Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद "र" वर्ण आने पर विसर्ग का लोप हो जाता है तथा पूर्ववर्ती ह्रस्व स्वर "इ" दीर्घ "ई" ( ी ) में बदल जाता है।
"नियमित योगाभ्यास और संतुलित सात्विक आहार शरीर को स्वस्थ और नीरोग बनाए रखता है।"
When a visarga followed by 'r' drops out, its preceding short vowel elongates into a long vowel (i → ee, u → oo). Alternatively, when preceded by 'a/aa' and followed by a dissimilar vowel, the visarga simply drops without vowel alteration.
यदि विसर्ग के बाद "र" वर्ण आए, तो विसर्ग का लोप हो जाता है और विसर्ग से पहले का ह्रस्व स्वर दीर्घ (इ का ई, उ का ऊ) हो जाता है। इसके अतिरिक्त यदि विसर्ग से पहले "अ/आ" हो और बाद में कोई भिन्न स्वर आए, तो केवल विसर्ग का लोप होता है।
"नी-" से शुरू होने वाले वे शब्द जिनमें दूसरा वर्ण "र" हो (जैसे नीरोग, नीरस, नीरव), उनमें विच्छेद करते समय छोटी इ और विसर्ग (निः) लग जाता है। जैसे: नीरोग = निः + रोग।
English Tip: Words beginning with long 'Nee-' directly preceding 'r' (like Neerog, Neeras) split with short 'Nih' (निः).
विसर्ग लुप्त हो जाता है और छोटी इ की मात्रा बड़ी ई बन जाती है।
Visarga disappears, and preceding short 'i' lengthens to 'ee'.
विसर्ग लुप्त हो जाता है और दोनों पद केवल पास-पास लिखे जाते हैं, अन्य कोई विकार नहीं होता।
Visarga simply drops with no further sound alteration.
"नीरोग" (वर्तनी शुद्धि व संधि दोनों का प्रिय प्रश्न) और "अतएव" हिंदी की प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा में बार-बार आते हैं।
इस नियम को सिद्ध करने वाले प्रामाणिक संधियुक्त शब्द एवं उनके विच्छेद
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद "र" वर्ण आने पर विसर्ग का लोप हो जाता है तथा पूर्ववर्ती ह्रस्व स्वर "इ" दीर्घ "ई" ( ी ) में बदल जाता है।
"नियमित योगाभ्यास और संतुलित सात्विक आहार शरीर को स्वस्थ और नीरोग बनाए रखता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद "र" आने से विसर्ग लुप्त हो जाता है और पूर्ववर्ती ह्रस्व "इ" दीर्घ होकर "नी" बन जाता है।
"कला और साहित्य से विहीन मनुष्य का जीवन सर्वथा नीरस और प्रेरणाहीन हो जाता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद "र" आने पर विसर्ग का लोप होता है और "नि" का ह्रस्व "इ" दीर्घ "ई" में परिवर्तित होता है।
"मध्यरात्रि के समय संपूर्ण गाँव में एक गहरा और नीरव सन्नाटा छाया हुआ था।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद "र" आने पर विसर्ग का लोप होकर पूर्ववर्ती स्वर "इ" दीर्घ "ई" में बदल जाता है।
"रोग (रुज) से रहित नीरुज काया ही मनुष्य के समस्त सांसारिक सुखों का पहला साधन है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "अ" हो तथा बाद में "अ" से भिन्न स्वर (यहाँ "ए") आने पर विसर्ग का मात्र लोप हो जाता है।
"वर्षा बहुत तीव्र गति से हो रही थी, अतएव आज विद्यालय में अवकाश घोषित कर दिया गया।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "अ" होने तथा बाद में "इ" स्वर आने पर केवल विसर्ग का लोप होता है, अन्य कोई स्वर संधि नहीं होती।
"निष्काम कर्मयोगी किसी सांसारिक यशइच्छा के बिना ही समाज की निस्वार्थ सेवा में लीन रहता है।"
यदि विसर्ग के बाद "र" वर्ण आए, तो विसर्ग का लोप हो जाता है और विसर्ग से पहले का ह्रस्व स्वर दीर्घ (इ का ई, उ का ऊ) हो जाता है। इसके अतिरिक्त यदि विसर्ग से पहले "अ/आ" हो और बाद में कोई भिन्न स्वर आए, तो केवल विसर्ग का लोप होता है।
इसका मुख्य सूत्र है: ह्रस्व स्वर (इ, उ) + ः + र = दीर्घ स्वर (ई, ऊ) + विसर्ग लोप | अः + भिन्न स्वर = विसर्ग लोप
"नी-" से शुरू होने वाले वे शब्द जिनमें दूसरा वर्ण "र" हो (जैसे नीरोग, नीरस, नीरव), उनमें विच्छेद करते समय छोटी इ और विसर्ग (निः) लग जाता है। जैसे: नीरोग = निः + रोग।
When a visarga followed by 'r' drops out, its preceding short vowel elongates into a long vowel (i → ee, u → oo). Alternatively, when preceded by 'a/aa' and followed by a dissimilar vowel, the visarga simply drops without vowel alteration.