दोहा छंद (13-11 मात्राएँ)
Classical Couplet (दोहा)

तुलसी अपने राम को, रीझि भजो कै खीझि।उलटो सीधा ऊपजै, खेत पड़े ते बीजि॥

Tulsi apne ram ko, reejhi bhajo kai kheejhi. Ulto seedha oopjai, khet pade te beeji.

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Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या)

हिंदी सरल व्याख्या (Hindi Vyakhya):

तुलसीदास जी सहज भक्ति का मार्ग दिखाते हुए कहते हैं कि अपने प्रभु श्री राम का स्मरण चाहे प्रसन्न होकर (रीझकर) करो अथवा क्रोध व झुंझलाहट में (खीझकर) करो, वह कल्याणकारी ही होता है। जिस प्रकार खेत में बीज सीधा गिरे या उलटा, वह अंकुरित होकर फसल अवश्य देता है, वैसे ही राम नाम कभी निष्फल नहीं होता।

English Translation & Meaning:

Tulsidas beautifully illustrates effortless devotion: remember Lord Rama whether in delight or distress, joy or resentment. Just as a seed dropped in fertile soil sprouts into life regardless of whether it fell upright or upside down, remembrance of the Divine always bears auspicious fruit.

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Literary Context & Source (साहित्यिक संदर्भ व स्रोत)

मूल ग्रंथ / संकलन: दोहावली
काव्य विधा: दोहा (मात्रिक छंद)

गोस्वामी तुलसीदास का यह दोहा 16वीं शताब्दी (भक्तिकाल - सगुण रामाश्रयी शाखा) की अमर साहित्यिक धरोहर है। यह दोहा मध्यकालीन भक्ति एवं नीति काव्य परंपरा का अत्यंत प्रामाणिक अंश है जो जीवन के व्यावहारिक सत्य, सदाचार और मानवीय चेतना को जागृत करता है।

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"तुलसी अपने राम को, रीझि भजो कै खीझि।" दोहे के रचयिता कौन हैं?▼

यह प्रसिद्ध एवं प्रामाणिक दोहा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित है। यह दोहा 'दोहावली' में संकलित है।

"तुलसी अपने राम को, रीझि भजो कै खीझि।" दोहे का सरल हिंदी भावार्थ (व्याख्या) क्या है?▼

तुलसीदास जी सहज भक्ति का मार्ग दिखाते हुए कहते हैं कि अपने प्रभु श्री राम का स्मरण चाहे प्रसन्न होकर (रीझकर) करो अथवा क्रोध व झुंझलाहट में (खीझकर) करो, वह कल्याणकारी ही होता है। जिस प्रकार खेत में बीज सीधा गिरे या उलटा, वह अंकुरित होकर फसल अवश्य देता है, वैसे ही राम नाम कभी निष्फल नहीं होता।

What is the English meaning of the doha "तुलसी अपने राम को, रीझि भजो कै खीझि।"?▼

Tulsidas beautifully illustrates effortless devotion: remember Lord Rama whether in delight or distress, joy or resentment. Just as a seed dropped in fertile soil sprouts into life regardless of whether it fell upright or upside down, remembrance of the Divine always bears auspicious fruit.

यह दोहा किस विषय और जीवन-मूल्य पर आधारित है?▼

यह दोहा मुख्य रूप से 'भक्ति एवं आध्यात्म' (Devotion & Spirituality) विषय पर आधारित है, जो मानव जीवन में सदाचार, विवेक और आत्म-सुधार की प्रेरणा देता है।

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तुलसी भरोसो एक को, एक बल एक आस।

एक राम घनश्याम हित, चातक तुलसीदास॥

Tulsi bharoso ek ko, ek bal ek aas. / Ek ram ghanshyam hit, chaatak tulsidas.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी अपनी अनन्य भक्ति की घोषणा करते हुए कहते हैं कि मुझे केवल एक ही प्रभु का भरोसा है, उन्हीं का परम बल है और उन्हीं से एकमात्र आशा है। जिस प्रकार पपीहा केवल स्वाति नक्षत्र के मेघ की प्रतीक्षा करता है, उसी प्रकार तुलसीदास भी केवल मेघस्वरूप प्रभु राम के अनन्य चातक हैं।

English: Tulsidas expresses absolute, undivided devotion: "My entire trust rests in One, my sole strength is in One, and my single hope resides in One alone." Just as the legendary Chataka bird pines exclusively for the monsoon raincloud, Tulsidas surrenders wholeheartedly to the cloud-dark beauty of Lord Rama.

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काम क्रोध मद लोभ रत, गृहासक्त दुख रूप।

ते किम जानहिं रघुपतिहि, मूढ़ परे तम कूप॥

Kaam krodh mad lobh rat, grihasakt dukh roop. / Te kim jaanahin raghupatihi, moodh pare tam koop.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि जो मनुष्य निरंतर काम-वासना, क्रोध, अहंकार और लोभ में डूबे रहते हैं तथा सांसारिक आसक्ति के दुःखमय रूप में उलझे रहते हैं, वे अज्ञान के अंधे कुएँ में गिरे हुए मूर्ख उस सच्चिदानंद स्वरूप प्रभु रघुपति के अलौकिक तत्व को कभी नहीं जान सकते।

English: Those who remain endlessly entangled in sensual lust, wrath, arrogant vanity, greed, and blind domestic attachments dwell in the deep dark pit of ignorance. They can never perceive or comprehend the transcendent reality and supreme peace of the Divine.

काम क्रोध मद लोभ • आध्यात्मिक बोधपूरी व्याख्या व संदर्भ→
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राम नाम मनिदीप धरु, जीहँ देहरीं द्वार।

तुलसी भीतर बाहिरहुँ, जौं चाहसि उजियार॥

Ram naam manideep dharu, jeehan dehreen dwaar. / Tulsi bheetar baahirahun, jaun chaahasi ujiyaar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि हे मनुष्य! यदि तू अपने अंतःकरण और बाह्य संसार दोनों में आध्यात्मिक प्रकाश और आनंद चाहता है, तो अपनी जिह्वा रूपी देहरी के द्वार पर 'राम' नाम रूपी मणि-दीपक को प्रज्वलित कर ले। जैसे देहरी पर रखा दीपक घर के अंदर और बाहर दोनों ओर प्रकाश फैलाता है, वैसे ही राम नाम भीतर-बाहर प्रकाश कर देता है।

English: Tulsidas counsels: if you yearn for the illuminating glow of truth and spiritual peace both within your inner heart and across your outer daily existence, place the jewel-lamp of Rama’s divine name upon the doorway threshold of your tongue.

राम नाम मनिदीप धरु • ईश्वर नाम जपपूरी व्याख्या व संदर्भ→
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भायँ कुभायँ अनख आलसहूँ। नाम जपत मंगल दिसि दसहूँ॥

सुमिरि सो नाम राम गुन गाथा। करउं नाइ रघुनाथहि माथा॥

Bhaayan kubhaayan anakh aalsahun. Naam japat mangal disi dasahun. / Sumiri so naam ram gun gaatha. Karaun naai raghunathahi maatha.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

तुलसीदास जी कहते हैं कि चाहे प्रेम-श्रद्धा से (भायँ), विरोध-शत्रुता के भाव से (कुभायँ), क्रोध-खीझ से (अनख) अथवा आलस्य में ही क्यों न ईश्वर के पावन नाम का उच्चारण किया जाए, वह सदैव दसों दिशाओं में परम कल्याण और आनंद ही प्रदान करता है। नाम स्मरण कभी व्यर्थ नहीं जाता।

English: Tulsidas affirms the intrinsic power of Divine Remembrance: whether recited out of heartfelt reverence, casual indifference, defiance, or even sheer lethargy, the chanting of the Holy Name unfailingly brings auspicious blessings in all ten directions of existence.

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