दोहा छंद (13-11 मात्राएँ)
Classical Couplet (दोहा)

रहिमन भेष बनाय के, कीजै नाहिं बड़ाई।जैसे काच न कनक सम, चमकत है अधिकाई॥

Rahiman bhesh banaay ke, keejai naahin badai. Jaise kaach na kanak sam, chamkat hai adhikai.

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Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या)

हिंदी सरल व्याख्या (Hindi Vyakhya):

रहीम जी बाह्य आडंबर और दिखावे का खंडन करते हुए कहते हैं कि केवल साधु या महात्मा का भेष बनाकर अपनी झूठी बड़ाई या प्रशंसा नहीं करानी चाहिए। जिस प्रकार चमकता हुआ काँच कभी शुद्ध सोने (कनक) के समान मूल्यवान नहीं हो सकता, भले ही वह धूप में सोने से भी अधिक चमकता हुआ दिखाई दे; उसी प्रकार बाह्य वेशभूषा से कोई महान नहीं बनता, आंतरिक गुण ही सच्चे आभूषण हैं।

English Translation & Meaning:

Never seek unearned praise and status by donning the mere outward guise of holiness, warns Rahim. Just as glittering glass can never equal precious gold even if it sparkles brilliantly in sunlight, outer appearance can never substitute for authentic virtue.

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Literary Context & Source (साहित्यिक संदर्भ व स्रोत)

मूल ग्रंथ / संकलन: रहीम सतसई (सच्चाई बनाम आडंबर)
काव्य विधा: दोहा (मात्रिक छंद)

रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) का यह दोहा 16वीं-17वीं शताब्दी (मध्यकालीन नीति व शृंगार काव्य) की अमर साहित्यिक धरोहर है। यह दोहा मध्यकालीन भक्ति एवं नीति काव्य परंपरा का अत्यंत प्रामाणिक अंश है जो जीवन के व्यावहारिक सत्य, सदाचार और मानवीय चेतना को जागृत करता है।

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"रहिमन भेष बनाय के, कीजै नाहिं बड़ाई।" दोहे के रचयिता कौन हैं?▼

यह प्रसिद्ध एवं प्रामाणिक दोहा रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना) द्वारा रचित है। यह दोहा 'रहीम सतसई (सच्चाई बनाम आडंबर)' में संकलित है।

"रहिमन भेष बनाय के, कीजै नाहिं बड़ाई।" दोहे का सरल हिंदी भावार्थ (व्याख्या) क्या है?▼

रहीम जी बाह्य आडंबर और दिखावे का खंडन करते हुए कहते हैं कि केवल साधु या महात्मा का भेष बनाकर अपनी झूठी बड़ाई या प्रशंसा नहीं करानी चाहिए। जिस प्रकार चमकता हुआ काँच कभी शुद्ध सोने (कनक) के समान मूल्यवान नहीं हो सकता, भले ही वह धूप में सोने से भी अधिक चमकता हुआ दिखाई दे; उसी प्रकार बाह्य वेशभूषा से कोई महान नहीं बनता, आंतरिक गुण ही सच्चे आभूषण हैं।

What is the English meaning of the doha "रहिमन भेष बनाय के, कीजै नाहिं बड़ाई।"?▼

Never seek unearned praise and status by donning the mere outward guise of holiness, warns Rahim. Just as glittering glass can never equal precious gold even if it sparkles brilliantly in sunlight, outer appearance can never substitute for authentic virtue.

यह दोहा किस विषय और जीवन-मूल्य पर आधारित है?▼

यह दोहा मुख्य रूप से 'सत्य एवं धर्म' (Truth & Righteousness) विषय पर आधारित है, जो मानव जीवन में सदाचार, विवेक और आत्म-सुधार की प्रेरणा देता है।

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खैर, खून, खाँसी, खुसी, बैर, प्रीति, मदपान।

रहिमन दाबे ना दबें, जानत सकल जहान॥

Khair, khoon, khaansi, khusi, bair, preeti, madpaan. / Rahiman daabe na dabain, jaanat sakal jahaan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी मानव मनोविज्ञान का अकाट्य सत्य प्रकट करते हुए कहते हैं कि सात चीजें छिपाने से कभी नहीं छिपतीं: खैर (कुशल-क्षेम या कत्था), खून (हत्या या रक्तपात), खाँसी, खुशी (हार्दिक प्रसन्नता), बैर (शत्रुता), प्रीति (सच्चा प्रेम) और मदपान (शराब का नशा)। लाख प्रयास करने पर भी ये बातें संसार के सामने प्रकट होकर ही रहती हैं। अंतःकरण की सच्चाई छिप नहीं सकती।

English: Seven realities can never be concealed despite all efforts, declares Rahim: well-being, bloodshed, coughing, joy, enmity, genuine love, and intoxication. The entire world knows that these truths inevitably reveal themselves.

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रहिमन तहाँ न जाइए, जहाँ कपट को हेत।

हम तन ढारत ढेहुरी, वे मन ढारत रेत॥

Rahiman tahaan na jaaiye, jahan kapat ko het. / Ham tan dhaarat dhehuri, ve man dhaarat ret.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कपटपूर्ण और झूठे संबंधों से दूर रहने की चेतावनी देते हुए कहते हैं कि उस स्थान पर कभी नहीं जाना चाहिए जहाँ केवल कपट और छल का संबंध हो। जहाँ हम तो निष्कपट भाव से अपना तन-मन समर्पित करने जाते हैं, परंतु सामने वाले के मन में केवल छल की सूखी रेत भरी होती है जो कभी किसी को तृप्ति नहीं दे सकती। कपटी लोगों से दूर रहना ही हितकर है।

English: Never venture into associations where deceit and hypocrisy are the hidden foundation, cautions Rahim. You may approach with pure, wholesome devotion, while in their calculating minds lies only barren, shifting sand that can support nothing genuine.

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रहिमन धर्म न छोड़िए, संकट परे हजार।

धर्म सहाई होत है, अंत समय संसार॥

Rahiman dharam na chhodie, sankat pare hazaar. / Dharam sahaayi hot hai, ant samay sansaar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी धर्म और सत्यनिष्ठा पर अडिग रहने का उपदेश देते हुए कहते हैं कि चाहे जीवन में हजारों संकट और विपत्तियां आ जाएं, फिर भी मनुष्य को अपने धर्म, नैतिकता और सत्य के मार्ग को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। जब जीवन के अंतिम समय में सारा संसार, धन-दौलत और सगे-संबंधी साथ छोड़ देते हैं, तब केवल मनुष्य का धर्म और सत्कर्म ही उसका सच्चा सहायक बनता है।

English: Never abandon the path of righteousness, even if a thousand perils beset you, urges Rahim. When mortal existence concludes and the entire world falls away, your moral virtue and righteous deeds alone stand as your steadfast protector.

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रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय।

टूटे पे फिर ना जुरे, जुरे गाँठ परि जाय॥

Rahiman dhaaga prem ka, mat toro chatkaay. / Toote pe phir na jure, jure gaanth pari jaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि प्रेम और आपसी विश्वास का संबंध एक कोमल और नाजुक धागे के समान होता है। इसे क्रोध, अहंकार या नासमझी के झटके से कभी नहीं तोड़ना चाहिए। यदि यह प्रेम रूपी धागा एक बार टूट जाता है, तो फिर पहले जैसा नहीं जुड़ता; और यदि बहुत प्रयास करके उसे जोड़ भी लिया जाए, तो उसमें सदा के लिए एक अविश्वास और संकोच की गाँठ पड़ जाती है।

English: Rahim counsels never to snap the delicate thread of love in a sudden fit of anger or ego. Once severed, it cannot be rejoined as before; and even if re-tied, an indelible knot of distrust and distance remains forever in the relationship.

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