जे रहीम दीपक दसा, कुल कपूत गति सोय।
बारे उजियारो करै, बढ़े अँधेरो होय॥
Je rahim deepak dasa, kul kapoot gati soy. / Baare ujiyaaro karai, badhe andhero hoy.
रहीम जी श्लेष अलंकार के माध्यम से दीपक और कुपुत्र (कुल-कलंक) की समानता दिखाते हैं। दीपक को जब जलाते हैं (बारे) तो वह प्रकाश करता है, और जब वह बुझ जाता है (बढ़े) तो अंधकार छा जाता है। इसी प्रकार, जब कुल में कुपुत्र का जन्म होता है (बचपन/बारे) तो परिवार में खुशी का उजियारा होता है, किंतु जब वह बड़ा होता है (बढ़े) और कुकर्म करता है, तो पूरे कुल में बदनामी का घोर अंधकार फैल जाता है।
English: The fate of an unworthy son closely mirrors the condition of an oil lamp, explains Rahim. When kindled (or born in childhood), it brings bright illumination; but as it goes out (or as he grows up into wicked deeds), complete darkness engulfs the lineage.