Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "इ" स्वर होने तथा बाद में "क" वर्ण आने पर विसर्ग मूर्धन्य वर्ण आधे "ष्" में बदल जाता है।
"बच्चों का निष्कपट और निश्छल स्वभाव प्रत्येक व्यक्ति के मन में आनंद का संचार कर देता है।"
When a visarga preceded by 'i' or 'u' is followed by velar, retroflex, or labial unvoiced stops (k, kh, t, th, p, ph), it mutates into the retroflex sibilant 'sh' (ष्).
यदि विसर्ग से पहले "इ" या "उ" स्वर हो और बाद में क, ख, ट, ठ, प, फ में से कोई वर्ण आए, तो विसर्ग का मूर्धन्य "ष्" (आधा ष) हो जाता है।
यदि शब्द के बीच में "ष्क", "ष्ट", "ष्प" या "ष्फ" दिखाई दे, तो ष् को विसर्ग (ः) में बदल दीजिए। जैसे: निष्कपट = निः + कपट, धनुष्टंकार = धनुः + टंकार।
English Tip: Presence of clusters 'shk', 'sht', 'shp', 'shph' derived from 'Nih' or 'Duh' signifies this rule.
निः के बाद कपट, फल, पाप आदि आने पर विसर्ग ष बन जाता है।
Visarga turns to retroflex 'sh' before k, p, f.
धनुः या दुः के बाद टंकार, कर्म आने पर विसर्ग ष बन जाता है।
Visarga preceded by 'u' transforms to 'sh'.
"धनुष्टंकार", "निष्कपट", "निष्फल" और "दुष्कर्म" बोर्ड परीक्षाओं में सबसे ज्यादा बार पूछे गए हैं।
इस नियम को सिद्ध करने वाले प्रामाणिक संधियुक्त शब्द एवं उनके विच्छेद
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "इ" स्वर होने तथा बाद में "क" वर्ण आने पर विसर्ग मूर्धन्य वर्ण आधे "ष्" में बदल जाता है।
"बच्चों का निष्कपट और निश्छल स्वभाव प्रत्येक व्यक्ति के मन में आनंद का संचार कर देता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "उ" स्वर होने तथा बाद में "ट" वर्ण आने से विसर्ग मूर्धन्य "ष्" बन जाता है।
"रणभूमि में श्रीराम के धनुष की भयानक धनुष्टंकार सुनते ही राक्षसी सेना में भगदड़ मच गई।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "उ" स्वर होने तथा बाद में "क" आने पर विसर्ग मूर्धन्य "ष्" में बदल जाता है।
"मनुष्य को सदैव बुरे कर्मों से बचना चाहिए क्योंकि किसी भी दुष्कर्म का परिणाम कभी सुखद नहीं होता।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "इ" स्वर होने तथा बाद में "फ" आने पर विसर्ग मूर्धन्य "ष्" में बदल जाता है।
"बिना सही दिशा और सुनियोजित रणनीति के किया गया अंधाधुंध प्रयास अंततः निष्फल ही सिद्ध होता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "इ" होने तथा बाद में "प" वर्ण आने पर विसर्ग मूर्धन्य वर्ण आधे "ष्" में बदल जाता है।
"शिशु का हृदय सर्वथा निष्पाप और राग-द्वेष की दूषित भावनाओं से मुक्त होता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "उ" स्वर होने तथा बाद में "प" आने पर विसर्ग मूर्धन्य "ष्" में परिणत हो जाता है।
"चार पैरों वाले चौपाया पशुओं को संस्कृत व्याकरण और साहित्य में चतुष्पाद कहा जाता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "इ" स्वर तथा बाद में "क" आने पर विसर्ग का मूर्धन्य "ष्" हो जाता है।
"सच्चे समाजसेवी का जीवन दर्पण के समान स्वच्छ और निष्कलंक होना चाहिए।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "उ" स्वर होने तथा बाद में "प" आने से विसर्ग मूर्धन्य "ष्" में बदल जाता है।
"प्रदूषण की निरंतर वृद्धि के दुष्परिणाम आज मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।"
यदि विसर्ग से पहले "इ" या "उ" स्वर हो और बाद में क, ख, ट, ठ, प, फ में से कोई वर्ण आए, तो विसर्ग का मूर्धन्य "ष्" (आधा ष) हो जाता है।
इसका मुख्य सूत्र है: इ / उ + ः + क / ख / ट / ठ / प / फ = ष् (मूर्धन्य षकार)
यदि शब्द के बीच में "ष्क", "ष्ट", "ष्प" या "ष्फ" दिखाई दे, तो ष् को विसर्ग (ः) में बदल दीजिए। जैसे: निष्कपट = निः + कपट, धनुष्टंकार = धनुः + टंकार।
When a visarga preceded by 'i' or 'u' is followed by velar, retroflex, or labial unvoiced stops (k, kh, t, th, p, ph), it mutates into the retroflex sibilant 'sh' (ष्).