rosary beads between the fingers, yet the restless wanderings and pretenses of the mind remained unchanged. Cast aside the physical rosary from your hand; instead turn and refine the inner beads of your own conscious mind.

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पाहन पूजे हरि मिलैं, तो मैं पूजौं पहार।

ताते यह चाकी भली, पीस खाय संसार॥

Pahan pooje hari milain, to main poojaun pahaar. / Taate yeh chaaki bhali, pees khaay sansaar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी मूर्तिपूजा के रूढ़िवादी अंधानुकरण पर कटाक्ष करते हुए कहते हैं कि यदि निर्जीव पत्थर की मूर्ति पूजने मात्र से ईश्वर की प्राप्ति हो सकती है, तो मैं पूरे पहाड़ की पूजा करने को तैयार हूँ। उस पत्थर से तो घर में रखी पत्थर की चक्की कहीं अधिक उपयोगी और श्रेष्ठ है, जिसके पीसे हुए अन्न से सारा संसार अपना पेट भरता है। सजीव कर्मकांड निरर्थक पूजा से श्रेष्ठ है।

English: If worshipping stone idols yields the Supreme Divine, I would gladly worship an entire mountain! Far more beneficial than that silent stone is the humble household grinding stone, whose ground flour feeds and nourishes the whole world.

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बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।

जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥

Bura jo dekhan main chala, bura na miliya koy. / Jo dil khoja aapna, mujhse bura na koy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि जब मैं संसार में दूसरों की बुराइयाँ और दोष ढूँढ़ने निकला, तो मुझे कोई भी वास्तव में बुरा नहीं मिला। परंतु जब मैंने अंतर्मुखी होकर अपने ही मन और हृदय की गहराइयों में झाँका, तो मुझे ज्ञात हुआ कि संसार में मुझसे अधिक अवगुणों से भरा कोई दूसरा नहीं है। यह दोहा आत्म-समीक्षा और निरहंकारिता का सर्वोच्च संदेश देता है।

English: When I set out to search for evil and fault in the world, I could find no truly wicked person. But when I probed deep into my own heart and mind, I realized that none was more flawed than myself. True transformation begins with honest self-introspection rather than judging others.

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