🪔संत कबीरदास⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 9-10🎓 Class 11-12🎓 Competitive Exams
दोहा छंद (13-11 मात्राएँ)
Classical Couplet (दोहा)

दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारंबार।तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि न लागे डार॥

Durlabh maanush janam hai, deh na baarambaar. Taruvar jyon patta jhade, bahuri na laage daar.

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Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या)

हिंदी सरल व्याख्या (Hindi Vyakhya):

कबीरदास जी मानव जीवन की अमूल्यता का बोध कराते हुए कहते हैं कि चौरासी लाख योनियों में यह मानव जन्म अत्यंत दुर्लभ है, यह देह बार-बार प्राप्त नहीं होती। जिस प्रकार वृक्ष की शाखा से एक बार पत्ता टूटकर नीचे गिर जाए, तो वह दोबारा उस डाल पर नहीं जुड़ सकता; उसी प्रकार बीता हुआ समय और मानव जीवन पुनः नहीं मिलता। अतः इसे व्यर्थ न गंवाएं।

English Translation & Meaning:

Human birth is exceedingly precious and rare; this vessel is not granted again and again. Just as a dry leaf falling from a branch can never be reattached to the tree, so too lost opportunity and mortal life never return. Strive for spiritual realization now.

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Literary Context & Source (साहित्यिक संदर्भ व स्रोत)

मूल ग्रंथ / संकलन: कबीर बीजक (चेतावनी को अंग)
काव्य विधा: दोहा (मात्रिक छंद)

संत कबीरदास का यह दोहा 15वीं शताब्दी (भक्तिकाल - निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा) की अमर साहित्यिक धरोहर है। यह दोहा मध्यकालीन भक्ति एवं नीति काव्य परंपरा का अत्यंत प्रामाणिक अंश है जो जीवन के व्यावहारिक सत्य, सदाचार और मानवीय चेतना को जागृत करता है।

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"दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारंबार।" दोहे के रचयिता कौन हैं?▼

यह प्रसिद्ध एवं प्रामाणिक दोहा संत कबीरदास द्वारा रचित है। यह दोहा 'कबीर बीजक (चेतावनी को अंग)' में संकलित है।

"दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारंबार।" दोहे का सरल हिंदी भावार्थ (व्याख्या) क्या है?▼

कबीरदास जी मानव जीवन की अमूल्यता का बोध कराते हुए कहते हैं कि चौरासी लाख योनियों में यह मानव जन्म अत्यंत दुर्लभ है, यह देह बार-बार प्राप्त नहीं होती। जिस प्रकार वृक्ष की शाखा से एक बार पत्ता टूटकर नीचे गिर जाए, तो वह दोबारा उस डाल पर नहीं जुड़ सकता; उसी प्रकार बीता हुआ समय और मानव जीवन पुनः नहीं मिलता। अतः इसे व्यर्थ न गंवाएं।

What is the English meaning of the doha "दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारंबार।"?▼

Human birth is exceedingly precious and rare; this vessel is not granted again and again. Just as a dry leaf falling from a branch can never be reattached to the tree, so too lost opportunity and mortal life never return. Strive for spiritual realization now.

यह दोहा किस विषय और जीवन-मूल्य पर आधारित है?▼

यह दोहा मुख्य रूप से 'समय एवं नश्वरता' (Time & Transience) विषय पर आधारित है, जो मानव जीवन में सदाचार, विवेक और आत्म-सुधार की प्रेरणा देता है।

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काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।

पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब॥

Kaal kare so aaj kar, aaj kare so ab. / Pal mein parlay hoyegi, bahuri karega kab.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी समय की महत्ता का बोध कराते हुए कहते हैं कि जो कार्य तुम कल पर टाल रहे हो, उसे आज ही पूरा करो और जिसे आज करना है, उसे इसी क्षण कर डालो। जीवन क्षणभंगुर है, एक पल में प्रलय (मृत्यु या अकस्मात संकट) आ सकती है, फिर बाद में तुम उस शुभ कार्य को कब कर पाओगे? आलस्य छोड़कर वर्तमान क्षण में तत्पर रहो।

English: What you intend to do tomorrow, accomplish today; what you plan for today, execute this very moment. In the blink of an eye catastrophe or death may arrive; when then will you accomplish what was left undone? Seize the present without procrastination.

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माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रूँदे मोय।

एक दिन ऐसा आएगा, मैं रूँदूंगी तोय॥

Maati kahe kumhaar se, tu kya roonde moy. / Ek din aisa aayega, main roondoongi toy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी नश्वरता का मर्म समझाते हुए रूपक का प्रयोग करते हैं: बर्तन बनाते समय कुम्हार जब मिट्टी को अपने पैरों से रौंदता है, तब मिट्टी उससे कहती है कि आज अपने घमंड में तू मुझे क्या रौंद रहा है? स्मरण रख, एक दिन ऐसा भी आएगा जब तेरी मृत्यु होगी और तू इसी मिट्टी में विलीन हो जाएगा, तब मैं तुझे अपने भीतर रौंदूँगी। संसार की नश्वरता के सम्मुख अहंकार मिथ्या है।

English: The clay speaks to the potter: Why dost thou tread upon me so arrogantly today? Remember, a day shall inevitably arrive when thou shalt perish and dissolve into dust, and then it is I who shall tread upon thee. Temporal pride is absurd before mortality.

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कबीर सूता क्या करे, जागो न जपो मुरारि।

एक दिन है सोवना, लंबे पाँव पसारि॥

Kabir soota kya kare, jaago na japo muraari. / Ek din hai sovna, lambe paanw pasaari.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी अज्ञान की निद्रा में सोए मनुष्य को जगाते हुए कहते हैं कि हे मानव! तू मोह-माया के प्रमाद में क्यों सोया पड़ा है? जाग और अपने प्रभु (मुरारि) का स्मरण कर। एक दिन जब मृत्यु आएगी, तब तो तुझे अनंत काल के लिए पाँव पसारकर चिरनिद्रा में सोना ही पड़ेगा। यह जीवन परमात्मा के भजन और सत्कर्मों का सुअवसर है।

English: Why dost thou remain slumbering in worldly illusion, O Kabir? Awake and meditate upon the Supreme Divine! A fateful day will inevitably come when you must sleep forever with legs outstretched in death. Waste not this precious waking life.

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पानी केरा बुदबुदा, अस मानुस की जात।

एक दिना छिप जाएगा, ज्यों तारा परभात॥

Paani kera budbuda, as maanus ki jaat. / Ek dina chhip jaayega, jyon taara parbhaat.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी मानव जीवन की क्षणभंगुरता बताते हुए कहते हैं कि मनुष्य का यह नश्वर शरीर जल के बुलबुले के समान क्षणिक है, जो क्षणभर में फूटकर समाप्त हो जाता है। ठीक उसी प्रकार जैसे भोर (प्रभात) होते ही आकाश के तारे लुप्त हो जाते हैं, एक दिन यह देह भी इसी प्रकार विलीन हो जाएगी। अतः जीवन का सदुपयोग परोपकार और भक्ति में करो।

English: Human physical existence is fragile and fleeting like a momentary bubble upon water. Just as the morning star fades and vanishes into the dawn, so too will this mortal vessel disappear one day. Spend life in virtue and devotion.

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