Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "आ" और द्वितीय पद के आदि में "ए" के मिलने से दोनों के स्थान पर वृद्धि रूप "ऐ" हो जाता है।
"सत्य और निष्ठा के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति को समाज में सदैव सम्मान मिलता है।"
When "a/aa" is followed by "e/ai", they grow into "ai" (double upper stroke); when followed by "o/au", they grow into "au".
यदि "अ" या "आ" के बाद "ए" या "ऐ" आए तो दोनों मिलकर "ऐ" ( ै ) बन जाते हैं; तथा यदि "ओ" या "औ" आए तो दोनों मिलकर "औ" ( ौ ) बन जाते हैं। इसे वृद्धि संधि कहते हैं।
शब्द के मध्य में सिर पर दो चोटियों वाली मात्रा "ऐ" ( ै ) या "औ" ( ौ ) दिखाई दे तो निसंदेह वृद्धि संधि है। जैसे: सदैव ( ै ), जलौघ ( ौ ), तथैव ( ै )।
English Tip: A double upper stroke (the "ai" marker ै or "au" marker ौ) over the middle consonant flags Vriddhi Sandhi instantly.
अथवा आ के उपरांत ए अथवा ऐ आने पर दोनों के स्थान पर वृद्धि रूप "ऐ" ( ै ) हो जाता है।
"a/aa" + "e/ai" merges to create the "ai" diphthong.
अथवा आ के उपरांत ओ अथवा औ आने पर दोनों के स्थान पर वृद्धि रूप "औ" ( ौ ) हो जाता है।
"a/aa" + "o/au" merges to create the "au" diphthong.
"एकैक", "सदैव", "मतैक्य" और "वनौषधि" प्रतियोगी परीक्षाओं में सर्वाधिक पूछे जाने वाले संधियुक्त शब्द हैं।
इस नियम को सिद्ध करने वाले प्रामाणिक संधियुक्त शब्द एवं उनके विच्छेद
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "आ" और द्वितीय पद के आदि में "ए" के मिलने से दोनों के स्थान पर वृद्धि रूप "ऐ" हो जाता है।
"सत्य और निष्ठा के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति को समाज में सदैव सम्मान मिलता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): दीर्घ "आ" के उपरांत "ए" आने से दोनों वर्ण मिलकर वृद्धि स्वर "ऐ" ( ै ) में परिवर्तित हो जाते हैं।
"गुरु ने जैसा उपदेश दिया, शिष्य ने तथैव जीवन में निष्ठापूर्वक आचरण किया।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में ह्रस्व "अ" और द्वितीय पद के आदि में "ए" मिलकर वृद्धि रूप "ऐ" बन जाते हैं।
"अध्यापक ने परीक्षा कक्ष में एकैक छात्र के पहचान-पत्र की सूक्ष्मता से जाँच की।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "अ" के बाद "ऐ" आने पर दोनों के स्थान पर वृद्धि रूप "ऐ" हो जाता है।
"समिति के सभी सदस्यों में नए प्रस्ताव पर पूर्ण मतैक्य स्थापित हो गया।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "अ" और द्वितीय पद के प्रारंभ में "ए" मिलकर वृद्धि रूप "ऐ" बन जाते हैं।
"सच्चा साधक सांसारिक प्रतिष्ठा व लोकैषणा से परे रहकर आत्म-कल्याण में लीन रहता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "अ" और द्वितीय पद के आदि में "औ" के मिलने से दोनों मिलकर वृद्धि रूप "औ" बन जाते हैं।
"हिमालय की दुर्लभ वनौषधि अनेक असाध्य रोगों के उपचार में अत्यंत गुणकारी सिद्ध होती है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): दीर्घ "आ" के उपरांत "औ" आने पर दोनों के स्थान पर वृद्धि स्वर "औ" ( ौ ) हो जाता है।
"आयुर्वेद में गिलोय को रोगों से रक्षा करने वाली महौषध के रूप में स्वीकार किया गया है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "आ" और द्वितीय पद के आदि में "औ" मिलने पर वृद्धि विकार "औ" होता है।
"महाराणा प्रताप के चरित्र में राष्ट्रभक्ति के साथ-साथ महोदार्य के दुर्लभ गुण विद्यमान थे।"
यदि "अ" या "आ" के बाद "ए" या "ऐ" आए तो दोनों मिलकर "ऐ" ( ै ) बन जाते हैं; तथा यदि "ओ" या "औ" आए तो दोनों मिलकर "औ" ( ौ ) बन जाते हैं। इसे वृद्धि संधि कहते हैं।
इसका मुख्य सूत्र है: अ/आ + ए/ऐ = ऐ | अ/आ + ओ/औ = औ
शब्द के मध्य में सिर पर दो चोटियों वाली मात्रा "ऐ" ( ै ) या "औ" ( ौ ) दिखाई दे तो निसंदेह वृद्धि संधि है। जैसे: सदैव ( ै ), जलौघ ( ौ ), तथैव ( ै )।
When "a/aa" is followed by "e/ai", they grow into "ai" (double upper stroke); when followed by "o/au", they grow into "au".