Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में दीर्घ "आ" तथा द्वितीय पद के प्रारंभ में दीर्घ "आ" के मेल से दीर्घ "आ" स्वर बन जाता है।
"हमारे नगर का केंद्रीय विद्यालय अनुशासन और श्रेष्ठ परीक्षा परिणामों के लिए विख्यात है।"
When two homogeneous (similar) short or long vowels (a, i, u, ri) combine, they invariably transform into their corresponding long vowel form (aa, ee, oo, ri).
दो सजातीय (समान) ह्रस्व या दीर्घ स्वर जब आपस में मिलते हैं, तो वे मिलकर उसी स्वर के दीर्घ रूप (आ, ई, ऊ, ऋ) में बदल जाते हैं। इसे दीर्घ संधि कहते हैं।
संधियुक्त शब्द के बीच में यदि "आ" (ा), "ई" (ी), या "ऊ" (ू) की दीर्घ मात्रा दिखाई दे, तो वहाँ अधिकांशतः दीर्घ संधि होती है। जैसे: देवालय (ा), कवीश (ी), भानूदय (ू)।
English Tip: Look at the junction point of the word: if you observe a long vowel marker ("aa", "ee", or "oo"), it is almost certainly Dirgha Sandhi.
अथवा आ के बाद अ अथवा आ आए तो दोनों के स्थान पर दीर्घ "आ" की मात्रा हो जाती है।
When short or long "a" meets another short or long "a", the resulting sound is long "aa".
ह्रस्व या दीर्घ इ के बाद ह्रस्व या दीर्घ इ आए तो दोनों मिलकर दीर्घ "ई" बन जाते हैं।
When short or long "i" meets another short or long "i", the result is long "ee".
ह्रस्व या दीर्घ उ के बाद ह्रस्व या दीर्घ उ आए तो दोनों मिलकर दीर्घ "ऊ" बन जाते हैं।
When short or long "u" meets another short or long "u", the combined result is long "oo".
ऋ के बाद ऋ आने पर दीर्घ ऋ (ॠ) होता है, हिंदी में इसे ऋ ही लिखा जाता है।
When "ri" meets another "ri", they coalesce into long "ri".
कक्षा 8-10 बोर्ड तथा CTET/TET परीक्षाओं में "गिरीश", "परीक्षार्थी", "सूक्ति", "वधूतसव" जैसे शब्द बार-बार पूछे जाते हैं।
इस नियम को सिद्ध करने वाले प्रामाणिक संधियुक्त शब्द एवं उनके विच्छेद
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में दीर्घ "आ" तथा द्वितीय पद के प्रारंभ में दीर्घ "आ" के मेल से दीर्घ "आ" स्वर बन जाता है।
"हमारे नगर का केंद्रीय विद्यालय अनुशासन और श्रेष्ठ परीक्षा परिणामों के लिए विख्यात है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में ह्रस्व "अ" और द्वितीय पद के आदि में दीर्घ "आ" के मिलने से दीर्घ "आ" स्वर बन जाता है।
"प्रातःकाल देवालय में घंटा-ध्वनि और शंखनाद से वातावरण अत्यंत पावन हो जाता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में ह्रस्व "अ" तथा द्वितीय पद के आदि में ह्रस्व "अ" के परस्पर मिलने से दीर्घ "आ" बन जाता है।
"राजा ने अपनी प्रजा के कल्याण हेतु धर्मार्थ चिकित्सालय और अन्नक्षेत्र की स्थापना की।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "अ" के बाद पुनः ह्रस्व "अ" आने पर दोनों के स्थान पर दीर्घ "आ" की मात्रा हो जाती है।
"संत कबीर के अनुसार जो व्यक्ति परमार्थ के कार्यों में जीवन बिताता है, उसका जीवन सार्थक है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "अ" के उपरांत दीर्घ "आ" आने से दोनों मिलकर दीर्घ "आ" रूप धारण कर लेते हैं।
"हमारे नगर का पुस्तकालय दुर्लभ ग्रंथों और ज्ञानवर्धक पत्रिकाओं का समृद्ध केंद्र है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में स्थित दीर्घ "आ" और द्वितीय पद के आदि में स्थित ह्रस्व "अ" मिलकर दीर्घ "आ" बन जाते हैं।
"प्रत्येक विद्यार्थी को अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्र और समय का पाबंद होना चाहिए।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में ह्रस्व "इ" और द्वितीय पद के आदि में दीर्घ "ई" के मिलने से दीर्घ "ई" स्वर बन जाता है।
"हिमालय को पर्वतों का अधिपति होने के कारण संस्कृत साहित्य में गिरीश कहा गया है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "इ" के बाद दीर्घ "ई" के संयोग से दीर्घ "ई" ( ी ) की मात्रा बन जाती है।
"हनुमान चालीसा में हनुमान जी को वानरों के अधिपति के रूप में कपीश कहकर नमन किया गया है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में ह्रस्व "इ" और द्वितीय पद के आदि में ह्रस्व "इ" मिलकर दीर्घ "ई" बन जाते हैं।
"गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने राष्ट्रगान जन-गण-मन की रचना कर संपूर्ण भारत को गौरवान्वित किया।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में ह्रस्व "उ" और द्वितीय पद के आदि में ह्रस्व "उ" के मिलने से दीर्घ "ऊ" स्वर बन जाता है।
"प्रातः भानूदय की स्वर्णिम रश्मियाँ पृथ्वी के कण-कण में नवजीवन का संचार करती हैं।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "उ" के बाद ह्रस्व "उ" आने पर दोनों के स्थान पर दीर्घ "ऊ" ( ू ) की मात्रा हो जाती है।
"वार्षिक परीक्षा के प्रश्नपत्र में लघूत्तर प्रश्नों के उत्तर निर्धारित शब्द-सीमा में देने होते हैं।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "ऋ" और द्वितीय पद के आदि में "ऋ" के मेल से दीर्घ ऋ रूप बनता है (हिंदी वर्तनी में ऋ रूप ही प्रयुक्त होता है)।
"माता-पिता की निस्वार्थ सेवा और आज्ञापालन करके ही मनुष्य पितृण से उऋण हो सकता है।"
दो सजातीय (समान) ह्रस्व या दीर्घ स्वर जब आपस में मिलते हैं, तो वे मिलकर उसी स्वर के दीर्घ रूप (आ, ई, ऊ, ऋ) में बदल जाते हैं। इसे दीर्घ संधि कहते हैं।
इसका मुख्य सूत्र है: ह्रस्व/दीर्घ (अ, इ, उ, ऋ) + समान ह्रस्व/दीर्घ (अ, इ, उ, ऋ) = दीर्घ (आ, ई, ऊ, ऋ)
संधियुक्त शब्द के बीच में यदि "आ" (ा), "ई" (ी), या "ऊ" (ू) की दीर्घ मात्रा दिखाई दे, तो वहाँ अधिकांशतः दीर्घ संधि होती है। जैसे: देवालय (ा), कवीश (ी), भानूदय (ू)।
When two homogeneous (similar) short or long vowels (a, i, u, ri) combine, they invariably transform into their corresponding long vowel form (aa, ee, oo, ri).