Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "ए" के बाद भिन्न स्वर "अ" आने पर "ए" का "अय्" हो जाता है, जिससे न् + अय् + अन मिलकर नयन बनता है।
"करुणा से भरे हुए नयन बिना बोले ही अंतर्मन की सारी व्यथा बयां कर देते हैं।"
When diphthongs "e", "ai", "o", "au" are followed by any dissimilar vowel, they break down into "ay", "aay", "av", and "aav" phonetic sequences.
यदि "ए", "ऐ", "ओ", "औ" के बाद कोई भिन्न स्वर आए तो "ए" का "अय्", "ऐ" का "आय्", "ओ" का "अव्" और "औ" का "आव्" हो जाता है। इसे अयादि संधि कहते हैं।
उच्चारण करने पर शब्द में "अय", "आय", "अव" या "आव" की स्पष्ट ध्वनि सुनाई देती है और प्रायः ये तीन अक्षरों के सरल शब्द होते हैं जिनमें कोई संयुक्त वर्ण नहीं होता। जैसे: नयन (अय), गायक (आय), पवन (अव), पावक (आव)।
English Tip: Look for simple tri-letter words where pronouncing them yields internal phonemes "ay", "aay", "av", or "aav".
ए के उपरांत स्वर आने पर "अय" तथा ऐ के उपरांत स्वर आने पर "आय" की ध्वनि उत्पन्न होती है।
"e" produces "ay" while "ai" produces "aay".
ओ के उपरांत स्वर आने पर "अव" तथा औ के उपरांत स्वर आने पर "आव" ध्वनि बनती है।
"o" produces "av" while "au" produces "aav".
"पवन", "पावक", "नयन", "गायक" और "नाविक" अयादि संधि के 5 सबसे प्रामाणिक व लोकप्रिय उदाहरण हैं।
इस नियम को सिद्ध करने वाले प्रामाणिक संधियुक्त शब्द एवं उनके विच्छेद
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "ए" के बाद भिन्न स्वर "अ" आने पर "ए" का "अय्" हो जाता है, जिससे न् + अय् + अन मिलकर नयन बनता है।
"करुणा से भरे हुए नयन बिना बोले ही अंतर्मन की सारी व्यथा बयां कर देते हैं।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "ए" के उपरांत भिन्न स्वर "अ" आने पर "ए" का विकार "अय्" होता है (श् + अय् + अन = शयन)।
"दिनभर के मानसिक तनाव और शारीरिक थकान के उपरांत शांत शयन कक्ष में गहरी नींद आई।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "ऐ" के बाद भिन्न स्वर "अ" आने पर "ऐ" का "आय्" हो जाता है (ग् + आय् + अक = गायक)।
"शास्त्रीय संगीत के प्रतिभाशाली गायक ने अपनी सुरीली तान से सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "ऐ" के बाद भिन्न स्वर "अ" आने पर "ऐ" का "आय्" हो जाता है (न् + आय् + अक = नायक)।
"नाटक का नायक अपने अदम्य साहस और सत्यनिष्ठा से दर्शकों के दिलों पर छा गया।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "ऐ" के उपरांत भिन्न स्वर "इ" आने पर "ऐ" का "आय्" होकर "इ" की मात्रा से "आयि" बनता है (न् + आयि + का = नायिका)।
"कालिदास के सुप्रसिद्ध नाटक अभिज्ञानशाकुंतलम् की नायिका शकुंतला का चरित्र अत्यंत गरिमामयी है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "ओ" के बाद भिन्न स्वर "अ" आने पर "ओ" का "अव्" हो जाता है, जिससे प् + अव् + अन मिलकर पवन बनता है।
"वसंत ऋतु में बहने वाली शीतल-मंद पवन मन और तन दोनों को आह्लादित कर देती है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "ओ" के बाद भिन्न स्वर "अ" आने पर "ओ" का विकार "अव्" होता है (भ् + अव् + अन = भवन)।
"संसद भवन देश के लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर है जहाँ राष्ट्र निर्माण के ऐतिहासिक निर्णय लिए जाते हैं।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "औ" के बाद भिन्न स्वर "अ" आने पर "औ" का "आव्" हो जाता है (प् + आव् + अक = पावक)।
"यज्ञ में प्रज्वलित पावक की पावन ज्वालाएँ वातावरण की संपूर्ण अशुद्धियों को भस्म कर देती हैं।"
यदि "ए", "ऐ", "ओ", "औ" के बाद कोई भिन्न स्वर आए तो "ए" का "अय्", "ऐ" का "आय्", "ओ" का "अव्" और "औ" का "आव्" हो जाता है। इसे अयादि संधि कहते हैं।
इसका मुख्य सूत्र है: ए + स्वर = अय् | ऐ + स्वर = आय् | ओ + स्वर = अव् | औ + स्वर = आव्
उच्चारण करने पर शब्द में "अय", "आय", "अव" या "आव" की स्पष्ट ध्वनि सुनाई देती है और प्रायः ये तीन अक्षरों के सरल शब्द होते हैं जिनमें कोई संयुक्त वर्ण नहीं होता। जैसे: नयन (अय), गायक (आय), पवन (अव), पावक (आव)।
When diphthongs "e", "ai", "o", "au" are followed by any dissimilar vowel, they break down into "ay", "aay", "av", and "aav" phonetic sequences.