Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में दीर्घ "आ" तथा द्वितीय पद के प्रारंभ में दीर्घ "आ" के मेल से दीर्घ "आ" स्वर बन जाता है।
"हमारे नगर का केंद्रीय विद्यालय अनुशासन और श्रेष्ठ परीक्षा परिणामों के लिए विख्यात है।"
Comprehensive guide to 18 standard Hindi sound-combination rules, formulas, split breakdowns, and authentic textbook examples.
दो स्वरों के परस्पर मेल से होने वाला ध्वनि परिवर्तन (दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण, अयादि)
दो सजातीय (समान) ह्रस्व या दीर्घ स्वर जब आपस में मिलते हैं, तो वे मिलकर उसी स्वर के दीर्घ रूप (आ, ई, ऊ, ऋ) में बदल जाते हैं। इसे दीर्घ संधि कहते हैं।
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में दीर्घ "आ" तथा द्वितीय पद के प्रारंभ में दीर्घ "आ" के मेल से दीर्घ "आ" स्वर बन जाता है।
"हमारे नगर का केंद्रीय विद्यालय अनुशासन और श्रेष्ठ परीक्षा परिणामों के लिए विख्यात है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में ह्रस्व "अ" और द्वितीय पद के आदि में दीर्घ "आ" के मिलने से दीर्घ "आ" स्वर बन जाता है।
"प्रातःकाल देवालय में घंटा-ध्वनि और शंखनाद से वातावरण अत्यंत पावन हो जाता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में ह्रस्व "अ" तथा द्वितीय पद के आदि में ह्रस्व "अ" के परस्पर मिलने से दीर्घ "आ" बन जाता है।
"राजा ने अपनी प्रजा के कल्याण हेतु धर्मार्थ चिकित्सालय और अन्नक्षेत्र की स्थापना की।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "अ" के बाद पुनः ह्रस्व "अ" आने पर दोनों के स्थान पर दीर्घ "आ" की मात्रा हो जाती है।
"संत कबीर के अनुसार जो व्यक्ति परमार्थ के कार्यों में जीवन बिताता है, उसका जीवन सार्थक है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "अ" के उपरांत दीर्घ "आ" आने से दोनों मिलकर दीर्घ "आ" रूप धारण कर लेते हैं।
"हमारे नगर का पुस्तकालय दुर्लभ ग्रंथों और ज्ञानवर्धक पत्रिकाओं का समृद्ध केंद्र है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में स्थित दीर्घ "आ" और द्वितीय पद के आदि में स्थित ह्रस्व "अ" मिलकर दीर्घ "आ" बन जाते हैं।
"प्रत्येक विद्यार्थी को अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्र और समय का पाबंद होना चाहिए।"
यदि "अ" या "आ" के बाद ह्रस्व या दीर्घ "इ/ई", "उ/ऊ" या "ऋ" आए, तो दोनों मिलकर क्रमशः "ए", "ओ" और "अर्" में परिवर्तित हो जाते हैं। इसे गुण संधि कहते हैं।
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में ह्रस्व "अ" और द्वितीय पद के प्रारंभ में ह्रस्व "इ" के मिलने से गुण रूप "ए" बन जाता है।
"स्वामी विवेकानन्द का बाल्यकाल का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "अ" के बाद ह्रस्व "इ" आने पर दोनों के स्थान पर एकल मात्रा "ए" ( े ) हो जाती है।
"पौराणिक कथाओं में देवराज इन्द्र को देवताओं का अधिपति होने से सुरेन्द्र कहा गया है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में दीर्घ "आ" और द्वितीय पद के आदि में ह्रस्व "इ" मिलकर "ए" बन जाते हैं।
"महेन्द्र पर्वत का उल्लेख प्राचीन भारतीय इतिहास और रामायण काल के भूगोल में मिलता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में स्थित "अ" और द्वितीय पद के प्रारंभ में स्थित दीर्घ "ई" मिलकर "ए" हो जाते हैं।
"सुरेश ने राज्य स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में प्रथम पुरस्कार जीतकर विद्यालय का नाम रोशन किया।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): दीर्घ "आ" के उपरांत दीर्घ "ई" आने पर दोनों के स्थान पर गुण स्वर "ए" हो जाता है।
"भगवान शिव को देवों के महान अधिपति होने के कारण महेश के नाम से पूजा जाता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): दीर्घ "आ" (राका = पूर्णिमा) के बाद दीर्घ "ई" आने से दोनों मिलकर "ए" बनते हैं (राकेश = चंद्रमा)।
"शरद पूर्णिमा की स्वच्छ रात्रि में आकाश में राकेश अपनी शीतल किरणों से अमृत बरसाता है।"
यदि "अ" या "आ" के बाद "ए" या "ऐ" आए तो दोनों मिलकर "ऐ" ( ै ) बन जाते हैं; तथा यदि "ओ" या "औ" आए तो दोनों मिलकर "औ" ( ौ ) बन जाते हैं। इसे वृद्धि संधि कहते हैं।
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "आ" और द्वितीय पद के आदि में "ए" के मिलने से दोनों के स्थान पर वृद्धि रूप "ऐ" हो जाता है।
"सत्य और निष्ठा के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति को समाज में सदैव सम्मान मिलता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): दीर्घ "आ" के उपरांत "ए" आने से दोनों वर्ण मिलकर वृद्धि स्वर "ऐ" ( ै ) में परिवर्तित हो जाते हैं।
"गुरु ने जैसा उपदेश दिया, शिष्य ने तथैव जीवन में निष्ठापूर्वक आचरण किया।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में ह्रस्व "अ" और द्वितीय पद के आदि में "ए" मिलकर वृद्धि रूप "ऐ" बन जाते हैं।
"अध्यापक ने परीक्षा कक्ष में एकैक छात्र के पहचान-पत्र की सूक्ष्मता से जाँच की।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "अ" के बाद "ऐ" आने पर दोनों के स्थान पर वृद्धि रूप "ऐ" हो जाता है।
"समिति के सभी सदस्यों में नए प्रस्ताव पर पूर्ण मतैक्य स्थापित हो गया।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "अ" और द्वितीय पद के प्रारंभ में "ए" मिलकर वृद्धि रूप "ऐ" बन जाते हैं।
"सच्चा साधक सांसारिक प्रतिष्ठा व लोकैषणा से परे रहकर आत्म-कल्याण में लीन रहता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "अ" और द्वितीय पद के आदि में "औ" के मिलने से दोनों मिलकर वृद्धि रूप "औ" बन जाते हैं।
"हिमालय की दुर्लभ वनौषधि अनेक असाध्य रोगों के उपचार में अत्यंत गुणकारी सिद्ध होती है।"
यदि ह्रस्व या दीर्घ "इ/ई", "उ/ऊ" या "ऋ" के बाद कोई भिन्न (असमान) स्वर आए, तो इ/ई का "य्", उ/ऊ का "व्", और ऋ का "र्" हो जाता है। इसे यण संधि कहते हैं।
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में ह्रस्व "इ" के बाद असमान स्वर "आ" आने से "इ" का "य्" होकर पूर्व व्यंजन "त्" आधा रह जाता है।
"दुकानदार ने फल, सब्जियाँ, दालें इत्यादि आवश्यक घरेलू सामग्री समय पर पहुँचा दीं।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "इ" के बाद असमान स्वर "अ" आने पर "इ" का "य्" हो जाता है और पूर्व व्यंजन आधा होकर "अत्यधिक" बनता है।
"ग्रीष्मकाल में अत्यधिक परिश्रम करने से शरीर में जल की कमी हो सकती है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "इ" के उपरांत भिन्न स्वर "अ" आने से "इ" का "य्" हो जाता है (द् + य् = द्य)।
"यद्यपि मार्ग अत्यंत दुर्गम था, तथापि पर्वतारोहियों ने शिखर पर विजय प्राप्त कर ली।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "इ" के बाद भिन्न स्वर "ए" आने पर "इ" का "य्" होकर "ये" बनता है और पूर्व व्यंजन "त्" आधा रह जाता है।
"सच्चे लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक के मत का समान महत्व और सम्मान होता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "इ" के बाद भिन्न स्वर "आ" आने पर "इ" का "य्" हो जाता है और पूर्व वर्ण "र्" रेफ बनकर ऊपर चला जाता है।
"स्वच्छ पर्यावरण ही भावी पीढ़ियों के स्वस्थ और खुशहाल जीवन की सर्वोत्तम गारंटी है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "इ" के बाद भिन्न स्वर "उ" आने पर "इ" का "य्" होकर "यु" बन जाता है।
"सज्जन व्यक्ति बिना किसी प्रत्युपकार की आशा किए निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करते हैं।"
यदि "ए", "ऐ", "ओ", "औ" के बाद कोई भिन्न स्वर आए तो "ए" का "अय्", "ऐ" का "आय्", "ओ" का "अव्" और "औ" का "आव्" हो जाता है। इसे अयादि संधि कहते हैं।
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "ए" के बाद भिन्न स्वर "अ" आने पर "ए" का "अय्" हो जाता है, जिससे न् + अय् + अन मिलकर नयन बनता है।
"करुणा से भरे हुए नयन बिना बोले ही अंतर्मन की सारी व्यथा बयां कर देते हैं।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "ए" के उपरांत भिन्न स्वर "अ" आने पर "ए" का विकार "अय्" होता है (श् + अय् + अन = शयन)।
"दिनभर के मानसिक तनाव और शारीरिक थकान के उपरांत शांत शयन कक्ष में गहरी नींद आई।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "ऐ" के बाद भिन्न स्वर "अ" आने पर "ऐ" का "आय्" हो जाता है (ग् + आय् + अक = गायक)।
"शास्त्रीय संगीत के प्रतिभाशाली गायक ने अपनी सुरीली तान से सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "ऐ" के बाद भिन्न स्वर "अ" आने पर "ऐ" का "आय्" हो जाता है (न् + आय् + अक = नायक)।
"नाटक का नायक अपने अदम्य साहस और सत्यनिष्ठा से दर्शकों के दिलों पर छा गया।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "ऐ" के उपरांत भिन्न स्वर "इ" आने पर "ऐ" का "आय्" होकर "इ" की मात्रा से "आयि" बनता है (न् + आयि + का = नायिका)।
"कालिदास के सुप्रसिद्ध नाटक अभिज्ञानशाकुंतलम् की नायिका शकुंतला का चरित्र अत्यंत गरिमामयी है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "ओ" के बाद भिन्न स्वर "अ" आने पर "ओ" का "अव्" हो जाता है, जिससे प् + अव् + अन मिलकर पवन बनता है।
"वसंत ऋतु में बहने वाली शीतल-मंद पवन मन और तन दोनों को आह्लादित कर देती है।"
व्यंजन के साथ स्वर अथवा व्यंजन के मेल से उत्पन्न विकार (7 मुख्य प्रामाणिक नियम)
यदि किसी वर्ग के पहले वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) के बाद किसी वर्ग का तीसरा या चौथा वर्ण, अथवा य, र, ल, व, ह या कोई स्वर आए, तो पहला वर्ण अपने ही वर्ग के तीसरे वर्ण (ग्, ज्, ड्, द्, ब्) में परिवर्तित हो जाता है।
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में स्थित क-वर्ग के प्रथम वर्ण "क्" के बाद स्वर "अ" आने पर "क्" अपने ही वर्ग के तीसरे वर्ण "ग्" में बदल जाता है।
"जैन धर्म में वस्त्र त्याग कर दिशाओं को ही वस्त्र मानने वाले मुनियों को दिगम्बर कहा जाता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "क्" के बाद दीर्घ स्वर "ई" आने पर क-वर्ग का प्रथम वर्ण "क्" अपने ही वर्ग के तीसरे वर्ण "ग्" में परिवर्तित हो जाता है।
"वाणी और विद्या के अधिष्ठाता होने के कारण महर्षि को वागीश की उपाधि प्रदान की गई।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "क्" के बाद किसी भी वर्ग का तीसरा वर्ण "ग्" आने पर "क्" अपने ही वर्ग के तीसरे वर्ण "ग्" में बदल जाता है।
"साहित्य और राजनीति के दिग्गज विद्वानों ने राष्ट्र निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): च-वर्ग के प्रथम वर्ण "च्" के बाद स्वर "अ" आने पर "च्" अपने ही वर्ग के तीसरे वर्ण "ज्" में परिवर्तित हो जाता है।
"संस्कृत व्याकरण में जिन शब्दों के अंत में स्वर होता है, उन्हें अजंत शब्द कहा जाता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ट-वर्ग के प्रथम वर्ण "ट्" के बाद दीर्घ स्वर "आ" आने पर "ट्" अपने ही वर्ग के तीसरे वर्ण "ड्" में बदल जाता है।
"छह मुख होने के कारण देवसेनापति कार्तिकेय को षडानन भी कहा जाता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): त-वर्ग के प्रथम वर्ण "त्" के बाद स्वर "ई" आने पर "त्" अपने ही वर्ग के तीसरे वर्ण "द्" में बदल जाता है।
"भक्तों की अटूट मान्यता है कि जगदीश संपूर्ण ब्रह्मांड का पालन-पोषण दयाभाव से करते हैं।"
यदि किसी वर्ग के पहले वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) के बाद कोई अनुनासिक वर्ण (विशेष रूप से न् या म्) आए, तो पहला वर्ण अपने ही वर्ग के पाँचवें (अनुनासिक) वर्ण (ङ्, ञ्, ण्, न्, म्) में बदल जाता है।
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में स्थित "क्" के बाद अनुनासिक वर्ण "म्" आने पर "क्" अपने ही वर्ग के पाँचवें वर्ण (अनुनासिक) "ङ्" में बदल जाता है।
"प्राचीन भारतीय संस्कृत वाङ्मय ज्ञान-विज्ञान, दर्शन और मानवीय संवेदनाओं का अक्षय भंडार है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंतिम वर्ण "त्" के बाद अनुनासिक वर्ण "न्" आने पर "त्" अपने वर्ग के पाँचवें वर्ण "न्" में बदल जाता है।
"निरंतर कठोर अनुशासन और परिश्रम करने वाले युवा जीवन के हर क्षेत्र में उन्नति प्राप्त करते हैं।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "त्" के बाद अनुनासिक व्यंजन "न्" आने पर "त्" अपने ही वर्ग के पाँचवें वर्ण "न्" में परिवर्तित होकर द्वित्व (न्न) बनाता है।
"पुरी स्थित जगन्नाथ मन्दिर में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली रथयात्रा विश्व प्रसिद्ध है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ट-वर्ग के प्रथम वर्ण "ट्" के बाद अनुनासिक वर्ण "म्" आने पर "ट्" अपने ही वर्ग के पाँचवें वर्ण "ण्" में बदल जाता है।
"गुरुकुल में छह महीनों (षण्मास) की सघन साधना के उपरांत शिष्यों की परीक्षा ली जाती थी।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "त्" के बाद अनुनासिक वर्ण "म्" आने पर "त्" त-वर्ग के पाँचवें अनुनासिक वर्ण "न्" में बदल जाता है।
"सच्चे गुरु सदैव अपने शिष्यों को कुमार्ग त्याग कर सन्मार्ग पर चलने का उपदेश देते हैं।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प-वर्ग के प्रथम वर्ण "प्" के बाद अनुनासिक वर्ण "म्" आने पर "प्" अपने वर्ग के पाँचवें वर्ण "म्" में बदल जाता है।
"सृष्टि के आरंभ में सम्पूर्ण भूमंडल जलमय अर्थात अम्मय अवस्था में ही विद्यमान था।"
त् के बाद यदि च/छ आए तो "च्च/च्छ", ज/झ आए तो "ज्ज", ट/ठ आए तो "ट्ट", ड/ढ आए तो "ड्ड", ल आए तो "ल्ल", श आए तो "च्छ" (त् का च् और श का छ्), तथा ह आए तो "द्ध" (त् का द् और ह का ध्) बन जाता है।
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में स्थित "त्" के बाद "च" आने पर "त्" भी "च्" में परिवर्तित हो जाता है।
"भाषा शिक्षण में वर्णों का शुद्ध और स्पष्ट उच्चारण अत्यंत आवश्यक माना गया है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "त्" के बाद "ज" आने पर "त्" भी "ज्" में बदल जाता है।
"सज्जन पुरुष विपत्ति के समय भी अपने धर्म, सत्य और मर्यादा का परित्याग नहीं करते हैं।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "त्" के बाद "ज्" आने पर "त्" भी "ज्" में बदल जाता है (ध्यान रहे इसमें दोनों "ज्" आधे होते हैं)।
"परिश्रमी और मेधावी विद्यार्थियों का भविष्य सदैव उज्ज्वल और प्रेरणादायक होता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "त्" के बाद "च" आने पर "त्" का विकार होकर आधा "च्" बन जाता है।
"सच्चरित्र व्यक्ति समाज में सभी के आदर और सम्मान का पात्र होता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "त्" के बाद "ल" आने पर "त्" भी आधे "ल्" में परिवर्तित हो जाता है।
"दीपावली का पावन पर्व पूरे देश में बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "त्" के बाद "ल" आने पर "त्" ल-वर्ण में विलीन होकर "ल्ल" बन जाता है।
"इतिहासकार ने अपनी शोध पुस्तक में प्राचीन नगरों की वास्तुकला का विस्तार से उल्लेख किया है।"
यदि किसी ह्रस्व स्वर (अ, इ, उ, ऋ) या "आ" के बाद "छ" वर्ण आए, तो संधि होने पर "छ" से पहले आधा "च्" जुड़ जाता है (इसे व्याकरण में च् का आगम या तुक् आगम कहते हैं)।
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व स्वर "अ" के बाद "छ" वर्ण आने पर दोनों के बीच आधे "च्" का स्वतः आगम हो जाता है।
"पिंजरे से मुक्त होते ही पक्षी स्वच्छंद होकर नीले आकाश में अपनी उड़ान भरने लगा।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व स्वर "इ" के बाद "छ" आने पर दोनों के मध्य आधे "च्" का आगम हो जाता है।
"लेखक ने अपनी नई पुस्तक के तृतीय परिच्छेद में समाज के ज्वलंत प्रश्नों की विवेचना की है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व स्वर "उ" के बाद "छ" आने पर बीच में "च्" वर्ण का आगम हो जाता है।
"भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व स्वर "इ" के बाद "छ" आने पर नियमतः "च्" का आगम होता है।
"संधि के नियमों को भली-भांति समझने के लिए शब्दों का सटीक विच्छेद करना आवश्यक है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): दीर्घ स्वर "आ" के उपरांत "छ" आने पर भी संधि होने पर मध्य में आधे "च्" का आगम होता है।
"सर्दियों के मौसम में घने कोहरे का आच्छादन समस्त घाटी को ढक लेता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "वृक्ष" के अंतिम स्वर "अ" और "छाया" के प्रथम वर्ण "छ" के मध्य आधे "च्" का आगम हो जाता है।
"तीखी दुपहरी में थके हुए पथिक ने विशाल बरगद के वृक्ष की शीतल वृक्षच्छाया में विश्राम किया।"
यदि "म्" के बाद कोई स्पर्श व्यंजन (क् से भ् तक) आए तो म् अनुस्वार (ं) या बाद वाले वर्ग के पंचम वर्ण में बदलता है। यदि म् के बाद अंतःस्थ (य, र, ल, व) या ऊष्म (श, ष, स, ह) आए तो म् सदैव अनुस्वार होता है। यदि म् के बाद म् आए तो द्वित्व "म्म" बनता है।
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंतिम वर्ण "म्" के बाद ऊष्म व्यंजन "स" आने पर "म्" सदैव अनुस्वार (ं) में परिवर्तित हो जाता है।
"महापुरुषों का विचार है कि यह संसार कर्मक्षेत्र है जहाँ प्रत्येक प्राणी को अपने कर्मों का फल मिलता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "म्" के बाद क-वर्ग का वर्ण "क" आने पर "म्" अनुस्वार (ं) अथवा उस वर्ग के पंचमाक्षर "ङ्" में बदल जाता है।
"दृढ़ संकल्प और निरंतर अभ्यास से कोई भी कठिन परीक्षा सरलता से उत्तीर्ण की जा सकती है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "म्" के बाद च-वर्ग का वर्ण "च" आने पर "म्" अनुस्वार (ं) अथवा पंचमाक्षर "ञ" में बदल जाता है।
"भविष्य की अनिश्चितताओं से सुरक्षित रहने के लिए धन और संसाधनों का सदुपयोगी संचय आवश्यक है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "म्" के बाद त-वर्ग का वर्ण "त" आने पर "म्" अनुस्वार (ं) अथवा पंचमाक्षर "न्" में बदल जाता है।
"नीतिकारों का कथन है कि संतोष ही मनुष्य का सबसे बड़ा और अमूल्य धन है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "म्" के बाद अंतःस्थ व्यंजन "य" आने पर "म्" अनिवार्य रूप से अनुस्वार (ं) में बदलता है।
"वर्षों बाद तीर्थयात्रा के दौरान पुराने सहपाठियों का आपस में मिलना एक सुखद संयोग था।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "म्" के बाद अंतःस्थ व्यंजन "व" आने पर "म्" का अनुस्वार (ं) हो जाता है।
"दो राष्ट्रों के मध्य शांति बनाए रखने के लिए सतत कूटनीतिक संवाद अत्यंत आवश्यक है।"
यदि किसी शब्द में ऋ, र् या ष् के बाद "न्" व्यंजन आए (चाहे बीच में स्वर, क-वर्ग, प-वर्ग, अनुस्वार या य, व, ह का व्यवधान क्यों न हो), तो "न्" का "ण्" (मूर्धन्य ण) हो जाता है।
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद में "र्" वर्ण के प्रभाव से द्वितीय पद का दन्त्य व्यंजन "न्" मूर्धन्य वर्ण "ण्" में बदल जाता है।
"सच्ची लगन और ईमानदारी से किए गए श्रम का परिणाम सदैव सुखद और फलदायी होता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): उपसर्ग "प्र" में स्थित "र्" के प्रभाव से उत्तर पद का अंतिम दन्त्य व्यंजन "न्" मूर्धन्य "ण्" में बदल जाता है।
"न्यायालय में न्याय की स्थापना के लिए ठोस साक्ष्य और प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद में स्थित "र्" के प्रभाव से द्वितीय पद "अयन" का दन्त्य "न्" मूर्धन्य "ण्" में बदल जाता है।
"महर्षि वाल्मीकि द्वारा विरचित रामायण भारतीय संस्कृति और मर्यादा का अमर महाकाव्य है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): धातु के अंत में मूर्धन्य वर्ण "ष्" होने पर प्रत्यय का दन्त्य "न्" मूर्धन्य "ण्" में बदल जाता है।
"विद्या और शील ही मनुष्य के सबसे वास्तविक और मूल्यवान आभूषण हैं।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व स्वर "ऋ" के बाद दन्त्य वर्ण "न" आने पर "न" का मूर्धन्य "ण्" हो जाता है।
"भारतीय परंपरा में माता-पिता और गुरु के ऋण से कभी भी उऋण नहीं हुआ जा सकता।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "शूर्प" में स्थित "र्" (रेफ) के प्रभाव से "नखा" का दन्त्य "न्" मूर्धन्य "ण्" में परिवर्तित हो जाता है।
"सूप जैसी चौड़ी नाखूनों वाली होने के कारण रावण की बहन का नाम शूर्पणखा पड़ा था।"
यदि दन्त्य "स्" से पूर्व "अ" या "आ" से भिन्न कोई अन्य स्वर (जैसे इ, उ आदि) आए, तो "स्" मूर्धन्य "ष्" में बदल जाता है। इसे षत्व विधान कहते हैं।
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): दन्त्य वर्ण "स्" से पूर्व "अ/आ" से भिन्न स्वर "इ" होने के कारण "स्" मूर्धन्य वर्ण "ष्" में परिवर्तित हो जाता है।
"प्राचीन काल में राजाओं के राजतिलक के समय विधि-विधान से पावन नदियों के जल से अभिषेक किया जाता था।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): उपसर्ग "वि" के ह्रस्व "इ" के बाद "स" आने पर दन्त्य "स्" मूर्धन्य "ष्" में रूपांतरित हो जाता है।
"धैर्यवान व्यक्ति जीवन की विषम से विषम परिस्थितियों में भी अपना मानसिक संतुलन नहीं खोता।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): उपसर्ग "नि" के अंत में स्थित "इ" स्वर के कारण उत्तर पद का "स्" मूर्धन्य "ष्" में बदल जाता है।
"सुरक्षा कारणों से आम नागरिकों का संवेदनशील सैन्य क्षेत्र में प्रवेश पूर्णतः निषिद्ध है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "वि" के "इ" स्वर के पश्चात आने वाला दन्त्य "स्" मूर्धन्य "ष्" में बदल जाता है।
"महाभारत के आरंभ में कुरुक्षेत्र की रणभूमि में अर्जुन के मन में गहरा विषाद उत्पन्न हो गया था।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): उपसर्ग "सु" के ह्रस्व "उ" के प्रभाव से उत्तर पद का दन्त्य "स्" मूर्धन्य "ष्" में बदल जाता है।
"वसंत ऋतु के आगमन पर प्रकृति की अनुपम और मनमोहक सुषमा देखते ही बनती है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "अनु" उपसर्ग के "उ" स्वर के प्रभाव से दन्त्य वर्ण "स्" मूर्धन्य "ष्" में परिवर्तित हो जाता है।
"मुख्य व्यवसाय के साथ-साथ कई अनुषंगी उद्योगों का भी तीव्र गति से विकास हुआ है।"
विसर्ग (ः) के साथ स्वर अथवा व्यंजन के मेल से होने वाला परिवर्तन (6 मानक नियम)
यदि विसर्ग (ः) से पहले "अ" स्वर हो और बाद में "अ" अथवा किसी वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ वर्ण, या य, र, ल, व, ह आए, तो विसर्ग का "ओ" ( ो ) हो जाता है।
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "अ" स्वर होने तथा विसर्ग के बाद अंतःस्थ व्यंजन "र" आने पर विसर्ग "ओ" ( ो ) की मात्रा में बदल जाता है।
"ईश्वर के आशीर्वाद और माता-पिता के सहयोग से विद्यार्थी का उच्च शिक्षा प्राप्त करने का मनोरथ पूर्ण हुआ।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "अ" स्वर होने तथा विसर्ग के उपरांत अंतःस्थ "व" आने पर विसर्ग का विकार होकर "ओ" बन जाता है।
"प्रातःकाल शांत सरोवर के स्वच्छ जल में खिलते हुए श्वेत और रक्ताभ कमल मन मोह लेते हैं।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "अ" होने तथा बाद में प-वर्ग का तीसरा वर्ण "ब" आने पर विसर्ग "ओ" में बदल जाता है।
"प्राचीन काल में महर्षि विश्वामित्र ने अपने प्रचंड तपोबल से एक नवीन सृष्टि की रचना कर दी थी।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "अ" होने तथा बाद में त-वर्ग का तीसरा वर्ण "द" आने पर विसर्ग का विकार होकर "ओ" बनता है।
"माता यशोदा का भगवान श्रीकृष्ण के प्रति वात्सल्य प्रेम साहित्य जगत में अद्वितीय माना गया है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "अ" होने तथा बाद में अंतःस्थ "व" आने पर विसर्ग "ओ" में परिणत हो जाता है।
"सभा में उपस्थित सभी नवयुवकों ने वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी का उठकर सादर अभिनंदन किया।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "अ" तथा बाद में क-वर्ग का तीसरा वर्ण "ग" आने पर विसर्ग "ओ" में बदल जाता है।
"आलस्य और कुसंगति में पड़ने से प्रतिभाशाली व्यक्ति की भी अधोगति सुनिश्चित हो जाती है।"
यदि विसर्ग से पहले "अ" और "आ" को छोड़कर कोई अन्य स्वर (जैसे इ, उ) हो और बाद में कोई स्वर या किसी वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ वर्ण, अथवा य, र, ल, व, ह आए, तो विसर्ग "र्" (रेफ) में बदल जाता है।
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "अ/आ" से भिन्न स्वर "इ" होने तथा बाद में सघोष व्यंजन "ध" आने पर विसर्ग "र्" (रेफ) में बदल जाता है।
"सच्चा धर्म वही है जो निर्धन और असहाय व्यक्तियों की सहायता के लिए प्रेरित करता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "उ" स्वर होने तथा बाद में प-वर्ग का तीसरा वर्ण "ब" आने पर विसर्ग "र्" (रेफ) बन जाता है।
"किसी भी सबल व्यक्ति को अपने बाहुबल का दुरुपयोग दुर्बल लोगों को सताने के लिए नहीं करना चाहिए।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "इ" तथा बाद में स्वर "आ" आने पर विसर्ग "र्" में बदलता है और "आ" से मिलकर "रा" बनता है।
"असफलता से घबराकर कभी भी मन में निराशा की भावना को स्थान नहीं देना चाहिए।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "उ" स्वर होने तथा बाद में अंतःस्थ "व" आने पर विसर्ग "र्" (रेफ) में परिवर्तित हो जाता है।
"आयुर्वेद भारत की प्राचीनतम प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है जो समग्र स्वास्थ्य का पोषण करती है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "इ" और बाद में सघोष वर्ण "ज्" आने पर विसर्ग "र्" (रेफ) बन जाता है।
"यात्री घने वन के बीच स्थित एक शांत और निर्जन मार्ग से होकर अपने गंतव्य की ओर आगे बढ़ा।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "उ" होने तथा बाद में स्वर "आ" आने पर विसर्ग "र्" बनकर "रा" में परिवर्तित होता है।
"बिना कठिन श्रम किए केवल भाग्य के भरोसे सर्वोच्च सफलता की दुराशा करना व्यर्थ है।"
यदि विसर्ग के बाद "च", "छ" या "श" आए, तो विसर्ग का तालव्य "श्" (आधा श) हो जाता है।
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद तालव्य व्यंजन "च" आने पर विसर्ग तालव्य वर्ण आधे "श्" में बदल जाता है।
"हिमालय अपनी विशाल और गगनचुंबी चोटियों के साथ सदियों से निश्चल भाव से प्रहरी बनकर खड़ा है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के उपरांत "च" वर्ण आने से विसर्ग का विकार होकर तालव्य आधा "श्" बन जाता है।
"वार्षिक परीक्षा की संपूर्ण तैयारी समय पर पूर्ण कर लेने के बाद विद्यार्थी निश्चिंत हो गया।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद तालव्य महाप्राण व्यंजन "छ" आने पर विसर्ग आधे "श्" में रूपांतरित हो जाता है।
"ग्रामीण जीवन की सरलता और वहाँ के लोगों का निश्छल व्यवहार मन को गहराई से छू लेता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद तालव्य वर्ण "च" आने पर विसर्ग तालव्य "श्" में बदल जाता है।
"महाराजा हरिश्चंद्र ने सत्य और धर्म की रक्षा के लिए अपने समस्त राजपाट और सुख का त्याग कर दिया।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद तालव्य "श" आने पर विसर्ग भी तालव्य "श्" में बदल जाता है (अथवा विसर्ग सुरक्षित भी रह सकता है: दुःशासन)।
"महाभारत के प्रसंग में द्युतसभा के भीतर दुश्शासन का आचरण अधर्म और घोर अन्याय की पराकाष्ठा था।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद तालव्य "च" आने पर विसर्ग आधे "श्" में परिवर्तित हो जाता है।
"प्राचीन कथाओं के आरंभ में प्रायः "कश्चित् राजा आसीत्" (कोई एक राजा था) का प्रयोग मिलता है।"
यदि विसर्ग से पहले "इ" या "उ" स्वर हो और बाद में क, ख, ट, ठ, प, फ में से कोई वर्ण आए, तो विसर्ग का मूर्धन्य "ष्" (आधा ष) हो जाता है।
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "इ" स्वर होने तथा बाद में "क" वर्ण आने पर विसर्ग मूर्धन्य वर्ण आधे "ष्" में बदल जाता है।
"बच्चों का निष्कपट और निश्छल स्वभाव प्रत्येक व्यक्ति के मन में आनंद का संचार कर देता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "उ" स्वर होने तथा बाद में "ट" वर्ण आने से विसर्ग मूर्धन्य "ष्" बन जाता है।
"रणभूमि में श्रीराम के धनुष की भयानक धनुष्टंकार सुनते ही राक्षसी सेना में भगदड़ मच गई।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "उ" स्वर होने तथा बाद में "क" आने पर विसर्ग मूर्धन्य "ष्" में बदल जाता है।
"मनुष्य को सदैव बुरे कर्मों से बचना चाहिए क्योंकि किसी भी दुष्कर्म का परिणाम कभी सुखद नहीं होता।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "इ" स्वर होने तथा बाद में "फ" आने पर विसर्ग मूर्धन्य "ष्" में बदल जाता है।
"बिना सही दिशा और सुनियोजित रणनीति के किया गया अंधाधुंध प्रयास अंततः निष्फल ही सिद्ध होता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "इ" होने तथा बाद में "प" वर्ण आने पर विसर्ग मूर्धन्य वर्ण आधे "ष्" में बदल जाता है।
"शिशु का हृदय सर्वथा निष्पाप और राग-द्वेष की दूषित भावनाओं से मुक्त होता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "उ" स्वर होने तथा बाद में "प" आने पर विसर्ग मूर्धन्य "ष्" में परिणत हो जाता है।
"चार पैरों वाले चौपाया पशुओं को संस्कृत व्याकरण और साहित्य में चतुष्पाद कहा जाता है।"
यदि विसर्ग के बाद "त", "थ" या "स" आए, तो विसर्ग का दन्त्य "स्" (आधा स) हो जाता है।
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद दन्त्य व्यंजन "त" आने पर विसर्ग दन्त्य वर्ण आधे "स्" में बदल जाता है।
"भारतीय शिष्टाचार में हाथ जोड़कर नमस्ते करना आदर और विनम्रता का सर्वोच्च प्रतीक माना गया है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद दन्त्य वर्ण "त" आने पर विसर्ग का आधा दन्त्य "स्" बन जाता है।
"अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प के बल पर पर्वतारोही ने दुस्तर हिमाच्छादित पर्वत को पार कर लिया।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद "त" आने पर विसर्ग दन्त्य "स्" में परिवर्तित हो जाता है।
"दीर्घकालिक बीमारी के कारण रोगी का चेहरा सर्वथा निस्तेज और दुर्बल दिखाई दे रहा था।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद दन्त्य "स" आने पर विसर्ग भी आधे "स्" में बदल जाता है (अथवा विसर्ग ज्यों का त्यों रह सकता है: निःसंकोच)।
"यदि मन में कोई जिज्ञासा या प्रश्न हो, तो अध्यापक से निस्संकोच होकर पूछना चाहिए।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद दन्त्य "स" आने पर विसर्ग का आधा "स्" में द्वित्व रूपांतरण हो जाता है।
"निस्संदेह, ईमानदारी और निष्ठा से किया गया कर्तव्य निर्वहन ही मनुष्य को महान बनाता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद दन्त्य वर्ण "त" आने पर विसर्ग दन्त्य आधे "स्" में बदल जाता है।
"अपनी भूल का समय रहते परिमार्जन न करने पर व्यक्ति को पश्चाताप और मनस्ताप भोगना पड़ता है।"
यदि विसर्ग के बाद "र" वर्ण आए, तो विसर्ग का लोप हो जाता है और विसर्ग से पहले का ह्रस्व स्वर दीर्घ (इ का ई, उ का ऊ) हो जाता है। इसके अतिरिक्त यदि विसर्ग से पहले "अ/आ" हो और बाद में कोई भिन्न स्वर आए, तो केवल विसर्ग का लोप होता है।
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद "र" वर्ण आने पर विसर्ग का लोप हो जाता है तथा पूर्ववर्ती ह्रस्व स्वर "इ" दीर्घ "ई" ( ी ) में बदल जाता है।
"नियमित योगाभ्यास और संतुलित सात्विक आहार शरीर को स्वस्थ और नीरोग बनाए रखता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद "र" आने से विसर्ग लुप्त हो जाता है और पूर्ववर्ती ह्रस्व "इ" दीर्घ होकर "नी" बन जाता है।
"कला और साहित्य से विहीन मनुष्य का जीवन सर्वथा नीरस और प्रेरणाहीन हो जाता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद "र" आने पर विसर्ग का लोप होता है और "नि" का ह्रस्व "इ" दीर्घ "ई" में परिवर्तित होता है।
"मध्यरात्रि के समय संपूर्ण गाँव में एक गहरा और नीरव सन्नाटा छाया हुआ था।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद "र" आने पर विसर्ग का लोप होकर पूर्ववर्ती स्वर "इ" दीर्घ "ई" में बदल जाता है।
"रोग (रुज) से रहित नीरुज काया ही मनुष्य के समस्त सांसारिक सुखों का पहला साधन है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "अ" हो तथा बाद में "अ" से भिन्न स्वर (यहाँ "ए") आने पर विसर्ग का मात्र लोप हो जाता है।
"वर्षा बहुत तीव्र गति से हो रही थी, अतएव आज विद्यालय में अवकाश घोषित कर दिया गया।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "अ" होने तथा बाद में "इ" स्वर आने पर केवल विसर्ग का लोप होता है, अन्य कोई स्वर संधि नहीं होती।
"निष्काम कर्मयोगी किसी सांसारिक यशइच्छा के बिना ही समाज की निस्वार्थ सेवा में लीन रहता है।"
कक्षा 8-10 बोर्ड, प्रतियोगी परीक्षाओं और सामान्य ज्ञान हेतु आवश्यक व्याकरण सिद्धांत
दो समीपवर्ती वर्णों (ध्वनियों) के परस्पर मेल से जो विकार (परिवर्तन) उत्पन्न होता है, उसे 'संधि' कहते हैं। जैसे: विद्या + आलय = विद्यालय; सम् + तोष = संतोष; मनः + अनुकूल = मनोनुकूल।
संधि दो 'वर्णों' (ध्वनियों) का मेल है, जबकि समास दो 'पदों' (शब्दों) का मेल है। संधि में ध्वनि परिवर्तन (विकार) अनिवार्य होता है, जबकि समास में विभक्ति चिह्नों का लोप होकर संक्षिप्त पद बनता है।
हिंदी व्याकरण में संधि के 3 प्रमुख भेद होते हैं: 1. स्वर संधि (दो स्वरों का मेल, 5 उपभेद), 2. व्यंजन संधि (व्यंजन के साथ स्वर या व्यंजन का मेल, 7 प्रमुख नियम), और 3. विसर्ग संधि (विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन का मेल, 6 प्रमुख नियम)।
संधि द्वारा बने नए संयुक्त शब्द को तोड़कर उसके दोनों मूल सार्थक पदों को अलग-अलग रूप में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को 'संधि विच्छेद' कहते हैं। जैसे: हिमालय का विच्छेद 'हिम + आलय' है।