Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद "र" वर्ण आने पर विसर्ग का लोप हो जाता है तथा पूर्ववर्ती ह्रस्व स्वर "इ" दीर्घ "ई" ( ी ) में बदल जाता है।
"नियमित योगाभ्यास और संतुलित सात्विक आहार शरीर को स्वस्थ और नीरोग बनाए रखता है।"
दो मूल सार्थक पद
Ataeva (Atah + Eva)
विसर्ग से पूर्व "अ" हो तथा बाद में "अ" से भिन्न स्वर (यहाँ "ए") आने पर विसर्ग का मात्र लोप हो जाता है।
Visarga preceded by "a" simply drops when followed by a vowel other than "a" without further contraction.
"वर्षा बहुत तीव्र गति से हो रही थी, अतएव आज विद्यालय में अवकाश घोषित कर दिया गया।"
"Rain was falling intensely; therefore (Ataeva), a holiday was declared in school today."
"अतएव" का शुद्ध एवं प्रामाणिक संधि विच्छेद "अतः + एव" है।
"अतएव" में मुख्य रूप से "विसर्ग संधि" (विशिष्ट उपभेद: विसर्ग का लोप एवं पूर्व स्वर का दीर्घ होना) है।
विसर्ग से पूर्व "अ" हो तथा बाद में "अ" से भिन्न स्वर (यहाँ "ए") आने पर विसर्ग का मात्र लोप हो जाता है। (ध्वनि सूत्र: अः + ए = अए (केवल विसर्ग लोप))
English Translation: "Rain was falling intensely; therefore (Ataeva), a holiday was declared in school today." | Sentence in Hindi: "वर्षा बहुत तीव्र गति से हो रही थी, अतएव आज विद्यालय में अवकाश घोषित कर दिया गया।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद "र" वर्ण आने पर विसर्ग का लोप हो जाता है तथा पूर्ववर्ती ह्रस्व स्वर "इ" दीर्घ "ई" ( ी ) में बदल जाता है।
"नियमित योगाभ्यास और संतुलित सात्विक आहार शरीर को स्वस्थ और नीरोग बनाए रखता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद "र" आने से विसर्ग लुप्त हो जाता है और पूर्ववर्ती ह्रस्व "इ" दीर्घ होकर "नी" बन जाता है।
"कला और साहित्य से विहीन मनुष्य का जीवन सर्वथा नीरस और प्रेरणाहीन हो जाता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद "र" आने पर विसर्ग का लोप होता है और "नि" का ह्रस्व "इ" दीर्घ "ई" में परिवर्तित होता है।
"मध्यरात्रि के समय संपूर्ण गाँव में एक गहरा और नीरव सन्नाटा छाया हुआ था।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद "र" आने पर विसर्ग का लोप होकर पूर्ववर्ती स्वर "इ" दीर्घ "ई" में बदल जाता है।
"रोग (रुज) से रहित नीरुज काया ही मनुष्य के समस्त सांसारिक सुखों का पहला साधन है।"