Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में ह्रस्व "इ" के बाद असमान स्वर "आ" आने से "इ" का "य्" होकर पूर्व व्यंजन "त्" आधा रह जाता है।
"दुकानदार ने फल, सब्जियाँ, दालें इत्यादि आवश्यक घरेलू सामग्री समय पर पहुँचा दीं।"
दो मूल सार्थक पद
Pitragya (Pitri + Aagya)
"ऋ" के बाद भिन्न स्वर "आ" आने से "ऋ" का "र्" हो जाता है और त् + र् मिलकर "त्र" बन जाता है।
Vowel "ri" followed by dissimilar "aa" converts to "r", fusing dental "t" and "r" into compound "tra".
"मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने पित्राज्ञा का पालन करते हुए चौदह वर्ष का वनवास सहर्ष स्वीकार किया।"
"Lord Rama joyfully accepted fourteen years of exile in devout compliance with paternal command (Pitragya)."
"पित्राज्ञा" का शुद्ध एवं प्रामाणिक संधि विच्छेद "पितृ + आज्ञा" है।
"पित्राज्ञा" में मुख्य रूप से "स्वर संधि" (विशिष्ट उपभेद: यण स्वर संधि) है।
"ऋ" के बाद भिन्न स्वर "आ" आने से "ऋ" का "र्" हो जाता है और त् + र् मिलकर "त्र" बन जाता है। (ध्वनि सूत्र: ऋ + आ = रा)
English Translation: "Lord Rama joyfully accepted fourteen years of exile in devout compliance with paternal command (Pitragya)." | Sentence in Hindi: "मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने पित्राज्ञा का पालन करते हुए चौदह वर्ष का वनवास सहर्ष स्वीकार किया।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में ह्रस्व "इ" के बाद असमान स्वर "आ" आने से "इ" का "य्" होकर पूर्व व्यंजन "त्" आधा रह जाता है।
"दुकानदार ने फल, सब्जियाँ, दालें इत्यादि आवश्यक घरेलू सामग्री समय पर पहुँचा दीं।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "इ" के बाद असमान स्वर "अ" आने पर "इ" का "य्" हो जाता है और पूर्व व्यंजन आधा होकर "अत्यधिक" बनता है।
"ग्रीष्मकाल में अत्यधिक परिश्रम करने से शरीर में जल की कमी हो सकती है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "इ" के उपरांत भिन्न स्वर "अ" आने से "इ" का "य्" हो जाता है (द् + य् = द्य)।
"यद्यपि मार्ग अत्यंत दुर्गम था, तथापि पर्वतारोहियों ने शिखर पर विजय प्राप्त कर ली।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "इ" के बाद भिन्न स्वर "ए" आने पर "इ" का "य्" होकर "ये" बनता है और पूर्व व्यंजन "त्" आधा रह जाता है।
"सच्चे लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक के मत का समान महत्व और सम्मान होता है।"