दोहा छंद (13-11 मात्राएँ)
Classical Couplet (दोहा)

विद्या धन उद्यम बिना, कहो जु पावै कौन।बिना डुलाए ना मिलै, ज्यों पंखा की पौन॥

Vidya dhan udyam bina, kaho ju paavai kaun. Bina dulaaye na milai, jyon pankha ki paun.

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Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या)

हिंदी सरल व्याख्या (Hindi Vyakhya):

रहीम जी परिश्रम और पुरुषार्थ की महत्ता समझाते हुए कहते हैं कि भला बिना कठिन परिश्रम (उद्यम) और अभ्यास के विद्या रूपी अनमोल धन को कौन प्राप्त कर सकता है? यह ठीक हाथ के पंखे के समान है; जब तक हाथ से पंखा न डुलाया जाए, तब तक उसकी शीतल पवन (हवा) भी प्राप्त नहीं होती। विद्या और सफलता केवल निरंतर परिश्रम से ही अर्जित की जा सकती है।

English Translation & Meaning:

Who has ever acquired the priceless treasure of knowledge without diligent labor and earnest effort? Even the cooling breeze of a hand-fan cannot be obtained unless you exert effort to move it. Dedicated industry is the sole key to wisdom.

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Literary Context & Source (साहित्यिक संदर्भ व स्रोत)

मूल ग्रंथ / संकलन: रहीम सतसई (उद्यम नीति)
काव्य विधा: दोहा (मात्रिक छंद)

रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) का यह दोहा 16वीं-17वीं शताब्दी (मध्यकालीन नीति व शृंगार काव्य) की अमर साहित्यिक धरोहर है। यह दोहा मध्यकालीन भक्ति एवं नीति काव्य परंपरा का अत्यंत प्रामाणिक अंश है जो जीवन के व्यावहारिक सत्य, सदाचार और मानवीय चेतना को जागृत करता है।

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"विद्या धन उद्यम बिना, कहो जु पावै कौन।" दोहे के रचयिता कौन हैं?▼

यह प्रसिद्ध एवं प्रामाणिक दोहा रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) द्वारा रचित है। यह दोहा 'रहीम सतसई (उद्यम नीति)' में संकलित है।

"विद्या धन उद्यम बिना, कहो जु पावै कौन।" दोहे का सरल हिंदी भावार्थ (व्याख्या) क्या है?▼

रहीम जी परिश्रम और पुरुषार्थ की महत्ता समझाते हुए कहते हैं कि भला बिना कठिन परिश्रम (उद्यम) और अभ्यास के विद्या रूपी अनमोल धन को कौन प्राप्त कर सकता है? यह ठीक हाथ के पंखे के समान है; जब तक हाथ से पंखा न डुलाया जाए, तब तक उसकी शीतल पवन (हवा) भी प्राप्त नहीं होती। विद्या और सफलता केवल निरंतर परिश्रम से ही अर्जित की जा सकती है।

What is the English meaning of the doha "विद्या धन उद्यम बिना, कहो जु पावै कौन।"?▼

Who has ever acquired the priceless treasure of knowledge without diligent labor and earnest effort? Even the cooling breeze of a hand-fan cannot be obtained unless you exert effort to move it. Dedicated industry is the sole key to wisdom.

यह दोहा किस विषय और जीवन-मूल्य पर आधारित है?▼

यह दोहा मुख्य रूप से 'कर्म एवं पुरुषार्थ' (Karma & Action) विषय पर आधारित है, जो मानव जीवन में सदाचार, विवेक और आत्म-सुधार की प्रेरणा देता है।

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जे रहीम दीपक दसा, कुल कपूत गति सोय।

बारे उजियारो करै, बढ़े अँधेरो होय॥

Je rahim deepak dasa, kul kapoot gati soy. / Baare ujiyaaro karai, badhe andhero hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी श्लेष अलंकार के माध्यम से दीपक और कुपुत्र (कुल-कलंक) की समानता दिखाते हैं। दीपक को जब जलाते हैं (बारे) तो वह प्रकाश करता है, और जब वह बुझ जाता है (बढ़े) तो अंधकार छा जाता है। इसी प्रकार, जब कुल में कुपुत्र का जन्म होता है (बचपन/बारे) तो परिवार में खुशी का उजियारा होता है, किंतु जब वह बड़ा होता है (बढ़े) और कुकर्म करता है, तो पूरे कुल में बदनामी का घोर अंधकार फैल जाता है।

English: The fate of an unworthy son closely mirrors the condition of an oil lamp, explains Rahim. When kindled (or born in childhood), it brings bright illumination; but as it goes out (or as he grows up into wicked deeds), complete darkness engulfs the lineage.

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रहिमन करम की रेख पै, काहू को नहिं जोर।

जतन किए कछु ना बनै, जो कछु लिख्यो सो होर॥

Rahiman karam ki rekh pai, kaahu ko nahin jor. / Jatan kiye kachhu na banai, jo kachhu likhyo so hor.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी पूर्वसंचित कर्मों के विधान को स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि मनुष्य के कर्मों के फल पर किसी का कोई ज़ोर नहीं चलता। मनुष्य चाहे कितने भी बाहरी उपाय या यत्न कर ले, कर्मफल के अटल विधान को कोई टाल नहीं सकता। जो प्रारब्ध में लिखा है, वह घटित होकर ही रहता है। अतः फल की व्यर्थ आसक्ति छोड़कर निष्काम भाव से सत्कर्म करते रहना चाहिए।

English: Upon the indelible lines etched by destiny through past actions, no mortal holds absolute sway, says Rahim. Contrive what you will, the harvest of karmic law must inevitably be reaped. Focus therefore on performing righteous deeds in the present.

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रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय।

टूटे पे फिर ना जुरे, जुरे गाँठ परि जाय॥

Rahiman dhaaga prem ka, mat toro chatkaay. / Toote pe phir na jure, jure gaanth pari jaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि प्रेम और आपसी विश्वास का संबंध एक कोमल और नाजुक धागे के समान होता है। इसे क्रोध, अहंकार या नासमझी के झटके से कभी नहीं तोड़ना चाहिए। यदि यह प्रेम रूपी धागा एक बार टूट जाता है, तो फिर पहले जैसा नहीं जुड़ता; और यदि बहुत प्रयास करके उसे जोड़ भी लिया जाए, तो उसमें सदा के लिए एक अविश्वास और संकोच की गाँठ पड़ जाती है।

English: Rahim counsels never to snap the delicate thread of love in a sudden fit of anger or ego. Once severed, it cannot be rejoined as before; and even if re-tied, an indelible knot of distrust and distance remains forever in the relationship.

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रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।

पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥

Rahiman paani rakhiye, bin paani sab soon. / Paani gaye na oobarai, moti, maanush, choon.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी श्लेष अलंकार का अप्रतिम प्रयोग करते हुए 'पानी' के संरक्षण का संदेश देते हैं। वे कहते हैं कि जीवन में पानी अवश्य बनाए रखना चाहिए, क्योंकि पानी के बिना सब कुछ व्यर्थ (शून्य) है। पानी (चमक/आभा) के बिना मोती मूल्यहीन है, पानी (सम्मान/प्रतिष्ठा/विनम्रता) के बिना मनुष्य का कोई अस्तित्व नहीं, और पानी (जल) के बिना चूना या आटा किसी काम का नहीं रहता।

English: Preserve water with the utmost care, for without water all creation becomes desolate, advises Rahim. When water is lost, three things lose all worth: the pearl loses its luster, human beings lose their honor and dignity, and flour or lime cannot bind into substance.

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