Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में ह्रस्व "इ" के बाद असमान स्वर "आ" आने से "इ" का "य्" होकर पूर्व व्यंजन "त्" आधा रह जाता है।
"दुकानदार ने फल, सब्जियाँ, दालें इत्यादि आवश्यक घरेलू सामग्री समय पर पहुँचा दीं।"
When "i/ee", "u/oo", or "ri" is followed by any dissimilar vowel, they convert to the corresponding semi-consonant glides: "y", "v", and "r".
यदि ह्रस्व या दीर्घ "इ/ई", "उ/ऊ" या "ऋ" के बाद कोई भिन्न (असमान) स्वर आए, तो इ/ई का "य्", उ/ऊ का "व्", और ऋ का "र्" हो जाता है। इसे यण संधि कहते हैं।
शब्द में "य", "व" या "त्र" से ठीक पहले आधा व्यंजन (अर्ध वर्ण) आए, तो वहाँ अधिकांशतः यण संधि होती है। जैसे: इ-त्या-दि (त् + य), स्वा-गत (स् + व), पि-त्रा-ज्ञा (त् + र)।
English Tip: A half consonant immediately preceding the semi-vowels "y", "v", or compound "tra" is the hallmark signature of Yan Sandhi.
इ या ई के बाद कोई अन्य स्वर आए तो इ/ई "य्" में बदल जाती है और बाद वाला स्वर य् से जुड़ जाता है। पूर्व व्यंजन आधा रह जाता है।
"i/ee" turns into "y", and the preceding consonant becomes a half-letter.
उ या ऊ के बाद कोई भिन्न स्वर आए तो उ/ऊ "व्" में परिवर्तित हो जाता है तथा पूर्व व्यंजन आधा हो जाता है।
"u/oo" turns into "v", and the preceding consonant becomes half.
ऋ के बाद कोई भिन्न स्वर आए तो ऋ "र्" में बदल जाता है (त् + र् मिलकर त्र बन जाता है)।
"ri" + dissimilar vowel converts to "r" (often "t" + "r" = "tra").
"स्वागत", "अत्यधिक", "इत्यादि", "अन्वेषण" और "पित्राज्ञा" हिंदी व्याकरण की हर प्रतियोगी परीक्षा के क्लासिक प्रश्न हैं।
इस नियम को सिद्ध करने वाले प्रामाणिक संधियुक्त शब्द एवं उनके विच्छेद
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में ह्रस्व "इ" के बाद असमान स्वर "आ" आने से "इ" का "य्" होकर पूर्व व्यंजन "त्" आधा रह जाता है।
"दुकानदार ने फल, सब्जियाँ, दालें इत्यादि आवश्यक घरेलू सामग्री समय पर पहुँचा दीं।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "इ" के बाद असमान स्वर "अ" आने पर "इ" का "य्" हो जाता है और पूर्व व्यंजन आधा होकर "अत्यधिक" बनता है।
"ग्रीष्मकाल में अत्यधिक परिश्रम करने से शरीर में जल की कमी हो सकती है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "इ" के उपरांत भिन्न स्वर "अ" आने से "इ" का "य्" हो जाता है (द् + य् = द्य)।
"यद्यपि मार्ग अत्यंत दुर्गम था, तथापि पर्वतारोहियों ने शिखर पर विजय प्राप्त कर ली।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "इ" के बाद भिन्न स्वर "ए" आने पर "इ" का "य्" होकर "ये" बनता है और पूर्व व्यंजन "त्" आधा रह जाता है।
"सच्चे लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक के मत का समान महत्व और सम्मान होता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "इ" के बाद भिन्न स्वर "आ" आने पर "इ" का "य्" हो जाता है और पूर्व वर्ण "र्" रेफ बनकर ऊपर चला जाता है।
"स्वच्छ पर्यावरण ही भावी पीढ़ियों के स्वस्थ और खुशहाल जीवन की सर्वोत्तम गारंटी है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "इ" के बाद भिन्न स्वर "उ" आने पर "इ" का "य्" होकर "यु" बन जाता है।
"सज्जन व्यक्ति बिना किसी प्रत्युपकार की आशा किए निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करते हैं।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में ह्रस्व "उ" के बाद असमान स्वर "आ" आने पर "उ" का "व्" हो जाता है और पूर्व व्यंजन "स्" आधा हो जाता है।
"भारतीय संस्कृति में अतिथियों का हृदय से स्वागत और सत्कार करने की प्राचीन परंपरा है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "उ" के बाद भिन्न स्वर "अ" आने पर "उ" का "व्" हो जाता है तथा पूर्व व्यंजन "न्" आधा रह जाता है।
"संस्कृत श्लोकों का यथार्थ अर्थ समझने के लिए पदों का उचित अन्वय करना अनिवार्य होता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "उ" के उपरांत भिन्न स्वर "ए" आने पर "उ" का "व्" होकर "वे" बन जाता है।
"वैज्ञानिक नए ग्रहों और ब्रह्मांडीय रहस्यों के अन्वेषण में रात-दिन जुटे हुए हैं।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "ऋ" के बाद भिन्न स्वर "आ" आने से "ऋ" का "र्" हो जाता है और त् + र् मिलकर "त्र" बन जाता है।
"मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने पित्राज्ञा का पालन करते हुए चौदह वर्ष का वनवास सहर्ष स्वीकार किया।"
यदि ह्रस्व या दीर्घ "इ/ई", "उ/ऊ" या "ऋ" के बाद कोई भिन्न (असमान) स्वर आए, तो इ/ई का "य्", उ/ऊ का "व्", और ऋ का "र्" हो जाता है। इसे यण संधि कहते हैं।
इसका मुख्य सूत्र है: इ/ई + असमान स्वर = य् | उ/ऊ + असमान स्वर = व् | ऋ + असमान स्वर = र्
शब्द में "य", "व" या "त्र" से ठीक पहले आधा व्यंजन (अर्ध वर्ण) आए, तो वहाँ अधिकांशतः यण संधि होती है। जैसे: इ-त्या-दि (त् + य), स्वा-गत (स् + व), पि-त्रा-ज्ञा (त् + र)।
When "i/ee", "u/oo", or "ri" is followed by any dissimilar vowel, they convert to the corresponding semi-consonant glides: "y", "v", and "r".